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झारखंड में ST महिलाओं को नौकरी का झाँसा देकर किया जा रहा रेप, फिर डाला जाता है धर्मांतरण का दबाव: आफताब अंसारी गिरफ्तार, साहिबगंज में पहला नहीं है ऐसा मामला

झारखंड में आफताब अंसारी नाम के व्यक्ति ने जनजातीय महिला को नौकरी का झाँसा दिया। इसके बाद दुकान पर बुलाकर उसके साथ रेप किया। इसके बाद उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाकर धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार, आफताब अंसारी ने एक शादीशुदा जनजातीय महिला को अच्छी नौकरी दिलाने का झाँसा देकर अपने जाल में फँसाया। इसके लिए उसने उसे अर्शी गारमेंट्स नाम की एक दुकान पर बुलाया था।

जब महिला दुकान पर पहुँची तो आफताब ने खुद को दुकान का मालिक बताया। इसके बाद वह उसे दुकान के पीछे लेकर गया। महिला के वहाँ पहुँचते ही उसने दरवाजा बंद कर उसके साथ रेप किया और उसका वीडियो भी बनाया। इसके बाद आरोपित आफताब ने महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। जब उसने इनकार किया, तो उसने उसके परिवार वालों को धमकियाँ दी।

झारखंड में इस तरह का मामला कोई पहला नहीं है बल्कि इस तरहल के मामले वहाँ जब तब सामने आ ही जाते हैं। पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने इस तरह के मामलों के लिए लगभग 8 महीने पहले ग्राउंड रिपोर्टिंग कर वहाँ के स्थानीय लोगों से बात की। उन्होंने एक्स पर एक जानकारी साझा की है।

शुभी ने लिखा, “झारखंड के साहिबगंज इलाके में गए, जहाँ ऐसे मियाँ भाइयों द्वारा आदिवासी महिलाओं को फँसाना आम बात है। यहाँ पर जिनमें ज्यादातर महिलाएँ शादीशुदा हैं। इसके बावजूद उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं और हिंदू बस्तियों के बाहर बस जाते हैं। दिन-ब-दिन जमाई लोगों की ये बस्तियाँ बढ़ती जा रही हैं, जबकि जनजातीय आबादी घटती जा रही है।

अपनी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने पंचायत अध्यक्ष से मुलाकात की। इस बारे में शुभी ने लिखा, “हमारी मुलाकात मोनिका किस्कू से हुई, जो एक पंचायत अध्यक्ष थीं और जिन्हें उमेद ने सबसे पहले अपने जाल में फँसाया था। उनके निधन के बाद, उनके भाई अली ने उनसे शादी कर ली। एक छोटी सी बस्ती में, अली और उनके परिवार का एक बड़ा सा घर है, जो इस बात को सही ठहराता है कि ये मियाँ भाई राजनीतिक ताकत, जमीन हड़पने और पहचान की चोरी के लिए जनजातीय महिलाओं से शादी करते हैं।”

शुभी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पार्टी पर सवाल करते हुए लिखा, “मोनिका के मामले में, उन्होंने अपना नाम नहीं बदला है, क्योंकि नाम बदलने से उन्हें जनजातीय महिला होने के नाते मिलने वाले सभी लाभ और सबसे बढ़कर आदिवासी सीट से चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित होना पड़ेगा। अली एक स्थानीय झामुमो (JMM) नेता हैं। अब आप गणित समझ गए होंगे। यह सब चुपचाप, हर दिन होता रहा है।”

गौरतलब है कि जनजातीय महिलाओं के साथ झारखंड में होने वाली ये घटनाएँ नई नहीं हैं। इससे पहले झारखंड के सरायकेला- खरसावाँ में एक मुस्लिम युवक को अपने से 13 वर्ष छोटी जनजातीय लड़की का धर्मांतरण करवाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। मुस्लिम युवक ने लड़की का धर्मांतरण करवाने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाकर निकाह भी कर लिया था।

स्थानीय लोगों ने बताया था कि 32 साल के तस्लीम आलम ने 19 वर्षीय जनजातीय समाज की लड़की का अपहरण किया। इसके बाद जबरन उसका धर्मांतरण करवाया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार कर लिया था। साल 2023 झारखंड की राजधानी रांची में इरशाद अंसारी नामक युवक के ब्लैकमेल से परेशान हो एक जनजातीय महिला ने आत्महत्या कर ली थी।

इरशाद अंसारी ने महिला के साथ बलात्कार कर उसका वीडियो बना लिया था। इसके बाद वह महिला को वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहा था। इससे परेशान होकर महिला ने 29 जुलाई 2023 को अपने घर में फाँसी लगा ली थी।

मृतक महिला के देवर ने पुलिस को बताया था कि करीब ढाई महीने पहले उसकी भाभी को कुत्ते ने काट लिया था। इसी को लेकर आरोपित इरशाद अंसारी उन्हें रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए हॉस्पिटल ले गया था। इसी दौरान उसने बलात्कार कर उनका अश्लील वीडियो बना लिया था। इसके बाद से वह मृतक महिला को लगातार परेशान कर रहा था।

इस तरह रेप कर धर्मांतरण के कई मामले सुर्खियों में आ चुके हैं। इन पर लागातार कार्रवाई की माँग भी उठती रही है लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम उठते नजर नहीं आ रहे हैं।

भोपाल में हिंदू लड़कियों से ड्रग्स डिलीवरी कराता था यासीन मछली, पुलिस ने बताया- मुंबई, पंजाब, राजस्थान से लाते थे चरस: सारिक के पास था युवतियों को फाँसने के लिए पूरा गैंग

भोपाल में ड्रग तस्करी और उससे जुड़े गंभीर अपराधों का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें यासीन मछली, उसके चाचा शाहवर और बड़े मछली कारोबारी सारिक मछली (यह भी यासीन का चाचा है) जैसे लोग शामिल हैं। ये लोग न सिर्फ ड्रग्स का धंधा चला रहे थे, बल्कि हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे घिनौने काम भी कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर भोपाल में ड्रग्स का बड़ा कारोबार चला रहे थे। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। राजस्थान से सड़क के रास्ते ड्रग्स भोपाल पहुँचाए जाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और पार्टियों में खास ग्राहकों तक पहुँचाया जाता था।

ये लोग ड्रग्स की डिलीवरी के लिए कई बार हिंदू लड़कियों का इस्तेमाल करते थे। इन लड़कियों को ड्रग्स फ्री में दिए जाते थे, ताकि वे इस काम में शामिल हो जाएँ।

पुलिस को यह भी पता चला कि यासीन और शाहवर का पंजाब के ड्रग तस्करों से भी सीधा कनेक्शन था। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को पुलिस ने शाहवर को तलैया थाने से बुधवारा तक जुलूस निकालकर ले गई, ताकि लोग इनके कारनामों को जान सकें।

उसी दिन यासीन को पुलिस राजस्थान ले गई, जहाँ से और भी अहम जानकारी सामने आई। शाहवर को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे दो दिन की रिमांड पर लिया गया। पुलिस ने इन दोनों की निशानदेही पर आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ चल रही है।

क्राइम ब्रांच ने यासीन के मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर मोहित बघेल और गौरव चौहान नाम के दो लोगों को भी हिरासत में लिया। यासीन के फोन में गौरव का एक वीडियो मिला, जिसमें वह शराब पीकर झूम रहा था। पुलिस ने इन दोनों से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की, लेकिन अभी तक इन्होंने ड्रग तस्करी से जुड़ी कोई खास जानकारी नहीं दी।

हिंदू लड़कियों का शोषण

इस मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि यासीन और शाहवर ड्रग्स का इस्तेमाल हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करने के लिए करते थे। ये लोग पहले लड़कियों को फ्री में ड्रग्स देकर उनकी लत लगाते थे। फिर उन पर शारीरिक संबंध बनाने और धर्म बदलने का दबाव डालते थे। एक पीड़ित युवक ने तलैया थाने में शिकायत की कि यासीन और उसके साथियों ने उसे बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा था। डर की वजह से उसने पहले शिकायत नहीं की थी।

सारिक मछली पर दुष्कर्म का आरोप

यासीन का चाचा और भोपाल का बड़ा मछली कारोबारी सारिक मछली भी इस मामले में फँस गया है। बागसेवनिया की एक युवती ने पिपलानी थाने में सारिक पर दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया। युवती ने बताया कि सारिक का एक गुंडा, दिव्यांश अहिरवार, मैनिट का स्टूडेंट बनकर उससे कोचिंग में मिला और दोस्ती की। एक दिन उसने घर छोड़ने के बहाने उसे क्लब-90 ले जाकर उसका रेप किया।

युवती ने अपनी शिकायत में बताया कि दिव्यांश ने उसे सारिक मछली से मिलवाया। दिव्यांश ने उस पर दबाव डाला कि वह सारिक और उसके साथियों के साथ दोस्ती करे और उन्हें खुश करे। पीड़िता का कहना है कि सारिक के दबाव में पिपलानी थाना पुलिस ने पहले उसकी शिकायत पर दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं किया। बाद में एक ब्लैंक कागज पर उसके हस्ताक्षर करवाकर ऐसी FIR दर्ज की गई, जिससे दिव्यांश को आसानी से जमानत मिल गई।

वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग

युवती ने यह भी खुलासा किया कि सारिक के गुंडे हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और क्लब में उनके अश्लील वीडियो बनाते थे। इन वीडियोज को वायरल करने की धमकी देकर उन्हें बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

पीड़िता ने बताया कि दिव्यांश ने उसे रामकृपाल मेहरा, अविनाश आनंद, मोहित बघेल, साहिल जैसे कई लोगों से मिलवाया। इन लोगों ने उसका अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद पुलिस को शिकायत दर्ज करनी पड़ी।

बता दें कि कुछ दिन पहले भोपाल पुलिस ने सैफुद्दीन और शाहरुख नाम के दो ड्रग पेडलरों को पकड़ा था। दोनों भोपाल के क्लबों और पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे पार्टी, क्लब और जिम के माध्यम से युवाओं को फिटनेस और पार्टी कल्चर के नाम पर ड्रग्स की लत लगाते थे।

दोनों ने पुलिस को बताया कि यहाँ संपन्न घरों की हिंदू लड़कियों को पहले फ्री में नशा करवा कर उनका शोषण किया जाता था। जब युवतियाँ नशे की गिरफ्त में आ जाती थीं, तब उन्हें ड्रग्स के बदले शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

यह पूरा मामला भोपाल में ड्रग तस्करी और उससे जुड़े अपराधों का एक काला सच सामने लाता है। यासीन मछली, शाहवर और सारिक मछली जैसे लोग न सिर्फ ड्रग्स का धंधा चला रहे थे, बल्कि हिंदू लड़कियों का शारीरिक और मानसिक शोषण भी कर रहे थे।

पुलिस इस मामले में गहराई से जाँच कर रही है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने आसपास हो रही ऐसी गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और समय रहते पुलिस को सूचित करना होगा।

जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन SIO की मेहमान बनीं ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका: मंच पाकर किया हिंदुत्व को किया बदनाम, इस्लामी आक्रांताओं का बचाव करने में कोई कसर नहीं छोड़ी

ट्विटर हिस्टोरियन के नाम से मशहूर और विवादों में घिरी रुचिका शर्मा को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए गुरुवार  (24 जुलाई 2025) को बुलाया गया। यह कार्यक्रम स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) की ओर से आयोजित किया गया था, जो कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ की छात्र इकाई है।

SIO का मुख्य उद्देश्य इस्लाम का प्रचार और धर्मांतरण को बढ़ावा देना माना जाता है। यह कार्यक्रम उनके शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (CERT) द्वारा आयोजित किया गया।

जिसमें रुचिका शर्मा को हिंदुत्व और भारतीय इतिहास को लेकर भ्रामक और झूठी जानकारियाँ फैलाने के लिए आमंत्रित किया गया था। रुचिका पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे भारत में इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को नजरअंदाज या छिपाने का प्रयास करती रही हैं।

हिंदू धर्म को लेकर झूठ फैलाने और इस्लामी कट्टरता को कमतर दिखाने के लिए पहचानी जाने वाली ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका शर्मा को अब जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा खुलकर समर्थन दे रही है।

SIO ने रुचिका को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया। ये वही संगठन है जिसने सितंबर 2022 में मोदी सरकार की ओर से बैन लगाए गए इस्लामिक आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का खुलकर बचाव किया था।

SIO ने उस समय ट्वीट करके कहा था, “PFI के खिलाफ देशभर में की गई कार्रवाई सरकार द्वारा असहमति की आवाज को दबाने के लिए जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाएँ।”

पिछले साल, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने हमास के आतंकवादी नेता इस्माइल हानिया की तारीफ की थी। इतना ही नहीं, केरल में इस संगठन से जुड़े लोगों ने हमास के एक और कुख्यात आतंकी याह्या सिनवार के लिए जनाजे की नमाज भी अदा की थी।

महाराष्ट्र में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) के अध्यक्ष सलमान अहमद को फरवरी 2020 में, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना), 153 (दंगे भड़काने की नीयत से उकसाना) और 34 (साझा इरादे से किया गया अपराध) के तहत केस दर्ज किया गया था।

जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा SIO के कट्टरपंथी सोच के बावजूद रुचिका शर्मा को इस संगठन से जुड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ के नाम से जानी जाने वाली रुचिका, इस्लामी आक्रमणकारियों की क्रूरता को छिपाने और हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाने में इस संगठन के लिए एक आसान और उपयोगी चेहरा बन गईं।

रुचिका शर्मा और कैसे इस विकृत कलाकार ने प्रसिद्धि पाई

पिछले कुछ वर्षों में, रुचिका शर्मा अक्सर गलत कारणों से सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने कई बार सनातन धर्म और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का मजाक उड़ाने और उन्हें गलत ढंग से पेश करने की कोशिश की है।

उन्हें अपने विचारों को इतिहास के नाम पर भोले-भाले दर्शकों के सामने रखने का शौक है। रुचिका JNU की पूर्व छात्रा हैं और ‘आईशैडो एंड इतिहास विद डॉ. रुचिका शर्मा’ नाम से एक यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं।

एक बार उनके द्वारा लिखा गया एक लेख को स्क्रॉल वेबसाइट ने प्रकाशित किया था, पर उनके लिखे झूठे दावों के कारण बाद में उसे हटा दिया गया था। 2017 में स्क्रॉल ने उनका एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था इतिहास का पाठ: पद्मावती को एक राजपूत राजकुमार ने आत्मदाह के लिए मजबूर किया था, अलाउद्दीन खिलजी ने नहीं।’  

इस लेख में दावा किया गया था कि रानी पद्मिनी, रावल रतन सेन की हार और मौत के बाद, कुंभलनेर के राजा देवपाल द्वारा बलात्कार की आशंका से डरकर जौहर (आक्रमणकारियों के हाथों अपमान से बचने के लिए किया गया आत्मदाह) करने पर मजबूर हुई थीं।

यह लेख बाद में हटा दिया गया क्योंकि इसमें इतिहास को लेकर गंभीर गलतियाँ थीं। लेख में झूठे तथ्य पेश किए गए थे, जिससे स्क्रॉल की काफी आलोचना हुई और मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगा। रुचिका शर्मा खुले तौर पर मुगल तानाशाह औरंगजेब और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती हैं।

वे अक्सर अपने ट्वीट्स और इंटरव्यूज में इन दोनों की कथित उदारता की तारीफ करती हैं, जो आमतौर पर वामपंथी विचारधारा से सहमत मीडिया संस्थानों द्वारा बढ़ावा दी जाती है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से यह स्पष्ट है कि औरंगजेब और टीपू सुल्तान दोनों ने हिंदुओं, उनके मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अत्याचार किए। उन्हें मारा, अपंग किया और लूटा।

इसके बावजूद, रुचिका शर्मा इन शासकों का लगातार महिमामंडन और मानवीकरण करती हैं, जिनका इतिहास हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार, जबरन धर्मांतरण, जजिया कर (गैर-मुसलमानों पर टैक्स) लगाने और धार्मिक कट्टरता से भरा हुआ है।

सैनिक की बिटिया से लेकर गरीब-लाचार तक… इस्लामी धर्मांतरण गिरोहों ने हिंदू लड़कियों को कैसे फँसाया, जानें सब: छांगुर के गुर्गे ने 5 को दिया था झाँसा, 3 का अब तक कुछ पता नहीं

हिंदू महिलाओं को अपने जाल में फँसाकर उनका धर्म परिवर्तन करने और फिर उन्हें जिस्मफरोशी जैसे धंधे में धकेलने के लिए विदेशों में भेजने वाले धर्मांतरण गिरोह को लेकर लागातार नए खुलासे हो रहे हैं। धर्मांतरण करने वाला कोई एक नहीं बल्कि कई गिरोह देश के अलग-अलग शहरों में अपना जाल बिछाए हुए हैं। कई गिरोहों की पहुँच तो अधिकारियों से लेकर जजों तक भी है।

उत्तर प्रदेश में बीते दो महीने में 6 शहरों में ये गिरोह जाँच एजेंसियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। इनमें से बलरामपुर में रहने वाला छांगुर पीर और आगरा के धर्मांतरण गिरोह का सरगना अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने कुछ बड़े खुलासे किए हैं। इन दोनों गिरोहों के दुबई- पाकिस्तान से फंडिंग और जिस्मफरोशी के धंधे को लेकर कई बड़े कनेक्शन जुड़ते दिख रहे हैं।

छांगुर के मुरीद बदर सिद्दीकी ने फँसाई 5 लड़कियाँ, 3 लापता

छांगुर पीर के गिरफ्तार होने के बाद लगातार नई बातें सामने आ रही हैं। UP-ATS को जाँच में पता चला कि उसका एक चेला मेरठ का बदर सिद्दीकी है। उसने दिल्ली और आसपास के शहरों के साथ बैंगलोर की भी लड़कियों को फाँसा था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बदर अख्तर सिद्दीकी ने 5 लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाया लेकिन उनमें से 2 का ही पता चल पाया है। 3 लड़कियाँ वर्तमान में कहाँ हैं इसके बारे में न तो उनके परिवार को पता है और न ही पुलिस को। यहाँ तक कि परिजनों ने उन लड़कियों के जीवित होने की आस भी छोड़ दी है।

चंगुल में फँसने वाली हिंदू पीड़िताएँ लगातार नए खुलासे कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंगलुरु की रहने वाली पीड़िता ने बदर सिद्दीकी के बारे में कई बातें बताईं। पीड़िता के इनुसार, उसकी पहचान राजू राठौर नाम के व्यक्ति से हुई।

राजू ने युवती से दोस्ती की और बताया कि वह सहारनपुर का रहने वाला है। उसने झाँसा दिया कि दुबई में पीड़िता को एक बढ़िया नौकरी मिल सकती है। साथ ही वह एक अमीर शेख से उसका निकाह भी करवा देगा।

झाँसे में आई पीड़िता 2021 में दुबई पहुँच गई। उसे बाद में पता चला कि राजू राठौर असल में ‘वसीम’ है। वसीम ने छांगुर पीर का नाम लेकर उससे बात करवाई। छांगुर ने पीड़िता को फोन पर अपने ‘मुरीद’ बदर सिद्दीकी से मिलने को कहकर धर्मांतरण की बारे में कहा।

हालाँकि बदर और वसीम के दबाव डालने के बावजूद पीड़िता ने धर्म बड़ले से मना कर दिया। इसके बाद उसे चुप रहने की धमकी देकर वापस भारत भेज दिया गया। पीड़िता ने वापस आकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को इसके बारे में ईमेल लिखा। 6 जून को गोरखपुर में सीएम योगी से जनता दरबार में जब पीड़िता ने अपनी बात कही तो छांगुर को गिरफ्तार किया गया।

परिवार के खिलाफ जिसके लिए गई, उसी ने किया लापता

इसके अलावा मेरठ की रहने वाली एक अन्य युवती आशा नेगी ने LIC एजेंट महमूद सिद्दीकी से बीमा करवाया। इसके बाद उसके बेटे बदर सिद्दीकी ने आशा से नजदीकियाँ बढ़ाईं और प्रेम जाल में फाँस लिया। 2017 में आशा ने परिवार के खिलाफ जाकर धर्म परिवर्तन किया और बदर से निकाह कर लिया।

2019 में आशा ने अपने भाई को फोन पर शौहर बदर की प्रताड़ना के बारे में बताया। साथ ही उसे अपनी रोती हुई फोटो और बदर के पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी के फोटो खींचकर वॉट्सऐप पर भेज दिए। परिवार के पास बस यही एक आखिरी निशानियाँ हैं। इसके बाद से आशा का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है।

आशा के परिवार वाले बदर के मेरठ वाले घर भी पहुँचे। वहाँ पर बदर के अब्बू-अम्मी ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बदर से उनका अब कोई वास्ता नहीं है। आशा की माँ मेरठ के सिविल लाइन्स थाने पर भी गईं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि परिजनों को ये भी नहीं पता कि उनकी बेटी जिंदा है या मर गई। इसके अलावा बदर ने जिन 5 लड़कियों को फँसाया था, उनमें से आशा के अलावा 2 और लड़कियों का कोई अता-पता नहीं है। ये दोनों लड़कियाँ 2021 में लापता हुईं। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई लेकिन कोई सफलता नहीं मिला।

आशा के गायब होने के 6 वर्ष बाद जाकर 24 जुलाई 2025 में FIR दर्ज की है। पुलिस ने बदर को खोजने के लिए 2,00,000 रुपए का इनाम भी रखा है। ATS ने भी उसके खिलाफ जाँच तेज कर दी है।

फोटो साभार- दैनिक भास्कर

खाड़ी देशो में मिले खाते

रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि पहले भी जाँच के दौरान क्राइम ब्रांच जब बदर तक पहुँचने के बिल्कुल करीब थी, उस समय मेरठ में तैनात रहे एक जज ने इंस्पेक्टर को अपने कमरे में बुलाया और केस पर पूछताछ की। इसके बाद उसकी टीम को इस केस से दूर होने तक के लिए कह दिया था।

छांगुर के गिरोह में शामिल नीतू उर्फ नसरीन और नवीन उर्फ जमालुद्दीन के नाम पर कई खाड़ी देशों में बैंक खाते मिले हैं। इनमें अल नहदा, अल अंसारी एक्सचेंज, एमिरेट्स NBD, वोस्ट्रो और मसरफ बैंकों के नाम सामने आए हैं। इनमें ट्रांजैक्शन करने के लिए नीतू और नवीन 2014 से 2020 के बीच 30 से अधिक बार UAE का दौरा किया।

आगरा धर्मांतरण के तार दुबई- पाकिस्तान से जुड़े

आगरा के धर्मांतरण गिरोह के सरगना अब्दुल रहमान ने भी पुलिस की पूछताछ में अपने कई राज खोले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रहमान ने धर्मांतरण के इस खेल के लिए पाकिस्तान से फंडिंग मिलने की बात भी कुबूल की है। साथ ही ये पूरा रैकेट दुबई से संचालित किया जाता था। इसके अलावा उसे कनाडा, अमेरिका, दुबई के साथ अन्य खाड़ी देशों से फंडिंग की बात भी सामने आ चुकी है।

आगरा धर्मांतरण के मामले में पुलिस अब तक 6 राज्यों से 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रहमान के साथ गोवा से आयशा को भी गिरफ्तार किया गया है। रहमान ने बताया कि लड़कियों का धर्म परिवर्तन करने के बाद उन्हें ‘रिवर्ट मुस्लिम’ नाम के एक ग्रुप में जोड़ा जाता था। इस व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन असल में एक पाकिस्तानी तनवीर नाम का शख्स है। ये दुबई में रहता है। इसी ग्रुप के जरिए लड़कियों को दीनी तालीम, नमाज पढ़ने और अन्य इस्लामी बातें सिखाईं जाती थीं।

पुलिस पूछताछ में आयशा के मोबाइल से तनवीर की ओर से भेजे गए तीन हिंदू लड़कियों की वीडियो मिली है जिनका धर्म परिवर्तन किए जाने की तैयारी चल रही थी। पर उससे पहले ही पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने उनका काम बिगाड़ दिया।

पुलिस के द्वारा रेस्क्यू की गई 4 में से 1 लड़की ने बताया कि उसके पिता सेवानिवृत्त फौजी हैं। वह देहरादून पढ़ने गई थी। वहाँ उसकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़की उरूज से हुई थी। उसने उसका ब्रेनवॉश कर 2022 अब्दुल रहमान से मिलवाया। उसके बाद उसे कलमा पढ़वाकर धर्मांतरण किया गया। इसके बाद उसे कहा गया कि एक मुस्लिम की तीसरी या चौथी बीवी बनना पड़ेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लड़की का निकाह एक रिवर्ट मुस्लिम अब्दुल्ला से ही रहमान के घर पर ही करवा दिया गया। पुलिस के अनुसार, धर्मांतरण के लिए लड़कियों को दिल्ली से कोलकाता ले जाने की तैयारी हो रही थी।

धर्मांतरण गिरोह के मामले में लड़कियों से दोस्ती की गई और धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश किया गया। जिनका ब्रेनवॉश हो गया, उन्हीं पर धर्म परिवर्तन का पूरा जाल बिछाकर उन्हें देश या विदेशों में अपने काले कारनामों को अंजान देने के लिए भेज दिया गया।

किसी अन्य धर्म के बारे में जानकारी होने की जिज्ञासा अच्छी बात है, लेकिन उस धर्म के झाँसे में आकर अपनी पहचान बदल लेना सामान्य नहीं है बल्कि ये भविष्य के किसी बड़े खतरे की ओर इशारा है। इस बारे में सोचना और सतर्क रहने का काफी जरूरत है।

सिद्धार्थनगर के अल फारुक कॉलेज का मैनेजर शब्बीर अहमद गिरफ्तार, नौकरी के नाम पर करवा रहा था धर्मांतरण: छांगुर पीर से निकला कनेक्शन, शिकायतकर्ता बोला- ₹20 लाख का लालच भी दिया

उत्तर प्रदेश के जिला सिद्धार्थनगर के एक इंटर कॉलेज से धर्मांतरण का खेल सामने आया है। यहाँ नौकरी दिलाने की आड़ में लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा था। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने के बाद यूपी पुलिस ने आरोपित मैनेजर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपित के तार छांगुर पीर से भी जुड़े हो सकते हैं पुलिस इसे लेकर भी जाँच कर रही है।

इस पूरे मामले को लेकर ऑपइंडिया ने शिकायकर्ता अखंड प्रताप सिंह से बातचीत की। बातचीत में शिकायतकर्ता ने इंटर कॉलेज के मैनेजर मोहम्मद शब्बीर अहमद पर गंभीर आरोप लगाए और कॉलेज में शिक्षा की आड़ में हो रहे धर्मांतरण के खेल का भी खुलासा किया है।

दरअसल मामला सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाना क्षेत्र के अल फारुक इंटर कॉलेज का है और शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह पुत्र उमेश प्रताप सिंह नगर पंचायत डुमरियागंज जिला सिद्धार्थनगर के मूल निवासी हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी लिखित शिकायत में बताया कि वर्ष 2020-21 के सत्र में उन्हें अल फारुक इंटर कॉलेज में बाबू के रिक्त पद की जानकारी मिली। इस पर जब वह कॉलेज गए तो मैनेजर शब्बीर अहमद ने 15 हजार रुपए महीने देने की बात करते हुए, नौकरी ज्वाइन करने को बोला। इस पर अगले दिन से प्रताप सिंह कॉलेज जाने लगे।

अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक, करीब 8-10 दिन बाद मैनेजर शब्बीर अहमद ने उन्हें अपने ऑफिस बुलाया। ऑफिस में बैठे चार-पाँच लोगों के बीच ड्यूटी एग्रीमेंट के नाम पर मुझसे 100 रुपए के ब्लैंक स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद मैनेजर शब्बीर ने हिंदू धर्म और पूजा पद्धति को लेकर विरोध करते हुए अखंड प्रताप सिंह से इस्लाम धर्म स्वीकार करने की बात कही। जब इंकार किया तो उन पर दवाब बनाया गया। फिर इस्लाम स्वीकार करने पर लालच देते हुए व्हाट्सऐप कॉल से विदेश में बैठे एक मौलाना से बात कराई।

अखंड प्रताप सिंह द्वारा दी गई शिकायत की प्रति

मौलाना ने कॉल पर इस्लाम में आने की दावत देते हुए इस्लाम स्वीकार करने पर 20 लाख रुपए देने की बात कही और फिर बड़ोदरा-गुजरात जमात में मिलने के लिए कहा। इसके बाद अखंड प्रताप कैसे भी मैनेजर की ऑफिस से निकल गए। घटना के कुछ दिन बाद से शब्बीर सादे स्टांप पेपर पर धर्म परिवर्तन की बात लिखकर दिखाते हुए अखंड प्रताप पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाता रहा। विरोध करने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

पहले भी की थी पुलिस में शिकायत

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक, इस संबंध में वह पहले नजदीकी थाने में शिकायत लेकर गए थे लेकिन थाना पुलिस ने मामले की शिकायत एसएसपी और मुख्यमंत्री से करने की बात करते हुए थाने से टाल दिया था। प्रताप सिंह का दावा है कि आरोपित शब्बीर अहमद करोड़पति होने के साथ ही काभी प्रभावशाली व्यक्ति है। इसी के चलते प्रताप सिंह डर कर घर बैठ गए, लेकिन झांगुर पीर की धर्मांतरण मामले में गिरफ्तारी के बाद आत्मविश्वास बढ़ा तो अखंड प्रताप ने मीडिया में आकर अपनी पीड़ा बताई और पुलिस को लिखित शिकायत दी।

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह

मैनेजर शब्बीर अहमद गिरफ्तार, भेजा गया जेल

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह की लिखित शिकायत के बाद अल फारुक इंटर कॉलेज के मैनेजर मोहम्मद शब्बीर अहमद को सिद्धार्थनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इटवा पुलिस और इस मामले की जाँच कर रहे चौकी इंचार्ज अनिल ओझा ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपी शब्बीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। कुछ दस्तावेज भी पुलिस ने इंटर कॉलेज से बरामद किए हैं। शिकायतकर्ता के आरोपों को लेकर मामले की जाँच की जा रही है। छांगुर पीर से कनेक्शन के एंगल से भी पुलिस जाँच कर रही है।

आरोपित शब्बीर के समर्थन में आए भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर रावण

मामले में आरोपित शब्बीर अहमद की गिरफ्तारी के बाद भीम आर्मी चीफ ने एक ट्वीट के माध्यम से शब्बीर अहमद को धार्मिक शिक्षा, सामाजिक समरसता और सद्भाव का प्रतीक बताया, साथ ही शिकायतकर्ता के आरोपों को निराधार और फर्जी करार दिया। इस पर अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि चन्द्रशेखर रावण अपनी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें इतना ही सामाजिक बनने का शौक है तो वह अपने संसदीय क्षेत्र नगीना की चिंता करे, बाकी पूरा प्रदेश सीएम योगी संभाल लेंगे।

जब 10000 फीट की ऊँचाई पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दिखाई औकात… कारगिल युद्ध में देश के 527 जवान हुए थे बलिदान, 323+ घायल: PM बोले- ये उस शौर्य और साहस को याद करने का दिन

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शनिवार (26 जुलाई 2025) को करगिल वॉर मेमोरियल में रीथ लेइंग सेरेमनी की गई। कारगिल विजय दिवस की इस 26वीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को शुभकामनाएँ दी।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह अवसर हमें माँ भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है, जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के लिए मर-मिटने का उनका जज्बा हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।”

वर्ष 1999 में इसी दिन भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की थी। पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ भारतीय सेना का यह युद्ध मई से जुलाई 1999 तक चला था।

क्यों और कब हुआ कारगिल युद्ध?

अप्रतिम साहस का प्रतीक ‘कारगिल विजय दिवस’ हर साल 26 जुलाई को पूरे भारत में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर होता है, जिन्होंने 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की।

जानकारी के अनुसार, दरअसल पाकिस्तानी फौज ने ‘ऑपरेशन बदर’ के तहत भारत की सीमा में घुसपैठ की। कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा को पार कर पाक ने कई फौजियों और आतंकवादियों को गुप्त रूप से भेजा।

इसी ऑपरेशन में भारत के कैप्टन सौरभ कालिया सहित 5 भारतीय सैनिकों को पाकिस्तानी फौज ने पकड़ लिया। उन्हें प्रताड़ित किया और मार दिया था। उनकी बेरहमी का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ था।

पाकिस्तान की फौज और आतंकवादियों ने मिलकर भारतीय सीमाओं में घुसपैठ के बाद कई ऊँची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद साल 1999 के मई महीने में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ नामक अभियान चलाकर लगभग दो महीने की कठिन और भीषण लड़ाई की और इन क्षेत्रों को फिर से अपने नियंत्रण में लिया।

भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को कैसे सिखाया था सबक

युद्ध के दौरान सबसे पहले तोलोलिंग की चोटी भारतीय सेना के कब्जे में आई। इसके बाद भारतीय सेना और पाकिस्तानी आतंकवादियों के बीच 11 घंटे तक लड़ाई चली। इसमें टाइगर हिल्स पर भी भारत ने जीत हासिल की और अगली कड़ी में भारतीय सेना द्वारा द्रास पर कब्जा कर लिया गया।

युद्ध में एक और सफलता तब मिली जब भारतीय फौज ने ‘थ्री पिंपल्स’ एरिया पर कब्जा किया। ‘थ्री पिंपल्स’ एरिया में नॉल, ब्लैक रॉक हिल और थ्री पिंपल्स पहाड़ियाँ शामिल थीं। पाकिस्तानी घुसपैठियों से एक और छोटे संघर्ष के बाद सेना ने प्वाइंट 4700 पर जीत हासिल की थी।

25 जुलाई 1999 को पाकिस्तान ने भारतीय सेना के अदम्य साहस से थक-हारकर कदम पीछे कर लिए और 26 जुलाई को आधिकारिक तौर पर भारत की विजय के साथ कारगिल में इस युद्ध की समाप्ति हुई।

इस युद्ध में भारत के 527 जवान बलिदान हुए, वहीं 363 जवान घायल हुए थे। यह युद्ध अत्यंत विषम और कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था। भारतीय सैनिकों ने इस युद्ध में ऊँचे पहाड़ी इलाकों, बर्फबारी और कम ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए अद्भुत साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 10 हजार फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित बटालिक, कारगिल, लेह और बाल्टिस्तान के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण कारगिल युद्ध का केंद्र बिंदु था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र यादव, राइफलमैन संजय कुमार, कैप्टन अमोल कालिया, लेफ्टिनेंट बलवान सिंह जैसे अनेक वीर जवानों ने असाधारण वीरता दिखाई। इनमें से कई जवानों को भारत सकरार द्वारा मरणोपरांत परमवीर चक्र और अन्य वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक सैन्य विजय का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन भारतीय जनता के लिए देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। इस दिन देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, उनके योगदान को याद किया जाता है और सेना के पराक्रम को सलाम किया जाता है।

आज देश का युवा कारगिल युद्ध से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा की भावना को अपनाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि देश की रक्षा में हमारे वीर जवानों का बलिदान सर्वोपरि है। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस और आत्मबलिदान की अमिट कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, निष्ठा और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता, ट्रंप और मेलोनी पिछड़े: ‘मॉर्निंग कन्सल्ट’ की सर्वे रिपोर्ट में जारी हुए आँकड़े, भारतीय पीएम बने 75% लोगों की पसंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बन गए हैं। अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कन्सल्ट (Morning Consult) ने जुलाई 2025 की अपनी सर्वे रिपोर्ट शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को जारी की। इसके अनुसार, पीएम मोदी को 75% लोगों की अप्रूवल रेटिंग मिली है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट ने इसके लिए एक सर्वे किया था। सर्वे में 4 जुलाई 2025 से 10 जुलाई 2025 तक का डेटा शामिल किया गया है। इसके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के नेताओं में 75% अप्रूवल रेटिंग के साथ सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता हैं। सर्वे में विश्व के 20 से अधिक देशों के नेताओं की रेटिंग शामिल की गई है।

पीएम मोदी के सबसे लोकप्रिय नेता चुने जाने के बाद बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने लिखा, “एक अरब से ज्यादा भारतीयों के प्रिय और दुनिया भर में लाखों लोगों के सम्मान के पात्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मॉर्निंग कंसल्ट ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर में शीर्ष पर हैं। दुनिया भर में सर्वोच्च रेटिंग वाले और सबसे विश्वसनीय नेता। मजबूत नेतृत्व। वैश्विक सम्मान। भारत सुरक्षित हाथों में है।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पीछे छोड़ जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले प्रधानमंत्री भी बन गए हैं। मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में भाग लेने वाले कुल 75% लोगों ने PM मोदी को एक लोकतांत्रिक विश्व नेता के रूप में पसंद किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मॉर्निंग कंसल्ट ने बताया कि लेटेस्ट अप्रूवल रेटिंग 4 से 10 जुलाई, 2025 तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित हैं। रेटिंग हर देश में वयस्कों के विचारों का सात दिन का सिंपल मूविंग एवरेज दिखाती हैं।

फोटो साभार- इंडिया टुडे

पीएम मोदी के बाद साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई हैं। उन्हें 57% वोट मिले हैं। वहीं सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 44% वोट के साथ आठवें स्थान पर हैं।

लिस्ट में कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चौथे स्थान पर हैं। उन्हें 56% वोट मिले हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के एंथोनी अल्बानीस लिस्ट में 54% वोट के साथ पाँचवें स्थान पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे कम वोटों के साथ पोलैंड के डोनाल्ड टस्क नौवें स्थान पर हैं। वहीं इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी दसवें स्थान पर हैं।

जब माँ कौशकी ने किया असुरों का संहार, माँ काली ने दैत्यों का खून पिया… दिल्ली के कालिका मंदिर का 3000 वर्ष पुराना है इतिहास, जानें कैसे शुरू हुई यहाँ पूजा-पाठ

देश की राजधानी दि्ल्ली की धड़कती रफ्तार के बीच एक ऐसा स्थान है जहाँ आत्मा को नई ऊर्जा मिलती है। यह जगह है श्री कालकाजी मंदिर। देवी काली को समर्पित ये मंदिर दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित है। यहाँ देवी काली को ‘कालिका’ के नाम से पूजा जाता है। माँ कालिका को शक्ति और समय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का नाम भी ‘कालकाजी’ इसी कारण पड़ा है।

नवरात्रों में जहाँ ये मंदिर एक महाआरती स्थल बन जाता है। वहीं, रोजमर्रा में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें गवाह हैं कि मंदिर में केवल देवी की मूर्ति नहीं बल्कि माँ कालिका का जीवंत रूप विराजमान है। कहा जाता है कि सच्चे मन से पुकारने वाले भक्तों की आवाज माता जरूर सुनती हैं। दिल्लीवासी हर शुभ कार्य से पहले माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर (साभार : HindusthanPost)

मंदिर रोज़ाना खुलता है। सुबह 4 बजे से लेकर रात 11 बजे तक भक्त दर्शन के लिए पहुँच सकते हैं। सुबह की मंगला आरती और शाम की संध्या आरती यहाँ की खास हैं। इस दौरान देवी को विशेष श्रृंगार में सजाया जाता है और मंदिर का वातावरण दिव्य संगीत से भर जाता है।

मंदिर का इतिहास

कालकाजी मंदिर को कालकाजी तीर्थस्थल भी कहा जाता है। मंदिर का इतिहास तीन हजार वर्षों से भी पुराना माना जाता है। यानी महाभारत काल से भी पहले की स्थापना है। मान्यता है कि यहीं पर माँ ने असुरों का संहार कर धरती से बुराई को मिटाया था। उसी क्षण से यह स्थान देवी के विशेष रूप का प्रतीक बन गया।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कालका देवी की उत्पत्ति मंदिर के वर्तमान स्थान दिल्ली के पूर्वी कैलाश के अरावली हिल्स में हुई। सतयुग के दौरान कई देवता सदियों पहले श्री कालका जी मंदिर के आसपास के क्षेत्र में रहते थे। लाखों साल पहले दो असुरों ने मंदिर स्थल के पास रहने वाले देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया। परेशान देवताओं ने देवी पार्वती से मदद माँगी और पार्वती के मुख से देवी कौशकी प्रकट हुईं। उन्होंने इन विशाल जीवों पर हमला किया और मारने में कामयब रहीं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर ( साभार : So City)

इस दौरान इन जीवों का खून धरती पर गिर गया, जिससे हज़ारों ऐसे और असुर पैदा हो गए। इतने सारे अपवित्र जीवों से एक साथ लड़ना कौशकी देवी के लिए बड़ा काम था। इसका साथ देने के लिए माँँ पार्वती ने अपना अलग अवतार लिया, जो देवी काली थीं।

देवी काली ने कौशकी देवी द्वारा मारे गए दैत्यों से गिरे खून को चूस लिया। दोनों देवियों ने मिलकर दैत्यों के खतरे को पूरी तरह से मिटा दिया। इसके बाद से देवी काल को क्षेत्र के दिव्य प्राणियों की प्रमुख माना जाने लगा। यही देखते हुए देवी ने अनिश्चित काल तक वहीं रहने का फैसला किया।

मंदिर की संरचना

मंदिर की वास्तुकला हिंदू मंदिरों की पारंपरिक शैली में बनी है। माना जाता है कि इसका सबसे पुराना हिस्सा मराठों द्वारा 1764 ई. के आसपास स्थापित किया गया था। कालका जी मंदिर पर संगमरमर की नक्काशी शानदार है। नींव ईंट की है, लेकिन ब्लॉकों को प्लास्टर किया गया है और फिर अधिक भव्यता के लिए संगमरमर से ढका गया है।

मंदिर की बाहरी संरचना एक पिरामिड के आकार के टॉवर द्वारा संरक्षित है। केंद्र के कमरे में 12 पक्ष हैं, जिसके अपने प्रवेश द्वार हैं। हर पक्ष की लंबाई 24 फीट है। सभी दरवाज़े गलियारे की ओर ले जाते हैं। इनमें से हर गैलरी आठ फीट और नौ इंच चौड़ी है। इसमें तीन बाहरी द्वार भी हैं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर ( साभार : skmpsc.org)

मंदिर के बीचोबीच संगमरमर का चबूतरा है, जिसपर पत्थर को तराश कर माँ की काली की मूर्ति रखी गई है। इसी मूर्ति पर एक शिलालेख है जिसपर देवी का नाम हिंदी में खोदा गया है। कालकाजी की प्रतिमा संगमरमर की रेलिंग से सुरक्षित हैं। इन सलाखों और चबूतरे पर नस्तलक शैली में सुलेख भी अंकित है।

नवरात्रों पर माँ का खास शृंगार

नवरात्रों के दौरान यह मंदिर एक उत्सव का रूप ले लेता है। नौ दिनों तक यहाँ मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। माता के जयकारों से गूंजता वातावरण, रंग-बिरंगे झूले, भक्ति संगीत और पूजा-पाठ का माहौल हर किसी के हृदय को छू जाता है। मंदिर के बाहर का चौक इन दिनों जीवन से भर उठता है। दुकानों में प्रसाद, खिलौने, चूड़ियाँ और धार्मिक वस्तुएँ बिकती हैं। हर कोना माँ की भक्ति में डूबा नजर आता है।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर (साभार : Travel -NativePlanet)

कैसे पहुँचे कालकाजी मंदिर?

दिल्ली मेट्रो की वायलेट और मैजेंटा लाइन पर ‘कालकाजी मंदिर’ नाम का स्टेशन स्थित है, जो मंदिर से मात्र पाँच सौ मीटर की दूरी पर है। स्टेशन से मंदिर तक पैदल कुछ ही मिनटों में पहुँचा जा सकता है या फिर स्थानीय ऑटो से भी जाया जा सकता है। इसके अलावा, दिल्ली की डीटीसी बसें, टैक्सियाँ और निजी वाहन से भी यहाँ पहुँचना बहुत सुगम है।

एक्टिविस्ट ‘दिखने’ की चाहत में टूटी झुग्गियों में पहुँचे राहुल गाँधी, SC के आदेश पर हुई डिमोलिशन ड्राइव से की पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश: फिर भी युवराज रहे खाली ‘हाथ’

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को दिल्ली के अशोक विहार और वजीरपुर के जेलर वाला बाग की झुग्गियों में पहुँच गए। ये वही जगह है, जहाँ पिछले महीने डीडीए (दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने झुग्गियों पर बुलडोजर चलाया था। राहुल गाँधी ने वहाँ मौजूद लोगों से मुलाकात की, उनकी बात सुनी और आश्वासन दिया कि कॉन्ग्रेस उनकी लड़ाई को कोर्ट तक ले जाएगी और संसद में भी यह मुद्दा उठाएगी।

हालाँकि सवाल यह है कि क्या यह दौरा वाकई लोगों की मदद के लिए था या फिर यह सिर्फ पॉलिटिक्स का एक और मौका था, जिसे राहुल गाँधी ने भुनाने की कोशिश की?

क्या है पूरा मामला?

जेलर वाला बाग में डीडीए ने 16 जून 2025 को एक बड़ा डिमोलिशन ड्राइव चलाया था। इस कार्रवाई में करीब 500 से ज्यादा झुग्गियों को तोड़ा गया, जिसके बाद कई परिवार बेघर हो गए। डीडीए का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई, क्योंकि इन झुग्गियों ने डीडीए की जमीन और रेलवे पटरी के आसपास अवैध कब्जा किया था। डीडीए ने पहले लोगों को नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन कई लोगों ने जमीन खाली करने में इंटरेस्ट नहीं दिखाया।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू यह है कि सरकार ने इन झुग्गीवासियों के लिए पुनर्वास की योजना बनाई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अशोक विहार फेज-2 में स्वाभिमान अपार्टमेंट बनाए गए हैं, जहाँ 1675 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट्स तैयार किए गए हैं।

इनमें से 1078 पात्र परिवारों को फ्लैट्स अलॉट हो चुके हैं। प्रत्येक फ्लैट की लागत 25 लाख रुपये है, लेकिन पात्र लोगों को सिर्फ 1.42 लाख रुपये और 30,000 रुपये रखरखाव के लिए देने हैं। बाकी लागत सरकार वहन कर रही है। डीडीए का कहना है कि यह योजना ‘जहाँ झुग्गी, वहीं मकान’ के तहत चल रही है, जिसे 2015 में तत्कालीन दिल्ली सरकार ने मंजूरी दी थी।

राहुल गाँधी का दौरा झुग्गी वासियों की मदद या पॉलिटिक्स?

राहुल गाँधी का यह दौरा तब हुआ, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था। अचानक जेलर वाला बाग पहुँचकर उन्होंने वहाँ के लोगों से बात की और उनकी समस्याएँ सुनीं। उन्होंने लोगों से पूछा कि यह इलाका कितने एकड़ में है और डीडीए ने कितने एकड़ में बुलडोजर चलाया। जवाब में एक व्यक्ति ने कहा कि 100 एकड़। इस पर राहुल गाँधी का जवाब था, “भइया, सौ एकड़ तो मैं पैदल चला हूं।” इस बातचीत का वीडियो कॉन्ग्रेस ने अपने ‘X’ अकाउंट पर शेयर किया, जिसमें लिखा गया कि राहुल गाँधी ने प्रभावित परिवारों का दर्द बाँटा और उनकी शिकायतें सुनीं।

लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आईं। कुछ यूजर्स ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर तंज कसा। एक यूजर पीतांबरा दत्त शर्मा ने लिखा, “इनमें से किसी ने जगह को मोल खरीदा है क्या? जो लोग सरकार से मोल प्लॉट खरीद कर टैक्स देकर मकान बनाते हैं, वो तो मूर्ख ही हुए न?”

एक अन्य यूजर, मुकेश अग्रवाल ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गाँधी कभी पाकिस्तान से आए विस्थापितों की झुग्गियों में गए? राजेश जैन नाम के यूजर ने तो कॉन्ग्रेस पर ही आरोप लगाया कि वह रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को दोबारा बसाने की कोशिश कर रही है।

झुग्गियों को ढहाने के मामले की क्या है सच्चाई?

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का दावा है कि डीडीए की कार्रवाई से लोग बेघर हो गए और उन्हें फ्लैट्स में पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फ्लैट्स में साफ पानी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। वहीं, कुछ ने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद उनके घर तोड़े गए।

लेकिन डीडीए पक्ष इससे अलग है। डीडीए का कहना है कि जिन लोगों को फ्लैट्स अलॉट किए गए हैं, उन्हें सस्ती कीमत पर पक्के मकान दिए जा रहे हैं। जो लोग पात्र नहीं थे, उनके पास 2015 से पहले का वैध राशन कार्ड या मतदाता सूची में नाम नहीं था। ऐसे लोगों को अपीलीय प्राधिकरण में अपील करने का मौका दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई को लेकर बीजेपी ने साफ कहा कि दिल्ली सरकार झुग्गीवासियों को पक्के मकान देकर अपना वादा पूरा कर रही है। यह योजना न सिर्फ कानूनी है, बल्कि लोगों को बेहतर जीवन देने का प्रयास भी है। हालाँकि राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस इसे बीजेपी की नाकामी बता रहे हैं और इसे एक प्रोपेगेंडा के तौर पर पेश कर रहे हैं कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है।

हालाँकि अशोक विहार में डिमोलिशन ड्राइव के समय ऑपइंडिया की टीम भी मौके पर पहुँची थी। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ये सब कुछ बीजेपी और दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश है, जबकि सच्चाई ये है कि रेखा गुप्ता की सरकार अपने वादों को पूरा कर रही है। रेखा गुप्ता की बीजेपी सरकार झुग्गी में रहने वालों को पक्का मकान देने का वादा पूरा कर रही है।

राहुल गाँधी की पॉलिटिक्स का पुराना पैटर्न

राहुल गाँधी का यह कोई पहला मौका नहीं है, जब वह किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में आए हों। चाहे वह किसान आंदोलन हो, बेरोजगारी का मुद्दा हो या कोई और सामाजिक मसला, राहुल गाँधी अक्सर ऐसे मौकों पर लोगों के बीच पहुँचते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं। लेकिन क्या इन वादों का कोई ठोस नतीजा निकलता है? यह सवाल बार-बार उठता है।

उदाहरण के लिए, 2020 में जब दिल्ली में दंगे हुए थे, तब भी राहुल गाँधी ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया था और सरकार पर निशाना साधा था। लेकिन उनके इस दौरे का कोई खास असर नहीं हुआ।

इसी तरह साल 2023 में छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, जब वहाँ 1000 से ज्यादा झुग्गियों को तोड़ा गया था। उस वक्त राहुल गाँधी ने इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बार भी यही सवाल उठाया कि जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब राहुल गाँधी को गरीबों का दर्द क्यों नहीं दिखा? यह सवाल उनके इरादों पर संदेह पैदा करता है।

राहुल गाँधी की छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो मुद्दों को उठाता तो है, लेकिन उसका कोई ठोस समाधान पेश नहीं करता। उनकी रैलियों और बयानों में अक्सर भावनात्मक बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से उनका कनेक्शन कम ही दिखता है। जेलर वाला बाग के मामले में भी यही लगता है कि राहुल गाँधी ने इसे एक पॉलिटिकल मौके के तौर पर देखा, न कि वाकई लोगों की मदद करने के इरादे से।

लोगों को गुमराह करने की कोशिश?

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का यह दावा कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है, कई मायनों में भ्रामक लगता है। डीडीए की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी, और यह पूरी तरह कानूनी थी। जिन लोगों को फ्लैट्स अलॉट किए गए हैं, उन्हें सस्ती कीमत पर पक्के मकान मिल रहे हैं। जो लोग पात्र नहीं थे, उनके लिए अपील का रास्ता खुला है। ऐसे में यह कहना कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है, हकीकत से परे है।

कॉन्ग्रेस का यह प्रोपेगेंडा लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश लगता है। राहुल गाँधी ने अपने दौरे में लोगों से मुलाकात तो की, लेकिन क्या वह इस मामले में कोई ठोस समाधान लेकर आए? नहीं। उनके आश्वासनों में कोर्ट और संसद में मुद्दा उठाने की बात तो थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि इससे लोगों को तुरंत राहत कैसे मिलेगी। यह सब सिर्फ पॉलिटिकल पॉइंट्स स्कोर करने की कोशिश नजर आती है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस बात को समझ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस को गरीबों का दर्द सिर्फ कैमरे के सामने दिखता है।” यह टिप्पणी राहुल गाँधी की मंशा पर सवाल उठाती है। अगर वह वाकई लोगों की मदद करना चाहते, तो शायद वह डीडीए और सरकार से बातचीत करके कोई रास्ता निकालने की कोशिश करते। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने इसे सिर्फ एक पॉलिटिकल इवेंट बना दिया।

एकतरफा नरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई ध्वस्त

बीजेपी और डीडीए का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पारदर्शी और कानूनी थी। ‘जहाँ झुग्गी, वहीं मकान’ योजना के तहत सरकार ने झुग्गीवासियों को पक्के मकान देने का वादा किया था, जिसे वह पूरा कर रही है। 1675 फ्लैट्स में से 1078 पहले ही अलॉट हो चुके हैं, और बाकी जल्द ही अलॉट किए जाएँगे। यह योजना न सिर्फ लोगों को बेहतर जीवन दे रही है, बल्कि दिल्ली को और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी एक कदम है।

हाँ, यह सच है कि कुछ लोगों को अभी तक फ्लैट्स नहीं मिले, और कुछ ने फ्लैट्स की सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। लेकिन डीडीए का कहना है कि इन समस्याओं को जल्द ही हल किया जाएगा। डीडीए का यह भी तर्क है कि अवैध कब्जों को हटाना जरूरी था, क्योंकि यह शहर की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है।

पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश या लोगों का भला?

राहुल गाँधी का जेलर वाला बाग दौरा और उनकी बातें सुनने में तो भावनात्मक लगती हैं, लेकिन गहराई से देखें तो यह सिर्फ पॉलिटिक्स की चमक नजर आती है। बीजेपी और डीडीए अपनी योजना के तहत लोगों को पक्के मकान दे रहे हैं, और यह पूरी प्रक्रिया कानूनी है। ऐसे में राहुल गाँधी का इसे प्रोपेगेंडा बनाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश लोगों को गुमराह करने जैसा लगता है।

कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी को अगर वाकई लोगों की चिंता है, तो उन्हें सरकार के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान ढूँढना चाहिए। सिर्फ कैमरे के सामने जाकर आँसू बहाने और बड़े-बड़े वादे करने से कुछ नहीं होगा। दिल्ली के लोग अब समझने लगे हैं कि कौन उनकी मदद कर रहा है और कौन सिर्फ पॉलिटिक्स की रोटियाँ सेंक रहा है। राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस को एक बार फिर से शायद निराशा ही ‘हाथ’ लगने वाली है।

लव जिहाद गैंग का मास्टरमाइंड आरिफ अंसारी गिरफ्तार, 150+ लड़कियों के अश्लील फोटो-वीडियो बरामद: रेप-धर्मांतरण-तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा, UP के बिजनौर का मामला

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चाँदपुर कस्बे में एक सनसनीखेज लव जिहाद मामले ने स्थानीय हिंदुओं को झकझोर दिया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित आरिफ अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे लव जिहाद गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर में शंकर मूर्ति चौराहे के पास गैस स्टोव और चूल्हा मरम्मत का काम करने वाले आरिफ पर हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने, उनका यौन शोषण करने, ब्लैकमेलिंग, जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से 150 से अधिक लड़कियों और महिलाओं की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बरामद किए हैं, जिसके बाद पूरे नेटवर्क की जाँच तेज कर दी गई है।

मामला तब सामने आया जब एक पीड़िता के भाई ने पुलिस को बताया कि आरिफ ने उनकी बहन को नशीली गोली देकर उसका शोषण किया। उसने पीड़िता का फर्जी आधार कार्ड ‘जिया आरिफ’ के नाम से बनवाया और पासपोर्ट के लिए उनके घर के पते का इस्तेमाल किया। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान इस साजिश का खुलासा हुआ।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरिफ ने उसे धोखे से नशीला पदार्थ खिलाकर अश्लील फोटो और वीडियो बनाए, जिनका इस्तेमाल कर वह उसे ब्लैकमेल करता था। उसने कई बार उसका बलात्कार किया और धर्मांतरण के लिए दबाव डाला।

पीड़िता के अनुसार, आरिफ का गैंग अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाता था और उन्हें विदेश खासकर दुबई भेजने की साजिश रच रहा था। पुलिस को आरिफ के मोबाइल से जाँच के दौरान 150 से अधिक लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले है।

बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) विनय कुमार सिंह ने बताया कि आरिफ के खिलाफ जालसाजी, ब्लैकमेलिंग, बलात्कार, जान से मारने की धमकी और मानव तस्करी के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

प्रारंभिक जाँच में संदेह है कि यह नेटवर्क संगठित रूप से हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर धर्मांतरण और तस्करी का रैकेट चला रहा था। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि बरामद तस्वीरें और वीडियो इस साजिश से कैसे जुड़े हैं।

मामले के खुलासे के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने चाँदपुर थाने के बाहर प्रदर्शन कर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस बीच, सोशल मीडिया पर आरिफ की कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें वायरल होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों में आक्रोश है, क्योंकि आरिफ शादीशुदा होने के बावजूद लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में लिप्त था।

पुलिस ने पूरे गैंग को पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की हैं और जाँच को गति दी है। इस मामले ने बिजनौर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।