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मिर्जापुर: हिन्दू-घृणा से भरा पैकेज लेकर आया है 53 लाशों का जश्न मनाने वाला विषैला गैंग

जी हाँ आपने एकदम सही पढ़ा, कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन और फिर अब ‘अनलॉक’ होते-होते CAA की आड़ में दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में मार-काट के मुजाहिरे का जश्न मनाने वाले गज़वा-ए-हिन्द का जमावड़ा हिन्दू-घृणा और मनोरंजन के बरक्स एक बड़े भारत-विरोधी बाज़ार में अपनी दुकानें फिर से गर्मा चुका है। और इस बार पहली छोटी दुकान नेटफ्लिक्स प्रायोजित ‘सीरियस मैन’ के बाद अमेज़न प्राइम की ‘मिर्ज़ापुर 2’ (Mirzapur 2) नाम से सजी है।

मिर्ज़ापुर क्या है?

मिर्जापुर (Mirzapur 2) भारत के गाँव-देहातों में अनेकों खामियों के बावजूद मजबूत संस्कृति को भद्दे प्रकाश में दिखाने का एक मनोरंजनात्मक ज़हर है। इसका पहला सीज़न भी आप लोगों ने सब्सक्रिप्शन लेकर या बिना सब्सक्रिप्शन के दीगर ज़रियों से देखा ही होगा।

ग़र आप इसको महज पंकज त्रिपाठी के अभिनय तक सीमित कर के देखते हैं तो भुलावे में हैं। मनोरंजन की नज़र से इसके पहले सीज़न में साफ़तौर पर दिखता है कि किस तरह अखंडानंद त्रिपाठी और रति शंकर शुक्ला नाम के दो हिन्दू-ब्राह्मणों के बीच हर क़िस्म की गुंडागर्दी और गन्दगी परोसी गई है।

यह एक सामान्य उदाहरण है जिसे दर्शक को जानना चाहिए। जिहाद-परस्त व जिहाद-समर्थ इसी तर्ज पर नए दौर में तलवार, पेट्रोल बम के साथ साथ मनोरंजन के नाम पर सांस्कृतिक जिहाद पर बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं।

मिर्जापुर दिल्ली दंगों में दिलबर नेगी, अंकित शर्मा व अन्य 5 दर्जन लोगों की मृत्यु का जश्न मनाने वालों का एक विषैला समूह है, जिसमें निर्माता फरहान अख्तर से लेकर कथित अभिनेता अली फ़ज़ल, विक्रांत मेसी सभी हिन्दू-घृणा की अफ़ीम को हर पल खाकर जीते हैं। यह वही अली फ़ज़ल हैं, जिन्हें CAA के खिलाफ प्रदर्शन करने के नाम पर आगज़नी में देखने में बहुत मज़ा आ रहा था। वेब सीरीज़ में पैसा लगाने वाले फरहान अख्तर से तो सबका तार्रुफ़ है ही।

तो क्या हुआ हम तो पंकज त्रिपाठी के लिए देखने जाएँगे?

आपके जेहन में ऐसा सवाल आता है तो इसका यह पक्ष जान लीजिए। टारगेट ऑडिएंस अधिकतर हिन्दू युवा ही हैं जिनको लुभाने के लिए मिर्जापुर नाम के इस भारतीयता व हिन्दू-विरोधी प्रचार में पंकज त्रिपाठी को रखने के तीन कारण हैं :

  1. पंकज त्रिपाठी अतीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अभाविप (ABVP) में सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके हैं जैसा वे खुद कुछ साक्षात्कार में बताते हैं। पंकज त्रिपाठी मसान, वासेपुर जैसी फिल्मों के काऱण युवाओं में लोकप्रिय हैं।
  2. बॉलीवुड में फैले भाई-भतीजावाद के बीच पंकज त्रिपाठी एक आउटसाइडर हैं और ठीक-ठाक कलाकार हैं, जो पूर्व में इसी प्रकार की कहानी ‘वासेपुर’ में भी सुल्तान का किरदार निभा चुके हैं। 8 सालों के वक्फे में फ़र्क महज़ वासेपुर से मिर्जापुर तक सुल्तान का अखंडानंद ‘त्रिपाठी’ होने का है। प्रतिभावान आउटसाइडर को किसी बड़े दुष्प्रचार का हिस्सा बनाकर ढोल-नगाड़ों के साथ दुष्प्रचार करने का यह नया फॉर्मूला है, जो आने वाले दिनों में और ज्यादा देखने को मिलेगा। हाल की ही गुंजन सक्सेना पर बनी फिल्मइसी बात का एक उदाहरण है।
  3. पंकज त्रिपाठी, राजेश तैलंग करेक्टर आर्टिस्ट हैं, जिनकी अभिनय कला अली फ़ज़ल और विक्रांत मेसी से कहीं बेहतर है, इसलिए यह वेब सीरीज़ एक भ्रम को टार्गेटेड ऑडिऐंस में कस्बाई बोलचाल इत्यादि जैसे अनेकों तत्व को अपने हिसाब से बोने का काम बखूबी करती है।

वेब सीरीज के माध्यम से हिन्दू-घृणा परोसना और उसे स्थापित करना अब वामपंथी बुद्धिपिशाचों का नया जरिया बन गया है। इसके इन्हें दो तरह के फायदे भी होते हैं – पहला तो जगजाहिर हिन्दू-घृणा, हिंदुत्व के प्रतीकों को अपमानित कर उनसे भयानक छेड़खानी कर नए नैरेटिव को टीवी के माध्यम से स्थापित करना और दूसरा यह कि विवादों के जरिए आसानी से चर्चा का विषय बन जाना। मिर्जापुर से पहले भी ‘पाताल लोक‘ और ‘लैला‘ इसी हिन्दू-घृणा से भरी खुराफात का ही निचोड़ मात्र थे।

फैक्टचेक: मौलवी हर रात नए बच्चे के साथ सोता है, हिन्दू बच्चियों से गलत काम करने बोलता है

सोशल मीडिया पर एक बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक मौलवी द्वारा किए गए काले करतूतों को लेकर बात कर रहा है। बच्चे ने वायरल वीडियो में बताया कि वो इस्लामिया मदरसा का छात्र है। उसने बताया कि उस मदरसे में जो मौलवी उर्दू पढ़ाता है, वो बच्चों के साथ सोता है। बच्चे ने बताया कि सुबह 4 बजे ही मदरसे में सबको उठा दिया जाता है, जिसके बाद उन्हें नमाज पढ़ाया जाता है।

मदरसे की दिनचर्या बताने के क्रम में बच्चे ने कहा कि सुबह के नाश्ते के बाद पढ़ाई होती है, फिर दोपहर में नमाज के बाद वो खा कर सो जाते हैं। बच्चे ने बताया कि मदरसे में उर्दू के अलावा कुछ और नहीं पढ़ाया जाता है। इसके अलावा हदीस पढ़ाया जाता है। उक्त मौलवी के बारे में बच्चे ने बताया कि वो सीतापुर का रहने वाला है, जो हाथरस में रहता है। साथ ही वो उर्दू के अलावा कुछ और की शिक्षा नहीं देता है।

बच्चे ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि रात में भोजन करने के बाद मौलवी मदरसे के किसी न किसी बच्चे को लेकर अपने बिस्तर पर सो जाता है। उसने बताया कि मौलवी नहाने के समय गुसलखाने में भी लड़कों के साथ गन्दी बात करता है। वीडियो से प्रतीत होता है कि ये बच्चा किसी छोटी बच्ची को लेकर कहीं जा रहा था। उससे किसी ने पूछा कि वो इस बच्ची को लेकर क्यों जा रहा है?

इसके जवाब में बच्चे ने कहा कि मौलवी उसे गन्दी बातें करने को बोलते हैं और कहते हैं कि हिन्दुओं की लड़कियों के साथ ‘गन्दी बातें’ करो।

पुलिस ने इस वायरल वीडियो के बारे में अहम जानकारी दी। हाथरस पुलिस ने इस घटना को लेकर कहा कि उक्त प्रकरण में प्रभारी निरीक्षक सादाबाद द्वारा बताया गया कि उक्त वीडियो वर्ष 2018 का है। पुलिस ने बताया कि इसके संबंध में थाना सादाबाद पर वर्ष 2018 में अभियोग पंजीकृत कर 03 नामजद बालअपराधियों को बाल सुधारगृह एवं एक अन्य प्रकाश में आए अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

8 दिनों तक 9 युवकों ने किया 19 वर्षीय युवती का गैंगरेप: राजस्थान के चूरू की घटना, आक्रामक वसुंधरा ने CM गहलोत को घेरा

राजस्थान में बलात्कार के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। अब ताज़ा मामला चूरू से आया है, जहाँ एक 19 वर्षीय युवती के साथ 8 दिन तक बलात्कार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस दौरान 9 लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया। इस दौरान आरोपितों ने चूरू के राजगढ़, जयपुर और सीकर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। पुलिस ने पीड़िता का राजकीय अस्पताल में इलाज करा कर मेडिकल जाँच कराया है।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, पीड़िता की रिपोर्ट पर राजगढ़ पुलिस ने विक्रम पूनियाँ, देवेंद्र पूनियाँ, बंटी, राहुल, शुभम, हेमंत, मुकेश गुर्जर और दो अन्य के खिलाफ आईपीसी की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। राजगढ़ थाने में दर्ज कराई गई खबर में पीड़िता ने कहा कि वह 24 सितम्बर को अपने गाँव से राजगढ़ बस स्टैंड पहुँची थी, जहाँ उसे आरोपित विक्रम पूनियाँ मिला। पीड़िता का कहना है कि वो विक्रम से पहले से परिचित थीं।

आरोप है कि विक्रम इस दौरान एसएससी का फॉर्म भरवाने के बहाने पीड़िता को गाड़ी में बिठा कर ले गया। उस कार में बाकी दो आरोपित पहले से ही मौजूद थे। सारे आरोपित मिलकर पीड़िता को राजगढ़ के एक मकान में लेकर गए। वहाँ चारों ने न सिर्फ उसके साथ गैंगरेप किया, बल्कि पूरे वारदात की अश्लील वीडियो बना लिया गया और आपत्तिजनक फोटोज भी क्लिक करवा लिया गया। साथ ही आरोपितों पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी देने और डराने का भी आरोप लगाया गया है।

पीड़िता का आरोप है कि उसे नशीला पदार्थ खिला कर बेहोश कर दिया गया और जब युवती को होश आया तो वो एक कमरे में कैद थी, जहाँ चार आरोपित पहले से ही मौजूद थे। आरोपितों ने बताया कि विक्रम उसे छोड़ कर एक होटल में गया है। इसके बाद चारों ने फिर उसके साथ गैंगरेप किया। इसके बाद मुकेश ने उसे 1 सप्ताह तक बंधक बना कर रखा और उसके साथ बलात्कार करता रहा। इसके बाद युवती को सीकर के नीमकाथाना स्थित एक गाँव में ले जाया गया।

इसके बाद 1 अक्टूबर को पुलिस ने उसे छुड़ाया था और हमीरवास थाने लाकर परिजनों को सौंप दिया। आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी थी कि अगर उसने पुलिस में कुछ भी शिकायत की तो उसके सारे आपत्तिजनक वीडियोज और फोटोज वायरल कर दिए जाएँगे। पीड़िता ने बताया है कि वो बदनामी के भय से डरी हुई थी। इस मामले में पीड़िता का बयान लेकर अपहरण और गैंगरेप का मामला दर्ज किया गया है।

राजस्थान में बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से राजस्थान मीडिया में ऐसी कोई हैडलाइन नहीं है जिसमें दुष्कर्म की घटनाओं का जिक्र ना हो। अब चूरू के नवाँगाँव में सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने ये साबित कर दिया है कि राजस्थान में जंगलराज की स्थिति चरम पर है तथा सरकार का पुलिस प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है।

इधर राजस्थान में बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं के पीछे का कारण बताते हुए डीजीपी भूपेंद्र यादव ने ‘इंटरनेट’ और ‘युवाओं में बढ़ती उत्सुकता’ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आज की युवा जनरेशन रिलेशनशिप को ‘एक्सप्लोर’ कर रही है, इसीलिए ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की बढ़ती संख्या भी इसका कारण हो सकती है, बेरोजगारी भी हो सकती है, कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्रियाँ हैं, जिन्हें देख कर बच्चे प्रेरणा ले रहे हैं – वो भी इसका कारण हो सकता है। 

‘दंगा तो कोई नहीं रोक पाएगा, हमारी पूरी तैयारी है’: हाथरस मामले में कॉन्ग्रेस नेता का वीडियो वायरल

अर्नब गोस्वामी की ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एक स्टिंग ऑपरेशन में हाथरस मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मामले का राजनीतिकरण कर के हाथरस को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में दंगे भड़काने की साजिश थी, ऐसा पता चला है। ‘रिपब्लिक’ के इस स्टिंग में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री श्योराज जीवन दंगे की साजिश रचते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इससे हाथरस केस में नया एंगल आने की सम्भावना है।

इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता श्योराज जीवन वाल्मीकि कहते दिख रहे हैं, “दंगा तो कोई भी रोक नहीं पाएगा, जो स्थिति बनती जा रही है। वाल्मीकि समाज ही मार्शल कौम है। हमलोगों को आप गाँव में मार सकते हैं। बहुत काट दिए जाएँगे, बहुत मार दिए जाएँगे। शहर में हमलोग अच्छी-खासी तादाद में हैं। तैयारी पूरी है। इसके लिए हम पूरे तरीके से लगे हुए हैं।” बताया जा रहा है कि उक्त नेता कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का करीबी है।

‘रिपब्लिक’ के अनुसार, श्योराज जीवन ने ये भी खुलासा किया कि हाथरस में जाति के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। चैनल का कहना है कि ये वीडियो इस बात का पक्का सबूत है और ये इस केस का सबसे बड़ा कबूलनामा है। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता कहते हैं, “ये केस नहीं दबेगा। मैं इस मामले में 4 दिन बाद पड़ा था। परिवार हताश हो गया था।

कॉन्ग्रेस नेता ने बताया कि जब उन्हें पता चला तो वो पीड़ित परिवार से मिलने के लिए गए। उन्होंने कहा, “बच्ची को देख कर कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता था। फिर मैंने उग्र रूप ले लिया।” चैनल का दावा है कि हाथरस में तनाव बढ़ाने के कॉन्ग्रेस नेता श्योराज जीवन खुद मैदान में उतर गए। राहुल गाँधी भी हाथरस पहुँचे तो उनसे उन्होंने मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। श्योराज जीवन को उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के दलित चेहरों में से एक माना जाता है। स्टिंग वाले वीडियो में वो कहते हैं,

“लड़की को जला दिया गया। माँ-बाप को उसके दर्शन भी नहीं करने दिए गए। मुझे उस दिन गिरफ्तार किया गया। मैं अलीगढ़ का बब्बर शेर हूँ। 29 सितम्बर को जब मुझे पता चला तो मैंने हजारों लोगों के साथ धरना दिया। हमने तोड़फोड़ भी की। मुकदमा भी दर्ज हुआ। मैं पार्टी का राष्ट्रीय सचिव रहा हूँ। मुझे दिल्ली से भी फोन आए। दिल्ली में जो लोग बैठे हुए हैं, वो मेरे ही तो साथी हैं। सारे क्रन्तिकारी लोग मेरे साथ हैं।”

जाँच एजेंसियों की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में रातों रात ‘जस्टिस फॉर हाथरस (Justice for hathras)’ नाम की वेबसाइट बनाई गई। इस वेबसाइट का इकलौता उद्देश्य था, उत्तर प्रदेश को दंगों की आग में झोंक देना। इस वेबसाइट को इस्लामी देशों द्वारा समर्थित कट्टरपंथी संगठन, एमनेस्टी इंटरनेशनल से फंडिंग मिलती थी। यह वेबसाइट बहुसंख्यक समुदाय में असंतोष पैदा करने, योगी और मोदी सरकार को कमज़ोर करने का प्रयास कर रही थी।

रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे HC से मिली सशर्त बेल: भाई शौविक को रहना पड़ सकता है 20 अक्टूबर तक जेल

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ड्रग केस में बुरी तरह फँसी रिया चक्रवर्ती को आज (अक्टूबर 7, 2020) कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। दरअसल, कई दिनों की मशक्कत के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। उनके साथ सैंमुअल मिरांडा को भी बेल मिली है।

हालाँकि, कोर्ट ने रिया के भाई शौविक और ड्रग तस्कर बासित परिहार को बेल नहीं दी। कोर्ट के फैसले के बाद एनसीबी ने कहा कि जिन्हें भी कोर्ट ने बेल दी है वो उसके खिलाफ अपील करेंगे। वहीं शौविक के वकील सतीश मानेशिन्दे उन्हें जमानत दिलाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें भी जल्द जमानत मिल सकती है।

जानकारी के अनुसार रिया चक्रवर्ती को 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है। रिया को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। वहीं अगर रिया को मुंबई से बाहर भी जाना होगा तो उसके लिए उन्हें मंजूरी लेनी होगी। जब भी रिया को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा उन्हें वहाँ पहुँचना पड़ेगा।

गौरतलब है कि रिया को एनसीबी ने 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था। रिया पर सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त करने का आरोप है। इसके अलवा उन पर कलाकार के पैसों की हेर-फेर का भी आरोप है। जिसकी जाँच ईडी कर रही है।

याद दिला दें सुशांत के अकॉउंट्स से जुड़ी जानकारी जुटाते समय ड्रग्स चैट का खुलासा हुआ था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मामला एनसीबी को सौंपा और फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद रिया, शौविक, सैमुअल समेत कई लोग गिरफ्तार कर लिए गए। रिया को अब तक भायखला जेल में बंद किया गया था।

इससे पहले 6 अक्टूबर को खबर आई थी रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक के अलावा, ड्रग्स सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार सैमुअल मिरांडा, दीपेश, बासित परिहार और जैद की न्यायिक हिरासत मुम्बई की एनडीपीएस कोर्ट ने 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही रिया के भाई शैविक चक्रवर्ती की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई है। अब दोनों भाई-बहन को 20 अक्टूबर तक जेल में रहना होगा।

हाथरस के बहाने जातीय दंगा फैलाने के लिए मॉरीशस से भेजे गए ₹50 करोड़, पूरी फंडिंग ₹100 करोड़ से भी ज्यादा: ED ने किया खुलासा

हाथरस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शुरुआती रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। मीडिया खबरों में ईडी की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया जा रहा है कि इस कांड के बहाने जातीय दंगा फैलाने के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पास मॉरिशस से 50 करोड़ रुपए आए थे।

इसके अलावा ईडी ने दावा किया है कि पूरी फंडिंग 100 करोड़ रुपए से अधिक की थी। अब आगे पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया से अफवाहों को फैला कर प्रदेश और देश की शांति व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश रची जा रही थी। हालाँकि, यूपी पुलिस की मुस्तैदी और खूफिया एजेंसियों के अलर्ट होने के कारण इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते हुए 4 संदिग्ध लोगों को मथुरा पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। पड़ताल में पता चला था कि इनके लिंक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से हैं। टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान इनकी गिरफ्तारी हुई थी। अब मथुरा पुलिस इनसे जुड़े हर पहलू पर जाँच कर रही है।

पुलिस ने इनकी पहचान उर रहमान पुत्र रौनक अली निवासी नगला थाना रतनपुरी जिला मुजफ्फरनगर; सिद्दीकी पुत्र मोहम्मद चैरूर निवासी बेंगारा थाना मल्लपुरम केरल; मसूद अहमद निवासी कस्बा व थाना जरवल जिला बहराइच व आलम पुत्र लईक पहलवान निवासी घेर फतेह खान थाना कोतवाली जिला रामपुर, के रूप में की थी।

इनमें से एक पीएफआई सदस्य जामिया का छात्र है। इसका नाम मसूद अहमद है। मसूद बहराइच जिले के जरवल रोड के मोहल्ला बैरा काजी का रहने वाला है और दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एलएलबी का छात्र है। वह 2 साल पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की स्टूडेंट विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से जुड़ा था।

यहाँ बता दें कि इससे पहले इस मामले में खुलासा हुआ था कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में ‘जस्टिस फार हाथरस’ नाम से रातों रात वेबसाइट तैयार हुई और वेबसाइट में फर्जी आईडी के जरिए हजारों लोग जोड़े गए। इसमें देश और प्रदेश में दंगे कराने और दंगों के बाद बचने का तरीका बताया गया। यहाँ मदद के बहाने दंगों के लिए फंडिंग की जा रही थी। जाँच एजेंसी को फंडिंग के जरिए अफवाहें फैलाने के लिए सोशल मीडिया के दुरूपयोग के भी सुराग मिले हैं।

महिलाओं, सवर्णों के खिलाफ जम कर जहर उगलने वाले प्रत्याशी से MP उपचुनाव में बढ़ी कॉन्ग्रेस की टेंशन! लात-घूँसों से हुई पिटाई का वीडियो वायरल

मध्यप्रदेश में उपचुनावों के मद्देनजर राजनीति शुरू हो गई है। हाल में प्रदेश के दतिया जिले के थाना भांडेर में पूर्व सीएम कमलनाथ और कॉन्ग्रेस पार्टी प्रत्याशी फूल सिंह बरैया सहित 2 दर्जन कॉन्ग्रेस नेताओं पर कोरोना नियमों की अनदेखी किए जाने पर मुकदमा दर्ज किया गया है

प्रशासन के मुताबिक, कार्यक्रम में केवल 100 लोगों के उपस्थित होने की अनुमति थी परंतु सभा मे हजारों लोग उमड़े जिसमें न तो सुरक्षित शारीरिक दूरी रखी गई और न ही, मास्क लगाए गए। इस बीच एक दिलचस्प वीडियो भी सामने आई। वीडियो में दिखा कि एक व्यक्ति पूर्व सीएम कमलनाथ के साथ फोटो खिंचाने के लिए टाई लगा कर मंच पर आया, मगर उन्हें फोटों खिंचाने का मौका नहीं मिला और वह हाथ-पाँव पटकते रह गए

इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रही है। कथिततौर पर यह वीडियो कॉन्ग्रेस नेता व प्रत्याशी फूल सिंह बरैया का है। इस वीडियो में वह खासतौर पर सवर्णों के ख़िलाफ़ जम कर जहर उगलते नजर आ रहे हैं।

इनकी इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग उनकी एक अन्य वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें गुस्साई भीड़ उन्हें लात, घूँसो, जूतों और चप्पलों से मार रही है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने इस वायरल होती वीडियो को झूठा और फेक बताया है। उनका आरोप है कि भाजपा ऐसे सारे कुत्सित प्रयास कर रही है, ताकि उनका ध्यान भटक जाए और वह चुनाव पर ध्यान देने की बजाय इधर-उधर में लग जाएँ।

जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो भितरवार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली चीनौर तहसील के गाँव भागीरथपुरा का है। जहाँ 14 अप्रैल 2016 को क्षेत्रीय विधायक लाखन सिंह यादव की मौजूदगी में संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया था।

बता दें कि, कथिततौर पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के साथ हुई मारपीट की वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि क्रोधित जनता पुलिस के मना करने पर भी फूल सिंह बरैया को छोड़ने को तैयार नहीं है और लगातार लात-घूँसो, जूते-चप्पलों से उन्हें मारती जा रही है। वीडियों में उन्हें फटे कपड़ों में पुलिस के साथ जाते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में दिया जा रहा विवादस्पद बयान

उल्लेखनीय है कि जिस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि फूल सिंह बरैया ने एक सभा को संबोधित करते हुए हिंदुओं के ख़िलाफ़ जमकर उलटा बोला। उसमें सुना जा सकता है कि वह कहते हैं, “अभी भी वक्त है कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को जाग जाना चाहिए वरना सवर्ण देश को हिंदू राष्ट्र बना देंगे।”

उन्होंने कहा कि समुदाय से भारत छोड़ने की बात करने वाले सवर्णों को पहले खुद देश छोड़ना चाहिए क्योंकि वह मुस्लिम समुदाय के बाद भारत आए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति के लोग और मुस्लिम, एक ही पिता की संतान हैं चाहे तो डीएनए टेस्ट करा लिया जाए।

उन्होंने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के एक भाषण का उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार जब हिंदुओं ने अंग्रेजों से भारत छोड़ने की माँग की तो चर्चिल ने कहा कि अगर भारत के मूल निवासी इस बात माँग करेंगे तो विचार किया जाएगा। इसके बाद फूल सिंह बरैया ने वीडियो में सबसे एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “यदि हम एक हो गए तो वे 15 है हम 85, वे मुकाबला नहीं कर पाएँगे।”

सवर्ण महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी

बता दें, उनका एक दूसरा वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वह सवर्ण महिलाओं के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। फूल सिंह बरैया कहते हैं कि सवर्ण वर्ग के लोगों का कुत्ता अगर अनुसूचित जाति के लोग छू लेते हैं तो वे उस कुत्ते को अनुसूचित जाति के घर बाँध आते हैं। इसलिए अनुसूचित जाति के लोगों को भी सवर्णों के घर जाकर उनकी महिलाओं को लड्डू खिलाने चाहिए, जिससे वह भी अछूत हो जाएँ और फिर सवर्ण वर्ग के लोग उन्हें अनुसूचित जाति के घर के लोगों के घर छोड़ आएँ। इस तरह अनुसूचित जाति के लोगों की दो-दो पत्नियाँ हो जाएँगी।

मोदी के बीस साल: 2001 में पहली शपथ, तीन विधानसभा, दो लोकसभा चुनाव; 18 साल मीडिया का एजेंडा झेला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारों का नेतृत्व करने के मामले में अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। इन 20 सालों में नरेंद्र मोदी ने पहले गुजरात में राज्य सरकार का नेतृत्व किया और 6 वर्षों से वो देश की केंद्र सरकार के मुखिया हैं। इस दौरान उन्होंने एक राजनेता, एक मुखिया और एक व्यक्ति के रूप में कई आदर्श स्थापित किए और दुनिया भर में पहले गुजरात और फिर भारत का डंका बजाया। नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 7, 2001 को बतौर गुजरात सीएम पहली बार शपथ ली थी

इस तरह से बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मुखिया के रूप में अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर गए। सोशल मीडिया पर उनके पहले शपथग्रहण का वीडियो वायरल हो रहा है और लोग इसे खासा पसंद कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के अस्वस्थ होने और भाजपा में बगावत होने के बाद राज्य की कमान संभाली थी और उसके बाद से कभी हार का मुँह नहीं देखा।

भूकंप और दंगों से जूझ रहे गुजरात को उन्होंने दुनिया भर में बिजनेस हब के रूप में स्थापित किया। नरेंद्र मोदी ने 2002 में समय पूर्व चुनाव कराने का निर्णय लिया और सोनिया गाँधी द्वारा उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के बावजूद पूर्ण बहुमत पाने में कामयाब रहे। इसके बाद 2007 और फिर 2012 में उन्होंने गुजरात विधानसभा का चुनाव जीता। 2014 में उनके नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। 2019 में वो और बड़े बहुमत से लौटे।

नरेंद्र मोदी ने जब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब वो विधायक भी नहीं थे। इसके कुछ ही महीनों बाद उन्होंने राजकोट वेस्ट से वजुभाई बाला द्वारा सीट खाली करने के बाद विधानसभा का चुनाव लड़ा और फिर जीते। इसी तरह प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संसद का मुँह भी नहीं देखा था। वो पहली बार सांसद बने और फिर देश की कमान संभाली। नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने से पहले कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला था।

हालाँकि, इस दौरान सोनिया गाँधी द्वारा उन्हें ‘खून का सौदागर’ कहे जाने से लेकर राहुल गाँधी द्वारा ‘नीच’ कहे जाने तक, उन्होंने कई विपक्षी नेताओं की आपत्तिजनक टिप्पणियों को काफी शालीनता से झेला। एक समय था जब अंग्रेजी अच्छी तरह न आने के कारण राजदीप सरदेसाई ने उन्हें अपने शो में नहीं बुलाया था और अख़बार उनके इंटरव्यू लेकर भी प्रकाशित नहीं करते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इन चीजों से निपटने में कुशलता दिखाई और शालीन तरीके से सारी चीजों को बर्दाश्त किया।

आज वही मीडिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं तो उनके सम्बोधन का लाइव प्रसारण करने को मजबूर होता है, उनके भाषण को लगातार ट्वीट किया जाता है और उनके इंटरव्यू के लिए बेचैन रहता है। नरेंद्र मोदी मेनस्ट्रीम मीडिया नहीं, बल्कि सीधे जनता से संवाद करते हैं और रेडियो के माध्यम से अपनी ‘मन की बात’ रखते हैं। उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स पर करोड़ों फॉलोवर्स हैं और वो दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले नेताओं में से एक हैं।

नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार गुजराती में शपथ ली थी। उन्होंने चुनावी घोषणापत्रों को सरकार के फैसलों का आधार बनाया। उन्होंने दशकों पुराने विवादों का निपटारा किया और साथ ही अनुच्छेद-370, तीन तलाक और राम मंदिर सहित कई मुद्दों पर जनता की माँगों को पूरा किया। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से जूझ रहे देश का वो कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं और हम सब आशा करते हैं कि उनके नेतृत्व में भारत इस महामारी को भी मात देगा।

किसी भी नेता के लिए उसकी छवि ही सबकुछ होती है। एक बार दाग लग गया तो उबरना मुश्किल होता है। मोदी पर, बिना किसी सबूत के, लगातार नकारात्मक प्रोपेगेंडा चलाया जाता रहा। जिस ट्रेन की बॉगी में 59 हिन्दू कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया, उसके बाद के दंगों का आरोप भी हिन्दुओं पर ही लगा, और अंततः मुख्यमंत्री मोदी पर जा कर चिपक गया। इन सबके बावजूद, सारी एजेंसियों को मोदी के पीछे लगा देने के बाद भी साबित कुछ नहीं हुआ।

समानांतर तरीके से वामपंथी मीडिया गिरोह लगातार एक ही बात रट-रट कर मोदी के खिलाफ अपना एजेंडा चला कर उन्हें कभी हिटलर, कभी दरिंदा, कभी राक्षस कहा जाता रहा। मोदी का इस युद्ध से बाहर आना बताता है कि साँच को आँच नहीं। वरना कॉन्ग्रेस के पास दस साल सत्ता थी, और वो चाह कर भी कुछ साबित नहीं कर पाए। ऐसे में एक ही बात शाश्वत सत्य लगती है कि लोगों तक विकास पहुँचाने और उनके जीवन में परिवर्तन लाने का माध्यम बनना ही आपको सफल राजनेता बनाता है।

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद: कोर्ट ने वक्फ बोर्ड पर लगाया 3000 का जुर्माना, हिन्दू पक्ष के दस्तावेज में औरंगजेब की कारस्तानी

काशी में बाबा विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के सम्बन्ध में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर की है। इस याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे मुक़दमे को चुनौती दी गई है। याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। हालाँकि, कोर्ट ने देर से याचिका दायर करने के लिए बोर्ड पर 3000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने वाली है।

अगली सुनवाई में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड की याचिका को एडमिट किए जाने के साथ ही इस पर निर्णय लिया जाएगा कि इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में चलेगी या वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ में? अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी ने पहले ही जिला जज की अदालत में याचिका दायर कर के सिविल कोर्ट में सुनवाई को चुनौती दे रखी है। बोर्ड चाहता है कि इसकी सुनवाई निचली अदालत में न होकर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए।

‘आजतक’ की खबर के अनुसार, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील मोहम्मद तौहीद खान ने जानकारी दी है कि जिला जज की अदालत में सिविल रिवीजन दाखिल करने में हुई देरी पर माफ़ी माँगते हुए सेक्शन-5 लिमिटेशन एक्ट के तहत प्रार्थना पत्र दायर किया गया था। जिला जज ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अक्टूबर 13, 2020 को अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। स्वयंभू विश्वेश्वर महादेव बनाम अंजुमन इंतजामिया मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 18 सितंबर को दूसरे प्रतिवादी के तौर पर शामिल होने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

इस प्रार्थना पत्र पर प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से वादमित्र ने निर्धारित समयावधि के बाद याचिका दायर करने पर आपत्ति जताई गई थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की थी। सिविल जज ने 25 फरवरी 2020 को पक्षकारों की बहस सुनने तथा दलीलों के विश्लेषण के बाद सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की चुनौती को खारिज कर दिया था।

दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव के जिस ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया जाता है, उसका मूल स्वरूप वो नहीं बल्कि उस जगह पर मौजूद है जहाँ 350 वर्ष पहले मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर एक मस्जिद बना दी गई थी। ‘Zee News’ की खबर के अनुसार, हिंदू पक्ष ने वाराणसी की उस अदालत में 351 वर्ष एक महत्वपूर्ण कागज जमा कराया है जो काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की सुनवाई कर रही है।

इसमें लिखा है कि औरंगजेब को ये खबर मिली है कि मुलतान के कुछ सूबों और काशी में ‘बेवकूफ ब्राह्मण अपनी रद्दी किताबें’ पाठशालाओं में पढ़ाते हैं और इन पाठशालाओं में हिंदु और दूसरे मजहब वाले विद्यार्थी और जिज्ञासु उनके बदमाशी भरे ज्ञान, विज्ञान को पढ़ने की दृष्टि से आते हैं। बादशाह औरंगजेब ने ये सुनने के बाद सूबेदारों के नाम ये फरमान जारी किया कि वो अपनी इच्छा से ‘काफिरों के मंदिर और विद्यालय ध्वस्त कर दें। फिर मूर्तिपूजन बंद करा कर काशी विश्वनाथ मंदिर को गिरा दिया गया।

हाल ही में कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा। याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की माँग की गई थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है। मथुरा की अदालत में दायर हुए एक सिविल मुकदमे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक माँगा गया था। 

कश्मीर में फिर BJP नेता को मारने के लिए हुआ आतंकी हमला: PSO ने अकेले एक आतंकी को मार कर बचाई जान, हुए बलिदान

कश्मीर के गांदरबल जिले के नुनार में मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को भाजपा जिला उपाध्यक्ष गुलाम कादिर राथर व उनकी पत्नी के घर पर आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं। हालाँकि, इस दौरान नेता के अंगरक्षक व पीएसओ अल्ताफ हुसैन ने फौरन सामने आते हुए बीजेपी नेता की जान बचा ली। मगर, हमले में वह खुद बुरी तरह घायल हो गए।

इस दौरान पीएसओ ने एक आतंकी को ढेर किया जबकि बाकी बचे आतंकियों को भी अपने साहस से अकेले वहाँ से खदेड़ दिया। बाद में गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई। अब आतंकी हमले की सूचना के बाद इलाके में अतिरिक्त जवान बुलाए गए हैं और आतंकियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी कश्मीर पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल रात के करीब 8 बजे आतंकियों ने भाजपा नेता के घर पर हमला बोला। इस दौरान गुलाम कादिर अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल की ओर जा रहे थे। हालाँकि, जैसे ही वह अपने गेट तक पहुँचे आतंकी उनके सामने आ गए और उन पर हमला कर दिया, तभी पीएसओ अल्ताफ हुसैन ने उनकी जान बचाते हुए जवाबी फायरिंग शुरू की।

इस बीच आतंकियों ने उन पर गोली भी चलाई लेकिन तब भी वह फायरिंग करते ही रहे। दोनों तरफ से 5 मिनट तक गोलियाँ चली। इसके बाद 1 आतंकी के ढेर होते ही बाकी भी वहाँ से भाग गए। गोलियों की आवाज सुनकर आस-पास के इलाके में गश्त कर रहे सेना व पुलिस के जवान भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने भाजपा नेता व उनके परिवार की सुरक्षा का इंतजाम करके पीएसओ अल्ताफ को फौरन अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अल्ताफ ने भाजपा नेता को कोई चोट नहीं आने दी। बताया जा रहा है कि पीएसओ अल्ताफ ने इतना साहस दिखाया कि उन्होंने आतंकियों को नेता के पास तक पहुँचने ही नहीं दिया।

बता दें कि सुरक्षाबलों ने मारे गए आतंकी का शव अपने कब्जे में ले लिया है और इलाके की घेराबंदी करके पूरे इलाके में तलाशी अभियान भी जारी है। उल्लेखनीय है कि आतंकी हमले में अपने अंगरक्षक के कारण बचने वाले गुलाम कादिर पिछले माह भी चर्चा में आए थे। उन पर किजौरा गाँव में कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा था।

ज्ञात हो कि यह कश्मीर में भाजपा नेताओं पर हमले की पहली वारदात नहीं है। 5 अगस्त को कुलगाम में आतंकियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जुलाई माह में बांदीपोरा के जिला अध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी।