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MP नवनीत राणा और पति MLA रवि राणा को फिर से कोर्ट का नोटिस, पूछा – क्यों न जारी हो गैर-जमानती वॉरंट? मुंबई पुलिस ने की है शिकायत

महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) और उनके विधायक पति रवि राणा की मुश्किलें अब फिर बढ़ सकती हैं। मुंबई की सेशन कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर दिया है। नवनीत राणा और रवि राणा से सेशन कोर्ट ने पूछा है कि उन दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी क्यों नहीं किया जाए।

बता दें कि हनुमान चालीसा विवाद में नवनीत राणा और रवि राणा जमानत पर बाहर हैं। लेकिन इस बीच उनपर मुंबई पुलिस ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। मुंबई पुलिस ने कहा था कि नवनीत राणा और रवि राणा ने मीडिया से बात की है जो कि मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन है।

कोर्ट में क्या हुआ?

मुंबई पुलिस की तरफ से पेश वकील ने कहा कि नवनीत जेल के बाहर आने के बाद लगातार कोर्ट के ऑर्डर को चुनौती दे रही हैं। साथ ही पूछा कि क्या सीएम ने उनको जेल भेजकर अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल किया था? क्या उनका ऐसा बोलना ठीक है? 

पुलिस के वकील ने कहा कि यह जमानत ऑर्डर का उल्लंघन है, वह सीएम और शिवसेना के नेताओं को खुलेआम धमकी दे रही हैं। वकील ने कहा कि अगर सांसद को पुलिस या जेल से दिक्कत है तो वह कोर्ट का रुख करें, इसके लिए उनको मीडिया से बात करने की जरूरत नहीं थी। इसलिए उनकी जमानत खारिज होनी चाहिए। आगे गैर जमानती वारंट जारी करने की माँग हुई है।

बता दें कि रविवार (8 मई, 2022) को लीलावती अस्पताल से बाहर आने के बाद नवनीत राणा ने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि भगवान राम नगर निकाय चुनावों में शिवसेना को सबक सिखा देंगे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वो उद्धव ठाकरे को सीधे निर्वाचित होने की चुनौती देती हैं। वो उनके खिलाफ चुनाव लडूेंगी और जीतेंगी भी। उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया था कि मुझे 14 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। आप मुझे 14 साल के लिए जेल में डाल सकते हैं, लेकिन मैं भगवान राम और हनुमान का नाम लेना बंद नहीं करूँगी। मैं शिवसेना के भ्रष्ट शासन को खत्म करने के लिए राम भक्तों का समर्थन करती रहूँगी।”

नवनीत राणा और उनके पति को इन शर्तों पर मिली है बेल

  • राणा दंपति मामले से जुड़ी कोई भी बात मीडिया के सामने आकर नहीं कह सकते।
  • सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकते।
  • जिस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है वैसा कोई काम वह फिर से नहीं कर सकते हैं।
  • राणा दंपति को जाँच में सहयोग करना होगा।
  • अगर इंवेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) पूछताछ के लिए बुलाता है तो जाना होगा, IO इसके लिए 24 घंटे पहले नोटिस देगा।

क्या है पूरा मामला

अमरावती से सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ने अपने समर्थकों के साथ मातोश्री (उद्धव ठाकरे का मुंबई स्थित घर) के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ का ऐलान करने के बाद 23 अप्रैल 2022 को खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। दोनों के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ भड़काने और राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था।

हिन्दू पक्ष वापस नहीं लेगा ज्ञानवापी ढाँचे वाला केस, किया नया ऐलान: VHP ने कहा – अयोध्या की तरह निकलेगा काशी का हल

हिन्दू पक्ष ने एक बार फिर से वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी विभेदित ढाँचे के भीतर जाकर वीडियो सर्वे जारी रखने की माँग अदालत से की है। माँ श्रृंगार गौरी की पूजा-अर्चना से जुड़े इस मामले को लेकर पहले खबर आ रही थी कि हिन्दू पक्ष ने मामला वापस लेने का मन बना लिया है, लेकिन अब केस दायर करने वाली पाँचों महिलाओं ने साफ़ कर दिया है कि वो ये केस लड़ती रहेंगी। मस्जिद कमिटी को अदालत द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर पर आपत्ति है।

मस्जिद कमिटी का कहना है कि एडवोकेट कमिश्नर निष्पक्ष तरीके से काम करने की बजाए एक पार्टी की तरह काम कर रहे हैं। एडवोकेट कमिश्नर का पक्ष सुनने का बाद अदालत फैसला सुनाएगी। मुस्लिम पक्ष उन्हें बदलने की माँग कर रहा है। वादिनी राखी सिंह ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अन्य चार महिलाओं की तरह वो भी अपना केस वापस नहीं लेंगी। उनके अधिवक्ता शिवम गौड़ ने भी दीवानी कचहरी में इस बात को स्पष्ट किया है।

उधर ‘सनातन वैदिक संस्था’ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन ने भी नया बयान जारी करते हुए केस वापस लेने की बात से इनकार किया है। बिसेन ने वाराणसी में मीडिया पर उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी ने गलत अफवाह फैला दिया। हालाँकि, 24 घंटे तक उनसे किसी का संपर्क न हो पाने और मोबाइल फोन स्विच्ड ऑफ रहने पर उन्होंने कोई बयान नहीं दिया। इससे पहले मुस्लिम भीड़ ने उपद्रव कर के सर्वे का काम रुकवा दिया था।

उधर संगम नगरी प्रयागराज में ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ की एक बैठक हुई, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने कहा कि राम मंदिर के बाद ज्ञानवापी मामले पर विहिप की पूरी नजर है। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम का सूक्ष्म अवलोकन किया जा रहा है। हालाँकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका हल ही अयोध्या की तरह ही संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से निकलेगा। उन्होंने कहा कि ‘ज्ञानवापी’ नाम ही सनातन परंपरा का द्योतक है और विवादित ढाँचे की दीवारों पर हिन्दू प्रतीक चिह्न हैं।

AMU प्रोफेसर असद पर तीन तलाक का केस दर्ज: M.Tech कराने का वादा कर किया निकाह, बाद में माँगने लगा ₹10 लाख दहेज, मारपीट भी की

उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के एक असिस्टेंट प्रोफेसर (AMU Assistant Professor Aligarh) के खिलाफ (Triple Talaq case) क्वार्सी थाने में दहेज उत्पीड़न और बीवी को तीन तलाक देने का मुकदमा दर्ज हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला का आरोप है कि उसके ससुरालियों ने निकाह से पहले उसे एमटेक कराने का वादा किया था, लेकिन निकाह के बाद उसे उच्च शिक्षा दिलाना तो दूर वे उसे दहेज (Dowry Case) के लिए प्रताड़ित करने लगे। जब यह मामला जब कोर्ट में पहुँचा तो, आरोपित शौहर उसे सड़क पर ही तीन बार तलाक बोल कर चला गया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने फरहीन इजहार के ससुरालियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

इकरा कॉलोनी पूल हाउस में रहने वाली फरहीन इजहार ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि उसका 9 नवंबर 2021 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय (Aligarh Muslim University) के कंप्यूटर इंजीनियर संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर असद मोहम्मद से उसका निकाह हुआ था। निकाह से पूर्व ससुरालियों ने उसे एमटेक कराने का वादा किया था, लेकिन निकाह के बाद वे अपने वादे से मुकर गए और दहेज की माँग करने लगे। महिला ने यह भी बताया कि वे लोग उससे दहेज में दस लाख रुपए, जमीन और फ्लैट माँगने लगे। तरह-तरह के आरोप लगाकर उसे तंग किया जाने लगा और 14 फरवरी को दहेज की माँग पूरी न होने पर शौहर उसे मायके छोड़ गया।

मजबूरी में महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ित करने का मामला दर्ज करवाया। जब इसका नोटिस ससुराल में पहुँचा, तो ससुराली और बिफर गए। इसके बाद छह मई की सुबह जब वह निजामी पुलिया के पास से अपनी बहन-बहनोई के साथ कहीं जा रही थी, तभी उसका शौहर उसे सरेराह तीन तलाक बोलकर चला गया। इस मामले में शौहर के अलावा जेठ आलम, ननदोई अनस, सास-ससुर पर भी मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता को फोन पर धमकाया। इंस्पेक्टर क्वार्सी ने बताया कि दहेज उत्पीड़न व मुस्लिम विवाह अधिनियम की धाराओं तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मुंबई में दाऊद के सहयोगियों पर NIA की रेड, 20 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी: माहिम और हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सोहेल समेत 3 हिरासत में

मुंबई में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़े हुए लोगों पर एनआईए (NIA) की छापेमारी जारी है। NIA ने बोरिवली, सांताक्रूज, बांद्रा, नागपाड़ा, गोरेगाँव, परेल के 20 ठिकानों पर छापे मारे हैं। इस छापेमारी में मुंबई की प्रसिद्ध माहिम दरगाह और हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सोहेल खंडवानी के घर पर भी छापेमारी की खबर सामने आई है। इसके अलावा 1993 मुंबई बम धमाकों से संबंधित लोगों के तीन ठिकानों पर भी रेड पड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने जहाँ सोहेल खंडवानी को डिटेन किया है वहीं मुंबई के भिंडी बाजार इलाके से छोटा शकील के साथी सलीम कुरैशी और सलीम फ्रूट को भी कस्टडी में लिया है। NIA की यह रेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए बड़ी चोट मानी जा रही है।

जाँच एजेंसी NIA ने मुंबई के नागपाड़ा, भिंडी बाजार, मुंब्रा, भिवंडी, गोरेगाँव, बोरीवली सांताक्रुज समेत अन्य जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है। कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि NIA को रेड के दौरान कई अहम दस्तावेज मिलें हैं। ।

रिपोर्ट के अनुसार, इसके पहले ED ने महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक को भी दाऊद से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ टेरर फंडिंग और डी गैंग से जुड़े हुए लोगों से जमीन का सौदा करने का मामला दर्ज किया था। वहीं अब NIA ने मलिक सहयोगी सुहेल खंडवानी पर कार्रवाई की है। खंडवानी के माहिम स्थित घर पर छापेमारी की गई है। इसके दायरे में दाऊद का गुर्गा छोटा शकील, जावेद चिकना, टाइगर मेनन, इकबाल मिर्ची, दाऊद की बहन हसीना पारकर से जुड़े लोग और उसके रिश्तेदार भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुहैल खंडवानी टचवुड रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं। वहीं नवाब मलिक के बेटे फराज मलिक भी 2006-2016 तक उसी फर्म में निदेशक थे। इस कंपनी में फराज के अलावा, फारूक और जकारिया दरवेश भी पार्टनर हैं। बता दें कि 150 करोड़ रुपए की बैंकिंग धोखाधड़ी के लिए सीबीआई द्वारा इस फर्म की भी जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, NIA की यह रेड दाऊद और उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है। वही एफआईआर, जहाँ ED को जाँच में नवाब मलिक का कनेक्शन मिला था। बता दें कि D गैंग के खिलाफ पहले ही NIA एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

हिमाचल में खालिस्तानी झंडे का AAP कनेक्शन: SFJ का खुलासा – CM केजरीवाल की रैली में गया था आरोपित, भगवंत मान को ₹46 Cr का डोनेशन

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा के ऊपर खालिस्तान का झंडा लगाए जाने के मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो के अनुसार, धर्मशाला में लगाया गया खालिस्तानी झंडा उस सिख कार्यकर्ता के माध्यम से भेजा गया था जो अरविन्द केजरीवाल की मंडी जिले में हुई सभा में शामिल हुआ था। बताया गया है कि वह कार्यकर्ता पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ जनसभा में शामिल हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने वीडियो में गुरपतवंत पन्नू ने कहा, “जब से अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान ने खालिस्तान समर्थकों को लुभाया है तब से उन्हें पंजाब चुनावों में $6 मिलियन (46.45 करोड़ रुपए) का डोनेशन गया है। सिख फॉर जस्टिस (SFJ) अपने उन कार्यकर्ताओं को खालिस्तान के जनमत संग्रह के लिए प्रयोग करेगी जो भगवंत मान के करीबियों में से हैं।’

इसी वीडियो में पन्नू ने कहा, “धर्मशाला से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को एक साफ संदेश गया है कि हिमाचल प्रदेश में भी खालिस्तान के जनमत संग्रह की माँग है। साथ ही एक बार फिर से यह पंजाब का हिस्सा होगा।” SFJ ने इसी साल जून के महीने में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की बरसी पर हिमाचल प्रदेश में खालिस्तान लिए के जनमत संग्रह करवाने की घोषणा की है।

गौरतलब है कि 8 मई, 2022 (रविवार) को हिमाचल प्रदेश की धर्मशाला स्थित विधानसभा के मुख्य द्वारा पर खालिस्तान के झंडे लटकाए गए थे। इसी के साथ वहाँ की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे भी लिख दिए गए थे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का एलान किया था। इस केस में SIT का भी गठन कर दिया गया है।

इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आईपीसी के सेक्शन 153-A, 153-B और यूएपीए के सेक्शन 13 के तहत यह मामला दर्ज किया गया था। सीमाओं को सील कर के तमाम ऐसी जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है जहाँ खालिस्तानी समर्थकों के छिपने की संभावना हो। इस मामले में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसिल गुरपतवंत सिंह पन्नू को मुख्य आरोपित बनाया गया है।”

अक्षय कुमार ने ‘पृथ्वीराज’ को बताया शिक्षाप्रद फिल्म, कहा – ‘इतने बड़े योद्धा थे, इतिहास की पुस्तकों ने एक पैराग्राफ में समेट दिया’

अक्षय कुमार की फिल्म ‘पृथ्वीराज’ का ट्रेलर ‘यश राज फिल्म्स (YRF)’ ने सोमवार (9 मई, 2022) को जारी कर दिया। इस फिल्म के साथ ही न सिर्फ YRF अपना 50वाँ साल मना रहा है, बल्कि अक्षय कुमार ने भी फिल्म इंडस्ट्री में 30 वर्ष पूरे कर लिए हैं। ये फिल्म दिल्ली के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान (राय पिथौरा) की गाथा को दर्शाता है, जो चाहमान राजवंश से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने घूरिद सुल्तान मुहम्मद ग़ोरी को बुरी तरह हराया था।

हालाँकि, अगले युद्ध में मुहम्मद ग़ोरी जीत गया था, जिसके बाद भारत में इस्लामी शासन की नींव पड़ी थी। अकबर से पहले दिल्ली की गद्दी पर कुछ दिनों के लिए बैठने वाले हेमू (हेमचन्द्र विक्रमादित्य) को छोड़ दें तो पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अंतिम हिन्दू शासक माना जाता है। ट्रेलर लॉन्च के मौके पर अक्षय कुमार ने बताया कि उन्हें वो दिन भी याद है जब वो डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी से मिले थे और उन्होंने ‘पृथ्वीराज’ फिल्म के बारे में बताया था।

बता दें कि नब्बे के दशक में ‘चाणक्य’ का किरदार निभा कर और दूरदर्शन पर आने वाले इस ऐतिहासिक धारावाहिक का निर्देशक कर के डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने ख्याति बटोरी थी। अक्षय कुमार ने बताया कि द्विवेदी ने उन्हें ‘पृथ्वीराज रासो’ पढ़ने के लिए दी थी, जिसे कवि चंदबरदाई ने लिखा है। अक्षय कुमार ने बताया कि इसके शब्द काफी कठिन थे, इसीलिए उन्हें इसे धीरे-धीरे पढ़ने के लिए बोला गया था। डॉ द्विवेदी उन्हें इसके कंटेंट्स बैठ कर समझाते थे।

अक्षय कुमार ने कहा, “आहिस्ते-आहिस्ते ‘पृथ्वीराज रासो’ पढ़ते-पढ़ते मुझे इस बात का एहसास हुआ कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान कितने बड़े योद्धा हैं। और जब हम इतिहास की पुस्तकों में पढ़ते हैं तो उनके बारे में सिर्फ एक पैराग्राफ आता था। आज मैं चाहूँगा कि इस फिल्म को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का हर बच्चा देखे। एक एक शिक्षाप्रद फिल्म है।” ये फिल्म हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगू में भी रिलीज हो रही है। इसमें मानुषी छिल्लर, संजय दत्त और सोनू सूद भी हैं।

कभी रुकी थी जहाँ प्रभु श्रीराम की बारात, वहाँ अब बनेगा विश्व का सबसे विराट ‘रामायण मंदिर’ : 270 फीट होगी कुल ऊँचाई, 33 फीट का शिवलिंग भी होगा स्थापित

अयोध्या (Ayodhya) में भगवान राम (Ram Mandir) का भव्य मंदिर बनाने का काम बड़ी तेजी के साथ जारी है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी ने भी अयोध्या जाकर मंदिर निर्माण के कार्य का जायजा लिया था। राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने बाद अब वहाँ भी एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा, जहाँ आराध्य देव राम की बारात ठहरी थी। इस मंदिर का नाम ‘रामायण मंदिर’ (Ramayan Temple) होगा। ये बिहार के पूर्वी चंपारण (East Champaran) में बनाया जाएगा। मान्यता है कि माता सीता से विवाह के बाद जनकपुर (Janakpur) से लौटते समय भगवान राम की बारात यहीं पर रुकी थी।

दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा

इस मंदिर इतना विशाल और भव्य बनाया जाएगा कि ये दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा। जानकारी के मुताबिक यह विराट रामायण मंदिर 270 फीट ऊँचा होगा। इसकी लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। 270 फीट के इस विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए 125 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार इस मंदिर के लिए अब तक एक सौ एकड़ जमीन मंदिर को मिल चुकी है।

दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग होगा

इस मंदिर परिसर में ऊँचे शिखरों वाले 18 मंदिर होंगे और इस मंदिर के परिसर में एक शिव मंदिर का भी निर्माण किया जाएगा। जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग होगा। पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि शिवलिंग 33 फीट ऊँचा होगा। जानकारी के अनुसार विराट रामायण मंदिर कंबोडिया में विश्व प्रसिद्ध 12वीं शताब्दी के अंकोरवाट परिसर से भी ऊँचा होगा, जो 215 फीट ऊँचा है।

शिवलिंग में दिखेगी 8वीं शताब्दी की छवि

आचार्य किशोर कुणाल के अनुसार इस शिवलिंग का निर्माण सहस्त्रलिंगम की तरह होगा, यानी एक शिवलिंग में 1,008 शिवलिंग को बैठाया जाएगा। 8वीं सदी में इस तरह के शिवलिंग का निर्माण होता था। उन्होंने बताया कि इस शिवलिंग का निर्माण महाबलीपुरम में कराया जा रहा है। इसके निर्माण में ब्लैक ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मंदिर निर्माण के प्रोजेक्ट को ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मलयाली अभिनेता पर यौन शोषण का आरोप, जारी हुआ वारंट: पीड़िता ने बताया- कार में जबरन ओरल सेक्स कराया, कुछ बोल नहीं पाई

यौन उत्पीड़न के मामले में फरार चल रहे मलयालम अभिनेता-निर्माता विजय बाबू (Malayalam actor Vijay Babu) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद केरल पुलिस ने उसकी (आरोपित) तलाश तेज कर दी है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की एक अभिनेत्री ने विजय बाबू पर मारपीट और यौन शोषण का आरोप लगाया है।

मनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, एर्नाकुलम की एक स्थानीय अदालत ने रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) के तहत आरोपित के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। रेड कॉर्नर नोटिस वांछित अपराधियों को गिरफ्तार करने या उनकी गिरफ्तारी की माँग करने के लिए जारी किया जाता है। रेड कार्नर नोटिस की मदद से गिरफ्तार किए गए अपराधी को उस देश भेज दिया जाता है, जहाँ उसने अपराध किया होता है। वहीं उस पर उस देश के कानून के हिसाब से मुकदमा चलता है और सजा दिलाई जाती है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अभिनेता विजय बाबू की तस्वीरें और जिस मामले में उन पर आरोप लगाए गए हैं, आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (इंटरपोल) की वेबसाइट पर दिखाई देगी। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद दुबई पुलिस कानूनी रूप से अभिनेता को हिरासत में लेकर उसे भारत भेज सकती है।

पुलिस के अनुसार, कोझीकोड की रहने वाली एक महिला ने 22 अप्रैल को एर्नाकुलम में विजय बाबू के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने अपनी शिकायत में कहा था कि अभिनेता ने एर्नाकुलम के एक फ्लैट में 13 मार्च से 14 अप्रैल, 2022 तक उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया और उसे पीटा भी। महिला ने अभिनेता पर यौन शोषण से पहले नशा कराने का भी आरोप लगाया है। हालाँकि, 26 अप्रैल की रात को विजय बाबू ने फेसबुक पर लाइव होकर आरोप लगाया कि वह युवती उन्हें फँसा रही है। ‘असली पीड़ित’ तो वह खुद है। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मैं पीड़ित हूँ। इस देश का कानून उसकी रक्षा कर रहा है और वह आराम से है, जबकि इस मामले में मुझे ही परेशान किया जा रहा है।”

बता दें कि अतिरिक्त सीजेएम अदालत ने रविवार (8 मई 2022) को विजय बाबू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। जाँच दल ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय जल्द ही इंटरपोल और दुबई पुलिस को गिरफ्तारी वारंट भेजेगा। वहीं बाबू ने फरार होने से पहले एक अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन केरल हाई कोर्ट ने उस पर कोई भरोसा नहीं किया। इस मामले को कोर्ट ने 18 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया है।

कर्नाटक: मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर के खिलाफ 1000 मंदिर में पढ़ी गई हनुमान चालीसा, हिंदू नेता बोले- CM योगी जैसी हिम्मत दिखाओ

श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने सोमवार (9 मई 2022) को कर्नाटक के मैसूर के मंदिरों में हनुमान चालीसा या भक्ति गीत बजाने के अभियान की शुरुआत की। सुबह 5 बजे से ही कर्नाटक के कई मंदिरों में हनुमान चालीसा या भक्ति गीत बजने लगे। हिंदू समर्थक संगठनों ने मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग को लेकर अभियान चला रखा है। सोमवार को विजयनगर, विजयपुर, मैसूर, बेलगावी जिलों में अभियान शुरू किया गया है।

श्री राम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने 9 मई की सुबह से कर्नाटक के एक हजार से ज्यादा मंदिरों में हनुमान चालीसा पाठ और भजन बजाने का आह्वान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि आज सुबह 5 बजे से श्रीराम सेना के कार्यकर्ताओं ने राज्य भर के कई मंदिरों में हनुमान चालीसा या भक्ति गीत बजाना शुरू कर दिया है।

इससे पहले श्री राम सेना के प्रमुख प्रमोद मुथालिक ने रविवार को ऐलान किया था कि 9 मई से राज्य के 1000 से अधिक मंदिरों में सुबह पाँच बजे से हनुमान चालीसा का बजाई जाएगी। यह ऐलान मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के खिलाफ किया गया था। 

मुतालिक ने कहा कि पहले चरण में सुबह पाँच बजे मंदिरों में हनुमान चालीसा/सुप्रभात/भक्ति गीत बजाने का अभियान श्रीराम सेना चलाएगी और अगले चरण में अजान के अन्य समय पर यह कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम यह सुबह कर रहे हैं, क्योंकि अदालत के फैसले के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक माइक या स्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन वे सुबह पाँच बजे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हम भी इस नियम का उल्लंघन करेंगे और सरकार को चेतावनी देंगे। हमारी लड़ाई मस्जिदों में अजान या नमाज अदा करने के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ है।” बेलगावी में श्रीराम सेना की जिला इकाई ने आज सुबह से इस अभियान की शुरुआत की। पुलिस ने मस्जिदों समेत जिलों के कई संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा कड़ी की है। पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि इस मुद्दे पर सांप्रदायिक झड़पें हो सकती हैं।

रविवार (8 मई 2022) को प्रमोद मुथालिक ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार यहाँ मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और राज्य के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र को वैसी ही हिम्मत दिखानी चाहिए, जैसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहाँ दिखाई है। योगी आदित्यनाथ ने वहाँ धार्मिक स्थलों से अनधिकृत लाउडस्पीकरों के खिलाफ कार्रवाई की है और अन्य को अनुमति योग्य सीमा तक आवाज सीमित रखने का निर्देश दिया है। 

शाहीन बाग़ में नहीं हटा अतिक्रमण, लौटे बुलडोजर: सुप्रीम कोर्ट पहुँचा मामला, AAP विधायक अमानतुल्लाह ने कहा – मुझसे बात करे पुलिस

शाहीन बाग़ में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए MCD (दिल्ली महानगरपालिका) के बुलडोजर तो पहुँचे, लेकिन वहाँ के स्थानीय लोग और खासकर महिलाएँ बुलडोजरों के सामने बैठ गईं। 2019 के अंत में और 2020 के शुरुआत में अहहीं बाग़ CAA-NRC के खिलाफ उपद्रव के लिए सुर्ख़ियों में आया था, जहाँ मुस्लिम महिलाओं ने महीनों जाम लगा कर लाखों लोगों को परेशान किया था।अब यही महिलाएँ बुलडोजरों पर चढ़ गईं, तो कई लोग इनके सामने ही लेट गए।

इसके बाद दोपहर के करीब साढ़े 12 बजे MCD के बुलडोजरों को वापस लौटना पड़ा। जैसा कि जहाँगीरपुरी मामले में हुआ था, सुप्रीम कोर्ट में MCD की कार्रवाई के खिलाफ याचिका पहुँच चुकी है और इस पर आज ही सुनवाई भी हो सकती है। जहाँगीरपुरी में हिन्दू विरोधी दंगे के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कुछ ही घंटों में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस दौरान लोगों ने जम कर हंगामा किया। पुलिस फोर्स भी शाहीन बाग़ में मौजूद है।

SDMC (दक्षिणी दिल्ली नगर निगम) की कार्रवाई ठीक से शुरू भी नहीं हो पाई थी कि उपद्रवी वहाँ पर जुट गए थे। ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के विधायक अमानतुल्लाह खान भी वहाँ पर आ धमके और इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने भी सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अमानतुल्लाह खान का कहना है कि उन्होंने तीन दिन पहले यहाँ आकर लोगों को समझाया था, जिसके बाद उन्होंने खुद ही अवैध अतिक्रमण हटा लिए थे।

उन्होंने दावा किया कि मस्जिद के बाहर वजूखाना था, उसे भी हटा दिया गया है। AAP विधायक ने कहा कि सड़क PWD की है और यहाँ स्थानीय पुलिस भी हैं, ऐसे में लोग प्रशासन से बात करेंगे और वो लोग खुद बचा-खुचा अतिक्रमण हटा लेंगे। उन्होंने इसे एक राजनितिक कार्रवाई करार देते हुए कहा कि पुलिस उनसे बात करे। CRPF के कई जवान भी इलाके में तैनात हैं। कई उपद्रवियों को हिरासत में लेकर वहाँ से हटाया गया।

दोपहर के 2 बजे से शाहीन बाग़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। अब तक बुलडोजर से सिर्फ एक इमारत के आगे लोहे की रॉड को ही हटाया जा सका है। ये रॉड रेनोवेशन के काम के लिए लगाई गई थी। वहाँ के लोगों ने भी बुलडोजर के डर से खुद ही अतिक्रमण हटाने शुरू कर दिए। सुरक्षा बलों ने किसी भी अनियंत्रित परिस्थिति के लिए आँसू गैस के गोले भी तैयार रखे हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने इस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की है।