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‘जेल में मेरे पति को कर रहे टॉर्चर’: BARC के पूर्व सीईओ की पत्नी ने NHRC से की शिकायत

BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को तलोजा जेल के अधिकारियों द्वारा जेजे अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराने के बाद उनकी पत्नी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को झूठे तरीके से फँसाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस उनके पति को हिरासत में टॉर्चर कर रही है।

NHRC को लिखे पत्र में पार्थो दासगुप्ता की पत्नी समरजनी दासगुप्ता ने उल्लेख किया है कि उनके पति को तलोजा अधिकारियों द्वारा जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा कि दासगुप्ता को 15  जनवरी को दोपहर 1 बजे अस्पताल लेकर जाया गया। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। वह अर्ध-बेहोशी की हालत में थे। वे बोल भी नहीं पा रहे थे।

समरजनी दासगुप्ता ने बताया, ”होश में आने के बाद उन्होंने नवी मुंबई के पुलिस अधिकारी के साथ मेरा नंबर साझा किया। मुझे उनकी गंभीर स्थिति के बारे में 16 जनवरी को सुबह 3.20 बजे सूचित किया गया था। जब हम अस्पताल पहुँचे, तो हमने उन्हें आपातकालीन वार्ड में गंभीर हालत में पाया। ना तो उनके बेड और न ही ओढ़ने का चादर था। इसके साथ ही उन्हें कोई तकिया भी नहीं दिया गया था। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें 15 जनवरी से खाने के लिए कुछ नहीं दिया गया है। उन्होंने हमें बताया कि तलोजा जेल में भी उन्हें बेरहमी से पीटा गया था।”

पूर्व BARC CEO की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है। अपने पत्र में, समरजनी ने कहा कि पार्थो को तलोजा जेल में मानसिक रूप से भी परेशान किया गया है।

समरजनी ने पत्र में बताया, “उन्हें 6.30/7:00 बजे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से हम उन्हें देख नहीं पाए या उनसे बात नहीं कर पाए। जेजे के डॉक्टरों ने किए गए टेस्ट और दी गई दवा की किसी भी रिपोर्ट को साझा करने से इनकार कर दिया।”

महाराष्ट्र सरकार पर अपने पति को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए, समरजनी दासगुप्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके पति को मिला इलाज उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि वे उचित इलाज के लायक हैं। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि परिवार को बताया जाना चाहिए कि उनको क्या उपचार दिया जा रहा है।

उन्होंने सवाल किया, “मेरी बेटी तलोजा जेल को अपने पिता के साथ एक कॉल करने के लिए लगातार ईमेल भेज रही है, जो कि जेल के नियमों के अनुसार आरोपित का अधिकार है। इस ईमेल में उसने हमेशा अपना फोन नंबर साझा किया है। 15 जनवरी की शाम 6 बजे, जब उसने जेल को ईमेल भेजा, तब भी हमें उनकी स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया। जब अधिकारियों के पास परिवार तक पहुँचने के सभी साधन मौजूद हैं तो फिर उनके परिवार को अँधेरे में क्यों रखा जा रहा है?”

समरजनी दासगुप्ता ने पूछा कि शुरू से ही हर कदम पर सहयोग करने के बावजूद उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। उनके मौलिक अधिकार को अस्वीकार क्यों किया जा रहा है। हम पार्थो को सुरक्षित चाहते हैं। उन्होंने एनएचआरसी को एक शिकायती पत्र में लिखा कि उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए और लोगों के निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए एक गलत बयान देने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

मुंबई पुलिस और सिटी क्राइम ब्रांच ने 25 दिसंबर 2020 को फर्जी TRP घोटाले के सिलसिले में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। यह आरोप लगाया जा रहा है कि BARC के पूर्व सीईओ को अर्नब गोस्वामी के खिलाफ झूठे बयान देने के लिए कथित रूप से प्रताड़ित किया गया था ताकि उन्हें मामले में फँसाया जा सके।

बेटी ने PM से लगाई गुहार

इससे पहले पार्थो दासगुप्ता की बेटी प्रत्यूषा ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई थी। उन्होंने इस पत्र में अपने पिता की ज़िंदगी बचाने की अपील की। प्रत्यूषा का कहना था कि उनके पिता शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) से ही बेहोशी की अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं।

प्रत्यूषा ने कहा कि जनवरी 15, 2021 को दोपहर 1 बजे उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया और अगले दिन 3 बजे दोपहर को परिजनों को इसकी सूचना दी गई, अर्थात 15 घंटे तक इस बात को छिपा कर रखा गया।

उन्होंने बताया कि जब वो अस्पताल पहुँचीं तो उनके पिता इमरजेंसी रूम में पड़े हुए थे। प्रत्यूषा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि उनके पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से वो कई सालों से पीड़ित हैं।

ऑपइंडिया ने स्थिति की वास्तविकता को जानने के लिए पार्थो दासगुप्ता के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने ऑपइंडिया को बताया कि दासगुप्ता 15 जनवरी 2021 की दोपहर के बाद से गंभीर हालत में थे और उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि, तलोजा जेल के अधिकारियों ने नवी मुंबई पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लगभग 15 घंटे तक उनकी हालत के बारे में परिवार से संपर्क नहीं किया गया। दोपहर बाद, जब दासगुप्ता को जेजे अस्पताल ले जाया गया, तब सत्र न्यायालय में जमानत की सुनवाई चल रही थी, जहाँ उनकी बेटी और पत्नी दोनों मौजूद थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रत्यूषा ने सवाल किया कि जब दासगुप्ता अस्पताल में बेहोश थे, तब अधिकारियों ने परिवार को इतने समय तक सूचित क्यों नहीं किया। उन्हें संदेह है कि अधिकारियों ने उस समय उनके गंभीर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी छिपा दी थी, क्योंकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति जमानत के लिए वैध होगी और पुलिस यह नहीं चाहती थी कि सुनवाई के दौरान ही ये जानकारी सामने आए।

परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की

समरजनी दासगुप्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पार्थो और उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक यातना का विवरण भी दिया है। हलफनामे में उन्होंने कहा कि जब वह अस्पताल पहुँची, तो ‘स्ट्रेचर पर खून था’ जहाँ पर पार्थो लेटे हुए थे। उनके पैर बर्फ से ठंडे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि डॉक्टरों ने उनकी तत्काल चिकित्सा के उनके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया। हलफनामे में उन्होंने कहा है कि 16 जनवरी की सुबह 6:30 बजे आईसीयू में ले जाया गया, जबकि वह 15 जनवरी की दोपहर से अस्पताल में थे। उन्होंने दावा किया कि उसके बाद भी उन्हें उनकी बीमारी या स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया।

फेक टीआरपी घोटाला

अक्टूबर 2020 में मुंबई पुलिस ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ सनसनीखेज दावे किए थे कि वे टीआरपी रेटिंग्स में हेरफेर कर रहे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन टीवी चैनल BARC के दर्शकों के डेटा में हेरफेर करने में शामिल थे, जिन घरों में बार-ओ-मीटर, टीवी व्यूअरशिप को ट्रैक करने वाले डिवाइस इंस्टॉल किए गए हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि हंसा रिसर्च ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। हंसा ग्रुप एक ऐसा संगठन है जिसने BARC के लिए TRP रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों को विनियमित किया है। दिलचस्प बात यह है कि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में एक बार भी रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं किया गया था। जिस चैनल का जिक्र कई बार किया गया वह इंडिया टुडे था।

जाँच के दौरान, कई सबूत और गवाह सामने आए कि कथित मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बोलने के लिए उन्हें डरा रही है, जिसमें हंसा के अधिकारी भी शामिल हैं। हंसा ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बयान देने के लिए परेशान किया जा रहा है।

डिमांड में ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी, यूपी पुलिस को चाहिए कस्टडी

भगवान राम-सीता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर गिरफ्तार कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की मुश्किलें और बढ़ने वाली है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुनव्वर के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। बता दें हाल ही में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मुनव्वर फारूकी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तरप्रदेश पुलिस ने कॉमेडियन फारूकी को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए इंदौर सेंट्रल जेल और सीजेएम कोर्ट के समक्ष 7 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल, 2020 में आशुतोष मिश्रा नामक एक अधिवक्ता की शिकायत पर प्रयागराज जिले के जॉर्ज टाउन पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले में यह प्रोडक्शन वारंट पेश किया गया है।

साभार: Newsroom Post

पुलिस ने आरोपित पर भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धर्म का अपमान कर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) और धारा 65 और 66 आईटी एक्ट, 2008 के तहत मामला दर्ज किया था।

बता दें यह मामला फारूकी द्वारा अपलोड एक यूट्यूब वीडियो पर आधारित है। इसमें उसने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए, गोधरा ट्रेन जलने के मामले में हिंदुओं की मौत का मजाक उड़ाते हुए और नरसंहार में आरएसएस और अमित शाह की भूमिका पर जोर दिया था।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुनव्वर की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार इरम सिद्दीकी ने ट्विटर पर जानकारी दी कि इंदौर में उच्च न्यायालय में जमानत की सुनवाई स्थगित कर दी गई क्योंकि पुलिस द्वारा उसकी केस डायरी पेश नहीं की गई।

उल्लेखनीय है कि हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मुनव्वर फारूकी ने हाल ही जमानत के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में उसकी याचिका खारिज की गई थी और सत्र न्यायालय ने भी जमानत देने से मना कर दिया था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन सिंह भूरिया ने भी 15 फरवरी को फारूकी की न्यायिक हिरासत को 27 जनवरी तक बढ़ा दिया था। यहाँ बता दें कि 1 जनवरी को स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ ने फारूकी और आयोजन से जुड़े 4 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि फारूकी ने कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गोधरा कांड को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की।

हार्वर्ड वाले स्टीव जार्डिंग के NDTV से लेकर राहुल-अखिलेश तक से लिंक, लेकिन निधि राजदान को नहीं किया खबरदार!

साइबर क्राइम के एक से एक मामले आपने देखे-सुने होंगे। लेकिन पत्रकार निधि राजदान के साथ जो हुआ वो एकदम अलग है और अनोखा भी। निधि राजदान के ट्वीट के मुताबिक हैकर्स ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के नाम पर उन्हें ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बनाया। मगर इसको लेकर अब भी कई सवालों के जवाब आने बाकी है। 

उन्होंने शनिवार (जनवरी 16, 2021) को इस मामले पर एक ब्लॉग लिखा। हालाँकि इस ब्लॉग ने जवाब से ज्यादा सवाल खड़े किए। ऐसा ही एक सवाल जिसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है, वो यह है कि कैसे उनके सर्किल के लोगों ने उनसे नहीं बताया कि यह स्कैम हो सकता है। उनकी सर्किल में हार्वर्ड एलुमनी और हार्वर्ड प्रोफेसर भी थे। उनमें से एक हैं- स्टीव जार्डिंग।

निधि राजदान के साथ स्टीव जार्डिंग कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (KSPP) के सलाहकार बोर्ड में हैं। वह हार्वर्ड केनेडी स्कूल में प्रोफेसर हैं। वह NDTV पर अमेरिकी राजनीति पर टिप्पणी करने के लिए आते रहे हैं। NDTV ने अपनी आदत के मुताबिक स्टीव जार्डिंग को प्रोफेसर और एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप में पेश किया और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ उनके लंबे समय के एसोसिएशन को छिपाने का प्रयास किया।

स्टीव जार्डिंग अमेरिकी सीनेट, कई डेमोक्रेट उम्मीदवारों के चुनावी अभियानों का हिस्सा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कम से कम एक बार डेमोक्रेटिक पार्टी में एक पद भी सँभाला है। उन्होंने 2016 में हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति अभियान में भी काम किया और रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने स्पेनिश प्रधानमंत्री मारियानो राजोय, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य के अभियानों में भी काम किया है।

स्टीव जार्डिंग ने भारतीय राजनीति में भी दबदबा बनाया है। उन्होंने 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं। उन्होंने पहले हिलेरी और फिर अखिलेश के राजनीतिक अभियान में हिस्सा लिया था।

उनके लीक हुए एक आंतरिक ईमेल से यह भी पता चला है कि अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के बीच का स्पष्ट टकराव राजनीतिक रणनीति के तहत जार्डिंग की सलाह के हिस्से के रूप में किया गया था।

Leaked email from Steve Jarding, Rahul Kanwal shared the image in December 2016
Leaked email from Steve Jarding, Rahul Kanwal shared the image in December 2016

सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, स्टीव जार्डिंग ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी को भी 2019 के लोकसभा चुनावों पर सलाह देने का प्रयास किया। ऐसी अटकलें थीं कि वह वास्तव में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने कहा कि दोनों के बीच केवल एक बैठक हुई थी।

उनके हालिया ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, यह शायद कुछ स्मार्ट फैसलों में से एक हो सकता है, जिसे राहुल गाँधी ने अपने राजनीतिक जीवन में लिया है। यह भी बताया गया कि वह 2019 के चुनावों के लिए जनसेना प्रमुख पवन कल्याण के साथ काम करेंगे। निधि राजदान मामले में यह समझ से बाहर है कि हार्वर्ड के प्रोफेसर और डेमोक्रेट पोल सलाहकार उन्हें सचेत करने में विफल रहे कि वह एक संभावित स्कैम की शिकार हो सकती हैं।

वह संयुक्त राज्य अमेरिका से एक अच्छी तरह से जुड़े हुए शख्स हैं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें विश्विद्यालय के बुनियादी विवरणों की जानकारी होगी। जैसे कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने निधि राजदान द्वारा विश्वविद्यालय में शामिल होने की घोषणा करने से दो महीने पहले अप्रैल 2020 में ही नई नियुक्तियों पर रोक का ऐलान कर दिया था। हालाँकि निधि इस मामले से तब तक बेखबर रही जब इस महीने यूनिवर्सिटी ने ऐसी किसी नियुक्ति से इनकार किया।

आतंकियों की तलाश में दिल्ली पुलिस ने लगाए पोस्टर: 26 जनवरी पर हमले की फिराक में खालिस्तानी-अलकायदा आतंकी

26 जनवरी के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के इंतजामों को पुख्ता किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर उन खालिस्तानी आतंकियों के पोस्टर जगह-जगह चिपकाए हैं, जिनकी तलाश है। इसमें खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकियों की तस्वीरें हैं।

इंटेलिजेंस इनपुट के अनुसार खालिस्तानी आतंकी दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का फायदा उठाकर गणतंत्र दिवस पर गड़बड़ी कर सकते हैं। कनॉट प्लेस के एसीपी सिद्धार्थ जैन ने बताया, ”हमें इनपुट मिले हैं कि खालिस्तानी संगठन और अलकायदा अवांछित गतिविधि कर सकते हैं। इसको ध्यान में रखकर हमने कई कदम उठाए हैं। वांछित आतंकवादियों के पोस्टर भी चिपकाए गए हैं।”

यूँ तो 26 जनवरी और 15 अगस्त को लेकर हमेशा ही आतंकी हमले का अलर्ट रहता है लेकिन, इस बार किसानों ने भी ट्रैक्टर मार्च का ऐलान किया है, जिसको देखते हुए दिल्ली के बॉर्डर पर सुरक्षा चौकस होगी। बता दें कि कोविड महामारी को देखते हुए इस बार 26 जनवरी कार्यक्रम में शामिल होने वालों की तादाद भी मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने कम कर दी है।

इतना ही नहीं इस बार लोगों की एंट्री में भी काफी पाबंदी लगाई गई है। इस बार बिना टिकट या इनविटेशन कार्ड के गणतंत्र दिवस समारोह में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। वहीं बिना परिचय पत्र के टिकट भी इशू नहीं किया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली बॉर्डर पर भी टिकट के साथ परिचय-पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।

बता दें खुफिया एजेंसियों से मिली इनपुट के बाद दिल्ली पुलिस ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं आशंकाओं के चलते दिल्ली पुलिस खुफिया एजेंसी के साथ लगातार संपर्क में हैं। पुलिस ने आदेश जारी कर दिया है कि 26 जनवरी के दिन जो लोग भी नई दिल्ली इलाके में आएँ वो अपने साथ आईडी प्रूफ रखें। कहीं भी चेकिंग हो सकती है और आईडी प्रूफ दिखाना पड़ सकता है।

‘मैं सभी को मार दूँगा, अल्लाहु अकबर’: जर्मन एयरपोर्ट पर मचाई अफरातफरी

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर एक अजीब घटना सामने आई है। जहाँ मास्क न पहनने की वजह से टोके जाने पर 38 वर्षीय एक शख्स ने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए एयरपोर्ट पर लोगों को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उसे पकड़ना चाहा तो वह सामान छोड़कर भागने लगा। इसके बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट को सील कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्लोवेनिया का रहने वाला शख्स फ्रैंकफर्ट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय आक्रामक हो गया जब पुलिस ने उसे मास्क नहीं पहनने पर टोका। सुरक्षा कारणों की वजह से पुलिस द्वारा टोके जाने पर वह जोर-जोर ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाने लगा। शख्स ने पुलिस वाले को धमकाते हुए कहा, “मैं सभी को मार दूँगा, अल्लाहु अकबर।” अल्लाहु अकबर कहते हुए आरोपित ने अपना सामान छोड़ा और घटनास्थल से भागने का प्रयास किया।

धमकी देने वाले शख्स के भागते ही पुलिस ने आनन-फानन में हवाई अड्डे को खाली करा दिया। इसके साथ ही पुलिस ने ऑपरेशन चलाकर सिरफिरे को गिरफ्तार कर लिया। घटना के वायरल हो रहे फुटेज में एयरपोर्ट का टर्मिनल-1 खाली नजर आ रहा है। हथियारबंद अधिकारी आरोपित को घेरे हुए हैं, जबकि अन्‍य यात्री एयरपोर्ट के बाहर चले गए।

पुलिस निदेशालय फ्रैंकफर्ट मेन एयरपोर्ट के एक प्रवक्ता ने बताया, “एक फेडरल पुलिस गश्ती दल ने एक स्लोवेनियाई व्यक्ति को मास्क नहीं पहनने के टोका। उसने तुरंत अधिकारियों के प्रति आक्रामक व्यवहार दिखाया और कहा- मैं आप सभी को मारूँगा, अल्लाहु अकबर। उसके इस व्यवहार के कारण वहाँ तैनात बलों को लगा कि मामला गंभीर है। आरोपित ने फिर भागने की कोशिश की, लेकिन तुरंत ही उसे धर-दबोच लिया गया।”

इसके अलावा दूसरे टर्मिनल में एक हथियारबंद व्यक्ति के होने की भी खबर थी। इस दौरान पुलिस ने एयरपोर्ट से चलने वाली रेल सेवाओं को भी रोक दिया था। लेकिन तलाशी के बाद पूरे एयरपोर्ट को खोल दिया गया। हालाँकि पुलिस ने दोनों ही घटनाओं के बीच संबंध को खारिज नहीं किया है। स्‍थानीय समयानुसार घटना रात करीब 8 बजे के आसपास की है, जिसके बाद एयरपोर्ट को खोल दिया गया। पकड़े गए आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

शिवलिंग पर कंडोम: अभिनेत्री सायानी घोष को नेटिजन्स ने लताड़ा, ‘अकाउंट हैक’ थ्योरी का कर दिया पर्दाफाश

बंगाली फिल्म एक्ट्रेस सायानी घोष को एक पुराने हिंदूफोबिक ट्वीट के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल एक्ट्रेस ने 2015 में यह ट्वीट किया था जो कि शनिवार (जनवरी 16, 2021) को वायरल हो गया। जिसके बाद लोगों ने उन्हें ट्विटर पर निशाने पर लेना शुरू किया।

18 फरवरी 2015 को, अभिनेत्री ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला को पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी। उन्होंने इस तस्वीर को कैप्शन दिया ‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान अब और उपकारी नहीं हो सकते)। बता दें कि हिंदू संस्कृति को अपमानित करता उनका ये ट्वीट महाशिवरात्रि के अवसर पर किया गया था, जो कि उस साल 17 फरवरी को मनाया गया था।

नेटिजन्स ने अभिनेत्री को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

अभिनेत्री का पुराना ट्वीट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी। मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने ट्वीट किया, “मिस सायानी घोष, आपने एक शिवलिंग पर कंडोम डाला है, जिसे मेरे सहित सभी हिंदू पवित्र से भी पवित्रतम मानते हैं!” उन्होंने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत एक संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध है। तथागत रॉय ने चेतावनी दी, “अब परिणाम के लिए तैयार रहें।”

एक अन्य यूजर ने बंगाली में लिखा, “आपकी गंदी मानसिकता पर शर्म आती है। कोलकाता पुलिस, हिंदू देवताओं की छवि को बिगाड़ने के लिए उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करे। हम अब हिंदू धर्म के किसी भी अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

‘ईद’ और ‘महाशिवरात्रि’ पर उनके दोहरे रवैये के लिए एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या यह ढोंग नहीं है? (वह) स्वरा भास्कर का बंगाली संस्करण है।”

लोगों की नाराजगी के बाज सायानी घोष ने माँगी माफी

2010 से फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली अभिनेत्री ने इस हिंदूफोबिक ट्वीट को हैकर द्वारा किया गया ट्वीट बताया। उन्होंने दावा किया कि अपमानजनक पोस्ट हैकर की करतूत थी। उन्होंने खुद के ट्वीट को ‘अप्रिय’ करार देते हुए कहा, “डिअर ऑल, 2015 के एक पोस्ट मेरे ध्यान में लाया गया है जो अत्यंत अप्रिय है। आपकी सभी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने 2010 में ही ट्विटर ज्वाइन कर लिया था लेकिन कुछ ही दिनों तक उपयोग करने के बाद मैंने उपयोग करना छोड़ दिया। हालाँकि अकाउंट बना रहा।”

उन्होंने दावा किया कि उनके पीआर एजेंट भासका रॉय ने उन्हें सूचित किया कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 तक खाते को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है। एक्ट्रेस ने जोर दिया, “मेरे पीआर भासका रॉय ने मुझे बताया कि मेरा अकाउंट हैक कर लिया गया है और हमें इसे तुरंत पुन: प्राप्त करने की आवश्यकता है। विभिन्न कारणों से, हम 2017 के बाद ही ऐसा कर पाए।”

इसके अलावा, सायानी घोष ने कहा कि कुछ अनावश्यक को छोड़कर अधिकांश पोस्ट हटा दिए गए थे। उन्होंने कहा, “मैं लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री को रोकने के लिए सख्त कदम उठाऊँगी।” अभिनेत्री ने यूजर्स से अपमानजनक पोस्ट का लिंक साझा करने का आग्रह किया ताकि वह इसे अपने ट्विटर टाइमलाइन से हटा सकें।

उन्होंने विनती की, “मुझे उम्मीद है कि गलत नहीं समझा जाएगा। मेरा धर्म मेरे लिए बहुत मायने रखता है इसलिए हमारी कोशिश एकता में है।”

नेटिजन्स ने पुख्ता सबूत के साथ ‘हैक थ्योरी’ का पर्दाफाश किया

हालाँकि, नेटिजन्स ने उनके घिसे-पिटे ‘हैक थ्योरी’ मानने से इनकार कर दिया। ऐसा इसलिए कि सायानी ने शिवलिंग की अपमानजनक तस्वीर 18 फरवरी 2015 को पोस्ट की थी और उनका कहना है कि अकाउंट हैक कर लिया गया है। मगर उसी दिन का उनका दूसरा पोस्ट कुछ और ही कहानी बयाँ करता है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए अकाउंट हैक करके शिवलिंग वाली फोटो डाली गई थी, लेकिन ये सोचने वाली बात है कि हैकर सायानी की दोस्तों के साथ उनकी सेल्फी क्यों पोस्ट करेगा? नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में, वह अपने दोस्त के साथ सेल्फी और अपनी वैनिटी वैन की तस्वीरें अपलोड करती हुई दिखाई दे रही है।

Screengrab of the tweets by Saayoni Ghosh via Befitting Facts

दिलचस्प बात यह है कि, सायानी घोष ने दावा किया था कि उनके खाते को 2017 तक पुन: प्राप्त नहीं किया जा सका था। हालाँकि, एक ट्विटर यूजर (@kannadaveera) ने उनके ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, जो सितंबर और अक्टूबर 2016 की तारीख में है। उक्त ट्वीट्स में अभिनेत्री को फिल्म ‘ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना’ का प्रमोशन करते हुए देखा गया, जो कि 7 अक्टूबर 2016 को रिलीज होने वाली थी। उसने फिल्म से अपने कैरेक्टर के दृश्य भी साझा किए थे, जो फिल्म की रिलीज़ से एक दिन पहले थे। ऐसी सामग्री निश्चित रूप से किसी हैकर द्वारा पोस्ट नहीं की जा सकती है।

इन सब चीजों के देखते हुए नेटिजन्स ने उनकी संदिग्ध माफी को खारिज कर दिया और कथित हैकर पर दोष मढ़ने की कोशिश करने के लिए माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

‘भूखमरी वाले देश में राम मंदिर 10 साल बाद नहीं बन सकता?’: अक्षय पर पिल पड़े लिबरल्स

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए लोगों से वैसे ही दान करने की अपील की, जैसे रामसेतु बनाने के दौरान वानरों और गिलहरी ने किया था। कुछ लोगों को ये बात नागवार गुजरी और वो सेकुलरिज्म का चोला ओढ़ कर चले आए। आनंद कोयारी नाम के यूजर ने उन्हें अस्पतालों और स्कूलों के लिए चंदा इकट्ठाइकठ्ठा करने की सलाह दे दी और दावा किया कि कोरोना काल में एक भी मंदिर काम नहीं आया।

जबकि लॉकडाउन के दौरान गरीबों की देखभाल में देश ही नहीं, दुनिया भर के मंदिर आगे रहे और उन्होंने लोगों में सिर्फ जागरूकता ही नहीं फैलाई, वरन सरकारों को दान में भी बड़ी रकम दी। वहीं हरप्रीत सिंह नामक ‘किसान आंदोलन’ समर्थक ने लिखा कि अगर कोई शैक्षिक संस्थान बन रहा होता तो वो सोचता, राम मंदिर के लिए वो कभी दान नहीं देगा। राहुल शुक्ल नामक यूजर ने दावा कर डाला कि जब लॉकडाउन में सबके खाने के लाले पड़े हैं और इसने सबकी बाट लगा दी है, तब अक्षय ऐसी अपील कर गलत कर रहे हैं।

कुमार यादवेंद्र नामक यूजर ने लिखा, “इस कनाडाई नागरिक के झाँसे में नही आना। देश के दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों-गरीबों-मजदूरों-किसानों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा का बंदोबस्त करना चाहिए। एक-एक पैसा अपने बच्चों के बेहतर भविष्य पर खर्च करना शिक्षा जरूरी हैं। बाक़ी सब काम पीछे, शिक्षा हो आगे। इनका बेटा तो अभिनेता बनेगा। और आपका?” एक अन्य यूजर तो पैसों का ही हिसाब माँगने लगा।

अमित चौधरी नामक यूजर ने लिखा, “अब से पहले भी 1400 करोड़ रुपए इकट्ठे किए जा चुके हैं लेकिन आज तक उन पैसों का अता-पता भी नहीं है। इस देश में भूखमरी है, गरीब जनता है। उनके बारे में ध्यान देना जरूरी है। मंदिर तो आज नहीं तो कल 10 साल या 5 साल बाद फिर से बन जाएगा, लेकिन जो लोग भूख से मर रहे हैं उनका क्या?” परमवीर सिंह नामक यूजर ने उन्हें किसानों को दान देने की सलाह दे डाली।

बता दें कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के लिए डोनेशन की अपील की है। ‘खिलाड़ी’ नाम से विख्यात अभिनेता ने लिखा कि अयोध्या में हमारे भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण शरू होना बहुत ख़ुशी की बात है और अब हमारी योगदान की बारी है। अक्षय ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने इसके लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई और लोग इससे जुड़ेंगे। उन्होंने इस दौरान एक रोचक कहानी का भी जिक्र किया, जो उन्होंने अपनी बेटी को सुनाई थी।

कुछ लोगों ने कहा कि भगवान को दान की ज़रूरत नहीं है, वहीं कुछ ने भूखे को भोजन देने की बातें कही। वहीं कइयों ने उनसे ‘किसान आंदोलन’ पर बोलने के लिए दबाव बनाया। एक ने उन्हें ‘अवसरवादी’ बताते हुए पूछा कि गिलहरी कैसे कुछ बोल सकती है? बलविंदर सिंह नामक यूजर ने लिखा कि मंदिर से केवल पुजारी को रोटी मिलती है। वहीं कुछ ने ‘कनाडियन’ कह कर उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की।

Coca-Cola ने लॉन्च किए ‘किसान एकता’ लिखे बोतल: सोशल मीडिया पर वायरल दावे का फैक्टचेक

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के महिमामंडन और अराजकता को सही ठहराने के लिए तरह-तरह के दावे शेयर किए जा रहे हैं। स्वदेशी कंपनियों को बदनाम किया जा रहा है और विदेशी कंपनियों को देवता बताया जा रहा है। इसी तरह अब एक वायरल दावे में कहा जा रहा है कि ‘कोका कोला’ (Coca-Cola) ने ‘किसान एकता’ और ‘सपोर्ट फार्मर्स’ लिखे हुए कोल्डड्रिंक के कई बोतल बाजार में उतारे हैं। कहा जा रहा है कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में ऐसा किया है।

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को जम कर शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी भारत में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन कर रही है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने रिलायंस जियो के बॉयकॉट के पोस्ट्स भी डाल रखे हैं। जहाँ जियो का बहिष्कार किया जा रहा है, वहीं ‘कोका कोला’ का प्रचार किया जा रहा है। ऐसे कई बोतलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड की गईं।

फेसबुक पर भी वायरल हुआ दावा

अब हम आपको बताते हैं कि इस वायरल दावे की सच्चाई क्या है। दरअसल, ‘कोका कोला’ ने ऐसी कोई बोतल लॉन्च ही नहीं की है, जिस पर ये चीजें लिखी हुई हों। कंपनी ने भारत में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर भी कोई बयान नहीं दिया है, समर्थन करना तो दूर की बात है। 2018 में कंपनी ने ‘शेयर्ड कोक’ बोतलें लॉन्च की थीं, जिसके तहत बोतल पर ‘पिता’, ‘भाई’, ‘दादी’ इत्यादि लिखे होते हैं।

‘किसान आंदोलन’ में खालिस्तानी ताकतों के घुसने की बात खुद केंद्र सरकार भी स्वीकार कर रही है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने ‘लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी (LBWS)’ के बलदेव सिंह सिरसा को समन भेजा है। ऐसे करीब दो दर्जन खालिस्तानी लिंक वाले नेताओं को समन भेजा गया है। संगठन ‘सिख फिर जस्टिस’ (SFJ) ‘किसान आंदोलन’ की आग में घी डालने का काम कर रहा है और वित्तीय मदद का ऐलान भी करता रहा है। 

‘आइए, हम सब वानर और गिलहरी बन अयोध्या के राम मंदिर के लिए योगदान दें, मैंने कर दी शुरुआत’: अक्षय कुमार की अपील

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के लिए डोनेशन की अपील की है। ‘खिलाड़ी’ नाम से विख्यात अभिनेता ने लिखा कि अयोध्या में हमारे भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण शरू होना बहुत ख़ुशी की बात है और अब हमारी योगदान की बारी है। अक्षय ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने इसके लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई कि और लोग इससे जुड़ेंगे।

राम मंदिर संकल्प निधि में डोनेशन के समर्थन में अक्षय कुमार ने वीडियो भी जारी किया। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि कल रात उन्होंने अपनी बेटी को एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक तरफ वानरों की सेना थी और एक तरफ लंका थी, जिनमें भयंकर संग्राम चल रहा था। वानर समुद्र में रामसेतु बनाने के लिए पत्थर डाल रहे थे, तभी भगवान राम की नज़र एक गिलहरी की तरफ पड़ी।

अक्षय कुमार ने कहा, “रामसेतु का निर्माण कर सीता मैया को वापस लाना था। एक गिलहरी पानी में जाकर किनारे पर आती थी, फिर रेत में लोट जाती और फिर पत्थरों की तरफ जाती थी। यही क्रम चलता रहा। भगवान राम ने गिलहरी से पूछा कि वो कर क्या रही है? गिलहरी ने जवाब दिया कि वो अपने शरीर को गीला कर रही है, उस पर रेत लपेट कर पत्थरों के बीच की दरारें भर रही हैं। ये था उस गिलहरी का योगदान।”

अक्षय कुमार ने इसी ‘गिलहरी योगदान’ की बात करते हुए बताया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान दे दिया है और साथ ही लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब वो सभी भी यही करें। उन्होंने कहा कि हम में से कुछ वानर बनें, कुछ गिलहरियाँ बनें और अपना-अपना योगदान देकर ऐतिहासिक और भव्य राम मंदिर बनाने में योगदान दें, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस मंदिर से मर्यादा पुरुषोत्तम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती रहे।

हाल ही में खबर आई थी कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी भी भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि देंगे। श्रीराम जन्मभूमि समर्पण निधि अभियान पर इकबाल अंसारी ने कहा कि बात राम मंदिर की है। बात धर्म की है। लोग बढ़-चढ़कर चंदा दें, मंदिर- मस्जिद के विवाद में लोग न आएँ। उन्होंने कहा था, “चंदा देने में कोई बुराई नहीं। लोग चंदा दे अब वह चाहे एक रुपए हों या एक लाख रुपए। राम मंदिर में सब का सहयोग होना चाहिए।”

निधि राजदान के ‘प्रोफेसरी’ वाले दावे से 2 महीने पहले ही हार्वर्ड ने नियुक्तियों पर लगा दी थी रोक

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान शुक्रवार (15 जनवरी 2021) से ही चर्चा में बनी हुई हैं। उन्होंने खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताते हुए कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था।

मामले में नया मोड़ तब आया जब निधि राजदान ने एक ब्लॉग लिखा। इसमें उन्होंने बताया कि वह ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार कैसे बनीं। इस ब्लॉग में उन्होंने कई सारे सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन कई सारे सवाल भी खड़े हुए हैं। हमारे पास हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबंधित कई रिपोर्ट्स हैं जो इस घटना की परत दर परत को खोलते हैं।

अप्रैल 2020 की शुरुआत में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने घोषणा की थी कि वे नई नियुक्ति और वेतन पर तत्काल रोक लगा रहे हैं। यह निर्णय कोविड-19 को लेकर लिया गया था। यहाँ पर बता दें कि निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वह जून 2020 में एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विश्वविद्यालय में शामिल होने वाली हैं।

Harvard University had announced a freeze on salary and hiring in April 2020, two months before Nidhi Razdan said she was joining the University as an associate professor.
Screenshot of a headline by CNBC

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के दैनिक छात्र समाचार पत्र द हार्वर्ड क्रिमसन में छपी रिपोर्ट में बताया गया था कि संस्थान में खर्चों पर रोक लगाई जा रही है। यहाँ पर होने वाली नए पदों की भर्तियाँ भी स्थगित कर दी गई है ताकि इस पैसे को बचाकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान किया जा सके।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष लॉरेंस बेको, कार्यकारी उपाध्यक्ष कैथरीन लैप और प्रोवोस्ट एलन गर्बर के एक संयुक्त ईमेल में कहा गया था, “भविष्य में इस तरह के कई निर्णय और विकल्प तेजी से सामने आएँगे। हालाँकि यह पहले से स्पष्ट है कि हमें अपने राजस्व में गिरावट के साथ अपने खर्च को श्रेणीबद्ध करने के लिए तुरंत कुछ कार्रवाई करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर के अन्य विश्विद्यालयों की तरह हार्वर्ड विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पर भी महामारी का असर पड़ा है।

ईमेल में कहा गया था, “हमारे राजस्व के प्रमुख स्रोत- ट्यूशन, दान, कार्यकारी और सतत शिक्षा और रिसर्च सपोर्ट- अभी खतरे में हैं और हमें आर्थिक सहायता की माँग में वृद्धि की उम्मीद है। महामारी की वजह से हुई आर्थिक गिरावट ने परिवार के बजट को प्रभावित किया है।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने छँटनी और छुट्टी की भी आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम अभी भी विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थितियों की एक पूरी पिक्चर हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं।”

हार्वर्ड क्रिमसन की रिपोर्ट में कहा गया, “कार्यों पर महामारी के वित्तीय प्रभावों से निपटने के लिए हमें और क्या अन्य कदम उठाने आवश्यक हैं, यह निर्धारित करने के लिए हम FY21 के बजट की जाँच करेंगे। अधिक जानकारी उपलब्ध होने पर हम आपसे संवाद करेंगे।”

पिछले वित्तीय वर्ष में, विश्वविद्यालय संचालन के लिए 1.9 बिलियन डालर का वित्त पोषण किया गया, जो हार्वर्ड के कुल परिचालन राजस्व का एक तिहाई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यह खर्च 40.9 बिलियन डॉलर था। MIT कम्यूनिटी के अध्यक्ष एल राफेल रीफ ने कहा कि संस्थान अभी यह नहीं जान सका है कि वित्तीय वर्ष 2021 में वैश्विक वित्तीय स्थिति कितनी गंभीर होगी। लेकिन हमें कठिन विकल्पों की उम्मीद करनी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा था कि शीर्ष अमरीकी संस्थान महामारी से उत्पन्न एक कठिन आर्थिक वातावरण में लागत को नियंत्रित करने के लिए विकल्पों को ढूँढ़ रहे हैं।

इस प्रकार, इस तथ्य को देखते हुए कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने अप्रैल में ही घोषणा की थी कि वे वेतन और नए पदों पर भर्तियाँ स्थगित कर दी गई है। यह आश्चर्य की बात है कि निधि राजदान ने घोषणा को देखा या सुना नहीं था। उनके अनुसार, उसे इस महीने पता चला कि नौकरी का प्रस्ताव ‘फिशिंग अटैक’ था।

बता दें कि इससे पहले निधि के खुलासे के बाद हार्वर्ड ने बताया था कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है। यहाँ तक कि पत्रकारिता के एक भी प्रोफेसर नहीं हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नीमन फाउंडेशन के जर्नलिज्म लैब के सीनियर डायरेक्टर और पूर्व डायरेक्टर जोशुआ बेंटन ने ये खुलासा किया। उन्होंने ये भी बताया कि हार्वर्ड में जर्नलिज्म पर फोकस रख कर सिर्फ मास्टर्स ऑफ लिबरल आर्ट्स नामक डिग्री की पढ़ाई होती है, जिसे कार्यरत पत्रकारों द्वारा ही पढ़ाया जाता है।