Home Blog Page 4043

UP में कोई भी समस्या हो, अधिकारी काम नहीं कर रहे हों… 1076 पर कॉल कीजिए: समाधान पर ऑफिसरों को रेटिंग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश के किसी भी नागरिक को कोई समस्या हो, तो बेझिझक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर सम्पर्क कर सकता है। उन्होंने कहा है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के आधार पर फील्ड में तैनात अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन होगा।

मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि तहसीलदार हो या थानाध्यक्ष, अगर जनता इनके कार्यों से संतुष्ट नहीं है तो इनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होगी। बुधवार (10 फरवरी 2021) को लोकभवन में उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन 1076 के अधिकाधिक प्रयोग के लिए जनता को जागरूक करने का निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना एवं तहसील स्तर पर जिस भी व्यक्ति की समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है, वह व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कभी भी संपर्क कर सकता है। हेल्पलाइन पर मिली ऐसी शिकायतों का तत्परता से निराकरण कराया जाएगा।

जनता की समस्याओं के समाधान के साथ ही थाना तथा तहसील स्तर पर जनता की शिकायत का निस्तारण किए जाने को लेकर जिले के जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान और थानेदार को जवाबदेह बनाया जाएगा। हालाँकि इसमें यह भी कहा गया है कि सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत दर्ज करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

इसके अलावा अब थाना तथा तहसील स्तर पर निस्तारित हुई जनता की समस्याओं की रेटिंग भी की जाएगी, जिससे यह पता चल सके कि किस जिले में जनता की समस्याओं के निस्तारण में तेजी दिखाई जा रही है। मुख्यमंत्री आवास पर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थाना एवं तहसील स्तर पर जनता की समस्याओं के निस्तारण संबंधी तंत्र पर चर्चा करते हुए यह फैसला लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह पता चला था कि थाना तथा तहसील स्तर पर जनता से मिलने वाली शिकायतों का निस्तारण ठीक से नहीं हो रहा है। इस सूचना के आधार पर मुख्यमंत्री ने जनता से मिलने वाली हर शिकायत के निस्तारण की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

सीएम हेल्पलाइन ने कोरोना संकट के दौरान जनता की मदद करने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी। अभी भी देश की सबसे बड़ी सरकारी हेल्पलाइन में कुल 250 ऑपरेटर चौबीसों घंटे लोगों की समस्याओं के निपटारे और उनकी निगरानी के लिए काम कर रहे हैं।

लॉकडाउन की शुरुआत में सीएम हेल्पलाइन के ज़रिए सभी जिलों के गाँवों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले उन लोगों की सूची तैयार की गई थी जो सर्दी-खाँसी से पीड़ित थे। तब इसी हेल्पलाइन के ज़रिए सभी प्रधानों और सभासदों को फोन करके प्रवासी लोगों के भरण-पोषण और उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए कहा गया था।

इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान सभी प्रधानों और पार्षदों को फोन करके राशन और भोजन वितरण, क्वारंटाइन, प्रवासी मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं जैसे बिंदुओं पर फीडबैक लिया गया था। इतना ही नहीं किसी भी सरकारी सिस्टम के बगैर दूसरे राज्यों से पहुँचे लोगों के इलाज आदि का भी पता लगाया गया था।  

राज्यपाल को ठाकरे सरकार ने नहीं दिया सरकारी विमान, 20 मिनट तक सीट पर बैठ कर प्लेन से उतरना पड़ा

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और राज्य की उद्धव सरकार के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों में मनमुटाव एक फिर देखने को मिला। दरअसल, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी आज देहरादून जाने के लिए एक सरकारी चार्टर प्लेन में लगभग 20 मिनट तक बैठे इंतजार करते रहे, लेकिन राज्य की महाविकास अघाड़ी (MVA) उद्धव सरकार ने चार्टर प्लेन की इजाजत नहीं दी। इसके बाद गर्वनर को विमान से उतरना पड़ा।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, “महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राज्य सरकार के प्लेन से आज देहरादून जाना था। मगर जब वह मुंबई एयर पोर्ट पर पहुँचे, तो उनसे कहा गया कि उन्हें प्लेन से देहरादून के लिए उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी गई है। इसके बाद उन्होंने कर्शियल फ्लाइट बुक की और फिर देहरादून के लिए रवाना हुए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते रविवार उत्‍तराखंड में हुई त्रासदी का जायजा लेने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी उत्तराखंड जाना चाहते थे। इसके लिए वह राज्य सरकार के विमान की सवारी करने वाले थे। जिसके मद्देनजर गर्वनर हाउस ने एक हफ्ते पहले ही राज्यपाल की देहरादून यात्रा की जानकारी राज्य सरकार को दी थी।

जब राज्यपाल विमान में सवार होने के लिए मुंबई एयरपोर्ट पहुँचे तो लगभग आधे घंटे तक राज्यपाल सामान्य प्रशासन विभाग के संपर्क में थे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। वहीं जब उनको विमान में यात्रा करने की अनुमति नहीं मिली तो फिर उन्होंने प्राईवेट एयरलाइंस से टिकट बुक करके मुंबई से देहरादून रवाना हुए।

बता दें, सरकारी चार्टर्ड प्लेन के इस्तेमाल की इजाजत मुख्यमंत्री के अंतगर्त आने वाले सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दी जाती है।

राज्यपाल को यात्रा की अनुमति नहीं दिए जाने का मामला गर्मा गया है। जिस पर नाराज भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने कहा, “यह बदला लेने की अधिकता है। मैंने कभी ऐसी प्रतिशोधी सरकार नहीं देखी। राज्यपाल एक संवैधानिक पद है, उसकी गरिमा को बनाए रखना चाहिए। ठाकरे सरकार ने रीति-रिवाजों और परंपराओं पर हमला किया है।”

इससे पहले भी कई मौके पर भगत सिंह कोश्यारी और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति देखी गई है।

टूलकिट का संबंध ऑल्ट न्यूज़ से बताने वाला वीडियो यूट्यूब ने किया डिलीट, भारत विरोधी षड्यंत्रों में विदेशी फंडिंग का था जिक्र

अभिव्यक्ति की आजादी की बहस के बीच ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट यूट्यूब ने ‘दी स्ट्रिंग’ (The String) नाम के एक चैनल का वीडियो डिलीट कर दिया है। ‘दी स्ट्रिंग’ ने हाल ही में चर्चा में आई ‘टूलकिट’ का वामपंथी मीडिया और ऑल्ट न्यूज़ जैसे कुछ स्वघोषित फैक्ट चेकर्स से संबंधों को उजागर करने का दावा किया था।

ट्विटर पर ‘द स्ट्रिंग’ (The String) ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया है कि यूट्यूब द्वारा उनका वीडियो डिलीट कर दिया गया है। ग्रेटा थनबर्ग द्वारा किसान आन्दोलनों को लेकर ‘गलती से’ सार्वजानिक की गई एक ‘टूलकिट’ पर जारी विवाद को लेकर ‘दी स्ट्रिंग’ नाम के इस चैनल ने दावा किया था कि वो इस टूलकिट को लेकर खुलासे करेगा, जिनसे स्पष्ट होगा कि किस तरह से मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ का भी इस टूलकिट से सम्बन्ध है। हालाँकि, इस वीडियो के प्रकाशित होने के कुछ देर बाद ही यह यूट्यूब द्वारा हटा दिया गया।

अपने ट्विटर अकाउंट से ‘दी स्ट्रिंग’ ने मंगलवार (फरवरी 09, 2021) को अपने इस वीडियो द्वारा अहम खुलासे करने की घोषणा करते हुए लिखा था, “आपका तथाकथित ‘देशभक्त’ मोहम्मद जुबैर वास्तव में एक भारत-विरोधी तत्व है, जो देशद्रोही है और वो लीक होने से पहले ही ग्रेटा थनबर्ग वाली टूलकिट साजिश का हिस्सा था। मेरे पास अपने दावे के बचाव में और इस दंगा भड़काने वाले को जेल भेजने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं।”

उन्होंने लिखा था कि फेक न्यूज़ बनाने की कम्पनी ऑल्ट न्यूज़ ‘रिवर्स साइक्लॉजी’ के माध्यम से अपने दर्शकों को फेक न्यूज़ देता है और अपने प्रतिद्वंदियों को फेक बताता है।

यूट्यूब पर ‘दी स्ट्रिंग’ द्वारा पोस्ट किए गए इस वीडियो की शुरुआत में ही कुछ वामपंथी मीडिया गिरोहों का नाम लेते हुए इसके एंकर कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि इस वीडियो को बनाने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं जिन्दा रहूँगा या नहीं। लेकिन इसके लिए जो लोग जिम्मेदार होंगे उनके नाम साकेत गोखले, बरखा दत्त, मोहम्मद जुबैर, ध्रुव राठी, वायर, क्विंट, न्यूज़लौंड्री, स्क्रॉल, कारवाँ, दी न्यूज़ मिनट, आउटलुक डॉट कॉम, इंडिया स्पेंड, परी नेटवर्क, और कॉन्ग्रेस पार्टी।”

‘दी स्ट्रिंग’ ने ये वीडियो सार्वजानिक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपनी जान बचाने की विनती भी की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम उन्होंने लिए हैं, उनके पास ये टूलकिट पहले से ही मौजूद थी।

क्या था ‘दी स्ट्रिंग’ के इस वीडियो में

यूट्यूब चैनल ‘दी स्ट्रिंग’ के इस एपिसोड का नाम ‘अरेस्ट राठी, जुबैर, बरखा (ग्रेटा थनबर्ग एक्सपोज्ड) था। एपिसोड की शुरुआत में ‘स्ट्रिंग’ ने ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर की गई टूलकिट और उसके समय यानी, 3 फरवरी शाम 5.19 दिखाया है। इसके बाद ‘स्ट्रिंग’ ने बताया कि कैसे वामपंथी मीडिया गिरोह के दी कारवाँ, स्क्रॉल, परी नेटवर्क, द वायर, द न्यूज मिनट, ऑल्ट न्यूज समेत कई ऑनलाइन पोर्टल इस पर 01 या 2 फरवरी को ही ट्वीट कर चुके थे। उन्होंने कहा कि यह यह इस बात का पहला सबूत है कि ग्रेटा थनबर्ग की टूलकिट शेयर होने से पहले ही इन लोगों के पास सिर्फ मौजूद ही नहीं थी बल्कि ये लोग इसके जरिए चंदा भी जुटाना चाहते थे।

वीडियो में ‘ दी स्ट्रिंग’ ने टूलकिट की टाइमलाइन के बारे में आगे बताया कि किसानों के समर्थन में टूलकिट शेय़र करने के आग्रह से कहीं पहले भारत को बदनाम और बर्बाद करने की साजिश रची जा चुकी थी। स्ट्रिंग ने सबसे पहले ‘डिजीपब न्यूज इंडिया फॉउंडेशन’ की प्रेस रिलीज का जिक्र किया, जो अक्टूबर 27, 2020 की है।

यानी, कथित किसान आंदोलन से कई माह पहले से ही इसे लेकर षड्यंत्र रचे जा रहे थे। दी स्ट्रिंग के अनुसार, डिजीपब के साथ जो नाम जुड़े हैं, उनका संबंध कहीं न कहीं ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ‘गलती से लीक’ हुई इस टूलकिट से भी जुड़े मिलते हैं। मजहबी फैक्ट चेकर ऑल्टन्यूज़ के मोहम्मद जुबैर और बरखा दत्त के नाम भी ग्रेटा थनबर्ग वाली टूलकिट में थे। इन नामों में से अधिकतर अक्सर ही सरकार विरोध में प्रपंच करते नजर आते हैं।

12 मिनट के इस इस वीडियो में, ‘द स्ट्रिंग’ ने खुलासा किया कि मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ इंटरनेशनल फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क (IFCN) से प्रमाणित है, जो पोयन्टर इंस्टीट्यूट द्वारा समर्थित है। बदले में, पोयन्टर इंस्टीट्यूट को ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा फंड दिया जाता है, जिसे जॉर्ज सोरोस द्वारा नियंत्रित किया जाता है और फंड दिया जाता है। जॉर्ज सोरोस के अलावा, पोयंटर इंस्टीट्यूट को फेसबुक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा भी फंड दिया जाता है।

एनालिसी मैरिली की ‘टूलकिट’ और भारत विरोधी प्रपंच में भूमिका

‘दी स्ट्रिंग’ ने अपने वीडियो में एनालिसी मैरिली का भी जिक्र किया है। एनालिसी उसी जॉर्ज सोरोस के लिए काम करती हैं जो कि ये भी बयान दे चुके हैं कि नरेंद्र मोदी भारत को राष्ट्रवादी हिन्दुराष्ट्र बनाना चाह रहे हैं। एनालिसी मैरिली के ट्विटर अकाउंट से पता चलता है कि उसने 03 फरवरी से पहले ही 01 फरवरी को वामपंथी मीडिया गिरोहों को डोनेशन देने की बात कही थी और उन्हें प्रोमोट किया, जिसे मोहम्मद जुबैर द्वारा रीट्वीट भी किया गया था।

जुबैर का नाम और उनकी कथित फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ का नाम भी इस टूलकिट में शामिल था। ‘दी स्ट्रिंग’ ने कहा कि ये तमाम मीडिया गिरोह चंदा जुटाने के लिए डिजीपब से जुड़े हुए हैं। स्ट्रिंग ने अमित शाह से आग्रह किया है कि वो इन सबकी जाँच कराएँ। साथ ही, स्ट्रिंग ने कहा कि जुबैर जैसों को तो लटका दिया जाना चाहिए। इसमें स्ट्रिंग ने अपने वीडियो में ध्रुव राठी का भी सम्बन्ध बताया है।

वीडियो में स्ट्रिंग ने एनालिसी को राहुल गाँधी का प्रशंसक बताते हुए उनके वामपंथी मीडिया गिरोहों से जुड़े तार भी सामने रखे हैं। स्ट्रिंग ने बताया कि एनालिसी ने राहुल गाँधी की वायनाड रैली को भी कवर किया था। स्ट्रिंग ने जॉर्ज सोरोस के खिलाफ भी कुछ साक्ष्य अपने वीडियो में रखे हैं, और बताया है कि भारत और मोदी विरोधी प्लेटफॉर्म्स को वैरीफाई कराने या फिर उनके भारत विरोधी प्रपंचों को पैसे और ताकत का प्रयोग कर बढ़ावा दिया जाता है। स्ट्रिंग ने जिक्र किया है कि यही जॉर्ज सोरोस ‘क्वॉड मीडिया’ यानी, एनालिसी मैरिली को फंड देते हैं।

बॉलीवुड पॉर्न वीडियो गिरोह: अब 21 साल की मॉडल आई सामने, कहा – नशीली एनर्जी ड्रिंक देकर शूट किया अश्लील सीन

हाल ही में अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने एक पोर्न फिल्म बनाने वाले रैकेट का खुलासा किया था। इस मामले में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और एक महिला को इसके चंगुल से छुड़ाया गया था। अब इस प्रकरण में एक और खुलासा हुआ है, 21 साल की मॉडल ने आरोप लगाया है कि इस गैंग ने उसका भी शोषण किया था। अब तक इस मामले में दो महिलाएँ शिकायत कर चुकी हैं, यह तीसरा मामला है। 

तीनों महिलाओं ने यास्मीन बेग खान (रोवा) नाम की महिला पर आरोप लगाया है। मंगलवार (9 फरवरी 2021) को अपराध शाखा ने यास्मीन के पति दीपांकर पारितोष ख़ासनवीस को गिरफ्तार किया था। यह पूरे मामले की 8वीं गिरफ्तारी थी, गिरफ्तारी के बाद उसे 37वीं मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। जिसके बाद उसे 10 फरवरी तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। 

अपराध शाखा ने सोमवार (8 फरवरी 2021) को उमेश कामत को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि वो एक सेलिब्रेटी ब्रिटिश व्यवसायी का दोस्त भी है। वह यूके (यूनाइटेड किंगडम) की कंपनी केनरिन (kenrin) का प्रतिनिधित्व करता है। उस पर लगभग 8 पॉर्न वीडियोज़ अपलोड करने का आरोप है, जिसे अभिनेत्री और मॉडल गहना वशिष्ट ने सोशल मीडिया एप हॉटशॉट (hotshot) पर शूट किया था। 

21 वर्षीय अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीता था। वह अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए मौके की तलाश में थी, तभी वह अलीशा नाम की महिला के संपर्क में आई। अलीशा ने उसकी मुलाक़ात ‘मोनू’ नाम के कैमरामैन से कराई। इसके बाद उसे एक नशीली ‘एनर्जी ड्रिंक’ दी गई थी और नग्न अवस्था में उसके साथ अश्लील दृश्य फ़िल्माए गए थे। 

इस घटना के बाद जब पीड़िता मॉडल अपने घर गई थी तब उसके कई दोस्तों ने बताया कि उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और तभी उसे पता चला कि अलीशा और यास्मीन खान एक ही व्यक्ति हैं।          

एकता कपूर के फेमस वेब शो ‘गंदी बात’ की एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ को मुंबई क्राइम ब्रांच ने शनिवार (फरवरी 6, 2021) को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे बुधवार (फरवरी 10, 2021) तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है।

गहना पर एक वेबसाइट के लिए एडल्ट वीडियो शूट करने और उन्हें अपलोड करने का आरोप है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो स्ट्रगल कर रहीं एक्ट्रेस को काम का लालच देकर पोर्न वीडियो शूट करवाती थी। काम के बदले हर फिल्म के लिए 15,000 से 20,000 रुपए भुगतान करती थी। पुलिस को आरोपितों के सैकड़ों एक्स-रेटेड वीडियो मिले हैं।

‘मेरी जान को खतरा था, सब ‘किसान’ मेरे ऊपर ही आरोप लगा दिए थे’ : दीप सिद्धू ने बताई अब तक छुपने की वजह

गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार किए गए दीप सिद्धू से पुलिस की पूछताछ जारी है। जिसमें उसने कहा है कि ऐसा करने के पीछे उसका कोई नकारात्मक उद्देश्य नहीं था, सभी वहाँ जा रहे थे, इसलिए वह भी चला गया।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा दीप सिद्धू से उसके ठिकानों और 26 जनवरी को हुई अराजकता को लेकर विस्तार से पूछताछ कर रही है। पूछताछ की शुरुआत में उसने 25 जनवरी को सिंघू बॉर्डर पर अपनी मौजूदगी से इनकार किया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी मौजूदगी के सबूत पेश किए, तब उसने माना कि वह ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था।

दीप सिद्धू ने इसके बाद बताया कि 26 जनवरी को सुबह के वक्त उसके मोबाइल पर तीन मिस्ड कॉल और मैसेज थे। यह लाल किले की तरफ बढ़ने को लेकर थे, जिसके बाद वह अपने 3 दोस्तों के साथ वहाँ पहुँच गया। 

पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक़ वह सुबह 11 बजे अपने दोस्तों के साथ गाड़ी से निकला और 1 बजे लाल किले पर पहुँच गया। जैसे ही लाल किले पर पहुँचा, वैसे ही वहाँ हिंसा भड़क चुकी थी और फिर वह वापस आ गया। पुलिस ने कहा है कि दीप सिद्धू द्वारा लगाए गए आरोपों और खुलासों का सत्यापन भी कराया जाएगा।

दीप सिद्धू ने इस बात को लेकर भी खुलासा किया कि वह क्यों इतने दिनों तक छुपा हुआ था। उसका कहना है कि अब तक छुपने की सबसे बड़ी वजह ये थी कि उसकी जान को ख़तरा था। ‘किसान’ आंदोलन के तमाम नेताओं ने गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा का आरोप उस पर लगा दिया था। 

बुधवार (10 फरवरी 2021) को इस मामले पर जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस ने बताया कि सिद्धू के अनुसार लाल किले और आईटीओ पर हुई हिंसा स्वतः और तात्कालिक नहीं थी। किसान नेता गणतंत्र दिवस से लगभग 15 दिन पहले ही ‘किसानों’ को बता रहे थे कि वो नई दिल्ली, इंडिया गेट, संसद और लाल किले पर ट्रैक्टर रैली निकालेंगे।

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के बाद से ही दीप सिद्धू फ़रार था। कई दिनों की तलाश के बाद मंगलवार (9 फरवरी 2021) को उसे गिरफ्तार किया गया था। किसान नेताओं ने दीप सिद्धू के बयानों को सुनने और समझने से पहले उस पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना किया है।

‘राम-हनुमान’ स्लोगन को हटवाने के आरोप पर वसीम जाफर ने कहा – ‘मामले को बनाया जा रहा सांप्रदायिक’

उत्तराखंड टीम के स्लोगन ‘राम भक्त हनुमान की जय’ को नकारने और कैम्प में मौलवियों को बुलाने का आरोप लगने पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी वसीम जाफर ने बयान जारी किया है। यह बयान उत्तराखंड क्रिकेट संघ (CAU) के मुख्य पद कोच के पद से इस्तीफ़ा देने के बाद सामने आया है

‘मुस्लिम’ खिलाड़ियों को तरजीह देने के आरोपित वसीम जाफर ने उत्तराखंड क्रिकेट टीम का साथ ऐसे समय पर छोड़ा है, जब विजय हजारे ट्राफ़ी को कुछ ही दिन बचे रह गए हैं। कोच के पद पर रहते हुए 45 लाख रुपए प्रति सत्र फ़ीस लेने वाले वसीम जाफर ने निराशा जाहिर की है।

उन्होंने इस्तीफ़े पर हो रही चर्चाओं को लेकर कहा कि टीम के खिलाड़ी उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं लेकिन उन्हें इस मौके से वंचित रखा जा रहा है। इसकी इकलौती वजह है खिलाड़ियों के चयन को लेकर लगाए गए पक्षपात के आरोप। इसके अलावा वसीम ने कहा कि इस तरह के आरोप बेहद निराशाजनक हैं, इससे बदतर और कुछ नहीं हो सकता है। यह आरोप सांप्रदायिक हैं और पूरे मामले को सांप्रदायिक एंगल दिया जा रहा है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वसीम जाफर ने सचिव महिम वर्मा और मुख्य चयनकर्ता रिज़वान शमशाद के साथ विवाद के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था। उन्हें उत्तराखंड क्रिकेट टीम का सीनियर कोच बनाया गया था, उन्होंने महिम पर टीम के चयन में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए थे। हालाँकि महिम ने भी वसीम पर कई हैरान करने वाले आरोप लगाए थे।

BCCI के पूर्व उपाध्यक्ष महिम के मुताबिक़ वसीम जाफर अक्सर CAU के अधिकारियों से लड़ते थे। इसके अलावा मज़हबी गतिविधियों को आधार बना कर टीम को तोड़ने का प्रयास करते थे। महिम के मुताबिक़, टीम के चयन के मुद्दे पर वसीम को पूरा समर्थन किया गया था, उन्हें पूरी छूट दी गई थी। लेकिन वो इक़बाल अब्दुल्ला, समद सल्ला और जय बिष्टा को बतौर गेस्ट खिलाड़ी लेकर आए। इतना ही नहीं कुणाल चंदेला की जगह इक़बाल को टीम का कप्तान बना दिया।

हाल ही में मुश्ताक अली ट्रॉफी में उत्तराखंड का प्रदर्शन काफी खराब रहा था, टीम 5 में से 4 मैच हार गई थी। वसीम जाफर टीम के कैम्प के दौरान मौलवियों को बुलाते थे। कैम्प के दौरान आयोजन स्थल पर तीन मौलवियों को बुलाया गया था।     

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पहले उत्तराखंड टीम का स्लोगन ‘राम भक्त हनुमान की जय’ हुआ करता था लेकिन जफ़र वसीम ने इसे धार्मिक बताते हुए बदल दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने ‘उत्तराखंड की जय’ का सुझाव दिया था तो इसमें भी वसीम ने ‘जय’ शब्द पर आपत्ति जताई थी। आखिरकार उन्होंने अपनी मर्ज़ी के अनुसार टीम का स्लोगन ‘गो उत्तराखंड’ रख दिया था। इसके अलावा वसीम पर यह भी आरोप हैं कि उन्होंने कई मुस्लिम खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए, अच्छे खिलाड़ियों को महत्व देना बंद कर दिया था।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय: नेहरू जानते थे कि ये न केवल संसद का समीकरण बदलेगा बल्कि राजनीति भी बदल देगा

11 फरवरी 1968। आज की तारीख से 53 साल पहले। मुगलसराय जंक्शन पर सुबह-सुबह चद्दर से ढका एक शव मिला। ये शव लोहे-कंकड़ के ट्रैक पर पीठ के बल सीधे पड़ा हुआ था। मुट्ठी में 5 रुपए का नोट था। कलाई में नाना देशमुख नाम से घड़ी थी। जेब में थे सिर्फ़ 26 रुपए और एक प्रथम श्रेणी की टिकट थी, जिस पर नंबर 04348 था।

इस शव को सबसे पहले देखने वाले का नाम लीवर मैन ईश्वर दयाल था, जिनकी सूचना के बाद पटरी के पास पड़े इस आदमी की स्थिति स्टेशन मास्टर ने अपने रजिस्टर में ‘लगभग मृत’ लिख कर दर्ज की थी। 

ये शख्स कौन था? जिसके अंतिम समय से जुड़ी एक-एक कड़ी अब तक कई लोगों की स्मृतियों में कैद है और जिसके कारण हर साल ये तारीख आने पर एक सवाल खड़ा होता है कि आखिर उस दिन ये मृत्यु कैसे हुई?

11 फरवरी 1968 को मुगलसराय जंक्शन पर मिला वह शव जनसंघ के सह संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय (पंडित जी) का था। आज उनके नाम पर आपको कई स्कूल, कॉलेज, संस्थान खुले मिलेंगे। उनकी विचारधारा ‘एकात्म मानववाद’ पर कई नेता उनकी प्रशंसा करेंगे। कई लोगों के जीवन में वह आदर्श भी पाए जाएँगे। लेकिन, इतनी महान विभूति के साथ अंतिम दिन क्या हुआ, ये कोई ठीक-ठीक नहीं बता पाएगा। समझने-समझाने को सिर्फ़ कुछ कड़ियाँ होंगी।

पंडित दीन दयान उपाध्याय का शव (साभार: गूगल)

वो बिंदुवार कड़ियाँ, जो आज भी पंडित दीन दयाल की मौत को ‘हत्या’ कहने पर मजबूर करती हैं

कुछ किताबों व रिपोर्ट्स के हवाले से बताया जाता है कि कत्ल से एक दिन पूर्व यानी 10 जनवरी 1968 पंडित उपाध्याय लखनऊ में अपनी मुँह बोली बहन लता खन्ना के घर पर थे। उसी रात उन्हें ट्रेन पकड़ कर अगले दिन के लिए सीधे दिल्ली आना था। जहाँ बजट सत्र के मद्देनजर जनसंघ की बैठक होने वाली थी। मगर, इससे पहले कि वह दिल्ली के लिए निकलें, लता खन्ना के घर बिहार जनसंघ के संगठन मंत्री अश्विनी कुमार ने फोन किया और उनके बिहार प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया।

अश्विनी के आग्रह पर गौर करते हुए पंडित दीन दयाल ने दिल्ली में सुदर सिंह भंडारी से बात की और बिना कुछ सोचे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखनऊ को अलविदा कह दिया। जल्दी-जल्दी में टिकट होने के बावजूद पंडित जी को प्रथम श्रेणी की बोगी ‘ए’ कम्पार्टमेंट में सीट मिली थी। स्वयं प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त उन्हें छोड़ने गए थे। 

करीब 7 बजे पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस लखनऊ पहुँची। बैठने पर पता चला कि ट्रेन के बी कंपार्टमेंट में यूपी विधान परिषद के कॉन्ग्रेस सदस्य गौरी शंकर भी थे। ट्रेन चलते ही पंडित जी ने अपनी सीट की अदला-बदली गौरी शंकर के साथ की। ट्रेन चली और हर पड़ाव पार करके जौनपुर पहुँची।

समय रात के 12 बज रहे थे। उनकी मुलाकात जौनपुर के महाराज के कर्मचारी कन्हैया से हुई। उसके हाथ में महाराज का खत देख उन्हें याद आया कि वह अपना चश्मा कंपार्टमेंट में भूल गए हैं। इसी खत को पढ़ने के लिए वह दोबारा कंपार्टमेंट में आए और कन्हैया को कहा कि वह इसका जवाब बाद में देंगे।

यूट्यूब वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

ट्रेन फिर चली। अगली बार इसका स्टॉपेज मुगलसराय जंक्शन का प्लेटफॉर्म नंबर 1 था। गाड़ी चूँकि पटना नहीं जाती थी, इसलिए उसके डिब्बों को दिल्ली हावड़ा एक्सप्रेस से जोड़ा जाना था। पूरी प्रक्रिया में उस समय करीब आधे घंटे लगते थे। सो यात्रियों को चाहते न चाहते इंतजार करना ही था।

समय सारणी बता रही थी कि गाड़ी 2:50 पर चलेगी और पटना 6 बजे पहुँचाएगी। यानी सब चीजें तय थीं। उधर पटना में पंडित जी के स्वागत की तैयारी हो रही थी। लेकिन अगली सुबह हुआ क्या? पंडित जी पटना पहुँचे ही नहीं। गाड़ी का कोना-कोना छाना गया। उनका कोई नामोनिशान नहीं था। तब तक इधर, मुगलसराय जंक्शन पर मालूम चल चुका था कि कोई शव है, जो पत्थरों के ढेर पर पड़ा है।

स्टेशन पर पड़ा पंडित दीन दयाल का शव

मुगलसराय स्टेशन पर भीड़ इकट्ठा होने में देर नहीं लगी। दो सिपाही 3:45 पर वारदात वाली जगह पहुँचे। इनके बाद दारोगा फतेहबहादुर सिंह ने भी घटनास्थल का मुआयना किया। डॉक्टर आए और सारी नब्ज आदि देख उन्हें मृत करार दे दिया गया। बड़ी अजीब बात थी, जब पटना में पंडित जी को ट्रेन में न पाकर कैलाशपति मिश्र उदास हो रहे थे, तभी वहाँ मुगलसराय में पंडित जी को आधिकारिक तौर पर मृत घोषित किया जा रहा था।

किसी को नहीं पता था कि ये शव जनसंघ के सह-संस्थापक दीन दयाल उपाध्याय का है। पुलिस को भी नहीं। मगर वहाँ स्टेशन पर काम करने वाले एक बनमाली भट्टाचार्य थे, जिन्होंने उन्हें पहचाना और बाद में इसकी सारी जानकारी जनसंघ कार्यकर्ताओं को दी।

चूँकि पुलिस को उनके शव के पास टिकट भी बरामद हुआ था, तो बड़ी आसानी से नंबर मिलान करके उन्हें पहचान लिया गया। वहीं पुलिस को जितनी चीजें मौका-ए-वारदात से मिली, वह भी पुलिस ने संभाल कर रख ली।

उसी दिन सुबह के साढ़े 9 बजे वो ट्रेन, जिसमें पंडितजी थे, मोकामा स्टेशन पहुँची। यहाँ किसी पैसेंजर ने एक लावारिस सूटकेस देखा तो उसने कर्तव्य समझ उसे रेलवे कर्मचारियों को दे दिया। छानबीन में मालूम हुआ कि वह सूटकेस भी पंडित जी का था।

साभार:बीजेपी यूट्यूब चैनल

अगली कड़ी में पुलिस को सुराग एमपी सिंह ने दिया। ये जिओग्राफिकल सर्वे ऑफ इंडिया से थे। उस दिन वह भी उसकी बोगी में थे, जिसमें पंडित दीन दयाल उपाध्याय की टिकट कन्फर्म हुई थी।

सिंह ने बताया कि मुगलसराय पर टॉयलेट की ओर जाते समय उन्हें एक आदमी पंडित जी का बिस्तर ट्रेन से उतारता दिखा था। जब उन्होंने पूछा तो बताया कि उसके पिता को यहाँ उतरना था, वह उतर गए तो अब बिस्तर भी जा रहा है।

पुलिस ने इस सुराग पर लालता नाम के युवक को खोज निकाला। पूछताछ में उसने बताया कि कोई राम अवध था, जिसने उसे लावारिस बिस्तर उठा कर ले जाने को कहा। उसने तो बस उसे उठाया और बाद में उसे 40 रुपए में बेचा। पड़ताल हुई तो किसी सफाईकर्मी के पास से पंडित जी का जैकेट और कुर्ता बरामद किया गया। 

कई निरीक्षण हुए मगर आगे कोई सुराग न मिला। बाद में जाँच गई सीबीआई के हाथ। चंद दिनों में ही पता चल गया कि उस दिन पटना स्टेशन पर गाड़ी पहुँचने के बाद किसी ने एक सफाईकर्मी को ट्रेन में भेज कर बोगी साफ करवाई थी, मगर वह खुद उस गाड़ी में नहीं चढ़ा था। इस काम के लिए उस समय सफाईकर्मी को 400 रुपए दिए गए थे।

पंडित जी की शव यात्रा

कड़ियाँ तलाशते-तलाशते दो हफ्ते में कई चीजें सीबीआई इकट्ठा कर चुकी थी। आरोपितों के तौर पर राम अवध और कोई भरत लाल पेश किए गए। सीबीआई के पास उनका बयान था, जिसमें वह स्वीकार रहे थे कि उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय को गाड़ी से नीचे फेंका क्योंकि वह चोरी का विरोध कर रहे थे। 

1 वर्ष 4 माह तक की जिरह के बाद 9 जून 1969 को इस मामले पर वाराणसी की सत्र अदालत में दोबारा सुनवाई हुई। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई जाँच के अतिरिक्त बहुत सारी चीजें अस्पष्ट हैं। मसलन आखिर क्यों पंडितजी के हाथ में उस रात 5 रुपए मिले? गाड़ी स्टेशन पर रुकी तो लाश अलग क्यों मिली? जब दो अभियुक्त चोरी की बात कह रहे हैं तो सहयात्रियों ने ऐसी बात क्यों नहीं बताई? आदि-इत्यादि।

यूट्यूब वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट

कोर्ट ने सोच-विचार तो बहुत किया लेकिन दोनों पक्षों की ओर से सही साक्ष्य न मिल पाने के कारण राम अवध और अन्य आरोपित हत्या के इल्जाम से मुक्त हो गए। चोरी के इल्जाम में भरत लाल नाम के युवक को 4 साल की सजा सुनाई गई। वह पहले भी कई बार इन इल्जामों में जेल भेजा गया था।

बाद में उनकी मौत को राजनीतिक हत्या करार दिया गया। कई तरह के दावे हुए। लेकिन प्रमाण कहीं से कहीं न मिल सका। कुछ लोगों ने जनसंघ के अगले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी तक को इसके लिए जिम्मेदार बता दिया, मगर हर थ्योरी फेल हो गई।

क्या कहते हैं पंडित दीन दयान उपाध्याय की ‘हत्या’ पर विश्लेषक और भाजपा नेता?

ये वो बिंदुवार कड़ियाँ हैं, जिन्हें जानना जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा ये जानना जरूरी है कि इसे लेकर वर्तमान के राजनीतिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं। यूट्यूब पर कुछ वीडियोज हैं। जिनमें कई लोगों ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय की बात करते हुए सीधे-सीधे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है।

द क्विंट की एक वीडियो में राजनीतिक विश्लेषक राकेश सिन्हा पंडित दीन दयाल पर बात करते हुए कहते हैं कि जब वह (पंडित जी) राजनीति में आए तो जवाहरलाल नेहरू ने जनसंघ पर प्रहार करने शुरू कर दिए थे। वह जानते थे कि ये आदमी न केवल संसद में समीकरण को बदलेगा बल्कि ये आदमी राजनीति की गुणवत्ता को भी बदल देगा।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (चित्र साभार: deendayalupadhyay.org)

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी इसे हत्या करार देते हुए पूछते हैं कि जो थ्योरी चली कि वह ट्रेन से गिराए गए… अगर ऐसा होता तो उनका शव सीधा क्यों पड़ा होता। 5 रुपए का नोट हाथ में क्यों होता? वह सवाल खड़ा करते हैं कि उस ट्रेन में उस दिन मौजूद हर यात्री का फर्जी अड्रेस था। जिससे पता चलता है कि वह सब सुनियोजित था, जिनकी कभी जाँच नहीं हुई। एमजे अकबर कहते हैं कि ये हकीकत है कि उस रहस्य को नहीं सुलझाया गया। अब भी कई ऐसी चीजें हैं, जो संतोषजनक नहीं हैं।

मुगलसराय जंक्शन का नाम हुआ पंडित दीन दयाल उपाध्याय

मालूम हो कि हाल में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद यह मुद्दा दोबारा उठा और पंडित दीन दयाल की मृत्यु पर दोबारा जाँच करने की बात कही गई। वहीं उससे पहले योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुग़लसराय रेलवे स्टेशन के नाम को बदलने के लिए केंद्र सरकार को एक सुझाव भेजा गया। केंद्र सरकार को भेजे अपने सुझाव में उत्तर प्रदेश सरकार ने मुग़लसराय का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन रखने की बात कही, जिसे जून 2018 में स्वीकार कर लिया गया।

इसके बाद मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन हो गया। रेलवे स्टेशन के नाम को बदले जाने के करीब 6 महीने बाद उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने फिर मुग़लसराय तहसील का नाम बदल कर पंडित दीन दयाल उपाध्याय तहसील करने का फैसला लिया।

मुग़लसराय तहसील का भी नाम बदल दिया गया
मुग़लसराय तहसील का भी नाम बदल दिया गया

इसके साथ ही पंडित दीन दयाल की विचारधारा की मुरीद मोदी सरकार ने अपने नेतृत्व में पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर देश में कई सारी बड़ी सरकारी योजनाएँ भी चलाईं। इन योजनाओं में मुख्य रूप से दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जीवन पर भाजपा के यूट्यूब चैनल पर मौजूद जानकारी

Dickinsonia: भीमबेटका में मिला दुनिया का सबसे पुराना और दुर्लभ जानवर का जीवाश्म

भोपाल से लगभग 40 किमी दूर स्थित यूनेस्को (Unesco site) के संरक्षित क्षेत्र, भीमबेटका (Bhimbetka) की ‘ऑडिटोरियम गुफा’ में दुनिया के सबसे दुर्लभ और सबसे पुराने जीवाश्म खोजा गया है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि उन्हें भारत में डिकिनसोनिया (Dickinsonia) का पहला जीवाश्म मिला है। यह पृथ्वी का सबसे पुराना, लगभग 57 करोड़ साल पुराना जानवर है।

समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के अनुसार, यह खोज अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘गोंडवाना रिसर्च’ के फरवरी संस्करण में प्रकाशित हुई है। डिकिनसोनिया जीवाश्म से पता चला है कि इस जानवर की लंबाई चार फीट से अधिक रही होगी, जबकि मध्य प्रदेश स्थित भीमबेटका की गुफा में जो जीवाश्म मिला है वो 17 इंच लंबा है।

भीमबेटका में डिकिनसोनिया का जीवाश्‍म (Dickinsonia fossils) शोधकर्ताओं को संयोग से ही मिला है। दरअसल, मार्च, 2020 में होने वाली 36वीं इंटरनेशनल जियोलॉजिकल कॉन्ग्रेस से पहले दो शोधकर्ता भीमबेटका के टूर पर गए थे। ये सेमीनार कोरोना वायरस महामारी के कारण दो बार स्थगित भी हो चुका है।

शोधकर्ताओं को भीमबेटका के अपने टूर के दौरान एक पत्‍तीनुमा आकृति नजर आई। यह जमीन से 11 फीट की उँचाई पर चट्टान के ऊपर मौजूद था और किसी रॉक आर्ट की तरह नजर आ रहा था। डिकिनसोनिया को लगभग 541 मिलियन वर्ष पहले, कैम्ब्रियन काल में प्रारंभिक, सामान्य जीवों और जीवन की शुरुआत के बीच प्रमुख लिंक में से एक माना जाता है।

80780617
जीवाश्म की तस्वीर (साभार- odishaexpo)

शोधकर्ता इस बात को लेकर हैरान हैं कि इतने वर्षों तक यह जीवाश्म अनदेखा कैसे रह पाया? भीमबेटका की गुफा को 64 साल पहले वीएस वाकणकर ने ढूँढा था। तब से, हजारों शोधकर्ताओं ने साइट का दौरा किया और यहाँ पर लगातार ही शोधकार्य चल रहे हैं। लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि यह दुर्लभ जीवाश्म अब तक सामने नहीं आ सका था।

50+ लड़कियों-महिलाओं को रहीम खान भेजता था गंदे-नंगे फोटो, khan786 के नाम से बना रखा था सोशल मीडिया हैंडल

19 साल का एक लड़का फरिदाबाद से गिरफ्तार हुआ है। नाम है – रहीम खान। आरोप है – 50 से अधिक लड़कियों और महिलाओं को सोशल मीडिया पर गंदी-नंगी तस्वीरें भेजने का।

रहीम खान सिर्फ 8वीं तक पढ़ा है। लेकिन उसे फोटो एडिट करनी आती है। इसी स्किल को उसने गैर-कानूनी कामों के लिए यूज किया। महिलाओं-लड़कियों (यहाँ तक की कई नाबालिगों को भी) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तस्वीरें निकाल कर रहीम खान उसे मॉर्फ्ड (ऐसी एडिटिंग, जिसमें चेहरा किसी और का हो, और उसे नंगा दिखाने के लिए गर्दन के नीचे शरीर किसी और का) करता था।

रहीम यह करने के लिए एक महिला के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाए हुए था। वह इसी प्रोफाइल से लड़कियों-महिलाओं से सोशल मीडिया पर दोस्ती करता था। इसके बाद वो यौन संबंधों वाले गंदे-गंदे मैसेज भेजना शुरू करता था। बात नहीं बनती थी तो फिर वो यूजर के फोटो को एडिट कर उसमें दूसरे के यौनांगों को दिखा ब्लैकमेल भी करता था।

फरीदाबाद पुलिस को मंगलवार (9 फरवरी 2021) को इतनी सारी पीड़ितों में से एक की शिकायत मिली। उसके बाद रहीम खान गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि एक व्यक्ति उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें ch_rahim_khan786 इंस्टाग्राम हैंडल से भेज रहा था। इतना ही नहीं, इसके बाद वो पीड़िता से ही नग्न तस्वीरों की माँग भी कर रहा था।

पुलिस ने इंस्टाग्राम से इस बारे में तकनीकी पूछताछ की। फिर उसी आधार पर, साइबर सेल की टीम ने आरोपित रहीम खान का पता लगाया। फरीदाबाद पुलिस ने कहा कि खान को उसके घर से ही पकड़ा गया।

आर्श्चयजनक यह है कि पुलिस की पूछताछ में रहीम खान ने अपने अपराध की बात कबूल कर ली। और उससे भी आश्चर्यजनक यह है कि उसने स्वयं यह बताया कि न सिर्फ पीड़िता (जिसने पुलिस में शिकायत दर्ज की) बल्कि उसके जैसी 50 से ज्यादा महिलाओं-लड़कियों को वो अपना शिकार बना चुका है।

फरीदाबाद पुलिस ने रहीम खान के मोबाइल फोन से चैट हिस्ट्री, वीडियो क्लिप्स और कई सारी महिलाओं-लड़कियों की तस्वीरें साक्ष्य के तौर पर सेव कर ली है। पुलिस ने यह भी कहा है कि अन्य पीड़ितों से संपर्क करना का प्रयास किया जा रहा है।

बंगाल: ‘जय श्री राम’ वाला मास्क बाँट रहे BJP नेता को ममता की पुलिस ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार का ‘जय श्रीराम’ के नारे से टकराव ख़त्म होने के बजाय चुनाव के नजदीक आते ही और अधिक बढ़ता नजर आ रहा है। अब ममता की पुलिस ने बंगाल में भाजपा नेता अमानिश अय्यर को गिरफ्तार कर लिया है। अमानिश अय्यर का ‘अपराध’ ये है कि वो ‘जय श्री राम’ का मास्क पहनकर ऐसे ही मास्क लोगों में बाँट रहे थे।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा है कि ‘जय श्री राम’ वाले मास्क पहनकर इन्हें बाँटने के लिए बंगाल पुलिस ने अमानिश अय्यर को गिरफ्तार कर लिया है। भाजपा नेता अमानिश अय्यर श्रीरामपुर सांगठनिक जिला के महासचिव हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले, पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर विक्टोरिया मेमोरियल में रखे गए एक कार्यक्रम में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंच पर जाते ही कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगा दिए थे।

इसे ‘सरकारी कार्यक्रम का अपमान’ बताकर नाराजगी में ममता ने भाषण देने से इनकार करते हुए स्पष्ट संकेत दिया था कि ममता बनर्जी को ‘जय श्री राम’ के नाम से ही समस्या है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के हुबली में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने नया नारा इजाद करते हुए ‘हरे कृष्णा हरे राम, विदा हो बीजेपी-वाम’ का नारा भी दिया। इस रैली में ममता ने तृणमूल छोड़ भाजपा का दामन थाम रहे नेताओं पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा वाशिंग मशीन है।

ममता ने कहा था कि.सम्मानित लोगों को ही वो अपनी पार्टी में लेंगी और चोरों को टीएमसी में जगह नहीं है। ममता ने कहा था, “मैं दूसरे दलों के सम्मानित लोगों को कहूँगी कि ट्रेन छोड़ने वाली है जल्दी जाओ। तुम लोगों को टीएमसी का टिकट नहीं मिलता इसीलिए भाजपा जा रहे हो।”