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इंग्लैंड के जिस मंत्री को ‘चुम्मा’ के कारण देना पड़ा इस्तीफा, वहाँ था चायनीज CCTV: इंग्लिश राजनीति में चीन की साजिश?

यूनाइटेड किंगडम के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक (Matt Hancock) ने ‘किसिंग स्कैंडल’ में फँसने के बाद इस्तीफा दे दिया है। अपने एक करीबी महिला साथी को किस करने के बाद उन पर कोरोना दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को लिखे पत्र में कहा कि सरकार कोरोना काल में त्याग करने वाले लोगों के प्रति कर्जदार है और हमने उन्हें निराश किया है, इसीलिए इस्तीफा देना ही उचित है।

उन्होंने पहले ही इसके लिए माफ़ी माँग ली थी। पीएम जॉनसन को लिखे पत्र में उन्होंने फिर से उस माफ़ी को दोहराया है। अब खुलासा हुआ है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के ही एक अधिकारी ने उनका वीडियो फुटेज वायरल किया था और उन पर दबाव बनाने के लिए उनके विरोधियों से संपर्क किया था। मई 6, 2021 को जब उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय में बतौर सलाहकार कार्यरत गिना कोलडांगेलो (Gina Coladangelo) को किस किया तो इसे किसी ने गुप्त रूप से रिकॉर्ड कर लिया।

लगभग एक महीने तक इस फुटेज को रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति इसे लेकर उनके विरोधियों के पास घूमता रहा, ताकि ये बात मीडिया में जोर-शोर से आए। कोरोना काल में मैट हैनकॉक ही स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कर रहे थे। अब उनके इस वीडियो फुटेज और तस्वीरों के सामने आने के बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि वो किसी विदेशी शक्ति की साजिश का शिकार हुए हैं, जैसे कि चीन। क्योंकि मंत्री के दफ्तर में कैमरा लगाया ही नहीं गया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अगर मंत्री के दफ्तर में कैमरा था भी तो इसके लिए मैट हैनकॉक से अनुमति नहीं ली गई थी। ये रिकॉर्डिंग किसी छोटे से कैमरे की है, जिसे कहीं छिपा कर फिक्स कर दिया गया था। सितंबर 2017 के पहले की तस्वीरों से पता चलता है कि इस कैमरे को मंत्री के दफ्तर में सीलिंग पर लगाया गया था। जिस कर्मचारी ने इस फुटेज को रिकॉर्ड किया था, उसे 6 सप्ताह बाद वायरल किया गया।

वो इसे लेकर लॉकडाउन समर्थकों और कोरोना दिशानिर्देशों के पालन के लिए अभियान चला रहे एक्टिविस्ट्स तक पहुँचा। मंत्रालय ने इस CCTV फुटेज को सिस्टम से हटा दिया था, लेकिन उक्त कर्मचारी ने पहले ही इसे सिक्योर कर के रख लिया था। ‘द डेली मेल’ ने दावा किया है कि ये फुटेज उसके पास भी आई थी। लेकिन, ‘द सन’ ने इसे अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित कर दिया, जिसके बाद ब्रिटेन में हंगामा मच गया।

एक एक्टिविस्ट ने कई इंस्टाग्राम मैसेज मीडिया संस्थानों को भेजे, जिसमें उसने कहा था कि वो जो सूचना शेयर करने जा रहे है उस बारे में काफी सावधान रहने की जरूरत है। उक्त एक्टिविस्ट ने कहा, “मेरे पास उस व्यक्ति को लेकर एक काफी चौंकाने वाला वीडियो फुटेज है, जिसे हाल ही में एकदम निराशावादी करार दिया गया था।” अब आशंका जताई गई है कि यूके में अस्थिरता चाहने वाली किसी विदेशी ताकत ने ऐसा करवाया है।

ये एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय में लगे CCTV फुटेज को Hikvision नामक कंपनी ने बनाया है। ये कंपनी अमेरिका प्रतिबंधित है। इस पर आरोप है कि इस कंपनी के कैमरे चीन के जासूसी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। कंपनी इन दावों को नकारते हुए कहती है कि चीन को वो अपना डेटा शेयर नहीं करती है। शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ दमनकारी अभियान में चीन का साथ देने के आरोप भी इस कंपनी पर लगे हैं।

घर से भाग शादी की, हाई कोर्ट से लड़की ने सुरक्षा माँगी… अब हमलावर की गोलियों से पति की मौत, खुद भी घायल

दिल्ली के द्वारका स्थित अम्ब्राही गाँव में एक टैक्सी ड्राइवर और उनकी पत्नी को गुरुवार (24 जून 2021) की रात अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। इसमें युवक की मौत हो गई, जबकि लड़की बुरी तरह से घायल हो गई है। दोनों ने पिछले वर्ष 13 अगस्त, 2020 में ही शादी की थी। जबकि दोनों का परिवार इसके सख्त खिलाफ था। शादी करने के बाद ही इस जोड़े ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा देने की गुहार लगाई थी।

पुलिस ने बताया है कि करीब 6-7 लोग द्वारका के अम्ब्राही गाँव में दंपति के घर को तोड़ कर जबरन घुस गए थे। आरोपितों ने दोनों पर 10 राउंड फायर किया। इसमें 24 वर्षीय युवक को 4 गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। जबकि उनकी 19 वर्षीय पत्नी किरण इसमें गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। उनका दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में इलाज चल रहा है।

ऑनर किलिंग का खुलासा

जाँच के दौरान ‘ऑनर किलिंग’ का खुलासा हुआ है। जिस दिन दोनों ने शादी की थी, उसी दिन किरण की माँ ने खारखोदा पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में पुलिस ने किरण के परिवार को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दंपति के वकील अभिमन्यु कलसी ने बताया, “उन्होंने (कपल) मुझसे मिल कर बताया था कि किरण का परिवार उन्हें शादी नहीं करने दे रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।”

हाई कोर्ट ने एसएसपी को दिया था निर्देश

19 अगस्त 2020 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस राज मोहन सिंह ने सोनीपत के एसएसपी को याचिकाकर्ता के आरोपों की जाँच कर सच्चाई पता लगाने और उसे धमकी देने के मामले की जाँच का आदेश दिया था। कोर्ट ने जोड़े को सोनीपत के एसएसपी के समक्ष पेश होने को कहा था।

लड़के का परिवार शादी के लिए राजी था

एसएसपी को लिखे पत्र में किरण ने अपने परिवार से जान का खतरा होने का खुलासा किया था। उन्होंने लिखा था, “मेरा परिवार हमारे संबंध का विरोध करता है। मैंने अपनी इच्छा से घर से भागकर शादी की है। हम स्वतंत्र इच्छा से पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं।”

पत्र में यह भी बताया गया है कि विनय का परिवार शादी के लिए राजी था, लेकिन किरण की माँ और रिश्तेदार इसके खिलाफ थे। पत्र में किरण ने लिखा, “कृपया मेरे पति विनय और उनके परिवार की रक्षा करें, ताकि मेरे परिवार के सदस्य हमें नुकसान न पहुँचा सकें।”

इससे पहले राजस्थान में 20 जून 2021 को ऐसा ही मामला सामने आया था। वहाँ एक अंतरधार्मिक जोड़ा आर्य समाज मंदिर में शादी करने के बाद सुरक्षा माँगने के लिए 23 जून को अजमेर में कलेक्ट्रेट गया। लड़की के माता-पिता, जो कि मुस्लिम समुदाय से हैं, मकराना पुलिस के अधिकारियों के साथ अजमेर कलेक्ट्रेट पहुँचे और जबरदस्ती दंपति को अलग कर दिया। यही नहीं दलित समुदाय से आने वाले लड़के को गिरफ्तार भी कर लिया गया।

‘स्वामी दर्शन भारती का सिर कलम करने वाले को ₹1 करोड़’: यूपी पुलिस ने दबोचा तो मौलाना ने कहा – दिमागी संतुलन हिल गया था

उत्तर प्रदेश स्थित बरेली के एक मौलाना ने उत्तराखंड के स्वामी दर्शन भारती का सिर कलम करने पर इनाम की घोषणा की थी। यूपी पुलिस ने मौलाना हाफिज फैजान रज़ा को गिरफ्तार कर लिया है। उसने ऐलान किया था कि स्वामी दर्शन भारती का सिर कलम करने वालों को 1 करोड़ रुपए दिए जाएँगे। स्वामी दर्शन भारती ‘उत्तराखंड रक्षा अभियान’ के संस्थापक हैं। बरेली पुलिस ने मौलाना को जेल भेज दिया है।

मौलाना हाफिज फैजान रज़ा आरोप लगाया कि स्वामी दर्शन भारती ने मुस्लिमों के खिलाफ बोला है। उक्त मौलाना बरेली में एक मरदसे का प्रबंधक है। उसने कहा कि स्वामी दर्शन भारती सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए विवादित बयान देते हैं। उसने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस सम्बन्ध में ज्ञापन देने का दावा करते हुए कहा कि इन सबके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उसे इनाम का ऐलान करना पड़ा।

उक्त मौलाना मदरसे के साथ-साथ ‘सर्व समाज संगठन’ नामक एक संस्था का संचालक भी है। उसने कहा कि इस्लाम के खिलाफ जो कोई भी बोलेगा, उसे आड़े हाथों लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर जैसे ही उसका बयान वायरल हुआ, बरेली पुलिस ने इस सम्बन्ध में FIR दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी। बरेली के SSP रोहित सिंह सजवाण ने जानकारी दी है कि मौलाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

मौलाना ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो डाला था, जिन्हें उसने अपने घर पर ही बनाया था। उसे दावा किया कि स्वामी दर्शन भारती मुस्लिमों को उत्तराखंड से निकाल कर मस्जिदों पर पाबंदी लगाने की बातें करते हैं। मौलाना हाफिज फैजान रज़ा ने स्वामी दर्शन भारती के लिए आपत्तिजनक भाषा का भी प्रयोग किया। वहीं दूसरे वीडियो में उसने स्वामी को खुली बहस की चुनौती दी। इज्जत नगर थाना ने उसके खिलाफ एक्शन लिया।

उप निरीक्षक इशरत अली ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विभिन्न समुदायों में वैमनस्यता फैलाने के आरोपों और IT एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की। इसमें लिखा गया है कि हिन्दू-मुस्लिम विभाजन के उद्देश्य से दिए गए इस बयान से लोगों में आक्रोश है। शनिवार (जून 26, 2021) को उसे जेल भेजा गया। गिरफ़्तारी के बाद मौलाना ने माफ़ी माँगते हुए कहा कि उसका दिमागी संतुलन हिल गया था। उसने अपने बयान पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था।

केंद्रीय मंत्रालय तक धर्मांतरण गिरोह की पहुँच, अधिकारी देता था बच्चों की सूची: मौलवियों को लेकर सबूत जुटाने निकली ATS

जहाँ देश भर में धर्मांतरण का मुद्दा गरमाया हुआ है और दिल्ली से दो मौलवियों की गिरफ़्तारी के बाद इस पर चर्चा जोड़ पकड़ रही है, वहीं अब केंद्र सरकार के एक अधिकारी के धर्मांतरण रैकेट में शामिल होने की बात पता चली है। ATS (आतंकवाद निरोधी दस्ता) की जाँच में महिला एवं बाल विकास विभाग का एक अधिकारी पकड़ा गया है। वो अनाथ बच्चों की सूची बना कर ‘इस्लामी दावा सेंटर’ को मुहैया कराता था।

केंद्रीय मंत्रालय तक पहुँची इस्लामी धर्मांतरण गिरोह की जाँच

गिरफ्तार मौलवी उमर गौतम इस संस्थान का संचालन करता था, जो मुख्य रूप से मूक-बधिर बच्चों को निशाना बनाता था। सूची मिलने के बाद वो उन बच्चों को प्रलोभन देता था और एक साजिश के तहत उसका धर्मांतरण किया जाता था। उक्त अधिकारी के बारे में पता चला है कि वो खुद धर्म बदल कर हिन्दू से मुस्लिम बना है। ATS फ़िलहाल उससे पूछताछ कर रही है। इस तरह ISI के इशारे पर चल रही इस्लामी धर्मांतरण रैकेट की जाँच अब स्मृति ईरानी के मंत्रालय की चौखट तक पहुँच गई है।

वो ऐसे बच्चों की सूची धर्मांतरण गिरोह को मुहैया कराता था, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं। इसके बाद मौलाना मोहम्मद उमर गौतम उन बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करता था और इस्लामी सेंटर लाकर उन्हें मुस्लिम बनाता था। जिन बच्चों के परिजन राजी नहीं होते थे, उन बच्चों को रोजगार का लालच देकर नोएडा की डेफ सोसाइटी जैसी संस्थाओं में पहुँचा दिया जाता था। वहाँ उनका सिस्टेमेटिक ब्रेनवॉश होता था।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अक्सर विभिन्न योजनाओं के तहत आवेदन आते हैं और उक्त अधिकारी उन्हीं आवेदनों से बच्चों की सूची तैयार करता था। कई साल से वो अधिकारी ‘इस्लामी दावा सेंटर’ से जुड़ा हुआ है और मौलाना मोहम्मद उमर गौतम का करीबी भी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की आर्थिक मदद व संरक्षण की जिम्मेदारी ली है। इस काम में कई NGO को भी लगाया गया है।

ऐसे समय में इस तरह का मामला सामने आना सरकार के कान खड़े करने वाला है। इस क्षेत्र में कार्य कर रही कुछ NGO को हटा भी दिया गया है। बच्चों की सूची तैयार करने के लिए कुछ चुनिंदा और भरोसेमंद अधिकारियों को ही लगाया गया है। उत्तर प्रदेश का बाल आयोग भी इस मामले के सामने आने के बाद सतर्क हो गया है। किस NGO के तार किन इस्लामी जिहादियों से जुड़े हो सकते हैं, ये कहना मुश्किल है।

मेरठ: जेल में 2 लाख रुपए देकर धर्मांतरण का आरोप

उधर उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक मामला सामने आया है, जहाँ जेल में बंद ताराचंद ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी। अब उसने दाढ़ी कटवा कर कहा है कि उसने सिर्फ नमाज पढ़ी है, इस्लाम कबूल नहीं किया है। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया था कि उसने अपना धर्म बदल लिया है। मुंडाली थाना क्षेत्र अंतर्गत मऊ खास गाँव का ताराचंद 2017 से ही जेल में बंद था। जेल से छूट कर आने के बाद वो गाँव में नमाज पढ़ने लगा था

साथ ही हो गाँव के कुछ युवाओं पर इस्लाम मजहब कबूल करने के लिए दबाव भी बना रहा था। लोगों का आरोप है कि जेल में ही 2 लाख रुपए देकर उसका धर्मांतरण करा दिया गया। अब उसने कहा है कि उसने इस्लाम कबूल नहीं किया है। एक युवक ने थाने में उसके खिलाफ तहरीर भी दी है और ख़ुफ़िया विभाग इस घटना पर नजर रखे हुए है। पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया है। उसका कहना है कि जबरन धर्मांतरण वाली कहने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है।

प्रयागराज की ऋचा और ज्योतिका: उच्च-शिक्षित भी बनी शिकार

धर्मांतरण गिरोह की जाँच कर रही टीम को प्रयागराज की एक युवती के बारे में भी पता चला है, जो अशोक नगर में रहती है। उसका नाम ज्योतिका बताया जा रहा है, लेकि अब उसने इस्लाम अपना लिया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक और फिर एमटेक कर चुकी ज्योतिका दिल्ली में रह कर आगे की पढ़ाई कर रही थी, लेकिन गिरोह ने उसे भी अपना शिकार बना लिया। प्रयागराज में उसके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश प्रशासन कर रहा है।

उच्च-शिक्षित होने के बावजूद युवती किन हालत में इस्लामी धर्मांतरण गिरोह का शिकार हुई, ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है। ज्योतिका के घर वालों को इस बात का पता है या नहीं, ये भी पता लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उसे विभिन्न कार्यक्रमों में बुला कर माइंडवॉश किया गया था। इसी तरह कानपुर की एक ऋचा के धर्मांतरण का मामला सामने आया था।

ऋचा भी ज्योतिका की तरह उच्च-शिक्षित थी। दोनों प्रयागराज की हैं और दिल्ली में उनका धर्म-परिवर्तन हुआ, ऐसे में पता लगाया जा रहा है कि दोनों के बीच कॉमन लिंक क्या है। बीएससी और एमबीए कर चुकी ऋचा ने जयपुर और नोएडा में जॉब भी किया था। ऋचा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई के दौरान किसी शाहिद का नाम लेती थी। शाहिद जमातियों को पनाह देने के आरोप में जेल जा चुका है।

वो पेशे से प्रोफेसर है। उसके वकील अदील अहमद खान का कहना है कि प्रोफेसर को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शाहिद का इस छात्रा से कभी कोई सम्बन्ध रहा ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि उक्त प्रोफेसर दूसरे विभाग में पढ़ाते हैं, जिसमें ऋचा नहीं पढ़ती थी। मौलाना उमर गौतम की जड़ें भी प्रयागराज में गहरी हैं। उसने वहाँ से पढ़ाई की थी। जॉर्ज टाउन की एक युवती ने भी झाँसा देकर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया है।

गिरफ्तार मौलानाओं को लेकर सबूत खँगालने निकली ATS

उधर उत्तर प्रदेश ATS दोनों मौलानाओं को लेकर राज्य के 4 जिलों में गई, जहाँ सबूत जुटाने का काम चल रहा है। मुफ़्ती काजी जहाँगीर कासमी और मौलाना उमर गौतम को साथ लेकर ATS सबूत खँगाल रही है। जिन 1000 लोगों का उसने धर्मांतरण कराया है, उसके बारे में भी पता लगाया जा रहा है। कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनकी पुष्टि की जा रही है। 4 जिलों में इन आरोपितों को कई बार ले जाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों पिछले समय में गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर और मेरठ में रहे हैं। गाजियाबाद में वो कई दिनों तक रहे थे, जहाँ कई लोगों का धर्मांतरण कराया गया था। असम की एक सदिग्ध संस्था से भी दोनों के सम्बन्ध पता चले हैं। इसका विवरण असम पुलिस से साझा किया जा रहा है। ‘इस्लामी दावा सेंटर’ के नाम पर भी अधिकतर फंडिंग रिसीव की जाती थी, जिसके स्रोतों का पता लगाया जा रहा है।

मुरुदेश्वर मंदिर: विश्व का सबसे ऊँचा गोपुरम, 123 फुट ऊँची भगवान शिव की प्रतिमा… टीपू सुल्तान के अब्बा ने जिसे लूटा था

ऑपइंडिया की मंदिरों की श्रृंखला में हम आज आपको रामायण काल से स्थापित एक ऐसे दिव्य स्थान ले चलते हैं, जो भगवान शिव को समर्पित है और तीन ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है। हिंदुओं के इस दिव्य स्थान की विशेषता है कि यहाँ स्थापित हैं भगवान शिव का ‘आत्मलिंग’ और मंदिर परिसर में ही स्थित है लगभग 250 फुट का गोपुरम, जो विश्व का सबसे ऊँचा गोपुरम है। इसके अलावा यहाँ भगवान शिव की एक विशालकाय 123 फुट ऊँची प्रतिमा भी बनाई गई है। तो आइए आपको बताते हैं उस प्राचीन मंदिर के बारे में, जिसे हैदर अली ने भारी नुकसान पहुँचाया था लेकिन बाद में एक स्थानीय व्यापारी ने मंदिर को प्रदान किया वर्तमान भव्य स्वरूप।

रामायण काल से जुड़ा हुआ है इतिहास

शिव पुराण में भगवान शिव के आत्मलिंग के बारे में बताया गया है। रावण ने अमरता का वरदान प्राप्त करने और महा-शक्तिशाली बनने के लिए भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया और उनसे आत्मलिंग प्राप्त किया। इसके बाद जब रावण ने उस आत्मलिंग को लंका ले जाने का प्रयास किया तब भगवान शिव ने यह शर्त रखी कि जहाँ भी यह आत्मलिंग जमीन पर रख दिया जाएगा, यह वहीं स्थापित हो जाएगा और उसके बाद इसे कोई उठा नहीं पाएगा। दैवीय कारणों से हुआ भी ऐसा ही। भगवान शिव को मुरुदेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए यह मंदिर जहाँ स्थित है, उस कस्बे का नाम मुरुदेश्वर और मंदिर का नाम मुरुदेश्वर मंदिर पड़ गया।

मुरुदेश्वर मंदिर कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तहसील में स्थित है। यह मंदिर कंडुका पहाड़ी पर स्थित है, जो तीन ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है। इसके अलावा यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की पहाड़ियों की गोद में स्थित है। यही कारण है कि यहाँ आध्यात्मिक दिव्यता के साथ प्राकृतिक सौन्दर्य भी देखने को मिलता है।

मंदिर की संरचना

मुरुदेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है, यहाँ स्थित भगवान शिव की विशालकाय प्रतिमा और मंदिर परिसर में स्थित ‘राज गोपुरा’ जो कि विश्व का सबसे ऊँचा गोपुरा है। मंदिर के अंदर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के प्रारंभ में ही क्रॉन्क्रीट के दो जीवंत हाथी बनाए गए हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव का आत्मलिंग स्थापित है।  

मुरुदेश्वर मंदिर का राज गोपुरा

इसके अलावा भगवान शिव की 123 फुट ऊँची विशालकाय प्रतिमा भी यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। भगवान शिव की इस प्रतिमा के चार हाथ हैं, जिन्हें सोने से सजाया गया है। किसी भी द्रविड़ वास्तुकला के मंदिर के समान ही इस मंदिर में भी गोपुरा का निर्माण कराया गया है, जो 20 मंजिला इमारत के बराबर है और जिसकी ऊँचाई लगभग 250 फुट है। 

मुरुदेश्वर मंदिर में स्थित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा

इस्लामी आक्रमण में हुए नुकसान के बाद व्यापारी ने दिया वर्तमान स्वरूप

भारत के कई अन्य मंदिरों की तरह यह मंदिर भी इस्लामी कट्टरपंथ की भेंट चढ़ा। मुरुदेश्वर मंदिर का प्राचीन स्वरूप इस्लामी शासक हैदर अली के द्वारा नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद इस मंदिर का वर्तमान दृश्य स्वरूप एक स्थानीय व्यापारी द्वारा बनवाया गया।

मंदिर की विशालता और भव्यता को देखकर ऐसा प्रतीत हो सकता है कि इस मंदिर का निर्माण सरकार द्वारा कराया गया है लेकिन ऐसा है नहीं। मंदिर में स्थित विशाल गोपुरा का जीर्णोद्धार और भगवान शिव की विशालकाय मूर्ति का निर्माण स्थानीय व्यापारी और समाजसेवी आरएन शेट्टी के द्वारा कराया गया। मूर्ति के निर्माण में ही लगभग 2 साल का समय लगा और लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत आई। इस मूर्ति के शिल्पकार शिवमोग्गा के काशीनाथ हैं। भगवान शिव की मूर्ति को इस प्रकार बनाया गया है कि इस पर सीधे ही सूर्य की किरणें गिरती रहें और यह मूर्ति लगातार चमकती रहे।

कैसे पहुँचें?

मुरुदेश्वर पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाईअड्डा मैंगलोर है, जो मंदिर से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा यह स्थान गोवा के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से लगभग 200 किमी की दूरी पर स्थित है। मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन, मैंगलोर और मुंबई से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से मैंगलोर ट्रेन की सहायता से पहुँच सकते हैं। इसके अलावा मुरुदेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग 17 पर स्थित है जहाँ कोच्चि, मुंबई और मैंगलोर से बस एवं टैक्सी आदि माध्यमों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। कर्नाटक के प्रमुख तीर्थ स्थल गोकर्ण की मुरुदेश्वर से दूरी लगभग 55 किमी है। गोकर्ण भी ट्रेन और सड़क मार्ग से देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

‘भारत विरोधी’ अरुंधति रॉय की किताब को सरकारी ट्विटर अकाउंट ने किया प्रमोट, भड़के यूजर्स ने कराया पोस्ट डिलीट

भारत सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट को शनिवार (26 जून 2021) को भारत विरोधी प्रोपेगेंडा मुहिम का हिस्सा व घोर वामपंथी अरुंधति रॉय द्वारा लिखी गई किताबों में से एक का प्रचार करते हुए पाया गया, जो कि लोगों की नजर में एक गलत कदम था। @MyGovIndia ट्विटर अकाउंट ने अरुंधति रॉय द्वारा लिखी गई किताब ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ की एक तस्वीर पोस्ट कर 20 वर्ड्स बुक समरी चैलेंज के भाग को पोस्ट किया। किताब की तस्वीर के साथ, ट्वीट में एडमंड विल्सन (Edmund Wilson) का एक कोट भी शामिल था, जिसमें कहा गया था, “कोई भी दो व्यक्ति कभी एक किताब नहीं पढ़ते हैं।”

साभार: ट्विटर

विवादास्पद लेखक को बढ़ावा वाली पोस्ट को हटाया गया

अरुंधति रॉय का फेक न्यूज फैलाने का पुराना इतिहास रहा है। ऐसे में भारत विरोधी प्रचारक द्वारा लिखी गई किताब का सरकार द्वारा समर्थन करना सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आया। उन्होंने इसको लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की और अपना आक्रोश व्यक्त किया।

ऐसा प्रतीत होता है कि ऑनलाइन यूजर्स द्वारा आक्रोश व्यक्त करने के बाद इस पोस्ट को ट्विटर अकाउंट @MyGovIndia ने तुरंत हटा दिया, जहाँ एक विवादित लेखिका की किताब का प्रचार किया गया था।

अरुंधति रॉय भारतीय राजनीति की एक विवादास्पद शख्स हैं। रॉय पर “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की आड़ में भारत विरोधी नैरेटिव गढ़ने और उसे आगे बढ़ाते रहने का आरोप वर्षों से लगता रहा है। अभी हाल ही में रॉय ने ‘द गार्जियन’ में एक लेख लिखा था, जिसमें मोदी सरकार के खिलाफ अपने प्रोपगेंडा को फैलाने के लिए महामारी का सहारा लिया था।

कहते हैं धूर्तता अरुंधति रॉय का दूसरा स्वभाव है और झूठ बोलना उनका पसंदीदा शौक। ‘द गार्जियन’ के उनके लेख में उनका यह रूप उस समय दिखा जब भारत COVID-19 की एक भयंकर दूसरी लहर से जूझ रहा था। रॉय ने अपने लेख में न केवल पीएम केयर्स फंड के बारे में झूठ बोला, बल्कि भारत के टीकाकरण अभियान और SII और भारत बायोटेक द्वारा विकसित COVID-19 टीकों के बारे में भी गलत सूचनाएँ फैलाईं। इतने से ही उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने ब्रिटिश डेली में लिखे एक लेख में पश्चिम बंगाल चुनावों के बारे में प्रोपगेंडा फैलाया।

करियर प्रोपगेंडिस्ट अरुंधति रॉय ने भारत के बारे में झूठ फैलाना जारी रखते हुए पिछले साल की शुरुआत में आरोप लगाया कि मोदी सरकार मुस्लिमों का नरसंहार करने के लिए कोरोनावायरस के प्रकोप का उपयोग कर रही है।

रॉय ने सिर्फ सरकार को नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों को भी बदनाम किया है। कश्मीर में आतंकवाद निरोधी अभियानों को उन्होंने लगातार “सरकार प्रायोजित” आतंकवाद के रूप में संदर्भित किया। साल 2002 के अपने कुख्यात भाषण में रॉय ने कहा था, “वर्तमान भारत सरकार की फासीवादी नीतियों के फलस्वरुप, जिसने कश्मीर घाटी में सरकारी आतंकवाद (आतंकवाद से लड़ने के नाम पर) के अपराध के अलावा गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ हाल ही में राज्य की निगरानी में हुए जनसंहार से आँखे मूँद ली हैं, हम भारत के सैकड़ों ही नहीं बल्कि लाखों लोग शर्मिंदा और नाराज हैं। यह सोचना बेतुका होगा कि जो लोग भारत सरकार की आलोचना करते हैं वे “भारत विरोधी” हैं –

खस्ताहाल पाकिस्तान को 3800 करोड़ डॉलर का फटका! FATF ने बढ़ाई इमरान खान की मुसीबत

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को एफएटीएफ यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ओर से बड़ा झटका लगा है। मीडिया रिपार्ट्स के मुताबिक, आर्थिक संकट की मार झेल रहे पाकिस्‍तान की हालत भविष्य में और भी खराब हो सकती है। दरअसल, इस्लामाबाद स्थित स्वतंत्र थिंक-टैंक ‘तबादलाबी‘ द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में कहा गया है, ”एफएटीएफ द्वारा साल 2008 से देश को ग्रे लिस्ट में बनाए रखने के कारण पाकिस्तान को 38 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है।” यह रिसर्च पेपर नाफी सरदार ने लिखा है। इसका शीर्षक ‘पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर एफएटीएफ की ग्रे-लिस्टिंग का प्रभाव’ है।

शोध पत्र में आगे कहा गया है कि एफएटीएफ (FATF) की ग्रे-लिस्टिंग में पाकिस्तान को 2008 से रखा गया है। अनुमान है कि 2019 तक इससे लगभग 3,800 करोड़ डॉलर का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान हुआ है। अनुमान के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद में कुल 450 करोड़ डॉलर और 360 करोड़ डॉलर का नुकसान के लिए निर्यात और आवक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आंशिक रूप से जिम्मेदार हैं। ये नुकसान एफएटीएफ ग्रे-लिस्टिंग के नकारात्मक परिणामों की ओर इशारा करते हैं।

रिपोर्ट में पाकिस्तान को भविष्य में होने वाले इस नुकसान से बचाने के लिए जल्द से जल्द FATF की सभी शर्तों को पूरा करने की अपील की गई है। पाकिस्तान ने अब तक FATF की 27 में से 26 मानकों को पूरा किया है। अब उसे मनी लॉन्ड्रिंग और टेटरिज्म की फिनांसिंग से संबंधित FATF की 7 नई शर्तों को पूरा करना है।

वहीं, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। एफएटीएफ ने कहा, ”पाकिस्तान में रह रहे इन आतंकवादियों में जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद और उसका ऑपरेशनल कमांडर जकीउर रहमान लखवी शामिल हैं।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से अपनी महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए काम करना जारी रखना चाहिए।

बता दें कि एफएटीएफ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने वाले संगठनों पर नजर रखने वाली संस्था है। इसका गठन साल 1989 में किया गया था, जिसमें 37 देश और दो क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं। एफएटीएफ द्वारा कुछ मानक बनाए गए हैं, जिससे अपराध और आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने से रोका जाता है। एफएटीएफ के मानकों का पालन नहीं करने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से सहायता मिलने में मुश्किल होती है।

कोरोना की वजह से 8 टॉप माओवादियों की मौत: 15-20 गंभीर रूप से संक्रमित, कई ने डर से छोड़ा काडर

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में 8 माओवादियों के मरने की खबर सामने आई है। वहीं, संक्रमण फैलने के डर से बहुत से माओवादियों ने काडर का साथ छोड़ दिया है। भारत में माओवादी बेल्ट, जिसे रेड कॉरिडोर भी कहा जाता है। इन दिनों कोरोना संक्रमण के डर से उनकी नींद उड़ गई है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना की दूसरी लहर में कई माओवादी संक्रमित पाए गए हैं, जबकि कई टॉप माओवादियों की संक्रमण से मौत हो गई ​है।

आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्य माओवादियों का गढ़ है। घने जंगलों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले माओवादी हमेशा से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की चपेट में आकर अपनी जान गँवाते रहे हैं। स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच और एंटी नक्सलाइट इंटेलिजेंस विंग के हवाले से टीओआई (TOI) ने बताया कि चीन के वुहान से फैली कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने माओवादियों के शीर्ष नेताओं और काडर को बुरी तरह प्रभावित किया है। पुलिस अधीक्षक (Bhadradri Kothagudem district) सुनील दत्त ने बताया, ”दूसरी लहर में कोविड-19 से कम से कम 8 माओवादी नेता और उनके कैडर के कई साथी मारे गए हैं।”

इसके साथ ही पुलिस का कहना है कि 15-20 दूसरे माओवादी कोरोना के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं। वहीं, तमाम दूसरे माओवादी वायरस के खतरे को देखते हुए काडर से अलग हो गए हैं। एंटी नक्सलाइट इंटेलिजेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हथियारबंद संगठन के संदेशवाहकों ने जंगलों में माओवादियों से मुलाकात की। ऐसा लगता है कि इसी वजह से वायरस ने उन्हें भी संक्रमित कर दिया।”

मेडिकल सुविधाओं तक पहुँच का अभाव, बेकार हो चुके खाने का इस्तेमाल और सर्पदंश (साँप काटने) से भी माओवादी जंगल में चौतरफा मार झेल रहे हैं। इसकी वजह से भी माओवादी कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।

कोरोना वायरस के कारण माओवादियों की मौत

बीते दिनों शीर्ष नक्सली कमांडर व तेलंगाना राज्य समिति के सचिव यापा नारायण उर्फ हरिभूषण और इंद्रावती क्षेत्र समिति के सदस्य सिद्दाबोइना सरक्का उर्फ भरतक्का की कोरोना की वजह से मौत हो गई थी। उनकी मौत की पुष्टि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने गुरुवार (24 जून) को की। 21 जून को हरिभूषण की मृत्यु हो गई और अगले दिन भरतक्का ने घातक बीमारी से दम तोड़ दिया। उनका अंतिम संस्कार 22 जून को किया गया था।

कोलकाता में नकली वैक्सीन कैंप लगाने वाले फर्जी IAS केस में सीबीआई जाँच की माँग, शुभेन्दु अधिकारी ने बताया- TMC की साजिश

कोलकाता के कसबा में कोरोना वैक्सीन का कैंप लगाने वाले फर्जी आईएएस अधिकारी देबांजन देब के मामले में सीबीआई जाँच की माँग की गई है। वैक्सीन घोटाले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील संदीपन दास ने एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें राज्य में वैक्सीन घोटाले को लेकर सीबीआई द्वारा स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में शनिवार (26 जून 2021) को फर्जी आईएएस अधिकारी के तीन और सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”देब के दो सहयोगी कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के नाम से आरोपित द्वारा खोले गए बैंक खाते के हस्ताक्षरकर्ता थे। देब के साथ काम करने वाला तीसरा आरोपित शिविर में काफी सक्रियता से हिस्सा ले रहा था, जहाँ कई लोगों को नकली टीके की खुराक दी गई थी।”

अधिकारी ने आगे बताया, ”इनमें से एक सॉल्ट लेक का निवासी है, जबकि दूसरा बारासात का रहने वाला है। दोनों को गिरफ्तारी से पहले पूछताछ के लिए लाया गया था।” उन्होंने बताया कि तीसरा व्यक्ति तालतला का रहने वाला है। शिविर के आयोजन में बेहद सक्रियता से मदद करते पाए जाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस बीच कसबा पुलिस थाना में देब के खिलाफ तीन और मामले दर्ज किए हैं।

दरअसल, खुद को आईएएस अधिकारी बताकर कसबा इलाके में कोविड-19 टीकाकरण शिविर आयोजित करने के आरोप में देब को बुधवार (23 जून 2021) को गिरफ्तार किया गया था। इस शिविर में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने भी टीके की खुराक ली थी, जो अब पेट दर्द की शिकायत कर रही हैं। बताया जा रहा है कि देबांजन की ओर से आयोजित कोरोना वैक्सीन कैंप में टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती सहित अन्य लोगों को कोविशील्ड की जगह Amikacin Injection दी गई थी। फर्जी टीकाकरण मामले की जाँच के लिए कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार (25 जून 2021) को एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया।

मालूम हो कि देबांजन देब द्वारा खुद को आईएएस अधिकारी बताकर यह फर्जी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था। इस मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। बीजेपी ने भी इसे केंद्र के खिलाफ बड़ी साजिश बताते हुए इसकी सीबीआई जाँच कराने की माँग की है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि यह TMC की एक साजिश है। उन्होंने कहा, ”पश्चिम बंगाल सरकार और सत्ताधारी पार्टी ने केंद्र को फँसाने के लिए एक बड़ी साजिश रची है। वे विवादित पहचान वाले लोगों को शिविर आयोजित करने में मदद कर रहे हैं, जहाँ नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए नकली टीके दिए गए थे। यदि किसी टीके का लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ता है तो टीएमसी नकली टीके उपलब्ध कराने के लिए केंद्र को दोषी ठहराएगी। यह एक बड़ी साजिश है। सीबीआई जैसी बड़ी एजेंसी ही सच्‍चाई सामने ला सकती है।”

बता दें कि देबांजन देब ने स्वीकार किया है कि उसने फर्जी पहचान बनाई। वह केएमसी ठेकेदारों से कहता था कि वह टेंडरों के लिए सब कॉन्ट्रैक्ट लेगा। उसने दो लोगों से ठगी भी की है। एक से 10 लाख रुपए और दूसरे से 90 लाख रुपए ठगे। वहीं, देबांजन के ट्वीटर अकाउंट पर टीएमसी के कई मंत्रियों और नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें हैं। इनमें मंत्री फिरहाद हकीम, मंत्री सुब्रत मुखर्जी से लेकर सांसद डॉ शांतनु सेन आदि शामिल हैं। हालाँकि, तृणमूल कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने मामले में किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है।

फर्जी आईएएस अधिकारी पर कई मामले दर्ज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक निजी कंपनी ने 172 कर्मचारियों के टीकाकरण के लिए देब को करीब 1.2 लाख रुपए देने का दावा करते हुए कसबा पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, दूसरी शिकायत एक ठेकेदार ने दर्ज कराई है, जिसने एक स्टेडियम के निर्माण को लेकर निविदा के लिए उसे 90 लाख रुपए देने का दावा किया है। इसके अलावा तीसरी शिकायत एक दवा कंपनी ने दर्ज कराई है, जिसने निविदा के लिए देब को 4 लाख रुपए भुगतान करने का दावा किया है।

कश्मीर में AK-56 सहित लश्कर आतंकी साहिल रमजान ने किया सरेंडर, वीडियो में देखें कैसे मेजर ने बनाया संभव

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के बारबर शाह इलाके में आज (26 जून, 2021) आतंकियों ने ग्रेनेड हमला किया जिसमें तीन राहगीरों के घायल होने की खबर है वहीं घेराबंदी करके आतंकियों की तलाश जारी है। इसी बीच एक सेना की एक खबर चर्चा में है जिसमें दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ जिले में शुक्रवार (25 जून 2021) को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया, जबकि माँ-बाप का वास्ता देकर दूसरे आतंकी को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया।

सरेंडर करने वाले दूसरे आतंकी का नाम साहिल रमजान डार है। वह कश्मीर का ही रहने वाला है। सरेंडर के लिए अपील करते सेना के मेजर का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह साहिल को हथियार डालने की अपील कर रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि सेना के मेजर के कहने पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी ने मुठभेड़ के दौरान एके-56 राइफल के साथ सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वाले आतंकवादी की पहचान शोपियां जिला निवासी साहिल रमजान डार के तौर पर हुई है।

सेना के चिनार कॉर्प्स ने अपने ट्वविटर हैंडल @ChinarcorpsIA पर इस ऑपरेशन का वीडियो डाला है। वीडियो में दिख रहे सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स की चौधरीगुंड COB के मेजर शुक्ला ने आतंकी को सरेंडर करने के कहा। मेजर ने उसे परिवार और दोस्तों का वास्ता दिया, जिसके बाद साहिल रमजान डार एक AK-56 राइफल सहित सरेंडर कर दिया। वीडियो में दिख रहा है कि सेना के कुछ जवान एक इमारत में मौजूद हैं। मेजर शुक्ला खिड़की के पास आकर माइक के जरिए आतंकी से सरेंडर करने के लिए कहते हैं और उसे भरोसा दिलाते हैं कि उसे कुछ नहीं होगा।

मेजर ने माइक से अपील करते हुए आतंकवादी से कहा, “साहिल तुम्हें मेरी आवाज आ रही है? जब आवाज आ रही है तो मेरी बात सुनो। मैंने तुमसे पहले भी रिक्वेस्ट किया.. तुम्हें आखिरी वॉर्निंग दे रहा हूँ, रिक्वेस्ट कर रहा हूँ, इसे जो भी समझना है समझना.. अपना हथियार डाल दे, हाथ ऊपर कर ले और सरेंडर कर दे। मैं इस बात की गारंटी देता हूँ कि तुम्हें कुछ भी नहीं होगा, अगर तुम हथियार डालकर और हाथ ऊपर कर बाहर आते हो तो। अपने घरवालों को याद करो, अपने दोस्तों को याद करो और अपने माँ-बाप को याद करो। जब सब याद हैं बच्चे तो मेरी रिक्वेस्ट है कि हथियार डालकर, हाथ ऊपर कर बाहर निकल आ। मैं सरेंडर लेने के लिए तैयार हूँ। मैं चाहता हूँ कि तू सरेंडर करे। तेरे घरवालों को जानता हूँ इसलिए चाहता हूँ कि तू सरेंडर करे। उनके ऊपर जो गुजरेगी वो तू नहीं समझता, इसलिए बोल रहा हूँ कि हथियार डाल के सरेंडर कर दे।”

वहीं, सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। सुरक्षाबलों को शोपियां जिले के हंजीपोरा इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान आतंकी सुरक्षाबलों पर फायरिंग करने लगे। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से हुई इस गोलीबारी में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया।

वहीं, शनिवार (26 जून 2021) को आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया। श्रीनगर के बारबार शाह में CRPF पार्टी पर ग्रेनेड फेंका गया। इस हमले में तीन नागरिक घायल हो गए हैं।