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‘भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में लगा है RSS’: सिखों के संगठन ने कहा- कृषि कानून वापस लो, संघ को बैन करो

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने एक प्रस्ताव पास किया है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। संघ पर प्रतिबंध लगाने और कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की माँग की गई है।

प्रस्ताव में एसजीपीसी ने आरोप लगाया है कि आरएसएस दूसरे पंथों और अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता का हनन कर भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाना चाहता है। उसके ‘हिन्दू राष्ट्र’ निर्माण की योजना के कारण अल्पसंख्यकों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह लगातार आरएसएस के विरोध में बोलते आए हैं और आरएसएस को बैन करने की माँग भी उन्होंने कई बार की है। जून 2020 में ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ की बरसी पर कहा था कि प्रत्येक सिख खालिस्तान चाहता है और यदि सरकार खालिस्तान की माँग स्वीकार करती है तो हमें और कुछ नहीं चाहिए। 2019 में सिंह ने कहा था कि आरएसएस देश के हित में नहीं है। यह देश को बर्बाद कर देगा। सरकार को इसे बैन करना चाहिए, क्योंकि आरएसएस के कार्य देश को विभाजित करते हैं, न कि संगठित।

30 मार्च 2021 को पास प्रस्ताव कहा गया है कि भारत एक बहुधर्मी, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश है। प्रत्येक धर्म का स्वतंत्रता में योगदान है और विशेषकर सिखों का। किन्तु कुछ समय से आरएसएस के ‘हिन्दू राष्ट्र’ की योजना के कारण अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है। एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध इस प्रस्ताव में आरएसएस की जमकर आलोचना की गई है और सरकार से यह माँग की गई है कि वह अल्पसंख्यकों के हितों को सुरक्षित करे।

आरएसएस के विरुद्ध एसजीपीसी का प्रस्ताव

एसजीपीसी ने कृषि कानूनों के विरुद्ध भी प्रस्ताव पास किया है। इसमें कृषि सुधार कानूनों को ‘काला कानून’ कहा गया है। प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से माँग की गई है कि इन कृषि कानूनों को खत्म किया जाए।

कृषि सुधार कानूनों के विरुद्ध प्रस्ताव

प्रस्ताव में 26 जनवरी के मार्च दौरान हुई हिंसा की जाँच और इस मामले में गिरफ्तार लोगों की तत्काल रिहाई की भी माँग की गई है।

‘असम को प्यार करने वाला हर व्यक्ति आहत है’: अजमल को PM मोदी ने घेरा, गमोसा का अपमान करते दिखे थे AIUDF के मुखिया

असम में विधानसभा चुनावों के बीच एक चुनावी रैली में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने असम के सांस्कृतिक प्रतीक ‘गमोसा’ का अपमान किया। रैली में अजमल गमोसा को फेंकते नजर आए। इसके बाद AIUDF मुखिया की हर जगह आलोचना शुरू हो गई। आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस हरकत पर अजमल को घेरा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों की भावनाएँ आहत हुई है और उनमें गुस्सा है।

बता दें कि कल मौलाना बदरुद्दीन अजमल, नगरबेरा में एक रैली के दौरान अपने ही पार्टी कार्यकर्ता पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने गमोसा को कार्यकर्ता पर फेंका। यह उन्हें अभिवादन में दिया गया था, मगर कार्यकर्ता से नाराज होते ही वह सार्वजनिक तौर पर इसका अपमान करने से नहीं चूके।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रैली में हो रही बेवजह की देरी से अजमल अपने कार्यकर्ता से नाराज थे। उन्हें चिंता थी कि अगर रैली में ही देर हो गई तो उनका हेलीकॉप्टर मौसम के कारण टेक ऑफ नहीं कर पाएगा।

बता दें कि गमोसा असम के लिए लोगों के लिए सिर्फ़ कोई कपड़े का टुकड़ा नहीं है। इससे उनकी सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। हाल में पीएम मोदी इसे धारण किए नजर आए थे। उनके कारण इसे राष्ट्रीय प्रसिद्धि भी मिली। 

इस गमछे के तीन किनारे लाल रंग के होते हैं और चौथे किनारे पर स्थानीय और प्राकृतिक कलाकृतियाँ बनी होती हैं। इसमें चित्रकारी लाल रंग की होती है। इसे खास त्योहारों पर पहना जाता है।

गमोसा की इतनी महत्ता के कारण ही अजमल की हरकत को असमिया संस्कृति का अपमान कहा जा रहा है। भाजपा ने भी इसे शेयर कर AIUDF और कॉन्ग्रेस के गठबंधन पर सवाल उठाया है। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट करके कहा कि ये गठबंधन असम की संस्कृति और धरोहर को अपमानित करने के लिए हुआ है।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी गमोसा के निरादर पर अजमल को घेरा। वहीं पीएम मोदी ने आज कोकराझार में कहा, “कल पूरे असम ने देखा है कि कैसे असम की पहचान, असम की बहनों के श्रम के प्रतीक, गमोसा का सरेआम अपमान किया गया। असम को प्यार करने वाला हर व्यक्ति, इन तस्वीरों को देखकर बहुत आहत है, गुस्से में है। इस अपमान की सजा कॉन्ग्रेस को तो मिलेगी ही, पूरे महाझूठ को मिलेगी।”

उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है जब बदरुद्दीन अजमल को इस तरह गुस्से में देखा गया हो। इससे पहले वह रिपोर्टर पर बूम माइक फेंकते नजर आए थे। 

‘TDP के घटते जनाधार से घबरा चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी का BJP में किया विलय’: आंध्र की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘अप्रैल फूल’ से भड़की

आज गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को ‘अप्रैल फूल’ बनाने के लिए एक पत्रकार ने कुछ ऐसा लिख दिया, जिससे आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी TDP नाराज़ हो गई। ये लेख ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ के रेजिडेंट एडिटर श्रीराम कर्री ने शेयर किया था, जिस पर चंद्रबाबू नायडू की पार्टी भड़क गई। दरअसल, इस ‘खबर’ में लिखा है कि 3 बार मुख्यमंत्री रहे नायडू ने अपनी लड़खड़ाती पार्टी का भाजपा में विलय करने का निर्णय लिया है।

इस पर बौखलाती हुई TDP ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि केवल मूर्ख ही ‘अप्रैल फूल’ मनाने के लिए ख़बरों का इस्तेमाल करते हैं। TDP ने लिखा कि ‘अप्रैल फूल डे’ का फायदा उठा कर श्रीराम कर्री ने फेक न्यूज़ फैलाने का काम किया है, जिससे न सिर्फ उन्होंने पत्रकारिता को नीचे धकेला है, बल्कि पाठकों को भी निराश किया है। तेदेपा ने लिखा कि उस पत्रकार ने ‘अपने मालिकों के साथ खुद के विलय’ का खुलासा किया है, जिससे उसे इनाम मिलेगा।

DC के उस लेख में लिखा है, “TDP के नेताओं को ऐसा लगता है कि पार्टी के भीतर जोश की भारी कमी है और सत्ताधारी YSRCP से अगले 3 वर्षों में सत्ता छीनने की छोटी सी उम्मीद ही बची है। लोगों के घटते समर्थन और हर जिले में कैडर और नेताओं के अलग होने के बाद नायडू ने ये फैसला लिया है। चिरंजीवी ने इसी तरह अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय किया था। अभी ये साफ़ नहीं है कि क्या TDP से भाजपा में गए किसी पूर्व राज्यसभा सांसद ने बिचौलिए की भूमिका निभाई।”

लेख में आगे लिखा है, “करार के अनुसार, नायडू ने बिना शर्त अपनी पार्टी का भाजपा के साथ विलय कर केंद्रीय राजनीति में जाने की योजना बनाई है। TDP ने शर्त रखी थी कि चंद्रबाबू नायडू को केंद्रीय कैबिनेट में एक बड़े विभाग का मंत्री बनाया जाए, जिसे भाजपा ने ठुकरा दिया। लेकिन, उन्हें जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट रैंक मिल सकता है। MLC, TDP सचिव और नायडू के बेटे नारा लोकेश के भविष्य को लेकर भी भाजपा ने कोई वादा नहीं किया है।”

खबर के अंत में लिखा था कि ये ‘अप्रैल फूल जोक’ है। आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सुनील देवधर ने भी इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया और पूछा कि क्या ये ‘अप्रैल फूल जोक’ है? बता दें कि TDP कभी राजग का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन 2018 में पार्टी भाजपा नीत गठबंधन से अलग हो गई थी। इसके बाद नायडू ने कई बड़े नेताओं से मिल कर तीसरे मोर्चे की तैयारी शुरू कर दी थी।

लेकिन पार्टी को धरातल पर आते समय नहीं लगा क्योंकि अगले ही साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उसे जगन मोहन रेड्डी की पार्टी से कड़ी पटखनी मिली। इसके बाद नायडू की पार्टी के मंत्रियों सहित 50 बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा। कहा जाता है कि एक रैली में नायडू ने NDA से अलग होने पर अफ़सोस भी जाहिर किया था। फ़िलहाल नायडू और उनकी पूर्ववर्ती सरकार भ्रष्टाचार के कई आरोपों से जूझ रही है।

BJP विधायक अरुण नारंग पर हमले के आरोपितों का 20 वकीलों ने किया समर्थन, मुफ्त कानूनी मदद की पेशकश

पंजाब के अबोहर से बीजेपी विधायक अरुण नारंग के साथ मारपीट करने वाले कथित प्रदर्शनकारियों के समर्थन में वकील उतर आए हैं। बठिंडा और मुक्तसर जिले के कम से कम 20 वकीलों ने नारंग पर हमले के आरोपितों का समर्थन करते हुए मुफ्त कानूनी सहायता की पेशकश की है।

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू सिधुपुर) की मुक्तसर ईकाई के अध्यक्ष सुखदेव सिंह और 26 अन्य के खिलाफ मालौट शहर में भाजपा विधायक नारंग की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था।

नांरग से साथ यह घटना उस वक्त हुई, जब वे राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे। प्रदर्शनकारी पहले से ही भाजपा कार्यालय पर थे। नारंग पहुँचे तो इन लोगों ने उन पर स्याही फेंकी और उनकी कार को भी गंदा किया। जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाहर निकले तो प्रदर्शनकारियों ने उनके कपड़े फाड़कर बीच सड़क पर उन्हें नंगा कर दिया था।

नारंग ने ऑप इंडिया को बताया कि ये स्पष्ट नहीं है कि कौन लोग किसानों को भड़का रहे हैं। ऐसा लगा जैसे उनकी योजना मेरी हत्या करने की थी। हालाँकि, उन्होंने किसान संघ के झंडे लिए थे। लेकिन वह गुंडे थे। उनके खिलाफ जाँच होनी चाहिए और जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।

अरुण नारंग से मारपीट करने वालों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के ऐलान करने वाले 20 वकीलों में से एक रामपुर फूल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीतपाल सिंह मंदर ने कहा कि भीड़तंत्र पूरे देश में है। ये प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो ये पक्का करें कि संवेदनशील जगहों पर भीड़ इकट्ठी न हो। पुलिस ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। अगर भीड़ वहाँ इकट्ठा हुई थी तो उसे पुलिस को हटाना चाहिए था। उन्होंने बीजेपी नेताओं को भी नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को पहले से तैयार रहना चाहिए था, जब वो जानते थे कि उनके खिलाफ नफरत का वातावरण है।

वकील ने मारपीट के मामले में हत्या की कोशिश का केस दर्ज करने को गलत ठहराया और कहा कि इस केस में धारा 355 के तहत एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि किसी के कपड़े फाड़ने का अर्थ हत्या की कोशिश नहीं है।

वहीं वहीं नारंग ने पुलिस पर अपनी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अबोहर की जनता और उनके परिवार की दुआओं ने उन्हें भीड़ से बचाया। उन्होंने मानसिक तौर पर मेरी हत्या की कोशिश की, ताकि भावनात्मक रूप से मुझे खत्म किया जा सके। लेकिन, आप सभी का समर्थन देखकर मुझे पूर्ण विश्वास हो गया है कि नारंग को मिटाना इतना आसान नहीं है।अबोहर के विधायक अरुण नारंग ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि अबोहर की जनता और उनके परिवार की दुआओं ने उन्हें भीड़ से बचाया। उन्होंने मानसिक तौर पर मेरी हत्या की कोशिश की, ताकि भावनात्मक रूप से मुझे खत्म किया जा सके। लेकिन, आप सभी का समर्थन देखकर मुझे पूर्ण विश्वास हो गया है कि नारंग को मिटाना इतना आसान नहीं है।

AAP ने चाँदनी चौक को लेकर फैलाया झूठ, यूजर्स ने कहा- ‘दो अलग जगह की तस्वीरों से केजरीवाल जनता को बना रहे उल्लू’

हर सरकार अपने काम-काज का प्रचार करती है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी यही किया। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली का विकास कितने अच्छे तरीके से किया है यह दिखाने के लिए आम आदमी पार्टी ने ‘अप्रैल फूल’ की पूर्व संध्या पर दो अलग-अलग स्थानों की तस्वीर को चाँदनी चौक का बताकर लोगों को मूर्ख बना दिया।

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दो तस्वीरों को मिक्स करके ट्वीट किया, जिसमें दिल्ली के चाँदनी चौक को पहले और बाद के तौर पर दिखाया गया था। पहली इमेज में सँकरी गलियाँ और भीड़-भाड़ वाली गली को दिखाया गया है। दूसरी तस्वीर में चौड़ी और साफ सुथरी सड़क और चारों तरफ हरियाली दिखाई गई थी।

आप के समर्थकों के लिए यह पिक्चर बहुत ही मनमोहक रही होगी कि किस तरह से केजरीवाल दिल्ली के लिए आशा की किरण बनकर आए हैं। लेकिन, ध्यान से देखने पर स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि दोनों इमेज अलग-अलग स्थानों की है।

आप के इस फ्रॉड को दिल्ली वासियों ने पकड़ लिया और ट्विटर पर आम आदमी पार्टी की क्लास लगाते हुए एक यूजर ने लिखा, “अगर यह सच्चा बदलाव है तो इसके लिए सरकार को धन्यवाद, लेकिन मुझे पूर्ण विश्वास है कि केजरीवाल ने इसमें भी कोई झोल किया है। दाई और बाईं तस्वीर दोनों एक ही जगह की नहीं है।”

एक अन्य ट्वीट में अस्वत्थामा लिखते हैं, “अगर केजरीवाल ने इसका आधा भी बदलाव किया होता तो वह टीवी, रेडियो, न्यूज पेपर से दुनियाभर में इसका प्रचार करते। केजरीवाल ने वैक्सीनेशन को लेकर खुद का प्रचार किया, जिसमें उनका शून्य प्रतिशत भी योगदान नहीं था।”

दिल्लीवासियों को अच्छी तरह से पता है कि केजरीवाल केवल क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उसमें उनका कोई योगदान नहीं है।

एक अन्य यूजर ने आम आदमी पार्टी की तस्वीर को लेकर लिखा, “दोनों तस्वीरें अलग-अलग जगहों की हैं। केजरीवाल जनता को उल्लू बना रहे हैं।”

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला, मीडियाकर्मियों को भी बनाया निशाना

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम से बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला करने की खबर सामने आ रही है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक सतेंगबाड़ी क्षेत्र में शुभेंदु के काफिले को निशाना बनाया गया। बंगाल की जिन 30 सीटों पर दूसरे चरण में आज (अप्रैल 1, 2021) मतदान हो रहा है, उनमें एक नंदीग्राम भी है। इस हमले में अधिकारी के काफिले में मौजूद कुछ गाड़ियों को नुकसान हुआ। घटना के बाद अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगलराज है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, नंदीग्राम के कमलपुर के बूथ नंबर 170 पर मीडियाकर्मियों पर हमला हुआ है। शुभेंदु अधिकारी ने हमले को लेकर कहा, “ये पाकिस्तानियों के काम हैं। ‘जय बांग्ला’ बांग्लादेश का स्लोगन है। एक निश्चित पार्टी के वोटर ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।”

इंडिया टीवी के अनुसार, घटना में उनका कैमरामैन जख्मी हो गया। मीडिया चैनल ने एक वीडियो शेयर की है, इसमें उपद्रवी उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंकते दिख सकते हैं।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के केशपुर में भाजपा उम्मीदवार प्रीतीश रंजन कोनार के काफिले पर भी हमला हुआ है। रंजन की भी गाड़ियों पर पथराव किया गया। इधर, वेस्ट मिदनापुर में बीजेपी के तन्मय घोष ने आरोप लगाया कि उनकी कार पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने हमला किया है। इतना ही नहीं बीजेपी की महिला एजेंट को भी मारा गया है। बीजेपी नेता का कहना है कि जब वो पुलिस स्टेशन गए तो उनकी शिकायत भी दर्ज नहीं की गई।

वहीं आज ही नंदीग्राम के एक नंबर ब्लॉक में एक भाजपा कार्यकर्ता का फंदे से लटकता शव मिला। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि TMC के गुंडों ने उदय दुबे को मार कर लटका दिया, जबकि तृणमूल ने भाजपा पर लाशों की राजनीति खेलने का आरोप मढ़ा है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल और असम में आज दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। बंगाल की 30, असम की 39 सीटों पर वोट डल रहे हैं। गुरुवार सुबह से ही कई सीटों पर ईवीएम में गड़बड़ी और हिंसा की खबरें आ रही हैं। इस दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने एक दूसरे पर वोटरों को धमकाने का आरोप भी लगाए हैं।

झारखंड: टॉफी का लालच देकर 7 साल की बच्ची को अपनी दुकान पर ले गया राशन दुकानदार मोहम्मद इक़बाल, फिर किया रेप

झारखंड की राजधानी राँची में टॉफी का लालच देकर एक 7 साल की बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है। ये घटना डोरंडा की है, जहाँ 28 वर्षीय मोहम्मद इकबाल उर्फ़ विक्की ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपित रोजमर्रा की चीजों की दुकान चलाता है। उसने बच्ची को टॉफी का लालच दिया और उसे अपने साथ अपनी दुकान पर ले गया। वहाँ उसने बच्ची के साथ रेप किया।

मामला संज्ञान में आने के बाद राँची की डोरंडा पुलिस ने छापेमारी शुरू की और टॉफी का लालच देकर रेप करने के आरोपित मोहम्मद इकबाल को रिसालदार नगर से धर-दबोचा। बच्ची की मेडिकल जाँच कराने के बाद इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012, (POCSO ) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित अविवाहित है। उसकी कोरोना टेस्टिंग करा ली गई है। पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आरोपित को जेल भी भेज दिया।

FIR के अनुसार, पीड़ित बच्ची अपने खेत के पास खेल रही थी। इस दौरान राशन दुकानदार मोहम्मद इक़बाल की उस पर बुरी नजर पड़ी और उसने टॉफी का लालच देकर उसे अपनी दुकान पर ले गया। रेप के बाद डरी-सहमी बच्ची रोते हुए अपने घर पहुँची, जहाँ माँ के पूछने पर उसने सब कुछ बताया। बच्ची ने कहा कि मोहम्मद इक़बाल ने उसे धमकी दी है कि अगर उसने किसी को इस बारे में कुछ बताया तो वो उसकी माँ-बाप को मार डालेगा।

इसके बाद परिजनों ने डोरंडा थाने में जाकर मामला दर्ज कराया। आरोपित के खिलाफ रेप के साथ-साथ आपराधिक धमकी देने के आरोपों के तहत भी FIR दर्ज की गई है। बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

रजनीकांत को सिनेमा का सर्वोच्च दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, PM मोदी ने ‘थलाइवा’ को दी बधाई: इससे पहले इन्हें मिल चुका है ये सम्मान

सुपरस्टार रजनीकांत को भारत सरकार ने 51वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 2018 में ये अवॉर्ड अमिताभ बच्चन को और 2017 में विनोद खन्ना को दिया गया था। 2016 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से फिल्म निर्देशक के विश्वनाथ को नवाजा गया था। इसी तरह 2015 में मनोज कुमार व के विश्वनाथ, 2014 में शशि कपूर, 2013 में गुलजार और 2012 में प्राण को ये सम्मान मिला था।

भारतीय सिनेमा के जनक धुंदीराज गोविंद फाल्के के सम्मान में उनके बाद राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार को भारतीय सिनेमा का सबसे गौरवपूर्ण तथा प्रतिष्ठित पुरस्कार का नाम दिया गया। यह वह व्यक्ति हैं जिन्होंने पहली भारतीय फीचर फिल्म वर्ष 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण किया था। दादासाहेब फाल्के ने 19 वर्ष की अवधि में 95 फिल्में तथा 26 लघु फिल्में बनाई थीं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में फिल्मी हस्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 1969 में शुरू किया गया था।

इस पुरस्कार की पहली विजेता देविका रानी थीं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार फिल्मी हस्तियों को भारतीय सिनेमा के विकास में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, प्रमाणपत्र, सिल्क स्क्रोल तथा एक शॉल दिया जाता है। रजनीकांत की उम्र 70 से अधिक हो चुकी है और वो इस उम्र में भी ‘2.0’, ‘पेट्टा’ और ‘दरबार’ जैसी सुपरहिट फ़िल्में दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा पर ख़ुशी जताते हुए कहा, “वो कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में ऐसा कार्य किया है, जैसा विरले ही कर पाए हैं। उनका व्यक्तित्व काफी प्यारा है और उन्होंने पर्दे पर विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं। ये रजनीकांत हैं। ये काफी ख़ुशी की बात है कि ‘थलाइवा’ को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें बहुत-बहुत बधाई।”

हालाँकि, कई लोगों ने इसे तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा। रजनीकांत भी राजनीतिक दल बना कर चुनाव में हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण उन्होंने अपने फैसले को बदल दिया। जब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय प्रकाश जावड़ेकर से ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 5 लोगों की ज्यूरी नाम तय करती है, इसमें राजनीति कहाँ से आ गई?

उन्होंने कहा कि रजनीकांत पिछले 5 दशक से फ़िल्मी दुनिया पर राज कर रहे हैं और लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। रजनीकांत के प्रशंसकों की एसोसिएशन रजनी मक्कल मण्ड्राम (Rajini Makkal Mandram) की तमिलनाडु में 65,000 इकाइयाँ हैं, जो उनके राजनीति में जाने के बाद पार्टी का हिस्सा बनने वाली थीं। अब तमिलनाडु में सभी पार्टियाँ उन्हें रिझाने में लगी हुई है। अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने भी उन्हें बधाई दी है। इससे पहले दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड विजेताओं की सूची इस प्रकार है:

वर्ष (समारोह)नामफिल्म इंडस्ट्री
2018 (66 वां)अमिताभ बच्चन हिन्दी
2017 (65वां)विनोद खन्नाहिन्दी
2016 (64वां)कसिनाथुनी विश्वनाथतेलुगू
2015 (63वां)मनोज कुमारहिन्दी
2014 (62वां)शशि कपूरहिन्दी
2013 (61वां)गुलजारहिन्दी
2012 (60वीं)प्राणहिन्दी
2011 (59वां)सौमित्र चटर्जीबंगाली
2010 (58वां)के. बालचन्दरतमिलतेलुगू
2009 (57वां)डी. रामानायडूतेलुगू
2008 (56वां)वी. के. मूर्तिहिन्दी
2007(55वां)मन्ना डेबंगालीहिन्दी
2006 (54वां)तपन सिन्हाबंगालीहिन्दी
2005 (53वां)श्याम बेनेगलहिन्दी
2004 (52वां)अडूर गोपालकृष्णनमलयालम
2003 (51वां)मृणाल सेनबंगाली
2002 (50वां)देव आनन्दहिन्दी
2001 (49वां)यश चोपड़ाहिन्दी
2000 (48वां)आशा भोसलेहिन्दीमराठी
1999 (47वां)ऋषिकेश मुखर्जीहिन्दी
1998 (46वां)बी. आर. चोपड़ाहिन्दी
1997 (45वां)कवि प्रदीपहिन्दी
1996 (44वां)शिवाजी गणेशनतमिल
1995 (43वां)राजकुमारकन्नड़
1994 (42वीं)दिलीप कुमारहिन्दी
1993 (41वां)मजरूह सुल्तानपुरीहिन्दी
1992 (40वां)भूपेन हजारिकाअसमिया
1991 (39वां)भालजी पेंढारकरमराठी
1990 (38वां)अक्कीनेनी नागेश्वर रावतेलुगू
1989 (37वां)लता मंगेशकरहिन्दी, मराठी
1988 (36वां)अशोक कुमारहिन्दी
1987 (35वां)राज कपूरहिन्दी
1986 (34वां)बी. नागी. रेड्डीतेलुगू
1985 (33वां)वी. शांतारामहिन्दीमराठी
1984 (32वां)सत्यजीत रेबंगाली
1983 (31वां)दुर्गा खोटेहिन्दीमराठी
1982 (30वां)एल. वी. प्रसादहिन्दीतमिलतेलुगू
1981 (29वां)नौशादहिन्दी
1980 (28वां)पैडी जयराजहिन्दीतेलुगू
1979 (27वां)सोहराब मोदीहिन्दी
1978 (26वां)रायचन्द बोरालबंगालीहिन्दी
1977 (25वां)नितिन बोसबंगालीहिन्दी
1976 (24वां)कानन देवीबंगाली
1975 (23वां)धीरेन्द्रनाथ गांगुलीबंगाली
1974 (22वां)बोम्मीरेड्डी नरसिम्हा रेड्डीतेलुगू
1973 (21वां)रूबी मयेर्स (सुलोचना)हिन्दी
1972 (20वां)पंकज मलिकबंगाली एवं हिन्दी
1971 (19वां)पृथ्वीराज कपूरहिन्दी
1970 (18वां)बीरेन्द्रनाथ सिरकरबंगाली
1969 (17वां)देविका रानीहिन्दी

रजनीकांत मुख्यतः तमिल फिल्मों में काम करते हैं लेकिन किसी जमाने में उन्होंने डेढ़ दर्जन से भी अधिक हिंदी फिल्मों में भी काम किया था। बॉलीवुड में उनकी ‘अंधा कानून’, ‘हम’ और ‘चालबाज’ जैसी फ़िल्में हिट रही थीं। रेखा और श्रीदेवी जैसी अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी को खासा पसंद किया जाता था। उन्होंने तमिल में कई ब्लॉकबस्टर दिए हैं। साथ ही वो तेलुगु, बांग्ला और अंग्रेजी फिल्मों का हिस्सा भी रहे हैं।

नंदीग्राम में लटकती मिली BJP कार्यकर्ता की लाश, परिजनों ने कहा- मिथुन की रैली में शामिल होने पर TMC के गुंडों ने कर दी हत्या

नंदीग्राम के एक नंबर ब्लाक में एक भाजपा कार्यकर्ता का फंदे से लटकता शव मिला। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगा है। डेबरा में भाजपा प्रत्याशी पूर्व आइपीएस अधिकारी भारती घोष का तृणमूल कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। विधानसभा क्षेत्र में सियासी बवाल के आरोप लग रहे हैं। भारती घोष ने आरोप लगाया है कि TMC के गुंडे मतदाताओं को धमका रहे हैं।

इन सबके बीच 50 साल के भाजपा कार्यकर्ता की लाश मिलना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक की बेटी ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ दिनों से TMC के गुंडों द्वारा उसके पिता को लगातार धमकियाँ दी जा रही थीं। ये वारदात नंदीग्राम के पूर्वी भकूटिया में हुई। मृत भाजपा कार्यकर्ता का नाम उदय दुबे है। परिजनों ने कहा है कि उन्होंने मार्च 30 को नंदीग्राम में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के रोड शो में हिस्सा लिया है, इसीलिए धमकियाँ मिल रही थीं।

जहाँ भाजपा नेताओं का कहना है कि TMC के गुंडों ने उदय दुबे को मार कर लटका दिया, वहीं तृणमूल ने भाजपा पर लाशों की राजनीति खेलने का आरोप मढ़ दिया। TMC का कहना है कि दुबे ने पारिवारिक समस्याओं की वजह से आत्महत्या की है। पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। क्षेत्र में केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है।

ये घटना तब सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की सीटों के लिए मतदान हो रहा है। नंदीग्राम राज्य की सबसे महत्वूर्ण सीट मानी जा रही है क्योंकि यहाँ से खुद ममता बनर्जी मैदान में हैं और TMC छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए अधिकारी परिवार की साख भी दाँव पर है। शुभेंदु अधिकारी हिंदुत्व और क्षेत्र से अपने परिवार के जुड़ाव के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गए। 8 चरण के मतदान के नतीजे 2 मई को आने हैं।

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नंदीग्राम में परेशानी खड़ी करने और मतदाताओं को धमकाने के लिए दूसरे राज्यों से गुंडे आए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने की माँग की थी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि दूसरे राज्यों के गुंडे मतदाताओं को धमकाने के लिए नंदीग्राम में दाखिल हो गए हैं। इलाके के ग्रामीणों को भगाया जा रहा है। वे मतदाताओं को धमकाया जा रहा हैं।

न्यू ईयर पार्टी में 2 लड़कियों के साथ अंतरंग हुआ था आरोपित श्री, एक की हो गई हत्या, एक बनी आरोपित: जाह्नवी हत्याकांड का खुला राज़

मुंबई के खार में नए साल की पार्टी के दौरान जाह्नवी कुकरेजा (Janhavi Kukreja) नामक युवती की हत्या ने सनसनी मचा दी थी। अब इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में बताया गया है कि जाह्नवी के शरीर पर जख्म के कुल 48 निशान थे, जहाँ से ब्लीडिंग हुई थी। उसकी खोपड़ी में भी चोटें थीं। उसके ही दोस्त श्री जोगधनकर और दीया पडलकर को इस हत्याकांड में आरोपित बनाया गया है।

खार पुलिस ने दिसंबर 31, 2020 की रात हुई इस वारदात के मामले में मंगलवार (मार्च 30, 2021) को 600 पन्नों की चार्जशीट पेश की। पार्टी में उपस्थित जाह्नवी के दोस्तों से लेकर पुलिस ने 74 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने कहा कि श्री और दीया 8वें फ्लोर पर एक-दूसरे के साथ आपत्तिजनक अवस्था में थे, जिस पर जाह्नवी ने आपत्ति जताई थी। फिर तीनों के बीच लड़ाई हुई। रात 1:45 बजे जाह्नवी नीचे उतर रही थी तो दोनों से उसे खदेड़ा और झगड़ा किया।

उसे सीढ़ियों पर धक्का दिया गया, उसके बाल खींचे गए और उसे तब तक पीटा गया, जब तक वो दूसरे फ्लोर तक नहीं पहुँच गई। इसके बाद श्री और दीया ने 19 वर्षीय जाह्नवी कुकरेजा के सिर को सीढ़ी की रेलिंग पर दे मारा। इसी बीच जाह्नवी ने आत्मरक्षा में कुछ वार किए। पुलिस का कहना है कि इसी कारण श्री भी चोटिल हुआ। पुलिस को 5वें फ्लोर से पीली चूड़ी और चौथे फ्लोर से एक सैंडल भी मिला। जाह्नवी कुकरेजा हत्या मामले में श्री और दीया – दो ही आरोपित हैं।

इसी सैंडल का दूसरा जोड़ा ग्राउंड फ्लोर पर जाह्नवी की लाश के पास से मिला। पुलिस को दूसरी और तीसरी मंजिल पर कान के झुमके और हेयरबैंड भी मिले। पुलिस ने कहा कि ये चीजें जाह्नवी और दीया पडलकर की थीं। दूसरे फ्लोर की रेलिंग पर जाह्नवी के बाल के सैम्पल भी बरामद हुए थे। साथ ही तीसरे फ्लोर की सीढ़ियों पर कुकरेजा के खून के निशान मिले। जाह्नवी साइकोलॉजी की छात्रा थी। श्री उसके करीबी मित्र था।

इस मामले में कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है लेकिन पुलिस ने कहा है कि उसके पास मजबूत परिस्थितिजनक सबूत हैं। ये घटना ‘भगवती हाइट्स बिल्डिंग’ में हुई थी। पुलिस ने श्री जोगधनकर के शर्ट और घटना के बाद दीया जिस बिस्तर पर सोई थी उस पर मिले खून के सैम्पल भी कुकरेजा से मैच हुए। श्री के एक दोस्त ने बताया कि वो उस रात जख्मी अवस्था में आया था, जिसके बाद उसे सिनो हॉस्पिटल लेकर जाया गया।

गवाहों में से कुछ ने बताया है कि उन्होंने श्री को जाह्नवी के साथ अंतरंग अवस्था में देखा था, जबकि कुछ का कहना है कि वो दीया के साथ भी काफी अंतरंग व्यवहार कर रहा था। जाह्नवी ने एक दोस्त को फोन कॉल करके बताया था कि श्री उसका अच्छा दोस्त है और दीया के साथ उसका करीब होना उसे पसंद नहीं। साथ ही उसे कहा था कि वो एक दोस्त के रूप में न ही श्री को और न ही दीया को खोना चाहती है।

ये पार्टी यश आहूजा नामक युवक ने दी थी। उसने बताया कि जब वो रात को बिरयानी लेने अपने फ़्लैट में गया तो उसने वहाँ दीया को बिस्तर पर पड़े हुए देखा। उसके होठों से खून बह रहा था और तकिए पर भी खून के धब्बे लगे थे। यश ने बताया कि जब श्री को जाह्नवी की लाश मिलने की सूचना दी गई, तो उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया। पूछने पर पडलकर ने कहा कि उसे कुछ भी याद नहीं। श्री के वकील ने गवाहों के बयानों को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि पुलिस से गलती हुई है।

जाह्नवी कुकरेजा की माँ निधि का कहना था कि उनकी बेटी और दीया 13 सालों से दोस्त थीं और पड़ोसी भी थीं। हत्या के अगले कुछ दिनों में उन्होंने दीया के इस हत्याकांड में शामिल होने पर अनिश्चितता जताई थी। उन्होंने बताया था कि उनके पति का जन्मदिन मना कर ही जाह्नवी न्यू ईयर पार्टी में दीया के कहने पर गई थी। ये पार्टी 16वीं मंजिल पर चल रही थी। जाह्नवी कुकरेजा सांताक्रुज की रहने वाली थी।