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रूस से पैसा लेते थे 150+ कॉन्ग्रेस MP, पत्रकारों ने दलाली में लिखे 16000 आर्टिकल- निशिकांत दुबे ने ‘कठपुतली गैंग’ की खोली पोल: इंदिरा हो या राजीव, DNA में ‘सूटकेस कल्चर’

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि कभी कॉन्ग्रेस के 150 से अधिक सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे। उनका कहना है कि पत्रकारों के एक समूह भी रूस का दलाल था।

ट्विटर/एक्स पर निशिकांत दुबे ने ‘कॉन्ग्रेस, करप्शन और गुलामी’ शीर्षक के साथ किए पोस्ट में ये दावा किया है। उन्होंने कहा है;

  1. ये अवर्गीकृत गुप्त दस्तावेज सीआईए का 2011 में जारी हुआ।
  2. कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एचकेएल भगत की अगुवाई में 150 से ज्यादा कॉन्ग्रेस के सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे, रूस के लिए दलाली करते थे?
  3. पत्रकारों का एक समूह दलाल था, कुल 16000 न्यूज आर्टिकल रूस ने छपवाए?
  4. उस जमाने में रूस के जासूसी संस्थानों के 1100 लोग हिन्दुस्तान में थे जो नौकरशाही, व्यापारी संगठनों, कम्युनिस्ट पार्टियों, ओपिनियन मेकर को अपने पॉकेट में रखते थे और सूचना के आधार पर भारत की नीति बनाते थे?
  5. कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार सुभद्रा जोशी ने लोकसभा चुनाव में उस वक्त 5 लाख रुपए लिए जर्मन सरकार से चुनाव के नाम पर, हारने के बाद इंडो जर्मन फोरम की अध्यक्ष बनीं।

उन्होंने लिखा है, “यह देश था या ग़ुलामों, दलालों या बिचौलियों की कठपुतली। कॉन्ग्रेस इसका जवाब दे, आज इस पर जाँच हो या नहीं?”

यह पहला मौका नहीं है जब रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी से पैसे लेने और उनके इशारे पर काम करने का आरोप कॉन्ग्रेस पर लगा है। इससे पहले भी इंदिरा गाँधी और उनके बेटे राजीव के जमाने में कॉन्ग्रेस के ‘ब्रीफकेस कल्चर’ को लेकर को लेकर तथ्य सामने आ चुके हैं।

2017 की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कुछ पुराने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। इससे पता चलता है कि इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेस के 40 फीसदी सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिला था। 2005 में केजीबी के ही एक पूर्व जासूस वासिली मित्रोकिन की किताब आई थी। इसमें तो बकायदा बताया गया है कि खुद इंदिरा गाँधी को सूटकेसों में भरकर पैसे भेजे गए थे।

साभार: indiafacts.org

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने ऑपइंडिया को बताया था कि जो तथ्य सार्वजनिक हुए, उससे जाहिर होता है कि 1967 के आम चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस सहित देश के ज्यादातर राजनीतिक दलों को विदेश से पैसा मिला था। उन्होंने बताया था कि शीत युद्ध के जमाने में कम्युनिस्ट देश जहाँ भारत में साम्यवाद के फैलाव के लिए पैसे खर्च कर रहे थे, तो पूँजीवादी देश साम्यवाद को रोकने के लिए। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का नेता ही बिकने को तैयार हो तो विदेशी ताकतों के लिए चीजें आसान हो जाती है।

किशोर ने ऐसी कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि विदेश से पैसा लेने के मामले की जाँच भी कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। जब कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे सार्वजनिक करने की माँग की तो तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री यशवंत राव चव्हाण ने संसद में कहा कि जिन दलों और नेताओं को विदेशों से धन मिले हैं, उनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे उनके हितों को नुकसान पहुँचेगा।

लेकिन, सालों तक जिन तथ्यों को कॉन्ग्रेस छिपाती रही उसे मित्रोकिन ने 2005 में दुनिया के सामने ला दिया। वे सोवियत संघ के जमाने के हजारों गोपनीय दस्तावेज चुराकर देश से बाहर ले गए थे। बाद में इसके आधार पर क्रिस्टोफर एंड्रयू (Christopher Andrew) के साथ मिलकर किताबें लिखी। द वर्ल्ड वॉज गोइंग आवर वे (The World Was Going Our Way) नामक किताब में कहा गया है कि केजीबी ने 1970 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार के लिए फंड दिया था।

2017 में सामने आई दिसंबर 1985 की सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि सोवियत संघ ने भारतीय कारोबारियों के साथ समझौतों के जरिए कॉन्ग्रेस पार्टी को रिश्वत दी थी। सोवियत संघ का दूतावास कॉन्ग्रेस नेताओं को छिपकर रकम देने सहित कई खर्चों के लिए बड़ा रिजर्व रखता था। इसके मुताबिक कॉन्ग्रेस के अलावा सीपीआई और सीपीएम को भी सोवियत संघ से काफी पैसा मिलता था। ऐसा नहीं है कि सभी को पैसे ही दिए गए थे। कुछ के साथ तो सोवियत संघ ने बकायदा समझौता भी किया था।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि केजीबी के पैसे की वजह से भारत के ढेरो नेता सोवियत संघ की मुट्ठी में थे और वे भारतीय राजनीति को अपने हितों के हिसाब से प्रभावित करते थे। मित्रोकिन की किताब में भी यह बात कही गई है। केजीबी के लीक दस्तावेजों में भारत को तीसरी दुनिया की सरकारों में केजीबी के घुसपैठ का एक मॉडल बताया गया था। इन दस्तावेजों में साफ तौर पर भारत सरकार में केजीबी के बहुत से सूत्र होने की बात कही गई थी।

साभार: indiafacts.org

ऐसा भी नहीं है कि इंदिरा के बाद विदेश से पैसा लेने की कॉन्ग्रेस की आदत छूट गई। दस्तावेज बताते हैं कि सोवियत संघ से पैसा लेने का जो सिलसिला इंदिरा गाँधी के जमाने में शुरू हुआ था वह राजीव गाँधी के जमाने में भी जारी रहा है। हालॉंकि इस दौर में सोवियत संघ का प्रभाव कुछ सीमित करने की कोशिश भी हुई थी।

साभार: indiafacts.org

ये दस्तावेज मीडिया में भी केजीबी की घुसपैठ के बारे में बताते हैं। इसके अनुसार सोवियत संघ ने अपने प्रोपेगेंडा के प्रचार के लिए भारत के बड़े मीडिया संस्थानों के साथ व्यापक पैमाने पर साँठगाँठ कर रखी थी। वे उसकी जरूरत के हिसाब से लेख लिखते थे। यहाँ तक की संपादकीय में भी सोवियत संघ की धुन बजाते थे। जिन संस्थानों का जिक्र है उनमें टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैन, द हिंदू शामिल है।

मित्रोकिन ने अपनी किताब में बताया है कि सोवियत संघ ने इस काम के लिए भारत में 40-50 पत्रकार रखे थे। बाद के सालों में इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 हो गई थी।

केरल के ‘इस्लामी अड्डे’ में कैद हैं कई लड़कियाँ, लंबी दाढ़ी वाले मर्द दे रहे जिहाद की ट्रेनिंग: प्रयागराज की जिस दलित लड़की को बनाने वाले थे ‘आतंकी’, उसने बताया सब कुछ

प्रयागराज की एक 15 साल की दलित लड़की को एक मुस्लिम महिला केरल लेकर गई। यहाँ उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवाया गया। उसको जिहादी ट्रेनिंग देने का भी प्रयास हुआ। लड़की किसी तरह बच कर वापस पहुँची। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मुस्लिम महिला के गैंग में और भी लोग शामिल हैं और उसका काम दलित एवं गरीब बच्चों को आतंकी नेटवर्क में शामिल करवाना है। अब इस मामले में मुस्लिम महिला और उसका साथी गिरफ्तार हो गए हैं।

प्रयागराज की दलित बच्ची को फँसाया

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

UP पुलिस बोली- केरल मॉड्यूल से जुड़ी है दरकशा

इस मामले में 28 जून, 2025 को प्रयागराज के फूलपुर थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस से पीड़िता की माँ ने पूरी घटना बताई है, इसके साथ ही कहा है कि उसे अब फोन पर धमकियाँ मिल रही हैं। FIR में पुलिस ने दरकशा, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद ताज समेत 4 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

इनके खिलाफ BNS की कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों पर SC/ST एक्ट की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले दरकशा और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य पता चले हैं।

प्रयागराज के DCP कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया है कि बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है जो गरीब और दलित लड़कियों को बहला-फुसलाकर, उनका ब्रेनवॉश करके और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करके आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल करता है।

उन्होंने शक जताया है कि दरकशा बानो केरल के एक मॉड्यूल से जुड़ी हुई है। अब इसकी जाँच 3 टीमें कर रही हैं।

‘रूस-ईरान-चीन ने हमारे साथ की गुपचुप बैठक, भारत को पूछा तक नहीं’: ऑपरेशन सिंदूर की मार से कराह रहा पाकिस्तान, फेक न्यूज की ‘मलहम’ से कम कर रहा सूजन

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत से बुरी तरह मात खाने के बाद अब पाकिस्तान अपनी वाह-वाही के लिए सोशल मीडिया पर प्रोपगेंडा फैला रहा है। पाकिस्तानी अकॉउंट्स से दावा हो रहा है कि चीन, रूस और ईरान के साथ उसने गुपचुप एक बैठक की है जो उनकी कूटनीतिक जीत है और भारत की हार है। इस दावे में क्या सच्चाई है इसके कहीं कोई प्रमाण नहीं हैं, लेकिन आतंकी मुल्क के प्रोपगेंडाबाज इसे सच साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

पूरा मामला

दरअसल, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 25 से 27 जून के बीच चीन के क़िंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने गए थे। इस बैठक में रूस, ईरान, पाकिस्तान और अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्री भी मौजूद थे।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब भारत और चीन अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा और वाणिज्य संबंधों के साथ-साथ बातचीत के माध्यमों को भी वापस शुरू किया जा सके।

इसी दौरान, पाकिस्तान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने एक झूठी खबर फैलाई कि SCO के तहत चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर की एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें भारत को बुलाया नहीं गया। उन्होंने इस फर्जी दावे को भारत की ‘कूटनीतिक हार’ और पाकिस्तान की ‘जीत’ के तौर पर पेश किया।

हालाँकि, सच यह है कि इस खबर की कहीं कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, जिससे यह तो साफ है कि यह खबरें केवल भ्रामक प्रचार का हिस्सा हैं।

एक रिपोर्ट में तो इस घटनाक्रम को “रणनीतिक संरेखण में एक बड़ा बदलाव” तक करार दे दिया गया।

डी-इंटेंट डेटा के अनुसार किसी भी विश्वसनीय स्रोत ने शिखर सम्मेलन में चार देशों के बीच ऐसी किसी बैठक की सूचना नहीं दी।

बता दें कि 26 जून 2025 को चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की जो बैठक हुई थी, उस पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कड़ा रुख अपनाया और उस साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था, जिसमें 26 निर्दोष हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी।

इस संयुक्त बयान में न तो भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति को दर्शाया गया और न ही पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोई बात की गई। हाँ लेकिन पाकिस्तान के कहने पर बयान में बलूचिस्तान की स्थिति का उल्लेख जरूर किया गया।

राजनाथ सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे आतंकवाद के खात्मे के लिए एकजुट हों, ताकि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इसके बावजूद, SCO ने अपने आधिकारिक बयान में पहलगाम हमले उल्लेख करना जरुरी नहीं समझा।

दलित बच्ची को इस्लामी आतंकी बनाने के लिए प्रयागराज से उठा केरल ले गई दरकशा बानो, करवाया धर्मांतरण: आगरा से गायब हुई बहनें भी इसी तरह बनी थीं ‘शिकार’

उत्तर प्रदेश में एक माह के भीतर द केरल स्टोरी की तरह का एक दूसरा मामला सामने आया है। प्रयागराज की एक नाबालिग दलित लड़की का धर्मांतरण करवा के उसे जिहाद में झोंका गया। यह काम एक मुस्लिम महिला ने किया, जिसने लड़की का ब्रेन वॉश किया। बच्ची किसी तरह बच के अपने घर पहुँची।

क्या है मामला?

प्रयागराज की रहने वाली एक दलित नाबालिग बीते दिनों गायब हो गई थी। उसकी माँ पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँची थी। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पता चला कि दरकशा बानो दलित नाबालिग लड़की को इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर केरल चली गई।

दरकशा बानो ने दलित बच्ची को केरल ले जाकर उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवा भी दिया। इसके बाद दरकशा ने उसे जिहाद में झोंकने का प्रयास किया। दलित बच्ची को आतंकवादी बनाने की साजिश थी। बताया गया कि दरकशा की सहायता मोहम्मद कैफ नाम के एक युवक ने की। पीड़िता किसी तरह बच कर केरल से निकली और प्रयागराज पहुँची।

पुलिस ने दरकशा बानो और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि दरकशा बानो पहले भी कई नाबालिगों को जिहादी नेटवर्क में शामिल करवा चुकी है। मामले में अब जाँच चल रही है। जाँच के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं।

आगरा में गायब हुईं थी दो लड़कियाँ

आगरा के परिवार ने भी हाल ही में अपनी दो बेटियों के इस्लामी धर्मांतरण गैंग में फंसने की शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी 2021 में गायब हो गई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि यह बेटी आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से पढ़ी हुई है। इस लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़की से थी।

पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी की दोस्ती सायमा नाम की एक लड़की से थी जो कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की रहने वाली थी। इस सायमा उर्फ़ खुशबू ने हिन्दू लड़की का ‘ब्रेनवॉश’ किया था। गायब हो चुकी बड़ी लड़की के पिता ने बताया कि इसी के चलते वह 2021 में गायब हुई थी।

गायब हुई लड़की के पिता ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी सायमा के चलते दूसरे मजहब के प्रभाव में थी।

दूसरी का भी किया ब्रेनवॉश

पीड़ित परिवार ने यह भी बताया था कि उनकी बड़ी बेटी इस कदर प्रभाव में आ गई कि उसने घर आने के बाद अपनी छोटी बहन का ही ब्रेनवॉश करना चालू कर दिया और इसमें सफल भी रही। इसके बाद 25 मार्च, 2025 को दोनों लडकियाँ आगरा स्थित घर से गायब हो गईं थी।

उनका कोई भी पता नहीं लगा। वह किसके साथ गईं और कहाँ गईं, इस संबंध में एक भी जानकारी परिवार के पास नहीं आई है। थक हार कर यह परिवार पुलिस के पास पहुँचा। पुलिस ने दोनों लड़कियों के बालिग़ होने को लेकर कार्रवाई करने में शुरुआत में ढिलाई बरती। हालाँकि, इस मामले में 4 मई, 2025 को FIR दर्ज हो गई।

ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज FIR कॉपी मौजूद है। FIR में पीड़ित पिता ने बताया था कि सायमा ही उनकी दोनों बेटियों को ले गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सायमा उनकी लड़कियों की शादी करवाने के लिए ले गई है।

पुलिस जाँच में धर्मांतरण गैंग का खुलासा

मामले में FIR दर्ज होने के बाद जाँच चालू की गई थी। पुलिस की शुरूआती जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला था कि यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसा है। पुलिस ने बताया कि यह दोनों बहने अब इस्लामी धर्मांतरण गिरोह का हिस्सा बन गईं हैं।

पुलिस ने इस मामले में यह भी पता किया कि इस केस के तार जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR से भी जुड़े हैं। पुलिस आगे और भी जानकारियाँ निकाल रही हैं। इसके अलावा मामले को आगरा की सायबर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

अडानी ग्रीन एनर्जी ने बनाया रिकॉर्ड, 15000 MW अक्षय ऊर्जा के लगाए प्लांट: 79 लाख घरों को किया जा सकता है रोशन, CEO ने कहा- 13 राज्यों को मिलेगा फायदा

अडानी ग्रीन एनर्जी दुनिया के 10 टॉप कंपनियों में शामिल हो गया है। इसे अक्षय ऊर्जा स्वतंत्र बिजली उत्पादक (IPP) में स्थान दिया गया है। कंपनी ने 10,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने के बाद 15 महीनों के भीतर 5,000 मेगावाट और अधिक उत्पादन शुरू कर कुल 15,539.9 मेगावाट तक पहुँच गया है।

एजीईएल भारत की पहली और एकमात्र अक्षय ऊर्जा कंपनी है जिसने मुख्य रूप से ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पोर्टफोलियो के मुताबिक कंपनी के पास 11,005.5 मेगावाट सौर, 1,977.8 मेगावाट पवन और 2,556.6 मेगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता है।

2,140 MW जेसलमेर, Rajasthan                         

AGEL के सीईओ आशीष खन्ना ने कहा, “15,000 मेगावाट की उपलब्धि को पार करना बहुत गर्व की बात है। यह उपलब्धि हमारी टीम के फोकस और समर्पण का प्रमाण है। यह हमारे प्रमोटरों के दूरदर्शी नेतृत्व और हमारे निवेशकों, ग्राहकों, टीम और भागीदारों के अटूट समर्थन के बिना संभव नहीं होता, जो हर कदम पर हमारे साथ खड़े रहे हैं। अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेता के रूप में अदानी को स्थापित करने की श्री गौतम अदाणी की महत्वाकांक्षा से प्रेरित होकर AGEL नवाचार और परिचालन उत्कृष्टता में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है”

AGEL का 15,539.9 मेगावाट बिजली से 79 लाख घरों को रौशन किया जा सकता है। इससे तेरह अलग-अलग भारतीय राज्यों को फायदा मिलेगा। इनमें पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र शामिल हैं।

648 MW कमूथी, तमिलनाडु                            

अडानी ग्रीन एनर्जी गुजरात के कच्छ के खावड़ा में बंजर भूमि पर 30,000 मेगावाट का दुनिया का सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रही है। 538 वर्ग किलोमीटर में बना यह संयंत्र पेरिस से पाँच गुना है। ये अंतरिक्ष से भी दिखाई देगा। पूरा होने के बाद ये दुनिया पर सबसे बड़ा बिजली संयंत्र होगा।

AGEL ने अब तक खावड़ा में 5,355.9 मेगावाट अक्षय ऊर्जा के भंडारण की क्षमता हासिल की है। खावड़ा में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता को हासिल करने लक्ष्य है।

AGEL के परिचालन पोर्टफोलियो को वाटर पॉजिटिव, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त और जीरो वेस्ट-टू-लैंडफिल के रूप में प्रमाणित किया गया है।

गेट से घसीटकर ले गए अंदर, गार्डरूम में गैंगरेप किया: कोलकाता लॉ कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी दिखी CCTV में, पुलिस सबूतों की जाँच में जुटी

कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। कोलकाता पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि 24 साल की छात्रा को दो आरोपी गेट से घसीटकर दक्षिण कलकत्ता लॉ कॉलेज परिसर के अंदर ले जा रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक छात्रा के साथ कॉलेज परिसर के गार्ड रूम में गैंगरेप किया गया। इसमें दो सीनियर छात्र और एक पूर्व छात्र शामिल था। वीडियो से छात्रा के आरोप की पुष्टि हो रही है। छात्रा ने कहा था कि मुख्य आरोपित मनोजीत मिश्रा ने दो लोगों को उसे जबरन गार्ड रूम में ले जाने का निर्देश दिया था।

एक पुलिस अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, “सीसीटीवी फुटेज महिला के आरोपों की पुष्टि करता है। इसमें तीनों आरोपियों, सुरक्षा गार्ड और पीड़िता की हरकतें दिखाई देती हैं। हम फिलहाल फुटेज की जाँच कर रहे हैं।”

इस मामले में मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके मोबाइल फोन से वीडियो क्लिप भी बरामद किया गया है।

इससे पहले रविवार (29 जून 2025 ) को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने कॉलेज का दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छिपाने की कोशिश की गई थी। मजूमदार ने कहा कि पुलिस आयोग के साथ पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रही है।

छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के विरोध में बीजेपी ने रविवार शाम को कोलकाता में महिला सुरक्षा यात्रा निकाली। रैली का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने किया। रैली में भाजपा कार्यकर्ता हाथों में मशाल लिए पीड़िता को न्याय देने की माँग कर रहे थे।

मजूमदार ने कहा, “पीड़िता का परिवार भारी दबाव में है। पुलिस को नहीं पता कि वह इस समय कहाँ है। उन्होंने मुझे अपराध स्थल का वीडियो रिकॉर्ड करने से भी रोक दिया।”

इस बीच ये भी बात सामने आई है कि इस मामले के मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके साथ पढ़ने वाले छात्र टीटस मन्ना ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के नेता के रूप में मोनोजीत जाना जाता है। वो छात्राओं को परेशान करने और स्टूडेंट्स के साथ हिंसा करने के लिए जाना जाता था, लेकिन उसका प्रभाव इतना था कि हर बार वह बच निकलता था।

टीटस ने बताया कि वह और मोनोजीत 2012 से साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में टीएमसीपी से जुड़े थे। 2013 में एक हिंसक घटना के बाद वह मोनोजीत से दूर हो गया।

टीटस ने याद करते हुए बताया, “मोनोजीत के खिलाफ 2013 में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था, जब उसने कथित तौर पर एक कैटरिंग कर्मचारी को चाकू मार दिया था और उसकी उंगली काट दी थी।” घटना के बाद, मोनोजीत कुछ सालों के लिए कैंपस से गायब हो गया।

2016 में मामला ‘गुपचुप तरीके से सुलझ’ जाने के बाद वह फिर से कॉलेज आने लगा। हालाँकि जब उसने 2017 में छात्र राजनीति में लौटने की कोशिश की, तो टीएमसीपी नेताओं ने उसे रोक दिया, लेकिन आगे चल कर वह शामिल हो गया।

एक हाथ में त्रिशूल, एक में खप्पर और प्रसाद में मदिरा… 6 हजार साल पुराना है काल भैरव मंदिर का इतिहास, जहाँ होती है शिव के रौद्र रूप की पूजा

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। फिर उसी मदिरा को भक्तों को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ये सच्चाई है काल भैरव मंदिर की। जो उज्जैन का न सिर्फ धार्मिक बल्कि रहस्यमयी चमत्कार भी है। काल भैरव को शिव के रौद्र रूप के तौर पर पूजा जाता है। यहाँ हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शराब की बोतल लेकर आते हैं और काल भैरव को अर्पित करते हैं।

माना जाता है कि पिलाते वक्त शराब मूर्ति के मुँह से गायब हो जाती है। कोई नली, कोई ट्रिक, यहाँ तक की अब तक कोई वैज्ञानिक भी इसका ठोस जवाब नहीं दे सका है। ये मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि जिज्ञासा का भी केंद्र है। यहाँ साधारण भक्तों से लेकर तांत्रिक तक सभी बाबा काल भैरव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

काल भैरव की मूर्ति
काल भैरव की मूर्ति को शराब का प्रसाद चढ़ाते महंत ( साभार : TripAdvisor)

मंदिर का इतिहास

काल भैरव मंदिर का इतिहास लगभग छह हजार वर्ष पुराना है। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। काल भैरव की पूजा कपालिका और अघोरा संप्रदाय का हिस्सा रही है। इतिहासकार की मानें तो मंदिर का निर्माण शिप्रा नदी के ऊपर राजा भद्रसेन ने करवाया था।

काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य
काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य (साभार : MP Tourism)

हालाँकि वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। यह मंदिर मराठा काल में बनवाया गया था। सन् 1788 में मराठा शासक महादजी शिंदे ने इस मंदिर को फिर से बनवाया और सजाया। उज्जैन प्राचीन अवंतिका नगरी रही है और यहाँ शैव परंपरा का गहरा असर है

मंदिर की संरचना

मंदिर की बनावट बहुत ही साधारण पर प्रभावशाली है। मालवा शैली के अद्भुत चित्र मंदिर की दीवारों को सजाते हैं। मुख्य द्वार पर दो विशाल सिंहों की मूर्तियाँ हैं जो मंदिर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। अंदर प्रवेश करते ही मुख्य गर्भगृह है। जहाँ काले पत्थर से बनी काल भैरव की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति की खास बात है इसका मुंँह, जिसके जरिए शराब ‘पी’ जाती है।

काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य
काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य ( साभार : MP Tourism)

मूर्ति के दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में खप्पर (खोपड़ी का पात्र) है। मंदिर में दीवारों पर भैरव से जुड़े चित्र और तांत्रिक प्रतीक भी देखे जा सकते हैं। आसपास छोटे-छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य भैरव रूपों को समर्पित हैं। मंदिर में एक अलग जगह पर शराब अर्पण की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अपनी बोतल वहीं पुजारी को देते हैं और वो मूर्ति के मुँह से चढ़ाते हैं।

काल भैरव की मूर्ति
काल भैरव की मूर्ति ( साभार : timeofindia)

मंदिर तक कैसे पहुँचे ?

काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। हवाई यात्रा कर आने वाले भक्तों के लिए नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है। जो मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से उज्जैन पहुँचना बहुत आसान है। शहर में होटल और धर्मशालाओं की भी अच्छी सुविधा है।

5 जिले, 1 लाख रोजगार, ₹1500-₹4000 करोड़ खर्च… ‘हथियार हब’ बन ‘ठोंक देंगे कट्टा कपार में’ का दाग धोएगा बिहार: ‘डिफेन्स कॉरिडोर’ को जमीन पर उतारने में जुटी डबल इंजन सरकार

‘ठोंक देंगे कट्टा कपार में, आइए ना हमरा बिहार में’… ये द खाकी चैप्टर: बिहार फाइल्स नाम की एक वेब सीरिज के टाइटल सॉंग की पहली लाइन है। यह वेब सीरीज बिहार में अपराध के दौर और उसके खिलाफ एक IPS अधिकारी की लड़ाई की कहानी है। लेकिन जो लाइन मैंने लिखी है वो दिखाती है कि तब के दौर में बिहार और अवैध कट्टा एक दूसरे के पर्यायवाची हो गए थे। लेकिन अब ये स्थिति बदलने वाली है।

बिहार में अब आर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनने जा रहा है। इससे पाँच जिलों में उन बंदूकों का निर्माण होगा जो सेना और पुलिस के काम आएँगी। यहाँ बनने वाले हथियार विदेशों तक जाएँगे और भारत के निर्यातों में सहायता करेंगे। यहाँ बनने वाला गोला बारूद बिहार की सड़कों पर नहीं चलेगा बल्कि दुश्मन का सफाया करने के काम आएगा। केन्द्र की मोदी सरकार और बिहार की नीतीश सरकार मिल कर यह कॉरिडोर बनाने वाली है।

क्या है पूरा प्लान?

बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनाने प्रस्ताव भेजा है। यह कॉरिडोर बिहार के 5 जिलों में बनाए जाने की योजना है। इसके तहत हर जिले में गोला-बारूद और हथियार बनाने की फैक्ट्रियाँ स्थापित की जाएँगी। इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है।

मंत्री नीतीश मिश्रा ने प्रस्ताव भेजने के साथ ही कहा है कि बिहार में यदि यह ऑर्डिनेंस कॉरिडोर जमीन पर उतर आता है तो इससे समय पर हथियारों की आपूर्ति देश भर में की जा सकेगी। इसके अलावा बिहार में इससे लगभग 1 लाख लोगों को रोजगार मिलने की भी बात कही गई है।

किन-किन जिलों में बनेगा कॉरिडोर

बिहार में यह ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर 5 जिलों में बनेगा। यह जिले मुंगेर, कैमूर, बांका, जमुई और अरवल जिलों में बनाया जाएगा। यहाँ कई तरह की बंदूकें और गोला-बारूद बनाने की फैक्ट्रियाँ लगेंगी। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एक फैक्ट्री पर लगभग ₹1500 करोड़ का खर्च आएगा।

यह फैक्ट्री जिस तरह का हथियार बनाएगी, उसी के अनुसार इसकी लागत होगी। कुछ फैक्ट्रियों की लागत ₹4000 करोड़ तक बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बीते कई वर्षों से अवैध हथियारों के पर्याय के रूप में प्रचारित हो गए मुंगेर जैसे जिलों को अब नई पहचान दी जाए।

इससे पहले मुंगेर में लगातार अवैध हथियारों के निर्माण और उनकी बिक्री के मामले सामने आते रहे हैं। मुंगेर में बीते 3-4 वर्षों में दर्जनों अवैध बन्दूक फैक्ट्री पकड़े जाने के मामले में सामने आते रहे हैं। इसके पीछे यहाँ बंद होती हथियार फैक्ट्रियां एक बड़ा कारण रहीं हैं।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कभी मुंगेर के भीतर कई वैध फैक्ट्रियां थी जिनमें हजारों कारीगर काम करते थे। हालाँकि, जंगलराज और उसके बाद बन्दूक को लेकर कानूनों में आई सख्ती के चलते धीमे -धीमे यह फैक्ट्रियाँ बंद हो गईं। इसके चलते कारीगर बेरोजगार हो गए और कुछ अवैध हथियार बनाने में लग गए।

कौन-कौन से हथियार बनेंगे?

योजना है कि इन जिलों में लगने वाली फैक्ट्रियों में छोटी पिस्टल से लेकर तोप तक बनें। एक बार फैक्ट्रियाँ लगने पर यहाँ राइफल, मशीनगन, FN-मिनिमी, नेगेव NG-5 तथा ब्राउनिंग मशीनगन बनाने का प्लान है। इसके अलावा तोप, ग्रेनेड और ग्रेनेड लॉन्चर बनाने की भी योजना है।

सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि सेना के लिए उपयोग होने वाले हेलमेट और सुरक्षात्मक क्लोथिंग भी बनाई जाएगी। यह फैक्ट्रियाँ अपना कच्चा माल पड़ोसी झारखंड से लेंगी। हथियार बनाने के चलते यहाँ आसपास विकास भी तेजी से होगा। इन जिलों को फैक्ट्री के साथ ही हवाई सेवाओं से जोड़ने का भी प्लान बनाया जा रहा है।

बिहार को क्या फायदे?

बीते लगभग 3-4 दशकों से पलायन का दंश झेल रहे बिहार के लिए यह नई पहल बड़े स्तर पर कारगर सिद्ध हो सकती है। अंदाजा है कि यहाँ 1 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही बड़े उद्योग लगने के चलते यहाँ का बाकी इन्फ्रा भी सुधरेगा। फैक्ट्रियों में काम करने के अलावा उन लोगों को भी फायदा होगा जो इससे दूसरे तरीकों से जुड़ेंगे।

बिहार में यह फैक्ट्रियाँ सरकारी निवेश से लगेंगी। लेकिन यहाँ से बाद में कुशल कारीगर भी मिलेंगे, जिससे निजी निवेश भी आ सकता है। बिहार में अभी निजी कम्पनियाँ निवेश करने में पीछे हटती हैं। यह क्रम बिहार को पुनः आर्थिक तरक्की के क्रम पर ला सकता है।

बिहार में औद्योगीकरण का यह कोई पहला बड़ा प्रयास नहीं है। इससे पहले 1970 के दशक में भी ललित नारायण मिश्रा के जमाने में ऐसा प्रयास हो चुका है। हालाँकि, उसके बाद लालू प्रसाद यादव के जंगलराज का दौर चला, जिसके चलते बिहार में चलने वाले उद्योग धंधे भी बंद हो गए।

UP-तमिलनाडु में बन चुका है डिफेन्स कॉरिडोर

बिहार में आर्डिनेंस कॉरिडोर का यह प्रयास उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले ही सफल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में 6 जिलों में डिफेन्स कॉरिडोर बनाया गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यहाँ अब तक ₹47 हजार करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है। यहाँ 7 कम्पनियाँ अब निर्माण चालू कर चुका है।

तमिलनाडु के डिफेन्स कॉरिडोर में कई बड़ी टेस्टिंग फैसिलिटी बन रही हैं। बिहार में भी इस तरह का विकास मोदी सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा पर एजेंडे को ही बढ़ाएगा। मोदी सरकार आने के बाद से रक्षा क्षेत्र में निर्माण और रक्षा उत्पादों के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई है।

वर्ष 2014 में जहाँ देश में मात्र ₹46 हजार करोड़ का रक्षा उत्पादों का निर्माण होता था, तो वहीं यह अब बढ़ कर ₹1.27 लाख करोड़ हो चुका है। इसी के साथ भारत का रक्षा उत्पादों का निर्यात 2014 के मुकाबले 34 गुना बढ़ कर ₹23,622 करोड़ हो चुका है। बिहार का आर्डिनेंस कॉरिडोर इसमें और सहायक हो सकता है।

‘गजवा-ए-हिंद’ के बारूद से देश में चल रही कितनी हथियार फैक्ट्री, कितने सलाऊद्दीन ‘हकीम’ बन घरों में जमा कर रहे असलहे? इसे केवल ‘अवैध’ कहना खतरों से आँख मूँदने जैसा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक थाना है- मलिहाबाद। इस थाने से करीब 100 मीटर दूर ही 68 साल की हकीम सलाऊद्दीन उर्फ लाला का घर है। 27 जून 2025 को इस घर पर पड़े छापे से पहले तक इस घर की पहचान एक हकीम के निवास के तौर पर थी। लेकिन वहाँ जिस तरह हथियारों का जखीरा मिला। वह किसी गंभीर खतरे के संकेत देता है।

यूपी पुलिस ने ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट में बताया है, “अवैध शस्त्र बनाने वाले 01 अभियुक्त को लखनऊ पुलिस द्वारा गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से 14 निर्मित अवैध शस्त्र, अर्धनिर्मित शस्त्र, शस्त्र बनाने के उपकरण व प्रतिबंधित पशु (हिरन) की खाल बरामद की गई है।”

पुलिस के इस पोस्ट से भी ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक सामान्य सा मामला है। लेकिन जब आप इस्लामी कट्टरपंथियों की गजवा-ए-हिंद की साजिशों और हकीम सलाउद्दीन के घर पर छापेमारी के बाद सामने आए तथ्यों को जोड़ते हैं तो यह देश के खिलाफ एक बड़ी साजिश का इशारा करती है।

कहा जा रहा है कि छापेमारी में पुलिस को हकीम के घर से 1 राइफल, 3 पिस्टल, 3 तमंचे, 9 एयर गन और 140 कारतूस सहित कई अन्य औजार मिले। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस के हाथ एक लाल पर्ची लगी है, जिसमें उर्दू और फारसी में कुछ नंबर लिखे हुए हैं। हकीम सलाऊद्दीन की पाकिस्तान में रिश्तेदारी है और वहाँ कई लोगों से उसकी बातचीत होती रहती है।

हकीम सलाऊद्दीन के लैपटॉप में एक दुबई का नंबर मिला है। इस नंबर पर वह रोज बात करता था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वह कश्मीर तक हथियारों की सप्लाई करता था।

दिलचस्प है कि कुछ साल पहले सलाऊद्दीन का एक्सीडेंट में पैर टूट गया था, जिसे एक हकीम ने सही किया। इसके बाद वह खुद ‘हकीम’ बन गया और इसी पहचान के साथ जिंदगी गुजारने लगा। जाँच से यह बात सामने आई है कि सलाऊद्दीन सिर्फ पहचान ओढ़ने में ही शामिल नहीं है। उसने हथियार बनाने के लिए कारीगर ‘किराएदार’ बनाकर अपने मकान में बसा रखे थे।

‘केवल अवैध हथियार फैक्ट्री’ नहीं चला रहा था सलाऊद्दीन ?

जिस तरीके से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भनक लगे दिए बिना सलाऊद्दीन हथियारों का निर्माण कर रहा था, उससे साफ है कि यह केवल अवैध हथियार फैक्ट्री चलाने का ही मामला नहीं है। इस फैक्ट्री का खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब देश के अलग-अलग हिस्सों से पाकिस्तान के लिए काम करने वाले कई इस्लामी कट्टरपंथियों की गिरफ्तारी हुई है।

लखनऊ के मलिहाबाद के हकीम के घर से मिला असलहे और कारतूस का ढेर, पुलिस ने किया गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

इनमें से एक वाराणसी से पकड़ा गया मोहम्मद तुफैल भी है। गिरफ्तारी के बाद उसके फोन में 600 पाकिस्तानी नंबर मिले थे। वह बाबरी मस्जिद का बदला लेने के लिए मुस्लिमों को उकसा रहा था। वह भारत में सरिया लागू के एजेंडे पर काम कर रहा था। इसी तरह मुरादाबाद से पकड़ा गया शहजाद पाकिस्तान के इशारे पर भारत में बड़े इस्लामी आतंकी हमले की साजिश रच रहा था।

2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश

गजवा-ए-हिंद यानी भारत को इस्लामी मुल्क बनाने को लेकर इस्लामी कट्टरपंथी लंबे समय से साजिश कर रहे हैं। ऐसी ही एक गंभीर साजिश का खुलासा साल 2022 में उस समय हुआ जब प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग सेंटर पर बिहार के फुलवाड़ी शरीफ में छापेमारी हुई थी। इस दौरान 8 पन्नों का एक दस्तावेज बरामद किया गया। इसका नाम ‘इंडिया विजन 2047’ था। इसमें भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के पूरे रोडमैप का जिक्र किया गया।

इस दस्तावेज में भारतीय सेना से लेकर कोर्ट तक में इस्लामी घुसपैठ का खाका खींचा गया था। ‘कायर हिंदुओं’ की हत्या के लिए मुस्लिम युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण देना भी शामिल था। क्या हकीम सलाऊद्दीन जैसे मुस्लिम PFI की उसी साजिश के तहत हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने को लेकर ही तो नहीं अपने घरों को हथियारों की फैक्ट्री के रूप में बदल चुके हैं?

कितने ‘हकीम’ घरों में चला रहे हथियार फैक्ट्री?

लखनऊ की अवैध हथियार फैक्ट्री और उसे चलाने वाला हकीम सलाऊद्दीन देश विरोधी/हिंदू विरोधी कितनी बड़ी साजिश का हिस्सा है यह जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी सामने आता जाएगा। लेकिन न तो फुलवाड़ी शरीफ में छापे से पहले हमें यह पता था कि देश के विरुद्ध PFI कितनी बड़ी साजिश पर काम कर रहा है और न ही 27 जून 2025 से पहले यह पता था कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में थाने से कुछ कदम की दूरी पर ही इतने बड़े पैमाने पर अवैध हथियारों का निर्माण हो रहा है।

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि जाँच का यह दायरा केवल एक हकीम सलाऊद्दीन या एक अवैध हथियार फैक्ट्री के उद्भेदन तक ही सीमित न रह जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हमें ये नहीं पता चलेगा कि हकीम सलाऊद्दीन केवल एक अवैध हथियार फैक्ट्री ही नहीं चला रहा था। वह उस इस्लामी साजिश का हिस्सा है जो भारत की सरकारों और हिंदुओं के विरुद्ध एक समानांतर तंत्र खड़ा करने में जुटा है। जो यह सुनिश्चित करने में लगा हुआ है कि सशस्त्र बगावत की स्थिति में उसे हथियारों की कोई कमी न हो। ध्यान रहे कि इस तंत्र के लिए हर हिंदू ‘काफिर’ है। गजवा-ए-हिंद वो ख्वाब है जिसका हदीस में जिक्र है। जिसके लिए दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर कहा था कि इस जंग में जो भी शहीद होगा वो ‘गाजी’ कहलाएगा।

रथ यात्रा में भगदड़ मची तो बना दिया ‘इमरजेंसी कॉरिडोर’, अस्पताल में ‘सेवा’ से लेकर साफ-सफाई तक का उठाया दायित्व: जानिए कैसे पुरी में भगवान जगन्नाथ के ‘सेवक’ बने 1500 स्वयंसेवक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ओडिशा के पुरी में आयोजित रथयात्रा में भी अपनी सेवाएँ दी हैं। RSS ने इस कार्यक्रम में 1500 स्वयंसेवक लगाए हैं। इन कार्यकर्ताओं ने यात्रा प्रबंधित करने से लेकर भगदड़ के दौरान सहायता पहुँचाने का काम किया। भगदड़ के दौरान उनकी सहायता से बड़ी संख्या में लोगों की जान बच सकी।

रथयात्रा मेले की व्यवस्था सुचारु ढंग से चलाने और संभालने के लिए RSS ने निर्धारित जगह पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी के हिसाब से नियुक्त किया था। उदाहरण के लिए लगभग 200 स्वयंसेवक दो चिकित्सा केंद्रों पर तैनात थे, अन्य 200 बड़ा डंडा साफ करने में लगे हुए थे।

वहीं प्राथमिक चिकित्सा सेवा पाँच डॉक्टरों, दो फार्मासिस्टों और चार सहायकों वाली एक टीम द्वारा प्रदान की गई थीं। इसके अतिरिक्त, 100 स्वयंसेवकों को यातायात प्रबंधन के लिए तैनात किया गया था और 884 स्वयंसेवकों ने रथ स्थल से मेडिकल चौक तक फैले एम्बुलेंस कॉरिडोर का निर्माण और रखरखाव किया।

जहाँ एक तरफ ABVP की चिकित्सा शाखा  ‘मेडीविजन’ ने एम्बुलेंस सेवाएँ और अस्थायी स्वास्थ्य शिविर संचालित कर श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार प्रदान किया और श्रद्वालुओं को आवश्यक दवाएँ वितरित कीं। वहीं विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाकर पुण्य अर्जित किया।

समिति के रथ यात्रा सेवा संयोजक रुद्रनारायण महापात्रा ने सेवा योजना का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि कहा कि ऐसे शुभ अवसरों पर अक्सर भारी भीड़ और गर्मी के कारण श्रद्वालुओं के बेहोश होने या घायल होने की घटनाएँ होती हैं, जिसके कारण इस तरह की व्यापक आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना लागू करने की आवश्यकता महसूस हुई।

RSS और उत्कल बिपन्न सहायता समिति के अलावा संघ से जुड़े कई अन्य संगठनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), हिंदू जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ भी रथयात्रा के अवसर पर सक्रिय रूप से सेवा में लगे हुए हैं। RSS के स्वयंसेवकों ने 29 जून, 2025 को सुबह हुई भगदड़ में काफी सहायता पहुँचाई।

RSS के स्वयंसेवकों कार्यकर्ताओं ने स्ट्रेचर और एंबुलेंस का उपयोग करके मेले में घायल और बेहोश भक्तों को अस्पताल पहुँचाया। जिस समय श्रद्धालु भीड़ और गर्मी से बेहोश हो रहे थे उस समय भी संघ ने बेहतरीन कदम उठाते हुए आपातकालीन गलियारे बनाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, जिससे एंबुलेंस को बड़ा डंडा (ग्रैंड रोड) के किनारे भीड़ से मरीजों को निकालने और अस्पतालों में पहुँचाने मे बड़ी सहायता मिली।