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यूपी के बाद जम्मू कश्मीर में भी चलेगा बुलडोजर, मस्जिद-मजार सहित वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्तियों को कराया जाएगा कब्ज़ा मुक्त

देश के कई राज्यों में बुलडोजर चलने के बाद अब जम्मू-कश्मीर में भी वक्फ बोर्ड की जमीनों को कब्ज़ा मुक्त कराने के लिए बुलडोजर चलाने की बात सामने आई है। इसकी घोषणा करते हुए जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ दरख्शां अंद्राबी ने रविवार (8 मई, 2022) को कहा कि जिन लोगों ने वक्फ की जमीन पर कब्जा किया है, जल्द ही केंद्र शासित प्रदेश में उन्हें बुलडोजर का सामना करना पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉ दरख्शां अंद्राबी यहाँ वक्फ बोर्ड के एक दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। प्रेस को सम्बोधित करते हुए उन्होंने उन सभी को चेतावनी दी जिन्होंने वक्फ बोर्ड की भूमि पर अतिक्रमण किया है और उस पर अवैध ढाँचे का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही हम अतिक्रमणकारियों के अवैध कब्जे को हटाने और मस्जिद, मजार, मकान सहित वक्फ भूमि और संपत्ति के स्वामित्व को बहाल करने के लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में एक तोड़-फोड़ अभियान शुरू करेंगे। वक्फ की जमीन और संपत्ति पर कब्जा करने वालों को जल्द ही बुलडोजर का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने आगे कहा कि यह मीडिया के माध्यम से वक्फ बोर्ड की मस्जिद, मजार या किसी प्रकार की संम्पत्ति पर कब्ज़ा करने वाले सभी अतिक्रमणकारियों को चेतावनी है कि वे हमारे पास आएँ और अपने अवैध कब्जे को सरेंडर कर दें अन्यथा उन्हें बुलडोजर का सामना करना पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, वक्फ बोर्ड की एक दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ अंद्राबी ने की, जिसमें बोर्ड के सदस्य डॉ गुलाम नबी हलीम, सैयद मोहम्मद हुसैन, सीईओ जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड मुफ्ती फरीद, वक्फ प्रबंधित मजहबी स्थलों के सभी प्रशासक भी मौजूद थे।

अपने संबोधन के दौरान, डॉ अंद्राबी ने वक्फ बोर्ड में नए कार्य आदेश के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमें अपनी बिखरी हुई व्यवस्था को पुनर्निर्मित करना होगा और राजस्व बढ़ाने के लिए संपत्ति और संपत्तियों के उपयोग में विविधता लानी होगी ताकि बिना किसी देरी के नई पहल की जा सके।”

डॉ दरख्शां अंद्राबी ने वक्फ के राजस्व को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही ताकि नई परियोजनाओं को हाथ में लिया जा सके। उन्होंने मस्जिद, मजार या दूसरे मजहबी स्थलों पर आम लोगों द्वारा दान स्वरुप दिए गए धन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपायों पर भी चर्चा की, साथ ही कहा कि जल्द ही एक फुलप्रूफ प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें लोगों की सभी शिकायतों को पूरी तरह से निवारण किया जाएगा। साथ ही फंड-पारदर्शिता की कमी को दूर किया जाएगा।

शुगर को हानिकारक बताने वाली आलिया कर रहीं शुगर वाले उत्पादों का विज्ञापन: लोग बोले – बॉलीवुड वाले पैसे के लिए कुछ भी करेंगे

पहले अक्सर अपनी आईक्यू के कारण विवादों में रहने वाली आलिया भट्ट अब एक नई वजह से लोगों का निशाना बनी हैं। अब आलिया भट्ट शुगर ड्रिंक्स के विज्ञापनों को करने के लिए लोगों के निशाने पर आई हैं। जबकि, वो कह चुकी हैं कि खुद शुगर नहीं खातीं आलिया भट्ट का एक पहले का वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वो कहती दिख रही हैं कि शुगर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और वो इसका इस्तेमाल नहीं करती हैं।

जबकि आलिया विज्ञापनों में वो फ्रूटी जैसे उत्पाद का प्रचार करती हुई दिख रही हैं, जिसमें शुगर डाला जाता है। उनके दोहरे रवैये को लेकर लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि रुपए के लिए के बॉलीवुड सेलेब्रिटी कुछ भी कर सकते हैं। ‘फ़िल्मी पुलाव’ नाम के एक ट्विटर पेज ने लिखा कि अपने बॉलीवुड आइकॉन्स को जानिए, जो खुद शुगर को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बता कर खाने में उसका इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन विज्ञापनों के जरिए कमाई के लिए वो शुगर वाले प्रोडक्ट्स का प्रचार कर सकते हैं।

वर्कफ्रंट की बात करें तो आलिया भट्ट मल्टीस्टारर ‘ब्रह्मास्त्र’ में दिखने वाली हैं, जिसमें रणबीर कपूर, नागार्जुन और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े अभिनेता भी हैं।’ब्रह्मास्त्र’ 9 सितंबर, 2022 को रिलीज होने वाली है।इसके अलावा वो ‘डार्लिंग्स’ नामक फिल्म का निर्माण भी कर रही हैं, जिसमें वो बतौर अभिनेत्री भी दिखेंगी। इसमें शेफाली शाह और विजय वर्मा भी मुख्य भूमिकाओं में होंगे। आलिया भट्ट ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में भी दिखाई देंगी।

करण जौहर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उनके ऑपोजिट रणवीर सिंह होंगे, जबकि धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी जैसी वरिष्ठ हस्तियाँ इस फिल्म का हिस्सा होंगी। हाल ही में आई आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने दुनिया भर में 196 करोड़ रुपए की कमाई की, जबकि भारत में इसका कलेक्शन 117 करोड़ रुपए नेट रहा। साथ ही वो तेलुगु फिल्म ‘RRR’ का भी हिस्सा थीं, जिसने अब तक 1125 करोड़ रुपए से भी अधिक की कमाई कर ली है।

लेखक नीलोत्पल मृणाल पर 10 साल तक रेप करने का आरोप, FIR दर्ज: पीड़िता ने कहा- पुलिस से भी दिलवाई जाती थी धमकी

लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल पर एक उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली 32 साल की महिला ने रेप का आरोप लगाया है। लेखक के खिलाफ दिल्ली के तिमारपुर पुलिस स्टेशन में बलात्कार का केस दर्ज हुआ है। महिला का आरोप है कि लेखक ने शादी का झाँसा देकर उससे 10 साल तक दुष्कर्म किया।

इस बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस ने ANI से कहा कि एक महिला की शिकायत पर लेखक के खिलाफ तिमारपुर थाना क्षेत्र में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ है। घटना की जाँच चल रही है। रेप का आरोप लगाने वाली महिला ने अपनी FIR में ये भी कहा है कि एक पुलिस अधिकारी ने भी उस लेखक पर केस दर्ज करने को लेकर धमकाया है। अधिकारी ने महिला और उसके पिता पर केस वापस लेने का दवाब भी बनाया था। उसने महिला के पिता से कहा कि अगर उसकी बेटी केस करेगी तो उस पर लेखक से पैसे के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगा दिया जाएगा।

साल 2013 में लेखक से मिली थी महिला

बता दें कि महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि वो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी करने के दौरान साल 2013 में लेखक से मिली थी और बाद में उनकी दोस्ती हो गई। इसके बाद लेखक ने उससे शादी का वादा करके उसका फायदा उठाया। वो दस सालों से दुष्कर्म की शिकार है। वहीं कोर्ट ने लेखक की गिरफ्तारी पर 31 मई तक रोक लगा दी है। दरअसल लेखक की तरफ से कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश पारित किया है।   

कौन है नीलोत्पल मृणाल?

मूलरूप से झारखंड निवासी नीलोत्पल मृणाल साहित्य जगत का जाना-माना नाम हैं। उन्हें साल 2016 में मशहूर बुक ‘डार्क हॉर्स’ के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नीलोत्पल मृणाल का जन्म 25 दिसंबर 1984 में दुमुका में हुआ था। ‘डार्क हॉर्स’ के अलावा उनकी किताब ‘औघड़’ भी काफी चर्चा में रही है।

शाहीन बाग में अवैध निर्माण को ढाहने पहुँचा बुलडोजर, सामने बैठ गए कॉन्ग्रेसी नेता और लोग: दिल्ली पुलिस और CRPF की तैनाती

दिल्ली के शाहीन बाग में आज अतिक्रमण विरोधी अभियान चलेगा। दिल्ली पुलिस ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम को इस अभियान के लिए पुलिस बल देने का एलान किया है। इसी के साथ ही शाहीन बाग में बुलडोजर चलने संबंधी तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। इलाके में पैरामिलिट्री भी तैनात कर दी गई है।

स्थानीय लोग कुछ नेताओं के सह पर अतिक्रमण हटाने आए बुलडोजर के सामने आकर बैठ गए हैं। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार ये नेता खुद को कॉन्ग्रेस से जुड़ा बता रहे। इन नेताओं का कहना है कि गरीबों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, जो नहीं होने दिया जाएगा। जबकि दक्षिण दिल्ली नगर निगम का स्पष्ट कहना है कि बुलडोजर वाली कार्रवाई सिर्फ अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर है।

CNN न्यूज़ 18 के मुताबिक अतिक्रमण विरोध अभियान 11.30 बजे शुरू हो सकता है। इलाके में भारी पुलिस बल दिखाई दे रहा है। बुलडोजर भी शाहीन बाग़ में पहुँच चुके हैं। इस बार दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने किसी भी वकील के लिए जहाँगीरपुरी की तरह कोर्ट से स्टे लेने के विकल्प नहीं छोड़े हैं। स्थानीय मेयर ने उन इलाकों का दौरा भी कर लिया है, जहाँ बुलडोजर चलने हैं।

SDMC सेंट्रल ज़ोन के चेयरमैन राजपाल ने कहा, “हमारे अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से तैयार हैं। टीमों का गठन कर लिया गया है। जहाँ भी अतिक्रमण होगा, उसे हटाया जाएगा। यह अभियान तुगलकाबाद, संगम विहार, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और शाहीन बाग में चलेगा।”

इस से पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में शाहीन बाग में बुलडोजर चलने पर संदेह जताया गया था। इस संदेह के पीछे पर्याप्त पुलिस बल न होना कहा गया था। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने इस बुलडोजर अभियान के खिलाफ अदालत में याचिका दाखिल की है।

CPI की सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका में कहा गया, “प्राधिकरण झुग्गी-बस्तियाँ ढहाने का प्लान बनाए हुए है। मई महीने के ही 4 तारीख को संगम विहार में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चला था। सोमवार को यही काम शाहीन बाग में भी होना है। दक्षिण दिल्ली नगर निगम पुलिस बल के साथ मिल कर ओखला शाहीन बाग में भी यही करने जा रहा है। उन्हें ऐसा करने से रोका जाए।”

गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने इसी माह शाहीन बाग से अतिक्रमण हटाने का फैसला किया था। इस बावत उन्होंने अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे दी थी। साथ ही सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस को भी सूचित कर दिया गया था।

विधानसभा भवन के बाहर खालिस्तानी झंडे: हिमाचल पुलिस ने SFJ के पन्नू पर लगाया UAPA, CM ठाकुर को दे चुका है धमकी

हिमाचल प्रदेश विधानसभा भवन में खालिस्तानी झंडे लगाने के मामले में अब पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। हिमाचल पुलिस ने इस मामले में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसिल गुरपतवंत सिंह पन्नू को मुख्य आरोपित बनाया है। साथ ही एक एफआईआर भी दर्ज की गई है, जिसमें यूएपीए (UAPA) समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

सभी जिलों को दिए गए निर्देश 

हिमाचल प्रदेश पुलिस के मुताबिक, आईपीसी के सेक्शन 153-A, 153-B और यूएपीए के सेक्शन 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा आरोपितों को पकड़ने के लिए इंटरस्टेट बॉर्डरों को सील कर दिया गया है। इसके लिए हर जिले के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तमाम ऐसी जगहों पर छापेमारी की जा रही है, जहाँ खालिस्तानी समर्थकों के छिपने की संभावना हो। 

क्या है पूरा मामला?

दरअसल हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मेन गेट पर खालिस्तान के झंडे लटकाए गए और इसकी दीवारों पर कुछ आपत्तिजनक नारे भी लिखे गए। विधानसभा परिसर के मेन गेट नंबर एक की बाहरी तरफ ये झंडे लटके मिले जिन्हें बाद में प्रशासन ने हटा दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हिमाचल सौहार्दपूर्ण राज्य है और यहाँ शांति कायम रहनी चाहिए। धर्मशाला में हुई घटना के दोषी जहाँ भी होंगे उन्हें शीघ्र पकड़ा जाएगा। उन लोगों का यह कायरतापूर्ण दौर अब अधिक नहीं चलेगा। निश्चित तौर पर इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’ 

मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा, “धर्मशाला विधानसभा परिसर के गेट पर रात के अंधेरे में खालिस्तान के झंडे लगाने वाली कायरतापूर्ण घटना की मैं निंदा करता हूँ। इस विधानसभा में केवल शीतकालीन सत्र ही होता है इसलिए यहाँ अधिक सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता उसी दौरान रहती है। इसी का फायदा उठाकर यह कायरतापूर्ण घटना को अंजाम दिया गया है, लेकिन हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस घटना की त्वरित जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। मैं उन लोगों को कहना चाहूँगा कि यदि हिम्मत है तो रात के अंधेरे में नहीं, दिन के उजाले में सामने आएँ।”

पन्नू ने दी थी सीएम जयराम ठाकुर को धमकी

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2021 में SFJ आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

सेना में गए तो अपने बिरादरों को मारना पड़ेगा… केरल के अस्कर अली ने खोली कट्टरपंथी तालीम की पोल, कहा- इस्लाम ही असली फासीवाद है

इस्लाम छोड़ने का ऐलान वाले केरल के अस्कर अली पर 1 मई 2022 को कोल्लम में मुस्लिम भीड़ के हमले का शिकार होना पड़ा था। तब उनके अपहरण का भी प्रयास हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान यौन शोषण होने का खुलासा किया था। अब अस्कर अली ने कई नए सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया है कि मुस्लिम रहने के दौरान उन्हें सेना तक में जाने से मना किया जाता था।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए अस्कर अली ने कहा, “हमें दूसरे समुदायों से नफरत करना सिखाया जाता था। हमको सेना में भी जाने से मना किया जाता था। बोला जाता था कि सेना में अपने ही बिरादरी के लोगों को मारना पड़ेगा जो हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है। जो भारत की सीमा में घुसपैठ करना चाहते हैं क्या वो मुस्लिम नहीं है ? सेना में हमें उन घुसपैठियों को मारने का दबाव बनाया जाएगा। हमारा मज़हब किसी और मुस्लिम को मारना नहीं सिखाता है।”

अस्कर अली ने आगे बताया, “मुझे मिल रही ये शिक्षा असल में बहुत ही खतरनाक है। ये बातें उन्होंने सिर्फ हमें नहीं बताईं बल्कि यही सोच वो हमारे समाज में फैला रहे हैं। किसी संगठन पर बैन लगाने का मतलब ये नहीं होगा कि उस सोच को खत्म कर दिया गया है। इस्लाम ठीक वैसे ही रहेगा। यह ही असली फासीवाद है।”

गौरतलब है कि अस्कर अली मल्ल्पुरम के रहने वाले हैं। उन्होंने वहीं के एक संस्थान से 12 साल का हुदावी कोर्स किया है। उनका कहना है, “मैंने इस्लाम छोड़ने से पहले इसका विस्तार से अध्ययन किया। (हुदावी) कोर्स के दौरान मैंने जो जो पढ़ा वो मुझे ऐसा करने पर मजबूर किया। जो लोग धर्म छोड़ते हैं उन्हें उनके परिवार के सदस्य नीच प्राणी के रूप में देखा जाता है। इस्लाम छोड़ने की घोषणा के बाद से ही मुझे अपने रिश्तेदारों और अन्य कट्टरपंथी तत्वों द्वारा जान से मारने जैसी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।”

इस दौरान वो रविवार (1 मई, 2022) को ‘वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद और समाज में सुधार की भावना’ को बढ़ावा देने वाले संगठन ‘एसेंस ग्लोबल’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गए थे। यहाँ उन्हें इस्लामी अध्ययन के छात्र के रूप में अपने अनुभव को साझा करना था। अस्कर अली की शिकायत के मुताबिक, “मलप्पुरम में लोगों के एक समूह ने मेरे अपहरण की कोशिश की। मुझे कोल्लम समुद्र तट पर ले जा कर मेरे साथ मारपीट की गई। उन्होंने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया गया और मेरे कपड़े फाड़ दिए गए थे। मुझे जबरन एक वाहन में ले जाने का प्रयास किया जा रहा था। स्थानीय लोगों के शोर मचाने पर पुलिस ने मुझे बचाया।”

द कश्मीर फाइल्स की तारीफ करना अक्षय कुमार की मजबूरी: विवेक अग्निहोत्री ने बताया- पीठ पीछे किसी ने नहीं किया सपोर्ट

बॉलीवुड डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स बॉक्स’ ऑफिस पर एक बहुत बड़ी हिट साबित हुई। कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन और उन पर हुए अत्याचार पर बनी यह फिल्म रिलीज के बाद से लेकर अब तक एक हॉट टॉपिक बनी हुई है। इतना ही नहीं बॉलीवुड के अंदर चल रही गैंग को लेकर भी विवेक अग्निहोत्री ने खुलकर निशाना साधा है। 

वहीं अब विवेक अग्निहोत्री के इंटरव्यू की एक शॉर्ट क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने अक्षय कुमार के फिल्म को सपोर्ट करने पर अब अपना रिएक्शन दिया है। डायरेक्टर ने साफ कहा कि फिल्म की तारीफ करना अक्षय कुमार की मजबूरी थी। डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री दावा करते हैं कि कि इंडस्ट्री की तरफ से उन्हें कोई तारीफ या सपोर्ट नहीं मिला।

विवेक ने आगे कहा कि अक्षय कुमार की ‘बच्चन पांडे’ फ्लॉप हो गई थी जिसकी वजह से उन्हें मजबूरी में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तारीफ करनी पड़ी। विवेक अग्निहोत्री ने हाल में आरजे रौनक के साथ एक इंटरव्यू किया। इस दौरान आरजे रौनक कहते हैं, “बॉलीवुड के सारे लोगों ने आपकी फिल्म की सराहना की है।” तब विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “जैसे… जैसे नाम बताओ।” आगे आरजे रौनक ने कहा, “अक्षय कुमार ने बोला।” विवेक जवाब देते हैं, “वो तो मजबूरी में, क्या बोलेगा आदमी जब सौ लोग सामने खड़े होके सवाल पूछेंगे कि कश्मीर फाइल्स चली आपकी फिल्म नहीं चली, मैं एक फंक्शन में था भोपाल में, तो उन्हें बोलना पड़ गया।” विवेक बताते हैं, “पीछे कोई तारीफ नहीं करता।”

बता दें कि अक्षय और विवेक रंजन अग्निहोत्री भोपाल में एक कार्यक्रम में एक साथ हिस्सा लेने पहुँचे थे। जहाँ अक्षय ने ‘कश्मीर फाइल्स’ का तारीफ करते हुए कहा था कि एक लहर बनकर आई जिसने सभी को झंझोर दिया और उनकी फिल्म को भी डुबो दिया। बता दें कि अक्षय की फिल्म ‘बच्चन पांडे’, ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रिलीज के एक हफ्ते बाद रिलीज हुई थी, जो अपना कमाल नहीं कर पाई थी।

वहीं अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने तंज कसा था। उन्होंने इस तरह की फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माताओं को क्लर्क की संज्ञा दी थी। ट्विंकल खन्ना ने कहा था कि कश्मीर फाइल्स की सफलता के बाद फिल्म निर्माता ‘अंधेरी फाइल्स’, साउथ ‘बॉम्बे फाइल्स’ नाम पंजीकृत कराने के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों के नाम पहले ही रजिस्टर्ड किए जा चुके हैं। इसलिए अब छोटे-छोटे मुहल्लों का विकल्प बचा है।

पाकिस्तान के 17 हिंदू शरणार्थियों को मिली भारत की नागरिकता: अहमदाबाद में शपथ पत्र लेकर कहा – सुरक्षित महसूस कर रहे

पाकिस्तान के 17 हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल गई है। इन सभी शरणार्थियों को अहमदाबाद के कलेक्टर संदीप सांग्ले ने शपथ पत्र दिया। सभी शरणार्थियों ने इसके लिए शुक्रिया अदा किया। इस दौरान कलेक्टर ने शरणार्थियों से बात भी की। बातचीत के क्रम में एक शरणार्थी ने बताया कि वो भारत में शांति और सुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए वो भारत की नागरिकता पाकर बेहद खुश हैं। 

नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों के तहत, सात या अधिक वर्षों से भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों को संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने के बाद नागरिकता मिलती है।

पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की नागरिकता को लेकर एक खबर और है। इस खबर के अनुसार कई साल से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहने वाले 17 पाकिस्तानी नागरिकों को भी जल्द भारतीय नागरिकता मिल सकती है। ये सभी यहाँ पर बिना नागरिकता के ही रह रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि अब इनका इंतजार जल्द खत्म हो सकता है।

केंद्र व प्रदेश सरकार ने बांग्लादेश, अफगानिस्तान व पाकिस्तान के रहने वाले लोगों की नागरिकता के आवेदनों में मिली कमियों को दूर करा कर उनका जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। अलीगढ़ शहर में रहने वाले हिंदू परिवारों के लोगों में से तीन को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि चार पाकिस्तानी मुस्लिम भी नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल दिसंबर 2019 में पाकिस्तान के सिंध से भाग कर आए 8 हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी गई थी।

रात में कमरे में लेकर जाकर मुफ्ती करता है गलत काम: ईद पर घर लौटे बच्चे ने अब्बू से की शिकायत, बताई मदरसे में कुरान पढ़ाने वाले मौलवी की करतूत

UP के मेरठ जिले में एक मदरसे के मुफ़्ती पर बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। आरोपित मुफ़्ती का नाम अब्दुल कलाम है। वह मदरसा दावातुल इस्लाम में बच्चों को कुरान पढ़ाता था और अन्य मज़हबी तालीम देता था। आरोप है कि मुफ़्ती कई अन्य बच्चों के साथ भी कुकर्म कर चुका है। पुलिस ने मामले में (7 मई 2022) को FIR दर्ज कर ली है। आरोपित मुफ़्ती फरार है।

एक वीडियो में थाने में बैठे बच्चे को कहते सुना गया, “मेरे साथ 19 – 20 बार गलत काम किया गया। मुफ़्ती रात को कमरे में से उठा कर ले जाता था। कमरे में 10 – 11 बच्चे थे। वो 3 और भी बच्चों के साथ ऐसा करते हैं। वो थोड़े बड़े बच्चों के साथ ये सब करता था। वो बच्चे भी नजफगढ़ के रहने वाले हैं। उन सभी ने अपने घर पर यह बात बताई है। मैं जब ईद पर अपने घर गया तब अब्बू को यह बात बताई थी।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी पीड़ित बच्चे सहरानपुर के निवासी हैं। मुफ़्ती उनके साथ 7 माह से कुकर्म कर रहा था। मदरसा मेरठ के इकराम नगर के फरीद कॉलोनी में स्थित है। बच्चे को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। पुलिस में शिकायत दर्ज होते ही आरोपित मुफ़्ती फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस इस मामले में अभी अन्य बच्चों के भी बयान दर्ज करेगी जो ईद की छुट्टी से लौट कर नहीं आए हैं।

गौरतलब है कि इसी साल जनवरी माह में UP के ही हरदोई जिले में शाहाबाद इलाके में एक मदरसे में वहीं पढ़ने वाले 10 साल के बच्चे के साथ कुकर्म हुआ था। तब आरोप मदरसा जामिया सैयद उल अबरार में कस्बे के बलाईकोट मोहल्ले का रहने वाले अरबाज पर लगा था। वह हाफिजा का छात्र है। आरोप था कि अरबाज ने कुकर्म मदरसे के अंदर ही किया था। पुलिस ने आरोपित को पकड़ लिया था।

भगवान श्रीराम हो गए लड़ाकू रैंबो, हनुमान गुस्से के प्रतीक हैं: छत्तीसगढ़ CM बघेल की BJP-RSS पर टिप्पणी, बोले- राहुल गाँधी अकेले दमदार नेता

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार (मई 8, 2022) को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय सेवक संघ को निशाना बनाने के चक्कर में भगवान श्रीराम और हनुमान पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। सीएम बघेल ने भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधने की आड़ में भगवान श्रीराम को रैंबो कहा और हनुमान जी को क्रोध का प्रतीक। कॉन्ग्रेस नेता व प्रदेश सीएम ने इंडियन एक्सप्रेस को कहा कि भारत इस समय ‘भड़काऊ और आक्रमक राष्ट्रवाद’ के दौर से गुजर रहा है जहाँ किसी आपत्ति या असहमति के लिए कोई जगह नहीं है। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ये दौर एक समय के बाद गुजर जाएगा और कॉन्ग्रेस की दोबारा सत्ता वापसी होगी।

श्रारीम और हनुमान पर CM बघेल की टिप्पणी

उन्होंने कहा, “राम हमारी संस्कृति में समाए हुए हैं। राम साकार और निराकार दोनों हैं… हमने राम को विभिन्न रूपों में स्वीकार किया है। हम कबीर के राम, तुलसी के राम और शबरी के राम को जानते हैं। राम हर भारतीय के दिल और दिमाग में रहते हैं। कार्यकर्ताओं ने राम को एक रूप में स्वीकार किया है, किसान उन्हें दूसरे रूप में देखते हैं, आदिवासी उनका एक और रूप देखते हैं, बुद्धिजीवी और भक्त उन्हें दूसरे रूप में देखते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “महात्मा गाँधी भी राम को मानते थे। उन्होंने आखिर शब्द ही ये कहा था- ‘हे राम’ थे। वे रघुपति राघव राजा राम का पाठ करते थे। लेकिन आज भाजपा और आरएसएस जिस तरह से राम को देखते हैं और जो एजेंडा तय कर रहे हैं, उन्होंने उन राम को बदल दिया है जो ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ थे और हर भक्त के दिलों में प्रेम के प्रतीक के रूप में रहते हैं। भाजपा-आरएसएस ने उन्हें लड़ाकू रैम्बो बना दिया है। इसी तरह हनुमान नम्रता, भक्ति और ज्ञान के प्रतीक हैं। लेकिन आज उनके पोस्टर आक्रमक हैं। यदि आप हनुमान जी के पुराने चित्रों को देखें, तो देखेंगे कि भगवान बहुत सुंदर थे, भक्ति और ध्यान मुद्रा में थे। मगर आज वह क्रोधित और आक्रामक हैं। जिस तरह से वे समाज की मानसिकता को स्थापित कर रहे हैं उन्होंने पहले राम के साथ ये किया (आक्रमक दिखाया) और अब हनुमान के साथ ऐसा कर रहे हैं। हमारा राम कबीर और तुलसी का है, आदिवासियों, किसानों और श्रमिकों के है राम- सौम्य राम जो सर्वव्यापी हैं।”

भाजपा का राष्ट्रवाद ‘मुसोलिनी’ से आया, कॉन्ग्रेस की होगी सत्ता में वापसी

भाजपा पर निशाना साधने के लिए सीएम बघेल ने कहा कि इस पार्टी के राष्ट्रवाद का विचार इम्पोर्ट किया हुआ है। बीएस मुंज का नाम लेते हुए उन्होंने पूछा, “मुसोलिनी से कौन मिला था, वह बीएस मुंज थे….ड्रम, टोपी, सब कुछ इम्पोर्ट किया हुआ है। इनके राष्ट्रवाद में असहमति और आपत्ति को जगह नहीं है। हमारा राष्ट्रवाद बिलकुल अलग था। हम शुरुआत से ही परंपराओं से जुड़े रहे जिसका विकास शंकराचार्य, कबीर, गुरु नानक, रामकृष्ण परमहंस द्वारा हुआ।”

पार्टी की सत्ता वापसी को लेकर सीएम बघेल ने कहा कि भारतीय समाज प्रेम, भाईचारा और सहिष्णुता चाहता है। यही देश की संस्कृति रही है। अंत में सिर्फ प्रेम और भाईचारा ही जीतेगा। कॉन्ग्रेस नेता उम्मीद करते हैं कि जिस दौर से देश गुजर रहा है उसका जल्द अंत होगा। लोग समझ चुके हैं कि अब हद्द हो गई है। हिंसा अलग अलग राज्यों में हो रही है। उन्होंने कहा, “मैं नाम नहीं लेना चाहता। लेकिन क्या ये हिंसा का नेतृत्व कोई कर रहा है। ये बिन सिर की है। अगर ऐसा एजेंडा तय होता है तो ये देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।”

सीएम बघेल के लिए राहुल गाँधी निर्भीक राजनेता

अपने इंटरव्यू में सीएम बघेल ने राहुल गाँधी को एकमात्र निर्भीक व दमदार राजनेता कहा जो भाजपा से नहीं डरते हैं और सीधे उन पर हमला करते हैं। सीएम बघले के अनुसार सिर्फ राहुल गाँधी ही ऐसे नेता हैं जो लोगों के कल्याण का सोचते हैं। चाहे वो महंगाई का मामला हो, बेरोजगारी का, जीएसटी या नोटबंदी का।

भूपेश बघेल के पिता पर भी है श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप

गौरतलब है कि केवल सीएम बघेल ने भाजपा के कंधे पर बंदूक रखकर हिंदू देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की। उनकी छवि पर सवाल नहीं उठाए बल्कि उनके पिता नंद कुमार बघेल पर भी भगवान राम के बारे में कथिततौर पर अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगा था। साल 2021 में उनके खिलाफ एफआईआर हुई थी क्योंकि उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर कहा था कि वह ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा भेजेंगे। जैसे अंग्रेज आकर गए वैसे ही ब्राह्मण भी सुधर जाएँ वरना वोल्गा जाने को तैयार हों।