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इस्लाम कबूल करवाने के दबाव के बाद पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने भारत को बताया ‘दुश्मन देश’, साथी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने लपेटे में लिया

पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी द्वारा पाकिस्तानी पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया पर ‘दुश्मन देश’ (भारत) की मीडिया से बात करने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद, दानिश ने अफरीदी को किसी भी भारतीय चैनल से बात न करने की सलाह दी है।

बता दें कि इससे पहले दानिश कनेरिया ने अफरीदी पर धर्मांतरण और इस्लाम कबूल करने के लिए राजी करने का भी आरोप लगाया था। सोमवार 9 मई, 2022 को कनेरिया ने ट्वीट किया, “भारत हमारा दुश्मन नहीं है। हमारे दुश्मन वो हैं जो मजहब के नाम पर लोगों को भड़काते हैं। यदि आप भारत को अपना दुश्मन मानते हैं, तो कभी भी किसी भारतीय मीडिया चैनल पर न जाएँ।”

दानिश कनेरिया ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन की दुर्दशा पर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने लिखा, “जब मैंने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकी दी गई कि मेरा करियर तबाह कर दिया जाएगा।”

दानिश कनेरिया ने यह भी कहा कि शोएब अख्तर अपनी समस्याओं के बारे में सार्वजनिक रूप से बोलने वाले पहले व्यक्ति थे। अख्तर ने खुलकर कहा था कि कैसे कनेरिया के साथ हिंदू होने की वजह से टीम में बुरा बर्ताव किया जाता था। दानेश कनेरिया ने कहा कि बाद में कई अधिकारियों ने अख्तर पर दबाव बनाया, जिसके बाद अख्तर ने इस बारे में बात करना ही बंद कर दिया।

विवाद की जड़

इस साल 29 अप्रैल को दानिश कनेरिया ने टीम के अपने पूर्व साथी शाहिद अफरीदी पर हिंदू होने के कारण दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। उन्होंने अफरीदी को चरित्रहीन, जालसाज और झूठा बताया था।

कनेरिया ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “शाहिद अफरीदी ने हमेशा मुझे निराश किया। वह मुझे बेंच पर रखते थे और मुझे वनडे इंटरनेशनल मैच नहीं खेलने देते थे। वह नहीं चाहते थे कि मैं टीम में रहूँ।”

उन्होंने आगे कहा कि शाहिद अफरीदी चरित्रहीन और झूठे व्यक्ति हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी को यह भी बताया कि शाहिद अफरीदी को उनके अच्छे प्रदर्शन से जलन होती थी और उन्होंने अन्य खिलाड़ियों को उनके खिलाफ उकसाया था। कनेरिया ने कहा कि इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए वह सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देते थे।

बाद में 4 मई को ज़ी न्यूज़ के साथ एक अन्य साक्षात्कार में, दानिश कनेरिया ने बताया, “हाँ, अफरीदी अक्सर मुझे इस्लाम कबूल करने के लिए कहते थे। लेकिन, मैं उसे कभी सीरियसली नहीं लेता था। मैं अपने धर्म में विश्वास करता हूँ और यह क्रिकेट पर निर्भर नहीं करता है।”

6 मई को द न्यूज इंटरनेशनल से बात करते हुए, शाहिद अफरीदी ने गाली दी और कनेरिया पर ‘चरित्र पर दृढ़’ नहीं होने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया, “कनेरिया मेरे छोटे भाई की तरह थे और मैं उनके साथ कई सालों तक खेला। अगर मेरा रवैया खराब था तो उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड या जिसके लिए खेल रहे थे, उससे शिकायत क्यों नहीं की।”

अफरीदी ने दानिश कनेरिया पर ‘दुश्मन राष्ट्र’ भारत को इंटरव्यू देने का आरोप लगाते हुए कहा, “वह मुझ पर सस्ती प्रसिद्धि पाने और पैसा कमाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। वह हमारे दुश्मन देश को इंटरव्यू दे रहे हैं जो धार्मिक भावनाओं को भड़का सकते हैं। उनके बारे में सभी जानते हैं।”

स्पिनर ने अब भारत को ‘दुश्मन देश’ कहने के लिए अफरीदी की खिंचाई की है।

हिंदू विरोधी रुख और शाहिद अफरीदी की भारत विरोधी टिप्पणी

बता दें कि दिसंबर 2019 में, अफरीदी के पुराने साक्षात्कार की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। जिससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। उस वीडियो में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने उस समय अपना टेलीविजन सेट तोड़ दिया था जब उन्होंने अपने एक बच्चे को एक भारतीय सीरियल में ‘आरती’ का दृश्य देखते हुए देखा था।

गौरतलब है कि पूर्व पाकिस्तानी कप्तान को हाल ही में तालिबान का समर्थन करते देखा गया था। उनका कहना था कि तालिबान बहुत ही पॉजिटिव माइंड के साथ आए हैं। वे महिलाओं को काम करने दे रहे हैं। पाकिस्तान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि तालिब मज़ेदार, क्रिकेट-प्रेमी लोग हैं।

वहीं, 2020 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान, शाहिद अफरीदी ने भारत के खिलाफ टिप्पणी की थी। इसके बाद, भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह और हरभजन सिंह, जिन्होंने उनके एनजीओ का समर्थन करने के लिए वीडियो पोस्ट किया, को आगे आना पड़ा और अफरीदी का समर्थन करने के लिए माफी माँगनी पड़ी थी।

अब मथुरा शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के लिए अदालत में प्रार्थना-पत्र, पूछा – ज्ञानवापी में हो सकता है तो यहाँ क्यों नहीं?

काशी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के बाद अब मथुरा स्थित शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में वीडियोग्राफ़ी और सर्वे के लिए प्रार्थना-पत्र दायर किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थिर ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट जनरल की निगरानी में चल रहे सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के विवरण भी सौंपे गए हैं। कहा गया है कि इसी तर्ज पर यहाँ भी एडवोकेट जनरल नियुक्त कर के प्रक्रिया पूरी की जाए।

ये प्रार्थना-पत्र अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने दायर किया है। उन्होंने कहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का अवलोकन कर के कमल, शंख, गदा, ॐ और स्वास्तिक जैसे हिन्दू प्रतीक-चिह्नों के सबूत अदालत के समक्ष पेश किए जाएँ। इस मामले की सुनवाई मंगलवार (10 मई, 2022) को होगी। इससे पहले भी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप अदालत के समक्ष इस तरह की माँग रख चुके हैं। दिसंबर 2021 में मथुरा में एक याचिका दायर की गई थी।

इस याचिका में माँग की गई थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए। ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति’ ने ये याचिका दायर की थी। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप इस संगठन के अध्यक्ष हैं, जिनका कहना है कि ईदगाह में नमाज नहीं पढ़ी जाती थी, लेकिन यहाँ जानबूझ कर पाँच वक्त की नमाज अदायगी शुरू कर दी गई है। उन्होंने इसे हिन्दुओं की संपत्ति करार दिया था।

जबकि ‘शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामियाँ कमिटी’ का कहना है कि जिस 13.37 एकड़ जमीन पर हिन्दू पक्ष दावा कर रहा है, उससे जुड़े कोई भी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए हैं। उसने दावा किया कि ये वाद सुने जाने योग्य नहीं है। अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। मथुरा मामले में 19 मई को स्थानीय अदालत का बड़ा फैसला भी आ सकता है। वकील रंजना अग्निहोत्री ने औरंगजेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की थी।

स्वतंत्रता सेनानियों के गुप्त प्रवास की एक गाथा, कैसे जुटाए अर्थ और अस्त्र : क्यों पढ़नी चाहिए ‘क्रांतिदूत’ की झाँसी फाइल्स

प्रारंभिक ‘शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर’ (RSS द्वारा संचालित) विद्यालय में होने के कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिदूतों के बारे में अच्छी खासी जानकारी प्राप्त हो गई थी। घर में पिताजी किताबों और संगीत के शौक़ीन थे तो शायद पढ़ना और संगीत सुनना विरासत में मिला। क्रांतिकारियों में मुख्यतः आज़ाद से संबंधित अनेक वाक़ये पिताजी सुनाते थे। शायद स्कूल और घर के इस माहौल ने ही देश के प्रति और आज़ादी की बलिवेदी पर प्राणों की आहुति देने वाले इन सेनानियों के प्रति मन को अगाध श्रद्धा से भर दिया।

आज इस भीड़भाड़ और भागमभाग भरी जिंदगी में कई सालों बाद लेखक मनीष श्रीवास्तव की किताब ‘क्रांतिदूत’ ने पुनः उसी दौर को मन के दरवाजे पर ला खड़ा किया। वास्तव में मनीष श्रीवास्तव से जुड़ने और उनके द्वारा लिखित ‘क्रांतिदूत’ पढ़ने का सौभाग्य मेरे लिए ‘बिनु हरि कृपा मिलहि नहीं संता’ को चरितार्थ करने जैसा है।

झाँसी स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक और मुख्य केंद्र रहा है। लेखक ने अपनी ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला के ‘झाँसी फाइल्स’ में इसी को सामने लाने का प्रयास किया है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए सबसे सौभाग्य की बात यह है कि मैं ऐसे व्यक्ति को पढ़ रही हूँ जिनके नाना मास्टर रुद्रनारायण सिंह जी ही झाँसी में आज़ाद, भगवान दास, सदाशिव, बलवंत (भगत सिंह), शचीन्द्रनाथ जैसे महान क्रांतिकारियों के गतिविधियों के नियंत्रक रहे थे।

‘झाँसी फाइल्स’ की शुरुआत चंद्रशेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्लाह खान, रामप्रसाद बिस्मिल और राजगुरु की बातचीत से शुरू होती है। ये अपने संगठन के लिए अर्थ और अस्त्र जुटाने के लिए चिंतित होते हैं क्योंकि इन दोनों के बिना संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति होना कठिन था। बातों-बातों में ही इनके क्रांतिकारी दिमाग में एक क्रांतिकारी योजना का जन्म हुआ जो इतिहास में ‘काकोरी कांड’ के नाम से जाना गया।

‘क्रांतिदूत’ की इस श्रृंखला में मुख्य रूप से आज़ाद के झाँसी में गुप्त रूप से प्रवास और इस दौरान अपने मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया है। वहाँ उनके लिए संसाधन और गुप्त ठिकानों को उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी मास्टर रुद्रनारायण जी ने सँभाली। क्योंकि, उन्हें पता था कि काकोरी कांड के बाद जिस तरह अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की तलाश में कुत्तों की तरह घूम रही है। ऐसे में इनका सुरक्षित और गुप्त रहना बेहद ज़रूरी था। क्रांति की इन मशालों को हवाओं से बचाना था। इस संघर्ष में ऐसे अनगिनत नाम हैं जिन्होंने परोक्ष रूप में आज़ादी में अपनी महती भूमिका निभाई। लेखक ने ऐसे ही गुमनाम नामों को परिचित कराने का सफल प्रयास किया है ‘क्रांतिदूत’ में।

‘झाँसी फाइल्स’ में आज़ाद के कई अनछुए पहलुओं और रुद्रनारायण और मुन्नी भाभी (लेखक के नाना और नानी जी ) से पारिवारिक संबंध को भी बहुत ही स्नेहिल अंदाज में बताया गया है। यह विवरण सोचने के लिए मजबूर कर देता है कि ऊपर से इतने कठोर दिखने वाले इन युवा क्रांतिदूतों के अंदर भी चुहल व हँसी-मजाक और प्रेम जैसी संवेदनशील भावना बसती थीं, जो पारिवारिक माहौल मिलने पर स्वाभाविक रूप ने स्वतः ही उजागर हो उठती थी। ख़ैर इन क्रांतिदूतों ने तो पूरे भारतवर्ष को ही अपना परिवार मान लिया था और परिवार को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने की शपथ उठा रखी थी।

किताब में कई जगह आज़ाद से जुड़े बहुत ही रोचक प्रसंग का चित्रण किया गया है जो अनायास ही होठों पर मुस्कुराहट और हृदय में उत्कंठा उत्पन्न करता है कि अब क्या होगा ! क्या आज़ाद और उनसे जुड़े लोगों का भेद खुल जायेगा!

ऐसा ही एक प्रसंग है ‘दम्बूक’ शीर्षक में। हालांकि हम सबको पता है कि आज़ाद आजीवन आज़ाद ही रहे। अंग्रेजी हुकूमत की किसी गोली में इतनी हिम्मत न थी  कि आज़ाद को छू भी पाती। लेकिन, ये लेखक के कलम का ही जादू है कि ऐसे कई प्रसंगों में मन आशंका से भर उठता है।

‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला ऐसे समय में आई है जब युवा पीढ़ी आज़ादी की बलिवेदी पर स्वयं को न्योछावर कर देने वाले इन क्रांतिवीरों के इतिहास के ज्ञान से लगभग अनभिज्ञ है। ऐसे समय पर ऐसी ज्ञानवर्धक किताबों की श्रृंखला प्रस्तुत करके मनीष जी ने समाज, खासकर युवा वर्ग के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाई है। पाठ्यक्रम में शामिल करने योग्य ‘क्रांतिदूत’ सीरीज की अन्य पुस्तकें भी रोचक और ज्ञानवर्धक होंगी – ऐसा विश्वास है।

किताब में प्रिंट और कहीं कहीं वाक्यों के समायोजन संबधी त्रुटियाँ अवश्य हैं, लेकिन विषयवस्तु के आगे वे गौण हो जाती हैं। अंत में ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला की सभी किताबों को हर भारतीय को अवश्य पढ़ना चाहिए। आशा है कि इस पुस्तक को लोग हाथोंहाथ लेंगे।

(इस लेख को वंदना कपिल ने लिखा है)

नाबालिग लड़की को बहलाकर जीशान ले गया अपने साथ: पीड़ित पिता ने परेशान होकर किया आत्मदाह का प्रयास, बताया- मुस्लिम पक्ष बंदूक दिखाकर देता है धमकी

अपडेट: नाबालिग के अपहरण और पिता द्वारा डीएम कार्यालय के बाहर आत्मदाह का प्रयास करने के इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार मधुबन बापूधाम कोतवाल और सेक्टर 23 चौकी प्रभारी रंजीत कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।

नाबालिग बेटी के मुस्लिम युवक द्वारा बहला फुसला कर ले जाने से आहत पिता ने गाजियाबाद DM ऑफिस पर 9 मई 2020 (सोमवार) को आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसको पकड़ कर किसी अनहोनी को टाल दिया। पीड़ित पिता पुलिस पर भी संतोषजनक कार्रवाई न करने का आरोप लगाता सुनाई दिया। पुलिस पीड़ित पिता को पूछताछ के लिए थाने ले गई है। दर्ज FIR के मुताबिक पीड़ित की नाबालिग बेटी को ले जाने वाले आरोपित का नाम वहाब उर्फ़ जीशान है। पुलिस को शक है कि पीड़ित की बेटी घर से नाराज हो कर गई है और वहाब से पूछताछ में कोई ख़ास जानकारी हासिल नहीं हुई है। हालाँकि पुलिस ने अंतिम निष्कर्ष तक आने के लिए जाँच जारी होना बताया।

वीडियो में पीड़िता पिता को कहते सुना गया, “साहब मैं SSP और SHO को बार-बार मिल चुका हूँ। वो (विपक्षी) मुझे 10 लाख रुपए की धमकी देते हैं। उन्होंने 10 लाख रुपए में चौकी इंचार्ज को खरीद लिया है। वो कहते तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। तुम्हारी लड़की को नहीं बरामद कर सकते। मैंने अपने ऊपर पेट्रोल डाला है। मैं मरना चाहता हूँ। मेरी बहुत बेइज्जती हो चुकी है सर। मुस्लिम पक्ष के लोग आ कर धमकी दे कर जाते हैं। उन लोगों ने मेरे ऊपर पिस्टल भी तान दी थी।”

वही इस मामले में गाजियाबाद के एसएसपी IPS मुनिराज ने कहा, “मामला थाना बापूधाम का है। लगभग 20 दिन पहले लड़की अपने पापा से नाराज हो कर घर से निकली थी। उसके बाद पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस ने फ़ौरन ही FIR दर्ज करवा दिया। इसके बाद लड़की को बरामद करने के लिए SHO, DSP और चौकी प्रभारी की टीम गठित की गई। लड़की को बरामद करने के प्रयास जारी हैं। इस मामले में एक लड़के पर आरोप लगाया गया था जिस से पूछताछ के बाद उस से कोई ज्यादा इनपुट नहीं मिल पाए। लड़की के जाने के सभी संभावित स्थानों पर पुलिस तलाश कर रही है। सभी CCTV फुटेज भी तलाशे जा रहे हैं।”

IPS मुनिराज ने आगे बताया, “अभी हमने SP सिटी के नेतृत्व में फिर से टीम को निर्देश दिया है। वो अपनी पूरी टीम के साथ लगे हुए हैं। लड़की के पास मोबाईल नहीं है इसलिए हमें थोड़ी दिक्कत आ रही है। हम लड़की को जल्द से जल्द बरामद करने की दिशा में काम कर रहे हैं। लड़की के पिता जब भी आए तब हमने उनको समझाया और पुलिस टीम को निर्देश दिए। उन्होंने अपने ऊपर ज्वलशील पदार्थ क्यों डाला ये हम नहीं बता सकते।”

FIR Copy

नाबालिग बेटी को वहाब द्वारा बहला फुसला कर ले जाने की शिकायत पिता ने दर्ज करवाई है। पीड़ित पिता के मुताबिक, “मेरी बेटी 17 साल 4 माह की नाबालिग है। वो 18 अप्रैल 2022 से ही घर से लापता है। उस दिन वो स्कूल से घर नहीं आई। बेटी के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर भेजे मैसेज और फोटो से मुझे पता चला है कि उसे वहाब उर्फ़ जीशान अपने साथ कहीं बहला फुसला कर ले गया है। मेरी बेटी को बरामद करते हुए वहाब पर कड़ी कार्रवाई करने की कृपा करें।” पुलिस ने यह मामला अपहरण की धाराओं 363 और 366 IPC में दर्ज किया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित पिता ने कहा, “अभी मुझे थाने के बाहर पूछताछ के लिए बिठाया गया है। मैं पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हूँ। मैं मजदूर हूँ और मजदूरी कर के ही अपने परिवार का पेट पालता हूँ। आज मेरे पेट्रोल छिड़कने के दौरान या उसके बाद पुलिस ने मेरे साथ कोई दुर्व्यहार नहीं किया है।”

हनुमान चालीसा की जो बात करें, उन्हें मत सुनो: मेघालय गवर्नर का लाउडस्पीकर विवाद पर बयान, बोले- देश विनाश की ओर जा रहा

अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक (Meghalaya Governor Satyapal Malik) ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “किसानों का आंदोलन खत्म कराने के लिए उनसे जो वादे किए गए थे, वो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। किसानों को एमएसपी कानून देने की माँग को तुरंत मान लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर किसानों की बात नहीं सुनी गई तो मुझे डर है कि इन्हें कहीं दोबारा मैदान में न उतरना पड़े।”

दरअसल, मलिक रविवार (8 मई 2022) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा, “जिन सवालों का कोई मतलब नहीं है केवल उन पर बहस हो रही है। देश विनाश की ओर जा रहा है। आज सवाल महँगाई और बेरोजगारी पर होने चाहिए, लेकिन लोगों को यह ध्यान ही नहीं रहा। पेट्रोल और डीजल का हाल कोई नहीं पूछ रहा। टैक्स के बारे में कोई बात नहीं कर रहा।”

लाउडस्पीकर विवाद को लेकर उन्होंने कहा, “मैं हिंदू और मुस्लिम दोनों से अपील करता हूँ कि जो लोग हनुमान चालीसा के नाम पर आपको लड़ा रहे हैं। उनकी बातें मत सुनो। लड़ाई छोड़कर इकट्ठा रहो और अपनी रोजी-रोजगार के लिए लड़ना सीखो।”

अपने कार्यक्रम के बाद पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक के आवास पर पहुँचे सत्यपाल मलिक ने बुलडोजर की कार्रवाई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मेघालय में बुलडोजर नहीं चलता। यह यूपी सरकार को सूट करता है इसीलिए चलाया जाता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कोर्ट इस मामले पर संज्ञान जरूर लेगा।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से राज्यपाल के तौर पर हटाकर गोवा और फिर मेघालय भेजे जाने के बाद से सत्यपाल मलिक अक्सर केंद्र सरकार की आलोचना करते नजर आते हैं। सत्यपाल मलिक ने 6 मार्च 2022 को जींद जिले के कंडेला गाँव की खाप और माजरा खाप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए लाल किले में तिरंगे का अपमान करने वाले कथित किसानों का बचाव किया था।

उन्होंने किसानों को भड़काते हुए कहा था, “अगर आप इकट्ठा नहीं रहोगे, अपने सवालों को नहीं समझोगे तो यही होगा। लड़ने की आदत डालो। दो साल बाद चुनाव है। इकट्ठा होकर वोट करोगे तो ये सब दिल्ली से भाग जाएँगे। किसानों का राज होगा। किसी से कुछ माँगने की जरूरत नहीं होगी। यूपी के चुनाव का नतीजा भले नहीं आया पर मैं पश्चिमी यूपी घूमा हूँ और वहाँ का बता रहा हूँ। किसी गाँव में कोई मंत्री घुस नहीं पाया। स्मृति ईरानी को तो कई किलोमीटर दौड़ाया। मैं ये कहना चाहता हूँ कि राज बदलो, अपना राज बनाओ। लोग तुमसे भीख माँगेंगे, तुम्हें भीख माँगने की जरूरत नहीं होगी।” मलिक ने किसानों को कहा था कि लाल किले में अपना झंडा फहराओ।

आर्थिक संकट और हिंसक झड़पों के बीच श्रीलंका के PM राजपक्षे ने छोड़ी कुर्सी, पूरे देश में लगा कर्फ्यू: प्रदर्शनकारी बोले- राष्ट्रपति भी छोड़ें अपना पद

श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट के बीच देश के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने सोमवार (9 मई 2022) को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अपना इस्तीफा सौंपा। श्रीलंका की स्थानीय मीडिया के हवाले से इस खबर की पुष्टि की गई है।

महिंदा राजपक्षे के बाद उनके मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री रहे प्रोफेसर चन्ना जयसुमना ने भी राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा इस द्वीपीय देश में आर्थिक संकट को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद दिया है। सोमवार को राजधानी कोलंबो में आर्थिक संकट को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी।

प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद महिंदा राजपक्षे ने आम जनता से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “जब भावनाएँ उच्च स्तर पर चल रही हैं, हमें ये याद रखना चाहिए कि हिंसा केवल हिंसा को जन्म देगी। हम जिस आर्थिक संकट में हैं, उसे एक आर्थिक समाधान की जरूरत है।”

महिंदा राजपक्षे ने कहा कि आर्थिक संकट के समाधान के लिए ये प्रशासन प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि आर्थिक संकट को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे विरोधियों और महिंदा राजपक्षे के समर्थकों के बीच सोमवार को हिंसक झड़प हो गई। महिंदा राजपक्षे के समर्थकों के हमले में 16 लोग घायल हो गए।

राजधानी कोलंबो में भड़की हिंसा के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। दूसरी तरफ, विपक्षी दल भी लगातार पीएम के इस्तीफे और संयुक्त सरकार के गठन की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे पहले महिंदा राजपक्षे ने कहा था कि वे कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हैं। राजपक्षे के इस बयान के बाद से ही उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। राजपक्षे ने यह बात प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास ‘टेम्पल ट्री’ में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही थी। उनके आवास पर एकत्र हुए एसएलपीपी के सदस्यों ने इनसे इस्तीफा न देने को कहा था।

उनके छोटे भाई और राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे की आर्थिक संकट से घिरी सरकार पर देश को उबारने के लिए अंतरिम सरकार बनाने का दबाव बढ़ गया है। मौजूदा आर्थिक संकट निपटने तक वह अंतरिम सरकार के पक्ष में हैं। गोटाबाया राजपक्षे की अध्यक्षता में राष्ट्रपति भवन में एक विशेष कैबिनेट बैठक में महिंदा राजपक्षे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने पर सहमति व्यक्त की है। अब प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति से भी इस्तीफा माँग रहे हैं।

मुनव्वर फारूकी ने डाली ‘गर्लफ्रेंड बब्बी’ के साथ तस्वीर तो लोगों ने पूछा – ‘अंजलि का क्या होगा?’

कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को हाल ही में ‘MX Player’ और ‘ALT Balaji’ पर प्रेरित हुए एकता कपूर के शो ‘Lock Upp’ का विजेता चुना गया। इस शो की होस्ट अभिनेत्री कंगना रनौत थी। ‘लॉक अप’ की ट्रॉफी के साथ कॉमेडियन जब मुंबई के डोंगरी स्थित अपने घर पहुँचा, तब लोगों ने किसी हीरो की तरह उसका स्वागत किया। उसने दिल वाली इमोजी के साथ एक तस्वीर भी इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से शेयर की है, जिसमें उसके साथ दिख रही लड़की उसकी गर्लफ्रेंड बताई जा रही है।

कहा जा रहा है कि उस लड़की का नाम नाज़िल है। इस तस्वीर में दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए दिख रहे हैं। उसने ‘बब्बी बब्बी तेरा नी मैं’ के कैप्शन के साथ-साथ दिलजीत दोसाँझ के गाने ‘लवर’ को भी लगाया। मुनव्वर फारूकी ने हार्ट वाली इमोजी से लड़की का चेहरा हल्का छिपा लिया। हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने वाले कॉमेडियन का नाम ‘Lock Upp’ शो की ही प्रतिभागी अंजलि अरोड़ा के साथ भी जुड़ा था।

अंजलि ने मुनव्वर फारूकी के बारे में बात करते हुए कहा भी था कि दोनों का बॉन्ड ‘सुपर स्पेशल’ है। हालाँकि, फारूकी ने शो में अपनी गर्लफ्रेंड होने का हिंट भी दिया था, जिसे वो ‘बब्बी’ कह कर पुकारता था। मुनव्वर और अंजलि को उनके फैंस साथ में ‘मुंजली’ बुलाने लगे थे। अब ये फैंस इस पोस्ट के बाद मुनव्वर फारूकी से अंजलि अरोड़ा के बारे में पूछ रहे हैं। जहाँ पायल रोहतगी इस शो की पहली रनर-अप रही थीं, दूसरी रनर-अप का ख़िताब अंजलि अरोड़ा को मिला था।

शो की एक अन्य प्रतिभागी सायशा शिंदे ने भी मुनव्वर फारूकी के लिए अपनी फीलिंग्स का इजहार किया था। सायशा शिंदे वही हैं, जिन्होंने खुलासा किया था कि बॉलीवुड में उन्हें एक प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। ‘लॉक अप’ शो की सक्सेस पार्टी भी हुई, जिसमें कंगना रनौत और एकता कपूर भी पहुँचीं। मुनव्वर फारूकी की नई गर्लफ्रेंड ‘नाज़िल’ के बारे में बताया जा रहा है कि वो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं।

‘Lock Upp’ शो में ही ये भी खुलासा हुआ कि मुनव्वर फारूकी की शादी हो चुकी है और उनका एक बेटा भी है। हालाँकि, मियाँ-बीवी साथ नहीं रहते और दोनों का मामला कोर्ट में है। फारूकी का निकाह कम उम्र में ही हो गया था और पिछले 1.5 साल से दोनों अलग रह रहे हैं। शो में पूनम पांडेय ने कहा था, “ये मुनव्वर अपनी शादी छुपा के 21 साल की लड़की को पटा रहा है। ये फैक्ट है। ये सच है इसने तेरे को (सायशा को) अटका के रखा है।”

पटक-पटक कर इतना मारा…. 6 सेकेंड में मर गया कुत्ता: नशे में धुत शख्स की करतूत Video में कैद, बोला- मुझ पर भौंकता है, ऐसे ही मारूँगा

पालतू जानवरों को बेहरमी से पीटने और उन्हें मारने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब राजस्थान के भरतपुर से एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया है। यहाँ एक व्यक्ति ने मामूली सी बात पर पालतू कुत्ते को जमीन पर पटक-पटक कर बेहरमी से मार डाला। यह घटना कोतवाली थाना इलाके की है। कुत्ते के मालिक ने आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबूलाल गर्ग नाम के व्यक्ति का एक पालतू कुत्ता है। पड़ोस के मोहल्ले में रहने वाला अजय कोली जब भी उस रास्ते से गुजरता था, तभी वह कुत्ता उस पर भौंकने लग जाता था। अजय को यह बात बेहद बुरी लगती थी। एक रात को जब यह कुत्ता सड़क किनारे अपने घर के सामने बैठा था, तभी अजय कोली वहाँ से निकल रहा था। वह शराब के नशे में था और अपने साथ एक रस्सी भी लाया था। उसने पहले कुत्ते के गले में रस्सी बाँधी और फिर उसे जोर-जोर से जमीन पर पटकना शुरू कर दिया।

वह तब तक कुत्ते को जमीन पर पटक-पटक कर मारता रहा, जब तक बेजुबान जानवर की मौत नहीं हो गई। जब पड़ोसियों ने अजय से कुत्ते को मारने की वजह पूछी तो उसने कहा कि कुत्ता मोहल्ले में आते-जाते उस पर भौंकता था। वारदात के वक्त भी वह यही कह रहा था, “मुझ पर भौंकता है, इसे ऐसे ही मारूँगा।”

अजय को पड़ोसियों ने रोकना चाहा तो वह उनसे लड़ने को तैयार हो गया। उसने कहा, “अभी नहीं मरा है, इसे मार दूँगा, जिसे जो करना हो कर लेना। तभी वहीं मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और वायरल कर दिया। कुत्ते की मौत के बाद बाबूलाल रात को कोतवाली थाने पहुँचे और आरोपित की शिकायत दर्ज कराई। वहीं, आरोपित अजय इस घटना के बाद से फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर इससे पहले भी कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिसमें बेजुबान जानवरों की निर्दयता पूर्ण हत्या कर दी गई। इसी साल जनवरी में ग्वालियर में एक युवक ने कुत्ते को पहले लाठी से पीटा और फिर पत्थर से कुचलकर उसे मार डाला।

SC में खारिज हुई ‘बुलडोजर अभियान’ के खिलाफ CPI की याचिका, कहा- HC के पास जाएँ, राजनीतिक एजेंडे को यहाँ अनुमति नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एमसीडी के ध्वस्तीकरण अभियान के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने सीपीएम की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोई भी प्रभावित पक्ष याचिका का हिस्सा नहीं है और यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रकृति का है।

रिपोर्ट के अनुसार, SC ने CPM की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत किसी की भी या हर याचिका का जवाब नहीं दे सकती है, विशेष रूप से एक जो एक राजनीतिक दल द्वारा दायर की गई है। सीपीएम की ओर से पेश अधिवक्ता सुरेंद्र नाथ ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका पर सुनवाई करने और विध्वंस के खिलाफ 2 दिन तक रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हालाँकि, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने यह देखने के बाद कि कोई भी प्रभावित पक्ष याचिका का हिस्सा नहीं है, याचिकाकर्ता की खिंचाई की।

न्यायमूर्ति जे राव ने कहा, “हम लोगों को हर बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अनुमति नहीं दे सकते, वह भी किसी राजनीतिक दल के इशारे पर। हाई कोर्ट इसे जरूर उठा सकता है, आपको सुप्रीम कोर्ट नहीं, हाई कोर्ट जाना चाहिए था। आप क्या चुनते हैं, या तो आप वापस ले लें या हम इसे खारिज कर देंगे।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि कुछ दल और समूह ध्वस्तीकरण अभियान को एक समुदाय विशेष के खिलाफ टारगेटेड कार्रवाई के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, यह मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास उन लोगों की सूची है जिनके अवैध ढाँचे को ध्वस्त किया गया है।

अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए सी.पी.एम. को फटकार लगाई कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आना कुछ ज़्यादा ही है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को मामले पर पहले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा।

गौरतलब है कि शाहीन बाग के आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक ड्रामा चल रहा है, जहाँ एमसीडी अवैध संरचनाओं के खिलाफ विध्वंस अभियान चलाने की कोशिश कर रही है। वहीं आप विधायक अमानतुल्ला खान और माजिद खान इलाके में हैं और लोगों से अभियान का विरोध करने को कह रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग बुलडोजर के रास्ते में खड़े नजर आए। दिल्ली पुलिस एमसीडी अधिकारियों और वाहनों को सुरक्षा मुहैया करा रही है।

संजय राउत पर चरित्र हनन का इल्जाम: BJP नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने थाने में दी शिकायत, डराने-धमकाने का भी लगाया आरोप

महाराष्ट्र भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने शिवसेना के संजय राऊत के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत दी है। अपनी शिकायत में डॉ मेधा सोमैया ने संजय राऊत पर अपने खिलाफ मीडिया में दिए गए बयान को अनुचित और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने संजय राऊत के बयान को अपने चरित्र के हनन का प्रयास बताया है। इसी शिकायत में राऊत पर डराने और धमकाने का भी आरोप लगा है। यह शिकायत 9 मई 2022 (सोमवार) को दी गई है।

किरीट सोमैया की पत्नी की शिकयत में संजय राऊत पर धारा 503, 506 और 509 IPC के तहत कार्रवाई की माँग की गई है। शिकायत में उन्होंने लिखा, “मैं 20 वर्षों से भी अधिक समय से आर्गेनिक केमिस्ट्री की प्रोफेसर हूँ। 16 अप्रैल 2022 को संजय राऊत ने मेरे खिलाफ मीडिया में एक गलत बयान दिया है। यह बयान तमाम मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित हुआ है। साथ ही यह सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ।”

शिकायत

यह शिकायत मुलुंड थाने के सीनियर इंस्पेक्टर को दी गई है। इस शिकायत की घोषणा किरीट सोमैया ने एक दिन पहले ही कर दी थी। 8 मई 2022 (रविवार) को ही किरीट ने सुबह 10.49 पर लिखा था, “मेधा, नील और मैं कल 11 बजे मुलुंड ईस्ट पुलिस स्टेशन जाएँगे। वहाँ हम संजय राऊत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाएँगे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस से पहले भी मेघा सोमैया संजय राऊत को मानहानि का नोटिस भेज चुकी हैं। नोटिस में उन्होंने संजय राऊत से 48 घंटे में माफ़ी माँगने को कहा गया था। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी गई थी। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही संजय राउत ने मेघा सोमैया पर सौ करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। साथ ही राऊत ने नौसेना के बेटे से हट चुके एयरक्राफ्ट कैरियर पोत ‘विक्रांत’ घोटाले में भी किरीट सोमैया का नाम लिया था।

सोमैया और राऊत के बीच विवाद सांसद नवनीत राणा द्वारा मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने के बाद शुरू हुआ। तब किरीट राणा परिवार से मिलने ख़ास थाने गए थे। इस दौरान उन पर पत्थर फेंके गए थे जिसमें उन्हें चोटें आईं थीं। सोमैया ने उस हमले का आरोप शिवसेना पर लगाया था।