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नक्सली आतंकियों ने किया 25 आदिवासियों का सामूहिक कत्ल, ‘पुलिस के एजेंट’ होने के शक में ठहराया था धोखेबाज

वामपंथी उग्रवादियों (LWT) ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तकरीबन 25 आदिवासियों को बर्बरतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया। नक्सलियों ने मारे गए लोगों पर पुलिस मुखबिर, गोपनीय सैनिक और भीतरघाती होने का आरोप लगाया है।

खबरों के मुताबिक, एक नक्सली वामपंथी आतंकवादी समूह ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 08, 2020) को एक बयान जारी कर कहा था कि बीजापुर के गँगालूर इलाके में उनके खिलाफ ‘स्पष्ट सबूत’ मिलने के बाद जनअदालत के माध्यम से कम से कम 25 आदिवासी लोगों को सजा दी गई है।

‘विकल्प’ नाम से जाने जाने वाले एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ने उन्हें ‘धोखेबाज’ और ‘पुलिस के मुखबिर’ घोषित करते हुए कहा कि मारे गए लोगों में 12 गोपनीय सैनिक, 5 भीतरघाति और 8 मुखबिर शामिल थे।

नक्सलियों द्वारा मारे गए आदिवासियों की सही संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालाँकि, तेलंगाना पुलिस ने कहा कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि नक्सलियों ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के पास 16 ग्रामीणों की हत्या की थी।

तेलंगाना के एक अधिकारी ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को बताया कि नक्सलियों ने कुछ अन्य ग्रामीणों को भी अगवा कर लिया था और उन्हें बीजापुर के जंगलों में छिपा दिया और बाद में उन्हें भी मार डाला था। नक्सल आतंकवादी गिरोह ‘विकल्प’ ने कथित तौर पर दावा किया कि पुलिस के लिए काम करने वाले गुप्त एजेंटों में से एक वरिष्ठ माओवादी नेता विज्जा भी शामिल था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वामपंथी आतंकवादी संगठन ने कहा, “हमारी पूछताछ से पता चला कि विज्जा पिछले दो वर्षों से एक पुलिस एजेंट के रूप में काम कर रहा था और उसे माओवादी पार्टी की केंद्रीय समिति को नुकसान पहुँचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसने चार बार पुलिस को पार्टी की बैठकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी थी।”

कथित तौर पर, बीजापुर में आदिवासियों की हत्या के लिए जिम्मेदार 39 वर्षीय नक्सली नेता मोडियम विज्जा उर्फ ​​भादरू को सितंबर के आखिरी सप्ताह में वामपंथी आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। पुलिस माओवादी नेता विज्जा की धरपकड़ में जुटी थी। यहाँ तक उसे पकड़ने के लिए 8 लाख रुपए का नकद इनाम भी रखा था।

आदिवासी इलाकों में ग्रामीण हैं नक्सलियों के खिलाफ

इस बीच पुलिस ने कहा है कि वामपंथी आतंकवादी निर्दोष आदिवासियों को निशाना बना रहे है। बस्तर क्षेत्र वामपंथी आतंकवादी का आंदोलन अपने अंत के करीब है क्योंकि आदिवासी इलाकों में ग्रामीण उनके खिलाफ हो रहे हैं। .

बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा है कि आतंकवादी गतिविधियों का आदिवासी क्षेत्रों में कोई लेना-देना नहीं है और इस क्षेत्र में आदिवासियों के बीच नक्सल विरोधी भावना के निर्माण के कारण इसका अंत हो रहा है। सुंदरराज ने कहा कि माओवादी नेताओं को अब अपने आंदोलन के खात्मे का डर दिख रहा है। यह आंदोलन अब पूरी तरह से दिशाहीन हो गया है।

J-K: पुलवामा एनकाउंटर में मारा गया LeT का टॉप कमांडर जाहिद टाइगर, 2 ऑपरेशन में 4 आतंकी ‘क्लीन बोल्ड’

जम्मू-कश्मीर स्थित पुलवामा के कंगन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच एनकाउंटर में सुरक्षा बलों और पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। संयुक्त ऑपरेशन में लश्कर के एक टॉप कमांडर समेत 2 आतंकी मारे गए हैं। 

कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट कर बताया कि पुलवामा एनकाउंटर में लश्कर के टॉप कमांडर जाहिद नजीर भट (Zahid Nazir Bhat) उर्फ जहीद टाइगर भी मारा गया है। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह बड़ी कामायबी है।

55 राजपूताना राइफल्स की अगुवाई में आतंकियों के खिलाफ यह एनकाउंटर चला। पुलवामा एनकाउंटर में भी 2 आतंकी मारे जा चुके हैं। शनिवार (अक्टूबर 10, 2020) को दिनभर में 2 अलग-अलग एनकाउंटर में अब तक 4 आतंकी ढेर कर दिए गए।

इससे पहले पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों को दक्षिण कश्मीर में कुलगाम जिले के चिनगाम इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद शुक्रवार देर रात इस इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया गया था।

उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में दो आतंकवादियों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मारे गए आतंकियों की पहचान जंगलपुरा दिवसार कुलगाम निवासी तारिक अहमद मीर और पाकिस्तानी नागरिक समीर भाई उर्फ उस्मान के तौर पर की गई। पाकिस्तान के पंजाब का रहने वाला उस्मान ‘ए’ श्रेणी का आतंकवादी है। अधिकारी के अनुसार, दोनों आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे।

पुलिस अफसर खुर्शीद अहमद और सरपंच की हत्या में थे शामिल

अधिकारी ने बताया, “पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों मारे गए आतंकवादी आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार संगठनों का हिस्सा थे। वे कई आतंकी वारदातों और नागरिकों की हत्या में शामिल थे। इनमें फुराह मीरबाजार में पुलिस अधिकारी खुर्शीद अहमद की हत्या और अखरान मीरबाजार में सरपंच आरिफ अहमद पर हमला शामिल है। हमले में अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए थे।”

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक एम4 राइफल और एक पिस्तौल जब्त की गई हैं। पुलिस ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के दादूरा इलाके में एक अन्य अभियान में दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से दो एके राइफल बरामद की गई हैं।

‘TRP के भूखे..ऐसे गाड़ी चलाते हैं जैसे पिछवाड़े में आग लगी हो’: आजतक की गाड़ी पर चिल्ला रहा शख्स देना चाहता है राहुल कँवल को संदेश, देखें वीडियो

फेक टीआरपी के मामले में ‘इंडिया टुडे’ बड़े पैमाने में लिप्त है। एक तरफ जहाँ चैनल घंटों उनके चैनल को देखने के लिए लोगों को रिश्वत देने के मामले में घिरा हुआ है, वहीं अब सोशल मीडिया पर ‘आजतक’ समाचार चैनल के कार में बैठे लोगों पर भड़कते और नाराजगी व्यक्त करते हुए एक आदमी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहा यह वीडियो खुद उस आदमी ने बनाया था, जिसने यह दावा किया कि वह आजतक चैनल के लोगों द्वारा की गई लापरवाह ड्राइविंग का शिकार हुआ है।

वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति का दावा है कि उन्हें लापरवाह ड्राइविंग करते हुए ‘आजतक’ न्यूज़ चैनल की एक कार ने ठोक दिया था। जिस वजह से नाराज व्यक्ति ने उसके जान को खतरे में डालने वाले व्यक्ति पर चिल्लाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं व्यक्ति ने अपना गुस्सा कार में बैठे लोगों पर भी निकाला।

आजतक पर लगाया लापरवाह ड्राइविंग का आरोप

इस वीडियो में नजर आ रही कार की विंडस्क्रीन पर समाचार चैनल ‘आजतक’ का स्टीकर चिपकाया हुआ देखा जा सकता है। कार के अंदर ड्राइवर और यात्री दोनों मास्क पहने हुए हैं। जो कि यह दर्शाता है कि वीडियो हाल ही के दिनों का हो सकता है।

आदमी कार पर चिल्लाते हुए कहता है- “यह आजतक की कार है। ऐसे गाड़ी चलते है मानो इनके पीछवाड़े में किसी ने आग लगा दी हो। इनकी गाड़ी पर आजतक का स्टीकर है।” तभी गाड़ी का हॉर्न बजने पर आदमी कहता है, “चुप! बहुत सुन लिया तुम्हारी बकवास। क्या समझते हो तुम अपने आप को?”

आदमी चिल्लाते हुए गाड़ी का चक्कर लगता है फिर गाड़ी में बैठे लोगों से मास्क उतारने और कैमरे में चेहरा दिखाने के लिए कहता है। गुस्से से भरा आदमी आगे कहता है, “याद रखना और यह अपने राहुल कँवल (इंडिया टुडे एंकर) को कह देना। चार साल पहले अप्रैल 02, 2016 को इसी तरह तुम्हारी गाड़ी मुझे मारने वाली थी। और अब इस 5 फीट 6 इंच के रॉबिनहुड का वादा है, की तुम मीडियावालों की वाट लगाऊँगा मैं।”

BARC ने इंडिया टुडे पर दर्शकों की संख्या में हेरफेर करने का आरोप लगाया

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा घोषित टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी का उल्लेख किया। इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कंवल ने टीआरपी मामले में रिपब्लिक चैनल का नाम आने के बाद जमकर खुशी जाहिर की थी। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिकी नहीं।

BARC ने हाल ‘इंडिया टुडे’ को 5 लाख रुपए का फाइन भरने को कहा गया था, क्योंकि उसने अपनी व्यूअरशिप बढ़ने के पीछे जो स्पष्टीकरण ‘BARC Disciplinary Council (BDC)’ को सौंपा, वह उन्हें संतोषजनक नहीं लगा। व्यूअरशिप में नजर आ रही गड़बड़ी (malpractice) के संबंध में टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड और BARC को 27 अप्रैल 2020 को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था।

इसके बाद टीवी टुडे द्वारा दिया गया जवाब BARC डिसिप्लिनरी काउंसिल को संतोषजनक नहीं लगा। बीडीसी ने इंडिया टुडे की प्रतिक्रिया पर कहा, “चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों (मुंबई और बेंगलुरु) में इंडिया टुडे चैनल की व्यूअरशिप में इतने उछाल के संबंध में दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं है।” इसके अलावा, BARC डिसिप्लिनरी काउंसिल ने कहा, “BARC Measurement Science Team द्वारा उपलब्ध कराए गए स्टैस्टिकल डेटा (statistical data) से पता चलता है कि व्यूअरशिप में असामान्य और सोच से परे वृद्धि हुई है।”

India Today ने ‘सेक्युलर अपराध’ पर डालना चाहा पर्दा, मुस्लिम लड़की से प्यार करने के चलते हुई थी राहुल की मॉब लिंचिंग

दिल्ली विश्वविद्यालय के 18 वर्षीय छात्र राहुल राजपूत की मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम प्रसंग होने की वजह से मोहम्मद अफरोज और मोहम्मद राज ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर उस पर बर्बरतापूर्वक हमला किया। राहुल घायल अवस्था में ही अस्पताल पहुँचा जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमलावरों में शामिल अफरोज को अपनी 16 साल की नाबालिग बहन के एक हिन्दू युवक राहुल के साथ प्रेम प्रसंग से आपत्ति थी। इसलिए उसने राहुल को सबक सिखाने की ठानी।

राहुल प्राइवेट माध्यम से जर्नलिज्म द्वितीय वर्ष की पढ़ाई करने के साथ-साथ बच्चों को अंग्रेजी का ट्यूशन भी देता था। मोहम्मद अफ़रोज़ और उसके साथियों द्वारा राहुल को पीटने का वीडियो CCTV में सामने आया है। उन्होंने पूरी तैयारी के साथ राहुल के चचेरे भाई के फोन पर कहा कि उन्हें अपने बच्चे को ट्यूशन दिलाना है, इसलिए राहुल को बाहर भेज दें।

फोन सुनकर राहुल बिना किसी को बताए बाहर गली में आ गया। घर के बाहर मौजूद 4-5 लोग उसे अपने साथ ले गए और गली नंदा रोड पर लात- घूंसों से उसको मारना शुरू कर दिया। CCTV में देखा गया कि मारपीट के बाद घायल हालत में ही राहुल किसी तरह से अपने घर पहुँचा। फिर उन्हें पास के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान राहुल ने दम तोड़ दिया। 18 वर्षीय राहुल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंदरूनी चोटों को मौत का कारण बताया गया।

कई मेनस्ट्रीम मीडिया ने इस खबर को चलाने की जहमत ही नहीं उठाई और जिन्होंने ये खबर चलाई, उन्होंने भी इस खबर को चलाने में ईमानदारी नहीं दिखाई। उन्होंने इसमें से कई बातों को बड़ी ही चालाकी से छुपा लिया। इनमें से एक मीडिया ग्रुप इंडिया टुडे भी था, जो कि फिलहाल टीआरपी घोटाले में फँसा हुआ है। 

हाल ही में इंडिया टुडे ने एक बयान जारी करते हुए स्वीकार किया कि उस पर ‘ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC)’ द्वारा जुर्माना लगाया गया था। इससे पहले रिपब्लिक टीवी के पत्रकार व एक मुख्य गवाह के बीच बातचीत में भी यह खुलासा हुआ था कि उस गवाह के बेटे को इंडिया टुडे देखने को कहा गया था ताकि अवैध रूप से इंडिया टुडे की TRP बढ़ सके।

इंडिया टुडे ने छुपाई आरोपितों की पहचान

इंडिया टुडे ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया कि एक 18 वर्षीय लड़के को एक ‘महिला’ के साथ उसकी ‘दोस्ती’ के लिए पीटा गया था। मीडिया हाउस ने युगल के बीच प्रेम संबंध को ‘मित्रता’ के रूप में दर्शाया। हालाँकि यह रिपोर्ट एकमात्र उदाहरण नहीं है जहाँ इंडिया टुडे ने एक मुस्लिम लड़की के प्यार में एक हिंदू लड़के की भीषण हत्या को छुपाने का प्रयास किया।

India Today report describes inter-faith relationship as “friendship”

इंडिया टुडे ने अपनी पूरी रिपोर्ट में घटना के विवरणों का विस्तार से वर्णन किया है, दोषियों के खिलाफ लगाए गए आरोप, तनाव कम करने के लिए पड़ोस में पुलिस बल की तैनाती, मृतक के चाचा की गवाही, कारण पीड़ित की मौत, घटना पर पुलिस का बयान आदि।

हालाँकि इन सबके बीच इंडिया टुडे की रिपोर्ट से एक चीज गायब थी-  हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की के बीच अंतरधार्मिक प्रेम संबंध का जिक्र। चैनल ने बड़े ही शातिर तरीके से किसी तरह के प्रेम संबंध का उल्लेख न करते हुए इसे दोस्ती करार दिया, ताकि ‘अंतरधार्मिक प्रेम संबंध’ का विवरण देने से आसानी बचा जा सके।

इसके अतिरिक्त, इंडिया टुडे ने जघन्य अपराध करने वाले आरोपितों की पहचान भी उजागर नहीं की। हालाँकि गिरफ्तार किए गए लोगों में से 3 नाबालिग हैं और उनकी पहचान भारतीय कानूनों के अनुसार नहीं बताई जा सकती है, लेकिन चैनल ने इस मामले में गिरफ्तार बाकी दो अभियुक्तों का भी उल्लेख नहीं किया। मोहम्मद अफ़रोज़ और मोहम्मद राज 5 में से दो लोग थे जिन्होंने राजपूत को नंदा रोड पर लिंचिंग की, लेकिन इंडिया टुडे ने उनकी पहचान का उल्लेख करने से परहेज किया।

इंडिया टुडे ने अंकित सक्सेना हत्या मामले में भी छिपाया धर्म

फरवरी 2018 में अंकित सक्सेना को उसकी प्रेमिका शहज़ादी के परिवार वालों ने सिर्फ़ इसीलिए मार डाला क्योंकि वो दोनों के रिश्ते से नाराज़ थे। शहज़ादी की माँ ने अपनी स्कूटी से धक्का देकर अंकित को गिराया और फिर शहज़ादी के पिता ने चाक़ू से उनके गले को रेत डाला। तब भी इंडिया टुडे की रिपोर्ट में हत्या पर पर्दा डालने की कोशिश की थी।

India Today report on Ankit Saxena’s gruesome murder

ऐसा अक्सर देखा गया है कि जब एक भीषण कृत्य का शिकार बहुसंख्यक समुदाय से होता है और अपराधी अल्पसंख्यक समुदाय से होता है तो इंडिया टुडे जैसे ही मीडिया गिरोह धार्मिक एंगल को दबाने का हरसंभव प्रयास करती है और इसे ‘दोस्ती’ का नाम देती है। हालाँकि जब पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय से होता है और हमला करने वाला बहुसंख्यक समुदाय से, तो माहौल इसके विपरीत होता है।

हाथरस: कथित नक्सली महिला से CPIM नेता सीताराम येचुरी ने की थी मुलाकात, तस्वीरों से खुलासा

हाथरस मामले (Hathras Case) में नक्सल कनेक्शन के बाद अब कम्युनिस्ट कनेक्शन भी सामने आया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) नेता सीताराम येचुरी की कुछ तस्वीरें कथित नक्सली महिला, जिसे कि ‘फेक भाभी’ भी कहा जा रहा है, से उनकी मुलाकात का संकेत देती नजर आ रही हैं।

दरअसल पिछले दो हफ्तों से पीड़िता के परिवार वालों के साथ एक महिला को देखा जा रहा था जिसके कथित तौर पर नक्सलियों से सम्बन्ध चर्चा का विषय बन चुके हैं। ख़बरों के मुताबिक हाथरस (Hathras) पीड़ित परिवार के साथ एक नक्सली महिला उसकी भाभी के रूप में 16 से 22 सितंबर के बीच रह रही थी।

हालाँकि कुछ अन्य स्रोतों से हमें पता चला कि कथित नक्सली महिला और भी पहले से परिजनों के साथ उनके घर में थी। फ़िलहाल उसके रहने की सही अवधि के बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, मीडिया में कथित नक्सली महिला के खुलासे से बाद अब ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जहाँ से पता चला है कि सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury) जैसे कम्युनिस्ट नेता जब पीड़ित परिवार से मिलने हाथरस पहुँचे थे, तो उनकी मुलाकात इस कथित नक्सल महिला से भी हुई थी। बता दें कि CPI और CPI-M नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने 6 अक्टूबर को परिवार से मुलाकात की थी। और मामले की न्यायिक जाँच की माँग की थी।

सीताराम येचुरी ने की नक्सली महिला से मुलाकात

तस्वीरों से ऐसा प्रतीत होता है मानो नक्सल महिला ने सीताराम येचुरी के साथ बातचीत की थी। तस्वीरें इस ओर भी इशारा कर रहीं है कि महिला बताए जा रहे समय से भी पहले से पीड़िता के परिवारवालों के साथ उनके घर पर रह रही थी।

पीड़िता की भाभी के साथ नक्सली महिला

योगी सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) के अनुसार, नक्सली महिला मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली है और लगातार पीड़िता की असली भाभी के संपर्क में रही है। उसकी पहचान उस समय सामने आई जब मामले तफ्तीश की दौरान जाँचकर्ताओं ने असली भाभी के कॉल रिकॉर्ड की जाँच की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता की असली भाभी नक्सली महिला के लगातार संपर्क में थी। वहीं एसआईटी ने अब कथित नक्सली महिला की असलियत को लेकर अभियान शुरू किया है।

हाथरस पीड़ितों से बात करते कम्युनिस्ट नेता

गौरतलब है कि स्थानीय खुफिया इकाई ( (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट/LIU) ने हाथरस मामले की आड़ में इलाके में दंगे भड़काने और सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का आयोजन करने की साजिश की चेतावनी दी थी। जिसके बाद पीड़ितों के परिवार के साथ एक नक्सली के रहने का खुलासा हुआ।

एसआईटी अब मामले के दो अलग-अलग पहलुओं पर जाँच कर रही है – हत्या का एंगल और असामाजिक तत्वों द्वारा मामले में बड़ी साजिश के माध्यम से सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश।

‘फेक भाभी’ का कॉन्ग्रेस कनेक्शन सामने आते ही बदलने लगे बयान, पहले बताया था खुद को बहन, अब बनी अनजान

हाथरस मामले में कथित ‘फेक भाभी’ के कथित नक्सल कनेक्शन और मार्क्सवादी कनेक्शन के बाद सोशल मीडिया पर अब इसके कॉन्ग्रेसी सम्बन्ध चर्चा का विषय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में इस महिला के बारे में दावा किया जा रहा था कि वह पीड़ित परिवारवालों के घर में मृतका की फेक भाभी बन कर रह रही थी।

यह भी माना जा रहा है कि यह महिला मीडिया और पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे राजनीतिक दलों से क्या और कैसे कहना है, इस बारे में परिजनों को सीखाने का काम करती थी। हाथरस में पीड़िता के घर में ‘नकली भाभी’ बनकर रहने की आरोपित डॉ राजकुमारी बंसल अब लगातार अपने बयान भी बदल रही हैं और पीड़िता की भाभी या बहन होने से भी इंकार कर रही हैं। वहीं ट्विटर यूज़र्स ने कथित नक्सली महिला का कनेक्शन कॉन्ग्रेस से भी होने का दावा किया है।

दक्षिणपंथी लेखिका शेफाली वैद्य ने अपने ट्विटर एकाउंट से मध्यप्रदेश जबलपुर की रहने वाली कथित नक्सली महिला के नाम से एक ट्विटर एकाउंट खोज निकाला है। उन्होंने दावा किया है कि यह एकाउंट हाथरस पीड़ित परिजनों के साथ पीड़िता के मरने के बाद रह रही कथित नक्सली महिला का ही है।

शेफाली वैद्य ने डॉ. राजकुमारी बंसल नाम से एक ट्विटर एकाउंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। बता दें कि पीड़िता की भाभी ने भी अपने एक बयान में उनके घर में 2 सप्ताह से रह रही कथित नक्सली महिला का नाम भी राजकुमारी ही बताया है।

पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट में शेफाली ने कई खुलासे भी किए है। इस महिला का नाम डॉक्टर राजकुमारी बंसल बताया जा रहा है जो कि जबलपुर, मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने ट्विटर पर एक ट्वीट भी किया है जिसमें लिखा है – #कास्ट मैटर्स

अपने पोस्ट में शेफाली ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए हाथरस घटना के पीछे राहुल गाँधी और प्रियंका द्वारा रची गई साजिश की ओर इशारा किया है। शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में ट्विटर यूजर ने बताया कि राजकुमारी बंसल कॉन्ग्रेस समर्थक है, जो कि उनके ट्विटर अकाउंट से भी पता चलता है। राजकुमारी कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर एकाउंट को फॉलो करती है, इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गाँधी के ट्वीट्स को भी रिट्वीट किया है।

वहीं, एक अन्य ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने भी यही दावा किया है। अंकुर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “हाथरस में रह रही नकली भाभी मध्यप्रदेश जबलपुर की रहने वाली डॉ. राजकुमारी बंसल है। आपको क्या लगता है कि किसी को एमपी से हाथरस क्यों भेजा गया? क्या उसे पीड़ित परिवार को यह सीखने के लिए भेजा गया था कि उन्हें क्या बोलना है या किसी भी सबूत को कैसे पेश करना है? फेक भाभी राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस को ट्विटर पर फॉलो करती हैं।” वहीं अंकुर ने एक फेसबुक एकाउंट भी शेयर किया है जिसे उन्होंने कथित नक्सली महिला राजकुमारी का होने का दावा किया है।

राजकुमारी बंसल फॉरेंसिक एक्सपर्ट की हैसियत से गई थी हाथरस

कॉन्ग्रेस समर्थक होने का खुलासा होने के बाद राजकुमारी बंसल का एक और वीडियो सामने आया है। राजकुमारी बंसल नाम की इस महिला ने स्वीकार किया है कि वह हाथरस पीड़ित परिवार के बीच गई थी। उन्हें इस वीडियो में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह फॉरेंसिक एक्सपर्ट हैं और इस सम्बन्ध में ही ‘कुछ मदद’ करने के लिए ही वो हाथरस गई थी।

पहले कहा था ‘बहन हूँ’, अब बदले बयान

राजुकमारी बंसल अब लगातार बयान भी बदल रही हैं। हाथरस में पीड़ित परिवार के साथ बैठकर एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में राजकुमारी बंसल ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि वह उनकी बहन हैं जबकि अब नए बयान में उन्होंने कहा है कि उन्होंने कभी भी खुद को परिवार का सदस्य नहीं बताया।

गौरतलब है कि ‘न्यूज़ 18’ ने अपने एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि एक महिला पीड़ित परिवार में मृतका की ‘भाभी’ बन कर रह रही थी और परिवार की तरफ से बयान भी दे रही थी। इसके बाद से हाथरस मामले का नक्सली कनेक्शन सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त ‘भाभी’ सितम्बर 16 से 22 तारीख तक परिवार के साथ रही और इस दौरान अपने नक्सली आकाओं से भी संपर्क में थी।

हालाँकि, अन्य सूत्रों का कहना है कि वो काफी समय से पीड़ित परिवार के साथ रह रही थी। कहा जा रहा है कि वो घटना के दो दिन बाद ही पीड़ित परिवार के साथ रहने आ गई थी।

वहीं अब पीड़िता की असली भाभी की एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि सवालों के घेरे में आई महिला कोई फर्जी नहीं बल्कि उनकी दूर की रिश्तेदार थी। घूँघट में अपना चेहरा ढके और हाथ में एक बच्चा लिए पीड़िता की असली भाभी ने कहा, “उनका (संदिग्ध नक्सली) नाम राजकुमारी है। उनका एक 10 साल का बेटा है। उनका पति और एक परिवार है। ऐसा कुछ नहीं है (जो मीडिया में बताया जा रहा है)।”

अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए मिलेगी मुफ्त कोचिंग और वजीफा: तेलंगाना सरकार का फैसला

तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 8 अक्टूबर को राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को सिविल सेवा परीक्षा को पास करने के लिए एक योजना की घोषणा की। अल्पसंख्यकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने घोषणा की है कि वह चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए मुफ्त कोचिंग कक्षाएँ प्रदान करेगी।

योजना के तहत, राज्य के 100 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों का चयन एक प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा, जिन्हें इंस्टीट्यूट में सिविल सेवाओं के लिए कोचिंग कक्षाएँ लेने के लिए भेजा जाएगा। तेलंगाना अल्पसंख्यक आवासीय शैक्षणिक संस्थान सोसायटी (TMREIS) के अध्यक्ष एके खान ने कहा कि चुने गए उम्मीदवार सूचीबद्ध इंस्टीट्यूट में से अपना मनपसंद कोचिंग संस्थान चुन सकेंगे। राज्य सरकार उनकी फीस का भुगतान करेगी और उन्हें वजीफा भी प्रदान करेगी। यह योजना उन उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध है जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2 लाख से अधिक नहीं है।

खान ने बताया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एक लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। उन्होंने कहा कि चयनित सौ उम्मीदवारों को पूरे साल उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। खान ने कहा, “इंशाल्लाह, हमारे पास एक योजना है, जो उन्हें हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ कोचिंग केंद्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तैयार है।” उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है और उन्हें इसका सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए।

पिछले महीने खबर आई थी कि तेलंगाना सरकार वक्फ बोर्ड की न्यायिक शक्तियों का विस्तार करने पर विचार करेंगे। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कोप्पुला ईश्वर ने कहा था कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही वक्फ बोर्ड को न्यायिक दर्जा देने के मुद्दे पर विचार करेंगे।

राजस्थान: वो जगह जहाँ पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर लगाई थी आग

राजस्थान में करौली जिले के बूकना गाँव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद में पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था। पुजारी की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने पुजारी पर पेट्रोल डालने के मुख्य आरोपित कैलाश मीणा को गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जाता है कि बुधवार शाम को कैलाश, शंकर, नमो, किशन, रामलखन जमीन पर कब्जा कर छप्पर तानने लग गए। बुजुर्ग पुजारी ने उन्हे रोकने का प्रयास किया तो आरोपितों ने बाजरे की कड़बी और पेट्रोल की बोतल डालकर आग लगा दी। इससे पुजारी बुरी तरह झुलस गए।

गंभीर स्थिति में पुजारी को जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मुख्य आरोपित को गिरफ्तार करने के साथ ही अन्य आरोपितों की तलाशी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीम गठित की गई है।

यही वह जगह है, जिसका अतिक्रमण रोकने पर पुजारी को गँवानी पड़ी अपनी जान

इस घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि एक बात तो स्पष्ट है कि यहाँ महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े, दलित, व्यापारी कोई भी सुरक्षित नहीं है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को अब अपनी गहरी नींद को त्यागते हुए दोषियों को सख्त सजा दिलाकर परिवार को तुरंत न्याय दिलाना चाहिए।

यही जगह पुजारी के लिए काल बनी

भाजपा के प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गहलोत सरकार में अत्याचारों की पराकाष्ठा हो गई है। गहलोत को एक मिनट भी मुख्यमंत्री रहने का अधिकार नहीं है ।

इसी जगह पर जमीन विवाद में पुजारी बाबूलाल को आग के हवाले कर दिया गया

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस जघन्य अपराध को लेकर राज्य की गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया है कि क्या आप राजस्थान को बंगाल बनाना चाहते हैं। 

यहीं पर पुजारी के ऊपर पेट्रोल छिड़क कर जला दिया गया था

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्विटर पर लिखा, “करौली में एक मंदिर के पुजारी को जिंदा जला देना राजस्थान की दुर्दशा का हाल बता रहा है। अशोक जी राजस्थान को बंगाल बनाना चाहते हो या राज्य जिहादियों को सौंप दिया है! या इसका भी ठीकरा अपने राजकुमार की तरह मोदी जी या योगी जी पर फोड़ोगे ?! षडयंत्रों से समय मिले तो काम भी कर लें!”

वो जगह जहाँ बाबूलाल पुजारी को आग लगाई गई थी

पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, प्रशासन इस मामले को शुरुआत में ‘आत्मदाह’ बताती रही। पुजारी ने मौत से पहले ही आरोपित कैलाश का नाम ले लिया था, बावजूद इसके उसे गिरफ्तार करने में पुलिस ने 24 घंटे का समय लगा दिया। लोगों की माँग है कि इस मामले के जाँच अधिकारी को भी हटाया जाए। शाम 6 बजे पुजारी का शव गाँव पहुँचा, जिसके बाद पीड़ित परिजनों ने दाह संस्कार से इनकार कर दिया।

पुजारी के परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया था। मृतक पुजारी बाबूलाल की पत्नी विमला देवी ने राजस्थान सरकार से माँग की थी कि सभी अभियुक्तों को फाँसी की सज़ा दी जाए, तभी इस मामले में न्याय हो पाएगा। साथ ही इस मामले को जातीय रंग देने की भी कोशिशें हो रही है।

फर्जी नक्सली भाभी के बचाव में पीड़िता की असली भाभी ने ‘नक्सली भाभी’ को बताया दूर की रिश्तेदार

उत्तर प्रदेश के हाथरस गाँव में 19 साल की एक लड़की की कथित हत्या से जुड़े इस सनसनीखेज मामले में प्रतिदिन चौकानें वाले नए खुलासे हो रहे हैं। हाथरस केस में ‘न्यूज़ 18’ ने खुलासा किया था कि हाथरस मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने पाया है कि मध्य प्रदेश की एक नक्सली महिला पीड़ित परिवार के साथ पीड़िता की भाभी बनकर रह रही रही थी। वहीं, अब इस मामले में मृतका की असली भाभी भी स्पष्टीकरण जारी करने के लिए सामने आई हैं।

‘न्यूज 18’ ने बताया था कि हाथरस मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने पाया है कि एक नक्सली महिला 16 सितंबर से 22 सितंबर के बीच पीड़ित परिवार के साथ रह रही थी। महिला कथित तौर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली है और मामले का खुलासा होने के बाद से ही फरार है। बताया जा रहा है कि नक्सली संगठन पीड़िता की असली भाभी के संपर्क में थे।

पीड़िता की असली भाभी की सामने आई वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि सवालों के घेरे में आई महिला कोई फर्जी नहीं बल्कि उनकी दूर की रिश्तेदार थी। घूँघट में अपना चेहरा ढके और हाथ में एक बच्चा लिए पीड़िता की असली भाभी ने कहा, “उनका (संदिग्ध नक्सली) नाम राजकुमारी है। उनका एक 10 साल का बेटा है। उनका पति और एक परिवार है। ऐसा कुछ नहीं है (जो मीडिया में बताया जा रहा है)।”

कथत नक्सली महिला के आवास के बारे में पूछने पर असली भाभी ने बताया, “वह जबलपुर में रहती है और वहाँ नौकरी करती है।”

उन्होंने आगे बताया कि, ‘फर्जी भाभी’ बताई जा रही महिला वास्तव में उनकी दूर की एक रिश्तेदार है, जो कथित गैंगरेप पीड़िता के बारे में जानने के बाद परिवार के साथ रहने आई थी। असली भाभी ने जोर देते हुए कहा, “वह (संदिग्ध नक्सली) मेरी भाभी की रिश्तेदार है और इस तरह मेरी दूर की रिश्तेदार है। जो घटना के बारे में जानने के बाद हमारे घर में आकर रह रही थी। भोपाल, अहमदाबाद और मुंबई से हमारे रिश्तेदार आ रहे हैं, तो क्या सभी को ऐसे फर्जी घोषित कर दिया जाएगा।”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए हाथरस घटना का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस घटना की आड़ में वह उत्तर प्रदेश में उच्च जाति के प्रति विरोध की भावना को भड़काने और निम्न वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत बना रहे है। वहीं मीडिया भी अपना फायदा देखते हुए इसका इस्तेमाल करने में पीछे नहीं है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं। जिससे हाथरस मामले की घटना और इसके आड़ में चल रही साजिशों का खुलासा हो सके। हाथरस मामले की पूरी क्रोनोलॉजी समझने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

मिर्जापुर2 के बाद अब अली फजल के बायकॉट ने पकड़ा जोर, सीएए विरोध में कहा था- मजा आ रहा है

बीते एक-दो दिनों से ट्विटर पर एक हैशटैग खूब चर्चा में रहा, #BoycottMirzapur। इस पर वेब सीरीज़ (मिर्ज़ापुर) में गुड्डू भैया का किरदार निभाने वाले अली फज़ल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह किसी ट्रेंड की दया पर नहीं टिके हैं। वह इस तरह के किसी ट्रेंड को नहीं मानते हैं। उनकी इस प्रतिक्रिया का नतीजा यह निकला कि ट्विटर पर एक और हैशटैग ट्रेंड करने लगा #बॉयकाट_अली_फजल। यानी वेब सीरीज़ के विरोध से शुरू हुआ ट्रेंड सीधे उनके विरोध तक आ पहुँचा। 

(साभार – ट्विटर )

इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2019 के दिसंबर महीने से हुई थी जब देश में सीएए और एनआरसी का विरोध हो रहा था। मिर्ज़ापुर वेब सीरीज़ के को प्रोड्यूसर फरहान अख्तर ने भी विरोध किया था। इस विरोध को मद्देनज़र रखते हुए ट्विटर पर मिर्ज़ापुर 2 का बहिष्कार शुरू हुआ।

इस बहिष्कार के चर्चा में आने के बाद अली फज़ल ने अपने बयान में कहा, “हमें तय करना होगा कि हम किस तरफ खड़े हैं? क्या हम किसी ट्रेंड की दया पर टिके हुए हैं? नहीं, मैं कला को उस नज़रिए से नहीं देखता हूँ। हम केवल एक एप की दया पर निर्भर हैं, जिससे तय होता है कि कौन हमारा शो देखेगा और कौन नहीं। इसका मतलब यह बहुत नीचे गिर चुका है। मेरा मतलब है कि अगर आप ट्रेंड की बात करते हैं तो मैंने कभी किसानों के लिए कोई ट्रेंड नहीं देखा जो पूरे देश में आंदोलन कर रहे हैं। हालाँकि मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि ऐसी चीज़ें ज़रूरी नहीं है, लेकिन कोरोना की ख़बरें अब किसी को ज़रूरी नहीं लग रही हैं। अब इस तरह की ख़बरें ट्रेंड में नहीं हैं, जबकि मेरे हिसाब से यह एक बड़ी समस्या है, जिसका हम फ़िलहाल सामना कर रहे हैं। मुझे आशा है कि आम लोग इस तरह की चीज़ों से ऊपर उठेंगे।”

लोगों ने उनके इस बयान के एक हिस्से का जम कर विरोध किया, वह था ‘हम ट्रेंड की दया पर नहीं जीते हैं।’ तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी। 

कुछ लोगों ने लिखा, “अब मैं मिर्ज़ापुर 2 मुफ्त में भी नहीं देखूँगा।” 

वहीं एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, “अब कोई भी फिल्म या वेब सीरीज़ देश के लिए वफ़ादार नहीं रह गई है।”    

देश में जब सीएए और एनआरसी का विरोध हो रहा था तब फरहान अख्तर समेत बॉलीवुड के कई कलाकारों ने विरोध किया था। इसमें अली फज़ल का नाम भी शामिल था। उन्होंने 20 दिसंबर 2019 को किए गए एक ट्वीट में लिखा था, “शुरू मजबूरी में किए थे, अब मज़ा आ रहा है।” बाद में अली फज़ल ने अपना यह ट्वीट हटा भी लिया था।

विरोध करने के दौरान फरहान अख्तर एक बार बुरी तरह ट्रोल भी हो चुके हैं। प्रदर्शन में शामिल होने के दौरान उन्होंने कहा कि विरोध करते हुए आवाज़ उठाना मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है। उनके इस जवाब पर एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि इस क़ानून को लेकर उनकी क्या समस्या है या उनके अनुसार इस क़ानून में क्या बदलाव किए जाने चाहिए? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मैं अभी इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता हूँ, सब कर रहे हैं तो कोई वजह ज़रूर होगी।”

हाल ही में मिर्ज़ापुर 2 का ट्रेलर आया था, जिसके बाद से इसकी चर्चा जारी है। इसके अलावा वेब सीरीज़ शुरुआत से ही विवादों में घिरी हुई है। आगामी 23 अक्टूबर को मिर्ज़ापुर 2 अमेज़न प्राइम पर स्ट्रीम होगी। इस वेब सीरीज़ में पंकज त्रिपाठी, रसिका दुग्गल, विजय वर्मा, कुलभूषण खरबंदा, श्वेता त्रिपाठी, राजेश तैलंग, हर्षिता गौड़, लिलीपुट और मेघना मलिक समेत अन्य कलाकार नज़र आएँगे।