Home Blog Page 2565

इस्लामी कॉलेज के कैंपस में यौन हिंसा, खुलासा करने वाले मैगजीन को बंद करवाया: इंडोनेशिया में छात्रों-पत्रकारों ने खोला मोर्चा

विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले मुल्क इंडोनेशिया (Indonesia) के एक इस्लामी कॉलेज ने परिसर में हुई यौन शोषण (Sexual Assault) की घटना के आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाए इसे सामने लाने वाले मैगजीन पर ही प्रतिबंध लगा दिया है।

इस घटना की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वॉच (Human Right Watch) ने निंदा की है। वहीं, इस घटना के बाद इंडोनेशिया के कई इलाकों में इस निर्णय के खिलाफ छात्रों और पत्रकारों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

इंडोनेशिया के मालुकु प्रांत में एंबोन में सरकारी इस्लामिक संस्थान ‘इंस्टीट्यूट अगामा इस्लाम नेगेरी (IAIN)’ में विद्यार्थियों द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिका लिंटास मैगजीन (Lintas Magazine) ने परिसर में यौन उत्पीड़न की घटनाओं का कवरेज किया था। आरोपितों के खिलाफ जाँच करने के बजाय कॉलेज ने इसे बंद करने का आदेश कर दिया।

ह्यूमन राइट वॉच के अनुसार, इस साल 14 मार्च को लिंटास पत्रिका ने साल 2015 से 2021 के बीच इस्लामी कॉलेज कैंपस में हुई यौन हिंसा की दर्जनों घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी। जब मैगजीन का यह अंक सामने आया तो हंगामा हो गया।

लिंटास ने परिसर में यौन हिंसा की घटनाओं की शिकार 27 छात्राओं और 5 छात्रों की 32 को कवर किया। मैगजीन ने स्टोरी के लिए पाँच साल तक किए अपने शोध में हिंसा के शिकार छात्र-छात्राओं के अलावा कैंपस के अधिकारियों का साक्षात्कार लिया। जिन अधिकारियों की साक्षात्कार लिया गया उनमें ज़ैनल आबिदीन रहावरिन भी शामिल थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रिका ने शोध में यौन हिंसा के 14 कथित आरोपितों की है। इन लोगों ने पीड़ितों के साथ फील्ड रिसर्च ट्रीप के दौरान, कैंपस, लेक्चरर ऑफिस और घरों में यौन हिंसा को अंजाम दिया। इनमें से पाँच पीड़ितों ने बताया कि उनके एक व्याख्याता रिश्तेदार ने ही उनका शोषण किया।

घटना सामने आने के बाद यह व्याख्याता लिंटास के न्यूज़रूम में गया और दो स्टाफ पर हमला किया। हमले में रिपोर्टर एम नूरदीन कैसुपी और डिजाइनर मुहम्मद पेब्रिएंटो घायल हो गए। इसके बाद रहावरिन ने छात्र पत्रिका को बंद करने, न्यूज़रूम को सील करने और सभी उपकरणों को जब्त करने का आदेश दिया।

उन्होंने इसके पत्रकारों और संपादकों पर कॉलेज को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए नौ पत्रकारों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। इतना ही नहीं, लिंटास पत्रिका के मुख्य संपादक योलांदा अग्ने पर सभी पीड़ितों और आरोपितों के नामों का खुलासा करने का दबाव डाला गया।

बता दें कि इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने साल 2019 में कानून बनाया था कि परिसर में यौन हिंसा की घटना को लेकर सभी इस्लामी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को एक टास्क फोर्स का गठन करना अनिवार्य है। हालाँकि, IAIN ने अब तक ऐसा नहीं किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज द्वारा पत्रिका को बंद करने का आदेश देने के बाद लगभग दो हजार पत्रकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इन पत्रकारों को इंडोनेशिया के एलायंस ऑफ इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स और अंबोन के स्थानीय समूह का भी साथ मिला है। इसके साथ ही छात्र संगठनों भी पत्रिका के समर्थन में सामने आए हैं।

‘सलमान भाई का इंतजार है’: Shaadi.com वाले अनुपम मित्तल के ऑफर पर ‘छोटी आँखों’ वाले मंत्री जी का ‘बिंदास’ जवाब

नागालैंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष व प्रदेश मंत्री तेमजेन इमना आलोंग के हिंदी में दिए गए भाषण वायरल होने के बाद लोगों ने उनके साथ उनकी पत्नी पर भी जानकारी जुटाने के लिए गूगल सर्च करना शुरू कर दिया था। इस बात की जानकारी अलोंग ने ट्वीट के जरिए दी थी और बताया था कि कैसे वो भी अभी अपनी पत्नी की खोज में है।

अलोंग के इसी ट्वीट पर शादी डॉट कॉम वाले अनुपम मित्तल ने रिप्लाई किया है। अनुपम मित्तल ने तेमजेन के ट्वीट पर अपने शादी डॉट कॉम को टैग करते हुए लिखा, “कुछ करना पड़ेगा।”

अनुपम का ट्वीट देख तेमजेन ने दोबारा रिप्लाई दिया और कहा, “भाई फिलहाल हम बिंदास हैं। सलमान भाई की शादी का इंतजार कर रहे हैं।” दोनों हस्तियों के ये ट्वीट देखने के बाद ट्विटर यूजर्स भी इन कमेंट पर मजे ले रहे हैं और साथ ही अलोंग के ह्यूमर की तारीफ कर रहे हैं।

बता दें कि शादी डॉट कॉम एक साइट है जहाँ पर शादी योग्य लड़का और लड़की अपनी प्रोफाइल बनाते हैं। इसके बाद उनकी प्रोफाइल और सर्च के हिसाब से उन्हें दूसरे व्यक्ति को सजेस्ट किया जाता है। इस साइट के मालिक अनुपम मित्तल हैं जिन्होंने 1997 में इसे शुरू किया था। उनका मकसद था कि लोग इंटरनेट के माध्यम से अपने पार्टनर को चुनने में सक्षम हों। पहले इस प्लेटफॉर्म का नाम सगाई डॉट कॉम था। हालाँकि अब ये शादी डॉट कॉम हो चुका है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस साइट का ज्यादा प्रयोग होता है।

यही वजह है कि तेमजेन ने जब कहा कि वो पत्नी की खोज में हैं तो अनुपम ने कहा कि लगता है शादी डॉट कॉम को कुछ करना पड़ेगा। हालाँकि सलमान खान वाला रिप्लाई पाकर उन्होंने कहा, “सलमान के लिए तो बहुत लंबा इंतजार हो सकता है। लेकिन आपका शादी डॉट कॉम और मुझे इंतजार रहेगा।”

इसके अलावा शादी डॉट कॉम ने भी अलोंग को रिप्लाई दिया है। इसमें लिखा है, “हम आपका इंतजार कर रहे हैं सर। आ जाओ।”

कोचिंग जा रही छात्रा पर दानिश खान ने चाकू से किए ताबड़तोड़ वार, 31 टाँके लगे: पीड़ित मॉं बोलीं- 2 साल से कर रहा था परेशान

उत्तर प्रदेश के झाँसी में एक छात्रा पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला किया गया। घटना सोमवार (11 जुलाई 2022) की है। हमले का आरोपित दानिश खान कथित तौर पर छात्रा को दो साल से परेशान कर रहा था।

12वीं में पढ़ने वाली छात्रा पर तब हमला किया गया, जब वह मिशन चौराहे से गुजर रही थी। उसे सिविल अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखकर लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। छात्रा के चेहरे पर 31 टाँके लगने की बात मीडिया रिपोर्टों में कही गई है। पुलिस आरोपित युवक की तलाश में जुटी है।

पीड़ित छात्रा रोजाना की तरह वह सोमवार शाम मिशन कम्पाउंड के पास इंग्लिश की कोचिंग करने जा रही थी। रास्ते में दानिश खान खड़ा था। उसने उसकी गर्दन और चेहरे पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। एक लड़की ने बीच-बचाव कर छात्रा को बचाया। दानिश हमला करके फरार हो गया। लहूलुहान हालत में छात्रा किसी तरह कोचिंग पहुँची, जहाँ से टीचर उसको अस्पताल ले गए। उसके बाद परिजनों को सूचना दी गई। 

जानकारी के मुताबिक दानिश और पीड़ित छात्रा के बीच दो साल पहले नंबर का आदान-प्रदान हुआ था। इसके बाद दानिश लगातार उसे ब्लैकमेल और परेशान कर रहा था। यह बातें तब सामने आई जब छात्रा के घर से रुपए और सोने के आभूषण गायब होने लगे। जब छात्रा की माँ ने तांत्रिक के पास जाने की बात कही तो उसने घर से पैसे व जेवर दानिश खान को देने के बारे में बताया। लड़की ने बताया कि दानिश उसे आए दिन डराता धमकाता है और पैसों की माँग करता है। इसकी जानकारी होने पर छात्रा माँ दानिश के घर गई। उस समय दानिश की माँ ने कबूल किया था कि दोनों के बीच दोस्ती है। इसके बाद दानिश और उसके परिवार के लोगों ने माफी माँग ली थी। छात्रा के परिजनों को कि मामला शांत हो गया है। इसलिए उस समय उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी।

पीड़ित छात्र की माँ का कहना है कि दानिश उनकी बेटी को पिछले दो साल से परेशान कर रहा था। उन्होंने कहा, “तीन महीना पहले हम उसके घर पर उसे समझाने के लिए गए थे। तब उसने माफी माँग लिया था और कहा था कि आज के बाद हम उसे परेशान नहीं करेंगे, बात नहीं करेंगे। उसकी मम्मी भी पैर पड़ रही थी। उसके बाद आज (11 जुलाई 2022) ये घटना हुई। उसने चाकू मार दिया।” उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को बहुत ज्यादा चोट लगी है। पीछे गला पूरा कटा हुआ है। दो लंबे-लंबे निशान लगे हैं।

क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलने पर जाँच की गई तो पता चला कि पीड़ित छात्रा और आरोपित युवक की कॉलेज से टेलीफोन पर बातचीत होती थी। उन्होंने बताया कि नंदिनी को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। फिलहाल वह खतरे से बाहर है। डॉक्टर ने कहा कि जल्द ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इधर दानिश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है। गिरफ्तारी के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक तुलसीराम पांडेय का कहना है कि दानिश की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें बनाई गई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

अपडेट: ताज़ा जानकारी यह है कि झाँसी पुलिस ने इस मामले में 7 आरोपितों को धर-दबोचा है। एक आधिकारिक बयान में यूपी पुलिस ने बताया कि नवाबाद थाना स्थित हाइड्रिल कॉलोनी की लड़की अंग्रेजी की कोचिंग पढ़ने जाती है और उसकी जान-पहचान करारी थाना क्षेत्र के सीपरी बाजार के रहने वाले युवक से हुई। पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर मन-मुटाव हो गया था, जिसके बाद कोतवाली थानांतर्गत सूद कॉलोनी में पढ़ने जा रही लड़की पर उसने ब्लेड से हमला कर दिया।

पुलिस ने जानकारी दी है कि लड़की को उसने झाँसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहाँ चिकित्सकों ने बताया कि उसकी स्थिति खतरे से बाहर है। सातों हिरासत में लिए गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

पाकिस्तान की लेडी ‘चांद नवाब’ : ईद की रिपोर्टिंग में खलल डाल रहे लड़के को जड़ा तमांचा, Video वायरल

ईद के मौके पर पाकिस्तान की एक महिला रिपोर्टर मायरा हाशमी का एक लड़के को थप्पड़ जड़ने का वीडियो वायरल हुआ है। ये वीडियो रिपोर्टिंग के दौरान का है जिसे सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की मशहूर पत्रकार नायला इनायत समेत कई लोगों ने डाला है।

वीडियो में देख सकते हैं कि मायरा आराम से अपनी रिपोर्टिंग कर रही होती हैं लेकिन आसपास के सभी लोग उन्हें घेरकर देखते रहते हैं। चेहरे पर बिन कोई शिकन लाए पहले वो अपना काम पूरा करती हैं उसके बाद माइक नीचे करके उस लड़के को झापड़ मारती हैं जो कैमरे के सामने आ रहा होता है।

पूरी घटना कैमरा ऑन रहने के कारण वीडियो में कैद हो गई। अब लोग इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं और इस तरह आसपास की भीड़ से तंग होकर अपना रिएक्शन देने वाली रिपोर्टर को पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार चांद नवाब का लेडी वर्जन और चांद नवाब की बेटी कहा जा रहा है।

कुछ लोग इस वीडियो को देख हँस रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्यों लड़के को थप्पड़ मारा गया, अगर वो पलट कर ऐसे ही कर देता तो क्या इज्जत रह जाती रिपोर्टर की।

कुछ महिलाएँ भी हैं जो रिपोर्टर के पक्ष में अंदाजा लगा रही हैं कि शायद लड़के ने कोई बदसलूकी की हो, इस वजह से रिपोर्टर बर्दाश्त न कर पाई हो। इसी तरह एक यूजर ने बताया कि लड़का मायरा को काफी देर से तंग कर रहा था। 2-3 बार मना करने के बाद भी जब वो नहीं माना तो ये घटना हुआ।

बता दें कि रविवार को बकरीद विश्व भर में मनाई गई थी। ऐसे में ये वीडियो भी उसी दिन की कही जा रही है। ट्विटर पर शेयर होती वीडियो को लाखों व्यूज मिल रहे हैं। इस बीच मायरा ने भी इसे अपने अकॉउंट से शेयर कर सफाई दी है। उर्दू में किए गए ट्वीट के गूगल अनुवाद से समझ आता है कि मायरा जिस समय एक परिवार का इंटरव्यू ले रही थीं, उस दौरान ये लड़का उस परिवार को तंग कर रहा था इसलिए जब अगली बार इस लड़के ने ऐसा किया तो उन्होंने बर्दाश्त नहीं किया।

12 जुलाई का वो पन्ना जिसे नेहरू के ‘टाइपिस्ट इतिहासकारों’ ने छिपाया: जब मूसलाधार बारिश के बीच RSS के संस्थापक सरसंघचालक हेडगेवार का स्वागत कर रहे थे मोतीलाल

भारत अपने स्वाधीनता का 75वाँ अमृत महोत्सव मना रहा है और देश अपने अमर नायकों के बलिदान, कृतित्व और संघर्ष को याद कर रहा है। भारत के स्वाधीनता आंदोलनों को लेकर अनेक अध्याय एवं ऐतिहासिक तिथियाँ स्वर्णिम अक्षरों से लिखी गई हैं। भारतीय इतिहास के शिलालेख पर लिखी हुई ऐसी ही एक तिथि है 12 जुलाई 1922।

इस लेख में हम स्वाधीनता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के महत्वपूर्ण योगदान के बारे चर्चा कर रहे हैं। 1921 में महात्मा गाँधी की अगुवाई में चले असहयोग आंदोलन में डॉ. हेडगवार ने अपनी महती भूमिका निभाई थी। जब वे जेल से छूटकर बाहर आए तब पंडित मोतीलाल नेहरू, विट्ठलभाई पटेल, हकीम अजमल खाँ, डॉ. अंसारी, श्री राजगोपालाचारी, श्री कस्तूरी रंग अयंगर आदि नेताओं ने उनका स्वागत किया। अनेक स्थानों पर मित्रों ने निमंत्रण देकर डॉक्टर हेडगेवार को बुलाया तथा उनकी शोभा-यात्रा निकालकर सत्कार-समारोहों का आयोजन किया।

अंग्रेजों द्वारा तुर्कस्तिान में खिलाफत को निरस्त करने से आहत मुस्लिम मन को अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आन्दोलन के साथ जोड़ने के उद्देश्य से महात्मा गाँधी ने खिलाफत का समर्थन किया। इस पर कॉन्ग्रेस के अनेक नेता और राष्ट्रवादी मुस्लिमों को भी आपत्ति थी। इसलिए, तिलकवादियों का गढ़ होने के कारण नागपुर में असहयोग आन्दोलन बहुत प्रभावी नहीं रहा। लेकिन डॉ. हेडगेवार, डॉ. चोलकर, समिमुल्ला खान समेत कई देशभक्तों ने यह परिवेश बदल दिया। उन्होंने खिलाफत को राष्ट्रीय आन्दोलन से जोड़ने पर आपत्ति होते हुए भी उसे सार्वजनिक नहीं किया। इसी आधार पर साम्राज्यवाद का विरोध करने के लिए डॉ. हेडगेवार ने तन-मन-धन से आन्दोलन में हिस्सा लिया।

आद्य सरसंघचालक जब कारागृह से बाहर आए तो मूसलाधार वर्षा हो रही थी। उस अवस्था में भी डॉ. मुंजे, डॉ. परांजपे, डॉ. ना.भा. खरे तथा अनेक मित्र बाहर उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके द्वारा अर्पित पृष्पहारों को सहर्ष स्वीकार करते हुए हेडगेवार सबके साथ घर को चले। रास्ते में स्थान-स्थान पर रोककर उनका स्वागत किया गया। उस समय के पत्र ‘महाराष्ट्र’ ने भी उसी दिन ‘छपते-छपते’ में हेडगेवार स्वागत का अवसर हाथ से नहीं जाने दिया। इस पत्र ने लिखा, “डॉ. हेडगेवार की देशभक्ति, देश के प्रति समर्पण और निःस्वार्थवृत्ति के सम्बन्ध में किसी के भी मन में शंका नहीं थी; परन्तु ये सब गुण स्वार्थत्याग की भट्टी में से निखरकर बाहर निकल रहे हैं। उनके इन गुणों का इसके आगे राष्ट्रकार्य के लिए सौगुना उपयोग हो यही हमारी कामना है।”

उसी दिन सायंकाल चिटणीस पार्क में ‘स्वागत-सभा’ की घोषणा की गई। इस समय पं. मोतीलाल नेहरू, श्री विट्ठलभाई पटेल, हकीम अजमल खाँ, डॉ. अंसारी, श्री राजगोपालाचारी, श्री कस्तूरी रंग अयंगर आदि नेता कांग्रेस कार्य-समिति की बैठक के लिए नागपुर आए हुए थे। वे सब स्वागत-सभा में उपस्थित रहेंगे, इसकी घोषणा भी की गई। लेकिन शाम तक लगातार बारिश होने के चलते ठीक समय पर ‘व्यंकटेश नाट्यगृह’ में सभा करनी पड़ी। नाट्यगृह नागरिकों से खचाखच भर गया था। डॉ. ना.भा. खरे ने अध्यक्ष-स्थान ग्रहण किया। हेडगेवार के स्वागत का प्रस्ताव रखा गया, जो तालियों की गड़गड़ाहट के बीच स्वीकृत हुआ।

इसके बाद पं. मोतीलाल नेहरू तथा हकीम अजमल खां के भाषण हुए। तदुपरान्त डॉक्टर हेडगेवार बोलने को खड़े हुए। उनका छोटा-सा किन्तु अत्यंत मार्मिक भाषण हुआ। उन्होंने कहा, “1 वर्ष सरकार का मेहमान बनकर रह आने से मेरी योग्यता पहले से बढ़ी नहीं है और यदि बढ़ी है तो उसके लिए हमें सरकार का आभार ही मानना चाहिए। देश के सम्मुख ध्येय सबसे उत्तम एवं श्रेष्ठ ही रखना चाहिए। मार्ग कौन सा हो, इस विषय में इतिहासवेत्ता श्रोताओं को कुछ भी कहना उनका अपमान करना ही होगा। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए मृत्यु भी आई तो उसकी चिंता नही करनी चाहिए। यह संघर्ष उच्च ध्येय पर दृष्टि तथा दिमाग ठण्डा रखकर ही चलाना चाहिए।”

नागपुर के बाद यवतमाल, वणी, आर्वी, वाढोणा, मोहोपा आदि अनेक स्थानों पर मित्रों ने निमंत्रण देकर डॉक्टर हेडगेवार को बुलाया तथा उनकी शोभा-यात्रा निकालकर सत्कार-समारोहों का आयोजन किया। स्थान-स्थान पर उनकी आरती की गई तथा उन्हें खादी का वेष भेंट किया गया। यवतमाल का समारोह लोकनायक बापूजी अणे की अध्यक्षता बड़ा समारोह हुआ।

दुनिया की दृष्टि से तो हेडगेवार साहब जेल से मुक्त हो गए थे; परन्तु उनका मस्तिष्क इसी धुन में लगा था कि इस विषम परिस्थिति में से कौन-सा मार्ग निकाला जाए जिससे हमारा देश स्वाधीन हो सके। उन्हें परतंत्र भारत की चिन्ताओं ने घेर रखा था। ऊपर से पुष्पमालाओं से लदे होने के बाद भी उनकी गर्दन चिन्ता के भार से दबी हुई थी। डॉ. हेडगेवार के स्वागत में ऐसे अनेक दृश्य देखे गए। इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में लिखे गए हैं। लेकिन वापमंथी लेखकों और पंडित नेहरू के टाइपिस्ट इतिहासकारों ने इस सत्य को छिपाने की भरसक कोशिश की। वे पंडित मोतीलाल नेहरू के उस स्वागत को भी भूल गए, जिसमें उन्होंने स्वयं डॉ. हेडगेवार का स्वागत किया था। स्वाधीनता संग्राम में अपना अनुपम योगदान देने वाले माँ भारती के अनन्य उपासक डॉ. साहब को कोटि-कोटि नमन।

मुंबई की 16 साल की लड़की को कश्मीर से धमकी दे रहा था फैयाज, पकड़ा गया: कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में नाबालिग ने किया था पोस्ट

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के विरोध में फेसबुक पोस्ट करने पर मुंबई की नाबालिग लड़की को जान से मारने की धमकी देने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। 30 साल का आरोपित कश्मीर का रहने वाला है। उसे जम्मू-कश्मीर के बडगाम से 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। आरोपित को 3 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है।

बता दें कि दक्षिण मुंबई के गिरगाँव की रहने वाली 16 साल की लड़की ने कुछ दिनों पहले अपने फेसबुक वॉल पर कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में पोस्ट किया था। इसके बाद उसे 1 जुलाई की देर रात तीन नंबर से कॉल और व्हाट्सएप मैसेज आए। कॉल करने वालों ने कन्हैया लाल का समर्थन करने पर नाबालिग लड़की को जान से मारने की धमकी और भद्दी-भद्दी गालियाँ दी। कॉल और मैसेज करने का यह सिलसिला अगले कई घंटों तक चलता रहा। जिसके बाद लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। लड़की के पिता की शिकायत पर वीपी रोड पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (2) और 509 के तहत मामला दर्ज किया था।

मामले पर कार्रवाई करते हुए तकनीकी जाँच और अन्य जानकारियाँ जुटाने के बाद वीपी रोड पुलिस स्टेशन की एक टीम को जम्मू और कश्मीर भेजा गया। स्थानीय पुलिस की मदद से 30 वर्षीय आरोपित को शनिवार (9 जुलाई 2022) की रात को बडगाम से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपित की पहचान फैयाज अहमद भट के तौर पर हुई है।

आरोपित फैयाज को 9 जुलाई की शाम को मुंबई लाया गया। यहाँ उसे सोमवार (11 जुलाई 2022) को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने कहा, “इस मामले में आगे की जाँच जारी है।”

28 जून को की गई थी कन्हैया लाल की हत्या

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा का समर्थन करने वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर करने को लेकर राजस्थान के उदयपुर में  कन्हैया लाल की 28 जून को उनकी दुकान पर गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। इससे तकरीबन एक हफ्ते पहले 22 जून को इसी वजह से महाराष्ट्र के अमरावती शहर में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी।

झारखंड CM के गृह जिले में भी ‘शरिया शासन’: सरकारी स्कूलों के नाम में जोड़ दिया ‘उर्दू’ ताकि रविवार की जगह जुमे पर हो छुट्टी

झारखंड में जामताड़ा के बाद प्रदेश मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिले दुमका में भी कुछ स्कूलों को उर्दू स्कूल में परिवर्तित किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। खबर है कि 33 से ज्यादा ऐसे स्कूल मिले हैं जो सरकारी होने के बावजूद रविवार को नहीं बल्कि शुक्रवार को छुट्टी देते हैं।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट भी दावा करती है कि उन्होंने झारखंड के जामताड़ा में स्कूलों को उर्दू स्कूल में परिवर्तित किए जाने का मामला आने के बाद दुमका में अपनी पड़ताल की थी। यहाँ उन्हें पता चला कि कुल 33 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जो उर्दू स्कूल बना दिए गए हैं।

इनके मिड डे मील के मेन्यू पर भी लिखा है कि वहाँ रविवार को खाना वितरित किया जाता है और जुमे वाले दिन छुट्टी रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन स्कूलों को बिन प्रशासन की सूचना के उर्दू स्कूल बना दिया गया है वो स्कूल मुस्लिम बहुल इलाकों में स्थित हैं।

इनमें 10 उर्दू स्कूल शिकारीपाड़ा में हैं जबकि जामा, जरमुंडी, काठीकुंड और दुमका में 2-2 स्कूल हैं। इसी तरह सरैयाहाट में 7 और रानेश्वर में 8 उर्दूर स्कूल चिह्नित किए गए हैं।

सरकारी स्कूलों में किए गए इस बदलाव को लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक संजय कुमार दास ने कहा है कि उन्होंने हर प्रखंड से रिपोर्ट मँगाई है। पता किया जा रहा है कि आखिर किन हालातों में इस तरह सरकारी स्कूलों में रविवार की छुट्टी शुक्रवार को दी जाने लगी है और कैसे इन स्कूलों के साथ उर्दू जुड़ा। संजय कुमार दास ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद वह इस मामले में अपनी जाँच करेंगे और उसके बाद दोषियों परा कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि दुमका के जिन स्कूलों में इस परिवर्तन की शिकायत की गई है वो सरकारी स्कूल हैं न कि कोई मदरसा। इससे पहले झारखंड के जामताड़ा में भी ऐसा मामला सामने आया था। दुमका सांसद ने ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिख बताया था कि कैसे जिले में 100 से अधिक मुस्लिम बहुल स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जाती हैं और जो स्कूल उर्दू स्कूल भी नहीं है उन्हें भी उर्दू स्कूल बनाने की साजिश सच कुछ सालों से चल रही है

अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि इन स्कूलों में हर समुदाय के बच्चे पढ़ने जाते हैं। ऐसे में उनके मनोभाव पर इसका काफी उलटा असर पड़ता है। उन्होंने एकरूपता कायम रखने के लिए माँग की है कि स्कूलों में रविवार को छुट्टी निर्धारित की जाए और इस बात पर संज्ञान लिया जाए कि कैसे कुछ प्रखंडों में स्कूल नियमों को ताक पर रखते हैं।

प्रदेश के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने इस बाबत कहा कि उन्होंने इस सूचना के मिलते ही संबंधित अधिकारियों से चर्चा की है और हफ्ते भर में रिपोर्ट माँगी गई है। इसी आधार पर आगे कार्रवाई होगी और सरकारी निर्देशों का पालन होगा।

बता दें कि कुछ दिन पहले झारखंड से ही एक मामला प्रकाश में आया था जहाँ स्कूल पर स्थानीय जनता ने दबाव बनाया था कि स्कूल के नियम उनकी आबादी को देख बदलें जाएँ। इसके बाद स्कूल की प्रार्थना, व प्रार्थना का ढंग सब बदल दिया गया था।

‘एक वर्ग की आबादी बढ़ती जाए, मूल निवासी कर दिए जाएँ नियंत्रित – ऐसा न हो’: CM योगी ने डेमोग्राफी असंतुलन पर जताई चिंता

सोमवार (11 जुलाई, 2022) को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब हम परिवार नियोजन की बात करते हैं तो हमें ध्यान में रखना होगा कि जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आगे बढ़े, लेकिन जनसांख्यिकी असंतुलन की स्थिति भी न पैदा हो पाए। इस अवसर पर न सिर्फ राज्य के स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर जनसंख्या असंतुलन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं

सीएम योगी आदित्यनाथ कहा, “ऐसा न हो कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने की स्पीड ज्यादा हो और जो मूल निवासी हों, उनकी आबादी को जागरूकता के प्रयासों से नियंत्रित कर दिया जाए।”

सीएम योगी ने आगे यह भी कहा, “जिन देशों की जनसंख्या ज्यादा होती है। वहाँ असंतुलन चिंता का विषय है, क्योंकि रिलीजियस डेमोग्राफी पर उल्टा असर पड़ता है। एक समय के बाद वहाँ अव्यवस्था और अराजकता जन्म लेने लगती है।”

सीएम ने यहाँ तक कहा, “जनसंख्या रोकने की कोशिश से सभी मजहब, वर्ग, संप्रदाय को एक समान रूप से जोड़ा जाना चाहिए। एक वर्ग विशेष में मातृ और शिशु मृत्यु दर दोनों ही ज्यादा हैं। अगर दो बच्चों के जन्म के बीच अंतराल कम है तो इसका असर मातृ और शिशु मृत्यु दर पर भी पड़ेगा।”

सीएम ने आगे जनसंख्या असंतुलन पर पर बोलते हुए कहा, “इसे रोकने के लिए धर्मगुरुओं का भी सहयोग लिया जाना चाहिए। इसमें सामूहिक कोशिशों से ही सफलता मिलेगी।” उन्होंने कहा, “मानव को 100 करोड़ तक होने में लाखों साल लगे, लेकिन 100 से 500 करोड़ होने में 183-185 साल ही लगे। इस साल के अंत तक विश्व की आबादी 800 करोड़ होने की संभावना है।”

वहीं उन्होंने भारत की जनसंख्या को मद्देनजर रखते हुए कहा, “आज का भारत 135-140 करोड़ जनसंख्या का देश है। यूपी सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यहाँ अभी 24 करोड़ की आबादी है, जो कि कुछ समय में 25 करोड़ की संख्या को पार कर जाएगी। उत्तर प्रदेश आबादी के लिहाज से ये दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा देश हो सकता है।” ऐसे में सीएम योगी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में कई समस्याएँ बढ़ी आबादी की वजह से प्रदेश में बनी हुई हैं।

सीएम योगी ने कहा, ”हम सभी जानते हैं कि बीते 5 वर्षों से देशभर में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं एक निश्चित पैमाने पर जनसंख्या समाज की उपलब्धि भी है, लेकिन यह उपलब्धि तभी है, जब समाज स्वस्थ व आरोग्यता की स्थिति को प्राप्त कर सके।”

वहीं उन्होंने जनसंख्या के हिसाब से राज्य की उपलब्धियों और सुविधाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यूपी में मैटरनल एनीमिया 51.1% से घटकर 45.9% रह गई है। 5 साल में फुल इम्यूनाइजेशन 51.1% से बढ़कर लगभग 70% तक पहुँच गया है। हॉस्पिटल में प्रसव की दर 67-68% थी, वह आज 84% है। यूपी में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में पहले की तुलना में अपने रिकॉर्ड को अच्छा किया है, लेकिन इसे और बेहतर करने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश स्टेट लॉ कमीशन के अध्यक्ष आदित्य मित्तल पिछले साल 16 अगस्त 2021 को सीएम योगी आदित्यनाथ को जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़ा ड्राफ्ट सौंपा था। वहीं अब इस बात का इंतजार है कि इस जनसंख्या नियंत्रण नीति को प्रदेश में आखिर कब लागू किया जाएगा।

वहीं आयोग ने विधेयक के प्रारूप में कहा है कि दो बच्चे वालों को ग्रीन और एक बच्चे वाले को गोल्ड कार्ड दिया जाए, जिससे योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें संबंधित दस्तावेज बार-बार न दिखाने पड़े। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर बच्चे को दिव्यांग माना जाए। दो बच्चों में एक के ट्रांसजेंडर होने पर परिवार को तीसरे बच्चे की छूट होगी। इस मसौदे में ये साफ तौर पर है, कि जिनके 2 से ज्यादा बच्चे होंगे उन्हें सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी और जो सरकारी नौकरी में होंगे उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा।

विधायकों के बाद अब शिवसेना के सांसदों में भी फूट, उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुँचे 7 सासंद: करते रह गए इंतजार

महाराष्ट्र की सत्ता गँवा चुके शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को जल्द ही एक और बड़ा झटका लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने सोमवार (11 जुलाई 2022) को मातोश्री में शिवसेना सांसदों की बैठक बुलाई, जिसमें 19 में से केवल 12 सांसद ही पहुँचे। काफी देर इंतजार करने के बाद भी 7 सांसद बैठक में नहीं पहुँचे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही शिवसेना के कुछ और सांसद पाला बदल सकते हैं। हालाँकि, इससे पहले भी ऐसी खबरें सामने आ चुकी हैं, जब कुछ सांसदों ने उद्धव ठाकरे से एकनाथ गुट से सुलह करने की सिफारिश की थी।

बताया जा रहा है कि उद्धव की बुलाई बैठक में गजानन कीर्तिकर, अरविंद सावंत, विनायक राउत, हेमंत गोडसे, धैर्यशील माने, ओमराजे निंबालकर, राजेंद्र गावित, राजन विचारे और राहुल शेवाले समेत 12 सांसद ही पहुँचे। बाकी सांसद बैठक में नहीं पहुँचे।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे ने आज अपने 15 विधायकों को एक भावुक पत्र लिखा। इसमें चिट्ठी में उन्होंने संकटकाल में भी पार्टी के प्रति निष्ठा और उन पर विश्वास दिखाने के लिए विधायकों को धन्यवाद कहा था। पत्र में उद्धव ने लिखा था, “किसी भी धमकी और प्रलोभन के चक्कर में न पड़ते हुए आप सभी एकनिष्ठ रहे और शिवसेना को बल दिया, इसके लिए धन्यवाद। माता जगदंबा आपको हमेशा स्वस्थ रखे, ये प्रार्थना करता हूँ।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों की अयोग्यता के मामले पर सोमवार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उद्धव गुट की तरफ से जहाँ सुनील प्रभु सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और अयोग्यता वाले मामले पर सुनवाई की माँग की। वहीं विधानसभा सचिवालय के प्रधान सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब देकर कहा था कि राहुल नार्वेकर स्पीकर बने हैं और उन्हें ही अयोग्यता के मामले पर सुनवाई करने दिया जाएगा। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण ने सॉलिसिटर जनरल से महाराष्ट्र विधानसभा नए अध्यक्ष (स्पीकर) राहुल नार्वेकर को सूचित करने के लिए कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर फैसला नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्णय न लें।

यूपी पुलिस के खिलाफ AltNews वाला मोहम्मद जुबैर पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, 12 जुलाई को याचिका पर सुनवाई: 3 हिन्दू संतों पर की थी घृणा भरी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की बेंच मंगलवार (12 जुलाई, 2022) को प्रोपगेंडा वेबसाइट AltNews के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) की याचिका पर सुनवाई करेगी। लाइव लॉ के मुताबिक, अपने ट्वीट में तीन हिंदू संतों (यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप) को कथित तौर पर ‘घृणा फैलाने वाले’ कहने के मामले में जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर को जुबैर ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

वहीं, बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी के बेंच ने ज़ुबैर को सीतापुर मामले में शर्तों के साथ पाँच दिन की जमानत दी थी। इस दौरान ज़ुबैर को ट्वीट करने और दिल्ली छोड़ने पर पाबंदी लगाई गई थी। हालाँकि, जुबैर ने अदालत में कहा था कि उसकी जान को खतरा है। उसे इंटरनेट पर जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उसने यूपी पुलिस द्वारा दायर एफआईआर को रद्द करने की भी माँग की थी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रिट पिटिशन को 13 जून को खारिज कर दिया था।

बता दें कि जुबैर के खिलाफ IPC की धारा 295A (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और IT एक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जुबैर को 27 जून को एक ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया था। 4 दिन की पुलिस कस्टडी खत्म होने के बाद कोर्ट में उसकी पेशी हुई तो सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने तमाम तरह के आरोप जुबैर पर लगाए। इन आरोपों में विदेशी फंड लेने के साथ-साथ सबूतों को मिटाने का भी इल्जाम लगा था।

एपीपी श्रीवास्तव ने कहा था कि मोहम्मद जुबैर को विदेश में रहने वाले लोगों से पैसे आए। उन्होंने जानकारी दी थी कि पाकिस्तान, सीरिया से आने वाली पेमेंट को Razor गेटवे से स्वीकार किया गया। अब पुलिस को इसी मामले में आगे की जाँच करनी है, क्योंकि जुबैर को बचाने के लिए उनकी वकील की ओर से दिया गया बयान और ऑल्ट न्यूज की वेबसाइट पर हो रखा दावा एक दूसरे से भिन्न हैं।