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भाई की आँखें फोड़वा दी, बीवी 14वें बच्चे को जन्म देते मरी: मोहब्बत का दुश्मन था हिन्दू-मुस्लिम शादी पर प्रतिबंध लगाने वाला शाहजहाँ

शाहजहाँ ने अपनी मरी हुई बीवी मुमताज की याद में ताजमहल बनवा दिया था, ये सभी को याद है। लेकिन, शाहजहाँ नहीं चाहता था कि कोई भी मुस्लिम लड़की किसी हिन्दू लड़के से प्यार करे और उनकी शादी हो – इस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता। आगे हम इसकी तह तक जाएँगे, लेकिन उससे पहले बता दें कि मुग़ल बादशाह का जन्म लाहौर में जनवरी 5, 1605 को हुआ था और युवाकाल तक उसका नाम खुर्रम हुआ करता था।

वो पाँचवाँ मुग़ल बादशाह था, जिसके नाम का अर्थ है – पूरी दुनिया का राजा। लिबरल गिरोह को वो बहुत प्यारा है और भारतीय इतिहासकारों ने उसकी छवि को चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, क्योंकि उसने ताजमहल बनवाया और उसके राज्यकाल में कई मुग़ल इमारतों का निर्माण हुआ। उसे भारत का संत वेलेंटाइन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। लेकिन, लोग ये नहीं बताते कि उसकी 7 पत्नियाँ थीं और हजारों उसकी हरम में थीं।

मुमताज महल निकाह के बाद अधिकतर गर्भवती ही रहीं और 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। जहाँगीर की पत्नी नूर जहाँ के साथ क्या किया गया, ये भी नहीं बताया जाता। जहाँगीर के राज में असली ताकत नूरजहाँ के हाथ में ही होती थी और सिक्कों तक पर उसके नाम हुआ करते थे। जहाँगीर की मौत के बाद नूरजहाँ की जान तो बख्श दी गई, लेकिन इस शर्त पर कि वो दरबार के मामलों में कभी दखल नहीं देगी।

नूरजहाँ ने अपनी बची हुई ज़िंदगी लाहौर के एक घर में अपनी बेटी के साथ काटी और अपने शौहर की मौत के बाद फिर कभी किसी भी ख़ुशी के मौके पर मुगलिया जश्नों में नहीं देखी गई। इसी तरह शाहजहाँ के राज में भी 14 बच्चे पैदा करने वाली मुमताज महल (जिसका असली नाम आरज़ूमंद बानू बेगम) के हाथ में असली सत्ता थी, जिस कारण उसकी चर्चा ज्यादा है। मात्र 38 साल उम्र में उसकी मौत हुई थी। उसके 14 बच्चों में से 7 ही जिंदा बचे थे।

अकबर ने बादशाह रहते हुए बाहर से थोड़ी उदार नीति अपनाई थी, ताकि वो खुद को हिन्दुओं का भी हितैषी दिखा सके क्योंकि विरोधों को दबाने का उसका एक अलग तरीका था। शाहजहाँ ने सत्ता में आते ही उन नीतियों को ख़त्म कर दिया और धार्मिक असहिष्णुता को अपना हथियार बनाया। उसने भारत को इस्लामी राज्य घोषित करते हुए शरीयत के हिसाब से शासन चलाना शुरू किया। उसने हिजरी संवत चलाया।

हिन्दुओं पर तीर्थयात्रा कर लगाए गए। मंदिरों ही नहीं, आगरा में गिरिजाघरों को भी तुड़वाया गया। हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच होने वाली शादी पर रोक लगा दी गई। गोहत्या खुलेआम होने लगी और उन पर लगी रोक हटा दी गई। निर्माणाधीन मंदिरों को तुड़वा दिया गया। नए मंदिर बनाने पर रोक लगा दी गई। बुढ़ापे में उसके साथ भी औरंगजेब ने क्रूरता की और उसे खाने के थाल में उसके बेटे का कटा सिर भेजा था।

अकबर के काल में जब थोड़ी छूट मिली तो ऐसे कई हिन्दुओं ने अपने पुराने पंथ को फिर से अपना लिया, जिन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया था। मुस्लिम महिलाओं की अगर हिन्दू परिवारों में शादी होती थी तो वो हिन्दू धर्म अपना सकती थी। शाहजहाँ एक सैन्य कमांडर भी था। इसी तरह के एक सैन्य मिशन के लिए वो कश्मीर गया था। वहाँ से लौटते वक़्त उसने भदौरि और भिम्बर में देखा कि वहाँ कई हिन्दू पुरुषों ने मुस्लिम महिलाओं से शादी कर रखी थी।

उसने पाया कि उनमें से कई महिलाओं ने शादी के बाद अपने पति के हिन्दू धर्म को अपना लिया था। अपनी पुस्तक ‘Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery‘ में M A खान लिखते हैं कि भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलम आजाद ने अकबर की इसीलिए आलोचना की थी, क्योंकि उसने ‘सहिष्णुता से शासन चलाया था जो भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम की आत्महत्या के समान था।

वो लिखते हैं कि आज़ाद ने कट्टर सूफी मौलाना शेख अहमद सरहिंदी का समर्थन किया था, क्योंकि उसने अकबर के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। उसने हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ाने की माँग लेकर विद्रोह किया था। असहिष्णु शाहजहाँ ने जिस कट्टरवाद के पौधे को सिंचित किया था, उसके बेटे औरंगजेब ने उसे ही और बड़ा किया। मक्का-मदीना का यात्रा करने वाले मुस्लिमों को विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं, जबकि हिन्दू पर्व-त्यौहारों को वो हतोत्साहित करता था।

बुंदेलखंड के राजपूत शासक जुझार सिंह ने उसकी इन्हीं नीतियों के कारण विद्रोह किया था। हालाँकि, शाहजहाँ को कभी विदेशी आक्रमण का सामना नहीं करना पड़ा, जिससे उसने एक असफल शासक होकर भी शांतिपूर्ण ढंग से राज चलाया और एक के बाद एक कई इमारतों का निर्माण करवाया। एक और बात जानने लायक है कि मुमताज महल उसकी सौतेली माँ नूरजहाँ के भाई आसफ खान की ही पुत्री थी।

शाहजहाँ ने ही इलाही संवत की जगह हिजरी संवत को चलाना शुरू किया। शाहजहाँ इतना कट्टर सुन्नी मुस्लिम तब था, जब उसकी माँ भी हिन्दू थी। हालाँकि, इतिहास में कहीं भी ‘जोधाबाई’ को लेकर कोई प्रसंग नहीं मिलता है, लेकिन इतना ज़रूर पाया जाता है कि शाहजहाँ और जहाँगीर, इन दोनों की माँएँ हिन्दू ही थीं। शाहजहाँ ने वंधेरा के राजा इंद्रमणि को कैद किया था और शर्त रखी थी कि मुस्लिम मजहब अपनाने पर ही वो उसे छोड़ेगा।

जिस तरह शाहजहाँ ने अपने भाई खुसरो को मरवाया था, उसी तरह उसके बेटे औरंगजेब ने अपने भाई द्वारा शिकोह की हत्या करवाई। शाहजहाँ भी तमाम बगावतों के बाद ही बादशाह बना था। उसके ही ससुर आसफ खान की सहायता से उसने शहरयार की हत्या करवाई और मुग़ल वंश में जो भी उसके खिलाफ थे, उन्हें बेरहम मौत दी। कई बेगमों ने आत्महत्या कर ली शहरयार की तो आँखें तक निकाल ली गई थीं। वो नूरजहाँ का दामाद था और जहाँगीर का बेटा था। इस तरह से वो नूरजहाँ का दामाद और सौतेला बेटा – दोनों था।

इस तरह से हम देखें तो ताजमहल की आड़ में ऐसी काफी सारी बातें हैं, जिन्हें न सिर्फ आज के लिबरल-सेक्युलर-कट्टर गिरोह द्वारा छिपा ली जाती हैं, बल्कि इन पर इतिहासकारों ने भी भरपूर पर्दा डाला। अपने ससुर की मदद से अपनी सौतेली माँ के दामाद की आँखें फोड़वाने वाला, अपनी सौतेली माँ को राजधानी से बदर करने वाला और अपनी बीवी को 14 बार प्रेग्नेंट करने वाला क्रूर इस्लामी शासक जब ‘प्यार का मसीहा’ बना दिया जाए, तो समझिए कुछ तो गलत है।

ताजमहल में लहराया भगवा, फिर से | Ajeet Bharti explains saffron flags inside Taj Mahal

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने लिखा, “एक बार फिर भगवा गुंडों ने मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत (ताजमहल) में तोड़फोड़ की।” प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ के जुबैर ने तो CISF पर ही सवाल उठाते हुए बकैती की।

पूरा वीडियो यहाँ देखें

‘बाल बढ़ने की गारंटी, 6 सप्ताह के भीतर 3 गुना फायदा’ – हीरो ने किया था क्रीम का प्रचार, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

केरल के उपभोक्ता निवारण आयोग ने मलयालम अभिनेता अनूप मेनन और आयुर्वेद उत्पाद कंपनी ‘धात्री’ पर ‘फर्ज़ी’ वादे करने के लिए जुर्माने के रूप में एक उपभोक्ता को ₹10,000-₹10,000 का भुगतान करने को कहा है। 2012 में एक उपभोक्ता ने यह आरोप लगाते हुए ‘धात्री’ की शिकायत की थी कि कंपनी की हेयर क्रीम से उसे कोई फायदा नहीं हुआ।

डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर रिड्रेसल फोरम, त्रिशूर ने ‘धात्री हेयर क्रीम’ के निर्माताओं और एक विज्ञापन में उत्पाद का समर्थन करने वाले सेलिब्रिटी फिल्म अभिनेता अनूप मेनन को “झूठा वादा” करने के लिए एक उपभोक्ता को 10,000 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।

दरअसल फ्रांसिस वडक्कन द्वारा ए-वन मेडिकल, धात्री आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड और अनूप मेनन के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत पर यह आदेश पारित किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट एडी बेनी ने फोरम से कहा कि उन्होंने पहली बार जनवरी 2012 में विज्ञापन देखने के बाद 376 रुपए में क्रीम खरीदी थी, जिसमें अनूप मेनन ने वादा किया था कि 6 सप्ताह के लिए उत्पाद का उपयोग करने से बालों में वृद्धि होगी। 

हालाँकि उन्होंने क्रीम का इस्तेमाल किया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने शिकायत की कि उत्पाद खरीदने के लिए उनके दोस्तों और परिवार द्वारा उनका मजाक उड़ाया गया। अपमानित महसूस करते हुए, उन्होंने 5 लाख रुपए मुआवजे के लिए फोरम से संपर्क किया।

अनूप मेनन ने फोरम में अपने बयान में स्वीकार किया कि उन्होंने कभी भी उत्पाद का इस्तेमाल नहीं किया है और उन्होंने केवल अपनी माँ द्वारा तैयार हेयर ऑयल का इस्तेमाल किया है। 

उन्होंने कहा, “मैंने कभी भी उल्लेखित उत्पाद का उपयोग नहीं किया है। मैं केवल बालों के तेल का उपयोग करता हूँ, जो मेरी माँ मेरे लिए बनाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि विज्ञापन के दौरान क्या बताया गया क्योंकि यह निर्माताओं की ‘कहानी’ थी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि यह उत्पाद बालों की देखभाल के लिए है न कि बालों के विकास के लिए।

फोरम ने कहा, “इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ब्रांड एंबेसडर विज्ञापन में उत्पाद का उपयोग किए बिना ही दिखाई दिए। अदालत द्वारा यह भी देखा गया कि निर्माता उस उत्पाद में परिणाम नहीं दे सका, जैसा कि उसके द्वारा दावा किया गया था।”

फोरम ने विज्ञापन में अनूप मेनन द्वारा कहे गए बयानों को भी संदर्भित किया, जिसमें कहा गया था, “बालों में वृद्धि की गारंटी है। सिर्फ 6 सप्ताह के भीतर, परिणाम तीन गुना हो जाएगा।” न्यायालय ने यह भी पाया कि उत्पाद के साथ-साथ विवरणिका में बताई गई सावधानियाँ इस तरह से छपी हुई हैं कि मैग्नीफ़ाइंग ग्लास की सहायता से देखने पर भी यह दिखाई नहीं देती है।

फोरम ने कहा, “विज्ञापन को एक सूचित उपभोक्ता संस्कृति के विकास में मदद करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता फर्जी उत्पादों को अस्वीकार करके सही विकल्प बना सके।”

सभी साक्ष्यों को देखते हुए, डिस्ट्रिक्ट फोरम के अध्यक्ष सी टी साबू और सदस्यों डॉ के राधाकृष्णन नायर और श्रीजा एस ने अनूप मेनन को उत्पाद की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के बाद ही भविष्य के विज्ञापन में शामिल होने का निर्देश दिया। उन्होंने अभिनेता और कंपनी, प्रत्येक को 10000 रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने ‘ए वन मेडिकल’ (मेडिकल स्टोर), जहाँ से उत्पाद खरीदा गया था, को 3,000 रुपए का जुर्माना देने का निर्देश दिया।

ओडिशा: मंदिर की मूर्तियाँ तोड़ीं, छत्र भी चोरी.. मिशनरी गतिविधियों के लिए जाना जाता है आंध्र की सीमा से लगा ये गाँव

शनिवार (जनवरी 02, 2021) देर रात ओडिशा के एक मंदिर में देवी सरस्वती, लक्ष्मी की मूर्तियों को कथित तौर पर कुछ अज्ञात उपद्रवियों द्वारा तोड़ दिया गया। यह घटना ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे रायगढ़ जिला स्थित हुकुमटोला गाँव की है। दावा किया जा रहा है कि यह इलाका मिशनरी गतिविधियों के लिए मशहूर है।

खबरों के मुताबिक, भगवान रामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी को अगले दिन, रविवार सुबह इस मंदिर के दरवाजे खुले मिले। उन्होंने जब मंदिर में प्रवेश किया उन्होंने मंदिर के वास्तुशिल्प और मूर्तियों के टुकड़े मंदिर परिसर में पाए। इसके बाद पुजारी ने मंदिर प्रबंधन समिति को इस घटना की जानकारी दी। मंदिर प्रबंधन समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि मूर्तियाँ तोड़ने वाले उपद्रवियों ने भगवान जगन्नाथ के गहने भी चोरी कर लिए।

इसके बाद, मंदिर प्रबंधन समिति ने इस संबंध में मुनिगुड़ा पुलिस स्टेशन में इस सम्बन्ध में एक लिखित शिकायत दर्ज की। स्थानीय निवासियों और मंदिर प्रबंधन ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि कुछ शरारती तत्वों ने रामेश्वर शैवपीठ के देवता की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। मंदिर में देवी सरस्वती, महालक्ष्मी और वृंदावती की भी मूर्तियाँ हैं उन्हें भी खंडित कर दिया गया है।

कुछ मूर्तियों को तोड़ दिया गया, किसी को कमर के हिस्से से ही क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मंदिर से भगवान जगन्नाथ का एक छत्र भी चोरी किया गया। जिसके बाद मंदिर प्रबंधन
समिति के सचिव पुरुषोत्तम जेना ने इसकी शिकायत मुनिगुड़ा थाने में की। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रविवार शाम तक भी कथित तौर पर मंदिर परिसर का निरीक्षण नहीं किया गया था।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा सकता है। कुछ ट्विटर यूजर्स ने इसमें मिशनरी लोगों का हाथ होने की सम्भावना भी जताई हैं।

हिन्दू नाम के सहारे मुस्लिम युवक ने की मस्जिद में ‘फर्जी निकाह’: एक्ट्रेस प्रीति तलरेजा ने लगाया मारपीट का आरोप, देखें Video

महाराष्ट्र में प्रीति तलरेजा नाम की कथित एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ हो रही घरेलू हिंसा के मामले को उजागर किया है। एक्स्ट्रेस ने अपने (मुस्लिम) पति पर उससे मारपीट करने के अलावा, धर्मांतरण, शारीरिक और मानसिक शोषण आदि का आरोप लगाया है। 

महिला का कहना है कि उसके द्वारा कई सबूत पेश किए जाने के बाद भी उसके पति ‘अभिजीत पेटकर’ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया जा रहा और उसे एनसी देकर कहा जा रहा है कि ये पारिवारिक मामला है।

सोशल मीडिया पर प्रीति तलरेजा ने 29 दिसंबर 2020 से इस संबंध में अपने पोस्ट डालने शुरू किए थे। पहले उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने खड़कपड़ा थाने (khadakpada police station) में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन वहाँ से उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया। उनकी एफआईआर तक नहीं लिखी गई।

इसके बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करके कहा कि उन्होंने अपने पति के ख़िलाफ़ शिकायत लिखवाई है जिसने प्रेम के नाम पर उनसे धोखा किया, उनका इस्तेमाल किया और एक फर्जी मुस्लिम निकाह करके ये यकीन दिलाया कि उनकी आधिकारिक तौर पर शादी हो गई है। एक्ट्रेस ने बताया कि एक ओर उनकी शिकायत को थाने में दर्ज तक नहीं होने दे रहे। वहीं दूसरी ओर मस्जिद में निकाह होने के कारण उन्हें सर्टिफिकेट देने से मना किया जा रहा है।

महिला ने बताया कि उनका पति मुस्लिम है और उसके पास धर्म परिवर्तन के कोई सबूत भी नहीं है, फिर भी वो अपने लीगल डॉक्यूमेंट पर अपना नाम अभिजीत पेटकर इस्तेमाल करता है। प्रीति ने अपने ट्विटर पर उनके साथ हुई मारपीट की वीडियो भी शेयर की है। उनका दावा है कि सबूत दिखाने के बावजूद कल्याण खड़पड़ा थाने में शिकायत दर्ज नहीं हो रही।

वह तंग होकर 4 जनवरी को कहती हैं कि भारत में महिला यदि आत्महत्या कर ले तो मासूम को भी सजा दे दी जाती है लेकिन यदि कोई जिंदा महिला संघर्ष करे तो उसका सिर्फ़ शोषण होता है, यही सच्चाई है। महिला के मुताबिक, उसका पति उसकी पहली बेटी को पसंद नहीं करता और नहीं चाहता कि वो उन लोगों के साथ रहे। 

वह त्रस्त होकर अपने अकॉउंट पर लिखती हैं, “…मैं हिन्दू जन्मी हूँ और हिंदू ही मरूँगी। मेरी अपील है अपनी बेटी को अकेला न छोड़ें। मेरा परिवार मेरे साथ है इसलिए हिम्मत करके मैं यहाँ तक पहुँची हूँ। लोगों को जो कहना है कहने दो। लेकिन इसे एक अपनी बेटी, बहन, बीवी और अन्य महिलाओं के लिए अच्छे उदाहरण की तरह लो।”

बता दें कि प्रीति तलरेजा ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड की है। इसके डिस्क्रिप्शन में उन्होंने आप बीती के रूप में एक नोट लिखा है। वह लिखती हैं:

मैंने इस आदमी से शादी की क्योंकि इसने मुझे अपना मासूम चेहरा दिखाया कि इसे इसकी पुरानी पत्नी ने बहुत प्रताड़ित किया है और इसके माता-पिता भी नहीं हैं। इस बीच मैं इसकी तरफ आकर्षित हुई क्योंकि मेरे पति से मेरी कुछ लड़ाइयाँ हो रही थीं। इसने मुझे बेहतर जीवन का वादा किया और मेरे पति को तालाक देने के लिए मुझे मना लिया। इसने मुझ पर मुस्लिम कानून के हिसाब से शादी का दबाव बनाया जो वास्तविकता में फर्जी शादी थी, जिसे इसके दोस्तों ने ही अरेंज किया था। ये मुझे सोशल मीडिया यूज करने पर गाली गलौच करता और मेरी बड़ी बेटी के साथ रहने पर भी गुस्सा होता। मेरे घरवालों और मैंने कई बार इसे इसकी छात्राओं के साथ डेट करते देखा है। लेकिन पूछने पर कहता कि वो 4 बीवियों से ज्यादा रख सकता है। इसकी पुलिस विभाग में और कुछ गुंडों से जान पहचान है, ये हमेशा अपनी और मेरी तस्वीरें शेयर करने की धमकी देता और मुझे व मेरे परिवार वालों को नुकसान पहुँचाने की धमकी देता। इसने मुझे राक्षस की तरह पीटा। मेरी बेटी को लात मारी। यह हड्डियाँ तोड़ना अच्छे से जानता है, उसने मेरी माँ को भी विश्वास और प्यार के बदले मारा। मैंने इस घटिया आदमी के लिए सबकुछ छोड़ दिया और बदले में मुझे 3 साल से सिर्फ़ बेवकूफ बनाया गया। कभी जाति धर्म के नाम पर कभी भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करके। मैं न्याय के लिए गुहार लगा रही हूँ। लेकिन भारतीय कानून बहुत सुस्त है कि वो एक जिंदा इंसान को न्याय दिलवा सके। लेकिन यहाँ यदि कोई व्यक्ति सुसाइड करले तो किसी मासूम को भी सूली पर चढ़ा दिया जाएगा।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर अभिजीत पेटकर नाम के इस युवक की कई फोटोज यूजर शेयर कर रहे हैं। इनमें से एक मे यह एक उलेमा के साथ खड़ा है। वहीं ज्यादातर पोस्ट में ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ भी लिखता है।

पाकिस्तान से हिंदू लड़कियों के रेप-धर्मांतरण की खबरें देने वाले कार्यकर्ता पर अल्लाहू अकबर चिल्लाते हुए चाकू से हमला

जाने-माने ट्विटर यूजर और पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन पर चाकू से हमला किया गया। खुद ऑस्टिन ने मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मुझ पर एक जिहादी ने चाकू से हमला किया। मुझे नहीं पता कि वह कौन था, मगर वह शायद मध्य-पूर्व या कहीं और से था।” राहत ने कहा कि वह घायल हो गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ऑपइंडिया के साथ शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में राहत ऑस्टिन ने कहा, “अभी कुछ समय पहले मुझ पर एक इस्लामी जिहादी ने हमला किया था। उसके पास एक चाकू था और जिस तरह से उसने ‘अल्लाहू अकबर’ कहा था, मुझे लगता है कि वह मध्य-पूर्वी देश से है। ये लोग दुनिया में हर जगह ऐसी चीजें क्यों करते रहते हैं? हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ सरकार, और मुस्लिम बहुल देशों में धार्मिक उत्पीड़न, रंगभेद, नरसंहार और जातीय हिंसा के मामलों की रिपोर्टिंग कर रहा हूँ। (वे) इसे ‘जिहाद’ के तहत करते हैं। जब  70 साल पहले 1947 में पाकिस्तान बना था, तब हम 23% थे और अब हम केवल 3% बचे हैं।”

जिहादी हमले में जख्मी राहत ऑस्टिन ने कहा, “यह एक व्यवस्थित नरसंहार है।” मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि नियंत्रित मीडिया और सरकार की नीतियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि ऐसे मामले कभी किसी की नजर में न आए और अब ऐसे अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए भी उनके प्रयासों को रोकने की कोशिश की जा रही है। “ये पागल लोग हैं। मुझ पर हमला हुआ। अगर मैंने खुद को बचाया नहीं होता, तो वो मेरा भी सिर कलम कर देते, जैसा कि दूसरों के साथ करते हैं। ये पागल लोग हैं।”

राहत ऑस्टिन और पाकिस्तान में ‘समानता’ के लिए उनकी लड़ाई

राहत ऑस्टिन पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामलों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाश में लाने में सबसे आगे रहे हैं, जिसे पाकिस्तानी सरकार छुपाने का प्रयास करती है। मुस्लिम बहुल देश में बराबरी का दर्जा पाने के लिए संघर्ष करते हुए वह पाकिस्तानी समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं। इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ‘नया पाकिस्तान’ में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा पर किए गए दावों के बावजूद, मानवाधिकार कार्यकर्ता पर हमला उनके खोखले दावों की पोल खोलता है।

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने 01 जनवरी, 2021 को हिन्दू उत्पीड़न की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की। जिसमें उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब के बहु भाटी गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति ने जबरन रतन लाल की बेटी मिजा कुमारी का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और निक़ाह करने के लिए बलपूर्वक उसका इस्लाम में धर्मांतरण कर दिया गया।

एक्टिविस्ट ने पीड़िता के माता-पिता की एक वीडियो शेयर की, जिसमें उन्होंने लोगों से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा, “यदि हमारी बेटी हमें वापस नहीं मिलती है तो हम आत्महत्या कर लेंगे। हम गरीब हैं, हम दोषियों से नहीं लड़ सकते, पाकिस्तान में कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा है। जो हमारी वीडियो देख रहा है, हम उनसे मदद का अनुरोध करते हैं।”

AMU का बैंक खाता सीज: ₹14.83 करोड़ संपत्ति कर न चुकाने पर अलीगढ़ नगर निगम ने की कार्रवाई

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। 14 करोड़ रुपए से अधिक के प्रॉपर्टी टैक्स के भुगतान न करने पर अलीगढ़ नगर निगम ने यह कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर एक सप्ताह के भीतर बकाया भुगतान नहीं किया जाता है, तो एएमयू के खाते से पैसा नगर निगम को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि नहीं दी जाती है तो संपत्तियों को बाधित करने के बारे में भी विचार किया जाएगा।

मुख्य कराधान अधिकारी विनय कुमार राय ने बताया, “अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर अलीगढ़ नगर निगम के लगभग 14.83 करोड़ रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। यह बकाया राशि पिछले 8 से 10 सालों से लंबित है। इसको लेकर 2019 में भी खातों को सीज किया गया था। बकाया भुगतान के लिए विश्वविद्यालय को पर्याप्त समय और मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसलिए उन्‍हें विश्वविद्यालय के बैंक खाते को सीज करने का निर्णय लेना पड़ा।”

उन्‍होंने बताया कि बकाया भुगतान न करने के कारण उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धाराओं 507, 509 व 513 के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए अलीगढ़ नगर निगम द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संचालित खाता को तत्काल प्रभाव से सीज किया गया है।

राय ने बताया कि अगर एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि जमा नहीं की जाती तो एएमयू के खाते से पैसा नगर निगम को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। संपत्तियों को बाधित करने के बारे में भी सोचेंगे। उन्‍होंने बताया कि एएमयू ने शासन को भी कर मुक्त करने के लिए लिखा था, लेकिन वहाँ से कोई राहत नहीं मिली और वसूली के आदेश प्राप्त हुए। 

मुख्य कराधान अधिकारी विनय कुमार राय ने बताया कि इस मामले में कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय के अवर सचिव को पत्र लिखा गया था। पत्र में एएमयू की ओर से 10 अप्रैल 1990 में जारी शासनादेश का हवाला दिया गया। यह आदेश उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत प्रदेश सरकार ने जारी किया था। शासनादेश से जो कर मुक्ति दी गई थी, वह नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत थी। वहीं, एएमयू पर जो टैक्‍स लगाया गया है, वह उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की व्यवस्था के तहत है।

इस संबंध में एएमयू के जनसंपर्क विभाग के एमआईसी इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई का पक्ष अभी देखा नहीं है। पक्ष देखने के बाद विधिक राय लेकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

किसान आंदोलन के नाम पर मोबाइल टावर तोड़ने पर HC ने माँगा पंजाब सरकार से जवाब, रिलायंस ने दायर की थी याचिका

किसान आंदोलन के नाम पर पिछले दिनों रिलायंस जियो टावर (Reliance Jio Tower) पर हुए हमले की बाबत पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब माँगा है। रिलायंस ने इससे पहले कोर्ट में अपनी याचिका दायर करते हुए हस्तक्षेप की माँग की थी। साथ ही कहा था कि तोड़फोड़ की इन गैर कानूनी घटनाओं को पूरी तरह से रोका जाए।

इस मामले की सुनवाई पर सरकार ने कहा कि उन्होंने एक हजार से ज्यादा पेट्रोलिंग पार्टी व सभी जिलों में नोडल ऑफिसर नियुक्त किए हैंं, ताकि रिलायंस की संपत्ति को किसी तरह का कोई नुकसान न हो। पंजाब सरकार का कहना है कि वह इस मामले में गंभीर हैं और किसी भी तरह की संपत्ति को नुकसान न हो, इसका वह पूरा ध्यान रखेंगे व आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी होगी। जानकारी के अनुसार, अदालत ने गृह सचिव, केंद्रीय गृह सचिव, पंजाब के गृह सचिव, डीजीपी व दूरसंचार विभाग को नोटिस जारी किया है। अब इन्हें 8 फरवरी तक अपना जवाब देना होगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राज्य में किसान आंदोलन के नाम पर कई उग्र घटनाएँ दर्ज की गईं। कहीं कुल्हाड़ी से टावरों को काटते हुए प्रदर्शनकारी नजर आए तो कहीं जियो जेनरेटर उखाड़ कर उसे दान देते हुए किसानों ने अपनी शेखी बघारी। ऐसे में लगातार हमले देख कर रिलायंस ने हाईकोर्ट के सामने मदद की गुहार लगाई और कहा कि देश में अभी जिन तीन कृषि कानूनों को लेकर बहस चल रही है, उनके साथ उसका (कंपनी का) कोई लेना-देना नहीं है।

कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि उसे इन कानूनों से किसी तरह का कोई फायदा नहीं हो रहा है। कंपनी ने कहा कि वह कॉरपोरेट या अनुबंध कृषि नहीं करती है। उसने कॉरपोरेट अथवा अनुबंध पर कृषि के लिए पंजाब या हरियाणा या देश के किसी भी हिस्से में प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर कृषि भूमि की खरीद नहीं की है। इसके अलावा रिलायंस ने भारती एयरटेल के ऊपर किसानों को उकसाने के आरोप लगाए। उनकी ओर कहा गया कि जियो के टावर तोड़े जाने की वजह से हजारों कर्मचारियों के जीवन पर असर पड़ रहा है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचने से कम्युनिकेशन में दिक्कतें आ रही हैं।

‘महिलाओं का भौंहें सँवारना इस्लाम में हराम’: मौलवी की धमकी पर बिकनी की तस्वीर भेज कर लिखा- ‘मेरे ? को किस कर लो’

ब्रिटेन में सायरा खान एक जाना-पहचाना नाम है, क्योंकि उन्होंने ITV पर आने वाले लंचटाइम टॉक शो ‘Loose Women’ का लम्बे समय तक संचालन किया है, जिसमें मनोरंजन व अन्य क्षेत्रों की महिलाएँ महिलाओं के परिप्रेक्ष्य में चर्चा करती हैं। अब सायरा खान ने शो को अलविदा कह दिया है, उन्होंने अपने जीवन के कुछ बुरे अनुभवों को लेकर बात की है। 50 साल की मीडिया प्रेजेंटर अब अन्य प्रोजेक्ट्स पर फोकस करेंगी। कभी उन्होंने इस्लाम में भौहें सँवारने को हराम बताने वाले एक मौलवी को सबक सिखाने के लिए बिकनी में तस्वीर भेज दी थी।

उन्होंने खुलासा किया है कि जब वो मात्र 13 साल की ही थीं, तभी उनके ही परिवार के एक सदस्य ने उनका यौन शोषण किया था। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने उनके बेडरूम में आकर उनका यौन शोषण किया। फिलहाल वो मर चुका है। उन्होंने कहा कि अगर किसी महिला को कोई व्यक्ति बिना अनुमति छूता है या कोई गलत कार्य करता है, तो ये किसी भी धर्म या संस्कृति में स्वीकार्य नहीं है – इस बारे में बात की जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि वो कट्टरपंथियों से इतनी डर गई थीं कि उनके पति ने उनसे चुप करने की ‘भीख माँगी’ थी और वो काफी डरे हुए थे। इसी तरह उन्होंने शो के एक एपिसोड में बताया था कि उन्होंने एक बिकनी तस्वीर अपलोड कर के एक मौलवी को महिलाओं के अधिकार के बारे में संदेश दिया था, जिसके बाद उन्हें जान से मार डालने की धमकियाँ मिलीं। उक्त मौलवी ने फतवा जारी किया था कि इस्लाम में महिलाओं का भौंहों को सँवारना हराम है।

उक्त मौलवी का कहना था कि भौंहों के साथ कुछ भी छेड़छाड़ करना इस्लाम में महिलाओं के लिए हराम है। इसके बाद सायरा खान ने बिकनी में अपनी तस्वीर भेजी, जिसमें वो पेट के बल लेटी हुई थीं। उन्होंने ‘Peach’ नामक फल की इमोजी भेजी और मौलवी को लिखा – “ऐ पिछड़े प्रागैतिहासिक डायनासोर, मेरे ? (Peach Emoji) को किस कर लो।” इसके बाद एक इंस्टाग्राम यूजर ने उन्हें धमकाया था कि अगर वो अपने जीवन का महत्व समझती हैं तो इस्लाम को इन सबसे दूर रखें।

उन्होंने ऑन एयर इस बात को कहा था कि हत्या की धमकियाँ उन्हें न तो मुस्लिम होने से रोक सकती हैं और न ही बिकनी पहनने से। उनके पति भी डर गए थे और उनसे दो बच्चों की खातिर ये सब बंद करने को कहा था लेकिन सायरा खान ने कहा कि वो बिकनी भी पहनेंगी और भौंहों को भी सँवारेंगी। उनका कहना है कि मजहब के नाम पर लोगों की हत्या गलत है। क्रिसमस से पहले उन्होंने आँसुओं के साथ ‘Loose Women’ शो को अलविदा कहा।

इसी तरह शनिवार (जनवरी 2, 2021) को पेटलिंग जाया शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद ‘मिस प्लस वर्ल्ड मलेशिया 2020 (MPWM 2020)’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कट्टरपंथी संगठनों और यहाँ तक कि मलेशिया की सरकार ने भी प्लस साइज महिलाओं के कार्यक्रम में आने को इस्लाम के खिलाफ बताया था। इस्लामी संगठनों ने इस कार्यक्रम को ‘भोगवादी’ करार दिया था, लेकिन कार्यक्रम तय समयानुसार हुआ।

JNU का वो काला दिन, जब वामपंथियों के डर से मिटाने पड़े थे स्वास्तिक और शुभ दीपावली के निशान

मैं कलम का सिपाही नहीं हूँ। इसलिए लेखन में सिद्धहस्त भी नहीं हूँ। लेकिन आज जो मैं लिख रहा हूँ, वो लिखने के अलावा मेरे पास कोई चारा भी नहीं बचा था। पिछले साल जनवरी की 5 तारीख को मैंने अपने भीतर कुछ टूटा हुआ महसूस किया। मुझे लगा कि मैं हार गया हूँ। मुझे लगा कि अब और मैं लड़ नहीं सकता। लेकिन एक जुनून था, जिसने मुझे उस हार को स्वीकारने नहीं दिया।

उस दिन मुझे नहीं पता था कि मुझे आगे क्या करना चाहिए। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं ये सब किसके साथ साझा करूँ, किस पर यकीन करूँ, किसको समझाऊँ, किससे सलाह लूँ और किससे मदद की गुहार लगाऊँ?

जब मुझे इनमें से किसी भी सवाल का जवाब ठीक से नहीं मिला तब मैंने सोचा कि अब लिखने के अलावा कोई चारा नहीं! मुझे नहीं पता कि कितने लोग इस लिखे हुए को पढ़ेंगे, या कितने लोग इसे पढ़ कर मेरी भावनाओं को समझ पाएँगे। पर मुझे इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

मैं अपने आप को अपने भीतर के डर से मुक्त करना चाहता हूँ। मैं असमर्थता के चंगुल से अब बाहर आ जाना चाहता हूँ। मैं जेएनयू की वादियों में बिना डरे दुबारा विचरण करना चाहता हूँ, कि लोग मेरा सामाजिक बहिष्कार न कर दें। और मेरी ये भावनाएँ न जाने कितने और जेएनयू वालों की भावनाएँ हैं, जिन्हें मैं इस लेख के माध्यम से शब्द देना चाहता हूँ।

उस दिन नए साल की पाँचवीं सुबह थी। उस दिन जो दंगे जेएनयू कैम्पस में हुए, उससे आप सब भली-भाँति परिचित हैं। जेएनयू के लोग भी भली भाँति परिचित हैं। जेएनयू का ‘कॉमन स्टूडेंट’ भी जानता है कि उस दिन जो हुआ, वो वामपंथी कुंठा का परिणाम और उनकी हिंसा की प्रवृत्ति की एक बानगी भर था।

पर आश्चर्य इस बात का है कि जेएनयू के एक बड़े वर्ग ने न सिर्फ उस घटना को स्वीकार कर लिया बल्कि हमारे खिलाफ नफरत फैलाने की जो साजिश रची गई, जो सोशल बॉयकॉट का ढोंग किया गया, उसमें भी शामिल हुए। तभी मेरे दिमाग में ये बात कौंधी कि जेएनयू को एक रंग में रंगने की जो साजिश एक लंबे समय से चलती आ रही है, उसका अपना प्रभाव दिखना तो लाजिमी है।

एक तरफ जेएनयू में भारत के हर कोने से विद्यार्थी आता है, हर भाषा, हर धर्म, हर वर्ग का विद्यार्थी जेएनयू में शिक्षा लेता है… एक तरह से देखें तो जेएनयू भारत का ही छोटा सा स्वरूप है। विविधता में एकता की खूबसूरती की जगह विविधता को समाप्त कर देने की कोशिश जब सफल होती दिखे तो दुख होता है।

मैं जब से जेएनयू में हूँ, तब से ही मुझे इस बात का एहसास है कि जेएनयू में एक ऐसा वर्ग है, जिसे ‘कॉमन स्टूडेंट्स’ कहा जाता है। जो राजनैतिक रूप से किसी एक पक्ष की ओर झुका हुआ नहीं है। जिसे गलत और सही में अंतर करना आता है। लेकिन 5 जनवरी की घटना के बाद ये भ्रम टूट सा गया और लगा जैसे जेएनयू में सच में बोलने की, सोचने की, सच कहने की, अपने अधिकारों के लिए लड़ने की, और समस्या से समाधान तक पहुँचने की कोशिश करने की कोई महता नहीं है।

यहाँ सिर्फ एक ही सत्ता है… वामपंथी तानाशाही सत्ता! जिस पर खतरा आते ही हिंसा का बर्बर रूप सामने आ जाता है। यह सब देख कर, सोच कर मुझे ऐसा लगने लगा जैसे हमारी ही गलती थी। ऐसा लगा जैसे एबीवीपी को गुंडा कहने वाले लोगों की बातें मान लेना ही अब एक चारा है। ऐसा लगा कि वामपंथ की ज़हरीली हवा को साफ करने की हमारी कोशिश ही गलत है।

जब कैम्पस में ये बात फैलाई गई कि एबीवीपी की प्लानिंग थी, ‘तुम लोग इसी लायक हो’, ‘और मिलेगा अभी प्रसाद’, जैसी बातें जब फैलाई जा रही थीं; और जब लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने कमरों की बालकनियों से छलाँग लगा रहे थे, आधे नँगे दौड़ रहे थे, खून से लथपथ थे, लेकिन फिर भी इस बात का सुकून था कि जान बच गई। तब ये सब देख कर मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि जेएनयू समुदाय मानसिक रूप से इतना बेबस नहीं हो सकता कि वामपंथ की इस साजिश को अपनी आँखों के सामने देख कर भी न देख सके। लेकिन ऐसा हुआ, और ऐसा होने के बाद जो वातावरण जेएनयू में बना, उसने मुझे भीतर से सहम जाने को मजबूर कर दिया।

यहाँ जेएनयू में जो कुछ भी हो रहा था, उसे पूरा देश मीडिया के माध्यम से देख रहा था। हमारे घरवालों ने भी देखा। माँ-बाप बोले, “बेटा छोड़ दो एबीवीपी, ज़िंदगी रही तो आगे बहुत कुछ कर पाओगे”, लेकिन उन्हें कहाँ पता है कि ये वामपंथी लोग खुद बस्तियाँ जला कर खुद मातम भी मना लेने वाले लोग हैं। इन्हें उस कॉमन स्टूडेंट को भी मारने में एक सेकंड की हिचक नहीं होती, जो इनके हर षड्यंत्र का साथी हो जाया करता है। इस बात का अंदाज़ा लगाना बेहद कठिन है कि 5 जनवरी की घटना ने कितने लोगो की ज़िंदगियों को बदल कर रख दिया है।

मैं खुद अपने आपको बहुत से मामलों में तब से अलग पाता हूँ। मैं कभी उन लोगों को इसके लिए माफ नहीं कर पाऊँगा, जो मेरी या मेरे जैसे कितने ही और विद्यार्थियों की ज़िंदगियों को बदलने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन साथ ही मैं कैम्पस के वामपंथी धड़े को यह भी याद दिलाना चाहता हूँ कि हम सब उस दिन बिखरे जरूर थे, लेकिन टूटे नहीं थे।

मैं अपने साथियों का आभार प्रकट करना चाहता हूँ, जिन्होंने मुझे आशा की एक किरण दी, कि हार नहीं मानना है, हिम्मत नहीं टूटने देना है, हम लोग वापस उठेंगे और फिर से मेहनत करेंगे। मैं अपने साथियों के इस जज़्बे को सलाम करता हूँ। मैं खुद पर इस नाते से गर्व करता हूँ कि एक ऐसे संगठन का हिस्सा हूँ, जिसने व्यक्ति से ऊपर उठ कर संगठन का भाव सिखाया है।

दंगे-फसाद के बाद हमें अस्पताल ले जाया गया। वहाँ से जब मैं वापस अपने हॉस्टल लौटा तो मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था। लोग मुझे देख कर मुँह मोड़ ले रहे थे। अजीब सा व्यवहार मुझे पहले तो समझ नहीं आया। तभी मुझे ध्यान आया कि ओह, मैं तो एबीवीपी से हूँ! मैं साफ-साफ सुन पा रहा था, लोग कह रहे थे – ‘ठीक से प्रसाद मिला नहीं लगता है!’

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या प्रतिक्रिया दूँ? मेरे मन में कई भाव उत्पन्न हो रहे थे जैसे गुस्सा, निराशा, हताशा, और मैं पूरी तरह हतोत्साहित हो गया था। बस मुझे ऐसा लगा जैसे मैं पूरी तरह से टूट चुका हूँ। ये 2020 की शुरुआत भर थी, हममे से कितनों ने आँसू बहा कर खुद को समझाया। आज मैं फिर से बुलंदी के साथ कहना चाहता हूँ कि ‘मैं एबीवीपी से हूँ, और मैं गुंडा नहीं हूँ’।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे एक दिन इस कैंपस से भागना पड़ेगा, जिसे मैंने खुशी-खुशी अपना माना था। हमारी फोटो लगा कर पर्चे बाँट कर हमें मारने का खुला न्यौता दिया। मैं यहाँ जो असहिष्णुता फैली हुई थीं, उसको देख रहा था और महसूस कर रहा था। लोग हमारे साथ चलने से डरते थे, हमारे कार्यकर्ता मेस में पर्चा बाँटने के लिए घुसने से डरते थे, भय के माहौल की पराकाष्ठा थी। मैं स्तब्ध रह गया, जब मेरे रूममेट ने कहा – “सॉरी यार रूम के बाहर का स्वास्तिक मिटाना पड़ा, शुभ दीपावली का पट्टा निकालना पड़ा… वरना ये लोग इस रूम में भी तोड़ कर घुस जाते।”

मुझे इस पर विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन ये सच्चाई थी। अब मैंने ठान लिया था कि तब तक दीवाली नहीं मनाऊँगा, जब तक दीवाली वाली रौनक वापस ना आ जाए। मैं एक ऐसी जगह रहता हूँ, जहाँ मैंने कभी सोचा नहीं था कि स्वास्तिक का चिन्ह और शुभ दीपावली की झालर देख कर लोग हमला कर सकते हैं।

मैं मेरे ईश्वर से माफी चाहता हूँ कि मैं कुछ नहीं कर सका, खुद को सुरक्षित रखने के लिए मुझे मेरे आराध्य का अनादर करना पड़ा। मैं एक ऐसी जगह पर था, जहाँ एक बड़ी संख्या में लोगों ने हमें सामाजिक रूप से बॉयकॉट कर दिया। लेकिन मुझे इस बॉयकॉट से कोई फर्क नही पड़ता, क्यूँकि अब मुझे पता चल गया कि ये लोग कभी मेरे साथ थे ही नहीं। और जो लोग मेरे साथ थे, आज भी मेरे साथ हैं।

मैं लोगों को आशाएँ खोते हुए देख रहा था, बोल रहे थे छोड़ ना, रहने दे ना भाई, बेकार में इन सब में पड़ रहा है, चुपचाप एक साल और निकाल ले और पढ़ कर निकल जा, अकेले कुछ नहीं कर पाएँगे इनका, ये लोग नहीं छोड़ेंगे नहीं तो। लेकिन मैं चैन की साँस ले सकता था क्यूँकि मैं जानता हूँ, जेएनयू के बाहर भी एक दुनिया है, मेरा पूरा जीवन बर्बाद नहीं हुआ है और कोई भी जेएनयू के बाहर मुझे गुंडे के रूप में नहीं देखेगा। कुछ समय बाद जब मैं यहाँ से चला जाऊँगा और मैं सुना जाऊँगा, मैं समझा जाऊँगा, और लोग मेरा सम्मान करेंगे।

जेएनयू के बाहर एक दुनिया है, जहाँ सच का सम्मान होता है, जहाँ लोग तथ्यों को समझने के बाद निर्णय लेते हैं, जहाँ कॉमन लोग सिर्फ कॉमन लोग होते हैं, जहाँ मुझे घुटन नहीं होगी, जहाँ मैं गर्व के साथ कह सकता हूँ कि मैं जेएनयू में एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में रहा और लोग तालियों से मेरी सराहना करेंगे। मैं चेन से साँस ले सकता हूँ क्यूँकि ये समय चला जाएगा और अच्छा समय लौट कर आएगा।