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‘रेपिस्ट मोनोजित मिश्रा को बचा रहा TMC का MLA, FIR से भी हुई छेड़छाड़’: BJP की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कोलकाता लॉ कॉलेज रेप केस में JP नड्डा को सौंपी रिपोर्ट, कहा- केन्द्रीय एजेंसी करे जाँच

कोलकाता गैंगरेप केस में बीजेपी की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंप दी है। टीम ने इस मामले में केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराने की सिफारिश की है।

बीजेपी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है और पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

बीजेपी के आरोप

बीजेपी की फैक्ट-फाइंडिंग टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्य पाल सिंह, मीनाक्षी लेखी, राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा और लोकसभा सांसद बिप्लव कुमार देब शामिल थे। टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

FIR में छेड़छाड़- बीजेपी का आरोप है कि पीड़ित छात्रा की हाथ से लिखी शिकायत में आरोपितों के नाम मिटा दिए गए और उनकी जगह कुछ अक्षर (J, G, S, M) लिख दिए गए।

TMC पर आरोप- BJP ने कलकत्ता लॉ कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल और TMC विधायक अशोक देब पर बलात्कार के आरोपितों को बचाने का आरोप लगाया है।

पुलिस की भूमिका- बीजेपी का कहना है कि पुलिस पीड़ित के परिवार को छिपा रही है और चौथे आरोपित सुरक्षा गार्ड से किसी को मिलने नहीं दे रही।

कानून व्यवस्था- बीजेपी नेताओं ने पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और पुलिस की निष्क्रियता पर चिंता जताई है। पुलिस से जब पूछा कि आरोपितों के नाम क्यों मिटाए तो उन्होंने टालमटोल किया।

जेपी नड्डा ने कहा कि यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल में अराजकता और महिला सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।

लोकसभा सांसद बिप्लव कुमार देब ने कहा है कि ममता बनर्जी इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लें या फिर इस्तीफा दें।

कोर्ट का रुख

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में तीन जनहित याचिकाओं पर पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब माँगा है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि कॉलेज की गवर्निंग बॉडी को इस मामले में शामिल क्यों नहीं किया गया।

मामला क्या था?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कसबा इलाके के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून 2025 को एक लॉ की छात्रा से कथित तौर पर गैंगरेप हुआ था।

30 जून 2025 को कोलकाता पुलिस ने बताया कि इस मामले के तीन मुख्य आरोपितों को 12 घंटे से भी कम समय में गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने 4 जुलाई 2025 को आरोपितों को कॉलेज ले जाकर क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट भी किया।

शाहीन बाग़, राकेश टिकैत, विनेश-बजरंग… क्या ‘डीप स्टेट’ का नया मोहरा है प्रशांत किशोर? नॉर्वे की राजदूत से मुलाक़ात के बाद उठे सवाल: क्या बिहार में ‘क्रान्ति’ की साजिश?

बिहार में प्रशांत किशोर और नॉर्वे के राजनयिक की गुप्त बैठक के बाद एक बार फिर डीप स्टेट टुलकिट की चर्चा होने लगी है। कई देशों को अस्थिर कर चुका ये टुलकिट भारत में कई बार अपना हाथ आजमा चुका है। किसान आंदोलन, पहलवान आंदोलन, अन्ना आंदोलन और उसके बाद केजरीवाल की मदद कर चुका है। सीसीए के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन और सबसे बड़ा शाहीन बाग आंदोलन ऐसे टुलकिट के जरिए मिले विदेशी फंडिंग के दम पर फले-फूले।

बिहार में नार्वे की दिलचस्पी क्यों?

भारत में नॉर्वे की राजदूत एलिन स्टेनर ने राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर से पटना में उनके आवास पर बैठक की है। देखने में यह एक सामान्य कूटनीतिक मुलाकात लग सकती है। लेकिन नॉर्वे के इतिहास और बिहार के लिए प्रशांत किशोर की महत्वाकांक्षा को देखते हुए कई राजनीतिक जानकार इस मुलाकात की जाँच कराने की माँग कर रहे हैं।

अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीतियाँ बनाने वाले प्रशांत किशोर अब जन सुराज पार्टी बना कर बिहार के चुनावी राजनीति में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ये मुलाकात कहीं बिहार से संबंधित तो नहीं है? क्या किसी इंटरनेशनल संगठन की बिहार में विशेष रुचि हैं? ये भारत की अस्थिर करने की साजिश तो नहीं? या बिहार में निवेश को लेकर प्रशांत किशोर गंभीर हो रहे हैं, हालाँकि उन्होंने पहले ही कह दिया है कि बिहार को किसी बड़े कारखाने की जरूरत ही नहीं है। इस दौरान उन्होंने नार्वे के विकास की बात भी कही थी।

तो क्या निवेश और पर्यावरण के नाम पर अब प्रशांत किशोर को नार्वे अपने एजेंडे के तहत सेट कर रहा है? प्रशांत किशोर को बिहार का अभिजात्य वर्ग भी पसंद कर रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के सहारे अनौपचारिक किंगमेकर बनने की कोशिश नार्वे कर सकता है, ताकि भारत के संघीय ढाँचे को नुकसान पहुँचाया जा सके। कई लोग तो प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी की विदेशी फंडिंग की जाँच की माँग भी कर रहे हैं।

रामलीला मैदान से शाहीन बाग तक हुई विदेशी फंडिंग

ये पहली बार नहीं है जब विदेशी फंडिंग को लेकर चर्चा हो रही है। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुआ अन्ना आंदोलन और उससे निकलने वाली आम आदमी पार्टी और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के विदेशी फंडिंग की जाँच सरकार कर रही है। ED ने आम आदमी पार्टी को 2014 से 2022 के बीच 7.08 करोड़ रुपए का विदेशी फंड मिलने की जानकारी गृहमंत्रालय को दी थी। इसमें अमेरिका,कनाडा, सऊदी अरब, यूएई से लेकर कई यूरोपीय देश शामिल हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि अब केजरीवाल का ग्राफ नीचे जाते ही प्रशांत किशोर विदेशियों के लिए नए विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं।

इससे पहले सीएए के खिलाफ देशभर में हुई हिंसा और शाहीन बाग आंदोलन में विदेशी ताकतों का हाथ होने की बात सामने आई। ईडी ने साफ तौर पर पीएफआई की फंडिंग की बात की थी। इतना ही नहीं पीएफआई से कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के संपर्क की बात भी ईडी ने कही थी।

किसान आंदोलन में विदेशी फंडिंग की जाँच

यही हाल किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के विरोध का भी रहा। केन्द्र सरकार ने अमेरिकन अरबपति जॉज सोरोस के नेतृत्व वाला ऑपन सोसाइटी फाउंडेशन पर आंदोलन को आर्थिक मदद करने का आरोप लगाया था। आंदोलन का मकसद भारत की आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना और देश को अस्थिर करना था। किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले राकेश टिकैत पर खुद उनके सहयोगियों ने भी विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया था।

भारत के आंतरिक मामलों में दिलचस्पी

नॉर्वे ने भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर खुद को ‘तटस्थ’ बताते हुए मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था। लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि कश्मीर मामले में ‘बाहरी हस्तक्षेप’ हमें कभी कबूल नहीं रहा। अब बिहार के बहाने भारत में फिर से दिलचस्पी लेना एक पूर्वनियोजित रणनीति का हिस्सा लगता है।

क्या है डीप स्टेट?

डीप स्टेट खुफिया तंत्रों सीआईए, एफबीआई जैसे अमेरिकन इंटेलिजेंस एजेंसी का नेटवर्क है। इनमें दुनिया के सरकारी और गैर सरकारी अभिजात्य वर्ग शामिल हैं, जो लोकत्रांतिक रूप से चुनी गई सरकार से ज्यादा ताकतवर है। ये दुनिया के किसी भी कोने में सरकारों को बनाने- गिराने का माद्दा रखती है।

ओस्लो का डीप स्टेट के साथ रिश्ता काफी गहरा है। नाटो के साथ उसका ऐतिहासिक समझौता है और डीप स्टेट का सेंटर ऑस्लो में है। दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश नॉर्वे हर हाल में सीआईए को भी सूट करता है।

डीप स्टेट का टूलकिट

नॉर्वे की सोच और उसका ‘इंटरनेशनल लगाव’ जगजाहिर है। खास पैटर्न को अपनाते हुए ये लोग पहले उन क्षेत्रों की पहचान करते हैं जिन्हें पहले से ही अस्थिर या असफल माना जाता है, जैसे- लीबिया, इथियोपिया, कोलंबिया या बिहार, भारत। एक बार लक्ष्य तय होने के बाद ये अपनी ‘ऑयल फंड’ का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए गैर-सरकारी संगठनों, खास दलों और विदेशी सहायता से कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाया जा सके।

नॉर्वे रहा है टूलकिट का हिस्सा

नॉर्वे प्रगतिशील और निष्पक्ष, मानवाधिकार की बात करने वाले देश होने की बात करता है लेकिन इसकी विदेश नीति लोकतंत्र को बढ़ावा देने की आड़ में बार-बार संप्रभु राष्ट्रों को अस्थिर करने की रही है। श्रीलंका में लिट्टे जैसे संगठन का समर्थन कर सालों तक देश को अस्थिर रखा गया। वही हाल लीबिया, इथियोपिया, सीरिया, कोलंबिया जैसे देशों का हुआ।

लीबिया में हस्तक्षेप की बात नॉर्वेजियन अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है। 2011 में गद्दाफी को हटाने के लिए नाटो अभियान में नॉर्वे शामिल हुआ। उसने 596 हमले किए और 588 बम गिराए। इसका नतीजा ये रहा कि आतंकवाद और अराजकता से घिरा एक ऐसे राष्ट्र के रूप में लीबिया सामने आया जहाँ की स्थिति बद से बदत्तर होती चली गई। खुद नार्वे ने माना कि “गर्व करने लायक फैसला नहीं था”।

नॉर्वे के विदेशी कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं। ओस्लो में “डीप स्टेट” मशीनरी का इस्तेमाल कर इसे आसान बनाया जाता है। इस मशीनरी में नाटो, अमेरिकी खुफिया विभाग और ऑपरेशन ग्लैडियो जैसे खुफिया नेटवर्क शामिल हैं।

नॉर्वे दुनिया का सबसे बड़े हथियार निर्यातक देशों में शामिल है और उसने हाल के युद्धों में अमेरिका और इज़राइल को छोड़कर बाकी सभी देशों से ज्यादा हिस्सा लिया है।

तेल का हथियार के रूप में इस्तेमाल

नॉर्वे का 1.4 ट्रिलियन डॉलर का सॉवरेन ऑयल फंड उसे मजबूत बना रहा है। ये मुनाफा रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूरोप के ऊर्जा संकट से हुए रिकॉर्ड “युद्ध मुनाफ़े” पर आधारित है। क्योंकि कई देशों ने रूस से ऑयल खरीदना बंद कर दिया था। इसका फायदा नॉर्वे को मिला।

सॉवरेन ऑयल फंड की वैल्यू दुनिया में दखलंदाजी के लिए काफी है। इसने क्लिंटन फाउंडेशन, बिल गेट्स की परियोजनाओं और नाटो से जुड़े दुनिया के कई देशों में शासन बदलने की कोशिशों में लगे संगठनों को मदद करता है। यही वजह है कि अर्थशास्त्री अब नॉर्वे से आग्रह कर रहे हैं कि वह इस फंड का उपयोग यूक्रेन की आर्थिक मदद के लिए करे।

प्रशांत के बहाने बिहार आएगा ‘ऑयल फंड’

दिल्ली में केजरीवाल सरकार का जाना, आम आदमी पार्टी का कमजोर पड़ना और शाहीन बाग- किसान विरोध जैसे आंदोलन के नहीं चलने के बाद अब डीप स्टेट टूलकिट के जद में प्रशांत किशोर आ गए हैं। ये टूलकिट ऐसे लोगों की तलाश करते हैं जो महत्वाकांक्षी हो, जमीन पर दिख रहा हो और जिसे मिला कर ‘अनौपचारिक किंगमेकर’ बन सकें।

खास बात ये हैं कि ये टूलकिट ऐसे प्रयासों को किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं मानते बल्कि लोकतंत्र या मानवीयता के लिए ‘जरूरी’ मानते हैं। इस सोची-समझी रणनीति का खुलासा नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री जेन्स स्टोलटेनबर्ग (अब नाटो महासचिव) ने लीबिया के संबंध में किया था- “नॉर्वे लीबिया पर हमले में शामिल हुआ क्योंकि ‘यह नॉर्वेजियन वायु सेना के लिए एक अच्छा अभ्यास होगा’।”

प्रशांत किशोर और नार्वे के राजदूत के बीच बैठक महज कूटनीतिक नहीं है। ये भारत को अस्थिर करने की रणनीति का हिस्सा है। इसके लिए तरह- तरह से फंडिंग कर चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश किए जाने का अंदेशा है। इसलिए भारत को सभी गैर-सरकारी संगठनों को होने वाली फंडिंग का ऑडिट करना चाहिए।

बिहार का भविष्य बिहारियों द्वारा तय किया जाना चाहिए। एक खरब डॉलर वाले डीप टूलकिट स्टेट इसको तय नहीं कर सकते। नॉर्वे आर्कटिक तेल के भंडार का खनन करते हुए भारत को जलवायु परिवर्तन पर उपदेश दे रहा है। इसकी संपत्ति उन्हीं जीवाश्म ईंधनों से आती है जिसको बचाने और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए दुनिया को वह ‘सचेत’ कर रहा है।

कन्हैया लाल का गला कैमरे पर रेत कर पूरी दुनिया को दिखाया, अब कह रहे उस पर बनी ‘उदयपुर फाइल्स’ मत दिखलाओ: जानिए क्या है मामला, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कबूल नहीं की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैयालाल की हत्या पर बनी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज के खिलाफ याचिका सुनने से इनकार कर दिया है। यह फिल्म 11 जुलाई, 2025 को रिलीज होनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसे रिलीज हो जाने दिया जाए। वहीं इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सुनवाई की है।

बुधवार (9 जून, 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर एक याचिका की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका कन्हैयालाल की हत्या में शामिल जावेद ने दायर की थी। जावेद का दावा था कि अगर या फिल्म रिलीज हुई तो उसे ‘निष्पक्ष सुनवाई‘ का मौक़ा नहीं मिलेगा।

इस याचिका को लेकर सुनवाई कर रही जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमलय बागची की बेंच ने जावेद से कहा कि वह मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करेंगे। बेंच ने इस मामले में पेश हुए वकील से कहा कि वह याचिका को 14 जुलाई को बेंच के सामने पेश करें। वहीं जावेद के वकील ने दावा किया कि तब तक फिल्म रिलीज हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा, “तो इसे रिलीज हो जाने दो।”

दिल्ली हाई कोर्ट अब करेगा फिल्म की स्क्रीनिंग

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले में जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने 9 जुलाई को इस मामले में सुनवाई की है। हाई कोर्ट ने जमीयत की तरफ से कपिल सिब्बल पेश हुए हैं। कपिल सिब्बल ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने दावा किया है कि इस फिल्म के रिलीज होने से ‘मजहबी तनाव’ फ़ैल सकता है।

कपिल सिब्बल ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने दावा किया कि फिल्म का उद्देश्य मजहबी तनाव फैलाना और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालना है। हालाँकि, केंद्र सरकार ने बताया कि इस फिल्म में पहले ही 40 से अधिक कट्स लगाए जा चुके हैं। सिब्बल इस पर भी तैयार नहीं हुए।

सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि वह फिल्म देख ले। इस मामले में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग 9 जुलाई, 2025 दिल्ली हाई कोर्ट में की जाएगी। इसके बाद इस पर फैसला आएगा। गौरतलब है कि जमीयत ने दिल्ली हाई कोर्ट के अलावा और भी कई हाई कोर्ट में याचिका इस फिल्म की रिलीज रोकने को रखी है।

जमीयत के मुखिया अरशद मदनी ने दावा किया था कि इससे देश का मुस्लिम आक्रोशित हो जाएगा। ध्यान देने वाली बात है कि उदयपुर में जून, 2022 में हुई कन्हैयालाल की हत्या मोहम्मद गौस और मोहम्मद रियाज ने की थी और इसे रिकॉर्ड भी किया था।

इन दोनों हिन्दुओं में डर भरने के लिए यह वीडियो वायरल की थी और वह चाकू तक दिखाया था जिससे हत्या हुई थी। कायदा तो ये था कि जमीयत इन इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़ी होती और कोर्ट जाती। लेकिन वह इस बात पर कोर्ट पहुँच रही है कि कहीं यह फिल्म न रिलीज हो जाए और इस हत्याकांड की कहानी दुनिया को पता चल जाए।

इस्लामी कट्टरपंथ पर पर्दा डालने की यह कहानी कोई नहीं है। इससे पहले कश्मीरी हिन्दुओं को इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा मार भगाए जाने पर बनी फिल्म कश्मीर फाइल्स का भी ऐसा ही विरोध इस जमात ने किया था। हालाँकि, कोर्ट ने उन्हें अब कोई राहत नहीं मिलनी।

बिहार बंद में सड़क पर लोटते रह गए कार्यकर्ता, फोटो-भाषणबाजी कर गायब हुए राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव: चुनाव आयोग के अधिकारी करते रहे इंतजार, नहीं बताया वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में क्या है आपत्ति

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बवाल मचा हुआ है। हर तरफ प्रदर्शन हो रहे हैं। सड़कें, रेल बंद हैं। लेकिन नेता लोग अपना भाषण देकर गायब हो गए। वहीं, अब भी कार्यकर्ता सड़कों पर लोट रहे हैं।

दरअसल, विपक्षी महागठबंधन ने इसे बीजेपी और चुनाव आयोग की साजिश बताकर बुधवार (9 जुलाई 2025) को ‘बिहार बंद’ बुलाया। सुबह से ही सड़कों पर हंगामा शुरू हो गया। पटना से लेकर दरभंगा, आरा, कटिहार तक महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर दिया।

कहीं ट्रेनें रोकी गईं, कहीं हाईवे जाम किए गए। पटना के आयकर गोलंबर पर तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर चादर बिछाकर लेट गए, बोले – “गाड़ी भी चढ़ जाए, हम नहीं उठेंगे!” वैशाली में RJD के लोग भैंस लेकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। कोई रेलवे ट्रैक पर लेटा, तो कोई गाँधी सेतु पर आगजनी करता दिखा। पूरे बिहार में बाजार बंद, बस-ट्रेन ठप, जनता परेशान।

इधर, तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी ने पटना में खुले ट्रक पर चढ़कर जोरदार भाषण दिए। तेजस्वी ने कहा, “ये बीजेपी की चाल है, गरीबों-दलितों का वोट छीनने की।” राहुल ने महाराष्ट्र के ‘वोट चोरी’ वाले आरोप को बिहार से जोड़ते हुए आयोग पर निशाना साधा।

राहुल गाँधी हो या तेजस्वी यादव, दोनों ने कार्यकर्ताओं को भड़काया और मार्च की शुरुआत की, लेकिन शहीद स्मारक के पास पुलिस ने रोक लिया। भाषण खत्म, फोटो खिंचवाए और दोनों नेता गायब। राहुल दिल्ली लौट गए, तेजस्वी घर। चुनाव आयोग के दफ्तर में अफसर इंतजार करते रह गए कि शायद कोई प्रतिनिधिमंडल आए, उनकी शिकायत सुने। लेकिन कोई नहीं पहुँचा।

नेताओं के आने का इंतजार करते चुनाव आयोग के अधिकारी (फोटो साभार: Live Hindustan)

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के लिए माँगे गए 11 दस्तावेजों में आधार कार्ड जैसी चीजें शामिल नहीं, जिससे गरीबों के नाम कट सकते हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया, “आयोग को ये हक किसने दिया?” उधर, आयोग का कहना है कि ये काम संविधान और कानून के तहत हो रहा है। ईसी का कहना है कि “किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा, सिर्फ घुसपैठियों और फर्जी नाम हटाए जाएँगे।” सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर 10 जुलाई को सुनवाई है, लेकिन उससे पहले बिहार की सड़कों पर सियासत गरमा गई।

बंद की वजह से आम लोग खासे परेशान दिखे। एक ऑटो ड्राइवर ने कहा, “नेता तो भाषण देकर चले गए, हमारी कमाई का क्या?” स्कूल-कॉलेज बंद, दुकानें सूनी, मरीज अस्पताल नहीं पहुँच पाए। विपक्ष का दावा है कि ये ‘लोकतंत्र बचाने’ की लड़ाई है, लेकिन सड़क पर भैंस और चादर लेकर प्रदर्शन देख जनता भी हैरान है। अब सवाल ये कि क्या ये बंद वाकई गरीबों की आवाज उठा रहा है या सिर्फ सियासी ड्रामा?

तेजस्वी, सागरिका, मनोज झा… बिहार में चुनावी प्रक्रिया पर झूठ फैलाते पकड़े गए विपक्षी नेता : ECI ने किया फैक्ट चेक, बताया- काम में तो 47 हजार RJD कार्यकर्ता भी जुटे

बिहार में वोटर लिस्ट के रिवीजन को लेकर विपक्ष का बवाल चालू है। RJD नेता तेजस्वी यादव से लेकर TMC की सागरिका घोष तक लगातार चुनाव प्रक्रिया को लेकर फर्जी दावर दावे कर रही हैं। चुनाव आयोग ने अब उनका फैक्ट चेक किया है।

तेजस्वी यादव की खोली EC ने पोल

राजद सुप्रीमो लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने बिहार में चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट सही करने की प्रक्रिया को ‘चीरहरण’ करार दिया। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बिना दस्तावेज और सत्यापन के फर्जी फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि बिना पूरी जानकारी के मौखिक निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर और निरक्षर बताकर किसी भी कर्मचारी से अंगूठा लगावाया जा रहा है। उन्होंने वोटर लिस्ट में बिना वोटर को बताए जानकारी अपलोड करने का दावा भी किया।

तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि BLO से एक-एक दिन में 10 हजार फॉर्म तक भरवाए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के इन दावों का फैक्ट चेक कर दिया।

चुनाव आयोग ने बताया कि तेजस्वी की पोस्ट में किए दावे ‘भ्रामक’ हैं। आयोग ने बताया, “राष्ट्रीय जनता दल ने स्वयं SIR के काम के लिए 47,504 बूथ लेवल एजेंट्स अप्वॉइंट किए हैं, जो कि SIR के लिए जमीनी स्तर पर तत्परता से कार्य कर रहे हैं। SIR सुचारू रूप से चल रहा है, कुल 4 करोड़ (50%) के करीब फॉर्म अभी तक कलेक्ट किए जा चुके हैं।”

सागरिका घोष ने चलाया ‘गरीब’ वाला प्रोपेगेंडा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर भ्रामक जानकारी दी। सागरिका घोष ने दावा किया कि बिहार में चुनाव आयोग ‘गरीबों’ का वोट छीन रहा है। उनकी पार्टी ने भी इस चुनावी प्रक्रिया का विरोध किया।

पार्टी ने माँग की कि पुनरीक्षण प्रक्रिया 2003 के बजाए 2024 के आधार पर की जाए। टीएमसी ने इसमें बीजेपी को घसीटा। पार्टी ने कहा, “विपक्ष शासित राज्यों की व्यवस्था में हेराफेरी करने के लिए चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का आदतन दुरुपयोग किया जाता है। हम लोकतंत्र को बीजेपी का खिलौना नहीं बनने देंगे।”

लेकिन इस दावे को भी चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने गरीबों से वोट छीनने के अधिकार वाले दावे को भ्रामक करार दिया। चुनाव आयोग ने फैक्ट-चेक में TMC और सागरिका घोष को तथ्यों की जानकारी दी।

चुनाव आयोग ने बताया कि SIR निर्देशों में पहले पन्ने के दूसरे पैराग्राफ के अनुसार, किसी भी योग्य नागरिक (RPA, 1950 की धारा 16 और 19 के साथ भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार) को नहीं छोड़ा जाएगा। 8 जुलाई 2025 तक, 47% के करीब और 3.70 करोड़ से अधिक लोग गणना प्रपत्र फॉर्म सबमिट कर भी चुके हैं।

RJD सांसद मजोज मनोज झा भी हुआ फैक्ट चेक

RJD के राज्यसभा MP मनोज कुमार झा ने भी चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग उन्हें मिलने का समय नहीं दे रहा है। इसका फैक्ट चेक चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया बताते हुए कर दिया।

चुनाव आयोग ने बताया कि वह अब तक 9 पार्टियों से इस मामले में संवाद कर चुका है। उसने यह भी बताया कि राजद की तरफ से ही मनोज झा को अधिकृत नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2 जुलाई 2025 को राजद ने मनोज झा को बैठक में भेजा था, जिसमें उनकी चुनाव आयोग से बातचीत भी हुई थी।

RJD ने वॉयस रिकॉर्डिंग से फैलाया भ्रम

नेताओं के अलावा RJD ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर एक ट्वीट किया। इसमें एक जिलाधिकारी की कथित वॉयस रिकॉर्डिंग सुनाई गई, जिसमे कई दावे किए गए। इस रिकॉर्डिंग में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्देश कथित तौर पर दिए जा रहे थे। RJD ने दावा किया कि सारी प्रक्रिया गड़बड़ की जा रही है।

इस दावे बिहार के बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भ्रामक करार दिया। फैक्ट-चेक में बताया गया कि डीएम की कथित वॉइस रिकॉर्डिंग में जो बातें कही गई हैं, यह सारी बातें पहले से ही SIR में शामिल हैं। इसके लिए कोई भी नए निर्देश नहीं दिए गए हैं।

फरहाज ने कोल्ड ड्रिंक पिलाकर किया रेप, वीडियो बनाकर दी इस्लाम कबूलने की धमकी: हिंदू महिला को सिगरेट से दागा-मारपीट की, लखनऊ के लुलु मॉल की घटना

लखनऊ के लुलु मॉल की एक हिंदू महिला कर्मचारी ने अपने मैनेजर पर रेप, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपित मैनेजर फरहाज उर्फ फराज को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपित फरहाज उर्फ फराज ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपित ने दुष्कर्म का वीडियो भी बना लिया, जिसका इस्तेमाल वह महिला को ब्लैकमेल करने और पैसे ऐंठने के लिए कर रहा था।

जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे सिगरेट से जलाया गया, गालियाँ दी गईं और मारपीट की गई।

धर्म परिवर्तन का दबाव

शिकायत में यह भी बताया गया है कि फरहाज लगातार महिला पर इस्लाम कबूल करने का दबाव डाल रहा था। वह कहता था कि अगर उसे मॉल में नौकरी करनी है तो उसे इस्लाम कबूल करना होगा।

उसने कई बार हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान भी किया, जिससे पीड़िता की आस्था को ठेस पहुँची।

धर्मांतरण नेटवर्क

शुरुआती जाँच से पता चला है कि आरोपित फरहाज के संबंध कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स और कथित धर्मांतरण नेटवर्क से हो सकते हैं।

पुलिस अब इस मामले की साइबर फॉरेंसिक जाँच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि आरोपित किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है। पुलिस मॉल के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित फरहाज को गिरफ्तार कर लिया है। डीसीपी नॉर्थ ने बताया कि आरोपित पर बलात्कार, जान से मारने की धमकी और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर भेज दिया गया है।

लुलु मॉल प्रबंधन की ओर से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

पीएम मोदी को ब्राजील में मिला सर्वोच्च सम्मान, बोले- दोस्ती का है प्रतीक: दोनों देशों के बीच 2000 करोड़ रुपए का होगा व्यापार, वीजा की प्रक्रिया होगी आसान

पाँच देशों की यात्रा पर निकले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना के बाद ब्राजील में भी सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है। मंगलवार (8 जुलाई 2025) को ब्राजील के राष्ट्रपति इनासियो लूला डि सिल्वा ने ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित किया।

इससे पहले पीएम मोदी को 16 जून 2025 को साइप्रस देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ से सम्मानित किया गया था। ब्राजील में पीएम मोदी मे रियो डि जेनेरियो में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसमें उन्होंने पर्यावरण, जलवायु सम्मेलन और स्वास्थ्य समेत कई वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। 2026 में BRICS शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित होगा।

इसके बाद पीएम मोदी राजकीय दौरे पर ब्राजील की राजधानी ब्रसीलिया पहुँचे। यहाँ पर ब्राजील के सर्वोच्च सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने इसे दोस्ती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति लूला और ब्राजील के लोगों का भारतीयों के प्रति गहरा लगाव है। आने वाले समय में इस दोस्ती के साथ हम और अधिक ऊँचाइयों को छुएँगे और साथ मिलकर काम करेंगे।”

ब्रासीलिया पहुँचने पर प्रवासी भारतीयों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी के स्वागत में शिव तांडव स्त्रोत और पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे का प्रदर्शन भी किया।

क्या है सर्वोच्च सम्मान का महत्व

पीएम मोदी को मिले सर्वोच्च सम्मान का मिलना वैश्विक स्तर पर काफी अहम बात है। ये सम्मान असल में उन व्यक्तियों को दिया जाता है जो दो देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने के में अहम भूमिका निभा रहे हों। ब्राजील के इस सम्मान का महत्व दोनों देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में मजबूती लाने के लिहाज से है।

ब्राजील का ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ सदर्न क्रॉस’ सम्मान उनके देश का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है। 1822 में शुरू हुए इस सम्मान से ब्राजील अपने वैश्विक रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने की कोशिश और आभार व्यक्त करता है। ब्राजील ने इस सम्मान से दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइजनहावर और महारानी एलिजाबेथ द्वितीय आदि विश्व नेताओं को भी सम्मानित किया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा

ब्राजील के परिपेक्ष्य में पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच खेती और पशुपालन का पुराना रिश्ता रहा है। इस कड़ी में अब हम आगे खाद्य प्रसंस्करण और कृषि अनुसंधान के लिए भी काम करेंगे। इसके अलावा दोनों देश मिलकर चिकित्सा और आयुर्वेद के लिए भी आगे काम करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले 5 वर्षों में 2000 करोड़ रुपए (20 बिलियन डॉलर) तक ले जाने का प्रयास है।

ब्राजील के सम्मान में पीएम मोदी ने कहा कि हम चाहते हैं कि वीजा काउंटर की लंबी लाइन के साथ भारत और ब्रजील के संबंध बेहतर हों। दोनों देशों के बीच खेलों की रुचि के मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि फुटबाल की जीत की तरह दोनों देशों के बीच भी जोश भरा रहे और ब्राजील के सांबा रेगे की तरह दिल जुड़ें। इसके लिए हम पर्यटकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और खेल से जुड़े लोगों के लिए प्रक्रिया सरल करेंगे।

ब्राजील की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया के दौरे को लिए निकल गए हैं।

व्यापार में निष्पक्षता या अमेरिका को घाटे से बचाना: BRICS देशों पर 10% टैरिफ के बाद भारत पर कितना पड़ेगा असर, ग्लोबल ट्रेड वार में ट्रंप ने दिया अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अगस्त 2025 से अपने व्यापारिक साझेदारों से सभी टैरिफ भुगतान शुरू करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि इस तारीख में कोई बदलाव या छूट नहीं होगी।

ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह चेतावनी साझा की है। यह घोषणा 14 देशों को निशाना बनाने वाले नए टैरिफ खतरों के बाद आई है, जो उनके प्रशासन के ग्लोबल ट्रेड वॉर में एक बड़ा कदम है।

BRICS देशों पर टैरिफ

ट्रम्प ने BRICS देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर जल्द ही 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उनका आरोप है कि BRICS समूह अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। भारत ने पहले ही एक ‘उचित प्रस्ताव’ पेश किया है, जिसकी समीक्षा अब अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।

यह समझौता दोनों देशों के बीच 12878 करोड़ ($150 बिलियन) से 171711 करोड़ ($200 बिलियन) के सामान व्यापार को कवर कर सकता है। यदि भारत पर भी 10% टैरिफ लगता है तो कुल 26% टैरिफ भारत को देना पड़ सकता है।

कुछ देशों को अधिक टैरिफ

लाओस और म्यांमार को 40% के साथ उच्चतम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। थाईलैंड और कंबोडिया पर 36% टैरिफ लगेगा, जबकि बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%।

ट्रम्प ने कहा कि वे व्यापार में निष्पक्षता लाना चाहते हैं और अमेरिकी कंपनियों, फैक्ट्री और जॉब्स की रक्षा करना चाहते हैं। ट्रंप का मानना है कि पिछले कुछ सालों से अन्य देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं।

टैरिफ रेट और प्रभावित देश

कई देशों को अलग-अलग टैरिफ रेट का सामना करना पड़ेगा

  • 40% टैरिफ – लाओस और म्यांमार
  • 36% टैरिफ – थाईलैंड और कंबोडिया
  • 35% टैरिफ – बांग्लादेश और सर्बिया
  • 32% टैरिफ – इंडोनेशिया
  • 30% टैरिफ – दक्षिण अफ्रीका और बोस्निया और हर्ज़ेगोविना
  • 25% टैरिफ – मलेशिया, ट्यूनीशिया, जापान, दक्षिण कोरिया और कजाकिस्तान

जवाबी टैरिफ पर चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई देश अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अपने चार्ज बढ़ाता है तो उसे और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को बताया है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो अमेरिका उनके सामान पर लगने वाले नए चार्ज को और बढ़ा देगा।

बता दें कि तांबा पर 50% टैरिफ लगाने की बात कही गई है। फार्मास्युटिकल इमपोर्ट पर 200% तक ‘बहुत-बहुत हाई रेट’ का संकेत दिया गया है।

भारत के साथ व्यापार समझौता

भारत के साथ व्यापार समझौते पर अंतिम फैसला आना बाकी है। भारत ने एक अंतिम प्रस्ताव दिया है, जिसमें कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्र शामिल नहीं होंगे।

अमेरिका अपने मेडिकल डिवाइस एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स पर कम टैरिफ चाहता है, जबकि भारत टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के लिए बेहतर अवसर चाहता है।

ट्रम्प ने कहा कि यह समझौता इस महीने या उनकी भारत यात्रा के दौरान हो सकता है।

वॉल स्ट्रीट की प्रतिक्रिया

ट्रम्प के टैरिफ पत्रों को साझा करने के बाद शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊँचाई से गिर गए और अमेरिकी डॉलर में वृद्धि हुई।

जापान, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों पर टैरिफ लगने से उनकी मुद्राओं में गिरावट आई।

कहीं रोकी ट्रेन, कहीं चक्का जाम… ‘बिहार बंद’ कर INDI गठबंधन ‘लोकतंत्र’ का बजा रहा गाना: गाँधी सेतु बंद-हाईवे पर रोकी गाड़ियाँ, राहुल गाँधी के ‘स्वागत’ में तेजस्वी कर रहे जनता को हलकान

विपक्षी INDI गठबंधन ने बुधवार (09 जुलाई 2025) को वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर बिहार बंद का ऐलान किया है। इसका असर सुबह से ही दिखने लग गया। बिहार के कई जिलों में कार्यकर्ता चक्का जाम कर रहे हैं। कई रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन को रोककर सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए।

पटना के मनेर में INDI गठबंधन कार्यकर्ताओं ने NH 30 को जाम कर आगजनी की। उधर, महात्मा गांधी सेतु पर कार्यकर्ता विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके बाद सेतु को बंद कर दिया है।

उधर, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भी दिल्ली से पटना के लिए रवाना हो गए है। यहाँ राष्ट्रीय लोकदल पार्टी (राजद) नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर लिस्ट का विरोध करेंगे। पटना में इनकम टैक्स गोलंबर से निर्वाचन कार्यालय तक मार्च करेंगे।

बिहार में रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन

बिहार बंद के तहत राजद कार्यकर्ताओं ने जहानाबाद में कोर्ट रेलवे स्टेशन पर पटना-गया पैसेंजर ट्रेन को रोकने की कोशिश की। यहाँ रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के सामने आकर प्रदर्शन किया। आरा में जगदीशपुर से राजद के पूर्व विधायक के भाई दिनेश ने कार्यकर्ताओं संग बिहिया स्टेशन पर श्रमजीवी एक्सप्रेस को रोककर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इसके अलावा दरभंगा में जयनगर से पटना जाने वाली नमो भारत ट्रेन को स्टेशन पर रोका गया। राजद सहित महागठबंधन के कार्यकर्ता ट्रेन के आगे खड़े हो गए और सरकार के विरोध में नारे लगाए।

तेजस्वी यादव ने की लोगों से अपील

बिहार बंद के ऐलान के बाद बुधवार (09 जुलाई 2025) को तेजस्वी यादव ने लोगों से लोकतंत्र को बचाने तक की अपील कर दी। उन्होंने बीजेपी की साजिश बताते हुए बिहार के लोगों से बिहार बंद और चक्काजाम में शामिल होने की बात कही। उन्होंने इस संबंध में एक्स हैंडल पर ट्वीट किया।

तेजस्वी यादव ने कहा, “बिहार बंद और चक्काजाम में शामिल होइए और लोकतंत्र को बचाइए! गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को वोटर लिस्ट से बाहर करने की चुनाव आयोग और बीजेपी की साजिश को हम कामयाब नहीं होने देंगे! आज नहीं जागे तो कल वोट का अधिकार भी छिन जाएगा..!!”

तेजस्वी यादव ने ‘बिहार बंद’ का किया था ऐलान

राजद नेता तेजस्वी यादव ने 08 जुलाई 2025 को ‘संपूर्ण बिहार बंद’ का ऐलान किया था। इस संबंध में तेजस्वी यादव ने अपने अधिकारिक एक्स हैंडल पर ट्वीट किया था। उन्होंने बिहार बंद का ऐलान INDI गठबंधन के आह्वान पर किया था।

तेजस्वी यादव ने ट्वीट में लिखा, 09 जुलाई 2025 को INDI गठबंधन के आह्वान पर- संपूर्ण बिहार बंद! तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी के नेतृत्व में हम लड़ेंगे।” उन्होंने यह भी कहा, जब गरीब की आवाज को वोटर लिस्ट से मिटाया जाए, तो सड़कों पर उतरना मजबूरी नहीं, जिम्मेदारी बन जाती है।”‘

क्यों कर रहे ‘बिहार बंद’ और चक्काजाम ?

INDI गठबंधन ने बिहार बंद और चक्काजाम का ऐलान किया। दरअसल, गठबंधन में शामिल पार्टियाँ वोटर लिस्ट रिवीजन पर तत्काल रोक लगाने की माँग कर रहा है। गठबंधन चाहता है कि वोटर लिस्ट रिवीजन बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन 11 दस्तावेजों की माँग की जा रही है, वह गरीबों के पास नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि इससे करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं।

वैध मतदाता का नाम नहीं कटेगा

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि वोटर लिस्ट रिवीजन का काम आर्टिकल-326 और लोक प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में ही किया जा रहा है। इससे किसी वैध मतदाता का नाम नहीं कटेगा। बल्कि विदेशी घुसपैठियों सहित वोटर लिस्ट में गलत तरीके से नाम जुड़वाने वाले ही केवल बाहर होंगे।

जिस पुलवामा अटैक में बलिदान हुए 40 CRPF जवान, उसके लिए विस्फोटक Amazon से आया: FATF का खुलासा, बताया- गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले आतंकी को PayPal से भेजे पैसे

दुनिया में टेरर फाइनेंस पर नजर रखने वाली संस्था FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि हथियारों की खरीदारी के लिए आतंकी संगठन अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन पेमेंट सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत में हुए दो आतंकी हमले का दिया उदाहरण

पुलवामा हमले के लिए अमेजन से एल्यूमिनियम मँगाया गया था जिससे विध्वंस करने की क्षमता बढ़ गई, वहीं गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में आतंकियों को PayPal और VPN का उपयोग करके करीब 6.7 लाख रुपए का पेमेंट किया गया। FATF ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों आतंकी घटनाओं का जिक्र किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 10 सालों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन इतना सस्ता और तेज हो जाएगा कि आतंकी 3डी प्रिंटेड हथियार, कैमिकल और दूसरे सामान आसानी से दुनिया के किसी भी भाग में बैठ कर मँगा सकेंगे। इसके लिए फिनटेक और डिजिटल पेंमेंट्स करना काफी आसान हो जाएगा।

पुलवामा हमले के लिए अमेजन का इस्तेमाल

2019 में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान बलिदान हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में मौजूद जैश ए मोहम्मद ने ली थी। FATF ने कहा कि सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने के लिए एल्यूमिनियम पाउडर ई कॉमर्स से अमेजन प्लेटफॉर्म से खरीदा गया था। इस पाउडर का इस्लेमाल विस्फोटक की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया गया। ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उदाहरण है।

गोरखनाथ मंदिर पर हमले के लिए इंटरनेशनल फंडिंग

अप्रैल 2022 में गोरखनाथ मंदिर पर हमला किया गया था। इसमें शामिल आतंकियों के संबंध इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़े थे। इस हमले में 6.69 लाख रुपए की इंटरनेशनल टेरर फंडिंग हुई थी। ये पैसा विदेशी खातों से आया था। इसके लिए पे पाल और वीपीएन का इस्तेमाल किया गया।

एफएटीएफ के मुताबिक ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ट्रैकिंग करना आसान नहीं होता और इसके लिए नकली नाम पता से लेकर फर्जी अकाउंट तक का इस्तेमाल होता है। यहाँ तक कि कुछ सरकारें भी आतंकी संगठनों को मदद देती हैं।

भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को इन आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार मानता है क्योंकि आतंकियों को सीमा पार से पाकिस्तान हर तरह से सपोर्ट करता रहा है। आतंकियों की फंडिंग, उन्हें पनाह देना और हथियार मुहैया करना सबकुछ पाकिस्तान करता रहा है।

FATF क्या है?

FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक इंटरनेशनल संगठन है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों की आर्थिक मदद करने वाले और उससे निपटने के लिए वैश्विक मानकों को निर्धारित करता है. यह 1989 में स्थापित किया गया था।