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संघियों से ज्यादा सावधान ऋचा, तापसी, स्वरा से रहो: ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ के ‘जातिवादी पोस्टर’ पर लोगों में नाराजगी

ऋचा चड्ढा की एक नई फिल्म का पोस्टर सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। यह फिल्म है- ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’। पोस्टर में ऋचा चड्ढा (Richa Chadda) सबसे आगे नजर आ रही हैं। सुभाष कपूर द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म ‘Madam Chief Minister’ एक पॉलिटिकल ड्रामा है, जो कि आने वाली 22 जनवरी को रिलीज़ के लिए तैयार है।

टी-सीरीज फिल्म्स और काँगड़ा टॉकीज़ द्वारा निर्मित इस फिल्म के पोस्टर में ऋचा चड्ढा अपने हाथ में झाड़ू लिए देखी जा सकती हैं और उनके साथ मानव कौल और सौरभ शुक्ला नजर आ रहे हैं। साथ ही एक टैगलाइन है, ‘Untouchable, Unstoppable’ यानी, ‘अछूत, अजेय’। ऋचा चड्ढा ने इस पोस्टर को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।

बताया जा रहा है कि यह फिल्म बसपा प्रमुख मायावती के राजनीतिक जीवन से प्रभावित है। लेकिन ‘दलित राजनीति’ पर बनी यह फिल्म सोशल मीडिया पर लिबरल्स और ‘अम्बेडकरवादियों’ के निशाने पर आ गई है।

इस फिल्म के पोस्टर पर जातिवादी होने के आरोप तो लग ही रहे थे लेकिन यह हंगामा तब बड़ा बन गया जब ‘मिर्जापुर’ और ‘फुकरे’ फिल्म से चर्चा में आए अली फजल ने ऋचा चड्ढा के इस पोस्टर को अपने ट्विटर अकाउंट पर प्रोमोट करना शुरू किया। दिल्ली दंगों के बाद इंटरनेट लिबरल्स के प्रिय बनक्र उभरे अली फजल ने जब यह पोस्टर शेयर किया तो लोगों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की, जिसे अली फजल सहन नहीं कर पाए।

अली फजल ने एक ट्वीट के जरिए बेहद सावधानी से और अस्पष्ट तरीके से रखते हुए अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, “लिबरल्स कभी भी खुश नहीं होंगे। फर्जी नैतिकता, जो सब कुछ तोड़-मरोड़ती है। हर बढ़ते कदम का गला घोंटने को तत्पर। मैं उन्हें तमाशबीन कहता हूँ। वो बस देखते हैं और उन्हें लगता है कि वो जी रहे हैं और सीख रहे हैं। लेकिन जब असलियत में उन्हें जाँच लिया तो वो सब निराश करते हैं।”

अली फ़जल के इस ट्वीट ने उनके समर्थकों को और भड़का दिया और उन्हें समझाया कि यह एक जातिवादी फिल्म है और बेचने के लिए दलितों के प्रतिनिधित्व को इस्तेमाल किया जा रहा है। अली फजल से कुछ लोगों ने आपत्ति जताते हुए लिखा है कि दलितों की पहचान को और उनके शोषण का अपमान आपको ‘सिनेमा लाइसेंस’ नहीं देता।

कुछ लोगों का कहना है कि अली फजल जिन लोगों को लिबरल्स कह रहे हैं वो लोग वास्तव में अंबेडकरवादी हैं। लोगों ने अली फजल को अपने किसी दलित मित्र से सलाह लेने तक की भी राय दे डाली है।

एक ट्विटर यूजर, जिसकी प्रोफाइल पिक्चर पर पेरियार की तस्वीर लगी है, ने ऋचा चड्ढा के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए वामपंथी प्रोपेगेंडा मैगजीन ‘कारवाँ’ का एक पोस्टर, जिसमें मायावती नजर आ रही हैं, को शेयर करते हुए लिखा है कि ‘बहन जी (मायावती) के संघर्ष को इस तरह से सामने रखा जाता है। उन्होंने लिखा है कि जब आप एक जातिवादी इन्सान नहीं होते तब आप इस तरह से उन्हें सामने रखते हैं।

‘फ्रंटियर इंडिका’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा है, “गोरा चेहरा, पंजाबी खत्री महिला मायावती के जीवन पर आधारित एक चरित्र निभा रही है और उसने हाथों में झाड़ू पकड़ी हुई है। जबकि मायावती एक कॉलेज से शिक्षित महिला हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से पहले एक शिक्षक के रूप में काम किया।”

इस फिल्म के पोस्टर को दलित विरोधी बताते हुए ‘बहुजन कनेक्ट’ नाम के एक और ट्विटर यूजर ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “ऋचा चड्डा, तापसी, स्वरा आदि.. हमेशा ध्यान रखो कि ये नाम संघियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं।”

‘अंबेडकर कारवाँ’ ने इस पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा है कि सवर्णों के लिए एक दलित को बिना झाड़ू के देखना कितना मुश्किल है?

NDTV पत्रकार के लिए हिन्दुओं की यात्रा पर पत्थरबाजी संवैधानिक अधिकार है, उस पर कानून न बने

NDTV पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने भाजपा से घृणा जाहिर करने के लिए 5 जनवरी 2021 को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने भाजपा शासित प्रदेशों में लाए गए नए कानूनों या फिर सत्ताधारी पार्टी द्वारा लिए गए फैसलों को लेकर अपने तर्क दिए।

श्रीनिवासन जैन ने सरकारी दस्तावेजों से हलाल शब्द हटाए जाने के फैसले को सरकार की स्ट्राइक कहा और उत्तर प्रदेश में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के ख़िलाफ़ बनाए गए कानून के लिए लिखा कि एक राज्य सरकार ने अंतरधार्मिक विवाह को आपराधिक घोषित करने के लिए कानून पास किया है। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश की ओर इशारा करते हुए उज्जैन में हुई हिंसा का सारा ठीकरा राम मंदिर डोनेशन यात्रा पर फोड़ा और कहा कि उसी से हिंसा भड़की, लेकिन सरकार ने पत्थरबाजों के ख़िलाफ़ कानून बना दिया।

श्रीनिवासन ने आगे मुन्नवर फारूकी का बचाव करते हुए उस एंगल को बिलकुल खारिज कर दिया कि उसने हिंदू देवी देवताओं के लिए अभद्र टिप्पणी की और ये दावा किया कि फारूकी इसलिए गिरफ्तार हुआ है क्योंकि उसने गृहमंत्री का मजाक उड़ा दिया था। आगे श्रीनिवासन ने कोरोना वैक्सीन पर उपजे विवाद पर ये गौर करवाया कि कैसे जो ‘बुद्धिजीवी’ इस वैक्सीन पर संदेह कर रहे हैं उन्हें सरकार राष्ट्र विरोधी घोषित कर रही है। 

अब प्रश्न यह है कि एनडीटीवी पत्रकार श्रीनिवासन जैन ये गहन विश्लेषण किस आधार पर करने चले हैं। क्योंकि, भाजपा के पास तो नए कानूनों को बनाने के पीछे पर्याप्त घटनाएँ हैं जिनकी गंभीरता साबित करती है कि लव जिहाद के ख़िलाफ़ बना कानून या फिर मध्यप्रदेश में बनने जा रहा पत्थरबाजों के ख़िलाफ़ कानून कितना अनिवार्य है। मगर, शायद श्रीनिवासन जैन जैसों की आपत्ति देख कर लगता है कि उनके लिए हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और हिंदुओं की यात्रा पर पत्थरबाजी करना, संवैधानिक अधिकारों की श्रेणी में आता है।

इसी प्रकार मुनव्वर फारूकी के घटिया ह्यूमर के ख़िलाफ़ हिंदूवादी संगठनों की नाराजगी भी जैन के लिए मुद्दा इसलिए है क्योंकि हिंदू अपने देवी देवताओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। वरना खुद अंदाजा लगाइए आखिर इस पूरे टॉपिक को गृहमंत्री से जोड़ने का क्या मतलब? हकीकत यही है कि फारूकी ने भगवान श्रीराम और माता सीता को लेकर अभद्र टिप्पणी की, इसलिए उसके ख़िलाफ़ हिंदूवादी संगठनों ने आवाज उठाई। न कि इसलिए क्योंकि उसने 2002 के दंगों में गृहमंत्री अमित शाह का नाम घुसा कर अपनी कुंठा को व्यक्त किया।

सोशल मीडिया से लेकर फारूकी के ख़िलाफ़ दर्ज हो रही शिकायतों तक में हर जगह उन्हीं वीडियो क्लिप की बात है जिसमें मुनव्वर ने कहा था, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”

इसी प्रकार भारतीय वैज्ञानिकों को नीचा दिखाने की कोशिश भी श्रीनिवासन अब उसे प्रीमेच्योर वैक्सीन बताकर कर रहे हैं। वैक्सीन पर संदेह से आखिर तात्पर्य क्या है? क्या वामपंथियों के लिए वैक्सीन पर शक करने का मतलब बस यही है कि उसे भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, तो वो उसपर शक करेंगे ही, जैसे उन्होंने ये मान रखा हो कि भाजपा शासन काल में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार वैक्सीन में गोबार ही होगा, इसलिए इस पर शक करना, इसका उपहास उड़ाना अनिवार्य है। क्या वे ये नहीं जानते कि वैक्सीन को अनुमति तब तक नहीं दी जाती जब तक सारे टेस्ट और प्रक्रिया पूरी न हो जाए?

केरल में 14 साल के बेटे का माँ ने ही किया यौन उत्पीड़न: पिता की शिकायत पर पॉक्सो के तहत गिरफ्तार

केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के कडकवूर (Kadakkavoor) में एक महिला को अपने ही बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। महिला के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट (POCSO एक्ट) में मामला दर्ज हुआ है। 

न्यूज 18 की खबर के अनुसार,  महिला पर अपने 14 साल के लड़के का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा है। पूरे राज्य में इस तरह का ये पहला मामला आया है। बच्चे के पिता ने इस बाबत पुलिस में शिकायत दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके बेटे की माँ पिछले कुछ समय से उसका उत्पीड़न कर रही है।

कडकवूर थाने के अधिकारी ने सोमवार (जनवरी 4, 2020) को IANS को बताया कि उन्हें एक पिता की शिकायत आई थी, जिसे उन्होंने बाल कल्याण आयोग को फॉर्वर्ड कर दिया। जाँच में पाया गया कि 35 साल की महिला अपने बच्चे को उत्पीड़ित कर रही थी। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत के समक्ष पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेेज दिया गया है। महिला फिलहाल तिरुवनंतपुरम की महिला जेल में है।

गौरतलब है कि अभी हाल में केरल से ही दो आदिवासी लड़कियों के यौन उत्पीड़न का मामला आया था। इस केस में पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया था। आदिवासी लड़कियाँ इन दोनों युवकों की दोस्त थीं और फोन के जरिए बात करते हुए इनके साथ रिलेशन में आई थीं। ये दोनों युवक इसी दोस्ती का फायदा उठा कर उन्हें नए साल की पूर्व संध्या पर अपने साथ ले गए और उनका यौन उत्पीड़न किया।

इससे पूर्व केरल में ही सुमदाय विशेष के दो अन्य युवकों पर 2 नाबालिग बच्चियों से रेप करने का आरोप लगा था। कथित तौर पर दोनों जुड़वाँ भाई थे और इनके नाम नौशाद व नवास थे। दोनों ने 10 साल और 5 साल की बच्चियों का कई बार रेप किया था। बच्चियों के माता-पिता ने इस मामले में दोनों भाइयों नौशाद और नवास के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई थी और आरोप लगाया था कि दोनों बच्चियों का कई बार रेप किया गया।

‘सेना में बगावत, जवान मोदी के खिलाफ’: स्वरा भास्कर का ‘फौजी’ निकला फर्जी, वर्दी पहन बनाया था वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक व्यक्ति किसानों को लेकर भारतीय सेना के जवानों को भड़काता हुआ नज़र आ रहा है। बता दें कि पिछले एक महीने से ज्यादा समय से किसान संगठनों का मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बार-बार बातचीत के बावजूद किसान संगठन अपने रुख पर अड़े हुए हैं। इस बीच वायरल हुए इस वीडियो को स्वरा भास्कर सरीखों ने भी आगे बढ़ाया।

वीडियो में भारतीय सेना की वर्दी पहने उक्त शख्स खुद को भारत का फौजी बताता है और दावा करता है कि वो किसानों के आंदोलन में हिस्सा ले रहा है। उस वीडियो में वो कहता है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ। मैंने अभी जो यूनिफॉर्म पहनी है, इसी वेशभूषा में मैं कुछ दिन पहले चीन की सीमा पर तैनात था। तब तो मैं बड़ा देशभक्त था। अब जब इस वर्दी को उतार कर मैं दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन में हिस्सा लेने पहुँचा, तो मैं बहुत बड़ा देशद्रोही हो गया, आतंकवादी हो गया, खालिस्तानी हो गया?”

इस वीडियो में उसने दावा किया कि उसे अब इन्हीं नामों से नवाजा जा रहा है। इसके बाद वो पीएम मोदी को ‘सलाह’ देते हुए बताता है कि सिख और जाट रेजिमेंट के जवानों के दिल में क्या चल रहा है। फिर वो कहता है कि अगर किसी के घर में कोई परेशानी आ जाती है तो उसका ड्यूटी में मन नहीं लगता। साथ ही वो कहता है कि ‘पीएम मोदी ने तो जवानों के घरों में ही आग लगा दी है तो क्या ख़ाक ड्यूटी करेंगे वो!’

वायरल वीडियो में उक्त व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना के जो जवान आज सीमा पर खड़े हैं, दिल्ली में उनके ही परिजन अपना हक़ माँगने के लिए विरोध प्रदर्शन में बैठे हुए हैं। उसने दावा किया कि पीएम मोदी को ये सब दिखाई नहीं दे रहा है और सिर्फ उन्हें बड़े बिजनेसमैन ही दिखते हैं। फिर वो सवाल दागता है कि कौन से बिजनेसमैन का बेटा सेना में है? उसने केंद्र सरकार को सीधी धमकी देते हुए सेना में भी बगावत की बात कही।

उक्त व्यक्ति वीडियो में पूछता है कि आज जो किसान धरने पर बैठे हुए हैं अगर उनके बेटे सीमा से वापस लौट आएँ और उनके लिए लड़ने लगें तो क्या पीएम मोदी पाकिस्तान और चीन की फ़ौज लाकर उनका मुकाबला करेंगे? अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इसे वीडियो को आगे बढ़ाते हुए लिखा – ‘कुछ सीधी बातें!’ इसी तरह ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन कर रहे अन्य लोगों ने भी इसे लेकर दावा किया कि भारतीय सेना अब मोदी सरकार के खिलाफ हो गई है।

अब आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। असल में ये व्यक्ति न तो भारतीय सेना का जवान है, न ही किन्हीं सशस्त्र बलों से इसका कोई सम्बन्ध है। ये असल में पंजाब का एक गायक और अभिनेता है, जिसका नाम गोल्डी मनेपुरिया है। न तो ये किसान है, न ही जवान। ये एक पंजाबी कलाकार है। वो इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर खासा सक्रिय रहता है और अपने गाने अपलोड करता रहता है।

स्वरा भास्कर 2020 में भी पूरे साल विवादों में ही रही हैं। उन्होंने बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर भी अपने प्रपंच का खेल खेला। स्वरा भास्कर ने दिसंबर 6, 2020 के अवसर पर अपने ट्वीट में लिखा था, “चाहे जितनी लीपा पोती कर लो, भगवान का घर… किसी के भी भगवान का घर तोड़ना पाप होता है।” उन्होंने ये सब इसके बावजूद लिखा, जब सदियों से हिन्दुओं के ही मंदिर तोड़े जाते रहे हैं।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हुए भीड़ ने ईसाई महिला को नंगा कर सड़क पर घसीटा, कोर्ट ने रिहा कर दिया

साल 2016 में मिस्र (Egypt) की एक ईसाई वृद्धा के साथ बदसलूकी का मामला फिर तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। खबर है कि मिस्र में हमदा अल सवा नाम की एक पब्लिक प्रॉजिक्यूटर ने दोबारा इस केस पर गौर करने का निर्णय लिया है, जिसमें तीन मुस्लिम आरोपितों को 10 साल की सजा दिए जाने के बावजूद उन्हें आरोपों से रिहा कर दिया गया।

पूरी घटना काहिरा से 250 किमी दक्षिण में मिन्या प्रांत के अल करम सड़क की है। साल 2016 में 70 वर्षीय सुआद थबेट (Suad Thabet) और उनके पति अब्दु अयाद के घर पर 300 से ज्यादा कट्टरपंथियों ने हमला किया था। भीड़ को संदेह था कि एक मुस्लिम महिला के साथ वृद्ध दंपत्ति के बेटे का प्रेम प्रसंग है। 

इस दौरान आतताई भीड़ ने सुआद को न केवल मारा-पीटा था बल्कि उन्हें नंगा करके सड़कों पर घसीटा भी था। इसी भीड़ ने कथित तौर पर अल्लाह हू अकबर चिल्लाते हुए उनके घर को लूटने के साथ-साथ 5 अन्य ईसाइयों के घरों को लूट कर आग के हवाले झोंक दिया था। बाद में इस केस में कार्रवाई हुई। कुछ को गिरफ्तार भी किया गया।

लेकिन, साल 2017 में यह पूरा केस ड्रॉप कर दिया गया। फिर पता चला कि साल 2020 के जनवरी माह में 3 आरोपितों को उनकी अनुपस्थिति में 10 साल की सजा सुनाई गई। लेकिन, हाल में खबर आई कि उन्हें भी रिहा कर दिया गया है।

विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना के बाद सुआद इतना टूट गईं कि जब तीनों आरोपितों को साल 2020 में रिहा किया गया तो वह कोर्ट के फैसले पर फूट-फूट कर रोने लगीं। उन्होंने पूछा, “आखिर उन लोगों को कैसे छोड़ा जा सकता है… प्रेसीडेंट अल सिसी ने मुझे न्याय दिलाने का वादा किया था, फिर कोर्ट ने कैसे कह दिया कि वो लोग निर्दोष हैं। मुझे लग रहा है मैं अब भी नग्न हूँ। अगर कुछ भी करके मुझे धरती पर न्याय नहीं मिलता तो मैं स्वर्ग में न्याय की प्रतीक्षा करूँगी।”

साल 2017 की एक विदेशी रिपोर्ट में महिला ने आपबीती साझा करते हुए कहा था, “हम लोग मुस्लिम कट्टरपंथियों के कारण वापसी घर नहीं जा पा रहे… सरकार ऐसे दमनकारियों को खुली सड़कों पर घूमने की छूट दे रही है। वह हमारा गाँव है। हम वहाँ पैदा हुए, बड़े हुए। आखिर हम पीड़ित कैसे हो सकते हैं कि अपने गाँव और घर न लौट पाएँ।”

आरोपितों की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले के ख़िलाफ़ कई लोगों ने अपनी आवाज उठाई। एक हैशटैग चलाकर पीड़ित महिला के लिए न्याय की गुहार लगाई जाने लगी। मॉनिका गेबरिल ने सुवाद को न्याय दिलाने के लिए लोगों से कहा कि वह उन्हें अपनी माँ की तरह समझें।

रमी ने भी मिस्र में आरोपितों की रिहाई के लिए पीड़ित वृद्धा से क्षमा माँगी और, “Egypt was naked” नाम से एक नया हैशटैग चालू किया।

बता दें कि मिस्र में ईसाइयों के साथ भेदभाव नई बात नहीं है। काहिरा और अलेक्जेंड्रिया जैसे बड़े शहरों में फिर भी यह सब कम है, लेकिन मिनिया जैसे प्रांतों में यह बहुत अधिक होता है, जहाँ ईसाई चारों ओर से बहुसंख्यक आबादी से घिरे हुए हैं।

14 साल की लड़की से शादीशुदा शाहरुख ने किया रेप, जेल गया… बेल पर आया तो फिर से उसी के साथ किया बलात्कार

मध्य प्रदेश के सीहोर से रेप का एक मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस की लापरवाही के कारण भाजपा नेताओं को न्याय के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोपित शाहरुख़ खान ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर के रेप किया। पीड़िता की उम्र मात्र 14 साल है। पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया। आरोपित जेल भी गया। लेकिन वो जैसे ही जमानत से बाहर आया, उसे दोबारा से फिर उसी दरिंदगी को अंजाम दिया।

आरोप है कि बेल पर छूटे शाहरुख़ खान ने दोबारा पीड़िता का अपहरण कर के उसे फिर से अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपित की उम्र 22 वर्ष है। उसने अक्टूबर 11, 2020 को 14 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर के उसके साथ रेप किया था। आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज कर के शाहरुख़ खान को गिरफ्तार तो किया, लेकिन उसके खिलाफ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) के तहत केस नहीं दर्ज किया।

‘जनसत्ता’ की खबर के अनुसार, इस वजह से अदालत से वो जमानत पाने में कामयाब रहा। इसके बाद 2020 में साल के अंतिम दिन उसने फिर से पीड़िता का अपहरण किया और उसके साथ वही हरकत की, जिस कारण वो जेल जा चुका था। उसने नाबालिग को धमकाया भी कि अगर उसने किसी को कुछ बताने की कोशिश की तो उसे और उसके परिवार को बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। इसके बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बातें कह सुनाई।

इसके बाद पीड़िता ने इसकी शिकायत बाल कल्याण समिति में की। चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति के दबाव के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। आरोपित फ़िलहाल फरार चल रहा है। बाल कल्याण समिति ने सीहोर के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर जवाब माँगा है कि आखिर नाबालिग पीड़िता के साथ रेप की घटना होने के बावजूद आरोपित के खिलाफ पाॅक्साे एक्ट के तहत मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया था?

पीड़िता और उसके परिजनों को भी बाल कल्याण समिति ने राजधानी भोपाल में एक सुरक्षित जगह पर रखा गया है। ‘द क्राइम इन्फो’ की खबर के अनुसार, पीड़िता और उसके परिवार की भाजपा नेताओं ने मदद की, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। पीड़िता सीहोर में चाय की दुकान चलाती है। आरोपित शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। एसएसपी समीर यादव ने कहा कि मामला दर्ज किया गया है और कार्रवाई जारी है।

दिसंबर 2020 में ही मध्य प्रदेश के ही उज्जैन से ‘लव जिहाद’ और रेप की घटना सामने आई थी। एक युवक ने नाम बदल कर तलाकशुदा महिला को फाँसा और 2 वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। उसने छद्म हिन्दू नाम के साथ दोस्ती की और फिर उसके साथ संबंध बनाए। युवक का असली नाम वसीम अकरम था, लेकिन उसने विकास नाम के साथ महिला को धोखा दिया। उसके ड्राइविंग लाइसेंस से उसका असली राज खुला।

रईस खान की बेटी से था धर्मेंद्र को प्यार, मार कर बिजली के तार से जलाया… ‘परफेक्ट साजिश’ के बाद भी हत्यारा धराया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवक की रहस्मयी मौत का खुलासा करते हुए पुलिस ने रईस खान नाम के स्थानीय को गिरफ्तार किया है। रईस पर आरोप है कि उसने अपनी बेटी से मेलजोल रखने वाले हिंदू युवक धर्मेंद्र को पहले मारा और उसके बाद हाई टेंशन वायर से झुलसाया ताकि यह सुनिश्चित हो कि उसे देख कर लगे कि मौत आकाशीय बिजली गिरने के कारण हुई।

पूरा मामला 29 अगस्त 2020 का था। भोपाल पुलिस को गूंगा इलाके में 26 साल के धर्मेंद्र की मोटरसाइकल के साथ उसकी झुलसी लाश बरामद हुई थी। पोस्टमॉर्टम हुआ तो रिपोर्ट में भी सामने आया कि मौत करंट लगने से हुई है। लेकिन, पुलिस के सामने इस वाकये में संदेह पैदा करने वाले दो बिंदु थे।

पहला ये अगर बाइक चलाते हुए आकाशीय बिजली गिरने के कारण मौत यदि हुई तो आखिर धर्मेंद्र की मुट्ठी बंद कैसे हो सकती है। बाइक चलाते हुए तो ऐसा संभव नहीं था। दूसरा यह कि धर्मेंद्र शहर के दूसरे कोने में स्थित शाहपुरा के एक शॉपिंग माल में काम करता था, तो वो मौत वाले दिन गूंगा इलाके में क्या कर रहा था।

पुलिस इन दो बिंदुओं के कारण धर्मेंद्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद भी चुप नहीं बैठी और जाँच चालू रही। एक दिन पुलिस को मालूम हुआ कि गूंगा इलाके में रहने वाली एक लड़की से धर्मेंद्र की बातचीत थी। इसके बाद पुलिस ने जाँच करते हुए रईस खान को अपने शक के घेरे में लिया और अंत में उसी के पास से वह हाई टेंशन वायर बरामद हुई, जिससे करंट लेकर धर्मेंद्र को सुनियोजित ढंग से मारा गया।

दरअसल, रईस खान को मालूम था कि धर्मेंद्र और उसकी लड़की के बीच प्रेम संबंध थे, जिसे लेकर वह आपत्ति जता चुका था। उसे यह भी पता था कि वो दोनों किस जगह पर मिलते थे। उसने इसी का फायदा उठा कर धर्मेंद्र के ख़िलाफ़ साजिश रची और ऐसे दिन व जगह का चयन किया ताकि पूरी वारदात एक प्राकृतिक दुर्घटना लगे।

पुलिस ने इस केस में जाँच के बाद बताया कि धर्मेंद्र का रईस खान की बेटी से प्रेम संबंध था, जो रईस खान को पसंद नहीं था। 29 अगस्त को धर्मेंद्र जब लड़की से मिलने के बाद लौट रहा था तो रईस खान ने पहले उसके सिर पर पत्थर मारा और फिर उसे क्षेत्र से गुजर रही हाई टेंशन लाइन से बिजली के झटके दिए। धर्मेंद्र की मौत के बाद उसकी लाश को मेन रोड पर लाकर उसकी मोटरसाइकिल के पास फेंक दिया गया। ये सब ऐसे किया गया, जिससे लगे कि धर्मेंद्र की मौत आकाशीय बिजली के हादसे से हुई।

‘CISF में अधिकतर हिंदू… इसलिए ताजमहल में लहराने दिया भगवा’: आगरा की घटना पर पागल हुए इस्लामी कट्टरपंथी

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित मुगलकालीन स्मारक ताजमहल में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरवादियों का मानसिक संतुलन ही हिल सा गया लगता है। ताजमहल सहित कई पर्यटन स्थल कोरोना संक्रमण और उससे निपटने के लिए हुए लॉकडाउन के कारण महीनों बंद रहे थे, जिन्हें खोले जाने के बाद अब वहाँ पर्यटकों के पहुँचने का सिलसिला जारी है।

इसी बीच, 17वीं सदी के इस मुग़ल स्मारक में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कुछ युवा पहुँचे और परिसर में भगवा झंडे लहराते हुए तस्वीरें व वीडियो क्लिक करवाई। इनमें से 4 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरवादियों ने वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाते हुए भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। इस अभियान का नेतृत्व किया प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ के जुबैर ने।

उसने कहा कि केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हाथों में ताजमहल की सुरक्षा सौंपी गई है और इसके सैकड़ों जवान तैनात हैं, जो विभिन्न शिफ्ट्स में काम करते हैं। उसने पूछा कि जब ये घटना हो रही थी तो ये सब कहाँ थे और क्या कर रहे थे? कुछ ने तो CISF के जवानों की देश के संविधान के प्रति निष्ठा पर भी सवाल खड़े कर दिए। आरिफ अयूब ने कहा कि भारतीय सेना, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया की तरह CISF के जवानों में भी अधिकतर महिला-पुरुष हिन्दू हैं।

उसने दावा किया कि अगर कोई कहता है कि इनकी निष्ठा देश के संविधान और उसके मूल्यों के प्रति है, तो वो खुला झूठ बोल रहा है। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी आपत्ति जताते हुए लिखा, “एक बार फिर क्या होता है? ‘एक बार फिर’ का सही इस्तेमाल… एक बार फिर भगवा गुंडों ने ग़ैर क़ानूनी ढंग से एक मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत में तोड़फोड़ की।” ‘भारत समाचार’ ने लिखा था, ‘आगरा: एक बार फिर ताजमहल पर लहराया भगवा।’, वो उसी का प्रत्युत्तर दे रही थीं।

ध्यान दीजिए कि ये वही लोग हैं, जो मंदिर में जबरन घुस कर कुछ मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं तो इसे सामुदायिक समरसता का प्रतीक बताते नहीं थकते हैं। वहीं जब किसी पर्यटन स्थल के परिसर में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिया तो ये उससे नाराज हो जाते हैं। कुछ ने कहा कि ताजमहल को मुस्लिमों ने बनवाया है, इसीलिए वहाँ भगवा जायज नहीं। एक ने लिखा कि संघियों के घर में खाना तक ठीक से नहीं बनता और 100 साल में वो एक इमारत तक खड़ी नहीं कर सके।

नवंबर 2020 में जब कुछ मुस्लिमों ने मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ी तो तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने तालियाँ पीटी थीं। नमाज पढ़ने वाले फैजल खान के बारे में पता चला था कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहा था। तस्वीरों में फैजल खान को CAA विरोधी प्रदर्शनों को सम्बोधित करते हुए देखा जा सकता था। अयोध्या के बाद मथुरा के लिए जो लड़ाई शुरू हुई है, उसी कारण फैजल खान ने नंदबाबा मंदिर में जाकर नमाज पढ़ी।

नए संसद भवन के निर्माण का रास्ता साफ: सेन्ट्रल विस्टा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, मोदी सरकार की बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के सेंट्रल विस्टा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। साथ ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने ये भी कहा कि इसके लिए क्लियरेंस देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। साथ ही पर्यावरण को लेकर जो क्लियरेंस दिया गया था, उसे भी बरकरार रखा गया है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने बहुमत से फैसला सुनाया, जबकि जस्टिस संजीव खन्ना ‘सिडेंटिंग जजमेंट’ का हिस्सा बने।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इसके लिए हेरिटेज कंजर्वेशन कमिटी की अनुमति लेनी ज़रूरी है, इसीलिए सरकार को इस कमिटी की अनुमति लेनी चाहिए। 3 जजों के बेंच ने 2:1 से फैसला सुनाया। साथ ही DDA एक्ट के तहत जिन अधिकारों का उपयोग किया गया है, उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने न्यायसंगत और सही करार दिया। साथ ही पर्यावरण मंत्रालय से जो क्लियरेंस मिला, उसे भी नियमों के अनुरूप बताया।

बता दें कि दिसंबर 10, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए संसद भवन का भूमि पूजन किया था, जिसे लगभग 971 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाना है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच की जगह का पुनर्विकास शामिल है। हिन्दू रीति-रिवाज़ों के अंतर्गत भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। 

श्रृंगेरी के श्री शारदा पीठम से आए पुजारियों के समूह ने विधिवत पूजा की थी। इसके अलावा ऐतिहासिक आयोजन के मौके पर विभिन्न धर्म के गुरुओं ने ‘सर्व धर्म प्रार्थना’ की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को शिलान्यास के आयोजन की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। हिन्दू रीति-रिवाज़ों से भूमि पूजन के लिए संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगतगुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामी से इस संबंध में निवेदन किया था।

इजिप्ट के सरकारी अस्पताल के ICU में अचानक से सब मर गए: वीडियो वायरल, हो गया था ऑक्सीजन सप्लाई बंद

इजिप्ट के एक अस्पताल के ICU में अचानक से ऑक्सीजन सप्लाई ही ख़त्म हो गई, जिससे वहाँ भर्ती सारे मरीज मारे गए। अब वहाँ की सरकार ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। सार्वजनिक अस्पताल में रविवार (जनवरी 3, 2021) को हुई इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें नर्सों को मरीजों को जिंदा करने के लिए जूझते हुए देखा जा सकता है। कुल 4 मरीजों की मौत हुई।

ये सभी मरीज कोरोना संक्रमित थे। ये घटना इजिप्ट के अल-शरक़िया प्रान्त में हुई, जहाँ के गवर्नर ने इस बात से इनकार किया है कि ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से ICU में ये मौतें हुई हैं। एक मरीज के रिश्तेदार ने ये आरोप लगाया था, जिसे सरकार ने नकार दिया है। गवर्नर ममदूह घोरब ने कहा कि ये मरीज इसीलिए मरे, क्योंकि उन्हें कोरोना संक्रमण के अलावा क्रोनिक रोग भी हो गए थे। एक रिश्तेदार ने ही वीडियो बना कर वायरल किया था

इजिप्ट 10 करोड़ की जनसंख्या के साथ अरब का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला मुल्क है, और अल-शरक़िया वहाँ का तीसरा सबसे बड़ा प्रान्त है। वहाँ कोरोना के मामले बढ़ने के कारण फिर से लॉकडाउन लगाया गया है। प्रोसिक्यूटर ऑफिस ने कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है। हॉस्पिटल के डायरेक्टर के साथ-साथ वहाँ के डॉक्टरों से भी पूछताछ जारी है। मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी गई है।

चार मृतकों में से 2 महिलाएँ थीं, जो 60 की उम्र पार कर चुकी थीं। दो पुरुष थे, जिनमें से एक 76 साल के बुजुर्ग थे तो एक की उम्र 44 साल थी। हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में फ़िलहाल 36 मरीजों का इलाज चल रहा है। इजिप्ट के स्वास्थ्य मंत्री हाला जायद का कहना है कि कोरोना का इलाज कर रहे सभी अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई है। इससे पहले नील डेल्टा के एक अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी से 2 मरीजों की मौत की खबर आई थी।

इजिप्ट में ‘China National Pharmaceutical Group (Sinopharm)’ द्वारा बनाई गई वैक्सीन के आपात प्रयोग की अनुमति दे दी गई है। दो सप्ताह के भीतर टीकाकरण अभियान शुरू होना है। इजिप्ट के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी, AstraZeneca, Pfizer और जर्मन पार्टनर BioNTech के वैक्सीन को मुल्क में लाने के लिए भी बातचीत जारी है। Pfizer/BioNTech के 2 करोड़ डोज और AstraZeneca के 3 करोड़ डोज पहुँच रहे हैं।

इधर भारत में भी दो वैक्सीन को अनुमति मिलने के बाद टीकाकरण अभियान के लिए तैयारी की जा रही है। हालाँकि, यहाँ वैक्सीन को लेकर विपक्ष राजनीति भी कर रहा है और तरह-तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं। इन सबके बीच भारत बॉयोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने सफाई भी दी है कि वैक्सीन पर सियासत हो रही है। कुछ लोग हमारी वैक्सीन के बारे में केवल गॉसिप कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।