Home Blog Page 4187

UP के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं का इतिहास, हर स्कूल में मनेगा ‘साहिबजादा दिवस’: CM योगी का ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि राज्य के पाठ्यक्रम में अब छात्रों को सिख गुरुओं के जीवन और बलिदान के बारे में पढ़ाया जाएगा। साथ ही अयोध्या भी विश्व स्तरीय शहर बनेगा। मुख्यमंत्री ने अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों एवं माता गुजरी जी की शहादत को समर्पित ‘साहिबजादा दिवस’ के अवसर पर गुरुबाणी कीर्तन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ये देश और धर्म के प्रति हमारे कर्तव्यों को याद कराने वाला दिवस है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको एक बात का हमेशा स्मरण रखना होगा कि इतिहास को विस्मृत कर के कोई भी व्यक्ति, जाति या कौम कभी आगे नहीं बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास पढ़ने पर पता चलता है कि विदेशी आक्रांताओं ने जब भारत के धर्म और संस्कृति को भ्रष्ट करने, भारत के वैभव को पूरी तरह से समाप्त करने को अपना एकमात्र लक्ष्य बना लिया था, तब भक्ति के माध्यम से जो अभियान प्रारंभ हुआ था, कीर्तन उसका आधार बना था।

सीएम योगी ने कहा कि कुछ गलतियों के कारण गुरु पुत्रों को विधर्मियों के हाथों जिस क्रूरता का सामना करना पड़ा, वैसी स्थिति आने वाले समय में किसी के साथ न हो, यह दिवस सदैव हम सबको एक नई प्रेरणा प्रदान करता है। यूपी सरकार ने फैसला लिया है कि हर साल दिसंबर 27 को यूपी के हर स्कूल में ‘साहिबजादा दिवस’ मनाया जाएगा। गुरुओं के योगदानों पर केंद्रित वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ होंगी और उनकी जीवनी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी।

सीएम योगी ने लोगों को याद दिलाया कि किस तरह औरंगजेब के आदेश पर सरहिंद के नवाब वजीर खान ने छोटे साहिबजादे अर्थात साहिबजादा जोरावर सिंह तथा साहिबजादा फतेह सिंह को इस्लाम स्वीकार न करने तथा अपने धर्म पर दृढ़ रहने की सजा के फलस्वरूप उन्हें जीवित ही दीवार में चुनवा दिया था। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म व संस्कृति की रक्षा करने और भारत को विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार से मुक्त करने के लिए ही चार साहिबजादों का बलिदान हुआ।

उधर अयोध्या में भी अब मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने के साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं के लिए काम चालू है। चौड़ी सड़कें और मल्टी लेवल पार्किंग पेयजल के साथ-साथ शौचालय और एल्क्ट्रिक कारों की सुविधा भी मिलेगी। रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। गाइडों के प्रशिक्षण का काम शुरू हो रहा है। अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में भी विकसित किया जाएगा। कई जगहों पर मल्टी लेवल पार्किंग होगी।

2020 के आखिरी ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने भी याद दिलाया था कि कैसे अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें। महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें। लेकिन, हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस और इच्छाशक्ति दिखाई। उन्होंने याद किया कि दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊँची होती रही, मौत सामने मँडरा रही थी, लेकिन, फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए।

‘वीर तुम बढ़े चलो’: राहुल गाँधी ने जिनकी कविता के साथ की छेड़छाड़, उनके परिजनों ने कहा – ‘माफी माँगिए’

राहुल गाँधी सोशल मीडिया पर एक कविता ट्वीट कर के फँस गए हैं। दिल्ली में मोदी सरकार के 3 कृषि कानूनों के खिलाफ 1 महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में उन्होंने एक कविता ट्वीट की थी, जिसके बाद इस कविता की रचना करने वाले दिवंगत कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी के परिजनों ने ही उनसे माफ़ी माँगने को कहा है। ‘वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!’ उनकी लोकप्रिय कविताओं में से एक है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर आरोप है कि उन्होंने इस कविता की पंक्तियों के साथ छेड़छाड़ करते हुए इसे गलत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी तरफ से कुछ शब्दों को जोड़ कर तुकबंदी की और फिर इसे ट्विटर पर डाल दिया। दिवंगत कवि के परिजनों ने सात दशक पुरानी कविता की मूल भावना से छेड़छाड कर उसका मखौल उड़ाने का आरोप लगाते हुए माफी माँगने की माँग की है। राहुल गाँधी ने ट्वीट किया था:

वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो
वॉटर गन की बौछार हो या
गीदड़ भभकी हज़ार हो
तुम निडर डरो नहीं
तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो
अन्नदाता तुम बढ़े चलो!

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी के पुत्र डॉक्टर विनोद कुमार माहेश्वरी ने इस बात पर आपत्ति जताई कि इस कविता को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। आगरा कॉलेज के प्राचार्य रहे विनोद ने कहा कि ‘बच्चों के गाँधी’ नाम से विख्यात रहे उनके पिता ने बच्चों के लिए दो दर्जन से अधिक साहित्य लिखे और उनकी इस कालजयी रचना को पढ़ कर न जाने कितने ही बच्चे आज प्रौढ़ावस्था को प्राप्त हो गए और अब भी बच्चे इसे पढ़ कर प्रेरणा लेते हैं।

उन्होंने राहुल गाँधी को संबोधित करते हुए कहा, “समय के शिलालेख पर अमिट ऐसी रचना को पैरोडी के रूप में आपके द्वारा प्रस्तुत किए जाने से मुझे और मेरे परिवार को पी़ड़ा हुई है। आप स्वयं विचार करें कि क्या यह कविता और कवि की आत्मा के साथ न्याय है? राहुल गाँधी जी, आपने उसी कविता का मजाक बनाया है, जो घोर निंदनीय है, इस पर माफी माँगनी चाहिए।” उन्होंने इस कविता को इस तरह पेश किए जाने पर आपत्ति जताई।

वहीं द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी के पौत्र प्रांजल माहेश्वरी ने याद दिलाया कि ये पंक्तियाँ उनके दादा ने लिखी हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी को सलाह दी कि वो दिल से इन पंक्तियों को सीखें, क्योंकि उन्होंने जो लिखा है, वो इसकी सही पंक्तियाँ नहीं हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से माहेश्वरी परिवार की आपत्तियों का कोई जवाब नहीं दिया गया है। द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता का सही रूप ये है, जो आज भी कई पाठ्य पुस्तकों का हिस्सा है:

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

इधर हमेशा की तरह राहुल गाँधी फिर अपनी विदेश यात्रा पर निकल चुके हैं। मीडिया में यह खबर छाई हुई है कि कॉन्ग्रेस नेता कतर एयरलाइंस की फ्लाइट से मिलान (इटली) के लिए रवाना हो चुके हैं। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी इस बात की पुष्टि की है कि राहुल गाँधी एक ‘शॉर्ट ट्रिप’ पर गए हुए हैं। वो ऐसे समय में विदेश गए हैं, जब सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को कॉन्ग्रेस का स्थापना दिवस भी है और उनकी पार्टी ‘किसान आंदोलन’ को लेकर खासी मुखर है।

मुस्लिम पति की ईसाई बीवी के पास बाइबिल, कुरान में देख कर दी सजा: छड़ी से पीट-पीट अधमरा किया, फिर पिलाया कीटनाशक

युगांडा में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी ईसाई पत्नी के पास बाइबिल देख लिया। इसके बाद कुरान में ‘सजा’ देख कर न सिर्फ उसकी पिटाई की, बल्कि उसे जबरन कीटनाशक भी पिलाया। ज़ुबेदा नबिरये बुगिरि जिले के मतोवु गाँव में रहती हैं और उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी की थी। महिला ने बताया कि उसके पति ने उसके सूटकेस में दो बाइबिल देख लिया था – एक अंग्रेजी अनुवाद में और एक स्थानीय भाषा में। इसके बाद वो आग-बबूला हो गया।

उसका पति बार-बार उससे पूछ रहा था कि क्या वो ईसाई मजहब का अनुसरण करती है? 38 वर्षीय महिला ने जवाब दिया कि वो बाइबिल और कुरान के कंटेंट्स की तुलना कर रही थीं और दोनों का ही अध्ययन करती हैं। इसके बाद उसके पति ने कुरान से वो सुरा पढ़ कर सुनाया, जिसमें बताया गया है कि अगर पत्नी अपने पति की बात टालती है तो उसके साथ क्या किया जाना चाहिए। इसके बाद उसने जम कर उसकी पिटाई की, फिर जहरीला कीटनाशक पीने को मजबूर किया।

उसने उसे फंगीसाइड Dithane M-45 लेने के लिए कहा। उसका पति उसके मुँह में ये केमिकल डालते हुए छड़ी से लगातार उसकी पिटाई कर रहा था। इसके बाद वो बेहोश हो गईं। उसके पति ने उसे बेहोश देख कर उसे केले के एक पेड़ के नीचे फेंक दिया। वहीं पर उसके पड़ोसियों ने उसे खून से लथपथ और उल्टियाँ करते हुए देखा। वो लगातार रो रही थीं। फ़िलहाल उसे अस्पताल में इलाज के बाद एक ईसाई परिवार के साथ रखा गया है।

महिला ने बताया कि वो अपने पति से दूर रहना चाहती है, लेकिन उसके 19, 16 और 9 साल के तीन बच्चे हैं, जिनके बारे में वो हमेशा सोचती रहती है। इसी डर से उसने पुलिस में कोई मामला भी नहीं दर्ज कराया है। ईसाई बहुल युगांडा में मुस्लिम नेता अक्सर दावा करते हैं कि वो जल्द ही बहुमत में आएँगे। कई ईसाईयों को वहाँ प्रताड़ित किए जाने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। अक्टूबर 31 को एक चर्च के पादरी को पीट-पीट कर मार डाला गया था।

इसके बाद नवंबर में कुछ मुस्लिमों ने एक अन्य पादरी की उसके बेटे सहित हत्या कर दी थी। पादरी की पत्नी ने बताया भी था कि इस्लाम की आलोचना करने के कारण उन्हें अक्सर धमकियाँ आती थीं। इसी तरह का एक अन्य मामला भी युगांडा में ही सामने आया है, जहाँ नमुतबि नामक महिला का उसके मुस्लिम पति ने गला दबाया और फिर तलाक दे दिया। उसने जल्द ही दूसरी शादी भी कर ली। उसने अपने पति से दहेज़ में 180 डॉलर और 13 गायें ली थी, जिसे उसे अब लौटाना होगा।

स्थानीय शेखों ने कहा है कि अगर वो पेमेंट नहीं करती हैं तो उन्हें जेल जाना होगा। ये महिला अपने तीन बच्चों के साथ उनके भरण-पोषण का जिम्मा उठाए हुए है। ब्रेंडा नमुतबि ने एक चर्च में ईसाई धर्म अपनाया था। बुड़ुका जिले में जूलियस मूसीसी नामक 16 वर्षीय युवती को सिर्फ इसीलिए मार डाला गया था, क्योंकि उसने इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया। युगांडा की मीडिया के अनुसार, वहाँ के ईसाई अब डरे हुए हैं।

घोटाले में फँसी मीडिया कंपनी के कर्मचारियों को CM रिलीफ फंड से सैलरी… पूरे 23 महीने: ममता सरकार के कारनामे का खुलासा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले शारदा चिटफंड घोटाले में ममता बनर्जी सरकार का नया कारनामा उजागर हुआ है। सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में दावा किया है कि सीएम रिलीफ फंड के पैसों का इस्तेमाल सरकार ने घोटाले में फँसी कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए किया।

सरकारी फंड से तारा टीवी (शारदा समूह से जुड़ी कंपनी) के कर्मचारियों को पूरे 23 महीने सैलरी दी गई। यह कंपनी पूरे घोटाले का खुलासा होने के बाद जाँच के केंद्र में थी।

सीबीआई ने कोर्ट में बताया कि साल 2013 से लेकर अप्रैल 2015 के बीच तारा टीवी के कर्मचारियों के लिए रिलीफ फंड से हर माह 27 लाख रुपए कंपनी को दिए गए। अपने आवेदन में CBI ने लिखा, “ये राशि कथित तौर पर मीडिया कंपनी के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए दी गई, जो जाँच के तहत शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज का हिस्सा थी।” इतना ही नहीं सीबीआई ने यह भी बताया कि फंड से इस बीच टीवी एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन को कुल 6.21 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

बता दें कि सीएम रिलीफ फंड का उपयोग किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए किया जाता है। लेकिन एक कंपनी के कर्मचारियों को इससे सैलरी देने का यह पहला मामला सामने आया है।

दैनिक भास्कर के अनुसार, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने कोर्ट में बताया कि कोलकाता हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को कंपनी के फंड से सैलरी देने को कहा था, लेकिन बंगाल सरकार ने CM रिलीफ फंड का पैसा दे दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे जाँच के लिए राज्य के मुख्य सचिव से जानकारी माँगी गई थी, मगर राज्य सरकार ने आधे-अधूरे दस्तावेज ही मुहैया कराए।

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी की फिर माँग की, जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में ही जमानत मिली थी। जाँच एजेंसी का कहना है कि राजीव पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे, इसलिए गिरफ्तारी जरूरी है।

गौरतलब है कि साल 2013 में राजीव कुमार के बिधाननगर पुलिस कमिश्नर होते हुए घोटाले का खुलासा किया गया था। जिसके बाद वह राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल जाँच टीम का हिस्सा थे। 2014 में जब इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई, तब कई अन्य बातें सामने आईं और इसमें जाँच एजेंसी ने पूरे मामले में राजीव कुमार की भूमिका पाई।

पूर्व कोलकाता कमिश्नर राजीव कुमार से हिरासत में पूछताछ की माँग करते हुए सीबीआई ने कहा कि जाँच से यह भी पता चला है कि पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ त्रिणमूल और शारदा समूह के साथ मिलकर बिधाननगर पुलिस ने राजीव कुमार के कहने पर सबूत छुपाए।

बता दें कि शारदा चिटफंड ने पश्चिम बंगाल में तीन फर्जी स्कीमें चलाकर लाखों लोगों से लगभग 2,460 करोड़ रुपए की धोखेबाजी की थी। 2013 में जब इसका खुलासा हुआ, तो लोगों को पता चला कि उनके करोड़ों रुपए डूब गए। ईडी की जाँच रिपोर्ट बताती है कि अब भी 80 फीसद जमाकर्ताओं का भुगतान किया जाना बाकी है।

नेपाल पहुँची चीन की उच्च-स्तरीय टीम, निवेश डूबने का डर: भारत के 3 दौरों ने फेल कर दिया यांकी का दाँव

चीन का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार (दिसंबर 27, 2020) को काठमांडू पहुँचा और तुरंत ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) को टूट से बचाने के काम में लग गया। नेपाल में अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने में चीनी राजदूत होउ यांकी सफल नहीं हो पाई हैं, इसीलिए बीजिंग से गुओ येझोउ के नेतृत्व में 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सब ठीक करने के इरादे से आया है। भारत के अधिकारियों के हालिया दौरों से भी चीन नाराज है।

गुओ येझोउ चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप-मंत्री हैं। दिसंबर 20 को पीएम ओली द्वारा संसद भंग किए जाने की घोषणा के बाद चीन की ये टीम काठमांडू आई है। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के सहयोगी भेष राज अधिकारी ने बताया कि चीनी टीम ने नेपाल के राष्ट्रपति से मुलाकात की है। लेकिन, ‘शीतल निवास’ ने इस बैठक के सम्बन्ध में कोई भी विवरण साझा करने से इनकार कर दिया है।

इसके बाद शाम के 7:30 बजे चीनी टीम बालूवाटर पहुँची और वहाँ पीएम ओली के साथ उसकी बैठक हुई। नेपाल के वित्त मंत्री और NCP के राष्ट्रीय महासचिव बिष्णु पौडेल भी इस बैठक में मौजूद रहे। ये बैठक 2 घंटों तक चली। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो इस बैठक का हिस्सा नहीं था। चीन ने ही मई 2018 में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी का गठन करवाया था, ऐसे में वो इसके टूट के कारण अपने निवेश पर होने वाले असर की आशंका से चिंतित है।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेताओं को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने बीजिंग बुला कर ट्रेनिंग दी है। NCP ने सितम्बर 2019 में 2 दिनों का एक कार्यक्रम रखा था, जिसमें CCP के कई नेता आए थे। साथ ही राजदूत होउ यांकी ने किस तरह दो-दो बार विवाद को स्थिर किया, इसकी भी मीडिया में खूब रिपोर्टिंग हुई। चीन पीएम ओली के संसद भंग करने के निर्णय से भी हतप्रभ रह गया था। ऐसे में चीन का ये प्रतिनिधिमंडल सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सन्देश लेकर नेपाल आया है।

जियोपोलिटिकल और सुरक्षा कारणों से चीन नहीं चाहता है कि नेपाल की सत्ताधारी पार्टी टूटे। मई में नेपाल में चुनाव होने की भी बात कही जा रही है, ऐसे में देखना होगा कि चीन क्या रुख अपनाता है। नेपाल में चीन का भारी निवेश है और उसकी टीम स्थिति का यही आकलन करने आई है कि नई परिस्थितियों में उस निवेश पर क्या असर पड़ेगा। नेपाल में चीनी टीम ने नेपाल पुलिस की सुरक्षा को भी ठुकरा दिया है।

चीन की इस टीम का विरोध भी खूब हुआ, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। चीनी दूतावास के बाहर 27 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। RAW के मुखिया सुमंत गोयल, भारतीय सेना प्रमुख MN नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से मुलाकात के बाद ओली के भारत विरोधी तेवर ढीले पड़े थे। भारत की तरफ से इन तीन दौरों ने नेपाल में चीन को चिंतित कर दिया है।

पोखरा में चीन एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना रहा है। साथ ही काठमांडू में रिंग रोड का विस्तारीकरण किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण चीनी निवेशों को धक्का लगा है। सुरक्षा कारणों से भी चीन NCP में टूट के खिलाफ है। नेपाल की राजनीति में चीन इस तरह से कभी सक्रिय नहीं रहा। अब चीन इसीलिए नाखुश है क्योंकि वो NCP नेताओं के बीच ‘गिव एंड टेक’ पर सहमति नहीं बन पाई। ऊपर से लोग चीन का विरोध भी कर रहे हैं।

IPS लिपि सिंह के पिता बने JDU के अध्यक्ष: नीतीश को कम सीटों पर जीत की कसक, दूसरे राज्यों में करेंगे पार्टी का विस्तार

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकार चलाने पर अपना पूरा फोकस रखने की बात कहते हुए जदयू (JDU) अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने फिर इस पद के लिए रामचंद्र प्रसाद (RCP) सिंह का नाम प्रस्तावित किया। इसके बाद उन्हें सर्वसम्मति से जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इस पद पर कभी जॉर्ज फर्नांडिस और शरद यादव जैसे नेता रहे थे। RCP सिंह, IPS अधिकारी लिपि सिंह के पिता हैं।

राज्यसभा सांसद RCP सिंह का नीतीश कुमार से पुराना जुड़ाव रहा है। जब नीतीश केंद्रीय मंत्री हुआ करते थे, तब उनके ही मंत्रालय में अधिकारी के रूप में वो तैनात थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश ने उन्हें बिहार बुला लिया। फिर IAS का पद छोड़ कर वो राजनीति में आ गए। RCP सिंह के दामाद सुहर्ष भगत भी डीएम हैं, ऐसे में इस परिवार को बिहार के सबसे प्रभावशाली परिवारों में गिना जाता है।

जदयू कार्यकारिणी को सम्बोधित करते हुए नीतीश कुमार ने खुद को निःस्वार्थ बताते हुए कहा कि वो तो मुख्यमंत्री बनना ही नहीं चाहते थे, लेकिन दबाव के कारण बने। उन्होंने कहा कि वो अब भी तैयार हैं कि NDA किसी को भी सीएम पद दे दे, भले ही वो भाजपा का ही क्यों न हो। बिहार सीएम ने कहा कि उन्होंने राजनीति में समझौते नहीं किए। उन्होंने जदयू नेताओं को भरोसा दिया कि वो पार्टी छोड़ नहीं रहे, बल्कि पार्टी को समय कम दे पा रहे थे, इसीलिए अध्यक्ष पद छोड़ा।

2019 में जदयू अध्यक्ष चुने गए नीतीश कुमार का अभी सवा साल का कार्यकाल बाकी था। जैसा कि उन्होंने बैठक में भी कहा, नेताओं को अब दूसरे राज्यों में पार्टी के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। नीतीश पहले भी ऐसा कर चुके हैं। जब 2014 लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली तो उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ उस पर जीतन राम माँझी को बिठा दिया था। अब विधानसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन गिरा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के मन में ये कसक थी कि भाजपा ने लगभग बराबर ही सीटों पर चुनाव लड़ कर जदयू से डेढ़ गुना से भी अधिक सीटें जीत लीं। जहाँ भाजपा को 74 सीटें मिलीं, नीतीश को मात्र 43 से संतोष करना पड़ा। नीतीश कुमार इस असमंजस में हैं कि जब 2019 लोकसभा चुनाव में जदयू ने 16 सीटें जीत लीं, तो डेढ़ वर्ष में ही ऐसा क्या बदल गया। वो लगातार कार्यकर्ताओं और हारे हुए उम्मीदवारों से फीडबैक ले रहे थे।

JDU की स्थापना से दिसंबर 2003 से अप्रैल 2006 तक जॉर्ज फर्णांडिस, 2006 से अप्रैल 2016 तक शरद यादव और इसके बाद से नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। कहा जा रहा है कि वो अन्य राज्यों में अब पार्टी के विस्तार के लिए समय देंगे। RCP सिंह पूरे बिहार में प्रखंड स्तर पर दौरा कर के पार्टी को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और दिलचस्पी को देखते हुए उन्हें अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी दी गई है।

हालाँकि, उन्हें JDU अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध भी हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि मुंगेर दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान पुलिस क्रूरता के कारण हुई 1 मौत (अपुष्ट रूप से 2) और कइयों के घायल होने के लिए जिम्मेदार रहीं एसपी लिपि सिंह के पिता को ये पद दिया जाना कहाँ तक ठीक है? दुर्गा पूजा समिति ने भी कहा था कि उसके लोग लिपि सिंह के सामने ला-ला कर पीटे गए। चुनाव आयोग ने उन्हें तब हटा भी दिया था।

शहजाद खान को खंभे से बाँध कर मारा, हुई मौत: मोबाइल चोरी का आरोप, जाँच कर रही मुंबई पुलिस

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के सांताक्रूज इलाके में मोबाइल चोरी करने के आरोप में भीड़ ने 30 साल के युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी। मृतक का नाम शहजाद खान बताया जा रहा है। आरोप है कि मृतक मोबाइल चुराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पकड़े जाने पर कुछ लोगों ने उसको इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है और मामले की जाँच कर रही है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि शहजाद खान शुक्रवार (25 दिसंबर, 2020) को सुबह एक बगीचे में घुसा। इस दौरान वहाँ मौजूद 6 लोगों ने इस युवक को पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया। उन्हें शक था कि वो मोबाइल चोर है। इन 6 लोगों ने इस युवक को एक खंभे से बाँधकर डंडों से खूब पिटाई की। इसकी वजह से युवक शहजाद खान की हालत नाजुक हो गई।

पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने उसे इतना मारा कि शहजाद नजदीक में ही एक पार्क के पास खड़े ऑटोरिक्शा में सो गया। हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे वहाँ मृत घोषित कर दिया।

वहीं मृतक के भाई ने चोरी के मामले को गलत बताते हुए कहा, “मेरा भाई ड्रग्स लेता था। वो अक्सर मुक्तानंद पार्क की तरफ ड्रग्स लेने के लिए अपने दोस्तों के साथ जाया करता था। वह सुबह 4 बजे घर से निकला था। मेरी माँ को किसी ने बताया कि मेरा भाई सड़क पर पड़ा हुआ है। इसके बाद हम तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे और अपने भाई को अस्पताल ले गए, लेकिन वो बच नहीं सका।”

फ़िलहाल मृतक के भाई के कहने पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302, 342 और 34 का मामला दर्ज कर लिया है। ये मामला सांताक्रुज पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

पढ़ाई, हेल्थ या परिवार… राहुल गाँधी इटली में घुसेंगे तो कैसे और क्या कारण बता कर? सोशल मीडिया पर सवाल-जवाब

हमेशा की तरह राहुल गाँधी फिर अपनी विदेश यात्रा पर निकल चुके हैं। मीडिया में यह खबर छाई हुई है कि कॉन्ग्रेस नेता कतर एयरलाइंस की फ्लाइट से मिलान (इटली) के लिए रवाना हो चुके हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनके जाने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन भी अभी तक नहीं किया।

यहाँ यह बात गौर करने वाली है कि राहुल गाँधी ऐसे समय में विदेश यात्रा कर रहे, जब उनकी पार्टी ‘किसान’ विरोध-प्रदर्शन का समर्थन कर रही है। उनके ऐसे कारनामों के बावजूद कॉन्ग्रेस के अधिकतर कार्यकर्ता उन्हें दोबारा से पार्टी अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते अलग-अलग देशों ने दूसरे देश से आने वाले यात्रियों के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हुए हैं। इसके मद्देनजर सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया है कि इटली में कोविड नॉर्म्स के तहत राहुल गाँधी के लिए वहाँ प्रवेश करना कितना मुश्किल होगा।

इटली की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट के अनुसार भारत वर्तमान में E-देशों की लिस्ट में शामिल है। क्रिसमस और नए साल के लिए लागू नियमों के अनुसार, E-लिस्ट में शामिल देश के लोग केवल काम, स्वास्थ्य या पढ़ाई के कारणों, अर्जेंट कामों के लिए और वापस अपने घर लौटने के लिए ही इटली की यात्रा कर सकते हैं।

वहाँ के नियम के अनुसार, “E-देशों में शामिल ऐसे लोग, जो इटालियन/यूरोपीय संघ/शेंगन (Schengen) के नागरिक हैं, और उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ वहाँ के दीर्घकालिक निवासी और उनके परिवार के सदस्यों के लिए इटली में वापसी/प्रवेश की अनुमति है।”

इसमें आगे लिखा गया है, “3 दिसंबर, 2020 को इटली के मंत्रीस्तरीय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, E-लिस्ट में शामिल देश के लोग, जिनके पास इटालियन/यूरोपीय संघ/शेंगन नागरिकों के साथ-साथ इटली के कानूनी रूप से निवासी (दीर्घकालिक निवासी) के साथ जो कानूनी रिलेशनशिप में हैं, वे भी अपने पार्टनर से मिलने के लिए उनके घर आ सकते हैं।”

अब यह सोचने वाला विषय है कि राहुल गाँधी ने इटली में प्रवेश करने के लिए क्या विशिष्ट कारण बताया होगा। सोशल मीडिया पर लोगों ने ‘युवा’ राहुल गाँधी के लिए स्वास्थ्य या अध्ययन कारणों की संभावना को नकार दिया है। और यह भी संभावना नहीं है कि इटली में नए साल के जश्न को “कोई अर्जेंट” काम के रूप में मानेगा। फिर जो दो विकल्प बचे हैं, वो काम या व्यक्तिगत पारिवारिक कारण हैं।

उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी भारत में एक राजनीतिक दल के नेता हैं। इसलिए, किसी काम के सिलसिले में गुप्त रूप से विदेशी यात्रा करना, अपने आप में कई सवाल खड़े कर देता है। और अगर यह सच में किसी काम से संबंधित है तो इसे जानने का हक सभी भारतीय को होना चाहिए।

इसके अलावा दूसरी संभावना यह है कि राहुल गाँधी का इटली में परिवार है, जिनसे वे मिलने जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोग इस कारण को सबसे सटीक मान रहे हैं। वैसे राहुल गाँधी का ननिहाल भी इटली में है। इसलिए, यह एक संभावना होगी। जबकि उनका दूसरा परिवार शादी के बाद ही वहाँ हो सकता है। लेकिन यह तो हमें पता ही है कि अभी तक उनकी शादी नहीं हुई है। हालाँकि यह सब अटकलों का विषय है और केवल कॉन्ग्रेस पार्टी और खुद पार्टी आलाकमान के बेटे ही इसकी स्पष्ट तौर पर जानकारी दे सकते हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेताओं ने अक्सर राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं को लेकर तंज कसा है। वर्ष 2017 में अमित शाह ने राहुल गाँधी को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया था कि उन्होंने क्यों अपनी विदेश यात्राओं पर एसपीजी सुरक्षा नहीं ली और यह भी कहा था कि आखिर वह क्या छिपाने की कोशिश कर रहे थे। तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुलासा किया था कि पिछले दो वर्षों में राहुल गाँधी कुल 72 दिनों में 6 विदेशी दौरों पर गए थे। इस दौरान भी उन्होंने एसपीजी सुरक्षा नहीं लिया था।

’41 किसानों की मौत’: लौट आया ‘नोटबंदी से होने वाली मौत’ वाला नैरेटिव किसान आंदोलन में भी

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। अपनी माँगों पर अड़े हुए किसान दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच रविवार (दिसंबर 27, 2020) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी किसान आंदोलनों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि ‘हमारे किसान साथियों को 32 दिनों से सर्दी में रहना पड़ रहा है’ और आंदोलन के दौरान हुई 40 किसानों की मौत ने उन्हें बहुत दुःख पहुँचाया है।

किसान आंदोलनों के दौरान हुई किसानों की कथित मौत को लेकर काफी बयानबाजी देखने को मिल रही है। लेकिन क्या किसान आंदोलनों में सामने आ रही किसानों की मौत वास्तव में उनकी माँगों या फिर धरना प्रदर्शन से जुड़ी हुई हैं? लेकिन जिस तरह से किसी भी मौत को किसान आंदोलन से जोड़ दिया जा रहा है, ठीक ऐसा ही चलन मीडिया से लेकर राजनीतिक बयानबाजी में नोटबंदी के दौरान भी देखने को मिला था जब किसी भी दुर्घटना के कारण हुई मौत को नोटबंदी से हुई मौत को ठहराया जाने लगा था। यहाँ तक दावे किए गए कि नोटबंदी की मार से 32 दिन में 100 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवाई। 

बताया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा में 15 सितंबर से अब तक पंजाब के साथ-साथ दिल्ली में 41 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें से 30 मौतें अकेले पंजाब के मालवा बेल्ट से, दोआब बेल्ट से 6, माझा बेल्ट से 2 और हरियाणा से 3 बताई जा रही हैं।

किसानों की जिन मौतों को इस आंदोलन से जोड़कर सामने रखा जा रहा है, उनमें से कई मौत तो वास्तव में किसी व्यक्ति के सल्फास खाने, दुर्घटना का शिकार होने आदि कारणों से हुई हैं। यहाँ तक कि इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने कर्ज के चलते कथित तौर पर आत्महत्या की हैं।

हमने सिर्फ जाँचने के लिए सबसे पहले आई कथित तौर पर ‘किसान आंदोलनों से जुड़ी मौतों’ की कुछ खबरों की पड़ताल की, तो पता लग गया कि ये आँकड़ा और कहानियाँ भ्रामक और गुमराह करने वाली हैं। इन लोगों की मौत की वजहों को देखकर उन तमाम मौतों पर संदेह पैदाता है, जिन्हें इस आंदोलन से जोड़कर बताया जा रहा है।

किसान आंदोलनों के कारण होने वाली कथित तौर पर पहली मौत 18 सितंबर को बताई जा रही है। दरअसल, पंजाब के मनसा गाँव के रहने वाले 65 वर्षीय प्रीतम सिंह ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के घर के बाहर धरने पर जानलेवा सल्फास की गोलियाँ खा ली थीं। प्रीतम सिंह के परिवार को सरकार द्वारा 3 लाख रुपए का मुआवजा, एक परिवार के सदस्य को नौकरी और कर्ज माफ़ी के आश्वासन के वायदे के बाद ही मृतक के शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

इन्हीं मौतों में दो महिलाएँ की मौत भी जोड़ी गई हैं। इन महिलाओं में से एक थीं 80 साल की तेज कौर! तेज कौर की मौत बुढलाडा में 8 अक्टूबर को रेलवे ट्रैक पर गिरने से हुई थी। जबकि गुरमेल कौर की मौत बठिंडा में विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुई। ख़ास बात यह है कि रेलवे ट्रैक पर गिरने और दिल का दौरा पड़ने से हुई मौतें भी किसान आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही हैं।

26 नवंबर को जब किसान पंजाब से दिल्ली की ओर रवाना हुए तो 27 नवंबर को एक और मौत दर्ज की गई। पंजाब के मनसा गाँव के 45 वर्षीय धन्ना सिंह के ट्रैक्टर के भिवानी के पास एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। उनके परिवार को पंजाब सरकार द्वारा मुआवजे में 5 लाख रुपए दिए गए।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रदर्शनकारियों की मौत दिल्ली में ठंड के कारण भी हुई हैं। जबकि कुछ लोग कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए। वहीं, गुरलभ सिंह, जिस पर 6 लाख से अधिक का कर्ज था, की मौत की जाँच पंजाब पुलिस कर रही है और बताया जा रहा है कि उसकी मौत का कारण विषैला पदार्थ खाकर आत्महत्या करना है।

इन लोगों की मौत का वास्तविक कारण सामने रखने का कारण यह भी है कि ठीक ऐसा ही माहौल राजनेताओं द्वारा नोटबंदी के दौरान भी बनाया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि नोटबंदी के समय भी सौ लाशों की गिनती पूरी करने वाले विपक्ष ने जैसे सामान्य मौतों को भी लाइन में खड़े हो कर मरने वाली मौत कह दी थी, वैसे ही कोई भी, कहीं भी आत्महत्या कर रहा है, या फिर ट्रक के टक्कर से दुर्घटनावश मर रहा है, उसे किसान आंदोलन वाले तत्परता से वैसे ही अपना बना रहे हैं जैसे खालिस्तानियों के नेताओं को।

‘सुरक्षा चाहिए तो हम देंगे’ – हिंदू युवकों से शादी करने वाली 2 मुस्लिम युवतियों को UP पुलिस की पेशकश

यूपी पुलिस ने बरेली जिले में 2 मुस्लिम युवतियों द्वारा अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन कर हिंदू युवकों के साथ शादी करने पर उन्हें सुरक्षा देने की पेशकश की है। मामला रिठौरा और बहेड़ी इलाके का है। युवतियों ने अपने परिजनों से जान के खतरे की आशंका जताई थी। पुलिस ने कहा कि अगर दोनों पति-पत्नी सुरक्षा माँगेंगे तो उन्हें सुरक्षा दी जाएगी।

बरेली के वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवाण ने शनिवार को कहा, “दोनों लड़कियों ने अपने प्रमाणपत्रों के आधार पर बालिग होना बताया है और दोनों ने दूसरे धर्म के युवकों से अपनी मर्जी से विवाह किया है। रिठौरा के युवक-युवती के परिजनों ने लिखित रूप से अब कोई भी आपत्ति ना होने की बात कही है और लिखित रूप से पुलिस को अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है। जिले के दोनों प्रकरण में कथित लव जिहाद का कोई मामला नहीं है।”

वहीं जिले के बहेड़ी इलाके में हुई घटना में महिला के परिवार ने हिंदू पुरुष के खिलाफ अपहरण और चोरी का मामला दर्ज कराया था। बता दें कि उनकी शादी गुरुवार को रितोरा क्षेत्र के एक मंदिर में हिंदू धर्म के अनुसार हुई थी।

गौरतलब है कि बहेड़ी क्षेत्र में मुस्लिम युवती ने हिंदू लड़के से शादी करने के बाद वीडियो साझा कर एसएसपी से जान की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। युवती ने अपने वीडियो में पति और उसके दोस्तों की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की।

युवती ने वीडियो में कहा, “मैंने अपनी मर्जी से शादी की है। अगर मेरे पति के साथ कुछ होता है तो मेरे माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाए।” दरअसल युवती के पिता ने हिन्दू पक्ष के ऊपर कई संगीन आरोप लगाए थे, जिसको युवती ने वीडियो जारी कर खारिज कर दिया। उसने शादी का प्रमाण-पत्र भी जारी किया, जिसमें आर्य समाज मंदिर में सितंबर 2020 में मंजीत चौधरी नामक युवक से शादी दर्शाया गया है।

एसएसपी सजवान ने कहा, “हम उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन कर रहे हैं, जो कहता है कि एक रिश्ते में दो व्यस्क की सहमित होनी चाहिए। उन्हें अपने परिवार के हस्तक्षेप के बिना एक साथ रहने का अधिकार है।”

हाल ही में इस तरह की एक और घटना बरेली में ही सामने आई थी, जहाँ अलीशा नाम की मुस्लिम युवती ने अमन नाम के हिन्दू युवक से शादी कर ली। युवती के पिता ने बरेली के प्रेमनगर थाने में हिन्दू युवक पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के कुछ ही समय बाद युवती को बरामद कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने युवती का मेडिकल कराया। अदालत में बयान भी दर्ज कराया। इस दौरान पुलिस ने बताया कि युवक और युवती दोनों बालिग़ हैं और युवती ने युवक के पक्ष में बयान दिया था। फिर पुलिस ने युवती को युवक के घर भेज दिया था और घटना में धर्म-परिवर्तन का कोई पहलू भी सामने नहीं आया था।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ही औरैया जिले में एक मामला सामने आया था, जिसमें दो अलग धर्म के प्रेमी-प्रेमिका ने आपसी सहमति से शादी की थी। दिल्ली की रहने वाली रेशमा और औरैया के निवासी अमन ने बिधूना कस्बे स्थित भगवान शिव के मंदिर में हिन्दू रीति-रिवाज़ों से शादी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोनों के बीच पिछले काफी समय से बातचीत हो रही थी। इस शादी में युवक और युवती के परिजन भी शामिल हुए थे और दोनों ने पति-पत्नी को आशीर्वाद भी दिया था। परिजनों का कहना था कि जिस बात में उनके बच्चे खुश हैं, उस बात में ही उनकी ख़ुशी है।