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‘योगी की मौत सुनिश्चित’ – बीवी को कुत्ते से कटवाने वाले AAP विधायक के बोल, जनता ने मुँह पर फेंकी स्याही

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सवाल उठाने के लिए रायबरेली पहुँचे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सोमनाथ भारती (Somnath Bharti) के मुँह पर कालिख (स्याही) फेंक दी गई। AAP ने स्वयं उनकी तस्वीर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से साझा की। पार्टी ने इस घटना के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ये भी बताया कि सोमनाथ भारती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

AAP ने अपने ट्वीट में यूपी के अंदर तानाशाही चरम पर बताते हुए योगी राज को ‘अपराधी बचाओ, विरोध दबाओ’ के समकक्ष कहा। ट्वीट में लिखा गया, “पूर्व मंत्री व विधायक सोमनाथ भारती पर रायबरेली में भाजपाइयों ने हमला कर दिया और सोमनाथ जी को ही पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।” आगे लिखा गया, “स्कूल, अस्पताल की बदहाली पर सवाल उठाने पर योगी सरकार ने AAP नेताओं को आतंकित करना शुरू कर दिया है।”

जानकारी के मुताबिक, रायबरेली में यूपी पुलिस से नोंकझोंक के दौरान AAP नेता सोमनाथ भारती के मुँह पर कहीं से एक युवक द्वारा स्याही फेंकी गई। कथित तौर पर यह युवक हिंदू युवा वाहिनी का है, जिसे उत्तर प्रदेश के अस्पतालों पर दिए गए भारती के विवादित बयान से आपत्ति थी।

इस घटना के बाद सोमनाथ भारती स्वयं युवक को पकड़ने के लिए दौड़ने लगे और ‘पकड़ो साले को’ कह कर उसके पीछे भागने लगे। पुलिस ने उन्हें संभालने की कोशिश की। मगर थोड़ी देर में माहौल बिगड़ गया और उनकी पुलिस से बहस हो गई।

बाद में पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर दोबारा अमेठी ले गई। कहा जा रहा है कि अमेठी में विधायक भारती पर एफआईआर दर्ज है, इसलिए उन्हें वहाँ ले जाया गया है।

मुख्यमंत्री योगी के लिए सोमनाथ भारती ने कहा- मौत सुनिश्चित है

इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में सोमनाथ भारती पुलिसकर्मी से कहते दिख रहे हैं, “ये सब करने से कुछ नहीं होगा अतुल, योगी की मौत सुनिश्चित है। उसको अरेस्ट करिए। और मेरी बात समझ लो। योगी से बोल दो ये सब करने से कुछ नहीं होगा। आप समझ लीजिए। यही सब करवा रहे हैं आप?”

सोमनाथ भारती ने पुलिस से की बदसलूकी, कहा-वर्दी उतरवा लूँगा

एक अन्य वीडियो में वो पुलिसकर्मी की वर्दी उतरवाने की बात कर रहे हैं। स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की इस वीडियो में वह कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

AAP नेता का विवादित बयान- अस्पताल में होते हैं कुत्ते के बच्चे पैदा

गौरतलब है कि रविवार को रायबरेली पहुँचने से पहले AAP विधायक सोमनाथ भारती शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर अमेठी पहुँचे थे। इस दौरान योगी सरकार पर निशाना साधने के लिए उन्‍होंने विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, “हम उत्तर प्रदेश में आए हैं। हम यहाँ के स्कूलों को देख रहे हैं। यहाँ के अस्पताल को देख रहे हैं। ऐसी बदतर हालत में हैं कि अस्पतालों में बच्चे तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन कुत्तों के बच्चे पैदा हो रहे हैं।”

भारती के इस बयान के बाद कई जगह उनका विरोध हुआ और कई लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। हालाँकि ये बात अलग है कि ‘कुते’ शब्द से उनका संबंध पुराना है। साल 2015 में सोमनाथ भारती की पत्नी ने भारती पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने कुत्ते डॉन से उन्हें कटवाया।

अपनी शिकायत में लिपिका (सोमनाथ भारती की पत्नी) ने कहा था, “भारती ने कुत्ते से मुझे कटवाया। जब कुत्ते ने मुझ पर हमला किया, तब सोमनाथ भारती वहीं खड़े रहे और देखते रहे। कुत्ते ने मुझे पेट में और कई अन्य हिस्सों पर काटा। भारती ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और मुझे तत्काल कोई प्राथमिक चिकित्सा तक मुहैया नहीं करवाई।”

‘या तो केंद्र कृषि कानूनों पर रोक लगाए, या हम रोक देंगे’: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम किसी को प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकते

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि अगर उसने कृषि कानूनों पर रोक नहीं लगाई, तो उसे खुद ये काम करना होगा। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। इन याचिकाओं पर CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों से वह निराश है।

शीर्ष अदालत ने सरकार से पूछा कि बातचीत की आखिर कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई कि पूरे के पूरे राज्य बगावत पर उतर गए हैं? जब अटॉर्नी जनरल ने पढ़ कर सुनाया कि इन प्रक्रियाओं को पूर्ववर्ती सरकारों ने ही शुरू किया था तो CJI ने कहा कि इससे कुछ साबित नहीं होता। CJI ने कहा कि वे एक सर्वमान्य निदान की तरफ देख रहे हैं। अटॉर्नी जनरल ने उन्हें बताया कि किसान संगठन जिद पर अड़े हैं कि या तो तीनों कृषि कानूनों को ख़त्म किया जाए, या आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि वो इन कृषि कानूनों पर रोक क्यों नहीं लगा रहे? उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जिम्मेदारी दिखाते हुए इसे रोकने का आश्वासन देती है तो सुप्रीम कोर्ट एक समिति बना कर इसे देखने को कहेगा। तब तक इसे रोक कर रखा जाए। उन्होंने पूछा कि आखिर इसे क्यों जारी रखा जा रहा है? उन्होंने बताया कि अब तक एक भी ऐसी अर्जी नहीं आई है, जिसमें कहा गया हो कि ये कृषि कानून ठीक है।

CJI बोबडे ने कहा कि अगर कुछ किसान संगठन इसे सही मान रहे हैं तो उन्हें जाँच समिति के समक्ष ये बातें कहने दीजिए, लेकिन केंद्र सरकार बताए कि वो इन कृषि कानूनों पर रोक लगाएगी या ये काम सुप्रीम कोर्ट करे? उन्होंने कहा कि इसे निलंबन की अवस्था में डालिए। उन्होंने कहा कि वो इस पक्ष में नहीं है कि इस कानून को रोका ही जाए, वो बस ये कह रहे हैं कि लागू न किया जाए। CJI ने बार-बार दोहराया कि वो इन कानूनों के कार्यान्वयन को रोक देंगे।

उन्होंने आशंका जताई कि कुछ ऐसी घटनाएँ हो सकती हैं जिससे शांति भंग हो, भले ही ये जान-बूझकर किया गया हो या फिर गैर-इरादतन। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसी दिशा-निर्देशों को नहीं मान रहे हैं, ऐसे में किसी भी नुकसान का भागी सुप्रीम कोर्ट नहीं बनेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारी भी आंदोलन रोक कर समिति के पास जाएँ, पर CJI ने कहा कि कोर्ट किसी को प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकता।

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को याद दिलाया कि जब तक किसी कानून से संविधान के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता, वो उस पर रोक नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि एक भी याचिका इस मामले को नहीं छूती है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि दक्षिण भारत में एक भी किसान संगठन ने प्रदर्शन नहीं किया। हरियाणा में हुई हिंसा की भी उन्होंने चर्चा की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे कानून तोड़ने का कभी समर्थन नहीं कर सकते।

बता दें कि कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध लगातार दूसरे महीने भी जारी है, जिसमें ज़्यादातर किसान संगठन पंजाब के हैं। जहाँ एक तरफ किसान अपनी माँग पर अड़े हुए हैं कि उन्हें किसी भी तरह का संशोधन स्वीकार नहीं है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने भी किसान संगठनों के ब्लैकमेलिंग पर समर्पण करने से साफ़ मना कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कृषि सुधार क़ानून वापस नहीं लिए जा सकते हैं, बल्कि बेहतर यही होगा कि अब इस मुद्दे पर देश की सबसे बड़ी अदालत फैसला ले।

MSP से ज्यादा कीमत पर धान बेच रहे किसान: कर्नाटक में रिलायंस की डील, हर क्विंटल पर 82 रुपए का फायदा

एक तरफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है तो दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी रिलायंस ने कर्नाटक में किसानों के साथ एक बड़ा समझौता किया है। ये डील एपीएमसी अधिनियम में संशोधन के बाद पहली कॉर्पोरेट डील है। सबसे अहम बात ये है कि इसमें किसानों को फसल की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक मिली है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कर्नाटक के रायचूर जिले स्थित सिंधनौर तालुक के किसानों के साथ रिलायंस रिटेल लिमिटेड ने एक हज़ार क्विंटल मंसूरी धान की खरीद का सौदा किया है। कंपनी ने इस सौदे की शुरुआत में सोना मंसूरी धान के लिए 1950 रुपए की पेशकश की थी। जो कि सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (1868) से 82 रुपए ज़्यादा है। 

बता दें कि रिलायंस रिटेल लिमिटेड के पंजीकृत एजेंट्स ने स्वास्थ्य फार्मर्स प्रोड्युसिंग कंपनी (एसएफपीसी) के साथ समझौता किया था। इसके पहले तक यह कंपनी सिर्फ तेल का व्यापार करती थी। अब इस कंपनी ने धान की खरीद और बिक्री भी शुरू की है। धान की खेती करने वाले लगभग 1100 किसान इस कंपनी से जुड़े हुए हैं।

एसएफपीसी और किसानों के बीच हुए समझौते में प्रति 100 रुपए के लेन देन पर एसएफपीसी को 1.5 फ़ीसदी कमीशन मिलेगा। इसके अलावा किसानों को फसल की पैकिंग के लिए बोरे के साथ ही सिंधनौर स्थित वेयरहाउस तक ट्रांसपोर्ट का खर्चा उठाना होगा। 

इस पर एसएफपीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मल्लिकार्जुन वल्कालदिन्नी का कहना है कि फ़िलहाल थर्ड पार्टी वेयरहाउस में रखे गए धान की गुणवत्ता की जाँच करेगी। उनके मुताबिक़, “गुणवत्ता की पुष्टि होने पर रिलायंस के एजेंट फसल उपलब्ध कराएँगे। अभी वेयरहाउस में लगभग 500 क्विंटल धान स्टोर किया गया है, खरीद के बाद रिलायंस ऑनलाइन माध्यम से एसएफपीसी को भुगतान करेगा। एसएफपीसी वह रुपए सीधे किसानों के खाते में जमा करेगा। इतना ही नहीं धान की फसल ले जारी गाड़ियों को जीपीएस से ट्रैक भी किया जाएगा।”  

इस समझौते से हर कोई खुश नहीं है। कर्नाटक राज्य रैथा संघ के अध्यक्ष चमारासा मालिपाटिल ने कहा कि कॉर्पोरेट कंपनी शुरुआत में तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक दाम का लालच देंगी ही। इससे एमएसपी की मंडियों का नुकसान होगा और फिर किसानों का उत्पीड़न किया जाएगा। इस तरह के समझौतों से बच कर रहना होगा।            

एक को पाकिस्तान की महिला एजेंट नंगी होकर करती थी कॉल, दूसरा पत्नी से रहता था अलग: ISI के हनी ट्रैप की डिटेल

भारत-पाकिस्तान सीमा के सटे राजस्थान के जैसलमेर के 42 वर्षीय सत्यनारायण पालीवाल को CID के स्पेशल ब्रांच ने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में रविवार (जनवरी 10, 2021) को गिरफ्तार किया। उसे 3 दिन पहले पोखरण फायरिंग रेंज से हिरासत में लिया गया था। 2 दिन तक चली पूछताछ में कई खुलासे हुए और उस पर लगे जासूसी के आरोप भी सही पाए गए। ISI की महिला एजेंट न्यूड होकर उसे वीडियो कॉल करती थी और सूचनाएँ उगलवाती थी।

पोखरण में देश का सबसे बड़ा फायरिंग रेंज है। उसके नजदीक ही लाठी नाम का गाँव है, जहाँ सत्यनारायण रहता था। उसके परिवार की एक महिला सरपंच है, इसीलिए वो भी गाँव में नेतागिरी करता था। कुछ वर्षों पहले ISI की महिला एजेंट ने उससे संपर्क किया था। उसने खुद को भारतीय बताते हुए सत्यनारायण से दोस्ती की। हनी ट्रैप में फँसाने के लिए वीडियो कॉल भी शुरू कर दिया। जैसलमेर की सामरिक जानकारियाँ जुटाने के लिए उसे लालच दिया गया था।

साथ ही वो पोखरण में सेना की गतिविधियों की जानकारी भी दिया करता था। जब उसके मोबाइल फोन को पुलिस ने जब्त कर जाँच की तो उसमें ISI के महिला एजेंट की कई न्यूड तस्वीरें मिलीं, जिसके स्क्रीनशॉट्स लेकर उसने सेव कर रखी थी। एडीजी इंटेलिजेंस उमेश मिश्रा ने बताया कि उसके खिलाफ जयपुर के स्पेशल पुलिस स्टेशन पर शासकीय गुप्त बात अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसकी पुष्टि हुई है कि पाकिस्तान की महिला ISI एजेंट जासूसी के एवज में उसे न्यूड होकर वीडियो कॉल करती थी।

करीब पिछले एक महीने से इंटेलिजेंस की टीम उस पर नजर रखे हुए थी। सेन्ट्रल और लोकल ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी उससे पूछताछ की। पोखरण में नियमित रूप से हथियारों और सैन्य साजो-सामान का ट्रायल चलता रहता है।

इसी तरह से मेरठ के सौरभ शर्मा को भी जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। रिश्ते ठीक नहीं होने के कारण वह अपनी पत्नी से अलग रहता था। गुजरात के हैंडलर ने कई बार उसकी और उसकी पत्नी के बैंक खातों में रुपए डाले थे।

अब पुलिस का सरदर्द ये है कि उसकी पत्नी नेहा सिंह अलग रहती थी, फिर भी उसके अकाउंट में रुपए क्यों डाले जाते थे और उसकी क्या भूमिका थी। नेहा की दूसरी शादी की सूचना मिली है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बैंक खातों की जाँच चल रही है। गोधरा का हैंडलर अनस भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब पुलिस जाँच कर रही है कि उत्तर प्रदेश में उसके कौन-कौन साथी हैं। स्थनीय एजेंसियाँ भी जाँच में जुटी हैं।

सौरभ ने एटीएस के सामने स्वीकार किया है कि वह पैसों के लालच में सेना की गोपनीय सूचनाएँ समय-समय पर व्हाट्सप्प के माध्यम से पाकिस्तान की एक महिला खुफिया अधिकारी को भेजता था। सौरभ शर्मा की 2014 में फेसबुक के माध्यम से एक लड़की से दोस्ती हुई थी। लड़की से उसकी काफी दिनों तक बातचीत होती रही। लड़की ने खुद को सेना की रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार बताया था। सौरभ पाकिस्तान का जासूस बनकर काम करने लगा था।

परिवार के गुजर-बसर के लिए खोल दीजिए सीज किए गए बैंक खाते: दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन की याचिका

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में नया खुलासा हुआ है। इन दंगों के आरोपित आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अपने सीज़ बैंक खातों को खोलने के लिए याचिका दायर की है। न्यायालय 12 जनवरी 2021 को इस याचिका पर सुनवाई करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कड़कड़डूमा के मेट्रोपोलेटिन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने इस याचिका के संबंध में जाँच अधिकारियों और पुलिस से जवाब माँगा है। 

उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन द्वारा दायर की गई याचिका पर 5 जनवरी 2021 को सुनवाई होनी थी लेकिन मामले का दूसरा पक्ष उपस्थित नहीं हुआ था। नतीजतन इस याचिका पर सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2021 की तारीख तय की गई है। इस याचिका में दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन का पक्ष रखते हुए कहा गया है कि पुलिस ने उसके बैंक खातों को सील कर दिया है, जिसमें कथित तौर पर उसकी पूरी कमाई मौजूद है। 

वह पिछले काफी समय से जेल में बंद है, जिसकी वजह से उसके पूरे परिवार का गुज़ारा काफी मुश्किल हो गया है। इसके आधार पर ताहिर हुसैन की तरफ से निवेदन किया गया है कि उसके सीज़ बैंक खातों को फिर से खोल दिया जाए, ताकि उसके परिवार का गुजर-बसर हो सके। याचिका में मुख्य रूप से यही कहा गया है कि अगर ताहिर हुसैन के बंद खाते खोल दिए जाते हैं तो उसके परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।   

इसके अलावा ताहिर हुसैन ने पुलिस द्वारा जब्त किया गया फोन भी वापस माँगा है। दंगों के आरोपित ताहिर की तरफ से माँग की गई है कि फोन उसके परिवार को सौंप दिया जाए। ताहिर के वकील ने दायर की गई याचिका में कहा है कि पुलिस ने उनके मुवक्किल का फोन जब्त किया है। पुलिस ने संभवतः जाँच प्रक्रिया पूरी करके ज़रूरी जानकारी ले ली होगी, इसलिए अब यह फोन वापस कर दिया जाए।

दरअसल जाँच एजेंसियों ने ताहिर हुसैन के बैंक खातों को सीज़ कर दिया था। जाँच एजेंसियों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इन दंगों के लिए सिलसिलेवार तरीके से षड्यंत्र रचा गया था। जाँच प्रक्रिया के दौरान पता चला था कि ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खातों में सऊदी अरब और देश के कई अलग-अलग हिस्सों से मोटी रकम आई थी। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए जाँच एजेंसियों और पुलिस ने इन बैंक खातों को सीज़ किया था।  

इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 44 और 45 के तहत कड़कड़डूमा कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया था। मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट का कहना था, “अभियुक्तों की संलिप्तता के बारे में प्रथम दृष्टया पर्याप्त भड़काऊ सामग्री है।”

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में सुनियोजित ढंग से सांप्रदायिक दंगा कराया गया। इसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। कई परिवार बर्बाद हो गए, करोड़ों की संपत्ति जलकर राख हो गई। आम आदमी पार्टी की तुष्टीकरण की राजनीति के तहत अपराधियों को संरक्षण देने का काम किया गया।

‘योगी को 24 घंटे के भीतर AK-47 से भून दूँगा’: UP के मुख्यमंत्री को फिर से मिली धमकी, जाँच में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मार डालने की धमकी दी गई है। यूपी पुलिस की इमरजेंसी सेवा डायल 112 पर फोन कॉल कर के धमकी दी गई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को AK-47 से मार डाला जाएगा। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में FIR दर्ज कर के कार्रवाई शुरू की। साइबर से को भी जाँच में लगाया गया है और अज्ञात आरोपित की तलाश जारी है।

ये धमकी शनिवार (जनवरी 9, 2021) को शाम 8 बजे एक मैसेज के माध्यम से दी गई। मोबाइल नंबर 8874028434 से आए व्हाट्सप्प मैसेज में लिखा था “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 24 घंटों के भीतर AK-47 से भून दूँगा। ढूँढ सको तो ढूँढ लो।” इसके बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया। तुरंत ही 112 में तैनात ऑपरेंशंस कमांडर सहेंद्र यादव ने इस मामले की FIR दर्ज करवाई।

डीसीपी साउथ रवि कुमार ने बताया कि धमकी देने वाला किसी दूसरे शहर का है और पुलिस ने अब तक की छानबीन में उसके मोबाइल नंबर के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी कर ली है। हाल ही में हजरतगंज कोतवाली में भी इसी तरह का मामला दर्ज किया गया था। तब गौरव सिंह राजपूत नामक युवक ने सीएम योगी को जान से मारने की धमकी दी थी। उसे गड़वार क्षेत्र से पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी।

दिसंबर 2020 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार जान से मारने की धमकी दी गई थी। ये धमकी भी पुलिस सेवा डॉयल 112 के व्हाट्सअप पर मिली थी। इस धमकी भरे संदेश में आपत्तिजनक भाषा और गलियों का प्रयोग भी किया गया था। तब धमकी देने वाला शख्स आगरा का निकला था। उससे पहले  22 नवंबर 2020 की शाम को पुलिस के डायल 112 के व्हाट्सएप नंबर पर धमकी दी गई थी। वहीं 21 मई, 2020 की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।

पंजाब के 4.74 लाख ‘धंधेबाज’ किसान, फर्जीवाड़ा कर PM किसान निधि का लिया पैसा: RTI से खुलासा, अब लौटाना होगा

‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के लिए केंद्र सरकार ने तो धनराशि जारी कर दी और किसानों तक कई किस्तों में रुपए पहुँचे भी, लेकिन कुछ राज्यों में इसे लेकर बड़ी गड़बड़ी की बात पता चली है। इनमें 20.48 लाख अपात्र लोगों को 1364 करोड़ रुपए ट्रांसफर हो गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने ही एक RTI के जवाब में ये खुलासा किया। गलत तरीके से पीएम किसान योजना का लाभ उठाने वालों में सबसे ज्यादा अपात्र किसान पंजाब के हैं।

पीएम किसान योजना के तहत हर साल गरीब किसानों को 6000 रुपए की राशि 2000 रुपए के तीन किश्तों में दी जाती है। 2019 में मोदी सरकार ने ये योजना लॉन्च की थी। जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है, उन्हें इसका लाभ दिया जाता है। हाल ही में दिसंबर 25, 2020 को इस योजना के तहत किसानों को किश्त मिली। अब मंत्रालय ने बताया कि इसके तहत अपात्र लोगों को दी गई धनराशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इनमें दो श्रेणियों में उनकी पहचान की गई है। पहली श्रेणी में वो लोग हैं, जो इस योजना की योग्यता पूरी नहीं करते। दूसरी श्रेणी में वो हैं, जो आयकर भरते हैं। RTI आवेदक वेंकटेश नायक के साथ सरकार ने ये आँकड़े साझा किए। अयोग्य लाभार्थियों में से 55.58 प्रतिशत तो ऐसे हैं, जो आयकर देते हैं। योजना की अर्हता पूरी न करने वाले लोगों की सख्या 44.41% है। इनके खातों से रुपए वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश – ये वो 5 राज्य हैं, जहाँ अपात्र लाभार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस सूची में 23.16% अपात्र किसान तो अकेले पंजाब में हैं, जिनकी संख्या 4.74 लाख है। इसके बाद असम और महाराष्ट्र का नंबर आता है। आधे से ज्यादा अयोग्य लाभार्थी (54%) इन्हीं 3 राज्यों में हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत ये जानकारी साझा की गई है।

पिछले कई सप्ताह से पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमा पर बैठे हुए हैं और केंद्र सरकार के उन तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, जो कृषि सुधारों की दिशा में लाया गया था। हरियाणा में करनाल जिले के कैमला गाँव में ‘किसान महापंचायत’ के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की गई। कई किसान नेताओं ने पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणियाँ की हैं। सरकार के साथ 8 दौर के बातचीत के बावजूद कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।

‘UP-बिहार के 90% लोग बेहूदे, माँ लक्ष्मी लुटेरों के साथ रहती हैं’: GoAir का हिंदू-विरोधी पायलट, गई नौकरी

विमानन कंपनी GoAir ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट्स करने के मामले में एक सीनियर पायलट को निकाल बाहर किया। वह बतौर ‘कैप्टन’ नौकरी कर रहा था। GoAir ने बताया कि उसकी सेवाएँ तत्काल प्रभाव से ख़त्म कर दी गई हैं। मिकी मलिक ने अपने ट्वीट में लिखा था, “प्रधानमंत्री इडियट हैं। हाँ, आप बदले में मुझे भी इडियट कह लें, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं पीएम नहीं हूँ। पीएम इडियट हैं। पीरियड।”

जब लोगों ने उसकी इस टिप्पणी का विरोध किया तो उसने माफ़ी माँग ली और यहाँ तक कि अपने ट्विटर हैंडल को भी लॉक कर लिया। उसने माना कि उनके कई ट्वीट्स आपत्तिजनक थे और कहा कि इससे जिनकी भी भावनाएँ आहत हुई हैं, उससे वो माफ़ी माँगता है। साथ ही उसने लिखा कि ये सारे ट्वीट्स उसके व्यक्तिगत हैं और GoAir से इनका कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे मामलों पर जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करते हुए कंपनी ने उसे निकाल दिया।

कंपनी ने कहा कि उसके एम्प्लॉयमेंट संबंधी कुछ नियम-कायदे हैं, रेगुलेशन और नीतियाँ हैं। GoAir ने कहा कि इसमें सोशल मीडिया में कर्मचारियों का व्यवहार भी शामिल है और इनका उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही कंपनी ने साफ़ कर दिया कि वो किसी भी कर्मचारी के व्यक्तिगत बयानों और विचारों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखता। अब मिकी मलिक के कई आपत्तिजनक ट्वीट्स सामने आए हैं, जिसके बाद लोगों ने उसे मानसिक रोगी करार दिया है।

उसने उत्तर प्रदेश और बिहार के खिलाफ भी घृणा फैलाई थी। उसने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश और बिहार मिल कर अमेरिका जितने बड़े हैं, लेकिन वो काफी गरीब, पिछड़े, गंदे और भूखे हैं। उसने दावा किया था कि कई मामलों में ये दोनों राज्य पूरे देश को नीचे लेकर जा रहे हैं। साथ ही उसने दावा किया कि न तो मुगलों और न ही किसी गाँधी परिवार ने उन्हें लूटा। उसने यूपी-बिहार के 90% लोगों को राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा ‘इडियट्स’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने सेल्फ-गोल किया है।

एक व्यक्ति ने जब उसकी भाषा को लेकर आपत्ति जताई तो उसने कहा कि उसकी चड्डी खाकी है और फटी हुई है। मलिक ने उक्त व्यक्ति को ‘सूअर’ बताते हुए कहा कि वो हर बिजली के पोल के सामने इलेक्ट्रिसिटी के लिए टाँग उठा देता है। कर्नाटक में भगवान हनुमान की 1200 करोड़ रुपए में 215 मीटर ऊँची प्रतिमा बनाए जाने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए उसने लिखा, “चलो, अब कर्नाटक में बंदर व्यस्त रहेंगे। नहीं तो ट्विटर पर उत्पात मचा रहे थे।”

साथ ही उसने नवरात्रि पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘इस टाइप के कुछ लोग हैं, जो कुछ दिन के लिए पाते हैं।’ उसने हिन्दू धर्म को संविधान के खिलाफ भी बताया था। उसने लिखा था कि लक्ष्मी पूजा की जरूरत नहीं है क्योंकि अब वो लूटेरों के साथ रहती हैं। उसने एक बार लिखा था, “भक्तों की सबसे अच्छी बात ये है कि एक फुलझड़ी छोड़ो तो 4 कुत्ते कार के पीछे लग जाते हैं।”

एक व्यक्ति को उसने ‘गंगा नदी के किनारे नागा साधुओं की तरह नंगा नाच करने’ की सलाह दी थी। साथ ही भगवद्गीता से उद्धरण देने के लिए उसे ‘हिंदुत्व मोरोन’ भी कहा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए उसने ‘सामूहिक नरसंहारक और तड़ीपार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था और पीएम मोदी की तुलना हिटलर से की थी। RSS के सदस्यों के लिए उसने ‘दक्षिणपंथी मूर्ख कट्टर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। उसने जनरल जीडी बक्शी को भी ‘खाकी चड्डी पहनने’ की बात कही थी।

जून 2020 में इसी तरह सोशल मीडिया पर सीता माता को लेकर अभद्र टिप्पणी करने वाले ट्रेनी ऑफिसर आसिफ खान को गोएयर (GoAir) ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। एयरलाइन ने कहा था कि किसी व्यक्ति या कर्मचारी के निजी विचारों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। गोएयर ने कहा था कि उनकी नीति सभी कर्मचारियों के लिए शून्य सहिष्णुता की है, जिसमें कर्मचारियों को रोजगार नियमों का पालन करना पड़ता है, इसमें सोशल मीडिया पर व्यवहार भी शामिल है।

‘जेंटलमैन’ नहीं है स्टीव स्मिथ: पंत का बल्लेबाजी मार्क चुपके से मिटाया… लेकिन वीडियो हो गया वायरल, हो रही थू-थू

सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा टेस्ट मैच चल रहा है, जिसके पाँचवें दिन सोमवार (जनवरी 11, 2021) को भारत को जीत के लिए 407 रनों का लक्ष्य मिला। सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है, ऐसे में ये मैच दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस बीच ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट कप्तान स्टीव स्मिथ पिच पर भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत द्वारा लिए गए गार्ड (बल्लेबाजी मार्क) को मिटाते दिखे।

ऋषभ पंत ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए भारत की जीत की राह आसान करते दिख रहे थे, लेकिन 118 गेंदों पर 97 रनों की उम्दा पारी खेल कर वो लंच के बाद अगले 10 ओवरों के भीतर ही आउट हो गए। क्रिकेट प्रशंसक टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नंबर-3 बल्लेबाज द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने की निंदा कर रहे हैं। ऋषभ पंत ने आउट होने से पहले अनुभवी चेतेश्वर पुजारा के साथ 148 रनों की पार्टनरशिप की।

दरअसल, जब ड्रिंक्स ब्रेक हुआ तो स्टीव स्मिथ स्मिथ सहित ऑस्ट्रेलिया के कुछ खिलाड़ी पिच पर ‘शैडो बैटिंग’ प्रैक्टिस करने के बहाने से आए। इसकी आड़ में ही स्टीव स्मिथ ने बल्‍लेबाज के मार्क लेने वाली जगह को जूते से कुरेदना शुरू कर दिया। जब ऋषभ पंत वापस बल्लेबाजी करने आए तो उन्हें इसका एहसास हुआ और उन्होंने अंपायर से बात कर के फिर से गार्ड लिया। लोग इसे ध्यान भटकाने के लिए तरकीब कह रहे हैं।

दरअसल, बल्लेबाजी का मार्क लगा कर बल्लेबाज ये तय करता है कि वो स्टंप्स से कितनी दूर बैटिंग करने में कम्फर्टेबल है। अगर उस मार्क से वो हट जाता है तो आउट होने की आशंका रहती है। स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर इससे पहले भी बॉल टेम्परिंग के मामले में 1 साल का प्रतिबंध झेल चुके हैं। ‘जेंटलमैन गेम’ कहे जाने वाली क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों द्वारा अक्सर इस तरह की हरकतें करने की खबरें आती रहती हैं।

इसी मैच के दौरान लगातार 2 दिन भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणी की गई, जिसके बाद पुलिस ने 6 दर्शकों को स्टेडियम से निकाल बाहर किया। मोहम्मद सिराज ने इसकी शिकायत की थी। इससे 1 दिन पहले भी उन्होंने और जसप्रीत बुमराह ने दर्शक दीर्घा से नस्लीय टिप्पणी की शिकायत की थी। BCCI पहले ही इस सम्बन्ध में CA के समक्ष शिकायत दर्ज करा चुका है। सचिन तेंदुलकर समेत दुनिया भर के दिग्गजों ने इस हरकत की निंदा की है।

‘WhatsApp और फेसबुक पूरे भारत में हो बैन’: व्यापारी संघ CAIT ने मोदी सरकार को लिखा पत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा की बात

‘अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT)’ ने भारत सरकार से माँग की है कि सोशल मीडिया एप्स व्हाट्सप्प (Whatsapp) और फेसबुक को प्रतिबंधित किया जाए। संगठन ने केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिख कर ये माँग की है। संगठन ने Whatsapp की नई प्राइवेसी नीतियों के आलोक में ये माँग की। चूँकि सोशल मीडिया जायंट फेसबुक ही Whatsapp की पैरेंट कंपनी है, इसीलिए उसे भी प्रतिबंधित करने की माँग की गई है।

‘द कन्फेडरशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT)’ ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस एप का प्रयोग करेगा, नई प्राइवेसी नीतियों के बाद उसकी सभी तरह के व्यक्तिगत डेटा, वित्तीय लेनदेन, कॉन्टेक्ट्स और लोकेशन सहित कई प्रकार के महत्वपूर्ण सूचनाएँ कंपनी के पास चली जाएगी। साथ ही आशंका जताई गई है कि इसका उपयोग किसी भी तरीके से किया जा सकता है, जिसके बारे में कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं बताया गया है।

व्यापारियों के संगठन ने कहा कि या तो व्हाट्सप्प को नई प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने से रोका जाए, या फिर उस पर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। CAIT ने कहा कि भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक यूजर हैं और उन्हें ऐसी सूचनाओं का एक्सेस देना न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा है। जबकि व्हाट्सप्प ने कहा है कि वो पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई नीति ला रहा है।

PTI के एक मेल का जवाब देते हुए कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक से सुरक्षित होस्टिंग सर्विस पाने के लिए ये निर्णय लिया गया है और इससे फेसबुक को व्हाट्सप्प यूजर्स के साथ अपने कम्युनिकेशंस के प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही दावा किया कि इससे इस पर कोई असर नहीं पड़ता है कि आप किससे क्या बातें कर रहे हैं और फेसबुक के साथ डेटा शेयरिंग प्रैक्टिस में भी बदलाव नहीं किया जा रहा है।

CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बदली हुई प्राइवेसी पॉलिसी भारत के संविधान में निहित नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है, इसीलिए इस मामले में सरकार का हस्तक्षेप ज़रूरी है। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के अस्सिस्टेंट वाईस प्रेजिडेंट (AVP) जय कोटक ने कहा कि अमेरिका की 5 गैर-जिम्मेदार और अनिर्वाचित प्राइवेट तकनीकी कंपनियाँ एकतरफा रूप से और एक ही समय पर दुनिया में किसी को भी इंटरनेट से बाहर का रास्ता दिखा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि आज इन कंपनियों ने उनके साथ ऐसा किया है, जिसके विचारों से आप सहमत नहीं हैं, तो ये सही कदम नहीं हो जाता। उन्होंने कई सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प को ब्लॉक किए जाने और व्यक्तिगत सूचनाओं तक उनकी पहुँच को लेकर ये टिप्पणी की। भारत में भी व्हाट्सप्प की नई प्राइवेसी पालिसी के विरोध में लोग ‘Signal’ और ‘Telegram’ जैसे एप्स का प्रयोग कर रहे हैं।