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MP का यासीन मछली करवाता था रेव पार्टी, ₹25 हजार में देता था एंट्री… हिन्दू लड़कियाँ होती थीं टारगेट पर: शहर से बाहर होते थे वेन्यू, पीड़िता ने करवाई रेप की FIR

भोपाल में हाई प्रोफाइल ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार यासीन मछली को लेकर कई खुलासे हुए हैं। यासीन मछली हिन्दू लड़कियों को टारगेट करता था। यासीन पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन मछली और उसका परिवार शामिल था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग तस्करी मामले में पकड़े गए यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। क्राइम ब्रांच के एडिशनल DCP शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि रेव पार्टी में शामिल होने से पहले सभी लोग यासीन के बताए पब में इकट्ठा होते थे। यहाँ से पार्टी के लिए तय जगह पर रवाना होते थे।

रेव पार्टियों में नाच गाना, भारी शोर शराबा और ड्रग्स के नशे के बीच युवाओं को ‘एंजॉय’ करवाया जाता था। रात भर लाउड म्यूजिक होने के बाद भी शिकायत नहीं की जाती थी, क्योंकि पार्टी के लिए ऐसे फार्म हाउस चुने जाते थे, जो शहर की भीड़-भाड़ वाले इलाकों से काफी दूर हुआ करते थे।

क्राइम ब्रांच ने शहर के उन सभी पब, क्लब और लाउंज को नोटिस जारी किया है, जिसमें यासीन और उसके गिरोह के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। अधिकारियों को शक है कि गिरोह में पब, क्लब और लाउंज के मालिक या स्टाफ भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए क्राइम ब्रांच ने उन सभी पब क्लब और लाउंज मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है।

यासीन ने पब में मिली युवती का किया रेप

भोपाल के एमपी नगर थाने में यासीन मछली के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। यासीन पर 29 वर्षीय युवती के रेप का आरोप है। थाने की सब इंस्पेक्टर अर्चना तिवारी ने बताया कि प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली युवती ने रेप की शिकायत दर्ज कराई है।

युवती ने शिकायत में बताया कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया। 1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

साल 2000 में दुर्गा पंडाल के लिए चंदा और देवी जागरण के आयोजन के जरिए हिंदुओं का भरोसा जीतना शुरू किया। इसके बाद 2005 से 2010 के बीच हथाईखेड़ा के आसपास कई इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों का निर्माण हुआ। इन्हीं कॉलेजों के छात्रों के लिए फ्रेशर्स पार्टियाँ और क्रिकेट टीम बनाकर टूर्नामेंट कराए।

2015 के बाद इन पार्टियों में नशे का कारोबार चालू किया। छात्रों को नशे की लत लगा दी। मछली परिवार अवैध हथियारों की सप्लाई, ड्रग्स के अवैध कारोबार में पूरी तरह शामिल था। इस दौरान लड़कियों से रेप और ब्लैकमेलिंग का सिलसिला भी शुरू हुआ।

यासीन का गुर्गा अंशुल सिंह कॉन्ग्रेस नेत्री का बेटा निकला

यासीन के गुर्गे अंशुल सिंह उर्फ भूरी को 31 जुलाई 2025 को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सोमवार (04 अगस्त 2025) को कोर्ट में पेशी के बाद अंशुल की रिमांड 07 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी गई। पूछताछ में अंशुल ने खुद को कॉन्ग्रेस की महिला नेता का बेटा बताया।

अंशुल पर शहर के अलग-अलग थानों में 20 से अधिक हत्या के प्रयास, मारपीट, आर्म्स एक्ट, शराब और तस्करी के केस दर्ज हैं। टीटी नगर थाने में उसको हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है।

पुलिस ने अंशुल के बयान के आधार पर 32 वर्षीय तौफीक निजामी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक पिस्टल और कारतूस जब्त किया गया है। तौफीक ने ही अंशुल को अवैध पिस्टल दी थी।

पुलिस की गिरफ्त में आया शाहवर मछली

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था। युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

सेना के अपमान पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी को लताड़ा, न्यायपालिका पर झुंड बना कर INDI गठबंधन टूटा: प्रियंका बोलीं- जज नहीं करेंगे तय

सेना पर आपत्तिजनक बयान मामले में राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा है। इसके बाद कॉन्ग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ही खड़ी हो गई है। कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी ने न्यायपालिका को घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने एक तरह से यह इशारा कर दिया है कि जज राहुल गाँधी पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस के साथ ही बाक़ी विपक्षी दल भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ लामबंद हैं।

प्रियंका गाँधी ने क्या कहा?

प्रियंका गाँधी ने मंगलवार (5 अगस्त,2025) को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट के जजों का पूरा सम्मान रखते हुए मैं ये कहना चाहती हूँ कि वे यह तय नहीं करेंगे कि सच्चा भारतीय कौन है।”

उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष के नेता के नाते सरकार से सवाल पूछना उनका (राहुल गाँधी) कर्तव्य है। मेरे भाई कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोलेंगे, वह उनके प्रति बहुत सम्मान रखते हैं। उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया।”

INDI ब्लॉक ने भी सुप्रीम कोर्ट का किया अपमान

कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने एक X पोस्ट में लिखा, “आज सुबह इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश द्वारा राहुल गाँधी जी पर की गई टिप्पणी पर चर्चा हुई।”

श्रीनेत ने आगे लिखा, “इंडी गठबंधन के सभी घटक दल इस बात से सहमत हैं कि वर्तमान न्यायाधीश ने एक ऐसी टिप्पणी की है जो राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर टिप्पणी करना राजनीतिक दलों, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष का दायित्व है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। माकन ने एक X पोस्ट में लिखा, “राहुल गाँधी जी और कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार चीन के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रही है, यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है… राहुल गाँधी की आवाज़ दबाने की हर कोशिश, सरकार की विफलताओं और उनके डर को उजागर करती है। ओ माई लार्ड।”

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (4 अगस्त) को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राहुल गाँधी की याचिका पर सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे?

कोर्ट ने आगे कहा, “आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं…अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते।”

सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते। तो इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, “आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा क्यों कहना पड़ता है?”

क्या था मामला?

यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की चीन पर भारत के कब्जे और भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों द्वारा ‘पीटे जाने’ की टिप्पणी से जुड़ा था। उन्होंने कहा था, “लोग भारत जोड़ो यात्रा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट वगैरह के बारे में तो पूछेंगे ही। लेकिन चीन द्वारा 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा करने, 20 भारतीय सैनिकों को पीटने और अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछेंगे।”

राहुल के इस बयान के बाद सीमा सड़क संगठन के एक अधिकारी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में केस दर्ज करने से मना कर दिया था जिसके बाद राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था

पीएम मोदी ने भी किया SC की टिप्पणी का जिक्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी की जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कल लगाई गई फटकार से बड़ी कोई फटकार नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा, “हम क्या कहें, जब सुप्रीम कोर्ट ने ही कह दिया… ये तो पत्थर मारना ही नहीं, ये ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति है।”

‘न्यूक्लियर पर बयानबाजी में रखो सावधानी’: रूस ने अमेरिका को चेताया, मेदवेदेव के बयान के बाद ट्रंप ने भेजी थी परमाणु हथियार वाली 2 पनडुब्बी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस के पास दो परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करने के आदेश दिए जाने के बाद अब रूस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके बयानों को लेकर चेतावनी दी है।

एक प्रेस ब्रीफ्ंग में पेसकोव ने कहा, “रूस परमाणु अप्रसार के विषय पर बहुत सतर्क है और हमारा मानना है कि सभी लोगों को परमाणु से जुड़ी कोई भी बयानबाजी करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।”

वाकयुद्ध से परमाणु हथियार तक पहुँचे अमेरिका-रूस के हालात?

अमेरिका और रूस के बीच हालिया विवाद की शुरुआत ट्रंप और रूस के पूर्व राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के बीच हुए वाकयुद्ध के बाद हुई थी। दरअसल, ट्रंप ने रूस को 10 दिनों के भीतर रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने पर सहमति देने का अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह रूस और उसके तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाएँगे।

इस पर मेदवेदेव ने कड़ा पलटवार किया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद खास मेदवेदेव ने 28 जुलाई को एक X पोस्ट में कहा था कि ट्रंप का हर नया अल्टीमेटम ‘युद्ध की ओर एक कदम’ माना जाएगा और ये युद्ध यूक्रेन-रूस के बीच नहीं बल्कि अमेरिका के साथ होगा।

उन्होंने लिखा था, “रूस के साथ ट्रंप अल्टीमेटम का खेल खेल रहे हैं: 50 दिन या 10… उन्हें दो बातें याद रखनी चाहिए। एक तो रूस इज़रायल या ईरान नहीं है। दूसरा हर नया अल्टीमेटम एक खतरा और युद्ध की ओर एक कदम है। रूस और यूक्रेन के बीच नहीं बल्कि उनके अपने देश के साथ होगा।”

मेदवेदेव के इस बयान के बाद ट्रंप भड़क गए और दो परमाणु पनडुब्बियों को रूस के पास तैनात कर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “मेदवेदेव के भड़काऊ बयानों के आधार पर मैंने दो परमाणु पनडुब्बियों को उपयुक्त क्षेत्रों में तैनात करने का आदेश दिया है- इस आशंका के तहत कि कहीं ये मूर्खतापूर्ण और उकसाने वाले बयान केवल शब्दों तक सीमित न रह जाएँ।”

फोटो साभार- ट्रुथ सोशल

ट्रंप ने आगे लिखा, “शब्द बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, और अक्सर अनजाने में गंभीर परिणामों की ओर ले जाते हैं। मैं आशा करता हूँ कि यह मामला ऐसा न हो।” इसके अलावा मेदवेदेव ने रूस के डेड इकोनॉमी वाले बयान को लेकर ट्रंप के बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अमेरिका का दूत जाएगा रूस

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध विराम करने को लेकर कदम उठाने की बात कही है। वो पुतिन को अपना दोस्त भी बताते रहे हैं। हालाँकि, दोनों देशों के बीच बीते कुछ दिनों से संबंध लगातार बिगड़े हैं ऐसे में ट्रंप अपने विशेष दूत को रूस भेज रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को मास्को भेजेंगे क्योंकि अमेरिकी प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों में लगा हुआ है। ट्रंप ने कहा कि वह ऐसा समझौता चाहते हैं जिसके बाद लोगों की हत्याएँ बंद हो जाएँ।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि?

परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना है। इस अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत 1968 में देशों के हस्ताक्षर के लिए खोली गई और 1970 में लागू हुई। 1995 में इस संधि को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था और अब इस पर 191 हस्ताक्षरकर्ता हैं।

इस संधि के तहत परमाणु हथियार वाले देश दूसरों को परमाणु हथियार पाने में मदद न करने का भरोसा देते हैं और परमाणु हथियार न रखने वाले देश परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करते हैं।

‘बहुत फजीहत हुई, पछता रहा होगा’: NDA संसदीय दल की बैठक में PM मोदी ने विपक्ष को घेरा, कहा- राहुल गाँधी का बचपना जाता नहीं

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को लेकर एनडीए संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी का सम्मान किया गया। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर आतंकी संगठन टीआरएफ तक का जिक्र है।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ देश की सेना का सम्मान है और इसे देश के सामने लाना बेहद जरूरी है। विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस की माँग करके विपक्ष खुद पछता रहा होगा। उनकी बहुत फजीहत हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चा विपक्ष रोज कराए और हमें जवाब देने का मौका दे।

बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रस्ताव भी पास किया गया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पर्यटकों के प्रति गहरी संवेदन प्रकट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रस्ताव में कहा गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ में अदम्य साहस दिखाने वाले सेना के जांबाजों को सलाम करता है। उनका साहस देश की सुरक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

पीएम मोदी ने एनडीए संसदीय दल की बैठक में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अगस्त 2025) के ऑबजर्वेशन में कह दिया है अब हम क्या कहें। सुप्रीम कोर्ट ने जितनी बड़ी फटकार लगाई है ये बहुत बड़ी बात है। ये तो पत्थर पैर पर मारना ही नहीं बल्कि आ बैल मुझे मार वाली हालत है।

भारत की कूटनीतिक जीत की हुई चर्चा

बैठक में पारित प्रस्ताव में अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया। ब्रिक्स देशों ने साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा की। पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद फैलाने का क्वाड देशों ने विरोध किया। ये भारत की कूटनीतिक जीत को दर्शाता है।

तिरंगा यात्रा में बढ़ चढ़ कर लें हिस्सा- पीएम

पीएम मोदी ने सांसदों से कहा कि वे खेल दिवस और तिरंगा यात्रा जैसे देशव्यापी कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें और संसदीय क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल होने के लिए उत्साहित करें। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी के बाद सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री के पद पर अमित शाह बने हुए हैं। ये तो अभी शुरुआत है।

एनडीए संसदीय दल की बैठक में संसद भवन का ऑडिटोरियम ‘हर हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के जयकारे से गूँज उठा। बैठक के दौरान महिला सांसदों को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था। नए सांसदों से पीएम मोदी का परिचय भी कराया गया। कठिन परिस्थिति में पीएम मोदी के असाधारण नेतृत्व की सराहना की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि पीएम मोदी के दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने देश को दिशा दी और देशवासियों के दिल में एकता, अखंडता और गर्व की भावना जगाई।

जिन कम्युनिस्टों ने काटे स्वयंसेवक सदानंदन के पैर, सरेंडर से पहले उनको CPM के गुंडों ने दिया ‘हीरो’ जैसा मान: केरल का Video वायरल

केरल में राज्यसभा सांसद C सदानंदन मास्टर के 1994 में पैर काटने वाले कम्युनिस्टों को हीरो की तरह विदाई दी गई है। यह विदाई जेल जाने से पहले दी गई। विदाई पाने वाले 8 कम्युनिस्ट 7 महीनों से फरार थे। इस विदाई समारोह में केरल की पूर्व शिक्षा मंत्री KK शैलजा तक मौजूद रहीं।

इस विदाई को लेकर अब कम्युनिस्ट पार्टी की थू-थू हो रही है। यह सम्मान समारोह थालसेरी सेशंस कोर्ट के बाहर और फिर कन्नूर जिले के मत्तनूर में आयोजित किया गया। यह वहीं जगह है जहाँ हमला हुआ था। कार्यक्रम में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दोषियों को माला पहनाई, नारे लगाए और हीरो की तरह विदा किया।

इसमें मत्तनूर की विधायक और राज्य की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा भी शामिल हुईं। उनके इस सार्वजनिक समर्थन पर अब सभी राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे को हीरो जैसा सम्मान दिया जा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब  सुप्रीम कोर्ट ने भी इन कम्युनिस्टो की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने हमले को ‘पूर्वनियोजित’ और ‘गंभीर रूप से निंदनीय’ बताया था।

सदानंदन मास्टर इस हमले में स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए थे। उन्होंने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और समाज को गलत संदेश देता है। ये लोग दोषी हैं, किसी कोर्ट ने इन्हें बरी नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट तक ने इनकी सजा बरकरार रखी। इसके बावजूद CPI(M) ने उन्हें नायक की तरह विदाई दी और एक निर्वाचित विधायक के.के. शैलजा ने इसमें हिस्सा लिया,  यह और भी चिंता की बात है।”

हमला, जमानत और जश्न

25 जनवरी 1994  को, कन्नूर (केरल) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह कार्यवाह और स्कूल टीचर सदानंदन अपने रिश्तेदारों से मिलकर अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिए घर लौट रहे थे। तभी CPI(M) पार्टी से जुड़े गुंडों ने उन पर हमला किया। इस हमले में वे पूरी तरह से अपाहिज हो गए और तब से अब तक व्हीलचेयर पर हैं।

इस मामले में कुल 12 लोगों को आरोपित बनाया गया था, लेकिन 1997 में कन्नूर की अदालत ने केवल 8 को दोषी ठहराया। चार अन्य आरोपितों को साजिश के आरोप से बरी कर दिया गया। शुरुआत में सभी पर TADA के तहत आरोप लगाए गए थे, लेकिन बाद में ये प्रावधान हटा दिए गए।

इन दोषियों को 7 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन पिछले करीब 30 सालों में वे ज्यादातर समय जमानत पर बाहर रहे क्योंकि उनकी अपीलें कोर्ट में लंबित थीं।

जनवरी 2025 में,  केरल हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा को बरकरार रखा और कहा,  “यह हमला किसी गुस्से या अचानक उकसावे में नहीं हुआ था, यह एक पूर्व-नियोजित हमला था। आरोपितों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।”

कोर्ट ने मुआवजे की राशि भी बढ़ाकर हर दोषी को पीड़ित को 50,000 रुपए देने का आदेश दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की अंतिम याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें 4 अगस्त 2025  तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

खुद कर रहे रूस से व्यापार, भारत को दे रहे शांति का ज्ञान: तेल खरीद पर ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने की कही बात, विदेश मंत्रालय ने दिखा दिया आईना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (4 अगस्त 2025) को कहा कि भारत रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन के साथ युद्ध को बढ़ावा दे रहा है इसलिए अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाएगा। इसके बाद भारत ने भी अमेरिका को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर भारत पर टैरिफ को लेकर पोस्ट साझा की। ट्रंप ने लिखा, “भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसे ऊँचे दामों पर बेच रहा है और भारी मुनाफा कमा रहा है। भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के कारण यूक्रेन में कितने लोगों की जान जा रही है। इस वजह से मैं भारत से आने वाले सामानों पर अधिक टैरिफ लगाऊँगा।”

इससे पहले 30 जुलाई को ट्रंप ने भारत से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।

भारत ने दिया करारा जवाब

ट्रंप के इस पोस्ट के बाद भारत ने भी जवाब दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी में भारत ने अमेरिका के साथ यूरोपियन यूनियन पर भी जमकर निशाना साधा। मंत्रालय ने लिखा कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद भारत को रूस से तेल आयात करने पर अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भारत ने यह आयात तब शुरू किया जब यूरोप ने पारंपरिक आपूर्ति को अपनी ओर मोड़ लिया था। उस समय अमेरिका ने भी भारत को ऐसे आयात के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।

अमेरिका को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं वे खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं और उनके लिए यह कोई मजबूरी नहीं है। भारत का तेल आयात पूरी तरह से घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती और स्थिर ऊर्जा कीमतें देने के उद्देश्य से किया गया है और यह वैश्विक बाजार की स्थिति से मजबूरी में उठाया गया कदम है।

डेटा के साथ यूरोपियन यूनियन को दिया जवाब

अपने पोस्ट में विदेश मंत्रालय ने महज कोरी बात ही नहीं की, बल्कि तथ्यों को भी साथ ही साथ सबके सामने रख दिया। पोस्ट में रणधीर ने लिखा, “2024 में यूरोपीय संघ ने रूस से 67.5 बिलियन यूरो का व्यापार किया और 2023 में सेवाओं का व्यापार 17.2 बिलियन यूरो रहा। ये भारत-रूस व्यापार से कहीं अधिक है।”

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि यूरोपीय संघ ने 2024 में 16.5 मिलियन टन LNG (गैस) आयात किया, जो 2022 के रिकॉर्ड 15.21 मिलियन टन से भी ज्यादा था। यूरोप रूस के साथ जो व्यापार करता है उसमें ऊर्जा के अलावा उर्वरक, खनिज, रसायन, स्टील, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट उपकरण भी शामिल हैं।

ट्रंप पहले भी ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय सामानों के आयात पर प्रभावी टैरिफ 35% होगा। अमेरिका में एक विधेयक भी पारित होने वाला है। इसके तहत रूस के साथ भारत, चीन और ब्राजील के लेन-देन पर 500% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

भारत ने भी साफ तौर पर बता दिया है कि वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है लेकिन किसी के भी दबाव में नहीं आकर ऐसा नहीं होगा।

‘द केरल स्टोरी’ को मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तो रोए ‘अवॉर्ड फॉर सेल’ वाले जितेश पिल्लई: साथ देने आईं साक्षी-दिया, असल दर्द है ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ की सच्चाई खुलना

71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को दो सम्मान मिले हैं। सुदिप्तो सेन को सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर और प्रसांतनु मोहपात्रा को सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर का पुरस्कार दिया गया है। फ़िल्मी दुनिया में सम्मान के प्रतिमान माने जाने वाले यह पुरस्कार एक तय प्रक्रिया के तहत सरकार देती है।

द केरल स्टोरी को मिले इन सम्मानों पर लेकिन अब कुछ लोग परेशान हो गए हैं। ‘द केरल स्टोरी’ को मिले इन सम्मानों पर फिल्मी चेहरे और पत्रकार सवाल उठा रहे हैं। यह वही लोग हैं जो खुद दर्जन के भाव से पुरस्कार बाँटते हैं और इनकी सच्चाई भी सबको पता है।

अब फिल्मफेयर मैगजीन के एडिटर जितेश पिल्लई ने ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार के जूरी सदस्य आशुतोष गोवारिकर की आलोचना की है। जितेश पिल्लाई ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर प्रलाप किया है।

इंस्टाग्राम पर जितेश पिल्लाई ने इसको लेकर लिखा, “एक खतरनाक फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार देकर राष्ट्रीय पुरस्कार के जूरी ने गलत संकेत दिए हैं। चलिए एक पल के लिए फिल्म के शातिर प्रचार और इसकी झूठी कहानी को भूल जाइए… यह अब तक बनी सबसे घटिया फिल्मों में से एक है- इसकी स्क्रिप्ट सबसे घटिया ढंग से लिखी गई है, इसमें एक्टिंग बेहद खराब है, फोटोग्राफी बेहद घटिया है और निर्देशन भी बेढंगे तरीके से किया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “क्या जूरी के अध्यक्ष आशुतोष गोवारिकर को सिनेमाटोग्राफी की इतनी गंदी समझ है कि वह ऐसी फिल्म को पुरस्कार देते हैं और जख्म पर नमक छिड़कने के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार भी दिया गया है।”

पिल्लई ने अपना रोना जारी रखते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि इसे चुनने का मापदंड क्या था और किस वर्ष इसका चयन किया गया था? जब हमारे पास कटहल, बलगम, चिता, 12वीं फेल, आत्म, ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट, विदुथलाई और ऐसी ही कई अच्छी फिल्में थीं तो केरल स्टोरी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार नहीं दिया चाहिए था।”

जितेश पिल्लई ने यह भी कहा, “अच्छे सिनेमा के प्रेमियों का सिर शर्म से झुक गया है। यह वाकई अब तक का सबसे बुरा झटका है और सिनेमा की उत्कृष्टता जज करने के लिए बुरा समय है।”

केरल में इस्लामी कट्टरपंथ और जिहाद की सच्चाई पर रोने वाले जितेश पिल्लई खुद फिल्मफेयर नाम के अवॉर्ड शो से जुड़े हैं। सिनेमा की उत्कृष्टता पर जार-जार रोने वाले जितेश पिल्लई का फिल्मफेयर तो बिकता है। और यह कोई हवा-हवाई दावा नहीं है।

इसकी पोल खुद ऋषि कपूर ने साल 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान खोल दी थी। जब उन्होंने कहा था कि फिल्म ‘बॉबी’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड खरीदना पढ़ा था। यह बात ऋषि कपूर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में भी लिखी थी।

सिंगर अमाल मलिक तक ने फिल्मफेयर अवॉर्ड शो पर ‘पक्षपात’ का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह अवॉर्ड शो केवल स्टार किड्स यानी हीरो-हीरोइन के बेटे-बेटियों को लॉन्च करने का एक साधन है।

उन्होंने कहा था कि स्टार किड्स को ‘बेस्ट डेब्यू अवार्ड’ देकर बॉलीवुड में नए मौके दिलाए जाते हैं। मलिक ने कहा था कि इससे अक्षय कुमार, रणदीप हुड्डा और दिलजीत दोसांझ जैसे बड़े कलाकारों को नीचा दिखाया जाता है।

‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ फिल्म के लीड एक्टर अभय देओल ने भी फिल्मफेयर अवॉर्ड को लेकर अपना अनुभव साझा किया था। उन्होंने कहा था कि अवॉर्ड समारोह ने उन्हें इंडस्ट्री में ‘डिमोट’ कर दिया है। वे कहते हैं कि जिंदगी न मिलेगी न दोबारा के लीड एक्टर से अब वे सपोर्टिंग एक्टर बन गए हैं।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि जिस फिल्मफेयर के बल पर पिल्लई द केरल स्टोरी को लेकर रो रहे हैं, वह तो एक बाजारू अवॉर्ड है। एक क्षण को मान लेते हैं कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में हो सकता है चुनाव गलत हो गया हो, लेकिन वहाँ कोई भी पुरस्कार बिकने के लिए नहीं रखा था।

निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी और बाकी चीजों को लेकर 2 बीघे की पोस्ट में रोने वाले पिल्लई का असल दर्द है इस फिल्म की विषयवस्तु। यह फिल्म उस जिहादी मानसिकता को पर्दे पर उतारती है, जिसे पिल्लई जैसे लिबरल दबा कर रखना चाहते हैं।

हमेशा ला ला लैंड टाइप की फिल्मों को लेकर ज्ञान बघारने वाले पिल्लई को कडवा सच पचा नहीं है। कोई और शख्स यह बातें करता तो ठीक भी लगता। लेकिन वह शख्स बोल रहा है, जिसका करियर की छत अवॉर्ड बेचने वाली मैगजीन की दीवारों पर खड़ी हैं। विडंबना का इससे अप्रतिम उदाहरण दूसरा शायद ही देखने को मिले।

इस आलोचना में उनका साथ देने वालों का नाम गेस करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। बस एक बार वह नाम याद कर लीजिए जो हमेशा ही इस्लामी कट्टरपंथ पर चुप रहे हैं। जी! आपने सही समझा, अब उनके साथ ‘पाकिस्तानी प्रेम’ दिखा चुकी एक्ट्रेस दिया मिर्जा और सोनाक्षी सिन्हा भी जुड़ गई हैं।

जितेश पिल्लई की द केरल स्टोरी को राष्ट्रीय पुरस्कार को मिलने पर आलोचना वाली इंस्टाग्राम पोस्ट में कमेंट कर अपनी राय दी है। हालाँकि, इससे यह सच्चाई नहीं बदलती कि द केरल स्टोरी ने उस पहलू को छुआ, जहाँ पर साउथ बॉम्बे के फिल्मकार जाने से भी डरते हैं।

कमल हासन ने सनातन पर उगला जहर, शिक्षा के बहाने बताया धर्म को ‘जंजीर’: डेंगू-मलेरिया बोलने पर उदयानिधि को भी बचा चुके, DMK के सपोर्ट से पहुँचे हैं राज्यसभा

राज्यसभा सांसद और अभिनेता कमल हासन ने सनातन परंपरा को लेकर विवादित टिप्पणी की है। मक्कल निधि मय्यम (MNM) मुखिया कमल हासन ने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान सनातन पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा ही वह हथियार है जो सनातन को तोड़ सकती है। उनके इस बयान को लेकर हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज करवाया है।

कमल हासन ने क्या कहा?

कमल हासन अपने बयान में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को लेकर हमलावर थे और इस दौरान उन्होंने कहा, “किसी और चीज़ को छोड़कर सिर्फ शिक्षा को ही अपने हाथ में लो।” उन्होंने कहा, “बहुसंख्यक मूर्ख तुम्हें हरा देंगे, केवल शिक्षा ही नहीं हरा पाएगी।”

हासन ने आगे कहा, “शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो तानाशाही और सनातन की जंजीरों को तोड़ सकता है।”

बीजेपी ने किया हासन का विरोध

बीजेपी के नेताओं ने कमल हासन के इस बयान पर एतराज जताते हुए इसका विरोध किया है। तमिलनाडु की बीजेपी नेता तमिलसाई सुंदरराजन ने कहा कि कमल हासन ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। उन्होंने कहा कि वह अब केवल एक अभिनेता नहीं है और उन्हें राज्यसभा सांसद होने के नाते उन्हें अधिक जिम्मेदार होना चाहिए।

सुंदरराजन ने कहा कि कमल हासन DMK के नेताओं से ज्यादा एम के स्टालिन के वफादार हैं और वह लोगों को धर्म के नाम पर बाँटने में लगे हैं। उनका कहना है कि हिंदुओं का अपमान करना तमिलनाडु में फैशन बनता जा रहा है।

बीजेपी के लोकसभा सांसद अरुण गोविल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। गोविल ने शिक्षा से सनातन मिटाने के बयान पर कहा कि सनातन से बड़ी कोई और शिक्षा नहीं है।

पहले भी सनातन विरोधी बयान देते रहे हैं हासन

कमल हासन का सनातन के खिलाफ जहर उगलने का लंबा इतिहास रहा है। कभी उन्होंने हिंदू शब्द को मुगलों से जोड़ा तो कभी गोडसे को हिंदू आतंकवादी बताया था। हासन ने इससे पहले सनातन को पेरियार की विचारधारा से जोड़ते हुए कहा था कि यह विचारधारा सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है।

‘हिंदू आतंकवाद’ के जिस शब्द को कॉन्ग्रेस के काल में गढ़ने की कोशिश की गई थी उसे भी कमल हासन ने अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया था। 2019 में एक चुनावी भाषण देते हुए उन्होंने कहा था, “मैं ये बात महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कह रहा हूँ। आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था, उसका नाम नाथूराम गोडसे था।” जाहिर है उन्होंने आतंकवाद को उस धर्म से नहीं जोड़ने की हिम्मत दिखाई होगी जिससे सबसे ज्यादा आंतकी आते हैं।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयानों का भी कमल हासन ने बचाव किया था। सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया से करने वाले और इसे मिटाने का दंभ भरने वाले उदयनिधि को कमल हासन ने युवा बच्चा कहकर क्लीन चिट दे दी थी। एक बार उन्होंने इसे उदयनिधि का निजी बयान बताया था। उन्होंने हिंदू शब्द को भी मुगलों से जोड़ा और महाभारत को लेकर भी वह अनर्गल प्रलाप कर चुके हैं।

कमल हासन सनातन पर जहर उगलने के अलावा जम्मू-कश्मीर में भी जनमत संग्रह कराए जाने की बात कर चुके हैं। 2019 में जब देश पुलवामा हमले के दर्द से गुजर रहा था तो इसके कुछ ही दिनों बाद कमल हासन ने कश्मीर में जनमत संग्रह की वकालत की थी। उन्होंने कहा था, “भारत कश्मीर में जनमत संग्रह क्यों नहीं करा रहा है? भारतीय सरकार किससे डरती है?” यही नहीं उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को आजाद कश्मीर बताया था।

डिपोर्ट नीति का दिमाग, व्हाइट हाउस का डिप्टी चीफ ऑफ़ स्टाफ… अब भारत के खिलाफ: जानें कौन हैं ट्रंप के कान भरने वाले स्टीफन मिलर, क्यों ‘हेट मॉन्गर’ का मिला है खिताब

अमेरिका और भारत के रिश्ते इन दिनों कुछ ख़ास अच्छे नहीं हैं। वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया। उन्होंने लगातार भारत के विरुद्ध वाकयुद्ध का ऐलान कर रखा है। भारत के खिलाफ उन्होंने टैरिफ का ऐलान भी किया है। हालाँकि, इन बीच एक ऐसा नाम सामने आया है जिसे वाइट हाउस में भारत विरोधी विचारों को हवा देने का जिम्मेदार माना गया है। यह नाम है स्टीफन मिलर। मिलर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी हैं, वाइट हाउस में ‘डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ’ हैं।

अगर सीधे-सीधे कहें तो ट्रंप को दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाफ भड़काने के प्रमुख जरूर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताने वाले ट्रंप आजकल उखड़े हुए हैं तो इसकी एक बड़ी वजह मिलर भी हैं।

मिलर ने भारत पर लगाए आरोप

मिलर ने भारत पर यूक्रेन और रूस युद्ध को फंड करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा, “ट्रंप ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदकर इस युद्ध को फंडिंग करना स्वीकार्य नहीं है।” मिलर का कहना है कि रूसी तेल खरीदने में भारत मूल रूप से चीन के साथ जुड़ा हुआ है जो यह एक आश्चर्यजनक बात है।

अब कैसे मिलर जैसे पश्चिमी देशों के लोग ये अनुमान लगा लेते हैं कि भारत का तेल खरीदा का छोटा हिस्सा तो फंडिंग कर रहा है लेकिन यूरोप गैस खरीदे तो सब बढ़िया है। इन लोगों की असल दिक्कत भारत की ऊर्जा जरूरतों के पूरा होने से है।

भारत को बात-बात पर तेल खरीदने का ज्ञान देने वाले पश्चिमी देशों की नैतिकता के मापदंड कैसे हैं वो इस रिपोर्ट से समझिए। अब इन देशों का मानना है कि भारत युद्ध की फंडिंग कर रहा है लेकिन दो दिन पहले की ही एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप का रूस से गैस आयात जुलाई में 37% (पिछले महीने के मुकाबले) बढ़ा गया है।

कौन हैं स्टीफन मिलर?

39 वर्षीय मिलर ट्रंप के सबसे प्रभावशाली सलाहकारों में शामिल हैं। मिलर ने 2016 और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका से दूसरे देशों के अवैध लोगों को चुन-चुनकर जिस नीति के तहत निकाला जा रहा है, माना जाता है कि उसके कर्ता-धर्ता भी मिलर ही हैं।

मिलर सबसे लंब समय से ट्रंप के सलाहकार रहे लोगों में शामिल हैं और उनके भाषण भी लिखते रहे हैं। मिलर की ताकत का अंदाजा लगाना हो तो NPR की इस रिपोर्ट को देख लीजिए। यह रिपोर्ट बताती है कि मिलर अन्य लोगों को तो छोड़िए अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की बातों को भी दरकिनार कर देते हैं।

यहूदी माता-पिता की संतान मिलर बचपन से ही कुख्यात रहे हैं। ‘द गार्जियन’ की एक रिपोर्ट में उनके बचपन से नस्लवादी होने का ज़िक्र किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि स्कूली दिनों में मिलर का स्कूल के सफाई कर्मचारियों के प्रति घृणित रवैये का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल में मिलर का हिस्पैनिक मूल के साथी छात्रों के प्रति तिरस्कार भरा रवैया था और एक लेख में उन्होंने अपने स्कूल को लेकर लिखा था कि ‘यहाँ ओसामा बिन लादेन का बहुत स्वागत होता’। ड्यूक विश्वविद्यालय में कॉलेज के दिनों में मिलर श्वेत राष्ट्रवादी विचारकों के साथ जुड़ गए।

ग्रेजुऐशन के बाद मिलर ने वाशिंगटन जाकर कॉन्ग्रेस के लिए काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने ट्रंप के पहले अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंस के लिए काम किया था। 2015 में ट्रंप द्वारा अपना राष्ट्रपति अभियान शुरू करने के बाद मिलर ने सेशंस के सीनेट कार्यालय को छोड़ दिया और ट्रंप के काम करने लगे। ट्रंप के बैनन की सिफारिश पर उन्हें भाषण लिखने के काम में लगा दिया गया।

मिलर की एक जीवनी भी लिखी गई है। जब कोई किसी की जीवनी लिखता है तो उसके व्यक्तित्व के हिसाब से, कर्मों से हिसाब से पुस्तक का अच्छा नाम खोजने की कोशिश करता है लेकिन मिलर की जीवनी का नाम है- हेट मॉन्गर यानी नफरत फैलाने वाला। इससे ज्यादा इस पर कुछ लिखे जाने की शायद जरूरत नहीं है।

मिलर की जीवनी (चित्र: Amazon)

राष्ट्रपति के सलाहकारों के कान भरने पर जब अमेरिका ने भुगता

मिलर ऐसे

कोई पहले सलाहकार भी नहीं है जो किसी राष्ट्रपति के कान भरकर उन्हें भड़काने में लगे हों। अमेरिकी इतिहास में कई ऐसे चर्चित सलाहकार रहे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे हेनरी किसिंजर जैसे लोगों को आज भी याद किया जाता है।

किसिंजर ने वियतनाम युद्ध को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी और भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के सलाहकार और उप-रक्षा मंत्री रहे पॉल वोल्फोविट्ज़ को 2003 के इराक युद्ध का सबसे बड़ा हिमायती माना जाता है।

कहा जाता है कि 9/11 के हमले के बाद कैंप डेविड में सबसे पहले वोल्फोविट्ज़ ने ही युद्ध के विचार को उठाया था। 2001 से 2005 बुश के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहीं कोंडोलीज़ा राइस जैसे सलाहकारों को अफगानिस्तान युद्ध में अमेरिका की भूमिका के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

वोटर ID-चॉकलेट-चिप तक ने बताया पाकिस्तानी थे पहलगाम के आतंकी, पर कॉन्ग्रेस नेता मानने को तैयार नहीं: सर्जिकल स्ट्राइक-बालाकोट के समय भी आतंकी मुल्क को दे दिया था क्लीनचिट

पहलगाम हमला करने वाले इस्लामी आतंकी हाल ही में ‘ऑपरेशन महादेव’ में मार दिए गए थे। सेना ने इन्हें जम्मू एवं कश्मीर में एक एनकाउंटर में मार गिराया था। यह तीनों आतंकी पाकिस्तान से आए थे। इनकी पाकिस्तानी पहचान भी स्थापित हो गई है। आतंकियों के पास से मिली वोटर ID, चिप और बाक़ी सामान से भी नई जानकारियाँ निकली हैं। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता रोज नए सबूत आने के बाद भी सच्चाई स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। वह रोज एक नए बहाने से पाकिस्तान को क्लीन चिट थमा रहे हैं।

आतंकियों की लाश से मिले ID कार्ड

ऑपरेशन महादेव में सुलेमान, जिब्रान और अबू हमजा अफगानी मारे गए थे। इन्हीं तीनों ने पहलगाम में हिन्दुओं को चुन-चुन कर मारा था। हालाँकि, जब श्रीनगर के दाचीगाम में सुरक्षाबलों ने इन्हें मार गिराया तो इनकी तलाशी ली गई। अब इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तलाशी में 2 आतंकियों के पास से पाकिस्तान में जारी किए गए 2 लैमिनेटेड वोटर ID कार्ड मिले हैं। यह वोटर ID कार्ड पाकिस्तान चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए थे। यह वोटर ID कार्ड अबू हमजा अफगानी और सुलेमान के थे।

सुरक्षा एजेंसियों ने उनके वोटर ID कार्ड के सहारे पाकिस्तान की वोटर लिस्ट में उनका नाम भी सत्यापित कर लिया है। दोनों आतंकी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहने वाले थे। इनमें से एक लाहौर की रावलपिंडी तहसील का रहने वाला है तो वहीं दूसरा आतंकी पंजाब के ही गुजरांवाला का रहने वाला है। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भी स्पष्ट किया था कि सरकार के पास इन तीनों आतंकियों के पाकिस्तानी होने के पूरे सबूत हैं, जिनमें वोटर ID नम्बर तक शामिल हैं।

चिप-चॉकलेट ने पूरा चिट्ठा सामने रखा

ID कार्ड ने जहाँ स्पष्ट कर दिया कि यह आंतकी पाकिस्तानी थे तो वहीं इनके पास से मिली एक चिप ने इन आतंकियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा ही सामने रख दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि यह चिप आतंकियों के पास से मिले डैमेज सैटेलाइटली फोन से बरामद हुई थी। इस चिप में इन तीनों आतंकियों के NADRA रिकॉर्ड थे। NADRA पाकिस्तान में वही काम करता है, जो भारत में UIDAI करती है। इस तरह इन आतंकियों के फिंगरप्रिंट, चेहरे की जानकारियाँ और यहाँ तक कि पते भी थे।

इसके अलावा इन आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बने खाने-पीने के सामान भी मिले हैं। इसमें कराची में बनाई जाने वाली चोकोमैक्स और कैंडीलैंड टॉफ़ी भी शामिल हैं। इन सब सबूतों से स्पष्ट हुआ है कि यह तीनों आतंकी पाकिस्तानी थे और इन्हें भारत में हमले करने के लिए घुसाया गया था। पता चला है कि यह आतंकी मई, 2022 में भारत में गुरेज इलाके से घुसे थे। इसके बाद इन्होंने हमले चालू किए। सुरक्षा एजेंसियों ने इनका रेडियो कम्यूनिकेशन भी पकड़ लिया था।

कॉन्ग्रेस अब भी नहीं मानने को तैयार

वोटर ID कार्ड, NADRA डिटेल्स और यहाँ तक कि पाकिस्तान में बने सामान के साथ इन आतंकियों की पहचान स्थापित हो जाने के बावजूद भी कॉन्ग्रेस के नेता मानने को तैयार नहीं हैं। कॉन्ग्रेस नेता लगातार पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं कि आतंकियों के पाकिस्तानी होने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने वामपंथी मीडिया पोर्टल द क्विंट को दिए एक इंटरव्यू में जाँच पर प्रश्न उठाए थे और आतंकियों के पाकिस्तानी होने के दावों को मानने से इनकार किया था।

चिदंबरम ने कहा था, “वे (NIA) यह बताने को तैयार नहीं है कि इन हफ्तों में उन्होंने क्या किया? क्या NIA ने आतंकियों की पहचान की है या पता लगाया है कि वे कहाँ से आए थे? आपने कैसे मान लिया कि आतंकी पाकिस्तान से थे।” चिदंबरम के इस बयान का खंडन गृह मंत्री शाह ने संसद में कर दिया था। हालाँकि, इसके बाद भी कॉन्ग्रेस नेता नहीं माने। उन्होंने आतंकियों की पहचान को लेकर प्रश्न उठाने जारी रखे।

कॉन्ग्रेस के नेता यह सब तब कर रहे हैं जब पूरी तरह से स्थापित हो गया है कि आतंकी पाकिस्तानी ही थे और वहीं से घुसपैठ करके जम्मू एवं कश्मीर आए थे। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने सेना के शौर्य पर सवाल उठाए हों। कॉन्ग्रेस का यही रवैया इससे पहले 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट स्ट्राइक पर रहा था। तब भी सेना से सबूत माँगे जा रहे थे। कहीं उनकी कार्रवाई को झुठलाया जा रहा था।

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना से सर्जिकल स्ट्राइक सबूत माँगे थे। उन्होंने कहा था कि सरकार सर्जिकल स्ट्राइक की बात करती है। वे दावा करते हैं कि हमने इतने लोग मार गिराए लेकिन सबूत नहीं दिए। केवल झूठ के पुलिंदे से ये राज कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह के अलावा मध्य प्रदेश से ही आने वाले कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने भी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगे थे।

उन्होंने कहा था, “देश की जनता जानना चाहती है कि सर्जिकल स्ट्राइक कब हुआ? कहाँ हुआ? इसका क्या परिणाम हुआ? सिर्फ मुँह से कह देने भर से काम नहीं चलेगा।” यह बयान उन्होंने तब दिया था जब वह स्वयं संवैधानिक पद पर थे। उन्होंने यह बयान मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए दिया था। बालाकोट स्ट्राइक पर भी कॉन्ग्रेस ने हवा हवाई प्रश्न उठाए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में बालाकोट स्ट्राइक को लेकर विवादित बयान दिया था।

इमरान मसूद ने दावा किया था कि पाकिस्तान हमारे हमलों का मजाक उड़ाता है। मसूद ने सर्जिकल स्ट्राइक पर उंगली उठाते हुए कहा कि पाकिस्तानियों का कहना है कि हिंदुस्तानियों ने तीन कौवे मार दिए हमारे। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता पहलगाम का बदला लेने को किए गए ऑपरेशन सिंदूर तक को नहीं बख्शते। उन्होंने इसे भी कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नाटक के एक कॉन्ग्रेस MLA ने प्रश्न उठाए थे। कॉन्ग्रेस के कर्नाटक विधायक कोथुर मंजूनाथ ने बयान में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिखावा था। कुछ हुआ ही नहीं। बस दिखावे के लिए तीन चार विमान ऊपर भेजे और वापस बुला लिए।” कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी और पृथ्वीराज चव्हान ने भी ऐसी ही बातें की थी। कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे कपिल सिब्बल ने पहलगाम का बदला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाकर लेने की बात कही थी।

कॉन्ग्रेस हमेशा ही ऐसे मामलों पर या तो सेना के विरुद्ध खड़ी दिखाई पड़ती है या फिर सरकार के विरुद्ध। सरकार के विरुद्ध वह राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे भी नहीं छोड़ती। पाकिस्तानी आतंकियों के मारे जाने पर चिदंबरम और मणिशंकर अय्यर के बयान वही बातें करते हैं जो पाकिस्तान हमेशा करता है। वह एक तरह से पाकिस्तान को क्लीन चिट देते हैं और भारत का पक्ष भी कमजोर करते हैं। राहुल गाँधी ने इसी बीच सेना की कार्रवाई को सवालों म खड़ा किया। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति से बाज नहीं आती।

वह पाकिस्तान को बचाती है। कॉन्ग्रेस का दायरा पाकिस्तान को बचाने तक ही सीमित नहीं है। बाटला हाउस में मारे गए आतंकियों को लेकर सलमान खुर्शीद ने कहा था कि इस पर सोनिया गाँधी रोईं थी। यह कॉन्ग्रेस के तुष्टिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण था। देश के भीतर और बाहर खड़े होने वाली सुरक्षा चिंताओं पर कॉन्ग्रेस के ऐसे रवैये ने उसकी भद्द भी पिटवाई है। हालाँकि, उसके नेता मानने को तैयार नहीं हैं।