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सवाल: जय श्रीराम से ममता बनर्जी को चिढ़ क्यों, TMC सांसद का जवाब: अंतिम संस्कार में ‘छैयां छैयां’ बजे तो परेशानी होगी ही

इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक तरफ बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी तीसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद कर रही हैं। ममता बनर्जी पिछले 10 वर्षों से बंगाल की सत्ता में हैं, इस बार वह सत्ता-विरोधी और हिंदुत्व की लहर का सामना कर रही हैं। हाल ही में बरखा दत्त को दिए एक इंटरव्यू में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि ममता बनर्जी को जय श्रीराम के नारों से चिढ़ क्यों होती है?

बरखा दत्त ने ब्रायन से पूछा कि आखिर ममता जय श्रीराम के नारों से क्यों चिढ़ जाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह के दौरान वह जय श्रीराम का नारा लगाए जाने से काफी नाराज हो गई थीं। इसके अलावा 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान ममता जय श्रीराम के नारों से इतनी गुस्सा हो गई थीं कि उन्होंने काफिला रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं को खरी-खोटी सुनाई थी।

इस सवाल का जवाब देते हुए ब्रायन ने कहा कि ममता बनर्जी ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह के दौरान अपना आपा नहीं खोया। टीएमसी नेता ने कहा कि उन्हें जय श्रीराम के नारों से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि इसका उपयोग कहाँ और किस तरीके से किया गया था।

इसके बाद टीएमसी नेता ने एक अजीब तुलना करते हुए कहा कि मलाइका अरोड़ा और शाहरुख खान पर फिल्माये गाने ‘चल छैयां छैयां छैयां’ में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन अगर यह उनके दोस्त के पिता के अंतिम संस्कार में बजाया जाता है, तो उन्हें इससे परेशानी होगी।

हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ब्रायन ने अपने दोस्त के पिता के अंतिम संस्कार के लिए ममता बनर्जी के काफिले की तुलना करना क्यों उचित समझा। हिंदुओं के लिए जय श्रीराम बेहद पवित्र है। इससे स्प्ष्ट होता है कि वह इसके महत्व को नहीं समझते हैं। वह इसे कुछ इस तरह से अपमानजनक मानते हैं जैसे एक अंतिम संस्कार में बॉलीवुड गाने का बजना है। उन्हें तो शायद यह भी महसूस नहीं हुआ कि जय श्रीराम की तुलना बॉलीवुड गाने के साथ करना कितना अनुचित है। जय श्रीराम न केवल एक नारा है, बल्कि यह लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। यह एक जाप है जो हिंदुओं को खासा प्रिय है।

बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह के दौरान ममता बनर्जी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जय श्रीराम का नारा लगाए जाने से काफी नाराज हो गई थीं। उस समय पीएम मोदी भी मंच पर ही मौजूद थे और ममता ने गुस्सा जाहिर करते हुए भाषण देने से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने पीएम सहित वहाँ मौजूद अन्य विशिष्ट लोगों के सामने आरोप लगाते हुए कहा था, ”सरकारी कार्यक्रम का एक सम्मान होना चाहिए। किसी को कार्यक्रम में बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं है।”

इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ममता का काफिला गुजरने के दौरान कुछ लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगा दिए थे। इस पर वह बौखला गई थीं। उन्होंने काफिला रोककर और गाड़ी से उतरकर उन लोगों को खरी-खोटी सुनाई और पुलिस अधिकारियों को नारा लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया था।

‘गरीब जब रात को जागेगा तो क्या करेगा? बच्चे ही पैदा करेगा न?’: जनसंख्या पर बोले मौलाना बदरुद्दीन – गरीबों को TV दो

असम में कॉन्ग्रेस के गठबंधन में मौलाना बदरुद्दीन अजमल इस विधानसभा चुनाव में ‘किंगमेकर’ बन कर उभरने के ख्वाब देख रहे हैं। अब उन्होंने जनसंख्या बढ़ने व इसके नियंत्रण को लेकर अपनी ‘महत्वपूर्ण’ राय दी है। उन्होंने कहा कि इसका एक ही समाधान है और वो है ‘तालीम’ अर्थात शिक्षा, क्योंकि जब वो पढ़-लिख लेंगे तो खुद अपने अच्छे-बुरे को समझेंगे। अजमल ने कहा कि गरीबी बहुत बड़ी समस्या है और इसे दूर किए बिना जनसंख्या नियंत्रण नहीं हो पाएगा।

बदरुद्दीन अजमल ने पूछा कि गरीबों को उनके मनोरंजन के लिए क्या दिया गया है? उन्होंने कहा कि इन गरीबों के पास देखने के लिए टेलीविजन नहीं है, रहने के लिए घर नहीं है और हवा के लिए पंखा नहीं है। उन्होंने कहा, “करंट नहीं है। बिजली नहीं है। अब इंसान हैं वो भी। गरीब जब रात को उठेगा। मियाँ-बीवी हैं। दोनों जवान हैं। तो फिर रात को क्या करेंगे? वो बच्चे ही तो पैदा करेंगे।” अजमल ने ‘लल्लनटॉप’ से बात करते हुए ये सब कहा।

ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ बदरुद्दीन अजमल की ही सोच है। वो तो भला सांसद हैं। यूपीए काल में भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी ऐसा ही सोचते थे। अगस्त 2009 में खबर आई थी कि भारत के तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद मानते हैं कि देर रात तक टीवी देखना जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक अच्छा उपाय है। उन्होंने गाँवों में बिजली पहुँचाने के परिप्रेक्ष्य में ऐसा कहा था। उन्होंने कहा था, “जब बिजली ही नहीं है, फिर बच्चे पैदा करने के सिवा करने को और कुछ है ही क्या?”

उन्होंने कहा था कि जब गाँवों तक बिजली पहुँचेगी तो लोग देर रात तक टीवी देखेंगे और सो जाएँगे, जिसके बाद उनके पास बच्चे पैदा करने का मौका ही नहीं होगा। ये उस देश के मंत्री का बयान था, जिसके बारे में अनुमान लगाया गया है कि कुछ वर्षों बाद वहाँ चीन से ज्यादा जनसंख्या होगी, दुनिया में सबसे ज्यादा। 70 के दशक में संजय गाँधी जबरिया फैमिली प्लानिंग योजना लेकर आए थे। कई अविवाहित और गरीबों की तब पकड़-पकड़ के नसबंदी कर दी गई थी।

माहिद बना मोहित, दोस्ती के बाद किया रेप… फिर दोस्तों से करवाया गैंगरेप: मना करने पर एसिड से जलाने की धमकी

महाकाल की नगरी उज्जैन में लव जिहाद का मामला सामने आया है। एक मुस्लिम लड़के ने नाम बदल कर पहले एक नाबालिग लड़की को अपनी दोस्ती के जाल में फँसाया और उसके बाद उससे दुष्कर्म किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता मध्य प्रदेश के बड़वानी की रहने वाली है। वह काम करने महाराष्ट्र के मालेगाँव गई थी, जहाँ उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के औरैया में रहने वाले मुस्लिम युवक माहिद से हुई। माहिद ने पीड़िता को अपना नाम मोहित (ताकि हिंदू पहचान हो) बताकर उससे दोस्ती कर ली। इसके बाद वह उसे अपने साथ मालेगाँव से पुणे, दिल्ली और फिर औरैया ले गया। अलग-अलग शहरों में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर लड़की का रेप किया।

यह मामला प्रकाश में तब आया, जब नाबालिग के गर्भवती होने पर माहिद ने उसे बस में बिठाकर उसकी बहन के पास उज्जैन भेज दिया। यहाँ जिला अस्पताल में लड़की ने एक दिव्यांग बच्चे को जन्म दिया, जिसकी बाद में मौत हो गई। इसी अस्पताल में हिंदू जागरण मंच की कार्यकर्ता की परिचित भी भर्ती थी।

पीड़िता ने उसे बताया कि माहिद नाम के मुस्लिम युवक ने उससे नाम बदलकर दोस्ती की। उसके बाद उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और अपने दोस्तों से भी उसका रेप करवाया। इस दौरान जब वह गर्भवती हो गई तो उन्होंने उसे उसकी बहन के पास उज्जैन भेज दिया।

पीड़िता ने बताया कि माहिद उसे जान से मारने और एसिड फेंकने की धमकी भी देता था। लड़की की दर्द भरी दास्तां सुनने के बाद हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उसकी मदद की। कार्यकर्ताओं ने लड़की से फोन करवा कर माहिद को बुलवाया और उसकी जमकर पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

ASI रशीद खान ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। मामला कई शहरों से जुड़ा हुआ है, इसलिए शून्य पर केस दर्ज कर (जीरो एफआईआर) इसे बड़वानी ट्रांसफर किया जा रहा है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हो गया है। राज्य सरकार ने शनिवार (27 मार्च 2021) को ‘मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 2020’ का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस धर्मांतरण विरोधी कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्षों की सजा का प्रावधान किया गया है।

DMK सुप्रीमो स्टालिन के दामाद के 4 ठिकानों पर IT रेड, ससुर के हैं सबसे करीबी सलाहकार: पार्टी ने बताया राजनीति से प्रेरित

तमिलनाडु में DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के मुखिया MK स्टालिन के दामाद सबारेसन के आवास और दफ्तर स्थित 4 ठिकानों पर आयकर (IT) विभाग ने शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को छापेमारी की। वो तमिलनाडु के दिवंगत मुख्यमंत्री करूणानिधि की पोती सेंथराइ के पति हैं। सबारेसन के जिस घर पर छापेमारी हुई, वो राजधानी चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड के नीलंकरई में स्थित है। उनके ठिकानों पर छापेमारी अभी भी जारी है।

वहीं उनका दफ्तर तेनमपेट में स्थित है। बताया जा रहा है कि IT विभाग इन दोनों ठिकानों के अलावा दो अन्य जगहों पर भी छापेमारी कर रहा है। सबारेसन को MK स्टालिन का सबसे करीबी सहयोगी और सलाहकार माना जाता है। साथ ही वो पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से भी एक हैं। वो कई सालों से ये भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन मीडिया से दूर लो प्रोफाइल इमेज ही मेंटेन करने में विश्वास रखते हैं।

इनकम टैक्स के करीब 25 अधिकारी सबारेसन और सेंथराइ के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। शुक्रवार की सुबह से ही ये कार्रवाई चालू है। सबारेसन गुरुवार को कोयम्बटूर में थे लेकिन छापेमारी की खबर के बाद वो चेन्नई लौट आए हैं। इससे पहले तिरुवन्नामलाई में DMK के बड़े नेता EV वेलु के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। वेलु वहाँ से चुनाव लड़ रहे हैं। जब ये छापेमारी हुई, तब स्टालिन उसी क्षेत्र में उनके लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे।

वेलु ने 1993 में अरुणाई इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की थी। वहाँ भी छापेमारी हुई। इसके अलावा उनके गेस्ट हाउस में भी तलाशी अभियान चलाया गया था, जहाँ एमके स्टालिन रुके थे। DMK का कहना है कि स्टालिन जिस कमरे में रुके थे, उसमें रेड डालना अलोकतांत्रिक और अनुचित है। पार्टी ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए कहा कि IT विभाग को वहाँ कुछ नहीं मिला। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा इन संस्थानों का राजनीतिक धमकी के लिए उपयोग कर रही है।

तमिलनाडु में अप्रैल 6 को विधानसभा चुनाव होने हैं और मुख्य मुकाबला DMK व सत्ताधारी AIADMK में है। जहाँ DMK ने कॉन्ग्रेस को साझीदार बनाया है, वहीं AIADMK राजग गठबंधन का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मौसी फ़िलहाल तमिलनाडु में ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं और 1 दिन पहले ही उन्होंने मिनाक्षी मंदिर में पूजा-अर्चना की है। ओपिनियन पोल्स में स्टालिन की पार्टी को बहुमत मिलते हुए दर्शाया गया था।

‘योग करने से हिंदुत्व के बढ़ने का खतरा’: कट्टरपंथियों के दबाव में अमेरिका के अलबामा में ‘योग पर बैन’ जारी

अमेरिका के अलबामा राज्य में बीते 28 साल से योग पर लगा प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा। इस पर लगे बैन को हटाने के लिए लाया गया विधेयक कट्टरपंथियों के दवाब के कारण पारित ही नहीं हो सका।

अलबामा प्रतिनिधि सभा ने योग विधेयक को 17 के मुकाबले 84 मतों से पारित करा लिया। मंजूरी के लिए इसे राज्य की सीनेट में लाया गया था। ताकि इस पर से प्रतिबंध को हटाया जा सके। लेकिन, कट्टरपंथी ईसाइयों के चलते ऐसा नहीं हो सका।

अलबामा हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव जेरेमी ग्रे ने कट्टरपंथियो को जवाब देते हुए कहा कि वो खुद बीते 10 साल से योग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने खुद 5 साल तक कक्षाओं में योग सिखाया है और हर रविवार बैप्टिस चर्च जाता हूँ।”

आपको बता दें कि जेरेमी ग्रे 2019 से योगा पर बैन हटाने के लिए प्रयासरत हैं। वह कहते हैं कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल अलबामा के सरकारी स्कूलों में योग को ऐच्छिक विषय के तौर पर चुनने का विकल्प देना था।

हिंदूफोबिया के शिकार हैं कट्टरपंथी ईसाई

कट्टरपंथी ईसाइयों के कारण ही अलबामा की स्कूलों में 1993 से योग पर बैन लगा हुआ है। कट्टरपंथी समूहों का आरोप था कि सरकारी स्कूलों में सम्मोहन विद्या के लिए योग का इस्तेमाल किया जाता है। इस कारण चरमपंथियों के दवाब में आकर अलबामा शिक्षा बोर्ड ने सम्मोहन और ध्यान को प्रतिबंधित करने के पक्ष में वोट किया था। तभी से यहाँ योग बैन है। इन ईसाइयों को इस बात का डर सता रहा है कि योग करने से लोग धर्मांतरण कर हिंदू बन सकते हैं।

योग सनातन संस्कृति का है अहम हिस्सा

योग सदियों से हिंदू संस्कृति का एक अहम हिस्सा रहा है। इसके कई चिकित्सकीय फायदे हैं। आध्यात्मिक तौर पर आत्मा को परमात्मा से मिलाने की क्रिया योग है और वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्वस्थ जीवन का आधार है। यही कारण था कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया था।

पकड़ी गई सचिन वाजे के साथ 5-स्टार होटल में दिखी ‘मिस्ट्री वुमन’: NIA ने लिया हिरासत में, कालाधन को करती थी सफेद

समय के साथ ही एंटीलिया केस और भी पेंचीदा होता जा रहा है, लेकिन एक-एक कर इस मामले में मुख्य आरोपित व निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की करतूतों की परतें उधड़ती जा रही हैं। पिछले दिनों खबर आई थी कि मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में सचिन वाजे के साथ एक महिला भी दिखी थीं। अब इस ‘मिस्ट्री वुमन’ के राज़ से पर्दा उठ गया है क्योंकि उस महिला को NIA ने हिरासत में ले लिया है।

NIA ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) की शाम को ये कार्रवाई की। वो मार्च 16 के एक वीडियो फुटेज में ट्राइडेंट होटल में सचिन वाजे के साथ दिखी थीं। पुलिस अब तक इस मामले में 8 गाड़ियाँ बरामद कर चुकी हैं और सभी के तार सचिन वाजे से ही जुड़े हैं। इसी मामले में NIA ने दक्षिण मुंबई के एक होटल और क्लब में तलाशी ली। ठाणे की एक फ्लैट से उस महिला को हिरासत में लिया गया। महिला सचिन वाजे की करीबी सहयोगी है।

हिरासत में लिए जाने से पहले महिला से पूछताछ भी की गई थी। वो महिला सचिन वाजे के काले धन को सफ़ेद करने का काम कर रही थी। दो आईडी का उपयोग कर के वो ऐसा करती थी और वाजे की मर्सिडीज से जो नोट गिनने की मशीन मिली थी, वो भी उसकी ही थी। उस दिन वाजे अपने साथ 5 काले बैग भी लेकर होटल में घुसा था। पता चला है कि उन सबमें कैश भरा था। होटल वाला वो इलाका गामदेवी थाने में पड़ता है।

सचिन वाजे से जुड़े बरामद हुई हैं 8 कारें

जहाँ NIA की एक टीम सचिन वाजे को लेकर बाबुलनाथ इलाके में गई थी, वहीं दूसरी टीम ने ठाणे के मीरा रोड स्थित एक फ़्लैट की तलाशी ली। वो महिला इसी फ्लैट में रहती थी। कुछ दिनों पहले ही NIA ने एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, दो हार्ड डिस्क, दो वाहन नंबर प्लेट, दो डीवीआर और दो सीपीयू को गोताखोरों की मदद से मीठी नदी से बरामद किया था। एंटीलिया के बाहर विस्फोटक वाली कार मिलने के कुछ दिनों बाद उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या हो गई थी।

मनसुख हिरेन की हत्या से 3 दिन पहले सचिन वाजे और विनय शिंदे नामक निलंबित पुलिस अधिकारी एक काले रंग की ऑडी में एक साथ दिखे थे। इस मामले में एक हरे रंग की स्कॉर्पियो, एक सफ़ेद इनोवा, 2 मर्सिडीज बेंज, एक ब्लैक वॉल्वो और एक मित्सुबिशी आउटलैंडर बरामद की गई है। यही ऑडी मुंबई पुलिस मुख्यालय में कई बार पार्क की हुई देखी गई थी। ब्लैक ऑडी इस मामले में बरामद हुई 8वीं कार है।

हत्या के आरोपित विनायक शिंदे के घर से एक डायरी भी मिली है। डायरी से खुलासा हुआ है कि विनायक शिंदे ठाणे शहर के बार और पब से प्रोटेक्शन मनी के नाम पर वसूली करता था और यह वसूली सचिन वाजे के नाम पर होती थी। इस डायरी में उन बार और पब का नाम है और उनके नाम के सामने हर महीने की वसूली गई तय राशि है, जो प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली जाती थी। उसने तकरीबन 30 बार और क्लब से प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली की थी।

‘सुषमा और जेटली की मौत का कारण PM मोदी’: स्टालिन के बेटे को दोनों की बेटियों ने दिया करारा जवाब

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी DMK के अध्यक्ष MK स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्रियों सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणी की, जिससे दोनों के परिजन दुःखी हो गए और उन्हें तगड़ा जवाब दिया। उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया था कि सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की मृत्यु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें प्रताड़ित किए जाने और उन पर दबाव बनाए जाने के कारण हुई।

गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को उदयनिधि स्टालिन ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “सुषमा स्वराज नाम की एक महिला हुआ करती थी। पीएम मोदी द्वारा बनाए गए दबाव के कारण उनकी मृत्यु हुई। अरुण जेटली नाम के एक व्यक्ति हुआ करते थे। पीएम मोदी द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण उनकी मृत्यु हुई।” उन्होंने प्रधानमंत्री पर वेंकैया नायडू को भी साइडलाइन करने का आरोप लगाया। नायडू फ़िलहाल भारत के उप-राष्ट्रपति हैं।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानिस्वामी नहीं हैं कि पीएम मोदी के सामने झुक जाएँगे, वो ‘कलैन्गर (करूणानिधि)’ के पोते हैं। उदयनिधि के आरोपों का जवाब सुषमा स्वराज की बेटी बाँसुरी स्वराज और अरुण जेटली की बेटी सोनाली जेटली बख्शी ने दिया। बाँसुरी स्वराज ने उदयनिधि को हिदायत दी कि वो चुनावी प्रोपेगंडा के लिए उनकी माँ के नाम का इस्तेमाल न करें। बाँसुरी ने कहा कि उनका बयान एकदम गलत है।

बाँसुरी स्वराज ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा मेरी माँ सुषमा स्वराज को अधिक से अधिक आदर और सम्मान दिया है। यहाँ तक कि सबसे कठिन क्षणों में भी प्रधानमंत्री और भाजपा हमारे साथ मजबूती से खड़ी रही। उदयनिधि, आपके बयान से हमें बहुत ठेस पहुँची है।” सुषमा स्वराज की मृत्यु अगस्त 6, 2019 को कार्डियक अटैक के कारण हुई थी। AIIMS दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था। वो प्रथम मोदी सरकार में विदेश मंत्री थीं।

वहीं सोनाली जेटली बख्शी ने उदयनिधि पर पलटवार करते हुए लिखा, “मैं जानती हूँ कि आप पर (उदयनिधि स्टालिन) चुनावी दबाव है, लेकिन अगर आप झूठ बोलेंगे और मेरे पिता की यादों का अपमान करेंगे तो मैं चुप नहीं बैठूँगी। पीएम मोदी और मेरे पिता (अरुण जेटली) के बीच ऐसा समन्वय था, जो राजनीति से परे है। काश! आप इतने भाग्यशाली होते जो इस दोस्ती को समझ पाते।” भारत के वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली की मृत्यु अगस्त 24, 2019 को हुई थी। उन्हें कई बीमारियाँ थीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को तमिलनाडु के धारापुरम में एक चुनावी सभा में मार्च 25, 1989 को हुए जयललिता के अपमान का मुद्दा उठा कर DMK के महिला-विरोधी रवैये की बात की थी। उस दिन DMK नेताओं ने भरी सभा में उनकी साड़ी खींचकर, बाल नोचकर उन्हें चप्पल मारी थी। जयललिता तमिलनाडु की 6 बार मुख्यमंत्री रही थीं। उससे पहले वो तमिल अभिनेत्री थीं।

उदयनिधि स्टालिन राजनेता होने के साथ-साथ तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता व निर्माता भी सक्रिय हैं। तमिल के कई बड़े फिल्मों में उन्होंने पैसे लगाए हैं। 2012 में उन्होंने बतौर लीड अभिनेता एक रोमांटिक फिल्म से डेब्यू किया था। वो 15 फिल्मों में दिख चुके हैं। DMK ने उन्हें पार्टी के यूथ विंग का सेक्रेटरी बना रखा है। उनकी पत्नी कीरुथीगा ‘इनबॉक्स 1305’ नामक लाइफस्टाइल मैगजीन चलाती हैं।

दूसरी सीट से नहीं लड़ेंगी ‘दीदी’ से ‘बेटी’ बनीं ममता: हिंदुत्व की लहर के बीच ‘विक्टिम कार्ड’ कितना कारगर?

पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव 2021, कई मायनों में अलग है। इसे काफी समय तक याद रखा जाएगा। इस चुनाव में एक ओर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनैतिक महत्वाकांक्षा है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, अमित शाह की रणनीति और बीजेपी की सांगठनिक क्षमता के साथ-साथ हिंदुत्व की लहर है। इस बीच ममता बनर्जी के नंदीग्राम के अलावा किसी और सीट से लड़ने की संभावनाओं को टीएमसी ने खारिज कर दिया है।

बंगाल के चुनावों को लेकर चुनावी विद्वान कुछ भी आकलन करते रहें, किन्तु ममता बनर्जी का व्यवहार उनकी पराजय के भय की कहानी कहता है। चाहे वो ‘जय श्री राम’ के नारे से खीझने की बात हो अथवा मुस्लिम तुष्टिकरण की, पीएम मोदी के विरुद्ध उनकी कड़वी भाषा हो अथवा बंगाल की राजनैतिक हिंसाओं पर उनकी चुप्पी, सभी इसी बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि ममता बनर्जी अपनी पराजय के भय को महसूस कर रही हैं। अपने शुरुआती राजनैतिक जीवन से ही एक राजनैतिक योद्धा के रूप में पहचान बनाने वाली ममता बनर्जी अचानक से पीड़ित कैसे बन गईं? क्या सच में बंगाल की ‘दीदी’ कमजोर हो रही है अथवा यह उनकी रणनीति का हिस्सा है?

इसका उत्तर तो उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ही दे सकते हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को बंगाल की ‘दीदी’ से ‘बेटी’ में बदल दिया।

इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने बताया कि ‘दीदी’ एक सशक्त व्यक्तित्व को दर्शाता है, किन्तु ‘बेटी’ इस बात पर जोर डालता है कि लोगों को साथ खड़े होने की आवश्यकता है। इसलिए स्लोगन दिया गया, ‘बांग्ला निजेर मेये-केइ चाए’ जिसका अर्थ है कि बंगाल अपनी बेटी को चाहता है। बंगाल में भाजपा की बढ़ती लहर का सामना करने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस ने प्रशांत किशोर की इसी रणनीति को अपनाया।    

प्रशांत किशोर की इस रणनीति का अर्थ था कि बंगाल में ममता बनर्जी को ‘दीदी’ के स्थान पर एक ऐसी ‘बेटी’ के रूप में प्रदर्शित किया जाए जो बाहरी लोगों से लड़ रही है। लक्ष्य साफ था ममता बनर्जी को एक ‘विक्टिम’ के रूप में दिखाना। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की का जो ड्रामा रचा गया वह इसी रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है।  

ममता का नंदीग्राम वाला एपिसोड

पिछले महीने ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके साथ चार-पाँच लोगों ने धक्का-मुक्की की जिससे उनके पैरों में चोट आ गई थी। ममता ने कहा कि उस समय वहाँ पुलिस भी नहीं थी। ममता ने इसे एक साजिश कहा था जिससे उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा जा सके। हालाँकि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पूरी घटना एक छोटा सा एक्सीडेंट था और वहाँ धक्का-मुक्की जैसा कुछ हुआ ही नहीं था। साथ ही ममता पुलिस से घिरी हुईं थी।

ममता का यह विक्टिम कार्ड बुरी तरह से असफल रहा। बंगाल में ममता बनर्जी का ‘दीदी’ से ‘बेटी’ तक का सफर एक रणनीति का ही हिस्सा था जो बंगाल में ममता को ‘विक्टिम’ बताकर वोट लेने के तरीके पर आधारित थी। प्रशांत किशोर ने यही तय किया था कि ममता को बंगाल की एक ऐसी ‘बेटी’ के रूप में दर्शाया जाए जो अपने ही राज्य में ‘बाहरी’ लोगों से लड़ रही है और बंगाल की जनता को उसके साथ खड़े होने की आवश्यकता है।

‘या मूत्र! गौ मूत्र’: इस्लामिक आतंकियों की जुबान में स्वरा भास्कर ने BJP का उड़ाया मजाक

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को इस्लामी आतंकियों की भाषा में भाजपा का मजाक उड़ाने का प्रयास किया। स्वरा ने अहाना पाठक नाम की एक ट्विटर यूजर के ट्वीट पर गौ मूत्र को लेकर टिप्पणी की।

अहाना ने अपने ट्वीट में भाजपा के चुनाव चिह्न कमल को निशाना बनाते हुए लिखा, “कमल उसी के दिमाग में खिलता है जिसमें गोबर भरा हो।” इसी ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए स्वरा ने बताया कि गोबर के अलावा उनके दिमाग में “या मूत्र! गौ मूत्र!” भी हो सकता है।

गौरतलब है कि स्वरा भास्कर ने भाजपा को निशाना बनाने के लिए जैसे गौ मूत्र शब्द का इस्तेमाल किया, उसी प्रकार इस्लामी आतताई भी हिंदुओं पर हमला बोलने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करके हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा दिखाते रहे हैं।

साल 2019 में पुलवामा हमले के आतंकी ने भी गौ मूत्र का नाम लेकर हिंदुओं को निशाना बनाया था। अपने आखिरी वीडियो में उसने कहा था, “गौमूत्र पीने वाले भद्दे लोग उनके आक्रमणों का सामना नहीं कर पाएँगे।”

बता दें कि हिंदू धर्म में गौ के पूजनीय होने के कारण उसके दूध, गोबर, मूत्र को हर कर्मकांड में बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसे में वामपंथी और कट्टरपंथी अक्सर हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए इसे घृणा और उपहास की नजरों से देखते हैं। अक्सर गाय के गोबर और गौमूत्र को लेकर इनकी उलटी-सीधी बयानबाजी सामने आती रहती है। 

पिछले दिनों वामपंथियों, कट्टरपंथियों और आतंकियों से हटकर एक आईपीएस महिला अधिकारी ने गौ मूत्र पर तंज कसा था। उस समय तजिंदर सिंह ने वामपंथियों को कैंसर बताया था, जिसके बाद असलम खान नाम की महिला आईपीएस ने तजिंदर सिंह बग्गा के एक ट्वीट पर लिखा कि क्या उन्हें गौ मूत्र से सही नहीं किया जा सकता।

‘जान पर खेलकर गया… फिर भी कहा केस वापस लो’: मुख्तार अंसारी पर कार्रवाई को लेकर मुलायम सरकार ने कैसे डराया, पूर्व DSP ने बताया

साल 2004 में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के वाराणसी यूनिट के प्रभारी रहे पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह यह है कि योगी सरकार ने उन पर किए गए केस वापस ले लिए हैं। सिंह पर मुलायम सरकार के जमाने पर केस हुआ था और उन्हें जेल भी भेजा गया था।

उस समय इस मामले पर काफी हंगामा हुआ था। असल में सिंह ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) लगाया था। इसे वापस लेने के लिए उन पर इतना दबाव डाला गया कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के कुछ महीने बाद ही उन पर केस दर्ज किया गया था।

17 साल पुरानी इस घटना को लेकर एक टीवी चैनल से बात करते हुए सिंह भावुक हो गए और बताया कि उन पर किस कदर दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय में उन्होंने अपनी जान पर खेलकर मशीनगन बरामद किया था। कोई जाने को भी तैयार नहीं था। सबको डर था कि लाइटगन है पता नहीं कितनी फायर एक बार में हो। कौन बचेगा कौन मरेगा। उसके बाद भी ऐसा कहा गया कि आप लोग केस वापस लो नहीं तो आप लोगों को जेल में डाल देंगे। ऐसी धमकियों में कोई कैसे काम करता।

अपने इस्तीफे पर बात करते हुए वह बोले कि इन्हीं धमकियों के कारण उन्होंने सर्विस से बाहर होना चुना। आम नागरिकों की तरह जीना चुना। वह बोले कि उन्होंने अपने इस्तीफे से जनता को ये दिखाया कि उनके चुने हुए नेता किस तरह से काम करते हैं। इसलिए सोचें कि दोषी कौन है।

संघर्षों पर बात करते हुए शैलेंद्र ने कहा कि 17 साल हम किस परिस्थिति में थे, ये कोई नहीं पूछता है। नौकरी छोड़ने का दर्द नहीं है। लेकिन ये सोचते हैं कि हम लोग कैसी परिस्थितियों में जीते हैं। कैसे हमारी जान बची है। परिवार वाले चिंता करते हैं।

इस्तीफे के समय शैलेंद्र ने सिर्फ़ 10 साल की ड्यूटी की थी। 20-21 साल उनकी नौकरी के बचे थे। लेकिन बीच में ऐसे हालत पैदा हो गए कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वह बताते हैं कि वह जब जेल गए तो योगी आदित्यनाथ ने उनके परिवार को फोन करके कहा था, ‘जब मैं आऊँगा तो न्याय करूँगा।’ आज उन्होंने वही किया। वह कहते हैं, “मेरा परिवार उनका आभारी है। आगे किसी के साथ ऐसा न हो इसका मैं अनुरोध करूँगा”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश का खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी इस समय पंजाब जेल में बंद है। पिछले दिनों वह मोहाली की कोर्ट में पेश हुआ। लेकिन उसे लेकर आई एंबुलेंस पर विवाद हो गया है। दरअसल जिस एम्बुलेंस से पुलिस ने उसे मोहाली कोर्ट में पेश किया, उसका रजिस्ट्रशन तो बाराबंकी जिले का है, लेकिन अब यह एंबुलेंस पंजीकृत ही नहीं है। इसके अलावा वह अस्पताल भी फर्जी है, जिसका नाम एंबुलेंस पर लिखा था।

न्यूज 18 के अनुसार, जिस अस्पताल के नाम से एंबुलेंस नंबर UP41 AT 7171 का रजिस्ट्रेशन बताया जा रहा है, वह असल में है ही नहीं। इसकी मियाद साल 2015 में खत्म हो चुकी है। एंबुलेंस की फिटनेस भी साल 2017 में एक्सपायर हो चुकी है। बाराबंकी स्वास्थ्य विभाग के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं है।