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बंगाल: ‘जय श्री राम’ वाला मास्क बाँट रहे BJP नेता को ममता की पुलिस ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार का ‘जय श्रीराम’ के नारे से टकराव ख़त्म होने के बजाय चुनाव के नजदीक आते ही और अधिक बढ़ता नजर आ रहा है। अब ममता की पुलिस ने बंगाल में भाजपा नेता अमानिश अय्यर को गिरफ्तार कर लिया है। अमानिश अय्यर का ‘अपराध’ ये है कि वो ‘जय श्री राम’ का मास्क पहनकर ऐसे ही मास्क लोगों में बाँट रहे थे।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा है कि ‘जय श्री राम’ वाले मास्क पहनकर इन्हें बाँटने के लिए बंगाल पुलिस ने अमानिश अय्यर को गिरफ्तार कर लिया है। भाजपा नेता अमानिश अय्यर श्रीरामपुर सांगठनिक जिला के महासचिव हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले, पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर विक्टोरिया मेमोरियल में रखे गए एक कार्यक्रम में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंच पर जाते ही कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगा दिए थे।

इसे ‘सरकारी कार्यक्रम का अपमान’ बताकर नाराजगी में ममता ने भाषण देने से इनकार करते हुए स्पष्ट संकेत दिया था कि ममता बनर्जी को ‘जय श्री राम’ के नाम से ही समस्या है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के हुबली में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने नया नारा इजाद करते हुए ‘हरे कृष्णा हरे राम, विदा हो बीजेपी-वाम’ का नारा भी दिया। इस रैली में ममता ने तृणमूल छोड़ भाजपा का दामन थाम रहे नेताओं पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा वाशिंग मशीन है।

ममता ने कहा था कि.सम्मानित लोगों को ही वो अपनी पार्टी में लेंगी और चोरों को टीएमसी में जगह नहीं है। ममता ने कहा था, “मैं दूसरे दलों के सम्मानित लोगों को कहूँगी कि ट्रेन छोड़ने वाली है जल्दी जाओ। तुम लोगों को टीएमसी का टिकट नहीं मिलता इसीलिए भाजपा जा रहे हो।”

ममता ने कहा था – RAW ने करवाया बम ब्लास्ट, अब उसी के लिए बांग्लादेशी आतंकी को 29 साल की सजा

पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में एक बम ब्लास्ट हुआ था। दिन था – 2 अक्टूबर 2014 – इस मामले में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB, Jamat-ul-Mujaheedin of Bangladesh) के आतंकी शेख कौसर को 29 साल कैद की सजा सुनाई गई है।

एनआईए की विशेष अदालत ने बांग्लादेश के नागरिक और आतंकी शेख कौसर (दूसरा नाम बोना मिजान – Bona Mizan भी) को भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने सहित कई अन्य धाराओं के तहत दोषी करार दिया।

NIA के जज सुभेंदु समांता ने शेख कौसर को 5 मामलों में 5-5 साल की सजा और 2 मामलों 2-2 साल की सजा सुनाई। कुल मिलाकर इस आतंकी को 29 साल की सजा हुई है।

बर्धमान बम ब्लास्ट: कब और कैसे

पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में यह ब्लास्ट 2 अक्टूबर 2014 को हुआ था। खगरागढ़ इलाके के किराए के एक मकान की पहली मंजिल पर यह विस्फोट हुआ था। यहाँ जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के आतंकियों द्वारा बम बनाया जा रहा था। बम बनाते समय ही किसी गलती से विस्फोट हो गया था। इस कारण 2 आतंकियों की मौत हो गई थी।

बर्धमान बम ब्लास्ट में 2 आतंकियों के मरने के साथ एक आतंकी घायल भी हुआ था। इस मामले में कुल 33 आरोपितों पर केस हुआ था। इनमें से शेख कौसर को मिली सजा के साथ 31 दोषी करार दिए जा चुके हैं। 2 आरोपित अभी तक फरार हैं।

बर्धमान बम ब्लास्ट: ममता बनर्जी की राजनीति

हमारे देश का नाम भारत है। इसी देश में एक राज्य है – नाम है पश्चिम बंगाल। उस राज्य की मुख्यमंत्री हैं – ममता बनर्जी। ममता बनर्जी के राज्य में बम विस्फोट होता है। भारत के संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री बनने वाली ममता बनर्जी भारत के संविधान के तहत ही काम करने वाली एक संस्था (RAW) पर बम विस्फोट कराने का आरोप लगा देती हैं।

ऊपर के पैराग्राफ को फिर से पढ़िए। ममता बनर्जी की राजनीति को समझिए। और फिर खबर का पहला पैराग्राफ पढ़िए। जिस आतंकी घटना के लिए राज्य की मुख्यमंत्री RAW पर आरोप लगा रही थीं, उसी घटना के लिए देश की अदालत एक आतंकी को 29 साल की सजा सुनाती है।

आपको बता दें कि जमात-उल-मुजाहिदीन (बांग्लादेश) के आतंकी शेख कौसर बिहार के बोधगया विस्फोट मामले में भी आरोपित है। बोधगया विस्फोट जनवरी 2018 में हुआ था।

Twitter इंडिया के शीर्ष अधिकारी हो सकते हैं गिरफ्तार, सरकारी आदेशों और भारत के कानूनों की अवहेलना का है मामला: रिपोर्ट्स

केंद्र सरकार जल्द ही भारत में ट्विटर के कुछ शीर्ष अधिकारीयों को गिरफ्तार कर सकती है। यह सामने आई है, जब ट्विटर भड़काऊ सामग्री, विशेष रूप से ‘किसानों के नरसंहार’ के हैशटैग शेयर करने वाले ट्विटर अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही। सरकार ने ट्विटर को इन अकाउंट पर एक्शन लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन ट्विटर ने इन आदेशों की अवहेलना की और वो आईटी एक्ट के सेक्शन 69 ए के तहत दिए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रहे।

बृहस्पतिवार (फरवरी 11, 2021) को आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में कहा कि चाहे ट्विटर, फेसबुक, लिंक्डइन या व्हाट्सऐप हो, भारत में काम करने के लिए उनका स्वागत है, उनके करोड़ों फोलोअर्स हैं, लेकिन उन्हें भारतीय संविधान और कानूनों का पालन करना होगा।

समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ पर पंकज डोवाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ट्विटर के शीर्ष अधिकारियों को अब केंद्र सरकार द्वारा गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, भारत सरकार ने ट्विटर से कुछ ‘भारत-विरोधी’ अकाउंट और खालिस्तान समर्थक अकाउंट को निरस्त करने के आदेश दिए थे।

हालाँकि, सरकार के कठोर रुख को देखते हुए, ट्विटर ने कुछ ट्विटर अकाउंट पर आंशिक रूप से प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर अब ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार’ की रक्षा को आधार बनाकर अदालत का रुख कर सकती है।

वहीं, ट्विटर ने मंगलवार (फरवरी 09, 2021) को कहा कि वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आदेशों का पूरी तरह से पालन नहीं करेगा, क्योंकि वह यह नहीं मानता है कि आदेश भारतीय कानून के अनुरूप हैं।

बुधवार (फरवरी 10, 2021) को ट्विटर के अधिकारियों- ट्विटर की ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी वाइस प्रेसिडेंट मोनीके मेशे और जिम बेकर के साथ एक बैठक के दौरान, केंद्रीय आईटी सचिव अजय प्रकाश साहनी ने स्पष्ट किया कि इन विवादास्पद हैशटैग का उपयोग न तो पत्रकारिता की स्वतंत्रता थी और न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है क्योंकि ये ‘गैर जिम्मेदाराना सामग्री भड़काने वाली’ साबित हो सकती है।

अजय साहनी ने ट्विटर के प्रतिनिधियों से कहा कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचना का सम्मान करता है क्योंकि ये हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है, हालाँकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और इस पर भी उचित प्रतिबंध लागू होते हैं, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेत 19 (2) में वर्णित है। उन्होंने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों में भी इस सिद्धांत को कई बार सही ठहराया गया है।

सरकार ने अमेरिकी कैपिटल हिल और लाल किले पर हुए दंगों के विषय पर ट्विटर की कार्रवाई पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। केंद्र ने ट्विटर से दोहरे मापदंड न अपनाने और सरकारी आदेशों का उल्लंघन न करने के साथ ही, लोकतांत्रिक संस्थानों का सम्मान करने के लिए कहा है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, एक सरकारी सूत्र ने कहा कि ट्विटर को आदेशों का पालन करना होगा और यह बातचीत का विषय नहीं बल्कि यहाँ का कानून है और अगर किसी को केंद्र सरकार द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई से कोई समस्या है तो वो कानूनी सहारा लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

केंद्र चाहता है कि ट्विटर सरकार के आदेशों का अनुपालन तत्काल रूप से करे। सरकार का कहना है कि अगर ट्विटर इस काम को हिचकिचाहट के साथ या विलम्ब से करता है तो यह वास्तव में अनुपालन नहीं माना जा सकता।

इससे पूर्व, ट्विटर ने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बचाव के अपने सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, हमने उन अकाउंट पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिनमें समाचार मीडिया संस्थाएँ, पत्रकार, कार्यकर्ता और राजनेता शामिल हैं। ऐसा करने के लिए, हमें विश्वास है, भारतीय कानून के तहत स्वतंत्र अभिव्यक्ति के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।” हालाँकि, संचार और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ बैठक में ट्विटर की इस दलील को खारिज कर दिया गया।

भारत सरकार ने ट्विटर से कठोर शब्दों में कहा है कि भारत में उसे भारतीय क़ानूनों का पालन करना ही होगा। सरकार ने ट्विटर के कुछ अकाउंट को प्रतिबंधित करने के आदेश के पालन में देरी पर भी नाराज़गी व्यक्त की है।

सरकार की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि ट्विटर अपने नियम और दिशानिर्देश बना सकता है, लेकिन भारत की संसद में पारित विधानों का पालन करना ही होगा, चाहे ट्विटर के अपने नियम और दिशानिर्देश कुछ भी हों।

गौरतलब है कि भारत में चल रहे किसान आन्दोलन के बीच किसानों के नरसंहार वाले भड़काऊ हैशटैग चलाने पर भारत सरकार ने ट्विटर को 250 से अधिक अकाउंट को प्रतिबंधित करने के लिए कहा था।

ट्विटर ने इसके बाद कुछ देर के लिए इन अकाउंट पर भारत में ‘रोक’ लगाईं भी थी, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्हें कुछ ही देर बाद फिर से सक्रीय कर दिया गया।

किसानों के समर्थन में अब पाकिस्तान में ट्रैक्टर रैली का आयोजन, वीडियो जारी कर खालिस्तानी आतंकी ने की घोषणा

खालिस्तानी आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का प्रमुख मुहम्मद हाफिज सईद का करीबी सहयोगी, गोपाल सिंह चावला ने घोषणा की है कि वह भारत में चल रहे ‘किसानों के विरोध के समर्थन में पाकिस्तान में एक ट्रैक्टर रैली का आयोजन करेगा।

चावला ने 2 मिनट का वीडियो जारी कर यह घोषणा की है। चावला ने वीडियो में कहा कि भारत में पारित किए गए नए कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे किसानों के विरोध के साथ एकजुटता दिखाते हुए पाकिस्तान में एक ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा चावला को वीडियो के जरिए लोगों को बरगलाते हुए भी सुना गया। उसने आरोप लगाया कि पिछले साल विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ही मोदी सरकार द्वारा सैकड़ों किसानों को मार दिया गया था।

कथिततौर पर आतंकी गोपाल चावला ने कहा, “पिछले कई महीनों से भारत में किसानों पर जुल्म हो रहा है। किसानों के लिए मोदी वह बिल ले आया है जो किसानों को मंजूर नहीं है। मोदी टस से मस नहीं हो रहा है। सैकड़ों किसान शहीद हो चुके हैं, मुझे इसकी बहुत तकलीफ है। हम किसानों के समर्थन में एक ट्रैक्टर रैली निकालेंगे जो ननकाना साहिब से शुरू होगी और वाघा बॉर्डर तक जाएगी। चावला कहता कि बलूचिस्तान, पेशावर और लाहौर से भी ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। ये सभी रैलियाँ वाघा बॉर्डर पर मिलेंगी।”

उसने आगे कहा, “हम दुनिया भर के किसानों को बताएँगे कि हम एकजुट हैं। जो कोई भी धरने पर बैठा है वह अन्नदाता है, वे सभी का पेट भरते हैं। इसलिए मैं सभी से रैली में शामिल होने की अपील करता हूँ।”

गौरतलब है कि इसी तरह दिल्ली की सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली का आह्वान किया गया था। जिसके चलते गणतंत्र दिवस पर हुए ट्रैक्टर रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में काफी उत्पात मचाया और पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए हिंसा को अंजाम दिया।

हजारों प्रदर्शनकारियों ने लाल किले पर भी धावा बोल दिया और इसकी प्राचीर पर खालिस्तानी झंडे को फहराकर भारत की संप्रभुता के प्रतीक को अपमानित किया। रैली के मद्देनजर जो हिंसा हुई उसमें 300 से अधिक पुलिस कर्मियों को गंभीर चोटें आईं। प्रदर्शनकारियों द्वारा बसों, निजी कारों और सरकारी संपत्तियों की भी तोड़फोड़ की गई थी।

उल्लेखनीय है कि चावला एक ISI आतंकी है और उस पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है। वह लश्कर प्रमुख हाफिज सईद के भी करीब है, जिसे वह पाकिस्तान का “मसीहा” कहता है। भारत सरकार ने 2018 में पाकिस्तान को एक दस्तावेज सौंपते हुए यह दावा किया था कि चावला भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में लिप्त है।

इससे पहले 2018 में करतारपुर यात्रा के दौरान कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और खालिस्तानी आतंकवादी गोपाल चावला को लेकर काफी कॉन्ट्रोवर्सी हुई थी। दरअसल, चावला ने अपने फेसबुक अकाउंट पर कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के बगल में खड़े हो कर एक तस्वीर पोस्ट की थी।

इसके अलावा खालिस्तान का कट्टर समर्थक गोपाल सिंह चावला पंजाबी सिखों के लिए एक अलग राष्ट्र माँगने वाला और खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों का सक्रिय सदस्य भी हैं। उसपर हाल ही में अमृतसर में एक निरंकारी सभा में बम विस्फोट में शामिल होने का संदेह है, जिसमें तीन लोग मारे गए थे।

माना जाता है कि गोपाल चावला पाकिस्तान प्रायोजित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के लिए ISI के संपर्क में भी है। गोपाल सिंह चावला ‘सिख रेफरेंडम 2020’ के पीछे के मुख्य सदस्यों में भी हैं और नियमित रूप से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा हैं।

‘अभ्युदय योजना’ के तहत योगी सरकार कराएगी IAS, PCS सहित कई परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी: यहाँ जानें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग, बैंक, एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होनहार छात्रों के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की है। इसके लिए सरकार ‘अभ्युदय योजना’ लाई है। जिसकी शुरुआत बसंत पंचमी यानी 16 फरवरी से होगी। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया आज (फरवरी 10, 2021) से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर रजिस्ट्रेशन शुरू होने की जानकारी दी है।

उत्तर प्रदेश में कई सारे छात्र ऐसे हैं जो अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कोचिंग प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे सभी छात्रों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आरंभ की है। प्रदेश का कोई भी युवा जो सिविल सेवा, नीट, जेईई, बैंकिंग, टीईटी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस खास पहल का लाभ ले सकता है। योजना के तहत बसंत पंचमी से पठन-पाठन शुरू होगा, इससे पहले इच्छुक अभ्यर्थियों को http://abhyuday.up.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकृत अभ्यर्थियों के साथ 15 फरवरी को सीएम योगी संवाद भी कर सकते हैं।

क्या है ‘अभ्युदय योजना’

इस योजना के अंतर्गत ऐसे सभी छात्रों को नि:शुल्क कोचिंग प्रदान की जाएगी जो इन परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति के कारण नहीं कर पाते हैं। प्रदेश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले और गरीब तबके के होनहार छात्रों के लिए योगी सरकार ‘अभ्युदय योजना’ लेकर आई है। यह योजना उन स्टूडेंट्स के लिए है जो शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए नहीं जा सकते। प्रदेश के हर मंडल में शुरू होने वाली अभ्युदय कोचिंग ऐसे छात्रों के लिए वरदान साबित होगी, जिनके पास प्रतिभा तो है, पर संसाधनों की कमी से पीछे रह जाते हैं। 

इस योजना के अंतर्गत मंडल स्तर पर छात्रों को सिलेबस एवं क्वेश्चन बैंक भी उपलब्ध करवाया जाएगा। UP Mukhyamantri Abhyudaya Yojana 2021 का कार्यान्वयन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी में किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत कक्षाएँ बसंत पंचमी के दिन से आरंभ होंगी। इस योजना के अंतर्गत छात्रों को ऑनलाइन स्टडी मटेरियल के साथ ऑफलाइन कक्षाएँ भी प्रदान की जाएगी।

अभ्युदय कोचिंग’ में इन परीक्षाओं की होगी तैयारी

सरकार की इस योजना के जरिए छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्‍च स्‍तरीय मार्गदर्शन और एग्जाम से पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। जिसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), अधीनस्‍थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC), अन्‍य भर्ती बोर्ड, नीट (NEET), जेईई (JEE), एनडीए (NDA), पीओ (PO), एसएससी (SSC), टीईटी (TET), बीएड (B.Ed) और अन्य परीक्षाएँ शामिल हैं।

IAS, IPS और PCS ऑफिसर देंगे स्टूडेंट्स को मार्गदर्शन

सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर युवाओं को मुफ्त कोचिंग सुविधा की सौगात दी थी। इन कोचिंग सेंटर्स में प्रदेश के छात्रों को आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और पीसीएस (PCS) अधिकारी कोचिंग देंगे, वह भी बिल्कुल मुफ्त में। तय व्यवस्था के अनुसार, विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी अतिथि व्याख्याता के तौर पर आमंत्रित किए जाएँगे। यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विषय का चयन परीक्षा की तैयारी के तरीके, टिप्स, प्रश्नों के उत्तर लिखने की विधि, सामान्य अध्ययन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, विषय विशेषज्ञ की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न विषयों की कक्षाएँ भी चलेंगी।

ई-लर्निंग प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा स्तरीय कंटेंट

अभ्यर्थियों को सहजता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्टडी मैटेरियल मिल सके, इसके लिए राज्य स्तर पर ई-लर्निंग कन्टेन्ट प्लेटफार्म बनाया गया है। इस प्लेटफार्म पर विभिन्न अधिकारियों द्वारा परीक्षा की तैयारी संबंधी अपने अनुभव साझा करते हुए वीडियो अपलोड किए जाएँगे। इसके अलावा, परीक्षा की तैयारी से संबंधित टिप्स सामग्री, पुस्तकों आदि से संबंधी मार्गदर्शन देते हुए वीडियो अपलोड होगा। लाइव सेशन एवं सेमिनार भी होंगे। 

ई-लर्निंग प्लेटफार्म पर छात्र अपनी जिज्ञासाएँ एवं प्रश्न भी सबमिट कर सकेंगे। यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित विषय वस्तु सामग्री एवं क्यूरेटिव कन्टेन्ट उपलब्ध होगा, जिसके लिए ख्याति प्राप्त संस्थाओं की सामग्री इकट्ठा की जा रही है। पंजीकृत अभ्यर्थियों को ई-लर्निंग प्लेटफार्म पर सवाल पूछने का भी मौका होगा। जिसका विशेषज्ञ समुचित निराकरण करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कोचिंग सेंटर युवाओं को एक नया मंच देगा और उन्हें नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रेरित करेगा।

भारत से वैक्सीन पहुँचने पर भावुक हुए मात्र 72 हजार आबादी के इस देश के PM, प्रधानमन्त्री मोदी को कहा- शुक्रिया

कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए भारत में वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो चुका है। दुनिया कोरोना से लड़ सके इसीलिए भारत कई देशों को वैक्सीन दे रहा है। भारत कई देशों को फ्री में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई कर रहा है। ऐसे में भारत की उदारता की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है।

इसी कड़ी में भारत की वैक्सीन डोमिनिकन गणराज्य पहुँच गई है। वैक्सीन देश में पहुँचने के बाद डोमिनिकन गणराज्य के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने पीएम मोदी और भारत के लोगों को शुक्रिया कहा है।

वैक्सीन पहुँचने के बाद आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में डोमिनिकन पीएम रूजवेल्ट स्केरिट ने कहा, “मैं यह कहूँगा कि मुझे इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि हमारी गुजारिशों पर इतनी जल्दी जवाब मिलेगा। कोई भी यह समझ सकता है कि इस तरह के गंभीर संकट में किसी भी देश के लिए अपनी ही रक्षा करना एक चुनौती है। ऐसी स्थिति में पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से किए प्रयासों के चलते यह संभव हुआ। उन्होंने मेरिट के आधार पर हमारी माँगों को स्वीकार किया और हमारे लोगों की समानता को स्वीकार किया।” उन्होंने बताया कि भारत द्वारा 35000 वैक्सीन यहाँ पहुँची है। इसके जरिए यहाँ की 72 हजार की आबादी में से आधे लोगों की जीवन रक्षा हो सकेगी।

वैक्सीन रिसीव करने खुद एयरपोर्ट पहुँचे प्रधानमंत्री

9 फरवरी को डोमिनिका के डगलस-चार्ल्स एयरपोर्ट पर भारत से वैक्सीन लेकर विमान पहुँचा। यह वैक्सीन पड़ोसी देश बारबाडोस के एयर नेशनल गार्ड के प्लेन से पहुँची। वैक्सीन को रिसीव करने के लिए खुद पीएम रूजवेल्ट स्केरिट और उनके कैबिनेट सहयोगी मौजूद थे। यही नहीं खुद पीएम और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने दवाओं को प्लेन से उतारने में सहयोग किया। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई थी।

बता दें कि कोविड-19 टीकों के अलावा भारत विश्व स्तर पर डीपीटी, बीसीजी और मीजल्स टीकों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। हाल ही में वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत भारत ने अफगानिस्तान को टीके उपलब्ध कराए थे और उसी दौरान बताया गया था कि कैरेबियाई देश बारबाडोस और डोमिनिका को भी कोरोना वैक्सीन की पहली खेप भेजी है।

अफग़ानिस्तान को जहाँ एयर इंडिया के विमान से रविवार को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की पाँच लाख खुराक मुंबई से दिल्ली फिर काबुल भेजी गई। वहीं कैरेबियाई देश बारबाडोस और डोमिनिका को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविडशील्ड वैक्सीन की एक-एक खेप आज भेजी गई। भारत ने पड़ोसी देशों समेत दुनिया के कुल 25 देशों को 24 मिलियन डोज उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। इन देशों में युगांडा, इक्वाडोर, निकारागुआ, मोरक्को और नामीबिया जैसे देश भी शामिल हैं।

चक्का जाम के बाद 18 फरवरी को रेल रोकेंगे ‘किसान’: टोल फ्री और कैंडल मार्च का भी ‘आन्दोलन जीवियों’ ने किया ऐलान

पिछले दो महीने से भी अधिक समय से जारी किसान आंदोलन अब और उग्र होता जा रहा है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को अब किसान पूरे देश में खड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं। इसी क्रम में अब 16 फरवरी को किसान मसीहा सर छोटूराम की जयंती पर किसान संगठनों ने देशभर में अपनी एक एकजुटता दिखाने का फैसला किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने ऐलान किया है कि 18 फरवरी को रेल रोको अभियान चलाएँगे।

बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर पिछले 80 दिनों हजारों किसान कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा सँभाले हुए हैं। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार (फरवरी 10, 2021) को राष्ट्रव्यापी रेल रोको अभियान का ऐलान किया। वरिष्ठ किसान नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य डॉ. दर्शन पाल सिंह ने बताया कि 12 फरवरी को राजस्थान के सभी टोल प्लाजा किसान फ्री कराएँगे, इसके बाद 14 फरवरी को पुलवामा हमले की सालगिरह पर शहीद जवानों और किसानों के लिए कैंडल मार्च निकाला जाएगा और ‘मशाल जुलूस’ एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।

डॉ. दर्शन पाल सिंह ने कहा, “हम 16 फरवरी को किसान सर छोटूराम की जयंती पर देश भर में एकजुटता दिखाएँगे, इसके लिए किसान सॉलिडैरिटी शो शुरू किया जाएगा। साथ ही 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक राष्ट्रव्यापी रेल रोको अभियान चलाया जाएगा।” दर्शन पाल सिंह के मुताबिक हरियाणा में लोगों से बीजेपी और जेजेपी नेताओं पर किसान हित में दबाव बनाने के लिए कहा गया है, अगर वह नहीं मानते तो उन्हें गद्दी छोड़ने के लिए कहें।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

केन्द्र सरकार इन कानूनों को जहाँ कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों नेताओं ने यह भ्रम फैलाया है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन नए कृषि कानूनों को लेकर कॉन्ग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों पर ‘झूठ एवं अफवाह’ फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि ये कानून किसी के लिये ‘बंधन नहीं है बल्कि एक विकल्प’ है, ऐसे में विरोध का कोई कारण नहीं है। प्रधानमंत्री ने ऐसे कुछ भ्रम फ़ैलाने वाले हर जगह मौजूद रहने वाले नेताओं को ‘आंदोलनजीवी’ कहा था।

हरसिमरत बादल ने फर्जी दावों के साथ किसानों के विरोध प्रदर्शन को हिंदू बनाम सिख मुद्दे में बदलने की कोशिश की: हुई बेनकाब

पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत बादल ने 9 फरवरी, 2021 को लोकसभा में भाषण दिया। बादल कृषि कानून और चल रहे किसान विरोध पर अपना विचार प्रस्तुत कर रही थीं। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत गुरु नानक देव के नाम से किया, जो सिखों के पहले गुरु थे। गुरु नानक देव ने तीन बड़ी सीख दी थी- कीरत करो, नाम जपो और वंड छको। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत से कमाएँ, भगवान से प्रार्थना करें और जो आपके पास जो है या कमाया है, उसे दूसरों में भी बाँटें।

हालाँकि, शुरुआती भाषण में वह किसानों के लिए चिंतित नजर आईं, लेकिन जल्द ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए हिंदुओं पर सांप्रदायिक टिप्पणी की। उनका भाषण जल्द ही हिंदू-सिख विभाजन की तरफ मुड़ गया।

‘किसानों को गोलियों का सामना करना पड़ा’: बादल का झूठा दावा

बादल ने दावा करते हुए आरोप लगाया कि नवंबर में जब किसानों ने सिंघु बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश की तो झड़प के दौरान सुरक्षा बलों ने किसानों पर वाटर कैनन और आँसू गैस के गोले के साथ गोलियाँ चलाई। हालाँकि, सच्चाई यह है कि सुरक्षा बलों ने किसानों के साथ हुई किसी भी झड़प के दौरान एक भी गोली नहीं चलाई, चाहे वो नवंबर 2020 हो या 26 जनवरी, 2021।

पुलिस ने निहत्थे किसानों पर हमला किया – बादल का दावा

अपने भाषण के दौरान बादल ने कहा कि पुलिस ने झड़प के दौरान निहत्थे किसानों पर हमला किया। नवंबर और जनवरी दोनों के दौरान पुलिस कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ने के लिए ट्रैक्टर सहित अपने भारी-भरकम वाहनों का इस्तेमाल किया। 26 जनवरी की हिंसा के दौरान, पुलिस कर्मियों पर डंडों और तलवारों से हमला किया गया

कुछ प्रदर्शनकारियों को जब रोका गया तो उन्होंने पुलिस कर्मियों को ट्रैक्टरों से रौंदने का प्रयास किया। लाल किले में, ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की गई, डंडों से पीटा गया, लात मारी गई और एक दीवार से धक्का दे दिया गया। हजारों प्रदर्शनकारी हथियार और तलवारों से लैश थे। एक प्रदर्शनकारी 26 जनवरी को असाल्ट राइफल लहराते हुए भी देखा गया था। 

‘सरकार जिद्दी है और किसानों से बात नहीं कर रही है’: 11 दौर की वार्ता के बाद भी बादल 

भाषण के दौरान बादल ने एक विचित्र दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों से बात करने में दिलचस्पी नहीं रखती है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार जिद्दी है और 75 से अधिक दिनों में प्रदर्शनकारियों के दिल्ली पहुँचने के बाद, एक भी मंत्री ने किसानों से संपर्क नहीं किया। उसने यह भी दावा किया कि सितंबर से पंजाब में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों के साथ मुद्दों पर चर्चा करने की कोई कोशिश नहीं की गई।

उनके बयान के विपरीत, किसानों के दिल्ली की तरफ कूच करने से पहले केंद्र सरकार ने पंजाब में किसानों से बात करने के लिए कई प्रयास किए। रिपोर्टों से पता चलता है कि किसान यूनियनों ने हर बार एक नई माँग के साथ सरकार द्वारा चर्चा के लिए मार्ग खोलने से इनकार कर दिया। जब किसान दिल्ली की ओर बढ़ने लगे, तो बैठक के लिए पहले से ही तारीख तय कर दी गई थी और यूनियनें केंद्र सरकार द्वारा दी गई तारीख का इंतजार कर सकती थीं। हालाँकि, उन्होंने अराजकता की स्थिति पैदा करते हुए दिल्ली की ओर मार्च करने का फैसला किया।

दिसंबर 2020 में चर्चा के पहले दौर के बाद से, सरकार अब तक किसान संघों के साथ चर्चा के 11 दौर की वार्ता कर चुकी है। सरकार ने उन्हें समस्याओं की एक सूची देने और कानूनों को क्लॉज-बाय-क्लॉज पर चर्चा करने के लिए कहा है। किसान यूनियनों ने मामले में हठ दिखाया और माँग की है कि सरकार को कानूनों को निरस्त करना चाहिए।

निशान साहिब को कठघरे में खड़ा किया: बादल

बादल ने दावा किया कि लाल किले पर जो झंडा फहराया गया था, वह निशान साहिब था और यह गुरुद्वारों की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री और कई विदेशी नेताओं द्वारा धारण किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इसे तिरंगे के लिए अपमान का कार्य बताकर, हर कोई निशान साहिब को कठघरे में खड़ा कर रहा है। हालाँकि, निशान साहिब, जो सिख समुदाय के पवित्र प्रतीक के साथ एक त्रिकोणीय झंडा है, एकमात्र ध्वज नहीं था जो गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर फहराया गया था। एक अन्य आयताकार झंडा भी वहाँ पर फहराया गया था, जो कि खालिस्तान समूहों के झंडे से काफी मिलता-जुलता था।

हमारे गुरुओं ने आपके ’जनेऊ’ और ’तिलक’ को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया: बादल ने किसानों के मुद्दों को हिंदू-सिख मुद्दों में बदल दिया

अपने भाषण के अंत में, बादल हिंदुओं के लिए जहर उगलने से नहीं कतराई। उन्होंने दावा किया कि सिख गुरुओं ने तिलक और जनेऊ पहनने वालों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सिखों ने हमेशा हिंदुओं को बचाया है और अब हिंदू सिख गुरुओं का अपमान कर रहे हैं। 

वास्तव में, कोई भी सिखों के खिलाफ नहीं है। राज्यसभा में भी अपने हालिया भाषण के दौरान, पीएम मोदी ने भारत की प्रगति में सिख समुदाय द्वारा किए गए योगदान का उल्लेख किया था। किसान विरोध की बहस और मीडिया प्रचार के दौरान, सिख विरोधी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। वास्तव में, प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ अलगाववादी तत्वों ने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी टिप्पणी की थी, जो कि पाकिस्तान द्वारा प्रोत्साहित किए गए अलगाववादी खालिस्तानी भावनाओं को भड़का रहा था।

‘पीएम ने किसानों को परजीवी कहा’: एक और फर्जी दावा

बादल ने अपने भाषण के दौरान एक अन्य फर्जी दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों को परजीवी कहा। दरअसल, पीएम मोदी ने उन लोगों का जिक्र किया, जो हमेशा विरोध में मौजूद रहते हैं, भले ही विरोध का एजेंडा कुछ भी हो।

पीएम मोदी ने कहा कि ये लोग विरोध प्रदर्शनों पर जोर देते हैं और अक्सर प्रदर्शनों को दुष्प्रचार में बदल देते हैं। ऐसे पेशेवर प्रदर्शनकारियों को परजीवियों की संज्ञा देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि उनकी पहचान करना आवश्यक है क्योंकि वे राष्ट्र के लिए परेशानी का कारण हैं। पीएम की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि यह किसानों के खिलाफ नहीं है, लेकिन कुछ राजनीतिक व्यक्ति विरोध प्रदर्शन को राजनैतिक प्रासंगिकता के लिए हाइजैक कर रहे हैं।

महाराष्ट्र: मंदिर से नकदी और जेवरात चोरी कर भागे शरीफ शैफुल शेख और मोहम्मद हुसैन गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के पिंपरी गाँव के एक मंदिर से पैसे और 50,000 रुपए के गहने लूटने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना 5 फरवरी को पिंपरी गाँव में स्थित एक मंदिर में घटित हुई थी। जिसके बाद जाँच पड़ताल में जुटी पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे 30 सीसीटीवी फुटेज बरामद किए थे।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रविवार को पड़ोसी नवी मुंबई के खारघर से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान 25 वर्षीय शरीफ शैफुल शेख और 28 वर्षीय मोहम्मद हुसैन यासीन मुल्ला के तौर ओर हुई है।

सहायक पुलिस आयुक्त नीता पाडवी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि पुलिस ने उनके पास से चोरी किए गए नकदी और गहने को भी बरामद कर लिया है।

वहीं महाराष्ट्र पुलिस ने मामले में एक ऑटो-रिक्शा को भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया गया था। अधिकारी ने कहा कि दोनों आरोपितों पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आजादी से पहले सृजित हुआ चर्चिल के लिए गोपनीय पद, बाद में भी जारी रहा CCA का पद: PM मोदी ने सुनाई सिस्टम के जड़ता की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (फरवरी 10, 2021) को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा कि सत्ता में हो या विपक्ष में हर किसी को किसानों के लिए काम करने की आवश्यक्ता है। किसानों को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ एग्रीकल्चर समाज के कल्चर का हिस्सा रहा है। हमारे पर्व, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही हैं। यहाँ राजा जनक और कृष्ण के भाई बलराम ने भी हल चलाई है। कृषि के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यक्ता है। हमारे यहाँ संभावना है। किसानों को सही तरीके से गाइड करना होगा। कृषि में निवेश की आवश्यक्ता है। केंद्र और राज्य सरकार उतना काम नहीं कर पा रही है। किसान के बस की भी बात नहीं है।

पीएम मोदी ने सुनाया यह किस्सा

पीएम मोदी ने आज लोकसभा में बोलते हुए 40-50 साल पुरानी घटना सुनाई। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले यहाँ से चर्चिल को सिगार भेजी जाती थी। इसको लेकर पद भी सृजित किए गए थे। सीसीए (Churchill’s Cigar Assistant) का पद आजादी के बाद भी जारी रहा।

दरअसल, 60 के दशक में तमिलनाडु में राज्य के कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ाने के लिए कमीशन बैठा था। उस कमेटी के चेयरमैन के पास एक लिफाफा आया, जिस पर ‘टॉप सीक्रेट’ लिखा था। उन्होंने देखा तो उसमें एक अर्जी थी। उसमें लिखा था- मैं बहुत सालों से सिस्टम में ईमानदारी से काम कर रहा हूँ लेकिन वेतन नहीं बढ़ रही है इसे बढ़ाया जाए। चेयरमैन ने लिखा कि आप कौन हो, पद क्या है। जवाब मिला कि मैं सरकार में मुख्य सचिव के कार्यालय में CCA के पद पर बैठा हूँ।

सवाल पर दिया गया यह जवाब

जब आयोग के सदस्यों ने खँगाला तो पता चला कि ऐसा तो कोई पद रिकॉर्ड पर है ही नहीं। इस मामले में आयोग के सदस्यों ने उन्हीं सज्जन से पूछा कि आप ही बताओ कि यह क्या पद है, क्या काम करते हो? उन सज्जन ने कहा कि यह तो गोपनीय जानकारी है और वह 1975 से पहले नहीं बता सकते। तब आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि यह तो बड़ी मुश्किल है। फिर आप ऐसा कीजिए कि 1975 के बाद जो आयोग बैठेगा, उसे बताइएगा।

यह था सीसीए का मतलब

बात बिगड़ती देख उस व्यक्ति ने राज खोला। उसने बताया कि सीसीए का मतलब है- चर्चिल सिगार असिस्स्टेंट। मामला कुछ यूँ था कि 1940 में जब विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे, तब उनके लिए तमिलनाडु के त्रिची (तिरुचरापल्ली) से सिगार जाते थे। ये सिगार व्यवस्थित रूप से चर्चिल तक पहुँचते रहें, इसके लिए एक पद सृजित किया गया था। 

मजेदार बात यह है कि 1945 के बाद तो विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं रहे। फिर 1947 में भारत आजाद हो गया, लेकिन सीसीए का यह पद बना रहा। चर्चिल को सिगरेट पहुँचाने की जिम्मेदारी वाला पद मुख्य सचिव के कार्यालय में चल रहा था। उसने प्रमोशन और तनख्वाह के लिए चिट्ठी लिखी। दरअसल, इस घटना के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने व्यवस्था की उस सड़ांध को उजागर किया, जहाँ यथास्थिति बनाए रखने के चलते कई इसी तरह के आश्चर्यजनक और हास्यास्पद उदाहरण कायम हैं। पीएम ने कहा कि अगर हम बदलाव नहीं करेंगे तो कैसे चलेगा, इससे बड़ा क्या उदाहरण हो सकता है।

पीएम ने कहा कि चर्चिल का उदाहरण बताता है कि मानव नवीनता से जब दूरी बना लेता है तब पुरानी व्यवस्थाएँ, जिसकी काेई तार्किकता बचती नहीं है, वैसे ही पड़ी रहती है। भारत काे अगर आगे बढ़ाना है ताे ऐसी व्यवस्थाओं काे हटाना ही हाेगा और कृषि मे किए गए सुधार उसी तरफ बढ़ा एक कदम है।