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देवी-देवताओं को कोई मुनव्वर गाली दे तो चुप रहें, वरना भास्कर गुंडा कहेगा

कई समय से हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने और हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ बेतुकी बयानबाजी करने वाले कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) की शुक्रवार (जनवरी 01, 2021) शाम कुछ लोगों ने पिटाई कर डाली। ‘दैनिक भास्कर’ जैसे मीडिया संस्थानों को हमेशा से ही अपमानित होते आ रहे लोगों की प्रतिक्रिया से आपत्ति है।

समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ ने इस घटना के सम्बन्ध में जो खबर प्रकाशित की हैं उसका शीर्षक है, “हिंदूवादी नेताओं की गुंडागर्दी: देवताओं और अमित शाह पर टिप्पणी का आरोप, शो में कॉमेडियन को पीटा।”

भास्कर की खबर

जाहिर सी बात है कि ‘भास्कर’ ने यहाँ पर मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) की कुटाई करने वाली भीड़ के प्रति अपना फैसला सुनाते हुए यह शीर्षक लिखा है। साथ ही, यह समाचार पत्र चाहता है कि हिन्दुओं को अपमानित कर अपना ‘कॉमेडी’ का करियर बनाने की चाह रखने वाला हर दूसरा आदमी इसी तरह से मनचाही बयानबाजी कर एक बड़े समूह को लज्जित करता रहे और वह समूह इन सभी बातों का विरोध भी न करे।

यानी, मुनव्वर फारूकी भगवान राम से लेकर जला कर मार दिए गए कारसेवकों का मजाक उड़ाता रहे, तब मीडिया की नजरों में वह ‘कॉमेडी’ है और जब हिन्दुओं ने इसका विरोध किया तो वह गुंडागर्दी हो गई। निश्चित रूप से किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन किसी भी तरह के उकसावे को भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसे में, विरोध को ‘गुंडई’ कह देना भी एक तरह से हिन्दू घृणा से सनी मीडिया द्वारा फारूकी जैसों के कारनामों का समर्थन ही है।

वास्तव में, सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने यह साबित भी किया है कि हिन्दुओं को या उनके देवी-देवताओं को लगातार अपमानित कर, उनकी भावनाओं को निरंतर आहत कर एक वर्ग-विशेष का चहेता बनने की इच्छा रखने वाले रातों-रात ‘स्टार’ भी बन गए। लेकिन यह अब एक चलन के साथ ही एक बढ़िया करियर विकल्प भी बनकर उभरा है और हिन्दू विरोधी घृणा से सने लोग इसे अवसर की तरह देखने लगे हैं।

लेकिन मीडिया का इन सब विषयों पर लिया गया पक्ष हैरान करता है। यदि मुनव्वर फारूकी की पिटाई करने वाले भीड़ ‘गुंडा’ थी तो फिर साल-दो साल से समाज एक एक बड़े वर्ग की भावनाओं का लगातार अपमान करने वाला फारूकी ‘कॉमेडियन’ कैसे कहा जा सकता है?

लेकिन ‘भास्कर’ चाहता है कि देवी-देवताओं को कोई गाली दे तो आप सुनते रहें और कोई प्रतिक्रिया ना दें। विरोध नहीं करें। और अगर आप ऐसा करेंगे तो यह गुंडई होगी। यह एकतरफा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता इस देश के उदार और सेक्युलर वर्ग की पसंदीदा फैंटेसी बन चुकी है और मीडिया ने इसे जमकर भुनाया है।

यह वही मुनव्वर फारुकी है, जिसने कॉमेडी के नाम पर माता सीता पर अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा था, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़क अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”

इस हरकत के बाद मुनव्वर फारुकी पर एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी लेकिन उसका नतीजा सामने नहीं आया। इसके अलावा, उसने गोधरा में जलाकर मार डाले गए 59 कारसेवकों का मजाक उड़ाया था। गोधरा कांड के लिए उसने अमित शाह और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था। संज्ञान में यह वीडियो आने के बाद राष्ट्रीय सेवा संघ (RSS) ने उस पर कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी।

क्या ये सब बातें कहीं से भी कॉमेडी या हास्य कही जा सकती हैं? अगर यह हास्य है तो उसे पहले अपने मजहब से इसकी शुरुआत की चाहिए, जिसमें हो सकता है कि अन्य धर्मों से अधिक हास्य की सम्भावन निकल आएँ। लेकिन शायद खुद मुनव्वर फारूकी जैसों को खुद भी सभी धर्मों की सहिष्णुता और असहिष्णुता के पैमानों का सही-सही अंदाजा है, इसी कारण ये उस धर्म को निशाना बनाना ज्यादा आसान समझते हैं, जहाँ उनकी जिंदगी पर बात नहीं आती और बात बस एक-आध FIR और ‘ट्विटर आउटरेज’ में दफ़्न हो जाती हैं।

‘भास्कर’ जैसे मीडिया गिरोहों का मुनव्वर फारूकी की खबरों में लिया गया पक्ष इस देश की सहिष्णुता और इसके उदारवाद का एकदम नग्न और स्पष्ट परिचय है। ये समय-समय पर इसी तरह खुद अपना आवरण उतारकर सामने आते रहेंगे।

फिलहाल एक और ‘गुंडागर्दी की खबर’ जो सामने आई है, वह ये कि हिन्दू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में एड्विन एंथनी, प्रखर व्यास, प्रियम व्यास और नलिन यादव शामिल हैं।

दरगाह के ट्रस्टी डॉ. मुदस्सिर निसार ने बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर किया बलात्कार, मुंबई पुलिस ने 25 दिन बाद किया केस दर्ज

मुंबई की माहिम दरगाह के ट्रस्टी डाॅ. मुदस्सिर निसार के खिलाफ एक महिला ने यौन शोषण का केस दर्ज करवाया है। पीड़ित महिला के अनुसार, डाॅ. निसार ने बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस ने धारा 376, 328 और 506 के तहत दरगाह के ट्रस्टी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालाँकि, एफआईआर के बावजूद अभी तक आरोपित की गिरफ्तारी नहीं की गई है।

डॉ. मुदस्सिर निसार महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के एक सक्रिय सदस्य हैं और माहिम दरगाह ट्रस्ट के ट्रस्टियों में से एक हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नवी मुंबई स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता ने 7 दिसंबर को माहिम पुलिस थाने में इसकी लिखित शिकायत कराई थी, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने 25 दिन बाद आरोपित माहिम दरगाह के ट्रस्टी डाॅ. मुदस्सिर निसार के खिलाफ एफआईआर रजिस्टर्ड की।

अपनी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के सदस्य मुदस्सिर निसार ने एक महिला को निक़ाह का झाँसा देकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर अपने वादे से मुकर गए। एफआईआर के मुताबिक, डॉ. मुदस्सिर ने पहले बेहोशी का इंजेक्शन देकर पीड़िता को सुला दिया, फिर उसका यौन शोषण किया। पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है। पुलिस ने मामले को लेकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। वहीं आरोपित की गिरफ्तारी पर भी चुप्पी साधे हुई है।

योगेंद्र यादव और माओवादी PDFI के ‘किसान नेता’ ने दी माँगें नहीं पूरी होने पर गणतंत्र दिवस को निशाना बनाने की धमकी

‘इच्छाधारी प्रदर्शनकारी’ योगेंद्र यादव ने धमकी दी है कि यदि तथाकथित ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की माँग पूरी नहीं की जाती है तो वे गणतंत्र दिवस को निशाना बनाएँगे। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने भी शनिवार (जनवरी 02, 2021) को यही घोषणा की।

योगेंद्र यादव ने कहा, “अगर हमारी माँगें 26 जनवरी तक पूरी नहीं होती हैं, तो किसान दिल्ली में ‘किसान गणतंत्र परेड’ करेंगे। हम राष्ट्रीय राजधानी के निकटवर्ती क्षेत्रों के किसानों से अपील करते हैं कि वे तैयार रहें और देश के हर किसान परिवार से अनुरोध करें कि यदि संभव हो तो एक सदस्य को दिल्ली भेजें।”

किसान आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में बात करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, “23 जनवरी को हम विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के घरों की ओर मार्च निकालेंगे और अगर सरकार के साथ बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली में ‘ट्रैक्टर किसान परेड’ आयोजित की जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि दर्शन पाल पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PDFI) के संस्थापकों में से एक हैं। बता दें कि पीडीएफआई माओवादी आंदोलन का एक घटक है, जो देश में वामपंथी आतंकवाद का संरक्षक है।

हैदराबाद में डॉ. मैरी चन्ना रेड्डी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार किए गए एक अध्ययन के अनुसार, पीडीएफआई माओवादियों द्वारा गठित सामरिक संयुक्त मोर्चा (टीयूएफ) का एक हिस्सा था। दर्शन पाल पीडीएफआई की 51 सदस्यीय कार्यकारी समिति के संयोजक थे।

दर्शन पाल के अलावा, PDFI के अन्य संस्थापक सदस्यों में वरवरा राव, कल्याण राव, मेधा पाटकर, नंदिता हक्सर, एसएआर गिलानी, बीडी सरमा आदि जैसे राष्ट्र-विरोधी और भाजपा-विरोधी नाम शामिल हैं।

इस बीच योगेंद्र यादव लगातार सरकार को धमकी देते रहे हैं। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वह कब किसान नेता बन गए। सरकार का कहना है कि वह किसान नहीं है और उन्हें सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई।

शुक्रवार (जनवरी 01, 2021) को ‘इछछाधारी प्रदर्शनकारी’ ने घोषणा की कि प्रदर्शनकारियों द्वारा 6 जनवरी को कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) में एक मार्च आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे शीघ्र ही एक तारीख की घोषणा करेंगे जब वे शाहजहाँपुर सीमा की तरफ आगे बढ़ेंगे।

तीन तलाक दे बना हिंदू, दूसरी शादी की; अब मोदी सरकार के कानून के तहत पहली बीवी माँग रही इंसाफ

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन तलाक का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहाँ एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति के खिलाफ न्याय माँग रही है, जिसने अब हिन्दू धर्म अपना लिया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट अनुसार, भारतीय रेलवे में काम करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति ने 2017 में तीन तलाक बोलकर अपनी पत्नी से रिश्ता तोड़ लिया था। 2004 में उसकी मुस्लिम महिला से शादी हुई थी, जिसके बाद उनके दो बेटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम पत्नी को तीन तलाक देने के बाद व्यक्ति ने हिंदू धर्म अपना कर एक हिंदू महिला से शादी कर ली और अब दोनों साथ रह रहे हैं।

हालाँकि, अब पूर्व पत्नी ने उसके खिलाफ ट्रिपल तलाक कानून (मुस्लिम महिला विवाह पर अधिकार संरक्षण विधेयक, 2019) के तहत अदालत से न्याय की गुहार लगाई है और उससे भरण पोषण भत्ते की माँग की है। भोपाल फैमिली कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश आरएन चंद के समक्ष सुनवाई के लिए यह मामला सामने आया है।

मुस्लिम महिला के वकील ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि महिला को अपने रिश्तेदारों से ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून के बारे में पता चला। साथ ही, बताया कि इसके तहत तीन तलाक एक साथ कहने पर वह मान्य नहीं होता और यह एक अपराध है। इसलिए, महिला ने कानून के तहत भरण पोषण भत्ते की माँग की है।

मुस्लिम से हिन्दू धर्म में परिवर्तित व्यक्ति की हिंदू पत्नी ने कथित तौर पर दावा किया है कि उसके पति के साथ उसकी शादी वैधानिक है। उसने कहा कि उसके पति ने पहली पत्नी को तलाक देकर हिन्दू धर्म में परिवर्तित होने के बाद उससे शादी की। उसने कहा कि ऐसे में उसकी पूर्व पत्नी का कोई हक नहीं बनता कि वह उसके पति के साथ रहे।

तीन तलाक कानून

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में तीन तलाक की प्रथा को गैर-कानूनी करार दिया था। जिसके बाद केंद्र सरकार ने 2019 में ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाया। इस कानून के अनुसार तीन तलाक की प्रथा एक अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। महिला कानून के तहत अपने आश्रित बच्चों के लिए रखरखाव की हकदार है।

850 से अधिक प्रसिद्ध शिक्षाविदों ने पत्र लिखकर किया कृषि सुधार कानूनों का समर्थन, कहा- सरकार के आश्वासन पर पूरा भरोसा

एक तरफ जहाँ तथाकथित किसान दिल्ली सीमा पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं तो वहीं इन कानूनों को देश भर में व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। कृषि क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानूनों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों के 850 से अधिक शिक्षाविदों ने एक पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून कृषि व्यापार को प्रतिबंधों से मुक्त करने और किसानों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपनी उपज बेचने में सक्षम बनाते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ उपकुलपतियों समेत प्रख्यात बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों ने कहा कि संघ सरकार ने किसानों को बार-बार आश्वासन दिया है कि इन तीनों कृषि कानूनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये पहले की तरह ही रहेगा। नया कृषि कानून सभी अवैध बाजार प्रतिबंधों से कृषि व्यापार को मुक्त करता है, ‘मंडियों’ से परे बाजार खोलने की अनुमति देता है और साथ ही सीमांत किसानों को बाजार / प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपनी उपज बेचने में मदद करता है।

Image Source: Mukul Yadav/ Twitter

पत्र में कहा गया है, “नए कानून किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करते हैं। हम किसानों को अपनी आजीविका की सुरक्षा के लिए सरकार के आश्वासन पर पूरा विश्वास करते हैं। सरकार अभी भी न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के सिद्धांत के लिए प्रतिबद्ध है।”

जीवंत चर्चा के बाद किए गए सुधार: विशेषज्ञ, शिक्षाविद

प्रख्यात विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए कृषि सुधारों के एजेंडे के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कानून कैसे लाया गया। बयान में कहा गया कि जीवंत चर्चा होने के बाद संसद के मानसून सत्र में विधेयक पारित किए गए। भारत एक ऐसा देश है जहाँ की अधिकांश आबादी अभी भी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।

शिक्षाविदों ने कहा, “हम सरकार और किसानों दोनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं और उनके गहन प्रयासों को सलाम करते हैं। हम सभी जीवंत रहेंगे, प्रगति करेंगे और एक साथ शांति से विकास करेंगे।” कई किसानों के समूहों द्वारा मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों का स्वागत करने के बाद शिक्षाविदों द्वारा तीन प्रमुख कृषि सुधारों का समर्थन करने से इसका विस्तार हुआ है।

मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कृषि कानूनों के लिए व्यापक स्वीकृति

जब से मोदी सरकार ने तीन कृषि कानूनों को पारित किया है, देश भर के किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करने के लिए आगे आए थे और केंद्र से अनुरोध किया था कि वह प्रदर्शनकारियों की माँगों के सामने न झुकें। पंजाब सहित विभिन्न राज्यों के इन किसानों ने कहा था कि नए खेत कानून उनके लिए फायदेमंद हैं और कहा कि इनको निरस्त नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें कि पंजाब के किसान इन कानूनों को निरस्त करने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि, देश के अधिकांश किसान खुलकर समर्थन में आ गए हैं। मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कानूनों ने उन्हें संबंधित राज्य सरकारों द्वारा पारित APMC अधिनियमों द्वारा लगाए गए पहले के प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया है।

सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और साक्ष्य सामने आए हैं, जो साबित करते हैं कि सभी किसानों ने न सही, मगर अधिकतर किसानों ने कृषि सुधार कानूनों का स्वागत किया है। हाल ही में हरियाणा के लगभग 1.20 लाख किसानों ने कृषि कानूनों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था और केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने की माँग की थी।

एक्शन में शिवराज की पुलिस: मुनव्वर फारूकी सहित 5 गिरफ्तार, देवी-देवताओं पर की थी आपत्तिजनक टिप्प्णी

हिन्दू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में एड्विन एंथनी, प्रखर व्यास, प्रियम व्यास और नलिन यादव शामिल हैं। सभी नए साल के मौके पर इंदौर स्थित एक कैफे में इवेंट में शामिल हुए थे।

भाजपा की स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ (36) इस कार्यक्रम में बतौर दर्शक पहुँचे थे। उन्होंने इस मामले की पुलिस से शिकायत की थी। घटना इंदौर के 56 दुकान स्थित मुनरो कैफे की है। शुक्रवार (1 जनवरी 2021) को शाम 6:30 बजे यह इवेंट आयोजित किया गया था।

इस इवेंट के दौरान तथाकथित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस बात की जानकारी मिलते हिन्द रक्षक संगठन के कई कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और मुनव्वर फारूकी की कथित तौर पर पिटाई कर दी। पिटाई के बाद उसे तुकोगंज थाने लेकर गए।  

एकलव्य गौड़ ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा था कि मुनव्वर फारूकी पहले भी देवी-देवताओं पर इस तरह की टिप्पणी कर चुका है। इसकी वजह से ही जयपुर में इसका एक कार्यक्रम रद्द हो चुका है। इस इवेंट की जानकारी मिलने पर संगठन के कार्यकर्ता टिकट लेकर इसमें शामिल हुए थे।

इसके पहले भी मुनव्वर फारूकी मंचों से ऐसी विवादित और अपमानजनक बातें कर चुका है। माता सीता पर अभद्र टिप्पणी करते हुए मुनव्वर ने कहा था, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”

इस हरकत के बाद उस पर एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी। इसके अलावा उसने गोधरा में जलाकर मार डाले गए 59 कारसेवकों का मजाक उड़ाया था। गोधरा कांड के लिए उसने अमित शाह और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था। संज्ञान में यह वीडियो आने के बाद राष्ट्रीय सेवा संघ (RSS) ने उस पर कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी।

नक्सली और उसकी पत्नी को ग्रामीणों ने पीट-पीट कर मार डाला, पड़ोसी की कर दी थी हत्या: झारखंड में ट्रिपल मर्डर

झारखंड के पलामू के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र मनातू में एक नक्सली की उसकी पत्नी सहित ग्रामीणों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। उक्त नक्सली ने जमीन के विवाद में एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने नक्‍सली प्रकाश सिंह और उसकी पत्‍नी तेरंगनी देवी को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति का मुआयना कर रही है।

कुल मिला कर तीन लोगों की हत्या हुई। एक हत्या के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने दो की हत्या कर दी। घटनास्थल वाला इलाका बिहार की सीमा से भी लगता है और यहाँ पहले भी नक्सली घटनाएँ हो चुकी हैं। एसपी संजीव कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस स्थिति कि समीक्षा में लगी हुई है। ताज़ा घटना मनातू थाना क्षेत्र के कुंडलपुर की है, जो रंगिया पंचायत में पड़ता है। मृत उग्रवादी प्रकाश सिंह जेजएमपी संगठन का पूर्व सदस्‍य रहा था। 

उसने ग्रामीण विनोद सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी थी, जिसके बाद उसकी और उसकी बीवी कि मॉब लिंचिंग कर दी गई। पीट-पीट कर हुई इस हत्या के पीछे लम्बे समय से चल रहे जमीन के विवाद को बताया जा रहा है। गाँव में बड़ी संख्या में पुलिस बल को कैम्प करने के लिए लगाया गया है। आसपास के इलाकों में इस तिहरे हत्याकांड से हड़कंप मचा हुआ है।

ये घटना शुक्रवार (जनवरी 1, 2021) की रात से शुरू हुई, जब विनोद सिंह की गोली मार कर हत्या की गई। उससे पहले दोनों पक्षों के बीच जम कर बहस हुई थी। नक्सली और उसकी बीवी की हत्या से पहले ग्रामीणों ने उसके हथियार को छीन लिया। ये इलाका कठिन पहाड़ियों के बीच है, इसलिए पुलिस को यहाँ आने में खासी परेशानी हुई। माओवादी घटना से 8 दिन पहले ही बाहर से अपने घर आया था और वो घटना के समय नशे में भी था।

पिछले कुछ महीनों में झारखंड और पश्चिम बंगाल में नक्सलियों के वापस सिर उठाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं। अगस्त 2020 में पुलिस ने राँची से प्रतिबंधित संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के 3 नक्सलियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी। ये 5 महीने से किराए का घर बदल-बदल कर राँची के अलग-अलग इलाकों में रुके हुए थे और एरिया कमांडर पुनई उरांव के इशारे पर व्यवसाइयों से वसूली कर संगठन को पैसा पहुँचाने का काम करते थे।

अखिलेश यादव बोले- BJP की कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाऊँगा, लोगों ने कहा- फतवे का पालन कर रहे अध्यक्ष जी

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोविड-19 वैक्सीन को लेकर दिए एक बयान में कहा है कि वो ‘भाजपा की कोरोना वैक्सीन’ नहीं लगाएँगे और जब उनकी सरकार आएगी तो वो लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाएँगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार ताली बजाने और थाली बजाने की बात कर रही थी, वे टीकाकरण के लिए इतनी बड़ी चेन क्यों बना रही है, वो ताली और थाली से ही कोरोना भगा दें न।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “मैं अभी कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं लगवाऊँगा। मैं भाजपा की वैक्सीन पर कैसे भरोसा कर सकता हूँ। जब हमारी सरकार बनेगी तो सभी को मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। हम भाजपा की वैक्सीन नहीं लगवा सकते।”

अखिलेश यादव के इस बयान पर लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी हैं। ‘नेता जी’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, “मुलायम ने भेजा तो था इसे ऑस्ट्रेलिया पढ़ने के लिए, पर लगता है एडमिशन मदरसे में करवाया था।”

वहीं, ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है कि अखिलेश यादव सैलरी भी भाजपा सरकार से ले रहे हैं, उन्हें सैलरी लेने से भी मना कर देना चाहिए।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने अखिलेश यादव के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, “अखिलेश यादव फतवा का पालन कर रहे हैं। वो भी उसी सोच में हैं की वैक्सीन में सूअर का चर्बी है।”

गौरतलब है कि कोरोना वायरस में सूअर की चर्बी का इस्तेमाल हाल ही में चर्चा का विषय रहा। इस्लामी मुल्कों ने तो हलाल सर्टिफिकेट वाली वैक्सीन तक की भी माँग की थी।

वहीं, अखिलेश यादव के इस बयान पर अखिलेश मिश्रा ने लिखा, “मुझे कोई संदेह नहीं है कि इस आदमी और उसके पूरे परिवार को पहले ही मौके में टीका लगाया जाएगा। अखिलेश यादव के बयान का मतलब उनके मुस्लिम मतदाताओं के लिए कोड में दिया गया संदेश है कि यह भाजपा का टीका है और इसे अस्वीकार करें। यह भारत की पुरानी राजनीति है।

राजदीप सरदेसाई को बेटी ने दिया ऐसा गिफ्ट कि लोग बोल पड़े- वाह! वह पिता की झूठी पत्रकारिता को समझती है

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने शनिवार (2 जनवरी, 2020) को ट्विटर पर एक टीशर्ट के साथ अपनी फ़ोटो साझा की। यह टीशर्ट उनकी बेटी ने उन्हें नए साल के उपलक्ष्य में तोहफे के तौर पर दिया था। जिसे हाथ में पकड़कर राजदीप ने फ़ोटो पोस्ट करते हुए अपनी बेटी को धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि टीशर्ट काले रंग की थी, परंतु उस पर लिखा था, ‘यह टीशर्ट सफेद है: इंडियन मीडिया’ (This T-Shirt is White: Indian Media)।

राजदीप सरदेसाई का ट्वीट

अपने आप को भारतीय मीडिया से बाहर का मानने वाले राजदीप सरदेसाई ने कहा कि भारतीय मीडिया इस समय उद्देश्यपूर्ण और ईमानदार पत्रकारिता नहीं कर रहा है, वे सिर्फ झूठ का प्रचार-प्रसार करने के लिए पत्रकारिता का सहारा ले रहा है। हालाँकि, राजदीप सरदेसाई इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे कि वे भी इसी मीडिया इकोसिस्टम का हिस्सा हैं, जिसनें अपने मतलब के लिए देश की पत्रकारिता के स्तर को नीचे गिरा दिया है। खुद को पत्रकारिता का कर्ताधर्ता समझने वाले सरदेसाई देश के उन अन्य स्वतंत्र पत्रकारों का मज़ाक उड़ा रहे, जिन्होंने क्रांतिकारी पत्रकारिता की यथास्थिति को तोड़ने का काम किया है।

इंडिया टुडे की घटती टीआरपी के साथ राजदीप सरदेसाई और उनके साइड-किक राहुल कंवल हर उस पत्रकार या मीडिया संगठन का मज़ाक उड़ाते रहते हैं, जो उनकी प्रोपेगैंडा वाली पत्रकारिता के स्तर पर न चल कर अक्सर वामपंथियों, इस्लामवादियों और देश विरोधी लोगों को लताड़ने का काम करते हैं।

इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार प्रदीप भंडारी को नीचा दिखने की कोशिश की थी जब उनके साथ एबीपी के पत्रकार ने हाथापाई करते हुए उन्हें थप्पड़ मारा था। भंडारी को दी गई सुरक्षा का उल्लेख करते हुए सरदेसाई ने कहा था, “एक छवि जो शायद ‘बनाना रिपब्लिक’ में टीवी मीडिया को परिभाषित करती है।” प्रदीप भंडारी पर हुए हमले को सही ठहराते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से इसे ‘खोए हुए सम्मान’ की वजह बताया।

इंडिया टुडे के पत्रकार ने दावा किया, “जब एक न्यूज़ चैनल साथी पत्रकारों से अपने तथाकथित रिपोर्टर को बचाने के लिए उन्हें निजी सुरक्षा देता है: इसका यह संकेत है कि चैनल अपना सबसे कीमती टीआरपी खो चुका है।”

गौरतलब है कि राजदीप और राहुल कंवल ने अर्णब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को बार-बार आड़े हाथों लिया हैं। इसलिए यह मान लेना उचित है कि राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का मतलब उन पत्रकारों को संदर्भित करना है, जो उनके स्टैंड से सहमत नहीं हैं। हालाँकि, राजदीप के फेक न्यूज़ का इतिहास देखा जाए तो यह उन पर ज्यादा सटीक बैठता है।

यूज़र्स ने राजदीप का उड़ाया मज़ाक, कहा: उनकी बेटी उन्हें ज्यादा अच्छे से समझती है

राजदीप सरदेसाई ने जैसे ही टीशर्ट के साथ अपनी फ़ोटो को साझा किया, सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनका यह कहकर मजाक उड़ाया कि उनकी बेटी अपने माता- पिता के प्रति बेहद ईमानदार है।

वहीं कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने राजदीप सरदेसाई पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी बेटी उनकी पत्रकारिता की शैली को समझती है और उसने राजदीप की पत्रकारिता को एक लाइन के अंदर ही परिभाषित कर दिया है।

एक अन्य यूजर ने कहा कि राजदीप सरदेसाई की बेटी में व्यंग्य करने की अच्छी समझ है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने मीम शेयर करते हुए रवीश कुमार, राहुल कंवल और विवादास्पद यूट्यूबर अभिसार शर्मा जैसे अन्य पत्रकारों से राजदीप सरदेसाई की तुलना करते हुए उन्हें उनसे अधिक दल्ले पत्रकार के रूप में संदर्भित किया।

भारतीय पत्रकारों को नीचा दिखाने पर ध्रुवित मकवाना नाम के यूजर ने राजदीप सरदेसाई से पूछा कि क्या वह फिर पकौड़े बेचते है फिर?

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई यकीनन देश के सबसे कुख्यात फर्जी न्यूज़ पेडलर हैं। राजदीप सरदेसाई और उनकी पत्नी सागरिका घोष न केवल सोशल मीडिया पर झूठी सूचनाओं को फैलाने के लिए जाने जाते हैं बल्कि खुद को न्यूट्रल पत्रकार होने का दावा करने के बावजूद गाँधी परिवार और कॉन्ग्रेस पार्टी का बचाव करने और उनका राजनीतिक पक्ष लेने के लिए खुले तौर पर जाने जाते हैं।

किसान नेताओं को पीयूष गोयल ने बैठक के दौरान ‘धमकाया’? जानिए, क्या है हकीकत

‘किसान आंदोलन’ ने वामपंथी प्रोपेगेंडा परस्तों को अपनी वैचारिक गुफ़ा से बाहर निकल कर एनडीए सरकार को लेकर मिथ्या प्रचार करने का अवसर दे दिया है। केंद्र सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों के बारे में फ़ेक न्यूज़ फैलाए गए। अपनी दोयम दर्जे की हरकतों को जारी रखते हुए इन्होंने अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पर किसानों को ‘धमकाने’ का आरोप लगाया है।     

एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पीयूष गोयल और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राकेश टिकैत और अन्य प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए नज़र आ रहे हैं। वीडियो की ऑडियो गुणवत्ता अच्छी नहीं होने की वजह से उसका संदर्भ समझ नहीं आता है। वीडियो में पीयूष गोयल कहते हैं, “हमारे पास आपके 40 संगठनों की सूची है। मुझे अपना मुँह खोलने पर मजबूर मत करिए।” 

प्रोपेगेंडा करने वाले इसका इस्तेमाल ये बताने के लिए कर रहे हैं कि पीयूष गोयल किसानों को धमकी दे रहे थे। यह दावा इसलिए भी संदेह के दायरे में नज़र आता है, क्योंकि वीडियो में किसान केंद्रीय मंत्री के समक्ष मुस्कराते हुए नज़र आते हैं। केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी के बावजूद किसानों के चेहरों को देख ऐसा कतई नहीं लगता है कि पीयूष गोयल ने उन्हें धमकी दी है। किसान बेहद निश्चिंत नज़र आते हैं और केंद्रीय मंत्री खुद टिप्पणी के बाद मुस्कराते हुए नज़र आते हैं।

बता दें कि हाल ही में देश भर से तमाम किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताने के लिए आगे आए थे। उनका कहना था कि केंद्र सरकार को आंदोलन करने वालों के सामने झुकने की ज़रूरत नहीं है। यह किसान देश के अलग-अलग राज्यों से थे और कुछ पंजाब के भी थे। इन किसानों के मुताबिक़ नए कृषि सुधार क़ानूनों से उन्हें फ़ायदा हुआ है। इन्हें निरस्त नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि विरोध करने वाले अधिकांश किसान पंजाब से ही हैं।    

हमने इस मुद्दे पर कई रिपोर्ट तैयार की थी जिनमें इस बात का ज़िक्र था पंजाब के किसान इस बात से नाराज़ हैं कि सरकार प्रदेश की किसान इकाइयों से बातचीत नहीं कर रही थी। लगभग 40 किसान संगठनों (ज़्यादातर पंजाब) से मिलकर बने संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर निवेदन किया था कि सरकार प्रदेश की किसान इकाइयों से बातचीत नहीं बंद करे। यह पत्र माओवादी संगठन PDFI के संस्थापक सदस्य दर्शन पाल ने लिखा था। 

यह पत्र उस वक्त लिखा गया जब अन्य राज्यों के किसान संगठनों ने कृषि सुधार क़ानूनों का समर्थन किया था। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह किसान आंदोलन को लेकर ‘दुष्प्रचार’ कर रही है। 

पीयूष गोयल ने इस संदर्भ में अनौपचारिक टिप्पणी तब की थी जब टिकैत ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि सरकार उन किसान संगठनों से भी बात कर रही है जो नए कानूनों के समर्थन में हैं।

यह बैठक सरकार और किसानों के बीच अंतिम राउंड की बातचीत के दौरान हुई थी। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ब्रेक के दौरान किसानों के साथ नज़र आए और उनसे अनौपचारिक रूप से बातचीत की। 

सूत्रों ने बताया कि टिकैत ने आरोप लगाया था कि सरकार ऐसे किसान संगठनों से बात कर रही है जो आंदोलन से जुड़े ही नहीं हैं। जो संगठन बैठक में शामिल नहीं हुए थे (खासकर जो कृषि क़ानूनों का समर्थन करते हैं) वह ‘विश्वसनीय नहीं’ हैं। इस बात पर पीयूष गोयल ने कहा था कि उनके पास ऐसे 40 कृषि संगठनों की सूची है जो किसान आंदोलन का हिस्सा हैं। इसके बावजूद ऐसा दुष्प्रचार किया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री ने किसानों को धमकी दी, जबकि वहाँ मौजूद किसी भी व्यक्ति ने इस तरह की कोई बात नहीं की है। 

‘पीआईएल एक्टिविस्ट’ प्रशांत भूषण इसे हवा देने में सबसे आगे रहे। उनके मुताबिक़, ”पीयूष गोयल किसानों को धमकी दे रहे हैं।” 

इसी तरह प्रोपेगेंडा फैलाने वाले एक व्यक्ति ने ट्विटर पर कहा, “इन्हें देखिए किसानों को सार्वजनिक रूप से धमकी दे रहे हैं।” 

तथाकथित पत्रकार रोहिणी सिंह ने कहा कि पीयूष गोयल का रवैया किसानों के प्रति बेहद घमंड भरा है। ऐसा घमंड किसी को भी ख़त्म कर देता है। 

कुछ दावा कर रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री ने किसानों को अपशब्द कहा। 

न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार जस ओबरॉय ने भी यही झूठ फैलाया कि पीयूष गोयल किसानों को धमकी दे रहे हैं। 

सबसे अहम बात ये है कि यह वीडियो सम्भावित रूप से बुधवार (30 दिसंबर 2020) का है जब किसान संगठनों और सरकार के बीच अंतिम राउंड की बातचीत हुई थी। उसके बाद से अभी तक किसी किसान नेता ने ऐसा नहीं कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री ने धमकी दी है। सिर्फ प्रोपेगेंडाधारी ही सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे कर रहे हैं। 

खुद किसान संगठन के नेताओं ने मीडियाकर्मियों से कहा था कि बातचीत सकारात्मक रही। राकेश टिकैत ने भी कहा था कि बहुत जल्द हमारी समस्या हल हो जाएगी। मीडिया वालों से बात करते हुए राकेश टिकैत बेहद सहज नज़र आ रहे थे। उन्हें देख कर ऐसा नहीं लग रहा था कि उनको किसी भी तरह की धमकी दी गई है।         

  

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