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काशी विश्वनाथ से लेकर माँ वैष्णो देवी और बद्रीनाथ धाम तक: गणतंत्र दिवस परेड की झाँकियों में खास

पूरा देश आज अपने 73 वें गणतंत्र दिवस की खुशियाँ मना रहा है। इस बीच राजपथ से भी विराट भारत की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। वहाँ माँ वैष्णों देवी से लेकर काशी विश्वनाथ और बाबा बद्रीनाथ धाम को राज्यों की झाँकियों में प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को भी एक बार फिर इन झाँकियों के माध्यम से याद कराया गया। देश में हुए छोटे-बड़े विकास की झलक गणतंत्र दिवस की परेड में देखते ही बनती है।

परेड की शुरुआत से पहले विंग कमांडर्स ने हेलीकॉप्टर से राजपथ पर पुष्पवर्षा की। इसके बाद देश की सामरिक शक्ति का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान राजपूत रेजीमेंट के मार्चिंग दस्ते ने 1950 में इस्तेमाल की जाने वाली भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहनकर परेड की जबकि जवानों ने 1947-48 में इस्तेमाल की जाने वाली राइफल को उठाया। परेड में आजादी के बाद से अब तक हुए सेना की यूनिफॉर्म और हथियारों के बदलाव को प्रदर्शित किया गया है।

इसके बाद मराठा, मद्रास और कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर और असम रेजिमेंट के संयुक्त बैंड ने दिल्ली में राजपथ पर रिपब्लिक डे परेड में भाग लिया। इनके बाद वायु सेना बैंड भी परेड में भाग लेता दिखा। वायुसेना की एक टुकड़ी ने भी राजपथ पर मार्च कर इस परेड की शान बढ़ाई। धीरे-धीरे सेना की विभिन्न टुकड़ियों ने राजपथ पर मार्च किया।

परेड में राज्यों की झाँकियाँ

इसके बाद बारी आई भारत के समृद्ध वैभव दर्शन की। सबसे पहले मेघालय की झाँकी सलामी मंच पर पहुँची। मेघालय की झाँकी में उनके 50 सालों का प्रदर्शन है और साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को सम्मान भी। इस झाँकी में बांस और बेंत से हस्तशिल्प को प्रस्तुत किया गया है। फिर गुजरात की झाँकी में आदिवासी क्रांतिवीरों की समर्पित दिखाई दी। एक सदी पहले जो जनजातियों ने ब्रिटिशों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई थी ये झाँकी उन्हीं वीरों को श्रद्धांजलि है।

हरियाणा की झाँकी में खेलों पर फोकस को साफ देखा जा सकता है। तस्वीर में देख सकते हैं कि कैसे टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों ने जो देश का नाम रौशन किया उसे इस झाँकी के माध्यम से दिखाया जा रहा है। नीरज चोपड़ा द्वारा देश के लिए जीता गया स्वर्ण पदक भी इस झाँकी का मुख्य आकर्षण है। उत्तराखंड की झाँकी में सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब, टिहरी डैम, बद्रीनाथ धाम समेत चार धाम के लिए चल रही योजना ‘ऑल-वेदर रोड’ का प्रदर्शन है। अगली झाँकी अरुणाचलप्रदेश की दिखाई गई। फिर कर्नाटक की झाँकी को दिखाया गया जिसमें पारंपरिक हस्तशिल्प कला को दिखाया गया है।

इसमें कमला देवी को सम्मान दिया गया है जिन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने का काम किया। परेड में इस बार जम्मू-कश्मीर की झाँकी को भी शामिल किया गया है। जम्मू-कश्मीर वाली झाँकी में देख सकते हैं कि कैसे वहाँ की प्रगति को दिखाया गया है। इसमें चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल भी देखने को मिलता है। इसके अलावा माँ वैष्णो का भवन भी नजर आता है। उत्तर प्रदेश की झाँकी में काशी विश्वनाथ का मंदिर मुख्य आकर्षण है और माँ गंगा की भी झलक है। पंजाब की झाँकी में आजादी के समय दिया गया योगदान प्रदर्शित किया गया। इस झाँकी में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के अलावा उधम सिंह को दिखाया गया।

पीएम ने राष्ट्रीय वार मेमोरियल पर दी श्रद्धांजलि

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोगी ने नेशनल वार मेमोरियल पहुँचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पिक कर दी है। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, रक्षा सचिव अजय कुमार और सेना के तीनों अंगों यानि थलसेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुख मौजूद रहे।

गणतंत्र दिवस पर राजपथ

राजपथ से सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि कैसे इस बार राजपथ में अनसंग हीरोज के साथ देश के लिए बलिदान होने वाले सैनिकों को सम्मान दिया गया है। राजपथ पर सम्मान देने के बाद उनके बलिदान और बहादुरी को याद किया गया। । परेड की बात करें तो गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झाँकियों को चुना गया है। इसमें मंत्रालय से जुड़ी 9 झाँकियाँ भी शामिल हैं।

इन राज्यों में हरियाणा, मेघालय, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र का नाम शामिल है। वहीं मंत्रालयों की बात करें तो संस्कृति मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, विधि और न्याय मंत्रालय, शिक्षा और कौशल विकास मंत्रालय, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, भारतीय डाक विभाग, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, डीआरडीओ और तीनों सेनाओं से जुड़े अत्याधुनिक हथियारों व विमानों की झाँकियाँ भी शामिल हैं।

माइनस 40 डिग्री हो या 15000 फीट की ऊँचाई… ITBP के हिमवीरों ने तिरंगा फहरा यूँ मनाया 73वाँ गणतंत्र दिवस

देश अपना 73वाँ गणतंत्र दिवस आज (बुधवार, 26 जनवरी 2022) मना रहा है। इसी क्रम में देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात भारतीय तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने लद्दाख और उत्तराखंड की बर्फीली ऊँचाई वाली चोटियों में तिरंगा फहराया।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP के हिमवीरों ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के औली में 11000 फीट की ऊँचाई पर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान में तिरंगा फहराया। वीडियों में जवानों को तिरंगा लेकर मार्च करते और भारत माता की जय के नारे लगाते देख सकते हैं।

इसी तरह से उत्तराखंड में ही आईटीबीपी के हिमवीरों ने 14000 फीट की ऊँचाई पर माइनस 30 डिग्री में तिरंगा फहराकर देश के 73वें गणतंत्र दिवस को सेलिब्रेट किया। 8 सेकंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि घुटने भर बर्फ में धंसी हुई आईटीबीपी के जवानों की ये टुकड़ी भारत माता की जय के नारे लगा रही है। जवानों ने कुमाऊँ सेक्टर में भी 12000 फीट की ऊँचाई पर तिरंगा फहराया।

आईटीबीपी के जवानों ने लद्दाख सीमा पर भी 15000 फीट की ऊँचाई पर माइनस 35 डिग्री सेल्सियस में तिरंगा फहराया। वीडियो में ये जवान हाड़ जमा देने वाली ठंड में मार्च करते दिखे। लद्दाख में ही जवानों की एक अन्य टुकड़ी ने माइनस 40 डिग्री के तापमान में तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया।

ओडिशा के गवर्नर गणेशी लाल और सीएम नवीन पटनायक ने भी राजधानी भुवनेश्वर में तिरंगा फहराया। तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि और सीएम एमके स्टालिन ने भी 73वाँ गणतंत्र दिवस मनाया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी तिरंगा फहराया।

इसी कड़ी में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय पर भी तिरंगा फहराकर 73वाँ गणतंत्र दिवस मनाया गया। इस अवसर पर संघ के माहनगर संघचालक राजेश लोया ने तिरंगा फहराया।

गौरतलब है कि इस बार का गणतंत्र दिवस कई मायनों में अलग होने वाला है। इस बार के गणतंत्र दिवस पर अब तक का सबसे बड़ा फ्लाई पास्ट होगा, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के 75 फाइटर प्लेन फ्लाई पास्ट करेंगे। इसमें सुखोई, मिराज और जगुआर को भी शामिल किया जाएगा।

जिस सपाई मंत्री ने किया था नाबालिग लड़की से बलात्कार, उसकी बीवी को MLA का टिकट: पोस्टर में ‘न्याय’ की माँग

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने 39 प्रत्याशियों के नाम वाली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में कई बड़े और विवादित नाम भी हैं। जैसे अखिलेश यादव ने अमेठी की सीट पर गायत्री प्रसाद प्रजापति की पत्नी महराजी प्रजापति को उतारा है। अब दिलचस्प बात ये है कि सपा सरकार में मंत्री रह चुके गायत्री जहाँ रेप के आरोप में जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वहीं उनकी पत्नी महराजी टिकट पाने के बाद पोस्टर छपवा कर उन्हें ही न्याय दिलवाने की बातें कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने इस पोस्टर को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “अखिलेश यादव ने अमेठी से सामूहिक बलात्कार के मामले में जेल में बंद #गायत्री_प्रजापति की पत्नी को उम्मीदवार बनाया और अब पत्नी बलात्कार के आरोपित को ‘न्याय’ दिलाने के लिए वोट माँग रही हैं। पोस्टर में अखिलेश-मुलायम की फोटो है,तो ये भी लिख देते- लड़के हैं, लड़कों से गलती हो जाती है।”

इस पोस्टर में देख सकते हैं मुलायम यादव और अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ महराजी ने खुद की और अपने पति की तस्वीर लगवाते हुए लिखवाया है, “आपका एक बहुमूल्य वोट अमेठी के बेटे को न्याय दिलाएगा।”

इस पोस्टर को देख हर कोई अपनी अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहा है। लोग महराजी को वोट माँगने की जगह शर्म करने की सलाह दे रहे हैं। लोगों का पूछना है क्या समाजवादी पार्टी को ऐसे ही लोग मिलते हैं। किस आधार पर इनके लिए वोट माँगा जाएगा।

बता दें कि पिछले साल ही समाजवादी पार्टी की सरकार में परिवहन, खनन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री का दायित्व संभालने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति को चित्रकूट के चर्चित गैंगरेप मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। प्रजापति के साथ मामले के अन्य दोषी आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी को भी उम्रकैद की सजा दी गई है। तीनों दोषियों पर 2-2 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया था।

गायत्री प्रसाद पर एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वो पूर्व मंत्री से उनके आपस पर मिलने पहुँची थीं तो नशा देकर उनकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया गया। साथ ही किसी को बताने पर जान से मरने की धमकी भी दी। पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ और 824 पन्नों की चार्जशीट दायर की गई थी। बाद में कोर्ट की सुनवाई के समय 17 गवाह और पुलिस की चार्जशीट के आधार पर गायत्री प्रजापति को दोषी पाया गया था।

लाल किला में पेशाब से लेकर महिला पुलिस से बदतमीजी तक: याद कीजिए 26 जनवरी, 2021… जब दिल्ली में खेला गया था हिंसक खेल

दिल्ली में 26 जनवरी, 2021 को किसान प्रदर्शनकारियों ने जो उत्पात मचाया और हिंसा का जो खेल खेला, उसके अब एक वर्ष पूरे हो गए हैं। अब तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद भले ही किसान नेता इसे भूल गए होंगे, लेकिन आम जनता नहीं भूली है कि किस तरह गणतंत्र दिवस के दिन ही दुनिया के सामने राष्ट्र की छवि धूमिल की गई। ‘प्रदर्शन’ के नाम पर सैकड़ों पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और आम लोगों को घायल किया गया। डर का ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दिल्ली आज तक नहीं उबरी है।

26 जनवरी, 2021: गणतंत्र दिवस के दिन हिंसक किसान प्रदर्शनकारियों ने क्या-क्या किया

आइए, एक बार हम आपको फिर से शुरू से याद दिलाते हैं कि कैसे क्या-क्या हुआ था। दिल्ली-हरियाणा के टिकरी सीमा पर सबसे पहले उत्पात शुरू हुआ। कथित किसानों ने पुलिस की बैरीकेडिंग तोड़ दी और दिल्ली में घुस गए। इसी प्रकार गाजीपुर बॉर्डर पर भी किसान बेरिकेडिंग तोड़कर दिल्ली की सीमा में घुस गए। पुलिस मान-मनव्वल करती रही, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सिंघु सीमा पर जमे किसानों ने मुबारक चौक पर तनावपूर्ण माहौल बना दिया और उस रास्ते से दिल्ली में घुसे।

प्रदर्शनकारियों ने ये सब करने के लिए धोखे का सहारा लिया था, क्योंकि कई स्तर की बातचीत के बाद पुलिस ने किसान नेताओं को गणतंत्र दिवस के दिन ‘ट्रैक्टर रैली’ निकालने की अनुमति दी थी। इसके बाद तो दिल्ली को कश्मीर ही बना डाला गया। वादा ‘शांतिपूर्ण विरोध’ का था, लेकिन किसानों ने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में हंगामा किया। प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। ‘किसानों’ द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी किसानों ने जम कर हाथापाई भी की। वो हिंसा पर उतारू थे। किसान तलवार लेकर पिल पड़े और पुलिसकर्मियों को खदेड़ने लगे। पुलिस उन्हें पीछे हटने के लिए कहती रही और किसान तलवार भाँजते हुए आगे बढ़ते रहे। इस दौरान वो धमकियाँ भी दे रहे थे। पुलिस के वाटर केनन वाहन को क्षति पहुँची। मुबारक चौक पर भी किसान प्रदर्शनकारी पुलिस की गाड़ी पर चढ़ गए और बैरिकेडिंग को तोड़ डाला।

सोशल मीडिया के माध्यम से विपक्षी नेता भी किसानों को भड़काते हुए नज़र आए। प्रियंका गाँधी वाड्रा ने किसानों की ट्रैक्टर रैली की तस्वीरें शेयर कर गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दी। दोपहर बाद तो स्थिति और बिगड़ गई। आईटीओ के पास इन्होंने एक डीटीसी बस को क्षतिग्रस्त कर डाला। फिर ऐलान किया गया कि उनका एक जत्था लाल किला की तरफ जा रहा है। इससे पहले पहले दिल्ली ने ऐसे नजारे जामिया हिंसा और उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के दौरान देखे थे।

अब असली हिंसा शुरू हुई। ITO पर हाथ में डंडे लिए इन किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मी को सड़क पर घेर लिया गया और उनका कॉलर पकड़कर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट और हाथापाई करने लगे। किसी तरह पुलिस वालों को बचाया गया। एक अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारियों को ट्रैक्टर से पुलिसकर्मियों को रौंदने की कोशिश करते हुए देखा गया। ये भी याद रखिए कि इस घटना से दो सप्ताह पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे।

ITO तक पहुँचने के बाद किसानों ने अचानक रास्ता बदल लिया और वो लाल किला की तरफ बढ़ पड़े। नंगलोई में तो दिल्ली पुलिस के जवानों को सड़क पर बैठना पड़ा, ताकि वो किसी तरह प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक सकें। गाजीपुर में बैरिकेड्स तोड़ कर किसानों ने जश्न भी मनाया। सोचिए, दिल्ली पुलिस के कर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर सड़क पर बैठना पड़ा। इसके बाद लाल किले पर उन्होंने अपना झंडा भी फहरा दिया। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने उस जगह पर अपना झंडा लगा दिया, जहाँ पर प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराते आए। रस्सी से लाल किला का दरवाजा तोड़ा गया।

एक अन्य वीडियो में देखा गया कि सड़क पर प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस को घेर कर पकड़ लिया और उसे एक कोने में लेकर चले गए। महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया। दिलशाद गार्डन में ड्यूटी के दौरान ही एक पुलिस का जवाब बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद बाकी पुलिसकर्मियों ने उसे वहाँ फर्स्ट एड दिया। उसे अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। लाल किला पर हजारों पुलिसकर्मी पहुँच गए

ट्रैक्टर से स्टंट करने के कारण एक किसान की मौत भी हुई, जिसे लेकर वामपंथी पत्रकारों ने अफवाह फैलाई कि पुलिस की गोली लगने से उसकी मौत हुई है। प्रदर्शकारियों ने उसे जानबूझ कर अस्पताल नहीं ले जाने दिया, जब वो घायल था। इसे लेकर राजदीप सरदेसाई ने फेक न्यूज़ फैला दी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया। वीडियो में देखा गया कि उपद्रवियों की भीड़ में से लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ रहा है। भीड़ में से जब एक आदमी ने उसकी ओर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया

राजनीतिक दलों ने हिंसा करने वालों का समर्थन किया, वामपंथी खुलेआम उतरे बचाव में

उस समय आए एक वीडियो में देखा जा सकता था कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं। 153 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। 250 बच्चे, जो 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लेने आए थे, वे लाल क़िले में फँस गए थे, डरे सहमे बच्चे क़रीब तीन घंटे तक ठिठुरते हुए में छिपे रहे, रोते रहे, बिलखते रहे, आंदोलनकारियों के हुड़दंग को देख डर से काँपते रहे। उन्हें किसी तरह रेस्क्यू किया गया। किसी पुलिसकर्मी का सिर फटा तो किसी को ICU में भर्ती कराना पड़ा।

इस घटना के एक दिन बाद अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में खालिस्तान समर्थकों ने कानून के विरोध में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया और खालिस्तानी झंडे लहराए। और इस दौरान मीडिया क्या कर रहा था?  रवीश के लाइव शो कवरेज में उनके रिपोर्टर ने ग्राउंड से रिपोर्ट दी जिसमें दंगाई स्वयं बता रहे थे कि अधिकारों की लड़ाई के लिए वह हिंसा कर रहे हैं। मगर, जब शो की वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हुई तो उससे वो सेक्शन बिलकुल गायब था। रवीश कुमार ने कहा कि ये हिंसा नहीं है, वो तो बस किसान उग्र हो गए थे।

मत भूलिए कि किस हिंसा की पटकथा पहले से ही लिखी जाने लगी थी। राकेश टिकैत ने कहा था, “किसी के बाप की जागीर है गणतंत्र दिवस? अगर ट्रैक्टर को रोका गया तो उसका इलाज होगा। अगर किसी ने रोका तो उसकी बकल उतार दी जाएगी। कौन रोकेगा ट्रैक्टर को? कोई नहीं रोकेगा। खबरदार जो किसी ने भी ट्रैक्टर को रोका।” वहीं पंजाब के गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा था, “हम सब जबरदस्ती पुलिस की बैरिकेड्स तोड़ कर दिल्ली में घुसेंगे। सरकार गोली मारे, लाठी मारे या जो करना है करे। लेकिन, ये फाइनल मैच होगा। उस दिन जो भी होगा, वो सरकार की जिम्मेदारी होगी।”

हिन्दू धर्म के खिलाफ भी इन किसान प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा निकाला था। उन्होंने राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। लाल किले में घुसी भीड़ ने उपद्रव के दौरान न केवल टिकट काउंटर को पूरी तरह फोड़ा। उन्होंने इसके साथ लगे बोर्डों को भी निकाल कर फेंक दिया। इस घटना के बाद खालिस्तानी संगठन SFJ ने लाल किले पर झंडा फहराने वाले व्यक्ति को $350,000 (2.61 करोड़ रुपए) देने का भी एलान किया

इस हिंसा के बाद कुछ किसान संगठनों ने खुद को आंदोलन से अलग कर लिया। कई प्रदर्शनकारी नशे में धुत थे। पुलिसकर्मियों को घेर-घेर कर मार रहे थे। पत्थरबाजी कर रहे थे। उनके पास धारदार हथियार थे। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इन सबके बावजूद ये कह दिया कि दिल्ली में किसान उग्र नहीं हुए थे, दिल्ली पुलिस उग्र हुई थी। लाल किला हिंसा के आरोपित दीप सिद्धू को ये किसान भाजपा का आदमी बताने लगे। वहीं गैंगस्टर लक्खा को अब किसानों की पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में टिकट दिया है।

किसान प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय स्मारक लाल किला की दीवारों पर पेशाब करते हुए भी पाया गया। कई नेताओं और पत्रकारों ने झूठी ख़बरें फैला कर माहौल बिगाड़ा। ‘किसान आंदोलन’ के कारण नेशनल हाईवे टोल प्लाज़ा पर 26 जनवरी, 2021 तक लगभग 560 करोड़ का अनुमानित राजस्व नुकसान हुआ। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार हिंसक किसानों को बचाती रही। कइयों को सिख संगठनों ने इनाम भी दिया। इस मामले में शायद ही अब तक कुछ खास कार्रवाई हो पाई हो। अंततः सरकार को उनकी माँगें मानते हुए तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े।

CDS बिपिन रावत और पूर्व CM कल्याण सिंह को पद्म विभूषण, वैक्सीन निर्माताओं को भी पद्म अवॉर्ड, सोनू निगम भी लिस्ट में: देखिए सूची

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार (25 जनवरी 2022) को पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) की घोषणा की है। इस साल चार हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। इनमें से तीन लोगों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। पद्म विभूषण सम्मान पाने वालों में दिवंगत पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत, (मरणोपरांत), भाजपा के दिवंगत नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (मरणोपरांत), राधेश्याम खेमका (मरणोपरांत) और प्रभा अत्रे का नाम शामिल हैं। इस बार 128 लोगों को पद्म पुरस्कार सम्मान दिया जा रहा है। इनमें चार को पद्म विभूषण, 17 को पद्म भूषण और 107 को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता और जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को पद्म भूषण, अभिनेता विक्टर बनर्जी, पूर्व गृह सचिव राज राजीव महर्षि, माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्या नडेला, SII के एमडी साइरस पूनावाला और गूगल के CEO सुंदर पिचाई को भी पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस बार केंद्र सरकार द्वारा वैक्सीन निर्माताओं को भी सम्मान दिया गया है।

भारत बायोटेक के फाउंडर कृष्ण इला और उनकी पत्नी सुचारिता इला को पद्मभूषण सम्मान से नावाजा जाएगा। टोक्यो ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने वाले नीरज चोपड़ा, प्रमोद भगत और वंदना कटारिया और गायक सोनू निगम को पद्मश्री से सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

बता दें कि 8 दिसंबर को हेलिकॉप्टर क्रैश हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) समेत 14 सैन्य अधिकारियों की मृत्यु हो गई थी। मृतकों में रावत के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह भी शामिल थे।

समलैंगिक युवक ने कुकर्म से इनकार करने पर 13 साल के बच्चे की हत्या कर उसे जमीन में गाड़ा, छत्तीसगढ़ का मामला

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बेमेतरा जिले से दिलदहाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक समलैंगिक (Gay) युवक ने कुकर्म से इनकार करने पर 13 साल के बच्चे की हत्या कर उसे जमीन में गाड़ दिया। पुलिस ने आज (25 जनवरी 2022) दोपहर को आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में फरी गाँव निवासी आरोपित 20 वर्षीय पंकज विश्वकर्मा ने पुलिस को बताया कि वह समलैंगिक है। उसने बच्चे के सामने सेक्स रिलेशन बनाने का प्रस्ताव दिया था, पर उसने इनकार कर दिया। इसके चलते उसने बच्चे की हत्या कर दी। हालाँकि, आरोपित ने यह नहीं बताया कि उसने किस चीज से बच्चे को मारा था। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13 वर्षीय उमेश पाटील पुत्र अनोज पाटील ग्राम फरी का रहने वाला है। सोमवार (24 जनवरी 2022) को दोपहर को घर से लापता हो गया था। जब शाम तब नहीं लौटा तो परिजन ने उसकी तलाश शुरू की। नहीं मिलने पर मंगलवार सुबह उसके परिवार वालों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस उसकी तलाश शुरू करती, इससे पहले कांस्टेबल रवि तिवारी को सूचना मिली कि ग्राम बीजाघाट के मुरुम खदान में खून जैसा कुछ पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। कांस्टेबल तिवारी ने मौके पर पहुँच उमेश का शव बरामद किया। आरोपित ने उसके पैर को उसी की पैंट से बाँध दिया था। बताया जा रहा है कि सिर पर पत्थर जैसी किसी भारी चीज से वार कर बच्चे की हत्या की गई थी। मामला इस बात से खुला क्योंकि पंकज विश्वकर्मा के साथ बच्चे को आखिरी बार साथ देखा गया था।

‘मैं गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ’: डॉक्टर कफील खान ने किया टिकट के लिए बातचीत का दावा, पार्टी का खुलासा नहीं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान (Kafeel Khan) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में ऑक्सीजन की कमी से कई बच्चों की मौत के बाद विवादों में आए कफील खान ने इस बार यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के खिलाफ गोरखपुर सीट (Gorakhpur Assembly Seat) से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।

गोरखपुर में छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है। उन्होंने मंगलवार (25 जनवरी 2022) को पीटीआई से बात करते हुए कहा, “अगर कोई पार्टी मुझे टिकट देती है तो मैं गोरखपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसी पार्टी के संपर्क में हैं या फिर किसी ने उनसे संपर्क किया है। इस पर उन्होंने कहा, “हाँ, बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो मैं चुनाव लड़ूँगा।”

खान ने आगे कहा कि अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे में उन्हें निशाना बनाया गया था, जिसमें 80 परिवारों के बच्चों की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर में उनकी 70 वर्षीय माँ को पुलिस प्रताड़ित कर रही है। कफील की माँ गोरखपुर के बसंतपुर मोहल्ले में अपने भाई आदिल खान के परिवार के साथ रहती हैं।

डॉ. कफील खान ने बीते दिनों यह भी दावा किया कि इतने सालों के बाद भी मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछली साल 17 दिसंबर को मेरी किताब का विमोचन होने के बाद पुलिस 20 दिसंबर और फिर 28 दिसंबर को मेरे घर पर पहुँची थी। उन्होंने कहा कि मैं गोरखपुर जिले के राजघाट थाने का हिस्ट्रीशीटर हूँ और विधानसभा चुनाव की वजह से ऐसे लोगों का सत्यापन किया जा रहा है।

बता दें कि योगी सरकार ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कफील खान के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की थी। बाद में हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद कफील जेल से बाहर आए थे। पिछले साल 9 नवंबर को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

विश्व के 50 ‘इनोवेटिव इकॉनोमीज़’ में भारत का स्थान: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति कोविंद का देश के नाम संबोधन, देखें वीडियो

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 73वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार (25 जनवरी, 2022) को राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। राष्ट्रपति कोविंद ने अपने संबोधिन की शुरुआत देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हम सबको एक सूत्र में बाँधने वाली भारतीयता के गौरव का यह उत्सव है।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राष्ट्र के नाम अपने संदेश में राष्ट्रपति देश में अब तक घटित बातों का जिक्र करते हैं साथ ही साथ आने वाली चुनौतियों के बारे में भी देश को अवगत करा रहे हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, “गणतन्त्र दिवस का ये दिन उन महानायकों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने स्वराज के सपने को साकार करने के लिए अतुलनीय साहस का परिचय दिया और उसके लिए देशवासियों में संघर्ष करने का उत्साह जगाया।” इस मौके पर राष्ट्रपति ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी याद करते हुए कहा, “दो दिन पहले, 23 जनवरी को हम सभी देशवासियों ने ‘जय-हिन्द’ का उद्घोष करने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया है। स्वाधीनता के लिए उनकी ललक और भारत को गौरवशाली बनाने की उनकी महत्वाकांक्षा हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि हमारे संविधान का निर्माण करने वाली सभा में उस दौर की सर्वश्रेष्ठ विभूतियों का प्रतिनिधित्व था। वे लोग हमारे महान स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख ध्वज-वाहक थे।”

उन्होंने आगे कहा, “आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करने के मूल कर्तव्य को निभाते हुए हमारे करोड़ों देशवासियों ने स्वच्छता अभियान से लेकर कोविड टीकाकरण अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया है। ऐसे अभियानों की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय हमारे कर्तव्य-परायण नागरिकों को जाता है।

इसके साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, “मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि विश्व में सबसे ऊपर की 50 ‘इनोवेटिव इकॉनोमीज़’ में भारत अपना स्थान बना चुका है। यह उपलब्धि और भी संतोषजनक है कि हम व्यापक समावेश पर जोर देने के साथ-साथ योग्यता को बढ़ावा देने में सक्षम हैं।”

राष्ट्रपति कोविंद ने इस खास मौके पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को भी याद किया करते हुए कहा, “सन् 1930 में महात्मा गाँधी ने देशवासियों को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाने का तरीका समझाया था। यथाशक्ति रचनात्मक कार्य करने का गाँधी जी का यह उपदेश सदैव प्रासंगिक रहेगा।” उन्होंने कहा कि गाँधी जी चाहते थे कि हम अपने भीतर झांक कर देखें, आत्म-निरीक्षण करें और बेहतर इंसान बनने का प्रयास करें, और उसके बाद बाहर भी देखें, लोगों के साथ सहयोग करें और एक बेहतर भारत तथा बेहतर विश्व के निर्माण में अपना योगदान करें।

उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस को महत्त्व बताते हुए कहा, “भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वाका अंगिकृत, अधिनयमित और आत्मार्पित किया गया। उस दिन को हम संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं। उसके दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 से हमारा संविधान पूर्णत प्रभावी हुआ। ऐसा सन् 1930 के उस दिन को यादगार बनाने के लिए किया गया था, जिस दिन भारतवासियों ने पूरी आज़ादी हासिल करने का संकल्प हासिल लिया था। सन् 1930 से 1947 तक हर साल 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाता था। इसलिए ये तय किया गया कि उसी दिन से संविधान पूर्णत प्रभावी बनाया जाए।”

‘हमारा गाँव योगी जी के साथ, यहाँ किसी और पार्टी के उम्मीदवार आकर अपना समय बर्बाद ना करें’: UP के इस गाँव में लगा पोस्टर बना चर्चा का विषय

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद सभी पार्टियाँ कैंपेनिंग और डिजिटल प्रचार में जुट गई हैं। कई नेता इधर से ऊधर भी जा रहे हैं। इस सबके बीच यूपी के सियासी दंगल में आखिर किस पार्टी के सारे समीकरण फिट बैठेंगे और वो सत्ता के शिखर पर पहुँचेगी, ये बड़ा सवाल है। हालाँकि इस सवाल के जवाब को लेकर अटकलें तो कई तरह की लगाई जा रही है, लेकिन इसका सटीक जवाब मतगणना के बाद ही मिल पाएगा।

लेकिन इन चुनावी कैंपेनिंग के बीच कई ऐसी बातें नजर आ जाती है, जो अनायास ही चर्चा का विषय बन जाता है। इसी में से एक है- प्रदेश के हापुड़ जनपद के लाखन गाँव में लगा यह पोस्टर। यह पोस्टर बीजेपी के समर्थन में है। इस पोस्टर में बीजेपी को छोड़ कर अन्य किसी भी पार्टी के प्रत्याशियों को गाँव में आकर समय बर्बाद न करने की सलाह दी गई, क्योंकि उन्होंने पहले ही योगी आदित्यनाथ को जिताने का मन बना लिया है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक इस पोस्टर में लिखा है, “हमारा गाँव लाखन योगी आदित्यनाथ जी के साथ है। यहाँ किसी और पार्टी के उम्मीदवार आकर अपना समय बर्बाद ना करें।” इस पोस्टर को गाँव के हर रास्ते, हर चौराहे पर लगा दिया गया है। जिससे कि चुनाव प्रचार के लिए आने वाले प्रत्याशी इसे देख लें और गाँव में आकर अपना और उनका, किसी का समय बर्बाद न करें। जानकारी के मुताबिक उनकी इस पोस्टर का फायदा भी होता नजर आ रहा है, क्योंकि ग्रामीणों का कहना है कि इस पोस्टर को लगाने के बाद किसी अन्य पार्टी का प्रत्याशी उनके गाँव में नहीं आया है।

इस पोस्टर को लगाने के पीछे की वजह को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि योगी सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में बेहतर विकास कार्य, स्वास्थ्य सुविधाएँ और गरीबों को राशन देने का काम किया है। इसलिए वो फिर से प्रदेश में योगी सरकार और धौलाना विधानसभा में बीजेपी के विधायक का समर्थन करते हैं। ग्राम प्रधान के साथ सभी लोगों ने मिलकर अपनी सहमति से यह पोस्टर लगाए हैं।

वहीं ग्राम प्रधान नितेन्द्र तोमर का कहना है कि प्रदेश में योगी सरकार होने के बावजूद धौलाना विधानसभा में बीजेपी का विधायक नहीं था। जिसके चलते क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो सका। 5 साल तक बसपा से विधायक रहे असलम चौधरी यहाँ कभी दिखाई नहीं दिए। अब यहाँ की जनता बीजेपी के विधायक को चुनेगी जिससे विकास कार्य तेजी से होंगे।

आसिफ शेख ने दोस्त की पत्नी की अश्लील फोटो खींचकर इस्लाम कबूलने और निकाह के लिए बनाया दबाव, ऐंठे रुपए: अब खोज रही महू पुलिस

मध्य प्रदेश के महू में एक मुस्लिम युवक द्वारा आपने ही दोस्त की पत्नी का अश्लील फोटो खींच कटर उस महिला को ब्लैकमेल कर पैसे माँगने और इस्लाम कबूल करके दूसरी शादी करने का मामला सामने आया है। विवाहिता ने महू पुलिस थाने में एक व्यक्ति के खिलाफ धर्मान्तरण और निकाह के लिए दबाव बनाने का आपराधिक मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने सोमवार को इस मामले में जानकारी दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महू पुलिस के थाना प्रभारी अरुण सोलंकी ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि विवाहिता ने महू थाने में आसिफ युसुफ शेख नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है कि उसने कथित तौर पर धोखे से महिला के कुछ आपत्तिजनक फोटो खींच लिए थे। पुलिस के मुताबिक 25 साल की विवाहिता का आरोप है कि शेख इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उस पर धर्मांतरण एवं निकाह का दबाव बना रहा था और उसने उससे धोके से पैसे भी ऐंठ लिए थे। पुलिस ने शेख पर भारतीय दंड विधान की धारा 384 (जबरन वसूली) और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के संबद्ध प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

महू पुलिस ने महिला की शिकायत पर आसिफ युसुफ शेख के खिलाफ जबरदस्ती धर्मांतरण कराने का दबाव डालने, ब्लैकमेल करने और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। महिला ने अपनी शिकायत में मामले के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस को बताया कि 5 साल पहले एक युवक से उसने प्रेम विवाह किया था। महिला ने बताया की आरोपित उसके पति का दोस्त है और वह हमेशा घर आता जाता रहता था। एक दिन उसने धोखे से महिला का अश्लील फोटो खींच लिया और उसे वायरल करने की धमकी देकर कई बार रुपए भी ऐंठ चुका है।

बताया जा रहा है कि विवाहिता ने भी अपनी बदनामी के डर से कई बार उसे रुपए दिए लेकिन आरोपित आसिफ का मन इसके बाद भी नहीं बदला और जबर्दस्ती निकाह करने का दबाव बनाने लगा। वह पीड़िता से कहने लगा कि अगर वह मुस्लिम धर्म नहीं अपनाएगी तो उसके फोटो को वायरल कर उसे बदनाम कर देगा। जिसके बाद पीड़ित महिला ने महू पुलिस से शिकायत की। वहीं अब इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपित आसिफ युसूफ शेख की तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल अभी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहद का एक नया मामला सामने आया था। जहाँ पर अहमद फैज़ नाम के व्यक्ति पर अमन बनकर कंपनी सेक्रेटरी (CS) की छात्रा को धोखे में रखने और उसके साथ दुष्कर्म और अश्लील फोटो एवं वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग करने के साथ-साथ धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा था। उस मामले में भी केस दर्ज कर इंदौर पुलिस ने 22 जनवरी को आरोपित फैज़ को गिरफ्तार कर लिया था।