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किसानों को फसल बेचने की स्वतंत्रता मिले, बिना टैक्स के खरीद-फरोख्त हो, तो किसी को क्या आपत्ति होगी?: कृषि मंत्री

नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए केंद्र सरकार के ख़िलाफ दिल्ली में जारी किसान आंदोलन के बीच आज कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान आंदोलन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में नरेंद्र सिंह तोमर ने सबसे पहले पश्चिम बंगाल में हुई घटना को लेकर ममता सरकार की निंदा की और घटना को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ कार्रवाई की माँग की।

आगे उन्होंने नए कृषि कानूनों पर बात की। उन्होंने कहा कि सारे कानून दो सदनों में लंबी बहस के बाद पारित हुए थे। सभी ने इस पर अपनी राय दी थी तब जाकर यह पूरे देश भर में लागू हुआ। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पिछले कुछ सालों में नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में किसानों के उत्थान के लिए लगातार काम हुए हैं। कैसे पीएम नरेंद्र मोदी ये सपना संजोए बैठे हैं कि किसानों की आय साल 2022 तक दुगनी हो। इस क्षेत्र में अधिक से अधिक अनुदान दिया जाए और लाभकारी योजनाओं को लागू किया जाए।

2014 से पहले यूरिया सृजन की किल्लत को याद कराते हुए तोमर बोले कि तब मुख्यमंत्री दिल्ली में डेरा डालकर अपनी माँग रखते थे, और उसकी कालाबाजारी होती थी। पीएम मोदी के आने के बाद यूरिया की कमी कभी किसी किसान को नहीं हुई। इसी प्रकार के बहुत सारे विषय है जिनपर पिछले 6 साल में काम हुआ। नए कानूनों को लेकर भी देश की अपेक्षा यही थी कि इनके माध्यम से इस क्षेत्र का विकास होगा। कई बुद्धिजीवियों की ओर से इस पर अक्सर सिफारिशें हुईं कि ये कानून आए।

उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए सरकार का उद्देश्य किसानों को मंडी की बेड़ियों से आजाद करना चाहती थी जिससे वे अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी को भी, अपनी कीमत पर बेच सकें। उन्होंने पूछा कि किसानों को बेचने की स्वतंत्रता मिल जाए और बिना टैक्स के खरीद फरोख्त हो, तो इससे किसे क्या आपत्ति होगी? कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि अभी कोई भी कानून यह नहीं कहता कि तीन दिन के भीतर उपज बेचने के बाद किसान को उसकी कीमत मिलने का प्रावधान हो जाएगा, लेकिन इस कानून में यह प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने कहा कि हमें लगता था कि कानून के जरिए लोग इसका फायदा उठाएँगे, किसान महँगी फसलों की ओर आकर्षित होगा, बुवाई के समय उसे मूल्य की गारंटी मिल जाएगी और इसमें किसान की भूमि को पूरी सुरक्षा देने का प्रबंध किया गया है। 

आगे केंद्रीय मंत्री ने किसानों को भेजे गए प्रस्ताव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किसान चाहते हैं कि नए कानून निरस्त हों। लेकिन सरकार कह रही है कि वो खुले दिमाग के साथ उन प्रावधानों पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं जिन पर किसानों को आपत्ति है।

उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि ये कानून एपीएमसी या एमएसपी को प्रभावित नहीं करते हैं और सरकार ने इस बात को समझाने की कोशिश की है। इसके अलावा सरकार की ओर से यह भी कह दिया गया है कि एमएसपी चलती रहेगी।

उन्होंने बताया कि रबी और खरीफ की खरीद अच्छे से हुई है। एमएसपी को डेढ़ गुना किया गया है, खरीद की वॉल्यूम भी बढ़ाया गया है। अगर इसके बावजूद एमएसपी के मामले में किसानों को कोई शंका है तो सरकार लिखित में आश्वासन देने को तैयार है। 

किसान बातचीत में कृषि कानूनों को अवैध बताते हैं और कहते हैं कि कृषि राज्यों का विषय हैं, सरकार इसमें नियम नहीं बना सकती। इस पर केंद्र सरकार की ओर से उन्हें समझाया गया कि व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार रखती है।

सरकार की ओर से बातचीत के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन किसान कोई सुझाव नहीं दे रहे, बस एक माँग पर अड़ें हैं कि कानून निरस्त हो। ऐसे सरकार बस जानना चाहती थी कि किसानों को किन प्रावधानों से दिक्कत है। जब उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया तो सरकार की ओर से ऐसे मुद्दे ढूँढे गए जिनसे किसानों को आपत्ति हो सकती है।

सरकार हर तरह से किसानों की समस्या का समाधान करना चाह रही है। वह टैक्स मुद्दे पर भी विचार करने को तैयार हैं। उनकी ओर से प्रस्ताव दिया गया है कि राज्य सरकार निजी मंडियों की व्यवस्था भी लागू कर सकेगी और राज्य सरकार निजी मंडियों पर भी टैक्स लगा सकेगी। एक्ट में यह प्रावधान था कि पैन कार्ड से ही खरीद हो सके। 

सरकार सोचती थी कि व्यापारी और किसान दोनों इंस्पेक्टर राज और लाइसेंसी राज से बच सकें। लेकिन किसानों को यदि ऐसा लगता है कि पैन कार्ड तो किसी के भी पास होगा और कोई भी खरीद कर सकेगा तो ऐसे में वह क्या करेंगे? इस आशंका को दूर करने के लिए सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि राज्य सरकारों को पंजीयन के नियम बनाने की शक्ति दी जाएगी।

उन्होंने किसानों की जमीन पर उद्योगपतियों के कब्जे की बात पर भी अपनी तरफ से स्पष्टता दी। तोमर ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग लंबे समय से चल रही है, लेकिन कहीं भी यह देखने को नहीं मिला कि उद्योगपतियों ने किसानों की जमीन हड़पी हो। फिर भी नए कानून में प्रावधान बनाया है कि इन कानूनों के तहत होने वाला समझौता केवल किसानों की उपज और खरीदने वाले के बीच होगा। इन कानूनों में किसान की जमीन को लेकर किसी लीज या समझौते का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। 

‘किसी को कुछ नहीं हुआ, सभी सुरक्षित हैं’: नड्डा के काफिले पर पथराव को लेकर बंगाल पुलिस का जवाब

पश्चिम बंगाल में आज (10 दिसंबर 2020) भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफ़िले पर पथराव की घटना हुई थी। घटना के दौरान भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंटें फेकी गई। इस घटना के तमाम वीडियो और तस्वीरें पूरे सोशल मीडिया चर्चा का कारण बनी हुई हैं। यह सब बंगाल पुलिस की मौजूदगी में हुआ। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस ने कहा है कि किसी को कुछ नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। 

पश्चिम बंगाल पुलिस की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा डायमंड हार्बर और साउथ 24 परगना स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुँच गए हैं। वह पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके काफ़िले को कुछ भी नहीं हुआ है। डायमंड हार्बर के फाल्टा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत देबीपुर में सड़क किनारे खड़े लोगों ने काफ़िले पर पत्थरबाजी की थी। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार सभी सुरक्षित और स्थिति शांतिपूर्ण है। फ़िलहाल मामले की जाँच की जा रही है कि घटनास्थल पर असल में हुआ क्या था।” 

केंद्र सरकार ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफ़िले पर हुई पत्थरबाजी और दौरे के समय सुरक्षा में हुई भारी चूक को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब की है। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह थी कि पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं पर यह हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ। बता दें आज (दिसंबर 10, 2020) दक्षिण 24 परगना में डायमंड हार्बर की ओर एक कार्यक्रम के लिए जाते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। 

इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी और पुलिस प्रशासन की नाकामयाबी को उजागर किया था। कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जी के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी, लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”

बता दें कि इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जेपी नड्डा की सुरक्षा में कमी का आरोप लगाया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने भाजपा नेताओं की चिंता पर पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब माँगा था। आज दिलीप घोष ने हमले की जानकारी देते हुए कहा, “डायमंड हार्बर के लिए जाते हुए टीएमसी समर्थकों ने हमारे लिए सड़कों को ब्लॉक कर दिया और नड्डा जी के वाहन समेत अन्य गाड़ियों पर पथराव किया।” घोष के अनुसार, टीएमसी अब अपना असली रंग दिखाने लगी है।

कुशीनगर में लड़की के हाथ में कलावा देख ग्रामीणों ने दी पुलिस को गुपचुप निकाह की खबर: मौलवी समेत 3 हिरासत में

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के कसया क्षेत्र में पुलिस ने युवक-युवती और मौलवी को हिरासत में लिया। खबरों में बताया गया कि मौलवी को देर रात घर पर बुलाकर युवक दूसरे समुदाय की युवती से चुपचाप निकाह करने का प्लॉन कर रहा थाा, लेकिन पुलिस समय पर पहुँचकर मौलवी समेत तीन लोगों को अपने साथ ले गई।

पूरा मामला गुरमिया गाँव के खान टोला का है। यहाँ एक समुदाय विशेष का युवक अपने साथ एक युवती को लेकर आया जिसके हाथ में लोगों ने कलावा बँधा देखा। कुछ देर में लोगों को उसी युवक के घर में मौलवी जाता भी दिखा, जिसके बाद लोगों का शक बढ़ गया। रात के करीब 9 बजे निकाह की तैयारियाँ देख गाँव के लोगों ने सारी बात आपस में बताई और इकट्ठा होकर पुलिस को मामले से सूचित कराया।

पुलिस जब मौके पर पहुँची तब मकान मालिक, युवती और मौलवी वहाँ मौजूद थे। पुलिस उनसे पूछताछ करने के लिए उन्हें अपने साथ ले गई। थाने में लड़की ने बताया कि वह पुरानी बस्ती थाना मुबारकपुर जिला आजमगढ़ की रहने वाली है।

इस आधार पर पुलिस ने उस इलाके के थाने से इनकी जानकारी मँगाई। जाँच में पता चला कि लड़की 13 दिन पहले फरार हुई थी। तलाश के बाद भी उसका सुराग किसी को नहीं मिला। उसके परिवार ने उसके गायब होने की रिपोर्ट भी करवाई हुई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, गुरमिया निवासी युवक से लड़की की बात इंटरनेट के जरिए शुरू हुई थी। बात होते होते दोनों में प्रेम हो गया और लड़की ने अपने घरवालों को शादी में रोड़ा बनता देख युवक के साथ भागने का निर्णय लिया। घर से फरार होने के बाद दोनों ने कुछ समय देवरिया और गोरखपुर में बिताया। इसके बाद वह गुरमिया आए।

कुछ लोग इन दोनों को एक समुदाय का बताते रहे। मगर, स्थानीयों का कहना है कि उन्होंने लड़की के हाथ में कलावा देखा। इस पूरे मामले पर कुशीनगर के एसपी विनोद कुमार सिंह ने कहा कि युवक-युवती बालिग हैं और एक की गुमशुदगी मुबारकपुर थाने में दर्ज है। लड़की के घरवालों की शिकायत पर अब आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इस केस में लड़की के घरवालों से बात करके पता लगाया है कि लड़का-लड़की दोनों एक ही मजहब से संबंध रखते हैं। लेकिन उनको सूचना दी गई थी कि लड़की अलग धर्म से है। उन्होंने ताजा जानकारी होते ही मकान मालिक और मौलवी को रिहा कर दिया है।

बेटों के खून से सने चावल माँ को खिलाने वाले वामपंथियों ने दिल्ली दंगों के लिए अमित शाह को ठहराया जिम्मेदार

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने बुधवार (दिसंबर 09, 2020) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर हिंसा भड़काने और और जाँच में पक्षपात का आरोप लगाया है। उससे भी बड़ी खबर यह है कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी टेलीग्राफ’ ने सीपीएम के इस आरोप को ‘फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट’ का दर्जा दिया है।

‘दी टेलीग्राफ’ के अनुसार, कथित फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट, जिसक शीर्षक ‘फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा’ है, में कहा गया है कि अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय की भूमिका इस हिंसा को बढ़ाने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार थी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि दिल्ली के दंगों को ‘सांप्रदायिक हिंसा’ कहना गलत है क्योंकि ‘दंगे’ एक ऐसी स्थिति का वर्णन करते हैं जहाँ दोनों पक्ष समान रूप से सहभागी हों। सीपीएम का आरोप है कि दिल्ली दंगों में एक ओर आक्रामक हिंदुत्व मॉब थी, जबकि दूसरी ओर के लोग इन हमलों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यही नहीं, सीपीएम का कहना है कि लगभग सभी जगहों पर पुलिस भी हिन्दुओं के साथ रही जिसके वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

गौरतलब है कि इस साल फरवरी माह में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में 53 लोग मारे गए थे। मरने वालों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा, दिलबर नेगी समेत दोनों समुदायों के लोग शामिल थे।

यह कथित ‘फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट’, सीपीएम पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात और राज्य सचिव केएम तिवारी, द्वारा पार्टी की ‘राहत और पुनर्वास एकजुटता समिति’ द्वारा किए गए साक्षात्कार में 400 लोगों की प्रतिक्रियाओं के संदर्भ और स्पष्टीकरण देने के लिए जारी की गई है।

वामपंथियों ने भाइयों को मारकर माँ को खिलाए थे खून से सने चावल

उल्लेखनीय है कि दिल्ली दंगों के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराने वाली यह वही कम्युनिस्ट पार्टी है, जिसके काडरों ने वर्ष 1969 में ही बंगाल के बर्दवान जिले के सेन भाइयों की हत्या कर अपने राजनीतिक नजरिए का परिचय दे दिया था। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में सेनबाड़ी हत्या से शायद ही कोई अपरिचित हो। वर्ष 1977 से 2011 के 34 वर्षों के वामपंथी शासन के दौरान जितने नरसंहार हुए उतने शायद देश के किसी दूसरे राज्य में नहीं हुए।

सेनबाड़ी हत्याकांड के दौरान सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने घरों में आग लगा दी, परिवार के दो भाइयों, प्रणब कुमार सेन और मलय कुमार सेन को परिवार के सदस्यों के सामने काट दिया गया था। यही नहीं, एक निजी ट्यूटर, जितेंद्रनाथ राय, जो परिवार में बच्चों को पढ़ाने के लिए आए थे, को भी काट दिया गया था। बाद में मारे गए भाइयों की माँ को अपने मृत बेटों के खून से सना चावल खाने के लिए मजबूर किया गया।

श्रृंगेरी के श्री शारदा पीठम से आए पुजारियों से हुआ नए संसद भवन का भूमि पूजन, साथ में सर्व धर्म प्रार्थना भी

आज गुरूवार (10 दिसंबर 2020) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए संसद भवन का भूमि पूजन किया, जिसे लगभग 971 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाना है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच की जगह का पुनर्विकास शामिल है। हिन्दू रीति-रिवाज़ों के अंतर्गत भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

श्रृंगेरी के श्री शारदा पीठम से आए पुजारियों के समूह ने विधिवत पूजा की। इसके अलावा ऐतिहासिक आयोजन के मौके पर विभिन्न धर्म के गुरुओं ने ‘सर्व धर्म प्रार्थना’ की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को शिलान्यास के आयोजन की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। 

हिन्दू रीति-रिवाज़ों से भूमि पूजन के लिए संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगतगुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामी से इस संबंध में निवेदन किया था। उन्होंने पूजा के लिए पुजारियों का समूह भेजने की बात कही थी, नतीजतन 6 पुजारियों का समूह मंगलवार को दिल्ली पहुँचा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नए संसद भवन के निर्माण की अवधि लगभग 21 महीने है। इसका निर्माण मौजूदा संसद भवन के नज़दीक ही कराया जा रहा है। नए संसद भवन की इमारत त्रिभुज (तिकोनी) के आकार की होगी, परियोजना में कॉमन सचिवालय और 3 किलोमीटर के राजपथ का पुनर्निर्माण शामिल है

नए संसद भवन में सभी सांसदों के लिए अलग कार्यालय होगा और यह अत्याधुनिक डिजिटल इंटरफेस पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य ‘पेपरलेस ऑफिस’ को बढ़ावा देना है। इसके भीतर एक बड़ा संविधान भवन (कॉन्सटिट्यूशन हॉल) भी होगा, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक धरोहर, पुस्तकालय, सांसदों के लिए लाउंज, कई समिति कक्ष, भोजन कक्ष और बड़ा पार्किंग स्थल भी मौजूद होगा। 

लोकसभा सचिवालय के अनुमान के अनुसार नए संसद भवन का निर्माण कार्य अक्टूबर 2022 तक पूरा हो जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नए संसद भवन में निचले सदन (लोकसभा) में 888 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। उच्च सदन (राज्यसभा) में 384 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी, यानी नए संसद भवन में कुल 1272 सांसदों के बैठने का इंतज़ाम है।

नए संसद भवन की पूरी परियोजना का निर्माण क्षेत्र 64500 वर्ग मीटर होगा। इस परियोजना में केन्द्रीय संवैधानिक गैलरी को भी स्थान दिया गया है, इसके निर्माण में हरित प्राद्यौगिकी का इस्तेमाल होगा।

संसद भवन के गेट नंबर 1 के विपरीत स्थित महात्मा गाँधी की 12 फ़ीट ऊँची विशालकाय प्रतिमा अस्थायी रूप से स्थानांतरित की जाएगी। इसके अलावा 5 और प्रतिमाएँ भी अस्थायी तौर पर स्थानांतरित जाएँगी।

टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड ने बीते सितंबर में 861.90 करोड़ रुपए की बोली लगा कर नए संसद भवन के निर्माण कार्य का ठेका अपने नाम किया था। सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) के मुताबिक़ निर्माण कार्य के पुराने संसद भवन की किसी भी कार्रवाई में बाधा नहीं आएगी। नए संसद भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पुराने का उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जाएगा।          

‘ड्रैगन’ को लेकर उत्तराखंड सरकार का कड़ा फैसला: चीनी कम्पनियाँ हुई टेंडर प्रक्रिया से बाहर

चीनी कंपनियों के साथ व्यापार और ग्लोबल टेंडर प्रकिया में उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार की ही नीति अपनाने का फैसला किया है। जिसके तहत अब राज्य में होने वाले किसी भी ग्लोबल टेंडर में चीनी कंपनियाँ शामिल नहीं हो पाएँगी। उत्तराखंड कैबिनेट ने अधिप्राप्ति नियमावली 2017 में संशोधन को हरी झंडी दिखा दी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार (10 दिसंबर, 2020) को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई है। कैबिनेट में हुई इस बैठक के अनुसार चीन सहित किसी भी पड़ोसी देश की कंपनी ग्लोबल टेंडर में प्रतिभाग नहीं ले पाएगी। हालाँकि, इस दौरान चीन का सार्वजनिक तौर पर नाम नहीं लिया गया है। लेकिन नियमावली में संशोधन चीन को ही ध्यान में रखकर किया गया है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य का बॉर्डर चीन और नेपाल बॉर्डर से लगता है।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक प्रदेश में विभिन्न कार्यों के लिए होने वाले टेंडर में ऐसे देशों की कंपनियों के लिए अलग से पंजीकरण अनिवार्य होगा। साथ ही जरूरत पड़ी तो इस पंजीकरण को राज्य सरकार रद्द कर सकेगी। वहीं अब प्रदेश सरकार के विभाग स्वयं सहायता समूहों से पाँच लाख रुपए तक के सामान की खरीद कर सकेंगे। कैबिनेट ने अधिप्राप्ति नियमावली में इस संशोधन को भी मंजूरी दे दी है।

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के सरकारी व गैरसरकारी क्षेत्र के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों को 15 दिसंबर से खोलने को मंजूरी भी दी गई। हालाँकि, कोचिंग सेंटर बंद रहेंगे। कक्षाएँ संचालित करते समय कोविड महामारी की रोकथाम को लेकर केंद्र व राज्य सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

राज्य के शहरी विकास मंत्री और सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने आगामी विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए कैबिनेट की बैठक को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन उन्होंने बताया कि सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में 29 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शेष एक प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक के लिए स्थगित कर दिया गया तो वहीं एक प्रस्ताव पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है।”

प्रदेश में सरकारी कोटे से पीजी की डिग्री लेने वाले डॉक्टरों के लिए सरकार ने एक नई व्यवस्था तय कर दी है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ये डॉक्टर या तो मानदेय (स्टाइपेंड) लेंगे या फिर आधा वेतन। अभी तक इन्हें आधा वेतन ही मिल रहा है। साथ ही बैंक गारंटी अब एक करोड़ से कम कर 50 लाख कर दी गई है।

वहीं महिला सशक्तिकरण को भी उत्तराखंड सरकार ने बढ़ावा दिया है। बदलाव के तहत अब पुलिस महकमे में पीएसी, आइआरबी आदि में तैनात महिला कार्मिकों को भी पदोन्नति के अधिक मौके मिलेंगे। इसके लिए कैबिनेट ने संशोधित नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके लिए आरक्षी, महिला आरक्षी, सब इंस्पेक्टर की वरिष्ठता सूची अलग-अलग बनेगी और इन्हें समान रूप से ही पदोन्नति दी जाएगी।

गौरतलब है कि इसी वर्ष लद्दाख में चीन की सीमा पर हुए विवाद के बाद केन्द्र सरकार ने अपने प्रावधानों में संशोधन करते हुए उन सभी देशों को ग्लोबल टेंडर में भाग लेने से अपात्र घोषित कर दिया जिसकी सीमा भारत की सीमा से लगती है। लेकिन राज्य में अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं थी। तो वहीं अब राज्य सरकारें भी भारत सरकार के तर्ज पर चीन को बॉयकॉट कर रही हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और हरियाणा सरकार ने भी चीनी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके टेंडर को रद्द और किसी सरकारी प्रोजेक्ट में टेंडर डालने में रोक लगा दी थी।

शहरी नक्सलियों, दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में 53 लाशें गिराने वालों को करो रिहा- धरने पर बैठे किसान नेताओं की माँग

कथित तौर पर किसान कानूनों के विरोध में दिल्ली में चल रहे कथित किसान आंदोलन को गैर-राजनीतिक होने के दावों के विपरीत, भारतीय किसान यूनियन (BKU उगराह) ने मानवाधिकार दिवस पर बृहस्पतिवार (दिसंबर 10, 2020) को माओवादी-नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में  ‘गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक (यूएपीए) UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए कई आरोपितों की रिहाई की माँग की है।

‘इन्डियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसमें जिन लोगों की रिहाई की माँग की गई है, उसमें शामिल यूएपीए के तहत बुक किए गए असम को भारत से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम, उमर खालिद, गौतम नवलखा, पी वरवरा राव, वर्नन गोंज़ाल्वेस, अरुण फरेरा और कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज सहित 20 से अधिक आरोपितों की तस्वीरें टिकरी सीमा के पास एक मंच पर लगाई जाएँगी। बताया जा रहा है कि कई मानवाधिकार समूहों के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है।

एक ट्विटर यूजर ने धरने पर बैठे किसानों का एक वीडियो भी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है कि जो लोग इस तस्वीर को फेक बता रहे थे उन्हें यह वीडियो देखना चाहिए।

वहीं, बीकेयू (उगराह) के वकील और समन्वयक एनके जीत ने कहा कि यह पहले दिन से ही उनकी माँग रही है कि जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कहा है कि शहरी नक्सलियों, कॉन्ग्रेस और खालिस्तानियों द्वारा कृषि आंदोलन को भड़काया गया है। एनके जीत ने कहा कि शहरी नक्सल लोगों पर मुकदमा चलाने का यह एक बहाना है और पंजाब में लोगों को स्टेट टेररिज्म और आतंकवादियों के बीच फंसाया जाता है जबकि नक्सलवाद ने आदिवासी लोगों को उनके अधिकार दिलाने में मदद की है।”

अपनी माँगों पर अडिग रहकर केंद्र द्वारा पेश 20 पेज के प्रस्ताव को किसान संघों ने बुधवार को खारिज कर दिया है। किसानों ने दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्गों को अवरुद्ध करके अपने आंदोलन को तेज करने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि 14 दिसंबर को भाजपा नेताओं, मंत्रियों और कार्यालयों के आवासों को घेरा जाएगा, और देश भर के जिला मुख्यालयों पर धरने होंगे। इस के साथ ही दक्षिणी राज्यों में विरोध अनिश्चित काल तक जारी रहेगा।

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में ही दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में 53 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसमें कई कथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अर्बन नक्सल समूहों पर दंगा भड़काने का आरोप भी लगा है। ऐसे समूहों के कुछ लोगों को जनता को गुमराह करने और सड़क पर उतरकर दंगा करने के लिए उकसाने के आरोप के तहत UAPA गिरफ्तार किया गया है।

मिलिए चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग से, पहले विदेशी नेताओं से सेक्स करती है फिर उगलवाती है इन्फॉर्मेशन

क्या चीन महिलाओं को हथियार बनाकर दूसरे देश की सरकारों में घुसपैठ कर रहा है? यह सवाल खड़ा हुआ है एक मीडिया खुलासे से। इसके मुताबिक चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग उर्फ फेंग फेंग (Fang Fang) ने अमेरिकी नेताओं से जिस्मानी रिश्ते बनाकर उनसे गोपनीय सूचनाएँ निकालने की कोशिश की।

इससे पहले नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर खबरें आईं थी कि उन्होंने वहाँ की सरकार में जबर्दस्त प्रभाव बना रखा है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा उनकी कठपुतली हैं। यांगी की दखल आर्मी हेडक्वार्टर से पीएमओ तक बराबर बताई जाती है।

Axios डॉटकॉम ने खुलासा किया है कि चीन की जासूस मानी जाने वाली क्रिस्टीन फेंग ने कैलिर्फोनिया के नेताओं को निशाना बनाया था। इनमें प्रतिष्ठित डेमोक्रेटिक सांसद और संसद की इंटेलीजेंस कमिटी के सदस्य एरिक स्वैलवेल (Eric Swalwell) भी हैं। बताया जा रहा है कि फेंग के 2015 में अमेरिका छोड़ने से पहले स्वैलवेल के साथ अंतरंग संबंध थे। हालाँकि स्वैलवेल लगातार इस सवाल से बच रहे हैं कि क्या सेक्स के बदले उन्होंने फेंग के साथ ‘गोपनीय जानकारी’ साझा की थी या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार फेंग ने फंड रेजिंग कैंपेन, अपने व्यापक नेटवर्क, आकर्षक व्यक्तित्व और रोमांटिक तथा जिस्मानी रिश्ते स्थापित कर राजनेताओं से संपर्क स्थापित किए थे। स्वैलवेल उसके प्रमुख निशाने में से एक बताए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में उनके चुनाव के वक्त उसने फंड रेजिंग कैंपेन चलाए। हालाँकि इसमें उसने स्वयं किसी तरह का योगदान नहीं किया और न ही कुछ गैर कानूनी काम हुआ। स्वैलवेल को 2015 में संघीय जाँचकर्ताओं ने उसकी गतिविधियों को लेकर सतर्क किया था।

Axios को दिए बयान में स्वैलवेल के कार्यालय ने बताया है कि फेंग से वे आठ साल पहले मिले थे और करीब 6 साल से देखा भी नहीं है। यह जानकारी वे एफबीआई को दे चुके हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि सतर्क किए जाने के बाद स्वैलवेल ने पेंग के साथ सभी तरह के रिश्ते खत्म कर लिए थे।

यह भी कहा जा रहा है कि फेंग के अमेरिका के कम से कम दो मेयर से भी रोमांटिक अथवा जिस्मानी रिश्ते थे। एक ओहियो के मेयर बताए जा रहे हैं।एक अभी भी फेंग को अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ बताते हैं। फेंग 2015 में अमेरिका छोड़कर चली गई थी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर अभी भी वह स्वैलवेल के परिवार की फ्रेंड लिस्ट में है।

स्वैलवेल का यह भी मानना है कि अमेरिकी चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगने के बाद पैदा हुई स्थिति के के मद्देनजर यह मामला उछाला जा रहा है। स्वैलवेल के अलावे एक और प्रतिष्ठित डेमोक्रेट नेता रो खन्ना के भी फेंग के निशाने पर होने की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि वे भी फेंग के शिकार बने थे या नहीं। जैसा कि वह इंटर्न के तौर पर स्वैलवेल के दफ्तर में जगह बनाने में कामयाब रही थी। वैसे स्वैलवेल का दावा है कि उन्होंने किसी तरह की संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की थी।

पुराने संसद ने स्वतंत्रता के बाद देश को दिशा दी, अब नया संसद आत्मनिर्भर भारत का गवाह बनेगा: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (दिसंबर 10, 2020) नए संसद भवन का शिलान्यास किया। उन्होंने संसद भवन का पूजन कर उसकी आधारशिला रखी। अपने संबोधन में इस अवसर को प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक और 130 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का दिन बताया। साथ ही संसद की नई इमारत को एक ऐसी तपोस्थली से जोड़ा, जो भारतीयों के कल्याण का काम करेगी।

पीएम मोदी ने कहा, “आज का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मील के पत्थर की तरह है। हम भारत के लोग मिलकर अपनी संसद के इस नए भवन को बनाएँगे और इससे सुंदर क्या होगा। इससे पवित्र क्या होगा कि जब भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मनाएँ, तो उस पर्व की साक्षात प्रेरणा, हमारी संसद की नई इमारत बने।”

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 2014 के उस दिन को याद किया, जब उन्हें पहली बार संसद आने का मौका मिला। उन्होंने उस वक्त लोकतंत्र के इस मंदिर को सिर झुका कर, माथा टेक कर नमन किया था।

पीएम कहते हैं कि हमारे वर्तमान संसद भवन ने आजादी के आंदोलन और फिर स्वतंत्र भारत को गढ़ने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। आजाद भारत की पहली सरकार का गठन भी यहीं हुआ और पहली संसद भी यहीं बैठी। लेकिन अब संसद के शक्तिशाली इतिहास के साथ ही यर्थाथ को स्वीकारना उतना ही आवश्यक है। ये इमारत अब करीब 100 साल की हो रही है। बीते वर्षों में इसे जरूरत के हिसाब से अपग्रेड किया गया। कई नए सुधारों के बाद संसद का ये भवन अब विश्राम माँग रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्षों से नए संसद भवन की जरूरत महसूस की गई है। ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि 21वीं सदी के भारत को एक नया संसद भवन मिले। इसी कड़ी में ये शुभारंभ हो रहा है। वह बोले, “पुराने संसद भवन ने स्वतंत्रता के बाद के भारत को दिशा दी, तो नया भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का गवाह बनेगा। पुराने भवन में देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए काम हुआ, तो नए भवन में 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाएँ पूरी की जाएँगी।”

उन्होंने इंडिया गेट से आगे बने नेशनल वॉर मेमोरियल का जिक्र करते हुए कहा कि संसद का नया भवन अपनी पहचान को स्थापित करेगा। आने वाली पीढियाँ नए संसद भवन को देखकर गर्व करेंगी कि ये स्वतंत्र भारत में बना है। आजादी के 75 वर्ष का स्मरण करके इसका निर्माण हुआ है।

भारतीयों के लिए लोकतंत्र को जीवन मूल्य करार देते हुए पीएम ने लोकतंत्र को जीवन पद्धति और राष्ट्र जीवन की आत्मा कहा। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र, सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है। भारत के लिए लोकतंत्र में, जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और साथ ही व्यवस्था का तंत्र भी है।

इतिहास में जाते हुए पीएम मोदी ने याद कराया कि आजादी के समय किस तरह से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत के अस्तित्व पर संदेह जताया गया था। अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक विविधता सहित कई तर्कों के साथ ये भविष्यवाणी कर दी गई थी कि भारत में लोकतंत्र असफल हो जाएगा। लेकिन आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश ने उन आशंकाओं को न सिर्फ गलत साबित किया, बल्कि 21वीं सदी की दुनिया भारत को अहम लोकतांत्रिक ताकत के रूप में आगे बढ़ते देख रही है।

पीएम ने कहा भारत में लोकतंत्र, हमेशा से ही गवर्नेंस के साथ ही मतभेदों को सुलझाने का माध्यम भी रहा है। मतभेद के लिए हमेशा जगह है लेकिन डिस्कनेक्ट कभी न हो, इसी लक्ष्य को लेकर हमारा लोकतंत्र आगे बढ़ा है। आज नीतियों में भले ही अंतर हो भिन्नता हो, लेकिन जनता की सेवा अंतिम लक्ष्य है और इसमें कोई मतभेद नहीं होना चाहिए।

इसके साथ उन्होंने राष्ट्र भावना को सर्वोपरि कहा और राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए एक स्वर में साथ खड़े होने की बात कही। उनके अनुसार भारत की एकता-अखंडता को लेकर किए गए उनके प्रयास, इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की ऊर्जा बनेंगे। जब एक-एक जनप्रतिनिधि, अपने ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, अपने अनुभव को पूर्ण रूप से यहाँ निचोड़ देगा, उसका अभिषेक करेगा, तब इस नए संसद भवन की प्राण-प्रतिष्ठा होगी।

पीएम मोदी ने जन कल्याण के लिए मूलभूत सिद्धांत दोहराया। उन्होंने कहा, “हमें संकल्प लेना है। ये संकल्प हो India First का। हम सिर्फ और सिर्फ भारत की उन्नति, भारत के विकास को ही अपनी आराधना बना लें। हमारा हर फैसला देश की ताकत बढ़ाए। हमारा हर निर्णय, हर फैसला, एक ही तराजू में तौला जाए। और वो है- देश का हित सर्वोपरि।”

उन्होंने सभी भारतीयों को प्रण दिलाया कि हमारे लिए देश के संविधान की मान-मर्यादा और उसकी अपेक्षाओं की पूर्ति, जीवन का सबसे बड़ा ध्येय होगी।

बंगाल में नड्डा के काफिले में कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट-पत्थरों से हमला, TMC पर आरोप: देखें Video

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं के ऊपर हमले अब पुलिस की मौजूदगी में भी होने लगे हैं। आज (दिसंबर 10, 2020) दक्षिण 24 परगना में डायमंड हार्बर की ओर एक कार्यक्रम के लिए जाते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा के काफिले पर हमला हुआ। 

इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर बड़ी-बड़ी ईंट फेंकी गई। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी और पुलिस प्रशासन की नाकामयाबी को उजागर किया।

कैलाश विजयविर्गीय ने लिखा, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी, लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”

भाजपा नेता के अकॉउंट से साझा की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि काफिले गुजरते वक्त उसके आसपास तमाम लोग टीएमसी का झंडा लेकर खड़े थे और भाजपा के ख़िलाफ़ नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस भी वहाँ मौजूद थी। लेकिन उसके बाद भी भीड़ जेपी नड्डा के काफिले पर पत्थर फेंकने लगी। थोड़ी देर में कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए और ईंट पत्थर गाड़ी के अंदर आ गए। उनके ड्राइवर ने किसी तरह उस भीड़ के बीच से काफिले को निकाला, लेकिन तब तक गाड़ी क्षतिग्रस्त हो चुकी थी।

कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार, ये घटना सिराकोल बस स्टैंड पास घटी। इस दौरान उनके कार्यकर्ताओं को भी पीटा गया। वह कहते हैं कि उनकी ओर से बंगाल पुलिस को पहले ही भाजपा अध्यक्ष के कार्यक्रम की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन फिर भी हम देख सकते हैं कि उनकी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। सड़क के कोने-कोने पर टीएमसी की भीड़ खड़ी रही और हाथ में पत्थर लेकर अटैक करती रही।

बता दें कि इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जेपी नड्डा की सुरक्षा में कमी का आरोप लगाया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने भाजपा नेताओं की चिंता पर पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब माँगा था।

आज दिलीप घोष ने फिर हमले की जानकारी देते हुए कहा, “डायमंड हार्बर के लिए जाते हुए टीएमसी समर्थकों ने हमारे लिए सड़कों को ब्लॉक कर दिया और नड्डा जी के वाहन समेत अन्य गाड़ियों पर पथराव किया।” घोष के अनुसार, टीएमसी अब अपना असली रंग दिखाने लगी है।

वहीं इस हमले पर टीएमसी नेता मदन मित्रा का कहना है कि भाजपा के खुद के गुंडे हिंसा में शामिल हैं। उन्होंने इस घटना में टीएमसी समर्थकों की संलिप्ता को खारिज किया। एक अन्य टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने कहा कि भाजपा राज्य के बाहर से लोगों को लेकर आ रही है और ऐसा करने से पहले सरकार को सूचित भी नहीं कर रही।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बंगाल के सिलीगुड़ी में भाजपा की एक रैली पर हमला हुआ था। उस हमले में एक बीजेपी कार्यकर्ता की जान गई थी। ये हमला भी पुलिस की मौजूदगी में ही हुआ था। लेकिन जब पार्टी ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए तो उनके नेताओं के ख़िलाफ़ गैरजमानती धाराों में मामला दर्ज कर लिया गया।