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‘स्वार्थी कॉन्ग्रेस ने चाचा का अपमान किया’: गुलाम नबी आज़ाद के भतीजे ने थामा BJP का दामन, कहा – PM मोदी के जमीनी काम से प्रभावित

कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता गुलाम नबी आज़ाद के भतीजे मुबशर आज़ाद ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। मुबशर ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर गुलाम नबी आज़ाद की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को स्वार्थी और अंतर्कलह से जूझ रही पार्टी बताया है। मुबशर ने यह सदस्यता जम्मू के त्रिकुटा भाजपा मुख्यालय में आज रविवार (27 फरवरी, 2022) को ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुबशर आज़ाद ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमीनी स्तर पर किए जा रहे विकास कार्यों से प्रभावित बताया। जम्मू कश्मीर भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। इस दौरान आज़ाद ने खुद को कॉन्ग्रेस के वर्तमान नेतृत्व द्वारा अपने चाचा (पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद) के अपमान से बहुत आहत बताया। इस दौरान उन्होंने देशहित में नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होने का संकल्प लिया।

इस मौके पर जम्मू – कश्मीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कहा, “हर कोई भाजपा की नीतियों की प्रसंशा कर रहा है। इसलिए सभी सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक लोग भाजपा से जुड़ कर जनसेवा करना चाहते हैं। अब मुबशर आजाद पार्टी से युवाओं को जोड़ेंगे और डोडा, किश्तवाड़, रामबन और अन्य क्षेत्रों में भाजपा को मजबूती देंगे। उनके प्रयास जम्मू-कश्मीर के युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रोत्साहित करेंगे।”

मुबशर आज़ाद की तस्वीर अपने साथ ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए रविंद्र रैना ने लिखा, “भाजपा जॉइन करने पर मुबशर आज़ाद को तहे दिल से बधाई।”

कुछ यूँ लोगों की सेवा में लगे यूक्रेन के 54 इस्कॉन मंदिर, ज़रूरतमंदों में बाँट रहे भोजन-पानी: पड़ोसी देश पहुँच रहे भारतीयों की भी मदद

जहाँ एक तरफ रूस और यूक्रेन युद्ध से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘International Society for Krishna Consciousness (ISKCON)’ जैसी संस्थाएँ वहाँ ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने में लगी हुई है। यूक्रेन से अब तक 2 लाख से भी अधिक लोग पलायन कर चुके हैं, ऐसे में वहाँ फँसे नागरिकों की मदद करने के लिए हिन्दू धर्म से जुड़ी संस्था आगे आई है। पूर्वी यूरोप के इस देश में इस्कॉन के मंदिरों ने ज़रूरतमंदों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।

इस्कॉन ने कहा है कि जो भी लोग दिक्कतों में हैं, उनकी सेवा करने के लिए उसके मंदिर और श्रद्धालु लगातार तैयार हैं। इस देश में इस्कॉन के 54 मंदिर हैं, जहाँ लोगों की मदद की जा रही है। उन्हें आशियाना दिए जाने के साथ ही उनके भोजन-पानी का भी प्रबंध किया जा रहा है। संस्था ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से यूक्रेन में इस्कॉन के अधिकतर मंदिर और श्रद्धालु फ़िलहाल सुरक्षित हैं। वामशी माधव दास नाम के एक श्रद्धालु के हाथ और छाती में गोली लगी है।

इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बताया कि माधव दास की पत्नी फ़िलहाल उनका ख्याल रख रही है, क्योंकि युद्ध की वजह से वो नजदीकी अस्पताल पहुँच पाने में असफल रहे हैं। उन्होंने लोगों से उनके स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने का निवेदन किया। यूक्रेन में फँसे जो भी भारतीय छात्र और नागरिक हंगरी पहुँच रहे हैं, उनके लिए वहाँ के इस्कॉन मंदिर भी व्यवस्था कर रहे हैं। वहाँ से भारतीय छात्रों को एयर इंडिया के फ्लाइट से भारत लाया जा रहा है।

यूक्रेन में ज़रूरतमंदों की मदद करते इस्कॉन के श्रद्धालु

हंगरी स्थित भारतीय दूतावास ने वहाँ पहुँचे भारतीयों हेतु भोजन और पानी की व्यवस्था के लिए इस्कॉन मंदिरों से मदद भी माँगी है। राधारमण दास ने कहा कि स्थिति विकट है। उन्होंने कहा, “एक कहावत है – अगर ज़िन्दगी तुम्हारी तरफ नीम्बू फेंके तो उसका शर्बत बना लो। लेकिन, हमारे श्रद्धालु इस मामले में एक कदम आगे हैं। उनका सिद्धांत है – अगर ज़िन्दगी तुम्हारी तरफ नीम्बू फेंके तो उसका शर्बत बना कर लोगों को पिलाओ।” उन्होंने कहा कि इस्कॉन के लोग जनसेवा में लगे रहेंगे।

पूर्व राजदूत ने की ‘हरे कृष्णा संस्था’ की तारीफ

इस्कॉन की इस सेवा भाव को लेकर हंगरी में भारत के पूर्व राजदूत व ICCR के डीजी कुमार तुहीन और भारतीय छात्रों की प्रतिक्रिया आई है। छात्रों का कहना है कि उन्हें इस समय जो मिले वो सब उनके लिए अच्छा है। वहीं इस संबंध में कुमार तुहीन ने इस संस्था की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी हरे कृष्णा संस्था से काफी करीबी साझेदारी रही है। पूर्व राजदूत ने कहा कि ये हाल है कि जब भारतीय छात्र आ रहे हैं और हमें उन्हें समर्थन देना है चाहे वो खाने के रूप में हो, पानी के रूप में हो… लेकिन ये सिर्फ पानी-खाने की बात नहीं है। ये दिखाने की है कि हमें उनकी परवाह है। कुमार तुहीन कहते हैं कि उन्होंने ही इन सबके लिए हरे कृष्णा संस्था से संपर्क करने के लिए कहा। उन्हें यकीन था कि जब वह हरे कृष्णा से संपर्क करेंगे तो संस्था खुशी-खुशी समर्थन करेगी। कुमार इस संस्था का काम देखकर उनकी तारीफ करते हैं। वह कहते हैं कि हरे कृष्णा ने न केवल इन छात्रों का ख्याल रखा बल्कि हर भारतीय का ख्याल रखा है।

यूक्रेन में फँसे राशिद रिजवान की रोते हुए वीडियो वायरल: ‘CAA-NRC से लेकर कश्मीर में 370’ के वक्त कोसते थे भारत को

रूस-यूक्रेन विवाद के बीच भारतीय छात्रों की वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल है। इस बीच एक वीडियो राशिद रिजवान नाम के लड़के की सामने आई है। इसमें दावा किया जा रहा है कि कुछ छात्र 10 घंटे से सीमा पर बैठे हुए हैं लेकिन कोई अधिकारी उन्हें देखने नहीं आया। कोई संपर्क नहीं कर रहा। वीडियो में रिजवान को आँख में आँसू भरकर कहते सुना जा सकता है कि इन हालातों में रहने से बेहतर तो ये था कि उन्हें कोई मिसाइल मार देती। वो अपनी वीडियो में भारत सरकार के विरुद्ध नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बातें हो रही हैं कि अधिकारी खड़े हैं। कोई अधिकारी नहीं खड़ा है।

रिजवान की यह वीडियो सोशल मीडिया पर लिबरल, वामपंथियो द्वारा शेयर की जा रही है। इस वीडियो के बूते जनता को समझाया जा रहा है कि कैसे भारत सरकार यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। जबकि हकीकत ये है कि भारत सरकार यूक्रेन से छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा को शुरू कर चुकी है। रोमानिया और हंगरी से करीब 710 लोग 3 फ्लाइट में लाए जा रहे हैं और अन्य तमाम भारतीय लोगों को भारत सुरक्षित लाने की कोशिशें चल रही हैं जिनमें रिजवान भी आते हैं।

कौन हैं राशिद रिजवान?

अब यहाँ ये गौर देने वाली बात है कि भारत सरकार के विरुद्ध और उनके प्रयासों को खारिज करने वाले लिबरल जिस रिजवान की वीडियो को लेकर अपना एजेंडा चला रहे हैं वे कौन हैं। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर ही रिजवान से जुड़ी जानकारी साझा की है। इनके मुताबिक राशिद रिजवान गोपालगंज बिहार का निवासी है और उसके ऊपर कई बार भारत विरोधी प्रोपेगेंडा में शामिल होने का आरोप है। रिजवान के ट्विटर हैंडल @rshdrizwan पर देख सकते हैं कि वो कैसे यूक्रेन से भारत सरकार के विरुद्ध सामग्री सोशल मीडिया पर डालता था।

सीएए/एनआरसी, कश्मीर, किसान आंदोलन…सब पर है राशिद के ट्वीट

साल 2020 में रिजवान ने एक तीन साल की बच्ची की तस्वीर को शेयर करके भारत सरकार को कोसा था, जो अपने दादा के शव के ऊपर बैठी थी और जिन्हें पाकिस्तान आतंकियों ने मार दिया था। इस तस्वीर के साथ राशिद ने कहा था कि धरती के स्वर्ग को धरती का नरक बना दिया गया है।

कुछ स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि कैसे सीएए-एनआरसी के खिलाफ राशिद ने यूक्रेन में रहते हुए विरोध किया था। जिसे देख नेटीजन्स ने आरोप लगाया था कि राशिद विदेशी मिट्टी पर जाकर लोकतांत्रिक तरह से चुनी गई सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बना रहे हैं।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय रिजवान को सफूरा जरगर को समर्थन देते देखा गया था। अपने ट्वीट में उसने दिखाया था कि जरगर पर इसलिए कार्रवाई हुई क्योंकि वो मुस्लिम हैं।

यूक्रेन में रहते हुए रिजवान ने एक भी मौका ऐसा नहीं छोड़ा जब वो भारत विरोधी माहौल बना सके। किसान आंदोलन के समय उसने कहा था कि ये जीत सिर्फ किसानों की नहीं शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों की है।

‘इस्लाम खतरे में है, काफिरों को मार डालो’: मुस्लिम भीड़ ने ट्रेन में ज़िंदा जला डाले 59 राम भक्त, 10 तो बच्चे और 27 महिलाएँ थीं

27 फरवरी 2002, याद करिए आज के उस दिन को। आज ही के दिन 2002 में गोधरा में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों को साबरमती एक्सप्रेस की S- 6 बोगी में जिन्दा जला दिया गया था। ये सभी कारसेवक भव्य राम मंदिर निर्माण के मकसद से अयोध्या गए थे। ट्रेन में वो सभी लोग भगवान का भजन कर रहे थे। इस निर्मम नरसंहार में लम्बी कानूनी प्रक्रिया चली।

इस घटना की जाँच के लिए जस्टिस नानावटी कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की रिपोर्ट में इस घटना के बारे में कहा गया, “ट्रेन सुबह 7:43 पर प्लेटफार्म पर लगभग 5 घंटे देरी से आई। ट्रेन को गोधरा में लगभग 5 मिनट रुकना था। ट्रेन पर हमला घांची मुस्लिम भीड़ ने किया। ये अनधिकृत रूप से स्टेशन पर कोल्डड्रिंक और अन्य खाने के सामान बेचते थे। गोधरा स्टेशन की बॉउंड्री से सटा एक इलाका है, जिसे सिग्नल फलिया कहा जाता है। यहाँ घांची मुस्लिम अच्छी संख्या में रहते हैं।”

जैसे ही ट्रेन गोधरा स्टेशन से रवाना होने लगी उसकी चेन खींच दी गई। ट्रेन पर 1000-2000 लोगों की भीड़ ने हमला किया। भीड़ ने पहले पत्थरबाजी की फिर पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। इसमें 27 महिलाओं, 22 पुरुषों और 10 बच्चों की जलने से मृत्यु हो गई। इस रिपोर्ट में इस घटना को साजिश बताया गया। प्रमुख साजिशकर्ता मौलवी हुसैन हाजी इब्राहिम उमर और ननूमियाँ थे। इन पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा। आरोपित रज्जाक कुरकुर के गेस्ट हाउस पर 140 लीटर पेट्रोल जमा किया गया। इसी पेट्रोल से ट्रेन जलाई गई थी।

जाँच के दौरान यह भी पता चला कि हिंसक भीड़ को उकसाने के लिए लाऊडस्पीकरों का प्रयोग किया गया था। अली मस्जिद यहीं पास में थी थी। इस दौरान ‘काफिरों को मार डालो, इस्लाम खतरे में है, काट दो, मार दो’ जैसे नारे लगाए गए। हमलावरों के हाथों में तलवारें और अन्य घातक हथियार थे। वो पत्थरबाजी भी कर रहे थे। ये सभी ट्रेन को घेरने की कोशिश कर रहे थे।”

कुछ कारसेवकों को घटना का पहले से अंदेशा हो गया था। वो स्टेशन छोड़ कर निकल गए थे। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालत को संभालने की बहुत कोशिश की लेकिन वो असफल रहे। घटना के लगभग 2 दशक बीत जाने के बाद भी तमाम वामपंथी और लिबरल इस हमले पर बात करने से कतराता है। आखिरकार इस घटना में कुल 59 कारसेवकों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। ऑपइंडिया ने काफी प्रयासों के बाद 41 कारसेवकों की लिस्ट हासिल करने में सफलता पाई है। उन ज्ञात कारसेवकों के नाम कुछ इस प्रकार से हैं।

1- नीलमबेन प्रकाशभाई चौडगर, रामोल, अहमदाबाद
2 – ज्योतिबेन भरतभाई पांचाल, मणिनगर अहमदाबाद
3- प्रेमाबेन नरनभाई डाभी, गीता मंदिर, अहमदाबाद
4- जीवीबेन नरनभाई डाभी, गीता मंदिर, अहमदाबाद
5- देवकलाबेन हरीप्रसाद जोशी, चांदलोडिया, अहमदाबाद
6- जेवरभाई जादवभाई प्रजापति, वस्त्राल, अहमदाबाद
7- मित्तलबेन भरतभाई प्रजापति, मणिनगर, अहमदाबाद
8- नीताबेन हर्षदभाई पांचाल, न्यू रानिप, अहमदाबाद
9- हर्षदभाई हरगोविंद भाई पांचाल, न्यू रानिप, अहमदाबाद
10- प्रतीक्षाबेन हर्षदभाई पांचाल, न्यू रानिप, अहमदाबाद
11- नीरूबेन नवीनचंद ब्रह्मभट्ट, संकेत सोसाइटी, वडनगर
12- छायाबेन हर्षदभाई पांचाल, न्यू रानिप, अहमदाबाद
13- चिरागभाई ईश्वरभाई पटेल, वाघोदिया, वडोदरा
14- सुधाबेन गिरीशचंद्र रावल, चांदलोडिया, अहमदाबाद
15- मालाबेन शरदभाई महात्रे, अम्बावड़ी, अहमदाबाद
16- अरविन्दाबेन कांतिलाल शुक्ला, रामोल, अहमदाबाद
17- उमाकांत गोविन्दभाई मकवाना, नवा नरोडा, अहमदाबाद
18- सदाशिव विट्ठलभाई जाधव, सुरेलिया एस्टेट रोड, अहमदाबाद
19- मणिबेन डाहयाभाई जाधव, नवा नरोडा, अहमदाबाद
20- जेसलकुमार मनसुख भाई सोनी, वस्त्राल, अहमदाबाद
21- मनसुख भाई कांजीभाई सोनी, वस्त्राल, अहमदाबाद
22- रतीबेन शिवपति प्रसाद, म्युनिसिपल क्वार्टर, विजय मिल्स, नरोदा, अहमदाबाद
23- जमनाप्रसाद रामाश्रय तिवारी, म्युनिसिपल क्वार्टर, विजय मिल्स, नरोदा, अहमदाबाद
24- सतीश रमनलाल व्यास, ओधव, अहमदाबाद
25- शांताबेन जशभाई पटेल, रून, आनंद
26- इंदिराबेन बंशीभाई पटेल, रून, आनंद
27- राजेशभाई सरदारजी वाघेला, खोखरा, अहमदाबाद
28- शीलाबेन मफतभाई पटेल, रून, आनंद
29- मंजुलबेन कीर्तिभाई पटेल, रून, आनंद
30- चम्पाबेन मनुभाई पटेल, रून, आनंद
31- दिवालीबेन रावजी भाई पटेल, मातर, खेड़ा
32- ललिताबेन करंसीभाई पटेल, कड़ी, मेहसाणा
33- मंगूबेन हीरजीभाई पटेल, कड़ी, मेहसाणा
34- प्रह्लादभाई जयंतभाई पटेल, अम्बिका टाउनशिप, पाटन
35- भीमजीभाई करसनभाई पटेल, खेदब्रह्म, साबरकांठा
36- लखुभाई हीराजीभाई पटेल, वडाली, साबरकांठा
37- विट्ठलभाई परषोत्तम भाई पटेल, खोखरा, अहमदाबाद
38- शैलेश रणछोड़ भाई पांचाल, संकल्प पार्क सोसाइटी, सुरेंद्र नगर
39- अमृतभाई जोईताराम पटेल, गमनपुरा, मेहसाणा
40- नरेंद्र नारायणभाई पटेल, मंडल, अहमदाबाद
41- रमनभाई गंगारामभाई पटेल, नुगर, मेहसाणा

यह घटना दोपहर 11.30 की है। इस घटना से S-6 और S-7 कोच प्रभावित हुए थे।

याद है ‘खल्लास गर्ल’, हीरो से अकेले मिलने नहीं गई तो फिल्म से निकाल बाहर किया’मुझे हीरो ने अकेला बुलाया, मैंने मना कर दिया और फिर…’: ‘खल्लास गर्ल’ ने बताई बॉलीवुड की सच्चाई, कहा- कभी कम्प्रोमाइज नहीं किया

‘खल्लास गर्ल’ के नाम से मशहूर अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर नारंग ने बॉलीवुड के स्याह चेहरे सामने लाने की कोशिश की है। कोप्पिकर ने कहा कि उन्होंने कभी कॉम्प्रोमाइज नहीं किया, इसलिए उन्हें छोटे-मोटे रोल करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के कुछ बड़े प्रोजेक्ट से इसलिए बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने सिर्फ काम ही ध्यान दिया।

अपने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में बताते हुए ईशा ने कहा कि एक प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि हीरो की ‘गुड बुक’ में रहो और उससे अकेले मिलने की कोशिश करो। ईशा ने बताया कि वह इसके लिए तैयार नहीं हुईं तो उन्हें प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया। ईशा का कहना है कि इसके बाद वह छोटी-छोटी भूमिका करने लगीं।

साल 2000 के दशक के अपने दिनों को याद करते हुए ईशा कहती हैं, ”2000 के मध्य में मुझे एक प्रसिद्ध निर्माता ने बुलाया। उसने कहा कि आपको हीरो की गुड बुक में रहना होगा। मुझे नहीं पता था कि उसका क्या मतलब है। इसलिए मैंने हीरो को फोन किया। उसने मुझे उससे अकेले मिलने के लिए कहा। उस समय उन पर बेवफाई के आरोप लग रहे थे। उसने मुझे अकेले मिलने के लिए कहा। मैंने निर्माता को फोन किया और कहा कि मैं यहाँ अपनी प्रतिभा और लुक के कारण हूँ। अगर इससे मुझे अच्छा काम मिल सकता है तो यह अच्छा है। इसके बाद मुझे फिल्म से बाहर कर दिया गया।”

बॉम्बे टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ईशा ने इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद, कास्टिंग काउच और बाहरी को लेकर कहा कि बॉलीवुड में आम बात है। उन्होंने कहा कि करियर के शुरुआत में उन्हें एक बड़े प्रोजेक्ट में शामिल किया जाना था, लेकिन एक पुरानी नायिका ने कुछ लोगों को कॉल किए और फिर उनकी बेटी को उनकी जगह उस प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया।

ईशा का कहना है कि वह काम से बाहर कभी नहीं रहीं। आजकल OTT पर व्यस्त हैं और उनकी कई वेब सीरीज लाइन में हैं। उन्होंने कहा कि इस साल लगातार उनकी ब सीरीज रिलीज होंगी। बता दें कि 29 नवंबर 2009 में ईशा ने बिजनेसमैन और मुंबई होटेलियर टिम्मी नारंग से शादी कर ली थी। उनकी सात साल की एक बेटी है, जिसका नाम रियाना है। ईशा ने साल 2019 में भाजपा ज्वॉइन की थी।

झारखंड पुलिस कस्टडी में BJP कार्यकर्ता की मौत, बोले परिजन – टॉर्चर कर के मारा: CM सोरेन के क्षेत्र की घटना पर विधानसभा में भी हंगामा

झारखंड के साहिबगंज में देबू तुरी नाम के भाजपा कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में मौत का मामला जोर पकड़ रहा है। तालझारी थाना क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर शुक्रवार (25 फरवरी, 2022) को ग्रामीणों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम करते हुए स्थानीय थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की। उग्र ग्रामीणों ने थाने पर हमला भी बोला। तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने भी बल प्रयोग किया। आँसू गैस के गोले छोड़े गए।

करीब दो घंटे तक पुलिस थाने में यही सब चलता रहा। पुलिस का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन दो जवान घायल हुए हैं। थाना परिसर में पुलिस के जवान कैंप कर रहे हैं। आधा दर्जन ग्रामीण भी चोटिल हुए हैं। सुरक्षा बल के जवानों को थाना परिसर में कैंप करने के लिए तैनात किया गया है। परिजनों का कहना है कि मौत से 4 दिन पहले पुलिस देबू तुरी को चोरी के आरोप में उठा कर ले गई थी। परिजनों का कहना है कि आरोप कबूल करवाने के लिए उन्हें कड़ी यातनाएँ दी गईं।

कहा जा रहा है कि पुलिस उन्हें घायल अवस्था में लेकर साहिबगंज सदर अस्पताल पहुँची, जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि होंडा शोरूम में रविवार (20 फरवरी, 2022) को चोरी हो गई थी। पुलिस के अनुसार, रात के समय हुई इस चोरी की घटना में पूछताछ के लिए देबू तुरी को बुलाया गया था और उसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। जबकि झरना टोला में रहने वाले देबू तुरी के परिजन पुलिस पर पिटाई और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगा रहे हैं।

देबू तुरी के बेटे मोनू का कहना है कि तालझारी पुलिस ने मौत के 4 दिन पहले ही उनके पिता को कस्टडी में ले लिया था। उन्होंने बताया, “पूछताछ के दौरान उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा गया। नियम के अनुसार, उन्हें हिरासत में लेने के 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। शव का पोस्टमॉर्टम भी कराया गया, लेकिन परिजनों को इसके रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की आशंका है। हालाँकि, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमॉर्टम किया है।

साहिबगंज पुलिस ने देबू तुरी की हत्या के मामले में जारी किया बयान

मामला इसीलिए भी तूल पकड़ रहा है, क्योंकि साहिबगंज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। वो यहाँ के बरहेट क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। उन्होंने अपने एक करीबी को विधायक प्रतिनिधि बना रखा है, जो जिले में राजनीति की दशा और दिशा तय करता है। पुलिस की ‘अचानक तबीयत खराब होने’ वाली थ्योरी पर लोग विश्वास नहीं कर रहे हैं। जबकि पुलिस-प्रशासन का कहना है कि ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ के निर्देशों का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही है।

वहीं साहिबगंज के ही राजमहल क्षेत्र से विधायक और भाजपा नेता अनंत कुमार ओझा ने इस मामले को झारखंड विधानसभा में भी उठाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अभिरक्षा में एक दलित युवक की हत्या कर दी है। मेरी सरकार से माँग है कि इस मामले की उचित जाँच कराई जाए।” परिजनों ने थाना और पुलिस पर ‘घूस खाने’ का आरोप लगाया है। मृतक की पत्नी अनुपमा हेम्ब्रम ने कहा कि पुलिस ने उन्हें धमकी भी थी और पूरे परिवार को उठाने की धमकी दी।

साहिबगंज के पुलिस अधिकारियों पर भी लोग कई आरोप लगा रहे हैं। सब-इंस्पेक्टर रूप तिर्की की संदिग्ध मौत के मामले में भी जिले के पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठे थे। मई 2021 के उस मामले को लेकर बताया गया था कि दरोगा बनने का बाद रूप तिर्की जिन 11 मामलों की जाँच कर रही थीं, उनमें से 5 हाई प्रोफ़ाइल केसेज थे। फिर से साहिबगंज में इस तरह का मामला आने के बाद भाजपा भी राज्य की झामुमो सरकार पर उँगली उठा रही है।

‘मुलायम सिंह को मुस्लिमों ने मौलाना की पदवी दी, लेकिन वो भाजपा से दोस्ती कर लिए’: कॉन्ग्रेस नेता नसीमुद्दीन ने कहा- मायावती पैसों की भूखी

कॉन्ग्रेस के महासचिव (Congress General Secretary) नसीमुद्दीन सिद्दीकी (Nasimuddin Siddiqui) ने कहा कि सपा (Samajwadi Party) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) को मुस्लिमों ने मौलाना का दर्जा दिया, लेकिन उन्होंने विश्वासघात करते हुए भाजपा (BJP) के नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया।

नसीमुद्दीन ने सपा को भाजपा के साथ दोस्ती निभाने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने बुनकरों का भरोसा तोड़ा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सपा ने कहा था कि सरकार बनने के बाद बुनकरों का मीटर तोड़कर सरयू नदी में फेंक दिया जाएगा, लेकिन सरकार बनने पर ऐसे हालात बना दिए गए कि बुनकरों को ही नदी में डूबने की नौबत आ गई।

नसीमुद्दीन ने बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के प्रमुख मायावती (Mayawati) को पैसों की भूखी भी बताया। उन्होंने कहा कि मायावती के बारे में उनसे बेहतर कोई और नहीं जानता। मायावती को देश-समाज से कोई मतलब नहीं है। नसीमुद्दीन कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार रागिनी पाठक के चुनाव प्रचार में जलालपुर के वाजिदपुर में शनिवार (26 फरवरी) को एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

भाजपा को जुमलेबाजों की पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि इसके नेता झूठ बोलकर जनता को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक विधायक महिला की हत्या करा रहा है और दूसरा मंत्री पुत्र किसानों को गाड़ी से रौंद रहा है। कॉन्ग्रेस का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि यही एक अकेली पार्टी है, जो समाज के हर वर्ग और क्षेत्र में विकास करके दिखाया है।

अंबेडकरनगर में एक सभा को संबोधित करते हुए नसीमुद्दीन ने कहा कि आज जितनी हिंदुस्तान की हालत कभी बुरी नहीं थी। उन्होंने कहा कि देश और समाज में जो जहर घोल दिया है। उससे केवल और केवल कॉन्ग्रेस ही लड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुस्लिमों की नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की बात कर रहे हैं।

बता दें कि आज रविवार (27 फरवरी) को उत्तर प्रदेश में पाँचवें चरण का मतदान जारी है। इस चरण में प्रदेश के 12 जिलों की 61 सीटों पर मतदान हो रही है। इन सीटों के लगभग 2.30 करोड़ मतदाता 693 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

‘इस्लाम की उदारता से खतरे में आया हिंदुत्व का अस्तित्व’ : Vision IAS में ‘भक्ति आंदोलन’ के नाम से पढ़ाया जा रहा इस्लामी प्रोपेगेंडा

सिविल परीक्षाओं के लिए अभ्यार्थियों को तैयार करने के नाम पर इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाने का एक मामला सोशल मीडिया पर सामने आया है। एक वीडियो है जिसे फिल्म निर्देशक विवेक अग्रनिहोत्री ने भी शेयर की है। वीडियो Vision IAS कोचिंग सेंटर की है। इसमें महिला टीचर छात्रों को ‘भक्ति आंदोलन’ पढ़ा रही हैं और समझा रही हैं कि कैसे ये आंदोलन इस्लाम में पसरी लिबर्टी के कारण शुरू हुआ।

वीडियो में महिला टीचर पूछती हैं कि बताओ भक्ति आंदोलन का उद्देश्य क्या था। बच्चे जब जवाब में समानता बोलते हैं तो टीचर कहती हैं। सातवीं-आठवीं शताब्दी में कुछ नहीं था, इस्लाम आ गया था। इसलिए ये शुरू हुआ। वह कहती हैं, “इस्लाम था बहुत लिबरल। वह समानता के बारे में बात करता था। कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी। अगर इस्लाम पढ़ा होगा तो एक चेरामन जुमा मस्जिद है जिसका मिनिएचर आपके पीएम ने सऊदी किंग को दिया । ये भारत का पहला मस्जिद है जो 7वीं-8वीं शताब्दी में बना। तब इस्लाम आया नहीं था। लेकिन इस्लाम आना शुरू हो गया था। उस समय वह उदारवाद, समानता के बारे में बात कर रहे थे। वह किसी भी तरह की कठोरता और जातिवाद से मुक्त थे। इस्लाम की एक खासियत थी जिसमें वह ईश्वर (अल्लाह) के प्रति पूरे समर्पण को लेकर बात करते थे। वे एक ईश्वर के कॉन्सेप्ट पर बात कर रहे थे।”

महिला टीचर कहती हैं, “इस्लाम का कहना था कि अगर एक ही अल्लाह है। उसी ने सबको बनाया है। इसका मतलब है कि सब एक ही हैं। वह सार्वभौमिक भाईचारे के बारे में बात कर रहा था। यही वजह है कि इस्लाम की ओर लोग आकर्षित होने लगे। जो लोग निम्न वर्ग के थे वो भी अपना स्तर बढ़ाने के लिए इस्लाम में आने लगे। उस समय था जब हिंदू सभ्यता के अस्तित्व पर खतरा आ गया। जब लोगों को कछ समझ नहीं आया तो उन्होंने भक्ति आंदोलन की शुरुआत की। वह बताना चाहते थे कि इस्लाम जैसा ही हिंदू धर्म है। ज्यादा फर्क नहीं है। थोड़ा 1 भक्ति आंदोलन में भी पूर्ण समर्पण और पूर्ण आस्था की बात हुई।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियो सामने आने के बाद लोग दो चीजों पर सवाल कर रहे हैं। एक बात तो ये कि आखिर हिंदुत्व को इतना नीचे दिखाने का प्रयास बुद्धिजीवियों द्वारा क्यों किया जा रहा है? और दूसरा सवाल ये कि इस्लाम का महिमामंडन करके छात्रों का ब्रेनवॉश इस स्तर तक कैसे किया सकता है। लोग तंज कस रहे हैं कि गजनवी और बाबर न केवल सेकुलर लोग थे बल्कि लिबरल भी थे। उन्होंने भातीयों को सेकुलरिज्म का पाठ पढ़ाया और भारत में चल रहे भक्ति आंदोलन से निजात दिलाई।

जानकारी के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाली महिला टीचर का नाम स्मृति शाह है। जो पूर्व में आईएस परीक्षाओं की तैयारी करती थीं, लेकिन उनका एग्जाम नहीं क्लियर हुआ। ट्विटर पर इन्हें लेकर कहा जा रहा है कि स्मृति भारतीय समाज के बारे में बारे में विजिन आईएएस में पढ़ाती हैं। वह वामपंथी हैं और मोदी/भाजपा से नफरत करने वाली हैं। एक यूजर कहता है, “मैंने पता नहीं इनके 20 लेक्चर कैसे देखे वो भी 2019 इलेक्शन से ठीक पहले। सारे लेक्चर सिर्फ राजनैतिक भाषण और व्यंग्य जैसे थे।”

UP चुनाव में गोंडा (करनैलगंज) से सपा उम्मीदवार पर रेप केस, आत्मदाह की धमकी: ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारे को भी जाँच रही पुलिस

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह पर मारपीट और रेप का केस दर्ज हुआ है। उनके खिलाफ करनैलगंज के भंभुआ पुलिस चौकी में शिकायत की गई है। पीड़ित महिला ने सपा प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह के साथ उनके साथियों पर भी घर में घुस कर मारपीट और दुष्कर्म का आरोप लगाया है। घटना शनिवार (26 फरवरी 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि रात 10 बजे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी उनके घर आ धमके थे। उन्होंने गालियाँ देते हुए घर को अपने साथियों के साथ चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर की महिलाओं के साथ अश्लीलता शुरू कर दी गई। महिलाओं को मारा-पीटा गया और उनके जेवर छीन लिए गए। आरोप है कि हमले में महिलाओं के साथ कई अन्य लोगों को भी चोटें आई हैं।

चीख पुकार की आवाज सुन कर आस-पास के लोग आए। उन्होंने बीच-बचाव किया, तब हमलावर वापस गए। घटना से नाराज हो कर भीड़ भंभुआ पुलिस चौकी पर जमा हो गई। मौके पर भाजपा के कई कार्यकर्ता भी पहुँच गए। यही भीड़ कोतवाली भी पहुँच गई। वहाँ पर धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया।

पीड़िता ने कार्रवाई न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दे डाली है। मौके की गंभीरता देखते हुए पुलिस के बड़े अधिकारी आए। उन्होंने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। तब जाकर लोगों का आक्रोश शांत हुआ। पुलिस ने जाँच शुरू करते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

गोंडा में ही सपा की रैली में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे

भाजपा नेता प्रशांत पटेल ने 26 फरवरी को एक वीडियो ट्वीट कर के गोंडा जिले में समाजवादी पार्टी की रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगने का आरोप लगाया था। उन्होंने लिखा, “गोंडा सदर में समाजवादी पार्टी के रोड शो में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लग रहे हैं।”

गोंडा पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है। पुलिस ने इस वीडियो के आधार पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। वीडियो एडिटेड है या सही, जाँच के बाद ही पता लगेगा।

‘थाला अजीत’ की फिल्म ने महज 3 दिनों में पार किया ₹100 Cr का आँकड़ा, BJP के साथी पवन कल्याण को 62 करोड़ की ओपनिंग

बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों दो बड़े अभिनेताओं की धूम है। जहाँ एक तरफ तमिल सिनेमा में ‘थाला’ (Thala) के नाम से पहचाने जाने वाले अजीत कुमार (Ajith Kumar) की फिल्म ‘वलिमै’ (Valimai) बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है, वहीं दूसरी तरफ तेलुगु राज्यों में ‘पॉवर स्टार’ (Power Star) कहे जाने वाले पवन कल्याण (Pawan Kalyan) की मूवी ‘भीमला नायक’ (Bheemla Nayak) शानदार कलेक्शंस (Box Office Collections) के साथ नाम कमा रही है। इधर बॉलीवुड में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ भी ठीक-ठाक कमाई कर रही है, लेकिन ये दक्षिण की दोनों फिल्मों से काफी पीछे है।

‘थाला अजीत’ की फिल्म ‘वलिमै’ ने 2 दिनों में ही 95 करोड़ रुपए बटोर कर ये जता दिया कि जोसेफ विजय के मुकाबले वो कहीं से भी पीछे नहीं हैं, वहीं राजनीति में सक्रिय और भाजपा का साथ देने वाले पवन कल्याण की ‘भीमला नायक’ ने भी ये बता दिया है कि बॉक्स ऑफिस पर उन्हें कमतर आँकने वाले अभी भी गलत हैं। तमिलनाडु में ‘वलिमै’ ने तीन दिनों में 81.25 करोड़ रुपए का कारोबार किया है, वहीं ‘भीमला नायक’ ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 2 दिनों में 62.14 करोड़ रुपए कमाए हैं।

अभी इन दोनों ही फिल्मों के रविवार (27 फरवरी, 2022) का बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस सामने नहीं आया है, ऐसे में छुट्टी के दिन इनकी कमाई में बड़ी उछाल देखने को मिल सकती है। ‘वलिमै’ ने 2 दिनों में दुनिया भर में 95.21 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। दोनों फिल्मों को अच्छी ओपेनिंग भी मिली। जहाँ पहले दिन ‘वलिमै’ ने वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर 59.48 करोड़ रुपए बटोरे थे, वहीं ‘भीमला नायक’ की पहले दिन की कमाई 61.24 करोड़ रुपए है।

वहीं आलिया भट्ट की मुख्य किरदार वाली हिंदी फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की भी कमाई ठीक-ठाक रही है। फिल्म ने दो दिनों में भारत में 23.82 करोड़ रुपए का नेट कारोबार किया है। दावा किया जा रहा है कि रविवार को फिल्म 40 करोड़ के आँकड़े के पास पहुँच सकती है। फिल्म के पाँचवें दिन मंगलवार को महाशिवरात्रि है, ऐसे में उस दिन भी इसे छुट्टियों का फायदा मिलेगा। महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में 50% ऑक्यूपेंसी का नियम लागू है, ऐसे में ट्रेड एनालिस्ट्स इसे अच्छा कलेक्शन बता रहे हैं।