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आजाद भारत में फाँसी पाने वाली पहली महिला शबनम: सलीम के प्यार में 7 परिवार वालों को कुल्हाड़ी से काट डाला था

स्वतंत्र भारत में किसी पहली महिला कैदी को फाँसी देने की तैयारी चल रही है। आज़ाद भारत के इतिहास में आज तक किसी महिला अपराधी को फाँसी की सजा नहीं दी गई। उत्तर प्रदेश के मथुरा में राज्य का इकलौता फाँसीघर है, जहाँ ये कार्रवाई पूरी की जाने की तैयारी चल रही है। उक्त महिला कैदी का नाम शबनम है, जिसने अपने प्रेमी के साथ मिल कर अपने ही परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काट कर बेरहमी से हत्या कर दी थी।

निर्भया के आरोपितों को फाँसी पर लटकाने वाले पवन जल्लाद फाँसी देने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। उन्होंने मथुरा के महिला फाँसीघर में चल रही तैयारियों का दो बार जायजा भी लिया है। हालाँकि, अभी फाँसी की तारीख़ नहीं तय की गई है। अमरोहा की रहने वाले शबनम ने 2008 में इस वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शबनम को मिली सजा बरकरार रखी थी और राष्ट्रपति भी उसकी दया याचिका ख़ारिज कर चुके हैं।

मथुरा जेल में यूँ तो आज से 150 वर्ष पूर्व ही फाँसीघर तैयार कर लिया गया था, लेकिन आज़ादी के बाद अब तक ऐसा नहीं हुआ कि किसी महिला अपराधी को फाँसी दी गई हो। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने कहा कि डेथ वारंट जारी होने के बाद तारीख तय कर के शबनम को फाँसी दे दी जाएगी। तख्ता-लीवर में पवन जल्लाद को कमी दिखी, जिसे ठीक करवाया जा रहा है। बिहार के बक्सर से फाँसी के लिए फंदा आएगा, जबकि रस्सी मनीला से लाई जाएगी।

38 वर्षीय शबनम का 12 साल का एक बेटा भी है। गिरफ़्तारी के वक़्त गर्भवती रही शबनम ने जेल में ही बेटे को जन्म दिया था। वो 7 वर्ष तक जेल में ही पला-बढ़ा, जिसके बाद अब वो एक व्यक्ति की देखरेख में है। शबनम फ़िलहाल रामपुर की जेल में बंद है। 15 वर्ष पूर्व बुंदेलखंड की रामश्री को फाँसी दी जानी थी, लेकिन महिला संगठनों के हंगामें के बाद सजा उम्रकैद में बदल दी गई थी। कल्लू जल्लाद ने तब तैयारियाँ भी पूरी कर ली थी।

बावनखेड़ी गाँव के मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14-15 अप्रैल, 2008 की रात को अपने ही घर में 7 खून किए थे। उसने अपने माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को मार डाला था। अब 1870 में निर्मित मथुरा के महिला फाँसीघर में उसे उसके गुनाहों की सज़ा मिल सकती है, अगर बीच में कोई अड़चन न आए। प्रशासन तैयारियों में लगा है।

एमए पास शबनम उस समय गाँव के स्कूल में शिक्षा मित्र थीं। मास्टर शौकत उसकी शादी किसी पढे़-लिखे लड़के से करना चाहते थे। लेकिन, शबनम का दिल अपने गाँव के 8वीं पास सलीम पर आ चुका था। दोनों का प्यार इतना परवान चढ़ा कि शबनम ने अपने घरवालों को नशे की दवाई देकर सलीम को हर रात घर पर बुलाना शुरू कर दिया। कुछ दिनों में दोनों ने परिवार को बाधा मानकर उन्हें खत्म करने की साजिश रची और फिर एक रात इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया।

मस्जिद में हिजाब… लेकिन भगवान गणेश की लॉकेट नंगे होकर: हिंदू-घृणा से सना है हॉलीवुड, रिहाना के अलावा 5 और हैं नाम

बॉलीवुड में पसरा हिंदूफोबिया अक्सर सिनेमा और वेबसीरीज के माध्यम से दर्शकों में देखा जाता रहा है, लेकिन हाल में अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना के टॉपलेस तस्वीर के साथ भगवान गणेश के लॉकेट ने इस बात को चर्चा में ला दिया है कि क्या ऐसी कोशिश हॉलीवुड ने भी शुरू कर दी है? 

वास्तविकता में हॉलीवुड में हिंदूफोबिया कोई नई बात नहीं है। इससे पहले अमेरिका की एक महिला रैपर कार्डी बी ने रिबॉक के स्निकर्स को प्रमोट करने के लिए दुर्गा माँ का मजाक उड़ाया था। 

नेक लेस टॉप के साथ वह हाथ में लाल रंग के जूते लिए नजर आई थी और उनका अवतार बिलकुल ऐसा था जैसे हिंदू ग्रंथों में देवी दुर्गा के लिए दर्शाया जाता रहा है। उनकी वह तस्वीर देखने के बाद कई भारतीयों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी।

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कार्डी बी (साभार: रीडर सेक्टर फीमेल)

ऐसे ही साल 2008 में हेदी क्लम (Heidi Klum) ने एक हैलोवीन पार्टी में काली माँ का रूप धारण कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया था। उनके इस रूप की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई हिंदू नेताओं ने उनका विरोध किया था और उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने को कहा गया था। हिंदू नेताओं का कहना था कि काली की पूजा हिंदू मंदिर में करते हैं, पब्लिसिटी स्टंट के लिए क्लब में नहीं लाया जा सकता।

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हेदी क्लम

साल 2017 में कैटी पैरी का एक सोशल मीडिया पोस्ट इसी तरह वायरल हुआ था। उसमें अपने मूड की तुलना उन्होंने काली माँ की तस्वीर से शेयर करके की थी। कैटी के ऐसे प्रयासों को हिंदुओं ने अभद्र करार दिया था।

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इसी तरह डीजे ओ कार्ली ने भी अपनी आस्था के नाम पर देवी काली के रूप का इस्तेमाल हैलोवीन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किया था। लोगों ने इसे देख उन पर गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि हमारा धर्म तुम्हारा हैलोईन कॉस्ट्यूम नहीं है।

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साभार: इंडियन स्पाइस

उक्त घटनाओं से ये साफ है कि हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना या उन्हें गलत तरह से प्रस्तुत करना हॉलीवुड के लिए कोई नई बात नहीं है। रिहाना ने भी नग्न तस्वीर के साथ गणेश लॉकेट की तस्वीर साझा करके सिर्फ़ उसी परंपरा को आगे बढ़ाया है, जहाँ हिंदुओं की आस्था से ख़िलवाड़ सामान्य माना जाने लगा है।

नंगे शरीर पर गणेश जी का लॉकेट लटका कर फोटो खिंचवाने का क्या मतलब हो सकता है? हिंदुओं को आहत करने से अधिक कुछ भी नहीं। प्रोग्रेसिव फोटोशूट की बात थी तो लॉकेट के रूप में कोई और चीज भी गले में लटकाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि उसे हिंदू समुदाय, महिला की निजता का मामला मानता और भावनाओं को ठेस दूर-दूर तक नहीं पहुँचती। 

रिहाना गणेश लॉकेट
टॉपलेस होकर गणेश लॉकेट के साथ फोटो खिंचाती रिहाना

दिलचस्प बात यह है कि हिंदू देवताओं का लॉकेट गले में टाँग अपनी टॉपलेस तस्वीर ख़िंचाने वाली रिहाना वही खुले विचारों की महिला हैं, जिन्हें जब मस्जिद के बाहर फोटोशूट कराना था तो वह नकाब ओढ़ कर गई थीं, जबकि उससे पहले तक उन्हें उनके सेक्सी पोज और न्यूड फोटोशूट के लिए जाना जाता था।

हिजाब में रिहाना
मस्जिद में फोटोशूट कराने के लिए हिजाब पहन तैयार हुई रिहाना

शायद, रिहाना को मालूम था कि यदि वो एक निश्चित समुदाय के प्रति इतना सम्मान नहीं दिखाएँगी तो उनका क्या होगा। लेकिन फिर भी हालत देखिए, अपनी तरफ से सामान्य पहनावा पहनने के  बावजूद शेख जायद शाही मस्जिद के अधिकारियों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था, वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने फोटोशूट के दौरान कोई गलत पोज देने की कोशिश की थी। उससे पूर्व मस्जिद के कंपाउंड में खड़े होकर पोज देने के लिए भी बहुत हंगामा मचा था।

प्‍लेबॉय मॉडल ल्युआना सैंडियन (साभार: इंस्टाग्राम)

मालूम हो कि रिहाना अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं, जिन्हें इस्लामी रिवाज के कारण मस्जिद के बाहर या फिर इस्लामी देश में उटपटांग फोटोशूट कराने के लिए चलता किया गया हो। अभी हाल में मुस्लिम देश दुबई में एक प्लेबॉय मॉडल ल्युआना सैंडियन को टॉपलेस तस्‍वीर खिंचवाना भारी पड़ गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स आलोचनाओं के साथ उन्हें धमकी भरे मैसेज भेजे जाने लगे थे। 

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टखने दिखाती सेलेना गोम्ज (साभार: डेलीमेल)

हालाँकि, इस मामले को लेकर मॉडल का कहना था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। शूट के दौरान उन्होंने हाथों से अपने ब्रेस्ट को ढक लिया था। उनके अलावा पॉप स्टार सेलेना गोमेज के आबू धाबी की ग्रैंड मस्जिद में ड्रेस उठाकर टखने दिखाते तस्वीर पर विवाद हुआ था। बात इतनी बढ़ गई थी कि सेलेना को लोगों की नाराजगी और बढ़ते विवाद को देख कर अपनी ये दोनों तस्वीरें अपने अकाउंट से हटानी पड़ी थी।

31 वर्षों बाद खुला श्रीनगर का शीतल नाथ मंदिर: इस्लामी आतंकियों ने जला डाला था, विशेष पूजा के साथ दर्शन चालू

श्रीनगर का शीतल नाथ मंदिर पिछले 31 वर्षों से बंद पड़ा हुआ था, जिसे मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को वसंत पंचमी के मौके पर खोला गया। इस मंदिर को इस्लामी आतंकवाद और हिन्दुओं के पलायन के कारण बंद किया गया था। ये मंदिर जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के हब्बा कदल क्षेत्र में स्थित है। मंदिर को 3 दशकों बाद पुनः खोलने के बाद श्रद्धालुओं ने यहाँ विशेष पूजा का भी आयोजन किया।

मंदिर में पूजा करने आए एक श्रद्धालु संतोष राजदान ने कहा कि स्थानीय लोगों ने इस मंदिर को खोलने में बड़ी भूमिका निभाई है। वहीं कई लोग इसे ‘नया जम्मू कश्मीर’ का कमाल भी बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तो मुस्लिमों ने भी मंदिर को खोलने में मदद की है। यहाँ आसपास पहले काफी सारे हिंदू रहा करते थे, जिन्हें इस्लामी आतंकवाद के कारण पलायन करना पड़ा था। अब यहाँ दर्शन चालू हो गया है।

शीतल नाथ मंदिर में आयोजित पूजा के आयोजकों में से एक रवींद्र राजदान ने कहा कि स्थानीय लोगों ने मंदिर की साफ़-सफाई में खासी मदद की है। पहले प्रत्येक वर्ष इस तरह की पूजा की जाती थी। बाब शीतल नाथ भैरों की जयंती भी वसंत पंचमी के दिन ही पड़ती है, इसीलिए ये दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष है। जब कश्मीरी पंडित यहाँ रहा करते थे, तब वो नियमित रूप से यहाँ पूजा-पाठ किया करते थे।

शीतल नाथ मंदिर से ग्राउंड रिपोर्ट (वीडियो साभार: Times Now)

यहाँ अब आसपास कोई हिंदू परिवार नहीं बचा है। रवींद्र राजदान इस मंदिर के सेवादार हैं, जिन्होंने इसे खोलने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वे इस जगह के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि इस मंदिर को 1991 में जला दिया गया था। उन्होंने कहा कि 3 दशक पहले यहाँ मेला लगा करता था और दुकानें सजती थीं। उन्होंने बताया कि अब हम फिर उसी महिमा को वापस लाना चाहते हैं, जिसके लिए सरकार की भी मदद चाहिए।

उन्होंने कहा, “ये कश्मीरी पंडितों का निवास स्थान है। हम चाहते हैं कि हम यहाँ आएँ और रहें। उसी वैभव के साथ, जैसे पहले हम यहाँ निवास किया करते थे। लेकिन, राज्य और केंद्र सरकारों को भी हमें इसके लिए सहायता करनी चाहिए। स्थिति ऐसी बनाई जानी चाहिए, ताकि हम यहाँ रहने लायक बनें। सरकारें सिर्फ वादा करती हैं, लेकिन वादों से पेट नहीं भरता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कश्मीरी पंडितों की वापसी होगी।

‘दक्षिण अफ्रीका ने भारत को वापस भेज दी कोरोना वैक्सीन की 10 लाख डोज, कारगर नहीं है, हो रही बीमारी’ – Fact Check

कई मीडिया संस्थानों ने खबर चलाई है कि दक्षिण अफ्रीका ने भारत से ली गई वैक्सीन की डोज लौटाने का फैसला किया है। इन ख़बरों में कहा गया कि पुणे के ‘सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SII)’ से ली गई कोरोना वैक्सीन की 1 मिलियन डोज दक्षिण अफ्रीका अब उसे वापस लौटा देगा। बताया गया कि वायरस के नए म्युटेंट पर ये कारगर नहीं है और इससे बीमारी हो रही है, इसलिए ऐसा फैसला लिया गया।

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी ‘तहरीक-ए-इंसाफ (PTI)’ ने भी फ़ोर्ब्स की खबर शेयर कर के दावा किया कि भारत पूरी दुनिया को खतरे में डाल रहा है। सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ‘द हिन्दू’ की खबर शेयर कर इसे आगे बढ़ाया। NDTV ने भी रिपोर्ट्स के हवाले से इस खबर को लपक लिया और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री के हवाले से इस खबर को आगे बढ़ाया। ‘इकनोमिक टाइम्स’ और ‘आउटलुक’ ने भी इस बारे में खबर प्रकाशित की।

पोर्टल ‘VCCircle’ ने भी अपनी खबर में कहा कि AstraZeneca के शॉट्स तैयार करने वाली SII को दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने कह दिया है कि वो अपने दिए 10 लाख वैक्सीन की डोज वापस ले ले। कई अन्य मीडिया पोर्टल्स ने भी इस खबर को प्रकाशित किया। सोशल मीडिया पर इसे शेयर कर के भाजपा विरोधियों ने अपने वही पुराने राग को अलापा, जिसमें इस वैक्सीन को खतरनाक बताया गया था।

अब आपको बताते हैं कि इस खबर की सच्चाई क्या है। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर ज़्वेली मखीज़ ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को स्पष्ट किया कि उनके देश ने SII को वैक्सीन वापस नहीं किया है। ‘स्टेट ऑफ द नेशन एड्रेस डिबेट’ के दौरान संसद में उन्होंने साफ़ किया कि मीडिया रिपोर्ट्स में जैसा कहा जा रहा है, ऐसा कुछ भी नहीं है। ‘Wion News’ ने मंत्री के इस बयान को प्रकाशित किया है।

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए आगे कहा, “मैं फिर से ये साफ़ कर देना चाहता हूँ कि वैक्सीन एक्सपायर नहीं हुए हैं और हमने खुद से परीक्षण कर के 31 अप्रैल की एक्सपायरी तारीख तय की है। गलत अफवाह फैलाई गई कि वैक्सीन एक्सपायर हो गए हैं। हमने जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की भी 90 लाख डोज ऑर्डर की है। कई अंतरराष्ट्रीय चैनलों से वैक्सीन निर्माताओं से बातचीत जारी है।”

बता दें कि भारत अब तक 15 से अभी अधिक देशों को वैक्सीन की खेप भेज कर उनकी मदद कर चुका है। भारत इसी महीने कनाडा को कोरोना वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ की पाँच लाख खुराक भेजेगा। भारत सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद ये मंजूरी दी गई। इसी तरह पाकिस्तान के अलावा सभी पड़ोसी मुल्कों को भी वैक्सीन दी गई।

महंत पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार, लखनऊ में चल रहा इलाज: लईक खान ने अतीक, सलमान के साथ किया हमला

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को ‘बड़ी संगत’ के महंत मुनि बजरंग दास पर चाकुओं से जानलेवा हमला किया गया। महंत पर ये हमला तब हुआ, जब समुदाय विशेष के लोग विवादित बाग़ में दवा का छिड़काव कर रहे थे और महंत ने इस पर विरोध जताया। इसके बाद आरोपितों ने महंत पर चाकुओं से ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे वो जख्मी हो गए। हमले में महंत के सुरक्षाकर्मी सहित 4 लोग जख्मी हो गए।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, घायल महंत मुनि बजरंग दास की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के डीएम और एसपी ने खुद घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। ये घटना खैराबाद थाना क्षेत्र की है। उक्त बाग़ विवादित है, जहाँ समुदाय विशेष के लोग दवा का छिड़काव करने पहुँच गए थे।

जैसे ही महंत ने विरोध जताया, समुदाय विशेष के कई लोग धारदार हथियारों से लैस होकर वहाँ पहुँच गए। इस जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चला आ रहा है। संगत की कई बीघा जमीन महंत ने हाल ही में कब्जे से मुक्त कराई है। प्रशासन की तरफ से महंत को बंदूक से लैस एक सुरक्षाकर्मी भी दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि ये जमीन का विवाद है और मामले की जाँच की जा रही है।

मुख्य आरोपित का नाम लईक खान है, जिसने अपने साथियों के साथ महंत पर हमला किया। साथ में उसके भाई सलमान और अतीक भी थे। डीएम विशाल भारद्वाज और एसपी आरपी सिंह खुद मामले पर नजर रख रहे हैं।

‘उदासीन अखाड़ा’ के महंत धर्मेंद्र दास ने शांति की अपील करते हुए कहा कि आपसी विवाद में कहासुनी हुई और महंत बजरंग को चोट आई। उन्होंने प्रशासन को स्थिति को संभालने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि चीजें नियंत्रण में हैं और अफवाह न फैलाएँ।

सीतापुर पुलिस ने बताया है कि खैराबाद क्षेत्र में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में शांति समिति की बैठक की गई, जिसमें दोनों समुदायों के गणमान्य लोग शामिल हुए। पुलिस ने कहा कि कानून/शांति व्यवस्था सम्बन्धी कोई समस्या नहीं है।

महंत की हालत भी स्थित बताई गई है, जिसकी पुष्टि ‘उदासीन अखाड़े’ ने भी की है। अभियुक्तों के खिलाफ जाँच कर के कार्रवाई की बात कही गई है। ये घटना ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली के मंगोलपुरी में चाकुओं से रिंकू शर्मा की हत्या से लोग आक्रोशित हैं।

प्रदर्शनकारी ने दिल्ली पुलिस के SHO पर तलवार से किया जानलेवा हमला, अस्पताल में भर्ती: नशे में धुत था ‘किसान’ हरप्रीत

गणतंत्र दिवस के दिन जिस तरह से ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की हिंसा में 500 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, उसे अभी देश भूल भी नहीं है कि पुलिसकर्मियों पर फिर हमले किए जा रहे हैं। सिंघु सीमा पर फिर से दिल्ली पुलिस के एक SHO पर तलवार से हमला किया गया। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) की रात 8 बजे हरप्रीत सिंह नामक प्रदर्शनकारी ने तलवार के बल पर जानलेवा हमला कर के दिल्ली पुलिस की कार छीन ली।

उक्त प्रदर्शनकारी कार लेकर चंपत होने लगा, जिसके बाद पुलिस ने उसका पीछा करना शुरू किया। मुकरबा चौक पर जब उसने खुद को घिरा हुआ पाया तो उसने कार को वहीं पर छोड़ दी और वहाँ पड़ी एक स्कूटी लेकर भाग खड़ा हुआ। समयपुर बादली थाने में तैनात SHO आशीष दुबे पुलिस बल के साथ उसका पीछा कर रहे थे, इसी दौरान उसने तलवार से हमला कर दिया और वो जख्मी हो गए।

तलवार के हमले में उनकी जान बाल-बाल बची। उँगलियों और गर्दन में जख्म होने के कारण उन्हें रात को ही अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। आरोपित पंजाब का रहने वाला है। उसके खिलाफ दो मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित नशे में भी था। उससे पूछताछ की जा रही है। इससे प्रदर्शन स्थल पर नशे को लेकर भी सवाल खड़ा हुआ है।

इससे पहले भी ऐसी वारदात सामने प्रदर्शनकारियों ने अलीपुर के SHO पर तलवार से हमला कर दिया था और वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जनवरी 29, 2021 की इस घटना में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने वहाँ मौजूद SHO पर तलवार से हमला कर दिया था, जिसमें उनका हाथ जख्मी हो गया। घायल SHO को अस्पताल ले जाकर तलवार को कब्जे में ले लिया गया था। 26 जनवरी को ऐसी कई वारदातें हुई थीं।

मस्जिद में चल रही थी बम बनाने की क्लास, फट गया… मर गया 30 आतंकी: अफगान रक्षा मंत्रालय ने की पुष्टि

अफगानिस्तान के एक मस्जिद में शनिवार (फरवरी 13, 2021) को बम बनाने के दौरान हुए विस्फोट में 30 तालिबानी आतंकी मारे गए। आधिकारिक सूचना के मुताबिक मरने वालों की संख्या में 6 विदेशी आतंकी भी शामिल थे। 

अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मस्जिद में हुए बम विस्फोट के कारण 30 आतंकियों के मरने की सूचना है। इनमें 6 विदेशी भी शामिल थे, जो प्रोफेशनली बम बनाने का काम करते थे। बयान के अनुसार, घटना एक ऐसी जगह घटी, जहाँ कई तालिबानी बम बनाने के लिए एकत्र हुए थे।

मंत्रालय के अनुसार, यह घटना सुबह 9.15 बजे बल्ख प्रांत के दावत अबद जिले के कितला गाँव में हुई, जो राजधानी काबुल के उत्तर में लगभग 450 किलोमीटर दूर है और उज्बेकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है।

मंत्रालय प्रवक्ता फवाद अमन ने इस घटना को सबसे घातक बताते हुए कहा कि इसमें कोई आतंकी जीवित नहीं बचा। अरब न्यूज को दिए बयान में वह बताते हैं कि पूर्व में भी ऐसी घटनाएँ हुईं लेकिन 6, 8 या 10 की संख्या में बम लगाते या उसे बनाते हुए आतंकियों की धज्जियाँ उड़ी, मगर इस बार संख्या ज्यादा है।

मालूम हो कि तालिबान ने बम विस्फोट की बात को स्वीकार लिया है। हालाँकि उनकी ओर से जान हानि की कोई पुष्टि नहीं की गई है। तालिबान के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने बताया, 

“हाँ, वहाँ पर विस्फोट हुआ है, जहाँ बम स्टोर किए गए थे, लेकिन वैसा नहीं जैसे सरकारी अधिकारी बता रहे हैं। हम उन रिपोर्ट को खारिज करते हैं जिसमें मौत की बातें है, कोई भी नहीं मरा है।” 

जबिहुल्लाह के अनुसार, सुबह के समय दुश्मनों के प्लेनों ने आकर बमबारी की थी, जिसके कारण पास के एक मस्जिद को क्षति पहुँची है।

वहीं बल्ख राज्यपाल के प्रवक्ता मुनीर अहमद फरहाद ने बताया कि दवलत अबाद में सालों से तालिबानियों की उपस्थिति है, लेकिन इस घटना से संबंधित रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के बारे में उन्होंने नहीं सुना था।

बता दें कि अफगानिस्तान में बल्ख उन जगहों में से एक था जहाँ से तालिबानियों ने कुछ समय पहले तक दूरी बनाई हुई थी। मगर, अब अमेरिका के सैनिकों के हटने के बाद और सरकारी नेताओं से अनबन के चलते उन्होंने वहाँ पहुँच बना ली है।

हालिया विस्फोट को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में एक स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है। पता लगना चाहिए कि ये कोई एयरस्ट्राइक थी या फिर सरकार के दावे सही हैं कि वहाँ बम बनाने के कारण विस्फोट हुआ?

CAA विरोधी दंगाइयों के ‘बलिदान’ का स्मारक बनवाएगी कॉन्ग्रेस: असम में चुनाव से पहले पार्टी ने किया वादा

असम में अप्रैल 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने CAA को फिर से मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। शिवसागर में चुनावी सभा के दौरान पार्टी के पूर्व-अध्यक्ष राहुल गाँधी ने CAA विरोधी गमछा गले में डाला हुआ था। अब पार्टी ने कहा है कि एंटी-CAA आंदोलन मरने वाले ‘बलिदानियों’ की याद में स्मारक बनवाया जाएगा। कॉन्ग्रेस पार्टी ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को ये ऐलान किया।

पार्टी ने कहा कि दिसंबर 2019 में CAA विरोधी आंदोलनों में जिनकी मौत हुई थी, उनके सम्मान वो स्मारक बनेगा। सांसद गौरव गोगोई, प्रद्युत बोरोडोलोई और असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये ऐलान किया। इन नेताओं ने लिखा कि आने वाले दिनों में गुवाहाटी में एक नया लैंडमार्क जुड़ेगा और वो होगा कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बनवाया जाने वाला ये स्मारक।

कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने पर इस स्मारक के निर्माण का वादा किया है। अपर असम में शिवसागर में हुई रैली में राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी असम में ‘इस विवादित कानून’ को नहीं लागू होने देगी। दिसंबर 2019 में CAA विरोधी उपद्रव में राज्य में 5 लोगों की मौत हुई थी। राज्य के वित्त, योजना एवं विकास विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और लोक निर्माण विभाग के मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि CAA चुनावी मुद्दा है ही नहीं।

उन्होंने कहा कि राज्य का युवा ये सोच रहा है कि राज्य सरकार ऐसी कोई योजना लॉन्च करेंगी कि नहीं जिससे उन्हें मोटरसाइकिल मिले, जैसी सुविधा प्रतिभावान छात्राओं को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सब चुनाव में चर्चा के मुद्दे हैं। वहीं सांसद प्रद्युत ने कहा कि भाजपा ने ऐतिहासिक असम एकॉर्ड का उल्लंघन किया है और सांप्रदायिक तनाव पैदा किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी फ़िलहाल ‘आइए, असम को बचाएँ’ अभियान चला रही है।

जिस मेमोरियल का वादा कॉन्ग्रेस ने किया है, उसके बारे में पार्टी ने बताया कि उसमें एंटी-CAA प्रदर्शनकारियों के ‘त्याग और उनके प्रयासों’ के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। साथ ही बताया कि उसमें गानों और पेंटिंग के जरिए CAA विरोधियों का गुणगान किया जाएगा। कॉन्ग्रेस ने कहा कि ये भाजपा को प्रदेश का सन्देश होगा – ‘असम में CAA नहीं’। वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि लोग ‘CAA विरोधियों के दमन’ को नहीं भूलेंगे।

किरण बेदी को हटाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में फूटे पटाखे, CM ने बाँटी मिठाइयाँ: आज पहुँचेंगे राहुल गाँधी

पुडुचेरी में हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश का राजनीतिक ड्रामा अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों तक यूँ ही चलता रहेगा। अब केंद्र सरकार ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को अपने पद से हटा दिया है। उनकी जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

तमिलसाई पहले तमिलनाडु में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष हुआ करती थीं। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) की रात राष्ट्रपति भवन की इस अधिसूचना के बाद घटनाक्रम तेज़ी से बदलने लगा। राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि जब तक पुडुचेरी के उप-राज्यपाल के रूप में अगली नियुक्ति नहीं की जाती, तमिलसाई सुंदरराजन अतिरिक्त प्रभार संभालती रहेंगी। भाजपा के एक यूनिट के कुछ नेताओं ने भी किरण बेदी के कामकाज से आपत्ति जताई थी।

किरण बेदी को मई 2016 में उप-राज्यपाल बनाया गया था, ऐसे में उनका कार्यकाल पूरा होने को मात्र 3 महीने ही बचे हुए थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने लगातार पुडुचेरी में ये बात फैलाई थी कि किरण बेदी के कामकाज से जनता नाराज़ है और वो चुनी हुई सरकार के ऊपर हावी हैं। स्थानीय भाजपा यूनिट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को 3 बार याचिका भेज कर किरण बेदी को हटाने की माँग की थी।

किरण बेदी ने पुडुचेरी में ट्रैफिक नियमों में सख्ती की थी और हेलमेट न पहनने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया था। गरीबों को अनाज के बदले ‘डायरेक्ट बेनेफिर ट्रांसफर (DBT)’ पर जोर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने जब सरकारी स्कूल के बच्चों को प्रदेश के इंजीनियरिंग/मेडिकल कॉलेजों में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया तो किरण बेदी ने इसे नकार दिया था। कॉन्ग्रेस इन बातों से नाराज थी।

किरण बेदी के हटाए जाने की खबर के साथ ही प्रदेश भर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ कर अपनी ख़ुशी जताई। कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में जश्न मनाया गया। खुद मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी ने नेताओं के बीच मिठाई बाँट कर जश्न मनाया।

सीएम नारायणसामी ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किरण बेदी को हटाने की माँग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बेदी प्रदेश सरकार की विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं।

वी नारायणसामी ने इस फैसले के तुरंत बाद एक प्रेस बैठक बुलाई और उसमें कहा कि ये न सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी, बल्कि पुडुचेरी की जनता की भी जीत है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में किरण बेदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद जनता के अधिकार सुरक्षित नहीं रह गए थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की जनता ने किरण बेदी को ‘एक बड़ा सबक सिखाया’ है। किरण बेदी अब तक इस मामले में खामोश ही हैं।

एक और अटकल ये लगाई जा रही है कि किरण बेदी सक्रिय राजनीति में वापसी कर सकती हैं, इसीलिए उन्हें हटाया गया है। पिछले साढ़े 4 वर्षों से भी अधिक समय के अपने कार्यकाल में उन्होंने पुडुचेरी में बतौर उप-राज्यपाल प्रतिदिन जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है। ये बात नारायणसामी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी गूँजी। नारायणसामी ने कहा कि अगर वो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में आती हैं तो उनका स्वागत है।

नारायणसामी ने कहा कि हमने न जाने कितने ही उपवास किए और धरने दिए, तब जाकर केंद्र सरकार की अब नींद खुली है। उन्होंने कहा कि अब पुडुचेरी की जनता खुश है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे भाजपा का ड्रामा बताते हुए कहा कि पार्टी को पता था कि अगर बेदी इस पद पर रहतीं तो भाजपा को वोट नहीं मिलते। अब सभी की नजरें राहुल गाँधी पर हैं, जो 4 दिनों के चुनावी कैम्पेन के लिए आज पुडुचेरी पहुँच रहे हैं। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया संयोजक ने बेदी और संघ/भाजपा के लिए काम करने के आरोप लगाए।

बता दें कि पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

‘प्रेमी जोड़ों के लिए डेटिंग डेस्टिनेशन’ – गुजरात कॉन्ग्रेस का चुनावी वादा, BJP ने कहा – ‘राहुल गाँधी के कहने पर…’

गुजरात में जल्द ही 6 नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं। राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, भावनगर और जामनगर में निकाय चुनाव के लिए जोर-शोर से प्रचार जारी है। वड़ोदरा निकाय चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को अपना घोषणापत्र (Manifesto) जारी किया। घोषणापत्र में पार्टी ने एक ऐसा वादा कर दिया है, जिसे लेकर शहर में हलचल मच गई है। 

कॉफी शॉप और डेटिंग डेस्टिनेशन बनाएगी कॉन्ग्रेस 

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने युवाओं को लुभाने के लिए अपने घोषणापत्र में डेटिंग डेस्टिनेशन बनाने का वादा किया है। कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि अगर वह सत्ता में आती है तो शहर में डेटिंग डेस्टिनेशन बनाए जाएँगे।

वड़ोदरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष प्रशांत पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सत्ता में आने पर कॉन्ग्रेस हर वार्ड में तिरंगा क्लीनिक शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस युवाओं, छात्रों, प्रेमी जोड़ों और कॉरपोरेट्स के लिए कॉफी शॉप के साथ डेटिंग डेस्टिनेशन खोलेगी। इसी के साथ किटी पार्टी के लिए एक हॉल का निर्माण भी किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से डेटिंग डेस्टिनेशन बनाए जाने के वादे पर बीजेपी ने तंज कसा है। वड़ोदरा बीजेपी के पूर्व मेयर भरत डांगा का कहना है कि जिसके जैसे संस्कार होते हैं, वे वैसा ही बात करते हैं। उनका कहना है कि वड़ोदरा को संस्कारी नगरी कहते हैं। यहाँ बीजेपी ने बाग-बागीचे लोगों की फिटनेस और बच्चों के खेलने के लिए बनाए हैं। उनका मानना है कि कॉन्ग्रेस ने डेटिंग डेस्टिनेशन बनाने का वादा राहुल गाँधी के कहने पर किया होगा। 

मुफ्त यात्रा का वादा

वड़ोदरा कॉन्ग्रेस ने सिटी बसों में महिलाओं, सेना से रिटायर्ड जवानों और होमगार्डों को मुफ्त यात्रा का वादा किया है। इसी के साथ छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को बस किराए में 50 प्रतिशत की राहत देगी।

गुजरात के राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, भावनगर और जामनगर समेत कुल 6 नगर निगमों के चुनाव के लिए 21 फरवरी को मतदान होगा, जबकि 81 नगरपालिकाओं, 31 जिला पंचायतों और 231 तालुका पंचायतों के लिए 28 फरवरी को वोट डाले जाएँगे।

बता दें कि इससे पहले चुनाव प्रचार के लिए गुजरात पहुँची केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को गुजरात से चुनाव लड़ने के लिए ललकारा। स्मृति ईरानी राहुल गाँधी द्वारा असम में ‘चाय बागानों’ को लेकर दिए गए बयान पर भी जमकर बरसी।

स्मृति ईरानी ने कहा, “कॉन्ग्रेस को गुजरात से परेशानी है, गुजरातियों से भी परेशानी है, मैं राहुल गाँधी को चैलेंज देती हूँ कि वे गुजरात से चुनाव लड़कर और जीत कर दिखाएँ। उनकी गलतफहमी दूर हो जाएगी।”

ईरानी ने नवसारी जिले के वांसदा शहर में स्थानीय निकायों के आगामी चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘राहुल गाँधी ने हाल ही में असम में एक रैली में कहा था कि वह गुजरात के छोटे चाय कारोबारियों की जेब से रकम निकलवाएँगे। इससे पहले उन्हें (कॉन्ग्रेस) चाय विक्रेता (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) से परेशानी थी और अब उन्हें चाय पीने वालों से दिक्कत है।’’

बता दें कि राहुल गाँधी ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस असम में सत्ता में आएगी तो वह चाय बागानों के श्रमिकों की दिहाड़ी मजदूरी में वृद्धि करेगी।