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रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बात करेंगे PM मोदी, भारतीयों को निकालने की तैयारी: यूक्रेनी राष्ट्रपति बोले- चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जे की कोशिश

यूक्रेन (Ukraine) में रूस के हमले के बीच वहाँ फँसे भारतीय लोगों के लिए भारत की मोदी सरकार (Modi Government) ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने लगभग 200 विद्यार्थियों को दूतावास के नजदीक स्थित एक स्कूल में रखा है। वहीं, जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से बात कर सकते हैं। उधर रूस ने दावा किया है कि उसने उक्रेन के 70 सैन्य ठिकानों को बर्बाद कर दिया है। साथ ही रूस ने अपने नागरिकों को युद्ध विरोधी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की चेतावनी दी है।

युद्धग्रस्त यूक्रेन की राजधानी कीव में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने वहाँ पढ़ाई करने गए 200 भारतीय छात्र-छात्राओं को दूतावास के नजदीक एक स्कूल में रखा है, ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। इस संबंध में वहाँ के भारतीय दूतावास ने इसका एक वीडियो जारी है, जिसमें इकट्ठा हुए विद्यार्थियों को देखा जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के हर्ष सिंगला का कहना है कि कीव में भारतीय दूतावास पूरी सक्षमता के साथ काम कर रहा है। वहाँ फँसे भारतीयों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही भारतीयों को वहाँ से निकालने के लिए भारतीय अधिकारियों को तैनात किया गया। सीमा के पास वहाँ कैंप बनाए जा रहे हैं। वहाँ से भारतीयों को निकाला जाएगा।

इधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया है कि रूस ने यूक्रेन के 70 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने ट्वीट कर कहा है कि रूस उनके चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि साल 1986 की त्रासदी को दोहराया न जाए सके इसके लिए यूक्रेन के जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं। रूस के इस हमले को उन्होंने पूरे यूरोप के खिलाफ युद्ध की घोषणा बताया है।

वहीं, इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूस के राष्ट्रपति से आज रात बात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है। यूक्रेन के हालात पर पीएम ने दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ-साथ इन तीनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बता दें कि आज ही यूक्रेन के राष्ट्रपति ने महाभारत और चाणक्य का हवाला देते हुए युद्ध रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि पुतिन पीएम मोदी का सम्मान करते हैं और वे पीएम की मोदी की बात जरूर मानेंगे।

यूक्रेन पर आक्रमण के बीच रूसी अधिकारियों ने युद्ध विरोधी सहानुभूति रखने वाले लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। दरअसल, रूस के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इस हमले को लेकर रूस के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने की अपील की थी। वहीं, स्वतंत्रता अधिकार समूह का कहना है कि युद्ध विरोधी प्रदर्शन के लिए रूस में कम से कम 27 लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया गया है।

  

कभी यूक्रेन ने किया था भारत के परमाणु परीक्षणों का विरोध, अब पीएम मोदी से रूस को रोकने के लिए माँग रहा मदद

रूस यूक्रेन पर लगातार हमले कर रहा है और उसके सैनिकों से सरेंडर करने के लिए कह रहा है। ऐसे में यूक्रेन दुनियाभर की सभी प्रमुख शक्तियों से रूस को रोकने की अपील कर रहा है। उसने भारत सरकार से भी रूस पर दवाब बनाने का आग्रह किया है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमीर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत से रूस से शांति के लिए बातचीत करने का उनुरोध करते हुए कहा कि भारत का रूस के साथ अच्छा संबंध है।

गुरुवार (24 फरवरी 2022) को भारत में यूक्रेन के राजदूत इगोर पोलिखा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूस के साथ तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि मोदी और पुतिन एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। दरअसल, यूक्रेन भारत के प्रभाव को स्वीकार कर रहा है औऱ चाहता है कि पीएम मोदी इसके लिए कदम उठाएँ।

इससे पहले कि यूक्रेन के ऊपर बात करें हम दोनों देशों के बीच संबंधों पर नजर डालते हैं। क्योंकि, पहले भारत के साथ यूक्रेन के संबंध अच्छे नहीं थे। उल्लेखनीय है कि जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तो यूक्रेन उन देशों में से एक था जिसने 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों का कड़ा विरोध किया था और 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद सुरक्षा परिषद में भारत के कदम की निंदा की थी।

गौरतलब है कि साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से पाँच परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उस दौरान यूक्रेन 25 अन्य देशों के साथ भारत के परमाणु परीक्षणों की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1172 के पक्ष में मतदान किया था। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित किए गए इस प्रस्ताव में माँग की गई थी भारत अपने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाए और एनपीटी और सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करे।

इसके अलावा प्रस्ताव में भारत से परमाणु कार्यक्रमों को रोकने, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और उत्पादन पर भी रोक लगाने को कहा गया था। इन सब में यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र का साथ दिया था।

जैसै कि आज हम सभी कह रहे हैं कि रूस के हमले के कारण यूक्रेन एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। दरअसल, यूक्रेन अपने शक्तिशाली दोस्तों के साथ रहना चाहता है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका को न तो दुनिया में कोई सम्मान मिलता है औऱ न ही उसका वैश्विक आधिपत्य है। वहीं करीब 22 साल पहले भारत की सुरक्षा जरूरतों के खिलाफ खड़े होने वाला यूक्रेन आज चाहता है कि भारत उसका साथ दे।

लेकिन जिस तरह से कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थाई मित्र या स्थाई दुश्मन नहीं होते हैं, केवल स्थाई हित मायने रखते हैं।

कौन हैं ये तातार मुस्लिम? जो रूस के यूक्रेन पर हमले से सिहर उठे हैं: कभी स्टालिन ने 15 मिनट में बँधवा दिया था बोरिया-बिस्तर

दुनिया को जिस बात का डर था, वह हो गया है। रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, दुनिया के तमाम देशों की अपील को दरकिनार करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया। रूसी सेना ने तबाही मचाना शुरू किया तो यूक्रेन का मंजर पूरी तरह से बदल गया। इस युद्ध से क्रीमियाई तातार मुस्लिम भी सिहर उठे हैं।

1991 में यूक्रेन द्वारा खुद को स्वतंत्र देश घोषित किए जाने के बाद यूक्रेन लौटे 53 वर्षीय क्रीमियाई तातार मुस्लिम एरफान कुडुसोव ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा, “जब बुजुर्गों ने पहली बार हवाई जहाज से उतरकर यूक्रेन की जमीन पर कदम रखा तो उन्होंने यूक्रेन की धरती को चूम लिया। लोग खुशी से रो रहे थे। वो अपने घर लौट आए थे।”

कौन हैं तातार मुस्लिम 

तातार मुस्लिम मंगोलों के वंशज हैं। जिन्होंने कई सदियों तक क्रीमिया पर शासन किया था। जब 1783 में रूस की महारानी ‘कैथरीन द ग्रेट’ ने क्रीमिया पर कब्जा किया, तब उनकी हैसियत घटने लगी थी। तातार अपने ही मुल्क़ में दोयम दर्ज़े के हो गए। वर्ष 1991 में सोवियत संघ विघटित हुआ। यूक्रेन रुस के तत्कालीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षा की जद में रहा।

तातार मुस्लिमों के पलायन का इतिहास

इधर 1922 में जोसेफ स्टालिन सोवियत संघ का सर्वेसर्वा बन गया। क्रीमिया के तातार भी जोसेफ स्टालिन के निशाने पर थे। वो बस एक मौका चाहता था। ये मिला एक रिपोर्ट की शक्ल में। अप्रैल 1944 में सीक्रेट सर्विस का मुखिया लावरेन्त बेरिया एक फाइल लेकर स्टालिन से मिला। इसमें उन तातार मुस्लिमों की लिस्ट थी, जिन्होंने जर्मन सेना का सहयोग किया था। स्टालिन ने फाइल पर नजर डाली और एक क्रूर आदेश लिखा। 

इसके बाद जब तातार लोग नींद की आगोश में थे, अचानक उनके दरवाजे खटखटाए जाने लगे। लोग अवाक रह गए। स्टालिन का फरमान था कि 15 मिनट में सामान समेटो और घर छोड़ दो। इन 180,000 बेघर अभागे तातारों को मालगाड़ियों में पशुओं की तरह ठूँस दिया गया। हफ्तों का कठिन कष्टप्रद सफर। कई तो यात्रा के दौरान ही मर गए। पूरे क्रीमिया से करीब 2.30 लाख तातार मुस्लिमों को उज्बेक प्रांत, उराल अंचल और साइबेरिया ले जाया गया। बाद में कुछ तातार लौटे भी, लेकिन व्लादिमीर पुतिन के क्रीमिया में आने के बाद तातारों के बुरे दिन फिर लौट आए। 

मार्च, 2014 में जनमत संग्रह हुआ और सेवस्तोपोल समेत क्रीमिया को रूस शासित प्रांत घोषित कर दिया गया। उसी साल यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन हुआ। 1991 में सोवियत संघ से आजाद होने के बाद ये पहला मौका था, जब यूक्रेन में रूस विरोधी सरकार बनी। वहाँ पर उठे विरोधी स्वर को देखते हुए 2014 में ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला और क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद हालात और बिगड़ने शुरू हो गए। तातार मुस्लिमों को क्रीमिया छोड़कर यूक्रेन भागना पड़ा। रुस की तरफ से युद्ध की शुरुआत करने के बाद अब उन्हें एक बार फिर से पलायन का डर सता रहा है। पिछले वर्षों में लाखों की संख्या में तातार पलायन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में तातार प्रताड़ित, कत्ल या गिरफ्तार हुए हैं।

‘विक्रम संपत के खिलाफ किए ट्वीट को हटाएँ ऑड्रे ट्रुश्के’: दिल्ली HC में हवाला देने पर बोले वकील- आतंकी शरजील को स्तंभकार कहता है द वायर

भारतीय इतिहासकार विक्रम संपत (Vikram Sampath) को राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के (Audrey Truschke) को उनके खिलाफ किए गए विवादास्पद ट्वीट्स को 48 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने गुरुवार (24 फरवरी 2022) को संपत की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें ऑड्रे ट्रुश्के समेत दूसरे लोगों द्वारा कथित साहित्य की चोरी का आरोप लगाकर उनके खिलाफ किए गए अपमानजक ट्वीट को हटाने की माँग की गई थी।

कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस अमित बंसल की सिंगल बेंच ने की। अदालत में इतिहासकार विक्रम संपत की तरफ से पेश हुए वकील राघव अवस्थी ने कहा कि विक्रम संपत पर ऑनलाइन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। संपत के खिलाफ किए जा रहे ट्वीट अदालती अधिकार पर भी हमले हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 18 फरवरी 2022 को ऑड्रे ट्रुश्के, जो चोपड़ा और अनन्या चक्रवर्ती को संपत के खिलाफ ट्वीट करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अवस्थी ने कहा कि ऑड्रे ट्रुश्के, जो चोपड़ा और अनन्या चक्रवर्ती ने लंदन स्थित द रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी को जो पत्र लिखा था, उसके संपत सदस्य हैं। 2017 में विक्रम संपत ने इंडिया फाउंडेशन जर्नल में एक स्पीच दिया था, जिसको लेकर इस प्रोफेसर की तिकड़ी ने उनके ऊपर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाते हुए यह पत्र लिखा था। वकील जवाहर राजा ने विक्रम संपत पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जो भाषण दिया था वो असल में एक रिसर्च पेपर था। जानकी बाखले (जिनका जिक्र विक्रम संपत ने अपने लेख में किया था) ने भी इसका विरोध किया है।

हालाँकि, हाईकोर्ट ने बाखले की आपत्तियों को स्वतंत्र मामला बताने के दावे को खारिज करते हुए कहा, “मेरा विचार है कि जो डॉक्यूमेंट्स वकील राघव अवस्थी रिकॉर्ड पर लाए हैं, उन्हें रिकॉर्ड में रखने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि ये केस अभी अपने शुरुआती चरण में है।”

अवस्थी ने अदालत में तर्क दिया कि ट्रुश्के ने वो पत्र किसी तीसरे व्यक्ति को प्रस्तुत किया था, जिसमें इसे ‘संभावित साहित्यिक चोरी’ का मामला बताया गया है। अवस्थी ने ये भी कहा कि ये लोग अब डायरेक्ट चोरी से संभावित चोरी पर आ गए हैं।

इसके साथ ही राघव अवस्थी ने कोर्ट में ऑड्रे ट्रुश्के के ‘द वायर’ का उल्लेख करने पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि वायर ने आतंकी शरजील इमाम को एक कॉलमनिस्ट बताया था। दलीलों के बाद जस्टिस बंसल ने कहा कि कोर्ट ऑड्रे ट्रुश्के को संपत के खिलाफ ट्वीट को हटाने का आदेश दे रही है।

हालाँकि, विरोधी पक्ष के वकील जवाहर राजा ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताते हुए कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई थी और कहा, “विक्रम संपत ने प्रथम दृष्टया मामला बनाया है! आप डॉक्टर ऑड्रे के वकील भी नहीं हैं! आप इस पर बहस क्यों करना चाहते हैं? यह आपको सीधे तौर पर प्रभावित भी नहीं करता है! इससे हमारे मन में आशंकाएँ पैदा होती हैं! आप मामले को सनसनीखेज बनाना चाहते हैं!”

अंतिम फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उसने पहले ही ट्रुश्के और अन्य को विक्रम संपत से संबंधित पत्र और ईमेल या किसी अन्य मानहानिकारक सामग्री को पोस्ट करने से रोक दिया है।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ FIR की माँग वाली याचिका खारिज: ‘भड़काऊ’ भाषण का लगाया था आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार (24 फरवरी) को एक अभियोग आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riot) के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के वाले भाजपा के विभिन्न नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई थी। अदालत ने कहा कि इस याचिका को भविष्य के लिए लंबित नहीं रखा जाएगा।

अदालत शेख मुज्तबा फारूक द्वारा दायर एक लंबित मामले में एक वकील की ओर से दायर एक हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसने भाजपा अधिकारियों अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और जाँच की माँग की थी।

याचिका दायर करने वाले वकील की ओर से अदालत में पेश होने वाले अधिवक्ता पवन नारंग के अनुसार, याचिकाकर्ता फारूक के पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में कहा गया है कि जो लोग पुलिस के पास भी नहीं गए हैं, उनकी जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने अभियोग आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया।

हालाँकि, इस मामले में सोमवार (28 फरवरी) को सुनवाई होगी। अदालत 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की स्वतंत्र एसआईटी जाँच की माँग करने वाली याचिकाओं के एक और समूह पर सुनवाई जारी रखेगी।

ध्यान देने वाली बात है कि पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को उस लंबित याचिका पर ‘तीन महीने के भीतर’ तय करने के लिए कहा था, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की गई थी। इस दंगे को 23 से 26 फरवरी 2020 के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में इस्लामवादियों द्वारा किए गए हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था।

यहाँ बताना जरूरी है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि उसे ‘कार्रवाई योग्य सबूत’ नहीं मिला है, जिससे पता चले कि इन नेताओं द्वारा इन दंगों में कोई भूमिका निभाई गई है।

दिल्ली दंगों के लिए बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर पर गलत आरोप

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के पारित होने के बाद शुरू हुआ दिल्ली में सीएए विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गया। 24 फरवरी 2020 को राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया था। उसके बाद वामपंथी मीडिया और लिबरल्स ने यह दावा करते हुए भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा को फँसाने की कोशिश की कि इनके ‘भड़काऊ’ बयान के बाद ही दंगे भड़के।

दिलचस्प बात यह है कि वामपंथी मीडिया ने यह स्वीकार करने से पूरी तरह से इनकार कर दिया कि चार्जशीट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि कैसे मुस्लिम नेताओं और वामपंथियों ने 5 दिसंबर 2019 तक हिंसा की योजना बनाना शुरू कर दिया था और हिंदू विरोधी दंगों तक मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं को लगातार अंजाम दिया जा रहा था।

‘कल जुम्मा है, माई लॉर्ड हिजाब पहनने की इजाजत दें’: कर्नाटक बुर्का विवाद में HC में कुरान और हदीसों का दिया गया हवाला, शुक्रवार को फिर होगी सुनवाई

हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को 10वीं सुनवाई खत्म हो गई है। वहीं इस मामले में कल सुनवाई पूरी होने की उम्मीद है। आज कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करते हुए हिजाब के समर्थन में वरिष्ठ वकील कामत ने कुरान और हदीसों का भी हवाला दिया। जैसे ही कोर्ट ने कहा कि कल ढाई बजे हम बाकी याचिकाकर्ताओं को सुनेंगे। वहीं एडवोकेट कुलकर्णी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “कल जुम्मा है, माय लॉर्ड कृपया कल हिजाब पहनने की अनुमति दें।”

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अपने दलीलों में दावा किया कि राज्य सरकार ने ड्रेस कोड के संबंध में 5 फरवरी, 2022 के सरकारी आदेश के संबंध में सरकार ने 90 प्रतिशत अपना रुख छोड़ दिया था। वहीं कामत ने यह भी कहा कि पर्दा और बुर्का एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है बल्कि हिजाब है। यह बात कहने के लिए मैंने निर्णय पेश किए हैं। लेकिन उत्तरदाताओं ने यह कहते हुए किसी निर्णय का हवाला नहीं दिया कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

कामत ने हिजाब का बचाव करते हुए, कुरान और हदीस का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, हदीस कुरान के समान ही महत्त्व रखता है। अध्याय 12, के आयत नंबर 24, 31 में समझाया गया है कि कैसे आयशा भी इसे पहनती थीं (आयशा पैगंबर मुहम्मद की पत्नी है) ताकि शरीर, चेहरे, गर्दन और छाती पर पर्दा रखने के लिए …. (…) और उनके सर ढके हुए हों।”

कामत ने अपनी दलीलों में यह भी कहा कि हिजाब अरबी शब्द खिमार से निकला है.. यह एक घूंघट की तरह है.. जो सिर और छाती को ढकता है। आगे, शायरा बानो का फैसला कहता है कि कुरान में जो कुछ भी है उसका पालन किया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ कर्नाटक पुलिस की सलाह के बावजूद हिजाब सुनवाई को लेकर भड़काऊ ट्वीट करने वाले एक्टर चेतन कुमार को गिरफ्तार किया गया है।

अब सिख लड़की को कहा, हटाएँ पगड़ी

वहीं अब बेंगलुरू के एक कॉलेज में सिख छात्रा को भी गड़ी उतारकर आने को कहा है। बेंगलुरू के माउंट कार्मेल पीयू कॉलेज ने एक अमृतधारी सिख छात्रा को कहा है कि वह कक्षा में पगड़ी पहनकर ना आए। कॉलेज ने इसको लेकर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला दिया है।

कर्नाटक में कॉलेजों में हिजाब बैन को लेकर चल रही बहस के बीच नया विवाद सामने आया है। बेंगलुरु के एक कॉलेज में 17 साल की अमृतधारी (बपतिस्मा प्राप्त) सिख लड़की को पगड़ी हटाने के लिए कहा गया। कॉलेज का कहना था कि उसे 10 फरवरी को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा, जिसमें समान ड्रेस कोड की बात कही गई है। बता दें कि कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में छात्रों को भगवा शॉल, हिजाब और धार्मिक झंडे या इस तरह के किसी धार्मिक परिधानों को कॉलेजों की कक्षाओं में पहनने से रोकता है।

हिजाब के लिए CFI भड़का रहा है छात्राओं को

वहीं कल बुधवार को हुई सुनवाई में वकील नागानंद ने कोर्ट को बताया कि सीएफआई के लोग कॉलेज में हिजाब को अनुमति दिलवाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2004 में कॉलेजों में यूनिफॉर्म को अनिवार्य किया गया था। तब से वही यूनिफॉर्म कॉलेज में पहनी गई। लेकिन अब सीएफआई हिजाब के लिए लोगों को भड़का रहा है। उन्होंने बताया कि सीएफआई ने कुछ शिक्षकों को भी इतना धमकाया है कि वो एफआईआर करने से डर रहे हैं।

भेदभाव मिटाने के लिए तय होती है यूनिफॉर्म

कल की सुनवाई में वरिष्ठ वकील साजन पोवैया ने सीडीसी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ओर से कहा कि वो नागानंद द्वारा कही गई हर बात से सहमत हैं। उन्होंने अनुच्छेदों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य किसी को ये नहीं कह सकता कि वो मुस्लिम क्यों है, लेकिन राज्य किसी पहनावे पर प्रतिबंध लगा सकता है। पोवैया ने बताया कि भेदभाव मिटाने के लिए यूनिफॉर्म तय की जाती है। उन्होंने पूछा कि क्या अगर हिजाब पहनने से किसी को रोका जाए तो इसका अर्थ ये है कि मजहब में बदलाव किया जा रहा है या ये है जो हिजाब नहीं पहनते हैं वो मजहब नहीं मानते? कोई मुस्लिम बच्चा हिजाब पहनेगा और हिंदू भगवा स्कॉर्फ तो ये दोनों ही चीजें ठीक नहीं हैं। आर्टिकल 25 मजहब को मानने का अधिकार देता है। मजहबी पोषाक पहनने का नहीं। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को फिजिक्स, केमेस्ट्री और ज्योग्राफी नहीं पढ़ाते हुए ये नहीं कह सकते हैं कि वो लोग मजहबी कपड़ों में आएँ। स्कूलिंग सिर्फ शैक्षिक ही नहीं बल्कि पूरे विकास से संबंधित है।

कॉन्ग्रेस के राजस्थान में राजीनामे का दबाव ऐसा कि जिसकी 5 साल की बच्ची से रेप, उसको ही छोड़ना पड़ा गॉंव

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में है। हालत ऐसी है कि फरियाद लेकर पुलिस थाने आई महिला से रेप करने का मामला भी सामने आ चुका है। अब इसी राजस्थान से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित परिवार पर राजीनामे का लिए इतना दबाव बनाया गया कि वह गाँव छोड़कर जाने को विवश हो गया।

भरतपुर के चिकसाना थाना क्षेत्र के इस पीड़ित परिवार की एक 5 साल की बच्ची के साथ 22 फरवरी 2022 को रेप किया गया। आरोपित शराबी और गाँव का ही है। बताया जाता है कि शौच के लिए खेत गई बच्ची से उसने दुष्कर्म किया। बच्ची को खोजने आई माँ को देखकर आरोपित भाग निकला। हालॉंकि बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

घर आकर पीड़िता की माँ ने बेटी से घटना की जानकारी ली। बच्ची ने आरोपित का नाम बताया। बच्ची के परिवार वाले आरोपित के घर शिकायत ले कर गए तो उन्हें ही उल्टे गाली-गलौज दे कर भगा दिया गया। आखिरकार पीड़ित परिवार ने आरोपित के विरुद्ध चिकसाना थाने में FIR दर्ज करवाई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद पीड़ित परिवार पर लगातार समझौते का दबाव बनाया गया। इसके चलते पीड़िता का परिवार गाँव छोड़ कर कहीं चला गया है। फ़िलहाल बच्ची का मकान खाली पड़ा है। चिकसाना के SHO के मुताबिक, “बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

जो भी लड़ना चाहेंगे सबको देंगे हथियार: यूक्रेन के राष्ट्रपति का ऐलान, रूसी हमले के बाद 18000 भारतीय भी फँसे

रूस यूक्रेन पर हमला कर चुका है औऱ वह लगातार एक-एक कर उसके शहरों पर हमले करके उन्हें अपने कब्जे में ले रहा है। रसियन फोर्सेस ने यूक्रेन के हथियार कारखाने को नष्ट कर दिया है। इस हमले के बाद अब देश के राष्ट्रपति व्लदिमीर ज़ेलेंस्की ने अपने नागरिकों से भी देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने की अपील की है।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा के वो उन सभी लोगों को हथियार देंगे जो आगे आकर यूक्रेन की रक्षा के लिए लड़ना चाहेंगे। उन्होंने लोगों से शहरों के चौकों में यूक्रेन का समर्थन करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

अपने दूसरे ट्वीट में ज़ेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार क्षेत्रीय रक्षा के हिस्से के रूप में देश की रक्षा में हथियार उठाने वाले किसी भी नागरिक के खिलाफ प्रतिबंधों को हटाएगी।

इससे पहले यूक्रेन ने रूस के हमले के बाद उसके साथ सभी तरह के संबंधों को तोड़ने का ऐलान किया था। गौरतलब है कि रूस यूक्रेन के लगभग सभी प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। हालाँकि, बावजूद इसके वो लगातार नागरिकों पर हमले करने की बात से इनकार कर रहा है औऱ यह दावा कर रहा है कि वो केवल यूक्रेनी सैन्य प्रतिष्ठानों को टार्गेट कर हमले कर रहा है।

हमले से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के सैनिकों को सरेंडर करने के लिए कहा था।

कई लोग मारे गए

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के हमले में यूक्रेन के अब तक 40 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। जबकि इस हमले में 10 नागरिकों के भी मारे जाने की खबर है। वहीं यूक्रेन ने भी रूस के 50 सैनिकों और 6 फाइटर जेट्स और टैंकों को तबाह करने का दावा किया है।

इस बीच यूक्रेन में भारत के दूतावास ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि रूसी हमले के बीच भी एम्बेसी को बंद नहीं किया जाएगा। भारत सरकार वहाँ फंसे 18000 लोगों को लगातार वहाँ से निकालने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने पकड़े 13 आतंकवादी, 2 को पाकिस्तान में मिली थी ट्रेनिंग: ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत CCTV बनेगा पहरेदार

दिल्ली पुलिस ने 24 फरवरी 2022 (गुरुवार) को अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने आतंकवाद, अपराध, हिंसा, साइबर क्राइम से जुड़े अपराधों पर की गई कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने साल 2021 में 13 आतंकवादियों को पकड़ा। इनमें से दो को पाकिस्तान में आईएसआई ने ट्रेनिंग दी थी। इनके नाम ओसामा और ज़ीशान कमर हैं। इसके अलावा एक पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी मोहम्मद अशरफ को भी गिरफ्तार किया गया है। वह भारत में अली अहमद नूर के नाम से रहकर स्लीपर सेल तैयार करने में जुटा था। दिल्ली पुलिस ने खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स (KCF) और कुकी नेशनल फ्रंट (KNF) के आतंकियों को भी पकड़ा है।

अस्थाना ने साइबर क्राइम को नेशनल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को 1,15,2013 कॉल मिले। इनमें से 24,219 फाइनेंसियल फ्रॉड के थे। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 4.31 करोड़ रुपए फ्रीज किए।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अभियानों की जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस ने बताया, “दिल्ली पुलिस के विभिन्न थानों में कुल 187 केस दर्ज किए गए। ये सभी बाल अपराध से जुड़े हुए थे। इन सभी में प्रभावी पैरवी और कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में कुल 127 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इसी के साथ ऑनलाइन अभियान चला कर इन अपराधों के प्रति लोगों को सजग किया गया।”

महिला अपराधों की रोकथाम के लिए पिंक बूथ

दिल्ली पुलिस के मुताबिक महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए पिंक बूथ की स्थापना की गई। इन बूथों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। यहाँ से महिलाओं को एमरजेंसी नंबर 1090 के प्रति भी जागरूक किया जा रहा। अब तक कुल 48 पिंक बूथ स्थापित किए गए हैं। बाकी अन्य की स्थापना पर तेजी से काम चल रहा है। इन बूथों पर जाने वाली महिलाओं को पुलिस स्टेशनों में भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है।

पूरी दिल्ली पर नजर रखने की तैयारी

दिल्ली पुलिस ने बताया, “CCTV कैमरों के माध्यम से पूरी दिल्ली पर नजर रखने की तैयारी है। फिलहाल दिल्ली में 15215 CCTV कैमरों से दिल्ली पुलिस हर संदिग्ध हरकत पर नजर रख रही है। अब इसमें 10000 कैमरे और जोड़े जाएँगे। इसे ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है। इस से लॉ एन्ड आर्डर, ट्रैफिक और किसी विषम स्थिति को सुधारने में मदद मिलेगी।”

इसी के साथ दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए चल रही योजनाओं, साइबर अपराध पर रोकथाम के आँकड़े, गुमशुदा बच्चों की खोजबीन, पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की जाँच, क्षेत्रीय और संगठित अपराधों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी साझा की गई। पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद और सुधारने की दिशा में भी जोर दिया गया।

महाभारत और चाणक्य का हवाला दे यूक्रेन की PM मोदी से गुहार, कहा- पुतिन आपके दोस्त, उनसे हमारे राष्ट्रपति जेनेंस्की की बात करवा दीजिए

रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। राजधानी कीव सहित यूक्रेन के सैन्य प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर भी धमाके की खबरें हैं। ऐसे संकट में यूक्रेन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप के लिए अनुरोध किया है। रूस के हमले से थर्राए यूक्रेन ने चाणक्य और महाभारत का जिक्र कर भारत से मदद की गुहार लगाई है। यूक्रेन के राजदूत ने कहा कि मुझे नहीं पता कि दुनिया के कितने नेताओं को पुतिन गंभीरता से लेते हैं लेकिन मोदी जी का स्टेटस अलग है। उनकी बात पुतिन को सुननी चाहिए। हम भारत सरकार से ऐसे कदम की उम्मीद लगाए हैं।

नई दिल्ली में तैनात यूक्रेन के राजदूत डॉ इगर पोलिखा (Dr Igor Polikha) ने पीएम मोदी से इस मामले में मदद माँगी है। यूक्रेन के राजदूत ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्लादिमीर पुतिन से दोस्ती का रिश्ता है। वह स्थिति को और बिगड़ने से बचाने में अहम रोल निभा सकते हैं। यूक्रेन के राजदूत इगर पोलिखा ने कहा, “हमारी पीएम मोदी से अपील है कि वह तुरंत रूसी राष्ट्रपति पुतिन और हमारे राष्ट्रपति जेनेंस्की के बीच बात करवाएँ।”

दरअसल, रूस-भारत के दशकों पुराने मजबूत संबंध और पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ घनिष्ठता देख यूक्रेन चाहता है कि वह इस युद्ध को रोकने के लिए आगे आएँ। भारत में यूक्रेन के राजदूत इगर पोलिखा (Dr Igor Polikha) ने कहा कि महाभारत को याद कीजिए। महाभारत के युद्ध से पहले भी शांति की कई कोशिशें हुई थीं। दुर्भाग्य से महाभारत में शांति की वह कोशिशें सफल नहीं हो सकी थीं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि इस मामले में ऐसी बातचीत सफल रहेगी।

उन्होंने कहा, “यूक्रेन भारत की तरह लोकतांत्रिक देश है। मैं भारत में राजदूत हूँ। हमारे लिए भारत स्पेशल है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है। भारत दुनिया में काफी प्रभावशाली देश है।” उन्होंने चाणक्य का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने आपका इतिहास पढ़ा है। यहाँ चाणक्य 2400 साल पहले हुए। जब यूरोप में कोई सभ्यता नहीं थी, यहाँ भारत में विद्वान हुए।”

यूक्रेन के राजदूत ने कहा, “हमारे पास पुष्ट जानकारी है कि कई यूक्रेनियन सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए हैं। बम और मिसाइल हमलों से सैन्य हवाई अड्डों, सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। कुछ हमले राजधानी के उपनगरीय इलाके में भी हुए हैं। कुछ हमले यूक्रेन की सीमा में काफी अंदर भी हुए हैं। हालात काफी बदल चुके हैं। आखिर तक हमारे राष्ट्रपति रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए कहते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आज सुबह 5 बजे से यह आक्रामक कार्रवाई शुरू हुई।”

क्या है भारत का स्टैंड

भले ही यूक्रेन के राजदूत की तरफ से पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई गई है, लेकिन भारत का इस पूरे मामले पर न्यूट्रल रुख है। भारत ने अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ से नहीं बोला है। साथ ही पीएम मोदी ने भी अब तक इस घटनाक्रम को लेकर कोई ट्वीट या सन्देश नहीं दिया है। साथ ही विदेश राज्य मंत्री की तरफ से भी साफ किया गया कि यूक्रेन मामले पर फिलहाल हम न्यूट्रल हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, शांति बनाए रखने के लिए कोशिशें जारी रहनी चाहिए।

गौरतलब है कि यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई जगह हुए धमाकों के बाद यूक्रेन में मार्शल ला लगा दिया गया है। इतना ही नहीं यूक्रेन ने दावा किया है कि उन्होंने 5 रूसी विमानों और एक रूसी हेलीकाप्टर को मार गिराया है। साथ ही यूक्रेन ने दावा किया है कि उनके हमले में 50 रूसी सैनिक भी मारे गए हैं। वहीं यूक्रेन के भी 40 सैनिक और 10 सिविलियन के मारे जाने की खबर भी सामने आई है।