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लड़कियों के नंबर चुरा कर उन्हें अश्लील फोटो-वीडियो भेजता था मिस्त्री तस्लीम, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पुलिस ने मोहम्मद तस्लीम नाम के टीवी मैकेनिक को गिरफ्तार किया है। तस्लीम पर आरोप है कि वह व्हाट्सएप ग्रुप में लड़कियों के अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजता था, जिसके चलते पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा आरोपित तस्लीम पर आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला भी दर्ज कर लिया गया है।

घटना उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित बशीर खान क्षेत्र की है। यहाँ यूपी पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (cyber crime branch) ने शनिवार (16 जनवरी 2021) को तस्लीम को गिरफ्तार किया। 30 वर्षीय मोहम्मद तस्लीम पेशे से टीवी मैकेनिक है।

तस्लीम पर आरोप है कि वह अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप ग्रुप में लड़कियों के अश्लील फोटो और वीडियो भेजता था। तस्लीम की इन हरकतों से परेशान होकर एक लड़की ने उसकी पुलिस में शिकायत कर दी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ घटना पर पुलिस का कहना है कि मैकेनिक तस्लीम फेसबुक और व्हाट्सग्रुप से लड़कियों के नंबर चुराता था इसके बाद अश्लील फोटो, वीडियो भेजता था। पुलिस ने मोहम्मद तस्लीम के पास फ़र्ज़ी आईडी और सिम कार्ड भी बरामद किया है। 

पीलीभीत कोतवाली के एसएचओ श्रीकांत द्विवेदी ने इस घटना पर कहा, “मामले के आरोपित मोहम्मद तस्लीम पर आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील हकत करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (information technology act) की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है। वह फ़िलहाल पुलिस की गिरफ़्त में है और मामले की जाँच जारी है।” 

आजम खान को तगड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी की 70 हेक्टेयर जमीन यूपी सरकार के नाम होगी

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान को एडीएम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एडीएम प्रशासन के राजस्व न्यायालय ने जौहर यूनिवर्सिटी की 70.05 हेक्टेयर जमीन उत्‍तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। यह जमीन अभी तक आजम खान की जौहर ट्रस्ट के नाम पर थी।

सपा सांसद आजम खान मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट ने शासन से 12.5 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति ली थी। लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए ट्रस्ट ने करीब 70 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन खरीद ली। आरोप है कि इस दौरान जमीनों पर अवैध कब्जे भी किए गए और सरकारी नियमों में फेरबदल किया गया। जिसके मद्देनजर एडीएम जेपी गुप्ता की कोर्ट ने शनिवार को यह फैसला सुनाया।

एडीएम कोर्ट के इस फैसले के बाद साढ़े बारह एकड़ जमीन तो यूनिवर्सिटी के पास रहेगी, लेकिन करीब 173 एकड़ जमीन (70 हेक्टेयर) राज्य सरकार के नाम दर्ज की जाएगी। बता दें 1 साल पहले इस मामले की शिकायत भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयोजक आकाश सक्सेना द्वारा की गई थी।

अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी-सिविल) अजय तिवारी ने कहा, “ट्रस्ट ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें उन्हें सिर्फ इस शर्त के आधार पर 12 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद की अनुमति दी थी गई कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।” एडीजीसी ने कहा, “अदालत ने इससे पहले सीतापुर जेल में बंद ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान को नोटिस और समन जारी किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”

गौरतलब है कि कोर्ट ने अपने आदेश में सूचित किया था कि ट्रस्ट अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी के लोगों से संबंधित जमीन को नहीं खरीद सकेगा और न ही इनके द्वारा नदी के किनारे या इसके आसपास के क्षेत्रों व ग्राम समाज भूमि या ‘चक’ सड़क से संबंधित भूमि को खरीदा जा सकेगा। इसके बावजूद आजम खान ने कोर्ट की बातों को अनदेखा कर शर्तों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश राजस्व अधिनियम की धाराओं का भी उल्लंघन किया।

कोर्ट से आदेश लेते वक्त ट्रस्ट द्वारा तब कहा गया था कि वह गरीबों की मदद के लिए चैरिटी का काम भी करेगी। साथ ही ट्रस्ट गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा भी दिलाएगी। लेकिन जाँच के दौरान यह सामने आया कि ट्रस्ट द्वारा जमीन पर जौहर विश्वविद्यालय का कार्य तो जोरशोर से चल रहा लेकिन ट्रस्ट द्वारा किए गए बाकी सारे वादे हवा हवाई हैं। पिछले दस सालों में ट्रस्ट ने कोई चैरिटी का काम नहीं किया।

इसे देखते हुए शिकायतकर्ता ने माँग की थी कि यूनिवर्सिटी को सरकार द्वारा टेकओवर कर लेना चाहिए।उल्लेखनीय है कि 500 एकड़ की जमीन पर फैले मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर सपा सांसद आजम खान हैं। विश्वविद्यालय को 2006 में स्थापित किया गया था। खान के अलावा उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और दोनों बेटे ट्रस्ट के सदस्य हैं। आजम की बड़ी बहन ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष हैं।

‘अडानी सभी बैंकों को खरीद सकता है’ – सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों पर कंपनी ने बता डाला 30 साल का रिकॉर्ड

शनिवार (16 जनवरी 2021) को अडानी ग्रुप ने बैंक का लोन नहीं चुकाए जाने के आरोप का स्पष्टीकरण जारी किया। इसके अलावा यह भी कहा कि उनके ग्रुप पर एक भी एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) नहीं होने का रिकॉर्ड पिछले तीन दशकों से बरकरार है। शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर के ज़रिए अडानी ग्रुप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि ग्रुप ने 4.5 लाख करोड़ का लोन नहीं चुकाया है जो कि अब एनपीए में तब्दील हो चुका है।  

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को ‘Trapeze artist’ (फँसाने वाला कलाकार) कहते हुए दावा किया कि 2016 से ग्रुप की आय हर दो साल में दोगुनी हो रही है। इसके बावजूद अडानी ग्रुप ने बैंक के लोन नहीं चुकाए। राज्यसभा सांसद ने अडानी समूह पर तंज कसते हुए कहा कि वह सभी बैंकों को खरीद सकता है, जैसे उसने कुल 6 बड़े हवाई अड्डे खरीदे हैं। 

2019 में अडानी ग्रुप ने 6 बड़े हवाई अड्डों को संचालित करने की नीलामी जीती थी। 

इन आरोपों के सामने आते ही अडानी ग्रुप ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है और कहा कि उन पर पिछले 3 दशकों से कोई एनपीए नहीं है। 

स्वामी के आरोपों पर अडानी ग्रुप का जवाब 

ट्विटर पर अपना पक्ष रखते हुए ग्रुप ने कहा कि जिन नीतिगत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पूँजी प्रबंधन प्रक्रियाओं से क्रेडिट गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है, उनका अनुसरण करते हुए ग्रुप ने आधारभूत तारकीय बुनियादी ढाँचे की संपत्ति तैयार की। जवाब के अंत में अडानी ग्रुप ने कहा, “हम पर एक भी एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) नहीं होने का रिकॉर्ड पिछले तीन दशकों से बरकरार है।” 

इसके अलावा अडानी ग्रुप ने ट्वीट में दर्ज की गई संख्याओं को ‘गलत और काल्पनिक’ बताया। जवाब के अगले हिस्से में अडानी ग्रुप ने कहा, “राष्ट्रनिर्माण की हमारी मूल मानसिकता, इस पर रह कर अडानी ग्रुप ने देश की माँगों को मद्देनज़र रखते हुए बुनियादी ढाँचे से जुड़ी चीज़ें बनाई हैं।”

इसके अलावा अडानी ग्रुप ने यह भी कहा, “हमें जिस तरह का नीतिगत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पूँजी प्रबंधन मिला है, उसकी वजह से हमारी कैपिटल गुणवत्ता लगातार बढ़ी है और ऋण से EBITDA का अनुपात 4 से कम है। जिसका यह मतलब है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने हमें क्रेडिट रेटिंग काफी ज़्यादा दी है।”       

अली अब्बास की ‘तांडव’ के खिलाफ मुंबई में कंप्लेन: भगवान शिव के गेटअप में जीशान अयूब ने परोसा है प्रोपेगेंडा

‘अमेज़न प्राइम’ पर आई अली अब्बास ज़फर निर्देशित वेब सीरिज ‘तांडव’ में सैफ अली खान ने मुख्य किरदार निभाया है। सीरिज में अभिनेता मोहम्मद जीशान अयूब ने एक दृश्य में भगवान शिव का गेटअप लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है और मौजूदा राजनीति को लेकर नैरेटिव बनाने की कोशिश की है, जिससे लोग नाराज़ हैं। भाजपा नेता राम कदम ने मुंबई पुलिस से इसकी शिकायत की है।

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले ‘तांडव’ के बहिष्कार का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के भाजपा नेता राम कदम ने पूछा कि आखिरकार क्यों हर बार फिल्मों और वेब सीरिज में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने का काम किया जाता है? उन्होंने कहा कि ताजा उदाहरण नई वेब सीरिज ‘तांडव’ है। उन्होंने कहा, “सैफ अली खान एक बार फिर ऐसी फिल्म या सीरिज का हिस्सा हैं, जो हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।”

राम कदम ने कहा कि निर्देशक अली अब्बास जफर को इस सीरिज से भगवान शिव का मजाक बनाने वाला हिस्सा हटाना होगा और अभिनेता जीशान अयूब को माफ़ी माँगनी पड़ेगी। भाजपा नेता ने ऐलान किया कि जब तक जरूरी बदलाव नहीं होते, तब तक ‘तांडव’ का बहिष्कार किया जाएगा। जिस दृश्य पर आपत्ति जताई जा रही है, उसे पहले ही एपी​सोड में दिखाया गया है। जहाँ भगवान शिव बना ज़ीशान अयूब सोशल मीडिया पर प्रोफ़ाइल पिक बदलने की बात करता है, क्योंकि ‘रामजी के फॉलोवर्स बढ़ रहे हैं।’

मंच पर एक अभिनेता नारद के किरदार में मौजूद होता है और ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारों का बचाव करने और देशद्रोहियों को सही साबित करने के लिए भगवान शिव के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। वहीं एक अन्य दृश्य में कॉलेज का एक युवक लड़की से कहता है, ‘जब एक छोटी जाति का आदमी एक ऊँची जाति की औरत को डेट करता है न, तो वह बदला ले रहा होता है, सिर्फ उस एक औरत से।’

राम कदम ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को घाटकोपर थाने जाकर ‘तांडव’ के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने वेब सीरिज के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता पर कार्रवाई की मॉंग की है।कपिल मिश्रा, तजिंदर पाल सिंह बग्गा और मनोज कोटक जैसे कई अन्य भाजपा नेताओं ने भी इस सीरिज का विरोध किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से लोग माँग कर रहे हैं कि वो इस तरह के कंटेंट्स पर प्रतिबंध लगाएँ।

इसी सीरिज में एक अभिनेत्री जोर देकर कहती है कि पुलिस के लिए मुसलमानों को मारना आसान है और कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा जाता है कि कई मुस्लिम युवाओं को उनकी हत्याओं को जस्टिफाई करने के लिए आतंकवादी के रूप में ब्रांडेड किया जाता है। साथ ही दिखाया गया है कि कैसे मुस्लिमों को ‘आतंकी साबित कर उन्हें मार डाला जाता है।’

सलमान खान को 5 साल कैद की सजा… लेकिन चुनौती याचिका पर पेश होने से 17वीं बार मिल गई छूट

जोधपुर की स्थानीय जिला एवं सत्र अदालत ने अभिनेता सलमान खान को 6 फरवरी को उनके समक्ष पेश होने को कहा है। अदालत ने अभिनेता को शनिवार (जनवरी 16, 2021) को पेश होने से छूट दी। सलमान खान को एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई के सिलसिले में शनिवार को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था, जिसमें उन्हें पाँच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी।

सलमान खान के वकील निशांत बोरा ने कहा, “हमने एक अर्जी सौंपी, जिसमें कोरोना महामारी की स्थिति और यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा को संभावित खतरे पर विचार करते हुए उन्हें पेश होने से छूट दिए जाने का अनुरोध किया गया।” इसकी अनुमति देते हुए, सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कछवाहा ने सलमान खान को 6 फरवरी को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।

बता दें कि जोधपुर में काला हिरण शिकार प्रकरण की सुनवाई चल रही है। शनिवार को उनके वकील ने कोरोना का हवाला देते हुए हाजिरी माफी रखी। कोर्ट ने उसे छूट प्रदान करते हुए अगली सुनवाई तिथि 6 फरवरी तय कर दी। साथ में सलमान को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। इस मामले में सलमान की तरफ से यह लगातार 17वीं बार हाजरी माफी ली गई है। कोरोना काल में ही उन्हें सातवीं बार हाजिरी माफी मिल चुकी है।

एक दिसम्बर को न्यायाधीश ने उन्हें 16 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत की तरफ से कोर्ट में पेश हाजिरी माफी में कहा गया कि रेस्पोंडेंट मुंबई में निवास करता है। मुंबई व जोधपुर में कोविड-19 महामारी भयंकर रूप से फैली हुई है। इन परिस्थितियों में रेस्पोंडेंट का पेशी के लिए जोधपुर आना खतरे से खाली नहीं है। इस कारण रेस्पोंडेंट सलमान खान आज कोर्ट में पेश नहीं हो सका है। ऐसे में सलमान को आज हाजिरी माफी प्रदान की जाए।

ट्रायल कोर्ट में मिल चुकी है सजा

अप्रैल 2018 में सलमान खान ने ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद वे एक बार कोर्ट में पेश हुए। ढाई साल की इस अवधि में इसके अलावा प्रत्येक पेशी पर वे किसी न किसी कारण से हाजरी माफी लेते रहे। 17 बार वह हाजिरी माफी का लाभ ले चुके हैं।

कोरोना काल में उनकी पहली पेशी 18 अप्रैल को, दूसरी 4 जून को, तीसरी पेशी 16 जुलाई को, चौथी 14 व पाँचवी 28 सितंबर को तथा छठीं पेशी 1 दिसम्बर को और 16 जनवरी को एक बार फिर सलमान की तरफ से कोरोना के नाम पर हाजिरी माफी माँगी गई। कोर्ट ने भी कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए हर बार सलमान को हाजरी माफी प्रदान की।

सह आरोपितों को मिल चुका है संदेह का लाभ

बता दें कि इस मामले में सह आरोपित फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू व सोनाली बेंद्रे को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सलमान खान को उस समय गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था। तीन दिन बाद वे कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर रिहा हुए थे। सलमान खान ने उन्हें सुनाई गई पाँच साल की सजा को चुनौती दे रखी है। वहीं आर्म्स एक्ट के मामले में कोर्ट ने सलमान को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती दे रखी है।

22 साल से चल रहे है मामले

स्थानीय पुलिस ने सलमान खान व अन्य के खिलाफ दो अक्टूबर 1998 को हिरण शिकार का मामला दर्ज किया। सलमान के खिलाफ हिरण शिकार का मामला विश्नोई समुदाय की तरफ से दर्ज कराया गया था। सलमान खान के खिलाफ तीन अलग-अलग स्थान पर हिरण शिकार व अवधि पार लाइसेंस के हथियार रखने के मामले दर्ज किए गए। इस मामले में सलमान खान को बारह अक्टूबर 1998 को गिरफ्तार किया गया। पाँच दिन बाद वे जमानत पर रिहा हुए।

2000 करोड़ रुपए कचड़े में: 7 साल पहले बेकार समझ फेंक दी थी, खोजने वाले को मिलेगा 50%

ये 2013 की बात है। ब्रिटिश आईटी कर्मचारी जेम्स हॉवेल्स (James Howells) ने एक हार्ड ड्राइव को कचरे में फेंक दिया था। ये वो साल था, जब बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत मात्र 50 डॉलर चल रही थी और इसे कोई खरीदने वाला भी नहीं था, न ही मीडिया में कहीं इसकी चर्चा थी। आज जेम्स हॉवेल्स उस हार्ड ड्राइव को खोजने के लिए छान मार रहे हैं, क्योंकि उसमें 7500 Bitcoins थे, जिनकी कीमत आज 26.94 करोड़ डॉलर (1971 करोड़ रुपए) है।

जेम्स हॉवेल्स का कहना है कि उन्होंने गलती से उस हार्ड ड्राइव को फेंक दिया था, जो अचानक हुई घटना थी। आज जब एक-एक Bitcoin की कीमत $36,000 (26.28 लाख रुपए) पर घूम रह है, वो घूम-घूम कर उस हार्ड ड्राइव को खोज रहे हैं। अब वेल्स के न्यूपोर्ट के रहने वाले जेम्स ने अपने सिटी काउंसिल को ऑफर दिया है कि वो अगर शहर के कचरे में से उस हार्ड ड्राइव को ढूँढ निकालें तो वो नगर प्रशासन को बड़ी रकम देंगे।

उन्होंने ऐलान किया है कि वो इस रकम का 25% डोनेट कर देंगे, ताकि इसे न्यूपोर्ट के हर एक नागरिक को उसका हिस्सा मिल सके। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति को 239 डॉलर्स (17,485 रुपए) मिलेंगे, क्योंकि शहर की जनसँख्या 3.16 लाख है। लेकिन, जेम्स का दुर्भाग्य ये है कि शहर के प्रशासन ने उनकी माँगों को मानना तो दूर की बात, इस सम्बन्ध में उनके साथ बैठक तक करने से इनकार कर दिया।

जब क्रिप्टो करेंसीज अपने शुरुआती स्टेज में थी, तभी जेम्स हॉवेल्स ने 4 साल लगा कर इन Bitcoins को लिया था। जून-अगस्त 2013 में जेम्स हॉवेल्स ने ये सोच कर उस हार्ड ड्राइव को फेंक दिया कि उनके पास तो इसके सारे बैकअप फाइल्स पड़े ही हुए हैं। 2013 में ही जब Bitcoin के दाम $150 से $1000 तक पहुँचे, तब उन्हें पहली बार अपनी गलती का एहसास हुआ। वो कचरे में घूम-घूम कर खोज रहे हैं लेकिन ड्राइव नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा है कि वो अब पर्यावरण के नियमों का पालन करते हुए ‘ग्रिड सेफ्टी रेफेरेंस’ से उस हार्ड ड्राइव को कचरे के उसी क्षेत्र में ढूँढ रहे हैं। डेटा रिकवरी स्पेशलिस्ट उस ड्राइव को ठीक कर सकता है, भले ही वो टूट-फूट ही क्यों न गया हो। उन्होंने यहाँ तक कहा है कि जो व्यक्ति उसे खोजने में फंडिंग करेगा, उसे इसका 50% मिलेगा और 25% न्यूपोर्ट के लोगों को देकर वो खुद मात्र 25% ही अपने पास रखेंगे।

प्रशासन का कहना है कि इतनी बड़ी खुदाई और खोज अभियान से वातावरण पर खासा बुरा प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि कचरे को वहाँ से हटाने और फिर उसमें खोजबीन करने में ही कई मिलियन पाउंड खर्च हो जाएँगे। वॉलेट रिकवरी सर्विस नामक कंपनी का कहना है कि उसे रोज ऐसे 70 निवेदन मिल रहे हैं, जहाँ यूजर्स अपने हार्ड ड्राइव को फिर से रिकवर करना चाह रहे हैं। ये संख्या बढ़ती ही जा रही है।

इसी तरह खबर आई थी कि सैन फ्रांसिस्को में रह रहे जर्मन प्रोग्रामर स्टेफन थॉमस के लिए चीजें और मुश्किल हो गई हैं। उनके पास पासवर्ड गेस करने के मात्र 2 मौके बचे हैं, वरना 220 मिलियन डॉलर (1608 करोड़ रुपए) के Bitcoins चले जाएँगे। उन्हें Ironkey नामक एक छोटे हार्ड ड्राइव को अनलॉक करना होगा। उन्होंने जिस डिजिटल वॉलेट में 7002 Bitcoins रखे थे, उन्हें पाने के लिए उसके प्राइवेट कीज चाहिए, जो इसी में हैं। 

कटवा विधायक ने लगवाया टीका, भतार MLA भी उसी लाइन पर: TMC नेताओं में वैक्सीन के लिए मची होड़

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं में कोरोना वायरस की वैक्सीन लेने की होड़ सी मच गई है। जहाँ केंद्र सरकार का जोर है कि सबसे पहले अपनी जान जोखिम में डाल कर लगभग एक वर्ष तक लोगों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसमें प्राथमिकता दी जाए, TMC के नेता पहले खुद को सुरक्षित कर लेना चाहते हैं। पार्टी के दो विधायकों ने वैक्सीन लगवाया है। ऊपर से कई स्वास्थ्य कर्मचारियों को बुला कर उन्हें खाली हाथ लौटा दिया गया।

वैक्सीन लगवाने वालों में भतार के विधायक सुभाष मोंडल और कटवा के विधायक रबीन्द्रनाथ चटर्जी शामिल हैं। शनिवार (जनवरी 16, 2021) की सुबह सुभाष ने राज्य के सरकारी अस्पताल में जाकर वैक्सीन ली। वहीं चटर्जी ने भी स्वास्थ्य कर्मचारियों के ऊपर खुद को प्राथमिकता दी। ये दोनों ही ईस्ट बर्दवान जिले के नेता हैं। पहले चरण में केवल फ्रंटलाइन वर्कर्स को ही वैक्सीन दिए जाने की अनुमति है, लेकिन इन नेताओं ने इसका उल्लंघन किया।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ये नेतागण जिले की पेशेंट्स वेलफेयर कमिटियों का हिस्सा हैं, इसलिए उन्होंने वैक्सीन ली। उनका कहना है कि इस समिति का सदस्य होने के नाते वो भी फ्रंट लाइन वर्कर हैं। पूर्व विधायक बनमाली हाजरा, जिला परिषद अध्यक्ष जहर बागड़ी और पंचायत समिति सदस्य महेंद्र हाजरा ने भी वैक्सीन ली। कई नर्सों ने शिकायत की कि उनका नाम होने के बावजूद उन्हें वैक्सीन नहीं दी गई।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “कोरोना वैक्सीन की लूट हुई है। देश के प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वॉरियर्स, स्वास्थ्यकर्मियों एवं फ्रंटलाइन वर्कर के लिए फ्री कोरोना वैक्सीन भेजी। लेकिन, पश्चिम बंगाल में TMC विधायक और गुंडों ने जबरदस्ती वैक्सीन लगवा ली। सीएम ममता बयान दे रही हैं कि पीएम ने ही कम वैक्सीन भेजी है। शर्म करो ममता जी!”

यहाँ तक कि सभी मुख्यमंत्रियों के साथ टीकाकरण अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताओं से खास तौर पर अपील की थी कि पहले चरण में जनप्रतिनिधि वैक्सीन लेने से बचें, ताकि स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जा सके। पहले चरण का पूरा खर्च भी केंद्र ही उठा रहा है। दिल्ली में स्वच्छता कर्मचारी मनीष इस टीकाकरण अभियान के पहले लाभार्थी बने।

सबसे अजीब बात तो ये है कि जिस पार्टी के नेता लपक कर सबसे पहले वैक्सीन ले रहे हैं, वो ही इसे रोकने की कोशिश भी कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और जमीयत उलेमा ए हिंदी का अध्यक्ष सिद्धीकुल्लाह चौधरी ने वैक्सीन को ले रही जा रही ट्रक को ही रोक डाला। उन्होंने ‘किसान आंदोलन’ की आड़ में ऐसा किया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों से ट्रक को बचाने के लिए पुलिस को बुलाने की नौकात आन पड़ी।

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत की और पहले ही दिन लगभग 2 लाख फ्रंटलाइन वॉरियर्स को वैक्सीन दिए गए। हालाँकि, ये आँकड़े भले ही लक्ष्य से पीछे हों लेकिन संतुष्टिजनक बात ये है कि इनमें से अब तक एक को भी किन्हीं भी कारणों से अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। पश्चिम बंगाल में दो लोगों की तबियत जरूर खराब हुई, लेकिन अब उनकी स्थिति स्थिर है।

एक साथ 8 ट्रेनें, सब से पहुँच सकेंगे सरदार पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति तक: केवड़िया होगा देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ स्टेशन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (17 जनवरी 2021) को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए स्टेचू ऑफ़ यूनिटी, केवड़िया को देश के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ने के लिए 8 ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने केवड़िया रेलवे स्टेशन समेत गुजरात की विभिन्न रेल परियोजनाओं का उदघाटन किया। देश के पहले गृह मंत्री और लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशाल प्रतिमा ‘स्टेचू ऑफ़ यूनिटी’ केवड़िया में ही मौजूद है। 

आज शुरू की गई 8 ट्रेनें केवड़िया को हज़रत निजामुद्दीन (दिल्ली), चेन्नई, रीवा, वाराणसी, अहमदाबाद, दादर और प्रतापनगर से जोड़ेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए ऐलान के मुताबिक़ केवड़िया रेलवे स्टेशन में तमाम नई सुविधाएँ शामिल की जाएँगी। इस रेलवे स्टेशन की ईमारत को स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा। केवड़िया रेलवे स्टेशन देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेट’ वाला स्टेशन होगा। इन परियोजनाओं के लागू होते ही भारतीय रेलवे के मानचित्र पर स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को भी जगह मिल जाएगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के दौरान कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, “आज केवड़िया से शुरू की गई कई ट्रेनों में एक पुरात्ची थलाइवर डॉ. एमजी रामचंद्रन रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। यह सुखद संयोग है कि आज एमजीआर की जयंती भी है, उनका जीवन हमेशा गरीब और वंचितों की सेवा में समर्पित था।” 

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने परियोजना से जुड़ी कई अहम बातें बताई:  

भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसा सम्भवतः पहली बार हो रहा है, जब एक साथ देश के अलग-अलग कोने से एक ही जगह के लिए इतनी ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई है। 

केवड़िया जगह भी ऐसी है, इसकी पहचान देश को एक भारत, श्रेष्ठ भारत का मंत्र देने वाले सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा से है।

इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टेचू ऑफ़ यूनिटी देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को मिलेगा ही। इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से केवड़िया में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों का जीवन भी बदलने वाला है। इससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर आएँगे। 

स्टेचू को यूनिटी को देखने के लिए अब स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से ज़्यादा पर्यटक आने लगे हैं। लोकार्पण के बाद अब तक लगभग 50 लाख लोग स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को देखने के लिए आ चुके हैं।

आज़ादी के बाद हमारी ज़्यादातर ऊर्जा पहले की रेल व्यवस्था को सुधारने में लगी रही। उस दौरान नई सोच और नई तकनीक पर ध्यान कम रहा। ये नज़रिया बदली जानी बहुत जरूरी थी, इसलिए बीते सालों में देश में रेलवे के पूरे तंत्र में व्यापक बदलाव करने के लिए काम किया गया। 

देश में रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण के साथ ही आज देश के उन हिस्सों को रेलवे से जोड़ा जा रहा है जो अभी जुड़े नहीं थे। आज पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी के सा​थ पुराने रेल रूट का चौड़ीकरण और बिजलीकरण किया जा रहा है, रेल ट्रैक को ज़्यादा स्पीड के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। 

फहद अहमद अब बना ‘किसान नेता’, पहले था CAA विरोधी छात्र नेता: स्वरा-मंडली संग करता है काम, AMU में मिली थी ‘ट्रेनिंग’

मुंबई में स्थित ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS)’ की तुलना आजकल अक्सर दिल्ली के ‘जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)’ से होती है, क्योंकि वहाँ भी छात्रों की राजनीति और बात-बात पर विरोध प्रदर्शन अब आम हो गया है। वहाँ Ph.D कर रहा एक छात्र नेता है फहद अहमद, जो CAA विरोधी प्रदर्शनकारी हुआ करता था, अब वो ‘किसान नेता’ है। वो स्वरा भास्कर, बरखा दत्त और हामिद अंसारी जैसों के साथ मिलता-जुलता रहता है।

आजकल वो मुंबई में ‘किसान आंदोलन’ को हवा देने में लगा हुआ है और अक्सर इसके वीडियोज और फोटोज डालता रहता है, जिसमें कई सिख प्रदर्शनकारी भी होते हैं। वो तीनों कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए भाषण भी देता है। वहीं जनवरी 2020 में जब वानखेड़े स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ODI मैच चल रहा था, तब उसने अपने साथियों के साथ मिल कर CAA और NRC विरोधी टीशर्ट्स पहन कर प्रदर्शन किया था।

CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान वामपंथी मैगजीन्स ने उस पर कवर स्टोरी भी की थी और TISS में मोदी विरोधी माहौल बनाने के लिए वो लगातार प्रयासरत है। उसने इस कानून को केंद्र सरकार की ‘गलत प्राथमिकता’ बताते हुए कहा था कि ये मानवता, महिलाओं और गरीबों के खिलाफ है। उसने अपने 50 साथियों के साथ मिल कर कई जगह घूम-घूम कर लोगों को भड़काया था। उसने सरकार पर सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने के आरोप भी लगाए थे।

उसके बयान “मोदी सरकार का ईगो भारत से भी बड़ा है, ऐसे घमंडी नेता देश के लिए खतरा हैं” को खूब प्रचारित किया गया था। मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए जिस विरोध प्रदर्शन में कई बॉलीवुड सेलेब्स भी हिस्सा बने थे, उसमें भी इसने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। कन्हैया कुमार, उमर खालिद, ज़ीशान अयूब और मक़सूर उस्मानी जैसे कथित एक्टिविस्ट्स के साथ मिल कर ये लगातार काम कर रहा था।

इससे पहली वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में था, जहाँ की ‘ट्रेनिंग’ की वो अभी भी दाद देता है। प्रशांत कनोजिया, शेहला रशीद, अरुंधति रॉय और खालिद सैफी जैसे कट्टर विवादित चेहरों के मार्गदर्शन में वो काम करता रहा है। उसने मुकेश अम्बानी पर किसानों की जमीने हड़पने का आरोप लगाते हुए लोगों को भड़काया। उसने सोशल मीडिया फीड्स किसान आंदोलन की तस्वीरों और वीडियोज से भरे हुए हैं।

फहद अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहेड़ी का रहने वाला है और अलीगढ़ के ही ‘ज़ाकिर हुसैन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल’ में उसकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा हुई है। AMU में उसने कॉमर्स की पढ़ाई की। उसने सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश से ‘सोशल वर्क’ की डिग्री ले रखी है। साथ ही वो ‘सोच’ नामक NGO का संस्थापक भी है। फेसबुक ने उसके पेज को वेरीफाई कर रखा है। TEDx ने भी उसे बोलने के लिए बुलाया था।

फरवरी 2020 में TISS में सोशल वर्क स्कूल के ‘समीक्षा सामाजिक कार्यक्रम’ में आपत्तिजनक नारों और भड़काऊ पोस्टरों का इस्तेमाल करते हुए CAA व NRC का विरोध किया गया था। इसमें ‘जम्मू कश्मीर में तालाबंदी: हमें चाहिए आज़ादी’, “जम्मू कश्मीर पर तुमने कब्जा कर रखा है, 200 से भी ज्यादा दिनों की तालाबंदी ख़त्म करो, आज़ादी दो’ और ‘कश्मीर को आज़ादी दो। फ्री कश्मीर’ जैसे पोस्टर्स लहराए गए थे।

प्राइवेट वीडियो, किसी और से शादी तक नहीं करने दी… सदमे से माँ की मौत: महाराष्ट्र के मंत्री पर गंभीर आरोप

महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री और एनसीपी नेता धनंजय पंडितराव मुंडे पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला ने इस मामले से जुड़े कई बड़े खुलासे किए हैं। इंडिया टुडे को दिए साक्षात्कार में महिला का कहना है कि धनंजय मुंडे के पास उसके तमाम प्राइवेट वीडियो मौजूद हैं और उन्हें डर है कि वह वीडियो लीक कर सकते हैं। उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो चुकी है लेकिन वह इंसाफ़ के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। 

महिला ने एनसीपी नेता पर और भी कई गम्भीर आरोप लगाए हैं। महिला के मुताबिक़ धनंजय मुंडे ने उससे शादी का वादा किया था और दोनों 2006 से रिलेशनशिप में हैं। इसके बाद महिला ने कहा, “जब मेरी माँ को पूरे मामले के बारे में पता चला तो वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उनकी मृत्यु हो गई। मैं 2014 में मुंबई आई थी और यहाँ पीजी में रहती थी। उसमें पुरुषों को आने की अनुमति नहीं थी इसलिए धनंजय मुंडे ने मेरे लिए किराए का मकान लिया। मुझे उस मकान में ही रहना पड़ता था और उसका किराया वह खुद देता था।” 

महिला ने कहा, “धनंजय मुंडे की वजह से मेरी ज़िंदगी और करियर दोनों बर्बाद हो गए। उसने मुझे किसी और से शादी तक नहीं करने दी। अब मुंडे मुझे पहचानने से भी मना कर देता है और पुलिस से मदद माँगने का कोई मतलब नहीं है। उसने मेरे साथ कई जगहों पर सम्बन्ध बनाए हैं, मुझे कब तक अत्याचार झेलना पड़ेगा? मेरे साथ न्याय कब होगा?”

हाल ही में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे पर लगाए गए बलात्कार के आरोपों पर बयान दिया था। गुरुवार (14 जनवरी 2021) को दिए गए बयान में शरद पवार ने कहा कि एनसीपी नेता पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इस घटना पर संगठन के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी और उसके बाद ही धनंजय मुंडे पर कोई फैसला लिया जाएगा। 

शरद पवार ने अपने बयान में यह भी कहा था, “मुंडे ने मुझसे मुलाक़ात की थी और इन आरोपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। मुंडे ने कहा था कि जिस महिला ने उन पर आरोप लगाया उससे उनका नज़दीकी रिश्ता था। उनके खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जा चुकी है और बहुत जल्द जाँच भी शुरू हो जाएगी। मुंडे की बातों से ऐसा लगता है कि जैसे उन्हें इसका अनुमान था इसलिए उन्होंने पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट का रुख किया था।”

इस घटना पर महाराष्ट्र भाजपा ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री का जम कर विरोध किया था। भाजपा के प्रदेश संगठन का कहना था कि धनञ्जय मुंडे को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। राज्य निर्वाचन आयोग को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने अपने चुनावी हलफ़नामे में अपनी दूसरी पत्नी की जानकारी छुपाए रखी।   


दरअसल महिला ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत की थी। उन्होंने मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को पत्र लिख कर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ओशिवारा पुलिस थाना उनकी शिकायत नहीं दर्ज कर रहा है। उसने अपनी जान खतरे में होने का दावा भी किया था।