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जहाँ इस्लाम छोड़ने वाले एक्स मुस्लिमों को मिला मंच, वामपंथियों की धुलाई: प्रदीप भंडारी के शो ने पूरे किए 1 साल, कहा – राष्ट्र और सनातन की सेवा जारी रखेंगे

‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी के शो ‘जनता का मुकदमा’ ने एक वर्ष पूरे कर लिए हैं। ये शो ‘इंडिया न्यूज़’ पर आता है। इस एक साल में इस शो में राष्ट्रवाद से जुड़े कई मुद्दों को कवर किया गया और देशद्रोहियों की पोल खोली गई। आतंकवाद और वामपंथ के विरुद्ध हमेशा मुखर रहने वाले प्रदीप भंडारी ने इस शो के माध्यम से लगातार देशहित के मुद्दों पर आवाज़ उठाई और इस्लामी कट्टरपंथ की बार-बार जनता के सामने पोल खोली।

चीन में बिहार के जिस छात्र अमन नागसेन की हत्या हो गई थी, उसकी डेड बॉडी वापस लाने के लिए प्रदीप भंडारी ने इस शो के माध्यम से अभियान चलाया, जिसके बाद गया में उसका अंतिम-संस्कार हुआ। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई हिंसा पर भी उन्होंने आवाज़ उठाई। वामपंथी नेता कविता कृष्णन के हिन्दू विरोध को लेकर खुलासे किए।

साथ ही ‘डिस्मैंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ के पाकिस्तानी कनेक्शन का भी खुलासा किया। इस शो में कश्मीरी घाटी में राष्ट्रवादियों की सुरक्षा, ओवैसी के भड़काऊ भाषणों को लेकर मुकदमा दर्ज करने, नरेंद्र गिरी हत्याकांड में न्याय के लिए, पंजाब में ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ, गुरुग्राम में सार्वजनिक नमाज के खिलाफ, दीवाली में पटाखों को प्रतिबंधित करने के फैसले के खिलाफ, पंजाब पीएम मोदी की सुरक्षा में सेंध में खालिस्तान का हाथ होने के खुलासे के बाद उसके खिलाफ, माँ श्रृंगार गौरी की पूजा-अर्चना – इन सभी मुद्दों पर अभियान चलाया।

साथ ही प्रदीप भंडारी ने ‘इंडिया न्यूज़’ के शो ‘जनता का मुकदमा’ के माध्यम से जम्मू कश्मीर टेरर फंडिंग को लकेर भी आवाज उठाई। साथ ही ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग की पूछ-अर्चना के लिए अभियान चलाया। नवाब मलिक ने ED के सामने स्वीकार किया था कि हसीं पार्कर का बॉडीगार्ड सलीम NCP कार्यकर्ता था – ये ब्रेकिंग भी इसी शो में चलाया गया। उन्होंने इस मौके कहा है कि हम भारत राष्ट्र और सनातन धर्म की सेवा करना जारी रखेंगे।

एक शो में प्रदीप भंडारी ने इस्लाम मजहब छोड़ चुके एक्स मुस्लिमों को भी बुलाया और उनकी बात सुनी। उन्होंने इस शो से कट्टरपंथियों को आईना दिखाया। इन पूर्व मुस्लिमों ने बताया कि उन्हें इस्लाम छोड़ने की प्रेरणा कहाँ से मिली और इस्लाम छोड़ने के पीछे वजह क्या थी।

राजस्थान में एक संत ने की आत्मदाह की कोशिश, दूसरे दो दिन से टावर पर: अवैध खनन के खिलाफ 550 दिनों से आंदोलन, फिर भी सोई है कॉन्ग्रेस सरकार

राजस्थान (Rajasthan) में अपराधियों के सामने अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) के घुटने टेकने के बाद साधु-संतों को सामने आना पड़ा है।

अवैध खनन के खिलाफ संतों के जारी आंदोलन के दौरान 65 वर्षीय बाबा विजयदास ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को शरीर पर किरोसीन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। गंभीर रूप से झुलसने के बाद बाबा को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दरअसल, भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में आदिबद्री धाम और कनकांचल में अवैध खनन के विरोध में साधु-संतों का करीब 550 दिनों से गाँव पसोपा में आंदोलन चल रहा है। इधर बाबा नारायणदास मंगलवार (19 जुलाई 2022) को विरोध में टावर पर चढ़ गए और पूरी रात उन्होंने वहीं गुजारी। इस दौरान बाबा को टावर पर ही ग्लूकोज और अन्य सामग्री पहुँचाई गई।

बुधवार को भी आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में साधु-संत इकट्ठा हो गए। विरोध के दौरान ही सुबह करीब 11.30 बजे विजयसदास नाम के एक संत ने धरनास्थल के पीछे जाकर ज्वलनशील पदार्थ अपने शरीर पर छिड़ककर आग लगा ली। 

संत को आत्मदाह करता देख वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य संतों ने तुरंत आग बुझाई। संत विजयदास को डीग के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आरबीएम जिला अस्पताल रेफर किया गया है। अस्पताल के बाहर भी संतों का जमावड़ा लगा हुआ है।

संत विजयदास गाँव पासोपा के मंदिर पर ही रहते हैं। उधर बाबा नारायण दास अभी टावर पर ही बैठे हैं। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल उन्हें मनाकर उतारने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, बाबा नारायणदास खनन के खिलाफ अपने विरोध पर अडिग हैं। बुधवार को भरतपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में साधु-संतों के साथ वार्ता की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि अवैध खनन के विरोध में 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। 6 अप्रैल 2021 को साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात की थी।

11 जुलाई 2022 को बाबा हरिबोल दास ने अलीपुर में आयोजित सभा के दौरान कफन पहनकर आत्मदाह करने का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने कफन यात्रा निकाली थी और 19 जुलाई 2021 को आत्मदाह करने की घोषणा की थी।

वहीं, मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री के नेतृत्व में 11 सितंबर 2021 को एक प्रतिनिधिमंडल कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से भी मुलाकात की थी। प्रियंका गाँधी ने प्रतिनिधिमंडल से अवैध खनन को लेकर सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन ही रह गया। 

संतों का कहना है कि अवैध खनन को लेकर अब 100 से भी अधिक अधिकारियों और सैकड़ों विधायक एवं मंत्रियों को 350 से भी ज्यादा ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनकी माँगें पूरी नहीं की गईं।

अवैध खनन के खिलाफ साधु-संतों ने आसपास के गाँवों में कई बार जनसंपर्क अभियान, पदयात्रा, धरना-प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैली, सड़क जाम, आमरण अनशन, क्रांति यात्रा आदि तक की, लेकिन आदिबद्री-कनकांचल पर्वतों पर खनन नहीं रूका। इसके बाद संतों में आक्रोश फैल गया। 

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 2009 में भी भरतपुर के डीग व कामां तहसील में पड़ रहे ब्रज के धार्मिक पर्वतों को संरक्षित वनक्षेत्र घोषित किया गया था। उस समय तहसील में अंतर होने से ब्रज के प्रमुख पर्वत कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र होने से छूट गया था। इसके कारण वहाँ खनन जारी है।

यदि कनकांचल और आदिबद्री पर्वत के क्षेत्र को वन संरक्षित क्षेत्र का दर्जा दे दिया जाता है तो वहाँ खनन नहीं हो पाएगा। इससे तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था। बता दें कि 1996 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार वन संरक्षित क्षेत्र में खनन प्रतिबंधित है।

बता दें कि कि अवैध खनन राजस्थान मेें भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण है। खनन को लेकर आए दिन हत्याएँ होती रहती हैं। पिछले साल खनन घोटाला भी सामने आया था। खनन घोटाला के कारण राज्य को लगभग 1000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

दरअसल, लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की माइंस को मार्बल की श्रेणी में डाल कर ‘RDSA माइनिंग’ को आवंटित कर दिया गया। बता दें कि लाइमस्टोन मेजर मिनरल की श्रेणी में आता है, जिसकी नीलामी केंद्र द्वारा तय नियमों के अनुसार होती है।

राजस्थान के खनन विभाग ने प्रतापगढ़ के पिपलखूँट तहसील के दाँता में 74.249 हेक्टेयर और केला-मेला में 10.4162 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले लाइमस्टोन (सीमेंट बनाने में इसका उपयोग होता है) को मार्बल (संगमरमर) दिखा दिया।

मार्बल माइनर मिनरल में आता है, इसीलिए इसकी नीलामी में राज्य की ही भूमिका होती है। इस तरह श्रेणी बदल कर दोनों ब्लॉक का आवंटन किया गया। खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल और खान निदेशक केबी पांड्या इस मामले में निशाने पर हैं।

जुबैर ने ट्वीट के बदले पैसे लेने की बात कबूली, जुमे पर भड़काने के लिए इस्तेमाल: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार, AltNews को-फाउंडर को बेल

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को, उत्तर प्रदेश में दर्ज केसों में सुप्रीम कोर्ट ने आज (20 जुलाई) बेल दे दी है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केस में सुनवाई करते हुए अपना यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को लगातार हिरासत में रखना ठीक नहीं है वो भी तब जब यूपी पुलिस में हुई एफआईआर और दिल्ली पुलिस की एफआईआर में गंभीरता एक समान है।

कोर्ट ने जुबैर को 20 हजार रुपए के बेल बॉन्ड पर रिहा किया। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने जो जुबैर को राहत दी है वो केवल अभी के मामलों में काम नहीं करेगी बल्कि इस संबंध में अगर अन्य एफआईआर हुईं तो उनमें भी अतंरिम बेल का यह आदेश काम करेगा। कोर्ट ने जुबैर के विरुद्ध जाँच के लिए गठित की गई एसआईटी को रद्द किया और सभी एफआईआर को एक जगह क्लब करके दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ट्रांस्फर करने को कहा।

कोर्ट ने बताया कि आगे यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में सुना जाएगा क्योंकि उन्होंने किसी एफआईआर को रद्द नहीं किया है। अगर याचिकाकर्ता इन्हें रद्द करवाना चाहते हैं तो वो सीआरपीसी की धारा 226 और 482 के तहत दिल्ली हाई कोर्ट जाएँ।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर की याचिका पर सुनवाई के दौरान अपना यह निर्णय दिया। अपनी इस याचिका में जुबैर ने माँग की थी कि यूपी में उनके विरुद्ध जितनी एफआईआर हैं सबको रद्द किया जाए। साथ ही उनकी याचिका पर फैसला आने तक उन्हें अंतरिम जमानत मिले।

जुबैर के विरुद्ध SC में UP सरकार

हालाँकि यूपी सरकार की ओर से पेश वकील गरिमा प्रसाद ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया है कि जुबैर अपने ट्वीट के बदले पैसे चार्ज करता था और जुमे पर लोगों को भड़काने का व सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का काम करता था। उन्होंने कहा कि जुबैर इस बात को स्वीकार चुका है कि उसे एक ट्वीट के बदले 12 लाख रुपए और एक के बदले 2 करोड़ भी मिले।

यूपी सरकार की वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि वो जुबैर ही थे जिन्होंने 26 मई 2022 को हुए डिबेट शो की क्लिप शेयर करके लोगों से पूछा था कि वो प्रदर्शन के लिए क्यों नहीं आगे आ रहे। बाद में उनका ट्वीट ही जुमे की नमाजों के बाद लोगों को भड़काने के लिए पैम्पलेट में इस्तेमाल किए गए।

प्रसाद ने कोर्ट में यह भी कहा था कि जुबैर कोई पत्रकार नहीं है। वो खुद को फैक्टचेकर कहता है। लेकिन वो फैक्ट चेकिंग की जगह प्रोपेगेंडा फैलाता है। उसने ही ऐसे पोस्ट किए जिनसे लोगों में जहर फैला। उसे ऐसे ट्वीट करने के पैसे मिलते थे। उसने एक ट्वीट के 2 करोड़ और एक के 12 लाख रुपए लिए थे। वह उन वीडियोज का इस्तेमाल करता था जिनसे नफरत फैले।

जुबैर की गिरफ्तारी

बता दें कि मोहम्मद जुबैर को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक पुराने ट्वीट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था, उनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था। वहीं जुबैर के खिलाफ यूपी में 6 एफआईआर दर्ज थी। इनमें दो केस हाथरस, एक-एक केस गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में दर्ज किए गए थे। इन्हीं याचिकाओं को रद्द कराने की अपील लेकर वह कोर्ट गया था और तत्काल सुनवाई की माँग की थी। हालाँकि सीजेआई ने तत्काल सुनवाई से मना करते हुए कहा था कि वह उस बेंच से तारीख माँगे जो पहले से ही इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

‘ये जामिया है, यहाँ शाकाहारी नहीं मिलेगा’: छात्र ने यूनिवर्सिटी कैंटीन में माँगा वेज सैंडविच, दिया चिकन वाला; ABVP का दावा- शिकायत भी नहीं सुनी

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) की सेंट्रल कैंटीन में शाकाहारी छात्र को कथित तौर पर नॉनवेज सैंडविच परोसने का मामला सामने आया है। कैंटीन स्टाफ से शिकायत करने पर जवाब मिला कि कैंटीन में शुद्ध शाकाहारी खाना नहीं मिलता है। यह मामला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जामिया मिलिया की इकाई ने उठाया है।

एबीवीपी की जामिया इकाई ने 19 जुलाई 2022 को किए एक ट्वीट में कहा है, “आज सेंट्रल कैंटीन में एक शाकाहारी छात्र को वेज सैंडविच की जगह नॉन-वेज सैंडविच परोसा गया। जब इसकी शिकायत की गई तो उसे बताया गया कि ये जामिया है, यहाँ आपको शुद्ध शाकाहारी खाना नहीं मिलेगा।”

फोटो साभार: ABVP का ट्विटर

जामिया एबीवीपी से जुड़े एक छात्र ने पहचान उजागर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया, “सेंट्रल कैंटीन में एक शाकाहारी छात्र को वेज सैंडविच की जगह नॉन वेज सैंडविच दिया गया और शिकायत करने पर माफी तक नहीं माँगी। कर्मचारियों ने दावा किया कि चिकन के टुकड़े गलती से सैंडविच में चले गए होंगे। कैंटीन के मालिक को बार-बार फोन किया गया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। कैंटीन के कर्मचारियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि यह आरएसएस का एजेंडा है।”

छात्र ने पूछा, “वहाँ मौजूद अन्य छात्रों ने भी देखा कि सैंडविच के अंदर चिकन के टुकड़े थे। सेंट्रल कैंटीन में अलग से शाकाहारी खाने का काउंटर क्यों नहीं है? विश्वविद्यालय में शाकाहारी छात्र ऐसी घटनाओं से कब तक परेशान होते रहेंगे? कैंटीन का ठेका देने से पहले मालिकों को शाकाहारी भोजन के लिए अलग काउंटर रखने के लिए क्यों नहीं कहा जाता है? शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए एक ही बर्तन का उपयोग क्यों किया जाता है?”

छात्र ने अनुरोध किया कि विश्वविद्यालय के कुलपति इस मामले की जल्द से जल्द जाँच करें। वह या तो कैंटीन का टेंडर रद्द करें, या फिर उचित कार्रवाई करें ताकि किसी भी अन्य शाकाहारी छात्र को इस तरह से मांसाहारी भोजन ना परोसा जाए।

चंपारण के मदरसे से देश विरोधी प्लानिंग, NIA ने मौलवी को दबोचा: 5 बोरी उर्दू किताबें बरामद, 100 लड़कियों को दे रहा था ‘तालीम’

बिहार के पटना में हाल में ही ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ के कुछ संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है। जिसके बाद उनके खतरनाक मंसूबों के बारे में देश को पता चला है। इस गिरफ्तारी के बाद से बिहार की पुलिस व जाँच एजेंसी NIA सक्रिय है। NIA अपनी तरफ से लगातार जाँच कर रही है।

इसी सिलसिले में मंगलवार (19 जुलाई, 2022) को पटना से ढाका पहुँची एनआईए की टीम ने पचपकड़ी रोड स्थित जामिया मारिया मिसवा मदरसा से तीन लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान सिकरहना डीएसपी राजेश कुमार समेत एसडीओ व कई पुलिस अधिकारी थाना पर मौजूद रहे।

पटना से आई एनआईए की टीम जामिया मारिया मिसवा मदरसा ढाका के पचपकड़ी पहुँची और मदरसा के मौलवी मुफ्ती असगर अली को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही मदरसा के दो अन्य लोगों को भी कस्टडी में लेकर ढाका थाना पहुँची। हालाँकि पूछताछ के बाद उन दोनों को छोड़ दिया गया और अली असगर को लेकर जाँच एजेंसी पटना आ गई है। जहाँ उससे दोबारा पूछताछ की जाएगी। मौलाना पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है।

बताया जा रहा है कि एफआईआर में अली का नाम भी है। पुलिस इस सिलिसिले में उसके घर पर भी दबिश देने पहुँची थी, जहाँ पाँच बोरे में उर्दू की किताबें मिली हैं। ये किताबें आपत्तिजनक बताई जा रही हैं, जिनकी आगे जाँच की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि वे कैसी मजहबी किताबें हैं। 

असगर अली पलनवा थाना के सिसवनिया गाद गाँव का रहने वाला है और जामिया मारिया मिसवा मदरसा में बच्चों को तालीम देने का काम करता था। ढाका के पचपकड़ी में स्थित जामिया मारिया मिसवा मदरसा का संचालन वर्ष 2013 से हो रहा है। इस मदरसे में लगभग 100 मुस्लिम लड़कियों को तालीम दी जाती है। अली असगर ढाका बड़ी मस्जिद के नायाब इमाम मोहम्मद नेसार के कमरे में रहता है। मस्जिद के नायाब इमाम ढाका थाना क्षेत्र के जमुआ के रहने वाले हैं।

ढाका पहुँची एनआईए की टीम को लेकर एसपी डॉ. कुमार आशीष ने भी कुछ बताने से इनकार किया है। डीएसपी सिकरहना राजेश कुमार ने सिर्फ एनआईए की टीम के आने की पुष्टि की, मगर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम पर देश विरोधी गतिविधियाँ चल रही थी, जिसका खुलासा होने का बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे बिहार में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। 

इससे पहले इस मामले में बिहार की पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ से पाँच लोगों की गिरफ्तारी की थी। इस मामले में कुल 26 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। बिहार पुलिस की फुलवारी शरीफ कार्यालय में छापेमारी के दौरान पुलिस को आपत्तिजनक दस्तावेज मिले थे, जिनमें से एक का शीर्षक था – ‘2047 इंडिया टुवर्ड्स रूल ऑफ इस्लामिक इंडिया’। इसके अलावा इनके पास से पीएफआई के पर्चे भी बरामद किए गए थे।

पीएम मोदी के पटना दौरे से 15 दिन पहले से ही इन आतंकियों को फुलवारी शरीफ में ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएम मोदी को मारने की साजिश को लेकर उन्होंने 6 और 7 जुलाई को बैठकें कीं। हालाँकि, बिहार पुलिस का कहना है कि पीएम मोदी को सीधा खतरा नहीं था।

‘आँख मूँद कर अधिकारियों पर भरोसा करना बंद करें’: भ्रष्टाचार पर सख्त CM योगी की मंत्रियों को सलाह, कहा – अनियमितता करने वालों को नहीं बख्शेंगे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मंत्रियों के बीच बढ़ते तनाव और सरकारी अधिकारियों के प्रस्तावित तबादलों के बीच बुधवार (20 जुलाई, 2022) को कैबिनेट मंत्रियों को अधिकारियों पर आँख मूँदकर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों की ओर इशारा करते हुए ये बात कही है।

दरअसल, राज्य सरकार ने 18 जुलाई को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी अनिल कुमार पांडे का ट्रांसफर कर दिया और भ्रष्टाचार के आरोप में पाँच अन्य अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांडे के खिलाफ कार्रवाई के बाद पीडब्ल्यूडी प्रमुख और चीफ इंजीनियर मनोज गुप्ता समेत पाँच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

यूपी सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद का विभाग ट्रांसफर असाइनमेंट में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गया है। उल्लेखनीय है कि जितिन प्रसाद ने कॉन्ग्रेस से भाजपा में शामिल होने के 13 महीने बाद विभाग सँभाला था। खास बात ये कि जितिन प्रसाद के ओएसडी अनिल कुमार पांडे इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार थे और उनको प्रसाद ने ही चुना था।

मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट की बैठक की और इसी दौरान उन्होंने मंत्रियों को अपने अधिकारियों पर आँख मूँदकर भरोसा नहीं करने की सलाह दी। सीएम योगी ने मंत्रियों को अपने अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है। ताकि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग के मामले में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की कई खबरें सामने आई हैं। पिछले सप्ताह राज्य के 100 से अधिक मेडिकल प्रोफेशनल्स ने सरकारी डॉक्टर के ट्रांसफर आदेशों में कथित गड़बड़ियों को लेकर चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा था। ये गड़बड़ियाँ मर चुके डॉक्टरों के ट्रांसफर, कपल पोस्टिंग के ट्रांसफर का उल्लंघन और ट्रांसफर के एस साल के अंदर दोबारा ट्रांसफर शामिल थे।

योगी सरकार लगातार भ्रष्टाचार कड़े एक्शन लेती रही है। साल 2018 में तो सीएम योगी ने आईएएस, आईपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारियों समेत 100 से अधिक दागी फर्स्ट क्लास के अधिकारियों का रिकॉर्ड तलब किया था। 2019 में भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए सात प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) अधिकारियों को बर्खास्त करने का फैसला किया था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा एक्शन

भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए यूपी सरकार ने 400 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ी सजा की चेतावनी दी थी। साथ ही करीब 200 कर्मचारियों को जल्दी सेवानिवृत्ति देने का फैसला किया था। इससे पहले 2019 में भी सरकार ने एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

वहीं अगर वर्तमान मामले को देखें तो पीडब्ल्यूडी विभाग के दो अन्य अधिकारियों पर भी ट्रांसफर में गड़बड़ियों का आरोप है। गौरतलब है कि ओएसडी पांडे यूपीए के शासनकाल के दौरान जब जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री थे तो भी उनकी सर्विस में थे। उन्हें प्रतिनियुक्ति पर लखनऊ लाया गया था।

दावा ये भी किया गया है कि ओएसडी पांडे के ट्रांसफर से जितिन प्रसाद बिलकुल भी खुश नहीं थे। मंत्री ने इस मामले पर सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और आज गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की उम्मीद है।

IPL मालिकों की हुई दक्षिण अफ्रीका की T20 लीग भी, सभी 6 टीमों को खरीदा: जानिए CSK-मुंबई ने किन टीमों पर लगाया दाँव, ग्रीम स्मिथ बने हेड

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) फ्रेंचाइजी ने क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका की आगामी नई टी-20 लीग में सभी छह टीमों को खरीदा है। इसका पहला सीजन जनवरी 2023 में खेला जाएगा। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, लखनऊ सुपर जायंट्स, सनराइजर्स हैदराबाद, राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स के मालिकों में से एक ने टीम की नीलामी के दौरान फ्रेंचाइजी के लिए सफलतापूर्वक बोली लगाई है।

ईएसपीएन क्रिकइंफो (ESPN cricinfo) की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएसके ने जोहान्सबर्ग फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए पैरेंट कंपनी चेन्नई सुपर किंग्स स्पोर्ट्स लिमिटेड के जरिए सबसे ऊँची बोली लगाई थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मुंबई इंडियंस ने केप टाउन फ्रेंचाइजी खरीदी, जबकि सन टीवी ग्रुप सनराइजर्स के मालिक ने पोर्ट एलिजाबेथ फ्रेंचाइजी को अपने नाम किया है।

2021 के अंत में लखनऊ आईपीएल फ्रेंचाइजी खरीदने के लिए 7090 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड राशि का भुगतान करने वाले आरपी संजीव गोयनका ग्रुप ने डरबन टीम को चुना। वहीं राजस्थान रॉयल्स ने पार्ल टीम को खरीदा। प्रिटोरिया को जिंदल साउथ वेस्ट स्पोर्ट्स ने लिया है, जिसके चीफ पार्थ जिंदल हैं। ये आईपीएल में दिल्ली कैपिटल के सह-मालिक भी हैं।

लीग का संचालन क्रिकेट साउथ अफ्रीका द्वारा टेलीविजन प्रसारक सुपरस्पोर्ट के साथ साझेदारी में किया जाएगा। बोर्ड से उम्मीद है कि जैसे ही कागजी कार्रवाई पूरी होती है, उसके बाद नए मालिकों और उन शहरों की ऑफिशियल अनाउंसमेंट करेगा। क्रिकेट साउथ अफ्रीका बोर्ड ने पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ को टी-20 लीग के ऑवर आल हेड के रूप में घोषित किया है। स्मिथ के फ्रैंचाइजी मालिकों के साथ सौदे निर्विवाद हैं।

स्मिथ ने कहा, “मैं इस रोमांचक नए काम को लीड करने के लिए बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। मैं दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट के लिए दिल से प्रतिबद्ध हूँ और जितना हो सके खेल की सेवा करता रहूँगा।” ग्रीम स्मिथ ने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह एक बेहतर प्रतिस्पर्धा होगी, जो कि खेल में बहुत जरूरी निवेश ला सकती है और दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए नए अवसर प्रदान कर सकता है। हमारे लिए भी यह अधिक महत्वपूर्ण है।”

राहुल गाँधी न काम के ना काज के: संसद में हंगामे को लेकर स्मृति ईरानी ने लताड़ा, बताया- गतिरोध पैदा करने वालों का सरगना

संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे की वजह से कार्यवाही बार-बार स्थगित होने पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार (20 जुलाई, 2022) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर जमकर हमला बोला। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को राजनीतिक रूप से बिना काम के बताते हुए कहा कि वह अब संसद की उत्पादकता कम करने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं।

स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर तीखा हमला करते हुए कहा, “अमेठी का सांसद रहते हुए राहुल गाँधी ने संसद में कोई सवाल नहीं पूछा और अमेठी छोड़कर जब वायनाड गए तो 2019 के शीतकालीन सत्र में संसद में उनकी उपस्थिति केवल 40 प्रतिशत थी। कॉन्ग्रेस नेता ने संसद में कोई भी निजी विधेयक पेश नहीं किया है। अब वह संसद की उत्पादकता को कम करना चाहते हैं। जो राजनीतिक रूप से फेल रहे हैं, वो पार्लियामेंटमें चर्चा नहीं होने देना चाहते हैं। संसद में गतिरोध पैदा करना उनका काम ही रहा है। राहुल गाँधी का पूरा राजनीतिक जीवन संसदीय परंपरा का अपमान करने में बीता है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जनता चाहती है कि संसद में उन मुद्दों एवं विषयों पर चर्चा हो जो भारत के हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण हैं। राहुल गाँधी जिनका राजनीतिक इतिहास इस बात से भी प्रतिबिंबित होता है कि वह देश में कब हैं और देश के बाहर कब हैं, वह अपनी पार्टी में चिंता का विषय बन जाते हैं।”

स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गाँधी ने संसद में कभी सवाल नहीं किया, हमेशा संसदीय कार्यवाही का अपमान किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को संसद में गतिरोध पैदा करने का सरगना करार दिया।

राहुल गाँधी पर सीधा निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “मैं उनसे कहना चाहती हूँ कि वह भले ही राजनीतिक रूप से भले किसी काम के न हों लेकिन वह संसद की उत्पादकता पर अंकुष लगाने का निरंतर दुस्साहस न करें।”

बता दें कि मानसून सत्र 12 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र में मोदी सरकार 24 विधेयकों को पारित कराना चाहती है। वहीं विपक्ष लगातार हंगामे और धरना प्रदर्शन में लगा है। मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार (19 जुलाई, 2022) को विपक्ष ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने महँगाई, जरूरी वस्तुओं पर जीएसटी में 5 प्रतिशत की वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं राहुल गाँधी भी विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 18 जुलाई से हुई है लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। एक तरफ जहाँ पीएम मोदी ने विपक्ष से शांति बनाए रखने और सर्जनात्मक चर्चा में भाग लेने की अपील की है वहीं विपक्ष जीएसटी, महँगाई, अग्निपथ योजना पर चर्चा कराने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है।

नूँह में कुचलने से पहले DSP को बंदूक दिखाकर दी गई धमकी, पीछे से दे रहे थे आवाज- गाड़ी चढ़ा: डंपर पर रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं

हरियाणा के नूँह जिले के पास अवैध खनन माफियाओं को रोकने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या मामले में कुछ नए खुलासे हुए हैं। डंपर के भीतर बैठे इकरार की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि डंपर चढ़ाने के निर्देश उन्हें पीछे से मिले थे। इसके अलावा माफियाओं ने पुलिस से बचने के लिए जो-जो करतूत की उसका खुलासा भी हो चुका है। पुलिस ने इकरार के साथ हत्या में इस्तेमाल डंपर को भी बरामद किया है। उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मंगलवार (19 जुलाई 2022) दोपहर 12 बजे डीएसपी सुरेंद्र सिंह जब औचक निरीक्षण के लिए पंचगाँव पहुँचे तो उन्होंने पत्थरों से भरे एक डंपर को अवैध खनन करते देखा। इसके बाद डीएसपी ने अपने साथ मौजूद एएसआई संजय कुमार, अंगरक्षक उमेश कुमार और गाड़ी ड्राइवर के साथ उस डंपर का पीछा किया और थोड़ी दूर जाकर गाड़ी ओवरटेक की गई।

डीएसपी सुरेंद्र ने गाड़ी से उतरकर डंपर चालक को गाड़ी बंद करने का इशारा किया जिसे देख डंपर एक बार रुका भी। लेकिन फिर पुलिसवालों को डंपर चालक ने देसी कट्टा दिखाकर कहा- ‘साइड हट जाओ वरना गोली मार देंगे।’

वहीं, इसी बीच पीछे आ रहे डंपर और गाड़ी में बैठे लोगों में से एक ने पुलिस वालों को डंपर रोकने पर सबक सिखाने की बात कही। वह बोला- ‘गाड़ी चढ़ा दे।‘ चालक ने निर्देश पाते ही बिन सोचे डीएसपी को रौंद डाला। घटना के वक्त अन्य पुलिसकर्मी भी वाहन में थे। मगर उन्होंने गाड़ी से कूदकर अपनी जानें बचाई।

मौके से फरार होने के लिए आरोपितों ने डंपर से भरे पत्थरों को पुलिस वाहन के सामने उड़ेला और उनका रास्ता ब्लॉक कर वहाँ से फरार हो गए। चार घंटे बाद जाकर सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम की फिर एक मुठभेड़ हुई और पैर में गोली लगने के बाद इकरार घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया।

फिलहाल पुलिस की 8 टीमें ऑपरेशन अन्य आरोपितों को ढूँढने की कोशिशों में लगी हुई हैं। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी हो रही है। अवैध खनन से जुड़े हर व्यक्ति का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

डीएसपी हत्या केस में मंगलवार देर शाम तावड़ू सदर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज हो गई है। केस को साजिश के तहत हत्या, हत्या के प्रयास, सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुँचाने, सरकारी आदेश का उल्लंघन, आर्म्स एक्ट व माइनिंग एक्ट के तहत दर्ज किया गया है।

बता दें कि डीएसपी सुरेंद्र सिंह हिसार जिले के आदमपुर क्षेत्र के गाँव सारंगपुर के रहने वाले थे। उन्होंने 12 अप्रैल 1994 को हरियाणा पुलिस बतौर एएसआई ज्वाइन किया था। इसी वर्ष 31 अक्टूबर उनकी रिटायरमेंट थी। उन्होंने घर से निकलते वक्त कहा भी था कि वह घर जल्दी आएँगे क्योंकि अब तो रिटायरमेंट को कुछ ही समय बचा है।

तड़प-तड़प कर मर रहीं गायें, हाथ पर हाथ धरे बैठा है राजस्थान का पशुपालन विभाग: किसान बेहाल, सरकार के पास एक ही जवाब – टीका नहीं है

देश भर में एक तरफ जहाँ इंसान कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पशु भी खतरनाक वायरस की चपेट में आ चुके हैं। लंपी स्किन डिजीज से गाय, भैंस, बैल समेत अन्य पशु बीमार होते जा रहे हैं। इसमें एक संक्रमित पशु के समीप आने पर दूसरे पशु भी संक्रमित हो रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी राजस्थान के ज्यादातर जिलों में देखने को मिल रहा है। यहाँ के जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, पाली, जोधपुर और बीकानेर जिले में यह वायरस तेजी से फैल रहा है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर नाकामी के आरोप लग रहे।

इस वायरस का सबसे ज्यादा असर दुधारू गायों पर हो रहा है। प्रतिदिन गौवंश की मौत का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं है। पशुपालकों का कहना है कि कई जानवर इस बीमारी से पीड़ित हैं। वह दर्द से मर रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग इस दिशा में बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिख रही है। लगातार हो रही गायों की मौत से पशुपालक चिंतित हैं, क्योंकि कई परिवार हैं जो केवल पशुपालन पर ही निर्भर हैं। इन्हीं से उनकी आजीविका चलती है।

राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सोलंकी ने इस बाबत पशुपालन विभाग के साथ बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बताया कि फिलहाल इस बीमारी से बचने के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। इसलिए लक्षणों को देखकर उसके आधार पर इलाज किया जा रहा है।

वहीं बाड़मेर में बढ़ती बीमारी को देखते हुए एडवाइजरी जारी की गई है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रतनलाल जीनगर ने बताया कि पशुपालन विभाग ने रोग से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसके अलावा बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।  इधर गायें तड़प-तड़प कर मर रही हैं, उधर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के पास इसका एक ही जवाब है कि बीमारी का टीका नहीं है।

लंपी स्किन वायरस के लक्षण 

लंपी वायरस नामक ये बीमारी पशुओं में तेजी से फैल रहा है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद पहले पशुओं में बुखार के लक्षण आते हैं और फिर त्वचा में गाँठें पड़ने लगती हैं। धीरे-धीरे ये गाँठ बड़ी होने लगती हैं और घाव बन जाता है। इससे पशु चारा खाना और पानी पीना बंद कर देते हैं। दुधारू पशु दूध देना बंद कर देते हैं, मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है। कई बार तो पशुओं की मौत भी हो जाती है। यह वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। साथ ही ये दूषित पानी, लार और चारे के माध्यम से भी फैलता है। इस बीमारी से अभी तक सबसे ज्यादा मौत दुधारू गायों की हुई है।

सबसे पहले अफ्रीका में आई थी यह बीमारी

यह बीमारी सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में पाई गई थी। पिछले कुछ सालों में ये बीमारी कई देशों के पशुओं में फैल गई। साल 2015 में तुर्की और ग्रीस और 2016 में रूस जैसे देश में इसने तबाही मचाई। जुलाई 2019 में इसे बांग्लादेश में देखा गया, जहाँ से ये कई एशियाई देशों में फैल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज साल 2019 से अब तक सात एशियाई देशों में फैल चुकी है। अगस्त 2019 में भारत और चीन, जून 2020 में नेपाल, जुलाई 2020 में ताइवान, भूटान, अक्टूबर 2020 वियतनाम में और नंवबर 2020 में हांगकांग तक पहुँच गया।