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RJD के बिहार बंद का मतलब- गुंडई की छूट, क्या चुनाव से पहले राज्य को हिंसा की आग में झोंकना चाहते हैं राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव? बोले राजनीतिक विश्लेषक- विपक्षी प्रोपेगेंडा का जमीन पर नहीं असर

बिहार में विपक्षी दलों ने बुधवार (9 जुलाई, 2025) को बंद का ऐलान किया है। इस बंद का ऐलान चुनाव आयोग के मतदाता सूची के निरीक्षण के फैसले के खिलाफ किया गया है। इस बिहार बंद में शामिल होने के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भी पहुँच रहे हैं। बताया गया है कि राहुल गाँधी एक मार्च का नेतृत्व करेंगे, जो राजधानी पटना में निकाला जाएगा। राजद नेता तेजस्वी यादव भी उनके साथ रहेंगे। चुनाव आयोग के फैसले पर हल्ला मचाने की कड़ी में विपक्ष का यह सबसे नया कदम है।

बिहार में चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया पर महागठबंधन पूरा माहौल तैयार करना चाहता है। चुनाव आयोग ने जबसे मतदाताओं की सूची का निरीक्षण करने का काम चालू किया है, तब से ही बयानों से लेकर कोर्ट तक इस मुद्दे को उछाला जा रहा है। राजद तो इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने भी पहुँच गई है। चुनाव आयोग ने लगातार इस मामले में इन सबके द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर स्पष्टीकरण दिए हैं, लेकिन यह पार्टियाँ इसे भुनाने के प्रयास में हैं।

इसको लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, जिस तरीके से चुनावों से पहले चुनाव सुधार की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग बढ़ रहा है, मेरी समझ में बिहार में यह पहली बार हो रहा है। ये पहले से चुनाव आयोग को बदनाम करने की साजिश है और इससे पहले चुनावों के बाद दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही चीजें हुई हैं।”

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में सबसे बड़ा मतदाता होता है, ऐसे में वोटरों की सूची को सही करने के प्रयास का, जिस तरीके से विरोध हो रहा है, उससे यह भी संदेह हो रहा है कि कहीं इन गडबडियों के पीछे विपक्ष और इन्हीं राजनीतिक दलों का हाथ तो नहीं था।”

चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी पार्टियों का दावा है कि यह मुस्लिम, यादव या फिर दलित वोटों को काटने का प्रयास है। एक तरह से यह पार्टियाँ यह बता रहीं हैं कि यह सारे वोट लिखित रूप से उनके हैं और कथित तौर पर इनके कट जाने से उन्हें नुकसान होगा। इन विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि किसी भी वोटर को अपना पक्का वोटबैंक बताना ना केवल मतदाता के वोट का अपमान है बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर भी बट्टा लगाने जैसी बात है।

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने विपक्ष के दावों को नकारते हुए कहा,”ये मेरा मतदाता, वो तेरा मतदाता, ये आप लोकतंत्र में कैसे तय करेंगे। आज कहा जा रहा है कि प्रवासी मतदाता सत्यापन के लिए कैसे आएँगे, तो यह कैसे माना जाए कि वह मतदान के लिए भी आएँगे।”

इस रैली के पहले चुनाव आयोग ने एक आँकड़ा देते हुए बताया है कि राज्य में अब तक लगभग 3.5 करोड़ से अधिक फॉर्म इकट्ठा किए जा चुके हैं और यह प्रक्रिया लगभग 50% पूरी हो गई है जबकि इसकी अंतिम तारीख 25 जुलाई, 2025 को तय की गई है। चुनाव आयोग के इस आँकड़े की मानें तो बिहार में मतदाता अपने अधिकार के प्रति जागरूक हैं और लगातार इस प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं, भले ही विपक्षी पार्टियाँ कुछ भी दावे करती रहें।

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने इस मुद्दे को लेकर कहा, “मेरी समझ में इसका (चुनाव आयोग की प्रक्रिया के विरोध का) कोई जमीनी असर बिहार में चुनाव पर नहीं दिखेगा। इसके विरोध में जो बंद बुलाया गया है, वो इन लोगों ने अपने काडर को चार्ज करने के लिए और सत्ता से लम्बे समय से बाहर है, इसलिए उनमें उत्साह भरने के लिए आयोजित किया गया है। यदि विपक्षी दल इससे कुछ फायदा पाते हैं तो यही उपलब्धि होगी।”

वहीं इस बिहार बंद पर सुरक्षा चिंताएँ भी कम नहीं हैं। लगातार चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद अगर पार्टियाँ इस मसले को उठा रही हैं और इससे मुस्लिमों को भड़काने का प्रयास कर रही हैं तो यह हिंसा का रूप भी ले सकता है। संभव है कि कहीं किसी जगह चुनाव आयोग की टीम को निशाना बनाया जाए। यह भी संभव है कि चुनाव आयोग के विरोध के नाम पर बिहार में हिंसा फैलाई जाए। और यह कोई विचित्र बात नहीं है, इससे पहले भी राजद ने जब बंद बुलाया है तो हिंसा देखने को मिली है।

बंद के दौरान दिए गए बयान भी इस आग को भड़का सकते हैं। हाल ही में बिहार में वक्फ कानून के विरोध में एक रैली इन्हीं विपक्षी दलों ने आयोजित की थी। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल हुए। इसके दौरान कई भड़काऊ बयान दिए गए। इसके 10 दिन भी नहीं बीते और बिहार के कटिहार, भागलपुर, दरभंगा समेत कई शहर मुहर्रम पर हिंसा का शिकार हो गए। ऐसे में 9 जुलाई की रैली का ऐसा कोई परिणाम नहीं होगा, यह बात करना बेईमानी है।

विपक्षी पार्टियाँ चुनाव से पहले लगातार ऐसा माहौल बना रही हैं कि जैसे उनकी हार सुनिश्चित किए जाने को यह प्रक्रिया हो रही हो। इसकी टाइमिंग को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी के अनुसार,”जो लोग कहते हैं कि यह प्रक्रिया गलत समय पर शुरू की गई है, तो यदि यह प्रक्रिया 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले की जाती तो यही कहते कि 400+ के लिए यह किया जा रहा है।”

कॉन्ग्रेस का चुनावी प्रक्रिया को लेकर रोना कोई नई बात नहीं है। राहुल गाँधी अब जब यह जान चुके हैं कि वह चुनावी मैदान में नहीं भाजपा से नहीं लड़ सकते और उनकी पार्टी बिहार में उतना ही उछलकूद मचा सकती है जितना राजद अनुमति दे। ऐसे में नाकामी के डर से वह पहले ही चुनाव आयोग पर फलिम हो गए हैं। पहले वह चुनाव आयोग के बाद EVM पर रोया करते थे लेकिन महाराष्ट्र चुनाव के बाद उन्होंने यह नई रणनीति अपनाई है। हालाँकि, इसका कोई फायदा उन्हें नहीं होने वाला है।


छांगुर पीर ने नीतू को ब्रेनवॉश कर नसरीन बनाया, लखनऊ के होटल में 70 दिन उसके साथ रहा: यहीं से धर्मांतरण-लव जिहाद का रैकेट चला रहा था जलालुद्दीन

धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चलाने वाला छांगुर पीर गर्लफ्रेंड नसरीन के साथ 70 दिन होटल में ठहरा। लखनऊ के इसी होटल से UP ATS ने दोनों को गिरफ्तार किया था। दोनों यहाँ पति-पत्नी बनकर रह रहे थे। होटल के कमरे से छांगुर पीर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन और लव जिहाद करवाते थे। नसरीन वही है, जिसका नाम अब तक नीतू नवीन रोहरा बताया गया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, छांगुर पीर और नसरीन 16 अप्रैल 2025 से लखनऊ के विकास नगर स्थित स्टार रूम्स होटल में रुके हुए थे। पहले दोनों कमरा नंबर 102 में 4 दिन तक ठहरे। इसके बाद पाँचवे दिन कमरा नंबर 104 में बाकी दिन बिताए।

जाँच अधिकारियों ने बताया कि पहले 4 दिन उन्होंने होटल का माहौल भांपा और सुरक्षित पाने के बाद धर्मांतरण का नेटवर्क यहीं से चलाने का फैसला लिया। उधर, होटल के कर्मचारियों और UPATS के अधिकारियों ने बताया कि छांगुर पीर और नसरीन के बीच अवैध संबंध थे। दोनों कमरे से बहुत कम बाहर निकला करते थे। होटल से ही खाना ऑर्डर कर खाते थे।

नीतू का धर्म परिवर्तन कराया, नाम बदलकर नसरीन रखा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतू नवीन रोहरा और उसके पति नवीन रोहरा पहले सिंधी थे। उनका धर्मांतरण छांगुर पीर पहले ही करा चुके थे। साथ ही उनकी नाबालिग बेटी को भी इस्लाम में परवर्तित किया गया। नीतू नवीन रोहरा का नाम बदलकर नसरीन रख दिया। तीनों बलरामपुर में छांगुर पीर के पास ही रहते थे।

अब नसरीन और नवीन दोनों पति-पत्नी ही छांगुर पीर का नेटवर्क संभालते थे। जहाँ छांगुर पीर कीपैड मोबाइल फोन लेकर चलता था। वहीं, नसरीन के पास टच वाला फोन था, जिससे वह धर्मांतरण के खेल को अंजाम देती थी। नसरीन का पति नवीन छांगुर पीर और नसरीन को लग्जरी गाड़ियों में लेकर चलता था।

सामाजिक संगठन के नाम पर फंड ऐंठता था

छांगुर पीर ने धर्मांतरण का नेटवर्क बड़े स्तर पर फैलाया हुआ था। इसके लिए विदेशों से फंडिंग की जा रही थी। अब सामने आया है कि वह सामाजिंक संगठनों के नाम पर बैंक में खाता खुलवाता था। इसमें चंदा जुटाने और उसे विदेश भेजने के लिए इन संगठनों का इस्तेमाल करता था।

जानकारी के मुताबिक, छांगुर ने आस्वी इंटरप्राइजेज, आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन, बाबा ताजुद्दीन आस्वी बुटीक जैसी संस्थाओं पर कागज बनवाए। दो बैंकों में इन संस्थाओं के आठ खाते खुलवाए।

इनमें से एक बैंक खाते से विदेशी खाते में ₹6 लाख रुपए जमा किए। इसके अलावा NEFT के माध्यम से इस्लाम ₹10 लाख जमा किए। वहीं, छांगुर अपने नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के खातों से भी लेन-देन करता था।

‘शिजर-ए-तैयब्बा’ से ब्रेनवॉश करता था छांगुर पीर

छांगुर पीर ने शिजर-ए-तैयब्बा नाम की किताब प्रकाशित कराई थी। इस किताब से आसपास के लोगों से इस्लाम का प्रचार-प्रसार कराता था। इस किताब को पढ़कर लोगों का ब्रेनवॉश करता था। नीतू रोहरा को भी यही किताब देकर ब्रेनवॉश किया था। बाद में नीतू का धर्मांतरण कर नसरीन बना दिया।

UPATS ने छांगुर पीर के बेटे महबूब को पहले किया गिरफ्तार

छांगुर पीर की गिरफ्तारी की प्लानिंग UPATS काफी समय पहले ही कर चुकी थी। इसी डर से छांगुर पीर और नसरीन अंडरग्राउंड हो गए थे। तभी दोनों ने धर्मांतरण का नेटवर्क का अड्डा होटल में बनाया। इसी ठिकाने से हिंदूओं को धर्मांतरण और लव जिहाद में फँसाते थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, UPATS ने नवंबर 2024 में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर और उसके बेटे महबूब समेत 10 लोगों पर FIR दर्ज की थी। इसमें नसरीन के पति और छांगुर के सहयोगी नवीन रेहरा का नाम भी शामिल था।

FIR दर्ज होने के बाद ATS ने 08 अप्रैल 2024 को छांगुर के बेटे महबूब को गिरफ्तार कर लिया। तभी से छांगुर पीर को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा। इसके बाद छांगुर और नसरीन ने अंडरग्राउंड होने की योजना बनाई। फिर लखनऊ के एक होटल में जाकर ठहरे।

उधर, UPATS लगातार उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थी। छांगुर पर ₹50 हजार का इनाम भी घोषित किया गया। इसके बाद शनिवार (08 जुलाई 2025) को छांगुर पीर और नसरीन को होटल से रंगे हाथों पकड़ लिया गया। दोनों यहाँ 70 दिन से रुके हुए थे।

छांगुर पीर और उसका नेटवर्क

जलालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

वक्फ का नाम लेकर तेजस्वी यादव ने भड़काया, मोतिहारी में ‘शांतिदूतों’ ने अजय यादव को काट डाला: गाँधी मैदान से विपक्ष ने लगाई थी हिंसा की जो आग, इस बार मुहर्रम पर बिहार उसी में जला

पटना के गाँधी मैदान में 29 जून 2025 को वक्फ कानून के विरोध में एक रैली आयोजित की गई। ‘वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ’ रैली में तेजस्वी यादव, पप्पू यादव, AIMIM के अख्तरुल ईमान समेत विपक्ष के कई बड़े नेता इस रैली का हिस्सा बने।

इमारत-ए-शरिया नाम के एक मजहबी संगठन की ओर से आयोजित की गई इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ और लोग शामिल हुए। हालाँकि वक्फ से परे इस रैली का असली मकसद बिहार का विधानसभा चुनाव 2025 था।

बिहार में कुल 18 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। ये किसी भी पार्टी का खेल बनाने या बिगाड़ने में अपनी अहम भूमिका निभा स कती है। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 में 243 विधानसभा सीटों में लगभग 48 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का बहुल है।

इन सीटों पर 20-40% या कुछ जगहों पर उससे भी अधिक मुस्लिम आबादी शामिल है। इसी के कारण RJD, कॉन्ग्रेस और AIMIM के नेता इस रैली में शामिल होकर मुस्लिम वोटर्स को अपने हक में करने की हर जुगत भिड़ाती दिखी।

रैली में BJP पर जमकर निशाना साधा गया। तेजस्वी यादव ने तो अपने वोटर्स को लुभाने के लिए गजब का नारा ही परोस दिया। उन्होंने कहा, “ये देश किसी के बाप का नहीं है। ये हम सबका हिंदुस्तान है।” अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने जमकर जहर उगला। मुस्लिम वोटर्स को लुभाने के चक्कर में वह ये तक कह गए कि उनकी सरकार बनने पर वक्फ संशोधन अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।

बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि BJP न सिर्फ वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है पर साथ ही मुस्लिमों, पिछड़ों और दलितों के वोट देने के अधिकार को भी छीनना चाहती है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव कर 4.7 करोड़ गरीबों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।

अपने भाषण में तेजस्वी ने ऐलान कर दिया कि बिहार में उनकी सरकार बनेगी तो वे इस वक्फ संशोधन कानून को लागू ही नहीं होने देंगे। रैली का हिस्सा कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान खा प्रतापगढ़ी भी रहे। उन्होंने वक्फ संसोधन बिल को बर्बादी कारण बता दिया और मुसलमानों के लिए इसे नामंजूर करार दे दिया।

इनके साथ AIMIM के नेता अख्तरुल ने कहा कि ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश है। ये वक्फ बोर्ड की आजादी छीनता है। बात इन दो-चार बयानों पर नहीं रुकी। सीपीआई माले के दीपंकर भट्टाचार्य ने बिल को हिंदुस्तान पर हमला बता दिया।

वहीं, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी खुद ही अपने पक्ष में करार दे दिया। उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस बिल के खिलाफ फैसला उनके पक्ष में आएगा।

कुल मिलाकर रैली में भड़काऊ बयानबाजी चरम पर रही। शरिया, वक्फ और मुस्लिम अधिकारों की बातें उठाकर हर पार्टी के नेता मुस्लिम वोटों को अपने हक में लाने की भरसक कोशिश करते दिखे।

अपनी राजनीति और तुष्टिकरण में भले ही अलग अलग पार्टियाँ एक साथ आकर ये जताने की कोशिश कर रहीं थीं। लेकिन असल में इनमें से हर पार्टी का अपना अपना एजेंडा चल रहा था। इस राजनीति के चक्कर में बिहार में इन नेताओं ने हिंदू- मुस्लिम संघर्षों और सांप्रदायिक तलाव को किस कदर आग में झोंका इसका अंदाजा अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

हिंसक संघर्षों में हुआ इजाफा

तेजस्वी यादव ने वक्फ बिल के विरोध में लोगों को सड़क पर उतरने तक की बात तक कह डाली थी। उन्होंने कहा कि RJD ने इस कानून का विरोध संसद में भी किया है। हम इस लड़ाई को हर जगह लड़ेंगे, चाहे वह सदन हो, सड़क हो या अदालत।

इस भड़काऊ बयान का असर इस कदर हुआ कि रैली के होने के 10 दिन के अंदर ही मजहबी हिंसा देखने को मिलने लगी। मोताहारी से लेकर कटिहार, भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, अररिया समेत बिहार के कई क्षेत्रों में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर पहुँच गए। कई जगहों पर तो हिंदुओं को अपनी जान तक गँवानी पड़ गई।

6 जुलाई 2025 को मोतिहारी के मेहसी थाना के तहत कनखट्टी बाजार में अजय यादव अपने भाइयों के साथ मुहर्रम का जुलूस देख रहे थे। इसी बीच मुहर्रम में करतब दिखा रहे कुछ लोगों से कहासुनी हो गई। इसके बाद हिंदुओं पर तलवार से हमला कर दिया गया। अजय यादव के गले पर तलवार से वार किया गया। इससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद 12 लोगों को हिरासत में लिया गया।

इसी दिन मुहर्रम के जुलूस के दौरान कटिहार में महावीर मंदिर पर पत्थरबाजी की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ। इसमें मुस्लिम युवक मंदिर के साथ कई घरों और दुकानों पर पथराव करते दिखे। इसके बाद हिंदू समुदाय में आक्रोश देखा गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।

दरभंगा में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक ASI को चाकू मार दिया गया। इसी में बिजली के तार की चपेट में आने से एक आदमी की मौत भी हो गई।

मुजफ्फरपुर के बरियापुर में भी हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प हुई। इसमें 2 लोग घायल हो गए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

इसी तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति धमकी दे रहा है कि बिहार में मुस्लिम बहुल है। ऐसे में बिहार में वही होगा जैसा मुस्लिम समुदाय चाहेगा।

इसके साथ ही भागलपुर के लोदीपुर थाना क्षेत्र के उस्तू गाँव में अखाड़ा घुमाने को लेकर झड़प हुई। इसमें लाठी- डंडे चलने के साथ साथ फायरिंग भी हुई। इसके तहत 8 लोग घायल हुए। अररिया के फारबिसगंज में मुहर्रम जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई और लाठियाँ चली। इसके बाद पुलिस को क्षेत्र में तैनात किया गया।

मुहर्रम जहाँ एक ओर मातम का संदेश देता है तो वहीं, मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाना क्षेत्र से ताजिया जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जुलूस हैदरे अखाड़ा की ओर से निकला। पुरानी पेठिया क़र्बला जाने के दौरान रास्ते में फिलिस्तीन का झंडा और कई हथियार लहराए गए। मामले पर मीनापुर थाना की पुलिस जाँच कर रही है।

बिहार में चुनाव नजदीक है। ऐसे में इस तरह की बयानबाजी, रैली, संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव लोगों के मन में भावनात्मक तौर पर घर कर रहे हैं। इससे भले ही राजनीतिक पार्टियाँ अपने वोट बैंक साध रही हों लेकिन लोगों के बीच सामाजिकता का अभाव बढ़ता जा रहा है। नतीजा ये होगा कि किसी विपदा के समय भी ये समाज चाहकर भी एकजुट नहीं हो पाएगा।

धर्मांतरण गिरोह की सम्पत्तियाँ जब्त करेगी UP सरकार, CM योगी ने किया ऐलान: जलालुद्दीन को बताया राष्ट्र का दुश्मन, बुलडोजर से कोठी ‘समतल’

यूपी में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वाले छांगुर पीर को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए गये लोगों को ऐसी सजा दी जाएगी जो एक उदाहरण बने। उन्होंने छांगुर पीर को राष्ट्रविरोधी करार दिया।

राष्ट्र विरोधी है जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर- सीएम

सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यूपी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित जलालउद्दीन की गतिविधियाँ समाज विरोधी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी भी हैं।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएँगी और उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

सीएम के मुताबिक, “राज्य में शांति, सौहार्द और महिलाओं की सुरक्षा को भंग करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्हें कानून के अनुसार ऐसी सजा दी जाएगी, जो समाज के लिए एक उदाहरण बने।”

छांगुर पीर की कोठी पर चला बुलडोजर

सीएम योगी की प्रतिक्रिया से पहले बलरामपुर स्थित छांगुर पीर की महिला सहयोगी नीतू नवीन रोहरा के घर पर बुलडोजर चलवाया था। ये आलीशान घर अवैध तरीके से बनाया गया था और यहाँ से छांगुर पीर अपने गैंग के साथ रहता था और धर्मांतरण के काले कारनामे करता था।

शनिवार (5 जुलाई 2025) को यूपी एटीएस ने छांगुर पीर और उसकी गर्लफ्रैंड नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया था। यह गिरोह बलरामपुर के उटरौला में लंबे समय से सक्रिय था। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को विदेशों से ₹100+ करोड़ की फंडिंग मिली है।

छांगुर बाबा और उसका नेटवर्क

जमालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

मातम का मुहर्रम या हिंसा का मुहर्रम? कहीं मंदिर में तोड़फोड़ तो कहीं हिन्दू को चाकू से गोदा: बिहार, UP, MP, झारखंड… इस्लामी जुलूस की आड़ में हर जगह कट्टरपंथ का प्रदर्शन

इस्लामी कट्टरपंथियों ने साल 2025 का मुहर्रम में जमकर हिंसा की है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पूरे देशभर में कहीं इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। तो कहीं मंदिर पर पत्थर चलाए। कहीं रास्ते को लेकर तो कहीं झंडे को लेकर उत्पात मचाया। ऑपइंडिया ऐसी ही सारी घटनाओं को एक साथ संकलित कर रहा है।

मोतिहारी में अजय यादव की तलवार से गला रेतकर हत्या

बिहार के मोतिहारी जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान अजय यादव की तलवार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने अजय यादव के दो भाइयों पर भी हमला बोला। धनंजय यादव और नवल किशोर यादव बुरी तरह घायल हुए हैं। पुलिस मामले में 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

दरभंगा में ASI अमित कुमार पर चाकू से हमला

बिहार के दरभंगा में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम भीड़ ने बवाल मचाया। फिर शांत करने पहुँची पुलिस पर भी हमला किया। ASI अमित कुमार पर मोहम्मद रब्बानी ने चाकू से वार किया। ASI को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपित मोहम्मद रब्बानी को गरिफ्तार कर लिया गया है।

बिहार के अररिया में इस्लामी कट्टरपंथियों ने थानेदार का सिर फोड़ दिया

बिहार के अररिया जिले में मुहर्रम जुलूस में शामिल मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला किया। पुलिस बिना अनुमति निकाले जा रहे जुलूस को रोकने पहुँची थी। यहाँ हथियार से लैस इस्लामी कट्टरपंथियों ने वीडियोग्राफी कर रहे ड्रोन कैमरा के ऑपरेटर की पिटाई कर कैमरा और मोबाइल छीन लिया था। बीच-बचाव में लगी पुलिस से मारपीट की गई।

घटना में थानेदार मिथिलेश कुमार का सिर फट गया। वहीं, कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हिंदू ई-रिक्शा चालक से मारपीट

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में मुहर्रम का चंदा न देने पर हिंदू ई-रिक्शा चालक बेदन घोष की बेरहमी से पिटाई की गई। दरअसल, एक दिन पहले बेदन घोष चंदा दे चुका था। लेकिन दोबारा चंदा देने पर उसने इनकार किया था। जिसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने बेदन घोष पर पत्थर से हमला कर दिया। बंगाल पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दे दिया।

रतलाम में ‘हिंदू राष्ट्र’ लिखे बैनर को जलाया

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिमों ने मुँह में पेट्रोल डाल आग लगाकर ‘हिंदू राष्ट्र’ लिखा बैनर जलाया गया। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठन ने विरोध जताते हुए हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

UP के सीतापुर में हिंदू दुकान मालिक से मारपीट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में मुहर्रम पर ताजिया का जुलूस निकाल रही मुस्लिम भीड़ ने हिंदू दुकान मालिक बेचेलाल संग मारपीट की। विवाद ईंट हटाने को लेकर शुरू हुआ था। दरअसल, ताजिया जुलूस बेचेलाल की दुकान तक पहुँचा। मुस्लिम भीड़ने ईंट हटाने को कहा, बेचेलाल के इनकार करने पर लाठी-डंडे से हमला किया। मौके पर पुलिस पहुँचते ही इस्लामी भाग निकले।

हाजीपुर में मुस्लिम भीड़ ने बस में लगाई आग

बिहार के हाजीपुर जिले में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में भीड़ को हटाने के लिए बस ने हॉर्न बजाया। तो इस्लामी कट्टरपंथी ने गुंडागर्दी पर उतर आए। बस में से सवारियाँ को उतारा और बस को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।

पुणे में मुहर्रम पर खामेनेई के लगे पोस्टर

महाराष्ट्र के पुणे के लोनी खलबोर गाँव में मुहर्रम पर ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बैनर लगाए गए। हिंदू संगठन ने शिकायत पर पुलिस ने बैनर हटवाए। पुलिस ने बताया कि बिना अनुमति के बैनर लगाए गए थे, इसीलिए संबंध लोगों को नोटिस भेजा गया।

बरेली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के लगाए नारे

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के फरीदपुर में ताजिया रखने के दौरान मुस्लिम भीड़ ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने मोहल्ले के दुकानों को तोड़ने के साथ व्यापारियों को जान से मारने और लूटने की भी धमकी दी। मामले में पुलिस ने मोबीना, अनस और नाजिम को गिरफ्तार किया है।

बिहार के जमुई में पाकिस्तान और फिलिस्तान का झंडा फहराया

बिहार के जमुई जिले के पैरामटिहाना गाँव में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में पाकिस्तान का झंडा लहराया। वहीं, जमुई के ही भछियार मोहल्ले में मुहर्रम जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा फहराया गया। दोनों मामले की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसके बाद हिंदू संगठन ने विरोध-प्रदर्शन किया।

बिलासपुर में मंदिर की छत पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया ‘शेर नाच’

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मुहर्रम जुलूस के दौरान शेर की वेशभूषा में इस्लामी कट्टरपंथी ने मंदिर में उत्पात मचाया। मंदिर की छत पर चढ़कर नाचने लगे। वीडियो वायरल होने पर हिंदू संगठन ने विरोध जाहिर किया। इसके बाद पुलिस तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

बिहार के कटिहार में महावीर मंदिर पर हमला, हिंदू-पुलिस पर पथराव

बिहार के कटिहार जिले में मुहर्रम के जुलूस के दौरान नया टोला स्थित महावीर मंदिर पर पथराव किया। घटना का वीडियो भी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। वीडियो में इस्लामी कट्टरपंथी मंदिर पत्थर फेंक रहे हैं। एक अन्य वीडियो में कट्टरपंथी हिंदू घरों और सड़क किनारे खड़ी गाड़ी पर ईंट के बड़े-बड़े टुकड़े फेंके जा रहे हैं।

घटना के बाद तनाव के माहौल को देखते हुए इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। घटना में पुलिसकर्मी समेत 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

उज्जैन में मस्जिद के पास हंगामा

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूर वाली मस्जिद के पास हंगामा हुआ। उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की जिद की। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हमला किया गया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जुलूस के आयोजक इरफान खान उर्फ लल्ला समते 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।

लखीमपुर खीरी में हिंदू घरों पर फेंका सफेद पाउडर, विरोध पर पथराव

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में विवाद हो गया। जुलूस में शामिल मुस्लिम भीड़ ने हिंदू परिवार के घर पर सफेद पाउडर फेंक दिया। परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया तो भीड़ ने हिंदू परिवार के बाकी घरों में पथराव किया।

पुलिस ने पीड़ित पंकज की तहरीर के आधार पर 4 लोग तालिब, जाहिद, सुलेमान और नूरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। ऑप इंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।

रायबरेली में मुस्लिम भीड़ ने की तोड़फोड़

उत्तर प्रदेश के रायबरेली के कुढ़ा गाँव में बिना अनुमति से निकाले गए मुहर्रम के जुलूस के दौरान जमकर विवाद हुआ था। जुलूस में शामिल लोगों ने आपत्तिजनक नारेबाजी की। लोगों ने विरोध किया तो मुस्लिम लोग उग्र हो गए और हिंसा शुरू कर दी।

उन्होंने लाठी-डंडों और हथियारों से हमला किया। उपद्रवियों ने 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ डाले। पुलिस ने पूरे फाजिल गाँव निवासी साजिद अली, सोनू, फूलबाबू, अट्टू, अमरोज, शब्बीर समेत 150 लोगों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

कोलकाता में सियालदह रेलवे स्टेशन पर खूनी संघर्ष

कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर मुहर्रम से पहले कई मुस्लिम युवक तलवारों से लैस होकर लोकल ट्रेन में चढ़ गए। उन्होंने हथियार लहराते हुए एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के वीडियो में व्यक्ति को खून से लथपथ देखा जा सकता है। वहीं, रेलवे स्टेशन पर भी जगह-जगह खून पड़ा दिखा।

महाराजगंज में बीजेपी नेता से मारपीट

यूपी के महाराजगंज में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। घर लौटते समय जुलूस की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज कर हाथापाई की।

सूचना पर पहुँची पुलिस ने बीजेपी नेता को सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव ने बिहार पर शुरू किया प्रोपेगेंडा, अब योगेंद्र यादव से लेकर ADR तक सारे ‘आंदोलनजीवी’ भी एक्टिव: जॉर्ज सोरोस के पैसों से चलता है ‘भारत को बदनाम करो’ का धंधा

बिहार में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियाँ चालू कर दी हैं। इसी कड़ी में चुनाव आयोग मतदाता सूची को सही कर रहा है। इस कदम का राहुल गाँधी, तेजस्वी यादव और पप्पू यादव समेत कई नेताओं ने विरोध करना चालू कर दिया है।

मतदाता सूची से अपात्र और अवैध लोगों को हटाने के फैसले को यह पूरा गुट ऐसे पेश कर रहा है जैसे यह उनके वोट काटने की साजिश हो। इस खेल में अब आंदोलनजीवी और चन्दाजीवी गैंग भी कूद गया है। उसने इस मामले को कोर्ट तक पहुँचा दिया है।

चुनावी प्रकिया को सुप्रीम कोर्ट में RJD, कॉन्ग्रेस, TMC की महुआ मोइत्रा और NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज और योगेन्द्र यादव जैसे आंदोलनजीवी लेकर पहुँचे हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को रोकने की माँग की है।

इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई 10 जुलाई, 2025 को होनी है। बिहार चुनाव से पहले मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी इस प्रक्रिया को मुद्दा बनाने की शुरुआत राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने की थी।

NRC-CAA जैसा प्रोपेगेंडा खड़ा करने का हो रहा प्रयास

विपक्षी नेताओं के प्रोपेगेंडा को आगे ले जाने का बीड़ा अब इन संस्थाओं ने उठाया है। इनमें NGO, आंदोलनजीवी और एक्टिविस्ट टाइप जमात शामिल है। यह सब तब हो रहा है जब चुनाव आयोग इस मामले पर सभी शंकाएँ दूर कर चुका है और प्रक्रिया अभी भी सुचारू ढंग से चल रही है।

चुनाव आयोग ने मतदाताओं को अपने दस्तावेज देने के लिए 25 जुलाई, 2025 तक का समय भी दे रखा है। इसके लिए मतदाताओं को जागरूक भी किया जा चुका है। चुनाव आयोग ने खुद बताया है कि वह अब तक 2.88 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन कर चुका है। यह बिहार में कुल मतदाताओं का 38% है।

इस सबके बावजूद भी पूरी प्रक्रिया को कोर्ट में ले जाना दिखा रहा है कि इस पर विपक्ष और NGO-आंदोलनजीवी गैंग NRC-CAA जैसा बवाल खड़ा करना चाहते हैं। इसे भी मुस्लिम विरोधी कदम करार दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मजहबी आधार पर ध्रुवीकरण किया जा सके।

NGO-आंदोलनजीवी बस मुखौटा भर

इस काम के लिए यह NGO और आंदोलनजीवी गैंग मुखौटा बना है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका ले जाने वाले यह गैंग पहले भी चुनावी प्रक्रिया पर अड़ंगे लगाते रहे हैं और इनका इतिहास मोदी सरकार के विरोध का रहा है। इस मामले में याचिका लगाने वाला एक NGO तो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है।

सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चुनाव आयोग के कदमों के खिलाफ याचिका लगाने वाला ADR इससे पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी अड़ंगा लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मोदी सरकार से कानून बनाने को कहा था, जब तक क़ानून ना बने, तब तक एक समिति बनाई थी, जिसमे प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष को रखा था।

इस समिति में CJI भी रखे गए थे। यह व्यवस्था तब तक ही चलनी थी जब तक सरकार कानून ना बना दे। मोदी सरकार ने इस पर कानून बनाया था और CJI को इसमें नहीं रखा था। इसके खिलाफ ADR याचिका लेकर पहुँच गया था। गौरतलब है कि यह कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पूरी तरह से सरकार के पास थी।

इसकी मदद भी प्रशांत भूषण जैसे वकील करते आए हैं, जिनका काम ही एजेंडा चलाना है। प्रशांत भूषण पर दिल्ली दंगों से पहले हुई बैठक आयोजित करने का आरोप है। प्रशांत भूषण लगातार देश विरोध में खड़े देखे जाते हैं।

जॉर्ज सोरोस से है याचिका डालने वाले NGO का लिंक

बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ याचिका डालने वाले NGO का लिंक जॉर्ज सोरोस से भी है। ADR असल में एक ऐसा NGO है जिसके पास FCRA लाइसेंस है। इसने लगातार मोदी सरकार को निशाने पर लिया है।

ADR को चुनावी और ‘राजनीतिक सुधार’ और ‘चुनावी निगरानी’ के लिए फोर्ड फाउंडेशन, गूगल, हिवोस और ओमदियार नेटवर्क से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होता है। हिवोस संगठन जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है और विभिन्न सरकारों से पैसा पाता है।

HIVOS की 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह डच विदेश मंत्रालय, ग्लोबल फंड, स्वीडिश इंटरनेशनल डेवलपमेंट एड, मिलेनियम चैलेंज अकाउंट, द स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और बाकी जगहों से पैसा लेता है।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कि उसकी कमाई के प्रमुख जरिए में फोर्ड फाउंडेशन भी था। ADR सीधे तौर पर फोर्ड फाउंडेशन और ओमदियार नेटवर्क से पैसे लेता रहा है। उसने
2016-2017 में फोर्ड फाउंडेशन से ₹70 लाख और और ओमदियार नेटवर्क से ₹2 करोड़ मिले हैं।

इसके अलावा वर्ष 2017-18 ने ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹2 करोड़ मिले हैं। 2018-19 में भी ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹60 लाख से अधिक मिला। वित्त वर्ष 2020-21 में भी ADR को ओमदियार नेटवर्क से ₹1.13 करोड़ मिले।

ADR को पैसा देने वाले उस द वायर को भी पैसा देते हैं जो फर्जी खबरें गढ़ता है। अब यही ADR बिहार चुनाव के मामले में कूद गया है और एक कहानी गढ़ना चाह रहा है। जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठन से पैसा लेता था। यही जॉर्ज सोरोस भारत में मोदी सरकार को कमजोर करने की बात कर रहा था।

जहाँ एक ओर ADR कोर्ट में इस मामले को फँसा रही है तो वहीं राहुल गाँधी 9 जुलाई, 2025 को चुनाव आयोग की प्रक्रिया के विरुद्ध बिहार जा रहे हैं।

भाजपा यह भी आरोप लगा चुका है कि सोनिया गाँधी का लिंक भी उस संस्थान से है जो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है। जॉर्ज सोरोस का लम्बे समय से प्रयास भारत में अस्थिरता पैदा करने का रहा है। इस बार उसने यह दाँव बिहार चुनाव पर लगाया है। बिहार इसलिए क्योंकि यहाँ के चुनाव देश की राजनीति पर असर डालते हैं।

क्या बिहार में हार का विपक्ष ने खोज लिया बहाना?

बिहार में यदि NDA चुनाव हारती है तो इसका असर सीधे तौर पर केन्द्र सरकार पर पड़ेगा। केन्द्र सरकार में JDU बड़ी सहयोगी। चुनावी लिस्ट को लेकर हो रही हुआ-हुआ उससे ही संबधित दिखाई पड़ती है। ADR, योगेन्द्र यादव जैसे एक्टिविस्ट और राहुल गाँधी मतदाता लिस्ट का मुद्दा तब उठा रहे हैं जब चुनाव आयोग सब जानकारियाँ स्पष्ट कर चुका है।

राहुल गाँधी इससे पहले महाराष्ट्र चुनाव पर भी भ्रम की स्थिति बनाने का प्रयास कर चुके हैं। राहुल गाँधी ने यह प्रयास तब चालू किए हैं जब उनको विश्वास हो गया है कि मृतप्राय हो चुकी उनकी पार्टी सीधे तौर पर भाजपा से मुकाबला नहीं कर सकती। अब उन्होंने चुनाव और चुनावी प्रक्रिया को निशाना बनाना चालू किया है।

बिहार में वोटर लिस्ट का विरोध करना उसी कड़ी का हिस्सा है। पहले राहुल गाँधी का चुनावी रोना सिर्फ EVM मशीनों तक सीमित था, लेकिन अब यह बढ़ कर वोटर लिस्ट और कुछ दिनों में इससे भी आगे पहुँचेगा, ऐसा लगता है।

हिन्दुओं ने मनाया मुहर्रम, क्योंकि गाँव में नहीं था कोई मुस्लिम… लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी ने ‘बुत’ तोड़ असलियत दिखाई: कर्नाटक में 7 दिनों के भीतर ही दिख गया ‘धर्म’ और ‘मजहब’ का फर्क

कर्नाटक में जुलाई के पहले सप्ताह में दो अलग-अलग तरह की खबरें सामने आई। यादगीर जिले के एक गाँव में हिंदुओं ने पूरे उत्साह के साथ मुहर्रम मनाया। खास बात ये है कि गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। वहीं शिवमोग्गा में एक मुस्लिम व्यक्ति ने भगवान गणेश की मूर्ति का अपमान किया।

पहले बात करते हैं यादगीर जिले के तलावरगेरे गाँव की जहाँ एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता। बावजूद इसके वहाँ हिंदू समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए पूरे श्रद्धा और उत्साह से मुहर्रम मनाया। यह परंपरा साल 1925 से चली आ रही है। कहा जाता है कि उस समय एक सूफी संत ने गाँव में दर्शन दिए थे और वादा किया था कि अगर उन्हें गाँव में स्थापित किया जाए तो प्लेग और सूखे से मुक्ति मिलेगी। इसके बाद ग्रामीणों ने ऐसा ही किया। ग्रामीण उनके कहे मुताबिक मुहर्रम मनाते हैं। दशकों से चली आ रही ये परंपरा आज भी कायम है।

गाँववाले हर साल छह दिन तक चलने वाला मुहर्रम उत्सव मनाते हैं। इसमें हजारों की संख्या में हिंदू श्रद्धालु शामिल होते हैं, जुलूस निकालते हैं, गीत गाते हैं, और हसन, हुसैन के प्रतीक रूप में पारंपरिक अलाई के पुतले लेकर चलते हैं। गाँव के मजहबी स्थलों की रंगाई -पुताई की जाती है, प्रसाद बाँटा जाता है और आस-पास के गाँवों से भी लोग आकर संत से आशीर्वाद लेते हैं।

अब बात करते हैं शिवमोग्गा की जहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा को मुस्लिम युवक ने तोड़ डाला और नागारा की प्रतिमा को नाले में फेंका गया।

शिवमोग्गा में मूर्तियों का अपमान, हिंदुओ में आक्रोश

3 जुलाई 2025 को शिवमोग्गा जिले के राघीगुड्डा के बंगरप्पा ले आउट में सैयद नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति पर पैर रखने और नागारा की मूर्ति को नाले में फेंकने की घटना सामने आई। ये मूर्तियाँ सार्वजनिक पार्क में स्थानीय लोगों ने स्थापित की थी।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। वीडियो में सैयद यह कहते हुए दिखाई दे रहा है “हम अपने घर के बाहर मंदिर क्यों देखें?” हालाँकि जानकारी के अनुसार बाद में उसने इसके लिए माफी माँगी।

पुलिस ने इस मामले में सैयद और उसके साथी रहमतुल्ला को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय विधायक एस. एन. चन्नाबसप्पा और पूर्व उपमुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा ने मौके पर जाकर घटना की निंदा की और सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस अधीक्षक (SP) मिथुन कुमार ने बताया कि जाँच चल रही है और आरोपितों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

जहाँ यादगीर जैसे गाँव साझा परंपराओं और विश्वास की मिसाल बन रहे हैं, वहीं शिवमोग्गा की घटना ने यह याद दिला दिया कि अगर नफरत को समय रहते रोका न जाए, तो वह समाज में जहर घोल सकती है।

मुहर्रम का चन्दा देने से किया मना तो इस्लामी भीड़ ने हिन्दू E-रिक्शा ड्राइवर को पीटा, सिर पर पत्थर मारा: पश्चिम बंगाल के बीरभूम की घटना, परिवार बोला – पुलिस नहीं कर रही कोई कार्रवाई

मुस्लिम भीड़ ने मुहर्रम से पहले दोबारा चंदा न देने पर एक हिंदू ई-रिक्शा चालक की बेरहमी से पिटाई की। शुक्रवार (4 जुलाई) की ये घटना पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सैंथिया कस्बे में हुई है।

दरअसल बेदन घोष नाम के ई-रिक्शा चालक से मुहर्रम से पहले चंदा के तौर पर 50 रुपए माँगे गए। उसने गुरुवार (3 जुलाई) को इसे दे दिया। बेदन घोष से दोबारा 50 रुपए चंदा माँगा गया। गुस्से में उसने पैसा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने बेदन घोष को पीटा।

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, “जब वे लोग उसे पीट रहे थे, तो उनमें से एक युवक ने उसके सिर पर पत्थर से हमला किया। इसमें वह घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन मरीज की स्थिति अभी कैसी है उसके बारे में नहीं पता।”

घटना के बाद गुस्साए लोग सड़कों पर आ गए और जाम लगा कर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, “घटना हुए एक घंटा बीत चुका है, लेकिन पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया है। हमने अब विरोध में इस सड़क को जाम कर दिया है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”

पीड़ित बेदन घोष के पिता तमाल घोष ने बताया, “मेरा बेटा यात्रियों को छोड़ने के लिए वहाँ गया था। उसने पिछले दिनों चंदा दिया था। आज जब वह वहाँ पहुँचा तो उन्होंने उससे फिर से चंदा माँगा। उसने उन्हें बताने की कोशिश की कि उसका आज का काम अभी शुरू हुआ है, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। मैं यह नहीं बता सकता कि उन्होंने मेरे बेटे को कितनी बेरहमी से पीटा। उसे कुछ स्थानीय लोगों ने बचाया।”

पीड़ित के पिता ने पुलिस पर मुस्लिम भीड़ के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है, “प्रशासन क्या कर रहा है? वे (मुस्लिम) हम पर बार-बार हमला करते हैं, हम पर अत्याचार कर रहे हैं।”

पीड़ित बेदन घोष से जब मीडिया ने बात की तो उसने बताया कि कैसे सैंथिया में मुस्लिम युवक मुहर्रम के चंदे के लिए हिंदुओं को परेशान कर रहे थे? उसने बताया “गुरुवार (3 जुलाई) को जब मैं अपने बेटे को स्कूल छोड़ने गया तो 8-10 मुस्लिम युवकों ने मुझे पकड़ लिया। उन्होंने मुझसे चंदा माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं तुरंत उन्हें पैसे दे दूँ।”

घोष को मारने-पीटने की धमकी दी गई। इस दौरान घोष ने आश्वासन दिया कि वह अपने बेटे को स्कूल छोड़ने के बाद चंदा देने के लिए वापस आएँगे। बाद में उन्होंने मुस्लिम युवकों से बचने के लिए अलग रास्ते से घर जाने लगा। लेकिन उसे फिर घेर लिया गया और मुस्लिम भीड़ ने उसे मारा पीटा।

पीड़ित की सरेआम बेरहमी से हुई पिटाई के विरोध में स्थानीय हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया और मुस्लिम अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए सड़क जाम किया। इसके बाद प्रशासन की नींद खुली और आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया गया।

योगी सरकार ने चलाया ‘छांगुर पीर’ की कोठी पर बुलडोजर, धर्मांतरण गैंग के सरगना ने हिन्दू महिला के नाम करवाई थी रजिस्टर: CM योगी बोले- ऐसी सजा देंगे, जो उदाहरण बने

उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चला रहे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चलाया गया। कोठी को अवैध तरीके से बनाया गया था। इसी कोठी में छांगुर पीर अपने गैंग के साथ रहता था और यहीं से धर्मांतरण के काला कारनामे करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोठी की जमीन नीतू नवीन रोहरा के नाम पर थी। इस कोठी में छांगुर पीर, नवीन रोहरा और नीतू रोहरा के साथ रहता था।

छांगुर पीर के धर्मांतरण गिरोह की जाँच करते हुए पुलिस को इस कोठी का पता लगा। मधुपुर गाँव स्थित आलीशान कोठी को सरकारी जमीन पर बनाया गया था। जिसके बाद अब बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान SDM, CO समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मंगलवार (08 जुलाई 2025) सुबह 9 बजे प्रशासन और पुलिस की टीम कोठी पर पहुँची। यहाँ करीब 10 बजे दो बुलडोजर चलाए गए। इसके बाद भी मकान का गेट नहीं खुला। पुलिस ने गेट काटने के लिए गैस कटर मंगवाया। फिर गेट का लॉक काटकर टीम और बुलडोजर घर के भीतर घुसे।

छांगुर के परिवार ने जताया विरोध

बुलडोजर एक्शन से एक दिन पहले सोमवार (07 जुलाई 2025) को पुलिस ने कोठी के बाहर गेट पर बेदखली का नोटिस चस्पा किया था। प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि बेदखली के नोटिस के बाद मधुपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

वहीं, प्रशासन की कार्रवाई के बाद छांगुर की आलीशान कोठी में रह रहे लोगों ने आक्रोश जताया। छांगुर की बहू साबिरा पहली बार बाहर निकली और खूब बवाल मचाया। साबिरा ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से बच्चे डरे हुए हैं। CO राघवेंद्र सिंह ने आरोपों को खारिज किया हैं।

CM योगी ने छांगुर पीर के खिलाफ दिया सख्त एक्शन का आश्वासन

बलरामपुर से धर्मांतरण नेटवर्क चला रहा जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर की गिरफ्तारी के बाद CM योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम ने कहा कि जलालुद्दीन की गतिविधियाँ ‘राष्ट्र विरोधी’ हैं। सीएम ने मामले में अपने अधिकारिक हैंडल पर ट्वीट किया है।

सीएम ने लिखा, “हमारी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित जलालुद्दीन की गतिविधियाँ समाज विरोधी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी भी हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने तीखे अंदाज में आगे कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएँगी और उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।”

पुणे में छांगुर पीर की करोड़ों की प्रॉपर्टी

STF ने खुलासा किया है कि छांगुर पीर ने पुणे में करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई थी। यह प्रॉपर्टी लोनावला में 16 करोड़ रुपए में खरीदी गई थी। ये प्रॉपर्टी छांगुर पीर के सहयोगी मोहम्मद अहमद खान के नाम पर रजिस्टर थी। छांगुर पीर के धर्मांतरण नेटवर्क पर जाँच करते हुए पहले ही साफ हो गया था कि उसे विदेशों से फंडिंग मिल रही थी।

छांगुर पीर का नेटवर्क UAE तक सक्रिय

UPATS अब छांगुर पीर के विदेशी फंडिग का नेटवर्क खंगाल रही है। इसके लिए छांगुर पीर की करीबी नीतू नवीन रोहरा के UAE की यात्रा की जानकारी मिली है। सातवीं कक्षा पास नीतू ने साल 2014 से 2019 तक 19 बार UAE की यात्रा की है। इसका कारण जाँच एजेंसियाँ तलाश करने में जुटी हैं।

वहीं, नवीन घनश्याम रोहरा ने भी 2016 से 2020 के बीच 19 बार UAE की यात्रा की। इसमें नीतू और नवीन साथ में केवल एक बार 08 अप्रैल 2017 में UAE गए थे। जबकि वापस अलग-अलग ही लौटे थे। ऐसे में जाँच एजेंसियों को कंफर्म हो गया है कि छांगुर पीर का नेटवर्क UAE में भी है।

विदेशी फंडिंग और संपत्तियाँ

ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि छांगुर पीर ने 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है। जाँच में पता चला है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियाँ खरीदी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फंडिंग से जलालुद्दीन पीर ने लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और शोरूम की खरीदारी की है।

गिरोह के पास 40 से अधिक बैंक खाते हैं। इनमें ₹100 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ है। यह पैसा कथित तौर पर धर्मांतरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। खासकर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आई है।

राज्य महिला आयोग ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

छांगुर पीर पर हिंदू युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण करने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने रोष जताया है। आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने छांगुर पीर को फाँसी की सजा दिलाए जाने की माँग की है।

उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा, “हमारी बेटियाँ कोई प्रयोगशाला नहीं हैं, जहाँ धर्मांतरण की जहरीली सोच का टेस्ट हो। जो बेटियों को छलकर उनका धर्म छीनते हैं, वे समाज के दुश्मन हैं। ऐसे लोगों को फाँसी की सजा मिलनी चाहिए।”

बबिता चौहान ने आगे कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ ने धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह चुप न रहे और इस मुद्दे पर आवाज उठाए। बेटियों को झूठ, लालच और धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर करने वालों के लिए फाँसी ही एकमात्र सजा होनी चाहिए।”

उत्तर प्रदेश में 5000 सरकारी स्कूलों का होगा विलय, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी लगाई मुहर: जानिए क्यों हो रहा था विरोध, सरकार ने क्या बताए कारण

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में हुए एक बड़े बदलाव को इलाहाबाद हाई कोर्ट की मंजूरी मिल गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में स्कूलों के विलय के फैसले को सही ठहराया है। हाई कोर्ट ने इसके विरुद्ध दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले को जहाँ सरकार ने छात्रों के हित में तो वहीं कई शिक्षक संगठनों ने विरोध में बताया है। उन्होंने और भी कई कारण इसके विरोध के पीछे बताए हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

7 जुलाई, 2025 को सीतापुर जिले के 51 छात्रों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी और कहा कि राज्य सरकार की स्कूलों के विलय के पीछे मंशा सही है और इसे नहीं रोका जाएगा। 

हाई कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश में लगभग 5 हजार स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। यह स्कूल प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल स्तर की शिक्षा देते हैं। इनके साथ ही इनमें पढ़ने वाले बच्चों का भी भविष्य अब इसी फैसले से तय होगा। योगी सरकार का यह फैसला बीते कुछ समय में चर्चा में रहा है। 

योगी सरकार के स्कूलों के विलय के फैसले पर राज्य के शिक्षकों के कई संगठन विरोध भी जता चुके हैं। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को हाल ही के भुनाने का प्रयास किया था। इस फैसले के विरोध और पक्ष में लोगों के अपने अपने तर्क हैं। 

पहले जानिए क्या है योगी सरकार का फैसला?

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 1.3 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें कई लाख बच्चे पढ़ते हैं। वर्तमान में हर ग्राम सभा में एक प्राथमिक स्कूल है, इसको लेकर स्पष्ट तौर पर नियम भी बने हुए हैं। इन स्कूलों में 6 लाख से अधिक शिक्षक तैनात हैं। 

कई जगह ग्राम सभाओं में स्कूल ऐसे हैं जहाँ कुल जमा 20-30 बच्चे भी नहीं पढ़ते। लेकिन इन स्कूलों में बाकी स्कूलों की तरह सरकार को सभी सुविधाएँ देनी होती हैं। इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जहां मात्र 30 बच्चों पर 5-6 शिक्षक हैं।

वहीं दूसरी तरफ कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 100 के पार है लेकिन वहाँ शिक्षक की संख्या 3-4 है। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात बिगड़ा हुआ है। 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इसी समस्या को हल करने के लिए यह फैसला ले रही है। योगी सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों में 50 से कम बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें पास के दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया जाएगा। 

इन बच्चों को पास के ही दूसरे किसी प्राथमिक या जूनियर हाई स्कूल में स्थानांतरित किया जाएगा। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को स्कूल जाने में कोई समस्या ना हो, इसके लिए भी दिशानिर्देश दिए गए हैं। 

योगी सरकार ने कहा है कि जिस भी स्कूल में विलय होना है, वह दूसरे स्कूल से … किलोमीटर दूर नहीं होना चाहिए। सरकार ने यह भी ध्यान रखने को कहा है कि यह विलय पड़ोस के गांव तक किया जाए। 

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि बच्चों की सुविधा के लिए यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दूसरे स्कूल के रास्ते में कोई प्राकृतिक बाधा कैसे नदी, पहाड़ या झरना आदि ना हो। यहां तक कि यदि दोनों स्कूल के बीच कोई ट्रेन पटरी भी है, तो उसे भी अवॉइड किया जाए। 

क्यों लिया योगी सरकार ने यह फैसला?

योगी सरकार ने इस फैसले के पीछे कई कारण दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं स्कूलों का विलय किया जा रहा है, जिनमें बच्चों की संख्या बहुत कम है। इन स्कूलों को चलाए रखना तार्किक नहीं है। 

सरकार का पक्ष है कि इन स्कूलों में शिक्षक तो कई हैं परंतु बच्चे ही नहीं हैं, ऐसे में शिक्षकों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। इसके अलावा, कम बच्चे होने के बावजूद भी इन स्कूलों को खेल, इंफ्रा और बाकी चीजों से संबंधित बजट उतना ही जाता है, जितना किसी बड़े स्कूल को। 

यह भी सही से इस्तेमाल नहीं हो पाता जबकि बड़े स्कूलों में कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं इंफ्रा नहीं है। यह समस्या यदि स्कूल आपस में विलय हो जाएं तो हल हो सकती है। इससे उन स्कूलों में शिक्षक पहुँच जाएंगे, जहाँ बच्चों की संख्या अधिक है और सरकार को भी बजट आवंटित करने में आसानी होगी। 

फैसले का विरोध क्यों?

इस फैसले का विरोध मुख्य तौर पर सरकारी शिक्षक कर रहे हैं। उनके इस विरोध में कई तर्क हैं। ऑपइंडिया ने इस मामले में शिक्षकों से बात भी की है। उनके विरोध का फोकस भर्ती कम होने, प्रमोशन घटने और कुछ हद तक बच्चों की समस्या से जुड़ा है। 

नाम ना बताने की शर्त पर एक शिक्षक ने हमें बताया कि हर स्कूल का अपना बजट होता है, वहाँ का एक प्रधानाचार्य होता है। यदि दो स्कूल आपस में विलय हो जाएंगे तो फिर प्रधानाचार्य तो एक ही रहेगा, ऐसे में जो शिक्षक आगे प्रमोशन का सोच रहे हैं, उन्हें अपने हित खतरे में लगते हैं। 

उत्तर प्रदेश विलय

इसके अलावा शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनका भविष्य भी अनिश्चितता की तरफ ले जाएगा। उनके अनुसार, वर्तमान में हर स्कूल पर यह फिक्स है कि कितने शिक्षक होंगे, लेकिन नई व्यवस्था में खत्म होने वाले स्कूलों से शिक्षक कहां जाएंगे, इस पर अनिश्चितता है। 

शिक्षकों का कहना है कि समस्या यहीं तक नहीं है। उनके अनुसार, अभी भले ही उन्हें दूसरे स्कूलों में अटैच किया जा रहा हो लेकिन आने वाले समय में सरकार स्क्रीनिंग कर के उन्हें हटा भी सकती है, ऐसे में उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। 

एक और मुद्दा नई भर्ती का है। शिक्षकों का दावा है कि स्कूलों की संख्या अगर कम की जाएगी तो इसका सीधा असर नई भर्ती की संख्या पर भी होगा। उनका कहना है कि इससे प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती रुक जाएगी और रोजगार सृजन नहीं होगा। इसके अलावा बच्चों को दूर जाना पडेगा, यह भी एक कारण दिया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने इन सब तर्कों ने नकार दिया है और अब विलय को हरी झंडी दिखा दी है।