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पवार की कहानी में कई लूपहोल, नागपुर में होम आइसोलेशन की देशमुख ने ही खोल दी पोल: ₹100 करोड़ की वसूली में उलझी NCP

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पत्र से पिंड छुड़ाने की कोशिश में एनसीपी (NCP) और उलझती ही जा रही है। सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सजिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। देशमुख का बचाव करते हुए एनसीपी सुप्रीम शरद पवार ने कहा था कि पत्र में जिस समय की बात की गई है उस वक्त गृह मंत्री अस्पताल और क्वारंटाइन में थे।

सोमवार को पवार ने दावा किया कि देशमुख 15 से 27 फरवरी तक नागपुर में थे। पवार ने इसके जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि फिर इस दौरान मुंबई में वाजे और देशमुख की मुलाकात कैसे संभव है। लेकिन, इस दावे को देशमुख ने ही गलत साबित कर दिया है। उन्होंने बताया है कि वे एक प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे।

ट्विटर पर एक वीडियो जारी कर देशमुख ने कहा है कि नागपुर में 15 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इसके तत्काल बाद आवश्यक अनुमति और सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए होम क्वारंटाइन के लिए वे मुंबई निकल गए। उनका दावा है कि इसके बाद 27 फरवरी तक वह होम क्वारंटाइन में रहे।

इस वीडियो में कई कट और एडिट नजर आते हैं।

एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्विटर पर यात्रा दस्तावेज साझा करते हुए कहा है कि देशमुख प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे। 15 फरवरी को अनिल देशमुख के नाम से एक प्राइवेट प्लेन का यात्रा दस्तावेज उन्होंने साझा किया है।

इससे पहले जब पूछा गया था कि अनिल देशमुख कैसे क्वारंटाइन और आइसोलेशन में थे कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर रहे थे और खुलेआम घूम भी रहे थे, तो शरद पवार अस्पताल के कागजात दिखाने लगे थे। उन्हें इसका कोई जवाब नहीं सूझा। उन्होंने नागपुर के एलेक्सिस अस्पताल के डिस्चार्ज पेपर दिखाए थे। बाद में उसी अस्पताल के कागजात से पता चला कि उस अवधि में अनिल देशमुख को घूमने-फिरने की पूरी अनुमति थी और उन्हें किसी प्रकार के क्वारंटाइन की सलाह नहीं दी गई थी।

इस मामले में 5 बड़े सवाल उठते हैं, जिनका जवाब शरद पवार को देना चाहिए। सबसे पहला सवाल तो यही है कि जिस अवधि में अनिल देशमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, कॉन्ग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिल रहे थे और अपने मृत सुरक्षा गार्ड के परिजनों को सांत्वना देने उसके घर गए थे – तब उनके क्वारंटाइन, आइसोलेशन या फिर में होने के दावों के लिए जो कागजात शेयर किए गए, क्या वो फर्जी थे? खुद शरद पवार और अनिल देशमुख के बयानों में विरोधाभास है। जहाँ पवार ने कहा है कि देशमुख फरवरी में नागपुर में क्वारंटाइन में थे, वहीं देशमुख ने अपने बयान में खुद के मुंबई में क्वारंटाइन होने की बात कही है।

शरद पवार ने पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने के बाद यहाँ तक दावा कर दिया कि अनिल देशमुख ने फरवरी 15 को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। क्या वो ठीक उसी तरह झूठ बोल रहे हैं जैसे उन्होंने 1993 बम ब्लास्ट में मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए मस्जिद में बन होने की झूठी अफवाह फैला दी थी? तीसरा सवाल ये है कि अगर देशमुख को सच में क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी गई थी तो फिर वो घूम-घूम कर लोगों की जान संकट में डाल रहे थे?

चौथा सवाल ये है कि अगर कोरोना पॉजिटिव रहते अनिल देशमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो फिर क्या वो पत्रकारों के लिए खतरा नहीं पैदा कर रहे थे? पाँचवाँ सवाल है कि उन्होंने पूरी लाव-लश्कर के साथ अपने मृत सुरक्षा गार्ड के परिजनों से क्यों मुलाकात की थी? अनिल देशमुख का कहना है कि उन्होंने पहली बार फरवरी में 28 तारीख को घर के बाहर कदम रखा। इन विरोधाभासी चीजों पर NCP को स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।

‘क्योंकि वाजे ने ही मुझसे कहा…’: मनसुख हिरेन और उनके भाई के बीच हुई थी बात… क्या है फाइव स्टार होटल में 4 दिन रुकने का राज?

मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने और उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में आरोपित सचिन वाजे की एक डायरी NIA के हाथ लगी है। इसमें उसने कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन की एक सूची बनाई हुई है। ये डायरी निलंबित पुलिस अधिकारी के दफ्तर से मिली। अब NIA इसकी जाँच के लिए ED से संपर्क कर रही है। इस डायरी में कई बैंक खातों के विवरण भी हैं। परमबीर सिंह ने भी अपने पत्र में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वाजे को 100 करोड़ की वसूली का टारगेट दे रखा था।

भाजपा ने पहले ही माँग की है कि इस मामले की जाँच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। जाँच एजेंसियों को शक है कि भेद खुलने के डर से सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की हत्या कर दी। अब ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने इस मामले की जाँच कर रही ATS के हाथ लगे एक फोन कॉल ट्रांसक्रिप्ट के हवाले से बड़ा दावा किया है। ये बातचीत मनसुख हिरेन और उनके भाई विनोद की है। ये बातचीत कुछ इस प्रकार है:

विनोद: आप सो गए क्या? क्या हुआ?
मनसुख हिरेन: अब हमें किसी भी प्रकार का बयान दर्ज कराने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सब ठीक है।
विनोद: आपने अपने बयान में क्या लिखवाया? बताया कि उस स्कॉर्पियो का प्रयोग वाजे कर रहा था?
मनसुख हिरेन: नहीं। मैंने इस चीज का जिक्र नहीं किया।
विनोद: आपने ऐसा क्यों नहीं किया?
मनसुख हिरेन: क्योंकि सचिन वाजे ने ही मुझसे कहा है कि मैं किसी से इस बात का जिक्र न करूँ कि उस स्कॉर्पियो का प्रयोग वो कर रहा था।

NIA के पास मामला जाते ही मनसुख हिरेन की हत्या की जाँच कर रहे महाराष्ट्र ATS ने दावा कर डाला है कि बुकी नरेश धरे और निलंबित पुलिस अधिकारी विनायक शिंदे की गिरफ्तार के साथ ही उसने इस मामले को सुलझा लिया है। ATS ने कहा कि धरे ने वाजे को गुजराती सिम कार्ड उपलब्ध कराया और उसी से फोन कॉल कर के वाजे ने मनसुख हिरेन को बुलाया, जिसके बाद उनकी हत्या हुई। भाजपा ने सचिन वाजे के नाम पर कई कंपनियों के रजिस्टर होने के आरोप लगाए हैं।

उधर NIA ने एक पाँच सितारा होटल की तलाशी ली, जहाँ वाजे कुछ दिनों पहले रुका था। जाँच टीम ने नरीमन प्वाइंट के ट्राइडेंट होटल के एक कमरे में तलाशी ली। इसी कमरे में वाजे 16-20 फरवरी, 2021 को रुका था। बताया गया है कि उसने जाली आधार कार्ड से ये कमरा बुक किया था, जिसमें फर्जी नाम से उसकी तस्वीर थी। होटल के दस्तावेज और CCTV फुटेज लिए गए हैं। होटल के कमरे से भी कुछ दस्तावेज मिले हैं।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब वाजे वहाँ रुका था, उसी दौरान लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन के लिए मुंबई में कई जगहों पर उसके ही नेतृत्व में छापेमारी हुई थी। NIA अब मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में ATS से सारी जानकारी ले रही है और पीड़ित परिजनों से भी एक टीम ने मुलाकात की। भाई विनोद ने बताया कि अब तक NIA ने मनसुख हिरेन की हत्या का अलग से आधिकारिक मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन कहा कि कुछ दिनों में वो फिर मिलेंगे।

साल 2004 से निलंबित चल रहे सचिन वाजे को कोरोना महामारी में पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता का हवाला देते हुए पिछले साल महाराष्ट्र सरकार ने बहाल कर दिया था। इस दौरान वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। वाजे की बहाली और हाई प्रोफाइल मामलों को असाइन करने की परिस्थितियाँ भी जाँच के दायरे में हैं। बता दें कि निलंबित होने के बाद वाजे शिवसेना में शामिल हो गया था।

बाइक पर सवार होकर गाँवों में घुसे बंदूकधारी, 137 लोग मार गिराए: इस्लामी कट्टरपंथ से त्रस्त है नाइजर

अफ्रीकी देश नाइजर में माली सीमा के समीप बसे गाँवों में मोटरबाइक से आए बंदूकधारियों ने कम से कम 137 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सरकारी प्रवक्ता अब्दुर्रहमान जकारिया ने रविवार (मार्च 21, 2021) को सभी हत्याओं की पुष्टि की। इससे पहले टोचंबांगो (Tchombangou ) और ज़ारुमदारेई (Zaroumdareye) के पश्चिमी गाँवों में कम से कम 100 लोग मारे गए थे। 

नाइजर में ऐसे हमले राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा और मोहम्मद बजूम (Mohamed Bazoum) के राष्ट्रपति नियुक्त होने के बाद से तेज हुए हैं। जिस दिन सरकारी प्रवक्ता ने हालिया हत्याओं की पुष्टि की उस दिन बजूम को नाइजर की संवैधानिक अदालत में आधिकारिक तौर पर फरवरी के चुनावों का विजेता करार दिया गया था। इसी प्रकार जनवरी में भी जब दो गाँवों में कम से कम 100 लोग मारे गए थे उस दिन राष्ट्रपति चुनावों की तारीख की घोषणा हुई थी।

हालिया हमलों की जिम्मेदारी फिलहाल किसी समूह ने नहीं ली है। लेकिन माली और नाइजर की सीमा पर बसे गाँवों में अक्सर इस्लामी कट्टरपंथी अपना कहर बरपाते रहते हैं। इस बार भी संदेह उन पर ही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हथियारबंद लोग मोटरसाइकिल पर आए और हर उस चीज पर गोली चलाई, जो हिल रही थी। आतंकियों ने जिन गाँवों पर हमला किया, वह टाहौआ क्षेत्र में आते हैं। इस्लामी कट्टरपंथी नाइजर के गाँवों में हमले करते हैं जिसके कारण अब तक यहाँ हजारों लोग मारे जा चुके हैं। हिंसा से त्रस्त होकर 50 लाख से ज्यादा अपना घर छोड़ चुके हैं।

नाइजर के अलावा बुर्किना फासो और माली भी इसी संघर्ष से सालों से जूझ रहे हैं। यहाँ इस्लामी स्टेट और अलकायदा का कहर ज्यादा है। इन आतंकी समूहों ने हजारों की जान ली हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते हफ्ते 15 मार्च को तिलाबेरी क्षेत्र में जेहादियों ने दुकानदारों को लेकर जा रही बस को किडनैप कर लिया था और 66 लोगों को मार डाला था। इसके बाद उन्होंने डारे-डे गाँव में हमला बोला। जहाँ लोगों को मारा गया और दुकानों को आग लगाई गई। 2 जनवरी को भी दो गाँवों पर हमला हुआ था। जहाँ 100 लोगों को मौत के घाट उतारा गया।

‘चेहरे के ऊपर घमंड है, तेजाब फेंक देंगे, कहीं घूमने के लायक नहीं रहोगी’: MP नवनीत राणा ने बताया- पहले बाहर और अब संसद में शिवसैनिक ने धमकाया

महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा ने शिवसेना सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत पर धमकी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे गए पत्र में सावंत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा ने एंटीलिया बम प्रकरण में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का वाला मामला संसद में उठाया था। आरोप है कि इसी पर सावंत भड़क गए।

बता दें कि मुकेश अंबानी की मुंबई स्थित 27 मंजिला इमारत एंटीलिया के बाहर बम लदी स्कॉर्पियो मिली थी। बाद में पता चला कि सचिन वाजे ने ही इसकी पूरी साजिश रची थी। वो गिरफ्तार भी किया जा चुका है। जाँच एजेंसियों को शक है कि भेद खुलने के डर से वाजे ने ही स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या कर दी। इसके बाद मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर कई आरोप लगाए।

संसद में भी ये मामला उठा और मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वाजे के शिवसेना कनेक्शन और परमबीर सिंह के पत्र को लेकर कई सांसदों ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर प्रश्न खड़े किए। नवनीत राणा ने लिखा है कि उन्होंने एक महिला सांसद होने के नाते महाराष्ट्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मामला सदन में उठाया और उद्धव ठाकरे सरकार का विरोध किया, जिसके बाद अरविंद सावंत ने लोकसभा की लॉबी में उन्हें धमकाया।

बकौल नवनीत राणा, सावंत ने उनसे कहा, “तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, मैं देखता हूँ। तेरे को भी जेल में डालेंगे।” नवनीत राणा ने आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी शिवसेना के लेटर हेड और फोन कॉल के माध्यम से उनके चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जा चुकी है। उन्होंने सावंत के बयान को न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान करार दिया। साथ ही शिवसेना सांसद पर कड़ी से कड़ी पुलिसिया कार्रवाई की माँग की।

नवनीत राणा ने कहा कि गरीब पहले से ही परेशान है क्योंकि कोरोना और लॉकडाउन की मार तो उस पर पड़ी ही है, साथ ही उसके पेट पर भी मार पड़ी है। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में 100 करोड़ रुपए की वसूली की आग लगी है, जबकि लोगों की जेब में 100 रुपए भी नहीं हैं। इस पूरे प्रकरण पर उन्होंने कहा कि सचिन वाजे 17 वर्षों से उद्धव ठाकरे के लिए काम कर रहा था और पूरे मुंबई की वसूली को देख रहा था।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनते सचिन वाजे को उद्धव ने क्राइम यूनिट में भेजा। इस पर मैंने सदन में जनता और संविधान द्वारा दिए गए अधिकार के तहत बात की तो अरविंद सावंत को मिर्ची लग गई। मुझे कोई पुरुष बताएगा कि मेरी बॉडी लैंग्वेज कैसी होगी? मेरे तरफ से गुजरते हुए उन्होंने मुझे जेल भेजने की धमकी दी। मैंने बगल में बैठे एक साथी सांसद ने भी उनकी धमकी को सुना। मुझे पहले भी कहा जाता रहा है कि चेहरे पर इतना घमंड है, इस पर तेजाब फेंक देंगे। कहीं घूमने के लायक नहीं रहोगी।”

नवनीत राणा ने कहा कि वो महाराष्ट्र के महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और जब सदन में उन्हें धमकाया जाता है तो महाराष्ट्र की स्थिति समझ लीजिए। उन्होंने शिवसेना को ‘गुंडे विचारधारा वाली पार्टी’ बताते हुए कहा कि महिलाओं को डराने की साजिश कामयाब नहीं होगी और वो लोगों के लिए बोलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि उनमें हिम्मत है तो आज ही उन्हें जेल में डाल दिया जाए। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री को भी इस घटना से अवगत कराया।

वहीं अरविंद सावंत ने इसे सरासर झूठ करार देते हुए कहा कि एक तो वो महिला हैं और उन्हें भैया कह कर पुकारती हैं, ऐसे में कोई शिवसैनिक महिलाओं को धमकाने का काम नहीं सकता। उन्होंने नवनीत राणा के बात करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके हर बयान की वीडियो क्लिपिंग में उनकी बॉडी लैंग्वेज और सीएम ठाकरे के लिए उनके शब्दों को सुना जा सकता है। सावंत ने कहा कि मैं उन्हें क्यों धमकाऊँगा?

उन्होंने कहा कि नवनीत राणा अच्छी तरह से बात नहीं कर रही हैं और ये ठीक नहीं है। उन्होंने राणा पर सीएम ठाकरे के अपमान का आरोप लगाया। भाजपा सांसद रमा देवी ने नवनीत राणा का समर्थन करते हुए कहा, “इस मामले में नवनीत राणा ने मुझसे बात की है। एक सांसद होने के नाते अरविंद सावंत को इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए थी। मैं लोकसभा स्पीकर से कहूँगी कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।”

नवनीत राणा तेलुगु की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हालाँकि, 2010 के बाद उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है। कन्नड़ फिल्म ‘दर्शन’ उनकी डेब्यू मूवी थी, जो 2004 में रिलीज हुई थी। उन्होंने तेलुगु अभिनेताओं जूनियर NTR और बालाकृष्णा की फिल्मों में काम किया है। हालाँकि, उन फिल्मों में उनका किरदार बड़ा नहीं रहा। 2008 में आई मलयालम फिल्म ‘लव इन सिंगापुर’ में उन्हें दिग्गज अभिनेता ममूटी के साथ काम करने का मौका मिला था।

उधर पता चला है कि परमबीर सिंह के पत्र लिखने से दो महीने पहले ही वाजे रेस्ट्रॉं और बार मालिकों से पैसा इकट्ठा कर चुका था। होटल मालिकों में से एक ने बताया कि वाजे क्रॉफोर्ड मार्केट में पुलिस आयुक्त कार्यालय के परिसर के अंदर CIU कार्यालय में होटल व्यवसायियों से पैसे निकालने की अपनी दुकान चला रहा था। वाजे उद्यमियों को बुलाता था और उन्हें इस बात के लिए आश्वस्त करता था कि SSB के अधिकारी उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी नहीं करेंगे, मगर इसके बदले में वे उन्हें हर महीने पैसे देंगे।

सचिन वाजे ने पुलिस कमिश्नर मुख्यालय के अंदर से चलाई ‘अवैध वसूली का धंधा’, रेस्टोरेंट मालिकों से वसूले लाखों: रिपोर्ट

हाल ही में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने गिरफ्तार असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे से कई बार मुलाकात की और उन्हें हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था।

मिड-डे ने एक रिपोर्ट में इंडियन होटल और रेस्तरां एसोसिएशन (एएचएआर) के सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा कि निलंबित पुलिस अधिकारी ने वास्तव में पैसा वसूलना शुरू कर दिया था। एएचएआर के सूत्रों के मुताबिक वाजे, परमबीर सिंह के पत्र लिखने से दो महीने पहले ही रेस्तरां और बार मालिकों से पैसा इकट्ठा कर चुका था।

होटल मालिकों में से एक ने बताया कि वाजे क्रॉफोर्ड मार्केट में पुलिस आयुक्त कार्यालय के परिसर के अंदर CIU कार्यालय में होटल व्यवसायियों से पैसे निकालने की अपनी दुकान चला रहा था।

होटल व्यवसायी ने कहा कि वाजे फूड और ड्रिंक बिजनेस से उद्यमियों को बुलाता था और उन्हें इस बात के लिए आश्वस्त करता था कि SSB के अधिकारी उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी नहीं करेंगे, मगर इसके बदले में वे उन्हें हर महीने पैसे देंगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने होटल व्यवसायियों को यह आश्वासन भी दिया कि यदि वे नियमित रूप से उन्हें भुगतान करते हैं तो वे कानूनी पेचों से बाहर रहेंगे।

साल 2004 से निलंबित चल रहे सचिन वाजे को कोरोना महामारी में पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता का हवाला देते हुए पिछले साल महाराष्ट्र सरकार ने बहाल कर दिया था। इस दौरान वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। वाजे की बहाली और हाई-प्रोफाइल मामलों को असाइन करने की परिस्थितियाँ भी जाँच के दायरे में हैं। बता दें कि निलंबित होने के बाद वाजे शिवसेना में शामिल हो गए थे।

‘वे गाली दे रहे थे, कहा हमें दे दो, काट देंगे’: दलित सुमित की माँ की जुबानी सुनिए ‘काले खाँ’ की पूरी कहानी

दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया।

ऑपइंडिया ने इस मामले पर विस्तृत जानकारी लेने के लिए सुमित की माँ से बात की। सुमित की माँ ने बताया कि उन दोनों का 3-4 साल से चक्कर चल रहा था। उन्होंने बताया कि सुमित की उम्र 22 साल है। वह घर में सबसे छोटा और शरीफ है। उसकी मुहल्ले में कभी किसी के साथ लड़ाई नहीं हुई। उसे किसी तरह की बुरी लत नहीं है।

सुमित की माँ ने बताया, “एक दिन उसने मुझसे कहा कि मम्मी मैं उससे (मुस्लिम लड़की) प्यार करता हूँ। आप उसके घर जाकर माँ-पापा से मेरे लिए रिश्ता माँग लो। हम घर के 5-6 लोग उनके घर गए, हाथ जोड़े। उनसे कहा कि इससे हमारे बच्चे भी खुश हैं और आपके बच्चे भी खुश हैं। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, उनकी शादी कर दो। या फिर तुम उसकी शादी कहीं और कर दो, हम अपने लड़के को रोक लेंगे। उन लोगों ने हमें जलील किया। भं* कहा। हमारी जाति को लेकर बोला।”

उन्होंने आगे बताया, “लड़की पूरी तरह से बिगड़ गई। उसने रोते हुए कहा कि वो उसी से शादी करेगी। उसी के साथ रहेगी और अगर उन्होंने उनकी शादी नहीं की तो वो कुछ कर लेगी। हम बस उनकी बात सुन कर आ गए। हमने कोई लड़ाई नहीं की। बच्चे दोनों राजी हैं। आर्य समाज से भी शादी हुई है, कोर्ट मैरेज भी हुआ है। पुलिस ने सुरक्षा भी दिया है।”

सुमित की माँ ने बताया, “मुस्लिम भीड़ ने उस थाने को ही घेर लिया था, जहाँ पर उनमें राजीनामा हुआ था। जब भीड़ ने उनको पूरी तरह से घेर लिया तो पुलिस ने सुरक्षा के मद्दे नजर लड़के के परिजनों को अंदर बुला लिया। वो लोग गाली-गलौज कर रहे थे। कह रहे थे कि लड़की को दे दो, काट देंगे। अब हमारे काम की नहीं रही। इसने ईमान खो दिया।”

लड़के की माँ ने कहा कि अगर उनकी बेटी जाती है तो ले जाए, लेकिन लड़की ने जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि डर की वजह से राजीनामा के बाद उन्हें अपने घर लेकर नहीं आई। उन लोगों ने उनके घर में तोड़फोड़ की। घर में आग लगाने की कोशिश की। अगर उस दिन घर पर वो लोग होते वो मार दिए जाते। पुलिस काफी सुरक्षा के साथ उन्हें भीड़ से बचाकर लाई। मामले में 4-5 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ गाँव में शनिवार रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। मुस्लिमों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी डंडों और तलवार के साथ हिन्दुओं की संपत्ति को तहस-नहस किया

दलित युवक के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया जैसे किसी का इन्हें डर ही न रहा हो।

गोवा हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर से अजान पर लगाया रोक: नूरानी, सफा, सुन्नी शाही मदीना मस्जिद पर निगरानी के आदेश

गोवा में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दरअसल, यह आदेश वरुण प्रीओलकर नाम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। वरुण मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं, मगर दिन में पाँच बार मस्जिदों से आने वाले लाउडस्पीकर की शोर की वजह से वह अपना काम नहीं कर पा रहे थे। 

पंडितवाड़ा में नूरानी मस्जिद, सफा मस्जिद, सुन्नी शाही मदीना मस्जिद, मस्जिद सहित आसपास की मस्जिदों से दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर के शोर में काम करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। ये मस्जिदें इस्लाम के विभिन्न संप्रदायों से संबंधित हैं, जिनमें शिया और सुन्नी शामिल हैं, लेकिन अशांति का स्वरूप एक ही है।

इसके बाद वरुण ने अपनी जॉब बचाने और मानसिक शांति के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच का रुख किया और मस्जिदों द्वारा अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने न्वाइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स 2000 के अनुसार अपने मौलिक अधिकार का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने वरुण की शिकायत को दूर करने और तीन महीने के भीतर मामले को निपटाने के लिए एडिशनल कलेक्टर को निर्देश देते हुए रिट जारी की।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष एक शिकायत का मामला दर्ज किया गया था, जो वरुण की शिकायत को सुनने और मस्जिदों से प्रतिक्रिया माँगने के बाद मस्जिदों के खिलाफ लाउडस्पीकर / पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग नहीं करने का निर्देश देते हुए आदेश पारित किया है। इसमें कहा गया है कि वो संबंधित अधिकारी से अनुमति लिए बिना इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं। पुलिस को भी निर्देशित किया गया है कि वह उक्त मस्जिदों पर नियमित निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि वे उक्त आदेश का अनुपालन करें।

गौरतलब है कि इससे पहले मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर प्रयागराज की वीसी की चिट्ठी पर जिले के आईजी ने सख्त एक्शन लिया था। उन्होंने रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाए जाने के आदेश दिए थे। आईजी का कहना था कि पॉल्युशन एक्ट के तहत रात 10 बजे से सुबह के 6 बजे कर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से बैन है। 

मुस्लिम भीड़ का तलवारों से हमला, घरों में आग लगाने की कोशिश, भं* कहा: सुनें सराय काले खाँ की पीड़िता को

दलित युवक के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया। रात के 11 बजे के बाद अचानक हुए इस हमले से बस्ती में रहने वाले लोग सहम गए हैं।

ऑपइंडिया ने इस बाबत वहाँ के पीड़ितों से बात की पीड़ित महिलाओं ने उस रात की भयावह दास्ताँ को बयाँ किया। उन्होंने बताया कि हमलावर उनके घर में घुस गए थे। हमलावरों के हाथों में तलवार, चाकू, छूरी, बंदूकें और डंडे आदि थे। पीड़ितों का कहना है कि चूँकि वो लोग जगे हुए थे, इसलिए बच गए। हमलावरों ने महिलाओं के बाल पकड़ कर भी खींचे। जिससे उन्हें चोटें भी आई। जब उन्होंने बच्चों को अंदर करके दरवाजा लगाने की कोशिश की तो हमलावरों ने बाल पकड़ कर खींचा।

मुस्लिम समुदाय के हमलावरों ने दरवाजे पर ईंटें और तलवारें मारी। जिससे कुछ हद तक कई गेट भी टूटे। उन्होंने आग लगाने की भी कोशिश की। वो गाड़ियों से पेट्रोल निकाल रहे थे, मगर लोगों ने देख लिया और छत से कुछ भारी फेंक कर मारा, जिसके बाद वो वहाँ से भागे। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जब लोग थोड़े से आक्रामक हुए तो वो लोग पीछे हटे और बगल वाली गली में गए। वहाँ पर भी उन लोगों ने हमला किया, जहाँ पर 4-5 लोगों को चोटें आई है।

उन्होंने बताया कि हमला करने वाली मुस्लिम भीड़ में शामिल शबीना नाम की महिला ने उनके कौम (जाति) को गाली दी और धमकी दी कि वो खून की होली खेलेगी। उसने हमें भं* कहा। उसने कहा कि जो भी मुहल्ला वाला बोलेगा, वो पिटेगा। पीड़ितों ने न्याय की माँग की है। उनका कहना है कि उन्होंने उनके कौम को गाली दी है, इस पर एक्शन लिया जाए। उन्होंने कहा कि वो प्रशासन से माँग करती हैं कि सभी हमलावरों (वो लड़की भी, जिसका नाम शबीना है, जिसने खून की होली खेलने की धमकी दी) को सजा हो।

इसके साथ ही गली में जितनी भी तोड़-फोड़ हुई है, उसकी भरपाई भी चाहिए। उन्होंने कहा कि वो इतने ज्यादा डरे हुए हैं कि दो दिन से काम पर नहीं जा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं वो उनके पीछे बच्चों को न कुछ कर दें। उन्हें अकेला पाकर उन पर भी हमला कर सकते हैं।

चश्मदीदों ने हमें बताया कि मस्जिद की गली की तरफ से ईंट-पत्थर लेकर घुसे और बाल्मीकि बस्ती तोड़फोड़ के बाद ईंट-पत्थरों से भरी हुई थी। अभी भी वहाँ पर जगह-जगह पर ईंट-पत्थरों को आप वीडियो में देख सकते हैं। चश्मदीदों ने हमें वो गली दिखाया, जहाँ पर ईंट-पत्थर जमा था। इतना ही नहीं, चश्मदीदों ने हमें बताया कि पुलिस और मीडिया के आने से पहले उनको डरा-धमका कर पत्थरों को हटा दिया गया था।

उन्होंने बताया किउस रात पूरी गली पत्थरों से भरी हुई थी। चारों तरफ पत्थर ही पत्थर था। उन लोगों ने 30 से ज्यादा गाड़ियों का भी नुकसान किया। सारी गाड़ियाँ फिलहाल पुलिस चौकी में खड़ी हैं। उन लोगों ने बताया कि मस्जिद के पास कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। इन लोगों ने वहीं से ईंट-पत्थर लिया और उसके बाद दलित बस्ती में घुस कर आतंक मचाया।

गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ गाँव में शनिवार रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। मुस्लिमों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी डंडों और तलवार के साथ हिन्दुओं की संपत्ति को तहस-नहस किया

‘जल प्रदूषण से पेट खराब होता है, ममता के क्षेत्र में 3 मौतों को प्रदूषित जल से जोड़ना गलत’: मेयर फिरहाद हकीम

16 मार्च को दक्षिण कोलकाता में भवानीपुर के शशि शेखर रोड क्षेत्र के लगभग 50 लोग प्रदूषित जल के सेवन के पश्चात बीमार हो गए। भवानीपुर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भवानीपुर के वार्ड नंबर 73 एवं वार्ड नंबर 74 में आपूर्ति किया जाने वाला जल निकट के किसी सीवेज निकास तंत्र (Drain) के संपर्क में आने के कारण प्रदूषित हो गया। परिणामस्वरूप लगभग 50 नागरिक गंभीर रूप से डायरिया से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती हो गए। कई नवजात भी इस प्रदूषित जल के कारण संक्रमित हुए हैं। दो दिनों के अंतराल में ही संक्रमितों की संख्या बढ़कर 55 हो गई। इस प्रदूषित जल के कारण 3 लोगों की मौत हो गई जिनमें एक 5 वर्ष का बच्चा भी शामिल है।

डायरिया के इस कहर के परिणामस्वरूप कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) ने लोगों को आपूर्ति का जल उपयोग न करने का निर्देश दिया और जल के टैंकरों को भवानीपुर भेजने का प्रबंध किया।

प्रदूषण मृत्यु का कारक नहीं : फिरहाद हकीम

कोलकाता के मेयर और तृणमूल के नेता फिरहाद हकीम का कहना है, “प्रदूषण तो हुआ है, मैं इससे सहमत हूँ किन्तु घबराहट का माहौल बनाया गया। किसी की प्रदूषित जल के सेवन से मृत्यु होना सामान्य नहीं है। प्लास्टिक के कारण उत्पन्न हुई रुकावट के कारण सीवेज जल आपूर्ति को प्रदूषित कर सकता है। इसके कारण पेट में समस्या हो सकती है किन्तु मौतों को जल के प्रदूषण से जोड़ना गलत है।”

(Video Courtesy: Youtube/ABP Ananda)

कोलकाता नगरपालिका निगम (KMC) ने जल प्रदूषण को नकारा

केएमसी के सदस्य मैनाक मुखर्जी ने तो यहाँ तक कह दिया है कि जल प्रदूषित ही नहीं हुआ था। मैनाक ने बताया, “हमनें जल के नमूने को स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जाने वाली प्रयोगशाला में भेजा। वहाँ से हमें जल में किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं मिला।” हालाँकि, स्थानीय नागरिकों द्वारा नल से बदबूदार और गंदे जल की आपूर्ति की शिकायत की गई। निगम प्राधिकरण द्वारा भूमिगत जल प्रणाली में लीकेज की खोज प्रारंभ कर दी गई है।

भवानीपुर में जल प्रदूषण से हुई मौतों के विरुद्ध भाजपा का विरोध प्रदर्शन :

भाजपा ने जल प्रदूषण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए भाजपा नेता शशि अग्निहोत्री ने कहा, “वार्ड नंबर 73, मुख्यमंत्री का निवास स्थान है। यहाँ उनके साथ पार्टी के समन्वयक और चेयरमैन भी हैं। इसके पश्चात भी ऐसी घटना हुई। हमारा प्रदर्शन इसी लापरवाही के विरुद्ध है।”

जल गुणवत्ता की जाँच के लिए सेन्सर :

भवानीपुर मे हुई मौतों के पश्चात आवासीय अवसंरचना विकास निगम ने जल की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ओवरहेड टैंकों में सेन्सर लगाने का निर्णय लिया है। संस्था ने निर्देशित किया है कि न्यू टाउन एरिया में सार्वजनिक शौचालयों एवं ओवरहेड टैंकों की सफाई की जाए।

एक कर्मचारी के अनुसार न्यू टाउन क्षेत्र में 23 ओवरहेड टैंक हैं जिनमें से नौ टैंकों में जल गुणवत्ता की जाँच के लिए स्मार्ट सेन्सर लगाए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट प्रत्येक 24 घंटे में तैयार की जाएगी।

सपने में पीर बाबा का हुक्म और… सुबह दूसरे के खेत में बनाने लगा मजार, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मैनाठेर थाना क्षेत्र के इमरतपुर उधो गाँव में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति को पुलिस ने किसी और के खेत में पीर की मजार बनाने के आरोप में हिरासत में ले लिया है।

पुलिस के अनुसार, उन्हें सोमवार (21 मार्च) को सुंदरलाल से शिकायत मिली कि ताहिर नाम का एक मुस्लिम शख्स उसके खेत में पीर की मजार का निर्माण कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मौके पर पहुँची और आरोपित को हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही शांति भंग करने के आरोप में उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

पुलिस ने जब इस मामले में ताहिर से पूछताछ की तो उसने बेहद हैरान कर देने वाली बात बताई। ताहिर ने बताया कि बीती रात उसके सपने में पीर बाबा आए थे। उन्होंने सुंदरलाल के खेत में मजार के निर्माण का हुक्म दिया था। इसलिए वह सुंदरलाल के खेत में मजार बनवा रहा था। वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश था।

हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी धर्म और आस्था के नाम पर जमीन हड़पने के कई मामले सामने चुके हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में एक मामला सामने आया, जहाँ मुस्लिमों ने धार्मिक आस्था के नाम पर हिंदुओं की जमीन को हड़प कर उसे कब्रिस्तान में बदल दिया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सड़कों के किनारे जमीनों का अतिक्रमण करके बनाए गए अवैध धार्मिक ढाँचों को हटाने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के निर्णय के आधार पर यह आदेश पारित किया गया था। प्रशासन ने प्रदेश में ऐसी इमारतों को हटाना शुरू कर दिया है।