डीजीपी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर जेडीयू के नेता बने गुप्तेश्वर पांडेय अब कथावाचक बन गए हैं। गुप्तेश्वर पांडेय नेतागिरी के बजाय अब कथावाचन का काम करेंगे। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा आता है जब आप जीवन के उद्देश्य और ईश्वर को जानना चाहते हैं। इसका मैं कोई अपवाद नहीं हूँ। मेरी दिलचस्पी अब भगवान में है और यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ है।”
पूर्व डीजीपी पांडेय आगे कहते हैं, “जब मैं 14 साल का था तभी से धार्मिक मौकों पर मंदिरों में प्रवचन सुनाया करता था। अध्यात्म में मेरी रुचि शुरू से ही रही है। सेवा के दौरान भी मैंने कई सारे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया, लेकिन तब कथा कहने की इजाजत नहीं थी। मेरा मानना है कि ईश्वर के चरण में स्थान पाना इंसान का अंतिम लक्ष्य होता है।”
न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा है, “मेरे अंदर सफल राजनेता बनने की क्षमता नहीं है। मैं बन सकता तो अब तक बन गया होता। ऐसा DGP खोज के निकाल दीजिए जो विधायक का चुनाव लड़ने के लिए DGP पद से 6 महीने पहले इस्तीफा दे। मैं विधायक इसलिए बनना चाहता था, ताकि कमजोर वर्ग के साथ खड़ा हो सकूँ।”
We think that material achievements will make us happy, but the real happiness lies in God. I only want to serve God now: Former Bihar DGP-turned-JD(U) leader Gupteshwar Pandey on turning religious preacher
गौरतलब है कि बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और बिहार के 26 जिलों में अपनी सेवाएँ देते हुए अंत में डीजीपी भी बने थे। पांडेय ने 2009 में बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया, लेकिन टिकट मिला नहीं तो वापस सेवा में आने की अर्जी दी। इसे 9 महीने बाद नीतीश सरकार ने मंजूर कर लिया और वे सेवा में बहाल हो गए। इसके बाद 2020 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने दोबारा वीआरएस लिया, लेकिन इस बार भी उनके हाथ निराशा लगी और टिकट नहीं मिला।
पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती पर अपने बयान को लेकर चर्चा में रहे हैं। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने डीजीपी के पद से वीआरएस ले लिया था। चर्चा थी कि वह जेडीयू से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला।
गुप्तेश्वर पांडेय ने धर्म-आध्यात्म की दुनिया में प्रवेश करते हुए पीला वस्त्र धारण कर लिया। वह जूम ऐप पर कथावाचन कर रहे हैं और चौपाइयों को सुनाकर लोगों को जीवन का महत्व बता रहे हैं। ईश्वर का महत्व और पाप-पुण्य की बात कथा के जरिए बता रहे हैं। उनका यह रूप सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद कर रहे हैं और उनका वीडियो देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो अयोध्या का है और 16 जून को बनाया गया था। इससे पहले वह गायक के रूप में भी दिख चुके हैं। भगवान भोलेनाथ पर इनका एक एल्बम भी आ चुका है और पांडेय उसमें एक्टिंग भी कर चुके हैं।
पतंजलि योगपीठ ने हिंदी खबर न्यूज चैनल के संपादक एवं एंकर अतुल अग्रवाल के खिलाफ ब्लैकमेल करने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाते हुए बहादराबाद थाने में मामला दर्ज कराया है। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के स्वामित्व वाली पतंजलि योगपीठ ने शिकायत में चैनल के संपादक अतुल अग्रवाल पर पैसे माँगने और नहीं देने पर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर बहादराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया है।
पतंजलि योगपीठ के विधि अधिकारी राजू वर्मा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में बताया कि संपादक अग्रवाल कई सालों से अपनी टीवी पर पतंजलि से जुड़े उत्पादों का विज्ञापन प्रसारित करते आ रहे थे। लेकिन, पिछले कुछ समय से पतंजलि ने न्यूज चैनल को विज्ञापन देना बंद कर दिया था। इस पर अतुल अग्रवाल नाराज हो गए और कई बार कंपनी के दफ्तर में आकर विज्ञापन को दोबारा जारी करने के लिए कहा। यही नहीं, विज्ञापन देने के लिए वह पतंजलि के कर्मचारियों को फोन भी करते थे और उन्हें भी धमकाते थे।
नोएडा में फ़र्ज़ी लूट की खबर बताने वाले वरिष्ठ पत्रकार के ख़िलाफ़ हरिद्वार के बहादराबाद में पतंजलि से अवैध वसूली और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। https://t.co/6A798M2CFvpic.twitter.com/qAxNXtGN8h
शिकायत पत्र में कहा गया है कि अतुल अग्रवाल ने कहा कि अगर पतंजलि ने विज्ञापन जारी नहीं किया तो इसके भयानक परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद अतुल अग्रवाल पतंजलि योगपीठ, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ गलत और भ्रामक खबरें चलाने लगे। इन खबरों के माध्यम से चैनल के संपादक ने उनकी मानहानि की और योग व हिंदू धर्म संस्कृति पर सवाल उठाते हुए धार्मिक भावनाओं को आहत किया। इस मामले में कोर्ट ने पुलिस को चैनल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिया। एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर अतुल अग्रवाल निवासी देहरादून के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि नोएडा पुलिस ने शुक्रवार (25 जून 2021) को हिंदी खबर के संपादक अतुल अग्रवाल द्वारा बताई गई उनके साथ लूट की कहानी को ‘पारिवारिक कारणों’ से गढ़ी गई लूट की कहानी बताया था। अग्रवाल ने दावा किया था कि 19-20 मई की रात उत्तर प्रदेश के नोएडा एक्सटेंशन में उनके साथ मारपीट और लूटपाट की गई थी।
अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि बंदूक की नोंक पर मारपीट और लूटपाट की गई। इसके बाद नोएडा पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। जाँच में पुलिस ने पाया कि अतुल अग्रवाल की कहानी मनगढ़ंत थी और जैसा उन्होंने आरोप लगाया था वैसा कुछ नहीं हुआ था। पुलिस ने पाया कि अग्रवाल 19 मई की शाम लगभग 7 बजे अपनी एक महिला मित्र के घर खाने के लिए गए थे। इसकी पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से भी हुई थी। महिला मित्र ने पुलिस को बताया कि जब अग्रवाल उनके यहाँ थे तो उनकी पत्नी का फोन आया था और उन्होंने उनसे तुरंत घर पहुँचने को कहा था। अग्रवाल रात 10:40 बजे घर वापस जाने के लिए जल्दबाजी में निकले।
इसके बाद रात के 1:20 बजे अग्रवाल ने अपनी महिला मित्र को फोन किया और बताया कि वह सड़कों पर घूम रहे हैं और रात बिताने के लिए ओयो रूम की तलाश कर रहे हैं। महिला ने पुलिस को बताया कि अग्रवाल ने उन्हें किसी भी प्रकार की लूट की सूचना नहीं दी थी। बाद में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से यह भी साबित हुआ कि अग्रवाल ने अपने बैंक खाते के माध्यम से ओयो रूम के लिए भुगतान किया था। होटल के सीसीटीवी कैमरों से भी उनके होटल में होने की पुष्टि हुई थी।
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक दबंग द्वारा महिला डांसर पर गोली चलाने की खबर है। मामला मिर्जापुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ रामनिवास यादव ने स्टेज से नीचे नहीं उतरने पर डांस कर रही एक महिला डांसर पर गोली चला चला दी। इस गोली से डांसर तो बच गई, लेकिन गोली उसके साथी को जा लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यादव रुपए लेने के लिए बार-बार डांसर को स्टेज से नीचे बुला कर तंग करता था।
दबंगई की यह घटना मिर्जापुर थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर गाँव की है। इसी गाँव के प्रदीप कुशवाहा के बेटे का नामकरण संस्कार हो रहा था, जिसमें लोगों के मनोरंजन के लिए एक समारोह का आयोजन किया गया था। मनोरंजन के लिए डांसरों को बुलाया गया था और डांस देखने के लिए बड़ी संख्या में गाँव से लोग इकट्ठा हुए थे।
डांसरों के डांस देखने के दौरान पृथ्वीपुर गाँव के ही रहने वाले रामनिवास यादव डांसरों को स्टेज से नीचे बुलाने लगा। वह महिला डांसर को ईनाम देने का लालच देता और नीचे आकर पैसे ले जाने के लिए कहता। एक महिला डांसर के साथ भी उसने यही किया। हालाँकि, डांसर ने स्टेज से नीचे आकर रुपए लेने से इनकार कर दिया। इसी बात पर दबंग रामनिवास यादव आग बबूला हो गया। उसने अपनी कमर में रखा तमंचा निकाला और महिला डांसर पर गोली चला दी।
रामनिवास यादव के तमंचे की गोली से महिला डांसर बाल-बाल बच गई, लेकिन उसका साथी बच नहीं पाया। तमंचे से निकली गोली स्टेज पर खड़े हास्य कलाकार दयाराम के हाथ में जा लगी। गोली चलते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हालाँकि, लोगों ने गोली चलाने वाले रामनिवास यादव को दबोच लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार बाजपेई का कहना है कि पृथ्वीपुर गाँव में डांस का एक कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें गाँव के ही रामनिवास यादव ने तमंचे से गोली चला दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और आरोपी यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के पास से तमंचा भी बरामद कर लिया गया है। राम निवास यादव के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
ऐसा मालूम होता है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने गलतबयानी करने का ठेका ले रखा है। सपा के ही सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और एसटी हसन के बाद अब विधायक इकबाल महमूद ने जनसंख्या वृद्धि पर कहा कि मुसलमान जनसंख्या नहीं बढ़ा रहे हैं बल्कि इसके पीछे प्रमुख कारण दलित और आदिवासी हैं। महमूद ने यह बात उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की जनसंख्या नियंत्रण कानून की योजना के बारे में कही।
संभल से सपा विधायक और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता इकबाल महमूद ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बढ़ती हुई जनसंख्या पर मुस्लिमों को बेवजह बदनाम कर रही है। जनसंख्या मुस्लिमों के कारण नहीं बल्कि दलितों और आदिवासियों के कारण बढ़ रही है। महमूद ने कहा कि यदि राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लाती है तो सपा उसका कड़ा विरोध करेगी और उसका हाल असम की एनआरसी की तरह ही हो जाएगा।
महमूद ने यहाँ तक कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार जनसंख्या नियंत्रण की आड़ में मुस्लिमों पर हमला कर रही है तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून को मुस्लिमों को ध्यान में रखकर ही लाया जा रहा है। महमूद ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को चुनावी मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा इस कानून के जरिए अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है और समाज को बाँटना चाहती है।
हालाँकि यह पहली बार नहीं है कि सपा के नेताओं (विशेषकर मुस्लिम) ने अजीबोगरीब बयान दिया हो। संभल से ही सपा के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा था कि Covid-19 कोई बीमारी नहीं है बल्कि ‘अल्लाह का अजाब’ है जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से खत्म होगी।
इसके पहले सपा सांसद डॉक्टर एसटी हसन ने विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया था। हसन ने कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान हुई मौतों और पिछले दिनों देश में आए दो चक्रवातों के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि भाजपा सरकार ने शरीयत में दखल दी है।
ज्ञात हो कि हाल ही में यह खबर आई थी कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य में 2 से अधिक बच्चों वाले अभिभावकों को सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। इसके लिए राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल के मुताबिक, राजस्थान व मध्य प्रदेश में लागू कुछ कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है।
जम्मू और कश्मीर से यह खबर आई कि वहाँ दो सिख लड़कियों का अपहरण करके जबरन उनका निकाह और इस्लामी धर्मांतरण करा दिया गया। इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष और अकाली दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनजिंदर सिंह सिरसा सक्रिय रूप से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं और लगातार यह माँग कर रहे हैं कि जम्मू और कश्मीर में इस प्रकार के धर्मांतरण और निकाह को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
उनकी यह माँग बिल्कुल जायज है लेकिन सिरसा ने ही लव जिहाद पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा कानून बनाए जाने पर हिन्दू धर्म को यह कहते हुए एक ‘कमजोर धर्म’ कहा था कि अगर किसी धर्म को अपनी रक्षा करने के लिए कानून की जरूरत पड़े तो वह धर्म पाप है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट करके गृह मंत्री अमित शाह से माँग की कि जम्मू और कश्मीर में सिख नाबालिग लड़कियों के जबरन निकाह को रोकने के लिए ‘उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश’ की तरह कानून लागू किया जाए जिसके तहत अंतरधार्मिक विवाह के लिए अभिभावक की मंजूरी आवश्यक हो।
The local Sikh community of Jammu and Kashmir urges @AmitShah Ji to get a strong law implemented in Jammu & Kashmir (Just like Uttar Pradesh & Madhya Pradesh) mandating Permission of parents in inter-religion marriages to stop these forced Nikahs of Sikh minority girls@ANIpic.twitter.com/Tk6suVnYyu
मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पूरे मामले में कहा, “यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपने भाईचारे को कायम रखने के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़े कि लगातार बेटियाँ अगवा हो रही हैं, लगातार उनका जबरन निकाह हो रहा है, धर्म परिवर्तन हो रहा है। सरकार इसके लिए अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तुरंत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तरह कानून लागू करे। जब तक यह कानून लागू नहीं होता, हमारी बच्चियाँ यहाँ सुरक्षित नहीं हैं।“
We will not tolerate forced Nikah and conversions of Sikh daughters living in Kashmir who are forced to marry elderly of different religion Sikhs living in J&K urge @AmitShah for a law that mandates permission of Parents in inter-religion marriages. pic.twitter.com/COFwSL1dW7
उन्होंने यह भी कहा, “पिछले 7 दिनों में 4 बच्चियाँ अगवा की जा चुकी हैं और 45-50 साल के लोगों के साथ उनका जबरन निकाह कराया जा चुका है। जिस धर्म के लोगों ने यह काम किया है उनका भी बहिष्कार किया जाना चाहिए। ये कौन सा धर्म है जो सिखाता है कि 18 साल की लड़की का निकाह एक 50 साल के आदमी से करा दिया जाए। हमारे धर्म के लोगों ने ऐसा किया होता हम जूतों के हार डाल देते, ऐसे आदमी के ऊपर। क्या मजबूरी है कि उस धर्म के लोग चुप हैं। क्या ऐसे निभाया जाएगा भाईचारा?”
कुछ महीनों पहले मनजिंदर सिंह सिरसा ने धर्म परिवर्तन पर भाजपा शासित राज्यों में बनाए गए कानूनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि किसी का धर्म इतना कमजोर क्यों है कि उसे बचाने के लिए कानून का सहारा लेना पड़े। यहाँ वह वीडियो दिया जा रहा है जिसमें सिरसा ने हिन्दू धर्म की निंदा की थी। वीडियो में 15:20 से लेकर 16:33 तक सिरसा का बयान सुना जा सकता है जहाँ वह धर्मांतरण कानून को लेकर हिन्दू धर्म की आलोचना कर रहे हैं।
वीडियो : नेशनल दस्तक
वीडियो के इस भाग में सिरसा कह रहे हैं, “अक्सर यह बात कही जाती है कि धर्म परिवर्तन करने पर मुकदमा दर्ज होगा लेकिन किसी का धर्म इतना कमजोर क्यों हो कि उसे बचाने के लिए कानून का सहारा लेना पड़े। ऐसा धर्म है ही क्यों? ऐसा धर्म होना ही पाप है। इसका मतलब यह हुआ कि उस धर्म में कमियाँ हैं, उन कमियों को निकालो। धर्म के संचालन करने वालों में जो कमियाँ हैं उनको निकालो।“
सिरसा ने सिखों के गुरु, गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनको लालच दिया गया, डराया गया लेकिन उन्होंने अपना धर्म नहीं छोड़ा लेकिन अगर किसी का धर्म इतना कमजोर है कि उसे पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है तो यह अच्छी बात नहीं है।
सिरसा ने यह भी कहा, “मैं श्रीनगर के नेताओं, मौलानाओं और मुफ्तियों से सिख बेटियों के समर्थन में आने का अनुरोध करता हूँ। सीएए के विरोध के दौरान मुस्लिम बेटियों को सुरक्षित घर पहुँचाने में सिख सबसे आगे थे, लेकिन कोई भी मुस्लिम नेता सिख लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठाने नहीं आया है।” हालाँकि तत्कालीन भाजपा सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने सीएए का विरोध किया था, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान था जिसमें सिख भी शामिल हैं।
I request local leaders of Srinagar and Mullanas & Muftis to come in support of Sikh daughters
Sikhs were at the forefront ensuring Muslim daughters reach home safely during CAA protests but no Muslim leader has come to raise voice against forced conversions of Sikh girls @ANIpic.twitter.com/QrYUjgqEWO
ज्ञात हो कि जम्मू और कश्मीर से दो सिख लड़कियों के जबरन अपहरण और उनके इस्लामी धर्मांतरण की खबर आई। इनमें से एक लड़की के बारे में कहा जा रहा है कि उसकी शादी जबरन एक मुस्लिम से करा दी गई है और उस लड़की का अब तक पता नहीं चल सका है। यह घटना बड़गाम की बताई जा रही है।
वहीं दूसरी घटना राजधानी श्रीनगर के महजूर नगर की है। जहाँ एक लड़की अपनी एक मुस्लिम दोस्त की शादी अटेंड करने गई थी। ये लड़की नाबालिग नहीं थी। इस लड़की की वहीं शादी समारोह में आए एक अन्य मुस्लिम लड़के से जबरन शादी करा दी गई।
मनजिंदर सिंह सिरसा समेत कई सिख नेता लगातार इन मामलों को लव जिहाद बता रहे हैं और सरकार से कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा सिरसा भी मुस्लिमों से अपील कर रहे हैं कि वो आगे आएँ और उनका समर्थन करें क्योंकि कश्मीर की घाटी में भाईचारा कायम रखने के लिए ये आवश्यक है।
खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले प्रोपेगेंडा पोर्टल AltNews ने आम आदमी पार्टी के बचाव में शनिवार (26 जून 2021) को एक व्यंग्यपूर्ण वीडियो का ‘फैक्ट चैक’ किया, जिसमें समाचार पत्रों के विज्ञापनों पर ‘आप’ द्वारा सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के पाखंड को उजागर किया गया था। इससे पहले, इस पोर्टल ने कॉन्ग्रेस को लेकर भी एक फैक्ट चेक किया था।
हाल ही में, Political Kida नाम के एक व्यंग्यपूर्ण ट्विटर अकाउंट ने अपने YouTube चैनल पर एक एडिटेड वीडियो साझा किया था। वीडियो में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के विज्ञापनों पर भारी खर्च करने के पाखंड को उजागर किया गया था। बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाते हुए दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का इस ट्विटर अकाउंट ने एक व्यंग्यपूर्ण वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया गया था, जिसको लेकर यूजर्स ने दिल्ली सरकार पर कोविड-19 के कुप्रबंधन को लेकर सवाल उठाया था।
— Major Surendra Poonia (@MajorPoonia) June 24, 2021
दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनीष सिसोदिया ने विज्ञापन पर पैसा खर्च करने को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाया था और वैक्सीन की खरीद पर पैसा खर्च नहीं करने के लिए सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था, “मोदी सरकार कोविड-19 के टीकों की बजाए विज्ञापनों पर पैसे खर्च कर रही है।” जैसे ही मनीष सिसोदिया का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, कई नेटिजन्स ने आम आदमी पार्टी को घेर लिया। उन्होंने ‘आप’ नेताओं के पाखंड को लेकर कहा कि यह केंद्र नहीं बल्कि दिल्ली सरकार है, जो जनता के करोड़ों रुपए अरविंद केजरीवाल की छवि को सुधारने के लिए जनसंपर्क गतिविधियों (PR activities) में खर्च कर रही है।
जब दिल्ली कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रही थी। उस दौरान कई लोगों ने अरविंद केजरीवाल और उनकी दिल्ली सरकार पर समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर भारी खर्च करने के लिए सवाल उठाया था। उन्होंने दिल्ली सरकार को अपनी छवि सुधारने के लिए फालतू खर्च करने और करदाताओं के पैसे बर्बाद करने के लिए उन पर हमला बोला था। दरअसल, इन लोगों ने ‘आप’ सरकार से दिल्ली के लोगों के लिए विज्ञापन के पैसों को वैक्सीन की खरीद पर खर्च करने को कहा था।
दिल्ली में कोरोना के खिलाफ चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को चलाने में असफल रहे अरविंद केजरीवाल की आलोचना करते हुए नेटिजन्स ने पूरे पेज के विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे। जिन पर AAP सरकार ने अपनी झूठी उपलब्धियों और अपनी छवि सुधारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए थे।
प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के पहले पेज पर ‘आप’ के विज्ञापन।
यहाँ ध्यान दें कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना महामारी में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्चा करने की बजाए समाचार पत्रों के अलावा विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापनों और प्रचार पर जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक 150 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यानी केजरीवाल सरकार ने पिछले दो साल में लगभग 800 करोड़ से ज्यादा रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।
समाचार पत्रों के विज्ञापनों पर जनता का पैसा खर्च करने के बाद ‘आप’ ने केंद्र सरकार पर ही आरोप मढ़ दिया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनीष सिसोदिया ने केंद्र पर दिल्ली को वैक्सीन व धन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया था, जबकि वह कोरोना की बेकाबू रफ्तार को काबू करने में विफल रहे थे।
उसी के जवाब में Political Kida ने एक व्यंग्यपूर्ण वीडियो (satirical video) पब्लिश किया था। वीडियो में ‘आप’ के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के पाखंड पर सवाल उठाया गया था, जिसमें उन्होंने केंद्र पर विज्ञापनों पर कथित रूप से खर्च करने का आरोप लगाया गया था। जबकि सच तो यह है कि उनके नेता अरविंद केजरीवाल अपनी छवि सुधारने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे थे। पॉलिटिकल कीड़ा ने बाईं ओर मनीष सिसोदिया के भाषण और दाईं ओर कोरोना महामारी के दौरान पीआर एक्टिविटी यानी विज्ञापनों पर दिल्ली सरकार द्वारा खर्च किए गए करोड़ों रुपए के तथ्य को उजागर किया है।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पॉलिटिकल कीड़ा द्वारा प्रकाशित इस व्यंग्य वीडियो को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने आम आदमी पार्टी के पाखंड को सबके सामने ला दिया है, क्योंकि वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे ‘आप’ इस तरह की पीआर गतिविधियों में संलिप्त होने के बावजूद विज्ञापनों को लेकर केंद्र पर हमला करके घटिया राजनीति कर रही है। मौका पाकर ऑल्ट न्यूज ने एक मीम वीडियो का ‘फैक्ट चेक’ किया, जो जाहिर तौर पर एक मजाक है। ऑल्ट न्यूज ने तब व्यंग्यपूर्ण वीडियो को ‘एडिट’ और ‘फैक्ट चेक’ मैटेरियल पाया।
जब ऑल्ट न्यूज से जुड़े लोग तथाकथित घृणा अपराधों के बारे में फर्जी खबरें फैलाने में व्यस्त नहीं होते हैं, जिससे देश में सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं, तब वे मीम्स का ‘फैक्ट-चेक’ करते हैं। ऑल्ट न्यूज ने अपने ‘फैक्ट चेक’ में कहीं भी इसका जिक्र नहीं किया है कि ये वीडियो व्यंग्यपूर्ण है। भले ही वह ‘आप’ के पाखंड को उजागर करना चाहते हों। इससे पहले भी कई बार, आम लोगों द्वारा पोस्ट किए गए मीम्स, व्यंग्य वीडियो के ‘फैक्ट चेक’ में प्रोपेगेंडा आउटलेट ने शर्मनाक पलों का सामना किया है।
यहाँ एक ऐसा ही उदाहरण है:
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने 2017 में राहुल गाँधी का मजाक उड़ाते हुए एक व्यंग्यपूर्ण वीडियो का ‘फैक्ट-चैक’ किया था। गौरतलब है कि अभी हाल ही में प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज को टूलकिट गड़बड़ी मामले में कॉन्ग्रेस को क्लीन चिट देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। ऑल्ट न्यूज कॉन्ग्रेस को बचाने के चक्कर में खुद ही फँस गया था।
इसी बीच ऑल्ट न्यूज द्वारा सुपर लोंडे का एक और वीडियो ‘फैक्ट चेक’ करने से पहले हम यह बता दें कि यह एक व्यंग्य है। आप वीडियो को यहाँ देख सकते हैं।
अन्य संदिग्ध ‘फैक्ट चेक’ वेबसाइट भी पॉलिटिकल कीड़ा के व्यंग्य वीडियो का सच उजागर करती हैं, फेसबुक का कहना है कि इस वीडियो में छेड़छाड़ (manipulated) की गई है। सिर्फ ऑल्ट न्यूज ही नहीं, यह तक कि अन्य संदिग्ध ‘फैक्ट-चैक’ वेबसाइट जैसे बूम लाइव और वामपंथी वेबसाइट द क्विंट ने विज्ञापन खर्च पर ‘आप’ के पाखंड पर पॉलिटिकल कीड़ा द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो के बहुत ही मेहनत से जाँच की। फेसबुक द्वारा ‘इंडिपेंडेंट’ फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट के रूप में मान्यता प्राप्त दो वेबसाइटों ने व्यंग्य वीडियो को ‘doctored’ घोषित किया।
द क्विंट ने अपने कथित ‘फैक्ट चेक’ में दावा किया कि मनीष सिसोदिया का दिल्ली के सीएम को फटकारने का वीडियो एडिटेड है। खैर, वह यह बताने में विफल रहा कि व्यंग्य वीडियो एडिट किए गए हैं और एक बिना तथ्यों की जाँच की गई सामग्री को प्रकाशित किया गया है।
पॉलिटिकल किडा के व्यंग्य वीडियो पर क्विंट की रिपोर्ट।
इसी तरह एक अन्य ‘फैक्ट चेक’ पोर्टल बूम लाइव ने इसका जिक्र किए बिना कि ये वीडियो व्यंग्य का काम है। उसने व्यंग्यपूर्ण वीडियो को ‘doctored’ घोषित कर दिया।
बूम लाइव का फैक्ट-चेक
जैसा कि दो फेसबुक-प्रमाणित फैक्ट-चेकर्स ने घोषणा की थी कि व्यंग्य वीडियो में ‘छेड़छाड़’ की गई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने अब इस वीडियो को ‘भ्रामक‘ के रूप में चिह्नित किया है।
फेसबुक ने व्यंग्यपूर्ण वीडियो को ‘भ्रामक’ बताया
यह पहली बार नहीं है जब प्रोपेगेंडा आउटलेट ने मीम का ‘फैक्ट चेक’ किया है। जुलाई 2020 में, लद्दाख में एलएसी के पास गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें दावा किया गया था कि भारतीय वायु सेना के अपाचे हेलीकॉप्टरों को लद्दाख में पैंगोंग झील के ऊपर से उड़ते हुए दिखाया गया था। यह दोनों देशों के बीच संघर्ष का एक और स्थल है। इसे व्यापक रूप से शेयर किए जाने के बाद ट्विटर पर कई लोगों ने बताया कि यह यूएसए का एक पुराना वीडियो था।
मथुरा की एक अदालत में ‘श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति’ ने एक याचिका दायर की है। इस याचिका में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की गई है। समिति ने कहा है कि अगर मुस्लिम पक्ष (मस्जिद प्रबंधन समिति) शाही ईदगाह मस्जिद को ध्वस्त करता है तो नई मस्जिद बनाने के लिए इससे भी बड़ी जमीन दी जाएगी। बता दें कि शाही ईदगाह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कब्ज़ा कर के बनवाया गया था।
मथुरा स्थित सीनियर डिवीजन के सिविल जज की अदालत में ये याचिका अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के माध्यम से दायर की गई। इस याचिका में कहा गया है कि औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर के उससे निकले पत्थरों से इस मस्जिद को बनवाया। सबूत के रूप में बताया गया है कि मस्जिद के कई पत्थरों पर अब भी हिन्दू शास्त्रों के शब्द खुदे हुए देखे जा सकते हैं। मंदिर प्रशासन की तरफ से इसमें कहा गया है कि अगर मुस्लिम पक्ष मस्जिद को ध्वस्त करने को राजी होता है तो नए मस्जिद के निर्माण के लिए इससे बड़ी जगह कहीं और दी जाएगी।
इस याचिका में नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक राम मंदिर फैसले का भी जिक्र किया गया है। इसमें हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने मस्जिद के लिए अयोध्या में ही अन्यत्र जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था। पिछले साल ही शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए याचिका दायर कर दी गई थी। इस याचिका को उस सूट के हिस्सा बनाने की प्रार्थना की गई है।
इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई 5, 2021 को तय की गई है। शाही ईदगाह मस्जिद के काउंसलर और सचिव तनवीर अहमद ने कहा है कि उन्हें इस याचिका की कोई कॉपी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि प्रति मिलने के बाद इस पर बयान जारी किया जाएगा। इस याचिका में मुस्लिमों को मस्जिद की जमीन से डेढ़ गुना ज्यादा, यानी ब्रज के 84 कोस जमीन मुहैया कराने का ऑफर दिया गया है।
The court of civil judge (senior division) in Mathura has fixed July 5 as the next date of hearing
सितंबर 25, 2021 को ही ‘श्री कृष्ण विराजमान’ की तरफ से मस्जिद को हटाने के लिए याचिका दायर की जा चुकी है। बाल श्रीकृष्ण के पैरवीकार के रूप में अधिवक्ता रंजन अग्निहोत्री व अन्य ने इस याचिका को दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि मस्जिद कमिटी ने कुछ मुस्लिमों की मदद से कटरा केशव देव की जमीन पर इस्लामी ढाँचा खड़ा कर के कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, जबकि वो जमीन श्रीकृष्ण मंदिर ट्रस्ट की है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा था, ”अभी तो यह झाँकी है, काशी मथुरा बाकी है। जो लोग चिल्ला रहे हैं कि बीजेपी की लोकप्रियता घट रही है, वह भूल गए हैं कि उत्तर प्रदेश का चुनाव हनोज दूर अस्त। यानी चुनाव अभी दूर है।” उन्होंने आगे लिखा था कि चुनाव से कुछ समय पहले मस्जिद गिरवा कर दंगे किए जाएँगे, जिससे हमारी मूर्ख जनता जिनके खोपड़े में सांप्रदायिकता का गोबर भरा है, उत्तेजित हो जाएगी और भड़भड़ा कर भाजपा को वोट दे देगी।
जम्मू एयर फोर्स स्टेशन के टेक्निकल एरिया में रविवार (27 जून) की रात को ड्रोन की सहायता से किए गए दो धमाकों को जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने आतंकी हमला बताया है। इस हमले के बाद एनआईए भी जाँच में जुट गई है और मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के द्वारा UAPA के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने जम्मू हवाईअड्डे पर वायुसेना के अधिकार क्षेत्र वाले हिस्से में हुए दो बम धमाकों को आतंकी हमला बताया है और यह भी जानकारी दी है कि जम्मू पुलिस के द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के एक ऑपरेटिव के द्वारा 5-6 किग्रा का आईईडी बरामद किया गया है जिसे भीड़भाड़ वाले इलाके में विस्फोट करने के लिए लगाया जाना था।
Major terror attack has been averted with this recovery. The suspect lifted being interrogated. More suspects likely to be picked up in this foiled IED blast attempt. Police also working on Jammu airfield blasts along with other agencies. FIR registered & probe on: J&K DGP to ANI
डीजीपी सिंह ने बताया कि पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है और इस आईईडी ब्लास्ट की कोशिश में और भी संदिग्धों के पकड़े जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि एक बड़ा आतंकी हमला टल गया है और जम्मू पुलिस अन्य केन्द्रीय जाँच एजेंसियों के साथ जम्मू एयरफील्ड ब्लास्ट की घटना पर जाँच में जुटी हुई है।
रात लगभग 2 बजे हुए इन धमाकों के बाद पुलिस के अलावा अन्य एजेंसियां भी जाँच में जुट गई हैं। एनएसजी के अलावा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की टीम भी घटना स्थल पर पहुँच चुकी है जो धमाकों की आतंकी एंगल से जाँच करेगी। इसके अलावा सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि भारतीय वायु सेना की उच्च स्तरीय जाँच टीम भी जम्मू के लिए रवाना हो चुकी है।
केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट करके वाइस एयर चीफ, एयर मार्शल एचएस अरोड़ा से इस मामले में अपनी चर्चा की जानकारी दी और साथ ही यह भी बताया कि एयर मार्शल विक्रम सिंह हालात का जायजा लेने के लिए जम्मू पहुँच रहे हैं।
Raksha Mantri Shri @rajnathsingh spoke to Vice Air Chief, Air Marshal HS Arora regarding today’s incident at Air Force Station in Jammu. Air Marshal Vikram Singh is reaching Jammu to take stock of the situation.
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) June 27, 2021
रविवार तड़के हुए इन दो धमाकों में से एक धमाके में इमारत की छत को नुकसान पहुँचा वहीं दूसरा धमाका खुले क्षेत्र में हुआ। मीडिया खबरों के मुताबिक यह आशंका जताई जा रही है कि इस साजिश में पी-16 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। यह ड्रोन काफी नीचे उड़ सकता है और राडार की पहुँच से भी दूर रह सकता है। हालाँकि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ज्ञात हो कि जम्मू के एयरपोर्ट में भारतीय वायुसेना के अधिकार वाले क्षेत्र में रविवार (27 जून) को दो विस्फोट हुए। इलाके को सील कर जाँच शुरू कर दी गई है। संभावना है कि हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। शुरुआती जाँच में माना जा रहा है कि ऐसा करके पाकिस्तान ने 2016 में हुए पंजाब के पठानकोट हमले को दोहराने की कोशिश की है।
केरल के कोझीकोड जिले में पुलिस ने सीपीएम के दो नेताओं के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। आरोप लगाने वाली महिला पार्टी की ब्रांच कमिटी मेंबर है। पहला आरोपित पुलुल्ला परमबथ बाबुराज सीपीएम मुल्लियेरी ब्रांच का सचिव है, जबकि दूसरा आरोपित टीपी लिजीश पार्टी के यूथ विंग डीवाईएफआई (DYFI) का पथियाराक्कारा क्षेत्र का सचिव है। मामला सामने आने के बाद सीपीएम ने दोनों नेताओं को पार्टी ने निकाल दिया है।
आरोप लगाने वाली महिला शादीशुदा और दो बच्चों की माँ है। महिला ने अपने शिकायत में कहा है कि बाबुराज ने तीन महीने पहले जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया था। उसके बाद घटना के बारे में महिला के पति और स्थानीय लोगों को बताने की धमकी देते हुए वह लगातार ब्लैकमेल करता रहा और कई बार दुष्कर्म किया।
इसके बाद लजीश ने दोनों के रिश्तों को सार्वजनिक करने की धमकी देते हुए रेप किया। इससे परेशान होकर पीड़ित महिला ने वडकारा के पुलिस इंस्पेक्टर से संपर्क किया और घटना के बारे में शिकायत की। महिला ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा की माँग भी की है।
हाल में महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा और सीपीएम की केंद्रीय समिति की सदस्या एमसी जोसेफिन द्वारा महिलाओं के खिलाफ असंवेदनशील टिप्पणी करने के कारण राज्य की वामपंथी सरकार निशाने पर आ गई थी। भाजपा और कॉन्ग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने जोसेफिन के उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उन्होंने शुक्रवार (25 जून 2021) को त्याग पत्र दे दिया था।
जोसेफिन के वक्तव्य को लेकर विवाद छिड़ गया था, जब उन्होंने एक टीवी चैनल के लाइव डिबेट में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला शिकायतकर्ता पर बुरी तरह भड़क उठी थीं। इसके बाद जोसेफिन के साथ-साथ सीपीएम की भी आलोचना होने लगी।
दरअसल, लाइव शो में एक महिला ने अपने पति और सास पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उसी दौरान जोसेफिन ने पूछा कि क्या वह पुलिस में शिकायत की हैं। इस पर महिला ने कहा कि नहीं। इतना सुनते ही जोसेफिन भड़क गईं और बोली कि पुलिस के पास नहीं जाने का परिणाम भुगतो।
जोसेफिन का बयान उस घटना के अगले ही दिन आया था, जिसमें एक 24 वर्षीया महिला ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर फाँसी लगाकर जान दे दी थी। उस महिला का नाम विस्मया है। इस घटना को लेकर राज्य सरकार की पहले ही तीखी आलोचना हो रही थी।
ये तो पहले ही सामने आ चुका है कि बिहार के दरभंगा स्थित रेलवे जंक्शन पर हुए बम ब्लास्ट के पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का हाथ है और इसके लिए करोड़ों रुपए की फंडिंग भी की गई थी। अब इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तान की एक महिला का नाम सामने आ रहा है, जिसकी आरोपित सलीम उर्फ़ टुइया से लंबी बातचीत होती थी। सलीम और कासिम ने पूछताछ में इस बात का खुलासा किया है।
साथ ही दोनों के मोबाइल फोन से भी उक्त पाकिस्तानी युवती के नंबर मिले हैं। NIA की टीम दोनों को अपने साथ ले गई है। आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तानी युवती ने हनीट्रैप के माध्यम से इन दोनों का ISI से संपर्क कराया। सलीम की उक्त पाकिस्तानी महिला से लंबी बातचीत होती थी। उक्त महिला का नाम फातिमा है, जिससे कासिम भी बात करता था। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, दोनों के मोबाइल के कॉल रिकार्ड्स चेक करने पर पता चला कि बातचीत काफी लंबी होती थी।
इससे पहले भी पाकिस्तान की तरफ से कई हनीट्रैप के मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ सेना के जवानों या फिर किसी संवेदनशील सूचना के लिए भारतीय नागरिकों को फँसाने की कोशिश की जाती है। हो सकता है कि इसी तरीके से सलीम और कासिम को भी उन्होंने अपने गैंग में शामिल किया हो। कैराना में कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिनकी रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। कैराना के ही इक़बाल उर्फ़ काना ने पाकिस्तान से नकली नोटों का कारोबार खड़ा किया था।
बिहार के दरभंगा में हुआ था बम ब्लास्ट
एजेंसियाँ इसकी भी जाँच कर रही है कि रिश्तेदारी की आड़ में कौन-कौन लोग इस तरह के धंधे चला रहे हैं। पूछताछ में कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिन्हें संभवतः गोपनीय ही रखा जा रहा है। उधर दरभंगा में शनिवार (जून 26, 2021) को फिर से हंगामा मच गया जब एक पार्सल में कुछ इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स पड़े हुए मिले। तुरंत बम डिस्पोज़ल यूनिट को लगाया गया। बाद में पता चला कि वो किसी दुकानदार का पार्सल था और ब्लूटूथ स्पीकर के गिरने से आवाज आई थी, जो उन आइटम्स में शामिल था।
NIA की 6 सदस्यीय टीम मामले की जाँच के लिए बिहार पहुँची है। कपड़े की गाँठ में ही रह जाने के कारण इस केमिकल बम का उतना बड़ा असर नहीं हुआ था। पार्सल बुक करने वाले नंबर से जिस नंबर की बात हो रही थी, वो भी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर सक्रिय था। फ़िलहाल ये नंबर नेपाल से सटे इलाकों में सक्रिय आ रहा है। जल्द ही इस मामले में कई अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे सारे राज़ खुल सकेंगे।