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अब्बा सरकारी मास्टर, खुद अलीगढ़ कॉलेज से पढ़ाई और धंधा… आतंकियों को पिस्टल की सप्लाई: बिहार से धराया जावेद

बिहार के सारण से एक आतंकी कनेक्शन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मढ़ौरा थाना इलाके में देव बहुआरा निवासी रिटायर शिक्षक महफूज अंसारी के 25 वर्षीय पुत्र जावेद को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जावेद के आतंकियों के साथ संबंध होने की सूचना मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जावेद ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर के मुश्ताक नाम के एक युवक को 7 पिस्टल मुहैया कराई थी, जिसे पाक के आतंकवादियों तक पहुँचाया गया। बिहार और जम्मू-कश्मीर की एसटीएफ की संयुक्त ने जॉइंट आपरेशन के तहत सोमवार (15 जनवरी, 2021) को उसके पैतृक घर से उसे धर दबोचा है।

जानकारी के अनुसार, जावेद की दोस्ती अलीगढ़ के एक कॉलेज में आतंकी कनेक्शन वाले कश्मीर के मुश्ताक नामक एक युवक से हुई। जावेद पर सारण से करीब 7 पिस्टल मुश्ताक को मुहैया कराने का भी आरोप है।

मुश्ताक ने बाद में पाकिस्तान के इशारे पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले हिदायतुल्लाह को ये पिस्तौलें सौंप दीं। इस बात की भनक लगते ही पुलिस की स्पेशल टीम ने जावेद को उसके घर से दबोच लिया।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने रविवार को आंतकी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया था कि घाटी में हथियार की सप्लाई बिहार से की जा रही है। जिसके लिए पंजाब में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि बिना किसी परेशानी के अवैध हथियारों को घाटी तक लाया जा सके।

हाल ही में स्वयंभू प्रमुख कमांडर हिदायतुल्ला मलिक और जहूर अहमद राथर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे लिंक का पर्दाफाश हुआ था। जिसके बाद से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं।

ग्रामीणों का कहना है लगभग 40-50 जवान इस पूरे ऑपरेशन में शामिल थे। जिन्होंने पूरे गाँव की घेराबंदी करते हुए उसे गिरफ्तार किया। इस दौरान जावेद ने भागने का भी प्रयास किया था।

स्थानीय मुखिया ने बताया कि जावेद लगभग एक महीने पहले ही अपने घर लौटा था। वह कहीं बाहर रह कर पढ़ाई पूरी कर रहा था और बहुत कम ही घर आता था। जावेद कुल 5 भाई और एक बहन है। पड़ोस के एक युवक से जावेद की सारी जानकारी लेने के बाद पुलिस ने उसके घर पर धावा बोला था।

पुडुचेरी में कल राहुल गाँधी का दौरा, आज कॉन्ग्रेस ने खोया बहुमत: CM ने कहा – ‘किरण बेदी की साजिश’

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

अब 33 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के भी 14 ही सदस्य हैं और भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन के बाद भी इतनी ही संख्या में विधायक हैं। चूँकि विधानसभा में 3 नॉमिनेटेड विधायक होते हैं और 5 उपलब्ध नहीं हैं, इसीलिए फ़िलहाल विधानसभा की संख्या 28 ही है। कॉन्ग्रेस के पास 10 विधायक हैं और उसके साथी DMK के पास 3 हैं। उन्हें 1 निर्दलीय का समर्थन भी प्राप्त है। विपक्ष में भाजपा के पास 3 नॉमिनेटेड विधायक हैं।

उसकी साथी ‘NR कॉन्ग्रेस’ के पास 7 विधायक हैं और AIADMK के 4 विधायकों को मिला कर ये संख्या 14 पहुँचती है। विपक्षी दलों ने माँग की है कि उप-राज्यपाल किरण बेदी जल्द ही सरकार को सदन में बहुमत साबित करने को कहें। जॉन कुमार हाल ही में दिल्ली में कुछ भाजपा नेताओं से मिले थे। 2016 में नेल्लीथोपे विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाले जॉन ने मुख्यमंत्री नारायणसामी के लिए ये सीट छोड़ दी थी।

उन्हें सीएम का करीबी भी माना जाता था। बाद में वो कामराज नगर से उपचुनाव में 2019 में विजयी रहे थे। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मल्लादी कृष्णा ने भी 1 दिन पहले ट्विटर के माध्यम से अपना इस्तीफा सार्वजनिक किया था। ये सब तब हो रहा है, जब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 1 दिन बाद ही पुडुचेरी में मई में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने जा रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के सत्ता में आने के बाद ये उनका पहला दौरा है।

पुडुचेरी के सीएम वी नारायणसामी के कार्यकाल को उप-राज्यपाल किरण बेदी से उनकी लड़ाई को लेकर लेकर भी याद किया जाता है। अब भी उन्होंने किरण बेदी पर ही साजिश के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कि वो राष्ट्रपति से शिकायत करेंगे कि किरण बेदी उनकी सरकार को अस्थिर कर रही हैं और अधिकारियों को धमका रही हैं। पिछले कुछ दिनों में 4 कॉन्ग्रेस विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। नारायणसामी ने कहा कि किरण बेदी ने कई सरकारी योजनाओं को भी रोक दिया है।

दिल्ली बॉर्डर से लौट रहे किसान, नहीं मिल रहा समर्थन: ‘बदली हुई रणनीति’ की दुहाई दे रहे किसान नेता

दिल्ली की सीमा से अब किसानों का जमावड़ा कम होने लगा है और भीड़ भी नहीं है, जिसे कई किसान नेता ‘बदली हुई रणनीति’ का हवाला देकर बचाव कर रहे हैं। किसानों का लौटना तो गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा के बाद से ही शुरू हो गया था लेकिन राकेश टिकैत के रोने के बाद नया ड्रामा शुरू कर के महापंचायत बुला ली गई थी। वहीं अब फिर से किसानों के लौटने के बाद अलग-अलग बातें की जा रही हैं।

दिल्ली की सीमा पर इस आंदोलन के 3 महीने होने वाले हैं। अब गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा कम होता जा रहा है और प्रदर्शन में वो उत्साह भी नहीं रहा। पिछले कुछ दिनों में जितने किसानों को यहाँ देखा जा सकता था, अब उसके आधे प्रदर्शनकारी भी मौजूद नहीं हैं। किसान नेता और वामपंथी मीडिया पोर्टल इसे देश भर में आंदोलन को फैलाने की रणनीति बताते नहीं थक रहे। वो कह रहे कि लड़ाई लंबी चलेगी।

नई रणनीति के तहत देश के सभी राज्यों में बड़ी-बड़ी रैलियाँ आयोजित कर के आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने की कवायद शुरू होने वाली है। किसान नेता राकेश टिकैत ने देश भर में महापंचायतों का आयोजन करने की योजना बनाई है, जिसके तहत अलग-अलग इलाकों को टारगेट किया जाएगा। अगले 10 दिनों में वो हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में कई सभाओं को संबोधित करेंगे। सरकार अभी भी बातचीत के प्रस्ताव पर कायम है।

किसानों की भीड़ कम होने पर रणनीति की दुहाई दे रहे किसान नेता (वीडियो साभार: लाइव हिंदुस्तान)

गाजीपुर प्रोटेस्ट कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा, “शुरू में आंदोलन सीमाओं पर केंद्रित था। लेकिन, किसान नेता भी अब रणनीति बदलने जा रहे हैं, ताकि यह आंदोलन गाँव-गाँव में हर घर तक पहुँचे। हम अलग-अलग जगहों पर महापंचायतें आयोजित करने वाले हैं।” एक किसान नेता ने कहा कि यहाँ 10 लाख प्रदर्शनकारी भी आ जाएँ तो सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेगी, इसीलिए देश भर में प्रदर्शन हो।

सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि महापंचायत के लिए उत्तर प्रदेश को ही फोकस में रखा जा रहा है, जहाँ इस साल पंचायत चुनाव और अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कई जगहों पर भी छोटे-मोटे आयोजन की योजना बनाई जा रही है। ‘किसान आंदोलन’ दिल्ली के आस-पास के इलाकों तक सीमित रहा और अन्य राज्यों से समर्थन नहीं मिला, इसीलिए नेता नाराज हैं। अब देखना ये है कि ये ‘बदली हुई रणनीति’ कैसे काम आती है।

उधर दिल्ली पुलिस अब ग्रेटा टूलकिट तह तक पहुँच रही है। लेकिन, इसके आरोपितों के पक्ष में वामपंथी गोलबंद होने लगे हैं और समर्थन में उतर आए हैं। जहाँ ‘द प्रिंट’ ने दिशा रवि की महिमा के गुण गाए हैं, वहीं कविता कृष्णन सरीखे पीटर फ्रेडरिक के बचाव में उतर आए। उन्होंने दावा किया कि पीटर अमेरिका और दुनिया को RSS की ‘तानाशाही नीतियों’ के बारे में बताता है। कई अन्य वामपंथी इन दोनों के समर्थन में बयान दे रहे हैं।

कृषि कानूनों का समर्थन करने वालों को रेप+मौत की धमकी, कनाडा के PM और सुरक्षा मंत्री से गुहार

कनाडा में रहने वाले भारतीयों के दो दर्जन से अधिक संगठनों ने इंडो-कनाडाई के राष्ट्रीय गठबंधन के तहत सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री बिल ब्लेयर को एक पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने भारत में पारित नए कृषि कानूनों को अपना समर्थन देने के लिए समुदाय पर समन्वित हमलों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इस पत्र पर 28 सामुदायिक निकायों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

समूह ने कहा, “खालिस्तान बनाने की माँग करने वाले अलगाववादी तत्व कनाडा में किसान कानून विरोधी आंदोलन में शामिल हैं और कनाडा में रहने वाले भारतीयों पर हमला ने अब सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है।”

पत्र में आगे कहा गया है कि यह बहुत ही चिंताजनक है कि कनाडा में आतंकवाद की सबसे बुरी घटना एयर इंडिया-182 ‘कनिष्क’ पर बमबारी के लिए जिम्मेदार समूह भारत में नए लागू किए गए कानूनों का विरोध करने की आड़ में हिंदूफोबिया में लिप्त है। 

इस विमान हादसे की वजह आतंकी हमला था। इसे इतिहास के बड़े विमान हादसों में एक माना जाता है। यह विमान 23 जून, 1985 को बम ब्लास्ट का शिकार हुआ था। खालिस्तानी आंतकवादियों द्वारा किए गए इस हमले में प्लेन में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी।

जल्दी और प्रभावी कार्रवाई की माँग की गई

पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने हिंदू-कनाडाई लोगों को आश्वस्त करने के लिए कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा विभागों से जल्दी और प्रभावी कार्रवाई की माँग की, जो इस हालिया घटना के कारण भविष्य से डरते हैं। उनका कहना है कि वो नहीं चाहते हैं कि कनिष्क त्रासदी को फिर से दोहराया जाए।

बलात्कार और मौत की धमकी

जो लोग कृषि कानूनों के पक्ष में हैं, उन्हें कैलगरी, मेट्रो वैंकूवर, ग्रेटर टोरंटो एरिया और एडमॉन्टन सहित कनाडा के कई हिस्सों में बलात्कार और मौत की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह के हमलों के पीड़ितों ने कई पुलिस शिकायतें दर्ज करवाई हैं।

‘तिरंगा रैली’ के प्रतिभागियों को टारगेट किया गया

10 फरवरी को, इंडो-कनाडाई समुदाय के सदस्यों ने कृषि कानूनों के समर्थन और 26 जनवरी के दंगों में खालिस्तानी तत्वों की भूमिका के खिलाफ मेट्रो वैंकूवर में ‘तिरंगा रैली’ का आयोजन किया। रैली में सर्रे से वैंकूवर तक लगभग 350 कारों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास भवन के सामने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लहराया।

रैली के कुछ ही घंटों के भीतर प्रतिभागियों को धमकी भरे फोन आने लगे और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी उनके कार्यालयों के बाहर घूमने लगे। हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, तिरंगा रैली के स्वयंसेवकों में से एक ने कहा कि वह और उसके पति का बिजनेस सर्रे में टारगेट किया गया।

समूह ने 26 जनवरी की हिंसा की निंदा करने के लिए पीएम ट्रूडो से आग्रह किया था

रिपोर्टों के अनुसार इंडो-कैनेडियन संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में कृषि कानूनों के विरोध के दौरान हुई हिंसा की निंदा करने के लिए आग्रह किया था। बता दें कि हाल ही में उन्होंने वाशिंगटन डीसी में हुई हिंसा का विरोध किया था।

ट्रूडो को लिखे पत्र में इंडो-कनाडाई के नेशनल अलायंस के अध्यक्ष आजाद कौशिक ने कहा कि वह पीएम को इंडो-कैनेडियन समुदाय की भावनाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए लिख रहे हैं। ट्रूडो के जनवरी में कैपिटल हिल हिंसा को ‘दंगाइयों द्वारा लोकतंत्र पर हमला’ बताया था। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा है कि ‘भारतीय लोकतंत्र पर इसी तरह का हमला और हिंसा’ हुई है। किसानों की आड़ में चरमपंथी तत्वों द्वारा ऐसी हरकत की गई, लेकिन कनाडा ने इसकी निंदा नहीं की।

ट्रूडो से आह्वान किया गया कि वे इसकी निंदा करें और इसको लेकर बयान जारी करें। आजाद कौशिक ने कहा, “यह किसानों की आड़ में चरमपंथी तत्वों को बड़े पैमाने पर मौन समर्थन में इंडो-कैनेडियन समुदाय और कनाडा में धारणा से बचने में मदद करेगा।”

वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक खुले पत्र में कनाडाई प्रांत ब्रिटिश कोलंबिया के पूर्व प्रमुख उज्जल दोसांझ ने उनसे नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर होने वाले आयोजनों का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया। विशेष जाँच दल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज द्वारा निगरानी कराने की गुजारिश की।

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भगवान गणेश की लॉकेट और कमर के ऊपर नंगी रिहाना… पैसे लेकर ट्वीट करने वाली ‘किसान’ हितैषी को पड़ रही गाली

पॉप स्टार सिंगर से किसान हितैषी बनी रिहाना ने मंगलवार को अपनी आधी नंगी टॉपलेस तस्वीर को ट्विटर पर पोस्ट किया। इस दौरान उन्होंने भगवान गणेश वाला एक पेंडेंट अपने गले में डाल रखा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तस्वीर उन्होंने लॉन्जरी ब्रांड सैवेज एक्स फेंटी (Savage X Fenty) के प्रचार के लिए खिंचवाई।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में आप रिहाना को नीचे बैंगनी रंग के कपड़े के साथ, एक बैंगनी रंग के हार को पहने हुए देख सकते हैं, जिस पर भगवान गणेश बने हुए हैं।

इस तरह से हिंदू देवता के छवि को खुलेआम अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल करना सोशल मीडिया यूज़र्स को नागवार गुजरा। लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए रिहाना पर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

हिंदुओ की मान्यताओं के साथ इस कदर खिलवाड़ करने पर ट्विटर यूज़र्स ने उन्हें जमकर लताड़ा और खूब खरी-खोटी सुनाई।

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही लॉन्जरी ब्रांड फेंटी के प्रचार-प्रसार के लिए एक मॉडल को एक हिंदू मंदिर में अपना फोटोशूट कराते हुए पाया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल उसने अपने लॉन्जरी ब्रांड फेंटी के वर्चुअल रनवे शो में हदीस के गाने बजाने के लिए मुस्लिम समुदाय से माफी माँगी थी।

गौरतलब है कि रिहाना ने इस महीने की शुरुआत में भारत में चल रहे ‘किसान’ विरोध पर ट्वीट किया था। इससे वो वामपंथियों की चहेती बन गई थीं, उनका दिल जीता था। हालाँकि बाद में यह पता चला कि रिहाना द्वारा किया गया ट्वीट पूर्व नियोजित था, जिसके लिए उसे मोटी रकम भुगतान की गई थी।

यह खुलासा तब हुआ, जब छोटी-मोटी प्रदर्शनकारी ग्रेटा थनबर्ग ने एक टूलकिट को ट्वीट किया था, जिसमें भारत को बदनाम करने वाली योजनाओं का पूरा ब्यौरा था।

उल्लेखनीय है कि रिहाना को लेकर एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था ​​कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।

चमोली आपदा: 10 दिन में मिले 58 शव, 146 लापता – जिंदगी की तलाश अब भी जारी

उत्तराखंड में आए जल प्रलय के दसवें दिन मंगलवार (16 फरवरी, 2021) को तपोवन जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में मलबा हटाने का कार्य जारी है। मलबे में फँसी जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे बचावकर्मियों ने अपनी पूरी जी जान लगा दी है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, तपोवन में स्थित NTPC टनल में भी सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ ‘मिशन जिंदगी’ में जुटी हुई है लेकिन अभी तक टनल से एक भी शख्स जिंदा नहीं मिल पाया है। तपोवन जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग से दो और शव मिले हैं।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट्स के अनुसार, अब कुल मृतकों की संख्या 58 हो गई है। वहीं लापता 206 लोगों में से अभी भी 146 लापता है। सुरंग से अब तक 11 शव निकाले जा चुके हैं। वहीं परियोजना के बैराज की ओर मलबा जमा है, जिसमें शवों के दबे होने की आशंका है।

कहा जा रहा है कि एनटीपीसी टनल के अंदर से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। कल यानी सोमवार को टनल के अंदर से जवानों ने 3 शवों को बरामद किया था। हालात इतने दर्दनाक हैं कि खोजबीन के दौरान जवानों को सुरंग की छत पर शव चिपके मिले हैं। 10 दिन से घंटों की मशक्कत के बाद निकाले गए मजदूरों के शव पानी और मलबे की वजह से फुले मिले हैं।

ज्यादतर मृतकों की उम्र 30 से 35 साल के बीच है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भयंकर तबाही के दौरान ये सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे होंगे। लेकिन अचानक से आए मलबे ने रास्ते को जाम कर दिया, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। बाढ़ के दबाव से उनका शव सुरंग की छत पर चिपक गया।

वहीं अब इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद टनल में फँसे किसी भी व्यक्ति का जिंदा बचना बहुत मुश्किल है।

बता दें कि विगत सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में आपदा आ गई थी। आपदा में कुल 206 लोग लापता हुए थे। ऋषिगंगा और धौली गंगा में आई भीषण आपदा से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से तहस-नहस हो गई है।

रेस्क्यू टीम टनल में अंदर के हाल जानने के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग उपकरणों की मदद भी ले रही है। इस टनल की लंबाई करीब ढाई किलोमीटर है। इसका ज्यादातर हिस्सा आपदा में आए मलबे से भरा पड़ा है। तपोवन में चौबीसों घंटे एंबुलेंस, हेलीकॉप्टर तैनात किया गया है।

59 कारसेवक जला दिए गए थे जिंदा… उस गोधरा कांड का मुख्य आरोपित रफीक हुसैन गिरफ्तार, 19 साल से था फरार

पुलिस ने 19 साल बाद गोधरा साबरमती एक्सप्रेस नरसंहार कांड के मुख्य आरोपित रफीक हुसैन भटुक को गोधरा शहर से गिरफ्तार कर लिया है। 51 वर्षीय रफीक हुसैन भटुक 2002 से फरार चल रहा था। बता दें कि इस घटना में 59 कारसेवकों की मौत हुई थी, जब मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन के एक कोच में आग लगा दी गई थी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पंचमहल जिले की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने कहा कि 51 साल का रफीक हुसैन भटुक गोधरा कांड के आरोपियों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था जोकि पूरी साजिश में लिप्त था। उन्होंने बताया कि रफीक हुसैन भटुक पिछले 19 सालों से फरार चल रहा था।

गुप्त सूचना के आधार पर गोधरा पुलिस ने रविवार (14 फरवरी) रात को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सिग्नल फलिया के एक घर में छापेमारी की और भटुक को वहाँ से गिरफ्तार किया।”

पाटिल ने बताया, “भटुक आरोपितों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जिन्होंने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन कोच को जलाने की पूरी साजिश रची थी, जिसके लिए उसने भीड़ को उकसाया और ट्रेन के कोच को जलाने के लिए पेट्रोल का इंतजाम किया था। जाँच के दौरान नाम सामने आने के तुरंत बाद वह दिल्ली भाग गया था।”

बता दें कि गोधरा कांड के मुख्य आरोपित के खिलाफ हत्या एवं दंगा फैलाने समेत अन्य आरोप भी हैं। पाटिल ने कहा कि वो आगे की जाँच के लिए गोधरा रेलवे पुलिस को उसे सौंप देंगे।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड में 59 कारसेवक मारे गए थे, जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। भटुक ने ही इस पूरी घटना की साजिश रची थी। जिसके चलते जिंदा कारसेवकों को आग में झोंक दिया गया था। आज भी इस घटना को याद कर लोगों के रूह कांप जाते है।

‘गुलामी की मानसिकता वालों ने लिखा इतिहास, राष्ट्र रक्षक सुहेलदेव को नहीं दिया मान’: PM मोदी ने किया शिलान्यास

उत्तर प्रदेश के बहराइच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महाराजा सुहेलदेव मेमोरियल का शिलान्यास किया। इस दौरान वहाँ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष पंचायत चुनाव और अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। यूपी का राजभर समुदाय खुद को महाराज सुहेलदेव का वंशज मानता है। इस दौरान सीएम योगी ने भी राजा सुहेलदेव को याद किया।

उन्होंने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के लिए इतना बड़ा कार्यक्रम किया है और दुनिया को उनकी शौर्य गाथा बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि ये आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांता से इस धरती को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले धर्मरक्षक महाराजा सुहेलदेव की पावन जयंती का कार्यक्रम है। उन्होंने कार्यक्रम में पीएम मोदी का भी स्वागत किया।

सीएम योगी ने कहा, “भारतीय स्वाभिमान, संस्कृति और शाश्वत सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले महान शासक, ‘राष्ट्र रक्षक’ महाराजा सुहेलदेव जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि श्रद्धांजलि। आपका पराक्रम और संघर्ष हमें राष्ट्र आराधना के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।” बता दें कि राजा सुहेलदेव पर अमिश त्रिपाठी ने एक पुस्तक भी लिखी है, जिस पर फिल्म बनाने की योजना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान अपने पराक्रम से मातृभूमि का मान बढ़ाने वाले, राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव की जन्मभूमि और ऋषि मुनियों ने जहाँ तप किया, बहराइच की उस पुण्यभूमि को नमन करते हुए लोगों को बसंत पंचमी की मंगलकामनाएँ दी। उन्होंने कामना की कि माँ सरस्वती भारत के ज्ञान-विज्ञान को और समृद्ध करें। उन्होंने कहा कि ये आधुनिक और भव्य स्मारक, ऐतिहासिक चित्तौरा झील का विकास, बहराइच पर महाराजा सुहेलदेव के आशीर्वाद को बढ़ाएगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि आज महाराजा सुहेलदेव जी के नाम पर बनाए गए मेडिकल कॉलेज को एक नया और भव्य भवन भी मिला है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ वो नहीं है, जो देश को गुलाम बनाने वालों, गुलामी की मानसिकता के साथ इतिहास लिखने वालों ने लिखा, भारत का इतिहास वो भी है जो भारत के सामान्य जन में, भारत की लोकगाथाओं में रचा-बसा है। जो पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि बीते कुछ सालों में देश भर में इतिहास, आस्था, अध्यात्म, संस्कृति से जुड़े जितने भी स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनका बहुत बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देने का भी है। उत्तर प्रदेश तो पर्यटन, तीर्थाटन दोनों के मामले में समृद्ध भी है और इसकी क्षमताएँ भी अपार हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के अनेक ऐसे सेनानी हैं, जिनके योगदान को अनेक वजहों से मान नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि चौरी-चौरा के वीरों के साथ जो हुआ, वो क्या हम भूल सकते हैं? महाराजा सुहेलदेव और भारतीयता की रक्षा के लिए उनके प्रयासों के साथ भी यही प्रयास किया गया।

‘जम्मू कश्मीर को 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद में झोंका, PM मोदी मेरे आदरणीय’: PDP के पूर्व सांसद

‘जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP)’ से राज्यसभा सांसद के रूप में हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले नज़ीर अहमद लावे ने कहा है कि जम्मू कश्मीर पर सिर्फ 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद थोपा। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्लाह की ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ और कॉन्ग्रेस पार्टी ने मिल कर जम्मू कश्मीर को आतंकवाद के रास्ते में झोंक दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों की गलतियों का खामियाजा आज भी जनता भुगत रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक हजारों मासूम बेगुनाह इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में जम्मू कश्मीर ने अपने हजारों नौजवानों को खो दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को इसकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ रही है। नज़ीर ने कहा कि इन दोनों पार्टियों के किए का फायदा पाकिस्तान ने उठाया। यही आतंकवाद की वजह है।

बकौल PDP नेता नज़ीर अहमद लावे, इन्हीं कारणों से देश और दुनिया का जम्मू कश्मीर के प्रति नजरिया बदल गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है और जब भी सदन में या पीएम के सामने व्यक्तिगत रूप से कोई बात रखने का मौका मिला तो उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया है। उन्होंने पीएम मोदी को जानकारी दी कि जम्मू कश्मीर बेहद ही गरीब राज्य है। उन्होंने कहा,

“जम्‍मू कश्‍मीर का विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म करने, अनुच्‍छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्‍य के विभाजन से वहाँ के लोग विकास की दौड़ में और पीछे हो गए हैं। इस फैसले का अब तक कोई फायदा सामने नहीं आया है और आएगा भी नहीं। ये सबसे बड़ा नुकसान वहाँ की जनता को हुआ है। इससे जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की भावनाएँ जुड़ी हैं। मैंने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए मजबूती से अपनी बात उठाई थी।”

उन्होंने कहा कि उनकी मुहिम विफल रही। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होंने संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत ही अपनी बात उठाई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को दोबारा सही समय पर राज्य का दर्जा देने का वादा किया है, लेकिन ऐसा किया ही क्यों गया? उन्होंने पीएम मोदी को ‘आदरणीय’ बताते हुए कहा कि वो हमेशा गंभीरता से उनकी बातों को सुनते थे।

बता दें कि इस संसद सत्र में गुलाम नबी आज़ाद, शमशेर सिंह, नज़ीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फयाज राज्यसभा से रिटायर हुए हैं। पीएम मोदी ने भी चिंता जताई थी कि गुलाम नबी आज़ाद के बाद इस पद को जो भी नेता संभालेंगे, उन्हें उनसे मैच करने में काफी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा था कि आज़ाद अपने दल के साथ-साथ अपने देश और सदन की भी चिंता करते थे। उन्होंने इस दौरान उस आतंकी हमले को भी याद किया, जिसमें 8 गुजराती पर्यटकों की मौत हो गई थी।

‘वो किसान है.. मृदुभाषी है.. कुत्ता घुमाती है’: दिशा रवि के लिए एक हुए वामपंथी, दिल्ली पुलिस HQ के सामने होगा प्रदर्शन

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से ट्वीट की गई टूलकिट को भले ही डिलीट कर दिया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस अब इसके तह तक पहुँच रही है। लेकिन, इसके आरोपितों के पक्ष में वामपंथी गोलबंद होने लगे हैं और समर्थन में उतर आए हैं। जहाँ ‘द प्रिंट’ ने दिशा रवि की महिमा के गुण गाए हैं, वहीं कविता कृष्णन सरीखे पीटर फ्रेडरिक के बचाव में उतर आए। उन्होंने दावा किया कि पीटर अमेरिका और दुनिया को RSS की ‘तानाशाही नीतियों’ के बारे में बताता है।

कविता ने लिखा कि पीटर फ्रेडरिक को इसके लिए धन्यवाद किया जाना चाहिए, क्योंकि वो तथ्यों के साथ दुनिया को भाजपा की ‘नाजी स्टाइल की तानाशाही’ के बारे में बता रहा है। वहीं ‘द प्रिंट’ ने बेंगलुरु से गिरफ्तार की गई क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को मृदुभाषी और एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद से प्रेरित बताया। उसके दोस्तों के हवाले से लिखा गया कि वो इकोलॉजिकल कंजर्वेशन का काम करती है और जलीय जीवन पर रिसर्च करती है।

‘द प्रिंट’ ने किया दिशा रवि का गुणगान

उसे क्लाइमेट चेंज के लिए संघर्ष करने वाला बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि उसका मैसूर में एक पारिवारिक फार्म है, जहाँ वो अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ जाती है। पड़ोसियों के हवाले से उसे ‘जर्मन शेफर्ड कुत्ता घुमाने वाली लड़की’ बताया गया है। उसके साथियों के हवाले से कहा गया है कि उन लोगों का खालिस्तानी संगठनों से कोई लिंक नहीं है। जबकि संगठन FFF के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज किए गए थे।

वहीं ‘न्यूजलॉन्ड्री’ वालों ने तो इन चीजों को छिपाने के लिए फिर से उसी तरह कपिल मिश्रा के नाम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जैसे दिल्ली दंगों के समय ताहिर हुसैन जैसे आरोपितों के लिए किया गया था। मेघनाद ने एक खबर लिख कर दावा किया कि उसने ‘हिन्दू इकोसिस्टम’ के टेलीग्राम ग्रुप के कई कंटेंट्स एक्सेस किए हैं। दिल्ली में मार डाले गए रिंकू शर्मा के पीड़ित परिवार की मदद करने वाले कपिल मिश्रा को फिर से निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ की उपाध्यक्ष रही कवलप्रीत कौर ने लोगों को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन के लिए बुलाया है, ताकि दिशा रवि की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया जा सके। ये प्रदर्शन मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को दोपहर में होगा। इतिहासकार एस इरफ़ान हबीब ने तो दिशा की तुलना भगत सिंह से कर डाली। वहीं बेंगलुरु में दिशा रवि के समर्थन में वामपंथियों ने प्रदर्शन किया।

CPI की सुचेता डे ने हास्यास्पद रूप से दिशा रवि के खिलाफ कार्रवाई को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से जोड़ते हुए आरोप लगा दिया कि बेटियों को जेल में डाला जा रहा है। कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ ने दावा किया कि दिशा रवि किसान परिवार से है। प्रशांत भूषण ने भी दिशा रवि की गिरफ़्तारी के खिलाफ बयान जारी किया। झूठे आरोप लगाए कि सिर्फ ‘टूलकिट बनाने के लिए’ गिरफ़्तारी हुई है।

उधर निकिता जैकब ने बयान जारी कर कहा है कि वो टूलकिट सिर्फ एक ‘सूचना पैकेज’ था और उसका उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं था। निकिता ने ये भी कहा कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के लिए समर्थन जुटाया और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उसने कहा है कि जो इस आंदोलन के बारे में सब कुछ जानना चाहते थे, उनके लिए ये टूलकिट तैयार किया गया। जैकब वैश्विक पर्यावरण संगठन ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन (XR)’ से जुड़ी हुई है। उसने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान के हिसाब से इस टूलकिट को तैयार करना वैध है।