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20 साल से कम की लड़कियाँ.. ‘गर्लफ्रेंड एक्सपीरियंस’ वाली वेबसाइट: अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे ने 5 महीने में सेक्स पर खर्चे ₹24 लाख

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन का बेटा हंटर बायडेन (Hunter Biden) अपने स्कैंडल के कारण बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ उसके खिलाफ वेश्यावृत्ति (Prostitution) का केस दर्ज कर सकती हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दस्तावेज सामने आए हैं, जिससे पता चला है कि हंटर बायडेन ने पाँच महीने में एस्कॉर्ट्स पर 30 हजार डॉलर (23,85,465 रुपए) यानी लगभग 24 लाख रुपए खर्च किए हैं।

यह मामला उस वक्त सामने आया, जब हंटर ने एक यूक्रेनी महिला को चेक काट कर दिया था। बैंकों ने इस लेन-देन को संदिग्ध मानते हुए रेड फ्लैग कर दिया था। जेपी मॉर्गन चेज ने इसको लेकर संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट दायर की थी, जिसमें फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क स्थित एकातेरिना मोरोवा को हंटर की कंपनी से हजारों डॉलर मिले थे, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई। इसके अलावा कथित तौर पर उसे उन महिलाओं से भी पैसे मिले, जिन्हें सेक्स के लिए हंटर ने बुलाया था।

हंटर के आईफोन से ऐसे टेक्स्ट बरामद हुए हैं, जिनसे पता चलता है कि उसने मोरेवा को अपने हाथों से एक चेक काट कर दिया था। इस चेक को राष्ट्रपति के बेटे ने एक मेडिकल सर्विस के लिए बताया था। हालाँकि, ये मामला तब और भी बिगड़ गया, क्योंकि मोरेवा को कुछ पेमेंट तब हुई, जब हंटर के पिता राष्ट्रपति जो बायडन ने कुछ घंटे पहले ही अपने बेटे को पैसे भेजे थे। जानकारी के मुताबिक, मोरोवा ‘गर्लफ्रेंड एक्सपीरियंस’ के लिए एक वेबसाइट चलाती है, जिसमें 20 साल या उससे कम उम्र की लड़कियाँ सेक्स के लिए उपलब्ध होती हैं।

ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आई हैं, जिसमें हंटर लड़कियों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जा रहा है, जो कि एक संभावित फेडरल अपराध है। नवंबर 2018 से मार्च 2019 के बीच में हंटर ने लगभग 30 हजार डॉलर रुपए एस्कॉर्ट पर उड़ाए थे।

गौरतलब है कि हंटर बायडेन के उनकी सौतेली माँ के साथ भी रिश्ते अच्छे नहीं हैं। उनके और उनकी सौतेली माँ जिल बायडेन को लेकर कुछ मैसेज्स भी वायरल हुए हैं। इसमें उन्होंने अपनी सौतेली माँ के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। उन्होंने अपनी सौतेली माँ को ‘स्वार्थी और मूर्ख फकिंग मोरोन’ और ‘बदला लेने वाली’ बताया था।

‘लिबरल गिरोह’ का शेर, हाथ जोड़ कहता है – लोल सलाम: अहिंसा का प्रतीक, महात्मा गाँधी की सवारी… शांत और सेक्युलर भी!

एक शिक्षक ने एक बार एक छात्र को शेर पर निबंध लिखने के लिए कहा। बेचारे छात्र ने वही लिखा, जो उसने किताबों में पढ़ा था और शेर को देखने-सुनने वालों से जाना था। उसने कुछ ऐसे लिखा, “शेर एक मांसाहारी चौपाया जानवर है, जिसे जंगल का राजा भी कहा जाता है। सिंह शिकार में निपुण होता है। इसकी टाँगें शक्तिशाली होती है, जबड़े मजबूत होते हैं और दाँत ऐसे होते हैं कि किसी भी शिकार को ये खा सकते हैं। इसके गर्दन पर बाल (अयाल) इसे अलग रूप देते हैं।”

शिक्षक लिबरल गिरोह का था। वो भड़क गया। उसने छात्र को दो तमाचे मारे और कुछ मन ही मन बुदबुदाने लगा। उसने पूछा कि तुमने ऐसा शेर कहाँ देख लिया, ऐसा कोई शेर नहीं होता। तो फिर सिंह कैसा होता है? – छात्र ने सवाल पूछा। शिक्षक ने जवाब दिया, “अरे, शेर तो एक अहिंसक जानवर है। वो अहिंसा का प्रतीक है। महात्मा गाँधी का आधिकारिक वाहन वही हुआ करता था। सिंह के मुँह हमेशा बंद रहते हैं, वो भला क्या शिकार करेगा?”

शिक्षक ने आगे समझाया कि सिंह जो है, वो आक्रामक नहीं होता। अब भला शेर भी तो ‘Cat’ ही हैं अर्थात बिल्ली प्रजाति का। अतः, शिक्षक ने घोषणा कर दी क्लास में कि शेर एकदम बिल्ली की तरह होता है। ये कुत्ते की तरह ‘भौं-भौं’ करता है और बिल्लियों की तरह ही लोगों के घरों से रोटी-दूध चुरा कर खाता है। उसने ये भी बताया कि शेर तो चूहे की तरह छोटा होता है और किसी भी जीव को देखते ही डर के मारे भाग जाता है।

उक्त शिक्षक की बात जिन छात्रों ने मान ली, वो उसे क्रांतिकारी समझ कर उसके अनुयायी बन गए। इन अनुयायियों को कालांतर में ‘लिबरल गिरोह’ के नाम से जाना गया। इनमें से अधिकतर पत्रकारिता और नेतागिरी में सक्रिय हैं। अब जब नए संसद भवन के शीर्ष पर 9500 किलोग्राम का और 6.5 मीटर ऊँचे कांस्य के अशोक स्तंभ की प्रतिमा का अनावरण हुआ है, ‘लिबरल गिरोह’ हल्ला मचा रहा है कि शेर को बिल्ली की तरह क्यों नहीं दिखाया, शेर को शेर क्यों दिखा दिया?

अक्षय कुमार की एक फिल्म आई थी अक्टूबर 2015 में – Singh Is Bling (सिंह इज़ ब्लिंग), जिसका एक दृश्य यहाँ जिक्र करने लायक है। इसमें अक्षय कुमार का किरदार ‘रफ़्तार सिंह’ एक चिड़ियाघर में नौकरी कर रहा होता है, तभी साथी दोस्त उसे शेर की रखवाली में छोड़ कर अपनी बेटी का स्कूल में एडमिशन कराने चला जाता है। मेयर साहब आने वाले होते है, लेकिन शेर किसी तरह भाग जाता है। इसके बाद रफ़्तार एक कुत्ते को अयाल लगा कर उसे शेर बना देता है।

भरे कार्यक्रम में बेइज्जती तब हो जाती है, जब चिड़ियाघर का संचालक शेर को दहाड़वाने के लिए रफ़्तार से कहता है और अंत में वो शेर बना ‘कुत्ता’ भौंकने लगता है। नीचे आप भी इस दृश्य का आनंद ले सकते हैं। शायद यही है ‘लिबरल गिरोह’ वाला शेर। या तो इस गिरोह को कभी असली शेर से भेंट हुई ही नहीं, या फिर ये शेर से इतना डरते हैं कि उसकी मूर्ति तक कहीं नहीं देखना चाहते। शेर की मूर्ति से इतनी दिक्कत है, सोचिए अगर असली शेर इनके सामने दहाड़ मार दे तब?

शेर आक्रामक थोड़े होता है? नए संसद भवन पर तो गीदड़ की मूर्ति लगाई जानी चाहिए थी। तब शायद लिबरल गिरोह खुश होता। शेर तो बड़ा ही शांत होता है। एक प्रतियोगिता आयोजित करा के भूखे शेर के पिंजरे में साथ बंद होकर कोई लिबरल ऐसा साबित करना चाहेगा क्या? ‘अहिंसा के प्रतीक’ शेर के बाद आश्चर्य नहीं कि ये ‘भाईचारे का प्रतीक’ डायनासोर को घोषित कर दें। इनकी नजर में छिपकली की तरह ही होता हो कहीं डायनासोर?

ठीक वैसे ही, जैसे लिबरल गिरोह का शेर शांतचित्त, सद्भाव का प्रचार करने वाला और शांति-समानता का सन्देश देने के लिए लाल झंडा उठा कर घूमने वाला होता है। उसके बाल भी सलीके से जावेद-हबीब से कट कराए हुए और कंघी किए हुए होते हैं, किसी नागा साधु की तरह नहीं होते। ये सेक्युलर होता है, 5 वक्त की नमाज पढ़ता है। किसी के मिलते ही हाथ जोड़ कर ‘लोल सलाम’ कहता है। इस शेर के दाँत और पंजे नुकीले नहीं होते, मुलायम और गद्देदार होते हैं।

मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ यूपी पुलिस की स्पेशल टीम करेगी जाँच, योगी सरकार ने गठित की SIT: कई जिलों में दर्ज है FIR

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) के मामलों की जाँच के लिए योगी सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया है। अब यूपी पुलिस की स्पेशल टीमें जुबैर के खिलाफ दर्ज अलग-अलग मामलों की जाँच करेंगी। मोहम्मद जुबैर के खिलाफ यूपी के सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हाथरस और मुजफ्फरनगर में मामले दर्ज हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज़ुबैर के मामलों की जाँच आईजी प्रीतिंदर सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी करेगी। डीआईजी अमित कुमार वर्मा भी जाँच टीम में शामिल हैं। पुलिस का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सीतापुर जिले में हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में जुबैर को राहत देते हुए अंतरिम जमानत की अवधि अगले आदेश तक बढ़ा दी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की राहत केवल सीतापुर मामले तक ही सीमित है। दिल्ली, लखीमपुर, हाथरस, मुजफ्फरनगर में दर्ज मामलों में जुबैर के खिलाफ कार्रवाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। जिससे अभी भी मोहम्मद जुबैर को जेल में ही रहना होगा।

ज़ुबैर के खिलाफ हाथरस में दर्ज FIR

बता दें कि लखीमपुर खीरी की अदालत ने पिछले साल दर्ज एक मामले में मोहम्मद जुबैर को तलब किया था। लखीमपुर खीरी पुलिस ने 25 नवम्बर 2021 को एक स्थानीय पत्रकार की शिकायत पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए यह मामला दर्ज किया था। इसी मामले में सोमवार (11 जुलाई, 2022) को मोहम्मद जुबैर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। इसी मामले में अदालत ने ज़ुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने 27 जून, 2022 को जुबैर को एक ट्वीट के जरिए हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करना) और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम की धारा 35 के नए प्रावधान लागू किए हैं।

वहीं सीतापुर मामले में, पुलिस ने जुबैर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। यूपी पुलिस ने मई में जुबैर द्वारा किए गए एक ट्वीट का हवाला दिया जिसमें उन्होंने यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘नफरत करने वाले’ कहा था। ज़ुबैर ने हिंदू धार्मिक नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया था।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर के खिलाफ मामला 2018 में किए एक ‘आपत्तिजनक ट्वीट’ से जुड़ा है। ज़ुबैर ने उस पोस्ट में भगवान हनुमान को आपत्तिजनक तरीके से प्रदर्शित किया था।

अलका लाम्बा की PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी, बता दिया ‘नालायक’: मणिशंकर अय्यर की ‘जोकर, नीच और चायवाला’ की परिपाटी को बढ़ा रहीं आगे

कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा (Congress Leader Alka Lamba) आजकल अपने नेता मणिशंकर अय्यर (Mani Shankar Aiyar) से प्रेरणा ले रही हैं। अय्यर की तरह उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है।

लाम्बा ने स्कूली बच्चों की मार्क्सशीट की तरह ही एक मीम बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिपोर्ट कार्ड ट्वीट किया है। मीम रिपोर्ट कार्ड के साथ लाम्बा ने ट्वीट कर लिखा, “नालायक को कितनी बार कहा था – जुमले-बाजी छोड़ थोड़ी मेहनत कर ले – पर यह किसी एक सुने तब ना – फेल तो होना ही था।”

लाम्बा ने ट्वीट में जिस भाषा का उपयोग किया है, वह आमतौर पर एक माँ अपने बच्चों को उलाहना के तौर पर देती है। लेकिन, लाम्बा ने देश के प्रधानमंत्री के लिए ये शब्द इस्तेमाल कर न सिर्फ अपने व्यक्तित्व के काले पक्ष का प्रदर्शन किया है, बल्कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा का भी ख्याल नहीं रखा है। यह सार्वजनिक जीवन के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।

अलका लाम्बा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लाम्बा यहीं नहीं रूकीं। उन्होंने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए और भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा, “उपर से अब ये भी 🙁 – इसे तो झोला देकर घर से निकाल ही देना चाहिए।”

इसके पहले भी लाम्बा कई बार आपत्तिजनक बयान और ट्वीट कर लोगों के निशाने पर आ चुकी हैं। कोरोना के दौरान उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक बयान दिया था। इसको लेकर उन पर FIR भी दर्ज की गई थी।

कॉन्ग्रेस में अलका लाम्बा अकेली नहीं हैं, जो भाषा की मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को लाँघ जाती हैं। उनके वरिष्ठ मणिशंकर अय्यर ने जब-जब मुँह खोला है, उससे भाषाई दुर्गंध और नफरत के भभूके ही आएँ हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच’ बोल चुके हैं।

दिसंबर 2013 में मणिशंकर अय्यर ने नरेंद्र मोदी के लिए ‘जोकर’ शब्द प्रयोग करते हुए कहा था, ”चार-पाँच भाषण देकर उन्होंने बता दिया है कि कितने गंदे-गंदे शब्द उनके मुँह में हैं। उन्हें न इतिहास पता है, न अर्थशास्त्र और न ही संविधान की जानकारी है। जो मुँह में आता है, बस बोलते रहते हैं।”

साल 2014 लोकसभा चुनाव के उन्होंने कहा था, “मुझे लगता है कि ये बहुत नीच किस्म का आदमी है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है। ऐसे मौके पर इस किस्म की गंदी राजनीति करने की क्या आवश्यकता है?” जब उनके इस बयान पर देश भर में बवाल हुआ तो कॉन्ग्रेस ने उनकी प्राथमिक सदस्यता खत्‍म कर दी थी।

उन्होंने उस वक्त यह भी कहा था, “एक चाय बेचने वाला (नरेंद्र मोदी) कभी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। अगर वह (पीएम मोदी) चाहे तो कॉन्ग्रेस कार्यालय में आकर चाय बेच सकते हैं।” इस बयान पर भी खूब बवाल हुआ था।

इतना ही नहीं, अय्यर ने साल 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को नालायक कहा था। हालाँकि, उस वक्त उन्होंने माफी माँग ली था और तर्क दिया था कि उन्हें हिंदी के शब्दों की उतनी समझ नहीं है। बता दें कि अय्यर भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी रह चुके हैं।

कर्नाटक में जिस हर्षा को इस्लामी कट्टरपंथियों ने चाकुओं से गोदा था, अब उनके दोस्त पर हमला: जुनैद-सोहिम सहित 5 थे हमलावर

कर्नाटक के शिवमोग्गा (Shivamogga, Karnataka) में बजरंग दल से जुड़े हर्षा की हत्या के बाद हेट क्राइम की एक और घटना सामने आई है। जिले के राजीव गाँधी कॉलोनी के पास मुस्लिम समुदाय के कुछ गुंडों ने भाजपा के वार्ड अध्यक्ष कांताराजू (BJP ward President Kantharaju) पर हमला कर दिया। कांताराजू मृतक हर्षा के मित्र थे।

बजरंग दल से पूर्व कार्यकर्ता कांताराजू अब भाजपा से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब वह नित्य क्रिया के लिए घर से बाहर आए तो उन पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। उनका कहना है कि बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के विरोध में वे बेहद सक्रिय हैं। इसी लिए उन पर हमला किया गया है। इस हमले में उनके हाथों में चोट आई है।

कांताराजू ने इस मामले में कोटे थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, हमले में पाँच आरोपित शामिल थे, जिनमें दो की पहचान कर ली गई है। इनके नाम हैं- जुनैद और सोहिम। पुलिस का कहना है कि आगे की जाँच चल रही है।

हर्षा की हत्या के पाँच महीने बाद उनके दोस्त कांताराजू पर हमला किया गया है। बजरंग दल के 26 वर्षीय कार्यकर्ता हर्षा की 20 फरवरी को चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने हाल में अपने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी। यही हत्या की वजह बनी।

इसके बाद राज्य भर में भारी असंतोष पनप गया था। हत्या के विरोध में राज्य भर में लोग सड़कों पर उतर आए थे। हर्षा के इलाके सेगेहट्टी में इकट्ठा हुए बजरंग दल के कार्यर्ताओं के जुलूस पर पथराव, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्तियों में आगजनी की गई थी। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जिले भर में धारा 144 लागू कर दी। 

इस मामले में 10 कट्टरपंथी मुस्लिमो शामिल हैं। इनमें से कुछ के नाम हैं- रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) को गिरफ्तार किया गया। शिवमोगा पुलिस ने बताया कि आरोपित कार में आए और घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने हर्षा का पीछा किया, फिर उसे मारा।

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित के ऊपर साल 2016-17 में मजहबी भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। हर्षा की हत्या करने में रियाज, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ का हाथ था जबकि इसकी साजिश रचने में नदीम और अफान शामिल थे। हर्षा को मारने के लिए पहले से ही फरमान जारी हो गया था।

इस हत्या पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा था, “हर्षा, जिसे हर्षा हिंदू के नाम से भी जाना जाता था। वो एक कार्यकर्ता था। वो हर तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। उसने हाल ही में हिंदुओं के कई अहम मामलों को उठाया था, जिससे कई लोग काफी चिढ़े हुए थे। कई स्थानीय लोग उसके खिलाफ थे। ये हत्या बहुत ही भयानक थी। ये हत्या से बढ़कर है। ये हार्डकोर दुश्मनी है, जिसे एक छोटे से लड़के पर दिखाया गया है। उसकी हत्या पीछे का सबसे बड़ा कारण यह था कि वो एक हिंदू एक्टिविस्ट था और बहुत ही मुखर तरीके से अपनी आवाज को उठाता था।”

वहीं, 30 जून 2022 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शिवमोगा जिले में 13 स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। जिन लोगों के घरों में तलाशी ली गई, वो सभी हर्षा की हत्या के मामले में संदिग्ध हैं। इसको लेकर एक अधिकारी ने कहा था कि आरोपित और संदिग्धों के घरों से तलाशी के दौरान विभिन्न डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, हार्ड डिस्क और अन्य आपत्तिजनक सामग्री और दस्तावेज शामिल हैं।

बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की मौत के मामले में कट्टरपंथी एंगल सामने आया था। कर्नाटक पुलिस ने सभी 10 आरोपितों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धाराएँ लगा दी थी।

मुसलमान कर रहे ज्यादा गर्भनिरोधक इस्तेमाल, बच्चे पैदा करने का ताल्लुक अल्लाह से: बात जनसंख्या नियंत्रण की, बातें मजहबी कर रहे सांसद

विवादित छवि वाले सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क अपने बेतुके बयान के कारण फिर से विवादों में हैं। इस बार उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने पर कहा, “औलाद पैदा करने का ताल्लुक इंसान से नहीं बल्कि अल्लाह ताला से है। अल्लाह जो बच्चा पैदा करता है, उसका रिज़क यानी की आगे का इंतजाम उसके साथ भेजता है।” उन्होंने योगी सरकार को नसीहत देते हुए कहा, “जनसंख्या कानून लाने के बजाए तालीम पर जोर देना चाहिए और हर छोटे बड़े इंसान के लिए सरकार को पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।”

यही नहीं शफीकुर्रहमान (Shafiqur Rahman Burke) ने आगे कहा हर किसी के लिए इसका बंदोबस्त करे तो मैं समझता हूँ कि तालीम उसे मिल जाएगी और जनसंख्या का मसला खुद-ब-खुद हल हो जाएगा। भाजपा राजनैतिक फायदा उठाने के लिए जनसंख्या का मुद्दा उछाल रही है। सपा सांसद ने यह भी कहा कि देश भर में बेरोजगारी और गुरबत छाई हुई है और 2024 का लोकसभा चुनाव सिर पर है। इसलिए वोट लेने के लिए भाजपा लोगों के नजरिए को बदलना चाहती है।

वहीं जनसंख्या को लेकर CM योगी के बयान पर एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या मुसलमान भारत के मूल निवासी नहीं हैं? यदि हम हकीकत में देखें तो मूल निवासी केवल आदिवासी और द्रविड़ लोग हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी कानून के उत्तर प्रदेश में 2026 से 2030 तक वांछित प्रजनन दर हासिल की जाएगी।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, ओवैसी ने कहा, “उनके अपने ही स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश में किसी कानून की जरूरत नहीं है। ज्यादातर गर्भनिरोधक का इस्तेमाल मुसलमान ही कर रहे हैं। 2016 में कुल प्रजनन दर 2.6 थी जो अब 2.3 है। देश का जनसांख्यिकीय लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) सभी देशों से सबसे अच्छा है।”

गौरतलब है कि सोमवार (11 जुलाई, 2022) को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर की थी। सीएम योगी आदित्यनाथ कहा था, “ऐसा न हो कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने की स्पीड ज्यादा हो और जो मूल निवासी हों, उनकी आबादी को जागरूकता के प्रयासों से नियंत्रित कर दिया जाए।”

सीएम योगी ने यह भी कहा था, “जिन देशों की जनसंख्या ज्यादा होती है। वहाँ असंतुलन चिंता का विषय है, क्योंकि रिलीजियस डेमोग्राफी पर उल्टा असर पड़ता है। एक समय के बाद वहाँ अव्यवस्था और अराजकता जन्म लेने लगती है।”

उन्होंने कहा, “मानव को 100 करोड़ तक होने में लाखों साल लगे, लेकिन 100 से 500 करोड़ होने में 183-185 साल ही लगे। इस साल के अंत तक विश्व की आबादी 800 करोड़ होने की संभावना है।”

शुद्धिकरण कर हिंदू धर्म में लौटा सौरभ, बहकावे में बन गया था सुहैल: रिपोर्ट्स में दावा- इस्लाम कबूलते ही अवसाद ने घेरा, कई बार सुसाइड की कोशिश भी

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक व्यक्ति ने विधि विधान से पूजा पाठ करके हिंदू धर्म मे घर वापसी की है। व्यक्ति का कहना है कि 11 साल पहले उन्हें बहका कर इस्लाम मजहब कबूल करवाया गया था। हालाँकि अब वह दोबारा अपने धर्म में वापस आ रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने बरेली जिला प्रशासन को घर वापसी के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया।

घटना अमरोहा के नई बस्ती नौगवा सादात की है। वहाँ युवक ने छोटी वमनपुरी के एक आश्रम में पंडित केके संख्यधर से अपना शुद्धिकरण करवाया है। जानकारी के मुताबिक सुहैल (मुस्लिम बनने के बाद रखा गया नाम) नाम के व्यक्ति ने प्रशासन को घर वापसी का आवेदन देते हुए बताया कि वह जन्म से हिंदू थे। उनका नाम सौरभ रस्तोगी था। लेकिन बहकावे में आकर उन्होंने कुछ साल पहले अपना धर्म छोड़ दिया और मुस्लिम बन गए। उनके दस्तावेज अब भी पुराने नाम के ही हैं।

कुछ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि सौरभ ने मुस्लिम लड़की से शादी करने के बाद इस्लाम को कबूला था और अब उसे तीन तलाक देकर हिंदू धर्म में आ रहे हैं, तो कुछ रिपोर्ट्स कह रही है कि सौरभ की बहन ने किसी मुस्लिम से शादी कर ली थी, इसके चलते घरवालों को भी इस्लाम कबूल करना पड़ा था। इसके बाद उनका नाम मोहम्मद सुहैल कर दिया गया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में उल्लेख है कि किसी इरशाद नाम के मौलवी ने सौरभ के परिजनों का घर आ आकर ब्रेन वॉश किया था और उनका धर्म परिवर्तन करवा दिया था। बाद में सौरभ को भी इस्लाम कबूलना पड़ा। खबर बताती है कि मौलवी ने इस कदर परिजनों को इस्लाम का पाठ पढ़ाया था कि सबने उसकी शादी तीन बार निकाह कर चुकी महिला से करवा दी थी।

अब असली वजह क्या है ये स्पष्ट नहीं है। लेकिन युवक की घर वापसी का जो आवेदन प्रशासन को दिया गया है उसकी प्रति ऑपइंडिया पर भी है। इसमें साफ है कि घर वापसी अपनी इच्छा से कर रहे हैं।

अपने आवेदन में युवक ने कहा कि वह भले ही कुछ साल पहले मुस्लिम बना लेकिन उसकी आस्था हमेशा हिंदू धर्म ही रही। वह अपने हिंदू देवी-देवताओं को मानता रहा। इसलिए अवब वह दोबारा से बिन किसी के दबाव में हिंदू धर्म में आना चाहता है और हमेशा हिंदू ही बनकर अपना जीवन गुजारना चाहता है। आवेदन पत्र में लिखा है कि शपथकर्ता अपना धर्म परिवर्तित करना चाहता है तथा हिंदू धर्म में लौटना चाहता है।

बता दें कि इस आवेदन के अलावा एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें सौरभ से सुहैल बना युवक दोबारा से सौरभ बनने के लिए अपना शुद्धिकरण करवा रहा है। हवन पूजा पाठ और मंत्रों के बीच सौरभ को हिंदू धर्म स्वीकारते देखा जा सकता है। वह तिलक लगवाकर, हाथ में कलावा बँधवाकर पूजा करते हैं। इसके बाद हवन की तैयारी की जाती है और सौरभ हाथ जोड़े वहीं बैठे रहते हैं।

स्थानीय रिपोर्ट्स बताती है कि सौरभ ने इस्लाम कबूलने को लेकर कहा कि कुछ साल पहले जब वह मुस्लिम बने तो धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले गए। कई बार उन्होंने आत्महत्या की भी कोशिश की। मगर अंत में उन्होंने अपनी स्थिति सुधारने के लिए हिंदू बनने का निर्णय ही लिया। युवक ने प्रशासन के समक्ष घर वापसी का आवेदन देने के अलावा ये भी कहा है कि अमरोहा में उसकी जान को खतरा है। ऐसे में उन्हें सुरक्षा की जरूरत है।

गोवा में फँसी पार्टी को छोड़ यूरोप निकले राहुल गाँधी: इधर अध्यक्ष के लिए कॉन्ग्रेस की बड़ी बैठक, राष्ट्रपति चुनाव, हिमाचल-गुजरात चुनाव की सरगर्मी

राहुल गाँधी एक बार फिर से यूरोप के लिए निकल गए हैं। वो भी तब, जब कॉन्ग्रेस की अहम बैठक होने वाली है। बताया जा रहा है कि ये उनका ‘व्यक्तिगत दौरा’ है। अब जब हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं, इस तरह राहुल गाँधी का विदेश दौरे पर जाना सबको हैरान करने वाला है। हालाँकि, इससे पहले भी वो ऐसे कारनामे करते रहे हैं। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि संसद का मॉनसून सत्र भी शुरू होने वाला है।

राहुल गाँधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने के सबसे बड़े कारणों में से एक ये भी है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षणों से पहले वो अचानक विदेश दौरे पर निकलते रहे हैं। फ़िलहाल पार्टी ने उनके ताज़ा दौरे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। गुरुवार (14 जुलाई, 2022) को पार्टी की एक बड़ी बैठक भी होने वाली है, जिसमें अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चर्चा होगी। राहुल गाँधी को भी अध्यक्ष की दौर में माना जा रहा है, लेकिन वो गायब होंगे।

महात्मा गाँधी की जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होने वाली कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर भी इस बैठक में चर्चा होगी। अब राहुल गाँधी के विदेश दौरे से भाजपा को भी नया मुद्दा मिलेगा, जिसका जवाब कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अजीबोगरीब ढंग से देते हैं। आपको याद होगा कि मई 2022 की शुरुआत में वो नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक शादी समारोह में चीनी महिला राजदूत के साथ दिखे थे। पंजाब और उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के बुरे प्रदर्शन के बाद ये वीडियो वायरल हुआ था।

इसी तरह वो उस समय भी यूरोप के दौरे पर निकले थे। दिसंबर 2021 में वो इटली के लिए निकल गए थे। फिर वो जनवरी आधा वहाँ बिता कर वापस आए थे। इसी साल यूके के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में जाकर उन्होंने भारत विरोधी भड़काऊ बातें की थीं। इधर राज्यसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस संघर्ष कर रही थी, उधर उनका नेता विदेश में था। अबकी संसद सत्र में राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति का चुनाव भी होना है। गोवा में कॉन्ग्रेस टूट गई है और पार्टी का बुरा हाल है।

सेना के जवान के 11 वर्षीय बेटे को मदरसे के मौलाना ने रॉड से पीटा: पुलिस शिकायत के बाद परिवार को मिल रही जान से मारने की धमकी

झारखंड की राजधानी राँची (Ranchi, Jharkhand) में एक मदरसे के मौलाना ने मैदान में खेलने को लेकर सेना के एक जवान के 11 वर्षीय बेटे को लोहे की सरिया से बर्बर तरीके से पिटाई कर दी। मौलाना सत्ताधारी पार्टी से नजदीकी संबंधों वाला बताया जाता है। इसलिए पुलिस पर आरोप है कि वह जानबूझकर मौलाना के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

राँची के अरगोड़ा थाना के कडरू की रहने वाली 39 साल की रौशन तारा ने बताया कि 6 जुलाई 2022 की शाम 5:30 उनका बच्चा सम्मी अहमद मदरसा हुसैनिया, कडरू के मैदान में फुटबॉल खेलने गया था। उसी दौरान मदरसे के मौलाना मुहम्मद ने हाथ में लोहे का रॉड लेकर बच्चों को खदेड़ लिया।

रौशन तारा ने ऑपइंडिया को बताया, “मेरा बच्चा सबसे छोटा था, इसलिए मौलाना ने उसे पकड़ लिया और बुरी तरीके से मारा। लोहे की रॉड की मार से बच्चे के पैर सहित पूरे शरीर पर निशान पड़ गए हैं और वह नहीं पा रहा है।”

रौशन आरा ने कहा कि अगले दिन वह थाने में रिपोर्ट कराने गईं और बड़ी कोशिश के बाद उम्मीद शिकायत ली गई। रौशन का कहना है कि सप्ताह भर बीत जाने के बाद भी मौलाना के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

रौशन आरा ने ऑपइंडिया से कहा, “मैं जब भी केस के IO तंजीजुल इमाम से इस बारे में बात करती हूँ तो वे कहते हैं कि केस पर काम हो रहा है।” पुलिस की लापरवाही को देखते हुए रौशन आरा ने अरगोड़ा थाने के प्रभारी को आवेदन देकर केस के जाँच अधिकारी को बदलने की माँग की है।

रौशन आरा का कहना है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण मौलाना और उसके लोग धमका रहे हैं। रौशन ने बताया, “मेरे शौहर फौज में हैं और घर में सिर्फ मैं और मेरा बच्चा है। मौलाना की इस हरकत पर मोहल्ले के लोग भी मेरी मदद नहीं कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि मौलाना के लोग उनके घर के सामने आकर धमकाते हैं और केस में समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। उन लोगों का कहना है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो उसे और उसके बच्चे को जान से मार दिया जाएगा। महिला ने मौलाना और उसके आदमियों से अपनी जान को खतरा बताया है।

रौशन तारा का कहना है कि मौलाना और उसके आदमियों के डर के कारण उसे हर समय अपना घर बंद करके उसके भीतर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौलाना बहुत प्रभावशाली है, इसलिए उस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अरगोड़ा थाना के प्रभारी विनोद कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पर कानून सम्मत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने हा कि अगर महिला को जान से मारने की धमकी मिल रही है तो वह पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी को महिला के घर के आसपास गश्ती बढ़ाने का निर्देश देंगे।

24 दिनों में 9वीं बार SpiceJet के विमान में तकनीकी खराबी, अब भारत-दुबई फ्लाइट में गड़बड़ी: DGCA ने दिया था ‘कारण बताओ नोटिस’

स्पाइसजेट विमानों में लगातार आ रही खराबी के बाद से यह नियामकीय जाँच के घेरे में है। सोमवार (11 जुलाई, 2022) को स्पाइसजेट दुबई-मदुरै की उड़ान SG-23 अंतिम समय में तकनीकी समस्या के कारण देर हो गई थी। एक वैकल्पिक विमान की व्यवस्था के बाद भारत के लिए वापस उड़ान भरी। स्पाइसजेट (SpiceJet) के विमानों में 19 जून से 11 जुलाई तक तकनीकी खराबी की कम से कम 9 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इसको लेकर बीते दिनों नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्पाइसजेट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

इस महीने की शुरुआत में (5 जुलाई) दिल्ली से दुबई जाने वाली स्पाइसजेट की SG-11 फ्लाइट में तकनीकी खराबी आने के बाद पाकिस्तान के कराची में इमरजेंसी लैंडिंग की गई थी। स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि संकेतक लाइट में तकनीकी खराबी के कारण स्पाइसजेट B737 विमान को कराची की ओर मोड़ दिया गया था। विमान कराची में सुरक्षित उतारा गया।

इस दौरान सभी यात्री सुरक्षित थे। प्रवक्ता ने यह भी कहा था कि लैंडिंग के दौरान कोई आपात स्थिति घोषित नहीं की गई। विमान की लैंडिंग सामान्य हुई। यात्रियों को सहज करने के लिए जलपान कराया गया। एक दूसरा विमान कराची भेजा गया, जो यात्रियों को दुबई लेकर गया। प्रवक्ता ने बताया था कि विमान में कुल 150 यात्री सवार थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा सितंबर 2021 में स्पाइसजेट के ऑडिट में पाया गया कि कलपुर्जों के आपूर्तिकर्ताओं को नियमित आधार पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे कलपुर्जों की कमी हो रही है।

डीजीसीए (Directorate General of Civil Aviation) ने बताया कि स्पाइसजेट एयरलाइन विमान नियम, 1937 के तहत सुरक्षित, दक्ष और विश्वसनीय हवाई सेवाओं को सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। दरअसल, दिल्ली-दुबई उड़ान को फ्यूल इंडिकेटर में खराबी होने के बाद विमान को पाकिस्तान के कराची में इमरजेंसी लैंडिंग कराई थी।

बता दें कि यह एयरलाइन पिछले चार सालों से घाटे में चल रही है। इसे 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में क्रमशः 316 करोड़ रुपए, 934 करोड़ रुपए और 998 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ। इसके बाद अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान उसे 1,248 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ। दूसरी ओर स्पाइस एक्सप्रेस का रेवेन्यू बढ़ रहा है। अक्टूबर-दिसंबर, 2021 की तिमाही में स्पाइस एक्सप्रेस ने अपने राजस्व में 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 584 करोड़ रुपए हासिल किए।