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अमेरिका ने कहा – यूक्रेन से रूसी फौजें तत्काल निकले, रूस ने Veto कर सभी 11 देशों को किया चुप

रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन में उसके सैन्य अभियान की निंदा की गई। इस प्रस्ताव में रूसी फौजों को यूक्रेन से तत्काल निकलने की माँग भी शामिल थी। यह प्रस्ताव अमेरिका द्वारा लाया गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 11 सदस्यों ने वोट दिया। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात हालाँकि अनुपस्थित रहे। यह प्रस्ताव शुक्रवार (25 फरवरी 2022) को लाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के साथ अल्बानिया ने भी इस प्रस्ताव को साझे तौर पर पारित करवाने का प्रयास किया। प्रस्ताव में रूस द्वारा युद्ध विराम के साथ डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) पर रूस द्वारा अपने फैसले को रद्द करना शामिल था। रूस ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, मतलब अस्वीकार कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र के 5 स्थाई सदस्य देशों में रूस भी है। स्थाई देश में से किसी को भी किसी प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार प्राप्त है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हालाँकि रूस को इस से दुनिया भर में अलग-थलग पड़ जाने की चेतावनी दी।

अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष में अल्बानिया, इंग्लैंड, फ्रांस, आयरलैंड, नॉर्वे, गाबोन, मैक्सिको, ब्राजील, घाना और केन्या ने वोट दिया। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। तीनों देशों ने मामले को बातचीत से सुलझाने की बात कही। अमेरिका अब इस मामले को जनरल एसेम्बली में उठा सकता है। यहाँ लाए गए प्रस्ताव को वीटो नहीं किया जा सकता। जनरल एसेम्बली में पारित प्रस्ताव को लेकर सदस्य देशों पर हालाँकि बाध्यता नहीं होती है।

रूस ने सोमवार (21 फरवरी) को यूक्रेन के दो इलाकों को स्वतंत्र बताया था। रूस ने इन दोनों डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) को दो स्वतंत्र राष्ट्र बताया था। इन देशों ने रूस के साथ सैन्य समझौता किया। साथ ही रूसी सेना की सहायता माँगी। यूक्रेन पिछले 7 वर्षों में इसका शांतिपूर्ण स्थाई समाधान निकालने में विफल रहा है।

गुरुवार (24 फरवरी) को रूस के राष्ट्रपति ने अपनी सेना को दोनों नए राष्ट्रों के नागरिकों की रक्षा करने का आदेश दिया। इस आदेश में यूक्रेन के सैनिकों से सरेंडर करवाना शामिल था। इससे पहले रूस ने यूक्रेन से तटस्थ रहने की कसम खाने और विदेशी हथियारों को अपनी जमीन पर न प्रयोग करने की सलाह दी थी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रूस के हमले को अप्रत्याशित और बेवजह बताया है। 2 दिन पहले जेलेंस्की ने अपने देश के नागरिकों से युद्ध के लिए हथियार उठाने को कहा था।

‘हिजाब’ का असर पहुँचा DU के सेंट स्टीफन तक: SC वकील जे साई दीपक को ‘इस्लामोफोबिक’ बताकर जेंडर सेल ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट के वकील जे साई दीपक के दक्षिणपंथी विचारों से आहत सेंट स्टीफन कॉलेज के जेंडर स्टडीज सेल ने उन्हें कॉलेज में बुलाए जाने का विरोध किया है। सेल ने उन्हें लेकर कहा कि वकील साई दीपक के विचार, उनके बयान हानिकारक, समस्याग्रस्त, पक्षपाती और अल्पसंख्यकों को खारिज करने वाले रहे हैं। अपने बयान में जेंडर सेल ने सुप्रीम कोर्ट के वकील को इस्लामोफोबिक बताते हुए उनके प्रति नाराजगी जाहिर की है।

इस बयान के स्क्रीनशॉट जे साई दीपक ने खुद ट्विटर पर शेयर किए हैं। उन्होंने इन्हें साझा करते हुए दर्शाया कि सेंट स्टीफन कॉलेज की जेंडर स्टडीज सेल में, “स्वतंत्र अभिव्यक्ति, विचारों में विविधता, सहिष्णुता, समावेश” के लिए कितनी जगह है। 

बयान में लिखा गया है कि जे साई दीपक के इस्लामोफोबिक होना, उनके हिजाब मामले पर दिए गए विचारों से स्पष्ट होता है और साथ ही आर्टिकल 370 हटाए जाने पर समर्थन देना भी इस बात का सबूत है कि जे साई दीपक इस्लामोफोबिक हैं। इसके अलावा उन्होंने जो सीएए-एनआरसी के विरोध में अपनी आवाज उठाई थी, उसकी वजह से भी कॉलेज की जेंडर सेल ने उनका विरोध किया है। बयान में लिखा गया है कि राष्ट्र, सभ्यता, धर्म, समुदाय और अधिकारों पर उनके (साई दीपक) दमनकारी, पक्षपाती और उच्च जाति के विचार बहुसंख्यक, लिंगवादी, स्त्री विरोधी और जातिवादी हैं।

जेंडर सेल के बयान के अनुसार, साई दीपक जैसे लोगों को आमंत्रण दिया जाना और इन्हें अप्रूवल मिलना कुछ घटनाओं के कैंसिल होने जुुड़ा है जैसे फराह बशीर जो कश्मीर पर बोलने वाली थीं उस वार्ता का निरस्त होना या फिर किसान प्रदर्शन पर भी पैनल चर्चा होने से पहले रद्द होना। सेल ने अपने कॉलेज पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि कॉलेज का ये गैर राजनैतिक होने वाला कदम, जो कि उसकी विशेषता रही है, ऐसे कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने के लिए जारी है, जिनके अल्पसंख्यकों के विरुद्ध विचार रहे हैं। इसमें कहा गया, “ये जरूरी है कि हम दोबारा से उन लोगों के बारे में सोचें जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे लोगों की उपस्थिति और इन्हें समर्थन दिए जाने की वजह से आहत होंगे।”

इस आमंत्रण के पीछे की वजह बताते हुए सेल ने इसे कॉलेज की उस व्यापक संस्कृति को जिम्मेदार दिखाया जो बिन कोई सवाल किए विवादस्पद व्यक्ति, बुद्धिजीवी और राजनेता को बोलने का प्लेटफॉर्म दे देते हैं वो भी सिर्फ उनके काम के आधार पर, उनकी हेटस्पीच को नजरअंदाज करते हुए।

बता दें कि सेंट स्टीफन कॉलेज के जेंडर सेल द्वारा शेयर किए गए नोट के अनुसार जे साई दीपक को कॉलेज में उनकी किताब “इंडिया दैट इज भारत:कोलोनिएलिटी, सिविलाइजेशन , कंस्टिट्यूशन” के लिए आमंत्रित किया गया था। बताया गया कि इस किताब में वह राष्ट्र राज्य के पुननिर्माण के रूप में उपनिवेशवाद को स्थापित करना चाहते हैं और फिर वह हिंदू धार्मिक सभ्यता की बातें शुरू कर देते हैं।

कॉलेज के जेंडर सेल के अनुसार सांस्कृतिक एकरूपता की खोज में एक कल्पित इतिहास का महिमामंडल कई लोगों द्वारा आजमाया व परखा तरीका है जिन्होंने अल्पसंख्यकों को सताकर सांस्कृतिक आधिपत्य स्थापित करने की कोशिश की। बयान में उन्हें लेकर कहा गया कि वह अल्पसंख्यक महिलाओं की स्वतंत्रता और इच्छाओं के विरुद्ध राय रखते हैं। उनका रवैया सबरीमाला मंदिर फैसले के समय भी साफ हुआ था जब उन्होंने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने का विरोध किया था।

साझा किए गए बयान में जे साई दीपक को लेकर कहा गया कि उन्होंने हृदय एनजीओ की ओर पक्ष रखे थे। ये संस्था पुरुषों के अधिकार के लिए लड़ती और भारतीय परिवारों में पितृसत्ता को बचाते हुए उन्हें पीड़ित दिखाती है जिन्होंने लिंगभेद और उत्पीड़न से फायदा उठाया। इसके अलावा जे साई दीपक ने कोर्ट में मैरिटल रेप के आपराधिक घोषित किए जाने का भी विरोध किया था। 

जिसको बता रहे थे ‘हिमालय का योगी’, वो निकला आनंद सुब्रमण्यम: CBI ने किया गिरफ्तार, इसी के इशारे पर चल रहा था NSE

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने गुरुवार (24 फरवरी 2022) की देर रात को बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के पूर्व ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) आनंद सुब्रमण्यम उर्फ ‘हिमालयन योगी’ को गिरफ्तार कर लिया है। NSE में कुछ साल पहले हुए बड़े घोटाले मामले में सीबीआई ने ये पहली गिरफ्तारी की है। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि सुब्रमण्यम ही ‘हिमालयन योगी’ है, जिसने NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण को ईमेल के जरिए संपर्क किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयन योगी बनने का ढोंग कर आनंद सुब्रमण्यम ही चित्रा रामकृष्ण द्वारा लिए जाने वाले फैसलों को कंट्रोल करता था। सुब्रमण्यम को चेन्नई स्थित उसके घर से जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किय़ा। जाँच एजेंसी ने दावा किया है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि आनंद सुब्रमण्यम ने [email protected] नाम की मेल आईडी बनाकर चित्रा से संपर्क किया था। चित्रा ने 2013 से 2016 के बीच अपनी मेल आईडी [email protected] से [email protected] पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लेकर कई सारी गोपनीय और संवेदनशील जानकारियाँ साझा की थीं। गौरतलब है कि चित्रा रामकृष्ण इसी अवधि में NSE की MD एवं CEO थीं।

हिमालयन योगी को गिरफ्तार करने से पहले पिछले सप्ताह जाँच एजेंसी ने उससे करीब चार दिन तक पूछताछ की थी, लेकिन वह सवालों के गोल-मोल जवाब देता था। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले चित्रा ने बताया था कि योगी एक सिद्ध संत हैं और वह हिमालय में कहीं रहते हैं। उनका कोई भौतिक शरीर नहीं है और वे कहीं भी आ-जा सकते हैं। इतना ही नहीं, ईमेल की जाँच में यह बात भी सामने आई कि यह हिमालयन योगी चित्रा के बालों की खूब तारीफ करता था और विदेश में जाकर समुद्र की सैर करता था।

कौन हैं आनंद सुब्रह्मण्यम

साल 2013 में NSE ज्वॉइन करने से पहले सुब्रह्मण्यम Balmer and Lawrie कंपनी में मिडिल मैनेजमेंट के तौर पर काम करते थे। उनका सालाना वेतन 15 लाख रुपए से भी कम था। इसके साथ ही उन्हें शेयर मार्केट से संबंधित कोई अनुभव भी नहीं था। मार्च 2013 में उन्हें तत्कालीन MD चित्रा रामकृष्ण ने NSE में चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर के(CSO) तौर ज्वॉइनिंग दी। ज्वॉइनिंग के समय उन्हें 1.68 करोड़ रुपए का सालाना पैकेज दिया गया। शुरू से ही उनका एक्सचेंज के हर काम में हस्तक्षेप होता था।

अप्रैल 2014 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 2.01 करोड़ रुपए, फिर अप्रैल 2015 में यह बढ़ाकर 3.33 करोड़ रुपए कर दिया गया। इसी साल उन्हें एक्सचेंज के MD और CEO का सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त कर दिया गया। फिर अप्रैल 2016 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 4.21 करोड़ रुपए सालना कर दिया गया।

गौरतलब है कि शेयर बाजार (Stock Market) नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शुक्रवार (11 फरवरी) को खुलासा किया था कि NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण ‘हिमालय में रहने वाले एक योगी’ के कहने पर काम करती थीं। इस योगी के कहने पर उन्होंने एक व्यक्ति को अपना सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त किया और उसे मनमाने ढंग से वेतन वृद्धि दी।

बेलारूस में होगी रूस-यूक्रेन बातचीत: NATO के सदस्य रोमानिया के शिप पर हमला, पुतिन ने यूक्रेनी सेना को सत्ता हाथ में लेने के लिए कहा

यूक्रेन के सेना प्रमुख का कहना है कि रूस ने रोमानिया के शिप पर हमला किया है। इस हमले के कारण शिप को भारी नुकसान हुआ है। नाटो (NATO) सदस्य रोमानिया के शिप पर हमले के बाद टेंशन और बढ़ने की आशंका है। माना जा रहा है कि रूस की इस कार्रवाई के बाद अमेरिका भी इस युद्ध में कूद सकता है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की सेना को कहा है कि वो देश की सत्ता अपने हाथ में ले ले।

इस बीच खबर ये भी आ रही है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की जल्दी ही वार्ता शुरू कर सकते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच में बातचीत बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में हो सकती है। बताया जा रहा है कि रूस की तरफ से इसका प्रस्ताव यूक्रेन को भेज दिया गया है।

देश को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा, “हमारी रणनीति और इरादे दोनों बिल्कुल साफ हैं। हम यूक्रेन पर कब्जा नहीं करना चाहते हैं। इसलिए यूक्रेन की फौज को चाहिए कि वो तुरंत रूस के सामने आत्मसमर्पण करे और वहाँ की सत्ता अपने हाथ में ले। यूक्रेन के लोगों को वहाँ की सरकार ने बंधक बना लिया है। वोल्दोमिर जेलेंस्की की सरकार ड्रग एडिक्ट और नाजियों का गिरोह है।”

सत्ता अपने हाथ में ले सेना: रूस

रूसी के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की सेना से कहा है कि वह देश की सत्ता अपने हाथों में ले ले। इससे दोनों के बीच समझौता करना आसान होगा। उन्होंने यूक्रेन की वर्तमान सरकार को नव-नाजी बताया। पुतिन ने कहा कि ‘नव-नाज़ियों’ से नागरिकों की रक्षा के लिए सेना को वहाँ की ‘सत्ता’ को अपने हाथों में ले लेना चाहिए।

रोमानियाई शिप पर हमला

यूक्रेन के सेना प्रमुख ने दावा किया है कि काला सागर (Black Sea) में रूस ने रोमानिया के एक शिप पर मिसाइल से हमला किया है। इस हमले से शिप में आग लग गई। बता दें कि रोमानिया नाटो का सदस्य देश है। नाटो और अमेरिका अब तक इस जंग में इसलिए नहीं कूदा है, क्योंकि उसका कहना है कि यूक्रेन उसके संगठन का सदस्य नहीं है।

इस हमले के बाद आशंका जताई जा रही है कि अगर युद्ध विराम नहीं हुआ तो अमेरिका और नाटो देश भी रूस के खिलाफ यूक्रेन के साथ इस युद्ध में कूद सकते हैं। इसके पहले अमेरिका ने कहा था कि वह इस युद्ध में नहीं पड़ेगा। हालाँकि, उसने रोमानिया में अपने फाइटर जेट F35 को तैयार रखा है।

बातचीत के लिए रूस तैयार

खबर आ रही है कि यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए रूस तैयार हो गया है। यह बातचीत बेलारूस में होने की संभावना है। रूस सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि उनकी सरकार डिप्लोमैट्स को बातचीत के लिए बेलारूस की राजधानी मिंस्क भेज सकती है। इस बारे में रूस की तरफ से लिखित बयान जारी किया गया है। इसके पहले उसने यूक्रेनी सेना के सरेंडर की शर्त रखी थी।

इसके पहले रूस ने यूक्रेन के सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए कहा था। रूस ने कहा था कि यूक्रेन के सैनिक अगर रूस के सेना के सामने आत्मसमर्पण करते हैं तो बातचीत की गुंजाईश बनेगी और दोनों देश बातचीत की टेबल पर आ सकते हैं।

पुतिन और जिंगपिन की बातचीत

आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की। इस दौरान जिनपिंग ने पुतिन से वार्ता के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया। दोनों राष्ट्रपति ने टेलीफोन पर वर्तमान हालात को लेकर बातचीत की। बता दें कि इसके पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की थी।

भारत में स्थित यूक्रेन ने राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया था कि वे रूस के राष्ट्रपति से बातचीत कर बातचीत के लिए तैयार करें। उन्होंने पीएम मोदी को पुतिन का दोस्त बताते हुए महाभारत का संदर्भ दिया था और कहा था कि महाभारत में युद्ध से पहले शांति की कोशिश हुई थी, लेकिन वह असफल रही थी। लेकिन, पीएम मोदी कोशिश करते हैं तो यूक्रेन और रूस के बीच शांति बहाल हो सकती है।

‘..तो क्या अंतरिक्ष स्टेशन को USA, यूरोप, भारत या चीन पर गिरा दें?’ अमेरिका के स्पेस प्रतिबंध पर भड़का रूस, दे डाली ये धमकी

रूस और यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच अमेरिका समेत कई देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इनमें अंतरिक्ष कार्यक्रम भी शामिल है। अमेरिका के इस कदम से भड़के रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ROSCOSMOS के प्रमुख दिमित्री रोगोज़िन ने गुस्सा जाहिर करते हुए दो टूक लहजे में कहा कि क्या अमेरिका चाहता है कि रूस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) को भारत-चीन या फिर य़ूरोपीय यूनियन पर गिरा दे।

दरअसल, 24 फरवरी 2022 को जैसे ही रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग का ऐलान किया। इसके कुछ घंटों के बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए कहा कि यूएस द्वारा लगाए गए बैन रूस की तकनीकी प्रगति पर नकारात्मक असर डालेंगे औऱ इससे उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम भी प्रभावित होंगे।

बस फिर क्या था अमेरिका की इस हिमाकत के बाद भड़के रोगोजिन ने ट्वीट किया, “ALZ-GEIMER के बैन। बाइडेन ने कहा है कि नए प्रतिबंध रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम को प्रभावित करेंगे। ठीक। चलिए कुछ तथ्य देखते हैं।

“क्या आप रेडिएशन प्रतिरोधी अंतरिक्ष माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक तक हमारी पहुँच को रोकना चाहते हैं? ये तो आप आधिकारिक तौर पर 2014 में पहले ही कर चुके हैं। जैसा आप देख रहे हैं कि हम फिर भी अपना खुद का अंतरिक्ष यान लगातार बना रहे हैं। और हम इसके लिए जरूरी उपकरणों का अपने देश में ही निर्माण करके करेंगे। क्या दुनियाभर के सभी देशों को विश्व के सबसे अधिक विश्वसनीय रूसी रॉकेट पर अपने अंतरिक्ष यानों को लॉन्च करने से रोकना चाहते हैं?”

रोगोजिन ने आगे कहा, “आप पहले से ही ऐसा कर रहे हैं औऱ अब हमारे लॉन्च वेहिकल पर बैन लगाकर 1 जनवरी, 2023 से स्पेस कम्पटीशन के वैश्विक बाजार को खत्म करने की तैयारी कर रहे हैं। हम जानते हैं। हम य़हाँ भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। क्या आप ISS पर हमारे सहयोग को खत्म करना चाहते हैं?”

रोगोजिन ने अमेरिका को उसी के अंदाज में जबाव देते हुए कहा कि अगर उस पर बैन लगा दिया गया तो ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) को नियंत्रित औऱ उसे कक्षा से बाहर कौन निकालेगा। क्योंकि उसका कंट्रोल तो रूस के ही पास है।

रूसी स्पेस एजेंसी के प्रमुख रोगोजिन ने अमेरिका को दो टूक कहा कि वो उनके अंतरिक्ष यात्रियों औऱ उसके ट्रेनिंग सेंटर के बीच हो रहे आदान-प्रदान को सीमित कर पहले से ऐसा करता रहा है। रोगोजिन ने बाइडेन से सवाल किया कि क्या वो ISS का कंट्रोल अपने हाथ में लेना चाहते हैं।

रोगोजिन ने कहा कि अगर अमेरिका ISS स्टेशन पर किसी तरह का सहयोग रोकता है तो यह कंट्रोल खोकर अमेरिका या यूरोप में गिरेगा। 500 टन वजनी इस स्ट्रक्चर के भारत औऱ चीन पर भी गिरने की संभावना है। रूस ने चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या आप इसके लिए तैयार हैं।

गौरतलब है कि 1998 में इस स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था। यह अमेरिका, रूस, कनाडा, जापान औऱ यूरोपीय यूनियन के सहयोग से चलता है।

‘नौकरियाँ निकलते ही चाचा-भतीजा वसूली पर निकल जाते थे’: CM योगी ने कहा- हार के डर से विपक्षियों के कार्यालयों में अभी से भूत नाच रहे हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) के प्रचार में आज 25 फ़रवरी (शुक्रवार) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज का दौरा कर एक रोड शो में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि सपा-बसपा के नेता हार के डर से विदेश बुकिंग करा लिए हैं। सीएम योगी ने बुलडोजर को विकास का प्रतीक और माफियाओं में डर का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है और वहाँ भूत नाच रहे हैं।

प्रयागराज के करछना में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रयागराज भगवान राम और निषादराज की मिलन भूमि है, लेकिन कभी प्रयागराज के नाम से लोग डरने लगे थे। यहाँ माफिया पनप गए थे। बेटियाँ स्कूल नहीं जा पाती थीं। महोत्सव के नाम पर केवल सैफई महोत्सव होता था। उसमें न राग था, न रंग था, न भाव था और न भाषा थी। आज जब महोत्सव की बात होती है तो अयोध्या के दीपोत्सव, काशी की देव दीपावली, मथुरा-वृंदावन की होली और प्रयागराज के कुंभ की चर्चा होती है।”

सीएम योगी ने आगे कहा, “10 मार्च के बाद जब सरकार बनेगी, तब उज्ज्वला लाभार्थियों को फ्री में होली दीपवाली में सिलेंडर दिया जाएगा। 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की उत्तर प्रदेश रोडवेज में फ्री में निशुल्क यात्रा होगी। आने वाले 5 साल में ऐसी व्यवस्था करनी है कि किसानों को ट्यूबेल का बिल ना भरना पड़े। बेटी के जन्म लेने से ग्रेजुएशन तक कन्या सुमंगला योजना में मिल रही राशि 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने जा रहे हैं। बेटी की शादी के लिए मिलने वाली 51 हजार रुपए की राशि को 1 लाख रुपए करने जा रहे हैं। अगले 5 साल में हर परिवार के कम से कम 1 परिवार को नौकरी, रोजगार या स्व-रोजगार से जोड़ने जा रहे हैं।”

सीएम आदित्यनाथ ने आगे कहा, “समाजवादी पार्टी ने विकास के नाम पर हर गाँव में कब्रिस्तान की बाउंड्री बनवाई है। समाजवादी पार्टी वालों ने मुझ से पूछा कि विकास के लिए पैसा कहाँ से आ रहा। मेरा जवाब था कि किसी माफिया की अवैध कमाई को जब्त करते हैं तो उसमें बुलडोजर की जरूरत होती है। छठे चरण में मेरे और सातवें चरण में मोदी के संसदीय क्षेत्र में चुनाव होना है। भाजपा 300 के पार होगी।”

प्रयागराज के हंडिया में सीएम योगी ने कहा, “सुरक्षा और विकास सबका, लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं होगा। 2017 के पहले फ्री का राशन क्यों नहीं मिलता था। ये राशन और बिजली का पैसा 2017 से पहले सपा-बसपा के इत्र वाले मित्र के घर चला जाता था। इसलिए जो गरीब का अन्न हड़पते थे उन्हीं के लिए एक यंत्र बनाया है। वो यंत्र एक्सप्रेस-वे भी बनाता है और माफियाओं की छाती भी रौंदता है। उस यंत्र का नाम बुलडोजर है। इस यंत्र से समाजवादी पार्टी वाले बहुत डरते हैं। रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते विपक्ष वाले विदेश में कहाँ जाएँ ये तय ही नहीं कर पा रहे हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “सपा की सरकार जब थी तब कोई भी नौकरी निकलने पर चाचा भतीजा वसूली पर निकल पड़ते थे। हमारे नौजवानों का भविष्य खराब होता था, क्योंकि न्यायालय स्टे कर देता था। हम 10 मार्च के बाद युवाओं को 2 करोड़ टैबलेट देंगे। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पूरा डिजिटल खर्च सरकार उठाएगी। दूसरी तरफ माफियाओं को संरक्षण देने वाले लोग हैं। उनके लिए केवल ‘सबका साथ, केवल सैफई खानदान का विकास’ ही मायने रखता है।”

दोस्त रिजवान के साथ मिलकर पति बबलू का घोंट दिया गला, धड़ घर में गाड़ा, हाथ-पैर और गर्दन अलग-अलग फेंके: इंदौर की घटना, ऐसे हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक महिला द्वारा अपने दोस्त के साथ मिल कर पति की हत्या का मामला सामने आया है। हत्या के बाद महिला के दोस्तों ने उसके पति की लाश के कई टुकड़े किए। अलग-अलग टुकड़ों को अलग-अलग जगहों पर दफनाया गया। आरोपित महिला का नाम सुनीता है। मृतक पति का नाम कुशलेन्द्र उर्फ़ बबलू था। हत्या में सहयोगी महिला के दोस्त का नाम रिज़वान है। घटना 5 फरवरी (शनिवार) की है जिसका खुलासा शुक्रवार (25 फ़रवरी) को हुआ। पुलिस ने आरोपित पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में शामिल रिज़वान और भैय्यू की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हत्या गला दबा कर की गई थी। महिला का पति बबलू आए दिन अपनी पत्नी से झगड़ा करता था। इस बीच 40 साल की सुनीता का परिचय 35 साल के रिज़वान से हो गया। घटना के दिन खाने में बबलू को नशीला पदार्थ दे दिया गया। बाद में बेहोशी की हालत में उसका गला घोंट दिया गया। पुलिस का मानना है कि शरीर के बाकी टुकड़े अलग-अलग जगह फेंक कर धड़ को जमीन में गाड़ दिया गया है। बाथरूम की खुदाई में पुलिस को कुछ न मिला। बाद में महिला ने दूसरी जगह बताई। खुदाई के लिए JCB बुलानी पड़ी। 6 फिट नीचे मृतक का धड़ बरामद हुआ। वहीं शरीर के बाकी अंगों की तलाश की जा रही है।

बताया जा रहा है कि सुनीता और रिज़वान के बीच शारीरिक संबंध भी थे। इसी के चलते उन्होंने बबलू को रास्ते से हटाने का निर्णय लिया था। अरोपिता सुनीता के दो बेटे हैं। इसमें एक का नाम प्रशांत और दूसरे का नाम ध्रुव है। इस घटना का खुलासा मृतका के 19 साल के बेटे ने शराब के नशे में किया। उसने अपने दोस्तों को बता दिया कि उसकी माँ ने उसके पापा को मार कर घर के बाथरूम दफना दिया है।

पुलिस के मुताबिक, “महिला ने अपने पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी। रिपोर्ट में उसने पति के 7 फरवरी से कहीं चले जाने की बात लिखी थी। हम बबलू की तलाश कर रहे थे। इस बीच हमें मुखबिर से पता चला कि महिला घर छोड़ कर भागने की तैयारी में है। संभवतः उसने अपने पति को कहीं मार कर गाड़ दिया है। इसी सूचना पर महिला को हिरासत में ले कर रात में पूछताछ की गई थी। इस दौरान उसने बताया कि उसने अपने एक दोस्त रिज़वान और रिज़वान के एक अन्य दोस्त भैय्यू के साथ मिल कर पति की हत्या कर दी है।”

“बबलू को भैय्यू और रिज़वान ने मारा। हत्या करके मृतक को एक हरे रंग के ड्रम में रखा गया। अगले दिन सीवेज टैंक के बहाने महिला ने गड्ढा खुदवा कर उसको गाड़ दिया। महिला ने अपने बड़े लड़के की मदद से बॉडी के कुछ हिस्से इंदौर के किसी क्षेत्र में फिंकवाए है। उसको बरामद किया जाएगा।”

मृतक का घर इंदौर के गणेशधाम कॉलोनी में है। हत्या गणेशधाम में करके उमरीखेड़ा कांकड में शव को दफनाया गया था। शव के साथ नमक डाल दिया गया था। मजदूर बुला कर ऊपर से प्लास्टर भी करवा दिया गया था। मजदूर भी ये नहीं समझ पाए की अंदर क्या है। पड़ोसियों से इस बीच सुनीता ने बाथरूम बनवाने की बात कही थी। पुलिस ने सुनीता को गुरुवार (24 फ़रवरी) को ही हिरासत में ले लिया था। खुदाई उसी की निशानदेही पर हो हुई है।

‘सरेंडर करे यूक्रेन तभी बातचीत संभव’: रूस के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, हमले से चेर्नोबिल न्यूलियर प्लांट के पास रेडिएशन लेवल बढ़ा

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia-Ukraine War) अपने चरम पर पहुँच चुका है। रूस ने यूक्रेन को भारी नुकसान पहुँचाया है। अभी तक कई सैनिकों की मौत भी हो चुकी है। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सेना हथियार डाले तभी आगे की बातचीत संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉस्को नहीं चाहता कि यूक्रेन पर ‘नव-नाजियों’ का शासन हो। बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की ने रूस को बातचीत का प्रस्ताव दिया था, जिसके बाद रूस के विदेश मंत्री का बयान आया है।

फिलहाल यूक्रेन में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। रूस के चौतरफा हमले की वजह से यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है। यूक्रेन के चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास गुरुवार (24 फरवरी) की रात रूसी सेना ने हमले किए। यहाँ कई धमाके भी हुए। इसके चलते इस एटमी प्लांट में रेडिएशन लेवल बढ़ गया है। यूक्रेन की न्यूक्लियर एजेंसी ने इसकी पुष्टि की।

इस इलाके में रहने वाले हजारों लोगों को रेडिएशन लेवल बढ़ने से जान का खतरा पैदा हो गया है। उन्हें आने वाले समय में सेहत संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इस बीच यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने नागरिकों से कहा है कि वे रूसी सेना के मूवमेंट के बारे में जानकारी देते रहें। इसके साथ ही उन पर पेट्रोल बम फेंकें।

इधर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूसी सेना राजधानी कीव में जल्द ही दाखिल हो जाएगी। रूसी टैंक कीव से 32 किलोमीटर दूर हैं। इन्हें रोकने के लिए यूक्रेनी सेना ने तीन पुल उड़ा दिए हैं। जेलेंस्की ने आशंका जताई है कि 96 घंटे यानी 4 दिनों में कीव पर रूस का पूरी तरह कब्जा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रूसी सेनाएँ रिहाइशी इलाकों को टारगेट कर रही हैं। 

रूस ने कहा कि गुरुवार को यूक्रेन के 14 इलाकों में 203 हमले किए गए। 83 लैंड बेस्ड टारगेट हिट किए गए। रूसी सेनाओं ने चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट पर कब्जा कर लिया है। कीव के नजदीक यूक्रेनी एयरबेस पर भी रूस का कब्जा हो चुका है। रूसी एयरक्राफ्ट एंटनोव-26 यूक्रेन के करीब वोरोनेज इलाके में क्रैश हो गया। रूस ने कहा कि यह एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट ट्रांसपोर्ट कर रहा था। एयरक्राफ्ट के क्रू मेंबर्स की मौत हो गई है। हालाँकि रूस ने यह नहीं बताया कि इनकी संख्या कितनी है।

कल भी रूस ने कहा था कि अगर यूक्रेन के सैनिक अपने हथियार डाल देंगे तो युद्ध रोक दिया जाएगा। उसने इस बात पर भी जोर दिया था कि उनके पास युद्ध के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उनके देश को यूक्रेन में चल रही गतिविधियों से खतरा था, ऐसे में उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी थी।

कर्नाटक हिजाब विवाद पर कर्नाटक HC में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर 11 दिन तक चली सुनवाई

कर्नाटक के उडुपी स्थित कॉलेज से शुरू हुए हिजाब विवाद पर जमकर हुए हंगामे के बीच एक मुस्लिम छात्रा ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर अनुमति देने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मसले पर 11 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जेएम खाजी की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर पेश हुए अधिवक्ता युसूफ मुच्छला ने तर्क देते हुए कोर्ट से शैक्षणिक संस्थानों में सिर को ढंकने देने की इजाजत देने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि हमें ऐसा करने से रोकना सही नहीं है। वकील ने ये भी दावा किया कि इस्लामिक हदीस में भी कहा गया है कि चेहरे को ढंकने के बजाय, हिजाब पहनने की जरूरत है।

मुस्लिम पक्ष के तर्क को काउंटर करते हुए महाधिवक्ता ने कहा कि कुरान में जो कहा गया है वह अनिवार्य होते हुए भी जरूरी नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी ने कहा था कि हिजाब के मुद्दे पर सुनवाई को शुक्रवार तक समाप्त किया जाना है।

गौरतलब है कि कर्नाटक में हिजाब विवाद को बढ़ाने में सीएफआई की भूमिका सामने आई थी। पिछली सुनवाई में वकील नागानंद ने कोर्ट में कहा था कि नागानंद ने कोर्ट को बताया कि सीएफआई के लोग कॉलेज में हिजाब को अनुमति दिलवाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2004 में कॉलेजों में यूनिफॉर्म को अनिवार्य किया गया था। तब से वही यूनिफॉर्म कॉलेज में पहनी गई। लेकिन अब सीएफआई हिजाब के लिए लोगों को भड़का रहा है। उन्होंने बताया कि सीएफआई ने कुछ शिक्षकों को भी इतना धमकाया है कि वो एफआईआर करने से डर रहे हैं।

कब से शुरू हुआ था ये विवाद

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है।

पॉलिटिक्स से पहले कॉमेडियन थे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की, अब बेबस और लाचार आ रहे नजर: जानें क्यों हुआ देश का यह हाल

रूस के हमले के बाद यूक्रेन पश्चिमी देशों से लगातार मदद की गुहार लगा रहा है और सबसे ज्यादा बुरी हालत यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) की है, जो अब लाचार और बेबस हालत में नजर आ रहे हैं। वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार (25 फरवरी 2022) सुबह भी कहा कि उन्होंने सुबह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कॉल भी किया था, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया। वह भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

जेलेंस्की पर अमेरिका के दबाव में आकर देश को युद्ध की आग में झोंकने का आरोप

वोलोडिमिर जेलेंस्की कभी यूक्रेनी टेलीविजन के एक कॉमेडियन थे, लेकिन अब उनके ऊपर अमेरिका के दबाव में आकर देश को युद्ध की आग में झोंकने के आरोप लग रहे हैं। जेलेंस्की 2019 में यूक्रेन के राष्ट्रपति बने थे। उन्हीं के कार्यकाल में यूक्रेन की संविधान में संशोधन कर देश को नाटो और यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने की नीति का ऐलान किया गया था।

कॉमेडी के दम पर यूक्रेन के राष्ट्रपति बने जेलेंस्की

वोलोडिमिर जेलेंस्की उन लोगों में से एक हैं जो पूरी तरह से एक कॉमेडियन के रूप में अपनी लोकप्रियता के आधार पर राष्ट्रपति बने। 44 साल के हो चुके जेलेंस्की को राष्ट्रपति बनने से पहले अपने पूर्ववर्ती राष्ट्राध्यक्षों की तुलना में राजनीति का कोई अनुभव नहीं था। उनके कार्यकाल की शुरुआत से यूक्रेन और रूस के बीच तनाव लगातार बना रहा। इसके बावजूद वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने देश को नाटो की पूर्ण सदस्यता दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने 1990 के समझौते का उल्लंघन कर खुद का सैन्यीकरण करने का फैसला किया है। पुतिन यूक्रेन के इस कदम को रूस के लिए प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखते हैं।

25 जनवरी 1978 को हुआ था जेलेंक्सी का जन्म

वोलोडिमिर जेलेंस्की का जन्म 25 जनवरी 1978 तत्कालीन सोवियत संघ के शहर क्रिवी रिह में हुआ था। वर्तमान में यह शहर यूक्रेन का हिस्सा है। जेलेंस्की के माता-पिता यहूदी थे। बचपन में ही जेलेंस्की का परिवार मंगोलिया के एर्डेनेट में रहने चला गया। इस कारण वोलोडिमिर जेलेंस्की की प्रारंभिक शिक्षा मंगोलिया में हुई। इसके बावजूद उन्होंने यूक्रेनी और रूसी भाषा पर अपनी पकड़ बनाए रखी। बड़े होने पर वो वापस यूक्रेन पहुँचे और 1995 में कीव नेशनल इकोनॉमिक यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री के साथ ग्रेजुएशन किया। इसके बावजूद जेलेंस्की ने अपना करियर कॉमेडी के क्षेत्र में बनाया। पढ़ाई के दौरान ही जेलेंस्की थिएटर को लेकर काफी आकर्षित हुए। वे 1997 में पर्फामेंस ग्रुप, क्वार्टल 95, KVN के फाइनल में नजर आए।

कई फिल्मों और कॉमेडी शो में आए नजर

2003 में उन्होंने अपनी कॉमेडी टीम क्वार्टल 95 के नाम पर एक सफल टीवी प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी ने यूक्रेन के 1+1 नेटवर्क के लिए शो का निर्माण किया। इस शो को विवादास्पद अरबपति मालिक इहोर कोलोमोइस्की ने फाइनेंस किया था। दावा किया जाता है कि वोलोडिमिर जेलेंस्की के राष्ट्रपति चुनाव का सारा खर्च भी इहोर कोलोमोइस्की ने ही उठाया था। 2010 तक वोलोडिमिर जेलेंस्की यूक्रेनी टेलीविजन के इतिहास के सबसे सफल कलाकारों में शुमार होने लगे। उन्होंने कई सुपरहिट टीवी शो और फिल्मों में काम किया, जिसमें लव इन द बिग सिटी (2009) और रेजेव्स्की वर्सेज नेपोलियन (2012) काफी प्रसिद्ध हैं।

साल 2014 जेलेंस्की और यूक्रेन दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण

साल 2014 न सिर्फ जेलेंस्की बल्कि यूक्रेन के लिए भी काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसी साल यूक्रेनी जनता ने विद्रोह कर रूसी समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को हटा दिया था। जिसके जवाब में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, तब से ही रूस ने यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में विद्रोहियों को हथियार और पैसों से मदद करना भी शुरू कर दिया। उसके एक साल बाद पॉलिटिकल सटायर सर्वेंट ऑफ द पीपल ने वोलोडिमिर जेलेंस्की के नाम को और ज्यादा प्रसिद्ध कर दिया। इस सटायर में जेलेंस्की ने वासिली गोलोबोरोडको नाम के एक व्यक्ति का किरदार निभाया था। इस शो में उन्होंने राष्ट्रपति का किरदार निभाया था।

2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति को हराकर सँभाली यूक्रेन की कमान

रील लाइफ में राष्ट्रपति के रूप में काफी समय बिताने के बाद जेलेंस्की ने 2019 में राजनीतिक कदम उठाने का फैसला किया। जेलेंस्की ने राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको को चुनौती दी। जानकारी के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति पद के प्रचार के दौरान गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने से परहेज किया और अपनी प्रचार योजना के तहत सोशल मीडिया पर हल्के-फुल्के हास्य वीडियो पोस्ट कर चर्चा बटोरी। इसी साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने पेट्रो पोरोशेंको को मात दी और यूक्रेन के राष्ट्रपति बन गए।

यूक्रेन पर रुसी भाषियों के खिलाफ भेदभाव करने का आरोप

शुरुआत में सब ठीक था। लेकिन धीरे-धीरे जेलेंस्की के रिश्ते पुतिन के साथ खराब होने लगे। पुतिन ने जेलेंस्की की सरकार पर रूसी-भाषियों के खिलाफ ‘भेदभाव’ करने और पूर्वी हिस्से के संघर्ष को सुलझाने के पिछले वादों से मुकरने का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने यूक्रेन में रूसी समर्थक राजनीतिक गुटों के खिलाफ सख्त कदम उठाया था। पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ शिखर सम्मेलन की जेंलेंस्की की पेशकश पिछले महीने मॉस्को ने नहीं मानी और आखिरकार युद्ध छिड़ गया। जेलेंस्की बार-बार अमेरिका सहित सभी नाटो देशों से भी साथ देने की अपील करते रहे। लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया। उन्होंने अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया है।