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फोन पर लगातार सम्पर्क में थे हाथरस पीड़िता का भाई और मुख्य आरोपित, कॉल विवरण में खुलासा- 104 बार हुई थी दोनों में बातचीत

हाथरस मामले को लेकर एक और खुलासा हुआ है। जाँच के दौरान पीड़िता के भाई की कॉल डिटेल (CDR) से खुलासा हुआ कि उसकी मुख्य आरोपित संदीप से फोन पर बात होती थी। कॉल डिटेल और लगातार बदलते बयानों के कारण हाथरस पीड़िता के परिवार पर सवाल उठ रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाथरस पीड़िता के भाई से पूछताछ की माँग की है। उन्होंने कहा है कि आरोपित और पीड़ित परिवार के बीच कई फोन कॉल हुए। टाइम्स नॉउ द्वारा एक्सेस किए गए कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच लड़की के भाई के नाम से रजिस्टर्ड फोन नंबर से 100 से अधिक फोन कॉल किए गए थे।

19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। अमित मालवीय ने कहा कि यह मामला आपसी रंजिश का परिणाम हो सकता है।

समाचार चैनल ‘टाइम्स नॉउ’ से बात करते हुए मालवीय ने कहा कि क्या यह पीड़िता का भाई था या फिर कोई और था, जो यह बातें कर रहा था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की उचित जाँच के बाद ही बातचीत का स्वरूप सामने आ पाएगा। वो कहते हैं कि जो कुछ सामने दिख रहा है, उससे काफी कुछ ज्यादा है इस मामले में।

मीडिया चैनल ने बताया कि यह बातचीत पीड़िता के परिवार के एक सदस्य और मुख्य आरोपित संदीप के बीच हुई है। कुछ कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि यह बातचीत 15 मिनट तक चली।

हाथरस पीड़िता और मुख्य आरोपित के बीच 104 कॉल

वहीं इंडिया टुडे का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीड़ित के परिवार और मुख्य आरोपित के फोन की जाँच की है। उन्होंने पाया कि पीड़िता मुख्य आरोपित के साथ लगातार टेलीफोनिक संपर्क में थी। पुलिस के मुताबिक, जाँच में पता चला है कि संदीप को पीड़िता के भाई सत्येंद्र के नाम से एक नंबर से नियमित रूप से कॉल आए।

सत्येंद्र के नंबर 989xxxxx और संदीप के 76186xxxxx के बीच 13 अक्टूबर, 2019 से टेलीफोनिक बातचीत शुरू हुई। अधिकांश कॉल चंदपा क्षेत्र में स्थित और मोबाइल टॉवरों से किए गए थे, जो पीड़ित के गाँव बूलगढ़ी से मुश्किल से 2 किमी दूर है।

कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि दो फोन नंबरों के बीच 62 आउटगोइंग कॉल और 42 इनकमिंग कॉल थे। कुल मिलाकर 104 कॉल किए गए थे। पुलिस के अनुसार, कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि पीड़िता और मुख्य आरोपित संपर्क में थे।

इससे पहले ‘Zee News’ में विशाल पांडेय की ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया था कि उसके पास वो कॉल रिकार्ड्स हैं, जिसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच घंटों बातचीत होती थी। खबर में कहा गया था कि उक्त नंबर पर अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच दोनों के बीच 5 घंटों की बातचीत हुई थी। वहीं पीड़िता के बड़े भाई ने परिवार के आरोपित संदीप से बातचीत होने की बात से इनकार किया था।

गौरतलब है कि यूपी सरकार ने मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर माँग की है कि उसे यूपी के हाथरस में लड़की से कथित बलात्कार और हमले की CBI जाँच का निर्देश देना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यूपी सरकार की माँग है कि PIL पर सुनवाई की जगह अदालत को CBI जाँच की निगरानी करनी चाहिए।

हाथरस पीड़िता की पहचान उजागर करने पर NCW ने दिग्विजय सिंह, स्वरा भास्कर और BJP IT सेल प्रमुख को भेजा नोटिस

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को सोशल मीडिया पर हाथरस पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए तीन अलग-अलग नोटिस भेजे। नोटिस में तीनों से स्पष्टीकरण माँगा गया है और उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे सोशल मीडिया पर संबंधित पोस्ट को हटा दें। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करते हैं।

ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर ने कल (अक्टूबर 5, 2020) दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन की तस्वीर को शेयर करते हुए एक ट्वीट किया था, जिसमें हाथरस पीड़ित की तस्वीर वाला एक बैनर दिखाई दे रहा था। हालाँकि, बाद में स्वरा भास्कर ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया

Screenshot of Swara Bhaskar’s tweet that she deleted later.

इसी तरह, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस दिग्विजय सिंह ने भी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार पर निशाना साधने के लिए हाथरस की पीड़िता की तस्वीर वाला ट्वीट किया था। हालाँकि, उन्होंने भी बाद में अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। खास बात यह है कि अनुभवी कॉन्ग्रेस नेता ने जो फोटो शेयर की थी, उसमें मामले के बारे में गलत सूचना फैलाई जा रही थी। इसमें दावा किया गया था कि पीड़िता की जीभ काट दी गई थी। इस दावे को पुलिस पहले ही खारिज कर चुकी है।

Screenshot of Digvijaya Singh’s tweet that he deleted later

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी कुछ दिन पहले हाथरस पीड़िता का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया था जिसमें कथित तौर पर हमला करने के बाद उसे जमीन पर लेटा देखा जा सकता था। वीडियो में, पीड़िता घटना के बारे में बता रही थी। वीडियो में उसका चेहरा धुँधला नहीं था। एनसीडब्ल्यू ने तीनों मामलों का संज्ञान लिया है और इन तीनों से स्पष्टीकरण माँगा है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कल कहा था कि जब हाथरस मामले में बलात्कार पर चीजें स्पष्ट हो जाएँगी, तब NCW इस मामले में पीड़िता की पहचान जाहिर करने वाले सभी लोगों को नोटिस देगा। उन्होंने कहा कि जिन भी लोगों ने सोशल मीडिया में या फिर विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर प्रदेश के हाथरस की पीड़िता की तस्वीरों का इस्तेमाल किया है, उन सभी के डिटेल्स उनके पास हैं।

बता दें कि कई लिबरल वामपंथी इस बात से नाराज़ हैं कि अभिनेत्री कंगना रनौत के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ महिला आयोग ने संज्ञान क्यों लिया। साथ ही हाथरस मामले में महिला आयोग द्वारा सक्रियता दिखाए जाने के बावजूद ये अध्यक्ष रेखा शर्मा को घेर रहे हैं, जबकि खुद पीड़िता की पहचान जाहिर कर रहे। ऐसे ही कठुआ की मासूम पीड़िता की पहचान भी जाहिर कर दी गई थी।

जामिया का छात्र निकला मसूद अहमद, हाथरस में जातीय हिंसा की साजिश में गिरफ्तार, 2 साल पहले जुड़ा था PFI से

दिल्ली से हाथरस जाते हुए 4 PFI सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद अब मामले का जामिया यूनिवर्सिटी से कनेक्शन सामने आया है। पुलिस का कहना है कि मथुरा के पास टोल प्लाजा से गिरफ्तार होने वाले 4 युवक यूपी में दंगे कराने की साजिश कर रहे थे और इनमें एक मसूद अहमद नाम का युवक PFI का मास्टरमाइंड है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशभर में हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया शामिल था।

मसूद अहमद के बारे में मौजूदा जानकारी के अनुसार, वह बहराइच जिले के जरवल रोड के मोहल्ला बैरा काजी का रहने वाला है और दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एलएलबी का छात्र है। इसके अलावा, जामिया का यह छात्र मसूद अहमद 2 साल पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की स्टूडेंट विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से जुड़ा था।

बता दें कि पीएफआई सदस्यों में बहराइच निवासी मसूद अहमद के शामिल होने की सूचना पाते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक बहराइच पुलिस का कहना है कि ये इलाका इंडो-नेपाल सीमा से सटा हुआ है और पिछले कुछ समय में पीएफआई से जुड़े कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस ने पकड़े गए लोगों के पास से हाथरस कांड से जुड़ा भड़काऊ लिटरेचर भी बरामद किया है और इनके मोबाइल, लैपटॉप जब्त किए गए हैं। ऐसे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यूपी और देश के भीतर जातीय और सांप्रदायिक दंगे फैलाने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर पीएफआई की क्या गतिविधियाँ चल रही हैं?

इसके अलावा पुलिस ने यह भी बताया है कि पूरे मामले में विदेशी फंडिग की बात की जा रही है। इसलिए इस कोण के साथ भी जाँच चल रही है। पुलिस ने कहा है कि अगर आगे जरूरत पड़ी तो जाँच एजेंसियों का सहारा लेकर भी मामले की तह तक पहुँचा जाएगा।

पुलिस ने पीएफआई जैसे संगठनों को सांप्रदायिक तनाव फैलाने और समाज में तोड़ने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान भी इस संगठन से जुड़़े लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि हाथरस मामले में पुलिस ने चंदपा थाने में जाति आधारित संघर्ष की साजिश रचने और सरकार की छवि को बिगाड़ने के प्रयास के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। प्रदेश भर में अब तक इस बाबत 21 मामले दर्ज हो चुके हैं।

एडिशनल डीजीपी (कानून-व्‍यवस्‍था) प्रशांत कुमार के मुताबिक, हाथरस मामले में जिले के विभिन्‍न थाना क्षेत्रों में दर्ज 6 मुकदमों के अलावा सोशल मीडिया के विभिन्‍न प्‍लेटफार्म पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी को लेकर बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्‍या, लखनऊ आयुक्तालय में कुल 13 मामले दर्ज किए गए हैं।

जब छपरा जेल के 1300 कैदियों ने कर लिया था कारागार पर कब्जा: कहानी लालू-राबड़ी युग के ‘जंगलराज’ की

बिहार में लालू-राबड़ी युग के जंगलराज की एक से बढ़ कर एक कहानियाँ हैं। इनमें से एक है छपरा जेल काण्ड। जी हाँ, जेल में रहने वाले कैदियों ने ही जेल पर कब्जा कर लिया था। तब छपरा के एसपी रहे कुंदन कृष्णन आज बिहार के एडीजी हैं। 2002 में हुए छपरा जेल काण्ड के बारे में हम विस्तृत रूप से आगे बात करेंगे लेकिन उससे पहले हमें इस स्थान और यहाँ अपराधियों के बर्चस्व की कहानी को समझना पड़ेगा।

घाघरा और गंगा नदी के मुहाने पर बसा छपरा शहर बिहार के सारण जिले का मुख्यालय है। आज भले ही छपरा विकास के रास्ते पर अग्रसर हो और यहाँ बिहार का पहला डबल-डेकर फ्लाईओवर बन रहा हो लेकिन 2005 से पहले ऐसा नहीं था। ये भोजपुरी सम्राट भिखारी ठाकुर और संगीतकार चित्रगुप्त (जिनके बेटे आनंद-मिलिंद हैं) के बेटे की भूमि है, जिसने बिहार को उसका 10वाँ मुख्यमंत्री दिया – दरोगा प्रसाद राय।

छपरा: राजनीतिक रूप से बहुचर्चित क्षेत्र की कहानी

छपरा के राजनीतिक महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने अपना पहला लोकसभा चुनाव इसी सीट से लड़ा था। 1977 में वो यहाँ से जीत कर सांसद बने और इस कारनामे को 1989 और 2004 में दोहराया। 2009 में लालू यादव फिर से यहाँ से जीते (सारण लोक सभा) और संसद पहुँचे। लेकिन, यही वो क्षेत्र है जहाँ से 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हार मिली।

छपरा के दरोगा प्रसाद राय बिहार के मुख्यमंत्री बने और उनकी पोती ऐश्वर्या राय की शादी लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप से हुई। हालाँकि, ये रिश्ता नहीं चल पाया और दोनों अलग-अलग हो गए। अब स्थिति ये है कि इसी जिले की किसी विधानसभा सीट से तेज प्रताप भी चुनाव लड़ने वाले हैं और ऐश्वर्या के भी यहीं से लड़ने की ख़बरें उड़ रही हैं। उनके पिता चन्द्रिका राय जदयू में शामिल हो चुके हैं।

जहाँ तक छपरा मंडल कारा की बात है, यहाँ आए दिन होने वाली पुलिस की छापेमारी में कैदियों के पास से कई ऐसी चीजें बरामद होती रहती हैं, जिन्हें जेल में रखने की अनुमति नहीं है। इस जेल में बंदियों द्वारा मोबाइल फोन का प्रयोग करने की सूचनाएँ अक्सर मिलती रहती हैं, ऐसा प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं। खुद डीएम-एसपी कई बार कमान संभालते हैं और यहाँ तालशी अभियान चलाते हैं।

हाल ही में एक कैदी ने छपरा जेल में भी धूमधाम से अपने जन्मदिन की पार्टी मनाई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुईं। जेल में न सिर्फ जन्मदिन की पार्टी मनाया गया बल्कि पूरी पार्टी का वीडियो इंस्टाग्राम पर भी अपलोड कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद एसपी ने जाँच कमिटी बना कर इतिश्री कर ली। इसी से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस इलाक़े में जब कैदी ऐसे हैं तो अपराधी कितने बेख़ौफ़ होंगे।

छपरा मंडल कारा: जब जेल पर 4 दिनों तक रहा था कैदियों का कब्जा

2002 में छपरा जेल में रहने वाले कैदियों ने ही जेल पर कब्जा कर लिया, जिसकी सुनवाई अब तक चली आ रही है। 2017 के जून में ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी की गई थी। कैदियों ने न सिर्फ पुलिस पर पत्थरबाजी की थी बल्कि जम कर फायरिंग भी की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से 50 के क़रीब गवाहों की गवाही हुई। ये घटना 2002 के होली की है, जब कैदी स्थानांतरण और जेल में मुलाकात के नियमों को लेकर आक्रोशित थे।

और जब पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई कर के जेल को कैदियों के चंगुल से छुड़ाया तो इस प्रकरण में 5 कैदी मारे गए। मार्च 30, 2002 को इस जेल को कैदियों के कब्जे से आज़ाद कराया गया। पटना से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित छपरा में हुए इस जेल कांड की चर्चा तब पूरे देश में हुई थी। जेल को आज़ाद कराने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ का सहारा लिया गया। कुल 1200 ऐसे कैदी थे, जिन्होंने जेल पर कब्जा जमा रखा था।

दरअसल, ये सब शुरू हुआ था राबड़ी देवी की सरकार के उस निर्णय से, जिसके हिसाब से छपरा जेल से 5 हार्डकोर अपराधियों को कहीं और स्थानांतरित किया जाना था। इनमें वकील राय, संजय राय और अशोक उपाध्याय नामक कैदियों के भी नाम थे। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में ये तीनों ही कैदी मारे गए। इन दोनों के अलावा शशि सिंह और संजय साह नामक दो अन्य कैदी भी मारे गए। सारण के एसपी कुंदन कृष्णन ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया था।

कैदी इतने आक्रामक थे कि उन्होंने ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया था और इसमें एसपी कृष्णन का हाथ भी फ्रैक्चर हो गया था। ये सब कुछ तब शुरू हुआ, जब अधिकारियों की टीम कैदियों के स्थानांतरण के लिए उन्हें लेने पहुँची। इनमें से तीन कैदियों को बक्सर जेल में ले जाया जाना था और दो कैदियों को भागलपुर जेल में स्थानांतरित करना था। जैसे ही टीम वहाँ पहुँची, कैदियों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया।’

असल में कैदियों को डर था कि स्थानांतरण के समय फेक एनकाउंटर के बहाने उन्हें मार डाला जा सकता है। बिहार में उस वक़्त इस तरह की चीजें आम बात थीं। आक्रोशित कैदियों ने अधिकारियों को बाहर निकाल कर भगा दिया और जेल को भीतर से बंद कर लिया। एक तरह से उन्होंने जेल को ही ‘हाईजैक’ कर लिया था। इसके अगले ही दिन कैदियों ने जेल की छत पर चढ़ कर नारेबाजी शुरू कर दी।

उनकी माँग थी कि या तो बिहार की मुख्यमंत्री उनसे मिलने आए या फिर आईजी (प्रिजन्स) उनसे मुलाकात करें क्योंकि उन्हें जिला स्तर के अधिकारियों पर जरा भी भरोसा नहीं है। इसके बाद उन्होंने जेल के बाहर कैम्प कर रहे पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर बरसाए। महराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह ने वहाँ पहुँच कर कैदियों से बातचीत का प्रयास किया लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ।

अगले ही दिन कुछ कैदियों के रिश्तेदार खाने-पीने की चीजें लेकर जेल में मिलने पहुँचे लेकिन पुलिस ने उनलोगों को अंदर नहीं जाने दिया। इसके बाद कैदी फिर से उखड़ गए और पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सीआरपीएफ और बीएमपी के जवानों ने बिहार पुलिस के साथ मिल कर सीढियाँ लगा कर छत पर चढ़ना शुरू किया। 30 मार्च के दिन ही दोपहर 2:30 बजे जेल को कब्जे से छुड़ाने की कार्रवाई शुरू की गई।

मार्च 30, 2002: जब छपरा जेल को कब्जे से छुड़ाया गया

कुंदन कृष्णन को छपरा की कमान तब दी गई थी, जब वहाँ अपराध चरम पर था और वो ज़माना ऐसा था, जब जेल को ही अपराधी ‘सेफ हैवेन’ मानते थे और भीतर बैठ कर बड़े-बड़े आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते थे। दिक्कत ये थी कि जेल का फाटक भीतर से बंद था और चाभी कैदियों के पास थी। राजनेताओं के दाँव भी फेल हो गए थे, ऐसे में बलप्रयोग ही अब आखिरी रास्ता बचा हुआ था।

इस पूरी घटना में 5 कैदियों की मौत हो गई और कई घायल भी हुए, जिनका इलाज छपरा के सदर अस्पताल में हुआ। एसपी कृष्णन ने अपना काम किया और फिर कहा था कि अब जेल प्रशासन के ऊपर है कि वो आगे की कार्रवाई करे। घायलों की स्थिति अच्छी-खासी गंभीर थी। ऑपरेशन ख़त्म होते ही जेल का ताला खोला गया और अधिकारियों ने अंदर जाकर चार्ज लिया। अंत में लाउडस्पीकर से सभी कैदियों को अपने-अपने वार्ड से निकल कर आत्मसमर्पण करने को कहा गया और उन्होंने ऐसा ही किया।

कैदियों ने इस मुठभेड़ के दौरान पुलिस से भी ज्यादा राउंड फायरिंग की थी। ये पूरा मामला इसीलिए भी भड़का क्योंकि राज्य सरकार ने भी काफी लापरवाही की थी। जिस छपरा जेल में मात्र 500 कैदियों की क्षमता थी, उसमें 1300 कैदी ठूँस कर रखे गए थे। साथ ही कैदियों के पास से कई लाठी-डंडे, पिस्तौल और सेलफोन्स जब्त किए गए। ऐसा नहीं है कि छपरा जेल पहली बार चर्चा में आया था।

अक्टूबर 2001 में छपरा जेल में ही दो कैदियों को मार डाला गया था। इस मामले में मृत कैदियों के परिजनों ने जेल के अधिकारियों के खिलाफ ही मामला दर्ज कराया था। इस ऑपरेशन में मारे गए एक कैदी शशि सिंह का दावा था कि वो उन कैदियों की हत्या का गवाह था। इसीलिए, इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से भी कई सवालों के जवाब लोगों को चाहिए थे, जो अब शायद ही कभी मिल पाएँ।

नितीश कुमार होंगे NDA का चेहरा: JDU- 121, BJP- 121 पर लड़ेगी चुनाव, HAM को अपने हिस्से से सीटें देगी JDU

बिहार में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन की ओर से सीट बँटवारे का ऐलान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि जेडीयू इस बार 122 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बीजेपी के खाते में 121 सीटें गई हैं। वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) HAM को 7 सीटें दी गई हैं। वहीं बीजेपी अपने कोटे से मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को सीट देंगे।

एनडीए के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के पूर्व के एक संक्षिप्त बयान में बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जयसवाल ने साफ़ कहा कि NDA गठबंधन में वही रहेंगे जो नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं। संजय जयसवाल ने कहा कि बिहार में एनडीए के नेता नीतीश कुमार हैं और गठबंधन में चुनाव नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व को बिहार में भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह स्वीकार करती है।

इस दौरान नीतीश कुमार ने विपक्षी पार्टी खास तौर से आरजेडी पर जमकर निशाना साधा। पटना में बीजेपी-जेडीयू की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने फिर कहा कि नीतीश कुमार ही एनडीए के नेता हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा, “सीटों की सूची भी रिलीज कर दी जाएगी। हम लोग बिहार के विकास के लिए काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। बहुत सारे लोगों के द्वारा बेवजह बहुत बातें की जाती हैं मैं उन्हें मैं महत्व नहीं देता हूँ। हमसे पहले भी 15 साल दूसरे लोगों को मौका मिला, कहाँ कोई विकास का काम हुआ, क्या हालत थी बिहार की। हमने हमेशा कहा न्याय के साथ विकास। हमारे मन में कोई गलतफहमी नहीं है। बिहार को आगे बढ़ाना है, यही हमारा लक्ष्य है।”

सीएम नीतीश कुमार ने आगे कहा, “जनता मालिक है वो तय करेंगे। हमलोग बीजेपी के साथ हैं। हमलोग मिलकर काम करेंगे। किसी को अगर कुछ कहने से आनंद मिलता है कहें,हमें कोई फर्क नही पड़ता। हमलोगों के मन ने कोई कंफ्यूजन नहीं है। निर्णय लेने में थोड़ा विलम्ब किया, मगर अब सब साफ हो गया है। कुछ लोग होते हैं कुछ बोलेंगे उनका स्वभाव होता है।”

बिहार विधानसभा चुनाव में महज कुछ दिन बचे हैं। एनडीए से अलग होने के बाद बीजेपी और जेडीयू कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे साफ हो गया है। बीजेपी और जेडीयू के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि एनडीए के नेता नीतीश कुमार ही रहेंगे और उन्ही के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल ने कहा कि बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी नीतीश कुमार के साथ पूरे बिहार का विकास हुआ है। 15 साल में एनडीए सरकार ने बदहाल बिहार को खुशहाल बिहार बनाया है। जेडीयू से हमारा अटूट बंधन है। लोजपा नेता रामविलास का सम्मान करते हैं। मगर बिहार में NDA के नेता नीतीश कुमार हैं और रहेंगे।

बीजेपी ने उम्मीदवारों की लिस्ट को लेकर भी चर्चा पूरी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार कैंडिडेट्स की लिस्ट में बड़ा सरप्राइज देने की तैयारी कर रही है। पार्टी इस बार पाँच से छ: मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। यही नहीं मौजूदा विधायकों के किसी करीबी और रिश्तेदार को भी टिकट नहीं देने पर विचार भी पार्टी कर रही है।

राहुल-प्रियंका के ठहाके वाले वीडियो के बचाव में इंडिया टुडे ने फर्जी ‘फैक्ट चेक’ कर की क्लीन चिट देने की कोशिश

हाथरस मामले पर हो रही राजनीति के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को कार से हाथरस जाते हुए देखा जा सकता है, जहाँ वह कथित तौर पर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए जा रहे थे। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता के ठहाके की आवाज सुनाई देती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की काफी आलोचना की गई, जो कि इंडिया टुडे को रास नहीं आया और मीडिया चैनल ने इसका ‘फैक्ट-चेक’ कर डाला। मीडिया चैनल ने दावा किया कि वीडियो को बहुत सारे कॉन्ग्रेसी नेताओं ने ठहाके वाली आवाज के साथ शेयर किया। India Today ने इस बात से इनकार नहीं किया कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा, दोनों ही कार में सबसे आगे बैठे हैं, लेकिन उनका कहना है कि चूँकि दोनों के चेहरे नहीं दिख रहे थे इसलिए यह नहीं बताया जा सकता है कि कौन हँस रहा है।

वीडियो को कॉन्ग्रेस पार्टी एनएसयूआई के छात्रसंघ के ट्विटर प्रोफाइल से ठहाके वाली आवाज के साथ शेयर किया गया था।

वीडियो को भारतीय युवा कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा रघुवंशी ने भी शेयर किया।

अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं ने इस वीडियो का छोटा सा हिस्सा शेयर किया, जिसमें ठहाके की आवाज सुनाई नहीं दे रही है।

हालाँकि इंडिया टुडे वायरल हुए वीडियो का बिना ठहाके वाला वर्जन प्रस्तुत नहीं कर सका। कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा शेयर किया वीडियो एडिटेड है। यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो से छोटा है। इसमें ठहाके वाली आवााज वाला हिस्सा हटाकर शेयर किया गया है। वायरल वीडियो को ध्यान से सुनने पर साफ पता चलता है कि यह प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी की आवाज है। और जब कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा इसे शेयर किया गया है, तो फिर इसकी प्रमाणिकता पर संदेह करने के लिए शायद ही कुछ बचा हो।

इसके अलावा, गाँधी भाई-बहनों को क्लीन चिट देने के लिए, इंडिया टुडे ने भ्रामक ’फैक्ट-चेक’ किया।

इंडिया टुडे ने 2019 के आम चुनावों से पहले ली गई एक तस्वीर शेयर की, जहाँ गाँधी भाई-बहन मुस्कुरा रहे हैं और कैमरे के लिए पोज दे रहे हैं। इंडिया टुडे ‘फैक्ट-चेक’ करते हुए यह दावा कर रहा है कि ‘ठहाके वाला वीडियो’ ‘भ्रामक’ था। इंडिया टुडे ने दो अलग-अलग घटनाओं को गलत तरीके से इस्तेमाल किया और गाँधी भाई-बहनों को क्लीन चिट देने के लिए शेयर हो रहे ठहाके वाले वीडियो को आसानी से नजरअंदाज कर दिया।

राहुल गाँधी के साथ मंच पर मौजूद पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना +ve: संगरूर रैली में शामिल कई नेताओं के जद में आने की आशंका

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पंजाब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को संगरूर में ट्रैक्टर रैली के दौरान नजर आने वाले प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

राहुल गाँधी की रैली के दौरान वह स्टेज सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे। इस दौरान कई दफा वह प्रदेश सीएम अमरिंदर सिंह व पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत कई नेताओं के संपर्क में आए थे।

आज कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे। उन्हें बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत थी।

मंगलवार को जब उन्होंने अधिक परेशानी बढ़ने पर कोरोना टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्होंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया। अब उनके संपर्क में आए सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किया जाएगा।

बता दें कि बलबीर सिद्धू ने सोमवार को संगरूर में खेती बचाओ रैली में भाग लिया था। राहुल गाँधी वहाँ नए किसान कानूनों के विरोध में अपनी रैली कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने सोमवार को अपनी रैली में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन कृषि कानूनों से ‘किसानों और मजदूरों को वैसे ही खत्म’ कर रहे हैं जैसे उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी से छोटे दुकानदारों को ‘बर्बाद’ कर दिया था। वहाँ उन्होंने चीन के मुद्दे को उठाते हुए यह भी कहा था कि भारतीय सैनिकों पर हमला चीन के फौजियों ने इसलिए किया क्योंकि प्रधानमंत्री ने देश को कमजोर बना दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस समय पंजाब में कोरोना संक्रमण के 1,19,186 मामले सामने आए हैं। इनमें से करीब 1,02,648 लोग ठीक हो चुके हैं और 3,641 लोगों की अब तक मौत हुई है। वहीं पूरे भारत की यदि बात करें तो देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 66,85,082 हो गए हैं। वहीं 884 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,03,569 हो गई है। इसके अलावा देश में कोरोना के 9,19,023 मरीजों का इलाज जारी है और 56,62,490 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं

नर्क से भी बड़ी यातना: चित्रगुप्त ने उस जीव को एक ढपली दी, ‘आजादीईईई’ का नारा दिया… मगर टिकट नहीं दी

“इन्साफ? आखिर कहाँ है इन्साफ?”, “तुम सब जिम्मेदार हो! क्या एक गरीब-मजलूम का न्याय पर कोई हक़ नहीं?” बाहर से तेज आवाजें आ रही थीं। वैसे तो यमपुरी में दफ्तर की सबसे ऊँची मंजिल का कोने वाला बड़ा केबिन यमराज को सदियों से मिला हुआ था, लेकिन सबसे नीचे के फ्लोर पर चल रही इस चीख-पुकार की आवाज, उनके ना चाहते हुए भी उनके कमरे तक आ ही जाती थी।

ऐसा लग रहा था कि दर्जन भर यमदूत किसी आत्मा से उठा पटक में लगे हुए हैं। बलशाली, दिव्य शक्तियों से लिसे उनके यमदूतों के लिए पापी से पापी, ज़ेवियर्स जैसी, खुद को संत घोषित करने वाली आत्माओं को भी नरक में पटकना चुटकियों का खेल था। फिर ये कौन था जो यमराज के दफ्तर में ही यमदूतों को धोबी-पछाड़ दिए जा रहा था?

चित्रगुप्त के भेजे डैशबोर्ड में जन्म-मृत्यु का हिसाब भी सही सेट नहीं हुआ था और यमराज पहले ही खीजे हुए थे। चिढ़े हुए यमराज अपने केबिन से बाहर निकले और दहाड़े, “क्या मजाक बना रखा है? ये दफ्तर है या कोई मछली बाजार?” चित्रगुप्त घबराए, मगर जब उन्हें दिखा कि ये डाँट उन्हें नहीं नीचे के किन्हीं कर्मचारियों को पड़ रही है, तो वो भी मौके का फायदा उठाकर अधिनस्तों पर धौंस जमाने यमराज के पीछे लपक लिए।

यमराज का पीछा करना बेचारे दुबले-पतले चित्रगुप्त के लिए कोई हँसी खेल न था। कोविड-19 के दौर में वर्क फ्रॉम होम करते जो वजन बढ़ गया था उसे नियंत्रित करने के लिए यमराज आजकल सीढ़ियों से चढ़ते उतरते थे।

पतले दुबले चित्रगुप्त को लगा कि उसके लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल जरूरी नहीं। फिर दौड़कर यमराज को पकड़ लेना भी कोई हँसी खेल नहीं था। सदियों में एकमात्र सावित्री ऐसा कर पाई थी, मगर वो तो स्त्री थी, वो कुछ भी कर सकती है, चित्रगुप्त ने सोचा और लिफ्ट में घुस लिए।

निचली मंजिल पर अफरा-तफरी मची थी। कई मेज-कुर्सियाँ उल्टी पड़ी थीं और एक लाल कमीज और कमर से खतरनाक स्तर तक फिसल चुकी जीन्स पहने कोई जवानी के बीते दिनों तक पहुँचा युवक, एक हाथ उठाए, आँखे बंद किए गला फाड़ कर चीख रहा था – “आजादीईईई! हमें क्या चैये – आजादी! अरे ले के रहेंगे – आजादीईईई” यमदूतों में कोई जमीन पर औंधा पड़ा था तो कोई इस उत्पाती आत्मा को बाँधने के लिए जैसे तैसे दिव्य शक्तियों के संधान में जुटा था।

लिफ्ट से भाग कर निकलते चित्रगुप्त और आँखें लाल किए, हाँफते हुए, सीढ़ियों से पहुँचे यमराज को देखकर यमदूतों को लगा बैकअप फ़ोर्स आई है। “कौन है ये जो इतना बवाल काट रहा है?” कहते कहते यमराज ने कमर पर टंगा यमपाश उतारा और शोर मचा रहे अधेड़ युवक की आत्मा को बाँधकर मेज से नीचे घसीट लिया। उसका गिरना था कि यमदूत उस पर टूट पड़े। दिव्य शक्तियों का संधान छोड़ जूते-चप्पल, लप्पड़-थप्पड़ जिसे जो मिला उसने उसी से मरम्मत शुरू कर दी। “बस करो मूर्खों, इधर लाओ उसे”, यम दोबारा चीखे।

हंगामा कुछ शांत हुआ और जब तक उसे यमराज के सामने पेश किया गया, तब तक किसी ने उसका मुँह मोबिल से काला कर डाला था। जोरदार पिटाई होते ही शौचालय में की जाने योग्य हरकतें भी उसने वहीं कर डाली थी। नाक सिकोड़ते हुए यमराज ने अपना उत्तरीय मुँह पर रखा और हिकारत भरी नजर से उसकी और भी नीचे फिसल गई गीली जीन्स को देखा।

चित्रगुप्त बोले, “आखिर कौन है ये दुष्ट और इसने उत्पात क्यों मचा रखा है।“ “उत्पात मचाने की इसकी शुरू से ही आदत रही है महाराज! धरती पर तो ये ‘टुकड़े होंगे’ के नारे लगाकर देश तोड़ने तक की बातें किया करता था”, एक यमदूत बोला। “ठीक है-ठीक है, मगर ये यमलोक में हंगामा क्यों खड़ा कर रहा है? कौन लाया है इसे?” “लाया नहीं गया महाराज, ये तो खुद ही घुसपैठ करके यमपुरी में प्रवेश कर रहा था, हम तो रोक रहे हैं इसे!” एक दूसरे यमदूत ने बताया।

“खुद ही घुसा चला आ रहा था!” चौंककर चित्रगुप्त ने यमराज की ओर देखा और बोले, “मैं अभी इसका बही-खाता देखता हूँ महाराज”, और कहते-कहते ही अपना टैब हवा में प्रकट कर लिया। पिटकर हलकान हुए व्यक्ति को अब कुछ होश आ रहा था और उसने इधर उधर देखना शुरू किया।

“ये तो एक पहुँचा हुआ नौटंकीबाज है महाराज!” चित्रगुप्त बही-खाते का हिसाब देखकर चीखे। “हस्तिनापुर जो कि अब दिल्ली-एनसीआर नाम से जानी जाती है, वहाँ के एक कंजड़ी ‘छोटा आदमी’ के बाद बेतुके बवाल करने में ये दूसरे नंबर पर था”, चित्रगुप्त ने आगे जोड़ा।

“काम के नाम पर ये ‘तैयारी’ किया करता था, और जिस उम्र में लोग मेहनत-मजदूरी से कमाने लगते हैं, उस उम्र में ये जनता के करों से बने हॉस्टल में पलता रहा। उसके बाद इसने एक आयातित विचारधारा के साथ चुनाव भी लड़ा था और फिर पार्टी को उस चुनाव में हुए खर्चे का हिसाब भी नहीं दिया। इसके मित्रों पर मृतकों के नाम पर चंदा वसूलकर दावतें उड़ाने के भी अभियोग रहे हैं।” चित्रगुप्त के पास उसके अपराधों की लम्बी लिस्ट थी।

“वो सब तो ठीक है, मगर ये यमपुरी कैसे पहुँचा? आयु कितनी है इसकी?” यमराज सीधे काम की बात पर आए। जितनी जल्दी ये बवाल निपटता वो घर की ओर निकल पाते, वैसे भी गृह-स्वामिनी ने आज मशरूम लेकर आने का आदेश दिया हुआ था। उसके साथ फ्रोजेन मटर ना ले जाने पर ‘तुम जरा सा भी दिमाग नहीं लगाते, क्या सिर्फ मशरूम की सब्जी बनेगी’, वाला भाषण सुनने का खतरा था, और जो लेकर जाते तो ‘पहले से ही फ्रिज में पड़ा था, अगर मुझे मँगाना होता तो वो भी व्हाट्स एप्प किया होता’ की डाँट पड़ सकती थी।

आगे कुआँ, पीछे खाई की स्थिति में फँसे यमराज इस घुसपैठिया आत्मा का का किस्सा जल्दी निपटाना चाहते थे। “आयु तो शेष है महाराज, उँगलियों पर हिसाब जोड़कर चित्रगुप्त ने कहा, जरूर ये आत्महत्या के प्रयास का मामला है!” उनकी बात पूरी ख़त्म भी नहीं हुई थी कि बंधे हुए युवक के अंग विशेष पर एक यमदूत ने लात जड़ दी। “कोई आत्महत्या के प्रयास का मामला नहीं महाराज”, वो चीखा!

“ये आत्मा इसी यमदूत के बीट एरिया की है महाराज, इससे अन्दर का मामला पता चल जाएगा”, चित्रगुप्त बोले। यमराज ने उसे आगे आने का इशारा दिया। “इसने जानबूझकर कम नशे की गोलियाँ खाई हैं महाराज”, यमदूत बोला। “ये पहले से ही नशे का अभ्यस्त है, पतली सिगरेट को वीड और मोटी सिगरेट को हैश बुलाने वाली ताड़का तो इसके पुराने हंगामों की ख़बरों में इसके बगल में ही दिख जाएगी!”

यमदूत के पास अपनी बात सिद्ध करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में लिंक और स्क्रीनशॉट भी थे। “कितने नशे पर ये मरेगा नहीं, बीच में लटका रहेगा और आत्महत्या के प्रयास की सहानुभूति भी बटोर लेगा, ये इसे अच्छी तरह पता है। ये बीच में लटका था जब यमदूत सुट्टा ब्रेक पर गए और प्रहरियों के कम होते ही ये यमपुरी में घुसने का प्रयास करने लगा। इसे बीच में लटका देखकर ही मुझे इसकी नियत पर शक हुआ था, और मैंने मोशन सेंसर ऑन कर दिए थे, इसके घुसपैठ करते ही अलार्म बज गया और ये पकड़ा गया।” यमदूत ने अपनी बात पूरी की।

“ठीक है, मगर फिर भी एक बार इससे पूछ लेते हैं, हमें दूसरे पक्ष की बात भी सुननी चाहिए महाराज”, चित्रगुप्त ने निवेदन किया। “हम्म, कहो, तुम्हें अपने पक्ष में क्या कहना है?” यमराज ने कड़ककर कहा। उनके इशारे पर तब तक एक दूसरा यमदूत नरक की आग की आँच तेज करने में जुट गया था, कुछ दूसरे तलने वाला कड़ाह और तेल भी ले आए थे।

पिटाई से टूटा हुआ युवक तैयारियाँ देखकर सुबका, “वो मुझे बहुत पसंद थी यमराज!” पहले ही वाक्य में सबको समझ आ गया कि मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग का है। सहानुभूति में चित्रगुप्त ने सर हिलाया और यमदूतों की पकड़ भी कुछ ढीली पड़ी। यमराज ने अपना पाश वापस खींच लिया। “मैं उसे रोजाना चिट्ठियाँ लिखा करता था”, उसने बताया।

“चिट्ठियां! #लाखोलपिला_क्वार्टर! व्हाट्स एप्प, और ईमेल के दौर में ये पढ़ा लिखा आदमी स्नेल-मेल भेज रहा था?” एक यमदूत बोल पड़ा। क्वार्टर कि बात सुनकर चित्रगुप्त ने आँखें तरेरी और यमराज की ओर आँखों से इशारा किया। यमदूत सकपका कर चुप हो गया।

“मगर जब दौर फ़ोन, मेसेज, व्हाट्स एप्प वगैरह का है ही तो तुम चिट्ठियाँ क्यों लिख रहे थे?” चित्रगुप्त ने जानना चाह। “वो क्या है कि मैं रोज व्हाट्स एप्प यूनिवर्सिटी कहकर देश की आम बहुसंख्यक आबादी का मजाक जो उड़ाता था! खुद ही व्हाट्स एप्प के जरिए प्रेम कैसे शुरू करता?” लाल कमीज वाले ने कहा।

“खैर, फिर क्या हुआ?” यमराज ने जल्दी किस्सा खत्म करवाने के लिए पूछा। “महाराज मैं चाँद-तारे तोड़कर लाने, गहने-जेवर दिलाने जैसे बुर्जुआ वादे भी नहीं करता था”, उसने बात जारी रखी। “बुर्जुआ”, नया शब्द सुनकर यम फुसफुसाए, “जाने दें महाराज, जुमला है, किस्सा सुन लें जल्दी”, चित्रगुप्त ने जवाब दिया। “कोने के ठेले की पापड़ी चाट, नत्थू हलवाई के समोसे-जलेबी से लेकर चुनमुन के खोमचे के गोलगप्पे तक के वादे किए थे मैंने”, वो बोलता रहा।

“फिर क्या हुआ?” चित्रगुप्त ने उकसाया। “होना क्या था, जो चिट्ठियाँ पहुँचाने जाता था, उसने चिट्ठियां खोलकर पढ़ने की आजादी ले ली!” उसने जीन्स को वापस थोड़ा ऊपर खींचते हुए कहा। “मैं आज जो चिट्ठी में वादा करता, अगले ही दिन वो कासिद वही चीज़ चिट्ठी के साथ लिए पहुँच जाता”। अब सुनने वालों को अंदाजा हो चला कि क्या हुआ होगा।

“मतलब तुम्हारी चिट्ठियाँ पहुँचाते-पहुँचाते डाकिए ने ही तुम्हारी माशूका फँसा ली! यही ना?” चित्रगुप्त ने पटाक्षेप किया। चित्रगुप्त की बात सुनते ही दोनों हाथ ऊपर उठाकर उसने दारुण स्वर में विलाप किया और पछाड़ मारकर जमीन पर लोटने लगा।

“अब आप ही फैसला कीजिए महाराज”, चित्रगुप्त बोले। युवक की मूर्खता पर अब यमदूतों को भी हँसी आ रही थी। “अरे मूर्ख, तूने बस वादे किए, उन्हें पूरा तो वो डाकिया करता रहा। ऐसे में लड़की चिट्ठियों के साथ चाट-समोसे पहुँचाने वाले के साथ नहीं जाती तो क्या तेरे झूठे वादे पढ़ती रहती?” यमराज ने सर पीटते हुए कहा।

“इस मूर्ख उत्पाती को अब कड़ाहे में तल देते हैं महाराज”, अब तक यमदूतों ने तेल भी खौला लिया था। “यमलोक की मामूली सजाएँ इस गधे के लिए प्रयाप्त नहीं होंगी। जरूर किसी क्लेरिकल एरर की वजह से इसे उल्लू-गधे के बदले मानवीय शरीर मिल गया है”, यमराज ने चित्रगुप्त की तरफ देखकर पूछा।

खुद को मामले में फँसता देखकर चित्रगुप्त ने जल्दी मामला निपटाना चाहा, “इसे वापस दिल्ली में फेंक देते हैं महाराज। मैं टिकट पाने वालों की पार्टी की पहली लिस्ट से इसका नाम काट देता हूँ। धरती पर जाकर ये दूसरे सिर्फ वादा करने वालों को सत्ता का इन्तजार करते और फासीवादी कहलाने वालों को वादे पूरे करके सत्ता का सुख भोगते देखकर जलेगा। कड़ाहे में तलना इसके लिए प्रयाप्त नहीं”, चित्रगुप्त ने जल्दी जल्दी कहा।

“हाँ, वैसे भी अपनी माशूका को किसी और की बाहों में देखकर जलने जैसा दर्द हमारे नरक में भी नहीं दिया जा सकता”, यमराज ने उसे वापस दिल्ली में फेंकने का इशारा करते हुए कहा और मुड़कर वापस सीढ़ियों की तरफ चल पड़े।

उत्पाती युवक को पता था कि नीचे उन्हीं की सरकार है जिन्हें कोसने में उसने पिछले 5 साल बिताए हैं। अगले कई वर्षों तक भी यही व्यवस्था रहने वाली थी, ये भी उसे मालूम था। कठिन दंड से घबराकर उसने छूटना चाहा मगर अब तक यमदूत संभल चुके थे। छटपटाते जीव को वापस दिल्ली में पड़े उसके शरीर में फेंक दिया गया।

केरल: लॉकडाउन के दौरान बढ़े चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले, DYFI नेता इसा रियाज समेत 41 लोग गिरफ्तार

केरल में बढ़ रहे चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों का खुलासा करते हुए प्रदेश पुलिस की साइबर विंग ने सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को DYFI (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) नेता इसा रियाज (Easa Riyaz) समेत 41 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें कई आइटी प्रोफेशनल भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने छोटे बच्चों की नग्न तस्वीरें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की।

प्रदेश के एडिशनल डीजीपी मनोज अब्राहम ने बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में उन्होंने 268 मामले दर्ज किए हैं। गिरफ्तार हुए लोगों पर ऐसी सामग्री अपलोड, डाउनलोड और उन्हें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने का आरोप है। इन लोगों के पास से पुलिस ने कई इलेक्ट्रानिक डिवाइस और फोन भी जब्त किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल पुलिस ने अपने इस ऑनलाइन ऑपरेशन को ‘P Hunt 20.2’ का नाम दिया था। इसी ऑपरेशन के तहत यह 41 लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस ने बताया कि ये लोग चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री को अपलोड और सर्कुलेट करने के लिए इनक्रिप्टिड अकाउंट का इस्तेमाल करते थे। पुलिस को इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और फोन मिले।

एडिशनल डीजीपी मनोज अब्राहम इस संबंध में बताते हैं कि आरोपितों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी ‘साइबरडोम’ (Cyberdome- साइबर पुलिस के स्पेशल विंग), इंटरपोल और अन्य एजेंसियों की मदद से की गई है। पुलिस का कहना है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधी बरामद सामग्री में अधिकांश बच्चे 6 से 15 उम्र के शामिल हैं।

इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी पाया है कि कुछ आरोपितों ने अपने फोन को लगातार फॉरमेट किया ताकि उन पर किसी की नजर न पड़े। साथ ही बच्चे की जानकारी चुराने के लिए ‘मालवेयर’ का इस्तेमाल करके पीड़ित का वेबकैम भी चालू किया गया।

साइबर क्राइम में विशेष अधिकारी के तौर पर तैनात मनोज अब्राहम कहते हैं, “महामारी के दौरान स्वास्थ्य के अलावा जिसके ऊपर सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है वो है- ऑनलाइन क्राइम। लॉकडाउन में डिजिटल इस्तेमाल में काफी बढ़ोत्तरी हुई है और इसी के साथ पोर्नोग्राफी खासकर चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले बढ़े हैं। कई लोग यह सोचते हैं कि रात के अंधेरे में वो जो कुछ भी नेट पर सर्च करते हैं उस पर किसी की नजर नहीं है, लेकिन ये उनकी भूल है।” अब्राहम के अनुसार कई केसों में देखा गया कि ऐसे लोग बीमार होते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत होती है क्योंकि वह बार-बार वही अपराध दोहराते हैं।

बता दें कि हमारे देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधी तस्वीरें, वीडियो और साहित्य देखना, उसे शेयर करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वाले को पाँच साल की जेल और अधिकतम 10 लाख का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

हाथरस की एक और बेटी ने तोड़ा दम: 6 साल की मासूम बच्ची से हुआ था रेप, इगलास SO सस्पेंड

हाथरस की एक और बेटी की दुष्कर्म के बाद मौत हो गई है। 6 साल की मासूम बच्ची ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मामला सादाबाद क्षेत्र का है। पीड़िता की मौसी के ही बेटे पर ही रेप का आरोप है। बच्ची की मौत के बाद शव के साथ परिजनों ने सड़क पर धरना दिया। पीड़ित पिता ने इगलास एसओ पर संगीन आरोप लगाए हैं। इसके बाद एसओ पर गाज गिरी है।

अलीगढ़ के एसएसपी ने इगलास एसओ को इस मामले में सस्पेंड कर दिया है। इगलास थाना क्षेत्र के एक गाँव में बच्ची के साथ रेप की घटना हुई थी। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पिता की तहरीर के आधार पर अलीगढ़ में मौसी और उसके बेटे के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342, 376, 120b और लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5 और 6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

हाथरस एसपी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हाथरस में सादाबाद क्षेत्र के जटोई गाँव की रहने वाली एक नाबालिग लड़की के अलीगढ़ में रहने के दौरान कथित तौर पर उसके साथ 15-20 दिन पहले उसके नाबालिग मौसेरे भाई ने बलात्कार किया था, जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त है। पीड़िता का कल इलाज के दौरान निधन हो गया और उसके परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और अलीगढ़ पुलिस द्वारा उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मृतक बच्‍ची की माँ की मौत 7 महीने पहले हो गई थी। इसके बाद उसकी मौसी उसे अपने यहाँ ले गई थी। पिता का आरोप है कि उसी के लड़के ने बच्ची से रेप किया। उन्होंने गुहार लगाई कि उनकी बड़ी लड़की को वापस लाया जाए और इस मामले में सही आरोपित की गिरफ्तारी हो। पुलिस ने गलत आरोपित को पकड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता के साथ दरिंदगी करने के बाद इलाज की जगह उसे बाथरूम में बंद कर दिया गया। घर के बाहर खेल रहे बच्चों ने जब मासूम के रोने की आवाज सुनी तो शोर मचाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से मासूम हो अस्पताल में एडमिट कराया गया। हालत बिगड़ता देख उसे दिल्ली भेजा गया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि हाथरस की ही दलित लड़की की मौत के मामले को लेकर पूरे देश में गुस्से और गम का माहौल है। चंदपा थानाक्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली दलित लड़की के साथ चार लोगों ने कथित रूप गैंगरेप किया था और उस पर जानलेवा हमला किया था। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद दलित लड़की की सफदरगंज अस्पताल में मौत हो गई थी। हालाँकि अभी तक इस मामले में रेप की स्थिति स्पष्ट नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट में रेप के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।