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101 साल का कॉमरेड नहीं रहा: केरल को ‘इस्लामी राज्य’ बनाने की साजिशों का किया था खुलासा, 26/11 के बलिदानी मेजर के परिवार का CM रहते किया था अपमान

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन का 101 की उम्र में तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में सोमवार (21 जुलाई 2025) को निधन हो गया। उम्र संबंधित बीमारियों के कारण वह पिछले काफी समय से बीमार थे। 26 जून 2025 को हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अच्युतानंदन 2019 से राजनीति में सक्रिय नहीं थे। वह पिछले कई सालों से अपने बेटे के घर पर रहते थे। अच्युतानंदन 2006 से 2011 तक CPI-M की सरकार के दौरान केरल के मुख्यमंत्री रहे थे।

केरल को ‘इस्लामी राज्य’ बनने की साजिश की खोली थी पोल

वामपंथी नेता अच्युतानंदन ने केरल को 2040 तक ‘इस्लामी राज्य’ बनाने की साजिशों का खुलासा भी किया था। इसका वीडियो साल 2023 में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी एक्स/ट्विटर पर शेयर किया था।

27 सेकेंड का यह वीडियो 24 जुलाई 2010 को दिल्ली में अच्युतानंदन के प्रेस वार्ता का था। वीडियो में वे केरल को अगले 20 सालों में इस्लामी राज्य बनाने की साजिशों का जिक्र करते सुनाई पड़ रहे हैं।

वीडियो में अच्युतानंदन बताते हैं इस्लामी कट्टरपंथियों की योजना अगले 20 साल में केरल को मुस्लिम राज्य बनाने की है। इसके लिए वे युवाओं का माइंडवाश कर रहे हैं। उन्हें पैसे दे रहे हैं। मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए युवाओं को हिंदू लड़कियों से शादी करने के लिए उकसाया जा रहा है। कम्युनिस्ट नेता ने बताया था कि इस्लामी कट्टरपंथियों की तरकीबें काम भी कर रही हैं और राज्य में उनकी आबादी भी बढ़ रही है।

इस वीडियो को ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में भी दर्शाया गया था। लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस हिस्से को फिल्म से हटा दिया था। वैसे यह दृश्य फिल्म के टीजर में भी शामिल था।

बलिदानी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का किया था अपमान

मुंबई में हुए 26/11 हमले में केरल के रहने वाले NSG कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने बलिदान हो गए थे। उस समय वीएस अच्युतानंदन ही केरल के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने बलिदानी मेजर और उनका परिवार का अपमान भी किया था।

अच्युतानंदन ने कहा था, “क्या ये कहीं का नियम है कि कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री को साथ में दौरा करना चाहिए? अगर वो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का घर नहीं होता तो उसकी तरफ एक कुत्ता भी नहीं देखता। उनके परिवार के साथ हमारा जुड़ाव खास है। एक सैनिक के पिता होने के नाते के उन्नीकृष्णन को ये नहीं समझना चाहिए क्या?” केरल सरकार की तरफ से बलिदानी मेजर के अंतिम संस्कार में भी कोई नेता नहीं गया था।

आगरा धर्मांतरण गैंग के कई गुर्गे हिंदू से बने हैं मुस्लिम, जवान लड़कियों को ही करते थे टारगेट: जिनको इस्लाम कबूल करवाया, उनको दिया ‘रिवर्ट’ कोड नेम

आगरा मामले में गिरफ्तार धर्मांतरण गिरोह ने धर्मांतरण का शिकार बन चुके लोगों के लिए कोडवर्ड बनाए था। जिन लोगों का धर्मांतरण यह गैंग कर लेता था, उन्हें ‘रिवर्ट नाम दे दिया जाता था। गिरोह के लिए इससे धर्मांतरण किए जा चुकी युवतियों की पहचान करना आसान होता था। उनके सोशल मीडिया पर भी ‘रिवर्ट’ नाम से अकाउंट बना दिए जाते।

इस धर्मांतरण गैंग मामले में पकड़े गए लोगों से पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि यह गिरोह केवल ‘बालिग’ युवतियों को निशाना बनाता था। इससे उन्हें अपने साथ ले जाने में परेशानी नहीं होती थी। कोर्ट में भी वह खुद को बालिग बताकर परिवार से दूर जा सकती थी।

इसका फायदा यह भी है बाद में यही युवतियाँ अपने संपर्क में आने वाली बाकी लड़कियों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करती थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धर्मांतरण के बाद युवतियों का घर वापस जाना मुश्किल हो जाता था। धर्मांतरण कराने से पहले अखबार में विज्ञापन तक दिया जाता था।

यह गैंग इसके बाद कोर्ट में अर्जी लगाकर दस्तावेज तैयार करवा लेता था और यहाँ तक कि निकाह तक करवाता था।

गैंग वाले भी पहले थे हिन्दू

इस धर्मांतरण गैंग में शामिल 10 लोगों में से 6 पहले हिंदू थे। इन्होंने धर्म परिवर्तन कर अपने नाम भी बदल लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसबी कृष्णा ने नाम बदलकर आयशा, रुपेंद्र बघेल ने अबु रहमान, मनोज ने मुस्तफा, शेखर रॉय ने अली हसन और पियुष सिंह पँवार ने मोहम्मद अली नाम रख लिया।

इसके बाद यह दूसरों फँसाने लगे। असल में पूरे गैंग का काम करने का तरीका यही था कि पहले यह पढ़ी लिखी महिलाओं को फँसाता और फिर उनसे भी धर्मांतरण का काम करवाता। आगरा में जिस बड़ी बहन को फँसाया गया, वह अभी तक इस धर्मांतरण गैंग के पक्ष में बोल रही है।

पुलिस ने बड़ी बहन से की पूछताछ

कोलकाता की मुस्लिम बस्ती से रेस्क्यू की गई आगरा की दोनों सगी बहनों से पुलिस ने पूछताछ की। उन्होंने घर जाने के लिए शर्त रख दी। कहा कि जब तक पकड़े गए लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा वे घर नहीं जाएँगी। बहनों ने कहा कि पकड़े गए लोगों का कोई कसूर नहीं है। बहनों का कहना है कि यह लोग धर्म के लिए काम करते हैं और अगर वे जेल चले गए तो उन्हें जन्नत भी नसीब नहीं होगी।

कोलकाता में बनाया धर्मांतरण करने वालों के लिए ‘सेफ जोन’

जाँच में यह तक सामने आया है कि आगरा की दो सगी बहनों को कोलकाता तक पहुँचाया गया था। बताया गया कि दोनों बहनें घर से ₹25 हजार और कुछ गहने लेकर भागी थीं। दोनों बस से दिल्ली, मुजफ्फरनगर, समस्तीपुर होते हुए कोलकाता पहुँचीं। कोलकाता में ओसामा नाम के युवक ने बहनों को होटल दिलाया।

फिर कोलकाता की मुस्लिम बस्ती ‘तपसिया’ में कमरा दिलाने में भी मदद की। रिपोर्ट्स में सामने आया कि कमरा ₹6 हजार महीने किराए पर लिया था। ₹30 हजार रुपए एग्रीमेंट में दिए थे। अली हसन ने दोनों बहनों का धर्मांतरण प्रक्रिया शुरू करवाई।

गिरोह ने बहनों को नौकरी की तलाश में भी मदद की। धर्मांतरण में आने वाले लोगों के लिए इसे ‘सेफ जोन’ कहा जाता था। दोनों बहनों को यहाँ दीन की तालीम भी दी गई। धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों का कोलकाता में वोटर आईडी और आधार कार्ड भी बनाए जाते थे। इन्हें वोट डालने का भी अधिकार मिल जाता था।

कश्मीर की साइमा ने बहनों का किया ब्रेनवॉश

दोनों सगी बहनों में 33 साल की बड़ी बहन ने पुलिस को बताया कि वह Msc जूलॉजी से MPhil कर चुकी है। साल 2020 में नेट की तैयारी के लिए कोचिंग में दाखिला लिया था। तभी कश्मीर स्थित उधमपुर निवासी साइमा उर्फ खुशबू से दोस्ती हुई।

साइमा ने ही बड़ी बहन को इस्लाम अपनाने के लिए भड़काना शुरू किया। साइमा ने बुर्का पहनने से लड़कियों की हिफाजत होने की बात कही। इसके अलावा कहा कि इस्लाम अपनाने से जन्नत का रास्ता आसान होता है

12वीं फेल अबु रहमान ने यूट्यूब पर चलाई धर्मांतरण की मुहिम

पुलिस की गिरफ्त में आए 10 आरोपितों में से अबू रहमान इस गैंग का सरगना है। रहमान के यूट्यूब चैनल पर धर्मांतरण कर चुकी युवतियों के वीडियो मिले हैं। इन वीडियो में इस्लाम का प्रचार किया जा रहा है। यूट्यूब चैनल पर 1.69 सबस्क्राइबर्स और 1500 से अधिक वीडियो हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, अबु रहमान सराय ख्वाजा का रहने वाला है। वह जूतों के स्टीकर बनाने का काम करता था। इसके साथ ही यूट्यूब चैनल पर धर्मांतरण की मुहिम भी चला रहा था। रहमान 12वीं फेल है, लेकिन यूट्यूब वीडियो पर वह अंग्रेजी बोलता दिखता है।

जानें पूरा मामला

हाल ही में आगरा में धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। इस गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें कनाडा, UAE और अमेरिका से फंडिंग मिलती थी। यह मामला आगरा की दो लापता बहनों की जाँच से सामने आया।

जाँच में 7 लोगों के खिलाफ सबूत मिले। उनके खिलाफ वारंट जारी हुए। फिर पुलिस ने 11 टीमें छह राज्यों में भेजीं। आगरा पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। आखिर में कोलकाता की मुस्लिम बस्ती से बहनों को रेस्क्यू किया गया। यहाँ से धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

₹1890000000 इस मॉनसून सत्र में बर्बाद करेगा विपक्ष? मोदी सरकार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा को तैयार, फिर भी जारी है हुड़दंग: जानिए कैसे हंगामा बनी परिपाटी

सोमवार (21 जुलाई, 2025 को संसद का मॉनसून सत्र चालू हो गया है। यह सत्र 21 जुलाई 2025 से 21 अगस्त, 2025 तक चलेगा। 32 दिनों वाले इस सत्र में 21 बार संसद की बैठक होगी। विपक्ष के हंगामे के चलते संसद का पहला दिन ही कामकाज के मामले में ठप हो गया। पहले प्रश्न काल के दौरान व्यवधान हुआ तो 12 बजे तक लोकसभा की कार्यवाही रोकी गई, फिर हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक रोक दी गई।

संसद में हंगामा और कार्यवाही रुकना कोई विचित्र बात नहीं है। दुनिया भर की सांसदों में यह होता है। लेकिन लगातार पूरे-पूरे दिन संसद ना चलने देना और पहले बैठकों में सहमति बनाने के बाद भी डेडलॉक पैदा करना भारत के विपक्ष की आदत बन गई है। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग पहले ही बता देते हैं कि संसद का सत्र चालू होने से पहले या तो कोई रिपोर्ट आएगी या कोई ऐसा मुद्दा उठेगा जिस पर हंगामा होगा, इसके बाद संसद सत्र बर्बाद होगा।

कार्यवाही रुकना यानी करोड़ों की बर्बादी

मॉनसून सत्र का पहले ही दिन हंगामा भरा होना कोई शुभ संकेत नहीं है। यह सत्र 32 दिन चलने वाला है और इसमें 21 दिन संसद की बैठक होगी। नियमानुसार, हर दिन संसद के दोनों सदन 6 घंटे काम करते हैं। यह समय घट-बढ़ भी सकता है।

लेकिन 21 दिन भी संसद चले और 6 घंटे भी काम करे तो इस पर भारी-भरकम खर्च होता है। यह खर्च जनता के पैसे का होता है, जिसे हम टैक्स कहते हैं। लोकसभा के पूर्व महासचिव PDT आचार्य ने कई वर्षों पहले बताया था कि संसद का एक मिनट चलाने पर भी ₹2.5 लाख का खर्च होता है।

इसमें सांसदों की तनख्वाह, बिजली-पानी के बिल समेत बाकी खर्च शामिल होते हैं। यह खर्च अभी तक काफी बढ़ गया होगा। लेकिन ₹2.5 लाख खर्च आज भी प्रति मिनट माना जाए, तो इस मॉनसून सत्र पर सैकड़ों करोड़ खर्च होने वाले हैं।

सीधी गणित के हिसाब से इस संसद सत्र पर ₹2.5 लाख/मिनट के हिसाब से ₹189 करोड़ खर्च होने हैं। 21 दिन में संसद 126 घंटे चलने वाली है। यानी इसकी कार्रवाई 7560 मिनट चलेगी। इन 7560 मिनटों को ₹2.5 लाख से गुना करे तो यह ₹189 करोड़ की धनराशि खर्च होगी।

संसद के खर्च इसके अलावा और भी होते हैं, जैसे सांसदों को संसद सत्र के दौरान आने का हर दिन का ₹2500 भत्ता भी मिलता है। ऐसे में यह खर्च बढ़ता ही है, देश के लोकतंत्र के मंदिर पर खर्च हो, इससे किसी को ऐतराज नहीं है, लेकिन जिस तरह से इस सत्र की शुरुआत हुई है उससे अच्छे आसार नहीं लगते।

सरकार इस सत्र के पहले हुई सर्वदलीय बैठक में कह चुकी है कि वह ऑपरेशन सिंदूर समेत सभी मुद्दों पर बात करने को तैयार है। विपक्ष की माँग थी कि इस दौरान बिहार में चुनाव आयोग की पुनरीक्षण प्रक्रिया पर बात हो और एअर इंडिया हादसे को लेकर भी बात हो।

सरकार ने इसके लिए भी हामी भरी थी। हालाँकि, पहला दिन ही हंगामे की भेंट चढ़ा दिया गया। ऐसे में यह आशंका और गहरी हो जाती है कि इस बार भी जनता ठगी सी रह जाएगी और लगभग ₹200 करोड़ को सिर्फ तख्तियों और हंगामों में सिमटता देखेगी।

पहले के सत्र भी हो चुके बर्बाद

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब संसद का सत्र शुरू होने से पहले ही उसे बर्बाद करने की ठान ली गई हो। विपक्ष ने इस बार मॉनसून सत्र मुद्दा बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और ऑपरेशन सिंदूर तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान बनाए हैं लेकिन इससे पहले भी हर बार संसद सत्र को बर्बाद करने की पटकथा लिख ली जाती है।

विपक्ष ने पेगासस स्नूपिंग के आधारहीन आरोपों के लेकर राफेल और अडानी-हिंडनबर्ग तक के मुद्दे उठाए हैं। यह मुद्दे संसद क सत्र बर्बाद करने में बड़ा कारण रहे हैं। बजट सत्र 2023 को बर्बाद करने के लिए कॉन्ग्रेस और विपक्ष ने अडानी के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा प्रकाशित हिट जॉब वाली रिपोर्ट मुद्दा उठाया था और पूरा सत्र बर्बाद कर दिया था।

इसी सत्र के पहले BBC की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बनाई प्रोपेगेंडा डाक्यूमेंट्री को लेकर भी बवाल विपक्ष ने किया था। 2023 के ही शीत सत्र के पहले एप्पल फोन की नोटिफिकेशन पर बवाल विपक्ष ने मचाया था। हालाँकि, यह मुद्दा बड़ा बनता लेकिन एप्पल ने सफाई दे दी।

इससे भी 2021 में मॉनसून सत्र के पहले पेगासस की स्टोरी को लेकर बवाल मचाया गया था और दावा किया गया था कि सरकार स्नूपिंग में लिप्त है। यह कहानी बाद में झूठी निकली लेकिन संसद का सत्र बर्बाद हो गया। इसमें भी जनता का अरबों रुपया बर्बाद हुआ।

2021 में राहुल गाँधी ने राफेल विमान खरीद में घोटाले का कथित मामला उठाया। यह विदेशी मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स आने के बाद उठाया गया था। इसको लेकर 2021 में संसद के सत्र हंगामे भरे रहे। राफेल मामले में हवा-हवाई दावे संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक नहीं टिक पाए। लेकिन संसद का समय बर्बाद होता गया।

इस दौरान जिस समय का उपयोग देश में नए कानून की चर्चा, पुराने कानूनों में सुधार करने और जनता के प्रश्न उठाने के लिए होना चाहिए था, उसका उपयोग विपक्ष ने तख्तियाँ उछालने और हंगामा मचाने में किया। विपक्ष ने इस दौरान कई मौकों पर डेडलॉक की स्थिति पैदा की और संसदीय काम जहाँ का तहाँ लटक गया।

क्यों चिंताजनक है यह ट्रेंड?

संसद को चलाना पक्ष और विपक्ष दोनों की बराबर की जिम्मेदारी होती है। संसद का कम दिनों चलना और कम काम करना चिंताजनक इसलिए भी है कि इससे व्यवस्था के दूसरे हिस्सों को प्रभाव बढ़ाने का मौक़ा मिलता है। एक रिपोर्ट बताती है कि जहाँ पहली लोकसभा (1952-57) साल में 135 दिन बैठी तो वहीं 17वीं लोकसभा (2019-24) मात्र 55 दिन चली।

इससे भी चिंताजनक यह ट्रेंड है कि इन 17वीं लोकसभा का लगभग 50% समय हंगामे और बवाल की भेंट चढ़ गया। इससे जहाँ एक ओर जनता का पैसा बर्बाद होता है तो वहीं दूसरी तरफ महत्वपूर्ण विधेयकों पर तक चर्चा नहीं हो पाती।

ऐसे में विपक्ष को सिर्फ हंगामे की जगह अपने तर्क और सबूत के आधार पर संसद में सरकार को घेरने की नीति बनानी चाहिए ना कि कार्यवाही पर ही ग्रहण लगा देना चाहिए। इससे जनता का विश्वास बढ़ेगा ही, देश का लोकतंत्र मजबूत होगा और सरकारी पैसे की बर्बादी रुकेगी।

पहलगाम में हिंदुओं का नरसंहार करने वालों को NYT ने नहीं कहा ‘आतंकवादी’, अमेरिकी संसद की कमिटी ने लगाई लताड़: कहा- कत्लेआम करने वालों को छूट नहीं

अमेरिकी निचली सदन की विदेश मामलों की एक समिति ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टिंग की आलोचना की है। कमेटी ने कहा, ” यह साफ तौर पर एक आतंकवादी हमला था। चाहे भारत हो या इजराइल, जब आतंकवाद की बात आती है, तो न्यूयॉर्क टाइम्स वास्तविकता से दूर हो जाता है।”

निचले सदन के प्रतिनिधि ब्रायन मास्ट की अध्यक्षता वाली समिति ने शनिवार (19 जुलाई 2025) को कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने उस पर बैन लगाया है। रेजिस्टेंस फ्रंट एक विदेशी आतंकवादी संगठन है और उस पर रोक जरूरी है।”

समिति ने कहा, “जब आप नागरिकों का कत्लेआम करते हैं, तो आपको छूट नहीं मिलती। सबके साथ न्याय होना चाहिए। पहलगाम में हुआ हमला एक आतंकवादी हमला था।”

समिति ने एक्स पर 22 अप्रैल को किए गए अपने पोस्ट का भी हवाला दिया, जब समिति ने पहलगाम हमले पर न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट की आलोचना की थी।

इस पोस्ट में हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने शीर्षक में ‘उग्रवादी’ शब्द को हटाकर उसके स्थान पर ‘आतंकवादी’ शब्द रख दिया गया और उसे बोल्ड कर दिया।

प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति ने टीआरएफ को ग्लोबल टेरर संगठन घोषित करने का स्वागत भी किया है। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा टीआरएफ यानी द रेजिस्टेंस फ्रंट पर हाल ही में अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने टीआरएफ के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि ट्रंप सरकार ने आतंकवाद से लड़ने और पहलगाम हमले में न्याय दिलाने के लिए ये निर्णय लिया है।

अमेरिका ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर TRF को आतंकी संगठन घोषित किया

भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने TRF को आतंकी संगठन घोषित करके अच्छा किया। उन्होंने X पर लिखा कि यह भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रिश्ते का सबूत है। जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी विदेश विभाग की तारीफ भी की।

क्या है टीआरएफ, कैसे काम करता है?

लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा और प्रॉक्सी संगठन टीआरएफ ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस दर्दनाक हमले में 26 नागरिक मारे गए थे।

टीआरएफ सीधे-सीधे बड़ा संगठन नहीं है। यह छोटे-छोटे आतंकी समूहों की तरह काम करता है, जिन्हें टेरर मॉड्यूल कहते हैं। इनमें फाल्कन स्क्वाड जैसे नाम शामिल हैं।

ये समूह किसी खास काम के लिए तैयार होते हैं और काम खत्म होने के बाद या तो खत्म हो जाते हैं या अपना चेहरा बदल लेते हैं। टीआरएफ के आतंकी बहुत चालाक होते हैं। वे आम लोगों की तरह रहते हैं।

हमला करने से पहले वे अपनी जगह की रेकी करते हैं, यानी वहाँ की पूरी जानकारी जुटाते हैं। फिर वे हथियार इकट्ठा करते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं। हमले के बाद वे अपने हथियार छिपा देते हैं और घाटियों या जंगलों में छिप जाते हैं।

SP MLA इकबाल महमूद ने काँवड़ यात्रा को ‘महापर्व’ बताने की आड़ में की बदजुबानी, काँवड़ियों को बताया ‘गुंडा-मवाली’: कहा- 2027 में सपा सरकार में किए जाएँगे ‘अलग इंतजाम’

उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के पावन अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के संभल से विधायक इकबाल महमूद ने एक बार फिर अपनी जहरीली जुबान से सनातन धर्म और शिवभक्तों को अपमानित करने का घिनौना काम किया है। काँवड़ यात्रा को आस्था का महापर्व बताने की आड़ में इकबाल महमूद ने शिवभक्तों को ‘गुंडा’ और ‘मवाली’ करार दे दिया।

इतना ही नहीं इकबाल महमूद ने 2027 में सपा की सरकार बनने की धमकी देते हुए कहा कि तब काँवड़ियों के लिए ‘अलग इंतजाम’ किए जाएँगे। यह बयान न सिर्फ सपा की सांप्रदायिक मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यह पार्टी गुंडागर्दी और नफरत की राजनीति की असली पोषक है।

इकबाल महमूद ने एक चैनल से बातचीत में काँवड़ यात्रा को निशाना बनाते हुए कहा, “इसमें शिवभक्तों से ज्यादा गुंडे और मवाली हैं, जो सड़कों पर बदतमीजी और तोड़फोड़ करते हैं।” उन्होंने मुजफ्फरनगर की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि काँवड़ियों ने स्कूल वैन पर हमला किया।

यह बयान न सिर्फ शिवभक्तों की आस्था पर चोट है, बल्कि लाखों काँवड़ियों की श्रद्धा को बदनाम करने की साजिश भी है। इकबाल ने धमकी भरे लहजे में कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनेगी और तब काँवड़ियों को ‘सबक’ सिखाया जाएगा। यह साफ है कि सपा की नजर में श्रद्धालु नहीं, बल्कि सिर्फ वोटबैंक की राजनीति मायने रखती है।

सपा की यह करतूत कोई नई बात नहीं है। पार्टी के नेता पहले भी हिंदू धर्म, मंदिरों और आस्था के प्रतीकों पर विवादित बयान देकर माहौल बिगाड़ते रहे हैं। चाहे वह महबूब अली का मुस्लिम आबादी बढ़ने का दंभ हो या इंद्रजीत सरोज का मंदिरों और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सपा बार-बार साबित करती है कि वह सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति की असली ठेकेदार है। इकबाल महमूद का ताजा बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो काँवड़ यात्रा जैसे पवित्र आयोजन को बदनाम करने की कोशिश है।

इस बीच, सीएम योगी आदित्यनाथ ने काँवड़ यात्रा को बदनाम करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है, ताकि अराजक तत्वों को बेनकाब किया जाए। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गुंडागर्दी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि सपा जैसे दल जो खुद को ‘गुंडों की पार्टी’ साबित कर चुके हैं, क्या ऐसी कार्रवाई से सबक लेंगे?

इकबाल महमूद का यह बयान न सिर्फ काँवड़ियों, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है। सपा की हरकत दिखाती है कि वह आस्था और संस्कृति का सम्मान करने के बजाय, समाज को बाँटने और नफरत फैलाने में विश्वास रखती है। साल 2027 की धमकी देकर सपा ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर, नक्सलवाद, मेड-इन-इंडिया और अर्थव्यवस्था… ‘मानसून सत्र’ से पहले PM मोदी ने मीडिया से की बात, कहा- ये ‘विजय उत्सव का सत्र’ है

मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी ने देश की उपलब्धि को गिनवाया है। मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी ने देश की उपलब्धि को गिनवाया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत के कदम रखने और ऑपरेशन सिंदूर में देश के पराक्रम की बात कही।

उन्होंने कहा कि इस दशक में शांति और प्रगति देखी गई, लाल गलियारा अब हरित विकास क्षेत्र में बदल रहा है। 2014 से पहले मुद्रास्फीति दर दहाई अंक में हुआ करती थी, अब यह लगभग दो प्रतिशत है। मानसून सत्र में पीएम ने विपक्ष से सकारात्मक बहस का आह्वान किया है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि भारत की सैन्य शक्ति का, भारत के सैन्य के सामर्थ्य का रूप दुनिया देख रहा है। भारत की सेना ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, वह 100 फीसदी हासिल किया।

आतंकियों के घर में घुसकर 22 मिनट में उसे ध्वस्त कर दिया। बिहार के कार्यक्रम के दौरान जो घोषणा की थी, बहुत ही कम समय में सेना ने वो कर के दिखा दिया। मेक इन इंडिया की ताकत पूरी दुनिया ने देखी है।

पीएम ने कहा कि पहलगाम में हुए क्रूर नरसंहार ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और आतंकवाद तथा उसके केंद्र की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। दलगत भावना से ऊपर उठकर, पूरे भारत के प्रतिनिधि पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करने के लिए एकजुट हुए

उन्होंने कहा, “हमारी सैन्य शक्ति में बहुत ही दमखम है ये दिखा दिया। इसमें मेड इन इंडिया सैन्य शक्ति का नया औजार पर दुनिया अचंभित है। मेड इन इंडिया रक्षा उपकरण बन रहे हैं उससे भारत की सैन्य शक्ति को बल मिलेगा। नौजवानों के रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।”

नक्सलवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आज नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिकुड़ रहा है। माओवाद और नक्सलवाद को पूरी तरह उखाड़ने का काम तेज गति से चल रहा है। मैं गर्व से कह सकता हूँ कि देश में सैकड़ों जिले नक्सल की चपेट से निकल कर मुक्ति का साँस ले रहे हैं। “

पीएम ने भारत की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले हम दुनिया में 10वें नंबर की अर्थव्यवस्था थे, लेकिन अब हम दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं।

पीएम ने कहा, “देश ने एक स्वर का सामर्थ्य क्या होता है ये देखा है, इसलिए सदन में भी ये स्वर निकले। दल हित में मन मिले न मिले लेकिन देशहित में मन जरूर मिले। इसलिए देश की प्रगति को आगे ले जाने वाले बिल को पास करें।”

पीएम ने कहा, “बारिश हर परिवार की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। आने वाले दिनों में देश को इससे काफी फायदा मिलेगा। मानसून सत्र देश के लिए गौरवपूर्ण सत्र है। मानसून नवीनता और नवसृजन का प्रतीक है। अब तक की खबरों के मुताबिक देश में मौसम बहुत ही अच्छे ढंग से आगे बढ़ रहा है। बारिश किसानों की अर्थव्यवस्था,देश की अर्थव्यवस्था और हर परिवार की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। “

देश के साथ खड़े हुए शशि थरूर तो केरल कॉन्ग्रेस ने बंद किया दरवाजा: पूर्व मंत्री बोले- वे अब हमारे नहीं, पार्टी कार्यक्रमों में तिरुवनंतपुरम MP को नहीं करेंगे आमंत्रित

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने रविवार को तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। मुरलीधरन ने साफ कहा कि जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें तिरुवनंतपुरम में कॉन्ग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा।

के मुरलीधरन ने शशि थरूर को चेतावनी देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य होने के बावजूद अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। मुरलीधरन ने यह भी कहा कि थरूर के खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब थरूर ने कोच्चि में एक कार्यक्रम में कहा कि देश और उसकी सीमाओं की सुरक्षा पहले आती है और पार्टियाँ सिर्फ देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों में सशस्त्र बलों और केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया था, जिसकी वजह से उनकी अपनी पार्टी में आलोचना हो रही है।

शशि थरूर ने कहा, “मैं अपने रुख पर कायम हूँ, क्योंकि यह देशहित में है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूसरी पार्टियों से सहयोग की बात करने पर उनकी अपनी पार्टी को यह विश्वासघात लगता है, जो एक बड़ी समस्या है।

मुरलीधरन ने पहले भी थरूर की आलोचना की थी। हाल ही में एक सर्वेक्षण में थरूर को यूडीएफ की ओर से केरल के मुख्यमंत्री पद का पसंदीदा चेहरा बताया गया था, जिस पर मुरलीधरन ने तंज कसते हुए कहा था कि थरूर को पहले अपनी पार्टी की पहचान तय करनी चाहिए। इसके अलावा थरूर के एक लेख में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गाँधी की भूमिका पर टिप्पणी को लेकर भी मुरलीधरन ने उनसे स्पष्ट राजनीतिक रास्ता चुनने को कहा था।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर के बयानों ने पार्टी को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर किया, जिससे उनके और कॉन्ग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव बढ़ गया। यह घटनाक्रम कॉन्ग्रेस के भीतर विचारधारा और नेतृत्व को लेकर गहरी खींचतान को दर्शाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि थरूर का रुख पार्टी लाइन से हटकर है, जिससे आंतरिक एकता पर सवाल उठ रहे हैं।

अलीगढ़ से 17 युवतियों समेत 97 महिलाएँ लापता, उमर की गिरफ्तारी से खुला राज – STF के रडार पर 50 लोग: ‘मिशन अस्मिता’ से धर्मांतरण गिरोहों की कमर तोड़ेगी योगी सरकार

अलीगढ़ में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके झाँसे में आईं करीब 97 महिलाओं का पता नहीं चल पा रहा है। ये महिलाएँ लापता बताई जा रही हैं। खुफिया एजेंसियाँ और यूपी पुलिस की विशेष टीमें जाँच में जुटी हुई हैं।

इसका खुलासा पुलिस को उमर गौतम नाम के शख्स की गिरफ्तारी से हुई है। यहाँ का सरगना उमर गौतम ही था जिसने पूरा नेटवर्क फैला रखा था।

दरअसल मार्च 2025 में 33 साल और 18 साल की दो सगी बहनें लापता हो गईं थी। पुलिस इन्हें ढूँढ रही थी। सोशल मीडिया पर अचानक एक बहन एक-47 के साथ नजर आई। इसके बाद पुलिस के कान खड़े हो गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों बहनों को अवैध तरीके से धर्मांतरण कराकर कोलकाता के एक मुस्लिम बहुल इलाके में रखा गया था। यहाँ से दोनों को विदेश भेजने की तैयारी थी।

उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि 2018 में 33 महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया था जिसमें 3 अलीगढ़ की थीं। लेकिन ये नेटवर्क धीरे-धीरे महिलाओं और युवतियों को अपने झाँसे में लेने लगा। यही वजह है कि जनवरी से अब तक 97 महिलाएँ लापता हैं जिनमें से 17 टीन एजर्स हैं।

सोशल मीडिया, विदेशी फंडिंग और आतंकियों से कनेक्शन

पुलिस जाँच में ये बात सामने आई है कि गैंग सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप, डार्क वेब और दूसरे तरीके से महिलाओं से संपर्क करता था। उन्हें अपने प्रेम जाल में फँसाता था और फिर धर्मांतरण के लिए दबाव डालता था। इस नेटवर्क का संचालन इतना गुपचुप तरीके से होता था कि पुलिस को इतने सालों में भनक तक नहीं लगी। गैंग के तार पीएफआई, सिमी, लश्कर ए तैयबा से जुड़ने के संकेत भी मिले हैं।

इसकी फंडिंग अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूएई जैसे देशों से हो रही थी। यूपी पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के मुताबिक इस गैंग ने सैकड़ों लोगों को धर्मांतरण करवाया। गैंग में ओडिशा की एसबी कृष्णा उर्फ आयशा, कोलकाता का शेखर राय उर्फ अली हसन, जयपुर का मोहम्मद अली समेत कई लोग शामिल हैं। इनलोगों को 6 अलग अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है।

यूपी में धर्मांतरण पर कसा शिकंजा

सीएम योगी ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ ‘मिशन अस्मिता’ चलाने का निर्देश दिया है। इसके तहत आगरा पुलिस ने 6 टीमें गठित की हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी खासा नजर रखा जा रहा है।

ये पता चला है कि अवैध धर्मांतरण करा कर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की मुहिम चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर ये लोग मूर्ति पूजा और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। ये लोग उन मंदिरों का जिक्र भी करते हैं जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ा था। ये लोग हिन्दू धर्म के पूजा पद्धति और रीति-रिवाजों का विरोध करते हैं और आपत्तिजनक बयान देतें हैं।

50 लोग पुलिस के रडार पर

इस मामले में पुलिस के रडार पर करीब 50 लोग हैं। इनके सोशल मीडिया, मोबाइल और दूसरे अकाउंट की पुलिस जाँच कर रही है। इसमें भारत के लोगों के मन में जहर घोलने की पुष्टि हुई है।

पीएम मोदी के वीडियो को अपने तरीके से इस्तेमाल किया

पुलिस को गोवा की आयशा को कनाडा के सैय्यद दाऊद द्वारा फंडिंग के सबूत मिले। पुलिस को कई वीडियो मिले हैं जिसमें देश विरोधी बातें कही गई हैं। यहाँ तक की पीएम मोदी के मंदिर जाने के वीडियो के साथ तुरंत ताजमहल दिखता है और पीछे से वॉयस आती है कि ये तारीख है इस्लाम से रिश्ते जोड़ने होंगे। बहुत बन चुके सोमनाथ अब तोड़ने होंगे।

बांग्लादेशी हैं या रोहिंग्या… बिहार में 11000 निकले ऐसे वोटरों के नाम, जिनका अस्तित्व ही नहीं: पड़ोसी बोले- इनके बारे में तो हमें भी नहीं कुछ पता, EC की SIR ड्राइव से खुलासा

बिहार में चुनाव आयोग (ECI) की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राइव ने चौंका देने वाला खुलासा किया है। वोटर लिस्ट की सफाई के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में 11,000 मतदाता पूरी तरह ‘नॉट ट्रेसेबल’ हैं। यानी न तो उनके पते पर कोई घर मिला, न ही पड़ोसियों को उनकी कोई खबर।

टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से ECI के एक अधिकारी ने दावा किया कि ये 11,000 ‘नॉट ट्रेसेबल’ लोग बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए हो सकते हैं, जो पड़ोसी राज्यों में रहते हुए बिहार में फर्जी वोटर कार्ड बनवाने में कामयाब रहे। ये सनसनीखेज खुलासा बिहार की सियासत में भूचाल ला सकता है, क्योंकि ये घुसपैठिए कथित तौर पर फर्जी वोटिंग के जरिए चुनावी खेल बिगाड़ने की साजिश रच रहे थे।

ECI के मुताबिक, ये गड़बड़ियाँ पुरानी समीक्षा में लापरवाही या भ्रष्टाचार की वजह से हुईं, जिससे घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में जगह मिली। कुछ मामलों में तो पते पर कोई घर ही नहीं था और कई बार पड़ोसियों ने भी ऐसे लोगों के बारे में अनभिज्ञता जताई। SIR ड्राइव का मकसद बिहार की वोटर लिस्ट को पूरी तरह साफ करना है, ताकि सिर्फ योग्य भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकें। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने तीन बार घर-घर जाकर जाँच की है।

वोटर लिस्ट की सफाई के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में 7.90 करोड़ मतदाताओं में से 95.92% की जाँच पूरी हो चुकी है, लेकिन 41.64 लाख मतदाता अपने पते पर नहीं मिले। इनमें 14.29 लाख संभावित रूप से मृत, 19.74 लाख स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके और 7.50 लाख लोग एक से ज्यादा जगहों पर रजिस्टर्ड पाए गए। लेकिन सबसे सनसनीखेज बात 11,000 मतदाताओं के नॉन ट्रेसेबल होने की है।

वहीं, बिहार की SIR ड्राइव में अब तक 7.15 करोड़ फॉर्म जमा हो चुके हैं, जिनमें से 6.96 करोड़ डिजिटाइज हो गए हैं। 25 जुलाई तक फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख है, और 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी। इसके बाद 1 से 30 अगस्त तक दावे-आपत्तियाँ दर्ज होंगी और 30 सितंबर को फाइनल लिस्ट आएगी।

ECI ने साफ किया कि अगर कोई नाम गलती से शामिल हुआ या छूट गया, तो उसे 30 अगस्त तक ठीक किया जा सकता है। इसके लिए 1 लाख BLOs, 4 लाख वॉलंटियर्स, और 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट्स दिन-रात काम कर रहे हैं। ECI का दावा है कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं, इसके लिए हर मुमकिन कोशिश हो रही है।

लेकिन इस अभियान ने सियासी तूफान भी खड़ा कर दिया है। विपक्षी INDIA ब्लॉक ने इसे ‘वोटबंदी’ और NDA के फायदे की साजिश करार दिया है। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है और उसने ECI को आधार, राशन कार्ड और वोटर ID जैसे दस्तावेजों की गहन जाँच करने को कहा है।

इस बीच, SIR ड्राइव में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। BLOs ने नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के विदेशी नागरिकों को भारतीय दस्तावेजों – जैसे आधार, राशन कार्ड और डोमिसाइल सर्टिफिकेट के साथ पकड़ा। इन विदेशी नागरिकों की मौजूदगी ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिर कैसे इन्हें भारतीय दस्तावेज मिले।

ECI ने कहा कि 1 से 30 अगस्त के बीच गहन जांच होगी, और जो भी अवैध पाया जाएगा, उसे फाइनल वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ये अभियान और भी अहम हो गया है, क्योंकि फर्जी वोटिंग का खतरा अब सबके सामने है।

भारत-मालदीव दोस्ती फिर पटरी पर, राष्ट्रपति मुइज्जू के बुलावे पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में मुख्य मेहमान बनेंगे पीएम मोदी: पड़ोसी मुल्क को चीनी शिकंजे से निकालने की हो रही तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जुलाई 2025 को मालदीव जा रहे हैं। ये दौरा भारत और मालदीव के बीच दोस्ती को फिर से मज़बूत करने की एक बड़ी कोशिश है। ये उनकी मालदीव की तीसरी यात्रा होगी, लेकिन सबसे खास बात ये है कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद ये किसी बड़े विदेशी नेता की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।

मोदी पहले 23-24 जुलाई 2025 को ब्रिटेन जाएँगे। वहाँ ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर से उनकी मुलाकात होगी। ये उनकी ब्रिटेन की चौथी यात्रा होगी। वहाँ वो स्टार्मर के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे तमाम मुद्दों पर बात करेंगे। वो किंग चार्ल्स तृतीय से भी मिलेंगे। लेकिन सबकी निगाहें उनकी मालदीव यात्रा पर टिकी हैं।

पीएम मोदी को मालदीव की 60वीं स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘मुख्य मेहमान’ बनाया गया है। ये दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसका कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व भी है। भारत और मालदीव के रिश्तों में पिछले एक साल से काफी उतार-चढ़ाव रहे हैं। नवंबर 2023 में जब मोहम्मद मुइज्जू राष्ट्रपति बने, तो उनके ‘इंडिया आउट’ कैंपेन ने दोनों देशों के बीच तनाव पैदा कर दिया। इस कैंपेन में भारतीय सैनिकों को मालदीव से हटाने की बात कही गई थी।

साल 2024 की शुरुआत में हालात और बिगड़ गए। मुइज्जू सरकार के दो मंत्रियों ने पीएम मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर भद्दी टिप्पणियाँ कीं। ये टिप्पणियाँ तब आईं, जब मोदी ने लक्षद्वीप के टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पोस्ट डाली थी। कई लोगों ने इसे मालदीव के टूरिज्म के खिलाफ देखा, क्योंकि लक्षद्वीप और मालदीव की खूबसूरती एक जैसी है।

जवाब में भारत में ‘बॉयकॉट मालदीव’ कैंपेन शुरू हो गया। भारतीय पर्यटक, जो मालदीव की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं, वहाँ जाना कम कर दिए। 2024 के पहले चार महीनों में भारतीय पर्यटकों की संख्या 42% कम हो गई।

लेकिन दोनों देशों ने तनाव को कम करने की कोशिश की। भारत ने मालदीव में तैनात अपने सैन्य कर्मियों को मई 2023 तक हटाकर उनकी जगह सिविल इंजीनियर्स भेज दिए। भारत ने 2025 के बजट में मालदीव को 600 करोड़ रुपये की मदद दी, जो पिछले साल के 470 करोड़ से कहीं ज्यादा है। साथ ही भारत ने 400 मिलियन डॉलर और 30 बिलियन रुपये का करेंसी स्वैप समझौता भी किया, ताकि मालदीव की आर्थिक मुश्किलें कम हों।

मुइज्जू ने भी रिश्ते सुधारने की कोशिश की। सितंबर 2024 में उन दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिन्होंने भारत और मोदी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। भले ही इसे ‘निजी कारण’ बताया गया, लेकिन सबको पता था कि ये कदम रिश्ते सुधारने के लिए था। 9 जून 2024 को मुइज्जू मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत आए और इस दौरे को ‘सफल’ बताया। उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मज़बूत करने की इच्छा जताई और जल्द ही भारत आने की बात कही। अक्टूबर 2024 में मुइज्जू ने भारत का दौरा किया और दोनों देशों ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ पर सहमति जताई।

मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद मालदीव का झुकाव चीन की तरफ दिखा। जनवरी 2024 में उनकी पहली विदेश यात्रा चीन की थी, जहाँ उन्होंने 20 बड़े समझौते किए, जिनमें सैन्य और आर्थिक सहयोग शामिल थे। मालदीव 2014 से चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है। उसने चीन से करीब 1.4 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है, जो उसके कुल सरकारी कर्ज का 20% है।

चीन ने मालदीव में 200 मिलियन डॉलर का ‘चाइना-मालदीव फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसी बड़ी परियोजनाएँ बनाई हैं। मालदीव का लोकेशन इंडियन ओशियन में बहुत अहम है, क्योंकि वहाँ से चीन का 80% तेल आयात गुजरता है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन मालदीव को अपने प्रभाव में रखना चाहता है, ताकि उसकी तेल सप्लाई सुरक्षित रहे।

लेकिन अब मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों में चीनी कर्ज से नाराज़गी बढ़ रही है। मालदीव की अर्थव्यवस्था और कर्ज संकट के बीच वो अब भारत के साथ फिर से दोस्ती बढ़ाना चाहता है। मालदीव ने सितंबर 2024 में भारत की 757 मिलियन डॉलर की मदद से डिफॉल्ट होने से बचा। भारत ने मालदीव में हनीमधू द्वीप पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, माले में हाउसिंग प्रोजेक्ट और ब्रिज जैसी परियोजनाओं में भी मदद की।

भारत और मालदीव का रिश्ता 1965 से है, जब मालदीव ब्रिटिश शासन से आज़ाद हुआ। भारत ने हमेशा मुसीबत में मालदीव की मदद की, चाहे वो 1988 का ऑपरेशन कैक्टस हो, 2004 की सुनामी हो या कोविड-19 महामारी। भारत ने मालदीव में सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसे कई प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया। 18 मई 2025 को दोनों देशों ने 100 करोड़ रुपये की ग्रांट के तहत 13 समझौते किए। मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने कहा कि भारत की मदद हमेशा मालदीव की ज़रूरतों के हिसाब से होती है।

मालदीव भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी और ‘विज़न महासागर’ का अहम हिस्सा है। ये पॉलिसी हिंद महासागर में शांति और कनेक्टिविटी बढ़ाने की बात करती है। मोदी का ये दौरा सिर्फ दो देशों की दोस्ती को फिर से मज़बूत करने का नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की ताकत दिखाने का भी मौका है। हाल के सालों में चीन ने मालदीव में अपनी पकड़ मज़बूत की थी, लेकिन अब मालदीव भारत की तरफ लौट रहा है।

मोदी का स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। ये दिखाता है कि भारत की नरम कूटनीति और पड़ोसी देशों से दोस्ती की रणनीति काम कर रही है। मालदीव की अर्थव्यवस्था टूरिज्म पर टिकी है, और चीनी कर्ज के बोझ तले वो अब भारत के साथ फिर से नज़दीकी चाहता है। मालदीव के लिए ये आर्थिक और कूटनीतिक सुरक्षा का रास्ता है। पहले मालदीव भारत से दूर जा रहा था, लेकिन अब मंत्रियों के इस्तीफे, भारत की बढ़ी हुई आर्थिक मदद और बड़े नेताओं की मुलाकातों से रिश्ते फिर से पटरी पर आ रहे हैं।

पीएम मोदी की मालदीव यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि एक बड़ा स्टेटमेंट है। ये भारत-मालदीव की ऐतिहासिक दोस्ती, सांस्कृतिक नज़दीकी, आर्थिक निर्भरता और रणनीतिक महत्व को दिखाता है। मालदीव अब चीन के कर्ज और टूरिज्म की चुनौतियों के बीच एक संतुलित रास्ता चुन रहा है, जो भारत की तरफ जाता है।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में ऋति सागर ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।