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राम मंदिर के लिए निकले थे चंदा जमा करने, मुस्लिम भीड़ ने किया हमला: 10 घायल, महाकाल मंदिर के पास की घटना

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बेगमबाग में शुक्रवार (दिसंबर 25, 2020) की शाम हिंदू संगठनों की रैली पर जम कर पत्थरबाजी की गई। बताया गया है कि मुस्लिम भीड़ की इस हरकत के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और इलाके में तनाव व्याप्त हो गया। वहाँ खड़ी कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। तोड़-फोड़ और पथराव की इस घटना में 10 लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार भी किया है।

हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए रैली निकाल रहे थे। इस रैली को टॉवर क्षेत्र से महाकाल क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर तक जाना था। तभी रास्ते में ही बेगमबाग क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों ने रैली पर पथराव शुरू कर दिया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने भारी पत्थरबाजी में खुद को घिरे हुए देख कर वहाँ से भागने में ही भलाई समझी। लेकिन, उन्होंने अपनी गाड़ियाँ वहीं छोड़ दीं।

इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने गाड़ियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। तोड़फोड़ के कारण सभी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस को जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, उसने घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रित किया। डीएम आशीष सिंह और एसपी सत्येन्द्र शुक्ला भी मौके पर पहुँचे। डीएम ने आपसी विवाद को झगड़े की वजह करार दिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने स्थिति को संभाल किया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

उज्जैन में महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर हुई घटना (वीडियो साभार: MP News TV)

इस पत्थरबाजी में न सिर्फ गाड़ियों के शीशे टूटे, बल्कि दुकानों के काँच भी टूट गए। क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। कुछ लोग हिरासत में भी लिए गए हैं। घटना से आक्रोशित हिंदुओं ने महाकाल थाने का घेराव किया और न्याय की माँग की। भाजपा सांसद अनिल फिरौजिया भी थाने पहुँचे। दोपहिया वाहनों की इस रैली पर शाम के 6 बजे पथराव हुआ। बदमाशों को चिह्नित कर के कार्रवाई की जा रही है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) ने अयोध्या में बनने जा रहे भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए एक देशव्यापी जन संपर्क और योगदान अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इस दौरान लोगों को जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व से भी अवगत कराया जाएगा। जनसंपर्क अभियान मकर संक्रांति से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत अरुणांचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान निकोबार और त्रिपुरा जैसे सुदूर के राज्यों तक में श्रीराम मंदिर की ऐतिहासिकता से रामभक्तों को अवगत कराया जाएगा।

माँ के प्यार में पागल सिरफिरे आशिक ने की बच्चें की बेरहमी से हत्या: क्राइम शो की नकल कर दिया अपराध को अंजाम

दिल्ली की संजय कॉलोनी से एक बेहद ही खौफनाक मामला सामने आया है। जहाँ एक सिरफिरे आशिक ने एक तरफा प्यार के जुनून में एक महिला के बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। बता दें, आरोपित महिला से प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। लेकिन महिला ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जिससे गुस्साए प्रेमी ने उसके बेटे को प्यार का दुश्मन समझ कर उसे इस कदर मौत के घाट उतारा जिसे सुनकर आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।

साउथ दिल्ली में 28 नवंबर को एक महिला ने अपने 10 साल के बेटे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने मामले में काफी जाँच पड़ताल की लेकिन उन्हें कोई सबूत हाथ नहीं लगा। धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ने लगा तभी लगभग एक महीने बाद पुलिस को 24 दिसंबर को जंगल के इलाके में एक बच्चे की लाश मिली शिनाख्त के बाद पता चला यह बच्चा वही है जिसकी तलाश की जा रही थी। बच्चे की लाश बेहद सड़ी गली अवस्था में थी।

पुलिस ने मामले में 22 साल के बिट्टू को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में बिट्टू ने बताया कि उसने एक फेमस क्राइम टीवी सीरियल देखकर अपहरण और खौफनाक हत्या की इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस के मुताबिक आरोपित बच्चे को उसके प्रेम के बीच रोड़ा मानता था। और उसे मारकर वह उसकी माँ के करीब जाना चाहता था।

एफआईआर के मुताबिक महिला का बेटा शिवम 28 नवम्बर को शाम करीब 4:00 बजे घर से बाहर कुछ सामान लेने के लिए निकला था और उसके बाद से ही वह लापता हो गया। बच्चे की माँ ने उसे बहुत ढूँढने की कोशिश की लेकिन जब वह नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस थाने में किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

बता दें, बच्चे के माँ- बाप आपसी मदभेद के चलते साथ नहीं रहते थे और उनका बच्चे की कस्टडी को लेकर कोर्ट में केस भी चल रहा था। बच्चे के गायब होने पर पुलिस को सबसे पहले पिता पर शक हुआ लेकिन तमाम जाँच पड़ताल और इलाके की सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को कुछ खास सफलता नहीं मिली।

फिर अचानक से एक दिन पुलिस को जंगल के पास के नदी में एक 10 साल के बच्चे की सड़ी हुई लाश मिली। पुलिस ने लाश की तफ्तीश की तो पता चला यह बच्चा वही है जिसकी तलाश की जा रही थी। बच्चे की हालत देख कर माँ बाप के भी होश उड़ गए थे।

जिसके बाद पुलिस ने मामले में फिर से जाँच शुरू की इस दौरान पुलिस को बिट्टू नाम के एक शख्स के बारे में पता चला। जो कि पीड़ित माँ के बचपन का दोस्त था और वह महिला से शादी भी करना चाहता था। लेकिन महिला के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और करवा दी थी।

वहीं जब बिट्टू को महिला और उसके पति के बीच की अनबन के बारे में पता चला तो वह वापस से उससे शादी करने का सपना सजाने लगा। बिट्टू धीरे-धीरे बच्चे की माँ के करीब आने लगा और उसने बच्चे से भी दोस्ती कर ली। वह अक्सर बच्चे को अपने साथ घुमाने के लिए ले जाया करता था। लेकिन जब उसने महिला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो उसने मना कर दिया और उससे दूरी बना ली।

पुलिस को बिट्टू पर शक हुआ और उन्होंने तुरंत उसे गिरफ्त में लेते हुए मामले की पूछताछ की। शुरुआत में बिट्टू ने पुलिस को उलझाने और अपने गुनाहों पर पर्दा डालने की तमाम कोशिश की। फिर सख्ती बरतने पर बिट्टू ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पूछताछ में बिट्टू ने बताया कि उसने बच्चे की माँ को कुछ दिन पहले शादी का प्रस्ताव दिया था लेकिन बच्चे की माँ ने उसके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बच्चे की माँ का कहना था कि अब उसका बेटा 10 साल का है वो अब दूसरी शादी नहीं करेगी। यह बात बिट्टू को नागवार गुजरी और बिट्टू ने 10 साल के मासूम शिवम को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चे को अकेला देख बिट्टू उसे कुछ खिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। वह पहले उसे बस स्टैंड ले गया और उसके बाद फतेहपुर बेरी पहुँचा वहाँ उसे जंगलों की तरफ ले गया और मौका देखकर बिट्टू ने गमछे से मासूम शिवम का गला दबाकर हत्या कर दी और उसकी लाश को एक तालाब में फेंक कर फरार हो गया। फिर वापस लौट कर बच्चे को ढूँढने का नाटक किया ताकि कोई शक ना कर सके।

साउथ दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर के मुताबिक अपहरण और कत्ल के आरोपी बिट्टू ने लाश को जलाने की भी कोशिश की थी। हत्या के अगले दिन बिट्टू एक बार फिर उसी तालाब पर पहुँचा जहाँ पर उसने शिवम की लाश को ठिकाने लगाया था। लाश तालाब में तैर रही थी बिट्टू ने लाश को बाहर निकाला और पास के पेट्रोल पंप से पेट्रोल लाकर लाश को जलाने की कोशिश की लेकिन कम पेट्रोल और लाश गीली होने की वजह से वह उसे जला नहीं पाया। इसके बाद बिट्टू ने शिवम की लाश को पत्थरों के नीचे छिपा दिया। पुलिस के मुताबिक उसके अगले दिन भी लाश के पास पहुँचा और शिवम के तमाम कपड़े उतार दिए ताकि उसकी पहचान ना हो सके।

मुंबई पुलिस का नया आरोप: BARC ने टाइम्स नाउ की रेटिंग घटाकर अर्णब के चैनल को बनाया नंबर-1, रिपब्लिक ने दिया तगड़ा जवाब

टीआरपी हेरफेर मामले में अब मुंबई पुलिस ने रेटिंग एजेंसी BARC के पूर्व अधिकारियों पर रिपब्लिक टीवी के साथ मिलीभगत करने का नया आरोप लगाया है।

मुंबई पुलिस ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के कार्यकाल के दौरान TRP का फर्जीवाड़ा किया गया और अन्य इंग्लिश टीवी समाचार चैनलों की रेटिंग जानबूझकर नीचे गिरा कर रिपब्लिक टीवी को नंबर 1 बनाया गया। बता दें दास इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके है।

पुलिस ने कहा कि BARC ने टाइम्स नाउ की रेटिंग को नीचे लाने के लिए व्यूअरशिप और टीआरपी डेटा में हेरफेर किया, जोकि पहले एक नंबर वन अंग्रेजी न्यूज चैनल था, जब अर्णब गोस्वामी इसे हेड कर रहे थे। इसके बाद अर्णब ने अपना खुद का चैनल रिपब्लिक टीवी लॉन्च किया।

BARC पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुंबई पुलिस ने कहा कि रेटिंग्स को पहले से ही निर्धारित कर दिया गया था और इसे अचीव करने के लिए दर्शकों के डेटा में हेरफेर किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि BARC के शीर्ष अधिकारियों द्वारा मामले में गुटबंदी की गई थी। मुंबई पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि डेटा, आउटलाइडर विधि, मेटा नियम और चैनल ऑडियंस नियंत्रण में हेरफेर करने के लिए तीन तरीकों को नियोजित किया गया था।

मुंबई पुलिस ने एक मेल के हवाला देते हुए कहा कि, BARC द्वारा टाइम्स नाउ और सीएनएन न्यूज 18 के नंबर बदल दिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप टाइम्स रेटिंग्स में बदलाव हुए थे। उन्होंने दावा किया कि रिपब्लिक को नंबर 1 पर लेने के लिए टाइम्स नाउ को जानबूझकर नंबर 2 बनाया गया।

गौरतलब है कि टीआरपी में हेरफेर मामले में यह नया खुलासा है, जहाँ मुंबई पुलिस मामले में दर्ज ओरिजिनल एफआईआर को पूरी तरह से अनदेखा कर रही है। बता दें यह एफआईआर हंसा रिसर्च द्वारा दायर की गई थी। जोकि निजी कंपनी है और BARC के बार-ओ-मीटर का प्रबंधन करती है, साथ ही टेलीविजन दर्शकों की संख्या को मापती है।

इस एफआईआर में उल्लेख किया गया था कि इंडिया टुडे अपने चैनल को देखने के लिए स्थापित टीआरपी को बढ़ावा देने के लिए मीटर के साथ घरों को रिश्वत दे रहा था। लेकिन इस मामले पर मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी पर आरोप लगाया था और इंडिया टुडे टीवी के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था।

वहीं मुंबई पुलिस द्वारा चैनल पर आरोप लगाए जाने के बाद रिपब्लिक टीवी ने एक बयान जारी कर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया और कहा कि BARC ने उन्हें दो बार ईमेल लिखकर कहा था कि रिपब्लिक टीवी पर किसी भी हेरफेर का कोई सवाल ही नहीं है। पुलिस के आरोपों को निराधार बताते हुए बयान में यह भी कहा गया कि जिस फोरेंसिक रिपोर्ट का मुंबई पुलिस उल्लेख कर रही है वह जुलाई 2020 से है, और चैनल को BARC के ईमेल नवंबर और दिसंबर 2020 में आए हैं।

रिपब्लिक ने यह भी बताया कि BARC में पिछले डिस्पेंशन के बाद चैनल की रेटिंग बढ़ गई। चैनल ने पूछा, “2020 का आधा साल बीतने के बाद दर्शकों की संख्या में वृद्धि हुई है। क्या मुंबई पुलिस के पास इसके लिए कोई स्पष्टीकरण है? या इसमें रिपब्लिक टीवी की दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए BARC की गलती है?”

उन्होंने यह भी कहा, “जुलाई 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद लगातार उसकी खबर चलाने पर रिपब्लिक भारत नंबर 1 हिंदी समाचार चैनल बन गया था, जब BARC में नया डिस्पेंसन खत्म हो गया था। क्या मुंबई पुलिस का दावा है कि BARC में नया डिस्पेंस रिपब्लिक टीवी के साथ हाथ मिला रहा है? ”

साथ ही रिपब्लिक ने कई दावे करते हुए मुंबई पुलिस के आरोपों को हास्यास्पद बताया है। और कहा है कि इस जाँच का कुल मकसद रिपब्लिक टीवी को टारगेट करना था।

उधर ‘जीजा जी’ किसानों की जमीन हड़प कर बैठे हैं, इधर घड़ियाली आँसू बहा कर कॉन्ग्रेस कर रही उन्हें गुमराह: स्मृति ईरानी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शुक्रवार को कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार पर जमकर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति चमकाने के लिए नए कृषि कानूनों के बारे में घड़ियाली आँसू बहा कर किसानों में भ्रम फैला रही है। वहीं स्मृति ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को किसानों के मुद्दे पर बहस करने की चुनौती भी दी।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “PM ने आज 18,000 करोड़ रुपए किसानों के खातों में डाले हैं। अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भी 39 करोड़ रुपए 1 लाख से ज्यादा किसानों तक पहुँचा है। यह उन लोगों को जवाब है जिन्होंने ऐसे लोकसभा क्षेत्रों में वर्षों-वर्ष अपनी सत्ता रखी, लेकिन किसान को वंचित रखा।”

उन्होंने गाँधी परिवार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “अमेठी जो एक वक्त में गाँधी परिवार का गढ़ कहलाता था, आज वही अमेठी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में विकास का साक्षी है। राहुल गाँधी का भ्रम जितनी जल्दी टूटे उतना अच्छा। पिछले चुनाव में वो सिमटकर लगभग 40 रह गए थे, अगले चुनाव में उनका क्या हश्र होगा वो भी जानते हैं।”

गौरतलब है कि संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अमेठी के दौरे पर आईं स्मृति ने किसान आंदोलन पर कॉन्ग्रेस की भूमिका पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, ”कॉन्ग्रेस अपनी सियासत चमकाने के लिए देश के किसानों के बीच भ्रम फैला रही है। कॉन्ग्रेस नए कृषि कानूनों के बारे में यह झूठ बोल रही है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था और मंडियों को समाप्त कर रही, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “देश के किसान कृषि की आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस को इससे तकलीफ हो रही है।” साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कर्ज माफी की थी, जिससे अमेठी के 40 हजार किसानों का 196 करोड़ रुपए का कर्ज माफ हुआ था। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की किसान सम्मान योजना के तहत अमेठी के तीन लाख 27 हजार किसानों को लाभ मिल रहा है।

इससे पहले, स्मृति ने तिलोई विधानसभा क्षेत्र के सिंहपुर ब्लाक में किसानों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया, “राहुल गाँधी किसानों से झूठ बोलकर उन्हें बरगलाने का काम कर रहे हैं। आज जो किसानों पर झूठे घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं, उन्हें गुमराह कर रहे हैं, उनके (राहुल के) जीजा जी तमाम किसानों की जमीन हड़प कर बैठे हुए हैं।”

स्मृति ने राहुल को बहस की चुनौती देते हुए कहा, “उनमें हिम्मत है, तो अमेठी के किसान के बीच आएँ। मैं उनसे किसानों के मुद्दे पर बहस करने को तैयार हूँ। मैं गाँधी खानदान को चुनौती देना चाहती हूँ कि राहुल गाँधी अमेठी के किसानों के बीच में बता दें उनके राज में किसानों की क्या स्थिति थी? आज अमेठी के किसानों के खातों में पैसा सीधे जा रहा है।”

अमेठी सांसद ने तीनों कृषि कानून किसानों के हित में बताते हुए किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा, ”आपकी जमीन न तो बिकेगी, न गिरवी होगी। बल्कि किसानों को उनकी उपज की कीमत 72 घंटे के अंदर मिल जाएगी। लेकिन, राहुल गाँधी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। अमेठी से उनका बोरिया बिस्तर बँध चुका है, अब देश से भी बंधने वाला है। यही कारण है कि उनमें (राहुल में) और कॉन्ग्रेस में बौखलाहट है।”

PM मोदी के आरोपों से तिलमिलाई ममता बनर्जी ने किया खाली वार: ‘किसान सम्मान निधि’ नहीं लागू करने पर दिया गोलमोल जवाब

पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को 18000 करोड़ रुपए ट्रांसफर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (25 दिसंबर, 2020) को ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोलते हुए 70 लाख किसानों को राजनीतिक वजहों से मदद से वंचित रखने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर उनकी विचारधारा को भी कोसा था।

वहीं अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने मामले में खुद को घिरता देख पलटवार किया है। हालाँकि, इस दौरान भी उन्होंने राज्य में पीएम किसान सम्मान निधि योजना को नहीं लागू करने को लेकर कोई बात नहीं कही और मुद्दे को अलग ही दिशा देते हुए पीएम मोदी पर ही लोगों को गुमराह करने का आरोप लगा दिया।

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “आज (शुक्रवार को) पीएम मोदी ने अपने टेलीविजन भाषण में किसानों के मुद्दों को सुलझाने पर काम करने की बजाय उनके प्रति अपनी चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पश्चिम बंगाल के किसानों को सम्मान निधि योजना के तहत मदद करने के अपने इरादे का दावा किया। फैक्ट ये है कि वह लोगों को अपने आधे सच से गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”

ममता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया, “तथ्य यह है कि मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल की मदद करने के लिए एक भी काम नहीं किया है। उन्हें अभी तक बकाया 85 हजार करोड़ रुपए की राशि जारी करनी है, जिसमें 8000 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया भी शामिल है, जिसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।”

वहीं दूसरी ओर ममता पर निशाना साधते हुए राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी राज्य के किसानों को पीएम सम्मान निधि नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए चिंता कि बात है कि पश्चिम बंगाल के किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का फायदा नहीं मिल सकेगा।” ममता सरकार के रवैए को लेकर उन्होंने कहा, “एक राज्यपाल होने के नाते मैंने कई बार मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर अवगत कराया है, लेकिन मेरे किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया गया।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज किसानों से बातचीत के दौरान ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा था, “अगर बंगाल आपकी धरती है तो आपने बंगाल में किसानों को केंद्र सरकार की योजना से होने वाले लाभ से क्यों वंचित रखा? अब आप उठ कर पंजाब पहुँच गए? आपको क्या लगता है लोग इसे भूल जाएँगे।”

उन्होंने कहा कि बंगाल के किसानों को केंद्र की योजनाओं के लाभ से वंचित रखा गया। बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है, जो योजनाओं का लाभ किसानों तक नहीं पहुँचने दे रहा। ममता बनर्जी की विचारधारा ने बंगाल को बर्बाद कर दिया है। अपनी बात रखते हुए पीएम ने उस विचारधारा को भी कोसा, जिसके कारण आज बंगाल का विकास रुका हुआ है।

NDTV, मालिकों पर ₹27 करोड़ का जुर्माना | Ajeet Bharti’s take on NDTV fine

प्रणय रॉय, राधिका रॉय (जो NDTV के मालिक हैं) और NDTV पर SEBI ने ₹27 करोड़ का जुर्माना ठोका है। इससे पहले इन पर ₹234 करोड़ पर इनकम टैक्स चोरी, और 1222 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अलग चल रहा है।

पूरा वीडियो यहाँ देखें

‘द इकोनॉमिस्ट हमेशा भारत विरोधी रहा’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन के मोदी विरोधी एजेंडे को HDFC चेयरमैन ने किया पस्त

NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन जैन एक बार फिर अपने शो में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ माहौल तैयार करते पकड़े गए। इस बार HDFC के चेयरमैन दीपक पारेख उनके शो का हिस्सा थे। चेयरमैन का इंटरव्यू लेते हुए श्रीनिवासन ने अपना एजेंडा चलाने का प्रयास तो किया लेकिन उन्हें जवाब के बदले सिर्फ निराशा हाथ लगी।

श्रीनिवासन जहाँ इंटरव्यू के टाइम असंतोष का रोना रोते रहे। वहीं दीपक पारेख ने इस बात पर ध्यान आकर्षित करवाया कि विपक्षी पार्टियाँ अपने लोकतांत्रिक ड्यूटी को अच्छे से निभा पाने में असफल हो रही हैं। जिसके बाद श्रीनिवासन ने यह सुन कर पहले तो उनसे सहमति प्रकट की। लेकिन बाद में उन्हें जवाब में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

दीपक पारेख ने कहा, “मुझे लगता है ये कुछ ज्यादा या बहुत ज्यादा होगा। जब हमारी पीएम के साथ हाल में मीटिंग हुई। वो मीटिंग संप्रभु धन निधि को लेकर थी। उस समय हममें से कुछ को बोलने को कहा गया था,और तब मुझे लगा कि वह चीजों को सुनने के लिए तैयार हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें मामला सुनने में कोई परेशानी है।”

इस तरह आलोचना और असंतोष पर अपनी चिंता व्यक्त करने वाले श्रीनिवासन का प्रोपगेंडा हवा पाने पहले से पस्त पड़ गया। बता दें कि इससे पूर्व NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन जैन को हाल में एक इंटरव्यू के दौरान व्यवसायी व निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने मीडिया रिपोर्टिंग पर नैतिकता का पाठ पढ़ाया था। साक्षात्कार के दौरान झुनझुनवाला ने एनडीटीवी पत्रकार और उनके मीडिया हाउस को मोदी से घृणा करने वाला बताया था।  उन्होंने पत्रकार से कहा था, “आप सिर्फ़ सरकार की आलोचना करते हो।”

झुनझुनवाला ने जैन से कहा था, “मैं मोदी का फैन हूँ। ये बात जगजाहिर है। भारतीय होने के नाते मेरा अधिकार है अपनी राजनैतिक पसंद रखने का लेकिन मुझे तुम पक्षपाती लग रहे हो। मुझे सरकार के ख़िलाफ़ एनडीटीवी पक्षपाती लगता है।”

उल्लेखनीय है कि एचडीएफसी चेयरमैन दीपक पारेख इससे पहले केंद्र सरकार के बदलावों की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने कृषि में बदलावों और श्रम कानून में आए बदलावों में भी सरकार का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत कुछ बुरा है, लेकिन कई क्षेत्रों में रिकवरी हो रही है। अपनी बातचीत में उन्होंने ‘द इकोनॉमिस्ट’ को भी लताड़ लगाई जिसने कुछ समय पहले दावा किया था कि भारत और शेष विश्व में लोकतंत्र ख़त्म हो रहा है।

चेयरमैन ने पीएम मोदी को परिस्थितियों में आशावादी बताया और कहा कि उन्हें विश्वास है चीजें जल्दी अच्छी होंगी। उन्होंने कहा, “यह निश्चित रूप से चिंता की बात है कि हम क्या देख रहे हैं लेकिन मैं द इकोनॉमिस्ट पर ज्यादा जोर नहीं दूँगा। पिछले 30 सालों में मैंने द इकोनॉमिस्ट द्वारा एक भी सकारात्मक लेख नहीं देखा। इसलिए मैं इकोनॉमिस्ट को एक मार्गदर्शक सिद्धांत या फिर ऐसे किसी व्यक्ति की तरह नहीं लूँगा, जो हमेशा भारत विरोधी रहे हैं। चाहे सरकार कोई भी हो।”

RSS नेता रुल्दा सिंह की हत्या के मामले में 3 खालिस्तान समर्थकों को UK पुलिस ने किया गिरफ्तार

यूनाइटेड किंगडम (यूके) की द वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने 3 खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार किया है, यह तीनों 2009 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रुल्दा सिंह की हत्या के मामले में आरोपित हैं। तीनों आरोपित यूके के ही नागरिक हैं, इनकी पहचान गुरशरणबीर सिंह वहीवाला, अमृतबीर सिंह वहीवाला और प्यारा सिंह गिल के रूप में हुई है। 

वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा प्रत्यर्पण वारंट (extradition warrants) जारी होने के बाद इन तीनों की गिरफ्तारी 21 दिसंबर को हुई थी। वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने पेश किए जाने के बाद इन्हें कड़े दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए जमानत पर रिहा कर दिया गया था। 

रुल्दा सिंह की हत्या

रुल्दा सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन राष्ट्रीय सिख संगत से जुड़े हुए थे। 2009 के दौरान पटियाला में उनकी हत्या की गई थी, वह एक दुकान के सामने खड़े थे तभी उन पर हत्यारों ने गोली चला दी थी। दूसरे देशों के दौरे पर वह वहाँ रहने वाले सिख समुदाय के लोगों से भारत वापस आने का निवेदन करते थे।  

रुल्दा सिंह की हत्या के लिए आरोपित आया था भारत 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना पर बताया था कि गुरशरणबीर सिंह वहीवाला और प्यारा सिंह गिल रुल्दा सिंह की हत्या करने के लिए भारत आए थे। गुरशरणबीर अपने भाई अमृतबीर सिंह वहीवाला के पासपोर्ट पर भारत आया था। 2009 में पुलिस ने इस मामले से जुड़े कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया था। पंजाब पुलिस ने जुलाई 2010 के दौरान इस हत्या की घटना से जुड़ी जानकारी वेस्टमिडलैंड्स पुलिस से साझा की थी, जिसके बाद गुरशरणबीर सिंह को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दिसंबर 2010 में यूके पुलिस की एक टीम मामले के अन्य आरोपितों से पूछताछ के लिए पटियाला आई थी जो उस वक्त नाभा जेल में कैद थे। 

फरवरी 2015 में पटियाला कोर्ट ने गुरशरणबीर सिंह वहीवाला को अपराधी घोषित किया था। इस मामले में 5 अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी हुई थी लेकिन सबूतों के अभाव के चलते पटियाला कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया था। 

एनआईए की जाँच में सामने आया खालिस्तान और गुरशरणबीर सिंह का संबंध 

गुरशरणबीर सिंह वहीवाला 2016-2017 के बीच हुई सिलसिलेवार हत्याओं का मुख्य साज़िशकर्ता था जिसमें आरएसएस नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा (सेवानिवृत्त) का नाम भी शामिल था। वह खालिस्तानी लिबरेशन फ़ोर्स के मुखिया हरमिंदर सिंह मिंटू का सहयोगी भी था जिसकी 2018 के दौरान पंजाब की जेल में मृत्यु हो गई थी। मिंटू पर हत्या के अलावा ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों के भी आरोप थे। गुरशरणबीर सिंह ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहाल का भी करीबी माना जाता है जिस पर सिलसिलेवार हत्याओं का आरोप है। सितंबर 2018 में वेस्टमिडलैंड काउंटर टेररिज्म यूनिट ने गुरशरणबीर सिंह के घर पर छापा मारा था। 

आरएसएस नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा की हत्या के आरोप में एनआईए ने चार्जशीट दायर की थी जिसमें 11 आरोपितों का नाम शामिल किया गया था। अगस्त 2016 के दौरान जालंधर में हत्यारों ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी। एनआईए की चार्जशीट में गुरशरणबीर सिंह और जगतार सिंह जोहाल का नाम मौजूद है।       

वैक्सीन लेने से पहले फ़तवे का इंतज़ार करो, उसमें कुछ ऐसा तो नहीं है जो इस्लाम में हराम है: दारूल उलूम देवबंद

जहाँ दुनिया एक तरफ कोरोना महामारी का सामना करने के लिए वैक्सीन का इंतज़ार कर रही है वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के लोग इस बात से चिंतित हैं कि वैक्सीन ‘हलाल’ के मानदंडों पर खरी उतरती है या नहीं। यानी उनके अनुसार वैक्सीन में सूअर का माँस (pork) और जिलेटिन (gelatin) नहीं होना चाहिए। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के दारूल उलूम देवबंद के मौलवी ने एक बयान दिया है। 

मौलवी का कहना है कि मुस्लिमों को कोरोना वैक्सीन लेने से पहले फ़तवा का इंतज़ार करना चाहिए। मौलवी के मुताबिक़ मुस्लिमों को वैक्सीन लेने से पहले इस बात की जाँच करनी चाहिए कि उसमें ऐसी कोई चीज़ तो नहीं मिली है जो इस्लाम में ‘हराम’ मानी जाती है। मौलवी का कहना था कि फतवा विभाग के मुखिया यह तय करेंगे कि वैक्सीन लेना मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए सही है या नहीं।

दरअसल, वैक्सीन का संग्रह करते समय और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान पोर्क से तैयार किए गए जिलेटिन का उपयोग किया जाता है। इस बयान के ठीक एक दिन पहले मुंबई स्थित रज़ा एकेडमी के सुन्नी स्कॉलर ने कहा था कि चीन की वैक्सीन मुस्लिमों के लिए ‘हराम’ है क्योंकि उसमें पार्क का जिलेटिन होता है। 

जारी किए गए वीडियो में रज़ा एकेडमी के सेक्रेटरी जनरल सईद नूरी ने कहा था, “केंद्र की मोदी सरकार चीन से वैक्सीन का आयात नहीं करे। ऐसी कोई भी वैक्सीन जो बाहर से मँगाई गई है या भारत में तैयार की गई है उसके लिए सरकार को पूरी सूची दिखानी होगी कि वह किन चीज़ों से तैयार की गई है। जिससे हम वैक्सीन के उपयोग को लेकर ऐलान भी कर सकें।”  

इसके पहले UAE के फतवा काउंसिल ने कहा था कि मुस्लिमों के लिए कोरोना वैक्सीन लेना हराम नहीं है, भले ही उसमें सूअर का माँस (Pork) ही क्यों न हो। ये संयुक्त अरब अमीरात की सर्वोच्च इस्लामी संगठन है। संस्था ने कहा था कि अगर कोरोना वैक्सीन में पोर्क जेलेटिन हो, फिर भी मुस्लिम इसका प्रयोग कर सकते हैं। अब तक ये बहस चल रही थी कि कोरोना वैक्सीन में पोर्क होने की स्थिति में मुस्लिमों को इसे लेने की अनुमति है या नहीं। 

UAE की फतवा काउंसिल के अध्यक्ष शेख अब्दुल्लाह बिन बयाह ने कहा था कि आज की तारीख में मनुष्य के शरीर को बचाने की जिम्मेदारी सर्वोपरि है, इसीलिए कोरोना वैक्सीन में सूअर का माँस या उससे जुड़ा कोई कंटेंट होने की स्थिति में भी इसे लिया जा सकता है। उनके मुताबिक़ ये इस्लाम के अंतर्गत आने वाले प्रतिबंधों के तहत नहीं आएगा। इस पर इस्लामी नियम-कायदे लागू नहीं होंगे। अभी मनुष्यता को बचाने की जरूरत है।   

किसानों के हित में पंजाब सरकार सितंबर तक चाहती थी नए कानून लागू करवाना: रिपोर्ट से हुआ खुलासा

किसान आंदोलन के नाम पर मोदी सरकार को घेरने का काम वर्तमान में कई राजनीतिक दल कर रहे हैं। ऐसे में पंजाब सरकार अपनी राजनीति साधने से बाज नहीं रही। हाल में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जनता को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा था कि यदि हम काले कृषि कानूनों का विरोध नहीं करते हैं तो हम अपने बच्चों का भविष्य खतरे में डाल देंगे।

इसी तरह समय-समय पर बयान देकर वह किसानों की माँग को जायज ठहरा रहे हैं। वह आशंका जता रहे हैं कि नए कृषि कानूनों से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को बड़ा नुकसान पहुँचेगा, जिनका विकास मौजूदा प्रणाली के अंतर्गत मंडी बोर्ड को होने वाली आय से किया जाता है। 

अब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं की बातों में कितनी गंभीरता है या वह प्रदेश के किसानों के कितने बड़े हितैशी हैं, इस बात का अंदाजा सितंबर माह में पंजाब सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। ये रिपोर्ट कोविड-19 रिस्पांस रिपोर्ट है।

इसी रिपोर्ट में पंजाब में कोविड चुनौतियों से उभरने के लिए उपाय सुझाए गए हैं। इस रिपोर्ट में कोविड में पंजाब की स्थिति, राज्य की परेशानी, सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान का जिक्र है।

इस रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 334 में कृषि बदलावों का भी उल्लेख है। जिसके अंतर्गत मार्केटिंग रिफॉर्म की जानकारी देते हुए एपीएमसी से परे बाजार खोलने की बात स्पष्ट तौर पर लिखी गई है।

 इसमें दो बिंदु निम्नलिखित है:

  • APMC से परे कृषि विपणन को खोलना ताकि किसानों की उपज बेचने का स्कोप बढ़ सके।
  •  उच्च मूल्य वाले फलों (जैसे प्लम, आड़ू, लीची, अमरूद आदि) और सब्जियों (आलू, मटर, मिर्च आदि) के बागों के तहत क्षेत्रों की डबलिंग करना।

इसके अतिरिक्त इस रिपोर्ट में किसानों और किसान प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के बीच कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का जिक्र भी किया गया है।

सोशल मीडिया पर इसी रिस्पांस रिपोर्ट में जिक्र किए गए बिंदु पर ध्यान आकर्षित सीएनएन पत्रकार मारया शकील ने करवाया है। उन्होंने संबंधित अंश शेयर करते हुए कहा कि पंजाब के मुख्य सचिव इन रिफॉर्म को लागू करवाने को जरूरी बता चुके हैं। जिसके बाद ट्विटर पर उनसे पूछा जा रहा है कि क्या वो भाजपा कि प्रवक्ता हैं या अपने बॉस के कहने पर ये सब कर रही हैं।