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हिमाचल के कॉन्ग्रेसी मंत्री ने NHAI इंजीनियर को सरेआम दी गाली, फिर कमरे में ले जाकर पीटा… सिर पर घड़ा मारा: शिमला में दर्ज FIR की पूरी डिटेल, पीड़ित बोले- SDM ने भी नहीं बचाया

हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ एक NHAI इंजीनियर पर हमला करने के मामले FIR दर्ज की गई है। यह FIR शिमला में पीड़ित इंजीनियर ने दर्ज करवाई है। इंजीनियर का आरोप है कि एक जगह निरीक्षण पर पहुँचे मंत्री ने उसको निशाना बनाया और जम कर पीटा।

यह घटना सोमवार (30 जून, 2025) को शिमला के भट्टाकुफ्फर इलाके में हुई। भट्टाकुफ्फर इलाके में 30 जून, 2025 की रात को एक पाँच मंजिला बिल्डिंग भारी बारिश के चलते जमींदोज हो गई थी। यह बिल्डिंग शिमला में बन रही फोरलेन के निकट है। इंजीनियर अचल जिंदल इसी प्रोजेक्ट में मेनेजर के तौर पर तैनात हैं।

आरोप है कि इसी बिल्डिंग गिरने की जगह का निरीक्षण करने के दौरान मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इंजीनियर से मारपीट की। मामले में दर्ज FIR में इंजीनियर ने बताया है कि बिल्डिंग गिरने के बाद उन्हें शिमला के SDM ने एक बैठक के लिए बुलाया था। यह बैठक ऑफिस में होनी थी।

FIR में अचल जिंदल ने कहा है कि जब वह SDM के दफ्तर पहुँचे तो वहाँ वह मौजूद नहीं थे और उन्हें पता चला कि SDM घटनास्थल पर गए हुए हैं जहाँ मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी मौजूद हैं। इसके बाद इंजीनियर जिंदल यहाँ चले गए।

इंजीनियर अचल जिंदल ने FIR में बताया है कि उन्होंने घटनास्थल पर बिल्डिंग के गिरने और इस मामले में फोरलेन निर्माण की भूमिका ना होने की बात मंत्री अनिरुद्ध सिंह को बता दी थी। इंजीनियर जिंदल का आरोप है कि यहाँ पर अनिरुद्ध सिंह ने उनके साथ गाली गलौज चालू कर दी।

अनिरुद्ध सिंह हमला NHAI
इंजीनियर अचल जिंदल द्वारा दर्ज करवाई गई FIR

FIR में इंजीनियर जिंदल आरोप है कि गाली गलौज के बाद उन्हें और उनके एक साथी को अनिरुद्ध सिंह ने वहीं पास के एक मकान में बुलाया और पीटना चालू कर दिया। जिंदल का आरोप है कि मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने यहाँ उनके ऊपर घड़े से वार कर दिया, जिससे उनके खून निकल आया। किसी तरह इंजीनियर जिंदल अस्पताल पहुँचे और इलाज करवाया।

इसके बाद इस मामले में FIR करवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। अचल जिंदल ने आरोप लगाया है कि उनकी पिटाई के दौरान SDM ने मौजूद रहते हुए भी कोई बीच बचाव नहीं किया। अचल जिंदल का कहना है कि वह IES अधिकारी हैं और उनके साथ इस बर्ताव ने अन्दर तक झकझोरा है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने अचल जिंदल से बात की है। उन्होंने न्याय की माँग की है और कहा है कि मंत्री अनिरुद्ध सिंह के ऊपर कार्रवाई की जाए। ऑपइंडिया ने आरोपित मंत्री अनिरुद्ध सिंह से सम्पर्क साधने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन का कोई जवाब नहीं दिया।

अनिरुद्ध सिंह हमला NHAI

इस मामले में NHAI इंजीनियर एसोसिएशन ने भी कार्रवाई की माँग की है। NHAI इंजीनियर एसोसिएशन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “यह अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे एक लोकसेवक पर एक भयावह और अस्वीकार्य हमला है। हम इस जघन्य कृत्य के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।”

मामले में कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह का अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई को लेकर कोई अपडेट नहीं दिया है।

जगनमोहन रेड्डी की कार के नीचे दबकर मर गए 55 साल के सिंगैया, हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व CM को दी राहत: कहा- कुंभ में भी हादसे होते हैं

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को हिट एंड रन मामले में राहत दे दी है। 18 जून 2025 को गुंटूर जिले में एक रोड शो के दौरान वाईएसआरसीपी समर्थक चीली सिंगैया की उनकी गाड़ी के नीचे आने से मौत हो गयी थी। पुलिस जाँच में भी सामने आया कि जिस गाड़ी से ये हादसा हुआ वह जगन मोहन रेड्डी की थी। पुलिस ने उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया था।

कोर्ट ने 27 जून के अपने आदेश में पुलिस को रेड्डी और दूसरे आरोपियों के खिलाफ 1 जुलाई तक कोई कार्रवाई नहीं करने को कहा। हालाँकि एफआईआर को रद्द करने की रेड्डी की याचिका पर भी सुनवाई रोक दी।

वाईएसआरसीपी के 55 वर्षीय समर्थक सिंगैया की 18 जून 2025 को एक रोड शो के दौरान आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के वाहन से कुचलकर मौत हो गई थी। यह घटना गुंटूर जिले के एतुकुरु गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग पर भगवान अंजनेया मंदिर के पास हुई थी। उस वक्त रेड्डी आत्महत्या करने वाले एक पूर्व सरपंच के परिवार से मिलकर लौट रहे थे।

55 वर्षीय चीली सिंगैया रेड्डी पूर्व सीएम पर फूल बरसाने की कोशिश कर रहे थे। अचानक वह फिसलकर गिर गए। रेड्डी की कार का अगला दाहिना पहिया सिंगैया की गर्दन पर चढ़ गया, जिससे उनकी मौत हो गई। रेड्डी की कार से कुचले गए व्यक्ति का वीडियो इंटरनेट पर वायरल भी हुआ था।

शुरुआत में पुलिस ने दावा किया था कि पीड़ित को एक प्राइवेट कार ने कुचला है, लेकिन सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ उसमें साफ दिखा था कि जो रेड्डी की कार के अगले पहिए के नीचे आ गये थे। कार उन्हें कुचल कर आगे बढ़ गई। हालाँकि जब लोगों ने उन्हें बाहर निकाला तो उनकी हालत गंभीर थी और उन्हें अस्पताल भेजा गया।

घटना के वक्त रेड्डी यात्री सीट की तरफ कार की खिड़की से बाहर खड़े होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। इस मामले में जगन मोहन रेड्डी को भारतीय दंड संहिता की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या के लिए आरोपी नंबर 2 और उनके ड्राइवर को आरोपी नंबर 1 बनाया गया। इसके अलावा वाईएसआरसीपी सांसद वाई.वी. सुब्बा रेड्डी, पूर्व मंत्री पेरनी वेंकटरमैया और विदादला रजनी और रेड्डी के सहायक के. नागेश्वर रेड्डी को भी आरोपी बनाया गया है।

हाईकोर्ट ने हिट एंड रन केस से कुंभ में मची भगदड़ की तुलना की

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस के श्रीनिवास रेड्डी ने सड़क दुर्घटना के लिए वाहन में सवार यात्रियों से जुर्माना वसूलने के पीछे के औचित्य पर सवाल उठाया। जस्टिस ने महाधिवक्ता दम्मलपति श्रीनिवास से पूछा कि दुर्घटना के लिए कार में बैठे लोगों को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

जस्टिस रेड्डी ने महाकुंभ में मची भगदड़ का जिक्र करते हुए कहा, “सभी सावधानियों के बावजूद, कुंभ मेले में भी दुर्घटनाएँ हुईं।”

जस्टिस रेड्डी ने करोड़ों भक्तों की आस्था का केन्द्र रहे कुंभ मेले में हुए हादसे से लापरवाही से हुए कार दुर्घटना की तुलना कर दी। कोर्ट के कहने का मतलब है कि अच्छी तरह से कार्यक्रम आयोजित करने के बावजूद त्रासदियाँ हो जाती हैं। चाहे वह कुंभ मेला हो या कोई राजनीतिक रोड शो। इसके लिए आरोपित व्यक्तियों को लापरवाह नहीं माना जा सकता।

हालाँकि यह तुलना बहुत ही चौकाने वाला है। कुंभ मेले में करोड़ों लोग हर दिन आते हैं और डुबकी लगाते हैं। यहाँ भीड़ प्रबंधन खुद में काफी चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। जैसा कि इस साल महाकुंभ में भगदड़ के दौरान देखा गया। कभी-कभी भारी भीड़ और अफवाह भी भगदड़ का कारण बनती हैं।

कुंभ मेले जैसी भीड़ की तुलना जगन मोहन रेड्डी के रोड शो से नहीं की जा सकती। हालाँकि भीड़ यहाँ भी थी, लेकिन वाहनों के काफिले के साथ एक नियंत्रित राजनीतिक कार्यक्रम था। हालाँकि ऐसे आयोजनों में भीड़ का जोश में आना भी सामान्य है। लेकिन नेता की कार के नीचे आने से हुई मौत की बारीकी से घटना की जाँच की माँग करता है। इसमें चालक का आचरण, काफिले ने प्रोटोकॉल का पालन किया या नहीं, कार द्वारा पीड़ित को कुचलने के समय और उसके बाद कार में बैठे लोगों का आचरण आदि शामिल हैं।

कुंभ मेले में हुई भगदड़ के साथ जगन मोहन रेड्डी के कार के नीचे आए व्यक्ति की दुर्घटना में हुई मौत की तुलना मामले को सरलीकृत करने और जाँच की कमजोरी को दर्शाता है।

यह भी याद रखना चाहिए कि पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि पीड़ित को एक निजी वाहन ने कुचल दिया था, जो वाईएसआरसीपी के आधिकारिक काफिले का हिस्सा नहीं था। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए घटना के वीडियो में दिखाया गया है कि पीड़ित को एक काली कार के अगले पहिये के नीचे बेरहमी से कुचल दिया गया था, जबकि रेड्डी यात्री सीट की तरफ कार की खिड़की से बाहर निकल रहे थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि रेड्डी की कार नहीं रुकी और पीड़ित के कुचले जाने के बाद भी चलती रही। पीड़ित के परिवार ने घटना की जाँच की माँग की है।

इसके अलावा, गुंटूर रेंज के आईजी सर्व श्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि रेड्डी के काफिले में अनुमति से ज्यादा वाहन मौजूद थे। आईजी त्रिपाठी ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीड़ित की इस तरह से मौत हो गई। प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि काफिले में लगभग 30 से 35 वाहन थे, जबकि आधिकारिक तौर पर केवल तीन की अनुमति थी।”

अमीर और शक्तिशाली अक्सर बच निकलते हैं

हिट-एंड-रन मामलों में अक्सर अमीर और शक्तिशाली आरोपित बच निकलते हैं। 2024 के पुणे पोर्श मामले में भी देखा गया कि कैसे एक अमीर बाप के बेटे ने नशे की हालत में अपनी पोर्श टेकन कार से बाइक को टक्कर मार दी और उसपर सवार दो लोगों की मौत हो गयी थी। हालाँकि आरोपित को कुछ ही घंटों के भीतर जमानत मिल गई। यहाँ तक कि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपित को सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का लेख लिखने, 15 दिनों तक यरवदा यातायात पुलिस के साथ काम करने और नशामुक्ति परामर्श लेने का आदेश दिया था।

इसी तरह जेसिका लाल मर्डर केस (1999), संजीव नंदा BMW हिट-एंड-रन केस (1999) जैसे कई मामले हैं, जिनमें पुलिस सुस्त दिखी और सजा अपेक्षाकृत बहुत कम थीं। अब संगैया हिट-एंड-रन केस इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि हमारी न्याय प्रणाली दो तरह की दिखती है। एक हाई-प्रोफाइल आरोपियों का ‘सिस्टम’ है जहाँ आरोपितों के प्रति सिस्टम उदार है। वहीं दूसरे मामले हैं जहाँ लोगों को छोटी घटनाओं पर भी जमानत मिलने में वक्त लग जाता है।

संगैया हिट-एंड-रन मामले में जाँच अभी भी जारी है, लेकिन कोर्ट ने रेड्डी और अन्य को न केवल अंतरिम राहत दी है, बल्कि इस घटना को पहले ही ‘दुर्घटना’ घोषित कर दिया है और इसे कुंभ मेले में हुई भगदड़ में हुई मौतों से तुलना की है।

पाकिस्तान में 4 हिन्दू बच्चों को जबरन बना दिया मुस्लिम, ISI का पोपट ARY बता रहा- इस्लाम पर ईमान लाए: कोर्ट ने भी सुनाया था इस्लामी कट्टरपंथियों के मनमाफिक फैसला

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण करवा दिया गया। इस मामले को पाकिस्तानी मीडिया ने हल्के में दिखाते हुए पीड़ित पर ही आरोप लगाए। कहा गया कि हिंदुओं ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है। साथ ही इस मामले को इस्लाम के हित में करार दिया।

मामला शाहदादपुर में चार भाई-बहन के जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ा है। बच्चों के कंप्यूटर टीचर फरहान खासखेली ने अपहरण कर इस्लाम में धर्मांतरण करा दिया। बच्चों को कराची से रेस्क्यू किया गया। अब बच्चों के परिजन न्याय के लिए भटक रहे हैं।

उधर, इन बच्चों की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। बेचारी माँ न्याय की माँग के लिए दर-दर भटक रही है। माँ ने रोते हुए कहा, “मेरी तीन बेटियाँ हैं और फरहान तीनों को ले गया।” वह कहती हैं कि उनका बेटा तो इतना नादान है उसे इतनी भी समझ नहीं कि धर्म परिवर्तन क्या होता है। बच्चों की माँ ने पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो जरदारी से न्याय की आस लगाई है।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर बच्चों का धर्म परिवर्तन होते हुए दिखाया गया है। लोगों की नजर में ये वीडियो आने के बाद इसकी जमकर आलोचना की जा रही है। पाकिस्तान में हिंदू पंचायत के प्रमुख राजेश कुमार ने इस घटना को पारिवारिक त्रासदी और सामुदायिक आपदा बताया। साथ ही नाबालिगों की उम्र को देखते हुए उनकी मर्जी से धर्म परिवर्तन करने की क्षमता पर भी सवाल उठाया।

सिंध कोर्ट ने आरोपित फरहान और जुल्फिकार को किया बरी

परिवार के विरोध के बीच धर्म परिवर्तन कर चुके भाई-बहनों को शाहदादपुर कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ कोर्ट ने दोनों बड़ी बहनों, जिया और दिया को कराची के एक शेल्टर में भेज दिया। वहीं, दो नाबालिग दिशा और हरजीत को परिजनों के पास वापस भेजने के आदेश दिए।

हालाँकि बच्चों की कस्टडी के लिए माँ-बाप से ही 10-10 मिलियन पाकिस्तानी रूपए यानी 1-1 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का बॉन्ड भरवाया गया, ताकि दोनों बच्चों की घर वापसी न कराई जा सके और वो इस्लाम का पालन करते रहें। यानी हिंदू माँ-बाप अपने ही जबरन मुस्लिम बनाए गए बच्चों को इस्लामी तरीके से पालते रहें और इसकी गारंटी भी दें कि वो हिंदू नहीं बनेंगे।

इसके अलावा कोर्ट ने आरोपित फरहान और जुल्फिकार खासखेली को अपहरण के मामले से बरी कर क्लीन चिट दे दी।

पाकिस्तानी मीडिया ने धर्मांतरण पर फैलाया प्रोपेगेंडा

शाहदादपुर में हिंदू भाई-बहनों का जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने की खबर को पाकिस्तानी मीडिया चैनल ARY Network ने अलग ढंग से पेश किया। चैनल ने इसे ‘अपनी इच्छा से किया गया धर्म परिवर्तन’ करार दिया। इसके अलावा कोर्ट में मामला जाने के बाद इसे ऐसे पेश किया जैसे बच्चों पर सच बोलने के लिए भी दबाव डाला गया है।

यहाँ तक मीडिया में कहा गया कि पीड़ित बहनों के बयान के आधार पर ही आरोपित जुल्फिकार खासखेली और फरहान को अपहरण के मामले से बरी किया गया है। जबकि असल में तो पुलिस ने ही उनपर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला।

ARY ग्रुप यूँ ही इस तरह की खबरों का रहनुमा नहीं है। इस चैनल के मालिक के पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी ISI के साथ ‘खास रिश्तों’ से हर कोई वाकिफ है। इसी मीडिया हाउस ने 2013 में एक प्रोपेगेंडा फिल्म ‘वार’ भी बनाई जिसमें हिंदुत्व का मजाक उड़ाने से लेकर पाकिस्तान में बमबारी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने जैसी कई बेतुकी बातें शामिल की गईं थी। इस फिल्म को 2019 में नेटफ्लिक्स पर भी स्ट्रीम किया गया था। हालाँकि भारतीयों के कड़े विरोध के बाद इसे वहाँ से हटा दिया गया।

भारत में भी ARY के पाँव जमे हुए हैं। ये वही मीडिया हाउस है जिसने बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान, फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा के साथ मिलकर फिल्म PK का निर्माण किया। पाकिस्तान में इसे ‘हिंदू भगवानों पर एक व्यंग’ की टैगलाइन के साथ रिलीज किया गया।

पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न लगातार जारी

पाकिस्तान में हिंदूओं के धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है। कई वर्षों से पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। हर साल 1000 से भी अधिक हिंदू लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के लिए अगवा किया जाता है। इन मामलों में अक्सर पुलिस की मिलीभगत भी होती है। एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में पिछले 12 सालों में 14,000 हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और गैंगरेप की घटनाएँ सामने आई हैं।

रोजाना होने वाले धर्म परिवर्तन, बलात्कार, भेदभाव, मंदिरों को अपवित्र करने और हिंसा झेलने के कारण पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू किसी भी तरह से भारत आना चाहते हैं। हिन्दुओं की एक बड़ी जनसंख्या 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से अपनी जान बचा कर भारत आ भी चुकी है।

पाकिस्तान के अधिकांश इलाकों में हिन्दुओं की जनसँख्या नगण्य हो चुकी है। हालाँकि, पाकिस्तान के सिंध में अब भी कुछ लाख हिन्दू बचे हैं। लेकिन यहाँ भी बीते कुछ वर्षों से हालात ऐसे हैं कि हिन्दू अपनी जमीन-घर और व्यापार छोड़ कर भारत में आ रहे हैं।

पाकिस्तान से हिन्दुओं का पलायन कितना तेज है, इसको साबित करती हुई एक रिपोर्ट भी सामने आई। खास बात ये है कि इस रिपोर्ट को खुद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने 23 जनवरी 2025 को प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में सिंध के हिन्दुओं के सामने आने वाली समस्याएँ बताई गईं, जिसके चलते वह अब भी भारत भागने को मजबूर हैं।

HRCP की रिपोर्ट में बताया गया था कि सिंध में हिंदू महिलाओं को उत्पीड़न, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की लगातार धमकियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण हिंदू परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई छुड़वा कर उन्हें दूसरे शहर भेजते हैं। यहाँ तक कि उन्हें भारत भी भेज दिया जाता है।

तुर्की की पत्रिका ने बनाया ‘मोहम्मद’ वाला कार्टून, भड़क गए इस्लामी कट्टरपंथी: कहा- पैगम्बर का किया अपमान, 3 कार्टूनिस्ट गिरफ्तार

तुर्की की साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका लेमन इनदिनों सुर्खियों में है। वजह है इसमें छपा कार्टून। दरअसल कार्टून में ‘मुहम्मद’ और ‘मूसा’ नाम के दो व्यक्तियों को आसमान में हाथ मिलाते दिखाया गया है और नीचे जमीन जल रही है। मुस्लिम कट्टरपंथियों का आरोप है कि ये पैगंबर मुहम्मद और पैगंबर मूसा हैं।

इसके बाद मुस्लिम बहुल देश की भावनाएँ भड़क गई और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। इस मामले में पुलिस ने तीन कार्टूनिस्टों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें कार्टूनिस्ट डोगन पेहलवान और पत्रिका के प्रबंध संपादक और प्रमुख संपादक शामिल हैं।

तुर्की के कानून मंत्री यिलमाज तुनक ने सोमवार को कहा कि तुर्की के अधिकारियों ने पत्रिका लेमन के खिलाफ़ आपराधिक जाँच शुरू कर दी है। तुनक ने अपने बयान में कहा कि इस्तांबुल के पुलिस कार्यालय ने तुर्की दंड संहिता की धारा 216 के तहत जाँच शुरू की है, जो ‘सार्वजनिक रूप से मजहबी मूल्यों का अपमान करने’ से संबंधित है।

क्या है मामला?

पत्रिका के 26 जून के अंक में छपे कार्टून में इजरायल और ईरान के बीच जंग दिखाने की कोशिश की गई है। इसमें ‘मुहम्मद’ और ‘मूसा’ को बमबारी से तबाह हुए शहर के ऊपर हाथ मिलाते हुए दिखाया गया था। कार्टून में नीचे जमीन पर जलता शहर और मिसाइलें दिखाई गई हैं।

पत्रिका का कहना है कि इस कार्टून का मकसद इजरायली हमले के दौरान ईरान में मारे गए एक मुस्लिम व्यक्ति की पीड़ा उजागर करना है। उसका नाम कार्टून में ‘मुहम्मद’ रख दिया गया है।

पत्रिका के प्रमुख संपादक तुन्के अकगुन ने एएफपी से बात करते हुए कहा है, “इस कार्टून में दिये गए नाम मुहम्मद का पैगंबर मुहम्मद से कोई लेना देना नहीं है। मुहम्मद नाम से करोड़ों लोग दुनियाभर में रहते हैं। ” पत्रिका ने कहा कि कार्टून का उद्देश्य मजहबी मूल्यों का मजाक उड़ाना नहीं था।

इस्तांबुल में लेमन के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन

कार्टून को तुर्की में धार्मिक भावनाओं का अपमान माना गया और कट्टरपंथी संगठन सड़कों पर उतर आए। इस्तांबुल के इस्तिकलाल स्ट्रीट पर लेमन की इमारत के सामने कई प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। कुछ लोग लेमन के कार्यालय में घुसने की कोशिश करते देखे गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लेमन पत्रिका ने पैगंबर मुहम्मद का खुलेआम अपमान किया है। इस अपमान को कभी भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं माना जा सकता।

ऐसा ही एक मामला 2015 में फ्रांस में सामने आया था। उस वक्त भी मामला पैगंबर मुहम्मद के कार्टून का ही था। जब व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली हेब्दो‘ के कार्यालय में घुस कर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फायरिंग की थी। इसमें संपादक समेत 12 लोगों की मौत हो गयी थी।

प्रयाग, दिल्ली, त्रिशूर… हिन्दू बच्ची के धर्मांतरण में सब कहीं के लोग शामिल, निशाने पर दलित-गरीब: मोहम्मद ताज को पकड़ने केरल गई पुलिस, ACP ने बताया- लग्जरी लाइफ का देते हैं झाँसा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक दलित बच्ची का अपहरण किया गया। उसको केरल ले जाकर धर्मांतरण करवाया गया। इसके बाद उसे आतंकी बनाने का प्रयास हुआ। यह सब काम दलित बच्ची की ‘सहेली’ दरकशा बानो ने किया। इसमें उसका साथ दिया मोहम्मद कैफ और ताज ने। अब पता चला कि यह गैंग प्रयागराज से लेकर दिल्ली और केरल तक फैला हुआ है। इसके मददगार सब कहीं हैं। यह भी आशंका जताई गई है कि यह तीनों कहीं किसी मॉड्यूल का हिस्सा हैं।

संगठित गिरोह कर रहा काम

प्रयागराज से 15 वर्ष की दलित बच्ची के अपहरण और उसके केरल में धर्मांतरण के मामले में पुलिस को कई तथ्य पता चले हैं। पुलिस ने बताया है कि बच्ची का ब्रेनवॉश करने वाली दरकशा बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। यह भी सामने आया है कि उसके निशाने पर दलित-गरीब बच्चियाँ होती हैं।

दरकशा उनका धर्मांतरण करवाती है। इसके लिए वह ब्रेनवॉश और लालच का इस्तेमाल करती है। दरकशा ने प्रयागराज में जिस बच्ची को निशाना बनाया, वह भी ऐसे ही एक परिवार का हिस्सा थी। पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उसके पिता का भी निधन हो चुका है।

पीड़िता की माँ चूड़ी बेचने और खाना बनाने का काम करती है। ऐसे में दरकशा ने उसे निशाने पर लिया। यह भी सामने आया है कि दरकशा पहले इस बच्ची की ‘सहेली’ बनी और फिर उसके मन में हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरना चालू किया।

प्रयागराज के ACP अजयपाल शर्मा ने इस मामले में बताया है कि दरकशा के गैंग के लोग दिल्ली और केरल में भी हैं। इनकी गिरफ्तारी और जाँच के लिए प्रयास हो रहे हैं। तीन टीमें इस मामले में लगाई गई हैं। उन्होंने कहा है कि दरकशा समेत एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन कई और नाम भी सामने आए हैं।

प्रयागराज में आतंकी मॉड्यूल?

दरकशा के धर्मांतरण करवाने और केरल ले जाने की इस प्लानिंग के चलते यह शक हो रहा है कि वह किसी आतंकी मॉड्यूल का भी हिस्सा हो सकती है। उसके स्लीपर सेल की तरह जाँच करने का शक भी गहरा रहा है। दरकशा ने इस बच्ची को कैसे टार्गेट किया, उसके किससे संबंध हैं, इसके लिए पुलिस टीमें फॉरेंसिक जाँच में भी जुटी हैं।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दरकशा का मोबाइल जब्त किया गया है और उसके व्हाट्सएप की भी जाँच हो रही है। वह किससे बात करती थी, इस पर भी जानकारी निकाली जा रही है। मोबाइल डाटा सामने आने पर यह भी पता लग सकता है कि उसने और कितनी बच्चियों को निशाना बनाया है।

ताज को गिरफ्तार करने केरल गई पुलिस

प्रयागराज पुलिस अब तक इस मामले में मोहम्मद कैफ और दरकशा को पकड़ चुकी है लेकिन मोहम्मद ताज उसकी गिरफ्त से बाहर है। मोहम्मद ताज को दरकशा का देवर बताया गया है। वह प्रयागराज का रहने वाला है लेकिन वर्तमान में केरल में मौजूद है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस की एक टीम केरल गई है। मोहम्मद ताज का नाम इस मामले में दर्ज FIR में भी है। दरकशा ने केरल में जा कर भी ताज भी का ही नाम लिया था।

भंडाफोड़ पर धमका रहा गैंग

इस गैंग के 2 सदस्य पकड़े जाने के बाद पीड़िता की माँ को एक धमकी भरा कॉल भी आया है। इस शख्स की पहचान सामने नहीं आई है लेकिन उसने फोन पर पीड़िता की माँ को जातिसूचक गालियाँ भी दी। इसके चलते पीड़िता का परिवार डरा हुआ है। पुलिस ने अज्ञात के रूप में इस शख्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसके अलावा FIR में SC/ST एक्ट के तहत धाराएँ भी जोड़ी हैं। इस शख्स की पहचान स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

चीन-पाकिस्तान के बंकर में रखे हथियार भी उड़ाएगा भारत, जमीन के 100 मीटर नीचे भी मार करेगा अग्नि-5 मिसाइल का ‘बंकर बस्टर’ वेरिएंट: DRDO कर रहा डेवलप, 9800 KM/H की रफ़्तार से चलेगी

ईरान और इजरायल के युद्ध में बड़े-बड़े हथियार, बम और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। युद्ध के बीच जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु हथियार फोर्डो पर हमला किया, तो उस वक्त बंकर बस्टर GBU-57/A को तैनात किया गया था। इसने ईरान के परमाणु हथियार बनाने के अड्डे को सतह तक तबाह कर दिया था।

ऐसे में अब भारत भी अपने मिसाइल सिस्टम को मजबूत करने में लगा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अब एग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल को अब नए रूप में विकसित करने जा रहा है। फिलहाल इस अग्नि-5 मिसाइल को 5000 किलोमीटर की रेंज तक फेंका जा सकता है। अब नए वैरिएंट में 7500 किलोग्राम बंकर बस्टर की क्षमता होगी।

इससे भारत अपने दुश्मन चीन और पाकिस्तान के ठिकानों को आसानी से निशाना बना लेगा। जमीन की कितने भी भीतर दुश्मन घुसा हो, यह मिसाइल तबाह करने में सफल होगी।

जमीन के 100 मीटर अंदर घुसकर मचाएगा तबाही

डीआरडीओ अब अग्नि-5 के नए वैरिएंट में बढ़ी क्षमता को विकसित कर रहा है। यह जमीन के 80 से 100 मीटर भीतर घुसकर तबाही मचाएगा। इस मिसाइल को विकसित करने से भारत अमेरिका की उपलब्धियों से भी आगे बढ़ जाएगा। अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए बंकर बस्टर बम GBU-57/A का इस्तेमाल किया था। यह बम की विश्व में सबसे बड़ा बंकर बस्टर बम कहलाता है।

भारत भी अब स्वदेशी की राह पर चल रहा है। जहाँ अमेरिका की तरह डिलीवरी के लिए बड़े और महंगे एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहने के बजाय भारत अपने बंकर बस्टर को मिसाइल डिलीवरी के लिए डिजाइन कर रहा है।

मैक 8 से मैक 20 की स्पीड में बनाई जा रही मिसाइल

फिलहाल अग्नि-5 के दो वैरिएंट बनाए जा रहे हैं। एक में जमीन के ऊपर के ठिकानों को तबाह करने की क्षमता होगी। वहीं, दूसरी एक गहरी पैठ वाली मिसाइल होगी, जो जमीन की गहराई में बने ठिकानों में घुस सकेगा। इसका डिजाइन GBU-57 की तरह बनाया गया है, लेकिन इसकी कीमत कम होगी।

हर मिसाइल का वजन आठ टन तक हो सकता है। यह अब तक विश्व में सबसे अधिक वजन वाली मिसाइल मानी जाएगी। हालाँकि, अग्नि-5 के नए वैरिएंट में 2500 किलोमीटर की कम रेंज होगी, बावजूद इसके उसका सटीक निशाना पुराने वाले से ज्यादा विनाशकारी होगा।

इन मिसाइल की गति मैक 8 से मैक 20 के बीच होगी, जो इन्हें हाइपरसोनिक हथियारों की श्रेणी में रखता है। ये अमेरिकी बंकर-बस्टर वेपन की स्पीड के बराबर ही होंगे, लेकिन इनकी पेलोड कैरी करने की क्षमता काफी अधिक होगी।

नौसेना अधिकारी के मुँह में ‘द वायर’ ने ठूँस दिया अपना एजेंडा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लड़ाकू विमान के नुकसान का गढ़ा नैरेटिव: जानिए मोदी सरकार को कैसे किया बदनाम

वामपंथी प्रोपेगेंडा फ़ैलाने वाला मीडिया संस्थान एक बार फिर झूठ फ़ैलाने पर उतर आया है। मोदी सरकार के अंध विरोध और राष्ट्रहित को नुकसान पहुँचाने के अपने ट्रैक रिकॉर्ड को कायम रखते हुए द वायर ने अब दावा किया है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कथित तौर पर ‘राजनीतिक रुकावटों’ के चलते लड़ाकू विमान खोए हैं।

द वायर ने इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास में डिफेन्स अताशे के तौर पर तैनात कैप्टेन शिव कुमार के एक बयान को तोड़ा मरोड़ा और इसी के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया है। ‘राजनीतिक नेतृत्व की रुकावटों के चलते भारतीय वायुसेना ने गँवाए पाकिस्तान के हाथों लड़ाकू विमान’ (IAF Lost Fighter Jets to Pak Because of Political Leadership’s Constraints) शीर्षक से यह लेख 29 जून, 2025 को प्रकाशित हुआ है।

द वायर के इस की बखिया उधेड़ने का समय आ गया है। उसकी इस अधपकी स्टोरी और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने की बीमारी का इलाज भी किया जाना जरूरी है। यह भी साफ़ किए जाने की जरूरत है कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर अब तक का सबसे साहसिक मिलिट्री ऑपरेशन रहा है।

पहलगाम हमला और बॉर्डर पार उसका जवाब

ऑपरेशन सिंदूर कोई बिना कारण की गई सैन्य कार्रवाई नहीं थी। यह मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। पहलगाम में पाकिस्तान के पाले इस्लामी आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों को निशाना बनाया था। उन्होंने हिंदुओं की पहचान के लिए खतना चेक किया था और फिर उन्हें बेरहमी से मार डाला था।

यह न केवल नागरिकों पर हमला था, बल्कि भारत के भीतर सांप्रदायिक तनाव को भड़काने का एक खुला प्रयास था। मोदी सरकार ने इस हमले के बाद पिछली सरकारों की तरह ना डोजियर सौंपे और ना ही निंदा वाले लम्बे प्रेस रिलीज दिए। बल्कि उसने सैन्य कार्रवाई की छूट दे दी।

मोदी सरकार ने इससे पाकिस्तान की परमाणु हथियारों की गीदड़भभकी को भी नाकाम कर दिया। लेकिन भारत, एक जिम्मेदार राष्ट्र है। वह नियम-आधारित व्यवस्था में विश्वास करता है,। उसने केवल आतंकी ढाँचे पर हमला किया और पाकिस्तान की फ़ौज पर नहीं।

लेकिन इस तथ्य को द वायर ने मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए आसानी से दरकिनार कर दिया।

कथित राजनीतिक रुकावटें समस्या नहीं, शासन की कला

द वायर के प्रोपेगेंडा का आधार इंडोनेशिया में भारत के डिफेन्स अताशे कैप्टन (नौसेना) शिव कुमार की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है। एक अकादमिक सेमिनार में बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरणों के दौरान, भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लड़ाकू विमानों ने राजनीतिक निर्देशों (सरकार) के तहत काम किया। उन्होंने बताया था कि इसके तहत जिसमें पाकिस्तानी फौजी ढाँचे या एयर डिफेन्स प्रणालियों को निशाना नहीं बनाया जाना था। यह कार्रवाई आतंकी अड्डों तक सीमित थी।

द वायर के अनुसार, यह मोदी सरकार की ‘राजनीतिक रुकावटों’ को साबित करता है, जिसके चलते कारण विमान नष्ट हुए। ऐसा कहना ना केवल वायर की कपटी मानसिकता दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि उसे युद्ध के नियमों, अंतर्राष्ट्रीय कानून और रणनीतिक गणना के बारे में कोई ज्ञान नहीं है।

तथाकथित ‘राजनीतिक रुकावटें’ आतंकवाद पर कार्रवाई करने और बाद युद्ध के बीच अंतर के लिए थी। यह मोदी सरकार का नपा तुला एक्शन था। भारत का प्रारंभिक संयम दुश्मन और दुनिया के लिए एक रणनीतिक संकेत था कि यह लड़ाई भारत बनाम पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत और आतंक की लड़ाई है।

आतंकी कैम्पों पर सटीक हमलों के बाद पाकिस्तान को तुरंत इसकी जानकारी दे दी गई थी। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क के समर्थन में सामने आया, भारत ने लड़ाई के नियमों को बदल दिया और पाकिस्तान के फौजी इन्फ्रा को तबाह करना चालू कर दिया।

विडंबना यह है कि वही वामपंथी टिप्पणीकार जो भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई किए जाने पर ‘परमाणु युद्ध’ के खिलाफ रोते हैं, मोदी सरकार के पूरी तौर पर युद्ध में ना उतरने पर भी प्रलाप कर रहे हैं। उनका दोहरापन स्पष्ट है। वे किसी भी भारतीय कार्रवाई का विरोध करते हैं।

अगर मोदी सरकार पाकिस्तान पर हमला करती है तो सीधे तौर पर युद्ध के बादल छा जाते, इससे देश का विकास का पहिया भी रुक सकता था। अगर ऐसा नहीं होता है, तो सरकार को दुश्मन को निर्णायक झटका देने के लिए सशस्त्र बलों के ‘पंख काटने’ के लिए दोषी ठहराया जाता। द वायर मोदी सरकार को किसी भी तरह दोषी बता कर ही छोड़ता।

युद्ध में नुकसान दुखद, लेकिन अप्रत्याशित नहीं

कोई भी सैन्य अभियान, खास तौर पर दुश्मन के इलाके में सटीक हमले, जोखिम से खाली नहीं होता। हालाँकि, यह बात द वायर के मूढ़ बुद्धि लोगों को समझाना मुश्किल है। युद्ध में नुकसान कोई नई बात नहीं है। यहाँ तक ​​कि अमेरिका और NATO जैसी फौजों को भी फाइटर विमानों का नुकसान उठाना पड़ा है।

अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन को खत्म करने के लिए एक ऑपरेशन में अपने सबसे उन्नत हेलिकॉप्टरों में से एक को खो दिया था। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में रूस ने भी विमान और ड्रोन खो दिए हैं।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना को कितना नुकसान हुआ, यह बात सार्वजनिक नहीं है। लेकिन अगर मान भी लिया जाए कि वायुसेना का कोई नुकसान हुआ भी है तो यह दुखद जरूर है लेकिन यह वायुसेना की कमजोरी का संकेत नहीं देता है।

सफलता का असली पैमाना अपने हर विमान या पूरे नुकसान से बचाना नहीं बल्कि रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करना है। इस पैमाने के हिसाब से, ऑपरेशन सिंदूर एक शानदार सफलता थी। लेकिन भारत विरोध में डूबे वायर के लिए यह मोदी सरकार की विफलता थी।

ऑपरेशन सिंदूर: मिलिट्री मास्टरक्लास

भारत ने जब पकिस्तान में आतंकी इन्फ्रा खत्म किया तो उसकी वायुसेना ने इसे बचाने के लिए अपने जेट्स चला दिए। भारत ने इसके बाद तुरंत रणनीति बदल दी। IAF ने दुश्मन के हवाई बचाव को बेअसर कर दिया। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्टैंड-ऑफ हथियारों का लाभ उठाया, और व्यवस्थित रूप से पाकिस्तान के हवाई अड्डों और सैन्य संपत्ति को तबाह किया।

ऑपरेशन सिंदूर के परिणाम निर्विवाद तौर पर स्पष्ट थे:

  • 11 पाकिस्तानी एयर बेस तबाह हुए।
  • पाकिस्तान के एयर डिफेन्स तबाह हुए।
  • पाकिस्तान के आक्रामक ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए।
  • लगातार होते नुकसान के चलते पाकिस्तान सीजफायर के लिए रोने लगा।

पाकिस्तान के DGMO ने कथित तौर पर अपने भारतीय समकक्ष के साथ डी-एस्केलेट के लिए विनती की। अगर भारत बंधा हुआ होता तो पाकिस्तान भला ऐसा क्यों करने लगता। वायर ने यह सब अनदेखा करते हुए अपनी कहानी लेकिन गढ़ दी।

जानबूझ कर तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करता है वायर

वायर ने कोई पहली बार भ्रामक सूचनाएँ नहीं दी हैं और ना पहली बार तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा है। वह इससे पहले में क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका कम करके दिखाना, आतंकी हमलों को इंटेलिजेंस फेलियर दर्शाना आयर बालाकोट स्ट्राइक्स जैसी घटनाओं पर दुष्प्रचार उठाने के कारनामे कर चुका है।

कैप्टन शिव कुमार के मामले में भी उसने यही किया। असल में उन्होंने कहा था, “हमारे पड़ोस के कुछ अन्य देशों के विपरीत भारतीय सेनाएं नागरिक राजनीतिक नेतृत्व के तहत काम करती हैं, … ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बना था और भारत विवाद बढ़ाना नहीं चाहता था।”

वायर ने यह सब नकार दिया और उसने पूरा और यह सब जानते हुए उसने लोकतंत्र के मूल्यों तहत लिए गए फैसलों पर दुष्प्रचार करना चालू कर दिया। वह उस फौजी तानाशाही पर नहीं बोलता जो पाकिस्तान में नागरिकों को अपनी ढाल बना कर रखती है।

वायर को नहीं पच रहा भारत का बदला रुख

वायर अब उस बदलाव पर दुखी है, जो भारत की रणनीति में ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है। यह बदलाव निम्नलिखित हैं:

  1. पाकिस्तान से आने वाले आतंकी हमलों को अब युद्ध के रूप में माना जाता है।
  2. भारत पाकिस्तान के ब्लैकमेल को नकारते हुए परमाणु धमकियों के तहत भी सैन्य रूप से जवाब देगा।
  3. पाकिस्तान और उसके आतंकियों के साथ गठजोड़ का भी भांडा फूट गया है।

मोदी सरकार ने असल में सिर्फ निंदा वाले डोजियर से आगे बढ़ कर वह रास्ता दिखाया है, जो कोई भी संप्रभु राष्ट्र अपनाएगा। यह बात वायर को नहीं पचने वाली क्योंकि वह इस्लामी कट्टरपंथी सोच का समर्थन करने वाला वामपंथियों का एक समूह है।

नैतिकता का वायर से 36 का आँकड़ा

वायर का असल में नैतिकता से दूर दूर तक लेना नहीं है। अब राजनीतिक रुकावटों पर आंसू बहाने वाला तब भारत को युद्ध के लिए भूखा बताता अगर उसने पहलगाम के तुरंत बाद पाकिस्तान पर हमला बोल दिया होता। अब जब भारत ने संयम दिखाया, तो भी उसे समस्या है।

एक बात और स्पष्ट है कि वायर पाकिस्तान के आतंकियों को संरक्षण देने पर नहीं बोलता। उनकी सबसे बड़ी चिंता मोदी सरकार की कुतर्कों के साथ आलोचना होती है, भले ही इसके लिए कितने ही तथ्य मरोड़ने पड़ें।

रणनीतिक सफलता को मीडिया रही नकार

ऑपरेशन सिंदूर ने साफ़ कर दिया कि भारत पाकिस्तानी आतंक पर चुप नहीं बैठेगा बल्कि वह इसका प्रतिशोध लेगा और पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाएगा। मोदी सरकार का यह नया सिद्धांत वायर की समझ से बाहर है।

ऐसे में वह वैचारिक शत्रुता से अंधा होकर, तथ्यों को मोड़ता है और ऐसे विचार लिखता है जो राष्ट्रीय हित के खिलाफ हों। वायर की ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ दुष्प्रचार की यह कोशिश नाकाम किए जाने के साथ ही उसकी पोल खुलनी चाहिए। वह आलोचना के नाम पर दुशमन के हाथों में काम कर रहा है।

तथ्य स्पष्ट हैं। दुश्मन उजागर हो चुका है। और भारत का संदेश पहले से कहीं ज्यादा लाउड है।

बांग्लादेश में पहले किया घर में घुस कर हिंदू लड़की का रेप, अब केस वापस लेने का ‘दबाव’ बना रहे : इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अफेयर’ का प्रोपेगेंडा भी चलाया, पीड़ित पिता का दर्द छलका

बांग्लादेश के कुमिल्ला में हिंदू युवती के साथ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नेता फजोर अली ने रेप किया। इसकी वीडियो भी वायरल की। फजोर अली गिरफ्तार भी हो गया। लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू लड़की का चरित्र हनन करने लगे। उसका रेपिस्ट के साथ ‘अफेयर’ बताने का प्रयास करने।

बांग्लादेश में इस घटना के बाद हिंदू संगठन आक्रोश में हैं। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। हालाँकि, पीड़िता ने कहा कि वह अपनी मर्जी से केस वापस लेना चाहती है। पीड़िता ने कहा, ”मैं देश में शांति चाहती हूँ।”

पीड़िता से जब पूछा गया कि वह ऐसा क्यों करना चाहती है तब बताया कि उसने यह अपने पति के कहने पर लिया है। पीड़िता ने कहा, “मेरे पति कहते हैं कि जो इज्जत जानी थी वह जा चुकी है। अब केस करने का फायदा नहीं है, इससे इज्जत वापस नहीं आ जाएगी। इसीलिए मैं अपनी मर्जी से केस वापस लेना चाहती हूँ।”

पीड़िता का फजोर अली से ‘अफेयर’ बताने की रची गई साजिश

जहाँ पीड़िता अपनी इज्जत बचाने के लिए केस तक वापस लेने को तैयार है वहीं कट्टरपंथी पीड़िता का चरित्र हनन करने में तुले हुए हैं। इंटरनेट पर रेप मामले में पीड़िता का लगातार अपमान किया जा रहा है। कट्टरपंथियों ने पीड़िता का आरोपित फजोर अली के साथ ‘अफेयर’ होने की बातें फैलाई।

इन आरोपों को पीड़िता के पिता ने झुठला दिया है। रविवार (30 जून 2025) को हिंदू कार्यकर्ता और वकील सुमोन कुमार रॉय से बात करते हुए पिता ने ‘अफेयर’ के आरोप पर सफाई दी। पिता ने कहा कि उनकी बेटी अपने ससुराल में रहती है और कुछ समय पहले ही घर आई है। पिता ने बताया कि फजोर अली से उसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।

हिंदू कार्यकर्ता और वकील सुमोन कुमार रॉय ने पीड़ित के पिता को हर तरीके की मदद देने का वादा किया। रॉय ने मुरादनगर पुलिस OC जहादुर रहमान से मुलाकात कर इंटरनेट पर पीड़िता के खिलाफ फैल रही अफवाहों की भी जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि पीड़िता का फजोर अली से विवाहेतर संबंध है।

इसके साथ ही रॉय ने पुलिस को पीड़िता की मौत के दावे पर भी सफाई दी। पुलिस को बताया कि इंटरनेट पर पीड़िता के आत्महत्या की खबरें चलाई जा रही हैं, जो कि फर्जी और बेबुनियाद हैं। रॉय ने कहा, “महिला ने कुछ समय पहले ही नया मामला दर्ज कराया था।”

क्या है मामला ?

बांग्लादेश में 21 वर्षीय हिंदू युवती से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता फजोर अली ने चाकू की नोंक पर रेप किया। पीड़िता 21 साल की है और उसके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता का पति दुबई में नौकरी करता और वहीं रहता है। वह 15 दिन के लिए मुरादनगर अपने पिता के घर रहने आई थी। तब से ही 38 वर्षीय फजोर अली उसके पीछे पडा था।

गुरुवार (26 जून 2025) रात को पीड़िता घर में अकेली थी। इसका फायदा उठाते हुए रात 10 बजे फजोर अली घर ने घर का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता ने दरवाजा खोलने से इनकार किया तो जबरदस्ती भीतर घुसा। यहाँ बंदूक की नोंक से डराकर महिला से रेप किया। उसके साथियों ने रेप का वीडियो भी बनाया। पीड़िता मदद की गुहार लगाते हुए चिल्लाई। आवाज सुनकर पड़ोसी आए और फजोर अली को जमकर पीटा।

पीड़िता ने मुरादनगर पुलिस में FIR दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने रविवार (29 जून 2025) को मुख्य आरोपित फजोर अली को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही घटना का वीडियो वायरल करने वाले 4 आरोपित अनिक, सुमन, रमजान और बाबू को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद कट्टरपंथी हिन्दू महिला के खिलाफ एजेंडा चलाने में जुटे हुए हैं।

ओमान में बैठे मोहम्मद इस्लाम ने किया हिन्दू युवती का ब्रेनवॉश, बेचने के लिए पासपोर्ट बना राजस्थान से बुलाया: दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने फ्लाइट चढ़ने से रोका, घर का सोना-चाँदी भी किया बरामद

ओमान से मोहम्मद इस्लाम ने भारत में हिंदू युवती को बेचने की साजिश रची। राजस्थान की 18 साल की युवती को सोशल मीडिया पर प्रेम-जाल में फँसाया। फिर ब्रेनवॉश कर ओमान आने की प्लानिंग बनाई। तीन महीने पहले युवती का पासपोर्ट भी बनवा दिया। युवती को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी पहुँचा दिया। लेकिन समय पर पुलिस ने युवती को रोक लिया।

मामला राजस्थान के चुरू जिले का है। यहाँ तारानगर थाने में युवती के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी अचानक घर से गायब हो गई है। साथ में एक लाख रुपए नगद और सोने-चाँदी के आभूषण भी लेकर गई है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी मदद से युवती को ट्रेस किया। युवती की लोकेशन दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर मिली।

यहाँ युवती ओमान जाने वाली फ्लाइट पर चेक-इन कर चुकी थी। फिर चुरू पुलिस ने दिल्ली पुलिस, एयरपोर्ट सुरक्षा, भारतीय दूतावास से संपर्क किया। समय रहते ही युवती को फ्लाइट में चढ़ने से रोक लिया गया।

मोहम्मद इस्लाम ने ब्रेनवॉश किया

रविवार (29 जून 2025) को पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया। चुरू एसपी जय यादव ने बताया कि युवती की ओमान के मस्कट में रहने वाले मोहम्मद इस्लाम से सोशल मीडिया पर दोस्ती थी। इस्लाम ने ही युवती का ब्रेनवॉश कर प्रेम-जाल में फँसाया। यहाँ तक की ओमान जाने के लिए भी हामी भरवा ली।

युवती इस कदर ब्रेनवॉश हो चुकी थी कि परिजनों से छिपकर तीन महीने पहले पासपोर्ट भी बनवा लिया। फिर अपने ही घर से सोना-चाँदी और एक लाख रुपए नगर चोरी कर ओमान जाने के लिए तैयार भी हो गई। एसपी ने बताया कि इस्लाम ने युवती के ओमान पहुँचने तक की पूरी व्यवस्था कर रखी थी। युवती के लिए घर से एयरपोर्ट तक कैब भी बुक की।

फ्लाइट में बैठने वाली थी युवती, तभी पकड़ा

एसपी जय यादव ने बताया कि युवती दिल्ली एयरपोर्ट में इमिग्रेशन करवा चुकी थी। चुरू पुलिस टीम ने दिल्ली एयरपोर्ट एसीपी को ई-मेल भेजा। इसके बाद एयरपोर्ट एसएचओ से संपर्क हुआ। युवती फ्लाइट में बैठने वाली कतार में लगी हुई थी। उसी समय दिल्ली पुलिस ने युवती को हिरासत में ले लिया। युवती को वापस लाने के लिए चुरू पुलिस भी दिल्ली पहुँची और उसको सुरक्षित परिजन को सौंप दिया गया।

ओमान पहुँचती तो बेच दी जाती: एसपी

एसपी ने बताया कि मोहम्मद इस्लाम पिछले कई समय से युवती को सोशल मीडिया पर बरगला रहा है। साथ ही ओमान आने के लिए ब्रेनवॉश किया, जिसके लिए युवती जा चुकी थी। अगर युवती फ्लाइट में बैठ जाती तो ओमान पहुँच जाती। जहाँ युवती को बेच दिया जा सकता था। या फिर मानव तस्करी में लिप्त करा दिया जाता।

रूस से पैसा लेते थे 150+ कॉन्ग्रेस MP, पत्रकारों ने दलाली में लिखे 16000 आर्टिकल- निशिकांत दुबे ने ‘कठपुतली गैंग’ की खोली पोल: इंदिरा हो या राजीव, DNA में ‘सूटकेस कल्चर’

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि कभी कॉन्ग्रेस के 150 से अधिक सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे। उनका कहना है कि पत्रकारों के एक समूह भी रूस का दलाल था।

ट्विटर/एक्स पर निशिकांत दुबे ने ‘कॉन्ग्रेस, करप्शन और गुलामी’ शीर्षक के साथ किए पोस्ट में ये दावा किया है। उन्होंने कहा है;

  1. ये अवर्गीकृत गुप्त दस्तावेज सीआईए का 2011 में जारी हुआ।
  2. कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एचकेएल भगत की अगुवाई में 150 से ज्यादा कॉन्ग्रेस के सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे, रूस के लिए दलाली करते थे?
  3. पत्रकारों का एक समूह दलाल था, कुल 16000 न्यूज आर्टिकल रूस ने छपवाए?
  4. उस जमाने में रूस के जासूसी संस्थानों के 1100 लोग हिन्दुस्तान में थे जो नौकरशाही, व्यापारी संगठनों, कम्युनिस्ट पार्टियों, ओपिनियन मेकर को अपने पॉकेट में रखते थे और सूचना के आधार पर भारत की नीति बनाते थे?
  5. कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार सुभद्रा जोशी ने लोकसभा चुनाव में उस वक्त 5 लाख रुपए लिए जर्मन सरकार से चुनाव के नाम पर, हारने के बाद इंडो जर्मन फोरम की अध्यक्ष बनीं।

उन्होंने लिखा है, “यह देश था या ग़ुलामों, दलालों या बिचौलियों की कठपुतली। कॉन्ग्रेस इसका जवाब दे, आज इस पर जाँच हो या नहीं?”

यह पहला मौका नहीं है जब रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी से पैसे लेने और उनके इशारे पर काम करने का आरोप कॉन्ग्रेस पर लगा है। इससे पहले भी इंदिरा गाँधी और उनके बेटे राजीव के जमाने में कॉन्ग्रेस के ‘ब्रीफकेस कल्चर’ को लेकर को लेकर तथ्य सामने आ चुके हैं।

2017 की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कुछ पुराने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। इससे पता चलता है कि इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेस के 40 फीसदी सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिला था। 2005 में केजीबी के ही एक पूर्व जासूस वासिली मित्रोकिन की किताब आई थी। इसमें तो बकायदा बताया गया है कि खुद इंदिरा गाँधी को सूटकेसों में भरकर पैसे भेजे गए थे।

साभार: indiafacts.org

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने ऑपइंडिया को बताया था कि जो तथ्य सार्वजनिक हुए, उससे जाहिर होता है कि 1967 के आम चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस सहित देश के ज्यादातर राजनीतिक दलों को विदेश से पैसा मिला था। उन्होंने बताया था कि शीत युद्ध के जमाने में कम्युनिस्ट देश जहाँ भारत में साम्यवाद के फैलाव के लिए पैसे खर्च कर रहे थे, तो पूँजीवादी देश साम्यवाद को रोकने के लिए। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का नेता ही बिकने को तैयार हो तो विदेशी ताकतों के लिए चीजें आसान हो जाती है।

किशोर ने ऐसी कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि विदेश से पैसा लेने के मामले की जाँच भी कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। जब कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे सार्वजनिक करने की माँग की तो तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री यशवंत राव चव्हाण ने संसद में कहा कि जिन दलों और नेताओं को विदेशों से धन मिले हैं, उनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे उनके हितों को नुकसान पहुँचेगा।

लेकिन, सालों तक जिन तथ्यों को कॉन्ग्रेस छिपाती रही उसे मित्रोकिन ने 2005 में दुनिया के सामने ला दिया। वे सोवियत संघ के जमाने के हजारों गोपनीय दस्तावेज चुराकर देश से बाहर ले गए थे। बाद में इसके आधार पर क्रिस्टोफर एंड्रयू (Christopher Andrew) के साथ मिलकर किताबें लिखी। द वर्ल्ड वॉज गोइंग आवर वे (The World Was Going Our Way) नामक किताब में कहा गया है कि केजीबी ने 1970 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार के लिए फंड दिया था।

2017 में सामने आई दिसंबर 1985 की सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि सोवियत संघ ने भारतीय कारोबारियों के साथ समझौतों के जरिए कॉन्ग्रेस पार्टी को रिश्वत दी थी। सोवियत संघ का दूतावास कॉन्ग्रेस नेताओं को छिपकर रकम देने सहित कई खर्चों के लिए बड़ा रिजर्व रखता था। इसके मुताबिक कॉन्ग्रेस के अलावा सीपीआई और सीपीएम को भी सोवियत संघ से काफी पैसा मिलता था। ऐसा नहीं है कि सभी को पैसे ही दिए गए थे। कुछ के साथ तो सोवियत संघ ने बकायदा समझौता भी किया था।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि केजीबी के पैसे की वजह से भारत के ढेरो नेता सोवियत संघ की मुट्ठी में थे और वे भारतीय राजनीति को अपने हितों के हिसाब से प्रभावित करते थे। मित्रोकिन की किताब में भी यह बात कही गई है। केजीबी के लीक दस्तावेजों में भारत को तीसरी दुनिया की सरकारों में केजीबी के घुसपैठ का एक मॉडल बताया गया था। इन दस्तावेजों में साफ तौर पर भारत सरकार में केजीबी के बहुत से सूत्र होने की बात कही गई थी।

साभार: indiafacts.org

ऐसा भी नहीं है कि इंदिरा के बाद विदेश से पैसा लेने की कॉन्ग्रेस की आदत छूट गई। दस्तावेज बताते हैं कि सोवियत संघ से पैसा लेने का जो सिलसिला इंदिरा गाँधी के जमाने में शुरू हुआ था वह राजीव गाँधी के जमाने में भी जारी रहा है। हालॉंकि इस दौर में सोवियत संघ का प्रभाव कुछ सीमित करने की कोशिश भी हुई थी।

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ये दस्तावेज मीडिया में भी केजीबी की घुसपैठ के बारे में बताते हैं। इसके अनुसार सोवियत संघ ने अपने प्रोपेगेंडा के प्रचार के लिए भारत के बड़े मीडिया संस्थानों के साथ व्यापक पैमाने पर साँठगाँठ कर रखी थी। वे उसकी जरूरत के हिसाब से लेख लिखते थे। यहाँ तक की संपादकीय में भी सोवियत संघ की धुन बजाते थे। जिन संस्थानों का जिक्र है उनमें टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैन, द हिंदू शामिल है।

मित्रोकिन ने अपनी किताब में बताया है कि सोवियत संघ ने इस काम के लिए भारत में 40-50 पत्रकार रखे थे। बाद के सालों में इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 हो गई थी।