इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम) में कोरोना वायरस के एक नए प्रकार का पता चला है। कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण दर बहुत ज्यादा है। इस कारण से वहाँ एक बार फिर सख्ती के साथ लॉकडाउन लागू किया गया है।
इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण लगभग 70% तेज दर (पहले मिले कोरोना वायरस की तुलना में) से फैलता है। इंग्लैंड की दूसरी संस्थाओं ने तो इसे आउट ऑफ कंट्रोल करार दे दिया है।
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सख्त लॉकडाउन की घोषणा की। इस कारण से ‘क्रिसमस बबल’ को भी रद्द कर दिया गया। इससे पहले क्रिसमस के कार्यक्रमों के लिए ढील देने का निर्णय लिया गया था लेकिन अब उस पर भी सख्ती रहेगी।
इंग्लैंड के अलावा कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण नीदरलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भी पाया गया है। नीदरलैंड और बेल्जियम ने कोरोना वायरस के नए प्रकार का पता चलने के बाद इंग्लैंड से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। इनके अलावा कई अन्य देश भी इंग्लैंड की उड़ानों पर रोक को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। यूरोप के कई देशों ने इंग्लैंड बॉर्डर को सील कर दिया है।
भारत में इस नए खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। यह मीटिंग सोमवार (21 दिसंबर 2020) को जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप के साथ होनी है। जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप की मीटिंग की अध्यक्षता डायरेक्टर जेनलर ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) करेंगे। WHO के भारतीय प्रतिनिधि डॉक्टर रॉडरिको एच ऑफरिन भी जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप के सदस्य हैं। इस इमरजेंसी मीटिंग में उनके भी रहने की संभावना है।
इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर क्रिस विट्टी ने कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में कहा, “हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बता दिया है। साथ ही कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में समझने के लिए उपलब्ध जानकारी का अध्ययन कर रहे हैं। हालाँकि फिलहाल इस बात को साबित करने का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है कि वायरस का यह नया प्रकार अधिक घातक है या नहीं।”
We’re in close contact with UK ?? officials on the new #COVID19 virus variant. They’ll continue to share info & results of their analysis & ongoing studies. We’ll update Member States & public as we learn more about the characteristics of this virus variant & any implications.
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों ने कल यानी, सोमवार (दिसंबर 21, 2020) से सभी धरना स्थलों पर 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।
किसानों ने कहा है कि वो 25-27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाकों को मुफ्त कर देंगे और दो दिनों तक हरियाणा के नाकों पर टोल नहीं वसूलने दिया जाएगा। जबकि, पंजाब में पहले से ही कई नाकों पर टोल की वसूली नहीं हो रही है।
ऐसे समय में, जब पंजाब के किसानों ने आरोप लगाया कि नए कृषि कानून एमएसपी (न्यनतम समर्थन मूल्य) को समाप्त कर देंगे, केंद्र सरकार ने घोषित किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान करते हुए कृषि उत्पादों की खरीद जारी रखी है। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2020-21 के दौरान, भारत सरकार ने देश भर के किसानों से धान, कपास, दलहन, तिलहन, कपास आदि विभिन्न फसलों को खरीदा, जिससे करोड़ों किसानों को लाभ पहुँचा है।
पंजाब राज्य में विरोध के बावजूद, खरीफ 2020-21 सीजन के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा में सुचारू रूप से चल रही है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, 19 दिसंबर को धान की 412.91 लाख मीट्रिक टन (LMT) खरीद की गई थी, जबकि पिछले साल यह 337.74 LMT थी। इस प्रकार, कोरोनो वायरस महामारी और तथाकथित किसान आंदोलनों के बावजूद इस साल एमएसपी के तहत धान खरीद 22.25% बढ़ी है।
इस वर्ष भारत में 412.91 लाख मीट्रिक टन की खरीद में से, अकेले पंजाब राज्य से खरीद 202.77 लाख मीट्रिक टन थी। जिसका मतलब है, कुल खरीद का लगभग आधा (49.10%), पंजाब से लिया गया।
एमएसपी की कुल 77957.83 करोड़ रुपए की खरीद से लगभग 48.56 लाख किसानों को लाभ हुआ है।
इसके अलावा, मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश से 51 लाख मैट्रिक टन दालों की खरीद की गई। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए कोपरा के 1.23 LMT की खरीद के लिए स्वीकृति भी दी गई।
मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा (नारियल की सफ़ेद भाग) की खरीद के प्रस्ताव अन्य राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद दिए जा रहे हैं। अगर संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में तय की गई फसल अवधि के दौरान उन फसलों के बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे जाते हैं, ऐसे में भी इन फसलों की खरीद के लिए पंजीकृत किसानों से सीधे वर्ष 2020-21 के लिए तय एमएसपी पर ही खरीदा जा सकेगा।
दिसंबर 19, 2020 तक, सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से मूँग, उड़द, मूँगफली और सोयाबीन के 1,95,899.38 मीट्रिक टन की खरीद की है, जिसका एमएसपी मूल्य 1050.08 करोड़ रूपए है। ये सीधे तौर पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान में 1,08,310 किसानों को लाभान्वित करते हैं।
इसी प्रकार, कर्नाटक और तमिलनाडु में 3961 किसानों को लाभान्वित करते हुए, 52.40 करोड़ रुपए के एमएसपी मूल्य वाले 5,089 मीट्रिक टन खोपरा खरीदे गए हैं। यहाँ पर ध्यान देने की जरूरत है कि पिछले वर्ष खोपरा की खरीद केवल 293.34 मीट्रिक टन थी।
सीजन के दौरान, 16,65,871 करोड़ रुपए मूल्य के 57,83,122 कपास के बीज की खरीद की गई, जिससे 11,24,252 किसानों को लाभ हुआ। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में कपास की खरीदारी की गई है।
कॉन्ग्रेस ने किसानों को झूठ बोलकर उकसाया कि एमएसपी को खत्म कर दिया जाएगा
ध्यान देने की बात यह है कि विपक्षी दल, विशेष रूप से कॉन्ग्रेस पंजाब में किसानों को नए कृषि कानूनों के सम्बन्ध में झूठ बोलकर लगातार गुमराह कर रही है। अन्य बातों के अलावा, कॉन्ग्रेस किसानों को उकसा रही है कि केंद्र सरकार अपने नए कृषि कानूनों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को समाप्त कर देगी। जो कि एमएसपी के अनुसार खरीफ फसलों की उपरोक्त खरीद के आँकड़ों के अनुसार एक स्पष्ट झूठ नजर आता है।
कॉन्ग्रेस के ही प्रपंच का नतीजा है कि किसानों ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में आंदोलन किया, यह मानते हुए कि नए कानूनों का मतलब है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को समाप्त कर दिया जाना!
मंडियाँ रहेंगी, MSP रहेगा अप्रभावित: मोदी सरकार
आंदोलन के बीच ही केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि वे ना तो मंडियों को खत्म कर रहे हैं और ना ही एमएसपी को निरस्त कर रहे हैं। यानी, विपक्ष के ये दोनों दावे झूठ हैं। वास्तव में, कॉन्ग्रेस ने अपने 2019 के चुनावी घोषणापत्र में, एपीएमसी अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त करने का वादा किया था। हालाँकि, मोदी सरकार ने केवल एपीएमसी अधिनियम में संशोधन किया है।
मोदी सरकार ने एपीएमसी अधिनियम को पूरी तरह से निरस्त नहीं किया है। नए कृषि कानून किसानों को राज्य की मंडियों के अलावा अपनी उपज बेचने के लिए एक अतिरिक्त जरिया प्रदान करते हैं। नए विधेयकों में प्रावधान राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए किसी भी ‘बाजार शुल्क या उपकर या लेवी’ से एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) मंडियों के परिसर के बाहर किए गए लेनदेन की छूट देते हैं। यानी, किसान इस कानून के जरिए अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊँचे दामों पर बेच पाएँगे।
पीएम नरेंद्र मोदी, सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने बार-बार कहा है कि एमएसपी जारी रहेगा। हालाँकि, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस बार-बार एक ही झूठ को दोहरा रहे हैं।
पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने रविवार को ट्विटर पर एक वीडियो साझा की। इस वीडियो में एक 13 वर्षीय नाबालिग ईसाई लड़की के पिता ने अपने परिवार के साथ हुए अत्याचार के बारे में बताया है।
पीड़ित पिता के मुताबिक साजिद अली, सुमैरा और तारव ने लाहौर के कंजरा से उनकी बेटी महविश को अगवा कर लिया। रेप के बाद जबरन उसका धर्मांतरण किया गया। उन्होंने बताया, “पुलिस ने मामले की जॉंच की। दस्तावेजों की जॉंच के बाद पुलिस ने उसे फर्जी बताया। बावजूद, इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।” उन्होंने यह भी बताया कि आरोपितों द्वारा लड़की के निकाहनामे और धर्मांतरण से जुड़े दस्तावेज भी नकली हैं।”
“We (Non-Muslims) can never get justice in Pakistan. I, with my family will commit suicide if our daughter is not returned” Says a Christian whose 13-year-old daughter Mehwish is abducted for rape & conversion to Islam by a 42-year-old Muslim Man in Thokar Nayaz, Kanjrah Lahore. pic.twitter.com/SG16wMCHXX
पीड़ित पिता से पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मामले को लेकर किसी नेता से मदद माँगी? जवाब में हताश पिता ने कहा,” शुरू में हमने दो बार मंत्री जाहज आलम घस्ती से मिलने की कोशिश की, लेकिन मिल नहीं सके। हालाँकि, बाद में 3 बार उनसे अलग-अलग मौकों पर मिले। लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें मैं क्या कर सकता हूँ।”
पीड़ित पिता ने वीडियो में आगे कहा, “यदि प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्य न्यायाधीश और सांसद मेरी पीड़ा नहीं सुनते और मेरी बच्ची की सही सलामत वापसी नहीं सुनिश्चित करवाते तो मैं पूरे परिवार के साथ मरने को मजबूर हो जाऊँगा। पाकिस्तान में इंसाफ मिलना असंभव है। न्याय तभी मिलेगा जब मेरी बेटी मेरे पास वापस आएगी। मेरी बातों को हल्के में न लें। अगर मेरी बेटी वापस नहीं आती है, तो मैं वही करूँगा जो मैंने कहा है।”
सॉलिडैरिटी एंड पीस मूवमेंट (MSP) ने अनुमान लगाया है कि 12 और 25 साल के बीच की लगभग 1000 ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण, बलात्कार और फिर जबरन धर्म परिवर्तन कर उन्हें निक़ाह के लिए मजबूर किया जाता है। वहीं पैसों से मजबूर कई पीड़ित परिवारों द्वारा तो मामले ही दर्ज नहीं किए जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 10 अक्टूबर को 14 वर्षीय हुमा यूनुस को कराची में उसके माता-पिता के घर से पंजाब के डेरा गाजी खान निवासी अब्दुल जब्बार नामक एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपहरण कर लिया गया था। वहीं फरजाना (14) और सेहरिश (16) के साथ 3 मुस्लिम युवकों ने सामूहिक बलात्कार किया, लेकिन परिजनों को अदालत के बाहर ही मामला सुलझाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
इनके अलावा मुसलमानों द्वारा अपहरण की गई सना जॉन (13) और महविश (14) के मामले में पुलिस ने कड़ी जाँच की थी, फिर भी उन्हें वापस नहीं लाया जा सका। मारिया सरफराज नाम की 11 साल की एक ईसाई लड़की के साथ भी 3 दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया गया, लेकिन उसे भी मामले को दबाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अप्रैल 2020 में मुहम्मद नक़श और उसके साथी द्वारा 14 वर्षीय ईसाई लड़की मायरा शहबाज़ को पाकिस्तान के फैसलाबाद में अगवा कर लिया गया था।
कोरोनो वायरस टीकों को लेकर दुनिया भर के मुस्लिम देशों की चिंता बाकि देशों से जरा हटकर हैं क्योंकि जिलेटिन को सड़े हुए पशुओं की खालों, हड्डियों, मवेशियों और सूअरों के टिशुओं को उबाल कर बनाया जाता है। सामान्य भाषा में कहें तो यही पोर्क से बनने वाला जिलेटिन, टीकों में स्टेबलाइजर के रूप में उपयोग किया जाता है।
ऐसे में इस्लामी देशों की चिंता का विषय यह है कि सूअर का माँस मजहब विशेष में ‘हराम’ माना जाता रहा है। वैक्सीन के भंडारण और ढुलाई के दौरान उनकी सुरक्षा और प्रभाव बनाए रखने के लिये सूअर के माँस (पोर्क) से बने जिलेटिन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालाँकि, वैक्सीन निर्माता कम्पनी फाइजर, मॉडर्न, और एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ताओं ने कहा है कि उनके COVID-19 टीकों में सूअर के माँस से बने उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। लेकिन कई कंपनियाँ ऐसी हैं, जिन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन में सूअर के माँस से बने उत्पादों का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। ऐसे में इंडोनेशिया जैसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में चिंता फ़ैल गई है।
हाल ही में एक खबर भी सामने आई थी, जिसमें बताया जा रहा था कि मुस्लिम देश कोरोना वैक्सीन के लिए हलाल सर्टिफिकेट की माँग कर रहे हैं। फाइजर, मॉडर्न और एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ताओं ने कहा है कि पोर्क उत्पाद उनके कोरोनावायरस टीकों का एक घटक नहीं हैं। लेकिन ऐसे हालातों में मिलियन डॉलर के व्यवसाय, और सीमित आपूर्ति के बीच परिणामस्वरूप, कि इंडोनेशिया जैसे कुछ मुस्लिम देशों को ऐसे टीके मिलेंगे जो अभी तक जिलेटिन मुक्त होने के लिए प्रमाणित नहीं हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव सलमान वकार का कहना है कि ‘ऑर्थोडॉक्स’ यहूदियों और मुस्लिमों समेत विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर असमंजस की स्थिति है, जो सूअर के माँस से बने उत्पादों के इस्तेमाल को धार्मिक रूप से अपवित्र मानते हैं। स्विट्जरलैंड की दवा कंपनी ‘नोवारटिस’ ने सुअर का मांस इस्तेमाल किए बिना दिमागी बुखार का टीका तैयार किया था।
सिनोवैक बायोटेक, कोरोना वायरस टीकों की निर्माता एक चीनी कम्पनी, और अन्य चीनी कंपनियों सिनफार्मा और कैनसिनो बायोलॉजिक्स ने टीके में इस्तेमाल किए गए घटकों पर पूछे गए सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पहले से ही दुनिया भर के मुस्लिम देशों के साथ लाखों की डील की हुई हैं। पाकिस्तान CanSino Biologics वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण कर रहा है और ये परिक्षण अंतिम चरण में हैं।
समुदाय विशेष में हैं टीकाकरण को लेकर अफवाहें
मजहबी धर्मगुरुओं के बीच भी कोरोना वैक्सीन के हलाल प्रमाणित होने की बहस जारी है। देखा जाए तो मुस्लिम समुदाय द्वारा ’हराम’ या पोर्क उत्पादों से युक्त होने के कारण वैक्सीन का प्रतिकार कोई नई घटना नहीं है। वर्ष 2018 में, इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल, जो कि हलाल प्रमाणपत्र जारी करती है, ने घोषणा की कि पोर्क से बने जिलेटिन के कारण खसरा और रूबेला के टीके ‘हराम’ हैं।
यह भी देखा गया है कि मुस्लिम समुदाय में अक्सर टीकाकरण को लेकर अफवाह और फर्जी दावे बेहद ‘लोकप्रिय’ रहे हैं। कोरोना वायरस की शुरुआत से ही सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम वीडियो देखे जाते रहे हैं, जिनमें कोई मुस्लिम मौलवी या इस्लामी धर्मगुरु टीके के साथ शरीर में ‘चिप’ फिट कर देने की बातें लोगों से कहते देखे जा सकते हैं।
मजहबी धर्मगुरु अल्लामा कौकब नूरानी ने तो ये दावा तक कर दिया कि कोरोना वैक्सीन के बहाने वैक्सीन लगवाने वालों के मिजाज पर काबू करने के लिए लोगों के शरीर में एक ‘चिप’ डालने की साजिश की जा रही है। उनका दावा था कि इस चिप से आप सिर्फ वही सोच सकेंगे जो वो (यहूदी) चाहेंगे।
पिछले दिनों केरल के कोच्चि में सड़क किनारे 63 वर्षीय शिवदासन का शव मिला था। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इसमें वे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मूर्ति की सफाई करते और उसे फूलों से सजाते नजर आए थे। पुलिसिया जाँच से यह बात सामने आई है कि इसी प्रसिद्धि के कारण उनकी हत्या कर दी गई।
वायरल वीडियो में शिवदासन सड़क किनारे लगी कलाम की मूर्ति को फूलों से सजा रहे थे। साथ ही उन्होंने वे केरल में रहते हुए उनसे दो बार मिल चुके थे। इस दौरान कलाम ने उन्हें 500 रुपए भी दिए थे। इस वीडियो ने लाखों लोगों का दिल जीता और वह लोगों के बीच जाने-माने चेहरे बन गए।
शिवदासन की बढ़ती लोकप्रियता के चलते सड़क किनारे रहने वाले राजेश को उनसे जलन होने लग गई। इसी चिढ़ में उसने शिवदासन की हत्या कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 16 दिसंबर को कथित तौर पर अब्दुल कलाम मार्ग (मरीन ड्राइव) से शिवदासन की लाश बरामद की थी। शुरुआत में लगा कि यह सामान्य मौत है। लेकिन, पोस्टमार्टम से पता चला कि मौत अंदरूनी चोटों की वजह से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।
जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि कुछ दिनों पहले सड़क पर ही रहने वाले राजेश ने शिवदासन को बुरी तरह पीटा था। इसके कारण उन्हें काफी चोटें आई थी। पुलिस को मरीन ड्राइव से भी हत्या के कई सबूत मिले। प्रारंभिक जाँच के आधार पर परवूर निवासी राजेश की गिरफ्तार किया गया।
एर्णाकुलम के सहायक पुलिस आयुक्त के लालजी ने शनिवार को मीडिया को बताया, “शिवदासन को हाल ही में अब्दुल कलाम की प्रतिमा को फूलों से सजाने पर बहुत लोकप्रियता मिली थी। हमें कई लोगों से पता चला है कि आरोपित इससे चिढ़ गया था। कई लोगों ने राजेश को लाश मिलने से दो दिन पहले शिवदासन को मारते हुए देखा था।”
गौरतलब है कि शिवदासन कोल्लम के रहने वाले थे और काफी समय से मरीन ड्राइव में रह रहे थे। वहीं पर अब्दुल कलाम की एक मूर्ति भी स्थापित है। मूर्ति के आसपास गंदगी देख शिवदासन ने रोजाना कलाम की मूर्ति की सफाई और उसे फूलों से सजाना शुरू कर दिया। कलाम के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी। जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था।
केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। रविवार (दिसंबर 20, 2020) को दौरे के अंतिम दिन उन्होंने बीरभूम जिले में हनुमान मंदिर स्टेडियम रोड से बोलपुर सर्कल तक रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने कोरोना वायरस वैक्सीन और CAA-NRC की ‘क्रोनोलॉजी को लेकर भी बयान दिए।
बोलपुर में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता ने कहा कि मैंने अपने जीवन में इस तरह का रोड शो नहीं देखा है। यह रोड शो पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति बंगाल के लोगों के प्यार और विश्वास को दर्शाता है। बंगाल के लोग बदलाव चाहते हैं।
रोड शो के बाद मीडिया से बात करते हुए जब केंद्रीय गृहमंत्री से कोरोना वैक्सीन और एनआरसी-सीएए की ‘क्रोनोलॉजी’ को लेकर सवाल पूछा गया तो इस पर अमित शाह ने जवाब दिया, “सीएए और एनआरसी के नियमों को अभी तैयार नहीं किया गया है। यह देशवासियों के लिए कोरोना वैक्सीन उपलब्ध हो जाने के बाद ही होगा।”
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “अभी सीएए के नियम बनने बाकी हैं और बड़ा अभियान नहीं चलाया जा सकता। इसलिए जब टीका लगने की शुरुआत होगी और कोरोना की सायकिल की शुरुआत होगी, तभी हम आपको सूचित करेंगे। क्रोनोलॉजी में पहला पहला तो समाप्त होने दीजिए।”
#BattleForBengal | The rules of the CAA & NRC are yet to be framed. This will happen post we have a vaccine for Covid in the country: Home Minister Amit Shah. pic.twitter.com/pS0HfWTqj0
बंगाल में होती आ रही भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या और भाजपा नेताओं से हिंसा के प्रश्न पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम सीमा पर है, 300 से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएँ कर दी गई हैं और उसकी जाँच में एक इंच भी प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बंगाल की जनता परिवर्तन चाहती है और जनता तय कर चुकी है कि चुनाव के मैदान में इस बार कमल खिलेगा। उन्होंने कहा, “यह परिवर्तन बंगाल के विकास के लिए है.. यह परिवर्तन बांग्लादेश से घुसपैठ रोकने के लिए है.. यह परिवर्तन हिंसा खत्म करने के लिए है।”
शाह ने कहा कि कुछ दिन पहले हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के बंगाल दौरे के दौरान उन पर TMC के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से हमला किया था, उसकी भाजपा निंदा करती है और मैं व्यक्तिगत रूप से भी इसकी निंदा करता हूँ। अमित शाह ने कहा, “TMC कार्यकर्ताओं की ओर से किया गया हमला केवल भाजपा अध्यक्ष पर हमला नहीं है, यह बंगाल के अंदर लोकतंत्र की व्यवस्था पर हमला है। इसकी ज़िम्मेदारी TMC सरकार और TMC कार्यकर्ताओं की है।”
रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसमें विभिन्न प्रजातियों के 100 से भी अधिक जानवरों, पक्षियों और सरीसृपों को रखा जाएगा। यहाँ जानवर देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लाए जाएँगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जामनगर में चिड़ियाघर बनाने के प्रोजेक्ट को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी देख रहे हैं। यह चिड़ियाघर जामनगर के पास मोती खावड़ी में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी परियोजना के समीप 280 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के डायरेक्टर परिमल नाथवानी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को ग्रीन्स जियोलॉजिकल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन किंगडम (Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Kingdom) नाम दिया गया है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के तमाम विभागों की अनुमति भी ली जा चुकी है। अनुमान है अगले 2 साल में यह प्रोजेक्ट बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इस साल लॉकडाउन और कोरोना की वजह से इस प्रोजेक्ट में थोड़ी देरी हुई है।
चिड़ियाघर के लिए लेआउट केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा पहले ही एप्रूव्ड करवा लिया गया है और इसकी जानकारी प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। सीजेडए वेबसाइट के अनुसार, “रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा गुजरात के जामनगर में ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन किंगडम की प्रस्तावित स्थापना के लिए मास्टर (लेआउट) योजना के साथ प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को 12 फरवरी, 2019 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 33 वीं बैठक द्वारा एप्रूव्ड किया गया था।”
उल्लेखनीय है कि इस चिड़ियाघर में सभी जानवरों के लिए अलग-अलग सेक्शन होंगे। इसमें फॉरेस्ट ऑफ इंडिया, फ्रॉग हाउस इंसेक्ट, लाइव ड्रैगन लैंड, एग्जॉटिका आईलैंड, वाइल्ड ट्रेल्स ऑफ गुजरात, एक्वेटिक किंगडम के नाम से सेक्शन बनाए जाएँगे। चिड़ियाघर का लेआउट केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की वेबसाइट पर साझा किया गया है।
यहाँ जानवरों को उस तरह का वातावरण दिया जाएगा जो उनके रहने के लिए अनुकूल हो। वहीं इस जू में आप बार्किंग डीयर, स्लेंडर लोरिस, स्लॉथ बियर, फिशिंग कैट, कोमोडो ड्रैगन, इंडियन वुल्फ और रोजी पेलिकन सहित विभिन्न जानवरों को देख पाएँगे। इसमें क्राउनड क्रेन, जैगुआर, अफ्रीकन लॉयंस के अलावा 12 शुतुरमुर्ग, 20 जिराफ, 10 काइमैन, 18 मीरकैट्स, 7 चीते, अफ्रीकी हाथी और 9 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी चिड़ियाघर के मुख्य आकर्षण होंगे।। फ्रॉग हाउस में करीब 200 अलग-अलग प्रजाति के मेढक तो वहीं एक्वेटिक किंगडम में 350 तरह की मछलियाँ मौजूद होंगी।
चिड़ियाघर को लेकर वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एडिशनल डायरेक्टर जनरल सौमित्र दासगुप्ता ने कहा, “हम वन्य जीवन और इसके संरक्षण के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रुचि और जुनून से अवगत हैं। परियोजना विवरणों के बारे में पूरी तरह से जानकारी नहीं होने के बावजूद, मुझे यकीन है कि यह वन्यजीव संरक्षण में निजी भागीदारी के लिए एक अच्छा उदाहरण स्थापित करेगा।”
दासगुप्ता ने कहा कि भारत में निजी चिड़ियाघरों का कॉन्सेप्ट कोई नया नहीं है। देश के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में से एक कोलकाता का ‘द जूलॉजिकल गार्डन’ भी एक प्राइवेट जू में शामिल है। बता दें आरआईएल ने जामनगर में एक संरक्षण केंद्र भी स्थापित किया है, जहाँ कुछ तेंदुओं को हाल ही में राज्य के वन विभाग द्वारा जंगल से लाया गया था। नथवाणी ने बताया कि यह केंद्र एक सीएसआर पहल के तहत है। यह चिड़ियाघर परियोजना से अलग है। यह जनता के लिए नहीं खुला है।
तमिलनाडु में मंदिर के भीतर चोरी का एक और मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अज्ञात बदमाशों ने थंजवूर (Thanjavur) जिले के थिरुविदाइमरुथुर (Thiruvidaimaruthur) क्षेत्र स्थित प्राचीन मंदिर में तोड़फोड़ की। वहाँ स्थापित देवी की मूर्ति से सोने का मंगलसूत्र (थाली) चुरा लिया। चोरी की वारदात लगभग 350 साल पुराने ‘आनंदवल्ली समेथा भास्करेस्वरार’ मंदिर में कुछ दिनों पहले अंजाम दी गई थी।
पुजारी शिवानंदियार सेनाथीपति रात में पूजा करने के बाद मंदिर में ताला लगा कर घर चले गए थे। अगले दिन मंदिर के गार्ड ने मंदिर का मुख्य द्वार खोला तो उन्होंने देखा कि मंदिर के चारों ताले टूटे हुए थे। मंदिर परिसर के भीतर दाखिल होने पर पता चला कि अम्बल श्राइन में रखे गए पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले थिरुमंगलयम, सोने और चाँदी के अन्य सामान गायब थे।
प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हुई चोरी
घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर के प्रबंधक कृष्णासामी ने इस संबंध में थिरुविदाइमरुथुर पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। कथीर न्यूज़ (kathir news) की रिपोर्ट के मुताबिक़ मंदिर के कोष विभाग ने तमाम शिकायतों के बावजूद सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं करवाई। मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालुओं का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही की वजह से चोरी की यह घटना हुई है।
विवादास्पद ईसाई प्रचारक, पादरी और DMK समर्थक बिशप एजरा सरगुनम ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक बयान देते हुए कहा है कि वो देश पर शासन करने के लायक नहीं हैं क्योंकि वह अपनी पत्नी के साथ पाँच दिनों तक भी नहीं रह पाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (दिसंबर 20, 2020) को बिशप एजरा सरगुनम (Bishop Ezra Sargunam), जो अक्सर हिंदू घृणा और पीएम मोदी से नफरत के लिए जाने जाते हैं, ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) प्रमुख एमके स्टालिन के नेतृत्व में नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘भूख हड़ताल’ में भाग लिया। इसमें उनके साथ अन्य हिंदू-विरोधी प्रचारक एमडीएमके प्रमुख वाइको, मनिठान्या मक्कल काची के नेता जवाहिरुल्लाह और विपक्षी दलों से संबंधित नेता भी उनके साथ थे।
इस कार्यक्रम में बोलते हुए बिशप एजरा सरगुनम ने पीएम मोदी की नीतियों को लेकर सरकार पर हमला किया और कहा कि वे जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह दिल्ली में गूँजना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में कही गई बातें मोदी के कानों में पड़नी चाहिए।
अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगलते हुए बिशप ने कहा, “वह वैसे भी अपना दिमाग नहीं बदलने वाला है। वह एक ऐसा व्यक्ति है जो देश को लूटने आया है और अपना काम सही तरीके से कर रहा है। उसका कर्तव्य चार अमीर लोगों का समर्थन करना है। वह गरीबों की परवाह नहीं करता है लेकिन वह कहता रहेगा ‘मैं गरीब पैदा हुआ था, मैंने चाय बेची है, मैं गरीबों के लिए अपना जीवन जी रहा हूँ। लेकिन दोस्तों, वह इसके बिल्कुल विपरीत काम करता है।”
अपने अपमानजनक बयानों को जारी रखते हुए, बिशप एजरा ने कहा कि पीएम मोदी भगवान से डरते नहीं हैं क्योंकि उनके पास विवेक नहीं है। पीएम मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत गालियाँ देते हुए विवादास्पद क्रिश्चियन प्रचारक ने कहा कि अगर मोदी कम से कम 5 दिनों के लिए अपनी पत्नी के साथ रहते तो उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी की कठिनाइयों का पता चल जाता।
पीएम मोदी के खिलाफ और जहर उगलते हुए, एजरा सरगुनम ने कहा, “क्या आप शादी एक बाद एक हफ्ते के लिए भी अपनी पत्नी के साथ नहीं रह सकते हैं? इस देश पर शासन करने के लिए आपके पास क्या योग्यता है? यह फेक आदमी.. जब तक इस मोदी को हटा नहीं दिया जाता, तब तक हमें ऐसी कठिनाइयाँ होती रहेंगी। वह किसी भी तरह की मुश्किलों को नहीं जानता है। अगर वह बच्चों की परवरिश करता, तभी उसे मुश्किलों का पता होता! हम नहीं जानते कि वह किसके साथ रहता था! हम अब उसके साथ फँस गए हैं। हम सबको उसके खत्म होने की प्रार्थना करनी चाहिए।”
.@narendramodi Sir how long will you bear with this and why? Sir be ruthless to this DMK AHs, these custards don’t deserve your kindness or mercy, This is just a sample for the hatred shown in yesterday’s DMK protest pic.twitter.com/uF2sFjGSiD
हैरान करने वाली बात यह है कि ईसाई प्रचारक ने ये सभी बयान DMK प्रमुख एमके स्टालिन और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में दिए। सरगुनम को द्रमुक का समर्थक माना जाता है। वह इससे पहले भी अपने बयानों से विवाद खड़े कर चुके हैं।
हिन्दुओं को तमाचा मारने की इच्छा रखने वाला ईसाई प्रचारक एजरा सरगुनम
बिशप एजरा सरगुनम तमिलनाडु राज्य का एक विवादास्पद मिशनरी प्रचारक है। राजनीतिक दल DMK के साथ उसके बेहद करीबी संबंध हैं और कई मौकों पर, खासकर चुनावों के दौरान वह उनका समर्थन करता रहा है। बिशप एजरा को हिंदुओं से गहरी नफरत के लिए भी जाना जाता है।
2019 में, एजरा सरगुनम को हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा कहते हुए पाया गया था, जब उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म नाम का कोई धर्म ही नहीं था। एजरा ने आगे कहा, “उनके (हिंदुओं) चेहरे पर थप्पड़ लगाओ, उनका खून बहने दो। फिर उन्हें सच्चाई (ईसाई धर्म) जानने दो।”
ईसाई मिशनरी एजरा के अनुसार, “उस समय ब्राह्मणों के एक समूह ने कहा था कि वे अनुसूचित जाति और आदिवासी लोगों को हिंदू के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। वे केवल एक ‘अच्छे ब्राह्मण’ को ही एक हिंदू के रूप में स्वीकार करेंगे।”
उसने यह भी दावा किया कि इन ब्राह्मणों ने देश की 50% आबादी को हिंदू के रूप में वर्गीकृत किया है। चुनावों में ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ के नए उदय का उल्लेख करते हुए बिशप ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सभी लोग राजनीतिक लाभ के लिए ‘हिंदूकृत’ थे। ईसाई प्रचारक ने कहा कि हिंदू धर्म एक ‘कृत्रिम धर्म’ है।
कोलकाता से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। नशे में धुत इरशाद माली रेप के इरादे से 6 साल की मासूम बच्ची को छत पर ले गया। फिर पकड़े जाने के डर से गला दबाकर बच्ची को छत से नीचे फेंक दिया। बच्ची की हालत नाजुक बताई जा रही है। आरोपित इरशाद को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना कोलकाता के राजा बागान थाना क्षेत्र के कानखुली इलाके की है। बच्ची अपने मामा के घर अपने अन्य दोस्तों के साथ लुका-छुपी खेल रही थी। इसी दौरान बगल की छत पर बैठे इरशाद की नजर उस पर पड़ी। आरोपित इरशाद अपनी छत से नीचे उतर कर 6 साल की बच्ची को बहलाने-फुसलाने में लग गया। उसने मासूम को कहा कि वह छुपने की एक अच्छी जगह जानता है, जहाँ कोई भी उसे ढूँढ़ नहीं सकता। बच्ची उसकी बातों में आ गई।
इरशाद माली उसे लेकर छत पर चला गया और यौन शोषण करने लगा। इसी दौरान बच्ची को ढूँढते हुए उसके मामा ने आवाज लगाई जिसे सुन बच्ची भी चीखने-चिल्लाने लगी। बच्ची के चिल्लाते ही आरोपित सहम गया और चुप कराने के लिए उसका गला दबा दिया। बच्ची बेहोश हो गई तो इरशाद को लगा कि वह मर गई है। फिर उसने बच्ची को छत से नीचे फेंक दिया। खून से लथपथ बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। पुलिस जाँच में एक महिला ने शराब में धुत इरशाद के बारे में जानकारी दी जिसे उसने छत से जल्दी-जल्दी नीचे उतरते देखा था। पूछताछ के दौरान इरशाद ने बच्ची के साथ दुष्कर्म और जान से मारने की कोशिश करने की बात स्वीकार ली।