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‘सबूत मिटाए जा सकते, बदले की कार्रवाई संभव’: SC में परमबीर सिंह, निष्पक्ष जाँच की माँग- ट्रांसफर को चुनौती

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने अब महाराष्ट्र के गृह मंत्री व NCP नेता अनिल देशमुख के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने ‘बना किसी पूर्वाग्रह, निष्पक्ष और बिना किसी बाहरी दखल वाले’ जाँच की माँग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस मामले में सबूत मिटाए जा सकते हैं, इसीलिए उससे पहले जाँच कराई जाए। उन्होंने खुद को ट्रांसफर के बाद DG (होमगार्ड) बनाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है।

परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फरवरी 2021 से ही गृह मंत्री अनिल देशमुख उन्हें कोई सूचना दिए बिना ही क्राइम इंटेलिजेंस ब्यूरो में रहे विवादित पुलिस अधिकारी (अब निलंबित) सचिन वाजे और सोशल सर्विस ब्रांच में ACP संजय पाटिल जैसे उनके जूनियर अधिकारियों के साथ बैठक कर मुंबई के विभिन्न प्रतिष्ठानों से 100 करोड़ रुपए प्रतिमाह वसूली का टारगेट दे रहे थे।

उन्होंने बताया है कि अगस्त 24/25, 2021 को इंटेलिजेंस कमिश्नर रश्मि शुक्ला ने DGP को अनिल देशमुख द्वारा गलत तरीके से मनमाना ट्रांसफर-पोस्टिंग किए जाने की बात बताई, जिसके बाद DGP ने इस मामले को राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव के समक्ष उठाया। उन्होंने अनिल देशमुख पर कई मामलों में हस्तक्षेप कर के जाँच को मनमाना दिशा में मुड़वाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

परमबीर सिंह ने याचिका में कहा है कि उनके मातहत अधिकारियों को बिना उनके सूचना के बुलाकर मनमाना निर्देश देना गृह मंत्री के रूप में पद का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह से ट्रांसफर-पोस्टिंग और जाँच में हस्तक्षेप को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में ये बातें पहले ही ला चुके हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि एकपक्षीय और अवैध तरीके से उनका ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर के रूप में 2 वर्ष का तय न्यूनतम कार्यकाल पूरा भी नहीं किया था। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में उनका ट्रांसफर दुर्भावना से लिप्त फैसला था। उन्होंने इसे असंवैधानिक के साथ-साथ इंडियन पुलिस सर्विस (काडर) नियमों का भी उल्लंघन करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले का जिक्र किया।

उस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवेदनशील पद और कार्यावधि में किसी अधिकारी के ट्रांसफर के पीछे अच्छे कारण होने चाहिए और इस पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद ही फैसला होना चाहिए। इसलिए, उन्होंने अनिल देशमुख के करतूतों की जाँच के साथ-साथ अपने ट्रांसफर के फैसले पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का निवेदन भी सुप्रीम कोर्ट से किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि देशमुख उनके खिलाफ बदले की भावना से कोई कदम उठा सकते हैं, जिससे उन्हें बचाया जाए।

उधर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NCP के मुखिया शरद पवार ने अपने मंत्री की ‘बेगुनाही’ का सर्टिफिकेट देते हुए देशमुख के फरवरी 2021 में अस्पताल में भर्ती होने, क्वारंटीन रहने जैसे दावे किए। लेकिन, इन दावों पर जब सवाल उठे तो वे जवाब नहीं दे पाए। 15 फरवरी को अनिल देशमुख एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान कॉन्ग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भी उनसे मिला था।

‘उद्धव ठाकरे ने की थी फडणवीस से सचिन वाजे की पैरवी’: संसद में गूँजा ₹100 करोड़ की वसूली का मामला

मुंबई पुलिस में रहे सचिन वाजे इस समय एंटीलिया केस में एनआईए (NIA) की हिरासत में हैं। मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। यह मामला सोमवार (मार्च 22, 2021) को संसद में भी उठा। महाराष्ट्र से आने वाली निर्दलीय सांसद नवनीत रवि राणा ने दावा किया है कि देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते हुए उद्धव ठाकरे ने सचिन वाजे को पुलिस की सेवा में वापस लेने के लिए पैरवी की थी।

राणा ने कहा कि 16 साल के लिए एक आदमी को किस आधार पर निलंबित किया गया और जेल में बंद कर दिया गया? जब बीजेपी की सरकार थी तब उद्धव ठाकरे ने खुद देवेंद्र फडणवीस को सचिन वाजे को वापस बुलाने के लिए कहा था। इस पर फडणवीस ने मना कर दिया था। जब ठाकरे सरकार में आए तो उन्होंने उन्हें बहाल कर दिया।

बता दें कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस वार्ता कर इस मामले में राज्य सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने मनसुख हिरेन की मौत को हत्या करार देते हुए कहा था कि यह बात सामने आनी चाहिए कि हाई प्रोफाइल मामला वाजे को सौंपने के पीछे वजह क्या रही? 

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने आरोप लगाया था कि कोरोना के बहाने वाजे की बहाली की गई। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे साल 2004 में सस्पेंड हुए, 2007 में उन्होंने वीआरएस (ऐच्छिक सेवानिवृत्ति) दिया लेकिन उनके ऊपर चल रही इन्क्वायरी के चलते उनका वीआरएस स्वीकार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि साल 2018 में जिस समय वो मुख्यमंत्री थे उस समय शिवसेना की ओर से दबाव बनाया जा रहा था कि एपीआई सचिन वाजे को फिर एक बार सेवा में लिया जाए। लेकिन उन्होंने सचिन वाजे को बहाल नहीं किया था।

इस बीच महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के आरोपों को लेकर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ। भारतीय जनता पार्टी समेत कई सांसदों ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में प्रश्न काल के दौरान हंगामे के बीच कहा कि पूरे देश ने देखा कि गृह मंत्री (महाराष्ट्र) वसूली कर रहे हैं। महीने के 100 करोड़ रुपए वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले आतंकवादी कार में बम लगाते थे, लेकिन अब पुलिस ही लगा रही है। हालाँकि राज्यसभा में उठाए गए इन मुद्दों को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया।

हंगामे के बाद चेयरमैन ने साफ किया कि कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा। हंगामे को देखते हुए राज्यसभा को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बल्कि लोकसभा में भी इस मसले पर बवाल हुआ। भारतीय जनता पार्टी के सांसद राकेश सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और केंद्रीय एजेंसियों को इस मामले की जाँच करनी चाहिए।

राकेश सिंह ने कहा कि ये पहली बार है, जब किसी पुलिस अधिकारी के समर्थन में मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसी पुलिस अधिकारी को सौ करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट दिया गया था। लोकसभा में शिवसेना के विनायक राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की सरकार को गिराने की कोशिश लंबे वक्त से चल रही है। परमबीर सिंह के खिलाफ आरोप लगे हैं, जिसकी जाँच हो रही है। 

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी था। बता दें कि परमबीर सिंह को हाल ही में मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाया गया था।

देशमुख की ‘बेगुनाही’ का सर्टिफिकेट भी जाली? उठे सवाल तो जवाब नहीं दे पाए पवार: ₹100 करोड़ की वसूली का मामला

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली की टारगेट देने का आरोप लगाया था। इसके बाद से ही राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार लगातार देशमुख का बचाव कर रहे हैं। ‘बेगुनाही’ का सर्टिफिकेट देते हुए पवार ने देशमुख के अस्पताल में भर्ती होने, क्वारंटीन रहने जैसे दावे किए। लेकिन, इन दावों पर जब सवाल उठे तो वे जवाब नहीं दे पाए।

राज्य की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के सूत्रधार शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को दिल्ली तलब कर बैठक की। इसके बाद दावा किया कि फरवरी महीने में देशमुख अस्पाल में भर्ती थे, ऐसे में फरवरी में देशमुख और सचिन वाजे के बीच बातचीत का आरोप गलत है। इस दौरान शरद पवार हॉस्पिटल का पर्चा लेकर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए थे।

NCP के संस्थापक-अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना के कारण अनिल देशमुख 5 से 15 फरवरी तक नागपुर के अस्पताल में भर्ती थे और उसके बाद 16 फरवरी से 27 फरवरी तक वह होम आइसोलेट थे। उन्होंने दावा किया कि यह स्पष्ट है कि आरोप गलत हैं, ऐसे में अनिल देशमुख के इस्तीफे का सवाल नहीं उठता। परमबीर सिंह के आरोपों से महाविकास अघाड़ी सरकार पर कुछ असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने एक तरह से सारे आरोपों को नकार दिया।

शरद पवार ने कहा, “आरोप जिस समय के बारे में था, उस समय की स्थिति क्या थी, यह साफ हो गया है। यह एक गंभीर चीज है। यह सीएम का काम है कि वह इस पर एक्शन लेना चाहते हैं तो लें या जाँच करना चाहते हैं तो कराएँ। ये मेरा काम नहीं है। जिस समय का यह आरोप लगा है, उस समय अनिल देशमुख अस्पताल में थे। ऐसे में यह बात साफ है कि इस आरोप में कोई दम नहीं है। पत्र में जाँच को भटकाने की कोशिश की गई है। मैंने रविवार को महाराष्ट्र के सीएम से बात की है।”

हालाँकि, शरद पवार के ‘झूठ’ का ठीक उसी तरह पर्दाफाश हो गया जैसे उन्होंने मुंबई बम ब्लास्ट के समय मस्जिद में धमाके की कहानी गढ़ी थी, ताकि ऐसा लगे कि निशाना सिर्फ हिन्दू नहीं थे। भाजपा की आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक वीडियो कोट किया है, जिससे पता चलता है कि 15 फरवरी को अनिल देशमुख एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। ऐसे में कोई उनसे फरवरी में न मिल सके, ऐसा कैसे संभव है?

इससे साफ़ है कि वो उस वक़्त अस्पताल में नहीं थे। एक और खबर है, जिससे पता चलता है कि 8 फरवरी को कॉन्ग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल अनिल देशमुख से मिला था। उस समय रिहाना के ट्वीट के जवाब में भारतीय सेलेब्स के ट्वीट्स आ रहे थे और कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन पर दबाव होने की शिकायत राज्य के गृह मंत्री से मिल कर की थी। सवाल है कि क्या ये डेलिगेशन अस्पताल में जाकर मिला था?

18 फरवरी 2021 का अनिल देशमुख का एक और ट्वीट देखिए। इसमें उनकी पत्नी आरती देशमुख कई लोगों से घिरी हुई दिख रही हैं। अनिल देशमुख ने इस ट्वीट में दावा किया है कि वे और उनकी पत्नी ने एक दुःखद एक्सीडेंट में मृत पुलिस अधिकारी संजय नरवणे को श्रद्धांजलि दी। देशमुख ने लिखा था कि उन्होंने नरवणे के परिवार से मिल कर उन्हें ढाँढस बँधाया।

अमित मालवीय ने सवाल पूछा है कि ये किस किस्म का क्वारंटाइन है, जहाँ व्यक्ति सैकड़ों लोगों के साथ जहाँ मन हो घूम रहा है? उन्होंने इसे अमानवीय व्यवहार बताते हुए कहा कि कोई अपनी पत्नी के साथ क्वारंटाइन अवधि में ऐसे घूम कर हजारों लोगों की जान संकट में कैसे डाल सकता है? उन्होंने कहा कि शरद पवार के दावों की ये तस्वीरें पोल खोलती हैं। यानी, क्वारंटाइन और अस्पताल में रहने की अवधि जिसे बताई जा रही है, तब देशमुख खुला घूम रहे थे।

ऐसा नहीं है कि ये सवाल शरद राव पवार से नहीं पूछा गया, प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने अमित मालवीय की ट्वीट का हवाला देते हुए उनसे सवाल दागा कि ये कैसे हो सकता है? इस सवाल के बाद पवार अपने हाथ में रखे कागजात को इधर-उधर खँगालने लगे और कहने लगे कि उनके पास अस्पताल का सर्टिफिकेट है। जब सभी ने यही सवाल दागा तो वो कागज की बात करते रहे और कहा कि वो और कुछ कहना नहीं चाहते।

ज्ञात हो कि इस प्रकरण के सामने आने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। ED अब NIA से इस जाँच का विस्तृत ब्यौरा माँगने की तैयारी में लगा हुआ है। अगर परमबीर सिंह के इस 8 पन्ने के पत्र की जाँच के दौरान कोई भी लीड मिलती है तो ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर के जाँच शुरू कर देगा। अधिकारियों का मानना है कि ये मामला हजारों करोड़ रुपयों का हो सकता है।

‘इस आग में आप भी जल जाएँगे’: महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की माँग पर शिवसेना सांसद संजय राउत

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पत्र के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने चेताया है। राउत ने कहा है कि सरकार सही जाँच के लिए तैयार है तो बार-बार इस्तीफे की माँग क्यों की जा रही है। 

बता दें कि महाराष्ट्र में परमबीर सिंह का खत सामने आने के बाद से सियासी घमासान मचा हुआ है। परमबीर सिंह ने बीते दिनों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक खत लिखा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री द्वारा 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद गृहमंत्री अनिल देशमुख से इस्तीफे की माँग तेज हो गई है। भाजपा सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने राज्य में कानून-व्यवस्था खत्म होने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की,  जिसके बाद संजय राउत ने सामने आकर बयान जारी किया है।

संजय राउत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश की जा रही है। जो लोग ऐसा काम कर रहे हैं, उनके लिए ये ठीक नहीं होगा। संजय राउत ने आगे कहा कि अगर ऐसा सोचा तो मैं उन्हें चेतावनी देता हूँ कि ये आग उन्हें भी जला देगी। 

राउत ने कहा कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने तय किया है कि अनिल देशमुख के ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी जाँच होनी चाहिए। राउत ने कहा कि अगर हम सभी का इस्तीफा लेते रहेंगे तो सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हैं, तब तक सभी मामलों की जाँच सही तरीके से की जाएगी। राउत ने साफ तौर पर कहा कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर के कंधे पर बंदूक रखकर चलाई जा रही है और विपक्षी दल लोगों को गुमराह कर रहा है। 

राउत ने कहा कि केंद्र चाहे जिस भी एजेंसी से महाराष्ट्र में जाँच करवा सकता है। उन्होंने कहा, “ED (प्रवर्तन निदेशालय) या उनके पिताजी को ले आइए, NIA या CBI को ले आइए, जो जाँच करनी है कर लीजिए। कोई कुछ भी करे, कोई भी जाँच हो। महाराष्ट्र सरकार का कोई बाल बाँका नहीं कर सकता।”

परमबीर सिंह ने भेजा था सीएम को लेटर

20 मार्च को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक लेटर भेजा था। इसमें उन्‍होंने आरोप लगाया था कि राज्‍य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने असिस्‍टेंट पुलिस इंस्‍पेक्‍टर सचिन वाजे से एक महीने में 100 करोड़ वसूलने को कहा था। वाजे मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्‍फोटक से लैस गाड़ी मिलने के केस में इस समय हिरासत में हैं।

नाबालिग अनुराग को सद्दाम, शादाब और अख्तर ने रास्ते में घेर कर पीटा, फिर जहर पिला हो गए फरार: मौत के बाद FIR

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में एक निर्मम हत्याकांड का मामला सामने आया है। वहाँ के धनुवाडीह गाँव में अनुराग नाम के एक किशोर की हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने नामजद तहरीर मिलने के बाद नसीरूल, सद्दाम, शादाब और अख्तर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की है। एडिशनल एसपी सुरेश चंद्र रावत ने परिजनों से मिल कर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

अनुराग कादिराबाद स्थित मौलाना आजाद इंटर कॉलेज में पढ़ता था। वहाँ वो इंटर का छात्र था। अनुराग के पिता राष्ट्रपति पांडेय भी उसी स्कूल में शिक्षक हैं। कुछ महीनों पहले परसपुर के कुछ लड़कों के साथ उसका खेल-खेल में ही झगड़ा हो गया था। बताया जा रहा है कि आरोपित तभी से बदला लेने की फिराक में थे। अनुराग बुधवार (मार्च 17, 2021) को समान लेने बयारा जा रहा था, वहीं पर आरोपितों ने उसे घेर लिया। पहले तो उसके साथ जम कर मारपीट की गई, फिर उसे जहरीला पदार्थ खिलाया गया। इसके बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गए।

घर पहुँचते ही किशोर की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। अनुराग के पिता ने बेटे से मिली जानकारी के बाद नामजद शिकायत दर्ज कराई। आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई हैं और पुलिस ने मामले का जल्द पर्दाफाश की बात कही है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद रात में ही सैकड़ों की संख्या में लोग घर पहुँच गए थे। पूरे गाँव में कोहराम मच गया था। शुक्रवार की देर रात में ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान स्थानीय विधायक भी मौके पर मौजूद रहे। अनुराग की आयु मात्र 17 वर्ष थी। इससे पहले उसकी बहन प्रिया की भी 14 साल की उम्र में मौत हो चुकी है। अब केवल उसकी एक बहन रचना बची है, जो 6 साल की है।

‘गरीबों को सपने दिखाओ… राज करो’ – PM मोदी ने मंच से ऐसा कहा? कॉन्ग्रेस IT हेड ने शेयर किया वीडियो: फैक्ट चेक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस किस्म-किस्म के दावे शेयर करती रहती है लेकिन अधिकतर बार या तो उसका देश-विरोधी रवैया सामने आ जाता है या फिर उनका झूठ पकड़ा ही जाता है। अबकी कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री के भाषण को काट कर एडिटेड हिस्सा शेयर किया और ऐसा दिखाना चाहा, जैसे पीएम मोदी खुलेआम मंच से गरीबों को भला-बुरा कह रहे हैं। लेकिन, उसका झूठ फिर पकड़ा गया।

ये कारनामा किया है कॉन्ग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया विभाग के अध्यक्ष रोहन गुप्ता ने। पीएम मोदी रविवार (मार्च 21, 2021) को असम में थे और गोलाघाट के बोकाखाट में उनकी जनसभा हुई। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी व उसके शीर्ष गाँधी परिवार पर निशाना साधा। लेकिन, रोहन गुप्ता ने एक वीडियो शेयर किया और ये जताना चाहा कि पीएम मोदी ने गरीबों को भला-बुरा कह कर उन्हें बेवकूफ बनाया है।

पहली नजर में, कोई बच्चा भी समझ जाएगा कि कोई नेता कितना भी बड़ा मूर्ख क्यों न हो, वो कभी मंच से गरीबों को भला-बुरा नहीं कह सकता है। और नरेंद्र मोदी तो राजनीति की चलती-फिरती पाठशाला हैं, जिन्हें पता होता है कि किस स्थानीय मुद्दे को उठाना है, किस नेता की आलोचना करनी है और किसे सम्मान देना है। कहाँ की जनता किस भाषा में उनसे क्या सुनना चाहती है, पीएम को बखूबी पता होता है।

रोहन गुप्ता द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पीएम मोदी कहते दिख रहे हैं, “गरीब को सिर्फ सपने दिखाओ, झूठ बोलो, उन्हें आपस में लड़ाओ और राज करो।” क्या दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का सबसे बड़ा नेता इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल खुद के लिए कर सकता है? क्या विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री लाखों लोगों के सामने एक चुनावी सभा में खुद के बारे में ऐसा बोलने की सोच भी सकता है?

अब आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। ये वीडियो ठीक है। इसमें पीएम मोदी द्वारा कहे गए शब्द भी ठीक हैं। लेकिन, वीडियो के आगे-पीछे उन्होंने क्या कहा, ये छिपा लिया गया है। उन्होंने ये बातें उनके परिप्रेक्ष्य में कही थी, जिन्होंने असम पर 50 वर्ष राज किया और अब 5 गारंटी दे रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस के लोगों को झूठे वादे करने और झूठे घोषणापत्र बनाने की आदत पड़ गई है और जनता इनकी रग-रग से वाकिफ है।

इसके बाद पीएम मोदी वो बात कहते हैं, जो रोहन गुप्ता वाली वीडियो में है। यानी, उन्होंने कहा था कि ये नीति कॉन्ग्रेस की रही है। यानी, “गरीब को सिर्फ सपने दिखाओ, झूठ बोलो, उन्हें आपस में लड़ाओ और राज करो – यही कॉन्ग्रेस का हमेशा से सत्ता में रहने का फॉर्मूला रहा है।” इसमें से आधा हिस्सा रोहन गुप्ता वाले वीडियो में है, आधा गायब है। जो चीज खुद के लिए कही गई हो, उस पर भी कॉन्ग्रेस ही खुश हो रही है।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा था, “कॉन्ग्रेस मतलब झूठे घोषणापत्र की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब कंफ्यूजन की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब अस्थिरता की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब, बम, बंदूक और ब्लॉकेड की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब हिंसा और अलगाववाद की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब भ्रष्टाचार की गारंटी, घोटालों की गारंटी।” क्या रोहन गुप्ता ये सब शेयर कर के भी अपनी पार्टी की पीठ थपथपाएँगे? या वो अपनी पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं?

दरअसल, मीम बनाने के चक्कर में कभी भारत का नक्शा गलत दिखा देना, तो कभी सोशल मीडिया ट्रॉल्स की तरह लड़ाई-झगड़े करना… कॉन्ग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडलों की आदत सी बन गई है। पीएम मोदी का अपमान करना कॉन्ग्रेस के नेताओं का पुराना पेशा रहा है। कभी जाति, कभी चाय तो कभी दाढ़ी को लेकर मजाक बनाया जाता है। हाल ही में GDP के आँकड़ों को उनकी दाढ़ी से जोड़ा गया।

और सबसे बड़ी बात ये है कि मीडिया आउटरेज तो हटा दीजिए, बात-बात पर भाजपा नेताओं व समर्थकों को शैडो-बैन करने वाला, उनके फॉलोवर्स कम करने वाला और उनके कंटेंट्स पर ‘वार्निंग’ देने वाले ट्विटर बड़े मजे से अपने प्लेटफॉर्म का उपयोग 130 करोड़ भारतीयों के नेता के अपमान के लिए करने दे रहा है, चूँ तक न कर रहा। जबकि भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय द्वारा शेयर किए गए कंटेंट्स पर वो खासा सक्रिय रहता है।

काट कर अलग कर दी थाना प्रभारी की कलाई, SI भी जख्मी: निहंग सिखों का पुलिस पर हमला, हत्या कर हुए थे फरार

पंजाब में निहंग सिखों के हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। तरनतारन में रविवार (मार्च 21, 2021) को पुलिस और बदमाशों के बीच संघर्ष हिंसक हो गया। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख़्त श्री हुजूर साहिब पर एक बाबा की हत्या के दो वॉन्टेड अपराधी यहाँ छिपे हुए हैं।

महाराष्ट्र पुलिस ने इसकी सूचना पंजाब पुलिस को दी। फिर स्थानीय पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने पहुँची। वहाँ निहंग सिख अचानक से आक्रामक हो गए और उन्होंने हमला कर के थाना प्रभारी की कलाई ही काट डाली। उनकी दूसरी कलाई पर भी गंभीर जख्म आए हैं।

इसके बाद हुई मुठभेड़ में पुलिस ने भी गोली चलाई और दोनों निहंग सिख मौके पर ही मारे गए। एनकाउंटर में ढेर हुए निहंग सिखों की पहचान महताब सिंह और गुरदेव सिंह के रूप में हुई है। इन्होंने नांदेड़ साहिब में बाबा संतोख सिंह की हत्या की थी और फिर फरार हो गए थे।

पुलिस ने दोनों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था और इनकी लोकेशन तरनतारन में मिली थी। वहाँ के सिंहपुरा इलाके में उनके होने की सूचना के बाद पुलिस वहाँ गई।

वहाँ छिछरेवाल गाँव में 10 दिन पहले हुई थाना भिखीविंड के हेड कॉन्स्टेबल सरबजीत सिंह की मौत के बाद आज भोग की रस्म चल रही थी। दोनों अपराधी भी यहीं छिपे हुए थे। थाना वल्टोहा के प्रभारी इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह और खेमकरण के प्रभारी सब इंस्पेक्टर नरिंदर सिंह वहाँ पहुँचे।

तभी निहंग सिखों ने उन दोनों पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। आरोपितों ने पुलिस अधिकारियों पर कई बार हमले किए। दोनों पुलिसकर्मियों को एम्बुलेंस से अस्पताल भेजना पड़ा।

मई 12, 2020 को भी इसी तरह का वाकया सामने आया था, जब कोरोना प्रोटोकॉल की ड्यूटी निभा रहे पंजाब पुलिस के ASI हरजीत सिंह पर निहंगों ने तलवार से हमला कर उनकी कलाई काट दी थी। हरजीत खुद कटा हाथ लेकर स्कूटर से अस्पताल पहुँचे थे, जहाँ चंडीगढ़ PGIMER  में घंटों की मशक्कत के बाद सर्जरी सफल रही थी।

तब बताया गया था कि पीजीआई चंडीगढ़ पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने पहले हाथ पूरी तरह से निरीक्षण किया उसके बाद उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के मुख्य ऑपरेशन थियेटर में सुबह करीब 10 बजे हाथ को जोड़ने का काम शुरू हुआ। शाम 5 बजे तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम ने हाथ की एक एक नस को सतर्कतापूर्वक बाकी शरीर से जोड़ा। कोरोना के दौरान कर्फ्यू पास दिखाने को कहने पर वो भड़क गए थे।

दान मंदिर को, बना दिया गोल्फ कोर्स… 4 लाख मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त कराने के लिए VHP का अभियान

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने देश के 4 लाख मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने इस तरफ इशारा करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों की सरकारों ने देश के 4 लाख मंदिरों पर कब्ज़ा कर रखा है, जिनसे वो अपील करते हैं कि इन मठों-मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त किया जाए। विहिप जल्द ही इन सरकारों से वार्ताएँ शुरू करेगा।

राज्य सरकारों के साथ वार्ता कर के उन्हें कहा जाएगा कि वो इन मठों-मंदिरों को अपने कब्जे से मुक्त करें। विहिप ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ती है तो इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज किया जाएगा। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, मिलिंद परांडे ने कहा कि समाज हित में उपयोग किए जाने की बजाए दानदाताओं द्वारा मठ-मंदिरों को दी गई जमीनों का उपयोग दूसरे कामों के लिए किया जा रहा है।

संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर सहित कई संगठनों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से विहिप की इस पहल का समर्थन किया है। RSS नेता नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि हिंदू मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए तथा उनका संचालन समाज के स्तर से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर में आए धन का उपयोग सामाजिक कार्यों में होना चाहिए। परांडे ने सभी मंदिरों में हिन्दू धर्म के प्रचार के लिए केंद्र बनाने की बात की।

उन्होंने कहा, “मंदिरों के दान का उपयोग हिंदू संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए। कई सरकारों द्वारा मंदिरों पर कब्जा कर भारतीय संस्कृति को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। कई मंदिरों में तो पूजा-पाठ तक ठीक से नहीं हो रहा है। इसके लिए समाज के लोगों को आगे आकर सरकारों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी समाज को सौंपें। श्रद्धालु ही मंदिरों का प्रबंधन करें।”

उन्होंने इसके लिए आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमला मंदिर का उदाहरण दिया। वहाँ प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं के दान से 1300 करोड़ रुपए आते हैं। इनमें से 85% धनराशि को सीधा सरकारी राजकोष में भेज दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के कहने पर वहाँ के 10 मंदिरों को अपनी जमीन गोल्फ कोर्स बनाने के लिए देनी पड़ी, जबकि हिंदुओं ने इस कार्य के लिए जमीन नहीं दी थी। जमीन का उपयोग धर्म के कार्यों के लिए नहीं हुआ।

मिलिंद परांडे ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा मनमाने ढंग से मंदिरों की सम्पत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही पूछा कि क्या इसीलिए हिन्दू चढ़ावा देते हैं? उन्होंने दूसरे धर्मों-सम्प्रदायों के धार्मिक स्थलों की बात करते हुए कहा कि वहाँ वो लोग खुद उनका प्रबंधन करते हैं। साथ ही सवाल दागा कि फिर हिन्दुओं के लिए ही इस तरह की बंदिश क्यों? हिन्दुओं द्वारा मंदिर को दिए गए धन पर सरकार का अधिकार नहीं होना चाहिए।

तमिलनाडु में सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ‘ईशा फाउंडेशन’ ने इसी तरह का अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने तमिलनाडु का आँकड़ा देते हुए बताया कि वहाँ करीब 12000 मंदिर अवसान की ओर हैं, वो खात्मे की तरफ बढ़ रहे हैं। क्यों? क्योंकि वहाँ पूजा नहीं हो रही है। 34000 मंदिर ऐसे हैं, जिन्हें 10000 रुपए वार्षिक के हिसाब से अपने कामकाज चलाने पड़ते हैं। 37000 मंदिर वहाँ ऐसे हैं, जहाँ सिर्फ एक ही व्यक्ति है, जिसके हाथ में पूजा की पूरी जिम्मेदारी है।

‘अंबानी से वसूली करना चाहता था वाजे… लेकिन किसके इशारे पर?’: ED दर्ज कर सकता है मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे परमबीर सिंह ने एक पत्र के माध्यम से आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एंटीलिया मामले में गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को प्रतिमाह 100 करोड़ रुपए की उगाही का लक्ष्य दिया था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। ED अब NIA से इस जाँच का विस्तृत ब्यौरा माँगने की तैयारी में लगा हुआ है।

अगर परमबीर सिंह के इस 8 पन्ने के पत्र की जाँच के दौरान कोई भी लीड मिलती है तो ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर के जाँच शुरू कर देगा। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, ED ने कहा कि अगर परमबीर सिंह के आरोपों में सच्चाई है तो ये मामला हजारों करोड़ रुपयों का हो जाता है और इसीलिए इसकी तह तक जाना ज़रूरी है। अधिकारी ने कहा कि अवैध सम्पत्तियों को चिह्नित कर उनकी वसूली ही ED का कार्य है।

साथ ही इसके पूरे नेटवर्क और लेनदेन का पता भी लगाया जाता है, जिसके लिए सम्बंधित लोगों से पूछताछ भी की जाती है। चल-अचल, नकद या फिर क्रिप्टोकरेंसी जैसे डिजिटल रूप में ही वो संपत्ति क्यों न हो, ED हर तरह के अवैध लेनदेन पर शिकंजा कसता है। गौर करने वाली बात है कि मुकेश अंबानी के घर के बाहर बम लदी स्कॉर्पियो कार खड़ी करने के पीछे का मकसद अब तक सचिन वाजे ने नहीं बताया है।

अभी तक अधिकारियों का मानना है कि एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति को भयभीत कर के सचिन वाजे ने मोटी रकम वसूलने की साजिश रची थी, लेकिन वो खुद ही इसमें फँस गया। सबसे बड़ा पेंच ये है कि मुकेश अंबानी जैसी हस्ती से वसूली करना सचिन वाजे जैसे स्तर के पुलिस अधिकारी के अकेले के बलबूते की बात नहीं थी, ऐसे में ये रकम आखिर जानी कहाँ थी? यहीं परमबीर सिंह के पत्र में लगे आरोपों से आगे की लीड मिलती है।

सचिन वाजे की गाड़ी में 5 लाख रुपए के नोट गिनने की मशीन मिली थी, जिससे पता चलता है कि वो वाजे वसूली के धंधे में लगा हुआ था। ED को अब NIA द्वारा दर्ज की गई FIR की कॉपी का इंतजार है, जिसके बाद मामला दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी जाएगी। इस पूरी साजिश में कौन-कौन शामिल था और वसूली का नेटवर्क कहाँ तक है, इन सबकी जाँच की जाएगी। फ़िलहाल NCP ने कहा है कि अनिल देशमुख इस्तीफा नहीं देंगे।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि गृहमंत्री पर जो आरोप लगाए गए हैं, वो गंभीर हैं और उनके खिलाफ फैसला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेना है और इस पर एक-दो दिनों में बातचीत करके फैसला ले लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी यहाँ आने से पहले इस विषय पर मुख्यमंत्री ठाकरे से भी बातचीत हुई है। उन्होंने कहा, “पत्र में 100 करोड़ वसूलने के लिए कहा गया। मुंबई पुलिस के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने पत्र में कहीं नहीं लिखा कि क्या पैसे दिए गए हैं?”

‘लड़कियों के कपड़े फाड़ कहा – हिंदुओं के खून की होली खेलेंगे’: दिल्ली में दलितों पर हमले में फरमान, शाहरुख सहित 4 गिरफ्तार

दिल्ली के सराय काले खाँ में हरिजन बस्ती में घुस कर मुस्लिम भीड़ द्वारा दलितों के साथ मारपीट किए जाने के मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली के इस इलाके में सारा बवाल शनिवार (मार्च 20, 2021) को एक दलित युवक और एक मुस्लिम लड़की की शादी के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने इस मामले में फरमान (20), शाहरुख़ (23), हसन अली (21) और राजा (19) को गिरफ्तार किया है।

सभी आरोपित पड़ोसी या आपस में रिश्तेदार हैं। पुलिस का कहना है कि शादी के कारण लड़की का परिवार उग्र हो गया और उसने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ मिल कर हमला बोल दिया। शादीशुदा जोड़ा फ़िलहाल गाजियाबाद में है। मुस्लिम भीड़ के हमले में कई लोगों को चोटें आईं। ये घटना सुबह के 10-11 बजे हुई। CCTV फुटेज में आरोपितों को दलित बस्ती में घुस कर गमले और कूलर तोड़ते हुए देखा जा सकता है।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि गली में घुस कर लोगों को मारा गया और जम कर तोड़फोड़ की गई। उन्होंने बताया कि पुलिस वाले खड़े-खड़े देख रहे थे और मुस्लिम भीड़ धमकी दे रही थी कि तुम्हारी लड़कियों को उठा लेंगे। महिलाओं ने ये भी कहा कि पुलिसकर्मियों को आरोपितों ने खरीद लिया है। आरोपितों के हाथ में तलवार थी। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि उन्हें साथ लेकर चलें, वो आरोपितों से लड़ेंगी।

महिलाओं ने बताया, “हम जाने को तैयार हैं। यहाँ बच्चों और महिलाओं को भी मारा गया है। पुलिस वाले उन्हें पकड़ ही नहीं रहे हैं। आरोपितों के हाथों में तलवार और चाकू थे। बच्चों को हमने छत पर चढ़ाया। लड़कियों को घर में छिपाया। जिस मुस्लिम लड़की से शादी हुई, उसे कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने घर के भीतर घुस कर हमें मारा है। हमलावरों ने कहा कि इस बार तुम लोग होली नहीं खेलोगे, हम हिंदुओं के खून की होली खेलेंगे।”

स्थानीय दलित महिलाओं ने डर जताया कि उनके घर के पुरुष दफ्तर जाएँगे या फिर बच्चे स्कूल जाएँगे तो फिर ये लोग उनके साथ कुछ भी कर सकते हैं। साथ ही मुस्लिम भीड़ पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के भी आरोप लगे हैं। महिलाओं के अनुसार, आरोपित कह रहे थे, “शौचालय साफ करने वालों के यहाँ हमारी लड़की नहीं जाएगी।” उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी लड़कियों को भी नहीं छोड़ और उनके कपड़े फाड़ दिए। उनके बाल पकड़ कर उन्हें मारा गया।

आरोपितों ने मुहल्ले में रखी बाइकों और साइकिलों को तोड़ डाला। साथ ही लोगों के दरवाजों को जोर-जोर से पीट कर उन्हें डराया। उन्होंने गाड़ियों को तोड़ने के लिए लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। DCP आरपी मीणा ने बताया कि पुलिस स्टेशन में घटना के बाद एक फ़ोन कॉल आया था। पुलिस ने कहा कि शादी करने वाले लड़का और लड़की बालिग हैं। लड़के की माँ ने कहा कि अगर उसके बेटे की यही मर्जी है, तो उसे कोई दिक्कत नहीं।

सरोज नामक 45 वर्षीय महिला ने बताया कि 25 से भी अधिक संख्या में आरोपित जब आए, तो वो दरवाजे पर ही खड़ी थीं। आरोपितों ने उसे किसी चीज से मारा और वो वहीं गिर कर बेहोश हो गईं। उनकी बेटी ने वहाँ आकर बचाया। महिला ने बताया कि मुस्लिम भीड़ गालियाँ बक रही थीं, अपमानजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर रही थी। पीड़ितों ने कहा कि वो अधिकतर आरोपितों को पहचानते हैं। आरोपितों ने जान से मार डालने की भी धमकी दी।

सराय काले खाँ में रहने वाले एक दलित युवक के एक मुस्लिम लड़की से प्रेम संबंध थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक युवक ने करीब छह माह पहले ही चोरी छिपे युवती से प्रेम विवाह कर लिया था। लेकिन कुछ दिन पहले ही मुस्लिम परिवार ने युवती का निकाह किसी अन्य व्यक्ति से तय कर दी थी। अपने परिवार के खिलाफ जाते हुए युवती ने कानून की शरण ली और दो दिन पहले ही सनलाइट कॉलनी थाने में अपना बयान दर्ज कराने के बाद वह दलित युवक के साथ उसके घर चली गई।