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‘यूक्रेन के आसमान की रक्षा कर रहा है कीव का भूत, मार गिराए रूस के 6 फाइटर प्लेन’: ‘यूरोपीय इक्के’ का FACT CHECK

रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच जारी जंग में रूसी सैनिक एक-एक कर लगातार यूक्रेन के शहरों पर कब्जे करते जा रहे हैं। वो देश की राजधानी कीव में घुस चुके हैं। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का आज तीसरा दिन है। इस बीच सोशल मीडिया से लेकर कई न्यूज चैनलों में यूक्रेन के आसमान को रूस से बचाने की कोशिश करते एक रहस्यमय मिग-29 फाइटर प्लेन के देखे जाने का दावा किया जा रहा है। वहाँ के लोग इसे ‘कीव का भूत’ करार दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर नेटिजन्स यूक्रेनी पायलट की क्लिप को शेयर कर रहे हैं, जिसे कथित तौर पर ‘घोस्ट ऑफ़ कीव’ बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर डॉग फाइट में रूस के 6 फाइटर प्लेन को मार गिराया। कई ट्विटर यूजर इस कथित भूत को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहला ‘यूरोपीय इक्का’ करार दे रहे हैं।

एरियल वार टेक्नोलॉजी में ऐसे पायलट को इक्का कहा जाता है, जिसने युद्ध के दौरान पाँच या अधिक विमानों को मार गिराया है।

ट्विटर यूजर Visegrad 24 ने मिग-29 फाइटर जेट का एक वीडियो शेयर किया, जिसने कथित रूसी प्लेन का पीछा किया था। यूजर ने कहा कि कई सारे रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि यूक्रेन के एक पायलट ने शुक्रवार को छह रूसी विमानों को मार गिराया था, जिससे वह 21वीं सदी का पहला लड़ाकू बन गया है। पायलट को अब ‘घोस्ट ऑफ कीव’ कहा जा रहा है।

एक अन्य वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि ‘घोस्ट ऑफ़ कीव’ ने अब तक रूसी वायु सेना के दो Su-35, एक Su-27, एक MiG-29 और दो Su-25s को ढेर कर दिया है।

यूक्रेन की आम जनता ही नहीं, बल्कि वहाँ के पूर्व राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने भी एक इमेज शेयर कर इस पायलट को ‘घोस्ट ऑफ कीव’ करार दिया। कथित भूत की जय-जयकार करने के लिए कई सारे असत्यापित वीडियो पोस्ट किए जा रहे हैं।

पोरोशेंको ने ट्वीट किया, “ये कोई और नहीं, बल्कि कीव का भूत है। वह दुश्मनों को आतंक और यूक्रेनियन को गर्व महसूस करा रहा है। रूसी पायलटों पर उसने 6 जीत दर्ज की है! ऐसे शक्तिशाली रक्षकों के साथ, यूक्रेन निश्चित रूप से जीतेगा!”

हालाँकि अभी तक उस संदिग्ध पायलट की पहचान नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि पोरोशेंकों ने लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए यह बयान दिया है।

फ़ैक्ट-चेकर्स ‘घोस्ट ऑफ़ कीव’ के अस्तित्व को नकार रहे

इस बीच कुछ फ़ैक्ट-चेकर्स ने भी वायरल हो रहे वीडियो का विश्लेषण करने के बाद दावा किया है कि ‘घोस्ट ऑफ़ कीव’ का दावा करने वाले कुछ फुटेज पायरेटेड हैं।

इसी क्रम में एक यूक्रेनियन यूजर ने वीडियो शेय़र कर दावा किया कि ‘घोस्ट ऑफ कीव’ ने रूसी Su-35 फाइटर प्लेन को मार गिराया। यूजर ने दो फाइटर प्लेन के बीच डॉगफाइट वाला वीडियो शेयर किया।

लेकिन फैक्ट चेक वेबसाइट स्नोप्स ने इसको लेकर खुलासा किया कि उक्त वीडियो एक फ्री-टू-प्ले कॉम्बैट-सिमुलेशन वीडियो गेम है।

इसे सबसे पहले YouTube यूजर Comrade_Corb ने पोस्ट किया, जिससे ये स्पष्ट होता है कि ये असली नहीं है।

खुद यूट्यूबर कॉमरेड_कॉर्ब ने कहा है, “यह फुटेज डीसीएस से है, लेकिन फिर भी ‘द घोस्ट ऑफ कीव’ के सम्मान में बनाया गया है। अगर ये असली है तो भगवान उसे अमर करें और अगर यह गलत था तो मैं उसके जैसे और लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ।”

बहरहाल भले ही ‘कीव के भूत’ के अस्तित्व को लेकर कोई सबूत नहीं हों, लेकिन इससे यूक्रेनियों की रूस से लड़ने को लेकर उम्मीदें जरूर जिंदा हैं।

राजस्थान के कोटा में घर से 200 मीटर की दूरी पर BJP नेता की हत्या: 2 बेटियों का कौन रखेगा ख्याल, चिंता में दोस्त-परिवार

राजस्थान के कोटा जिले से भाजपा के कार्यकर्ता की उनके घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर बदमाशों ने बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी। मृतक विकी आर्य बीजेपी का कार्यकर्ता होने के साथ-साथ युवा मोर्चा से भी जुड़े हुए थे। वो काफी मिलनसार और दूसरों का ख्याल रखने वाले था, लेकिन उनकी हत्या के बाद अब उनकी दो बेटियों का ही ख्याल रखने वाला कोई नहीं रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह वारदात कैथोनीपूल इलाके के साबरमती कॉलनी में घटी। बताया जाता है कि मृतक विकी आर्य की आरोपितों से पुरानी रंजिश थी। इसके चलते शुक्रवार (25 फरवरी 2022) की रात को 6 बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। मृतक विकी आर्य भाजपा के शहर महामंत्री थे।

डीएसपी अमर सिंह का कहना है कि विकी आर्य घटना वाले दिन अपनी बाइक लेकर घर से निकले थे। वो जगत मंदिर के पीछे वाली गली से निकल ही रहे थे कि वहाँ पर पहले से ही कुछ हमलावर घात लगाए बैठे थे और उनके वहाँ पहुँचते ही वो सामने आ गए। हाथों में सरिया और लोहे के पाइप लिए हमलावरों को देख विकी ने डर कर अपनी गाड़ी वहीं खड़ी कर दी और पैदल ही अपने घर की ओर भागे।

भागने के दौरान वो अपने घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर ही रहे होंगे जब आरोपितों ने उन्हें पकड़ लिया और घेर कर ताबड़तोड़ हमले किए। उन्हें अधमरा करने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गए। इस बीच हमले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँचे उनके घरवाले उन्हें एमबीएस अस्पताल ले गए, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने ही मारा

पुलिस का कहना है कि विकी आर्य की हत्या उनके ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने की है। दरअसल, उनका आरोपितों के साथ पिछले साल दिसंबर 2021 में झगड़ा हुआ था। इसके बाद से ही आरोपित बदला लेने की ताक में थे। उस झगड़े में हालाँकि डायरेक्टली विकी का हाथ नहीं था।

एएसपी प्रवीण जैन के मुताबिक, मामले में दो आरोपित राज और निखिल को नामजद कर गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों ने हत्या की बात कबूल कर ली है। दो अन्य नामजद आरोपित बनवारी और अर्जुन की तलाश की जा रही है।

विक्की के दोस्तों का कहना है कि वो बहुत ही मिलनसार और सभी का ध्यान रखने वाले व्यक्ति थे। उनकी दो बेटियाँ हैं। उनकी मौत के बाद परिवार उजड़ गया।

नाबालिग बेटी का पहले किया जबरन धर्मांतरण, फिर 5 माह तक शोषण: ईसाई मिशनरी के खिलाफ एक माँ का आरोप, HC ने जारी किया नोटिस

नाबालिग हिंदू लड़की को ईसाई धर्म में जबरन परिवर्तित कराने के मामले में उसकी माँ द्वारा दायर की गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। माँ का आरोप है कि इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया कमीशन ऑन रिलीफ एंड प्रयास (Evangelical Fellowship of India Commission on Relief and Prayas ) नामक ईसाई मिशनरी के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी बच्ची को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया और उसके जरिए एक फर्जी का यौन शोषण मामला दर्ज करवाया।

माँ का कहना है कि उनकी बच्ची की जानकारी के बिना ही हिंदू से ईसाई बनाने का काम किया गया। उन्होंने कहा ईसाई बनाने के बाद एनजीओ ने 5 माह से ज्यादा उनकी बच्ची का  शोषण। ये सब तब हुआ जब बच्ची चाइल्ड केयर इंस्टिट्यूशन में थी जिसे ग्लोबल फैमिली चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है।  

अधिवक्ता दिब्यांशु पांडे के माध्यम से दायर एक याचिका में, पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया कि उनकी नाबालिग बेटी को उपरोक्त गैर सरकारी संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा ‘फँसा’ लिया गया था, जिन्होंने उससे झूठी एफआईआर करवाई थी। इसी एफआईआर के चलते उसे ‘पाँच’ दिन बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया गया, जो कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 के नियम 81 (1) का सीधा उल्लंघन है।

अब माँ की नाराजगी सीडब्ल्यूसी की ढिलाई पर है जिसके कारण चाइल्ड केयर इंस्टिट्यूशन में कई एनजीओ ने उसको प्रताड़ित किया और उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए प्रेरित किया। उनका आरोप है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता और उसकी बेटी को न्याय से वंचित किया गया है। साथ ही साथ भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किए गए मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में ईसाई मिशनरी लगातार धर्मांतरण का रैकेट चलाने के लिए कारण सुर्खियों में रहती हैं। वह जरूरतमंदों को खाना, पीना, आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधा का लाचल देकर ईसाई धर्म में आकर्षित करते हैं। पिछले साल मध्य प्रदेश के रायसेन में एक गर्ल्स हॉस्टल में चल रहे धर्मांतरण रैकेट का खुलासा हुआ था। इसके अलावा पिछले वर्ष ही ऑपइंडिया ने आपको बताया था कि कैसे ईसाई मिशनरियों ने कोविड का फायदा उठाकर लाख से ज्यादा लोगों को ईसाई बनाया।

‘थाला अजीत’ के सामने फीका पड़ा भंसाली-आलिया का ग्लैमर, एक दिन में ₹60 करोड़ कमा कर रचा इतिहास: ‘गंगूबाई’ पिछड़ी

बॉक्स ऑफिस पर जहाँ तमिल सुपरस्टार अजीत कुमार की फिल्म ‘वलिमै’ धूम मचा रही है, वहीं आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ काफी पीछे छूट गई है। मूवी ट्रेड एनालिस्ट मनोबाला विजयन द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, ‘थाला अजीत’ कहे जाने वाले सुपरस्टार की फिल्म ने पहले ही दिन दुनिया भर में 60 करोड़ रुपए का कारोबार किया। फिल्म के अकेले तमिलनाडु में 36.17 करोड़ रुपए कमाए। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसकी कमाई 1.80 करोड़ रुपए रही।

कर्नाटक में अजीत कुमार की ‘वलिमै’ ने 3.72 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। केरल में इसने 1.55 करोड़ रुपए कमाए। भारत के अन्य हिस्सों में उसने 1.04 करोड़ रुपए कमाए हैं। वहीं विदेशों में भी इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन शानदार रहा है। ओवरसीज में फिल्म ने 15.20 करोड़ रुपए कमाए हैं। इस तरह से फिल्म ने पहले दिन कुल 59.48 करोड़ रुपए का कारोबार किया। तमिलनाडु में दूसरे दिन भी फिल्म ने 24.62 करोड़ रुपए कमाए।

इस तरह से अकेले दो दिनों में सिर्फ तमिलनाडु में फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 60 करोड़ रुपए के पार पहुँच गया है। आँकड़ों को देखें तो नेट कलेक्शन के मामले में भी 30 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ‘वलिमै’ ने रजनीकांत की हाल में आई फिल्म ‘अन्नाथे’ और ‘थलापति’ कहे जाने वाले विजय की 2021 में आई फिल्म ‘मास्टर’ को पछाड़ दिया है। वहीं आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ को पहले दिन सिर्फ 9-10 करोड़ रुपए के नेट कलेक्शन से संतोष करना पड़ा।

संजय लीला भंसाली की फिल्म पहले से ही विवादों में है। गंगूबाई के डॉयलॉग को कॉपी करते हुए एक बच्ची का वीडियो वायरल होने के बाद कंगना रनौत ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को टैग करते हुए कहा था, “क्या इस बच्ची को किसी सेक्स वर्कर की नकल मुँह में बीड़ी और अश्लील डायलॉग्स के साथ करनी चाहिए? उसकी बॉडी लैंग्वेज देखिए, क्या इस उम्र में उसे इस तरह कामुक दिखाना ठीक है? सैकड़ों अन्य बच्चे हैं जिनका इसी तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।”

470+ भारतीय छात्रों को यूक्रेन से निकाला गया, 23 नंबरों के साथ नई एडवाइजरी: वतन-वापसी के प्लान में प्लेन और बस भी

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने यूक्रेन से 25 फरवरी (शुक्रवार) तक 470 छात्रों को वापस लाने में सफलता पाई है। इन सभी को युद्ध क्षेत्र से बचा कर रोमानिया सीमा से लाया गया है। भारत सरकार की लगातार यूक्रेन छोड़ देने की एडवाइजरी के बाद अभी तक लगभग 18000 छात्र यूक्रेन में मौजूद हैं। इन सभी को बसों से सीमाओं तक छोड़ा गया था। इस बात की जानकारी कीव में भारतीय दूतावास ने दी है।

दूतावास द्वारा शुक्रवार को किए गए ट्वीट में कहा गया, “आज दोपहर 470 से अधिक छात्र यूक्रेन छोड़ देंगे। हम भारतीयों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों की सीमाओं की तरफ ले जा रहे हैं। हमारे प्रयास जारी हैं।” मिली जानकारी के मुताबिक भारत का कीव दूतावास रोमानिया, पोलैंड और हंगरी के भारतीय दूतावास के सम्पर्क में है। विदेश विभाग के प्रवक्ता द्वारा शेयर किए गए वीडियो में रोमानिया पहुँचे भारतीयों के पहले जत्थे को दिखाया गया है।

एयर इंडिया रोमानिया और हंगरी के लिए जारी रखेगा उड़ान

जानकारी इस बात की भी आ रही है कि भारत का विदेश मंत्रालय भारतीयों को निकालने के लिए पोलैंड से भी बात कर रहा है। इस बीच एयर इंडिया की फ्लाइट दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से रोमानिया और हंगरी के लिए आज शनिवार को उड़ान भरेंगी। ये उड़ानें सीमाओं पर पहुँच रहे भारतीयों को लाने के लिए हैं।

इससे पहले एयर इंडिया इसी सप्ताह 242 छात्रों को यूक्रेन से भारत लाने में सफल रही थी। गुरुवार (24 फरवरी) को एयर इंडिया की एक फ्लाइट कीव से रूसी गोलाबारी के बीच वापस आ गई थी। भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस कंपनियों को पत्र लिख कर यूक्रेन की सीमाओं से लगे देशों के लिए उड़ानें जारी रखने का निर्देश दिया है।

यूक्रेन में भारतीय दूतावास की भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी

शनिवार (26 फरवरी 2022) को यूक्रेन में भारत के दूतावास ने वहाँ मौजूद भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया, “यूक्रेन में मौजूद सभी भारतीयों को बताना है कि बिना भारत सरकार के सलाह के सीमाओं की तरफ न जाएँ। जानकारी के लिए सरकार ने एमरजेंसी और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।”

यूक्रेन में भारत के दूतावास की नई एडवाइजरी

इस एडवाइजरी में आगे लिखा है, “सीमाओं पर हालत संवेदनशील हैं। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पड़ोसी देशों से लगातार सम्पर्क में हैं। हम बिना जानकारी दिए ही सीमाओं की चेकपोस्ट पर पहुँच रहे भारतीयों की सहायता करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पश्चिमी यूक्रेन में रहना सीमाओं की तरफ भागने से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। पूर्वी क्षेत्रों में रहने वालों से आग्रह है कि वो अगला आदेश आने तक अपने वर्तमान स्थान पर बने रहें। वो शांति बनाए रखें और अधिक से अधिक कोशिश आश्रयस्थलों में रहने की करें। अनावश्यक भाग-दौड़ से बचें।”

विदेश विभाग के प्रवक्ता ने यूक्रेन में फँसे भारतीयों की सहायता के लिए तमाम जरूरी नंबर और ई-मेल आदि की जानकारी शेयर किया है।

विदेश राजयमंत्री ने कहा, “छात्र और उनके परिजन न करें चिंता”

रिपब्लिक वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय विदेश राजयमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, “विदेश मंत्रालय यूक्रेन में मौजूद सभी 18000 भारतीयों को वापस लाने के लिए सभी कदम उठा रहा है। यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद है। इसलिए वैकल्पिक रास्तों पर विचार चल रहा है। भारत सरकार सभी भारतीयों की सुरक्षा को ले कर चिंतित है। मैंने दक्षिणी यूक्रेन में मौजूद एक मलयाली छात्र से बात की। उसने बताया कि वहाँ बिजली, पानी और खाना मिल रहा है। छात्रों और उनके अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमने भारतीयों को ईराक जैसे देशों से सुरक्षित निकाला है।”

यूक्रेन बचाने सड़क पर आए राष्ट्रपति जेलेंस्की, उंगली की जगह लिंग से 5 मिनट तक पियानो बजाने वाला Video भी वायरल

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार (फरवरी 25, 2022) को अपनी नई वीडियो जारी की। इस वीडियो में कथित तौर पर राष्ट्रपति अपने साथियों के साथ कीव की सड़कों पर हैं। वीडियो में वलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) कहते नजर आ रहे हैं कि वह अपनी स्वतंत्रता को बचाने के लिए यहाँ पर मौजूद हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा, “हम सब यहाँ हैं। हमारी सेना यहाँ है। नागरिक यहाँ हैं। हम सब अपनी स्वतंत्रता, अपना देश बचाने के लिए यहाँ है और ऐसे ही बने रहेंगे।” वीडियो में उनके साथ यूक्रेन के प्रधानमंत्री, चीफ ऑफ स्टाफ और अन्य वरिष्ठ साथी भी नजर आए। 

मालूम हो कि इससे पहले खबर आई थी रूस के आक्रमण के बाद जेलेंस्की देश को छोड़ कर भाग गए हैं और अब ये उनकी नई दावे वाली वीडियो है, लेकिन इस वीडियो को कब रिकॉर्ड किया गया, ये टाइम अभी मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं बताया गया है।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ यूक्रेन के हालात सुर्खियों में हैं, वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति भी अपनी नई पुरानी वीडियोज से चर्चा में हैं। हाल में उनकी एक वीडियो सामने आई है। इसमें वह हाथ ऊपर करके और पैंट नीचे करके पियानो बजाते और अजीब कॉमेडी करते नजर आ रहे हैं। उनकी इस वीडियो को देखकर लोगों का कहना है कि यही वजह है एक कॉमेडियन के हाथ में देश को नहीं सौंपा जाना चाहिए।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की का लिंग से पियानो (Volodymyr Zelensky piano with dick/penis) बजाने वाला वीडियो अब वायरल हो गया है। मीडिया में यह भी रिपोर्ट किया जा रहा है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की बस एक मुखौटा हैं, यूक्रेन की असल सत्ता आयहोर कोलोमोस्काई (Ihor Kolomoyskyi) के हाथ में है।

जेलेंस्की का कॉमेडी करियर और राजनीतिक सफर

जानकारी के मुताबिक, 1995 में कीव नेशनल इकोनॉमिक यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री के साथ ग्रेजुएशन किया। इसके बावजूद जेलेंस्की ने अपना करियर कॉमेडी के क्षेत्र में बनाया। पढ़ाई के दौरान ही जेलेंस्की थिएटर को लेकर काफी आकर्षित हुए। वे 1997 में पर्फामेंस ग्रुप, क्वार्टल 95, KVN के फाइनल में नजर आए। राजनैतिक करियर की बात करें तो जेलेंसकी एक राजनेता के तौर पर 2018 में सामने आए।

इसके बाद उनकी एक राजनैतिक व्यंग्य सीरिज के कारण वह लोगों के बीच इतने पसंद किए गए कि उन्हें राजनेता बनने के डेढ़ वर्षों में ही राष्ट्रपति का पद सौंप दिया गया। बिन मेनस्ट्रीम मीडिया के यूक्रेन राष्ट्रपति बनने वाले जेलेंसकी हमेशा सोशल मीडिया और यूट्यूब पर फेमस रहे थे। लेकिन उनके राष्ट्रपति बनने के बाद यूक्रेन की संविधान में संशोधन कर देश को नाटो और यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने की नीति का ऐलान किया गया था। इस बदलाव का नतीजा क्या हुआ ये आज विश्व के सामने है।

ये बात सच है कि 44 साल के हो चुके जेलेंस्की को राष्ट्रपति बनने से पहले अपने पूर्ववर्ती राष्ट्राध्यक्षों की तुलना में राजनीति का कोई अनुभव नहीं था। उनके कार्यकाल की शुरुआत से यूक्रेन और रूस के बीच तनाव लगातार बना रहा। इसके बावजूद वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने देश को नाटो की पूर्ण सदस्यता दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने 1990 के समझौते का उल्लंघन कर खुद का सैन्यीकरण करने का फैसला किया है। पुतिन यूक्रेन के इस कदम को रूस के लिए प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखते हैं।

‘सत्ता के लिए केजरीवाल कुछ भी कर सकते हैं, सरकार गिराने-लाने वाले सबसे बड़े मुजरिम हैं अरविंद: मुनव्वर राणा

विवादित शायर मुनव्वर राणा के निशाने पर अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल आ गए हैं। उन्होंने AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सत्ता के लिए कुछ भी कर गुजरने वाला व्यक्ति बताया। मुनव्वर राणा ने कुमार विश्वास के आरोपों में सच्चाई होने की भी संभावना जताई है।

हिंदुस्तान द्वारा 25 फरवरी को प्रकाशित इंटरव्यू में मुनव्वर राणा ने कहा, “कॉन्ग्रेस की सरकार को गिरा कर भाजपा को सत्ता में लाने में सबसे बड़ा हाथ अरविन्द केजरीवाल का ही है। अन्ना तमाशा इनकी ही मिली-जुली सरकार थी। बाद में केजरीवाल ने भाजपा को भी धोखा दे दिया। कुमार विश्वास का आरोप झूठ भी नहीं हो सकता। कुमार विश्वास और केजरीवाल काफी गहरे दोस्त रहे हैं। सत्ता के लिए केजरीवाल कुछ भी कर सकते हैं।”

मुनव्वर राणा ने आगे कहा, “कुमार विश्वास आज कल मुझ से नाराज चल रहे हैं। मेरे बहुत ज्यादा ताल्लुकात फ़िलहाल उनसे नहीं हैं। कुमार विश्वास काफी सोच समझ कर बोलते हैं। देश तोड़ने की बातें तो आज कल मुहावरा जैसी बन चुकी हैं। आरोपों को जैसे बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता था, वैसा है नहीं।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कुमार विश्वास ने अरविन्द केजरीवाल पर खालिस्तान समर्थक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने केजरीवाल को खालिस्तान के खिलाफ बोलने की भी चुनौती दी थी। इन आरोपों के जवाब में केजरीवाल ने खुद को ‘स्वीट आतंकी‘ कहा था।

कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल पर जो आरोप लगाया था, वो नया नहीं है। उन्होंने आज से 3-4 साल पहले भी Transparency: Pardarshita नाम की डाक्यूमेंट्री सीरीज में अपना यह बयान जारी किया था। अरविंद केजरीवाल को लेकर आम आदमी पार्टी के कई संस्थापक सदस्यों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें कपिल मिश्रा जैसे नामी-गिरामी लोग से लेकर आम कार्यकर्ता तक रहे हैं। जिन-जिन लोगों ने केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उनके वीडियो आप यहाँ देख सकते हैं।

अमेरिका ने कहा – यूक्रेन से रूसी फौजें तत्काल निकले, रूस ने Veto कर सभी 11 देशों को किया चुप

रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन में उसके सैन्य अभियान की निंदा की गई। इस प्रस्ताव में रूसी फौजों को यूक्रेन से तत्काल निकलने की माँग भी शामिल थी। यह प्रस्ताव अमेरिका द्वारा लाया गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 11 सदस्यों ने वोट दिया। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात हालाँकि अनुपस्थित रहे। यह प्रस्ताव शुक्रवार (25 फरवरी 2022) को लाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के साथ अल्बानिया ने भी इस प्रस्ताव को साझे तौर पर पारित करवाने का प्रयास किया। प्रस्ताव में रूस द्वारा युद्ध विराम के साथ डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) पर रूस द्वारा अपने फैसले को रद्द करना शामिल था। रूस ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, मतलब अस्वीकार कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र के 5 स्थाई सदस्य देशों में रूस भी है। स्थाई देश में से किसी को भी किसी प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार प्राप्त है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हालाँकि रूस को इस से दुनिया भर में अलग-थलग पड़ जाने की चेतावनी दी।

अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष में अल्बानिया, इंग्लैंड, फ्रांस, आयरलैंड, नॉर्वे, गाबोन, मैक्सिको, ब्राजील, घाना और केन्या ने वोट दिया। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। तीनों देशों ने मामले को बातचीत से सुलझाने की बात कही। अमेरिका अब इस मामले को जनरल एसेम्बली में उठा सकता है। यहाँ लाए गए प्रस्ताव को वीटो नहीं किया जा सकता। जनरल एसेम्बली में पारित प्रस्ताव को लेकर सदस्य देशों पर हालाँकि बाध्यता नहीं होती है।

रूस ने सोमवार (21 फरवरी) को यूक्रेन के दो इलाकों को स्वतंत्र बताया था। रूस ने इन दोनों डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) को दो स्वतंत्र राष्ट्र बताया था। इन देशों ने रूस के साथ सैन्य समझौता किया। साथ ही रूसी सेना की सहायता माँगी। यूक्रेन पिछले 7 वर्षों में इसका शांतिपूर्ण स्थाई समाधान निकालने में विफल रहा है।

गुरुवार (24 फरवरी) को रूस के राष्ट्रपति ने अपनी सेना को दोनों नए राष्ट्रों के नागरिकों की रक्षा करने का आदेश दिया। इस आदेश में यूक्रेन के सैनिकों से सरेंडर करवाना शामिल था। इससे पहले रूस ने यूक्रेन से तटस्थ रहने की कसम खाने और विदेशी हथियारों को अपनी जमीन पर न प्रयोग करने की सलाह दी थी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रूस के हमले को अप्रत्याशित और बेवजह बताया है। 2 दिन पहले जेलेंस्की ने अपने देश के नागरिकों से युद्ध के लिए हथियार उठाने को कहा था।

‘हिजाब’ का असर पहुँचा DU के सेंट स्टीफन तक: SC वकील जे साई दीपक को ‘इस्लामोफोबिक’ बताकर जेंडर सेल ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट के वकील जे साई दीपक के दक्षिणपंथी विचारों से आहत सेंट स्टीफन कॉलेज के जेंडर स्टडीज सेल ने उन्हें कॉलेज में बुलाए जाने का विरोध किया है। सेल ने उन्हें लेकर कहा कि वकील साई दीपक के विचार, उनके बयान हानिकारक, समस्याग्रस्त, पक्षपाती और अल्पसंख्यकों को खारिज करने वाले रहे हैं। अपने बयान में जेंडर सेल ने सुप्रीम कोर्ट के वकील को इस्लामोफोबिक बताते हुए उनके प्रति नाराजगी जाहिर की है।

इस बयान के स्क्रीनशॉट जे साई दीपक ने खुद ट्विटर पर शेयर किए हैं। उन्होंने इन्हें साझा करते हुए दर्शाया कि सेंट स्टीफन कॉलेज की जेंडर स्टडीज सेल में, “स्वतंत्र अभिव्यक्ति, विचारों में विविधता, सहिष्णुता, समावेश” के लिए कितनी जगह है। 

बयान में लिखा गया है कि जे साई दीपक के इस्लामोफोबिक होना, उनके हिजाब मामले पर दिए गए विचारों से स्पष्ट होता है और साथ ही आर्टिकल 370 हटाए जाने पर समर्थन देना भी इस बात का सबूत है कि जे साई दीपक इस्लामोफोबिक हैं। इसके अलावा उन्होंने जो सीएए-एनआरसी के विरोध में अपनी आवाज उठाई थी, उसकी वजह से भी कॉलेज की जेंडर सेल ने उनका विरोध किया है। बयान में लिखा गया है कि राष्ट्र, सभ्यता, धर्म, समुदाय और अधिकारों पर उनके (साई दीपक) दमनकारी, पक्षपाती और उच्च जाति के विचार बहुसंख्यक, लिंगवादी, स्त्री विरोधी और जातिवादी हैं।

जेंडर सेल के बयान के अनुसार, साई दीपक जैसे लोगों को आमंत्रण दिया जाना और इन्हें अप्रूवल मिलना कुछ घटनाओं के कैंसिल होने जुुड़ा है जैसे फराह बशीर जो कश्मीर पर बोलने वाली थीं उस वार्ता का निरस्त होना या फिर किसान प्रदर्शन पर भी पैनल चर्चा होने से पहले रद्द होना। सेल ने अपने कॉलेज पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि कॉलेज का ये गैर राजनैतिक होने वाला कदम, जो कि उसकी विशेषता रही है, ऐसे कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने के लिए जारी है, जिनके अल्पसंख्यकों के विरुद्ध विचार रहे हैं। इसमें कहा गया, “ये जरूरी है कि हम दोबारा से उन लोगों के बारे में सोचें जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे लोगों की उपस्थिति और इन्हें समर्थन दिए जाने की वजह से आहत होंगे।”

इस आमंत्रण के पीछे की वजह बताते हुए सेल ने इसे कॉलेज की उस व्यापक संस्कृति को जिम्मेदार दिखाया जो बिन कोई सवाल किए विवादस्पद व्यक्ति, बुद्धिजीवी और राजनेता को बोलने का प्लेटफॉर्म दे देते हैं वो भी सिर्फ उनके काम के आधार पर, उनकी हेटस्पीच को नजरअंदाज करते हुए।

बता दें कि सेंट स्टीफन कॉलेज के जेंडर सेल द्वारा शेयर किए गए नोट के अनुसार जे साई दीपक को कॉलेज में उनकी किताब “इंडिया दैट इज भारत:कोलोनिएलिटी, सिविलाइजेशन , कंस्टिट्यूशन” के लिए आमंत्रित किया गया था। बताया गया कि इस किताब में वह राष्ट्र राज्य के पुननिर्माण के रूप में उपनिवेशवाद को स्थापित करना चाहते हैं और फिर वह हिंदू धार्मिक सभ्यता की बातें शुरू कर देते हैं।

कॉलेज के जेंडर सेल के अनुसार सांस्कृतिक एकरूपता की खोज में एक कल्पित इतिहास का महिमामंडल कई लोगों द्वारा आजमाया व परखा तरीका है जिन्होंने अल्पसंख्यकों को सताकर सांस्कृतिक आधिपत्य स्थापित करने की कोशिश की। बयान में उन्हें लेकर कहा गया कि वह अल्पसंख्यक महिलाओं की स्वतंत्रता और इच्छाओं के विरुद्ध राय रखते हैं। उनका रवैया सबरीमाला मंदिर फैसले के समय भी साफ हुआ था जब उन्होंने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने का विरोध किया था।

साझा किए गए बयान में जे साई दीपक को लेकर कहा गया कि उन्होंने हृदय एनजीओ की ओर पक्ष रखे थे। ये संस्था पुरुषों के अधिकार के लिए लड़ती और भारतीय परिवारों में पितृसत्ता को बचाते हुए उन्हें पीड़ित दिखाती है जिन्होंने लिंगभेद और उत्पीड़न से फायदा उठाया। इसके अलावा जे साई दीपक ने कोर्ट में मैरिटल रेप के आपराधिक घोषित किए जाने का भी विरोध किया था। 

जिसको बता रहे थे ‘हिमालय का योगी’, वो निकला आनंद सुब्रमण्यम: CBI ने किया गिरफ्तार, इसी के इशारे पर चल रहा था NSE

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने गुरुवार (24 फरवरी 2022) की देर रात को बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के पूर्व ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) आनंद सुब्रमण्यम उर्फ ‘हिमालयन योगी’ को गिरफ्तार कर लिया है। NSE में कुछ साल पहले हुए बड़े घोटाले मामले में सीबीआई ने ये पहली गिरफ्तारी की है। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि सुब्रमण्यम ही ‘हिमालयन योगी’ है, जिसने NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण को ईमेल के जरिए संपर्क किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयन योगी बनने का ढोंग कर आनंद सुब्रमण्यम ही चित्रा रामकृष्ण द्वारा लिए जाने वाले फैसलों को कंट्रोल करता था। सुब्रमण्यम को चेन्नई स्थित उसके घर से जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किय़ा। जाँच एजेंसी ने दावा किया है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि आनंद सुब्रमण्यम ने [email protected] नाम की मेल आईडी बनाकर चित्रा से संपर्क किया था। चित्रा ने 2013 से 2016 के बीच अपनी मेल आईडी [email protected] से [email protected] पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लेकर कई सारी गोपनीय और संवेदनशील जानकारियाँ साझा की थीं। गौरतलब है कि चित्रा रामकृष्ण इसी अवधि में NSE की MD एवं CEO थीं।

हिमालयन योगी को गिरफ्तार करने से पहले पिछले सप्ताह जाँच एजेंसी ने उससे करीब चार दिन तक पूछताछ की थी, लेकिन वह सवालों के गोल-मोल जवाब देता था। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले चित्रा ने बताया था कि योगी एक सिद्ध संत हैं और वह हिमालय में कहीं रहते हैं। उनका कोई भौतिक शरीर नहीं है और वे कहीं भी आ-जा सकते हैं। इतना ही नहीं, ईमेल की जाँच में यह बात भी सामने आई कि यह हिमालयन योगी चित्रा के बालों की खूब तारीफ करता था और विदेश में जाकर समुद्र की सैर करता था।

कौन हैं आनंद सुब्रह्मण्यम

साल 2013 में NSE ज्वॉइन करने से पहले सुब्रह्मण्यम Balmer and Lawrie कंपनी में मिडिल मैनेजमेंट के तौर पर काम करते थे। उनका सालाना वेतन 15 लाख रुपए से भी कम था। इसके साथ ही उन्हें शेयर मार्केट से संबंधित कोई अनुभव भी नहीं था। मार्च 2013 में उन्हें तत्कालीन MD चित्रा रामकृष्ण ने NSE में चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर के(CSO) तौर ज्वॉइनिंग दी। ज्वॉइनिंग के समय उन्हें 1.68 करोड़ रुपए का सालाना पैकेज दिया गया। शुरू से ही उनका एक्सचेंज के हर काम में हस्तक्षेप होता था।

अप्रैल 2014 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 2.01 करोड़ रुपए, फिर अप्रैल 2015 में यह बढ़ाकर 3.33 करोड़ रुपए कर दिया गया। इसी साल उन्हें एक्सचेंज के MD और CEO का सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त कर दिया गया। फिर अप्रैल 2016 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 4.21 करोड़ रुपए सालना कर दिया गया।

गौरतलब है कि शेयर बाजार (Stock Market) नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शुक्रवार (11 फरवरी) को खुलासा किया था कि NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण ‘हिमालय में रहने वाले एक योगी’ के कहने पर काम करती थीं। इस योगी के कहने पर उन्होंने एक व्यक्ति को अपना सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त किया और उसे मनमाने ढंग से वेतन वृद्धि दी।