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‘बांग्लादेश से घुसपैठ रोकेंगे, राजनीतिक हत्याएँ बंद होंगी’: मेगा रोड शो में अमित शाह ने बंगाल से कहा- BJP को 1 मौका दीजिए

अपने 2 दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (दिसंबर 20, 2020) को बीरभूम के बोलपुर में 1 किलोमीटर के विशाल रोड शो में हिस्सा लिया, जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भीड़ जुटी। उससे पहले उन्होंने स्थानीय हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। स्टेडियम रोड से बोलपुर चौराहा तक चले इस रोड शो के दौरान भीड़ ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगाती रही।

अमित शाह ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का तेज अभी भी यहाँ पर है और बंगाल के खोए हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने के गुरुदेव के सपनों को पूरा करने के लिए भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बीरभूम का महत्व इसीलिए भी है क्योंकि यहाँ 2 लोकसभा सीटें हैं और पश्चिम बंगाल के 294 विधानसभा सीटों में से 11 यहाँ पर हैं। ऐसे में यहाँ पार्टी ज्यादा मेहनत कर रही है।

अमित शाह ने इस दौरान कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह का रोड शो नहीं देखा है और ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति बंगाल का प्यार दिखाने के साथ-साथ दीदी को लेकर उनका विरोध भी दिखाता है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव विकास के लिए होगा और न सिर्फ बांग्लादेश से घुसपैठ रोकेंगे, बल्कि राजनीतिक हत्याएँ भी बंद होंगी। उन्होंने बताया कि जहाँ भी भाजपा सत्ता में है, उस राज्य में विकास हुआ है।

शाह ने दावा किया कि बंगाल विकास के रास्ते से भटक चुका है। उन्होंने बंगाल की जनता से कहा कि आपने कॉन्ग्रेस को मौका दिया, कम्युनिस्टों को मौका दिया, TMC को मौका दिया है। साथ ही आग्रह किया कि एक बार भाजपा को मौका दीजिए, हम 5 साल में सोनार बांग्ला बना कर रहेंगे।

2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने बीरभूम के 11 सीटों में से 9 पर जीत दर्ज की थी। अमित शाह के यहाँ रोड शो करने से पार्टी को यहाँ आशा दिख रही है। यहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद रहे अनुपम हाजरा अब भाजपा में हैं, ऐसे में समीकरण बदल रहे हैं।

अमित शाह ने कहा कि उन्हें आज एक ऐसे महान व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, जिन्होंने दुनिया में भारतीय ज्ञान, साहित्य, दर्शन और कला को लोकप्रिय बनाया है। उन्होंने कहा कि गाँधी और बोस, दोनों ही उनसे प्रेरित थे। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर, रवींद्रनाथ ने विश्व-भारती और शांति निकेतन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, कला और दर्शन को बढ़ावा दिया। दूसरी ओर, दुनिया की विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ा गया है। उन्हें नोबेल से पहचान नहीं मिली, नोबेल को उनसे पहचान मिली।

इससे पहले उन्होंने शांति निकेतन पहुँच गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी। वे कोलकाता के विस्टीन होटल से बीरभूम के लिए निकले, जहाँ शांति निकेतन के विश्व भारती विश्वविद्यालय का उन्होंने दौरा किया। इसके बाद वे रवींद्र भवन पहुँचे, जहाँ टैगोर को श्रद्धांजलि देने के बाद संगीत भवन के लिए रवाना हुए। विश्व भारती विश्वविद्यालय में उन्होंने पारम्परिक बंगाली ‘बाउल’ संगीत को सुना और कलाकारों की प्रस्तुति का भी आनंद लिया।

काबुल में कार बम धमाका: 9 लोगों की मौत, सांसद मोहम्मद वारदाक की हालत गंभीर

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकियों ने एक साथ कई कारों में बम धमाका किया। इन विस्फोटों में अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है। घायलों की संख्या 20 से ज्यादा बताई जा रही है।

विस्फोट इतना भयंकर था कि आस-पास की बिल्डिंग की खिड़कियों में लगे काँच टूट कर बिखर गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सासंद मोहम्मद वारदाक को इस हमले में निशाना बनाया गया था। उनकी हालत गंभीर है, जबकि उनके कई सुरक्षाकर्मियों की इस हमले में मौत हो गई।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने अशरफ गनी ने इस आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा, “आम लोगों पर आतंकी हमले से शांति के प्रयासों को धक्का लगा है।”

अफगानिस्तान में आंतरिक मामलों के मंत्री मसूद अंदाराबी ने इन कार बम धमाके की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अब तक 9 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 अन्य घायल हैं।

अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि कार बम से हुए आतंकी धमाके में बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग समेत 20 लोग घायल हुए हैं। विस्फोट से आस-पास के घरों को गंभीर नुकसान भी पहुँचा है।

जिस म​हिला MLA ने कहा था- मैं सभी मंत्रियों की बाप, वो बेटी से टिप्स लेकर दे रहीं 10वीं का इम्तिहान

मध्य प्रदेश उपचुनावों के बाद बसपा के विवादित विधायक रामबाई फिलहाल कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रहने का फैसला करते हुए राज्य ओपन बोर्ड के माध्यम से कक्षा 10 की परीक्षा दे रही हैं।

रामबाई का राजनीतिक करियर बेहद दिलचस्प और विवादित रहा है। इसी वर्ष मार्च के माह कमलनाथ सरकार पर संकट के दौरान कथित तौर पर कॉन्ग्रेसी नेता उन्हें गुरुग्राम के एक होटल से छुड़ाकर ले गए थे। गौरतलब है कि रामबाई अक्सर मंत्री पद की माँग करती रही हैं और उन्हें पहले कॉन्ग्रेस और फिर भाजपा सरकार में मंत्री पद की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ऐसे में अब रामबाई का पूरा ध्यान आजकल अपनी शैक्षणिक योग्यता सुधारने पर है और इस काम में उनका सहयोग कर रही हैं उन्हीं की बेटी मेघा। बसपा विधायक की बेटी मेघा परिहार दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास ऑनर्स की छात्रा हैं। रामबाई अब तक कक्षा 10 की तीन परीक्षाएँ दे चुकी हैं। रामबाई ने यह जानकारी समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को देते हुए कहा कि वो आजकल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

विधायक रामबाई ने कहा कि उनके गाँव में कोई स्कूल न होने के कारण वो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई थीं। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तय करने के बाद स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती थी जिस वजह से उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। विधायक रामबाई आठवीं पास हैं। इसकी जानकारी उन्होंने खुद अपने विधानसभा चुनाव के नामंकन भरने के शपथ पत्र में दी थी।

उल्लेखनीय है कि रामबाई वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा की टिकट पर पथरिया विधानसभा सीट से विधानसभा पहुँची हैं। इससे पहले रामबाई अपने एक विवादस्पद बयान को लेकर चर्चा में आईं थीं। दरअसल उस समय विधायक ने कह दिया था कि वह सभी मंत्रियों की बाप हैं।

जनवरी 2019 में लगातार हंगामे के बावजूद मंत्री पद नहीं मिलने के कारण, मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक, रामबाई ने कहा था कि वह सभी मंत्रियों से ऊपर हैं क्योंकि वह मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाले राज्य (तब) में कॉन्ग्रेस सरकार की ‘किंगमेकर’ थीं।

इस पर निराशा में बसपा विधायक ने कहा था, “”हम बन जाएँ, तो काम करेगे, नहीं बने तो भी सही काम करेंगे.. हम मंत्रियो के बाप हैं, हमने ही सरकार बनाई है।”

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष दिसंबर माह में ही, नागरिकता कानून का समर्थन करने के कारण बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा विधायक रमाबाई परिहार को पार्टी से निलंबित भी कर दिया गया और उन पर पार्टी कार्यक्रमों में भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी। परिहार ने नागरिकता कानून का समर्थन करते हुए इसे अच्छा कानून बताया था, जिसे मायावती द्वारा अनुशासनहीनता ठहरा दिया गया।

मुस्लिम महिला से मोहब्बत की सजा: अफवाह पर लड़के की 74 वर्षीय माँ को नग्न कर इस्लामी भीड़ ने गाँव में घुमाया था, 4 साल बाद आरोपित बरी

दक्षिण मिस्र (south egypt) के एक गाँव में 74 वर्षीय ईसाई महिला को नग्न कर बेरहमी से घसीटने और पीटे जाने के मामले में वहाँ के न्यायालय ने 3 लोगों को बरी कर दिया है। इस घटना का कारण यह था कि गाँव में यह अफ़वाह उड़ी थी कि ईसाई महिला के बेटे का प्रेम प्रसंग (अफेयर) एक मुस्लिम महिला के साथ है। इस बात की जानकारी मिलते ही लगभग 300 लोगों की इस्लामी भीड़ ने ईसाई महिला के साथ इस बर्बर घटना को अंजाम दिया था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह घटना 2016 की है। सोड थाबेत (Soad Thabet) नाम की वृद्ध महिला को इस्लामी भीड़ ने पीटने के बाद निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया था। इस घटना के दौरान उस क्षेत्र में रहने वाले ईसाई समुदाय के लोगों के घरों में जम कर तोड़फोड़ और लूट की वारदात अंजाम दी गई थी। करीब 7 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। ईसाई समुदाय के लोगों को गाँव छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। शुरुआत में इस मामले में एक आरोपित और उसके दो बेटों को 10 साल की सजा सुनाई गई थी। लेकिन, दोबारा सुनवाई में तीनों को बरी कर दिया गया।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने इस आदेश की जानकारी मिलने पर दुःख जताया। उन्होंने कहा, “घटना के इतने सालों बाद आखिर कैसे उन्हें छोड़ा जा सकता है। उन्होंने मुझे सभी के सामने निर्वस्त्र करके पीटा था। मैं इसके अलावा और क्या कह सकती हूँ। ईश्वर मेरे अधिकार मुझे वापस देगा।” इस घटना के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरने के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सिसी (Abdel Fattah al-Sisi) ने भी इसे अस्वीकार्य बताया था। मिस्र के कई दिग्गज मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की काफी आलोचना की थी।

मिस्र की कुल आबादी लगभग 10 करोड़ है। इसमें ईसाई आबादी करीब 15 फ़ीसदी है। बीते कुछ सालों में ईसाई समुदाय पर अत्याचार के मामलों में काफी तेज़ी देखने को मिली ही। ISIS ने भी मिस्र में मौजूद चर्च को जम कर निशाना बनाया है। इस मामले में 74 वर्षीय महिला के बेटे पर आरोप लगाया गया था कि उसका एक मुस्लिम व्यवसायी की पत्नी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। दोनों ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया था। 74 वर्षीय महिला का कहना था कि भीड़ ने उनके घर को आगे के हवाले किया फिर उन्हें निर्वस्त्र करके घुमाया।

मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक़ मिस्र में अल्पसंख्यकों के साथ इस तरह के अत्याचार की घटनाएँ आम होती जा रही है। उनके घर जलाए जाते हैं। चर्च में उपद्रव किया जाता है। महिलाओं के साथ ज़्यादती होती है और लोगों को पलायन करने पर मजबूर किया जाता है। मिस्र के मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। इसकी वजह से अत्याचार करने वाले कट्टरपंथी इस्लामियों के हौसले बुलंद रहते हैं।  

जिस मदरसे में पढ़ने जाती थी, वहीं के मौलाना ने की नाबालिग से रेप की कोशिश, जान से मारने की धमकी: गिरफ्तार

यूपी पुलिस ने अमेठी जिले में मदरसा शिक्षक कलीम अहमद को नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और रेप की कोशिश में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मौलवी ने 15 वर्षीय छात्रा को नशीली दवा पिला कर दो अन्य लोगों के साथ मिल कर उसका रेप करने की कोशिश की। यही नहीं, मामले को दबाने के लिए मदरसा शिक्षक ने पीड़िता और उसकी माँ को जान से मारने की धमकी भी दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की माँ ने 16 दिसंबर को अमेठी के पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देते हुए मामले की जानकारी दी थी। पत्र में पीड़िता की माँ ने मौलाना की अश्लील हरकतों के बारे में बताते हुए कहा, “26 नवंबर को दोपहर बाद जब वह घर से बाहर बाजार गई थी, उसी बीच अकेली पाकर मदरसे के मौलाना घर पर आए और कोई नशीली दवा उसकी बेटी को दे दी। इसके बाद पीछे से दो लोगों ने उसका हाथ पकड़ लिया, जिसके बाद मेरी बेटी के साथ छेड़खानी के साथ ही दुष्कर्म का प्रयास भी किया।”

माँ ने आगे लिखा, “मेरी बेटी बेहोश हो गई थी लेकिन उसी बीच जब वह बाजार से घर आ गई तो और उसने किसी तरह मदरसा शिक्षक और बाकियों से अपनी बेटी की जान बचाई। इसके बाद मौलाना ने उसे धमकी दी थी कि अबकी बार तो उसकी बेटी बच गई है लेकिन अगर कहीं शिकायत की तो जान से हाथ धोना पडेगा, इसलिए इस बारे में अब तक शिकायत नहीं की थी लेकिन उसे लगातार आरोपी की तरफ से धमकी मिल रही है।”

वहीं पीड़िता ने पुलिस को बताया की दुष्कर्म के इरादे से मदरसे से कुछ लोग घर में घुसे थे, जिनमें से वह 2 लोगों को पहचानती है। जिनका नाम महफूज आलम है, जिसका मदरसा है और कलीम कारी जोकि मौलाना हैं। पीड़िता की माँ ने पुलिस को बताया कि 1 साल पहले उनकी बेटी इन्हीं के मदरसे में पढ़ने जाती थी। जहाँ मौलाना उसकी बेटी के साथ अक्सर अश्लील हरकतें करता था। जब बेटी के आरोपों पर हमने इसकी शिकायत मदरसे में की, तो उन्होंने हमें धमकी देकर भगा दिया था।

जिले के थाना शिवरतनगंज पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने बताया, “आज पुलिस ने सूचना पर पॉक्सो कानून समेत कई गंभीर धाराओं में वांछित बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र के पिचूरी निवारी आरोपी कलीम अहमद को चिलौली मोड़ के पास से सुबह गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। बाकी अन्य लोगों की धर-पकड़ में पुलिस जुटी है।”

‘कश्मीर में जो भारतीय बसेगा, वो हमारे निशाने पर होगा’: लश्कर से जुड़े PAFF ने हथियारों वाले वीडियो से धमकाया

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने वीडियो जारी कर जम्मू-कश्मीर में बसने की योजना बना रहे लोगों को धमकी दी है। वीडियो में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों को भी जान से मारने की धमकी दी गई है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस वीडियो में एक नकाबपोश आतंकी धमकी देते हुए कहता है, “हम कश्मीर में इजरायल जैसे समझौते की तरह बस्तियाँ स्थापित करने की इजाज़त नहीं देंगे। जो भारतीय यहाँ बसने की तैयारी कर रहे हैं वह हमारा सबसे पहला निशाना होंगे।”

न्यूज़ 18 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ धमकी देने वाला व्यक्ति कश्मीरी पोशाक पहने हुए है और उसने कश्मीरी में ही अपनी पूरी बात कही। उसकी मेज पर दो एके 47, गोलियाँ और हथियार रखे हुए थे।  

नकाबपोश आतंकी वीडियो में कहता है, “नियम के मुताबिक़ हम आम नागरिकों की हत्या नहीं करेंगे। लेकिन आरएसएस का जो एजेंट कश्मीर में स्थायी रूप से रहने की योजना लेकर आएगा उन पर कोई रहम नहीं किया जाएगा। इस तरह के लोग सबसे पहले हमारे निशाने पर होंगे।”

आतंकी ने दावा किया कि ‘हिन्दू आतंकवादी’ कश्मीरियों से उनकी ज़मीन छीन कर और उनके बगीचों को काट कर उन्हें बाहर करने की योजना बना रहे हैं। ऐसी तमाम क्लिप्स सामने आई हैं जिसमें सैनिकों की बस्ती के लिए ज़मीन की पहचान की जा रही है और बगीचों को हटाया जा रहा है। आतंकी इसकी तुलना “इजरायली पद्धति के कॉलोनियलिज्म” (colonialism) से की। 

वीडियो के अंत में आतंकी कह रहा है, “बाहरियों को जम्मू-कश्मीर का पाक साफ़ ‘स्टेटस’ बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बस्तियाँ बनाने की आड़ में गैर कश्मीरियों को बसाना, फासिस्ट केंद्र सरकार की घटिया योजना है। ‘आज़ादी’ के लिए लड़ने वाले इस तरह के षड्यंत्रों को जम्मू-कश्मीर में नहीं पनपने देंगे। वह इस तरह की कोशिशों को रोकने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देंगे, इसलिए हमारी चेतावनी है बच कर रहिए।”   

PAFF वही आतंकी संगठन है जिसने भारतीय सेना के जवानों पर हमले का वीडियो बॉडी कैमरे से शूट किया था। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया था। अगस्त 2020 में जम्मू-कश्मीर के बारामूला स्थित क्रीरी में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें कुल 5 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे और 3 आतंकवादी मारे गए थे। 

घटना के दो दिन बाद आतंकियों ने घटनास्थल पर हुई गोलीबारी का वीडियो इंटरनेट पर साझा किया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक़ PAAF लश्कर-ए-तैय्यबा से संबंधित है।                 

OpIndia ने 703 दिन पहले ही बता दिया था फर्जी: जयराम ने माँगी माफी, रवीश कुमार कब माँगेंगे

वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘कारवाँ’ के साथ मिल कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कोर्ट में इस मामले में माफ़ी माँग ली है। विवेक डोभाल द्वारा दायर किए गए आपराधिक मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई के दौरान कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अपना माफीनामा सौंपा। आपत्तिजनक लेख और बयान के खिलाफ विवेक ने मुकदमा दायर किया था।

NSA अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के माफीनामे को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि का केस वापस लेने का निर्णय लिया है। जयराम रमेश ने अपने माफ़ीनामे में कहा कि उन्होंने क्षणिक आवेश में विवेक डोभाल के खिलाफ बयान दिए और कई आरोप लगाए, क्योंकि उस समय चुनाव का भी माहौल था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें ये सब कहने से पहले अपने दावों की पुष्टि कर लेनी चाहिए थी। इसके अलावा, जो एक और बात कॉन्ग्रेस नेता ने कही, वो ये कि वो कारवाँ पर प्रकाशित लेख को पढ़ कर भ्रम में पड़ गए थे।

विवेक डोभाल पर आरोप लगाने की यह कहानी सिर्फ कॉन्ग्रेस नेता तक ही सीमित नहीं है। कारवाँ द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को हवा और दिशा देने में एक और व्यक्ति का भी बहुत बड़ा योगदान था। ये नाम है मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और वामपंथी प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार का।

सत्ता विरोधी प्रपंचों में फर्जी ख़बरें फ़ैलाने के लिए मशहूर NDTV के पत्रकार रवीश कुमार को साल 2019 में ही रमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी साल यानी 2019 की ही शुरुआत में, रवीश कुमार ने वामपंथी प्रोपेगेंडा मशीनरी- ‘कारवाँ’ और ‘दी वायर’ के कंधे पर बंदूक रखकर NSA अजीत डोभाल के बेटे विवेक पर आरोप लगाते हुए बड़े शब्दों में इसे ‘D-कम्पनी’ लिखा था।

अपने प्राइम टाइम से लेकर फेसबुक पोस्ट में रवीश कुमार ने बिना किसी सबूत के, या शायद अपने व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों की ‘वाइब्स’ के आधार पर ही NSA अजीत डोभाल और उनके बेटों को सीधा ‘D- कंपनी’ कहते हुए हर तरह की कॉन्सपिरेसी थ्योरी ऊगली थी। रवीश ने लिखा था- “डी-कंपनी का अभी तक दाऊद का गैंग ही होता था। भारत में एक और डी कंपनी आ गई है…” 

रवीश कुमार के इन्हीं आरोपों का खंडन ठीक उसी दिन ऑपइंडिया ने एक लेख भी लिखा था। वामपंथी मीडिया के कुकर्मों को बेनकाब करने के उद्देश्य से अस्तित्व में आए ‘ऑपइंडिया’ (हिंदी) को तब महज 5 दिन ही हुए थे। वास्तव में, तब रवीश कुमार ने इस फेक न्यूज़ को कॉन्ग्रेस नेता पी चिदम्बरम के बेटे कार्ति चिदम्बरम की गिरफ्तारी की खुन्नस में उछाला था और उसका जवाब अब रवीश को भी मिल ही चुका है।

पहला जवाब तो ये कि इसके बाद पी चिदंबरम को जेल जाना पड़ा, जबकि अजीत डोभाल के बेटे ने रवीश और कारवाँ मैगजीन पर मानहानि का केस दायर कर दिया था। अब, ऑपइंडिया द्वारा रवीश के दावों के खंडन किए जाने के लगभग 703 दिन बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने माँग कर स्पष्ट रूप से कहा है कि वह कारवाँ द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार में आ गए थे।

यहाँ पर रवीश कुमार का जिक्र किया जाना इस कारण भी आवश्यक है क्योंकि अक्सर हर फर्जी आरोप को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का जिक्र करते हुए वामपंथी मीडिया मनगढ़ंत आरोप लगाकर सत्ता के खिलाफ नागरिकों को भड़काता आया है। ठीक इसी तरह से इन मीडिया गिरोहों द्वारा अक्सर अम्बानी और अडानी के नाम को भी बदनाम किया जाता रहा है।

यही नहीं, रवीश कुमार और तमाम वामपंथियों के इन प्रपंचों को काटने का जो काम ऑपइंडिया (OpIndia) ने किया था, उसका परिणाम अब सामने आने लगा है। तमाम मनगढ़ंत आरोपों और फर्जी खबरों को इस गर्व और हुनर के साथ कह देने के बाद से रवीश कुमार एक मोहल्ले के चुगलखोर से ज्यादा और कुछ नहीं रह गए हैं। हालाँकि, उन्हें इस बात से कोई फर्क न पड़ता हो, फिर भी रवीश कुमार को अपने व्हाट्सऐप संदेशों पर ज्यादा समय नहीं गुजरना चाहिए, उनका दिमाग कुतर्क की हर सीमा पार कर चुका है।

आप खुद सोचिए, एक आदमी कितने शातिर तरीके से आपको प्रभावित कर सकता है, रवीश कुमार इस बात का उदाहरण है। लेकिन आपने सच्चाई और कुतर्कों में से कुतर्क को चुना है, क्योंकि आपको लगता है कि आप सही बात कहने के लिए उस वर्ग द्वारा नकार दिए जा सकते हैं, जिसके मूल में घृणा और विपरीत विचाधारा के लिए नफरत है। सो हाँकते रहिए… इसी बात के तो पुरस्कार हैं।

बाउल लोकगायक के घर लंच, ‘गुरुदेव’ को श्रद्धांजलि: अमित शाह के 1 KM मेगा रोड शो के लिए बीरभूम तैयार

पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (दिसंबर 20, 2020) को शांति निकेतन पहुँच गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी। वे कोलकाता के विस्टीन होटल से बीरभूम के लिए निकले, जहाँ शांति निकेतन के विश्व भारती विश्वविद्यालय का उन्होंने दौरा किया। इसके बाद वे रवींद्र भवन पहुँचे, जहाँ टैगोर को श्रद्धांजलि देने के बाद संगीत भवन के लिए रवाना हुए।

वहाँ बांग्लादेश भवन सभागार में अमित शाह ने जनसभा को सम्बोधित किया। उनका हेलिकॉप्टर बीरभूम के बोलपुर में उतरा, जहाँ भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया। विश्व भारती विश्वविद्यालय में उन्होंने पारम्परिक बंगाली ‘बाउल’ संगीत को ध्यान से सुना और कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लिया। उन्होंने उस कॉटेज का भी दौरा किया, जहाँ टैगोर रहा करते थे। जिस कुर्सी पर गुरुदेव बैठते थे, उस पर उन्होंने पुष्प अर्पित किया।

लोकगायकों को सुनने के बाद अमित शाह ने एक लोकगायक के ही आवास पर भोजन भी किया। इससे 1 दिन पहले उन्होंने एक किसान के यहाँ भोजन किया था। दोपहर के 2 बजे के बाद बोलपुर में स्टेडियम रोड स्थित हनुमान मंदिर से बोलपुर सर्कल तक उनका रोड शो प्रस्तावित है, जिस पर सभी की नजरें हैं। 1 किलोमीटर का ये रोड शो करीब 1 घंटे तक चलेगा। इस दौरान राज्य के अन्य प्रमुख भाजपा नेता उनके साथ रहेंगे।

बाउल संगीत का लुत्फ उठाने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। अमित शाह विश्व भारती यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में भी शरीक हुए। इस दौरान कुलपति विद्युत् चक्रवर्ती व विश्वविद्यालय के अन्य सदस्यों के साथ बैठक भी हुई। छात्रों ने रवींद्र संगीत की प्रस्तुति दी। पूरे बोलपुर में अमित शाह और जेपी नड्डा के ही कटआउट्स नजर आ रहे हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने शहर में अमित शाह की यात्रा में व्यवधान डालने की भी कोशिश की।

इससे 1 दिन पहले पश्चिम बंगाल के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी सहित 11 विधायक और एक सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे। हालाँकि, मिदनापुर में हुई रैली के बाद भाजपा के कई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में भाजपा के 15 कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें से 6 का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है। TMC के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं को गाड़ी से निकाल-निकाल कर लाठी-डंडों से पीटा गया।

‘TMC के खिलाफ एक भी वोट पड़ा तो खून की नदियाँ बहा देंगे’: पश्चिम बंगाल की दीवारों पर मतदाताओं को धमकी

जहाँ एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं, वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों की करतूतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब राज्य में दुकानों की दीवारों पर भाजपा के लिए धमकी लिखी जा रही हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने एक वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया कि मतदाताओं को धमकाने के लिए TMC द्वारा बांग्ला में दीवारों धमकी लिखी गई हैं।

उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मतदाताओं को धमकाने के लिए दीवारों पर बांग्ला में लिखा है कि ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस के खिलाफ एक भी वोट पड़ा तो हम खून की नदियाँ बहा देंगे। अगर भाजपा को एक भी वोट दिया तो आपको उसके नतीजे भुगतने होंगे।’ क्या यही ममता राज का लोकतंत्र है!” वीडियो में एक दुकान के दोनों तरफ दीवारों पर बांग्ला में पंक्तियाँ लिखी हुई दिख रही हैं।

नदिया के शांतिपुर क्षेत्र का ये मामला है। यहाँ से भाजपा के जगन्नाथ सरकार सांसद हैं, वहीं TMC के अरिंदम भट्टाचार्य विधायक हैं। इससे पहले नॉर्थ 24 परगना के बैरकपुर में एक भाजपा के दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया थे। नदिया में मनोज सरकार नाम के एक असामाजिक तत्व का नाम सामने आ रहा है, जिसके द्वारा ये सन्देश लिखवाए जा रहे हैं। भाजपा लगातार तृणमूल पर विरोधी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने का आरोप लगा रही है।

ज्ञात हो कि अपने 2 दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुँचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (दिसंबर 20, 2020) को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन पहुँच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वे कोलकाता के विस्टीन होटल से बीरभूम के लिए निकले, जहाँ शांति निकेतन के विश्व भारती विश्वविद्यालय का उन्होंने दौरा किया। इसके बाद वो रवींद्र भवन पहुँचे, जहाँ टैगोर को श्रद्धांजलि देने के बाद संगीत भवन के लिए रवाना हुए।

…5 साल तक बैठे रहेंगे PM मोदी के समर्थन में, कानून हमारे लिए सही: विरोध वाले ‘किसानों’ को आईना दिखाती वायरल वीडियो

केंद्र सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों का लगातार 25वें दिन भी ‘विरोध’ जारी है। पंजाब-हरियाणा समेत देश के तमाम हिस्सों से आए ‘किसान’ दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। ‘किसान’ संगठनों की माँग स्पष्ट है कि मोदी सरकार कृषि सुधार क़ानूनों को वापस ले। 

जहाँ एक तरफ तथाकथित किसान इन क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तमाम किसान और किसान संगठन इसके समर्थन में भी आगे आए हैं। इस क़ानून के समर्थन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में बना हुआ है, जिसमें किसान कहते हैं कि ज़रूरत पड़ी तो वह इसके समर्थन में 5 साल तक बैठेंगे।

ट्विटर पर साझा किया गया यह वीडियो फ़िलहाल काफी चर्चा में बना हुआ है, जिसमें एक रिपोर्टर कई किसानों से कृषि सुधार क़ानूनों पर प्रश्न पूछता है। वीडियो की शुरुआत में ही एक किसान कहते हैं, “किसान के हक़ में बने हैं ये बिल। मोदी ने जो तीनों बिल पास किए हैं, वह किसान हित में हैं।” इसके बाद रिपोर्टर ने पूछा कि वह (किसान) अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली और ज़रूरत का सामान भी लेकर आए हैं। 

इसका जवाब देते हुए किसान ने कहा, “हम अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली सब लेकर आए हैं।” विरोध कर रहे तथाकथित किसानों के 2 साल तक प्रदर्शन स्थल पर बैठने की बात पर किसान ने कहा, “हम 2 साल तो क्या ज़रूरत पड़ने पर 5 साल तक बैठेंगे मोदी के समर्थन में!” इसके बाद दूसरे किसान ने कहा, “हम सभी समर्थन में ही आए हैं और अगर वह (प्रदर्शन करने वाले किसान) 2 साल बैठते हैं तो हम पूरे 5 साल तक यहीं पर बैठेंगे।” 

फिर तीसरे किसान ने कहा, “आज तक जो भी सरकार आई, क्या उसने किसानों को खाद-पानी के लिए 6 हज़ार रुपए दिया? यही इकलौती ऐसी सरकार (मोदी सरकार) है, जो किसानों को 6 हज़ार रुपए दे रही है। यह सरकार दे रही है तो बीच में रोड़ा बन रहे हैं कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी वाले। इनको सोचना चाहिए कि आज तक इन्होंने क्या दिया देश के किसान को, बता दें?”

पहले किसान ने दोबारा 6 हज़ार रुपए वाली बात की पुष्टि करते हुए कहा, “किसानों को 6 हज़ार रुपए हर साल मिल रहा है। 60 साल की उम्र का किसान है, उसके लिए भी 3 हज़ार रुपए पेंशन दी जा रही है, यह सब मोदी सरकार कर रही है तो मोदी को कैसे गलत बता रहे हो। मोदी सबसे बढ़िया है और यह जो तीनों बिल आए हैं, वह किसानों के पक्ष में आए हैं।” 

अंत में रिपोर्टर ने पूछा कि क्या राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं? इस पर वहाँ मौजूद एक किसान ने कहा, “राहुल गाँधी कैसे बन जाएँगे प्रधानमंत्री? वह अभी ख़्वाब देख रहे हैं। कम से कम साल 2024 और 2029 के बाद ही राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनने का सोच सकते हैं।”