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कश्मीर में AK-56 सहित लश्कर आतंकी साहिल रमजान ने किया सरेंडर, वीडियो में देखें कैसे मेजर ने बनाया संभव

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के बारबर शाह इलाके में आज (26 जून, 2021) आतंकियों ने ग्रेनेड हमला किया जिसमें तीन राहगीरों के घायल होने की खबर है वहीं घेराबंदी करके आतंकियों की तलाश जारी है। इसी बीच एक सेना की एक खबर चर्चा में है जिसमें दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ जिले में शुक्रवार (25 जून 2021) को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया, जबकि माँ-बाप का वास्ता देकर दूसरे आतंकी को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया।

सरेंडर करने वाले दूसरे आतंकी का नाम साहिल रमजान डार है। वह कश्मीर का ही रहने वाला है। सरेंडर के लिए अपील करते सेना के मेजर का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह साहिल को हथियार डालने की अपील कर रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि सेना के मेजर के कहने पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी ने मुठभेड़ के दौरान एके-56 राइफल के साथ सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वाले आतंकवादी की पहचान शोपियां जिला निवासी साहिल रमजान डार के तौर पर हुई है।

सेना के चिनार कॉर्प्स ने अपने ट्वविटर हैंडल @ChinarcorpsIA पर इस ऑपरेशन का वीडियो डाला है। वीडियो में दिख रहे सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स की चौधरीगुंड COB के मेजर शुक्ला ने आतंकी को सरेंडर करने के कहा। मेजर ने उसे परिवार और दोस्तों का वास्ता दिया, जिसके बाद साहिल रमजान डार एक AK-56 राइफल सहित सरेंडर कर दिया। वीडियो में दिख रहा है कि सेना के कुछ जवान एक इमारत में मौजूद हैं। मेजर शुक्ला खिड़की के पास आकर माइक के जरिए आतंकी से सरेंडर करने के लिए कहते हैं और उसे भरोसा दिलाते हैं कि उसे कुछ नहीं होगा।

मेजर ने माइक से अपील करते हुए आतंकवादी से कहा, “साहिल तुम्हें मेरी आवाज आ रही है? जब आवाज आ रही है तो मेरी बात सुनो। मैंने तुमसे पहले भी रिक्वेस्ट किया.. तुम्हें आखिरी वॉर्निंग दे रहा हूँ, रिक्वेस्ट कर रहा हूँ, इसे जो भी समझना है समझना.. अपना हथियार डाल दे, हाथ ऊपर कर ले और सरेंडर कर दे। मैं इस बात की गारंटी देता हूँ कि तुम्हें कुछ भी नहीं होगा, अगर तुम हथियार डालकर और हाथ ऊपर कर बाहर आते हो तो। अपने घरवालों को याद करो, अपने दोस्तों को याद करो और अपने माँ-बाप को याद करो। जब सब याद हैं बच्चे तो मेरी रिक्वेस्ट है कि हथियार डालकर, हाथ ऊपर कर बाहर निकल आ। मैं सरेंडर लेने के लिए तैयार हूँ। मैं चाहता हूँ कि तू सरेंडर करे। तेरे घरवालों को जानता हूँ इसलिए चाहता हूँ कि तू सरेंडर करे। उनके ऊपर जो गुजरेगी वो तू नहीं समझता, इसलिए बोल रहा हूँ कि हथियार डाल के सरेंडर कर दे।”

वहीं, सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। सुरक्षाबलों को शोपियां जिले के हंजीपोरा इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान आतंकी सुरक्षाबलों पर फायरिंग करने लगे। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से हुई इस गोलीबारी में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया।

वहीं, शनिवार (26 जून 2021) को आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया। श्रीनगर के बारबार शाह में CRPF पार्टी पर ग्रेनेड फेंका गया। इस हमले में तीन नागरिक घायल हो गए हैं।

‘मोदी सत्यानाशी, जहाँ जाते हैं सत्यानाश करते हैं’: कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिं​ह के फिर बिगड़े बोल, PM को जी भर कोसा

मध्य प्रदेश के गुना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिं​ह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। दिग्विजय सिं​ह ने शनिवार (26 जून 202)1 को केंद्र सरकार को महँगाई और बेरोजगारी पर घेरते हुए कहा, ”मोदी सरकार के राज में ईंधन के दाम 100 रुपए के ऊपर जा चुके हैं। रसोई गैस की कीमत का भी कोई हिसाब नहीं है।”

राज्यसभा सांसद ने कहा, ”मैंने तो पहले ही कहा था कि नरेंद्र मोदी सत्यानाशी है और इनकी कुंडली में है कि यह जहाँ जाएँगे वहाँ सत्यानाश करेंगे। फिर भी मोदी के अंधभक्त उनका नाम जपते रहते हैं और हर-हर मोदी घर-घर मोदी में लगे रहते हैं।”

दिग्विजय ने आगे कहा, ”देश के हालात ऐसे हो गए हैं और मोदी-मोदी करिए। मोदी इस तरह देश का सत्यानाश भी कर देंगे।” वहीं, राज्य में कोरोना वायरस से हो रही मौतों के लिए भी ​कॉन्ग्रेस नेता ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा। दिग्विजय ने कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों में कोरोना वायरस से हो रही मौतों को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है।

बता दें कि बीते दिनों दिग्विजय सिंह का क्लब हाउस चैट का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस ऑडियो में दिग्विजय ने पाकिस्तानी पत्रकार से मोदी सरकार के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फैसले पर विचार करने का वादा किया था। अनुच्छेद-370, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्रता के बाद भी शेष भारत से अलग रखा गया, जिसके दम पर कॉन्ग्रेस या अन्य सरकारों ने वहाँ तनावपूर्ण माहौल पैदा किया। घाटी में हिंदुओं का नरसंहार हुआ।

दिग्विजय ने कहा था कि वे कश्मीरी पंडित ही थे, जिन्हें नौकरियों में आरक्षण मिला। यानी इससे उनका मतलब था कि राज्य के मुसलमानों द्वारा घाटी के हिंदुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया गया था? जबकि सच्चाई यह है कि मुस्लिम कट्टरपंथी और जिहादियों ने हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या और कश्मीर में नरसंहार कर उन्हें भगा दिया ​था।

TMC सांसद मिमी चक्रवर्ती की फर्जी वैक्सिनेशन कैंप से टीका लगवाने के बाद बिगड़ी तबीयत, पेट में उठा तेज दर्द

जादवपुर लोकसभा सीट से टीएमसी सांसद और बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती की शनिवार को तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके कारण डॉक्टर को बुलाना पड़ा। पिछले दिनों उन्होंने कोलकाता में एक फर्जी टीकाकरण शिविर में वैक्सीन लगवाया था। जानकारी के मुताबिक, मिमी चक्रवर्ती को पेट में तेज दर्द और खूब पसीना बहने के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ी उन्हें कई तरह की परेशानियाँ आ रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जुझ रही मिमी को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई, लेकिन वे अपना इलाज घर पर ही करा रही हैं। दरअसल, चार दिन पहले शहर के कस्बा इलाके में आयोजित एक शिविर में टीएमसी सांसद ने वैक्सीन लगवाई थी।

आरोपी ने गेस्ट के रूप में बुलाया था सांसद को

सांसद मिमी ने बताया, “मेरे पास एक शख्स ने अपने आपको आईएएस ऑफिसर बताया और कहा कि वे ट्रांसजेंडर्स और दिव्यांगों के लिए स्पेशल वैक्सीनेशन ड्राइव चला रहे हैं। इसके साथ ही उस शख्स ने मुझसे वैक्सीनेशन कैंप में आने का अनुरोध किया। मैंने लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए कोविशील्ड की वैक्सीन भी लगवाई, लेकिन कभी भी कोविन से कंफर्मेशन का मेसेज नहीं आया। इसके बाद कोलकाता पुलिस से मैंने शिकायत की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।” मिमी चक्रवर्ती का कहना था कि आरोपित शख्स फर्जी स्टिकर और नीली बत्ती भी अपनी गाड़ी पर इस्तेमाल कर रहा था।

250 लोग टीका फर्जीवाड़े का शिकार

इस बीच पुलिस का कहना है कि कस्बा सेंटर पर पिछले छह दिनों के दौरान कम से कम 250 लोगों को कथित वैक्सीन लगाई गई है। जाँच में यह भी पता चला है कि आरोपित देबांजन देब ने इसी तरह से नॉर्थ और सेंट्रल कोलकाता में फर्जी कैंप आयोजित किए थे। इनमें से एक नॉर्थ कोलकाता के सिटी कॉलेज और एक कैंप सोनारपुर में 3 जून को लगाया गया था। पूछताछ में देब ने पुलिस को बताया है कि उसने बगड़ी मार्केट और स्वास्थ्य भवन के बाहर से वैक्सीन ली थी। चूँकि कोविड वैक्सीन की खुले बाजार में बिक्री नहीं होती है लिहाजा यहाँ टीका लगवाने वाले लोगों को इस संबंध में जानकारी दी गई है।

जाँच के लिए भेजी जाएगी वैक्सीन वायल

इस बीच कोलकाता पुलिस का कहना है, “हमें ऐसी कोई वायल नहीं मिली है, जिस पर एक्सपायरी डेट हो। जब्त की गई वैक्सीन वायल को जाँच के लिए भेजा जाएगा, जिससे पता चल सके कि वह असली है या नकली। आरोपित से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी।”

जाँच के लिए सरकार ने बनाई एक्सपर्ट कमिटी

पश्चिम बंगाल की सरकार ने कोलकाता में हुए फर्जी वैक्सीनेशन मामले को लेकर 4 सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी जल्द ही फर्जी वैक्सीन के असर की जाँच कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। कमेटी यह भी बताएगी कि जिन लोगों को यह फर्जी वैक्सीन लगाई गई, उनके लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए। इस रिपोर्ट के बाद पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पीड़ित लोगों का मेडिकल परीक्षण कराएगी। 

आरोपित खुद को बताता था आईएएस अधिकारी

पुलिस ने बताया कि तब देवांजन देव की तहकीकात में जानकारी मिली कि वह खुद को आईएएस अधिकारी बताता था। उस ने खुद को नगर निगम का वरिष्ठ अधिकारी बताकर कैंप आयोजित कराया था। वह नीली बत्ती वाली कार में आता था और उसके साथ गार्ड भी रहते थे। एसएसडी डिवीजन के उपायुक्त आईपीएस रसीद मुनीर खान ने बताया कि उससे पूछताछ कर पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके साथ और कौन-कौन से लोग इसमें शामिल हैं।

संजय सिंह ने संघ प्रमुख भागवत को लिखा पत्र, कहा- श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के भ्रष्टाचारियों के बारे में पेश करना चाहता हूँ सबूत

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहनराव भागवत को पत्र लिखकर उनसे मिलने के लिए समय माँगा है। शनिवार (26 जून 2021) को लिखे गए इस पत्र में अयोध्या में हो रहे राम मंदिर निर्माण में व्यापक स्तर पर घोटाले की बात दोहराई गई है। इस पत्र को संजय सिंह ने ट्विटर पर साझा भी किया है।

पत्र में संजय सिंह ने कहा है कि वे मोहन भागवत से मिलकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड द्वारा भूमि खरीद के मामले में हो रही अनियमितता की जानकारी देना चाहते हैं। उनके पास इस घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज मौजूद हैं, वे उन्हें मोहन भागवत को देकर इस मामले पर उन्हें सच्चाई बताना चाहते हैं।

संजय सिंह ने पत्र में लिखा है, “आपको ज्ञात होगा कि राम मंदिर ट्रस्ट में जमीन खरीददारी से संबंधित बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। मैं आपसे मिलकर इस पूरे घोटाले को विस्तार से आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ। इससे संबंधित सभी सबूत और तथ्य मेरे पास मौजूद हैं। यह सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के लोगों द्वारा की गई चंदा चोरी है। इस चंदा चोरी की घटना ने देश के हिंदुओं की आत्मा को झकझोर दिया है।”

अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा है, “श्रीमान जी, देश के करोड़ों लोगों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के मंदिर के लिए अपने खून पसीने की गाढ़ी कमाई दान की है, इस दान की रकम से भ्रष्टाचारियों ने दलाली करके अपनी जेब भर ली है। भगवान श्रीराम के नाम पर एकत्रित किए गए दान से अपनी जेब भरने वाले लोग हिंदू धर्म के सबसे बड़े गुनाहगार हैं। आज इन अपराधियों की काली करतूतें सबके सामने हैं। देश की जनता के पास भी इस घोटाले के सभी दस्तावेज एवं पुख्ता सबूत हैं।”

संजय सिंह ने आरएसएस प्रमुख से कहा कि वह इस घोटाले से संबंधित सभी दस्तावेज उनके समक्ष रखना चाहते हैं। इसलिए वह संघ प्रमुख के बहुमूल्य समय में कुछ समय मुलाकात के लिए माँग रहे हैं। संजय सिंह ने कि इन घोटालेबाजों के अपराध को प्रमुख चैनल देश की जनता के सामने ला चुके हैं।

दरअसल, संजय सिंह ने राम मंदिर के लिए खरीदी गई जमीन में हेराफेरी का आरोप लगाया था। बाद में जमीन के कथित घोटाले को लेकर वह कोर्ट जाने की धमकी दे रहे थे। ट्वीट कर संजय सिंह ने कहा था कि उन्होंने जब से भूमि घोटाले का खुलासा किया है तभी से वह इंतजार कर रहे थे कि भाजपा एक्शन ले, लेकिन 3 दिन बीतने के बाद अब वह कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

संजय सिंह ने कहा था, “मैंने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के संबंध में घोटाले का खुलासा किया। इसके बाद केंद्र सरकार और भाजपा के कार्रवाई करने के लिए 3 दिनों तक इंतजार किया, लेकिन अब मैं समझ गया हूँ कि बीजेपी की आस्था प्रॉपर्टी डीलरों/भ्रष्टाचारियों में हैं, भगवान राम में नहीं। मैं इस मामले को अदालत में ले जाने की तैयारी कर रहा हूँ।” हालाँकि अभी तक उनके अदालत जाने की कोई खबर नहीं है।

मो उमर गौतम ने किया मेधावी छात्राओं का भी ब्रेनवॉश: ATS को मिली ग्रामीण इलाकों की मुस्लिम बनीं 33 युवतियों की लिस्ट

उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा धर्मांतरण कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद से इस मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। एटीएस को आरोपितों के पास से 33 लड़कियों की एक सूची मिली है, जिनमें आधे से ज्यादा युवतियाँ ग्रामीण इलाकों की रहने वाली हैं। धर्म परिवर्तन मामले में गिरफ्तार मोहम्मद उमर गौतम और काजी जहाँगीर ने एटीएस को बताया कि वे ग्रामीण इलाकों की युवतियों को अपना शिकार बनाते थे, क्योंकि गाँवों में रहने वाली युवतियों का ब्रेनवॉश करने में आसानी होती थी।

बताया जा रहा है कि बीहूपुर गाँव घाटमपुर निवासी ऋचा उर्फ माहीन अली का खुलासा होने के बाद एटीएस ने एक बार फिर मोहम्मद उमर गौतम की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर से बरामद 33 युवतियों और महिलाओं की सूची की दोबारा पड़ताल शुरू कर दी है। एटीएस के सूत्रों के अनुसार सूची की जाँच के बाद पता चला कि ज्यादातर युवतियाँ और महिलाएँ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुवाहाटी समेत अन्य राज्यों के ग्रामीण इलाकों की हैं। गिरोह के सदस्य उन्हें लालच देकर अपने जाल में फँसाते हैं और इसके बाद उनका ब्रेनवॉश करके धर्मांतरण करा देते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूछताछ में आरोपितों ने यह भी कबूला कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाली इन युवतियों और महिलाओं को दबा-कुचला वर्ग मानकर कई बार इनका तिरस्कार किया गया है। इसका फायदा उठाकर उनका गिरोह उन महिलाओं और युवतियों को अपना शिकार बनाते हैं और उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन व हक दिलाने का झाँसा देकर उनका ब्रेनवॉश करते हैं। महिलाओं को बताया गया कि इस्लाम में इन्हें पूरा हक और सुरक्षा मिलेगी, जिसके कारण उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया।

33 में से 12 युवतियाँ मेधावी

एटीएस के सूत्रों के अनुसार, धर्मांतरण की शिकार हुई ग्रामीण इलाकों की 33 युवतियों व महिलाओं में 12 युवतियाँ मेधावी रही हैं। एमबीए, बीएड, बीएससी, एमएससी करने वाली इन युवतियों ने स्कॉलरशिप के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की है। उसके बाद भी गिरोह के सदस्य इन युवतियों का ब्रेनवॉश कर उनका धर्मांतरण करा देते हैं।

मालूम हो कि धर्मांतरण मामले में जारी हुई लिस्ट में MBA पास ऋचा देवी का भी नाम दर्ज है। घाटमपुर की 26 वर्षीय ऋचा ने कानपुर और प्रयागराज से पढ़ाई की है। सिविल सर्विसेज की तैयारी के दौरान वह एक मुस्लिम प्रोफेसर के संपर्क में आई और अपना धर्म बदल लिया। अब उसने अपना नया नाम माहीन अली रख लिया है। ऋचा उर्फ माहीन एक कंपनी में जॉब करती है और परिवार से अलग नोएडा में रहती है। गुरुवार (जून 24, 2021) को एटीएस ने छात्रा के घर पहुँच कर इसकी जानकारी जुटाई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एटीएस ने सोमवार (21 जून 2021) को मूक-बाधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं, मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर कासिम को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर अब तक करीब 1,000 मूक-बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया था।

इसमें से एक उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वह दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मान्तरण का सारा खेल खेला जाता है। गिरफ्तार किए गए मोहम्मद उमर गौतम को लेकर फतेहपुर के एक स्कूल में अंग्रेजी की टीचर रही कल्पना सिंह ने खुलासा किया था कि उन पर भी धर्मांतरण का दबाव बनाया गया था। हिंदू बच्चों को उर्दू और अरबी पढ़ाने का विरोध करने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था।

जिसने सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करके बनवाया था अवैध इबादतगाह, UP पुलिस-प्रशासन ने उसी से तोड़वाया

उत्तर प्रदेश के हरदोई में जिला प्रशासन ने एक 10 साल पहले बने अवैध इबादतगाह को वहाँ से हटवा दिया। योगी आदित्यनाथ सरकार सरकारी जमीन को कब्ज़ा कर बने अवैध ढाँचों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई का आदेश दे चुकी है। हरदोई में इस इबादतगाह को भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर के ही बनाया गया था। हरदोई के देहात कोतवाली क्षेत्र स्थित काशीराम कालोनी में ये कार्रवाई की गई।

इस दौरान वहाँ बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। इसे हटाने के लिए पहले ही सगीर अहमद नामक शख्स को नोटिस जारी किया जा चुका था। हालाँकि, इबादतगाह को हटाने का कार्य पुलिस-प्रशासन ने नहीं, बल्कि खुद अतिक्रमणकारियों ने ही किया। प्रशासन के लोग इस दौरान वहाँ बस मौजूद रहे। अतिक्रमणकारियों ने अपने लोगों के साथ मिल कर उस अवैध इबादतगाह को ध्वस्त किया।

इस बारे में प्रशासन को सूचना मिली थी कि वहाँ अवैध इबादतगाह होने से लोगों को परेशानी हो रही है। टीन-शेड से निर्मित किया गया था। इसे हटवाने की कार्रवाई शुक्रवार (जून 25, 2021) को की गई। इबादतगाह के मुतवल्ली सगीर अहमद ने बताया कि ये इबादतगाह यहाँ तभी से स्थित है, जब इस कॉलोनी का निर्माण हुआ था। इसके स्थापित हुए एक दशक हो चुके हैं। इससे पहले यहाँ सिर्फ तिरपाल डाला हुआ था।

‘बजरंग दल’ सहित अन्य हिन्दू संगठनों ने भी इस अवैध ढाँचे को लेकर आपत्ति जताई थी। आसपास के लोगों ने भी इस दौरान इसे हटाने में सहयोग किया। पुलिस ने पहले ही लोगों को विश्वास में ले लिया था और वो इसे हटाने को तैयार हो गए थे। उत्तर प्रदेश में राजमार्गों या सरकारी संपत्ति का कब्ज़ा कर के बने ऐसे इबादतगाहों/पूजा स्थलों को हटाया जा रहा है। इसी क्रम में कुछ अवैध मजार भी हटाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के दरियाबाद में 100 साल पुरानी कथित मस्जिद को ध्वस्त किया गया था। इसके बाद एसडीएम दिव्यांशु पटेल को धमकी मिलने लगी थी। उन्हें धमकाने के आरोपित अशरफ अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाराबंकी के राम सनेही घाट क्षेत्र में ‘तहसील’ परिसर के अंदर स्थित एक अवैध आवासीय ढाँचे को ध्वस्त कर दिया था। मुस्लिम समुदाय इसके मस्जिद होने का दावा करता था।

धर्मांतरण रोकने के लिए मदरसों पर हो तालाबंदी, मौलवियों की संपत्ति की हो जाँच: महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के रैकेट पर्दाफाश और देश के 24 राज्यों में फैले इसके नेटवर्क को लेकर लोगों में रोष है। वहीं, धर्मांतरण के साजिश के खिलाफ देश के साधु-संत भी आगे आने लगे हैं। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि मतांतरण के लिए इस्लामिक देशों द्वारा मदरसों की फंडिंग की जा रही है। ये मदरसे लोगों के मन में जहर घोलकर मतांतरण करा रहे हैं। इसकी जाँच कराकर केंद्र सरकार कार्रवाई करे।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक अभिशाप के रूप में पनप रहा है। इस पर अंकुश लगाने के लिए देश के सभी मदरसों में तालाबंदी करनी चाहिए। यदि मदरसों को चलाना ही है तो उन्हें सरकारी तंत्र के नियमों के अधीन रखा जाए। साथ ही उन्होंने मदरसों मेें पढ़ाने वाले मौलवियों की संपत्ति की जाँच करने की भी माँग की।

उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण बेहद जरूरी है। इसके लिए केंद्र सरकार को दो बच्चों से संबंधित कानून शीघ्र लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुई है, इससे संत चिंतित हैं। स्वामी यतींद्रानंद ने कहा कि सनातन हिंदू संस्कृति के अनुरूप देश को नए संविधान की भी आवश्यकता है।

गौरतलब है कि देश में धर्मांतरण को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) ने दो मौलानाओं- मौलाना मोहम्मद उमर और काजी जहाँगीर को गिरफ्तार किया है, जो देश भर में 1,000 से अधिक लोगों का धर्मांतरण कराने का खुद दावा कर रहे हैं। धर्मांतरण करने वाली महिलाओं की सूची में कुछ ऐसी उच्च शिक्षित महिलाएँ हैं, जो इस्लाम अपनाकर अपना घर तक छोड़ चुकी हैं। इनमें सिविल सर्विस की तैयारी करने वाली ऋचा और दुबई एयरपोर्ट पर नौकरी करने के लिए मुसलमान बनने वाली रिटायर फौजी की बेटी रेणु की कहानी बेहद चौंकाने वाली है।

गिरफ्तार मौलाना मोहम्मद उमर धर्मांतरण के लिए किस तरह के तरीके अपनाता था, इसका उदाहरण है फतेहपुर के स्कूल में अंग्रेजी की टीचर रही कल्पना सिंह की आपबीती। कल्पना सिंह ने बताया कि स्कूल में हिंदू बच्चों को उर्दू और अरबी पढ़ाया जाता था और उनसे विशेष प्रार्थना कराया जाता था। उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और एक साल का वेतन भी रोक लिया गया।

यूपी एटीएस की पूछताछ में एक आरोपित मौलाना उमर ने बताया कि मतांतरण के लिए दावत का इंतजाम किया जाता था। मतांतरण के लिए सबसे पहले गीता पढ़ाया जाता था। फिर कुरान पढ़ाते थे। दोनों का अंतर और गीता में कमी बताई जाती थी। उसके बाद हदीस पढ़ाया जाता था। हदीस पढ़ाने के बाद पूरी तरह से ब्रेन वॉश किया जाता है और फिर लोगों को धीरे-धीरे इस्लाम के प्रति आकर्षित कर लिया जाता है।

बता दें कि यूपी एटीएस ने उमर गौतम और जहाँगीर आलम को गिरफ्तार कर बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण का खुलासा किया था। उमर गौतम दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस में इस्लामिक दावा सेंटर नामक संस्था का संचालक है। यहीं से धर्मान्तरण का सारा खेल खेला जाता है। उमर पर आरोप है कि उसने नोएडा के मूक-बधिर स्कूल के दर्जनों छात्रों का उसने धर्मांतरण कराया है। उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बन गया था।

अयोध्या का विकास मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिससे युवाओं में हो आध्यात्मिकता का सृजन: पीएम मोदी ने की समीक्षा बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में विकास कार्यों को लेकर शनिवार (26 जून 2021) को समीक्षा बैठक की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व दिनेश शर्मा इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। करीब 45 मिनट तक चली इस समीक्षा बैठक में पीएम मोदी ने अयोध्‍या का विजन डॉक्‍यूमेंट देखा।

प्रधानमंत्री ने अयोध्या के विकास मॉडल को तैयार करने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए इसे समय से पूरा करने के लिए कहा। अयोध्या को हर भारतीय की सांस्कृतिक चेतना में उकेरा हुआ शहर बताते हुए पीएम ने कहा, ”अयोध्या का विकास मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिससे युवाओं में आध्यात्मिकता का सृजन हो। वे संस्कार के साथ अध्यात्म की शिक्षा भी ग्रहण कर सकें। अयोध्या को हमारी उत्कृष्ट परंपराओं, सर्वश्रेष्ठ विकास परिवर्तनों को प्रदर्शित करना चाहिए।”

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अयोध्या के मानवीय लोकाचार भविष्य के बुनियादी ढाँचों से मिलते-जुलते होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने अयोध्या की पहचान का जश्न मनाने, नवीन तरीकों से इसकी सांस्कृतिक जीवंतता को बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की।

बैठक में पीएम मोदी ने कहा, ”जिस तरह भगवान राम में लोगों को एक साथ लाने की क्षमता थी, उसी तरह अयोध्या के विकास कार्यों को स्वस्थ जनभागीदारी की भावना से किया जाना चाहिए।” उन्होंने अयोध्या के विकास कार्य में प्रतिभाशाली युवाओं के कौशल का लाभ उठाने का भी आह्वान किया।

पीएम ने बैठक में कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने जीवन में कम से कम एक बार अयोध्या जाने की इच्छा महसूस करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में अयोध्या में विकास कार्य जारी रहेंगे।

वीडियो कॉन्फ्रें​सिंग के माध्यम से हुई इस समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के अलावा वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन, पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी, सिंचाई मंत्री महेंद्र सिंह, अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह, चीफ सेक्रेटरी के अलावा प्रमुख सचिव पर्यटन, अपर मुख्य सचिव नगर विकास समेत अन्य विभागों के प्रमुख सचिव भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि बैठक में अयोध्या के विकास से जुड़ी परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की ओर से एक प्रस्तुती दी गई। बयान में कहा गया कि अयोध्या के विकास की कल्पना में एक अध्यात्मिक केंद्र, वैश्विक पर्यटन केंद्र और टिकाऊ स्मार्ट सिटी विकसित करना है।

बता दें कि बैठक में प्रधानमंत्री को अयोध्या के संपर्क को बेहतर करने से संबंधित ढाँचागत विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं से अवगत कराया गया। इस दौरान हवाई अड्डे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, सड़कों और राजमार्गों के विकास से संबंधित योजनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही एक हरित उपनगर बसाने को लेकर भी चर्चा की गई, ताकि यहाँ दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आश्रम, होटल और विभिन्न राज्यों के भवनों की सुविधा उपलब्ध हो। एक आधुनिक पर्यटन सुविधा केंद्र और वैश्विक स्तर का एक संग्रहालय बनाए जाने को लेकर बैठक में चर्चा हुई।

यूपी पुलिस ने 33 बच्चों को तस्करी से बचाया, हाशिम, शाहिद, और शमशुल समेत 8 गिरफ्तार: मदरसा ले जाने का बनाया बहाना

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जंक्शन पर मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बाल श्रम व अन्य अवैध कार्यों के लिए मानव तस्करी की जा रही थी। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के NGO ‘बचपन बचाओ’ की सूचना के बाद GRP (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) ने 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से कई बच्चों को छुड़ाया। कुल 33 बच्चों को छुड़ाया था। बिहार के बच्चों को ये तस्कर दिल्ली और पंजाब लेकर जा रहे थे।

पुलिस ने इन बच्चों को रेस्क्यू कर के उन्हें चाइल्ड लाइन को सौंप दिया और आरोपितों से पूछताछ की गई। NGO के स्टेट कोऑर्डिनेटर सूर्य प्रताप मिश्रा ने बच्चों की तस्करी की सूचना राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को दी थी। इसके बाद चेयरमैन डॉक्टर विशेष गुप्ता ने SSP को इसके जानकारी दी। शुक्रवार (जून 25, 2021) को दोपहर साढ़े 12 बजे GRP ने नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस की घेराबंदी की।

चेकिंग के दौरान अलग-अलग 9 लोगों के पास कुल 33 बच्चे मिले। उनमें एक जुबैर नाम का व्यक्ति था, जो अपने बच्चे के साथ जा रहा था। शेष 8 लोगों के साथ अन्य बच्चे थे। इनमें मोहम्मद हाशिम, शाहिद आलम, नोमान, अब्दुल सलाम, मुशाबिर, शाह आलम, शमशुल हक और हाफिज जावेद शामिल हैं। इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बच्चों को बल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।

वहाँ उनके बयान दर्ज किए गए। 10 साल से कम उम्र के बच्चों को खुल्दाबाद स्थित राजकीय बाल गृह और इससे ज्यादा उम्र वाले बच्चों को राजरूपपुर राजकीय स्थित बाल गृह में भेजा गया है। आरोपितों ने पूछने पर बताया था कि वो तालीम दिलाने के लिए इन बच्चों को तुगलकाबाद स्थित एक मदरसे में ले जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों के माँ-बाप से मंजूरी लेने की बात कही। लेकिन, जब सवाल दागा गया कि कोरोना महामारी में मदरसों में पढ़ाई चालू है, तो वो संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

वो लोग मदरसा प्रबंधन से भी बात नहीं करा पाए। तस्करी से पहले बच्चों को आरोपितों द्वारा प्रशिक्षण तक दिया गया था। अपने बयान में बच्चों ने ही ये खुलासा किया। पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर बच्चों ने आरोपितों को अपना मामा बताया था। उन्हें ऐसा बोलने के लिए सिखाया गया था। बच्चों को ये कहने को भी कहा गया था कि वो पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इस गिरोह का नेटवर्क कहाँ तक फैला है, इसकी तफ्शीश की जा रही है।

तीन बीघा कॉरिडोर: बांग्लादेशियों को आने-जाने के लिए भारत ने दी जमीन… लेकिन स्थानीय भारतीय मनाते हैं शहीद दिवस

‘तीन बीघा गलियारा या कॉरिडोर’, सुनने में भले ही जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा ही लगे लेकिन भारत और बांग्लादेश के संबंधों में इसका बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान है। यह गलियारा (कॉरिडोर) दो पड़ोसी देशों के बीच उस सीमाई सामंजस्य की कहानी कहता है, जिसके लिए सालों तक दोनों ही देशों की सरकारों के बीच बैठकें हुईं, समझौते हुए और उसके बाद कहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा के उलझे हुए दाँव-पेंच सुलझ पाए।

26 जून 1992, यह वही तारीख थी जब भारत ने बांग्लादेश के लोगों को सहूलियत देने और कई सालों से चले आ रहे सीमा संकट को समाप्त करने की पहल की। इसी दिन भारत ने बांग्लादेश को 178 मीटर लंबा और 85 मीटर चौड़ा भूखंड 99 सालों की लीज पर दे दिया था, जिससे बांग्लादेश के नागरिक बिना किसी प्रशासनिक समस्या के अपने देश में आवागमन कर सकें। लेकिन यह ‘तीन बीघा गलियारा या कॉरिडोर’ है क्या और भारत द्वारा बांग्लादेश को इसे लीज पर देने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी? क्या है इस छोटे से भूखंड का इतिहास? आगे ऐसे ही कुछ प्रश्नों के उत्तर ढूँढते हैं।

तीन बीघा गलियारे के अस्तित्व में आने की यात्रा

यह तब शुरू हुआ, जब भारत का विभाजन हुआ। भारत और पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) की सीमा का निर्धारण रैडक्लिफ अवॉर्ड (सर सिरिल रैडक्लिफ) के द्वारा किया गया। इसके तहत दोनों देशों के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर की सीमा का निर्धारण हुआ। हालाँकि सीमा निर्धारण के बाद भी विवाद की स्थिति बनी रही। दोनों ही देशों के बीच कई ऐसे क्षेत्र थे, जो एक देश में स्थित थे लेकिन उन तक पहुँचने के लिए दूसरे देश के प्रशासनिक क्षेत्र से होकर जाना पड़ता था। इसके कारण दोनों ही देशों के नागरिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

इसे देखते हुए 16 मई 1974 को भारत और बांग्लादेश (तब बांग्लादेश, पाकिस्तान से आजाद हो चुका था और एक नया देश बन चुका था) के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते को ‘लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट’ कहा गया। इस समझौते के तहत यह तय हुआ कि भारत आधा बेरुबाड़ी संघ अपने पास रखेगा और बदले में बांग्लादेश को दहग्राम-अंगरपोटा का अधिकार क्षेत्र प्राप्त हुआ। यही वह समझौता था, जब पहली बार ‘तीन बीघा गलियारे की अवधारणा सामने आई। लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट में यह सुनिश्चित किया गया कि भारत, बांग्लादेश को तीन बीघा जमीन भी देगा, जिससे बांग्लादेश के निवासी सरलता से आवागमन कर सकें। हालाँकि तब संवैधानिक सीमाओं के चलते ‘तीन बीघा गलियारा’ अस्तित्व में नहीं आ सका।

फोटो सोर्स : coochbehar.nic.in

इसके बाद 1982 में एक बार फिर इसके लिए प्रयास किया गया लेकिन तब भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका। हालाँकि दोनों देशों की सरकारों के प्रयास के बाद अंततः 26 जून 1992 को बांग्लादेश के लोगों के आवागमन के लिए ‘तीन बीघा गलियारा’ प्रतिदिन 6 घंटे के लिए खोला गया। 1996 में 6 घंटे के इस समय को बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया। हालाँकि क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण भारत का ही बना रहा।

‘तीन बीघा गलियारा या कॉरिडोर’ को लेकर सबसे बड़ा समझौता सितंबर 2011 में ढाका में हुआ। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच एक समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत यह निर्णय लिया गया कि भारत के द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाला 178 x 85 वर्ग मीटर का भूखंड बांग्लादेश को 99 सालों की लीज पर दिया जाता है। अंततः दोनों देशों के बीच इस समझौते के बाद ‘तीन बीघा गलियारा’ अस्तित्व में आया।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर स्थित एन्क्लेव्स के हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की प्रतिबद्धता जाहिर की गई। इसके लिए जून 2015 में 100वाँ संविधान संशोधन किया गया और इसके तहत बांग्लादेश को भारत की जमीन पर स्थित 111 एन्क्लेव्स हस्तांतरित कर दिए गए। साथ ही बांग्लादेश के अधिकार क्षेत्र में स्थित 51 बांग्लादेशी एन्क्लेव्स भारत को प्राप्त हुए।

एन्क्लेव्स को समझने के लिए: भारत की जमीन में बांग्लादेश का टुकड़ा, उसी बांग्लादेशी टुकड़े के अंदर भारत की जमीन (मैप साभार: जिन थॉर्प, वॉशिंगटन पोस्ट)

दोनों देशों के बीच सीमाओं के स्पष्ट निर्धारण के क्षेत्र में यह सबसे बड़ा कदम माना गया। हालाँकि इस संविधान संशोधन के माध्यम से एन्क्लेव्स के हस्तांतरण के बाद भी दहग्राम-अंगरपोटा एन्क्लेव अभी भी उसी स्थिति में है और ‘तीन बीघा गलियारा’ ही वह जमीन का एक भाग है, जो बांग्लादेश को अपने इन एन्क्लेव्स से जोड़ता है।

भौगोलिक स्थिति :

तीन बीघा भारत में पश्चिम बंगाल राज्य के कूचबिहार जिले के मेखलीगंज ब्लॉक के दक्षिण-पूर्व में स्थित भूमि की एक लंबी पट्टी है। भौगोलिक रूप से यह भूभाग फुलकदबरी ग्राम पंचायत (उत्तर में) और कुचलीबाड़ी ग्राम पंचायत (दक्षिण में) [दोनों भारत से संबंधित हैं] और दहग्राम (पश्चिम में) और पनबारी मौजा (पूर्व में) [दोनों बांग्लादेश से संबंधित हैं] से घिरा हुआ है।

फोटो सोर्स : coochbehar.nic.in

जमीन की तीन बीघा पट्टी, मेखलीगंज के 10 किमी दक्षिण पूर्व में है। यह रणनीतिक रूप से पश्चिम में दहग्राम और अंगरपोटा के बांग्लादेश परिक्षेत्रों और पूर्व में बांग्लादेश के पनबारी मौजा के बीच स्थित है। दोनों एन्क्लेव बांग्लादेश के पटग्राम पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।  

तीन बीघा गलियारे पर आंदोलन

हालाँकि क्षेत्र के भारतीय लोग बिना किसी प्रतिबंध के ‘तीन बीघा कॉरिडोर’ के माध्यम से बांग्लादेशी लोगों के आवागमन को लेकर संतुष्ट नहीं है। विशेष तौर पर कुचलीबाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को तीन बीघा गलियारे से बांग्लादेशी लोगों के आवागमन के दौरान अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारतीयों द्वारा हर साल 26 जून को तीन बीघा आंदोलन में मारे गए दो आंदोलनकारियों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है।