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मोदी के बीस साल: 2001 में पहली शपथ, तीन विधानसभा, दो लोकसभा चुनाव; 18 साल मीडिया का एजेंडा झेला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारों का नेतृत्व करने के मामले में अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। इन 20 सालों में नरेंद्र मोदी ने पहले गुजरात में राज्य सरकार का नेतृत्व किया और 6 वर्षों से वो देश की केंद्र सरकार के मुखिया हैं। इस दौरान उन्होंने एक राजनेता, एक मुखिया और एक व्यक्ति के रूप में कई आदर्श स्थापित किए और दुनिया भर में पहले गुजरात और फिर भारत का डंका बजाया। नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 7, 2001 को बतौर गुजरात सीएम पहली बार शपथ ली थी

इस तरह से बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मुखिया के रूप में अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर गए। सोशल मीडिया पर उनके पहले शपथग्रहण का वीडियो वायरल हो रहा है और लोग इसे खासा पसंद कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के अस्वस्थ होने और भाजपा में बगावत होने के बाद राज्य की कमान संभाली थी और उसके बाद से कभी हार का मुँह नहीं देखा।

भूकंप और दंगों से जूझ रहे गुजरात को उन्होंने दुनिया भर में बिजनेस हब के रूप में स्थापित किया। नरेंद्र मोदी ने 2002 में समय पूर्व चुनाव कराने का निर्णय लिया और सोनिया गाँधी द्वारा उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के बावजूद पूर्ण बहुमत पाने में कामयाब रहे। इसके बाद 2007 और फिर 2012 में उन्होंने गुजरात विधानसभा का चुनाव जीता। 2014 में उनके नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। 2019 में वो और बड़े बहुमत से लौटे।

नरेंद्र मोदी ने जब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब वो विधायक भी नहीं थे। इसके कुछ ही महीनों बाद उन्होंने राजकोट वेस्ट से वजुभाई बाला द्वारा सीट खाली करने के बाद विधानसभा का चुनाव लड़ा और फिर जीते। इसी तरह प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संसद का मुँह भी नहीं देखा था। वो पहली बार सांसद बने और फिर देश की कमान संभाली। नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने से पहले कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला था।

हालाँकि, इस दौरान सोनिया गाँधी द्वारा उन्हें ‘खून का सौदागर’ कहे जाने से लेकर राहुल गाँधी द्वारा ‘नीच’ कहे जाने तक, उन्होंने कई विपक्षी नेताओं की आपत्तिजनक टिप्पणियों को काफी शालीनता से झेला। एक समय था जब अंग्रेजी अच्छी तरह न आने के कारण राजदीप सरदेसाई ने उन्हें अपने शो में नहीं बुलाया था और अख़बार उनके इंटरव्यू लेकर भी प्रकाशित नहीं करते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इन चीजों से निपटने में कुशलता दिखाई और शालीन तरीके से सारी चीजों को बर्दाश्त किया।

आज वही मीडिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं तो उनके सम्बोधन का लाइव प्रसारण करने को मजबूर होता है, उनके भाषण को लगातार ट्वीट किया जाता है और उनके इंटरव्यू के लिए बेचैन रहता है। नरेंद्र मोदी मेनस्ट्रीम मीडिया नहीं, बल्कि सीधे जनता से संवाद करते हैं और रेडियो के माध्यम से अपनी ‘मन की बात’ रखते हैं। उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स पर करोड़ों फॉलोवर्स हैं और वो दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले नेताओं में से एक हैं।

नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार गुजराती में शपथ ली थी। उन्होंने चुनावी घोषणापत्रों को सरकार के फैसलों का आधार बनाया। उन्होंने दशकों पुराने विवादों का निपटारा किया और साथ ही अनुच्छेद-370, तीन तलाक और राम मंदिर सहित कई मुद्दों पर जनता की माँगों को पूरा किया। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से जूझ रहे देश का वो कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं और हम सब आशा करते हैं कि उनके नेतृत्व में भारत इस महामारी को भी मात देगा।

किसी भी नेता के लिए उसकी छवि ही सबकुछ होती है। एक बार दाग लग गया तो उबरना मुश्किल होता है। मोदी पर, बिना किसी सबूत के, लगातार नकारात्मक प्रोपेगेंडा चलाया जाता रहा। जिस ट्रेन की बॉगी में 59 हिन्दू कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया, उसके बाद के दंगों का आरोप भी हिन्दुओं पर ही लगा, और अंततः मुख्यमंत्री मोदी पर जा कर चिपक गया। इन सबके बावजूद, सारी एजेंसियों को मोदी के पीछे लगा देने के बाद भी साबित कुछ नहीं हुआ।

समानांतर तरीके से वामपंथी मीडिया गिरोह लगातार एक ही बात रट-रट कर मोदी के खिलाफ अपना एजेंडा चला कर उन्हें कभी हिटलर, कभी दरिंदा, कभी राक्षस कहा जाता रहा। मोदी का इस युद्ध से बाहर आना बताता है कि साँच को आँच नहीं। वरना कॉन्ग्रेस के पास दस साल सत्ता थी, और वो चाह कर भी कुछ साबित नहीं कर पाए। ऐसे में एक ही बात शाश्वत सत्य लगती है कि लोगों तक विकास पहुँचाने और उनके जीवन में परिवर्तन लाने का माध्यम बनना ही आपको सफल राजनेता बनाता है।

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद: कोर्ट ने वक्फ बोर्ड पर लगाया 3000 का जुर्माना, हिन्दू पक्ष के दस्तावेज में औरंगजेब की कारस्तानी

काशी में बाबा विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के सम्बन्ध में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर की है। इस याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे मुक़दमे को चुनौती दी गई है। याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। हालाँकि, कोर्ट ने देर से याचिका दायर करने के लिए बोर्ड पर 3000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने वाली है।

अगली सुनवाई में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड की याचिका को एडमिट किए जाने के साथ ही इस पर निर्णय लिया जाएगा कि इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में चलेगी या वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ में? अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी ने पहले ही जिला जज की अदालत में याचिका दायर कर के सिविल कोर्ट में सुनवाई को चुनौती दे रखी है। बोर्ड चाहता है कि इसकी सुनवाई निचली अदालत में न होकर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए।

‘आजतक’ की खबर के अनुसार, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील मोहम्मद तौहीद खान ने जानकारी दी है कि जिला जज की अदालत में सिविल रिवीजन दाखिल करने में हुई देरी पर माफ़ी माँगते हुए सेक्शन-5 लिमिटेशन एक्ट के तहत प्रार्थना पत्र दायर किया गया था। जिला जज ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अक्टूबर 13, 2020 को अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। स्वयंभू विश्वेश्वर महादेव बनाम अंजुमन इंतजामिया मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 18 सितंबर को दूसरे प्रतिवादी के तौर पर शामिल होने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

इस प्रार्थना पत्र पर प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से वादमित्र ने निर्धारित समयावधि के बाद याचिका दायर करने पर आपत्ति जताई गई थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की थी। सिविल जज ने 25 फरवरी 2020 को पक्षकारों की बहस सुनने तथा दलीलों के विश्लेषण के बाद सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की चुनौती को खारिज कर दिया था।

दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव के जिस ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया जाता है, उसका मूल स्वरूप वो नहीं बल्कि उस जगह पर मौजूद है जहाँ 350 वर्ष पहले मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर एक मस्जिद बना दी गई थी। ‘Zee News’ की खबर के अनुसार, हिंदू पक्ष ने वाराणसी की उस अदालत में 351 वर्ष एक महत्वपूर्ण कागज जमा कराया है जो काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की सुनवाई कर रही है।

इसमें लिखा है कि औरंगजेब को ये खबर मिली है कि मुलतान के कुछ सूबों और काशी में ‘बेवकूफ ब्राह्मण अपनी रद्दी किताबें’ पाठशालाओं में पढ़ाते हैं और इन पाठशालाओं में हिंदु और दूसरे मजहब वाले विद्यार्थी और जिज्ञासु उनके बदमाशी भरे ज्ञान, विज्ञान को पढ़ने की दृष्टि से आते हैं। बादशाह औरंगजेब ने ये सुनने के बाद सूबेदारों के नाम ये फरमान जारी किया कि वो अपनी इच्छा से ‘काफिरों के मंदिर और विद्यालय ध्वस्त कर दें। फिर मूर्तिपूजन बंद करा कर काशी विश्वनाथ मंदिर को गिरा दिया गया।

हाल ही में कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा। याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की माँग की गई थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है। मथुरा की अदालत में दायर हुए एक सिविल मुकदमे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक माँगा गया था। 

कश्मीर में फिर BJP नेता को मारने के लिए हुआ आतंकी हमला: PSO ने अकेले एक आतंकी को मार कर बचाई जान, हुए बलिदान

कश्मीर के गांदरबल जिले के नुनार में मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को भाजपा जिला उपाध्यक्ष गुलाम कादिर राथर व उनकी पत्नी के घर पर आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं। हालाँकि, इस दौरान नेता के अंगरक्षक व पीएसओ अल्ताफ हुसैन ने फौरन सामने आते हुए बीजेपी नेता की जान बचा ली। मगर, हमले में वह खुद बुरी तरह घायल हो गए।

इस दौरान पीएसओ ने एक आतंकी को ढेर किया जबकि बाकी बचे आतंकियों को भी अपने साहस से अकेले वहाँ से खदेड़ दिया। बाद में गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई। अब आतंकी हमले की सूचना के बाद इलाके में अतिरिक्त जवान बुलाए गए हैं और आतंकियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी कश्मीर पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल रात के करीब 8 बजे आतंकियों ने भाजपा नेता के घर पर हमला बोला। इस दौरान गुलाम कादिर अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल की ओर जा रहे थे। हालाँकि, जैसे ही वह अपने गेट तक पहुँचे आतंकी उनके सामने आ गए और उन पर हमला कर दिया, तभी पीएसओ अल्ताफ हुसैन ने उनकी जान बचाते हुए जवाबी फायरिंग शुरू की।

इस बीच आतंकियों ने उन पर गोली भी चलाई लेकिन तब भी वह फायरिंग करते ही रहे। दोनों तरफ से 5 मिनट तक गोलियाँ चली। इसके बाद 1 आतंकी के ढेर होते ही बाकी भी वहाँ से भाग गए। गोलियों की आवाज सुनकर आस-पास के इलाके में गश्त कर रहे सेना व पुलिस के जवान भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने भाजपा नेता व उनके परिवार की सुरक्षा का इंतजाम करके पीएसओ अल्ताफ को फौरन अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अल्ताफ ने भाजपा नेता को कोई चोट नहीं आने दी। बताया जा रहा है कि पीएसओ अल्ताफ ने इतना साहस दिखाया कि उन्होंने आतंकियों को नेता के पास तक पहुँचने ही नहीं दिया।

बता दें कि सुरक्षाबलों ने मारे गए आतंकी का शव अपने कब्जे में ले लिया है और इलाके की घेराबंदी करके पूरे इलाके में तलाशी अभियान भी जारी है। उल्लेखनीय है कि आतंकी हमले में अपने अंगरक्षक के कारण बचने वाले गुलाम कादिर पिछले माह भी चर्चा में आए थे। उन पर किजौरा गाँव में कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा था।

ज्ञात हो कि यह कश्मीर में भाजपा नेताओं पर हमले की पहली वारदात नहीं है। 5 अगस्त को कुलगाम में आतंकियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जुलाई माह में बांदीपोरा के जिला अध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी। 

हाथरस मामला ‘ऑनर किलिंग’ का, पीड़िता के भाई ने ही की हत्या: अधिवक्ता AP सिंह का दावा, जाँच कर रही SIT को मिले और 10 दिन

हाथरस मामले में आरोपितों के वकील एपी सिंह ने पीड़ित परिवार पर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे ‘ऑनर किलिंग’ का मामला बताते हुए कहा कि पीड़िता को उसके भाई ने ही मारा है। साथ ही वकील एपी सिंह ने इस मामले का राजनीतिकरण करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के एक सप्ताह बाद जब नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, उसके बाद ही बलात्कार का मामला दर्ज किया गया।

वकील एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने आरोपितों के परिजनों से बातचीत की है और साथ ही कहा कि अब तक मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की कोई पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्भया मामले के दो वकील एक बार फिर से आमने-सामने हो सकते हैं। निर्भया के दोषियों के खिलाफ पैरवी करने वाली वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने हाथरस पीड़िता का केस लड़ने का ऐलान किया है।

एपी सिंह ने बताया कि आरोपितों के वकील के अलावा भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री मानवेंद्र सिंह ने भी उनसे सपर्क कर के इस मामले में आरोपितों की तरफ से केस लड़ने को कहा है। मानवेन्द्र सिंह ने कहा है कि उनका संगठन वकील की फीस भरने के लिए धन इकठ्ठा करेगा। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सवर्ण समाज को बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जिससे राजपूत समाज आहत हुआ है।

वहीं पीड़ित परिवार की तरफ से सीमा समृद्धि कुशवाहा ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर के इस मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित करने की माँग करेंगी। उन्होंने कहा कि वो हाथरस की बेटी को न्याय दिलाएँगी और दोषियों को सज़ा मिलेगी लेकिन ये तब तक संभव नहीं हो पाएगा, जब तक मामला उत्तर प्रदेश से बाहर नहीं जाता।

उधर हाथरस मामले की जाँच कर रही SIT को इस मामले में रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। इससे पहले बुधवार (अक्टूबर 7, 2020) को ही रिपोर्ट सौंपी जानी थी।गृह सचिव भगवान स्वरूप इस SIT की अगुवाई कर रहे हैं। SIT ने गाँव में जाकर इस मामले की पूरी छानबीन की है। इस मामले में यूपी सरकार सीबीआई जाँच की सिफारिश भी कर चुकी है। SIT ने चश्मदीदों के साथ क्राइम सीन क रिक्रिएट भी किया था।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाथरस पीड़िता के भाई से पूछताछ की माँग की है। उन्होंने कहा है कि आरोपित और पीड़ित परिवार के बीच कई फोन कॉल हुए। अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच लड़की के भाई के नाम से रजिस्टर्ड फोन नंबर से 100 से अधिक फोन कॉल किए गए थे। 19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। अमित मालवीय ने कहा कि यह मामला आपसी रंजिश का परिणाम हो सकता है।

वो ऑपरेशन, जिसके लिए मुस्लिम मुल्कों की आलोचना का शिकार बने थे जॉर्ज बुश: कैसे रास्ते पर आया ब्लैकमेलर Pak!

अब जब अफगानिस्तान से अमेरिका की सेना वापस लौट रही है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में इस प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा पूरा भी हो गया है, हमें इस बात को समझने की ज़रूरत है कि आखिर ऐसी क्या नौबत आई थी कि तालिबान के खात्मे के लिए अमेरिका को अफगानिस्तान में घुसना पड़ा और आतंकवाद के खिलाफ उसका ‘Operation Enduring Freedom (OEF)’ शुरू हुआ। इसकी नींव कब पड़ी थी और इसका भारत-पाकिस्तान से क्या लेना-देना था?

दरअसल, अमेरिका में सितम्बर 11, 2001 को अलकायदा के हमले ने पश्चिमी जगत को बताया कि आतंकवाद इस दुनिया की कितनी बड़ी समस्या है। न्यूयॉर्क के मैनहटन में स्थित ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ पर ओसामा बिन लादेन ने ऐसा हमला करवाया, जिसे अभी भी इतिहास के सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक माना जाता है। इतना बड़ा आतंकी हमला दुनिया के इतिहास में अनदेखा और अनसुना था।

9/11 का हमला, जिसके प्रतिक्रिया में शुरू हुआ OEF

इसे हम 9/11 के आतंकी हमले के रूप में भी जानते हैं। इस हमले में 2977 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और 25,000 से भी अधिक घायल हुए थे। साथ ही 10 बिलियन डॉलर की संपत्ति का नुकसान भी हुआ था। ओसामा बिन लादेन ने 1996 में ही संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के खिलाफ ‘युद्ध’ की घोषणा कर दी थी और 9/11 हमले के पीछे भी पूरी साजिश उसकी ही थी। अफगानिस्तान उस समय अलकायदा और तालिबान के लिए जन्नत बना हुआ था।

इस दिन अलकायदा ने पूरे सुनियोजित तारीके से एक के बाद एक चार बड़े हमले किए। उत्तर-पूर्वी अमेरिका से कैलिफोर्निया के लिए निकले 4 एयरक्राफ्टस को अलकायदा के 19 आतंकियों ने मिल कर हाइजैक कर लिया। इनमें से दो एयरक्राफ्टस को ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ के नॉर्थ और साउथ टॉवर से टकराया गया। अगले कुछ ही मिनटों में ये दोनों ही इमारतें ध्वस्त हो गईं। दोनों इमारतें 110 मंजिल थीं, इससे आप तबाही के मंजर का अंदाज लगा सकते हैं।

ये हमला इतना जबरदस्त था कि ‘वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर’ कॉम्प्लेक्स के भीतर खड़ी सारी इमारतें पूर्ण या अपूर्ण रूप से ध्वस्त हो गईं। एक एयरक्राफ्ट को आतंकियों ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन से टकराया, जिससे इस इमारत का पश्चिमी हिस्सा ध्वस्त हो गया। चौथे एयरक्राफ्ट को वाशिंगटन ले जाने कि योजना थी लेकिन वो पेंसिलवेनिया के एक मैदान में क्रैश हुआ। अमेरिका ही नहीं, पूरे देश में हाहाकार मच गया।

इस हमले के 3 साल बाद 2004 में अलकायदा के सबसे बड़े सरगना ओसामा बिन लादेन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और इसके पीछे इजरायल को अमेरिका का समर्थन, सऊदी अरब में अमेरिकी सेना की मौजूदगी और इराक पर लगे प्रतिबंधों को कारण बताया। जैसा कि हम जानते हैं, ओसामा बिन लादेन बाद में पाकिस्तान में पाया गया था और वहीं एबटाबाद में ऐशोआराम की ज़िंदगी जी रहा था, जहाँ उसे मई 2011 में मार गिराया गया।

अलकायदा के इस हमले से न्यूयॉर्क की अर्थव्यवस्था तो ध्वस्त हुई ही, साथ ही पूरे विश्व के बाजारों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा। अगले 4 दिनों तक अमेरिका और कनाडा के एयरस्पेस को बंद रखना पड़ा। साथ ही ‘वॉल स्ट्रीट’ का कारोबार भी अगले एक सप्ताह तक पूरी तरह ठप्प रहा। सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ाई करते हुए ओसामा बिन लादेन अब अमेरिका का दुश्मन नंबर एक था। वो आतंकी, जिसने ‘जिहाद’ का पाठ पढ़ाया और इसे आतंक से जोड़ा।

जब अफगानिस्तान मे घुसा अमेरिका: क्या हुआ तालिबान और अलकायदा का हाल?

एक दिलचस्प बात ये है कि पहले इस ऑपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन इंफाइनाइट जस्टिस’ था लेकिन मुस्लिम जगत की तीखी आलोचना के बाद इसका नाम बदल कर ‘ऑपरेशन एंडयूरिंग जस्टिस’ कर दिया। तब इसके पीछे कारण बताते हुए अमेरिका के तत्कालीन डिफेंस सेक्रेटरी डोनाल्ड रूम्सफेल्ड ने कहा था कि इस्लाम में माना जाता है कि ‘Finality’ एक ऐसी चीज है, जो अल्लाह ही दे सकता है – इसीलिए नाम बदला जा रहा है।

आतंकवाद पर अमेरिका का ये वार बहुआयामी था। OEF तो सिर्फ मिलिट्री का सेटअप था लेकिन आतंकवाद के खिलाफ युद्ध तो आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक – इन तीनों ही आयामों में चल रहा था। तभी अमेरिका ने कह दिया था कि ये ‘क्विक फिक्स’ नहीं है, इसमें सालों लगेंगे क्योंकि ये एक धीमी प्रक्रिया होगी और इसमें और भी जानें जा सकती हैं। दुनिया भर के मुस्लिम संगठनों और कई इस्लामी मुल्कों ने इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का विरोध शुरू कर दिया था।

सितंबर 20, 2001 को कॉन्ग्रेस सेशन को संबोधित करते हुए जॉर्ज बुश ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध की घोषणा की और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से कहा कि वो अपने देश में रह रहे सारे अलकायदा आतंकियों को अमेरिका को सौंपे और अपनी जमीन पर स्थित सारे आतंकी कैंपों का एक्सेस यूएन को दे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इन माँगों पर न तो कोई चर्चा हो सकती है और न ही मोलभाव का कोई स्कोप है।

जॉर्ज बुश ने कहा कि तालिबान के पास दो ही विकल्प हैं – या तो वो सारे आतंकियों को अमेरिका के सुपुर्द करे या फिर उसका भी वही हाल होगा, जो उन आतंकियों का होगा। इसके लिए वो तैयार रहे। 2001 में अफगानिस्तान में अमेरिका ने तालिबान का शासन ख़त्म कर दिया। 1996 से ही चल रहे तालिबान के शासन के दौरान इस्लामी शरिया कानून लागू था और संगीत, टीवी, खेल और नृत्य जैसी चीजों पर पूर्णरूपेण पाबन्दी लगी हुई थी।

ओसामा बिन लादेन अमेरिका के हाथ अगले 10 सालों तक नहीं आया। तब तक वो बयान जारी कर कहता रहा कि कैसे पश्चिम में इस्लाम को लेकर जबरदस्त घृणा है। उसने कहा कि अमेरिका के खिलाफ आतंकवाद जायज है क्योंकि ये ‘अन्याय के खिलाफ लड़ाई’ है और अमेरिका उस इजरायल का सहयोगी है, जो ‘हमारे लोगों को’ मारता है। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में एक-एक कर अलकायदा के आतंकियों को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया।

Operation Enduring Freedom: भारत और पाकिस्तान के परिप्रेक्ष्य में

पाकिस्तान की हमेशा से यही चाल रही है कि एक तरफ तो वो भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे और दूसरी तरफ अमेरिका से आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर रुपए ऐंठे। जब अमेरिका अफगानिस्तान में घुसा, तब उसे रसद से लेकर ज़रूरी साजो-सामान वहाँ पहुँचाने के लिए पाकिस्तान की दरकार थी। तभी तो उसने पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की सहायता करनी शुरू कर दी। इधर पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी हरकतों को बढ़ावा देता रहा।

लेकिन, धीरे-धीरे पाकिस्तान की पोल खुलती चली गई क्योंकि कारगिल युद्ध के बाद से ही उसके दोहरे रवैये दुनिया के सामने आने लगे थे। तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शांति का सन्देश लेकर पाकिस्तान गए थे लेकिन वहाँ से भारत की पीठ में छुरा घोंपा गया। अमेरिका ने भारत से कहा कि वो अफगानिस्तान के बाद भी आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई जारी रखेगा। कइयों को लगा कि शायद अब कश्मीर की बारी है।

लेकिन, ऐसा नहीं था। अमेरिका अफगानिस्तान में फँस चुका था और वहाँ उसे पाकिस्तान की ज़रूरत थी। भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह को ये वास्तविकता पता थी, तभी उन्होंने वाशिंगटन में ये कहा कि कश्मीर की लड़ाई भारत को अब खुद के भरोसे ही लड़नी पड़ेगी। अमेरिका ने भारत पर 1998 परमाणु परीक्षण के बाद लगे प्रतिबंधों को हटाना शुरू कर दिया और कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं है।

जॉर्ज बुश भारत और पाकिस्तान के बीच बैलेंस बना कर चलना चाहते थे। लेकिन, पाकिस्तान को 100 करोड़ डॉलर की सहायता कम नहीं थी और इन रुपयों का इस्तेमाल कहाँ होना था, इसका भी सभी को अंदाज़ा था। अफगानिस्तान में भारत को उस समय कोई भूमिका नहीं दी गई थी लेकिन धीरे-धीरे मानवीय सहायताओं के रूप में भारत ने अफगानिस्तान के लोगों का दिल जीतना शुरू कर दिया। साथ ही पाकिस्तान की पोल खुलती चली गई।

जबकि सच्चाई ये थी कि अफगानिस्तान में भारत को नज़रअंदाज़ किए बिना कोई भी कार्रवाई संभव ही नहीं थी। वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक अपनी पुस्तक ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ में लिखते हैं कि वो धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी, संस्कृत के व्याकरणाचार्य पाणिनि और गुरु गोरखनाथ की भूमि है। वो आर्यों, बौद्धों और हिन्दुओं का देश रहा है, जहाँ लड़कों का नाम आज भी कनिष्क, हविष्क और लड़कियों के नाम वेद व अवेस्ता सुना जा सकता है।

आज के समय में देखा जाए तो भारत अफगानिस्तान में एक से बढ़ कर एक विकास कार्य चला रहा है और दुनिया के सामने नंगे खड़े पाकिस्तान के न तो उससे अच्छे सम्बन्ध हैं और न ही भारत से। अमेरिका से उसे अब पहले की तरह लॉलीपॉप भी नहीं मिलता। ये बदलाव 9/11 हमलों के बाद या अमेरिका के ऑपरेशन के बाद अचानक नहीं आए बल्कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिस तरह से उसे बेनकाब किया है, ये उसका नतीजा है।

उसी हमले के बाद से दुनिया भर के देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी-अपनी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी शुरू की। हालाँकि, मनमोहन सरकार के दूसरे कार्यकाल में ये चीजें पूरी तरह पटरी से उतर गईं। असल में 26/11 के मुंबई हमले के बाद से ही यूपीए सरकार की नीति काफी लचर रही, जिसे मोदी सरकार ने दुरुस्त करना शुरू किया। आज कश्मीर में स्थिति ठीक होती जा रही है और आतंकियों का सफाया हो रहा है।

9/11 के हमले के बाद से ही अमेरिका अलकायदा के पीछे पड़ा और उसने ओसामा बिन लादेन की तलाश शुरू की। अपने ‘सेफ हेवन’ पाकिस्तान में रह रहे लादेन को इस ऑपरेशन के शुरू होने के 10 वर्षों बाद मार गिराया गया। अब गणित भारत के पक्ष में है क्योंकि UN के मंच पर भी सबूतों के साथ आतंकवाद पर पाकिस्तान को बेनकाब किया जाता है। वहीं पाकिस्तान को अब इस्लामी मुल्कों से भी लताड़ मिल रही है।

असल में भारत पहले भी पाकिस्तान की चालबाजियों को लेकर आवाज़ उठाता था लेकिन अब दुनिया में हमारा पक्ष इसीलिए गूँज रहा है क्योंकि बिना किसी हिचक के हर देश में, हर मंच पर उसके खिलाफ सबूत रखे गए हैं और दूसरी तरफ विकास कार्यों को बढ़ावा देकर जम्मू कश्मीर के लोगों का दिल जीता गया है। तभी तो मुद्दा अब जम्मू कश्मीर नहीं, POK है – जैसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह भी चुके हैं।

हमारी सरकार होती न, तो चीन को 15 मिनट में उठा कर बाहर फेंक देते: राहुल गाँधी ने PM मोदी को बताया ‘कायर’

हाथरस में हुए सियासी ड्रामे और हरियाणा में कृषि बिलों में विरोध में ट्रैक्टर रैली करने के बाद पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अब एक बार फिर से चीन वाले राग पर लौट आए हैं और पीएम मोदी के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया है। उन्होंने दावा किया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ किसी दूसरे देश की सेना ने घुस कर यहाँ की जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है। राहुल गाँधी ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो वो चाइना को 15 मिनट में उठा कर बाहर फेंक देते।

उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि चीन भारत के अंदर घुसा हुआ है। उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वो अपनेआप को देशभक्त कहते हैं और साथ ही पूछा कि वो कैसे देशभक्त हैं? राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री के लिए ‘कायर’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में शेखी बघारते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो चीन को भारत में एक कदम भी नहीं रखने देती।

उन्होंने दावा किया कि चीन बाहर से देख रहा है कि नरेंद्र मोदी ने देश को कमजोर कर दिया है, इसीलिए उसमें इतनी हिम्मत आ गई कि उसने भारत की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया। राहुल ने पीएम मोदी को ‘फेल’ बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देश के किसानों एवं मजदूरों को कमजोर कर दिया है। राहुल गाँधी ने अपनी ‘खेती बचाओ यात्रा’ के दौरान कुरुक्षेत्र के गीता स्थल पर प्रार्थना भी की।

राहुल गाँधी ने अपनी 3 दिवसीय यात्रा के दौरान कहा कि पीएम मोदी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि देश में क्या हो रहा है और वो केवल अपनी छवि बचाने में लगे रहते हैं। उन्होंने कृषि क़ानूनों को लेकर दावा किया कि इससे न सिर्फ किसानों बल्कि उपभक्ताओं पर भी बड़ा फर्क पड़ेगा। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगा दिया की पीएम मोदी नए कृषि कानूनों को समझते तक नहीं हैं। उन्होंने बिना सबूतों के दावा किया कि चीन ने भारत के 1200 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है।

हाल ही में संबित पात्रा ने कहा था कि जिस तरह से इश्क और मुश्क छिपाने से भी नहीं छिपते, ठीक वैसे ही कॉन्ग्रेस और चीन के बीच चल रहे प्रेम के बारे में सभी को पता है। उन्होंने दावा किया था कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच समझौते हुए हैं, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक की जानी चाहिए। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ मुखर है।

पाक सेना के खिलाफ साजिश के आरोप में POK के कथित PM राजा फारूक समेत कई नेताओं के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज

पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (POK) के प्रधानमंत्री राजा फारूक को पाकिस्‍तानी सेना की आलोचना करना पड़ा भारी पड़ गया है। पाकिस्‍तान सरकार ने पीओके के कथित प्रधानमंत्री राजा फारूक के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। राजा फारूक हैदर के साथ-साथ पाकिस्तान के पूर्व पीएम- नवाज शरीफ और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के कई अन्य नेताओं पर भी देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।

दरअसल, राजा फारूक हैदर खान (Raja Farooq Haider Khan) पर पाकिस्‍तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ के साथ मिलकर पाकिस्‍तानी सेना के खिलाफ गतिविधियाँ चलाने का आरोप लगाया गया है। फारूक़ और अन्य नेताओं के खिलाफ सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को मामला दर्ज किया गया था, जिसमें शरीफ की बेटी मरियम नवाज, पूर्व प्रमुख शाहिद खकान अब्बासी, सीनेटर परवेज राशिद शामिल थे। इन सभी नेताओं ने पिछले हफ्ते लंदन से शरीफ द्वारा संबोधित पार्टी की बैठकों में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया था।

FIR की कॉपी

FIR में कहा गया है कि नवाज शरीफ ने लंदन में भड़काऊ भाषण देकर पाकिस्‍तान के प्रतिष्ठित संस्‍थानों के खिलाफ साजिश रची। इसके साथ ही एफआईआर में कहा गया है कि नवाज शरीफ के इन भाषणों का मकसद पाकिस्‍तान को गुंदागर्दी करने वाला राज्‍य घोषित करना है। इससे एक दिन पहले ही नवाज शरीफ के दामाद कैप्‍टन (रिटायर) मुहम्‍मद सफदर के खिलाफ भी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके ऊपर देश और संस्‍थानों के खिलाफ लोगों को भड़काने का आरोप लगा था।

यहाँ यह गौर करने वाली बात है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए नेताओं द्वारा साजिश का दावा करते हुए, पाकिस्तान दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत पाकिस्तान के नागरिक बदर रशीद ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।

उन्होंने एफआईआर में आरोप लगाया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पार्टी की बैठकों में अपने भाषणों के दौरान, शरीफ ने भारत की नीतियों का समर्थन किया ताकि पाकिस्तान वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ‘ग्रे सूची’ पर बना रहे। एफआईआर के मुताबिक पाक अधिकृत कश्मीर के पीएम भी बैठक के दौरान कथित रूप से मौजूद थे।

आवेदक ने यह भी कहा कि शरीफ के भाषणों का उद्देश्य ‘नवाज के’ दोस्त ‘भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को लाभ पहुँचाने के लिए तथा भारत अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाना था।’

देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के बाद पाक पीएम इमरान खान सरकार ने इस कदम से खुद को अलग कर लिया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस पर जहाँ ‘कड़ी नाराजगी’ जाहिर की है, वही फेडरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री फवाद चौधरी ने दावा किया कि पीएम इमरान नवाज शरीफ और अन्य के खिलाफ दर्ज कराए गए मामले से अनजान थे। उन्होंने दावा किया कि देशद्रोह का मामला दर्ज करना पीटीआई सरकार की नीति नहीं है, ऐसा नवाज शरीफ के कार्यकाल में हुआ था।

हिन्दू लड़की का रेप करने हथियारबंद गुंडों के साथ घर में घुसा मोहम्मद अजमत, विरोध करने पर पिता की बेरहमी से हत्या

पाकिस्तान में जबरन अपहरण, बलात्कार, धर्म परिवर्तन और हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएँ जारी है। पाकिस्तान में काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन के अनुसार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बर्बरता की एक और घटना में, एक हिंदू पिता को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हथियारबंद लोगों के एक समूह ने मार डाला क्योंकि उसने अपनी बेटी को अपराधियों से बचाने की कोशिश की थी।

पाकिस्तानी कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने कहा कि मोहम्मद अज़मत की अगुवाई में हथियारों से लैस लोगों के समूह ने जबरदस्ती शिव कोहली के घर में प्रवेश किया और उनकी बेटी के साथ बलात्कार करने की कोशिश की। जब लड़की के पिता ने अपनी बेटी पर हमले का विरोध करने की कोशिश की, तो मोहम्मद अज़मत और उसके साथियों ने बुजुर्ग हिंदू व्यक्ति को बेरहमी से टॉर्चर किया और फिर मार डाला।

राहत ऑस्टिन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए जानकारी दी कि पाकिस्तान पुलिस ने पीड़ित को किसी भी तरह की मदद देने या अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बजाय मृतक के परिवार को गिरफ्तार किया है। परिवार के लोग टंडो गुलाम अली, बादिन में मामला दर्ज करवाने की जिद कर रहे थे।

पहले भी होते रहे हैं हिन्दू परिवारों पर अत्याचार

इसी तरह की घटना पाकिस्तान के सिंध से 2 जून को सामने आई थी। 6 हथियारबंद लोग 13 वर्षीय हिंदू लड़की परमी भेल के घर में घुस गए । इसके बाद उन्होंने हिंदू परिवार के साथ मारपीट की और फिर लड़की को अगवा करके ले गए। इन 6 लोगों ने बंदूक की नोंक पर पूरी रात हिंदू लड़की के साथ बलात्कार किया। लड़की का परिवार उसे पूरी रात खोजता रहा, मदद के लिए बिलखता रहा।

उसी महीने, सिंध प्रांत पाकिस्तान के हल मटियारी में एक और 14 वर्षीय हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया गया था। राहत ऑस्टिन द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में अपहरण की गई लड़की की माँ को काफी दु:खी और बिलखते हुए देखा गया था। वीडियो में बिलखते हुए वह कह रही थी, “यह एक इस्लामी देश में पैदा होने का अभिशाप है।” एक्टिविस्ट के अनुसार, 14 वर्षीय नसीबन को यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए ले जाया गया था।

केरल गोल्ड तस्करी: 2 प्रमुख आरोपित फैसल, हमीद दुबई पुलिस की हिरासत में, CPI(M) के राज्य सचिव के बेटे का भी नाम, NIA ने की पुष्टि

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को केरल में गोल्ड तस्करी मामले की जाँच कर रही कोच्चि की एक विशेष अदालत को सूचित किया कि इस मामले में दो प्रमुख आरोपित फैसल फरीद (Faisal Fareed) और रब्बिन्स हमीद (Rabbins Hameed) दुबई पुलिस की हिरासत में हैं, जबकि चार अन्य के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।

कुछ आरोपितों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए, एनआईए ने कहा कि मामला एक महत्वपूर्ण चरण में है और इस समय उनकी जमानत चल रही जाँच को प्रभावित करेगी। गौरतलब है कि अदालत ने सोमवार को एजेंसी की आलोचना की थी और आरोपितों के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों के लिए सबूत माँगे थे। मामले के सभी 30 आरोपितों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका है जब UAPA को तस्करी के मामले में लागू किया गया। कुछ आरोपितों ने तर्क दिया कि यह केवल एक आर्थिक अपराध था और उन पर यूएपीए लागू नहीं किया जा सकता। एनआईए के जवाब की जाँच के बाद अदालत बुधवार (अक्टूबर 07, 2020) को फिर से उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी।

फैसल फरीद, जिसने कथित तौर पर ‘राजनयिक सामान’ के रूप में संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास में खेप में 30 किलोग्राम सोना भेजा था, एनआईए द्वारा दर्ज मामले में तीसरा आरोपित था।

दो महीने पहले, एनआईए की एक टीम ने यूएई का दौरा किया था और कथित तौर पर जेल में उनसे पूछताछ की थी। इसमें पाया गया था कि रब्बिन्स हमीद ने तस्करी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उससे देश के बड़े हिस्से में देश-विरोधी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराया जाता है। दुबई में गिरफ्तार दोनों हवाला लेनदेन में भी सक्रिय थे।

सीपीआई (M) के राज्य सचिव के बेटे से भी पूछताछ

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ड्रग जब्ती मामले के संबंध में अपने बेंगलुरु कार्यालय में सीपीआई (M) के राज्य सचिव कोडिएरी बालाकृष्णन के बेटे बिनेश कोडियरी को छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। जाँच दल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें अभी तक क्लीन चिट नहीं दी गई है और उनके बयानों की जाँच के बाद फिर से तलब किया जाएगा।

कोडियारी के लिए तभी से मुश्किलें शुरू हुईं जब बेंगलुरू ड्रग रैकेट के आरोपित अनूप मोहम्मद ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पास उनके नाम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन के दूसरे बेटे बिनेश कोडियरी ने उनके ‘व्यावसायिक कारोबार’ में उनकी बहुत मदद की थी।

इसके बाद, सीपीआई (M) के राज्य सचिव के बेटे कोडियारी नाम भी अनूप मोहम्मद की कॉल सूची में सामने आया था। ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि एक साल में मोहम्मद के खाते में 30 लाख रुपए आए, जो उन्होंने कथित

तौर पर ड्रग्स खरीद के लिए इस्तेमाल किए थे। जाँच के दौरान, एजेंसियों ने यह भी पाया कि तस्करी और ड्रग जब्ती के मामले जुड़े हुए थे।

फोन पर लगातार सम्पर्क में थे हाथरस पीड़िता का भाई और मुख्य आरोपित, कॉल विवरण में खुलासा- 104 बार हुई थी दोनों में बातचीत

हाथरस मामले को लेकर एक और खुलासा हुआ है। जाँच के दौरान पीड़िता के भाई की कॉल डिटेल (CDR) से खुलासा हुआ कि उसकी मुख्य आरोपित संदीप से फोन पर बात होती थी। कॉल डिटेल और लगातार बदलते बयानों के कारण हाथरस पीड़िता के परिवार पर सवाल उठ रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाथरस पीड़िता के भाई से पूछताछ की माँग की है। उन्होंने कहा है कि आरोपित और पीड़ित परिवार के बीच कई फोन कॉल हुए। टाइम्स नॉउ द्वारा एक्सेस किए गए कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच लड़की के भाई के नाम से रजिस्टर्ड फोन नंबर से 100 से अधिक फोन कॉल किए गए थे।

19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। अमित मालवीय ने कहा कि यह मामला आपसी रंजिश का परिणाम हो सकता है।

समाचार चैनल ‘टाइम्स नॉउ’ से बात करते हुए मालवीय ने कहा कि क्या यह पीड़िता का भाई था या फिर कोई और था, जो यह बातें कर रहा था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की उचित जाँच के बाद ही बातचीत का स्वरूप सामने आ पाएगा। वो कहते हैं कि जो कुछ सामने दिख रहा है, उससे काफी कुछ ज्यादा है इस मामले में।

मीडिया चैनल ने बताया कि यह बातचीत पीड़िता के परिवार के एक सदस्य और मुख्य आरोपित संदीप के बीच हुई है। कुछ कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि यह बातचीत 15 मिनट तक चली।

हाथरस पीड़िता और मुख्य आरोपित के बीच 104 कॉल

वहीं इंडिया टुडे का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीड़ित के परिवार और मुख्य आरोपित के फोन की जाँच की है। उन्होंने पाया कि पीड़िता मुख्य आरोपित के साथ लगातार टेलीफोनिक संपर्क में थी। पुलिस के मुताबिक, जाँच में पता चला है कि संदीप को पीड़िता के भाई सत्येंद्र के नाम से एक नंबर से नियमित रूप से कॉल आए।

सत्येंद्र के नंबर 989xxxxx और संदीप के 76186xxxxx के बीच 13 अक्टूबर, 2019 से टेलीफोनिक बातचीत शुरू हुई। अधिकांश कॉल चंदपा क्षेत्र में स्थित और मोबाइल टॉवरों से किए गए थे, जो पीड़ित के गाँव बूलगढ़ी से मुश्किल से 2 किमी दूर है।

कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि दो फोन नंबरों के बीच 62 आउटगोइंग कॉल और 42 इनकमिंग कॉल थे। कुल मिलाकर 104 कॉल किए गए थे। पुलिस के अनुसार, कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि पीड़िता और मुख्य आरोपित संपर्क में थे।

इससे पहले ‘Zee News’ में विशाल पांडेय की ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया था कि उसके पास वो कॉल रिकार्ड्स हैं, जिसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच घंटों बातचीत होती थी। खबर में कहा गया था कि उक्त नंबर पर अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच दोनों के बीच 5 घंटों की बातचीत हुई थी। वहीं पीड़िता के बड़े भाई ने परिवार के आरोपित संदीप से बातचीत होने की बात से इनकार किया था।

गौरतलब है कि यूपी सरकार ने मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर माँग की है कि उसे यूपी के हाथरस में लड़की से कथित बलात्कार और हमले की CBI जाँच का निर्देश देना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यूपी सरकार की माँग है कि PIL पर सुनवाई की जगह अदालत को CBI जाँच की निगरानी करनी चाहिए।