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’26 जनवरी को फैसला हो जाएगा कि किसने माँ का दूध पीया है’: जब PM मोदी ने आतंकियों की स्वीकार की चुनौती, कश्मीर के लाल चौक पर फहराया था तिरंगा

गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का 30 वर्ष पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो वर्ष 1992 में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर श्रीनगर में नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण का है। देश गुजरात द्वारा यूट्यूब पर शेयर की गई इस वीडियो में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं, “जनता की सफलता ने आतंकवादियों को परेशान करके रखा हुआ है। लाल चौक में पोस्टर लगाए गए हैं, दीवारों पर लिखा गया है – जिसने अपनी माँ का दूध पिया हो, वो श्रीनगर के लाल चौक में आए। यहाँ आकर भारत का तिरंगा झंडा फहराए, अगर वो वापस जिंदा जाएगा, तो आतंकवादी उसे इनाम देंगे। 26 जनवरी को परसो अब चंद घंटे बाकी हैं। लाल चौक में फैसला हो जाएगा कि किसने अपनी माँ का दूध पिया है।”

90 के दशक में जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, उस वक्त भी नरेंद्र मोदी आतंकवादियों की गीदड़भभकियों से नहीं डरे और पूरे आत्मविश्वास के साथ मुरली मनोहर जोशी के साथ 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा झंडा फहराया था। उन्होंने ऐसा कर​के ना केवल आतंकवाद को पोषित करने वालों को करारा जवाब दिया था, बल्कि उनकी आने पौध को भी यह संदेश दिया था कि उनके खतरनाक मंसूबों के आगे देशप्रेमियों का जज्बा किसी भी प्रकार से फीका नहीं पड़ने वाला।

आपको बताते चलें कि वर्ष दिसंबर 1991 से बीजेपी की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की ‘एकता यात्रा’ शुरू हुई थी। ‘अनुच्छेद-370 हटाओ, आतंकवाद मिटाओ’ के मुद्दे पर 30 वर्ष पहले निकाली गई भाजपा की ‘एकता यात्रा’ आज भी देशवासी नहीं भूले हैं। कन्याकुमारी से शुरू हुई यह यात्रा कई राज्यों से होते हुए 24 जनवरी 1992 को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर पहुँची थी। इसमें लगभग एक लाख के करीब लोग शामिल हुए थे। इन सभी का केवल और केवल एक ही उद्देश्य था, श्रीनगर के लाल चौक में भारत का तिरंगा झंडा फहराना। उस यात्रा में जोशी के साथ वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे। पीएम मोदी उस समय भाजपा के महासचिव थे।

श्रीनगर में देश तिरंगा झंडा फहराने के 21 वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ‘एकता यात्रा’ को याद करते हुए कहा था, “मुझे स्मरण है कि मैं 1992 में श्रीनगर में लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराने गया था। उस वक्त आतंकवाद अपने पूरे जोर पर था। आतंकवादी हिंदुस्तान के तिरंगे को जमीन पर रौंदते थे, उसको जलाते थे, उसे अपमानित करते थे। तिरंगे से अपने जूते साफ करते थे, अपनी कार साफ करते थे। ये सब वो कैमरे के सामने करते थे। ये दृश्य मेरे दिल में आग पैदा करता था।”

उन्होंने (पीएम मोदी) कहा था, “हमने एक यात्रा निकाली थी। कन्याकुमारी से तिरंगा झंडा लेकर निकल पड़े थे हम और तय किया था कि श्रीनगर में पहुँचकर वहाँ लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराएँगे। आतंकवादियों की उस जगह पर जाकर तिरंगा झंडा फहराने की सोचना भी…। जैसे ही हम श्रीनगर पहुँचे हम देखते हैं कि आतंकवादियों ने दीवारों पर और कई जगहों पर पोस्टर लगाए हुए थे कि जिसने भी अपनी माँ का दूध पिया हो, वो लाल चौ​क पर तिरंगा फहराकर वापस जाकर दिखाए। लेकिन इससे पहले जब हमारी यात्रा हैदराबाद पहुँची थी, तभी मुझे लोगों ने उन पोस्टरों के बारे में बता दिया था। इसलिए मेरे भाषणों, बोलने का तरीका और रंग-रूप पहले ही बदल गया था। मैंने हैदराबाद से ही आतंकवादियों को ललकारा था कि मैं 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक सुबह 11 बजे पहुँच जाऊँगा। मैं बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर नहीं आऊँगा। मैं बुलेट प्रूफ गाड़ी में भी नहीं आऊँगा। हाथ में सिर्फ तिरंगा झंडा लेकर आऊँगा और फैसला 26 जनवरी को लाल चौक पर होगा कि किसने अपनी माँ का दूध पिया है। इसके बाद मैं अपने समयानुसार लाल चौक पर पहुँचा और झंडा फहरा कर वापस लौट आया और आज आपके सामने खड़ा हूँ।”

बता दें कि लाल चौक पर तिरंगा फहराने का सबसे बड़ा असर फौज के मनोबल पर पड़ा था। उनका मनोबल काफी बढ़ गया था, क्योंकि वह जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ रहे थे। वहाँ की जनता को भी भरोसा हो गया था कि देश इस मामले में हमारे साथ है।

अपने नवजात बच्चे और बीबी से मिलना है तो ईसाई धर्म अपनाना होगा: कर्नाटक में धर्मांतरण का मामला, ससुर और रिश्तेदारों पर FIR

कर्नाटक में चित्रदुर्ग जिले के होसदुर्गा पुलिस थाने में मरप्पा नाम के एक व्यक्ति ने अपने ससुर और अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि आरोपित उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए मजबूर कर रहा है। होसपेट के पास अरविंद नगर में बड़गा जंगम कॉलोनी निवासी मरप्पा ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने नवजात बच्चे और उनकी पत्नी को देखने नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पत्नी के परिवार के सदस्यों द्वारा उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए धमकी दी जा रही है, ब्लैकमेल किया जा रहा है और मारपीट की जा रही है। जानकारी के मुताबिक यह शिकायत उनके ससुर वसंत कुमार, उनकी पत्नी के दादा रामचंद्रप्पा के अलावा अन्य रिश्तेदार सुधाकर, मंजूनाथ, संकप्पा के खिलाफ दर्ज की गई है। मरप्पा ने अपनी शिकायत में कहा कि 6 जुलाई, 2020 को शादी के दौरान उन्हें पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए मजबूर किया गया और उन्होंने घोषणा की कि अब वह ईसाई बन गए हैं। 

आरोपित ने हिंदू देवताओं की तस्वीरें फाड़कर जला दीं और उन्हें पूजा न करने के लिए कहा। आरोपित ने उन्हें बताया कि हिंदू देवी सनकलम्मा, मरम्मा, दुर्गम्मा ‘अशुभ’ के अलावा और कुछ नहीं हैं और अगर वह उनकी पूजा करता है तो वह नरक में जाएगा।

शिकायतकर्ता ने 2 दिसंबर, 2021 को अपनी पत्नी सरला को गर्भावस्था के दौरान उसके माता-पिता के घर भेज दिया था। मरप्पा ने शिकायत में उल्लेख किया कि उसे नवजात बच्चे के बारे में दूसरों से पता चला था। पुलिस ने कहा कि जब उसके भाई डोड्डाहुसेनी, सना हुसैनी, कार्तिक, चंद्रू बच्चे को देखने गए, तो आरोपितों ने गाली दी और उन्हें घर के अंदर नहीं जाने दिया। उनके भाइयों के साथ मारपीट भी की गई।

पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता से कहा गया था कि अगर वह ईसाई धर्म का पालन करता है, तभी वह अपने नवजात बच्चे और पत्नी को देख सकता है और वह उन्हें अपने घर भी ले जा सकता है। मरप्पा ने माँग की है कि पुलिस उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करे और उनकी पत्नी और बच्चे को उनके साथ भेजे।

मामला हैदराबाद कर्नाटक अलेमारी (खानाबदोश) बडगा जंगम जागृति समिति के संज्ञान में आया है। इधर शिकायतकर्ता ने स्थानीय भाजपा विधायक गूलीहट्टी शेखर से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

देश आजाद के योगदान को स्वीकार रहा और कॉन्ग्रेस को उनकी जरूरत नहीं: सिब्बल ने अपनी ही पार्टी को घेरा, थरूर बोले- भाजपा ‘कॉन्ग्रेस-युक्त’ हो गई

कॉन्ग्रेस (Congress) हताशा के दौर से गुजर रही है। कोई पार्टी छोड़कर जा रहा है तो कोई पार्टी की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।, फिर भी कॉन्ग्रेस पर इसका प्रभाव नपड़ने के बजाए इसे विचारधारा और राजनीति से जोड़ा जा रहा है। कुछ नेता पार्टी की कमियों की ओर ध्यान खींचने की बजाए हाईकमान को खुश करने के लिए चुटकी ले रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi azad) को पद्म पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा के बाद कपिल सिब्बल (Kapil sibbal) ने अपनी ही पार्टी पर हमला बोला है। वहीं, शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कॉन्ग्रेस की नीतियों को ‘विचारधारा’ बताते हुए भाजपा में शामिल हुए पार्टी नेता रतनजीत प्रताप नारायण सिंह (आरपीएन सिंह) (RPN Singh) को लेकर तंज कसा है।

ट्विटर पर थरूर ने भाजपा को कॉन्ग्रेस-यु्क्त बताते हुए कहा कि उधर (भाजपा में) भी सब अपने ही ही हैं। कॉन्ग्रेस के केरल से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने ट्वीट में एक लघु कविता शेयर करते हुए आरपीएन सिंह पर कटाक्ष किया कि वे अपना घर (कॉन्ग्रेस) छोड़कर जा रहे हैं, शायद उनके कुछ अपने सपने हैं।

थरूर के ट्वीट पर जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि जो विचारधारा के नहीं हुए वे अपने कैसे हुए?

उधर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किए जाने के बाद अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है। सिब्बल ने कहा कि यह विडंबना ही है कि जब देश सार्वजनिक जीवन में गुलाम नबी आजाद के योगदान को मान्यता दे रहा है, वहीं कॉन्ग्रेस को उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद उस जी-23 ग्रुप का हिस्सा थे, जो पार्टी नेतृत्व में संगठनात्मक बदलाव की माँग कर रहे थे। कपिल सिब्बल भी उसी जी-23 समूह का हिस्सा हैं। वहीं, आजाद इस बात पर अफसोस जताते रहे हैं कि असहमति और पार्टी के संचालन में खामियों को इन दिनों नेतृत्व विद्रोह के रूप में देख रहा है। 

भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान के लिए नबी को पद्म भूषण देने की घोषणा करने के बाद सिब्बल ने ट्विटर पर उन्हें बधाई दी। सिब्बल ने कहा- बधाई भाईजान।

फहराया उलटा तिरंगा, केरल के मंत्री अहमद ने सैल्यूट भी किया: शिकायत होने पर दोबारा हुआ कार्यक्रम

केरल के कासरगोड़ जिला प्रभारी मंत्री अहमद देवरकोविल को गणतंत्र दिवस के मौके पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। 26 जनवरी के अवसर पर अहमद को अपनी फजीहत उस समय महसूस हुई जब उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया लेकिन तिरंगा उलटा फहरा। शर्मिंदगी की बात ये है कि बंदरगाह मंत्री एवं जिला पुलिस प्रमुख वैभव सक्सेना, प्रभारी जिला कलेक्टर एडीएम एके रामेंद्रन और अन्य पुलिस अधिकारियों ने उलटे तिरंगे को ही सैल्यूट कर दिया। ये पूरी घटना विद्यानगर के कासरगोड़ नगर निगम स्टेडियम में घटी।

हालाँकि तिरंगे के खुलते ही कुछ पत्रकारों ने इस गलती को नोटिस किया और अधिकारियों को इस संबंध में सूचित किया। इसके बाद मंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जिला पुलिस अध्यक्ष से फौरन कार्यक्रम रुकवाकर राष्ट्रीय ध्वज को सही से फहराने के लिए कहा। 10 मिनट के अंदर तिरंगा नीचे उतारा गया। सही से लगाया गया और फिर गणतंत्र दिवस समारोह में दोबारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। अब इस संबंध में जिला पुलिस प्रमुख सक्सेना कन्नूर रेंज के उप महानिरीक्षक राहुल आर नायर को अपनी रिपोर्ट सौंपेगें।

उल्लेखनीय है कि उलटा झंडा फहराने की ये पहली घटना नहीं है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी के खनियाधाना में शासकीय माध्यमिक विद्यालय में भी शिक्षकों ने उलटे झंडे को फहराया। अब इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है। बता दें कि 1 नवंबर, 2021 को कर्नाटक के मंगलुरु में राज्योत्सव समारोह के दौरान, बंदरगाह मंत्री और पड़ोसी दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रभारी मंत्री एस अंगारा ने भी राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा फहराया था। इसके बाद वो खुद को स्टेज पर वापस आ गए थे, मगर अधिकारियों ने इ गलती को सुधारा था।

‘हिन्दुआ सूरज का अपमान बर्दाश्त नहीं’: राना अय्यूब को ‘महाराणा’ बताए जाने से क्षत्रिय संगठन नाराज़, कहा – ‘राना’ अरबी/फ़ारसी शब्द

तथाकथित पत्रकार राना अय्यूब विवादों में फँसी हुई हैं। हमेशा की तरह मामला यही है कि उन्होंने अपना प्रोपेगंडा फैलाया है। लेकिन, इस बार प्रोपेगंडा भारत के खिलाफ ही नहीं है बल्कि आतंकद का समर्थन करते हुए सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के भी खिलाफ है। इस प्रोपेगंडा के कारण राना अय्यूब को इन दोनों अरब देशों से भी जम कर लताड़ पड़ी। 2022 में उन्होंने हज जाने का सपना देखा था, ऐसे में संशय है कि अब ये पूरा हो पाएगा या नहीं। लेकिन हाँ, अब उन्हें ‘महाराणा’ बताए जाने से राजपूत संगठन जरूर आक्रोशित हो गए हैं।

पहले संक्षित में बता दें कि सऊदी अरब, UAE और यमन के बीच चल क्या रहा है। अरब देश के सबसे गरीब देशों में से एक यमन में गृह युद्ध चल रहा है। 2011 में विद्रोह के बाद वहाँ के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को इस्तीफा देना पड़ा, जो 34 वर्षों से सत्ता में जमे थे। 2017 में उनका निधन भी हो गए। शिया अल्पसंख्यकों के कट्टर संगठन हूती (अंसार अल्लाह) विद्रोहियों ने नए राष्ट्रपति अब्द्रब्बुह मंसूर हदी की कमजोरी का फायदा उठाते हुए 2015 में राजधानी सना पर कब्ज़ा कर लिया।

सऊदी अरब ने इसके पीछे शिया ईरान का हाथ देखा और 8 सुन्नी अरब मुल्कों ने उसके नेतृत्व में हूतियों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। हाल ही में अबूधाबी एयरपोर्ट पर किए गए हमले में हूतियों ने दो भारतीय सिखों को मार डाला। लेकिन, राना अय्यूब ने उनका समर्थन किया, जिससे सऊदी अरब और UAE वालों ने उन्हें आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक बताया। राना अय्यूब को इसमें भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोष नजर आ गया। आकार पटेल जैसे राना अय्यूब के समर्थकों ने उन्हें ‘महाराणा’ बता डाला।

नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप देख सकते हैं कि कैसे राना अय्यूब की तस्वीर पर ‘महाराणा’ लिख कर उनके महिमामंडन की कोशिश की गई है। इस पस प्रतिक्रिया देते हुए लोगों ने समझाया है कि हिन्दुओं (क्षत्रिय) द्वारा लगाया जाने वाला ‘राणा’ अलग है और मुस्लिम जिस ‘राना’ उपनाम का प्रयोग करते हैं, वो अलग है। हिन्दुओं ने इस पर आक्रोश जताते हुए महान महाराणाओं से राना अय्यूब की तुलना पर उन्हें खरी-खरी सुनाई। हालाँकि, वामपंथी और कट्टर इस्लामी कब इससे बाज़ आने वाले हैं।

राना अय्यूब को ‘महाराणा’ बताए जाने पर हिन्दू हुए आक्रोशित

अब राजपूत संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। राजपूत संगठन ‘क्षत्रिय परिषद’ ने कहा है कि ‘हिन्दुआ सूरज’ महाराणा प्रताप का जीवन अपनी मातृभूमि के लिए एक ऐसे प्यार और त्याग की गाथा है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। संगठन ने इसे भारतीय इतिहास का एक गर्व भरा अध्याय करार देते हुए कहा कि एक गर्वी क्षत्रिय के रूप में उन्होंने न सिर्फ शक्तिशाली मुगलों के अधीन आने से इनकार किया, बल्कि उनका सामना भी किया। उन्होंने अपनी अंतिम साँस तक मातृभूमि के गौरव और महिमा की रक्षा की।

‘क्षत्रिय परिषद’ ने कहा कि महान वीर राजपूत राजा महाराणा प्रताप एक आदर्श राजा थे, जिन्होंने अपनी प्रजा का ऐसे ही ख्याल रखा जैसे कोई पिता अपने पुत्रों का रखता है। संगठन ने कहा कि ये महाराणा की विनम्रता एवं अनुकंपा का भाव और करिश्मा ही था जिसने उन्हें लोगों का इतना प्यारा बना दिया। न सिर्फ आमलोगों, बल्कि जनजातीय समुदायों ने भी उनका नेतृत्व सहज स्वीकार किया। संगठन ने कहा कि प्रत्येक भारतीय के लिए, खासकर हम राजपूतों के लिए, महाराणा प्रताप का जीवन साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान का सर्वोच्च प्रतीक है।

‘क्षत्रिय परिषद’ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “ये हमारे प्रकाश में आया है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने शरारतपूर्ण तरीके से एक मुस्लिम महिला के लिए ‘महाराणा’ शब्द का प्रयोग किया है, जिसके प्रथम उपनाम में ‘राना’ लगा हुआ है। ‘राना’ एक फ़ारसी/अरबी/तुर्किश/कुर्दिश मूल का शब्द है, जिसका अर्थ होता है – आँखों का ध्यान आकर्षित करने वाला, चमकने वाला, मंत्रमुग्ध करने वाला। ये ‘यार्नु’ नामक शब्द से जन्मा है, जिसका अर्थ है किसी को तरस के साथ देखना।”

राजपूत संगठन क्षत्रिय परिषद ने राना अय्यूब को ‘महाराणा’ बताए जाने पर आक्रोश जताते हुए जारी किया बयान

‘क्षत्रिय परिषद’ ने बताया कि मध्य-पूर्व के मुल्कों में महिलाओं को इस तरह के नाम दिए जाते हैं। वहीं ‘राणा’ को संगठन ने एक भारतीय मूल का शब्द बताते हुए जानकारी दी कि ये ‘रायाण’ से सामने आया है, जो संस्कृत में ‘राजन्’ शब्द के बराबर है। ‘राजन्’ शब्द का अर्थ है राजा। संगठन ने आक्रोश जताया कि महाराणा प्रताप जैसी प्रेरणादायक हस्ती के साथ आज के किसी व्यक्ति की तुलना, खासकर उनकी जो देश के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने में लगे हैं, ये अनादर है और हमें स्वीकार्य नहीं है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि हम न सिर्फ मजबूती से इसकी निंदा करते हैं बल्कि भविष्य में इस प्रकार के ऐसे व्यवहार के प्रति चेतावनी भी देते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की करतूत प्रायश्चित के योग्य भी नहीं है। सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने भी राना अय्यूब को ‘राणा’ और ‘राना’ के फर्क को समझाया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दुओं से घृणा करने वाले की तुलना एक महान हिन्दू राजा से कैसे हो सकती है? राना अय्यूब अब सऊदी अरब UAE के लोगों के साथ-साथ हिन्दुओं, खासकर राजपूतों का भी निशाना बन रही हैं।

आकार पटेल के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों ने बताया कि ‘ण’ के लिए अंग्रेजी में कोई अलग शब्द नहीं है, इसीलिए ‘राणा’ और ‘राना’ को ‘Rana’ ही लिख दिया जाता है। अर्नब बख्शी नाम के ट्विटर यूजर ने कहा कि राना अय्यूब को ‘महाराणा’ नहीं, ‘महा रोना’ लिखा जाना चाहिए। एक अन्य यूजर ने लिखा कि 2 भारतीय नागरिकों की मौत तो दूर की बात, हजारों भारतीय मर जाएँ फिर भी वो आतंकियों का ही समर्थन करेंगी। लोगों ने इस कृत्य की तुलना ‘कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली’ वाली कहावत से भी की।

बता दें कि अब सऊदी अरब और भारत के लोग मिल कर उन पर निशाना साध रहे हैं। मेजर (रिटायर्ड) माणिक एम जॉली ने लिखा, “राणा अयूब ने एक कूटनीतिक मुद्दे में टाँग अड़ाया, जिस समस्या की उन्हें समझ नहीं थी। ISI ने उनका इस्तेमाल ईरान-पाकिस्तान-तुर्की के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया, ताकि वो सऊदी अरब-अमेरिका और आंशिक रूप से इजरायल पर भी निशाना साध सकें। ये रोजमर्रा के घृणा फैलाने से कहीं अधिक बढ़ कर है। ये एक बड़ा लीग हैं।” सऊदी वाले कह रहे कि मुस्लिम होने की वजह से काबा राना अयूब का नहीं हो जाता।

गंदे फोटो से लेकर पोर्न, ‘Stud Muslim’ ग्रुप में बीजेपी कार्यकर्ता और हिन्दू लड़कियों की तस्वीरें: आरोपित शेख पर कार्रवाई की माँग

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बीजेपी (BJP) की कार्यकर्ता अंकिता की इमेज का राधा शेख नाम के आरोपित ने सोशल मीडिया (Social Media) पर गलत इस्तेमाल किया है। इस घटना को लेकर अंकिता ने मंगलवार (25 जनवरी 2022) को साइबर पुलिस में इसकी शिकायत की। अंकिता ने कहा है कि उन्हें एक अनजान व्यक्ति ने ट्विटर का एक लिंक भेजा, जिसे ओपन करते ही उन्होंने देखा कि राधा शेख नाम के व्यक्ति ने उनकी इमेज को एडिट कर उसे रेडिट ग्रुप पर डाल दिया है।

अंकिता ने आगे कहा कि इस इमेज को जब उन्होंने लोगों और अधिकारियों के संज्ञान में लाने के लिए ट्विटर पर शेयर किया तो इसे हटा दिया गया, लेकिन वो उनकी इमेज को मार्फ करने वाले आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती थी। उन्होंने इस मामले में पुलिस से रेडिट और आरोपित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की। इस मामले में अंकिता कहती हैं, “आज उसने मेरे साथ ऐसा किया है, कल किसी और महिला के साथ भी ऐसा ही करेगा।”

अपने ट्विटर थ्रेड में अंकिता ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) को टैग करते हुए कहा कि इस तरह की समस्या झेलने वाली वो अकेली महिला नहीं हैं, इंटरनेट पर ऐसी कई महिलाएँ हैं, जिनकी तस्वीरों को मार्फ कर उनका गलत इस्तेमाल किया गया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से कहा, “सर मुझे आशा है कि आप इसे पढ़ेंगे और इस मामले को आगे बढ़ाएँगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह के सैकड़ों ग्रुप मौजूद हैं। आज मेरे साथ ऐसा हुआ, कल किसी और महिला के साथ हो सकता है। कृपया सोशल मीडिया पर इन सभी ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई करें।”

प्रोपेगेंडा से मुझे दूर रखें

इसके साथ ही अंकिता ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया, जो ये कह रहे थे कि बीजेपी अपने कार्यकर्ता के साथ नहीं खड़ी है। उन्होंने कहा, “जो लोग लिख रहे हैं कि बीजेपी मेरा ख्याल नहीं रख रही है। मैं आपको बताना चाहती हूँ कि मेरे साथ बहुत से लोग हैं, हर कोई सब कुछ नहीं दिखा सकता है, कृपया अपने प्रोपेगेंडा से मुझे दूर रखें।”

सोशल मीडिया पर खुद को मिल रहे समर्थन पर अंकिता ने कहा, “हर मुश्किल से लड़ने में मेरा समर्थन करते रहें। हम सब साथ हैं। ये बहुत ही दुखद है कि हर दिन हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। यह जानकर मुझे मेरे अलावा भी कई अन्य महिलाओं की इमेज अभी भी यहाँ मौजूद हैं। मैं उन महिलाओं के लिए और इस दुनिया की सभी महिलाओं के लिए लड़ूँगी।”

नए आईटी नियमों से यूजर को मिली आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की ताकत

इस मामले में जब नेटिजन, अंशुल सक्सेना से केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrashekhar) से एक्शन लेने की माँग की तो उन्होंने रिप्लाई करते हुए अंकिता से रेडिट को ऑब्जेक्शनेबल कंटेट हटाने के लिए लिखने को कहा।

केंद्रीय मंत्री ने आईटी एक्ट के नियम 3 (2) बी का हवाला देते हुए कहा, “उनके पास नए आईटी नियमों के नियम 3 (2) बी का हवाला देते हुए हटाने की माँग करने का अधिकार है। मैं अंकिता से अनुरोध करता हूँ कि वह तुरंत रेडिट को लिखें। नए आईटी नियम प्लेटफॉर्म को यूजर्स के प्रति जवाबदेह बनाते हैं।”

गौरतलब है कि साल 2021 में भारत सरकार ने नए आईटी नियमों को लागू किया था, जिसके तहत किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के मामले में दर्ज की गई शिकायत पर मध्यस्थ को ही कार्रवाई करनी होती है। वो इस केस में 24 घंटे के अंदर विवादित कंटेट को हटाने की माँग कर सकता है।

सोशल मीडिया पर हिंदू महिलाओं को किया जा रहा टार्गेट

साम्प्रदायिक नफरत फैलाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग लगातार हिंदू महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने के लिए की जा रही है, लेकिन इसके खिलाफ सही तरीके से कार्रवाई नहीं होती है। सोशल मीडिया पर कई महिलाओं की तस्वीरें हैं, बिंदी, मंगल सूत्र, सिंदूर और साड़ी में में उन्हें दिखते हुए हिंदू बताया गया है। साथ ही इसमें इस तरह के कमेंट किए जा रहे हैं कि ये ‘मुस्लिम d*ck’ का इतंजार कर रही हैं, क्योंकि वे ही उन्हें संतुष्ट कर सकते हैं। इस तरह की अश्लील इमेज को कभी-कभी महिला को अपमानजनक दिखाने और उसे धमकाने के लिए भी किया जाता है। अश्लील तस्वीरें ‘HSlut4MStud’ (मुस्लिम स्टड के लिए हिंदू slt) जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट की जाती हैं।

हालाँकि, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि संघियों से नफरत के कारण स्वयंभू लिबरलों और कॉन्ग्रेस समर्थकों का एक तबका हिंदू महिलाओं के उत्पीड़न पर चुप रहने वाला है। क्योंकि इन आरोपितों में अधिकतर मुस्लिम हैं। खास बात ये है कि तथाकथित उदारवादी हिंदुओं को टार्गेट किए जाने के तथ्य को बार-बार अनदेखा करते हैं और ये सोचते हैं कि ‘भारत में धार्मिक बहुमत पीड़ित या प्रताड़ित कैसे हो सकता है’।

गणतंत्र दिवस पर PM मोदी ने हाथ झुका कर क्यों दी सलामी, खास तरह की टोपी का महत्व क्या

देश भर में 26 जनवरी के दिन 73वाँ गणतंत्र दिवस मनाया ज रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर आजादी से लेकर अब तक वीरगति को प्राप्त हुए देश के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने इस दौरान वीरों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा।

इसके साथ ही, उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर खास अंदाज में तिरंगे को सलामी (सैल्यूट) दी। उन्होंने जिस अंदाज में तिरंगे की सलामी की, वह नौसेना को समर्पित था। नौसेना में सलामी हमेशा दाहिने हाथ के पंजे को थोड़ा आगे की ओर झुकाकर दी जाती है।

उल्लेखनीय है कि तीनों सेनाएँ अलग-अलग ढंग से काम करती हैं। यहाँ तक की तीनों सेनाओं का सैल्यूट भी अलग है। लेकिन, ऐसा क्यों है? आइए बताते हैं कि नेवी, आर्मी और एयर फोर्स के सैल्यूट में क्या अंतर होता है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सैल्यूट का मतलब अपने बड़े अधिकारियों को सम्मान देने से होता है। इसलिए देश की तीनों सेना के जवान अपने-अपने तरीके से सैल्यूट करते हैं।

इंडियन आर्मी सैल्यूट

इंडियन आर्मी का सैल्यूट पूरी हथेली दिखाकर यानी खुले हाथों से किया जाता है। उनके सैल्यूट के वक्त हाथ का पूरा पंजा दिखता है। सभी ऊँगलियाँ खुली रहती हैं और अँगूठा सिर और आईब्रो के बीच में होना चाहिए। 

इंडियन नेवी सैल्यूट

इंडियन नेवी के जवान का सैल्यूट आर्मी से बिल्कुल अलग होता है। इनके सैल्यूट में पंजा नहीं दिखता। हाथ पूरी तरह से नीचे की ओर मुड़ा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराने जमाने में जब नेवी के जवान जहाज में काम करते थे तो उनके हाथ गंदे हो जाते थे तो वह अपने पंजे को छिपाकर सैल्यूट करते थे। बस तब से ही ऐसे सैल्यूट किया जा रहा है।

एयर फोर्स सैल्यूट

एयर फोर्स का सैल्यूट पहले आर्मी की तरह ही होता है। लेकिन, साल 2006 में इंडियन एयर फोर्स ने अपने जवानों के सैल्यूट के नए फॉर्म तय किए थे। सैल्यूट के दौरान उनके हाथ और जमीन के बीच 45 डिग्री का कोण बनता है। इसका मतलब यह भी होता है कि वायु सेना आसमान की ओर अपने कदम को दर्शाती है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास तरह की टोपी और गमछा पहना हुआ था। मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, गणतंत्र दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड की टोपी पहनी हुई थी। इस टोपी पर ब्रह्मकमल छपा हुआ था। इसके साथ ही, उन्होंने मणिपुर का गमछा पहना हुआ था। राजपथ पर तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भी गए। वहाँ उन्होंने सेना के जवानों को सलामी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित किया।

पहली बार अमर शहीदों को नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आज दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी की गई। पिछले साल गणतंत्र दिवस के मौके पर हजारों किसान केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में लालकिला तक पहुँच गए थे और उनका पुलिस से टकराव भी हुआ था। इसे देखते हुए इस बार सावधानी बरती जा रही है और टिकरी, सिंघू व गाजीपुर समेत दिल्ली के प्रमुख प्रवेश द्वार को बंद किया गया है।

वो शौर्य चक्र विजेता, जिन्होंने दे दी अपनी जान… ताकि हम 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) मना सकें

देश का 73वाँ गणतंत्र दिवस (Republic Day) समारोह हम मना रहे हैं। किस कीमत पर, कभी सोचा है? कीमत है उन वीरों का बलिदान, जिन्होंने अपनी जान केवल इसलिए न्योछावर कर दी, ताकि हम सभी ये गणतंत्र दिवस मना सकें। इस मौके पर देश के तीसरे सबसे बड़े सम्मान शौर्य चक्र से 12 वीर जवानों को सम्मानित किया गया। इसमें से 9 जवान ऐसे हैं, जिन्हें मरणोपरांत ये सम्मान दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन जवानों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया, उसमें पाँच इंडियन आर्मी के जवान हैं, एक असम राइफल्स, 6 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान हैं। जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए जिन वीरों ने वीरगति प्राप्त की उनमें नायब सूबेदार श्रीजीत एम (17 मद्रास रेजीमेंट), हवलदार अनिल कुमार तोमर (राजपूत/44 राष्ट्रीय राइफल्स), काशीराय बम्मनल्ली (इंजीनियर/44 आरआर), पिंकू कुमार (जाट/34 आरआर) और सिपाही मारुप्रोलू जसवंत कुमार रेड्डी (17 मद्रास रेजीमेंट) शामिल हैं।

इसके अलावा CRPF के हेड कॉन्स्टेबल अजीत सिंह और कुलदीप कुमार उरवां, कॉन्स्टेबल विकास कुमार और पूर्णनाद को भी मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। साथ ही कमांडेंट दिलीप मलिक और सहायक कमांडेंट अनिरुद्ध प्रताप सिंह को भी इस पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 5 असम राइफल्स के राइफलमैन राकेश कुमार को असम में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन के लिए इस प्रतिष्ठित पदक से सम्मानित किया गया।

इस साल किसी को भी अशोक चक्र और कीर्ति चक्र से सम्मानित नहीं किया गया। हालाँकि, तीन को साहस और शौर्य प्रदर्शित करने के लिए दूसरी बार सेना मेडल दिया गया है। इनमें मेजर भरत सिंह झाला (जाट/34 RR), जगतार जोहल (राजपूत/44 RR) और हवीदार नसीर अहमद मीर (प्रादेशिक सेना) शामिल हैं।

लद्दाख में पूर्व 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल PGK मेनन, लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे (15 कोर), रविन खोसला (4 कोर) और जॉनसन पी मैथ्यू (3 कोर) समेत चार वरिष्ठ अधिकारियों को उत्तम युद्ध सेना पदक मिला है।

384 गैलेंट्री अवार्ड्स को मंजूरी

गौरतलब है कि 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के जवानों और अन्य को 384 वीरता और अन्य रक्षा अलंकरणों के पुरस्कारों को मंजूरी दी। इनमें 12 शौर्य चक्र, 29 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 04 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 53 अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), 13 युद्ध सेवा मेडल, 3 बार विशिष्ट सेवा मेडल (Bar to Vishisht Seva Medals), 122 विशिष्ट सेवा मेडल, 3 बार सेना मेडल (वीरता – Bar to Sena Medals Gallantry), 81 सेना मेडल (वीरता), 2 वायु सेना मेडल (वीरता), 40 सेना मेडल (कर्तव्य के प्रति समर्पण), 8 नौ सेना मेडल (कर्तव्य के प्रति समर्पण), 14 वायु सेना मेडल (कर्तव्य के प्रति समर्पण) शामिल हैं।

बच्ची ने की आत्महत्या, हुआ था यौन शोषण, सुसाइड नोट में केरल पुलिस अधिकारी को बताया जिम्मेदार: CWC ने माँगी रिपोर्ट

केरल में 18 साल की यौन शोषण पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। वह मलप्पुरम जिले के थेनहीपालम के पास एक किराए के घर में रहती थी। घटना 20 जनवरी 2022 की है। कई मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि उसने मंगेतर के साथ झगड़े के बाद यह कदम उठाया, जबकि पीड़िता द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट से पता चलता है कि वह स्थानीय पुलिस द्वारा अपमान और मजाक उड़ाए जाने को लेकर परेशान थी। उसने कई लोगों पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए पुलिस के समक्ष कई शिकायतें दर्ज करवाई थीं।

इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामला दर्ज किया है। आयोग की सदस्य बबीता बलराज ने बच्ची की मौत के मामले में बाल कल्याण समिति और कोझीकोड के जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट माँगी है। केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा कि वह जिला पुलिस प्रमुख और बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही मामले पर कार्रवाई करेगा। कोझीकोड के जिला बाल संरक्षण अधिकारी को भी रिपोर्ट देने को कहा गया है। जानकारी के मुताबिक COVID-19 लॉकडाउन के दौरान लड़की के यौन शोषण के संबंध में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं से जुड़े आधा दर्जन मामले दर्ज थे।

यह शिकायतें 2 साल में उसके साथ हुई दुर्व्यवहार को लेकर दर्ज कराई गई थी। इन आरोपितों में मृतक के रिश्तेदार भी शामिल थे। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि दो दिन पहले सामने आए उनके सुसाइड नोट में कहा गया है कि कोझीकोड जिले के फिरोक थाने के तत्कालीन सर्कल इंस्पेक्टर ने उन्हें सेक्स वर्कर कह कर उसका अपमान किया था। उसने उस पर अपने मंगेतर को धमकी देने का भी आरोप लगाया। यह नोट कुछ महीने पहले लिखा गया था जब उसने एक बार पहले भी आत्महत्या का प्रयास किया था।

नोट में फेरोक पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर पर मामले की जाँच के तहत उसके परिवार को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है। उसने पत्र में लिखा था, “सीआई सर ने मुझे सेक्स वर्कर कहकर मेरा अपमान किया। उन्होंने आसपास के लोगों को यौन शोषण के बारे में बताया। अब मैं बाहर नहीं जा सकती। मेरी मौजूदा स्थिति के लिए आरोपित और पुलिस जिम्मेदार हैं।” उसने पत्र में यह भी कहा कि उसके मंगेतर के साथ मारपीट की गई और उससे शादी न करने की धमकी दी गई।

यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने अपने मंगेतर को यौन शोषण के बारे में बताया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने पुलिस में शिकायत करने के लिए उसका समर्थन किया। मार्च 2021 में, उसने सभी शिकायतें दर्ज कीं, सभी छह POCSO अधिनियम के तहत दर्ज की गईं। इसमें से एक मलप्पुरमा के कोंडोट्टी में और पाँच फेरोक में दर्ज की गई थी।

मीडिया से बात करते हुए उसकी माँ ने कहा कि युवती गंभीर मानसिक संकट से गुजर रही थी और उसे राज्य से कोई सहयोग नहीं मिला। माँ ने कहा कि हालाँकि उन्होंने कुछ पुलिस अधिकारियों को अपनी बेटी की खराब स्थिति के बारे में सूचित किया था, लेकिन कोई भी उसकी मदद करने या परामर्श देने के लिए तैयार नहीं था। उसने यह भी आरोप लगाया कि युवती का मंगेतर से विवाद चल रहा था और आत्महत्या से पहले पिछले कुछ दिनों में उनका फोन पर झगड़ा हुआ था। इसके साथ ही उसकी माँ ने बताया कि उसने डिप्रेशन के कारण तीन बार अपनी जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास किया था।

जानकारी के मुताबिक फेरोक पुलिस स्टेशन के निरीक्षक ने 22 मार्च, 2021 को पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी का विवरण देते हुए बाल कल्याण समिति (CWC), कोझीकोड में एक रिपोर्ट दर्ज की थी। हालाँकि, पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि सूचित किए जाने के बाद भी सीडब्ल्यूसी ने इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं सीडब्ल्यूसी ने इन आरोपों का खंडन किया।

सीडब्ल्यूसी कोझीकोड के अध्यक्ष एडवोकेट पीएम थॉमस ने TNM को बताया, “न तो परिवार और न ही पुलिस ने परामर्श के लिए मदद माँगी थी। पुलिस ने सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट दी। हमारे पास पॉक्सो पीड़ितों की सुरक्षा और सहायता के लिए एक उचित प्रणाली है। अगर हमें सूचित किया जाता तो हम उचित परामर्श दे सकते थे।” 

हालाँकि, जब टीएनएम ने फेरोक में पुलिस से पूछा तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने FIR दर्ज करने के बाद सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है। फेरोक स्टेशन हाउस ऑफिसर जी बालचंद्र ने कहा, “हमने मामले दर्ज होने के तुरंत बाद CWC को एक विस्तृत रिपोर्ट दी थी। हमने सभी विवरण दिए हैं और यह उन्हें ही तय करना है कि पीड़ित को कैसे समर्थन या आश्रय में ले जाना है।” बालचंद्र ने ही मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी।

10 लाख रुपए की कमाई पर 9.33 लाख टैक्स, खुद PM इंदिरा गाँधी ने संसद में पेश किया था बजट: Fact Check

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि 1971-72 के दौरान 10 लाख रुपए की कमाई पर 9.33 लाख रुपए टैक्स देना पड़ता था। क्या यह सच हो सकता है? या बस अफवाह है?

1971-72 मतलब जब कॉन्ग्रेस नेता इंदिरा गाँधी भारत की प्रधानमंत्री थीं। तब कोई 10 लाख रुपए कमाता था, तो वह 9.33 लाख से अधिक टैक्स के रूप में भुगतान करता था? आखिर क्यों हो रहा यह दावा वायरल? हुआ यह कि कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर चुटकी ली 1945 की आयकर दरों को पोस्ट कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर 1971-72 का टैक्स स्लैब वायरल होना शुरू हो गया।

शशि थरूर वाले तंज के जवाब में, ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने 1971-72 के टैक्स स्लैब की तस्वीर पोस्ट की, जो अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल है। अगर उनके ट्वीट पर विश्वास किया जाए, तो उस अवधि के दौरान, दस लाख से अधिक आय वाले किसी भी व्यक्ति को 85% टैक्स और 10% सबचार्ज का भुगतान करना होता था। यानी कुल मिलाकर उन्हें 95% का भुगतान करना पड़ता था।

10 लाख पर 9 लाख टैक्स? क्या है सच

फैक्ट हंट ने 1971-72 के उपरोक्त टैक्स स्लैब का विस्तृत विश्लेषण साल 2020 में किया था। इस दौरान उन्होंने पाया था कि फोटो सही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने 28 फरवरी, 1970 को अपने केंद्रीय बजट भाषण के दौरान व्यक्तिगत आयकर स्लैब दरों की घोषणा की थी। बता दें कि उस दौरान इंदिरा गाँधी वित्त मंत्री भी थीं।

वित्तीय वर्ष 1970-71 (कर निर्धारण वर्ष 1971-72) के लिए व्यक्तिगत आयकर स्लैब दरों के अनुसार, 5000 से 10000 के बीच आय वाले किसी भी व्यक्ति के लिए आयकर की दर 10% थी। आय में अतिरिक्त 5000 के अंतराल पर आयकर की दर में वृद्धि हुई और जो लोग 30001 से 40000 रुपए कमा रहे थे, वे अपनी मेहनत की कमाई का 50% कर के रूप में भुगतान कर रहे थे।

कर निर्धारण वर्ष 1971-72 में जैसे-जैसे आय स्लैब अधिक होता गया, 2 लाख रुपए या उससे अधिक कमाने वाले लोगों के लिए टैक्स की दर कुल आय का 85% हो गया था। यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह थी कि उस समय सरकार ने कुल आय 5000 रुपए से अधिक होने पर आय पर 10% सबचार्ज भी लगाया था।

इंदिरा गाँधी चाहती थी वाम समर्थक छवि

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, “1969 में कॉन्ग्रेस का विभाजन हो गया था। उस समय, सरकार अपनी वाम समर्थक छवि दिखाना चाहती थी। रिपोर्ट में कहा गया है, “यह पूरी तरह से एक ऐसी राजनीति के अनुरूप था जिसमें धन बनाने वालों को मुफ्तखोर और उच्च आय अर्जित करने वाले और कर देने वाले नागरिकों को बुरी नजर से देखा जाता था।”

इसमें आगे कहा गया, “उच्च करों के लिए वित्त मंत्री सीडी देशमुख द्वारा दो दशक पहले 27 फरवरी, 1953 के केंद्रीय बजट भाषण में बौद्धिक ढाँचा निर्धारित किया गया था। उन्होंने जॉन मथाई की अध्यक्षता में कर निर्धारण जाँच आयोग (Taxation Enquiry Commission) की स्थापना की, जिसमें वीकेआरवी सहित छह अन्य सदस्य थे। राव ने 150000 रुपए से अधिक आय पर अधिकतम मार्जिनल रेट 85 प्रतिशत की सिफारिश की थी। हालाँकि उच्च टैक्स फिर भी पर्याप्त नहीं थे।”

इसके अलावा, 1973-74 में, किसी व्यक्ति के लिए उच्चतम टैक्स स्लैब 97.50% पर जाकर आसमान छू गया था। उल्लेखनीय है कि उस अवधि के दौरान, इस तरह की उच्च टैक्स दरों ने करदाताओं को करों का भुगतान करके राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने से हतोत्साहित किया। भ्रष्टाचार और कर चोरी एक आदर्श बन गया था और आज भी सरकार की करों के मामले में अक्सर बुराई की जाती है।

टैक्स रिफॉर्म कमिटी, 1991 की सिफारिशों के बाद ही कर दरों में कमी आई और 1992-92 में केवल 20%, 30% और 40% के तीन कर ब्रैकेट पेश किए गए। इसके अलावा, 1997-98 में इसे घटाकर 10%, 20% और 30% कर दिया गया था।