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‘शराब पीने वालों के लिए खुशखबरी, प्रधानमंत्री घर-घर पहुँचा रहे पाइपलाइन’: आवेदन फॉर्म हुआ वायरल, जानिए क्या है माजरा

सोशल मीडिया पर एक फार्म वायरल किया जा रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार लोगों के घरों तक शराब की पाइपलाइन पहुँचाने में मदद कर रही है। शराब की पाइपलाइन के लिए लोग आवेदन कर सकते हैं। वायरल फॉर्म में लिखा है, “भारत सरकार, शराब की पाइपलाइन कनेक्शन हेतु आवेदन। माननीय प्रधानमंत्री ने रोज शराब पीने वालों के लिए शराब की पाइपलाइन देने का फैसला लिया है, जो भी इच्छुक हों वो 11000 रुपए के डिमांड ड्राफ्ट के साथ इस आवेदन पत्र को भरकार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO Office) में जमा करवाएँ।

आवेदन प्राप्त होने के एक महीने बाद निरीक्षण करके आवेदक के घर मीटर के साथ शराब की पाइपलाइन को जोड़ दिया जाएगा। बाद में खपत के अनुसार, बिल घर पर आएगा।” इसके बाद नीचे आवेदन का नाम लिखने के लिए जगह छोड़ी गई और साथ ही एक फोटो के लिए भी जगह दी है। यह फाॅर्म बिल्कुल सरकारी फार्म जैसा ही दिख रहा है।

यह मैसेज सोशल मीडिया पर इतना वायरल हुआ कि प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक के पास पहुँच गया। फैक्ट चेक डिपार्टमेंट ने इस खबर को फर्जी बताया है। PIB ने इस वायरल मैसेज के खूब मजे लिए और नाना पाटेकर की फोटो के साथ इसे शेयर करते हुए लिखा, “चिल गाइज, अपनी उम्मीदों को ज्यादा मत बढ़ाओ।” यानी यह खबर सच नहीं है। इस तरह की कोई योजना नहीं आ रही है। वहीं, यूजर्स भी इस ट्वीट पर काफी मजे ले रहे हैं और इसके मीम्स वायरल कर रहे हैं।

कपिल सिंह लिखते हैं, “लगता है जिस बंदे ने ट्वीट किया है वो मदिरा पान करता है।”

अमिताभ राय लिखते हैं, “पाइपलाइन की कोई आवश्यकता नहीं…CHEER।”

एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली सरकार के लिए बेस्ट प्लान… केजरीवाल जी को एक बार सोचना चाहिए।”

कमल सेठी लिखते हैं, “PIB fact check team आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं भारत सरकार का अगले कई 100 वर्षों तक भी ऐसा सोचना संभव नहीं होगा परंतु दिल्ली में अगले 2 वर्षों में श्रीमान केजरीवाल जी इस योजना को लागू जरूर कर देंगे नल से दारू वह भी बिना मीटर के फ्री।”

फोटो साभार: कमल सेठी का ट्विटर

मजदूर शहजाद अंसारी ने ‘रवींद्र’ बन हिन्दू महिला से मंदिर में की शादी, सच्चाई पता चलने पर मारपीट के घर से निकाला: स्टेशन पर रह रही

झारखंड के रहने वाले एक युवक पर आरोप लगा है कि उसने उत्तर प्रदेश आकर ‘लव जिहाद’ किया। उक्त मुस्लिम युवक ने 7 वर्ष पूर्व मंदिर में हिन्दू युवती से शादी की थी। ससुराल पहुँचने पर इसका पता चला कि लड़का मुस्लिम है। उक्त महिला इसके बाद मुस्लिम टोले से भाग कर गढ़वा में आ गई और न्याय की गुहार लगा रही है। उक्त मुस्लिम युवक गढ़वा जिले के सगमा प्रखंड के कुंबा खुर्द गाँव का रहने वाला है। उसने आजमगढ़ की युवती से हिन्दू रीति-रिवाज से शादी की थी।

लड़की 7 साल बाद अपने ससुराल पहुँची, तब उसे पता चला कि लड़का मुस्लिम है। इसके बाद मुस्लिम युवक ने हिन्दू महिला को घर से निकाल दिया, जिसके बाद वो बाहर दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर है। उपायुक्त रमेश घोलप के पास पहुँच कर महिला ने न्याय की गुहार लगाई है। बंशीधर नगर स्थित महिला थाना व पुलिस अधीक्षक के पास भी महिला ने शिकायत की थी। शहजाद अंसारी दिल्ली के क्रेशर प्लांट में मजदूरी करता था।

वहीं पर पीड़िता का एक रिश्तेदार भी काम करता था। उसी रिश्तेदार से नंबर लेकर शहजाद अंसारी ने महिला से फोन पर बातचीत करनी शुरू कर दी। जब वो महिला रिश्तेदार के पास जाती-आती थी, तब वो उससे बात भी करता था। मुलाकात होने लगी तो इसके 6 महीने बाद उसने मंदिर में शादी कर ली। शादी के 2 दिन बाद उसे गाँव ले गया, लेकिन कुछ दिन रहने के बाद पीड़िता अपने मौके लौट आई। शहजाद अंसारी भी पीड़िता के मायके में ही एक अलग कमरा लेकर रहने लगा।

शहजाद अंसारी करीब 8 वर्ष तक वैसे ही रहता रहा। क्रेशर प्लांट बंद होने के बाद वो वापस अपने गाँव लौट गया। जब पीड़िता उसके घर पहुँची तो वो मारपीट करने लगा। उसने भरण-पोषण के लिए पैसे देने भी बंद कर दिए। अप्रैल 2022 में महिला ने गढ़वा के एसपी से इसकी शिकायत की। अब वो गढ़वा रेलवे स्टेशन पर ही रह रही हैं। पिछले कुछ समय से ‘लव जिहाद’ कानून के तहत कई मामले दर्ज हुए हैं। फ़िलहाल केवल भाजपा शासित राज्यों में ही ऐसे कानून हैं।

‘ASI ने खोजा, वामपंथियों ने छिपाया’: समुद्री में डूबी द्वारका के रहस्यों पर आ रही है ‘कार्तिकेय 2’, इस्कॉन मंदिर पहुँची पूरी टीम

तेलुगु फिल्म ‘कार्तिकेय’ 8 साल बाद अपने सीक्वेल के साथ एक बार फिर धमाल मचाने के लिए तैयार है। ‘कार्तिकेय 2’ (Karthikeya 2) में भगवान कृष्ण और समुद्र में डूबे द्वारका के रहस्यों से पर्दा उठाया जाएगा। इन दिनों फिल्म की स्टारकास्ट ‘कार्तिकेय 2’ के प्रोमोशन्स में खासा बिजी है। आज हिंदी में फिल्म का टीजर रिलीज हो गया है। इसी सिलसिले में ‘कार्तिकेय 2’ फिल्म में लीड रोल निभाने वाले निखिल सिद्धार्थ (Nikhil Siddartha) फिल्म की स्टारकास्ट के साथ मंगलवार (19 जुलाई 2022) को वृंदावन के इस्कॉन मंदिर पहुँचे।

अभिनेता ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं। उन्होंने लिखा, “इस्कॉन वृंदावन में एपिक मिस्टिकल मूवी कार्तिकेय 2 का बहुत अच्छा अनुभव रहा। इस्कॉन के प्रवक्ता राधाराम दास जी ने फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तथ्यों और द्वारका के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए टीम को धन्यवाद दिया।”

राधाराम दास ने कहा, “महाभारत के अनुसार कृष्ण का द्वारका 5124 साल पहले समुद्र में डूब गया था। 1984 में ASI ने समुद्र में डूबे हुए द्वारका को खोजा, लेकिन वामपंथियों ने उन निष्कर्षों पर पर्दा डाल दिया। यह फिल्म तथ्यों पर आधारित है। हमारा रामायण और महाभारत का इतिहास है। ​इस विषय पर फिल्म बनाने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

बता दें कि ‘कार्तिकेय’ फिल्म को पीपल मीडिया फैक्ट्री और अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स द्वारा प्रेजेन्ट किया जा रहा है। ये सुपरनैचुरल मिस्ट्री थ्रिलर 2014 में आई फिल्म कार्तिकेय का सीक्वेल है। यह ​फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु में 22 जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म के कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज होने की उम्मीद है।

इस फिल्म के डायरेक्टर चंदू मोंडेती हैं, उन्होंने इस फिल्म की कहानी भी लिखी है। वहीं फिल्म का प्रोडक्शन टीजी विश्व प्रसाद और अभिषेक अग्रवाल का है। इस फिल्म में निखिल सिद्धार्थ के साथ अनुपमा परमेश्वरन, श्रीनिवास रेड्डी, विवा हर्षा और आदित्य मेनन मुख्य किरदार में नजर आएँगे। फिल्म की कोरियोग्राफी कार्तिक घट्टामनेनी ने की है और म्यूजिक काला भैरव ने दिया है।

दिल्ली के सीलमपुर में काँवड़ यात्रा पर फेंका गया मांस का टुकड़ा, हिन्दुओं ने किया विरोध प्रदर्शन: वीडियो वायरल

दिल्ली के सीलमपुर में काँवर खंडित होने का मामला सामने आया है। जहाँ काँवर यात्रा पर मांस टुकड़ा फेंक दिया गया है। जिसके बाद काँवड़ियों ने करीब एक घंटे तक सड़क जाम कर आरोपितों पर कार्रवाई की माँग करते रहे। घटना आज मंगलवार (19 जुलाई, 2022) शाम करीब 4 बजे की है। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। वहीं पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।

दरअसल, 13 जुलाई, 2022 को हरिद्वार से गंगा जल लेकर राजस्थान के अलवर स्थित स्थानीय शिव मंदिर निकले काँवड़ियों के दल को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा जब दिल्ली के सीलमपुर इलाके से गुजरते हुए पुल के नीचे काँवड़ पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया। लगभग 7 की पैदल यात्रा कर दिल्ली पहुँचे इन काँवड़ियो की बाकी राज्यों की तरह फूलों से स्वागत की बात कौन कहे बल्कि बिना खंडित हुए इनका काँवड़ निकल जाए यही चिंता की बात है। जबकि इन्हें अभी भी अगले 6 दिनों की पैदल यात्रा कर 25 जुलाई की शाम तक राजस्थान के अलवर पहुँचना है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने उस काँवड़ यात्रा समूह के एक काँवड़िया से बात की। जिसने पूरे मामले में बात करते हुए बताया कि जैसे ही हम सीलमपुर इलाके से काँवड़ लेकर गुजर रहे थे तभी एक साथी काँवड़िए ने जब काँवड़ को एक कंधे से दूसरे कंधे पर बदला तो उसके काँवड़ के साज-सज्जा में अटका मांस का टुकड़ा सड़क पर गिर पड़ा। हालाँकि, किसने और कब फेंका यह वह दावे से नहीं कह सकते लेकिन मुस्लिम बहुल सीलमपुर से पहले सब ठीक था और लोग जगह-जगह स्वागत-सत्कार भी कर रहे थे। लेकिन दिल्ली में मामला कुछ और ही नजर आया।

बता दें कि 7 दिन की मेहनत के बाद दिल्ली पहुँचे काँवड़ के मांस के टुकड़े से खंडित होने के बाद काँवड़ियों ने वहीं सड़क जाम कर केजरीवाल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और योगी-मोदी के व्यवस्था की तारीफ करनी शुरू कर दी। करीब एक घंटे चले हंगामे के बाद, मौके पर पहुँची दिल्ली पुलिस ने उक्त काँवड़िया को हरिद्वार ले जाकर वापस जल भरवाने और सुरक्षित लाकर सीलमपुर में उसी स्थान पर छोड़ने के आश्वासन के बाद बाकी काँवड़िए राजस्थान को निकल गए। लेकिन सवाल तो है ही कि एक भी त्योहार बिना किसी उपद्रव के मुस्लिम बहुल इलाकों में शांति ने नहीं गुजर रहा है अब वो चाहे विसर्जन यात्रा हो, कोई शोभायात्रा या फिर काँवड़यात्रा।

गौरतलब है कि सावन का महीना लगने से पहले ही यानि 14 जुलाई से ही काँवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। यह यात्रा 12 अगस्त तक चलेगी। इतना ही नहीं पुलिस ने काँवड़ियों से तय रास्ते का इस्तेमाल करने की भी अपील की है। पुलिस ने वाहन चालकों और सड़क पर चलने वालों को भी यातायात नियमों का पालन करने को कहा है। फिर भी मांस फेंक देने की ऐसी घटनाएँ मुस्लिम बहुल इलाकों में पुलिस की तैयारियों को और चाक-चौबंद करने की माँग करती हैं।

नूँह DSP हत्याकांड: एनकाउंटर के बाद इकरार गिरफ्तार, पाँव में लगी गोली, बोले गृह मंत्री अनिल विज – एक भी दोषी को नहीं छोड़ेंगे

हरियाणा में पत्थर से भरे डंपर से कुचल कर DSP सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या के मामले में पुलिस ने एनकाउंटर के बाद इकरार नामक आरोपित को गिरफ्तार किया है। इकरार के पाँव में गोली लगी है। ये घटना हरियाणा के नूँह की है, जो इस्लामी कट्टरवाद और रोहिंग्या बस्तियों के लिए पहले से कुख्यात रहा है। अब खनन माफिया ने एक पुलिस अधिकारी को मार डाला। साउथ रेंज रेवाड़ी के ADGP डॉ एम रवि किरण ने बताया कि DSP गुप्त सूचना मिलने के बाद औचक निरीक्षण के लिए गए थे।

उन्होंने बताया कि इसी कारण उनके पास बैकअप फोर्स नहीं रही होगी, या इसके लिए उन्हें समय नहीं मिला होगा। खुद DGP पीके अग्रवाल जाँच के लिए नूँह पहुँचे और आरोपितों पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों संग बैठक की। उन्होंने घटनास्थल पर पहुँच कर वारदात के बारे में भी जानकारी ली। नूँह के कुछ गाँवों में पुलिस ने दोपहर के बाद से ही घेराबंदी कर रखी है। पुलिस ने अपनी 8 टीमों को आरोपितों की धर-पकड़ में लगाया है।

इकरार के साथ मुठभेड़ में कई राउंड गोली चली, लेकिन अंततः पुलिस उसे धर-दबोचने में कामयाब हुई। पैर में गोली लगने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य बदमाशों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिसिया छापेमारी जारी है। मृतक DSP के परिवार को हरियाणा सरकार ने 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलेगी। तावडू के डीएसपी के चालक और सुरक्षाकर्मी इस घटना में किसी तरह बच गए।

अनिल विज ने कहा, “हरियाणा के DGP घटनास्थल पहुँच कर निगरानी रख रहे हैं। एनकाउंटर के बाद एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया है। तलाशी अभियान जारी है। बाकी तुरंत गिरफ्तार किए जाएँगे। हम इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि हमला हमारी पुलिस पर हुआ है और हम किसी को नहीं छोड़ेंगे। हमने व्यवस्था पहले से मजबूत की है। कल ही 400-425 असामाजिक तत्वों को दबोचा गया। हम समय-समय पर ऐसा अभियान चलाते हैं और मैं खुद इसकी निगरानी करता हूँ।”

याद दिला दें कि मुस्लिम बहुल नूँह कोरोना वैक्सीनेशन में भी फिसड्डी रहा था। यहाँ साक्षरता दर वैसे भी कम है और यहाँ के मुस्लिम कह रहे थे कि टीका लगवाने के बाद उनके बच्चे नहीं होंगे। इससे पहले यहाँ मुस्लिमों के अपराध की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

नूपुर शर्मा की हत्या के लिए Pak से आया रिजवान अशरफ, साथ में 11 इंच का चाकू, नक्शे और मजहबी किताबें: अजमेर शरीफ जाने वाला था

नूपुर शर्मा की हत्या के लिए पाकिस्तान से आए रिजवान अशरफ को राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से गिरफ्तार किया गया है। BSF ने उसे घुसपैठ करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। वो नूपुर शर्मा को जान से मार डालने की मंशा से आया था। उनके पास से कई संदिग्ध वस्तुएँ भी बरामद हुई हैं। IB और RAW जैसी ख़ुफ़िया एजेंसियों की टीमें भी उससे पूछताछ में लगी हुई हैं। मिलिट्री एजेंसी की टीम भी उससे पूछताछ कर रही है।

ये घटना शनिवार (16 जुलाई, 2022) की है, जब रात के 11 बजे श्रीगंगानगर से सटे हिंदुमलकोट बॉर्डर पर फेंसिंग के आसपास एक संदिग्ध व्यक्ति घूम रहा था। पेट्रोलिंग टीम को उस पर संदेह हुआ, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई। उसने ठीक से सवालों के जवाब नहीं दिए। तलाशी लेने पर उसके पास से दो चाकू भी बरामद हुए। इसमें से एक चाकू 11 इंच का और काफी धारदार है। उसके पास से मजहबी किताबें, नक़्शे, कपड़े और खाने-पीने के सामान भी मिले हैं।

पूछताछ में रिजवान अशरफ ने बताया है कि वो उत्तरी पाकिस्तान स्थित मंडी बहाउद्दीन शहर का रहने वाला है। ये शहर पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि उसने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए बॉर्डर क्रॉस किया था, आधिकारिक रूप से ऐसी कोई पुष्टि हो गई है कि वो इसीलिए ही आया था। पुलिस ने उसे स्थानीय अदालत में पेश किया, जिसके बाद उसे 8 दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ ने एक वरिष्ठ BSF अधिकारी के हवाले से बताया कि उसने पूछताछ में नूपुर शर्मा की हत्या के लिए बॉर्डर क्रॉस करने की बात कबूल की है। रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि इससे पहले वो अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जाने वाला था। पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के बयान से वो नाराज़ है। बता दें कि राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल और महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की जिहादियों ने नूपुर शर्मा के समर्थन का आरोप लगा कर हत्या कर दी है।

CM एकनाथ शिंदे से मिले उद्धव गुट के 12 सांसद: महाराष्ट्र पर 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, ठाकरे ने संगठन में की 100 नई नियुक्तियाँ

महाराष्ट्र के सियासी संकट पर बुधवार (20 जुलाई 2022) को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। इस दौरान चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और हेमा कोहली की बेंच उद्धव ठाकरे की अगुआई वाले खेमे और एकनाथ शिंदे खेमे की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इससे एक दिन पहले यानी आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने दिल्ली में शिवसेना के 12 सांसदों से मुलाकात की।

शिवसेना में विभाजन के बीच रिपब्लिक टीवी ने उन 12 लोकसभा सांसदों की सूची जारी की है, जो एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इसमें भावना गवली और श्रीकांत शिंदे शामिल हैं, जिन्होंने शिवसेना में बगावत की शुरुआत से ही उद्धव ठाकरे गुट से दूरी बना ली थी। अभी तक, 6 लोकसभा सांसद- विनायक राउत, अरविंद सावंत, गजानन किरीटकर, संजय जाधव, ओम राणे निंबालकर, और राजन विचारे ठाकरे खेमे में हैं, जबकि दादरा और नगर हवेली की सांसद कलाबेन डेलकर ने अभी तक इसको लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

शिवसेना के 12 लोकसभा सांसदों की सूची

एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल होने वाले शिवसेना के 12 लोकसभा सांसदों की सूची में सबसे पहले श्रीकांत शिंदे का नाम है। श्रीकांत शिंदे महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे और 2014 से कल्याण लोकसभा सीट से सांसद हैं। धैर्यशील माने पहली बार हाटकानागले से सांसद चुने गए हैं। सदाशिव लोखंडे 2014 से शिरडी के सांसद और 3 बार विधायक रह चुके हैं। हेमंत गोडसे 2014 से नासिक के सांसद हैं। हेमंत पाटिल पहली बार हिंगोली से चुने गए सांसद और नांदेड़ दक्षिण के पूर्व विधायक हैं।

राजेंद्र गावित 2018 से पालघर के सांसद हैं। संजय मंडलिक पहली बार कोल्हापुर से सांसद बने हैं। श्रीरंग बार्ने 2014 से मावल के सांसद हैं। राहुल शेवाले 2014 से मुंबई साउथ सेंट्रल सांसद और पूर्व बीएमसी स्थायी समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रतापराव गणपतराव जाधव 2009 से बुलढाणा के सांसद हैं। कृपाल तुमाने 2014 से रामटेक के सांसद हैं। वहीं, भावना गवली 1999 से यवतमाल-वाशिम की सांसद हैं।

गौरतलब है कि लगातार बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार (18 जुलाई, 2022) को 100 नई नियुक्तियाँ की। उद्धव ने मुंबई, पालघर, यवतमाल, अमरावती समेत कई अन्य जिलों में 100 से ज्यादा पदाधिकारी नियुक्त किए हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना में इसकी घोषणा की गई है।

लुलु मॉल में मुस्लिमों ने ही पढ़ी थी नमाज, गलत नाम और दिशा बता कॉन्ग्रेसी-लिबरल कर रहे थे हिंदुओं को बदनाम: UP पुलिस का खुलासा

लखनऊ के लुलु मॉल में नमाज पढ़ने और उसका वीडियो बनाने वाले 9 नमाजियों में से 4 को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसकी जानकारी मंगलवार (19 जुलाई, 2022) को लखनऊ के पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने दी। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर ने नमाज अदा करने वाले आरोपितों के बारें में जानकारी देते हुए बताया, “चारों गिरफ्तार किए गए अभियुक्त साथ में ही लुलु मॉल के अंदर नमाज अदा की थी। CCTV से आरोपितों की पहचान की गई थी। रेहान, लुकमान, नोमान लखनऊ के इंदिरानगर थाने के खुर्रमनगर के अबरार में रहते हैं। अतिफ खान लखीमपुर के मोहम्मदी का रहने वाला है। लुकमान और नोमान दोनों सगे भाई हैं। जो कि सीतापुर के लहरपुर थानाक्षेत्र के मंगोलपुर के रहने वाले हैं। ये बाइक से मॉल में नमाज पढ़ने के लिए पहुँचे थे।”

पुलिस कमिश्नर ध्रुव कांत ठाकुर ने आगे बताया कि गिरफ्तार किए गए चारों अभियुक्तों के खिलाफ धारा 153 A (1) 341, 505 295 A के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक जो जानकारी सामने आई है उसमें बताया जा रहा है कि चारो आरोपितों ने पुलिस के सामने कबूल किया कि 12 जुलाई, 2022 को लुलु माल परिसर में बिना अनुमति के नमाज पढ़ी थी और उसका वीडियो भी बनाया था और सोशल मीडिया पर वायरल किया था। बता दें कि इन चारों आरोपितों के साथ वीडियो में कुल 9 लोग नमाज पढ़ने गए थे। जिनका वीडियो वायरल हुआ था। पुलिस पाँच अन्य नमाजियों की तलाश कर रही है।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लुलु मॉल के आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद घटनाक्रम पर बोलते हुए कहा, “शहर के एक नए मॉल को राजनीति का अड्डा बना लिया गया है। मॉल के नाम पर प्रदर्शन हो रहे हैं और बेमतलब की बयानबाजी चल रही है। कुछ लोग जनता के आवागमन को रोकने के लिए अनावश्यक रूप से टिप्पणी और प्रदर्शन कर रहे हैं। लखनऊ प्रशासन को इस पर मामले पर पूरी गंभीरता से लेकर ऐसे लोगों से सख्ती से निपटना चाहिए।”

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह 12 जुलाई को, लुलु मॉल में नमाज पढ़ने का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद से शहर में नया खुला ये शॉपिंग मॉल विवादों आ गया। तब से वामपंथी-लिबरल गिरोह इसे रोज नया मोड़ देते हुए कई मनगढंत दावे कर रहा था। यहाँ तक कि नमाजियों को भी हिन्दू साबित करने की न सिर्फ कोशिश हुई बल्कि खूब प्रोपेगेंडा फैलाया गया।

हालाँकि, लुलु मॉल में नमाज की प्रतिक्रिया में कुछ हिंदूवादी संगठनों ने भी हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, गायत्री मन्त्र पढ़ने की घोषणा की थी। जिसको देखते हुए मॉल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। साथ ही किसी भी तरह के उपद्रव से निपटने के लिए CM योगी ने सख्त आदेश दिए थे। जिसके बाद लुलु मॉल की सुरक्षा में पीएसी तैनात कर दी गई थी और अराजकतत्वों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

इन सब विवादों के बीच अयोध्या में तपस्वी छावनी के महंत परमहंसाचार्य भी मंगलवार की दोपहर को लुलु मॉल पहुँचे। हालाँकि, उनकी भी पुलिस से थोड़ी कहा-सुनी भी हुई लेकिन प्रशासन ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी और पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई है।

वहीं इस मामले पर बोलते हुए महंत परमहंसाचार्य ने कहा, “मैं मॉल की शुद्धिकरण के लिए आया था। यहाँ नमाज पढ़ी गई, इसलिए मॉल अशुद्ध हो गया था। लुलु मॉल का नाम बदलकर भगवा भवन करना चाहिए। मुझे मॉल में जाने से रोका गया। मॉल में 80 फीसदी मुस्लिम कर्मचारी हैं।”

पहली बार सेना भर्ती में पूछी जा रही है जाति? झूठ फैलाने वालों में AAP नेता संजय सिंह भी, लोगों ने पूछा – कभी कोई भर्ती फॉर्म भरा भी है?

नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने आज (19 जुलाई 2022) एक बार फिर सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया है। उन्होंने मोदी सरकार को घेरने के लिए अपने ट्वीट में दावा किया कि मोदी सरकार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को योग्य नहीं मान रही, इसलिए पहली बार सेना में भर्ती के लिए जाति प्रमाण पत्र माँगा जा रहा है।

संजय सिंह ने अभ्यार्थियों की सुविधा के लिए जारी होने वाले जरूरी डॉक्यूमेंट की लिस्ट का एक पेज शेयर कर उसे हाई लाइट किया। इसे ऐसे दिखाया गया कि अब सेना भर्ती के लिए जाति और धर्म के प्रमाण पत्र कितने ज्यादा जरूरी हैं। अपने ट्वीट में संजय सिंह लिखते हैं, 

“मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है। क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के काबिल नहीं मानते? भारत के इतिहास में पहली बार ‘सेना भर्ती’ में जाति पूछी जा रही है। मोदी जी आपको अग्निवीर बनाना है या जातिवीर।”

संजय सिंह के इस ट्वीट को देखने के बाद पीबीआई फैक्ट चेक ने इस दावे को झूठा बताया है। फैक्ट चेक में लिखा है कि जैसा कि दावा हो रहा है कि भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है… ये दावा बिलकुल गलत है। सेना भर्ती के लिए जाति प्रमाण पत्र दिखाने का प्रावधान पहले से ही है। इसमें विशेष रूप से अग्निपथ योजना के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस फैक्टचेक के अलावा सोशल मीडिया यूजर्स भी संजय सिंह को समझा रहे हैं कि ये जाति प्रमाण दिखाने का नियम आज से नहीं बल्कि काफी समय से है। एक यूजर उन्हें कहता है, “लगता है आपने कभी किसी भर्ती का कोई फॉर्म नहीं भरा। वरना इस तरह की बातें नहीं करते।

बता दें कि सेना में जाति, धर्म देखकर भर्ती करने का मुद्दा पहली बार नहीं उठा। साल 2013 में भी सुप्रीम कोर्ट में आर्मी ये साफ कर चुकी है कि वो जाति, धर्म और क्षेत्र देखकर लोगों की भर्ती नहीं करते हैं। लेकिन एक रेजिमेंट में एक क्षेत्र से आने वाले लोगों के समूह को प्रशासनिक सेवा और सुविधाएँ देने के लिए ऐसा किया जाता है। जाति-धर्म की चयन प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होती।

लखनऊ से पकड़े गए नुरुद्दीन जंगी के साथ बिहार पुलिस की सत्तू पार्टी: पटना कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था, PFI के ‘मिशन 2047’ से जुड़े हैं तार

बिहार पुलिस का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कुछ जवान नुरुद्दीन जंगी के साथ सत्तू पीते नजर आ रहे हैं। जंगी कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सक्रिय सदस्य है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जंगी को पेशी के लिए पटना कोर्ट लाया गया था। इस दौरान उसे पुलिसकर्मियों के साथ आराम से बात करते और सत्तू पीते देखा गया। वीडियो सोमवार (18 जुलाई 2022) का बताया जा रहा।

फुलवारी शरीफ से दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद जिन 26 लोगों पर नामजद एफआईआर हुई थी, उनमें जंगी भी है। उसे लखनऊ से पकड़ा गया था। इन आतंकियों की गिरफ्तारी से 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की साजिशों का खुलासा हुआ था। पुलिस ने बताया था कि पीएफआई इसके लिए युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के नाम पर हथियार चलाने का प्रशिक्षण दे रहा था।

जंगी को 15 जुलाई को लखनऊ के मवैया मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे बिहार लाया गया। वायरल वीडियो में जंगी पूरी तरह बेफिक्र दिख रहा। उसके हाथों में हथकड़ी नहीं थी। पत्रकार प्रकाश कुमार ने ट्वीट कर कहा है, “कहा जा रहा है कि पुलिसकर्मियों को सत्तू जंगी ने ही अपने पैसे से पिलाई थी।” पेशी के बाद सिविल कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

दरभंगा के डीएसपी कृष्णानंद के मुताबिक, नुरुद्दीन बिहार के दरभंगा के उर्दू बाजार के शेर मोहम्मद गली का रहने वाला है, वह लंबे समय से पीएफआई से जुड़ा हुआ है। 11 जुलाई को पटना के फुलवारी शरीफ में दो संदिग्ध आतंकवादियों के पकड़े जाने और पटना पुलिस के द्वारा इस मामले में 26 लोगों पर नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने के बाद वह बिहार छोड़ फरार हो गया था।

गौरतलब है कि फुलवारी शरीफ के नया टोला से 11 जुलाई, 2022 को पटना पुलिस ने अतहर परवेज और जलालुद्दीन को और 14 जुलाई को अरमान मल्लिक को पकड़ा था। वे फुलवारी शरीफ में शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में आतंकी प्रशिक्षण देने और भारत को 2047 तक इस्लामिक राष्ट्र (गजवा-ए-हिन्द) बनाने की साजिश से जुड़े हैं। इसके बाद बिहार पुलिस की जाँच के दौरान इनके पूरे आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हो गया।