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‘जब किसी ने पार्टी छोड़ी ही नहीं तो ये दल-बदल कैसे?’: सुप्रीम कोर्ट में साल्वे की दलीलों से सिब्बल-सिंघवी चित, अब शिवसेना बड़ी बेंच के हवाले

शिवसेना में फ़िलहाल पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के बीच संघर्ष चल रहा है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्णय लिया है। साथ ही दोनों गुटों को कहा गया है कि वो अगले बुधवार (27 जुलाई, 2022) तक अपने-अपने मुद्दों को लेकर रिपोर्ट दायर करें। कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में यथास्थिति बनाई रखी जाए।

जहाँ शिवसेना की तरफ से सपा नेता कपिल सिब्बल और कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर अधिवक्ता पेश हुए, वहीं एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ ऐसे संवैधानिक मुद्दे हैं, जिनका समाधान करना ज़रूरी है। साल्वे ने जहाँ मुद्दों को लेकर रिपोर्ट देने के लिए एक सप्ताह का समय माँगा, सिब्बल ने कहा कि इस मामले में और देरी ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट सभी मुद्दों को जानने के बाद बड़ी पीठ का गठन करेगी।

उद्धव ठाकरे की तरफ से महेश जेठमलानी भी पेश हुए। उद्धव गुट ने राज्यपाल के निर्णय पर भी आपत्ति जताई और स्पीकर बदले जाने को भी गलत फैसला बताया। हरीश साल्वे ने कहा कि दल-बदल का कानून तब लागू होता है जब कोई पार्टी छोड़ दें, लेकिन यहाँ पार्टी में रह कर ही एक गुट ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि मात्र 20 विधायकों के समर्थन से भला कोई मुख्यमंत्री कैसे बना रह सकता है? जबकि सिब्बल ने पार्टी व्हिप के उल्लंघन का आरोप लगा शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य बताया।

वहीं राज्यपाल की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोई पार्टी किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन में होती है और फिर चुनाव बाद पाला बदल लेती है, लेकिन लोग तो उस गठबंधन के लिए वोट करते हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ नेताओं को लगता है कि वो मतदाताओं का सामना नहीं कर सकते, इसीलिए उन्होंने ये निर्णय लिया। जबकि कपिल सिब्बल ने एक दिन की भी देरी को खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी सरकारें एक दिन भी सत्ता में नहीं रहनी चाहिए।

पाकिस्तान का फोर्ट मुनरो देखने गई अमेरिकी TikToker, होटल में गैंगरेप: इस्लामाबाद की सड़क पर बुर्के में जा रही महिला को दबोचा

पाकिस्तान में एक अमेरिकी महिला के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है। वहीं राजधानी इस्लामाबाद से बीच सड़क पर बुर्के में जा रही महिला को पीछे से दबोचने का वीडियो सामने आया है

पीड़ित अमेरिकी महिला टिकटॉक (TikTok) कंटेंट क्रिएटर है। वह डेरा गाजी खान के पर्यटक स्थल फोर्ट मुनरो गई थी। यहीं होटल में उसके साथ गैंगरेप किया गया। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अनवर के अनुसार, घटना के आठ घंटे के अंदर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। मुख्य संदिग्ध, मुजमिल शहजाद गाइड का काम करता है।

रेप पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि वह 17 जुलाई की रात फोर्ट मुनरो के होटल में ठहरी थी, तभी शहजाद और उसके साथियों ने उसके साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। विदेशी महिला ने आरोप लगाया कि उन लोगों ने बलात्कार का वीडियो भी बनाया है। पाकिस्तान के पंजाब (Punjab) प्रांत के मुख्यमंत्री हमजा शाहबाज ने इस घटना पर संज्ञान लिया है और प्रांत के शीर्ष पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट माँगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाएगी और पीड़िता को हर कीमत पर न्याय दिलाया जाएगा।

इससे पहले बुर्के वाली महिला को सड़क पर दबोचने का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में एक महिला रात के समय बुर्का पहने सड़क अकेली जाती दिख रही है। इसी दौरान एक शख्स पीछे से आकर उसे दबोच लेता है। महिला के शोर मचाने पर वह भाग जाता है। इस सिरफिरे की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

गौरलतब है कि पाकिस्तान में साल दर साल महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। हालत यह है कि पंजाब प्रांत में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ रही यौन हिंसा के बाद ​जून 2022 में आपातकाल की घोषणा की गई थी। पंजाब के गृह मंत्री अट्टा तरार ने कहा था कि उन्हें ये करने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होते अपराध समाज और सरकार दोनों के लिए चिंताजनक हैं।

पास्ता और वाइन… तीसरी प्रेग्नेंसी पर करीना कपूर ने तोड़ी चुप्पी, कहा- देश की आबादी बढ़ाने में सैफ का बहुत ज्यादा योगदान

बीते कई दिनों से बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) के गर्भवती होने को लेकर अटकलें लग रही थी। दावा किया जा रहा था कि वह तीसरी बार माँ बनने जा रही हैं। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर शेयर की गई कुछ तस्वीरों शेयर से हुई थी। इन तस्वीरों में करीना के पेट को देख लोगों ने उसे बेबी बंप समझना शुरू कर दिया था। लेकिन अब करीना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

करीना कपूर ने अपनी इंस्टा स्टोरी में बताया है कि वे प्रेग्नेंट नहीं हैं और ये सब पास्ता और वाइन की वजह से है। करीना कपूर ने लिखा, “यह पास्ता और वाइन है। शांत हो जाइए। मैं प्रेग्नेंट नहीं हूँ। उफ्फ… सैफ का कहना है कि उसने देश की आबादी बढ़ाने में पहले ही बहुत ज्यादा योगदान दे दिया है।”

फोटो साभार: करीना कपूर खान इंस्टाग्राम

बता दें कि सैफ अली खान चार बच्चों के पिता हैं। उन्हें पहली पत्नी अमृता सिंह से दो बच्चे हैं, जिनका नाम सारा अली खान और इब्राहिम अली खान है। वहीं, करीना कपूर और उनके दो बेटे तैमूर अली खान और जहाँगीर अली खान हैं। जहाँगीर का जन्म पिछले साल फरवरी में ही हुआ था। सैफ की सबसे बड़ी बेटी सारा और सबसे छोटे बेटे जहाँगीर के बीच 25 साल का अंतर है।

करीना ने जब दी बच्चे न पैदा करने की हिदायत 

पिछले दिनों करीना कपूर ने सैफ अली खान को फिर से बच्चा नहीं करने की हिदायत दी थी। वोग इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उम्र के हर दशक में सैफ ने बच्चा पैदा किया है। 60 साल की उम्र में ऐसा नहीं करने की मैंने उसे हिदायत दी है। करीना ने कहा था, “सैफ का हर दशक में बच्चा होता है। 20वें दशक, 30वें, 40वें और अब 50वें दशक में भी उनका एक बच्चा हुआ है। मैंने उनसे कहा है कि अब 60वें बरस में ऐसा नहीं हो। मुझे लगता है कि सैफ जैसे दिमाग वाला व्यक्ति ही चार बच्चों का पिता हो सकता है जो हर मामले में काफी यूनिक है। वह चारों को अपना समय देते हैं।”

इन फिल्मों में आएँगे नजर

करीना कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म में वह आमिर खान के साथ नजर आएँगी। इसके अलावा वह सुजॉय घोष द्वारा निर्देशित अपने ओटीटी डेब्यू प्रोजेक्ट की शूटिंग भी पूरी कर चुकी हैं। यह फिल्म जापानी नॉवेल ‘द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स’ पर आधारित है। वहीं, सैफ अली खान ‘विक्रम वेधा’ में नजर आएँगे।

झारखंड में महिला SI संध्या टोपनो पर पशु तस्करों ने चढ़ाई वैन, कुचल कर मार डाला: BJP ने बताया- गौतस्करों के बढ़े मनोबल का परिणाम

हरियाणा के नूंह में डीएसपी सुरेंद्र सिंह को डंपर से कुचलकर मारे जाने के चंद घंटों बाद झारखंड के राँची में भी महिला दरोगा को वाहन से कुचलकर मार डालने का मामला सामने आया है। महिला पुलिसकर्मी की पहचान संध्या टोपनो के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने देर रात जानवरों की अवैध तस्करी की सूचना मिलने पर एक वाहन को चेकिंग के लिए रोका। लेकिन तस्करों ने उनकी सुनने की बजाय उन पर पूरी वैन चढ़ा दी।

सामने आई जानकारी के अनुसार घटना बुधवार (20 जुलाई 2022) तीन बजे के आसपास की है। तुदुपना में इस समय एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत अपनी ड्यूटी करते हुए दरोगा संध्या टोपनो ने एक पिकअप वैन को आते देख उसे रुकने का इशारा किया। लेकिन, ड्राइवर ने गाड़ी को रोकने की बजाय उसे दरोगा के ऊपर चढ़ाया और फिर वहाँ से फरार हो गया।

घटना की सूचना होते ही मौके पर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी पहुँचे। उन्होंने संध्या को रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया। मगर बुरी तरह कुचले जाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। संध्या टोपनो 2018 बैच की दरोगा थीं और वर्तमान में तुपुदाना ओपी के प्रभारी पद पर तैनात थीं।

एसएसपी राँची ने इस मामले में जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने SI संध्या को मारने वाले गाड़ी चालक को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तस्करों ने महिला पुलिकर्मी को मारने के बाद वाहन इतनी तेज रफ्तार में भगाया कि वह रिंग रोड पर पलट गया। इसके बाद गाड़ी से कई तस्कर निकलकर भागे। हालाँकि पुलिस ने गाड़ी चलाने वाले को हिरासत में लिया और वाहन को जब्त कर लिया। अब बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने इस घटना को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि जब से राज्य में हेमंत सोरेन सरकार आई है उसके बाद से गौ तस्करी की राज्य में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग पूरी तरह उन्हें समर्थन देते हैं उनका संरक्षण करते हैं जिनके कारण कानून व्यवस्था चरमराई हुई है और तुपुदाना की घटना जंगलराज की ओर बढ़ता एक उदाहरण है। उन्होंने चेतावनी देते हुए सरकार से कहा कि या तो गौ तस्करी पर रोक लगाई जाए वरना जनता के क्रोध को झेलने के लिए तैयार हो जाएँ।

उल्लेखनीय है कि अभी कल ही हरियाणा के नूँह में पत्थर से भरे डंपर से डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई को कुचले जाने का मामला प्रकाश में आया था। पुलिस ने इस केस में इकरार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक गुप्त सूचना मिलने पर डीएसपी इलाके में औचक निरीक्षण के लिए गए थे जहाँ उनके ऊपर डंपर चढ़ाया गया।

लोकसभा में भी एकनाथ शिंदे की ही शिवसेना: राहुल शेवाले को मिली मान्यता, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे को एक और झटका

शिवसेना पर कब्जे की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार (19 जुलाई 2022) को एकनाथ शिंदे गुट के नेता राहुल रमेश शेवाले को सदन में शिवसेना नेता के रूप में मान्यता दे दी।

अब लोकसभा में शिवसेना के नेता राहुल शेवाले होंगे, जबकि भावना गवली चीफ व्हिप बनी रहेंगी। लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में सर्कुलर भी जारी कर दिया है। इसमें शिवसेना नेता के रूप में राहुल रमेश शेवाले का नाम दर्ज है।

लोकसभा स्पीकर के पास शिंदे और ठाकरे दोनों गुट की तरफ से आवेदन आए थे। बता दें कि लोकसभा में शिवसेना के 19 सांसद हैं, जिनमें से 12 सांसद शिंदे के साथ हैं। इन 12 लोकसभा सदस्यों ने संसदीय दल के नेता को बदलने के लिए अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था। राहुल शेवाले ने कहा था कि कई सदस्य सदन के नेता विनायक राउत के काम से खफा थे। इसलिए स्पीकर को सदन का नेता बदलने के लिए लिखा गया था। उन्होंने कहा था कि चीफ व्हिप भावना गवली ही रहेंगी, इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

इससे एक दिन पहले सोमवार (18 जुलाई 2022) को पार्टी के सदन के नेता विनायक राउत ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा था जिसमें विरोधी खेमे से कोई ज्ञापन स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया गया था। राउत ने सोमवार रात अध्यक्ष को सौंपे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि वह शिवसेना संसदीय दल के विधिवत नियुक्त नेता हैं और राजन विचारे चीफ व्हिप हैं।

इसके बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सहित शिवसेना के बारह लोकसभा सदस्यों ने ओम बिरला से मुलाकात की और उनसे संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता को बदलने का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुट के किसी भी निवेदन पर विचार नहीं करने के लिए कहा था। वहीं दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शेवाले ने कहा, “पिछले साल जून में उद्धव ठाकरे NDA के साथ फिर से जुड़ने के इच्छुक थे, लेकिन अपनी बात से मुकर गए।”

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में आज (20 जुलाई 2022) फिर महाराष्ट्र के विधायकों की अयोग्यता के मामले पर सुनवाई होगी। विधायकों को अयोग्य ठहराने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई करेगी। शिवसेना के दोनों खेमे ने याचिका दाखिल कर विधायकों को अयोग्य ठहराने की माँग की है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर अयोग्यता नोटिस पर तब तक फैसला नहीं कर सकते जब तक कि अदालत उस पर फैसला न दे।

‘मेरी माँ (राबड़ी देवी) को मारा, मुझे और मेरे परिवार को गालियाँ’: बोले तेज प्रताप- Video जारी कर दूँगा, ऐश्वर्या के साथ चल रहा तलाक का मामला

राजद नेता व बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव (Tej Pratap) के तलाक का मामला फैमिली कोर्ट में चल रहा है। बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या राय तलाक नहीं देना चाहती हैं। इस बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप ने मामले की मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताई है। साथ ही वैवाहिक जीवन में मिली प्रताड़ना के वीडियो जारी करने की धमकी दी है।

तेज प्रताप ने मंगलवार (19 जुलाई 2022) को फेसबुक पर लाइव आकर तलाक के मुद्दे पर अपनी छवि खराब करने का आरोप मीडिया पर लगाया। उन्होंने कहा, “मामला कोर्ट में है। मैं हर चीजों को झेलने का काम कर रहा हूँ। किस तरह से इस मामले में हमारी छवि को धूमिल करने का काम किया गया। इसे पब्लिक डोमेन में लाने का काम न करें।”

तेज प्रताप ने कहा कि इस मामले में यदि उन्हें खुलासा करना होगा तो उनके पास एक हजार वीडियो हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने माता-पिता, भाई बहनों के साथ हुए शारीरिक और मानसिक शोषण को साबित करने के लिए अनगिनत वीडियो क्लिप और सबूत पेश कर सकता हूँ। लेकिन मैंने उन्हें साझा नहीं किया, क्योंकि यह एक लड़की का मामला है और बेहद संवेदनशील है।” साथ ही कहा, “हम भी खुलासा कर सकते हैं। हम भी वीडियो चलाने का काम कर सकते हैं। यदि इस मामले को नहीं रोका गया तो मैं आपके सामने दूध का दूध, पानी का पानी करके रहूँगा। मैं अब रुकूँगा नहीं।”

उन्होंने कहा, “चार साल मैंने झेलने का काम किया है। अब इस वीडियो को पूरे बिहार की जनता देखेगी। किस तरीके से मेरी माँ को मारा गया। किस तरीके से मुझे गाली दी गई। मेरे पिता, भाई-बहनों को गाली दी गई।” लाइव के अंत में उन्होंने कहा कि ये चीजें न सामने आए इसलिए मेरी गुजारिश है कि इस मामले को कोर्ट से ही खत्म होने दिया जाए।

तेज प्रताप ने यह भी कहा कि वे पिछले चार साल से जो झेल रहे हैं, उसे कोई नहीं समझ सकता। ससुराल वालों की तरफ से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। करोड़ों रुपए की डिमांड की जा रही है। उनके पूरे परिवार को बर्बाद करने की साजिश चल रही है।

बता दें कि तेज प्रताप यादव मई 2018 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती ऐश्वर्या राय के साथ के शादी के बंधन में बंधे थे। लेकिन उनका रिश्ता छह महीने से भी कम समय तक चला और अब यह मामला फैमिली कोर्ट में है।

‘हिंदू होना पाप है क्या’ : रॉकेट्री की आलोचना पर नंबी नारायण का सवाल, कहा- ‘मैं हिंदू हूँ तो फिल्म में मुस्लिम-ईसाई दिखाएँगे क्या’

‘रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट’ फिल्म में इसरो वैज्ञानिक को हिंदू परंपराओं का पालन करते हुए दिखाए जाने पर लिबरल आलोचकों ने जो सवाल खड़े किए थे, उन पर स्वयं नंबी नारायण ने जवाब दिया है। उन्होंने पूछा है कि क्या हिंदू होना पाप है। अगर वो हिंदू हैं और हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं तो वही तो उनकी बायोग्राफी में दिखाया जाएगा।

डेक्कन वाहिनी को दिए गए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने फिल्म की आलोचना को गलत बताते हुए कहा,

“मैं हिंदू हूँ। मुझे कोई शर्म नहीं है हिंदू होने में। क्या हिंदू होना पाप है? अगर मैं हिंदू हूँ और मेरी कहानी दिखाई जा रही है तो वो मुझे हिंदू की तरह ही तो दिखाएँगे । वह लोग मुझे मुस्लिम या ईसाई तो नहीं दिखा सकते…। तो फिर हम किस बारे में बात कर रहे हैं? क्या ब्राह्मण होना पाप है? मैं ब्राह्मण नहीं हूँ, वो अलग सवाल है। अगर कोई ब्राह्मण है तो क्या आप उसे हटा देंगे? कितने ब्राह्मण हैं जिन्होंने इस देश को अपनी सेवा दी। कोई एक नहीं। बहुत सारे। मैं आपको लिस्ट दे सकता हूँ।”

उन्होंने कहा,

“मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि हम बेवजह मामले को रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। हम नरेंद्र मोदी को भाजपा नेता कहते हैं न कि प्रधानमंत्री। आपकी जानकारी के लिए बताता हूँ, नरेंद्र मोदी को भूल जाएँ। क्या आप जानते हैं कि वर्तमान के केरल मुख्यमंत्री ने मेरा कितना समर्थन किया था? जिस ढंग से उन्होंने मुझे समर्थन दिया वो जितना बताओ उतना कम है? उन्होंने मेरे मामले को लंबा खिंचने से रोका। ऐसे में क्या मुझे कम्युनिस्ट कहा जाने लगेगा।”

वह इंटरव्यू में साफ करते हैं कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रति कोई झुकाव नहीं है। लेकिन फिर भी उनसे सवाल हो रहे हैं क्योंकि लोगों की एक मानसिकता बन गई है। वह कहते हैं, “आप मुझसे सवाल नहीं पूछते, क्योंकि आपने एक तरह की मानसिकता बनाई हुई है कि आप मुझपर बीजेपी का ठप्पा लगाना चाहते हैं।” 

उन्होंने इंटरव्यू लेने वाले को सलाह दी वो अपने सवाल में सुधार करें और चीजों को समझें। तब उन्हें पता चलेगा कि चाहे शिवसेना हो या कोई और उनसे किसी का कोई लेना देना नहीं है।

वह बोले, “अगर कोई मुझे समर्थन देता है है तो कृपया ऐसा न दिखाएँ कि मैं उस पार्टी विशेष का हो गया हूँ। मैं ये देखकर खुश होता हूँ मैंने नरेंद्र मोदी और पिनराई विजयन दोनों से बात की। वह दोनों ही शीर्ष पर हैं। अगर मेरा केस सही नहीं होता तो ये दो लोग क्यों मेरे साथ आते।”

रॉकेट्री की आलोचना

बता दें कि नंबी नारायण के जीवन पर आधारित रॉकेट्री फिल्म 1 जुलाई 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। आर माधवन ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लिखा, इसे डायरेक्ट किया और इसमें लीड रोल निभाया। इस फिल्म को देखने के बाद कई लिबरलों ने इस पर सवाल खड़े किए थे। फिल्म आलोचक अनुपमा चपड़ा ने कहा था,

“ये सराहनीय बात है कि फिल्म ने नारायणन की उपलब्धियों को सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन फिल्म में लगातार उनकी राष्ट्रभक्ति दिखाई गई है और बार-बार उनके धर्म को प्रदर्शित किया गया है। सबसे पहले ही दृश्य में नारायण अपने घर में पूजा कर रहे हैं और किसी भी महत्वपूर्ण समय में वह प्रार्थना ही करते दिखते हैं। “

‘3 घंटे बिना ब्रा के दी परीक्षा, अंत में कहा – हाथ में लेकर निकल जाओ’: NEET की छात्रा ने बताया केरल में क्या हुआ, केंद्र और महिला आयोग हरकत में

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के दौरान केरल के कोल्लम में एग्जास हॉल में जाने से पहले चेकिंग के नाम पर कुछ छात्राओं के ब्रा उतरवाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जहाँ शिक्षा मंत्रालय ने एग्जाम बाद से उभरे इस मामले में NTA से रिपोर्ट माँगी है। वहीं NTA ने पुलिस में दी गई शिकायत को ‘मनगढ़ंत’ और ‘गलत इरादे’ से की गई बताया है। फ़िलहाल NTA ने इलाके का दौरा करने से एक कमिटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगाएगी। वहीं इस मामले में महिला आयोग भी कार्रवाई के लिए पत्र लिख चुका है।

क्या है मामला

केरल के कोल्लम में NEET एग्जाम सेंटर पर सख्ती के नाम पर करीब 100 से अधिक छात्राओं को अपने ब्रा उतारने के लिए मजबूर किया गया। इसको लेकर अब छात्राओं के परिजनों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया है। जबकि कोल्लम के मोर्थम इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलेजी ने छात्राओं के आरोपों से इनकार किया है।

इस मामले में केरल पुलिस को अब तक तीन शिकायतें मिलीं हैं। जिसमें से एक केरल के कोल्लम जिले में 17 वर्षीय लड़की के पिता गोपकुमार सूरनाद ने दर्ज कराई है। उन्होंने TNM से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना बुलेटिन में धातु के हुक वाली ब्रा पर किसी प्रतिबंध का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि जब उनकी बेटी ने अपने इनरवियर को हटाने से इनकार कर दिया, तो उन्हें परीक्षा न देने के लिए कहा गया। मेरी बेटी लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रही थी। लेकिन वह ठीक से परीक्षा भी नहीं लिख पा रही थी। वह दुखी होकर रोती हुई हमारे पास लौट आई। उन्होंने आगे बताया कि सेंटर पर अनिवार्य रूप से छात्राओं से अपने इनरवियर को हटाने के लिए कहा गया था। बच्चे बहुत असहज थे। उनमें से कई रो रहे थे। अगर ऐसा है तो वे फ्रिस्किंग के दौरान इनरवियर चेक कर सकते हैं। लेकिन उन्हें क्यों हटाएँ? NEET बुलेटिन में ऐसे कोई नियम नहीं हैं।

वहीं NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित छात्रा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा, क्या आपने मेटल हुक इनरवियर पहना है? मेरे हाँ कहने पर उन्होंने मुझे अलग लाइन में खड़ा कर दिया।”

लड़की ने कहा कि उसे समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। इसके बाद बाद उन्होंने मुझे इनरवियर उतारकर मेज पर रखने को कहा। सारी इनरवियर एक साथ रखी गई थीं। हमें ये तक नहीं पता था कि हमें ये वापस मिलेंगी भी या नहीं। हम जब एग्जाम देकर लौटे तो बहुत भीड़ थी। धक्का-मुक्की हुई लेकिन मुझे अपनी इनरवियर वापस मिल गई।”

पीड़िता ने आरोप लगाया, “उन्होंने हमसे अपनी इनरवियर हाथ में लेकर वहाँ से जाने को कहा, उन्होंने कहा कि इसे यहाँ पहनने की जरूरत नहीं है। हम यह सुनकर हम बहुत शर्मिंदा हुए। यह बहुत भयानक अनुभव था। जब हम एग्जाम हॉल में लिख रहे थे तब हमने अपने बालों से सीना ढका। वहाँ लड़के-लड़कियाँ दोनों थे। यह बहुत ही कठिन और असहज स्थिति थी।”

NCW ने लिया संज्ञान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संगीन प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग शर्मनाक करार दे चुका है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एनटीए को पत्र लिखकर आरोपों की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। इस घटना के सामने आने के बाद केरल के उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने भी इस घटना को ‘अमानवीय और चौंकाने वाला’ करार दिया और केंद्र से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

वहीं NBT की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमें कोई शिकायत अथवा प्रतिवेदन नहीं मिला है। मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों के आधार पर केन्द्र के अधीक्षक तथा पर्यवेक्षक से तत्काल रिपोर्ट माँगी गई है।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि हमें बताया गया है कि इस प्रकार की कोई घटना नहीं हुई है और दर्ज कराई गई शिकायत ‘मनगढ़ंत’ और ‘गलत इरादे’ से की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्राओं ने दावा किया है कि रविवार को जब वे परीक्षा देकर बाहर निकलीं तो उन्हें सारे अंडरगारमेंट्स डिब्बों में एक साथ फेंके हुए मिले। जबकि केरल के मार्थोमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में स्थित अयूर चदायमंगलम केंद्र ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है कि छात्राओं की तलाशी और बायोमेट्रिक जाँच बाहरी एजेंसियों द्वारा की गई थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में रविवार को करीब 95 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसके लिए इस साल सबसे ज्यादा आवेदन आए थे। कुल 18,72,329 उम्मीदवारों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10.64 लाख छात्राएँ थीं।

पता चल गया कहाँ पहुँच रहा ड्रग्स का पैसा, इसी से देश विरोधी एजेंडा चला रहे फर्जी पत्रकार: आतंकवाद की भी फंडिंग, मिले कई दस्तावेज

जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स की तस्करी और आतंकवाद का रिश्ता काफी पुराना है। इसी बीच कश्मीर घाटी में कुछ फर्जी पत्रकारों के आतंकवाद का महिमामंडन करने और सुरक्षा बलों को बदनाम करने के लिए ड्रग मनी के इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियाँ भी भारत की छवि खराब करने वाले ‘फर्जी’ पत्रकारों द्वारा अवैध धन का इस्तेमाल करने से हैरान हैं।

नम्बला, उरी और बारामूला शहर में छापे के दौरान एसआईए की जम्मू विंग के अधिकारियों ने ड्रग सिंडिकेट और इन ‘फर्जी’ पत्रकारों के बीच साँठ-गाँठ का पर्दाफाश कर पर्याप्त सबूत जुटाए हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले सबूतों से एसआईए (SIA) टीम को यह समझने में आसानी हुई है कि पाकिस्तान से तस्करी कर लाए गए नशीले पदार्थों और ड्रग्स की बिक्री से जुटाए गए धन का इस्तेमाल आतंकवाद और जेहादी एजेंडा चलाने वाले पत्रकारों दोनों के लिए किया गया था।

बताया जा रहा है कि फर्जी पत्रकारों को सुरक्षा बलों, केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) की छवि खराब करने, आतंकवाद का महिमामंडन करने और युवाओं को भ्रमित करने के लिए भुगतान किया गया था। एसआईए ने छापेमारी 31 मार्च 2022 को गाँधी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज टेरर फंडिंग मामले के संबंध में एफआईआर संख्या 73/2022 के तहत की थी। यह मामला धारा 13, 17, 18 यूए (पी) अधिनियम, 1967 के तहत दर्ज किया गया था।

एसआईए की टीमों द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि कैसे सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की जड़े मजबूत करने और धन जुटाने के लिए किया गया था। इसके अलावा जाँच में यह भी पता चला है कि किस तरह ड्रग मनी का इस्तेमाल आतंकी मॉड्यूल, अलगाववादियों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को देने के लिए किया जा रहा है।

गरीबों के कल्याण के लिए योगी सरकार को ₹600 करोड़ की संपत्ति दान करेंगे ये उद्योगपति: जानिए जूते की वो कहानी, जिसने बदल दी उनकी सोच

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के उद्योगपति डॉ. अरविंद कुमार गोयल ने अपनी पूरी संपत्ति सोमवार (18 जुलाई, 2022) को अचानक उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को दान करने की घोषणा कर दी। दरअसल, उद्योगपति के साथ-साथ समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ. अरविंद गोयल ने 25 साल पहले ही ठान लिया था कि वह एक दिन अपनी सारी संपत्ति गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए दान कर देंगे। ऐसा ख्याल उनके मन में ट्रेन में सफर के दौरान एक गरीब को ठंड में ठिठुरता देखकर आया था। तब उन्होंने तत्काल उसे अपने जूते तक दे दिए थे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तक दान स्थान्तरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अरविंद कुमार गोयल की संपत्ति की कुल कीमत करीब 600 करोड़ रुपए बताई गई है। गोयल ने अपने पास सिर्फ मुरादाबाद सिविल लाइंस स्थित कोठी रखी है। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति दान करने के बाद अपना पूरा जीवन देशसेवा और समाजसेवा को समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की है।

बता दें कि गोयल ने 50 साल की कड़ी मेहनत से यह संपत्ति बनाई। वहीं गोयल ने यह दान सीधे राज्य सरकार को इसलिए दिया है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुँचाई जा सके। अपनी इस घोषणा की जानकारी देते हुए डॉ गोयल ने कहा, “राज्य सरकार उनकी सारी संपत्ति से प्रदेश में गरीबों के लिए निशुल्क शिक्षा और अच्छे इलाज की व्यवस्था करे। उनकी इच्छा है कि समाज का कोई भी गरीब, अनाथ और बेसहारा व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे।”

वहीं अपने दान के इस अचानक से लगने वाले निर्णय पर डॉ गोयल ने 25 साल पहले की उस घटना को याद करते हुए कहा, “वो दिसंबर की ठंडी रात थी। मैं जैसे ही ट्रेन में सवार हुआ। सामने देखा कि एक गरीब आदमी ठंड से ठिठुर रहा है। उसके पास न तो चादर थी और न ही पैरों में चप्पल या जूते थे। उस आदमी को देखकर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपने जूते उतार कर उसे दे दिए। कुछ देर तक तो मैंने सहन किया, लेकिन कड़ाके की ठंड होने की वजह से मेरी भी हालत खराब होने लगी। तब मैंने सोचा कि इस सामने वाले आदमी की तरह तमाम लोग ऐसे ही ठंड में ठिठुरते होंगे। मैं घर पहुँचा, लेकिन उस आदमी की सूरत मेरे जहन से नहीं निकल रही थी। इसके बाद मैंने बेसहारा और गरीबों के लिए काम शुरू कर दिया। बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बनवाया। छात्र-छात्राओं को किताबें, कॉपी और कपड़े बाँटने शुरू कर दिए।”

डॉ गोयल ने अपनी कहानी साझा करते हुए आगे बताया, “उस दिन से ठंड हो, गर्मी हो या बारिश हो, मैं रोज अपने घर से निकला। सड़क किनारे बैठे लोगों की आर्थिक मदद, फल, सब्जी बेचने वाले बुजुर्ग महिला-पुरुषों की मदद की। लंबे समय से समाजसेवा करने के दौरान गरीबों और बेसहारा लोगों की मुझे बहुत दुआएँ मिलीं। मैं और मेरे परिवार ने भी खूब तरक्की की। अब मैंने सोच लिया है कि अपनी सारी संपत्ति दान कर दूँगा। इसके लिए मैंने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर माँग रखी है। जिला प्रशासन शासन से अनुमति लेगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।”

रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. गोयल के सहयोग से बीते करीब 20 साल से देशभर में सैकड़ों वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम और फ्री हेल्थ सेंटर चलाए जा रहे हैं। उनकी मदद से चल रहे स्कूलों में गरीब बच्चों को शिक्षा मुफ्त दी जा रही है। यहाँ तक कि कोविड लॉकडाउन में भी करीब 50 गाँवों को गोद लेकर उन्होंने लोगों को मुफ्त खाना और दवा दिलवाई। उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ राजस्थान में भी उनके स्कूल-कॉलेज हैं।

गौरतलब है कि डॉ. अरविंद कुमार गोयल के समाजसेवा के जूनून और लगन को देश और दुनिया खूब सराहा और सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें अब तक भारत के चार राष्ट्रपतियों से भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम समाजसेवा के लिए उनको सम्मानित कर चुके हैं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी डॉ. गोयल के सेवा कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।​​​​​​