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‘राहुल गाँधी शादी करें… वो भी दलित लड़की से, महात्मा गाँधी का सपना पूरा करें’ – रामदास अठावले

रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) चीफ व केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले अक्सर सदन में अपने मजाकिया अंदाज के कारण चर्चा में रहते हैं। अब अठावले ने राहुल गाँधी को ‘हम दो-हमारे दो’ पर सुझाव दिया है। साथ ही अठावले ने अपने इस सुझाव के साथ राहुल गाँधी को महात्मा गाँधी का ‘सपना’ पूरा करने की नसीहत भी दे डाली है।

दरअसल कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना ‘हम दो, हमारे दो’ के जरिए निशाना साध रहे हैं। राहुल गाँधी ने सदन में भी ‘हम दो, हमारे दो’ का नारा दिया। अब राहुल को आरपीआई चीफ रामदास अठावले ने सलाह दी है।

केंद्रीय मंत्री अठावले ने कहा, “हम दो, हमारे दो का नारा परिवार नियोजन के लिए इस्‍तेमाल किया जाता था। यदि वे (राहुल गाँधी) इसका प्रचार करना चाहते हैं तो उन्‍हें शादी जरूर करनी चाहिए। उन्‍हें दलित लड़की से शादी करना चाहिए और जातिवाद को दूर भगाने का राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गाँधी का सपना पूरा करना चाहिए। इससे युवाओं को प्रेरित किया जा सकता है।”

वहीं इससे पहले एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गाँधी के हम दो हमारे दो नारों का अर्थ उन्हें समझा दिया था। नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि ‘हम दो-हमारे दो’ का नारा राहुल गाँधी के परिवार का ही बनाया हुआ है। वे इसी का पालन करते हैं। ‘हम दो’ का अर्थ है, माँ और बेटा और ‘हमारे दो’ का मतलब दीदी और बहनोई। नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि वो दो हो गए और उनके दो हो गए। यही बात वह कह नहीं पा रहे हैं तो उसको आप इस अर्थ में निकालिए तो यह सामरिक और सार्थक दिखेगा।

दरअसल, लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गाँधी ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने ने कहा कि सालों पहले फैमिली प्लानिंग के लिए नारा था ‘हम दो हमारे दो’। जैसे कोरोना दूसरे रूप में आया है, वैसे ही यह नारा दूसरे रूप में आया है। आज इस देश को 4 लोग चलाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “नाम सब जानते हैं। ये किसकी सरकार है- हम दो हमारे दो।”

रामदास अठावले ने इसी के साथ झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को लेकर उन्होंने कहा, “मेरी पार्टी नरेंद्र मोदी और BJP के साथ NDA में है। मैंने शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि अगर वे भी NDA में आते हैं, तो यहाँ भी सरकार झारखंड मुक्ति मोर्चा और BJP की रहेगी। दिल्ली में भी उनको सत्ता मिल सकती है।” उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और उन्हें इसके बारे में सोचना चाहिए।

मंदिर जाने वाली महिलाएँ रखती हैं सेक्स की चाहत: मलयालम उपन्यास ‘मीशा’ को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार

केरल साहित्य अकादमी ने वर्ष 2019 के लिए पुरस्कारों की घोषणा की। एस हरीश के ‘मीशा’ को सर्वश्रेष्ठ उपन्यास चुना गया। यह उपन्यास मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं और पुजारियों के किरदार को गलत तरीके से दर्शाने के लिए विवादों में रहा।

@thegeminian_ नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उपन्यास ने मंदिर जाने वाली महिलाओं को सेक्स की चाहत रखने वालों के रूप में चित्रित किया।

इसमें वह दो दोस्तों के बीच की बातचीत का वर्णन करती है। इसमें एक दोस्त दूसरे से कहता है कि महिलाएँ अच्छे से सज-धज कर मंदिर इसलिए जाती है कि वो लोगों को, खासकर पुजारियों को यह बता सके कि वह सेक्स के लिए तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट में उपन्यास को चुनौती

2018 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उपन्यास को चुनौती दी गई थी। उपन्यास में मंदिर जाने वाली महिलाओं के चरित्र को लेकर गंदी टिप्पणी की गई थी। कोर्ट में दलील दी गई थी कि उपन्यास ‘मीशा’ के कुछ पैराग्राफ आपत्तिजनक हैं, क्योंकि उसमें हिंदू धर्म और हिंदू पुजारी का अपमान किया गया है।

मंदिर में हिंदू महिलाओं के जाने के संबंध में उपन्यास के आपत्तिजनक अंश को उजागर करने के लिए उपन्यास में दो पात्रों के बीच बातचीत का अनुवाद प्रस्तुत किया गया था। बातचीत में मंदिर में जाने वाली महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में दिखाया गया है, जो मंदिर इसलिए जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि वे सेक्स के लिए तैयार हैं। किताब के अंश इस तरह हैं-

6 महीने पहले मॉर्निंग वॉक पर जाने के दौरान एक मित्र ने पूछा, “मंदिर जाने के लिए ये लड़कियाँ नहाती क्यों हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन क्यों करती हैं?” 

मैंने कहा, “प्रार्थना करने के लिए।” 

उसने कहा, “नहीं।”

उसने कहा, “ध्यान से देखो, उन्हें प्रार्थना करने के लिए सबसे अच्छे कपड़े पहनने की क्या ज़रूरत है? वो अनजाने में घोषणा करती हैं कि वो सेक्स करने के लिए तैयार हैं।” मैं हँसा।

उसने आगे कहा, “नहीं तो वे महीने में चार या पाँच दिन मंदिर क्यों नहीं आते? वे लोगों को यह बताती हैं कि वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। विशेष रूप से, मंदिर के उन ब्राह्मण पुजारियों को सूचित करती हैं। क्या वे अतीत में इन मामलों में मास्टर नहीं थे?”

हालाँकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीश पीठ ने उपन्यास पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता करार दिया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की थी, “आप इस तरह की चीजों को अनुचित महत्व दे रहे हैं। इंटरनेट के युग में, आप इसे एक मुद्दा बना रहे हैं।”

उपन्यास को बैन करने के लिए उठी थी काफी माँग

उपन्यास को पहली बार मलयालम साप्ताहिक मातृभूमि में प्रकाशित किया गया था। साप्ताहिक में तीन अध्याय प्रकाशित करने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। इसे बाद में डीसी बुक्स द्वारा एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया। इस उपन्यास को मंदिरों में जाने वाली महिलाओं के चित्रण के लिए भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। 

केरल के भाजपा प्रमुख के सुरेंद्रन ने उपन्यास को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि इसे हिंदू समुदाय के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “केरल ने ऐसा अपमानजनक उपन्यास नहीं देखा है। मीशा को पुरस्कार देने के फैसले को हिंदू समुदाय के खिलाफ एक कृत्य के रूप में देखा जाना चाहिए। यह सबरीमाला मुद्दे के बाद हिंदुओं का अपमान करने का सिलसिला है।”

राजदीप के खिलाफ SC ने नहीं किया केस दर्ज, स्वतः संज्ञान वाली बात सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से अनजाने में हुई गलती

नोट: कल शाम में खबर आई थी कि पत्रकार राजदीप सरदेसाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया। हालाँकि बाद में पता चला कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की वेबसाइट पर यह अनजाने में गलती से अपलोड कर दिया गया था। इसे सुधार लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्टरी के भूल सुधार से पहले की खबर

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पत्रकार राजदीप सरदेसाई के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया है। राजदीप के खिलाफ यह मुकदमा उनके अगस्त 2020 में एडवोकेट प्रशांत भूषण और न्यायपालिका की आलोचना मामले में किए गए ट्वीट को लेकर किया गया है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने आस्था खुराना की याचिका के आधार पर दर्ज किया। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सरदेसाई के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया था।

आस्था खुराना ने सितंबर 2020 में याचिका दायर की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना के मामले में मुकदमा पंजीकृत किया है। आस्था ने याचिका में राजदीप सरदेसाई के कई ट्विट्स का हवाला दिया था।

याचिका में राजदीप सरदेसाई के खिलाफ देश की न्यायपालिका को लेकर विवादित टिप्पणी करने के लिए अवमानना ​​की कार्रवाई की माँग की गई थी। उसमें यह भी कहा गया कि राजदीप सरदेसाई के ट्वीट से पता चलता है कि ये न केवल लोगों के बीच प्रचार का एक सस्ता स्टंट था, बल्कि भारत विरोधी अभियान के रूप में नफरत फैलाने का जानबूझ कर एक प्रयास किया गया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की अवमानना के मसले पर प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपए का ज़ुर्माना लगाया था। कोर्ट ने ज़ुर्माना न भर पाने की सूरत में तीन महीने की क़ैद तथा साथ ही तीन साल के लिए वकालत पर प्रतिबंध लगाया था। हालाँकि बेशर्मी से माफी नहीं मॉंगने की बात कहने वाले भूषण ने जुर्माना भर दिया था।

राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट में प्रशांत भूषण मामले पर दिए गए फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय की आलोचना करते हुए दावा किया था कि शीर्ष अदालत के पास अवमानना ​​मामले की सुनवाई के लिए समय था जबकि कश्मीर में हिरासत में लिए गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक साल से अधिक समय से लंबित पड़ी थी।

उन्होंने यह भी कहा था कि भूषण को कोर्ट केस की अवमानना ​​में दी गई सजा सुप्रीम कोर्ट के लिए खुद में एक शर्मिंदगी है। एक और ट्वीट में उन्होंने अदालतों को काम करने का तरीका भी बताया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। गौरतलब है कि जस्टिस अरुण मिश्रा ने सचिन पायलट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट बेंच की अध्यक्षता की थी। राजदीप सरदेसाई ने उनका नाम घसीटते हुए कहा था कि यह वही अरुण मिश्रा है, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को ‘बहुमुखी प्रतिभा’ के रूप में वर्णित किया था।

खादी से बनी डिजाइनर पोशाक भगवान राम को अर्पित: आत्मनिर्भरता के लिए प्रोजेक्ट रामलला, CM योगी ने किया अनावरण

बसंत पंचमी के मौके पर अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के लिए खास पोशाक तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसंत पंचमी के मौके पर फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी द्वारा बनाए गए खास पोशाक को रामलला को भेंट किया।

बता दें कि यह ड्रेस उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के सहयोग से फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी द्वारा “प्रोजेक्ट रामलला” के तहत बनाई गई है। प्रोजेक्ट रामलला लोगों के दैनिक जीवन में खादी सामग्रियों के उपयोग और खादी के कपड़ों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करती है।

गौरतलब है कि, ‘प्रोजेक्ट रामलला‘ मनीष त्रिपाठी की ‘शहर से गाँव तक’ की पहल का हिस्सा है, जिसे कोरोनोवायरस महामारी के समय प्रवासी श्रमिकों के अपने प्रदेश वापसी के दौरान शुरू किया गया था। परियोजना का उद्देश्य कुशल मजदूरों और कारीगरों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें और सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बन सकें।

उन्होंने कहा कि जब वह महामारी के बीच कारीगरों के साथ काम कर रहे थे, तब अयोध्या में राम मंदिर का भव्य आयोजन हुआ। तभी एक दिन यूँ ही खयाल आया कि भगवान को पॉलीएस्टर के परिधान क्यों पहनाए जाएँ, जबकि हम खुद पहनना कभी पसंद नहीं करेंगे। इसी उधेड़बुन में खादी मास्क के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, तब लगा कि खादी को हर घर तक पहुँचाने के लिए क्यों न शुरुआत रामलला से की जाए।

प्रोजेक्ट रामलला के तहत, जो महिला कारीगर पहल के तहत काम कर रही हैं, वे ही अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान रामलला के लिए पोशाक बना रही हैं। यह पहल न केवल खादी के उपयोग को प्रोत्साहित और रोजगार के सृजन में मदद करेगी बल्कि यह कुशल मजदूरों की स्थिति में भी सुधार लाएगी।

उल्लेखनीय है कि बसंत पंचमी के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खादी से बने इन पोशाकों को रामलला को अर्पित किया गया है।

15 साल के लड़के को ऑनलाइन धमकी: ध्रुव राठी के खिलाफ एक्शन में NCPCR, ट्विटर को 7 दिन में कार्रवाई का आदेश

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के व्लॉगर ध्रुव राठी के खिलाफ जाँच शुरू की है। बता दें कि ध्रुव राठी ने 15 साल के लड़के का आईपी लोकेशन गैरकानूनी तरीके से हासिल कर लिया और फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धमकी दी। जिसके बाद NCPCR ने संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू किया

सूत्रों के मुताबिक ट्विटर को संबोधित एक पत्र में एनसीपीसीआर ने कहा कि आयोग को शिकायत मिली कि ध्रुव राठी द्वारा 15 वर्षीय लड़के को परेशान किया जा रहा है और उसे धमकी दी जा रही है।

आयोग ने आगे कहा कि लड़के ने इस बात को उजागर किया था कि राठी ने उसे इंस्टाग्राम पर मैसेज किया और उसे नुकसान पहुँचाने की धमकी दी। लड़के ने ट्विटर पर डिटेल्स पोस्ट किया। बच्चे ने आगे आरोप लगाया कि राठी ने उसे कानूनी परिणामों के भुगतने की धमकी दी और दावा किया कि उसने आईपी लोकेशन प्राप्त कर लिया है। राठी ने बच्चे का नाम फर्जी मामलों में घसीटने का भी दावा किया।

आयोग ने सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) (d) (j) और (k) के तहत मामले का संज्ञान लिया और ध्रुव राठी के खिलाफ जाँच शुरू की। आगे कहा गया कि नाबालिग का आईपी एड्रेस प्राप्त करना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसे धमकी देना गंभीर अपराध है।

ट्विटर को 7 दिनों के भीतर राठी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी होगी

आयोग ने ट्विटर को पत्र जारी करने के सात दिनों के भीतर ध्रुव राठी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। NCPCR ने ट्विटर को बिना किसी देरी के शिकायत के बारे में संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए कहा। आयोग के आदेशों का पालन करने में विफल रहने पर NRCPC, कानून के अनुसार ट्विटर के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा।

ध्रुव राठी ने 15 वर्षीय लड़के को धमकी दी

एक ट्विटर यूजर ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि ध्रुव राठी ने उसे यूट्यूब चैनल ‘द स्ट्रिंग्स’ का समर्थन करने के लिए इंस्टाग्राम के माध्यम से डीएम (डायरेक्ट मैसेज) में धमकी दी थी। नाबालिग लड़का इस बात से सहमत था कि उसने भी गलती की थी, लेकिन राठी द्वारा डराने और धमकाने की प्रवृत्ति गंभीर थी।

नाबालिग लड़के के ट्विटर से किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट (साभार: Twitter)

नाबालिग द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि राठी ने उसे धमकी दी और कहा कि अगर लड़का स्ट्रिंग्स का समर्थन करता रहेगा, तो वह केस में उसका नाम घसीटेगा और उसका जीवन बर्बाद कर देगा।

Screenshots of messages sent by Dhruv Rathee to the minor boy. (Source: Twitter)

जब लड़के ने उसे बताया कि वह 15 साल का है, तो राठी ने कथित तौर पर कहा कि उसकी उम्र उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। लड़के ने तब से अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट/डिएक्टिवेट कर लिया है।

‘सरस्वती शिक्षा की देवी नहीं…’ के अलावा माँ सरस्वती के लिए लिखी बहुत ही गंदी बात: अरेस्ट_दिलीप_मंडल कर रहा ट्रेंड

माँ सरस्वती पर आपत्तिजनक बयान देने के बाद ट्विटर पर अरेस्ट दिलीप मंडल का हैशटैग ट्रेंड #ArrestDilipmandal कर रहा है। सोशल मीडिया पर पत्रकार दिलीप मंडल को जेल में डालने की बात कही जा रही है। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को बसंत पंचमी के अवसर पर मंडल ने माँ सरस्वती पर अभद्र टिप्पणी की, जिसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। लोग ने इस टिप्पणी को हिन्दु भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है।

दिलीप मंडल ने ट्वीट करते हुए लिखा, “सरस्वती को मैं शिक्षा की देवी नहीं मानता। उन्होंने न कोई स्कूल खोला, न कोई किताब लिखी। ये दोनों काम माता सावित्रीबाई फुले ने किए। फिर भी मैं सरस्वती के साथ हूँ। ब्रह्मा ने उनका जो यौन उत्पीड़न किया, वह जघन्य है।” – इसके लिए मंडल ने महाराष्ट्र सरकार पब्लिकेशन से प्रकाशित Slavery(1991) नामक किसी किताब का जिक्र किया।

इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। एक यूजर ने लिखा, “आरक्षण की भीख पर पलने वाले, जिन्हें डर है कि कहीं लाठी टूट गई तो क्या होगा। वो अब शिक्षा पर भाषण देगा और जो शोषण ईसाई मिशनरियों ने किया, उसके लिए भी साथ हो जा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “काश बुद्धि आरक्षण में मिली होती, तो तुमको पूरा पता होता कि शास्त्रानुसार सरस्वती, ब्रह्माजी की पत्नी हैं। ब्रह्मा ने पत्नी के रूप-गुणों की कल्पना कर उनको रचा था, वो पैदा नहीं हुई थीं। शुक्र है तुमने अपने बाप को माँ के यौन उत्पीड़न और तुमको पैदा करने के जुर्म में जेल नहीं भिजवाया।”

गणेश नाम के यूजर ने लिखा, “मैं भी कुछ लोगों को प्रोफेसर नहीं मानता। जो खुद पढ़ नहीं सकते, वो पढ़ाने में लगे हैं। गजब है ना।”

गीतांजलि मोहापात्रा ने लिखा, “अरे आप पागल हो गए हो, शर्म नहीं आती। कुछ जानते नहीं हो तो कम से कम खुलेआम अपना मजाक क्यों बनाते हो। ब्रह्मा जी और सरस्वती माँ का संबंध क्या था, यह भी आपको पता नहीं। ऐसा लग रहा है कि आप अपने माँ-पापा का रिलेशन को कभी ऐसे गंदे नजर में भी ले लोगे।”

एक यूजर ने लिखा, “यह क्या बकलोली है? माताजी में आस्था नहीं है तो मत मानो! वह आपकी निजी राय है। लेकिन, यहाँ ट्विटर पर भौंकने की क्या जरूरत है? किसने हक दिया आपको करोड़ों हिंदुओ की आस्था को दुखाने का? बकवास करने की बजाय अपना काम कर।”

प्रमिला नाम के एक यूजर ने लिखा, “हिम्मत है तो ऐसा ही तू किसी दूसरे धर्म के आराध्यों के बारे में कह के दिखा, जिंदा नहीं बचेगा। वो तो हिन्दू सहनशील हैं, ऐसे पागल कुत्तों के भौंकने पर रिएक्ट नहीं करते।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “मैं आदर करती थी आपका, लेकिन आरक्षण की रोटियाँ मत सेंको। किसान आंदोलन से जनाधार लेकर जाति का रोना बन्द करो 10-15 साल के लिए था, अभी भी संतुष्टि नहीं हुई। सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी के लिए भी गलत है ये सब, पर आप लोगों को देश नहीं सिर्फ आरक्षण बचाना है। सरस्वती माँ का अपमान शर्म कर कुछ।”

कुमार सोमी नाम के यूजर ने लिखा, “मैकाले शिक्षा पद्धति एवं कम्युनिस्टों द्वारा लिखित इतिहास पढ़ा है तुम जैसे अनपढ़ लोगों ने और अपने धर्म को ढंग से नहीं जाना, तुम्हारे जैसे लोगों ने कभी डर से, कभी बहकावे में आकर ऐसे ही धर्म परिवर्तन कर अपने मूल स्वरूप को भूल चुके हो। अपनी पहचान खो चुके हो।”

कॉन्ग्रेस नेता के पास 10 लाख की गाड़ी, 15 लाख का सोना… घर में शौचालय नहीं: नामांकन हो गया रद्द

गुजरात के अहमदाबाद में एक कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का नामांकन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उनके घर में शौचालय नहीं था। चौंकाने वाली बात तो यह है कि महिला उम्मीदवार के पास 15 लाख रुपए का सोना, नरोदा में एक फ्लैट है और 10 लाख रुपए की एसयूवी भी है… लेकिन उनके घर में शौचालय नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद जिला पंचायत के लिए सिंगरवा सीट का है। कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार कृना पटेल ने पंचायत चुनाव के लिए सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करने पहुँचीं थीं, लेकिन घर में टॉयलेट (Toilet) न होने की वजह से उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। कॉन्ग्रेस नेता अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकती क्योंकि कंभा गाँव स्थित उनके घर में टॉयलेट नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, कृना पटेल के नॉमिनेशन फॉर्म की जाँच करने के दौरान बीजेपी उम्मीदवार ने उनके हलफनामे को लेकर आपत्ति जताई थी। प्रतिद्वंद्वियों का कहना था कि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने अपने एफिडेविट में झूठ बोला है कि कंभा गाँव में उनके घर में टॉयलेट है।

दरअसल, 47 वर्षीय कृना पटेल ने उसी गाँव से अपना नॉमिनेशन फाइल किया था, जिसको लेकर दस्करोई के रिटर्निंग ऑफिसर कोमल पटेल ने बताया कि बीजेपी के एक सदस्य ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसको गंभीरता से लेते हुए इस मामले की जाँच की गई।

कोमल ने बताया, “कृना ने शपथ में घोषणा की थी कि उसके घर पर शौचालय है, मैंने उससे पूछा कि क्या वह सही बोल रही हैं। इससे वह चिंतित हो गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एक कॉन्ग्रेसी नेता भी उनके साथ मौजूद थे। कॉन्ग्रेस नेता ने जब उनसे पूछा कि क्या उनके घर पर शौचालय है। फिर उन्होंने कहा कि उनके कंभा स्थित घर में शौचालय नहीं है।”

वहीं इस मामले को कृना ने भी स्वीकार किया कि उनके घर में शौचालय नहीं है। एसडीएम ने कहा, “हमने उनसे यह बात लिखित रूप में देने के लिए कहा। कृना से लिखित लेने के बाद उनका नामांकन अस्वीकार कर दिया गया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमा किए गए एफिडेविट में उल्लेख है कि कृना ने बारहवीं कक्षा पास की है। क्रीना पटेल के पास एक फ्लैट, 15 लाख रुपए का सोना, 10 लाख रुपए की एसयूवी कार है।

मात्र चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरे जाने को लेकर बीजेपी ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह रहती तो नरोदा में थीं, लेकिन कागज पर कंभा की रहने वाली थी। इसलिए उन्होंने कभी भी अपने गाँव के घर में शौचालय बनवाना जरूरी नहीं समझा।

गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने अक्टूबर 2017 में दावा किया था कि उनके सभी गाँव अब खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। केंद्रीय पीने के पानी और सेनिटाइजेशन मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 92.46 फीसदी गाँवों को खुले में शौच मक्त घोषित किया गया था। 15842 गाँव में से 14,647 गाँव को खुले में शौच से मुक्त सत्यापित किया गया था।

DCP भी लगा सकेंगे गुंडा ऐक्ट, 2 जिलों के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी: 14 दिन के बजाय 60 दिन की पुलिस रिमांड

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ व गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के लिए बड़ा निर्णय किया है। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) भी अपराधियों के विरुद्ध गुंडा ऐक्ट निरुद्ध करने की कार्रवाई कर सकेंगे। पहले यह अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास था।

क्या हैं गुंडा ऐक्ट के प्रावधान?

विधेयक में मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, गोहत्या, बंधुआ मजदूरी और पशु तस्करी पर सख्ती से लगाम लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा जाली नोट, नकली दवाओं का व्यापार, अवैध हथियारों का निर्माण व व्यापार और अवैध खनन जैसे अपराध पर भी गुंडा ऐक्ट लगाने का प्रावधान है।

गुंडा ऐक्ट के तहत ऐसे अपराधियों की आसानी से जमानत नहीं हो सकेगी। अपराधियों की संपत्तियाँ भी जब्त होंगी। पुलिस आरोपियों को 14 दिन के बजाय अधिकतम 60 दिन के लिए रिमांड पर ले सकती है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में इस बार विधानसभा, विधानमंडल का बजट सत्र पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है। इसके लिए बीते दिनों सभी सदस्यों की स्पेशल ट्रेनिंग भी करवाई गई। यूपी सरकार ने 18 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के लिए राज्यपाल आनंदी पटेल के अभिभाषण को मंजूरी दे दी है।

गौरतलब है कि यूपी में बीते एक साल में पुलिस और बदमाशों के बीच संघर्ष की कई घटनाएँ सामने आई हैं। फिर चाहे वो कानपुर का बिकरू कांड का मसला हो या फिर हाल ही में कासगंज मामला हो, जिसमें अपराधियों द्वारा पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी और कई जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। ऐसे में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए गुंडा ऐक्ट से जुड़ा फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले एक्सप्रेस-वे के लिए योगी सरकार ने 2900 करोड़ के ऋण को मंजूर किया है। सरकार का दावा है कि मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित यह एक्सप्रेस-वे देश में सबसे बड़ा होगा। इसके लिए हाल ही में जमीन अधिग्रहण व खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई है। इस बड़ी परियोजना के वित्त पोषण के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।

यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (हुडको) से 2900 करोड़ रुपए का ऋण लिया जाएगा। औद्योगिक विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

मुस्लिम लड़कियों से शादी की सजा: हाई कोर्ट नहीं दे रहा गैर-मुस्लिम भाइयों को बेल, पिता को भी पाकिस्तान में जमानत नहीं

पाकिस्तान की एक उच्च न्यायालय द्वारा सोमवार (15 फरवरी, 2020) को मुस्लिम महिलाओं से शादी करने वाले दो अहमदी भाइयों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। बता दें कि इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान में अहमदी मुसलमानों को गैर-मुस्लिमों की श्रेणी में रखा जाता है।

रबवाह टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति सैयद अरशान अली ने मामले के सिलसिले में अपना फैसला सुनाते हुए ज़ैद और ज़ाहिद के साथ उनके पिता साजिद को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

जैद और जाहिद ने पिछले साल जून में पाकिस्तान के पेशावर में शेख मुहम्मदी इलाके में सोबिया और सलमा नाम की महिलाओं से निक़ाह किया था। जिसके बाद 29 सितंबर को उन पर निक़ाह का झाँसा देकर धोखाधड़ी और ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, और पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया था।

दोनों भाइयों के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धारा 298C (अहमदी/क़ादियानी खुद को मुस्लिम या उसमें विश्वास रखने वाले) और 493A (धोखेबाजी से शादी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की घटना लोगों के संज्ञान में आई है।

इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में खबर आई थी कि एक पाकिस्तानी अहमदी प्रोफेसर को उत्तर-पश्चिम शहर पेशावर में एक अन्य मुस्लिम प्रोफेसर ने गोली मार दी थी। आरोप था कि दोनों के बीच धार्मिक मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई थी। मृतक अहमदी प्रोफेसर की पहचान डॉ. नईमुद्दीन खट्टक उर्फ ​​नईम खट्टक के रूप में हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉलेज आते समय प्रोफेसर फारूक माद और बंदूक लिए एक अन्य आदमी द्वारा अहमदी प्रोफेसर की हत्या को अंजाम दिया गया था।

जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने इस घटना को लेकर एक बयान में कहा कि प्रोफेसर खट्टक को उनकी अहमदी विश्वास के कारण मौत के घाट उतार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नईम को अतीत में धमकियों और बहिष्कार का सामना भी करना पड़ा था। नईम गवर्नमेंट सुपीरियर साइंस कॉलेज पेशावर में एक फैकल्टी मेंबर थे। उनके घर में अब उनकी विधवा पत्नी, दो बेटे और तीन बेटियाँ हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में लंबे समय से अहमदिया समुदाय पर अत्याचार हो रहा है। उन्हें साल 1974 में संविधान में संशोधन के साथ अहमदियों को गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 1984 में जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के शासन में एक सख्त अध्यादेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि अगर कोई अहमदिया खुद को मुस्लिम बताएगा, तो वो अपराध की श्रेणी में आएगा और ऐसा करने वाले को 3 साल की सजा और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। तब से उन पर हिंसा, भेदभाव और ईशनिंदा के झूठे मामले दर्ज किए जा रहे है।

टूलकिट मामले में शिवसेना कनेक्शन: जिस शांतनु के खिलाफ गैरजमानती वारंट, उसके पिता-चाचा-भाई सब हैं पार्टी में

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे ‘किसान’ आंदोलन की चर्चा अब टूलकिट पर आकर टिक गई है। किसानों के समर्थन में ट्वीट करने वाले जाने-पहचाने नाम साजिश का हिस्सा बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसियों का कहना है कि किसान आंदोलन के नाम पर देश को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा गया, लिहाजा इस प्रकरण में शामिल लोगों की गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं।

दिशा रवि फिलहाल गिरफ्तार हो चुकी हैं और निकिता जैकब व शांतनु मुलुक के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है। जानकारी ये भी सामने आई है कि 20 जनवरी से 27 जनवरी तक शांतनु टिकरी बॉर्डर पर मौजूद था और किसानों के आंदोलन में शामिल हुआ था।

इस बीच महाराष्ट्र में भाजपा नेता राम कदम ने खुलासा करते हुए बताया कि शांतनु मुलुक का शिवसेना से संबंध है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “शांतनु मुलुक बीड से शिवसेना जिला प्रमुख का चचेरा भाई है। शिवसेना का असली चेहरा आया सामने।”

राम कदम ने बताया कि शांतनु के चाचा सचिन मुलुक, शिवसेना के जिला अध्यक्ष हैं। शांतनु के पिता शिवलाल मुलुक शिवसेना से ही नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। शांतनु का चचेरा भाई चुलत भाऊ भी बीड में शिवसेना का जिला प्रमुख है।

दिल्ली पुलिस की तरफ से दी गई नई जानकारी के मुताबिक, शांतनु 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई दिल्ली हिंसा के समय तक टिकरी बॉर्डर पर था लेकिन इसके बाद वह वहाँ से चला गया। दिशा रवि के अलावा शांतनु और बॉम्बे हाईकोर्ट की वकील निकिता जैकब पर भारत की छवि को धूमिल करने के इरादे से किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी टूलकिट बनाने का आरोप है।

गौरतलब है कि 15 फरवरी को इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी। दिल्ली पुलिस साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेम नाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “11 जनवरी 2021 को पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) ने एक जूम मीटिंग का आयोजन किया। इस मीटिंग में निकिता जैकब, शांतनु, एमओ धालीवाल व अन्य शामिल हुए। इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि इस कैंपेन को विश्व स्तर पर फैलाया जाए। धालीवाल का मकसद इस मुद्दे को बड़ा बनाना और किसानों के बीच असंतोष व गलत जानकारी फैलाना था। यहाँ तक कि एक किसान की मौत को भी गोली से हुई मौत बताया गया।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि विवादित टूलकिट निकिता और उसके साथी शांतनु व दिशा ने तैयार की थी। इस टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट को शांतनु के ईमेल अकाउंट से बनाया गया था। पुलिस ने बताया कि ये लोग एक वॉट्सऐप ग्रुप पर जुड़े थे, ये ग्रुप 6 दिसंबर को बनाया गया था।

ज्वाइंट कमिश्नर प्रेम नाथ ने बताया कि दिशा के फोन से जानकारी मिली है कि उसने अपने साथी शांतनु और निकिता के साथ मिलकर टूलकिट डॉक्यमेंट बनाया। दिशा की जो दोस्त फ्राइडे फॉर फ्यूचर नामक पर्यावरण नामक आंदोलन से जुड़ी हैं, उसमें एक ग्रेटा थनबर्ग हैं, उनको टेलीग्राम पर यह टूलकिट भेजी गई। यानी पुलिस के मुताबिक, जिस टूलकिट को लेकर ये पूरा विवाद है, वो दिशा की तरफ से ग्रेटा थनबर्ग को भेजी गई थी।  

पुलिस ने दिशा के फोन से जुड़ी अपनी जाँच के आधार पर ये भी बताया कि 3 फरवरी को ओनर्स राइट लेकर टूलकिट डॉक्यूमेंट से जुड़े लिंक हटा दिए गए। इन तथ्यों के आधार पर 13 फरवरी को दिशा को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।