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कॉन्ग्रेस नेता ने पंजाब में 1300 Jio टावरों पर हमला करने वालों का किया उत्साहवर्धन, देश में इसी तरह के तोड़-फोड़ के लिए उकसाया

यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अभियान प्रभारी श्रीवत्स को पंजाब में Jio मोबाइल टावरों से बिजली काटने वाले किसानों का उत्साहवर्धन करते देखा गया। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के पूर्व मीडिया प्रमुख इस बात को लेकर उत्साहित थे कि राज्य के 9000 Jio मोबाइल टावरों में से 1300 में बिजली की आपूर्ति नहीं है।

Senior Youth Congress leader cheers for criminal behaviour
युवा कॉन्ग्रेस नेता ट्वीट

श्रीवत्स ने आगे कहा, “किसानों को समझ आ गया है कि मोदी से सीधे बात करने का एकमात्र तरीका अंबानी को तकलीफ देना है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आपराधिक व्यवहार को पूरे देश में दोहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर यह पूरे भारत में होने लगा, तो मोदीजी दौड़ते हुए सिंघु बॉर्डर पर आएँगे।”

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने ‘प्रदर्शनकारी’ किसानों से अपील की थी कि वे बिजली बाधित करके या फिर बुनियादी ढाँचे को नष्ट करके आम जनता के लिए असुविधा उत्पन्न न करें। उन्होंने ‘प्रदर्शनकारियों’ से कनेक्टिविटी को बंद न करने और टेलीकॉम वर्कर्स के साथ मारपीट न करने का भी आग्रह किया था। हालाँकि, ऐसा लगता है कि ‘प्रदर्शनकारी किसानों’ ने मुख्यमंत्री की अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया और अब ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस नेता भी इस तरह की अराजकता की वाह-वाही कर रहे हैं। वहीं आज भी CM ने टॉवर में तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

‘प्रदर्शनकारी’ रिलायंस जियो टावरों को निशाना बना रहे हैं क्योंकि उनका दावा है कि रिलायंस के साथ ही अडानी समूह नए कृषि कानूनों की मदद से किसानों का शोषण करेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि जब साइट मैनेजर ने प्रदर्शनकारियों को बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने से रोकने की कोशिश की तो उन्हें थप्पड़ मारा गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। बिजली लाइनों को तोड़ दिया गया और टावरों को कुल्हाड़ी मारने की कोशिश की गई।

उधर मोगा में मोबाइल टॉवर में तोड़-फोड़ करने खबर है। और ये सिलसिला पंजाब में बढ़ता ही जा रहा है।

गौरतलब है कि ‘किसानों’ का प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों की हरकत के कारण संदेह के घेरे में आता दिख रहा है। पिछले दिनों हमने वायरल वीडियो में किसानों को Jio मोबाइल टावर कुल्हाड़ी से काटते देखा और फिर बाद में एक नई वीडियो सामने आई, जिसमें वह जियो के जेनरेटर लूट कर शेखी बघारते नजर आए।

प्रदर्शन के नाम पर वीडियो में देखा जा सकता है कि ये कथित प्रदर्शनकारी टेलीकॉम टॉवर्स से जुड़े जियो जेनरेटर को वीडियो में ट्रैक्टर से बाँध कर उसे उसकी जगह से जबरदस्ती हटा रहे थे और फिर उसे सड़क पर घसीट कर गुरुद्वारे में ले जाकर डोनेट करते दिख रहे थे। इस दौरान ट्रैक्टर पर एक झंडा भी लगाया गया था और कई लोग उसके पीछे चल रहे थे।

दलित नेता डॉ उदित राज के समर्थकों ने हैक की कॉन्ग्रेस आईटी सेल की ज़ूम मीटिंग: उठाई उन्हें ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ बनाने की माँग

देश में ऐसे कम ही नेता हैं जिन्हें कॉन्ग्रेस नेता डॉ उदित राज जितना स्नेह और समर्थन हासिल होता है। सभी जानते हैं कि डॉ उदित राज के चाहने वालों की तादाद कितनी ज़्यादा है और वह अपने चाहने वालों के बीच कितने लोकप्रिय हैं, जिन्हें आम तौर पर उदितियंस (Uditians) कहा जाता है। उनके चाहने वालों ने एक बार फिर अपने प्रबुद्ध नेता के लिए अपनी वफ़ादारी और भक्ति दिखाई है हालाँकि, ऐसा करते हुए वह अक्सर कुछ ज़्यादा ही दूर चले जाते हैं।  

कॉन्ग्रेस के सामने फ़िलहाल नेतृत्व का संकट है ऐसे में डॉ उदित राज का वफ़ादार ‘फैन बेस’ पुरजोर माँग उठा रहा है कि उनके नेता को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाए। उदित राज के चाहने वाले अक्सर ट्विटर पर उनके समर्थन में हैशटैग ट्रेंड कराते हैं और उनका समर्थन करते हुए नज़र आते हैं। कॉन्ग्रेस नेता सोशल मीडिया की इस पूरी प्रक्रिया का भरपूर आनंद भी लेते हैं। 

उदितियंस ने हैक की कॉन्ग्रेस की ज़ूम मीटिंग, कहा उदित राज को बनाया जाए राष्ट्रीय अध्यक्ष 

इस बार उदितियंस ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कॉन्ग्रेस आईटी सेल की ज़ूम मीटिंग ही हैक कर ली। ज़ूम मीटिंग पर इस तरह धावा बोलने के बाद उदितियंस माँग उठाने लगे कि कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष पद डॉ उदित राज के हवाले किया जाए। इस मीटिंग में कॉन्ग्रेस दलित नेता डॉ उदित राज खुद शामिल हुए थे, फिर उनके एक समर्थक ने मीटिंग हैक की और कहा कि उदित राज को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाए। 

अपने चाहने वालों द्वारा उठाई गई इस माँग पर डॉ उदित राज पूरी नरमी से पल्ला झाड़ते हुए नज़र आए। उन्होंने कहा, “ये भाजपा आईटी सेल ने यह हरकत कॉन्ग्रेस की मीटिंग रोकने के लिए की है। भाजपा के पूरे आईटी सेल को इस प्रोपेगेंडा प्रचार की ज़िम्मेदारी मिली है कि मुझे कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया जाए।” लेकिन उनके वफ़ादार इस बात से ज़रा भी सहमत नहीं हुए, बल्कि वह इस बात से निराश हुए कि उनके प्रयासों का श्रेय भाजपा आईटी सेल को दे दिया गया। 

 कॉन्ग्रेस नेता उदित राज की प्रचंड लोकप्रियता 

डॉ उदित राज को मिलने वाला समर्थन कोई हाल फ़िलहाल की प्रक्रिया नहीं है बल्कि पिछले कुछ ही समय में यह तेजी से बढ़ा है। नवंबर की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों का ऐलान होने वाला था, उदितियंस ने ट्विटर पर ‘DrUditRajForPOTUS’ ट्रेंड करा दिया। उनका कहना था कि उदित राज की विशेषताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें POTUS (अमेरिकी राष्ट्रपति) बनाना नाइंसाफी होगी।

अगस्त 2020 के दौरान जब 23 कॉन्ग्रेसी नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पार्टी संकट को लेकर पत्र लिखा था तब अफ़वाहें सामने आई थीं कि कॉन्ग्रेस किसी गैर-गाँधी व्यक्ति को पार्टी का अध्यक्ष चुन सकती है। उसके ठीक बाद से ही ट्विटर पर #UditRajForCongressPresident ट्रेंड करने लगा। ऐसी अफ़वाहों के सामने आते ही उदितियंस ने भी अपनी कोशिशों की रफ़्तार बढ़ा दी। 

जहाँ एक तरफ डॉ उदित राज ने इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्हें कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक़ यह भाजपा आईटी सेल की साजिश थी लेकिन उनके चाहने वालों का कहना है कि उनकी यही माँग है और ऐसा करने के लिए उन्हें किसी से रुपए नहीं मिले। श्री उदित राज जी अक्सर लोगों के असल मुद्दों को लेकर मुखर रहते हैं और अपनी माँगों में वज़न भी रखते हैं जो कि राहुल गाँधी के बयानों में नहीं नज़र आता है। यह बात एक डिजिटल एक्टिविस्ट और उदित राज के घनघोर समर्थक ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कही।     

अमेरिका की फटकार के बाद इमरान खान ने लगाई पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई पर रोक

अमेरिका की चेतावनी से डरकर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने पत्रकार डेनियल पर्ल (Daniel Pearl) के हत्यारों की रिहाई पर रोक लगा दी है। अब पाकिस्तान ने ब्रिटेन में जन्मे अलकायदा आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख (Ahmed Omar Saeed Sheikh) और उसके तीन सहयोगियों को रिहा नहीं करने का निर्णय किया है।

हाल ही में, सिंध हाईकोर्ट ने अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारे पाकिस्तानी आतंकी अहमद उमर शेख, फहाद नसीम, सईद सलमान साकिब और शेख मोहम्मद आदिल को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था।

डेनियल पर्ल हत्याकांड की सुनवाई करते हुये सिंध हाईकोर्ट ने कहा था कि चारों आतंकवादियों को जेल में रखना गैरकानूनी है। जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे चिंताजनक करार दिया था।

पाकिस्तान के द्वारा इन आतंकियों की रिहाई के फैसले पर अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका डेनियल पर्ल की हत्या के लिए जिम्मेदार कई आतंकवादियों को रिहा करने के सिंध हाईकोर्ट के 24 दिसंबर के आदेश की खबरों से चिंतित हैं।

अमेरिका ने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि अभियुक्तों को इस समय रिहा नहीं किया गया है। अमेरिका इस मामले में सभी घटनाक्रम की निगरानी करता रहेगा और साहसी पत्रकार के रूप में डेनियल पर्ल की विरासत का सम्मान करते हुए उनके परिवार का समर्थन करना जारी रखेगा।

अमेरिकी सरकार की सख्त प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान सरकार ने सभी आरोपितों की रिहाई पर रोक लगा दी है। सरकार के फैसले के बाद सिंध हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है, तो उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश के अनुसार सिंध प्रांत की सरकार उनको रिहा नहीं करेगी।

उल्लेखनीय है कि 38 साल के अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख थे और जनवरी, 2002 में पाकिस्तान स्थित कराची में अलकायदा से जुड़े आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर हत्या कर दी थी।

पर्ल का सर कलम कर दिया गया और लगभग एक महीने बाद कराची के यूएस दूतावास को इस क्रूरता का एक ग्राफिक वीडियो भी भेजा गया। डेनियल आईएसआई और आतंकी संगठन अलकायदा के बीच संबंधों को लेकर एक खोजी खबर के सिलसिले में पाकिस्तान गए थे।

इससे पहले, वर्ष 1994 में आतंकी अहमद उमर शेख, जो की पर्ल की हत्या में आरोपित है, ने कश्मीर में 4 विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था। उमर शेख द्वारा अपहरण किए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में उमर शेख को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद उमर शेख गाजियाबाद समेत देश की कई जेलों में रहा। लेकिन, वर्ष 1999 में एयर इंडिया के विमान के अपहरण के बाद जिन आतंकवादियों को छोड़ा गया, उनमें उमर शेख भी शामिल था।

राहुल बाबा बैंकॉक क्यों जाते हैं? | Ajeet Bharti on Rahul Gandhi foreign trips?

चाहे पार्टी की हार हो, टिकट बाँटना हो, कोई आंदोलन चल रहा हो, चुनाव आने वाले हों, संसद सत्र हो… राहुल गाँधी यूरोप-थाइलैंड-बैंकॉक करते रहते हैं…

पूरा वीडियो यहाँ देखें

अमेजन के ‘रेप साहित्य’ में ‘रं$# कु*या’ हिंदू महिला लेती है बलात्कार का आनंद, करती है मुस्लिम के लिंग की पूजा

अमेजन के किंडल एडिशन पर साहित्य के नाम पर तमाम तरह की अश्लील और रेप कल्चर को डिफाइन करने वाली सामग्री मौजूद हैं। शर्मनाक बात यह है कि इसमें खास कर मुस्लिम युवकों और हिंदू महिलाओं का प्रमुख रूप से जिक्र किया गया है।

स्वराज पर प्रकाशित लेख के अनुसार इस प्लेटफऑर्म पर Indian Hindu wife’s affair with her Muslim lover नाम की किताब अनलिमिटिड सब्सक्रिप्शन पर फ्री में पढ़ने के लिए मौजूद है। इस किताब की लेखिका का नाम नीलिमा स्टिवन्स है। 35 पृष्ठों की किताब के कवर पेज में एक व्यक्ति इस्लामी टोपी पहने दिखता है। वहीं महिला डीप क्लिवेज दिखाते हुए बिंदी लगाए नजर आती है। 

The cover of the e-book
स्वराज की रिपोर्ट के एक पैरा ग्राफ में किताब केअंश

इस किताब में श्वेता नाम की महिला और उसकी सहेली राजिया के शौहर अशरफ के बीच शारीरिक संबंधों पर बात हुई है। हिंदू महिलाओं के चरित्र पर सवाल खड़ा करते हुए मुस्लिम युवक को एक स्टड की तरह दिखाया गया है। अंत में ये भी बता दिया गया कि शाकाहारी श्वेता कैसे अशरफ के कहने पर माँस खाने लगती हैं और यौन संबंध बनाने के लिए उससे पैसे लेने को भी राजी हो जाती है।

स्वराज्य की रिपोर्ट कहती है कि इस लेखक के नाम पर किंडल में 20 किताब मौजूद हैं। अगली किताब का नाम- Indian wife cheating: sex with neighbour है। इस किताब में एक हिंदू महिला की व्याख्या एक रूढ़िवादी अय्यर परिवार से जोड़ कर की जाती है जो धार्मिक माहौल में पलती-बढ़ती है। इसके अलावा इस किताब में दूसरा कैरेक्टर महिला का पड़ोसी है जिसका नाम मुर्शीद शेख है। किताब में महिला के लिए मद्रासी वेश्या (Madrasi prostitute) और रं$# हिंदू कु*या (whore Hindu bitch) जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है।

एक अन्य किताब इसी लेखिका की  Cheating wife’s affair with husband’s friend के नाम से है। किताब के एक पैराग्राफ में हिंदू महिला को लेकर कहा गया है, “विनीता मुस्लिम युवक के लिंग की पूजा करती है और उसके गुप्तांग के कोने कोने से होकर गुजरती है।”

इसके बाद हिंदू महिला और मुस्लिम पुरूष के संबंधों पर रेप फैंटसी को लिखने वालों में एक नाम सुनीता सरण का भी है। इस लेखिका की आधा दर्जन किताबें ईबुक के रूप में किंडल पर मौजूद हैं। इनमें से एक किताब में ‘भारतीय पत्नी की कामुक दास्तां’ का जिक्र किया जाता है और कहा जाता है कि कैसे वो मुस्लिम माफिया के लिए रात में भोग वस्तु बन गई।

इस किताब में एक आदमी दाढ़ी में दिख रहा है जबकि महिला साड़ी में नजर आ रही हैं। किताब का उद्देश्य सिर्फ ये बताना है कि कैसे महिला को उसकी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर हर रात मुस्लिम डॉन उसका बलात्कार करता है और महिला चुपके चुपके इस बलात्कार को एंजॉय करती है।

इस रेप लिटरेचर को बढ़ावा देने वाले अगले लेखक का नाम पविश सिंह है। इनकी किताब किंडल पर 226 रुपए में मौजूद है। इसका शीर्षक Hindu wife sexy encounter with Muslim driver है।

अन्य लेखक इस सूची में निक्की रवलानी हैं। इनकी दो किताबें इस प्लेटफॉर्म पर हैं। इनमें से एक का नाम Four tales of high-class married Hindu women being taken by low-class Muslim males है। जो किंडल पर मात्र 164 रुपए में मौजूद है। ये साऱी किताबें 2015,2016, 2017 में पब्लिश हुई हैं।

बता दें कि ये सारी किताबें, इनमें निहित विषय सामग्री आदि से साफ पता चल रहा है कि किताबों के पब्लिशर ने अमेजन किंडल पर डायरेक्ट पब्लिशिंग सर्विस का फायदा उठाकर आसानी से इन घृणित विषयों को पब्लिक स्पेस में उतारा। इसके लिए फेक पब्लिशर्स के नामों का इस्तेमाल भी किया गया।

गौरतलब है कि इस प्लेटफॉर्म पर जहाँ हिंदू महिलाओं और मुस्लिम पुरूषों को लेकर अश्लील सामग्री मौजूद है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं के साथ हिंदू पुरूषों के संबंध पर भी किताब है। मगर, इसमें भी हिंदू पुरूष को अत्याचारी दिखाया गया। जैसे सना खान की किताब के कवर पेज में लिखा है मुस्लिम बीवीयाँ वेश्या बन रही हैं और नीचे लिखा है भारतीय मुस्लिम महिला को हिंदू स्टड ने किया डॉमिनेट।

On Kindle Store, A Sea Of Pornographic And Rape Fantasy Books Featuring Hindu Women And Muslim Men

अब ऐसी किताबों के शीर्षक पढ़कर कहाँ से लग रहा है कि इनका मकसद समाज को साहित्य के नाम पर उसका आइना दिखाना है। वो भी तब जब आए दिन हिंदू महिलाएँ कट्टरपंथियों की बर्बरता का शिकार हो रही हैं। इन किताबों के शीर्षक भर पढ़ लेने से ऐसा लगता है जैसे रेप आदि का महिमामंडन किया जा रहा हो और एक विशेष समुदाय की महिलाओं और पुरूषों को मलिन किया जा रहा हो

याद दिला दें कि अमेजन पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का सिलसिला बहुत पुराना है। साल 2017 में सुषमा स्वराज ने इस मामले को उठाया था। जिसके बाद अमेजन को माफी माँगनी पड़ी थी। उस समय अमेजन ने डोरमेट पर हिंदू देवी देवताओं की तस्वीर को डाला था।

अब हाल में स्वराज्य पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा की रिपोर्ट के बाद महिला आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए अमजेन के वरिष्ठ अध्य़क्ष अमित अग्रवाल को ऐसी सामग्रियों पर रोक लगाने को कहा है जिनमें महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध को बढ़ावा दिया गया हो और एक समुदाय के लिए गलत संदेश दिया हो।

फेसबुक पर CM पिनराई विजयन की आलोचना पड़ी भारी: एयरपोर्ट कर्मचारी को धोना पड़ा नौकरी से हाथ

केरल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का नया मामला सामने आया है। कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (KIAL) के एक स्टाफ मेंबर केएल रमेश को फेसबुक पोस्ट के कमेंट सेक्शन में केरल के सीएम पिनराई विजयन के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणी करने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया

रिपोर्ट के अनुसार, 20 नवंबर को पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में रमेश ने अपने फेसबुक पोस्ट पर केरल के सीएम और राज्य सरकार की आलोचना की थी। उनके फेसबुक पोस्ट के खिलाफ कई ‘शिकायतें’ सामने आई। जिसके बाद  KIAL ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों ने जाँच का आदेश दिया था। रमेश को पोस्ट के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया, जिसे कथित तौर पर अनुशासनात्मक मानदंडों का उल्लंघन माना गया था। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सीएम पिनाराई विजयन भी KIAL के अध्यक्ष हैं।

KIAL उनके स्पष्टीकरण से ‘संतुष्ट’ नहीं हुआ और प्रबंध निदेशक वी. थुलासीदास ने रमेश को टर्मिनेशन लेटर जारी किया। रमेश एयरपोर्ट के फायर एंड रेस्क्यू विंग के सहायक प्रबंधक के रूप में काम करते थे।

रमेश ने KIAL अधिकारियों पर प्रतिशोध का आरोप लगाया

रमेश ने कहा, “मैंने समिति को बताया था कि मैं एक हिंदू हूँ और तिरुवनंतपुरम से हूँ और पोस्ट KIAL के संबंध में नहीं था। एक नागरिक के रूप में मुझे अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।” हालाँकि, उनका मानना है कि उन्होंने कन्नूर हवाई अड्डे पर कई अनियमितताओं के बारे में अधिकारियों को बताया था, जिसका खामियाजा उन्हें टर्मिनेशन के रुप में भुगतना पड़ा। कथित तौर पर रमेश ने अपने फेसबुक पोस्ट को हटा दिया था और माफी भी माँगी थी लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। जाँच समिति ने उन्हें टर्मिनेट कर दिया।

पद्मनाभस्वामी मंदिर की पंक्ति को लेकर त्रावणकोर शाही परिवार पर SC का फैसला

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम में ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को अपने नियंत्रण में लाने के केरल सरकार के प्रयास के खिलाफ फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने केरल उच्च न्यायालय के 2011 के फैसले को पलट दिया जिसने राज्य सरकार को मंदिर, उसके प्रबंधन और संपत्ति पर नियंत्रण रखने की शक्ति प्रदान की।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा और यूयू ललित की 2-सदस्यीय पीठ द्वारा पारित फैसले में कहा गया है कि त्रावणकोर परिवार के एक राजा की मौत परिवार और मंदिर के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी, यह परिवार द्वारा प्रबंधित किया जाना जारी रहेगा।

केरल में कम्युनिस्ट सरकार ने ‘आलोचकों’ को गिरफ्तार करने के लिए अध्यादेश पारित किया

कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली केरल राज्य सरकार ने कानून में धारा 118-ए को जोड़कर केरल पुलिस अधिनियम में विवादास्पद संशोधन लाया था जो मूल रूप से 2011 में पारित किया गया था।

नया सेक्शन पुलिस को मीडिया के खिलाफ कार्रवाई करने और संबंधित धारा के तहत संज्ञेय अपराध का पता लगाने की स्थिति में मामले दर्ज करने का अधिकार देता है। संशोधन में सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को डराने, अपमान करने या बदनाम करने के लिए कम्युनिकेशन के किसी भी माध्यम से अपमानजनक सामग्री का उत्पादन, प्रकाशन या प्रचार करने के लिए दोषी पाए जाने वाले लोगों को पाँच साल की कैद और 10,000 रुपए का जुर्माना देने का प्रस्ताव है।

Video: पूर्वी दिल्ली नगर निगम में पार्षदों के बीच चले जूते-चप्पल, भाजपा ने केजरीवाल सरकार पर लगाया सैलरी रोकने का आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा, दोनों दलों के पार्षद पूर्वी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के सदन में सोमवार (दिसंबर 28, 2020) की सुबह धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आपस में भिड़ पड़े। जुबानी भिड़ंत के साथ-साथ दोनों पार्टियों के नेताओं में जमकर भिड़ंत हुई और जूते-चप्पल भी चले।

सोमवार सुबह दिल्ली, ईस्ट एमसीडी कार्यालय के अंदर जमकर हंगामा हुआ। पूर्वी दिल्ली निगम में भाजपा के 47 नगरसेवक हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार नगर निगम के इस्तेमाल के लिए फंड जारी नहीं कर रही है।

भाजपा पार्षद दिल्ली सरकार पर निगम कर्मचारियों की सैलरी के लिए पैसा रिलीज नहीं करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। इस बीच दोनों पार्टियों के पार्षद आमने-सामने आ गए और बात हाथापाई तक पहुँच गई।

वीडियो में दोनों दलों के सदस्य एक-दूसरे के साथ हाथापाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के आरोपों के जवाब में, AAP ने भाजपा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उत्तरी नगर निगम में कथित तौर पर 2500 करोड़ रुपये घोटाले को लेकर AAP पार्षद हंगामा करने लगे। AAP पार्षदों ने माँग की कि महापौर इसकी जाँच CBI से कराएँ।

हंगामा इतना बढ़ गया कि एमसीडी कार्यालय में पार्षद एक-दूसरे पर जूते- चप्पल लहराने लगे। सदन में AAP पार्षद मोहिनी जीनवाल के हाथ में चप्पल और भाजपा पार्षद नीतू त्रिपाठी के हाथ में जूता देखा गया। महापौर ने नेता प्रतिपक्ष मनोज त्यागी और AAP पार्षद मोहिनी जीनवाल को सदन की कार्रवाई बाधित करने के आरोप में 15 दिन के लिए निलंबित कर दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हंगामे को लेकर आम आदमी पार्टी के तीन पार्षदों की ओर से दिल्ली के पटपड़गंज थाने में भाजपा पार्षद बिपिन बिहारी सिंह, संतोष पाल और कन्हैया लाल के खिलाफ शिकायत दी गई है। शिकायत में तीनों भाजपा पार्षदों पर मारपीट का प्रयास, धक्का मुक्की और गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की माँग की गई।

इससे पहले, 18 दिसंबर को भी एमसीडी फंडों की कथित हेराफेरी को लेकर दिल्ली विधानसभा में इसी तरह का हंगामा देखने को मिला था। AAP विधायकों ने कथित 2,500 करोड़ रुपए के घोटाले में सीबीआई जाँच की मांग के लिए विधानसभा में नारेबाजी की और बैनर लगाए थे।

महिलाओं की ड्राइविंग के लिए आवाज उठाने वाली एक्टिविस्ट को आतंकवाद सम्बन्धी धाराओं में 6 साल की जेल

सऊदी अरब की एक अदालत ने महिला अधिकार कार्यकर्ता लुजैन अल-हथलौल (Loujain al-Hathloul) को सोमवार (दिसंबर 28, 2020) के दिन पाँच साल और आठ महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह सजा ऐसे समय पर सुनाई गई है, जब तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों द्वारा उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

सऊदी मीडिया के अनुसार, अदालत ने मानवाधिकार कार्यकर्ता को ‘आतंकवाद विरोधी कानून द्वारा निषिद्ध विभिन्न गतिविधियों’ का दोषी ठहराया। हथलौल की दो साल और 10 महीने की सजा को निलंबित कर दिया गया है। हथलौल पर उस अदालत में मुकदमा चलाया जाए जो आतंकवादी मामलों को देखती है। सऊदी के अधिकारियों ने कहा कि हथलौल की गिरफ्तारी सऊदी के हितों को नुकसान पहुँचाने और विदेशों में शत्रुओं को समर्थन देने के संदेह में की गई थी।

वहीं, मानवाधिकार समूहों ने हाल ही में यह भी खुलासा किया था कि हथलौल सहित कुछ महिलाओं को महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया और उन्हें बिजली के झटके दिए गए, उनके साथ मारपीट और यौन उत्पीड़न जैसे दुर्व्यवहार किए गए। हालाँकि, सऊदी अरब के अधिकारी इन तमाम आरोपों को फर्जी बता रहे हैं।

31 वर्षीय लुजैन अल-हथलौल को मई 2018 में सऊदी अरब द्वारा महिलाओं के ड्राइविंग करने पर लगाए गए दशकों पुराने प्रतिबंध को हटाने से कुछ हफ्ते पहले एक दर्जन अन्य महिला कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनमें से ज्यादातर महिलाएँ ड्राइव करने के अधिकार के लिए अभियान चला रहीं थीं। उन पर आतंकवाद सम्बन्धी आरोप लगे हैं।

सऊदी अरब दुनिया में अकेला देश हुआ करता था, जहाँ महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी थी। इस देश में महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए जाते। ऐसे में, गाड़ी चलाने वाली महिलाओं पर ज़ुर्माना लगता है और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है।

सऊदी अरब की महिलाओं द्वारा इस रोक को हटाने के लिए कई अभियान चलाए गए। लुजैन अल-हथलौल को दिसंबर 01, 2014 में भी गाड़ी चलाकर देश की सीमा में घुसते वक्त गिरफ़्तार किया गया। आख़िरकार 73 दिनों की क़ैद के बाद लुजैन को रिहा कर दिया गया था।

सऊदी अरब में महिलाओं के ड्राइविंग के अधिकार के लिए पहली बार नवंबर, 1990 में 47 महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया था। उन्होंने इस कानून के विरोध में रियाद प्रांत की सड़कों पर गाड़ी चलाई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।

महिलाओं के आवाज उठाने के बाद वरिष्ठ इस्लामिक विद्वानों की परिषद ने फ़तवा तक जारी किया और महिलाओं के ड्राइविंग पर रोक लगा दी। इस फ़तवे में महिलाओं की ड्राइविंग करने को अशुभ और नकारात्मक परिणामों को आमंत्रण देने वाला बताया गया था। यहाँ तक कहा गया कि इस तरह महिलाओं की नजदीकी पुरुषों के साथ बढ़ेगी और वे विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होंगी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सऊदी अरब में कैद लुजैन अल-हथलौल ने अपनी आजादी की पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। उनके भाई ने बताया था कि हथलौल को एक वीडियो टेप में यह कहने की शर्त दी गई थी कि कैद के दौरान उन पर अत्याचार नहीं किया गया।

हर बड़े मौके पर ‘रणछोड़दास’ साबित हुए राहुल गाँधी: जानिए कब, किस मौके पर पार्टी को मझधार में छोड़ गए ‘युवराज’

मौका चाहे नए साल का हो, संसद सत्र का हो, चुनाव का हो या फिर राहुल गाँधी के जन्मदिन का… वो हर बड़े मौके पर विदेश की यात्रा पर होते हैं। मौका कॉन्ग्रेस स्थापना दिवस का है, लेकिन राहुल गाँधी इस मौके पर विदेश चले गए हैं। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि राहुल गाँधी विदेश दौरे पर इटली गए हैं। कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल एक छोटे से ट्रिप पर विदेश गए हैं। वहीं अब पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा है कि राहुल गाँधी अपनी नानी को देखने इटली गए हैं

इस विदेश यात्रा की खबर आते ही सोशल मीडिया पर राहुल के राजनीति को लेकर गंभीर न होने की चर्चा शुरू हो गई। पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है और उसके पास स्‍थाई अध्‍यक्ष तक नहीं है। राहुल की विदेश यात्राओं की टाइमिंग पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आइए जानते हैं कि हाल के दिनों में ऐसा कब-कब हुआ।

कोरोना काल में इटली से आए थे राहुल

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी इसी वर्ष फरवरी में भी विदेश दौरे पर थे। उस वक्त भाजपा ने राहुल को खूब टारगेट किया था। उसी वक्त इटली दुनिया में कोरोना का हॉटस्‍पॉट बन गया था। जिसके बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गाँधी की जाँच कराने की माँग की थी। सांसद हनुमान बेनीवाल ने तो इस मुद्दे को संसद में भी उठा दिया था। जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने इस बात की जानकारी दी थी कि राहुल की स्‍क्रीनिंग हुई थी और उन्हें कोरोना नहीं हुआ है।

जन्‍मदिन विदेश में मनाते रहे हैं राहुल गाँधी

एक तरफ जहाँ नरेंद्र मोदी अपना जन्‍मदिन ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाते हैं, राहुल विदेश में बर्थडे सेलिब्रेट करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के सिर्फ 44 सीटों पर सिमटने के बाद राहुल, जून 2014 में विदेश चले गए थे। 2015 की शुरुआत में राहुल करीब दो महीने तक देश से बाहर रहे। वह वियतनाम, कम्‍बोडिया, थाइलैंड के अलावा म्‍यांमार भी गए थे। अप्रैल 2015 में लौटे राहुल ने 19 जून 2015 को अपना बर्थडे दिल्‍ली में मनाया था। मगर अगले ही दिन वो माँ सोनिया गाँधी और बहन प्रियंका गाँधी के साथ विदेश चले गए। सभी 10 दिन बाद लौटकर आए। जून 2016 में राहुल ने अपना जन्‍मदिन तुर्की में मनाया। 2017 में इटली जाकर नानी संग बर्थडे मनाया।

महाराष्‍ट्र, हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राहुल की फॉरेन ट्रिप

पिछले साल महाराष्‍ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव थे। राहुल मतदान से कुछ समय पहले विदेश दौरे पर रवाना हो गए थे। बीजेपी ने इसे लेकर राहुल पर खूब हमला बोला था। जिसके बाद पार्टी के प्रवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्विटर पर लिखा था कि किसी के निजी जीवन को सार्वजनिक जीवन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

हालाँकि, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वो कहाँ गए थे। राहुल गाँधी 2014 से 2018 तक एक्सटर्नल अफैयर्स की स्टैंडिंग कमिटी के कुल 76 में से मात्र 9 मीटिंग में शामिल हुए। सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक की सारी मीटिंग में वो अनुपस्थित रहे। स्टैंडिंग कमिटी ऑन डिफेंस में इस साल एक में गए भी तो काफी लेट। यहाँ पर भी वो मुद्दे से इतर ही बोलते नजर आए। 

सितंबर 2020 में पूरा मानसून सत्र गायब रहे

संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर 2020 को शुरू हुआ और 1 अक्टूबर को समाप्त हुआ। इस पूरे सत्र के दौरान राहुल गाँधी नदारद रहे। सत्र शुरू होने से ठीक पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी मेडिकल टेस्ट के लिए अमेरिका रवाना हो गईं। सोनिया गाँधी के साथ उनके बेटे राहुल गाँधी भी गए। सोनिया-राहुल गाँधी के विदेश यात्रा पर जाने से लोगों ने सवाल भी उठाए कि क्या संसद के मानसून सत्र में चीन के खिलाफ बोलने से बचने के लिए सोनिया- राहुल अमेरिका निकल गए हैं? 

ये सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि गलवान में चीन से साथ झड़प के बाद से ही राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के सभी नेता काफी जोर-शोर से मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे थे। चीन मामले पर तकरीबन रोज कुछ ना कुछ ट्वीट कर रहे थे। लेकिन ठीक सत्र शुरू होने से पहले देश से बाहर जाने पर लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि सत्र से दौरान चीन के खिलाफ कुछ बोलना ना पड़े या उसकी आलोचना ना करनी पड़े, इसलिए अमेरिका चले गए। 

किसान आंदोलन को समर्थन देने वाले स्वयं गायब हैं

कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी ने देश में जारी किसान आंदोलन का एक बार फिर से शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को एक ट्वीट करते हुए किसानों को अपना समर्थन दिया। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने शनिवार को कहा कि सरकार को नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों की बात सुननी होगी। राहुल गाँधी ने किसानों के विरोध का एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा- “मिट्टी का कण-कण गूँज रहा है, सरकार को सुनना पड़ेगा, सरकार को (किसानों को) सुनना होगा।” किसानों का समर्थन करने वाले राहुल गाँधी अब खुद गायब हैं। वो छुट्टियाँ मनाने विदेश दौरे पर निकल गए हैं।

2019 में शीतकालीन सत्र में अनुपस्थित

राहुल गाँधी ने 18 नवंबर 2019 से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में एक दिन भी हिस्सा नहीं लिया। विपक्ष खासतौर से कॉन्ग्रेस ने सत्र के दौरान 370 हटाए जाने के बाद के कश्मीर के हालात, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद फारूक अब्दुल्ला की रिहाई, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और गाँधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा में कटौती और इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इस सत्र में एक बार भी संसद नहीं आए।

2018 की होली इटली में मनाई

02 मार्च को देश में होली मनाई जा रही थी और 03 मार्च को त्रिपुरा, नागालैंड व मेघालय के परिणाम आए, जिसमें कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त मिली। तब वह अपनी नानी को ‘सरप्राइज’ देने गए थे। उन्‍होंने ट्विटर पर ऐलान करते हुए लिखा था कि उनकी नानी 93 साल की हैं और वे होली पर उन्‍हें सरप्राइज देने जा रहे हैं। राहुल ने लिखा था कि वे अपनी नानी को गले लगाने के लिए बेताब हैं। इसके बाद उन्‍होंने मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा भी की थी।

2017 में ओस्लो, नार्वे की यात्रा

जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी दलों की एकता दिखाने के लिए लालू प्रसाद रैली कर रहे थे और चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था, तब भी राहुल गाँधी विदेश दौरे पर थे। पटना में लालू यादव की अगुवाई में आयोजित विपक्ष की एकता रैली में उनकी नामौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। उस समय मंदसौर में कॉन्ग्रेस का किसानों को लेकर आंदोलन चल रहा था और राष्ट्रपति पद के लिए कॉन्ग्रेस की ओर से मीरा कुमार को नामाकंन करना था।

2016 के विधानसभा चुनाव अधर में छोड़ गए थे राहुल गाँधी

दिसंबर 2016 में राहुल गाँधी नए साल का जश्‍न मनाने विदेश गए थे। उस वक्‍त अमरिंदर सिंह दिल्‍ली में डेरा डाले हुए थे ताकि राहुल लौटें और टिकट वितरण को अंतिम रूप दें। इसी समय नोटबंदी भी हुई थी और कॉन्ग्रेस पार्टी नोटबंदी को लेकर विरोध कार्यक्रमों की धार तेज कर रही थी। विदेश से लौटने के बाद वह अगले चार साल बाद तक इस मुद्दे पर बोलते रहे। इसी समय पंजाब के अलावा गोवा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले थे। राहुल दिसंबर-जनवरी के बीच 10 दिन तक विदेश में रहे।

दिसंबर 2015 में किया यूरोप का दौरा

अप्रैल 2016 में असम के विधानसभा चुनाव होने वाले थे। राहुल दिसंबर 2015 में यूरोप गए थे। उन्होंने यूरोप में ही नया साल मनाया था। असम चुनाव की तैयारियों को दरकिनार कर विदेश जाने पर खूब सवाल उठे थे। राहुल हर साल 2-3 बार छुट्टियों पर जाते रहे हैं। 2015 में ही बजट सत्र के दौरान अचानक 57 दिनों के लिए देश से बाहर चले गए। कहाँ गए थे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया था, “राहुल गाँधी को आत्मचिंतन, आत्ममंथन के लिए समय दिया गया है।” वह सप्ताह के अंत तक दिल्ली से बाहर रहेंगे और बजट के दौरान उपस्थित नहीं हो पाएँगे।” कॉन्ग्रेस की ओर से आए बयान के मुताबिक राहुल गाँधी ने चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार पर आत्मचिंतन और पार्टी की भविष्य की योजनाओं पर विचार करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से छुट्टी ली थी। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने राहुल की अनुपस्थिति के सवाल पर कहा था कि राहुल को कुछ वक्त चाहिए। राहुल कुछ हफ्तों में वापस आएँगे।

शुभेंदु अधिकारी की ‘नंदीग्राम चलो’ रैली से घबराई ममता: CM बनने के बाद पहली बार छोड़ा 7 जनवरी का कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने 7 जनवरी को नंदीग्राम में होने वाली अपनी बैठक रद्द कर दी है। ममता की जगह अब उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी बैठक में हिस्सा लेंगे। रामनगर से TMC विधायक अखिल गिरी ने ममता की अनुपस्थिति का कोई कारण बताए बिना सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को यह घोषणा की।

ममता बनर्जी द्वारा नंदीग्राम में इस बैठक का हिस्सा होने से इंकार करने का फैसला नंदीग्राम में ही कभी ममता बनर्जी के ‘सिपाही’ कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में जाने के बाद आया है।

वर्ष 2008 से ही प्रत्येक वर्ष 07 जनवरी के दिन नंदीग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और ग्रामवासी उन्हें याद कर शोक मनाते हैं। इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष शुभेंदु अधिकारी भी वहाँ मौजूद रहते हैं। वर्ष 2007 में 7 जनवरी को भरत, शेख सलीम और विश्वजीत इस आंदोलन में शहीद हो गए थे।

नंदीग्राम में एक रासायनिक केंद्र स्थापित करने के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के लिए भूमि अधिग्रहण करने के वामपंथी सरकार के कदम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 11 लोग मारे गए थे।

हर साल, TMC द्वारा 2007 के इस नरसंहार की याद में ‘शहीदों के स्मरण कार्यक्रम’ में बड़ी सभाएँ आयोजित की जाती हैं, जिस कारण 2011 में बंगाल में वाम सरकार का पतन हुआ और मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी की ताजपोशी हुई। यह पहला मौका है, जब ममता बनर्जी ने इस कार्यक्रम को छोड़ने का फैसला लिया है।

बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा में हाल ही में शामिल हुए नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा ‘नंदीग्राम चलो’ रैली शुरू करने की घोषणा की है। संयोग से, शुभेंदु नंदीग्राम के पूर्व विधायक भी हैं। उन्होंने भाजपा में शामिल होने से पहले विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया।

गौरतलब है कि गत 17 दिसंबर को ही शुभेंदु अधकारी ने आधिकारिक रूप से तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ दी, और सत्ताधारी पार्टी में उनका 22 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपने विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया, जिसे अब स्पीकर बिमन बनर्जी द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।