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जयपुर राजघराना, गणेश जी की मूर्ति, नगाड़ा बजाने वाला अब्दुल: अब कह रहा ये प्रॉपर्टी मेरी, थाने पहुँचा मामला

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पूर्व राजघराने की संपत्ति पर कब्जा करने का एक प्रकरण सामने आया है। महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट सिटी पैलेस के प्रशासक प्रमोद यादव ने नगाड़ा बजाने वाले एक पूर्व कर्मचारी के खिलाफ माणक चौक थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत में कहा गया है कि जलेबी चौक स्थित सिरहड्योढ़ी दरवाजे पर गणेशजी की मूर्तियों की स्थापना शुरू से ही है। वहाँ पूजा होती है और रियासत काल से नगाड़ा बजता रहा है। म्यूजियम ट्रस्ट ने भी पुरानी परिपाटी के अनुसार नगाड़ा बजाने के लिए अब्दुल सलाम को नौकरी पर रखा था, जो साल 2018 में रिटायर हुआ। इसके बाद नगाड़ा बजाने के लिए नए लोग रख लिए गए पर सलाम का परिवार अब तक इस प्रॉपर्टी पर डटा हुआ है।

ट्रस्ट के प्रशासक के अनुसार रिटायरमेंट के बाद अब्दुल को सभी लाभ दिए गए थे। लेकिन उसने कब्जा नहीं छोड़ा। उनके अनुसार अब्दुल को यह सम्पत्ति सेवा में रहने के दौरान उपयोग के लिए दी गई थी। लेकिन अपने भाई इस्लाम खाँ और अम्मी मुन्नी बेगम से मिलीभगत कर जाली दस्तावेज तैयार कर संपत्ति पर खुद का कब्जा दिखा बिजली-पानी के कनेक्शन ले लिए।

प्रॉपर्टी पर कब्जे की बात जब ट्रस्ट के संज्ञान में आई तो उन्होंने अब्दुल को संपत्ति से अपना कब्जा खाली करने को कहा। अब्दुल ने कागज और बिजली-पानी का कनेक्शन दिखा जगह छोड़ने से इनकार कर दिया। साथ ही म्यूजियम की संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बताने लगा और धार्मिक भावनाएँ भड़काने की भी कोशिश की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जलेबी चौक एवं उससे सटी सारा सम्पत्ति (जिसमें सिरहड्योढ़ी दरवाजा भी आता है) केंद्र सरकार और महाराजा मान सिंह के बीच में निष्पादित कोविनेंट (प्रसंविदा) के अनुसार संपादित महाराजा सवाई मानसिंह के स्वामित्व एवं कब्जे की व्यक्तिगत सम्पत्ति थी। हालाँकि, महाराजा सवाई मानसिंह के स्वर्गवास के बाद महाराजा सवाई भवानी सिंह सिटी पैलेस एरिया की सम्पत्ति एवं जलेबी चौक की सम्पत्ति 1972 के प्रन्यास के जरिए महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट में निहित कर दी गई और उसके बाद से इसकी देखरेख ट्रस्ट के हाथ में है। इस प्रॉपर्टी को लेकर नगर निगम, राज्य सरकार और महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट के बीच एक केस भी चल रहा है जिस पर स्टे है।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने माणकचौक थाने और ट्रस्ट के प्रशासक से बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। दैनिक भास्कर ने माणकचौक थाने के एसएचओ सुरेंद्र यादव के हवाले से बताया है कि पुलिस ने दोनों पक्षों से रिकॉर्ड माँगा है। अब्दुल इस जमीन पर पुराने समय से अपना कब्जा बता रहा है।

राजमहल में चलता मिला था मदरसा

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मध्य प्रदेश स्थित विदिशा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर प्राचीन उदयपुर नगर में तकरीबन एक हजार साल पुराने परमार वंश के राजमहल पर मदरसा चलते हुए पाया गया था। राजमहल पर मदरसा चलाने वालों ने वहाँ निजी संपत्ति का बोर्ड लगाया हुआ था। काजी ने सफाई में कहा था कि यह एक हजार साल पुराना ना होकर चार सौ साल पुराना है, जिसका निर्माण उनके पूर्वजों द्वारा पूरा कराया गया था। काजी के अनुसार, जहाँगीर और शाहजहाँ ने उनके परिवार के नाम यह संपत्ति कर डाली थी। इस विषय के सोशल मीडिया पर उछलने के बाद वहाँ के तहसीलदार स्वयं इस महल में पहुँचे थे और उन्होंने एक्शन लेते हुए महल से इस बोर्ड को भी हटा दिया था, जिसमें इसे काजी की निजी सम्पत्ति बताया गया था।

अलवर: 20 वर्षीया लड़की का 2 साल से गैंगरेप, शिकायत पर पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई, अब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

राजस्थान के अलवर जिले में पिछले दो वर्षों से एक 20 वर्षीय लड़की से कथित तौर पर लगातार गैंगरेप किए जाने की शर्मनाक वारदात सामने आई है। इस वारदात की शुरुआत अप्रैल 2019 में हुई थी। इसके बाद पीड़िता ने मई 2019 में अलवर के ही मालाखेड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उस दौरान पुलिस ने न मामले में शिकायत दर्ज की और ना ही किसी तरह की कोई कार्रवाई की।

इन दो वर्षों में आरोपितों ने पीड़िता को बार-बार हवस का शिकार बनाया। वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उसे बार-बार ब्लैकमेल किया।

इसी कड़ी में 25 जून 2021 को गौतम सैनी नाम के एक आरोपित ने पीड़िता को वह वीडियो भेजा, जिसके जरिए उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था। उसने भी वीडियो भेजकर लड़की को मिलने का दबाव बनाया और धमकी दी कि अगर वो नहीं चाहती कि ये वीडियो उसके घरवालों को मिले तो वो वैसा ही करें, जैसा वह कह रहा है। हालाँकि, धमकी के बाद भी जब पीड़िता उससे मिलने नहीं गई तो उसने दो दिन बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

इसके बाद पीड़िता एक बार फिर से इसी साल (28 जून 2021) को मालाखेड़ा थाने में सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का केस दर्ज कराया, जिसके बाद तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अलवर जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया, “गौतम सैनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे केवल लड़की का वीडियो और फोन नंबर मिला था। सीधे तौर पर उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उस पर आईटी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।”

पीड़िता ने बताया है कि वह साल 2019 में गोरिदेव कॉलेज में परीक्षा देने के लिए गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात विकास उर्फ विक्की चौधरी से हुई। विकास पीड़िता का जानकार था।

एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया, “विकास और उसका दोस्त भुरू सिंह जाट ने उसे किडनैप कर लिया और नशीला पदार्थ पिला दिया और बाद अलवर के बाहरी क्षेत्र चिकानी रोड स्थित एमआईए क्षेत्र में स्थित एक घर में लेकर गए और वहाँ उनका बलात्कार किया। लड़की ने आरोप लगाया कि आरोपियतों से वहाँ का चौकीदार भी मिला हुआ था। पीड़िता ने एफआईआर में बताया है कि विकास और भुरू के अलावा दो अन्य लोगों ने उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।”

मई 2019 में जब पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ मालाखेड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी। उसके बाद आरोपितों ने फिर से उसके साथ गैंगरेप किया था।

हो रही है पुलिस की भूमिका की जाँच

आईपीएस अधिकारी के मुताबिक, “पीड़िता की शिकायत के बावजूद एफआईआर रजिस्टर नहीं करने के मामले में पुलिस की भूमिका की जाँच अलवर (ग्रामीण) के सर्किल ऑफिसर अमित सिंह कर रहे हैं। अगर पुलिसवालों के खिलाफ कुछ मिलता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

दिल्ली पुलिस को शेल्टर होम से गायब 10 लड़कियों की तलाश, DMRC ने कहा- तीस हजारी वाले चिल्ड्रेन होम में सिर्फ लड़के रहते हैं

दिल्ली के तीस हजारी स्थित चिल्ड्रेन होम से 10 लड़कियों के गायब होने की खबर का दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने खंडन किया है। ये पूरा मामला दिल्ली पुलिस की ओर से इन लड़कियों की तलाश में अखबार में दिए एक विज्ञापन से सामने आया था। इससे पता चला था कि इन लड़कियों की मई 2021 से कोई खबर नहीं है। इनके अगवा होने को लेकर दिल्ली के द्वाराका सेक्टर-23 पुलिस थाने में 24 मई को रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी।

डीएमआरसी के खंडन के बाद मीडिया रिपोर्टों में दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया गया है कि ये लड़कियाँ द्वारका के एक शेल्टर होम से गायब हैं और पुलिस इनका सुराग लगाने में जुटी हैं। हालाँकि इन रिपोर्टों में भी स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली पुलिस के विज्ञापन में डीएमआरसी चिल्ड्रेन होम और सलाम बालक ट्रस्ट का जिक्र कैसे आया।

इससे पहले दिल्ली पुलिस की ओर से प्रकाशित विज्ञापन में कहा गया था कि ये लड़कियाँ तीस हजारी के डीएमआरसी चिल्ड्रेन होम से लापता/अगवा हैं। इस चिल्ड्रेन होम का संचालन सलाम बालक ट्रस्ट करता है। एएनआई के अनुसार डीएमआरसी ने एक बयान में कहा है, “दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी के डीएमआरसी चिल्ड्रेन होम से 10 लड़कियों के कथित अपहरण को लेकर विज्ञापन प्रकाशित किया है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सलाम बालक ट्रस्ट द्वारा संचालित इस चिल्ड्रेन होम में केवल लड़के रहते हैं। कोई लड़की यहाँ नहीं रहती।”

दिल्ली पुलिस की ओर से शुक्रवार (2 जुलाई 2021) को टाइम्स ऑफ इंडिया में एक विज्ञापन दिया गया था। इसमें पुलिस ने 10 लड़कियों के बारे में विवरण देते हुए इनके बारे में सूचना देने की अपील आमलोगों से की है। विज्ञापन में गायब लड़कियों के नाम: निशा, सुष्मिता, सीता, सुषमा, सुशीला, सांचमाया, सिम्मी, संगीता, स्वीटी और अनीषा बताए गए हैं। इनकी उम्र 20 से 26 वर्ष के बीच बताई गई है।

स्ट्रीट चिल्ड्रेंस के लिए तीस हजारी स्थित बाल गृह का निर्माण डीएमआरसी ने 2010 में किया था और इसकी जिम्मेदारी गैर सरकारी संस्था सलाम बालक ट्रस्ट को सौंपी गई थी। आपको बता दें कि सलाम बालक ट्रस्ट की स्थापना इंडियन ट्रस्ट ऐक्ट 1908 के अंतर्गत दिसंबर 1988 में हुई थी। यह ट्रस्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कार्यशील और बेसहारा बच्चों को सहायता प्रदान करता है। यह ट्रस्ट दिल्ली के कई इलाकों में लड़के और लड़कियों के लिए शेल्टर होम और चिल्ड्रन होम चलाता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में 2 जुलाई 2021 को प्रकाशित विज्ञापन

दिल्ली के आश्रय गृहों से इस तरह महिलाओं के लापता होने का यह पहला मामला नहीं है। कुछ साल पहले दिल्ली के ही दिलशाद गार्डन स्थित एक शेल्टर होम से 9 लड़कियों के गायब होने की खबर आई थी। इनमें एक नाबालिग भी थी। शेल्टर होम के कर्मचारियों ने लड़कियों के भाग जाने के बारे में सूचना दी थी। लेकिन शेल्टर होम की दूसरी लड़कियों ने पुलिस को बताया था कि गायब हुई लड़कियों के साथ सही व्यवहार नहीं होता था। इस मामले में डीसीडब्ल्यू ने लड़कियों के अपहरण की आशंका भी जताई थी।

गौरतलब है कि 2018 में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक शेल्टर होम से नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद इन केंद्रों की स्थिति राष्ट्रीय मुद्दा बन गई थी। उसके बाद कई जगहों से इस तरह के मामलों की शिकायत मिली थी।

राजस्थान सरकार ने मई में खरीदे 948 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, ₹35,000 के बदले दिए ₹1 लाख; क्वालिटी घटिया: रिपोर्ट

जब देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के प्रकोप से जूझ रहा था और ऑक्सीजन संकट से गुजर रहा था, तब राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की खरीद में अनियमितताओं में व्यस्त थी। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की खरीद में सामान्य से कई गुना अधिक कीमत का भुगतान किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह खरीद तब की गई, जब देश में ऑक्सीजन संकट समाप्त हो चुका था।

इस पूरे खरीद मामले में गौर करने वाली जो पहली बात है, वह यह है कि कॉन्ग्रेस सरकार ने कंसन्ट्रेटर की खरीद सीधे निर्माता से न करके बिचौलियों के जरिए निजी कंपनियों से किया। दूसरा, ₹35,000-₹40,000 के कंसन्ट्रेटर को कॉन्ग्रेस सरकार ने ₹1,00,000 में खरीदा, जो कि उसके वास्तविक मूल्य का लगभग 2.5 गुना है। तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य में कोरोना का पीक खत्म होने और अप्रैल में उत्पन्न हुई ऑक्सीजन संकट खत्म हो जाने के बाद ये कंसन्ट्रेटर 2 मई को खरीदे गए।

इसका परिणाम यह हुआ कि अधिकांश ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर राज्य भर के अस्पतालों में बिखरे पड़े हैं। भास्कर की टीम राज्य के 11 जिलों के 65 स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुँचकर वास्तविक मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदे गए कंसन्ट्रेटर के बारे में सच्चाई जाननी चाही।

भास्कर की टीम ने कॉन्ग्रेस सरकार को कंसन्ट्रेटर उपलब्ध कराने वाली कंपनी से जब बात की तो वह ₹35,000-₹40,000 में कंसन्ट्रेटर उपलब्ध कराने के लिए तैयार हो गई। नाम नहीं छापने की शर्त पर उन निजी कंपनियों में से एक ने भास्कर टीम को बताया कि जब राज्य कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा था, उस समय भी 5 लीटर की क्षमता वाले एक कंसन्ट्रेटर की लागत ₹35,000-₹40,000 रुपए ही थी, ₹1,00,000 नहीं।

ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की खरीद के लिए निर्धारित विधायक फंडों की जाँच करने पर भास्कर टीम ने पाया कि प्रति मशीन 1.06 लाख की दर से कुल 948 कंसन्ट्रेटर खरीदे गए थे। राजस्थान के ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, भिलावाड़ा, राजसमंद, कोटा, नागौर, झुंझुनू, अलवर, बरान और चित्तर के कई क्षेत्रों में कंसन्ट्रेटर को ₹1,00,00 से ₹1,25,000 में खरीदी गई थी।

इसके अलावा, टीम ने पाया कि महँगे खरीदे गए इन ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। बांदुकिया के कोविड केंद्रों में से एक पर टीम ने कंसन्ट्रेटर से ऑक्सीजन की शुद्धता 5 लीटर प्रति मिनट पर केवल 30 प्रतिशत ही पाया। यहाँ तक कि राज्य के कई अस्पतालों ने सरकार द्वारा खरीदे गए दोषपूर्ण कंसन्ट्रेटर पर अपनी आपत्ति जताई। भरतपुर मेडिकल कॉलेज ने जयपुर में राज्य सरकार के अधिकारियों को एक पत्र दिया, जिसमें घटिया कंसन्ट्रेटर के विरोध की बात कही गई थी। इस पत्र में आरोप लगाया कि कंसन्ट्रेटर उल्लेखित शर्तों को पूरा नहीं करता है।

विभिन्न जिलों के डॉक्टरों और विधायकों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर बताया कि सरकार द्वारा खरीदे गए घटिया ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर घटिया और कोविड -19 रोगियों के लिए उपयोग करने लायक नहीं हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने जिन कंपनियों से ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर खरीदा था, उनका नाम पहले ही घोटालों में आ चुका है। दरअसल, 5 साल पहले हुए एनएचएम घोटाले में कमीशन बाँटने वाले व्यक्ति की फर्म के माध्यम से इन कंसन्ट्रेटर की खरीद की गई है।

शायर के बेटे ने खुद ही लिखी खुद पर हमले की स्क्रिप्ट, पुलिस से उखड़े मुनव्वर राणा ने की आरोपों की फायरिंग

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में मुनव्वर राणा के बेटे तबरेज राणा पर हुई फायरिंग मामले में पुलिस ने शुक्रवार को (जुलाई 2, 2021) बड़ा खुलासा किया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि तबरेज ने अपने चाचा और उनके बेटों को फँसाने के लिए खुद के ऊपर अपने दोस्तों से हमला करवाया और बाद में झूठा आरोप लगाते हुए एफआईआर करवा दी। अब इस मामले में पुलिस मुन्नवर राणा की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

पूरा मामला सम्पत्ति विवाद से जुड़ा है। तबरेज अपने चाचा पर दबाव बनाना चाहता था। लेकिन केस उलटा हो गया। बाद में पुलिस ने तबरेज को पकड़ने के लिए गुरुवार आधी रात लखनऊ और रायबरेली में छापेमारी की। साथ ही उसके दोनों शूटर दोस्तों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में अब तक 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

इस बीच मुनव्वर राणा की बेटी ने जहाँ पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाया, वहीं खुद शायर मुनव्वर राणा ने सारे सबूतों के बावजूद पुलिस को दोषी दिखाना चाहा। उन्होंने कहा कि केस को बिकरु कांड बनाने की कोशिश चल रही है। इन हालात में वे मर जाते हैं तो इसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। मुनव्वर ने तंज कसते हुए कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने तबरेज को पैदा किया।

4 गिरफ्तारी

रायबरेली पुलिस ने इस केस को फर्जी करार दिया है। वहीं एसपी ने बताया कि तबरेज पर हमले की प्लानिंग होर्डिंग लगाने वाले हलीम घोसी और सुल्तान ने बनाई थी। आपराधिक रिकॉर्ड वाले -सत्येंद्र त्रिपाठी और शुभम सरकार ने तबरेज की कार पर गोली चलाई थी। इन चारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चारों ने अपना गुनाह कबूल भी कर लिया है उन्होंने बताया कि मुनव्वर राना का बेटा तबरेज फरार है उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

रायबरेली पुलिस ने जारी की वीडियो

मामले पर रायबरेली पुलिस ने सच बताते हुए दो वीडियो जारी किया है। पहली वीडियो में तबरेज शूटर्स के साथ मिलकर होटल ओम क्लार्क के सामने खुद पर हमले की प्लानिंग कर रहा है। इसमें दो शूटर और तबरेज दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में तबरेज अपनी गाड़ी से पेट्रोल पंप के पहुँचता हुआ दिखाई दे रहा है।

वीडियो में देख सकते हैं कि पंप से कुछ दूरी पर ही उसने गाड़ी रोक दी। थोड़ी देर बाद बाइक से दो लोग आते हैं। कार के पीछे से घूमकर सामने आते हैं। उस वक्त तबरेज गाड़ी रोककर खड़ा रहता है। फिल्मी अंदाज में दोनों कार पर गोली चलाते हैं और फिर कार के सामने से निकल जाते हैं।

मुनव्वर राणा ने पुलिस को बताया दोषी

पुलिस की छापेमारी के बाद शायर ने भी अपना एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, “एक दिन हमारी जंगल में लाश पड़ी मिलेगी, बिकरु कांड की तरह। इसमें इतना हंगामा करने की क्या जरूरत है? अब ये मुनव्वर राना बिकरु कांड हो गया है। पुलिस ने कहा कि हम इनको जेल ले जाएँगे… उनको जेल ले जाएँगे। मैंने वारंट के बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे हटने के लिए बोल दिया।”

मुनव्वर के मुताबिक, ”पुलिस ने हमारे साथ गुंडागर्दी की। इनमें से कोई मुझे मार भी देगा और न भी मारे तो मैं इन हालात में मर जाऊँगा।” मुनव्वर ने पुलिस पर तंज कसते हुए कहा, “पुलिस वाले मुझे हटने के लिए बोल रहे थे…मैं कैसे हट जाऊँ। वो मेरा बेटा है। मेरी सबसे बड़ी गलती है कि मैंने उसे पैदा किया है।”

तबरेज पर फायरिंग का पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि मुनव्वर और उनके भाइयों के बीच 8 करोड़ की कीमत वाली पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। 28 जून को तबरेज पर रायबरेली के त्रिपुला चौराहे के पास हमने की घटना से हल्ला मच गया था। बाद में 29 जून को इस संबंध में शिकायत हुई जिसमें दावा किया गया कि हमलावरों ने तबरेज की सफेद गाड़ी पर कई राउंड फायरिंग की। हमले में वे बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई थी।

तबरेज राणा ने इस मामले में अपने ही परिवार के पाँच लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी थी। देर रात पुलिस ने उसके चाचा समेत पाँचों आरोपितों इस्माइल राणा, राफे राणा, जमील राणा, शकील राणा (सभी चाचा) और यासर राणा (चचेरे भाई) के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

तबरेज राणा की शिकायत की कॉपी

फायरिंग के बाद दर्ज हुए मुकदमे में आरोपित बनाए गए राफे राणा ने बताया था कि राजघाट पर साढ़े आठ बीघा जमीन है। इसमें चार बीघा उनकी और उनके भाई इस्माइल की है। साढ़े चार बीघा में 6 भाइयों का हिस्सा है। पिता की मृत्यु के बाद पूरी साढ़े आठ बीघा जमीन 6 भाइयों के नाम चढ़ गई। इसका वाद न्यायालय में विचाराधीन है। राफे के मुताबिक फरवरी 2021 में तबरेज ने उनके हिस्से की जमीन में से 18 बिस्वा बेच दी। ये बात जब पता चली तो निबंधन कार्यालय में आपत्ति करके दाखिल-खारिज रुकवा दी।

बता दें कि पूरे मामले का सच उजागर होने के बाद कहा जा रहा है कि संपत्ति मामले में परिवार के लोग ज्यादा अड़ंगेबाजी न करें इसलिए तबरेज ने यह साजिश रची। फिलहाल वह फरार है पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।

₹45 लाख की फंडिंग, हत्या के बाद नेपाल भाग गए थे आरोपी: मनसुख हिरेन मर्डर में NIA का खुलासा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मनसुख हिरेन की हत्या मामले में नया खुलासा किया है। एनआईए की विशेष अदालत को एजेंसी ने बताया है कि उसे इस मामले में 45 लाख रुपए की फंडिंग का संदेह है। साथ ही बताया है कि लाल रंग की टवेरा कार में हत्या करने के आरोपित नेपाल भाग गए थे।

इसी साल 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर (एंटीलिया) के बाहर से एक विस्फोटक लदी कार मिली थी। यह कार हिरेन के नाम थी जिसकी चोरी होने की उन्होंने

मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक NIA ने बताया कि उसे सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें हत्यारोपित चार मार्च को ठाणे के घोडबांदर रोड पर मनसुख के साथ देखे गए। आरोपित सतीश मुटकोरी और मनीष सोनी को पेश करते हुए एजेंसी ने उनकी हिरासत बढ़ाने की माँग की। एजेंसी ने कहा कि 45 लाख रुपए के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल हिरेन की हत्या के लिए किया गया, क्योंकि वह बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का आदेश नहीं मान रहा था। NIA के अनुसार 45 लाख रुपए की फंडिंग बहुत छोटी रकम है, संदेह है कि इसमें करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। इस मामले में कुछ और लोग संलिप्त हैं, जिनके बारे में जानकारी हासिल किए जाने की जरूरत है।

इसके बाद कोर्ट ने सतीश और मनीष की NIA हिरासत पाँच जुलाई तक बढ़ा दी। अदालत में बहस के दौरान लोक अभियोजक ने कहा कि मनसुख हत्याकांड के आरोपित के हवाले से 35 हजार रुपए बरामद हुए हैं। कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राशि बड़ी नहीं है। इस पर लोक अभियोजक ने कहा कि यहाँ पाँच हजार रुपए के लिए हत्या हो जाती है, ऐसे में NIA जानना चाहती है कि आरोपित के पास 35 हजार रुपए कहाँ से आए।

एनआईए ने यह भी बताया कि इस मामले में गिरफ्तार पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने आरोपी संतोष शेलार, आनंद जाधव, सतीश और मनीष को फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराए थे। इसके अलावा सतीश, मनीष, सतीश और आनंद हत्या के बाद छुपने के लिए नेपाल भी गए थे। एनआईए अब यह पता लगा रही है कि आखिर ये यात्रा करना इनके लिए कैसे संभव हुआ।

एनआईए के सूत्रों ने बताया कि उन्हें एक सीसीटीवी मिला है जो ठाणे के घोडबंदर इलाके का है। उस फुटेज में दिखाई दे रहा है कि लाल रंग की टेवरा गाड़ी खड़ी है और गाड़ी के बाहर संतोष शेलार गाड़ी से टेक लगाकर खड़ा है और तभी दूरी से कार आती है जिसमें से मनसुख को निकालकर टवेरा गाड़ी में बैठा दिया जाता है। टवेरा में बैठाते समय संतोष मनसुख के पीठ पर हाथ से थपथपाते हुए भी दिखाई पड़ता है। एनआईए इसे काफी अहम सबूत मानती है जिसमें यह साबित होता है कि हत्या के समय सारे आरोपित वहीं मौजूद थे।

वैक्सीन पर प्रोपेगेंडा से राहुल गाँधी फिर नहीं आए बाज, बीजेपी ने बताया- तथ्यों से कंगाल, कुतर्कों का मवाली

कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाने वाले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हमला बोला है। राहुल गाँधी ने शुक्रवार (जुलाई 2, 2021) को सुबह ही वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाया था, “जुलाई आ गई है, लेकिन वैक्सीन नहीं आई।” राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर जवाब देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि आखिर राहुल गाँधी की समस्या क्या है। डॉ. हर्षवर्धन ने लिखा, “मैं कल ही जुलाई महीने में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर पूरी जानकारी दी थी। आखिर राहुल गाँधी की समस्या क्या है? क्या वह पढ़ते नहीं हैं? या फिर वह समझते नहीं हैं?”

यही नहीं राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अहंकार और नजरअंदाज करने के वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है। इसके अलावा डॉ. हर्षवर्धन ने राहुल गाँधी की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को अपनी लीडरशिप में बड़े बदलाव के बारे में विचार करना चाहिए।

इससे पहले गुरुवार को भी वैक्सीनेशन पॉलिसी को लेकर उठ रहे सवालों पर डॉ. हर्षवर्धन ने जवाब दिया था। हेल्थ मिनिस्टर ने लिखा था, “मैंने दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन अभियान को लेकर कई नेताओं के गैर-जिम्मेदार बयान देखे हैं। मैं यह कुछ फैक्ट रखता हूँ, जिससे लोगों को इन नेताओं की भावनाओं के बारे में पता लग सकेगा। केंद्र सरकार की ओर से 75 फीसदी फ्री वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी उठाने के बाद से अब तक जून में सरकार ने 11.50 करोड़ डोज मुहैया कराए हैं।”

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि राहुल गाँधी के पास तथ्यों की कंगाली है, इसलिए उनको कुतर्कों का मवाली बना दिया है। आज दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत में चल रहा है और सभी समाज के लोग इसमें बढ़-चढ़कर के हिस्सा ले रहे हैं और सामाजिक क्रांति के तौर पर इसको देखा जा रहा है। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी भ्रम का भाव खड़ा करके कंफ्यूजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। राहुल गाँधी जिम्मेदार तो है नहीं, इस वजह से इस तरीके का व्यवहार कर रहे हैं इस तरीके का बयान राहुल गाँधी का बंटाधार कर रहा है।

‘राहुल को नफरत का मोतियाबिंद’

भारतीय जनता पार्टी के नेता गौरव भाटिया ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार की अगुवाई में वैक्सीनेशन का काम तेज़ी से चल रहा है। पिछले 11 दिनों में औसतन 62 लाख वैक्सीन हर रोज़ लगाई जा रही हैं। गौरव भाटिया ने कहा कि कॉन्ग्रेस की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है, राहुल गाँधी को सदबुद्धि कब आएगी। राहुल गाँधी को नफरत का मोतियाबिंद है। राहुल गाँधी ने कभी कोविड को मोविड कहा, लेकिन हमने कभी रोविड नहीं कहा जो देश को अंदर से खोखला करने में लगा है। 

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वैक्सीन की 12 करोड़ डोज़ जुलाई महीने में उपलब्ध होंगी, जो प्राइवेट हॉस्पिटल्स की आपूर्ति से अलग है। राज्यों को 15 दिन पहले ही आपूर्ति के बारे में सूचना दी जा चुकी है। राहुल गाँधी को समझना चाहिए कि कोरोना से लड़ाई में गंभीरता के बजाय इस समय ओछी राजनीति का प्रदर्शन उचित नहीं है।”

दिसंबर तक पूरा होगा टीकाकरण?

जानकारी के मुताबिक, जुलाई महीने में केंद्र की ओर से राज्यों को कुल 12 करोड़ के करीब वैक्सीन दी जाएँगी। यानी इस महीने इतनी वैक्सीन की डोज़ लग पाएँगी। अभी देश में 35 करोड़ से अधिक डोज़ लग चुके हैं। ऐसे में जुलाई तक ये आँकड़ा 50 करोड़ के आसपास पहुँच सकता है।

हालाँकि, अभी तक सिर्फ 6 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा था कि अगस्त से दिसंबर के बीच उसके पास 135 करोड़ से अधिक वैक्सीन उपलब्ध रहेंगी। ऐसे में सरकार का टारगेट दिसंबर तक सभी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लगाने का टारगेट है।

दर्ज होंगे सारे FIR, बीजेपी वर्कर का दोबारा पोस्टमॉर्टम, DCP को नोटिस: बंगाल हिंसा पर NHRC रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट सख्त

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद भड़की हिंसा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सभी मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। बीजेपी कार्यकर्ता अविजीत सरकार की फिर से पोस्टमॉर्टम कराने को कहा है। साथ ही जाधवपुर में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की जाँच टीम पर हुए हमले को लेकर दक्षिण कोलकाता के डीसीपी को नोटिस जारी किया है।

राज्य में दो मई 2021 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के समर्थकों पर राजनीतिक विरोधियों खासकर बीजेपी समर्थकों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप हैं। पीड़ितों ने पुलिस पर भी शिकायत दर्ज करने में टालमटोल करने और हिंसा के दौरान मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया था। अदालत के आदेश पर जाँच के बाद एनएचआरसी की टीम ने 30 जून को हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी।

अब हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को हिंसा के सभी मामलों की एफआईआर दर्ज करने को कहा है। इसके अलावा ममता बनर्जी सरकार को भी पीड़ितों का इलाज कराने और उन्हें राशन उपलब्ध करने के लिए कहा गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय पीठ ने ये निर्देश दिए। पीठ में जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस सुब्रत तालुकदार भी शामिल हैं। NHRC की सिफारिशों के मद्देनजर ये निर्देश दिए गए हैं।

पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को भी हिंसा के सभी मामलों से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए कहा है। इसके अलावा कोर्ट ने हिंसाग्रस्त इलाकों के DM और SP को नोटिस जारी करके जवाब माँगा है कि हिंसा को रोकने में असमर्थ रहने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

कोर्ट ने साउथ कोलकाता के डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस राशिद मुनीर खान के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस जाँच के लिए गई NHRC की टीम के कार्य में बाधा पहुँचाने वालों को रोकने में असफल रहने पर जारी किया गया है।

इसके अलावा कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार को भी आदेशित करते हुए कहा है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि हिंसा पीड़ितों का समुचित इलाज कराया जाए। साथ ही पीड़ितों को मुफ़्त में राशन भी उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा उन्हें भी राशन मिलना चाहिए जिनके पास राशन कार्ड उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही NHRC के सदस्य राजीव जैन के नेतृत्व में एक 7 सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने हिंसाग्रस्त इलाकों का दौरा किया था। इसके बाद आयोग की रिपोर्ट 30 जून को कोर्ट के सामने पेश की गई। हालाँकि आयोग ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि यह रिपोर्ट आंशिक है और पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए उसे और समय चाहिए। इसके लिए कोर्ट ने कमेटी को 13 जुलाई तक का समय दे दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई भी 13 जुलाई को ही होनी है।   

दरभंगा ब्लास्ट: आतंकी साजिश रचने वाले इमरान और नासिर को पटना लेकर पहुँची NIA, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं तार

दरभंगा रेलवे स्टेशन पर पार्सल ब्लास्ट मामले में हैदराबाद से गिरफ्तार दोनों संदिग्ध आतंकियों को पटना ले आया गया है। दोनों पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़कर देश के खिलाफ आतंकी साजिश रचने का आरोप हैं। नासिर मलिक और इमरान मलिक नाम के इन्हीं दो भाइयों ने ट्रेन में केमिकल बम रखा था। अब पटना लाकर NIA इन्हें कोर्ट में पेश करेगी।

जानकारी के मुताबिक, आतंकवादियों को इंडिगो के विमान संख्या 6E982 से पटना लाया गया है। इन्हें लेकर एनआईए की टीम 11:20 मिनट पर पटना एयरपोर्ट पहुँची। इससे पहले एयरपोर्ट पर वहाँ की पूरी तरह सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। इस दौरान बिहार एटीएस की टीम भी पटना एयरपोर्ट पर थी। बताया जा रहा कि एटीएस की टीम अब एनआईए को दरभंगा पार्सल बम ब्लास्ट मामले में सहयोग करेगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले एनआईए (NIA) की प्रवक्ता जया राय ने बताया कि 17 जून को दरभंगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पार्सल में विस्फोट हुआ था। जाँच के दौरान पुलिस को केमिकल ब्लास्ट का शक हुआ क्योंकि मौका ए वारदात पर केमिकल की बोतल भी बरामद हुई थी। इस मामले में 24 जून को एनआईए ने जाँच शुरू की थी। (जिसके बाद दो लोग गिरफ्तार हुए।) इमरान मलिक और मोहम्मद नासिर खान से शुरुआती पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने लोकल केमिकल का इस्तेमाल कर आईईडी तैयार किया था।

जाँच में NIA को पता चला कि दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं। ये लोग देश में और भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश की फिराक में थे। NIA के मुताबिक, ये दोनों पाकिस्तान में बैठे अपने आका के आदेश पर हिंदुस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में जुटे थे। पूरी साजिश पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के इशारे पर रची गई थी।

गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद नासिर खान और उसके भाई इमरान मलिक ने खुद ये आईईडी बम बनाया था। बाद में इन्होंने उस बम को कपड़े के एक पार्सल में पैक किया, जिसे सिकंदराबाद से दरभंगा तक लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन में रखा गया।  इनका मकसद था एक चलती हुई यात्री ट्रेन में विस्फोट करना – जैसा 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में किया गया था। गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद नासिर खान ने वर्ष 2012 में पाकिस्तान का दौरा किया था और वहीं केमिकल बम बनाना सीखा था।

अब उसी तकनीक के जरिए ये आतंकी चलती ट्रेन में भी बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते थे, लेकिन उनके मंसूबे नाकामयाब रह गए और अब उनकी गिरफ्तारी भी हो गई है। जाँच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों भाई अपने हैंडलर से बात करने के लिए सुरक्षित संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। नासिर और इमरान दराबाद के नामपल्लई में रहते थे पर दोनों मूलत: उत्तर प्रदेश के शामली के हैं।

बंगाल बजट सत्र के हंगामेदार होने का आसार: राज्यपाल धनखड़ ने किया ममता सरकार का पूरा अभिभाषण पढ़ने से इनकार

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के कामकाज के तरीके को लेकर राज्य के गवर्नर जगदीप धनखड़ के बीच लंबे समय से तकरार चल रही है। खासतौर पर राज्य में चुनाव बाद हिंसा को लेकर दोनों के बीच तल्खी कुछ ज्यादा ही है। ऐसे में आज (शुक्रवार, 2 जुलाई 2021) से प्रदेश के विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो रही है, जिसके काफी हंगामेदार रहने के आसार है। राज्यपाल के अभिभाषण से दोपहर 2 बजे इसकी शुरुआत होगी, लेकिन गवर्नर ने पहले ही साफ कर दिया है कि वो ममता सरकार की लिखी सभी चीजों को सदन में नहीं बोलेंगे।

सामान्यतया विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की योजनाओं और उसके कामकाज का महिमामंडन होता है। इसके अलावा उसमें आने वाली योजनाओं की झाँकियाँ भी होती हैं। हालाँकि, सीएम ममता बनर्जी और राज्यपाल धनखड़ के बीच तल्खी कुछ ज्यादा ही है। वह कई बार ममता सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठा चुके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बजट सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले गुरुवार (1 जुलाई 2021) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौराना दोनों नेताओं के बीच राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मुद्दे पर चर्चा हुई। अधिकारी ने शाह को बताया है कि वो विधानसभा सत्र के दौरान कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सदन के पटल पर लाने की योजना पर काम कर रहे हैं।

ममता ने गवर्नर को कहा था भ्रष्ट

ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच तल्खी को इस तरीके से समझा जा सकता है कि हाल ही में सीएम ममता ने शब्दों की सीमाओं को लाँघते हुए राज्यपाल को भ्रष्ट करार दे दिया था। उन्होंने कहा, “आखिर केन्द्र सरकार ऐसे गवर्नर को क्यों मंजूरी देती है।”

ममता के आरोपों पर पलटवार करते हुए गवर्नर जगदीप धनखड़ ने इसे सनसनी फैलाने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि किसी चार्जशीट में मेरा नाम नहीं है। जैन हवाला केस में किसी पर आरोप तय नहीं हुए हैं। सनसनी फैलाने के लिए ममता ने यह गलत जानकारी दी है। ममता के मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत है। मेरा किसी हवाला से कोई संबंध नहीं है।