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बंगाल के कुख्यात तस्कर अब्दुल बारी बिस्वास के खिलाफ NIA में शिकायत, करोड़ों रुपए के घोटाले में SIT ने दबोचा: TMC को फंडिंग और धर्मांतरण के भी आरोप

पश्चिम बंगाल के कुख्यात तस्कर और कथित बिजनेसमैन अब्दुल बारी बिस्वास को लेकर भाजपा नेता देवदत्त माँझी ने शनिवार (30 जुलाई 2022) राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को पत्र लिखा है। माँझी ने अपने पत्र में अब्दुल पर पशु तस्करी, सोने की तस्करी और मानव तस्करी के साथ-साथ आतंकी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग और धर्मांतरण के लिए फंडिंग करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी विभाग की SIT ने शुक्रवार की शाम को अब्दुल को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी करोड़ों रुपए के कोयला घोटाले के मामले में की गई है। इससे पहले अब्दुल बारी को CBI ने साल 2014 में तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था और पिछले साल उसके घर पर छापेमारी की थी। वहीं, ED उसकी 20 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त कर चुकी है।

NIA को लिखे अपने पत्र में 2021 के कोलकाता के चौरंगी विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार रहे माँझी ने कहा कि 5 जू 2022 को कुछ युवाओं ने दो वाहनों को रोका था, जिनमें 98 मवेशी भरे हुए थे। इस बारे में उन्होंने ड्राइवर से पूछा तो उसने बताया कि यह अब्दुल बारी के निर्देश पर बांग्लादेश भेजे जा रहे एक बड़े कन्साइनमेंट का हिस्सा है।

माँझी ने बताया कि पूछताछ के दौरान उन्हें पता चला कि कुछ अन्य वाहन पहले ही बांग्लादेश पहुँचने वाले हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि मवेशियों की तस्करी सोने के बदले की जाती है। यानी बांग्लादेश से सोना लेकर वहाँ मवेशी भेजे जाते हैं।

माँजी ने आगे कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि अब्दुल का बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अन्य देशों के अंतरराष्ट्रीय कई आतंकी संगठनों के साथ भी लिंक हैं।” पत्र में माँझी ने कहा कि बशीरहाट और उसके आसपास के बेहद गरीब लोगों का इसने बैंकों खाता खोलवाया है और उसका इस्तेमाल वह खुद करता है।

धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि इन बैंक खातों के जरिए वह मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। इसके साथ ही अब्दुल इन पैसों का इस्तेमाल इस्लामी संस्थाओं को दान, इस्लाम में धर्मांतरण के लिए फंडिंग और समाज में दंगा एवं अराजकता फैलाने के लिए करता है।

माँझी का कहना है कि अब्दुल अपनी काली कमाई में से सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को भी भारी मात्रा में चंदा देता है। इससे वह सुरक्षित रहता है और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होती है और वह अपनी गतिविधियों को आराम से अंजाम देता रहता है।

माँझी ने पत्र में अब्दुल बारी बिस्वास के नेटवर्क के बारे में लिखते हुए कहा कि उसका जाल फैला हुआ है और तस्करी से लेकर तमाम आपराधिक गतिविधियाँ उसके लोगों द्वारा सँभाली जाती है। इनमें उसके दो भाई गुलाम बिस्वास और खालिक बिस्वास भी शामिल हैं।

बता दें कि पश्चिम बंगाल सीआईडी की SIT ने शुक्रवार की रात में अब्दुल बारी बिस्वास को एयरपोर्ट के पास नारायणपुर इलाके से गिरफ्तार किया था। सीआईडी का कहना है कि अब्दुल के खिलाफ कोयला तस्करी को लेकर ईस्टर्न कोल फिल्ड (ECL) द्वारा बर्धमान में कई मामले दर्ज कराए गए हैं।

यह गिरफ्तारी जमुरिया पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले से संबंधित है। ईसीएल ने यह मामला साल 2020 में दर्ज कराया था। सीआईडी का कहना है कि इस मामले में और गिरफ्तारी हो सकती है।

बता दें कि उसके पहले साल 2014 में CBI ने गो तस्करी के मामले में अब्दुल को गिरफ्तार किया था। मार्च 2015 में कस्टम ने उसके पास से 15 करोड़ रुपए की कीमत के 40 किलोग्राम सोना जब्त किया था। वहीं, साल 2015 में ED ने उसकी 20 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी। अब्दुल बारी कुख्यात गो तस्कर, सोना तस्कर और मानव तस्कर है। उसके सत्ताधारी TMC के साथ भी गहरे संबंध हैं।

अब्दुल बारी टीएमसी के नेता एनामुल हक का बेहद करीबी बताया जाता है। अप्रैल 2022 में ED ने बांग्लादेश में मवेशी तस्करी को लेकर एनामुल हक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें एनामुल हक के साथ TMC यूथ विंग के नेता विनय मिश्रा और उसके भाई विकास मिश्रा को आरोपित बनाया गया था। तस्करी के मामले में एनामुल को CBI भी पहले गिरफ्तार कर चुकी है।

अब सवाल है कि जब टीचर भर्ती घोटाले में राज्य के मंत्री और उनके सहयोगी गिरफ्तार हो चुके हैं और कई लोग राडार पर हैं, ऐसे में दो साल पुराने मामले में CID ने आनन-फानन में अब्दुल को गिरफ्तार कर कुछ छुपाने का प्रयास कर रही है या मजबूर होकर कार्रवाई कर रही है। सवाल इसलिए जायज है कि पिछले दो सालों में राज्य की पुलिस ने अब्दुल के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की।

‘हमें भी आँख सेंकने दीजिए’ : रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट पर बोलीं विद्या बालन, नेटीजन्स ने कहा- लड़का बोलता तो बवाल मच जाता

रणवीर सिंह का न्यूड फोटो शूट पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खासी चर्चा का कारण रहा। सामान्य जन ने जहाँ इसे बेशर्मी की इंतेहा बताया वहीं दूसरी ओर सेलीब्रिटियों की इस फोटोशूट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आईं। अब इसी मुद्दे पर बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने भी अपना बयान दिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

सोशल मीडिया पर शेयर हो रही विद्या बालन की वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे रणवीर के फोटोशूट को लेकर विद्या बालन कहती हैं, “अरे क्या प्रॉब्लम है। पहली बार कोई आदमी ऐसा कर रहा है। हम लोगों को भी आँखे सेंकने दीजिए न।” इतना कहकर वो जोर से हँसने लगती हैं।

विद्या के इस वीडियो को देखने के बाद नेटीजन्स ने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि विद्या बालन जिस बात को कहकर हँस रही है। अगर वो बात एक लड़का बोलता तो लोग उसकी बैंड बजा देते ट्रोल कर करके और पूरा बवाल मच जाता।

अन्य यूजर ने कहा, “इनको सिर्फ बकवास बातें करनी ही आती हैं।”

एक यूजर कहता है, “एक एफआईआर तेरे ऊपर भी हो तब मजा आए।”

भाष्यम मुरलीधर कहते हैं, “सच बोला। आपको ये फोटो बहुत पसंद है तो आप इसे बेडरूम में लटकाएँ। अच्छा लगेगा। लेकिन पब्लिक में ये गैर कानूनी है।”

डॉ सुमित पूछते हैं, “पॉर्न क्यों बैन हैं, ड्रग्स क्यों अवैध हैं, मूवी को ए सर्टिफिकेट क्यों दिया जाता है। विद्या के लॉजिक से तो इन सब चीजों में कोई बुराई नहीं है। दिक्कत ये है कि हम लोग ऐसे सेलेब्रिटियों को बुद्धिजीवी मानने लगे हैं। लेकिन ये जब भी मुँह खोलते हैं तो इनके मुँह से कूड़ा ही निकलता है।”

पारूल अरोड़ा कहती है, “जो लोग खुद को नंगा करके पैसे कमाते हैं और जो उन्हें देखकर आँख सेंकते हैं, उन लोगों के पास दिल नहीं है कि वो एफआईआर के कारण को समझें। इन्होंने दिल को पैसे में बेच दिया है।”

बता दें कि रणवीर सिंह द्वारा पोस्ट किए गए न्यूड फोटोशूट के बाद मुंबई पुलिस में उनके विरुद्ध पिछले दिनों एफआईआर हुई थी। ये एफआईआर भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए एक गैर-सरकारी संस्था ने मुंबई के चेम्बूर पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई थी। जबकि सेलीब्रिटी धड़ा उनका समर्थन करता दिखा था।

रणवीर का बचाव करते हुए आलिया ने कहा था “मुझे अपने पसंदीदा रणवीर सिंह के बारे में कुछ भी नकारात्मक कहना और सुनना पसंद नहीं है। मैं उनसे हमेशा प्यार करती हूँ और वह केवल मेरे ही नहीं हर किसी के पसंदीदा कलाकार हैं। रणवीर ने हमें बहुत ही बेहतरीन फिल्में दी हैं, इसलिए हमें उन्हें सिर्फ प्यार देना चाहिए।”

6 राज्यों में NIA की छापेमारी, PFI और ISIS आतंकियों से जुड़े हैं तार: कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रविवार (31 जुलाई 2022) को आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 राज्यों में संदिग्धों के 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की।

एजेंसी ने मध्य प्रदेश के भोपाल और रायसेन जिले, गुजरात में भरूच, सूरत, नवसारी और अहमदाबाद, बिहार में अररिया जिला, कर्नाटक में भटकल और तुमकुर, महाराष्ट्र में कोल्हापुर और नांदेड़, उत्तर प्रदेश के देवबंद में एजेंसी ने ये कार्रवाई की। इस मामले में एनआईए द्वारा 25 जून 2022 को आईपीसी की धारा 153 ए, और 153 बी और यूए (पी) अधिनियम की धारा 18, 18 बी, 38, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

छापेमारी के दौरान जाँच एजेंसी को आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्रियाँ बरामद की गई हैं। मामले की जाँच की जा रही है। यहीं नहीं एनआईए ने बिहार के फुलवारी शरीफ मामले में इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े होने के संबंध में गुरुवार सुबह से नालंदा जिले सहित बिहार में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, एनआईए ने ये कार्रवाई मामले में गहन जाँच करने के करीब एक सप्ताह के बाद की है।

कहा जा रहा है कि जिन स्थानों पर ये छापेमारी की जा रही है, ये सभी जगह सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) से जुड़े लोगों के हैं। पिछले तीन घंटे से चल रही छापेमारी में एनआईए की टीम पूरे घर की तलाशी ले रही है और हर चीज की जाँच की जा रही है। इस मामले में अब तक कइयों को हिरासत में लिया जा चुका है। सुरक्षा के हालात को देखते हुए इलाके में भारी सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि एनआईए ने 22 जुलाई को गृह मंत्रालय (एमएचए) के काउंटर टेररिज्म एंड काउंटर रेडिकलाइजेशन डिवीजन ने एक आदेश जारी किया था, जिसके बाद आईपीसी भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर बिहार पुलिस से जाँच को अपने हाथ में ले लिया था।

‘ये क्षण हमेशा याद रहेगा’: सुपरस्टार रजनीकांत ने ‘रॉकेट्री’ के लिए R माधवन को किया सम्मानित, नंबी नारायणन भी रहे मौजूद

सुपरस्टार रजनीकांत ने ‘रॉकेट्री’ फिल्म के लिए आर माधवन को वैज्ञानिक नंबी नारायणन की मौजूदगी में सम्मानित किया। आर माधवन ने खुद इसका वीडियो शेयर किया, जिसमें देखा जा सकता है कि सुपरस्टार रजनीकांत शॉल ओढ़ा कर आर माधवन को सम्मानित कर रहे हैं और वहीं कुर्सी पर बैठे नंबी नारायणन उनसे कुछ बातें कर रहे हैं। इस दौरान भावुक आर माधवन ने पाँव छू कर रजनीकांत का आशीर्वाद लिया। रजनीकांत पहले भी फिल्म की तारीफ़ कर चुके हैं।

‘रॉकेट्री: द नंबी इफ़ेक्ट’ के निर्देशक एवं मुख्य अभिनेता आर माधवन ने इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जब आपको नंबी नारायणन की मौजूदगी में ‘वन मैन इंडस्ट्री’, स्वयं लीजेंड का का आशीर्वाद मिले। ये एक ऐसा क्षण है, जो हमेशा के लिए आपके जीवन में छप जाएगा। आपके इस लगाव और ‘रॉकेट्री’ फिल्म के लिए आपके शब्दों के लिए धन्यवाद रजनीकांत सर। आपके इस प्रोत्साहन ने हमें फिर से जोश से भर दिया है। हम सब आपसे प्यार करते हैं।”

हाल ही में अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस फिल्म को देखने के बाद वीडियो के जरिए बताया था कि उन्हें रोना आ गया। फिल्म का हिंदी वर्जन ‘Voot Select’ एप पर उपलब्ध करा दिया गया है। फिल्म ने उत्तर भारत में अब तक 25 करोड़ रुपए के कलेक्शंस कर लिए हैं। एक महीने बाद भी फिल्म कई स्क्रीन्स में चल रही है। फिल्म को देश-विदेश से खूब तारीफ़ मिली। नंबी नारायणन को देशद्रोह मामले में फँसा कर उनका करियर तबाह कर दिया गया था, जिससे ISRO और भारत की रॉकेट तकनीक कई साल पीछे चली गई थी – ये फिल्म उसी पर आधारित है।

इससे पहले सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा था, “आर माधवान ने बतौर निर्देशक अपनी पहली ही फिल्म में अपने वास्तविक अभिनय के साथ-साथ साबित किया है कि वो बेहतरीन फिल्म निर्देशकों में से एक हैं। उन्होंने पद्म भूषण वैज्ञानिक नंबी नारायणन के इतिहास को दिखाया है, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष रिसर्च के विकास के लिए कई बाधाओं का सामना किया और बलिदान दिए। इस तरह की फिल्म देने के लिए मैं अपने हृदय से आर माधवन को धन्यवाद देता हूँ।”

बारामुला एनकाउंटर में बलिदान हुआ 2 साल का ‘एक्सल’, बहादुरी देख सेना ने दी श्रद्धांजलि: आतंकियों को पकड़वाने में थी खास भूमिका

जम्मू-कश्मीर के बारामुला में शनिवार (30 जुलाई 2022) को आतंकियों को पकड़ने के ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के खोजी कुत्ते ‘एक्सल (Axel)’ की मृत्यु हो गई। एक्सल की तैनाती 29 राष्ट्रीय रायफल में थी। शनिवार को आतंकियों ने उनके सिर पर गोली मारी।

पोस्टमार्टम में सामने आया कि एक्सल के शरीर पर दस से अधिक चोटें थी और फीमर का फ्रैक्चर भी था। सेना में दिए गए उनके योगदान को देखते हुए उनके सम्मान में फोर्स कमांडर द्वारा रविवार को श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया।

बता दें कि बारामुला ऑपरेशन के दौरान एक्सल की भूमिका काफी अहम रही। सेना ने आतंकियों का पता लगाने के लिए उन्हें ही ठिकाने में अंदर भेजा था। खबरों की मानें तो एक्सल को आता देख कई आतंकी भागने लगे थे, जिसके बाद सेना उनके ऊपर आसानी से निशाना साध पाई। लेकिन इसी सब के बीच उन आतंकियों ने एक्सल पर गोली दाग दी। वह बुरी तरह घायल हो गए और अपने जीवन का बलिदान देकर कई सुरक्षाबल जवानों की जान बचाई। इस मुठभेड़ में एक्सल के अलावा तीन जवान भी घायल बताए जा रहे हैं जबकि एक आतंकी अख्तर हुसैन भट्ट को ढेर किए जाने की खबर हैं।

मात्र 2 साल का था एक्सल

मालूम हो कि आतंकियों के विरुद्ध चलाए गए सेना के अभियान में मुख्य भूमिका अदा करने वाला ‘एक्सल’ मात्र दो साल के थे। उनका रंग हल्का भूरा था और ब्रीड बेल्जियन मैलिनोइस थी। वह 26 आर्मी डॉग यूनिट का हिस्सा थे और 29 राष्ट्रीय रायफल में उनकी तैनाती हुई थी।

सेना के अधिकारियों ने ऑपरेशन के दौरान एक्सल की भूमिका बयां करते हुए कहा कि एक बिल्डिंग क्लीयरेंस ऑपरेशन के दौरान शुरू में सेना के एक दूसरे डॉग ‘बालाजी’ को बिल्डिंग इंटरवेंशन के लिए भेजा गया और कॉरिडोर को अंदर से सैनिटाइज किया गया। इसके बाद ‘एक्सल’ को तैनात किया गया।

सेना अधिकारियों के मुताबिक, ‘एक्सल’ पहले कमरे में गए, तो उस कमरे को क्लीयर किया गया। मगर,दूसरे कमरे में घुसते ही ‘एक्सल पर फायरिंग कर दी गई। गोली लगने के बाद भी ‘एक्सल’ ने 15 सेकंड के लिए कुछ हलचल दिखाई, पर इसके बाद वह गिर गए। सुरक्षाबल के जवान जब तक उन्हें अस्पताल ले जाते, तब तक वह दम तोड़ चुके थे।

5 घंटे चली इस मुठभेड़ के बाद एक्सल के शव को बरामद किया गया। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि सुरक्षाबल का जवान कहता नजर आ रहा है कि एक्सल को तीन गोली लगी। वहीं सोशल मीडिया यूजर्स भी इस वीडियो को देख भावुक हो रहे हैं। उन्होंने भी एक्सल को श्रद्धांजलि अदी है।

पार्था-अर्पिता मामले में ममता बनर्जी को पाक साफ़ साबित करने में जुटा ‘इंडिया टुडे’ का पत्रकार: बंगाल CM पर लिख चुका है किताब, सरकार में मिला था खास पद

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर जयंत घोषाल पश्चिम बंगाल सरकार का बचाव किया है। 28 जुलाई ,2022 को चैनल पर एक डिबेट के दौरान इस घोटाले के मामले में घोषाल ने सीएम ममता बनर्जी को डिफेंड करने की कोशिश की। डिबेट के दौरान होस्ट राजदीप सरदेसाई थे और उसी दौरान जयंत घोषाल ने दावा किया कि उन्हें इस बात का पूर्ण विश्वास है कि ममता बनर्जी इस घोटाले से पूरी तरह से अनजान थीं।

अपने दावे को सही ठहराते हुए घोषाल ने कहा, “मैं कल कोलकाता में था और उनसे इस बारे में बात की और समझने की कोशिश की। वो बहुत परेशान थीं। उन्होंने पार्था के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इसलिए समय लिया क्योंकि वो ये समझना चाहती थीं कि ये क्या हो रहा है।” घोषाल दावा करते हैं कि ममता बनर्जी को इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं ता कि आखिर शिक्षक भर्ती घोटाले की आरोपित अर्पिता मुखर्जी कौन है। इस दावे के उलट ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो हैं, जो कि कुछ और ही बयाँ करते हैं। वहीं घोषाल के दावों का खंडन करते हुए बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो दिखाया जिसमें सीएम बनर्जी अर्पिता मुखर्जी की उनके “अच्छे काम” के लिए प्रशंसा कर रही थीं।

कौन हैं जयंत घोषाल?

1962 में जन्मे जयंत घोषाल ने 40 साल से भी अधिक समय से राजनीतिक पत्रकार के रूप में काम किया है। उनका मुख्य जुड़ाव बंगाली समाचार पत्र ‘आनंद बाजार पत्रिका’ से रहा है, जहाँ वे एक पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा वो इंडिया टीवी, बार्टमैन, एबीपी न्यूज और अन्य के लिए लिखते है। वो ‘इंडिया टुडे समूह’ के लिए सलाहकार संपादक के रूप में भी काम कर रहे हैं।

ममता सरकार के लिए करते हैं पीआर का काम

गौरतलब है कि जयंत घोषाल को टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। ममता सरकार ने सितंबर 2020 में उन्हें सूचना एवं विकास अधिकारी (IDO) बनाया था। आईडीओ के तौर पर उनका मुख्य काम राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच संपर्क स्थापित करना था।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 18 सितंबर 2020 को जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार के लिए पीआर के तौर पर उनकी प्रोफ़ाइल उन्हें अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोकेगी। आदेश में कहा गया है, “जब से वो इस प्रकार के संपर्क, समन्वय और सूचना प्रसार के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के लिए काम करते रहेंगे, तब तक को उन्हें अन्य कार्यों की इजाजत नहीं होगी। अगर वो ऐसे कोई भी अन्य कार्य करते हैं तो उन्हें पहले इसके बारे में राज्य सरकार को बताना होगा।”

इस पद के तहत उन्हें प्रधान आवासीय आयुक्त कार्यालय और कोलकाता सूचना केंद्र के ऑफिस में स्थान दिया गया था। 1.5 लाख रुपए की सैलरी के अलावा दिल्ली-कोलकाता-दिल्ली सेक्टर में ड्यूटी पर हवाई यात्रा खर्च जैसे भत्ते भी दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि यह पद विशेष रूप से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनाया गया था।

साल 2020 में पीटीआई के पत्रकार सौम्यजीत मजूमदार ने एक ट्वीट में कहा था, “पश्चिम बंगाल सरकार ने सूचना एवं विकास अधिकारी का एक पद सृजित किया है जो राज्य की ओर से केंद्र से संपर्क करेगा। वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल को इस पद पर नियुक्त किया गया है।”

ममता ने दिया बंग भूषण सम्मान

इस बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने जयंत घोषाल को 25 जुलाई 2022 को बंग भूषण सम्मान से नवाजा। ये पुरस्कार इंडिया टुडे पर डिबेट में शामिल होने से ठीक तीन पहले दिया गया। बंग भूषण पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को सम्मानित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्थापित एक पुरस्कार है। पुरस्कारों की शुरुआत राज्य सरकार ने 2011 में की थी।

घोषाल ने सीएम बनर्जी पर लिखी किताब

यहीं नहीं घोषाल के ममता बनर्जी का समर्थन करने को इस तरह से समझा जा सकता है कि उन्होंने ममता बनर्जी को लेकर ‘ममता: बियॉन्ड 2021’ नामक एक पुस्तक लिखी है, जो कि फरवरी 2022 में जारी हुई थी। ये किताब पूरी तरह से ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस किताब में इस बात को जानने की कोशिश की गई है कि पिछले विधानसभा चुनावों में टीएमसी की जीत में किन कारकों ने योगदान दिया था।

इसमें लिखा था, “भाजपा की बंगाली पहचान की समझ में भारी अंतर था, जिसका ममता फायदा उठा सकीं। अर्धसैनिक बलों, खुफिया एजेंसियों से लेकर प्रमुख टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने तक केंद्र सरकार के हस्तक्षेप ने भाजपा को मतदाताओं को अलग कर दिया। इस कारण से प्रदेश के लोगों को लगा कि नई दिल्ली और बंगाल के बीच खाई बढ़ती जा रही है।” इस किताब में उन सवालों पर भी प्रकाश डाला गया है कि क्या ममता बनर्जी खुद को पीएम पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार मानती हैं।

घोषाल ने ममता बनर्जी के जीवन पर ‘ममता: बियॉन्ड 2021’ नामक पुस्तक लिखी है

उन्होंने लिखा, “बीजेपी और आरएसएस के कई नेता इस बात को मानते हैं कि 2021 की तरह ही 2024 में ममता को कम करके आँकना मोदी सरकार के लिए बड़ी भूल होगी। ममता बनर्जी को खुद को व्यापक तौर पर स्वीकार्य नेता बनाने के लिए कई और अभिनव कदम उठाने होंगे, जो नरेंद्र मोदी का विकल्प हो सकते हैं। इस मोर्चे पर निष्क्रियता तो दूर वह चुपचाप तैयारी कर रही हैं। उनका मिशन ‘नई दिल्ली 2024’ देखने लायक होगा।”

उन्होंने आगे बताया है कि बंगाल की सीएम रहते हुए ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण करती रही हैं, लेकिन खुद को एक राष्ट्रीय नेता के रूप में चित्रित करने के लिए वो अपनी इस छवि को पीछे छोड़ने की कोशिश करेंगी। यहीं नहीं, अगर क्षेत्रीय दल 2024 के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वो अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय छवि के नेता के तौर पर पीछे छोड़ देंगी। बता दें कि जयंत घोषाल की डिबेट लेख और ऑप-एड ज्यादातर ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने की उच्च संभावना के साथ एक प्रिय नेता के रूप में चित्रित करने का प्रयास करते हैं।

‘मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर’ – अब पंजाब में निकाह से पहले मियाँ-बीवी को भरना पड़ेगा फॉर्म, न मानने पर पाकिस्तान में मिलेगी कड़ी सज़ा

पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त की सरकार अब निकाह में ‘मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर’ का फॉर्म भरवाएगी। मार्च 2022 के इस प्रस्ताव को पंजाब सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दे कर अनिवार्य बना दिया है। पंजाब मुस्लिम परिवार नियम के मुस्लिम फॅमिली लॉ ऑर्डिनेंस 1961 के कागजातों में में अब ‘खत्म ए नबूवत’ का फार्म जोड़ दिया गया है। यह फैसला शनिवार (30 जुलाई 2022) को लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब की प्रांतीय सरकार ने अपने अधीनस्थ सभी क्षेत्रों के अधिकारियों को इस नए कानून को फ़ौरन लागू कर के अमल में लाने के आदेश दिए है। वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब में चौधरी परवेज इलाही के नेतृत्व में सरकार चल रही है। सरकार द्वारा इस आदेश का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा का अभी फरमान सुनाया गया है।

इस नए फार्म के मुताबिक, अब मियाँ-बीवी को लिखित देना होगा कि वो इस बार पर विश्वास करते हैं कि मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर हैं। पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के फ़राज़ ने मुख्यमंत्री के इस आदेश को ट्वीट किया है। फ़राज़ ने खुद को ईसा मसीह को मानने वाला घोषित करते हुए ईशनिंदा का आरोपित भी लिखा है। ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग के रूप में #Blasphemy लगाया है।

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने इस नियम का प्रस्ताव मार्च 2022 में पारित किया था। उस समय वहाँ के कई लोगों ने निकाहनामे के इस नए संशोधन का समर्थन किया था तो पाकिस्तान की निगत दाद और बुशरा ख़ालिक़ जैसी महिला एक्टिविस्टों ने इसका विरोध किया था।

₹5000 करोड़ का बंगाल भर्ती घोटाला, वकील का दावा: 6वीं पास भी बना टीचर, सामने आई लिस्ट; नाम/मोबाइल सबका खुलासा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) की कैबिनेट के पूर्व सहयोगी पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) जिस शिक्षक भर्ती (Teacher Recruitment Scam) में गिरफ्तार हुए हैं, उसकी परतें खुलने लगी हैं। मामले में गिरफ्तार अर्पिता मुखर्जी सहित TMC के कई नेताओं ने अपने-अपने लोगों की नौकरी की सिफारिश की थी।

खबर सामने आ रही है कि साल 2014 के इस घोटाले को कई तरह से अंजाम दिया गया था। इसमें बिना मेरिट वालों को नौकरी दी गई। जो छठी कक्षा पास थे, उन्हें भी टीचर बना दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने एग्जाम ही नहीं दिया, उनका भी सिलेक्शन हो गया था।

इन भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए। इस भर्ती घोटाले से संबंधित तीन सूची सामने आई है। इसकी एक लिस्ट किसी एजेंट की बताई जा रही है। इस लिस्ट में उन लोगों के नाम दिए गए हैं, जिनसे रिश्वत ली गई थी। इसमें उनके नाम, मोबाइल नंबर और कितना पैसा लिया गया है, दर्ज है।

इसके साथ ही एक दूसरी लिस्ट है। यह लिस्ट बंगाल के सत्ताधारी दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायकों से जुड़ी है। इसमें उन विधायकों और मंत्रियों के नाम दिए गए हैं, जिन्होंने उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया था।

दैनिक भास्कर ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि TMC नेता मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय, पार्टी के राज्य सचिव असीम माझी और अखिल गिरी के साइन किए हुए अलग-अलग लेटर मिले हैं। ये पत्र साल 2013 में लिखे गए हैं और इनमें परीक्षार्थियों के नाम और उनके रोल नंबर लिखकर भर्ती बोर्ड को भेजे गए थे।

यह बात भी सामने आई है कि पार्थ चटर्जी के पूर्व बॉडीगार्ड के परिवार के 13 लोगों को शिक्षा विभाग में नौकरी दी गई है। इनमें एक महिला ऐसी भी है, जो छठी पास है। इसी तरह अर्पिता की सिफारिश पर भी उसके कई रिश्तेदारों को नौकरी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पिटीशन दाखिल करने वाले वकील तरुण ज्योति तिवारी ने बताया कि शिक्षक भर्ती का पैसा TMC के कई नेताओं के जरिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री तक पहुँच रहा था। तिवारी के मुताबिक, यह पूरा घोटाला 5,000 करोड़ का है, क्योंकि हर कैंडिडेट से 18-20 लाख रुपए लिए गए और यह सब पिछले 10 साल से चल रहा था।

बता दें कि हाईकोर्ट के निर्देश पर इस भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। दूसरी तरफ, भर्ती प्रक्रिया में शामिल विद्यार्थी पिछले 503 दिनों से कोलकाता के मेयो रोड पर कोर्ट की अनुमति के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि, इन अवैध भर्ती वालों में से अभी तक किसी को हटाया नहीं गया है।

नेताजी बोस हों या पंडित नेहरू… दोनों की किताबों में वो शख्स थे कॉमन, जिनके लिए भारत माता ही थी आराध्य देवी

किसी भी ऐतिहासिक जीवन चरित्र के दो मुख्य साहित्यिक स्रोत होते हैं। पहला वो जीवनी जिसमें व्यक्ति के निजी जीवन, क्या किया, कैसे किया और क्यों किया सम्मिलित रहता है। दूसरा उनका दर्शन सहित्य, जो उनके स्वयं के लिखे हुए या बोले हुए शब्द होते हैं, जिससे व्यक्ति के विचार क्या थे, किस-किस सम्बन्ध में थे, यह जानकारी मिलती है।

19वीं शताब्दी में जन्में भारत के महान योगी स्वामी विवेकानंद आधुनिक इतिहास के उन न्यून व्यक्तियों में से हैं, जिनकी वाणी और कर्म में एक समावेश है। उन्होंने जो बोला और जैसा जीवनयापन किया, उसमें कोई भिन्नता या अंतर न था।

“मनसा, वाचा, कर्मणा” अर्थात हमारे मन के विचार, हम जो बोलते हैं और कर्म या कार्य करते हैं, उनमें समानता और संयोग होना। स्वामी विवेकानंद के जीवन में यह संयोग दिखता है। उनके शब्द जितने निर्भीक और साहसी हैं, उतना ही निर्भीक और साहसी उनका जीवन था। उनका स्वयं का जीवन भी भयमुक्त यानि अभय था और उनकी वाणी भी मनुष्य को अभय बनने के लिए आग्रह और प्रेरित करती है। वह तो भय को मृत्यु मानते थे और साहस को जीवन।

सुभाष चंद्र बोस जो 15 वर्ष की उम्र से लेकर जीवन के अंतिम समय तक स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेते हैं और जिनका जीवन स्वयं निर्भीकता से भरा था, वह विवेकानंद के बारे में अपनी पुस्तक ‘द इंडियन स्ट्रगल’ (1920-34) पृष्ठ- 18 में लिखते हैं:

“उन्होंने भारत की नवसन्तति में अपने अतीत के प्रति गर्व, भविष्य के प्रति विश्वास और स्वयं में आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान की भावना फूँकने का प्रयत्न किया। यद्यपि स्वामी विवेकानन्द ने कोई राजनीतिक विचार या सन्देश नहीं दिया, तथापि हर व्यक्ति जो उनके सम्पर्क में आया या जिसने भी उनके लेखों को पढ़ा, वह देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया और स्वतः ही उसमें राजनीतिक चेतना पैदा हो गई।”

स्वामी विवेकानंद के जीवन के हर पहलु में एक निरंतरता दिखती है। यह निरंतरता थी भारत या कहें भारत की विचार के लिए जीने की, भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण के कार्य करने की, भारत के प्रति अपने स्नेह और भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने के लिए… जिसके लिए उन्हें पश्चिम तक जाना पड़ा। यह निरंतरता थी अपनी सनातन संस्कृति के प्रति गर्व करने की, यह निरंतरता थी एक विचार से ओत-प्रोत होकर जीवन भर कार्य करने की। यह निरंतरता ही थी, जो स्वामी विवेकानंद को शायद सबसे अलग ही नहीं बनाती बल्कि युवाओं को उन तक खींच लाती है।

हर युवा अनेकों चुनौतियों से जूझता है, जिसमें सबसे मुख्य है एक विचार या कार्य के प्रति एकाग्रता का अभाव और निरंतर भटकाव आना। यदि वह स्वामी विवेकानंद की जीवनी या उनका अन्य साहित्य पढ़ते हैं तो उनको एक निरंतरता दिखती है, जिसकी वो खोज में हैं। उन्हें अपने प्रश्नों का उत्तर मिलने लगता है और यही कारण है जिससे स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता वर्ष दर वर्ष बढ़ती ही जा रही है।

ऐसा नहीं है कि स्वामी विवेकानंद के जीवन में कोई चुनौतियाँ नहीं आई या वातावरण हमेशा अनुकूल रहा। 25 वर्ष की उम्र के बाद जब से वह परिव्राजक संन्यासी बने, तब से उनके जीवन के अंतिम वर्ष 39 साल यानी 14 वर्षों तक तो उनको यह भी नहीं पता था की उनको अगले दिन भोजन कहाँ से मिलेगा और वह विश्राम कहाँ करेंगे।

  • 1884 में अपने पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु के बाद घर पर आया हुआ आर्थिक संकट
  • अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की समाधी (1886) के बाद उनके शिष्य और अपने गुरु भाइयों को एकत्रित करके शिक्षा और दीक्षा का कार्य
  • गुरु के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का काम
  • परिव्राजक जीवन में बिना साधन-सुविधा भारत को जानने की लालसा
  • जल-वायु परिवर्तन से जूझना
  • दिनों-दिनों तक भोजन ना मिलना
  • अमेरिका में ठण्ड और भूख के कारण संघर्ष या रंग भेद का सामना
  • अमेरिका के शिकागो शहर में 11 सितम्बर 1893 को आयोजित विश्व धर्म महासभा का विश्व दिग्विजय, जिससे उनकी ख्याति विश्व स्तर तक… जिसका मूल्यांकन करना कठिन
  • 1897 के शुरुआत तक का पश्चिम का प्रवास, जहाँ उन्होंने व्याख्यान भी दिए और भारतीय दर्शन पर कक्षाएँ भी लीं
  • 15 जनवरी 1897 को भारत वापस आकर यहाँ अपने व्याख्यानों के द्वारा या 1 मई 1897 को रामकृष्ण मठ की स्थापना के बाद एक संगठन के रूप में कार्य

ऊपर जितनी चुनौतियाँ हैं, इन सबके बावजूद उनमें एक निरंतरता थी, जो उनको सबसे अलग बनाती है ।

स्वामी विवेकानंद स्पष्ट थे कि अकेले साधन से साधना नहीं होती इसीलिए वह अडिग, अटल, अचल खड़े रहे हर चुनौती के सामने और अपने मनुष्य निर्माण, लोगों में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना जगाने के कार्य में लगे रहे। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी स्वामी विवेकानंद के जीवन को देख कर अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ पेज 337 में लिखते हैं:

“स्वामी विवेकानंद एक गतिशील और जोशीली ऊर्जा और भारत को आगे बढ़ाने के जुनून से भरपूर थे। वह उदास और निराश हिंदू मन के लिए एक टॉनिक के रूप में आए। उनके लिए भारत को राजनैतिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी आज़ाद करवाना जरूरी था, जिसके लिए उन्होंने भारत के हर भाग में जाकर युवाओं को प्रेरित किया।”

1897 में मद्रास में दिए हुए अपने व्याख्यान “भारत के भविष्य” में वह हर प्रकार की गुलामी त्यागने के लिए आह्वान करते हैं। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि आगामी पचास वर्ष के लिए यह जननी जन्मभूमि भारत माता ही मानो आराध्य देवी बन जाए। अपना सारा ध्यान इसी एक ईश्वर पर लगाओ, हमारा देश ही हमारा जाग्रत देवता है।

उनसे प्रेरणा लेते हुए आज तक करोड़ों लोग अपना जीवन भारत के लिए और भारत के विचार के साथ जीते हैं।

‘इतनी फ्लॉप फिल्मों के बाद कौन दे रहा इन्हें काम’ : तापसी पन्नू की ‘दोबारा’ का ट्रेलर देख लोगों ने उठाए सवाल, बताया- स्पेनिश फिल्म की फुल कॉपी

बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू की आने वाली फिल्म ‘दोबारा’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। कुछ दिन पहले ही इसका ट्रेलर जारी हुआ था, लेकिन लोगों ने इसे देखने के बाद कहा कि ये फ़िल्म स्पेनिश फिल्म ‘मिराज’ की कॉपी है। इसके अलावा लोग इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी सारी फ्लॉप फ़िल्म देने के बाद भी तापसी को काम कैसे मिल रहा है।

27 जुलाई 2022 को ‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’ के यूट्यूब चैनल पर फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था। 3 दिन में इस ट्रेलर को 45 लाख से ज्यादा व्यूज मिले हैं जबकि 62 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया है। कई लोग सोशल मीडिया पर इस ट्रेलर की तारीफ कर रहे हैं और कुछ पूछ रहे हैं कि क्या बॉलीवुड में अब ओरिजनल फिल्में नहीं बनतीं जो एक-एक सीन मिराज फिल्म का कॉपी कर दिया है।

एक यूजर ने कहा, “मिराज फिल्म से एक एक सीन लेकर कॉपी कर दिया है। ऐसे तो हमारा लुलू हलवाई भी डायरेक्टर और एक्सप्रेशनलेस शालू भाभी भी हिरोइन बन सकते हैं।”

निकी सिकारवार नाम की यूजर ने तापसी को लिखा, “आखिरी बार आपकी एक फिल्म देखी थी। आँखों में हारपिक डालना पड़ा था। बॉयकॉट दोबारा।”

अमित कुमार लिखते हैं, “देख रहा है ना विनोद टुकड़े-टुकड़े गैंग कैसे एक दूसरे को कॉपरेट करते हैं। फ्लॉप दर फ्लॉप फिर भी लीड रोल। अरे अनुराग कश्यप स्वरा को भी फिल्म दो इतना गाली सुनती हैं आपके इको सिस्टम के लिए, फिर भी उसको काम नही देते बेचारी।”

अमित लिखते हैं, “मैं एक बात जानता हूँ, जब इतने सारे टैलेंटेड लोग हैं, तो खराब अभिनय कौशल और इतनी फ्लॉप फिल्मों के साथ इन्हें एक के बाद एक फिल्म कैसे मिलती है।”

बता दें कि तापसी की फिल्म ‘दोबारा’ की तुलना जिस स्पेनिश फिल्म से की जा रही है वो ‘मिराज’ फिल्म 2018 की है। वो एक मिस्ट्री-ड्रामा फिल्म थी जिसे ओरिओल पाउलो द्वारा लिखा व निर्देशित किया गया था। वहीं तापसी की ‘दोबारा’ फिल्म ‘साइको-थ्रिलर’ फिल्म कही जा रही है। इसे अनुराग कश्यप ने निर्देशित किया है। फिल्म 19 अगस्त को रिलीज होगी। बीते दिनों तापसी की शाबाश मिट्ठू फिल्म पर्दे पर आई थी, जिसके कारण पनन्नू की बहुत फजीहत हुई थी।