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व्यंग्य: बिहार चुनाव में टिकट न मिलने पर कन्हैया का धमाकेदार इंटरव्यू ऑपइंडिया पर

अजीत: भेज रहा हूँ नेह निमंत्रण प्रियवर तुम्हें बुलाने को, हे बीहट के वामपंथी शूकर तुम भूल न जाना आने को… शरद ऋतु के आश्विन मास की चतुर्दशी की इस पावन बेला में हम आज आप लोगों का साक्षात्कार कन्हैबा से करवाने जा रहे हैं। इनको इज्जत बस वामपंथी कामभक्त माओवंशी लमप्ट समुदाय और गिरोह विशेष के पत्रकार और R&Dtv जैसे संस्थान ही देते हैं। वरना लड़कियों के सामने लिंगलहरी बन कर मूत्र विसर्जन का कार्य हो, या फिर भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की अतितीव्र इच्छा, इनकी करतूतें ऐसी हैं कि कन्हैया कुमार कहना कुछ वैसा ही है जैसे कुत्ते को घी पिलाना। पचेगा ही नहीं। इसलिए हम इन्हें कन्हैबा कहेंगे।

कन्हैबा: आप ही लोग का टाइम है, संघी लोग का समय है तो सूगर कह लो, कुत्ता कह लो… लेकिन जनता जवाब देगी इसका भी। संघियों से बढ़िया बात का उम्मीद भी कैसे करें। यही सब गाली-गलौज करोगे, यही सिखाया जाता है साखा में।

अजीत: अरे, शूकर तो विष्णु के अवतार हैं भाय! आप को तो वामपंथी होने के बाद भी सूअर कह कर मैंने कितनी इज्जत दी है। जेएनयू में ये सब नहीं पढ़ाया क्या? खाली यही पढ़ाया कि बाप मरे तो माथा मत मुड़ाओ? जनेऊ तोड़ तो, ब्राह्मणवाद के खिलाफ हो जाओ?

कन्हैबा: जेएनयू एक वर्ल्ड क्लास

अजीत: चार चवन्नी घोड़े पर, वर्ल्ड क्लास…

कन्हैबा: फिर देखो अश्लील बातें… यही सब तो पढ़ाते हैं साखा में।

अजीत: एगो भीतर का बात बताएँ? हम आज तक संघ की किसी शाखा में नहीं गए। हम वहाँ गए हैं जहाँ तुम्हारे जैसे बकचोन्हर पूरा जीवन किताब पढ़ कर मर जाएँगे, सलेक्शन नहीं होगा। और, अगर बचपन में थोड़ा पढ़ लेते मेरी तरह के स्कूल में, तो बनराते नहीं। अफ्रीका के समाज पर पीएचडी कर के बिहार के गाँव में ज्ञान नहीं दे रहे होते कि सामाजिक न्याय नहीं हो रहा है। और वैसे भी, कभी शाखा हो आओ, क्या पता लबरागिरी छोड़ कर कुछ सेन्स माथा में ढुक जाए!

कन्हैबा: अरे महराज, सबाल पूछिए, टाइम नहीं है ओतना! सुबह-सुबह दारू ले के बैठ गए हैं…

अजीत: दारू नहीं है, शैम्पेन है। मेहनत की कमाई का है। तुम बाप जनम में अफोर्ड नहीं कर पाओगे। किसी बड़े वामपंथी के पास जाओगे तो हो सकता है सूँघने या देखने दे दे, तुम्हारी औकात उतनी ही है। पूरा जीवन साला ‘ऐ कामरेड, दो रूपया दीजिए न, एक बीयर हो जाएगा’ कह के जेएनयू में भीख माँगने में बीता, और बात करते हैं शैम्पेन की… और ये ‘टाइम’ का क्या करोगे तुम? हाथरस जाना है क्या तुमको भी? तुम्हारे भाई-बंधु तो आग लगाने की तैयारी में हैं, जाओ तुम भी… अच्छा, पहला सवाल दोगलेपन पर है। याद है तुम ललुआ का पैर में गिर गए थे दाँत बिदोर के? कि भूल गए? और वही राजद वाला तुम्हारे खिलाफ चुनाव में कैंडिडेट उतार दिया था? नहीं तो तुम्हारी हार इतने बुरे तरीके से नहीं होती। एक और बात याद है, चंद्रशेखर वाली? कॉमरेड चंद्रशेखर? पता है मेरे ही स्कूल के थे, उनको लालू पार्टी के ही काल में पार्टी के ही नेता ने सरेआम गोली से छलनी कर दिया था। फिर ये बताओ कन्हैबा, लाज नहीं लगा था ललुआ के पैर पर गिरने में? वो भी छोड़ो, इस बार तो गठबंधन में आ गए हैं वामपंथ वाले। तुम लोगों का सही में कुछ ईमान-जमीर जैसा कुछ है कि सब बेच कर बीड़ी पी गए? लाज नहीं लगता है आईना देखते हो तो?

कन्हैबा: देखिए राजनीति में कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता… कॉमरेड चन्द्रशेखर वाली बात तो पुरानी हो गई। कब तक वही बात ले कर हम लोग अलग-अलग बिखरे रहेंगे। समय है कि सेकुलर ताकतों को एक साथ…

अजीत: ऐऽऽऽ इधर देखो… ऐसा लप्पड़ मारेंगे न कि कनपट्टी लाल हो जाएगा! सेकुलर ताकतें? पूरा जीवन साला हिन्दू-मुस्लिम, यादव-मुस्लिम, दलितों की बात कर के आंदोलन के नाम पर उन्हीं गरीबों की हत्या करवाने में लगे रहे, और बात कर रहे हैं सेकुलर ताकतों का। दोबारा मत बोलना नहीं तो स्क्रीन से बाहर निकल कर चमेटा मारेंगे।

कन्हैबा: अरे! राजनीति में और क्या कहें? कह दें कि हम लोग बिक गए हैं, विचारधारा के नाम पर हमें कोई पूछता नहीं, न ही हम विचारधारा जैसी कोई बात मानते हैं? ऐसे थोड़े होता है। सब कुछ देखना पड़ता है भाई, वरना हम लोगों को, जब तक कहीं सैनिकों को न मार दें, सरकारी कर्मियों को माइन से न उड़ा दें, कहीं केरल माँगे आजादी न कहें, कहीं दिल्ली में दंगा न करवाएँ, तब तक हमको पूछता ही कौन है? हम लोगों से ज्यादा पॉपुलर और वामपंथी तो साले कॉमेडियन हो गए हैं! …ये वाला पार्ट कटवा दीजिएगा भाय, आप तो समझते ही हैं।

अजीत: अरे, एकदम… बिलकुल कटवा देंगे भाई। टेंशन न लो। वैसे विचारधारा से याद आया कि उमर खालिद पर पूरे साल कुछ बयान नहीं? अरेस्ट हो गया, एक केस से छूटा, दूसरे में अरेस्ट हुआ। तुमने न तो फासीवाद कहा, न लोकतंत्र की हत्या… मतलब, भाई था यार तुम्हारा। कितने फोटो में एकदम जानेमन टाइप चिपक कर खड़ा है तुम्हारे साथ…

कन्हैबा: देखिए, उसको राजनीति करना है, हमको भी करना है। उसको ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, सफूरा जरगर के साथ मीटिंग कर के जिल्ली दंगों वाली राजनीति करनी है, हमको बिहार का राजनीति करना है। वो अपने राह चला, हम अपने। हम अभी कुछ बोलेंगे तो बेगूसराय वाला सब मारेगा कम, दौड़ाएगा ज्यादा। लोकसभा चुनाव में तो देखे ही आप कि कैसे जिस गाँव में जाते थे, वहीं पूछता था कि भारत के टुकड़े काहे करना चाहते हो? बोला ऊ, फँस गए हम। हमको भोट भी उसी कारण लोग नहीं दिया। नया मूँछ वाला मजहबी छोड़ कर हमको वोट कोई देबे नहीं किया नहीं तो गिरिराज को तो हराइए देते।

अजीत: मतलब, अपनी छवि सुधारना चाह रहे हो कि तुम देशद्रोही नहीं हो?

कन्हैबा: और क्या! हम काहे के देशद्रोही? ‘जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस धार नहीं, वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’! हमको सब याद है ये सब। हम देशप्रेमी आदमी हैं। हमको तो फँसाया गया है मोदी के द्वारा, डरता है हमसे…

अजीत: फिर देखो! मोदी तुमसे काहे डरेगा? कभी सोचे हो बैठ कर?

कन्हैबा: देस के युवाओं से डरता है मोदी, हम भी युवा हैं…

अजीत: अच्छा! तुम युवा हो और मोदी तुमसे डरता है? सुनो, ऐसा है कि तुम हो बुजुर्ग आदमी जो ‘छात्र’ होने के नाम पर बहुत दिन पब्लिक के पैसे पर ऐश काटा। यहीं बीहट के चाँदनी चौक पर मोबाइल रिचार्ज का दुकान खोल लो, फिर आशिकबाजी करते रहना… बात करते हैं! बिहार चुनाव में तो घंटा टिकट नहीं मिला तुमको…

कन्हैबा: हम कौन सा टिकट माँग रहे थे। हम तो लड़ने का सोचे भी नहीं थे।

अजीत: अच्छा! दस महीने में बिहार पर जो ज्ञान देते रहे, गाँव-घर घूमते रहे, वो क्या जनेर के घास का दाम पता कर रहे थे? इतना झूठ काहे बोलते हो? इंटरनेट के युग में ये सब छुपता है? सीधे क्यों नहीं बोलते कि तुम्हारी पार्टी ने अपना भविष्य देखते हुए, राजद ने अपने लौंडों का भविष्य देखते हुए, तुम्हें लात मार कर बाहर कर दिया। राजद वाला अपने तेजू-तेजा को ‘युवा नेता’ बनाएगा कि तुमको आगे बढ़ने देगा?

कन्हैबा: अरे, हम तो एक सप्ताह पहलहिए बोल दिए थे कि हम चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं रखते, ऐसा कोई विचार ही नहीं था।

अजीत: वामपंथी का बात, घोड़ा का पाद… चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं रखते! सीधे बोलो कि पार्टी ने नौता दे के पत्तल खींच लिया। निर्दलीय लड़ जाओ, कौन रोक रहा है?

कन्हैबा: जिला परिसद का देखेंगे, पंचायत चुनाव का टार्गेट अब ले कर चलेंगे। हारना नहीं है, हम लड़ेंगे साथी। वो भी नहीं होगा तो जेएनयू में तो इतना है ही कि एक और पीएचडी के लिए एडमीसन मिल जाए। स्टूडेंट हैं, आदमी जीबन भर सीखता रहता है। हमारी उमर ही अभी क्या है!

अजीत: उमर का तो खैर रहने दो बौआ! ये बताओ कि लाज नहीं लगता तनिको? एक रत्ती? तनियो-मनियो? आदमी आज कल बीस-बाइस साल से कमाने लगता है, या कम से कम कमाने के लिए उपाय करता है। तुम अभी भी निर्लज्ज टाइप ‘एक और पीएचडी कर लेंगे’ की बात कर रहे हो। पुरानी पीएचडी से भारत के किस क्षेत्र का भला हो गया? बोलने-बैठने का सहूर नहीं है तुमको, तुमसे बढ़िया भाषण छठी क्लास का बच्चा देता है… तुमको नहीं लगता कि परिस्थितिवश तुम नेता बन गए, वरना तुमको आता तो घंटा कुछ नहीं है!

कन्हैबा: अरे आप संघी आदमी हैं, आपको पीएचडी कहाँ से समझ में आएगा। आप लोग तो शिक्षा के विरोध में हमेशा रहे हैं। समाज को बाँटना आप लोगों का काम रहा है। गाँधी जी भी अफ्रीका में ही काम किए थे। आप तो काले लोगों के विरोध में हमेशा रहे हैं। आप क्या जानेंगे कि अफ्रीका का क्या महत्व है।

अजीत: बेटा, संघ का कितना स्कूल चलता है पता है? संघ के किसी आदमी से मिले भी हो कि ऊपर से जो व्हाट्सएप्प ग्रुप में आता है, वही बोकर देते हो? समाज को बाँटने वालों ने कोरोना के समय में कितने करोड़ लोगों को लगातार भोजन पहुँचाया है पता करो। जब तुम्हारे वामपंथी सब घरों मों दुबक कर प्राइम टाइम कर रहे हैं, उसी समय में सेवा भारती बिना जात-मजहब देखे, लगातार सेवा में लगी हुई है। संघी होते तो आदमी होते, वामपंथी हो तो कीचड़ में मजा लेने वाले सूअर से ज्यादा कुछ भी नहीं।

कन्हैबा: फिर से सूअर बोल रहे हैं आप…

अजीत: बैल बोलेंगे तो कहोगे कि संघी है, गाली देता है। सूअर ही सूट करता है तुमको। इज्जत ही दे रहे हैं वैसे। अच्छा ये बताओ कि दिल्ली दंगे पर एकदम ही शांत हो गए…

कन्हैबा: (आईपैड में देखते हुए) दिल्ली दंगे पर क्या बोलना है। दोषियों को सजा होनी चाहिए और क्या…

अजीत: एक मिनट, एक मिनट… ये आईपैड कहाँ से आया तुम्हारे पास? कट्टा दिखा के ओवरब्रिज पर छीनमछोरी करने लगे क्या? कट्टा और वामपंथियों का तो पुराना नाता है…

कन्हैबा: अरे! अपना है। वामपंथी हैं तो कुछ भी बोलिएगा क्या?

अजीत: वाह! बाप मरे अन्हार में, बेटा पावरहाउस! कैपिटलिज्म का प्रोडक्ट यूज करते हुए उँगली गली नहीं तुम्हारी? दिन-रात तो गरियाते रहते हो कॉरपोरेट को, अमेरिका को लेकिन सामान जो है सो चकाचक वही वाला यूज करना है। तब फिर लोग गरियाता है तुमको कि ‘साले वामपंथी, वुडलैंड का जूता पहनते हैं, रिक्शा पर सर्वहारा से खिंचवाते हैं खुद को, कम पैसे देते हैं उसको, और फिर कमरे पर जा कर रिक्शावाले की व्यथा पर कविता करते हैं’ तब तुम्हारा लहर जाता है भक्क से…

कन्हैबा: तो क्या रिक्शा वाले का जीवन नहीं है! संघी लोग तो शुरु से ही गरीब विरोधी रहा है। रिक्शे पर बैठ कर चार रूपया ही तो देते हैं उसको…

अजीत: ‘चार ही रुपया देते हो’ ये बोलो। बीस रूपया का चढ़ते हो और गरिया कर दस रूपया दे कर चल देते हो सहेली के साथ…

कन्हैबा: आपको सेक्स नहीं मिलता तो उसके लिए वामपंथी जिम्मेदार कैसे हो गया?

अजीत: दुखती रग पर हाथ मत रखो, मार हो जाएगा… सेक्स-वैक्स पर बात नहीं होगा यहाँ पर। मेरा शो है, हम जो बोलेंगे उसी पर बात होगा… (रुक कर) यार तुम सेक्स का बात गलत कर दिए… पर्सनल नहीं होना चाहिए। क्या बताएँ यार तुमको… दस रुपया के नोट पर ‘आइ सभ यू एक्स’ लिख कर भेजे, वहीं नीचे लिखे कि इसी नोट पर लिख कर जवाब दे देना… नोट भी गया… लौंडा एक बताया कि उसी पैसे का गोलगप्पा खा गई और मैसेज पढ़ा ही नहीं… बहुत दुख है भाय जीवन में!

कन्हैबा: अरे ठीक हो जाएगा महाराज, रोइए नहीं। बताइए तो हम करवाते हैं इंतजाम… फोन करेंगे और हो जाएगा काम। हम लोगों को तो सबका एक्सेस है। ये बात तो विचारधारा से हट कर है इसलिए आपकी मदद कर देंगे।

अजीत: वीड पीते हो? वूमन आती थी जेएनयू में! वूमन आती थी? सीडी के बहाने? अनमोल रतन टाइप?

कन्हैबा: सब… सबकुछ… वामपंथ की तो पहली कक्षा में हम लोग नए लोगों को, खास कर लड़कियों को शारीरिक स्वतंत्रता के नाम पर यही सब तो कहते हैं कि ‘देह कम्यून की प्रॉपर्टी है’, ‘यह क्रांति की आग जलाए रखने में मददगार है।’ हम लोग समझाते हैं कि शरीर को इज्जत से नहीं जोड़ना चाहिए और उन्मुक्त जीवन जीना चाहिए। उनको ज्ञान इतना दे देते हैं कि पूरे समय सामाजिक व्यवस्था में दब-दब कर, डर-डर कर रहने वाली लड़कियों में अचानक से विद्रोह की आग घुस जाती है और हमारा काम बन जाता है।

अजीत: वाह! मोदी जी वाह! यही उगलवाने के लिए तो मैंने अपनी दुख भरी कहानी सुनाई थी तुम्हें। तुमको क्या लगता है कि हम दस रुपया के नोट पर सोनम गुप्ता बेवफा लिखने का काम करते हैं? ये बताओ, सिलिंडर कितने दिन चलता है?

कन्हैबा: यही तीन-चार दिन… मोदी यही सब तो करता है। पहले यहाँ के लोग गोबर के गोइठा से, लकड़ी के जलावन से काम करते थे। लोग जमीन से जुड़े हुए थे, ये मोदी आ कर सिलिंडर दे रहा है। आप ही बताइए कि सिलिंडर देने से भरवाएगा कितना आदमी?

अजीत: सौ में से 86 लोग भरवा रहे हैं सिलिंडर। तीन-चार लोगों के परिवार में 40-45 दिन चलता है सिलिंडर। और हाँ, जलावन का दाम जोड़ोगे तो कम ही आता है। कभी बैठ कर हिसाब करना, मोदी को गरियाना तो चलता रहेगा।

कन्हैबा: आपको कुछ पता नहीं है, दिल्ली में बैठे रहने से गाँव का पता कहाँ से चलेगा…

अजीत: तुमसे ज्यादा गाँव में रहे हैं बकलोल आदमी। तुमको अपने गाँव में भी आदमी तब पहचाना जब तुम कुख्यात होने लगे थे अपने कुकर्मों के कारण। इसलिए, ये बकैती रक्खो स्थान विशेष में…

कन्हैबा: स्थान विशेष क्या होता है? फिर कुछ अश्लील बात बोला संघी आदमी!

अजीत: स्थान विशेष का शरीर में वही महत्व है जो समुदाय विशेष का समाज में। बाकी, जोड़-घटाव कर लो। हग्गनपॉट को दिए एक इंटरव्यू में तुमने कहा कि ‘आज जो भी सिस्‍टम की कमियों पर सवाल उठाता है, उसे वामपंथी मान लिया जाता है, ये भी गलत है’। तो क्या तुम खुद को वामपंथी नहीं मानते? मतलब, टिकट नहीं दिया तो अब ये सब कहोगे कि ‘मैं किसी विचारधारा का चेहरा नहीं हूँ, मुद्दे की राजनीति करता हूँ?’ पूरा करियर तुम्हारा नजीब अहमद, रोहित वेमुला, अखलाक जैसों के नाम पर साम्प्रदायिकता फैलाने, दलितों के मन में जहर डालने में गया, वामपंथी पार्टी के सदस्य हो, उसके टिकट पर चुनाव लड़े और अचानक से टिकट लिस्ट में नाम न होने पर ‘मैं किसी विचारधारा का चेहरा नहीं हूँ’ पर आ गए? शास्त्रों में इसे ही…

कन्हैबा: ‘…दोगलापन कहा गया है’, यही कहोगे ना? मानते हैं इस बात को। लेकिन पार्टी ने क्या किया मेरे लिए? लाठी, जूता, चप्पल, ईंटा-पत्थल, गाली सब हम खाए, लोग हम पर पम्पीसेट का डहलका मोबिल फेंका है… किसके लिए वो सब सहे? और आज तेजस्वी जैसे लोगों से हाथ मिला लिया? क्यों? ताकि मेरे जैसा एक युवा नेता ऊपर न उठ सके?

अजीत: अरे रे रे रे… दुखती नब्ज पर हाथ रख दिया क्या?

कन्हैबा: भरे बैठे हैं, मुँह मत खुलवाइए!

अजीत: …वैसे, फिर कब दोगे… इंटरव्यू? ले तो तुम्हारी पार्टी ने ही रक्खी है!

कन्हैबा: (कुर्सी छोड़ कर उठते हुए) हमको नहीं करना है इंटरव्यू। बुला के बेइज्जत करता है। रिपब्लिक पर आया पाकिस्तानी गेस्ट बना कर रख दिया है। नै करना है ये सब। जो मन में आए लिखो।

नोट: व्यंग्य की आंचलिकता बचाए रखने के लिए कई शब्दों का उच्चारण जानबूझकर गलत ही छोड़ा गया है।

रिया चक्रवर्ती और भाई शोविक समेत 6 आरोपितों की 20 अक्टूबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका एक बार फिर से खारिज कर दी गई है। रिया चक्रवर्ती को उनके पूर्व ब्वॉयफ्रेंड और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गिरफ्तार किया है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक के अलावा, ड्रग्स सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार सैमुएल मिरांडा, दीपेश, बासित परिहार और जैद की न्यायिक हिरासत मुम्बई की एनडीपीएस कोर्ट ने 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है।

रिया की न्यायिक हिरासत फिर से 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई है। अब दोनों भाई-बहन को 20 अक्टूबर तक जेल में रहना होगा।

गौरतलब है कि सितंबर 22, 2020 को स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की न्यायिक हिरासत की अवधि 6 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। जमानत के लिए आवेदन करते समय, रिया ने आरोप लगाया था कि उन्हें NCB द्वारा पूछताछ के दौरान खुद को दोषी मानने वाला बयान देने के लिए दबाव डाला गया था।

अभिनेत्री ने कहा था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और मामले में उन्हें गलत तरीके से फँसाया गया है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को ‘अनुचित और अन्यायपूर्ण’ बताते हुए इसे मनमाना करार दिया।

14 जून को सुशांत की मौत के बाद मामले में उभरे ड्रग्स एंगल में कथित तौर पर ड्रग्स एंगल के आरोप में रिया को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत आरोपित ठहराया गया था।

उल्लेखनीय है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (सितम्बर 08, 2020) को रिया चक्रवर्ती को मादक पदार्थों से जुड़े आरोपों के सिलसिले में तीन दिनों तक पूछताछ करने के बाद ड्रग सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद रिया को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया था।

रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 81 दिन बाद हुई थी। अगर रिया चक्रवर्ती इस मामले में दोषी पाई जाती हैं तो उन्हें करीब 10 साल तक की सजा हो सकती है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे।

11 सितंबर को एक विशेष अदालत ने रिया चक्रवर्ती को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो वह दूसरों को सतर्क कर सकती हैं और वे सबूत नष्ट कर सकते हैं। रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष हैं और उसे झूठा फँसाया गया है। बता दें कि रिया को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के कई धाराओं के तहत बुक किया गया है।

हाथरस कांड के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान ही आपस में भिड़ गए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, जमकर हुई जूतमपैजार: देखें VIDEO

हाथरस कांड पर पूरे देश में उबाल देखने को मिल रहा है। सभी विपक्षी पार्टियाँ इस मुद्दे पर अपनी राजनीति चमकाने की जुगत में लगे हैं। हर जगह विपक्षी पार्टियाँ इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करती आ रही है। इसी क्रम में कई जगहों से हिंसा की खबरें भी सामने आ रही है। ताजा मामला मुंबई का है।

सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को मुंबई के वसई में उस समय बेहद ही अलग नजारा देखने को मिला, जब प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए और जमकर जूतमपैजार हुए। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता कैसे आपस में ही लड़ रहे हैं।

कोई किसी का कॉलर पकड़ कर मार रहा है तो कोई घूँसा चला रहा है। वहीं कुछ लोग छुड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह जूतमपैजार इस बात को लेकर हुई कि बैनर कौन पकड़ेगा।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इसके खूब मजे ले रहे हैं और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ज्योति खाड़े नाम की एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि पप्पू के कार्यकर्ता पप्पू को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

वहीं एक यूजर ने लिखा, “प्रोटेस्ट में प्रोटेस्ट।”

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “क्या बात है। शायद इसलिए कर रहे हैं कि आने वाले समय में उन्हें ये मौका दोबारा मिले या ना मिले।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि ऐसा ही कुछ लग रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले में भी ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला था। यहाँ योगी सरकार का विरोध करते-करते कॉन्ग्रेस और भीम आर्मी वाले आपस में झगड़ पड़े। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

जानकारी के मुताबिक भीम आर्मी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी, इसी के कारण दोनों दलों में झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। नतीजतन, दूसरी ओर से भी भीम आर्मी पर हमला बोल दिया गया।

पुलिस अधिकारी ने इस संबंध में कहा था, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथरस मामले में प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच भीम आर्मी वाले आ गए और उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद ही हिंसा भड़की।”

‘न्याय’ माँग रहे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ठहाके लगाते दिखे ‘दलित नेता’ उदित राज, वीडियो वायरल

कॉन्ग्रेस नेता लगातार हाथरस मामले को जातीय कोण देकर प्रदेश में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। एक ओर जहाँ एक वंचित समाज की बेटी ने कथित तौर पर कुछ ‘सवर्णों’ के कारण अपनी जान गवाई है, वहीं कॉन्ग्रेसी राजनेताओं के लिए उसका घर अब पिकनिक स्पॉट बन गया है।

कुछ दिन पहले हमने हाथरस की तरफ कूच कर रहे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को वीडियो में हँसते हुए व लॉन्ग ड्राइव का आनंद उठाते देखा था। अब सोमवार (अक्टूबर 05, 2020) को यही दृश्य दलित नेता उदित राज के पहुँचने पर देखने को मिला।

हालाँकि, उदित राज को पहले यूपी गेट के पास गाजियाबाद पुलिस ने रोका क्योंकि उनके पास वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी। मगर, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जिला प्रशासन और हाथरस एसपी व आगरा डीजीपी से अनुमिति ले ली है। इसके बाद उन्होंने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिसकी बाद में वीडियो भी वायरल हुई। 

वीडियो में देख सकते हैं कि ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाते हुए प्रदर्शन पर बैठे कॉन्ग्रेसी नेता किस तरह ठहाके लगा रहे हैं। वहीं, उदित राज कॉन्ग्रेस की महिला समर्थक से हँसी-मजाक भी कर रहे हैं।

वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि पहले उदित राज महिला के कंधे पर हाथ रखकर उनके कान में कुछ फुसफुसाते हैं और उसके बाद सब मिल कर हँसने लगते हैं। गौर करने वाली बात है कि ऐसा दृश्य उस प्रदर्शन में देखने को मिलता है जहाँ कहने को एक मृत लड़की के लिए इंसाफ की माँग की जा रही हो।

बता दें कि इस वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उदित राज की बहुत आलोचना हो रही है। उन्हें उनके असंवेदनशील बर्ताव के लिए सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। उनसे सवाल पूछा जा रहा है कि क्या वह पिकनिक पर आए हैं।

उल्लेखनीय है कि हाथरस मामले के तूल पकड़ने के बाद से जिला मजिस्ट्रेट ने इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लगाई हुई है। इसमें 5 लोगों से ज्यादा को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है।

गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि उदित राज हाथरस में एक रैली निकालना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। हालाँकि 6 वाहनों के साथ उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दे दी गई।

जब उदित राज लड़की के घर पहुँचे तो उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों को गले लगाया। उन्होंने फोटो खिंचवाते हुए दावा किया कि वह मृतक लड़की के परिवार के साथ खड़े हैं, मगर जैसे ही फोटो खिंच गई वो फौरन लड़की के पिता के बगल से हट गए।

उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलते हुए कोई कोरोना में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि परिवार से मिल कर उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की है और दावा किया कि वह अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ेंगे।

याद दिला दें कि इससे पहले वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को भी संवेदनहीनता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। लोगों ने उनकी वीडियो शेयर करके ध्यान आकर्षित करवाया था कि कैसे पीड़ितों से मिलने जाते वक्त दोनों भाई-बहन हँस रहे हैं।

गौरतलब है कि हाथरस मामले में पीड़िता की मौत के बाद से तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। शुरू में पीड़िता के घरवालों ने कहा था कि उसका रेप हुआ है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि रेप की बात गलत है। बाद में, स्थानीय पुलिस में परिवार द्वारा दर्ज किए गए प्रारंभिक बयान और पुलिस रिपोर्टें सामने आईं, जिसमें किसी भी बलात्कार या यौन हमले का उल्लेख नहीं किया गया था। जिससे पूरी घटना में सामने आए बयानों पर संदेह पैदा हो गया। इसके बाद आरोपितों की जाति को आधार बनाकर विपक्ष ने योगी सरकार पर निशाना साधा और पूरे मामले का राजनीतिकरण करने में जुट गए। ज्ञात हो कि इस केस में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

हाथरस: UP सरकार ने की CBI जाँच की माँग, हलफनामे में SC को बताई अंतिम संस्कार करने की वजह

यूपी सरकार ने मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर माँग की है कि उसे यूपी के हाथरस में लड़की से कथित बलात्कार और हमले की CBI जाँच का निर्देश देना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यूपी सरकार की माँग है कि PIL पर सुनवाई की जगह अदालत को CBI जाँच की निगरानी करनी चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक अनुसूचित जाति की युवती से कथित सामूहिक बलात्कार और मौत के मामले में केस की SIT से जाँच कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच कर रही है।

पीड़िता के परिवार की सहमति से ही किया था रात को अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि पीड़िता के परिवार की सहमति से ही उस रात अंतिम संस्कार किया गया था। मामले में एसआईटी की जाँच चल रही है। आज एसआईटी की टीम उस जगह पहुँची है, जिस जगह पीड़िता का शव जलाया गया था।

हलफनामे में बताया गया है कि जिला प्रशासन ने सुबह बड़े पैमाने पर हिंसा से बचने के लिए, रात में सभी धार्मिक संस्कारों के साथ पीड़िता के अंतिम संस्कार के लिए पीड़िता के माता-पिता को समझाने का फैसला लिया। इस घटना का राजनीतिक किया जा सकता था और कुछ निहित स्वार्थों द्वारा विभाजित जातिगत विभाजन से उत्पन्न राजनीतिक हिंसा को समाप्त करने के लिए ही अंतिम संस्कार किया गया।

‘राज्य सरकार को बदनाम कराने के लिए चलाए जा रहे हैं अभियान’

यूपी सरकार की ओर से, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि इस घटना के बारे में निहित स्वार्थों द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातें हैं और यही कारण है कि यूपी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश करने का फैसला किया। राज्य सरकार ने कहा कि सीबीआई जाँच सुनिश्चित करेगी कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएँ।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का नोटिस मिलने का इंतजार किए बिना ही अपनी तरफ से हलफनामा फाइल कर दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि हाथरस कांड के बहाने राज्य सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया, टीवी और प्रिंट मीडिया पर आक्रामक अभियान चलाए गए। इस हलफनामे में कहा गया है कि चूँकि यह मामला अब पूरे देश के आकर्षण के केंद्र में आ गया है, इसलिए इसकी केंद्रीय एजेंसी से जाँच होनी चाहिए।

हलफनामे में कहा गया है कि खुफिया विभाग के मुताबिक, 29 सितंबर से कुछ लोग हालात को खराब करने के लिए सक्रिय हो गए थे। इसकी शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल से हुई। खुफिया विभाग के मुताबिक, कुछ लोगों ने 30 सितंबर को हाथरस में जमा हो कर दंगा भड़काने की साजिश रची और मामले को जातीय और धार्मिक रंग देने की कोशिश की।

यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार सीबीआई को इस घटना की जाँच कर जातिगत संघर्ष को फैलाने के साथ ही हिंसा और मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश कर घटना का दुष्प्रचार करने वालों की सच्चाई को उजागर करने की माँग करती है।

यूपी सरकार ने दोहराई मेडिकल जाँच में बलात्कार की पुष्टि न होने की बात

इस बीच, यूपी सरकार ने SC में भी दोहराया कि जेजे मेडिकल अस्पताल अलीगढ़ की मेडिकल रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया बलात्कार की बात नहीं थी। यूपी सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि नमूने को एफएसएल आगरा भेजा गया था, जिसने अपनी अंतिम राय बताई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक युवती का 14 सितंबर को कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था और दो सप्ताह बाद नई दिल्ली के अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर देशभर में विवाद जारी है और इसमें कई तरह के नए खुलासे भी सामने आ रहे हैं।

हाथरस केस में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यचिकाकर्ताओं से कहा, “हर कोई कह रहा है कि घटना झकझोरने वाली है। हम भी यह मानते हैं। तभी आपको सुन रहे हैं, लेकिन आप इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? क्यों नहीं मामले की सुनवाई पहले हाईकोर्ट करे, जो बहस यहाँ हो सकती है, वही हाईकोर्ट में भी हो सकती है। क्या ये बेहतर नहीं होगा कि हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करे?” इस मामले में आगे की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

पश्चिम बंगाल में BJP नेता मनीष शुक्ला की हत्या के आरोप में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख को CID ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के अपराध जाँच विभाग (CID) ने सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को बैरकपुर इलाके के टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के पास भाजपा नेता मनीष शुक्ला की निर्मम हत्या के लिए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हत्या रविवार (अक्टूबर 4, 2020) शाम करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। कथित तौर पर, बाइक सवार हमलावरों ने शुक्ला को बेहद करीब से गोली मारी थी।

सीआइडी ने मामले में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। खुर्रम को दिन में ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि शेख को 5 अक्टूबर और 6 अक्टूबर की मध्यरात्रि को गिरफ्तार किया गया। सीआईडी अधिकारियों ने दोनों से पूछताछ की और बताया कि मोहम्मद खुर्रम की मृतक भाजपा नेता के साथ ‘व्यक्तिगत दुश्मनी’ थी।

दोनों आरोपितों ने मनीष शुक्ला की हत्या किस मकसद से किया था, CID इसकी जाँच कर रही है। इसके साथ ही जाँच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन दोनों ने इस हत्या के वारदात को अंजाम कैसे दिया। CID ने कहा है कि मामले की जाँच उन्हें अन्य आरोपितों तक ले जाएगी।

गौरतलब है कि भाजपा नेता मनीष शुक्ला की कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा की गई हत्या के एक दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी थी। इस बात की जानकारी सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने रोष जताया था। संगठन का कहना था कि उन्हें तृणमूल सरकार के अंतर्गत काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर असहमति का एक सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ समय में वहाँ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है, जिसे राज्य की पुलिस ने आत्महत्या घोषित कर दिया या उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है।

सोमवार (5 अक्टूबर 2020) को भाजपा कार्यकर्ता नील रतन सरकार अस्पताल के सामने इकट्ठा हुए, जहाँ मृतक का शरीर रखा गया था। कार्यकर्ताओं का कहना था कि शरीर उनके हवाले किया जाए। पार्टी ने इस बात की जानकारी दी कि वह अपने कार्यकर्ता का शव कोलकाता से ले जाना चाहते थे। हालाँकि, पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की माँगों को सिरे से खारिज कर दिया था। पुलिस ने अस्पताल के लगभग हर गेट पर बैरीकेडिंग लगा दी थी, सिर्फ एम्बुलेंस और मरीजों को भीतर दाखिल होने की अनुमति दी थी।

CM गहलोत के कार्यकाल में हुआ था ‘द्रौपदी का चीरहरण’: पति को बंधक बना दलित महिला के साथ गैंगरेप में 4 दोषियों को आजीवन कारावास

राजस्थान के अलवर स्थित थानागाजी गैंगरेप मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने सभी 5 आरोपितों को दोषी करार दिया है। मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। ये मामला अप्रैल 26, 2019 का है, जब एक 19 वर्षीय दलित महिला का उसके पति के सामने ही इन पाँचों ने गैंगरेप किया था। इस मामले में राजस्थान की पुलिस ने FIR तक दर्ज करने में भी काफी देरी की थी।

इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। पाँच आरोपितों छोटे लाल (22), हंस लाल गुर्जर (20), अशोक कुमार गुर्जर (20), इंद्रज सिंह गुर्जर (22) और एक नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धारा-147 (दंगेबाजी), 149 (गैर-क़ानूनी ढंग से जुटान), 323 (जानबूझ कर चोट पहुँचाना), 327 (जबरन वसूली और नुकसान), 341 (सदोष अवरोध), 354B (महिला का सम्मान भंग करना), 365 (गुप्त रूप से अपहरण), 376D (गैंगरेप), 384 (रंगदारी), 395 (डकैती) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

साथ ही इस मामले में एससी-एसटी एक्ट और आईटी एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई थीं। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल बन गया था और 2019 लोकसभा से पहले चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बसपा प्रमुख मायावती ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की निंदा की थी। अशोक गहलोत दिसंबर 2018 में तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने थे। देश भर में उनकी किरकिरी हुई थी।

आरोपितों ने इस गैंगरेप का वीडियो भी शूट कर के वायरल कर दिया था, जिसके बाद जनता का आक्रोश और बढ़ गया था। पीड़िता के पति को आरोपित तीन घंटे तक पीटते रहे थे और एक आरोपित वीडियो बना रहा था। मई 2, 2019 को वीडियो वायरल होने के बाद थानागाजी के इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में 32 गवाह पेश किए गए थे। एक नाबालिग की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज की अदालत में चल रही थी

अंत में अशोक गहलोत सरकार ने अलवर के एसपी और थानागाजी के एसएचओ को निलंबित कर दिया था। जून 7, 2019 को SHO के खिलाफ अपनी ड्यूटी करने में विफल रहने के कारण 166A(C) के तहत FIR दर्ज की गई। इस मामले के सम्बन्ध में सारी सूचनाएँ व सबूत होने के बावजूद उन्होंने मामला दर्ज नहीं किया था। एसपी ने घटना के 24 घंटे बाद भी घटनास्थल का दौरा नहीं किया था।

पुलिस की जाँच में उन्हें क्लीनचिट दे दी गई थी लेकिन बाद में हुए प्रशासनिक जाँच में उन्हें लापरवाही का दोषी पाया गया था। जयपुर डिविजनल कमिश्नर वर्मा ने इस मामले में प्रशासनिक जाँच की थी। सर्कल अधिकारी जगमोहन शर्मा को चार्जशीट दायर होने के बाद जिले से बाहर भेज दिया गया था। अन्य पुलिस अधिकारियों को भी जयपुर पुलिस रेंज से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया था। अब सभी आरोपित दोषी पाए गए हैं। 4 आरोपितों को आजीवन कारावास और एक को आईटी एक्ट के तहत 5 साल जेल की सज़ा दी गई। कोर्ट ने कहा है कि ये घटना ‘द्रौपदी के चीरहरण’ जैसी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अलवर, राजस्थान दुष्कर्म प्रकरण का संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। आयोग ने मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट माँगी थी। वहीं, आयोग ने प्रदेश सरकार को आदेश देते हुए कहा था कि पूरे प्रकरण की 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करें। पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दोपहर 3 बजे तालवृक्ष जा रही थी, तभी थानागाजी-अलवर बाइपास रोड पर उनकी बाइक के सामने 5 युवकों ने अपनी मोटरसाइकिलें लगा दी थी।

इसके बाद वे महिला एवं उसके पति को रेत के टीलों की तरफ ले गए। वहाँ उन्होंने पति के साथ मारपीट की और दंपति को बंधक बना लिया। पाँचों युवकों ने इसके बाद दोनों पति-पत्नी के कपड़े उतरवाए। पति के साथ मारपीट की। पीड़िता के साथ भी मारपीट की और रेप की कोशिश की। शुरुआत में जब पीड़िता ने रेप की कोशिश का विरोध किया तो उसके पति को और मारा गया। अंततः पीड़िता ने अपने पति की रक्षा के लिए हार मान ली। इसके बाद उन दरिंदों ने 3 घंटे तक बारी-बारी से पीड़िता के साथ रेप किया। 11 वीडियो क्लिप भी बनाए। 

केरल: जुड़वा भाई नौशाद व नवास ने कई बार किया 5 और 10 साल की मासूम बच्चियों का रेप, गिरफ्तार

केरल की त्रिवेंद्रम पुलिस ने रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को दो नाबालिग बच्चियों के रेप के आरोप में कथिततौर पर दो जुड़वा भाइयों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों की पहचान नौशाद और नवास के रूप में हुई है। पीड़ित बच्चियों की उम्र 10 साल और 5 साल है। दोनों भाइयों पर बच्चियों के साथ कई बार रेप करने का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नाबालिगों के माता पिता काम पर जाने के कारण उन्हें इन दोनों के पास देख-रेख के लिए छोड़ कर जाते थे। मगर, उन्हें इस संबंध में शक तब हुआ जब उन्हें अपने बच्चों के बर्ताव में फर्क दिखने लगा और उन्होंने इस बारे में उनसे बात की। दोनों बच्चियों ने माता पिता को सारी बातें बताईं, जिसे सुनकर वह फौरन थाने पहुँचे।

बच्चियों के माता पिता ने मामले में दोनों भाइयों नौशाद और नवास के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई और आरोप लगाया कि दोनों बच्चियों का कई बार रेप किया गया है। पुलिस ने इस मामले को दर्ज करने बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया और उनके ऊपर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस बताती है कि आरोपितों ने बच्चियों का कथिततौर पर रेप करने के बाद उन्हें धमकी दी थी कि वह अपने पिता और रिश्तेदारों में से किसी को इस संबंध में न बताएँ। आरोपितों ने बच्चियों को धमकाते हुए कहा था कि अगर वह ऐसा करेंगी तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। बता दें, पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ केरल में दोनों बच्चियों के साथ रेप की वारदात का मामला सामने आया है। वहीं हाथरस में भी एक और रेप के बाद मौत का मामला उजागर हुआ है। पीड़िता की उम्र मात्र 6 साल थी। जानकारी के अनुसार, रेप का आरोप बच्ची की मौसी के बेटे पर ही लगा है।

‘आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच फोन पर होती थी घंटों बातचीत’: हाथरस पर ‘Zee News’ की रिपोर्ट में कई खुलासे

हाथरस मामले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पीड़िता के भाई और आरोपित संदीप आपस में मित्र थे। कहा जा रहा है कि इन दोनों के बीच बातचीत भी होती थी और इनकी पुरानी जान-पहचान थी। दोनों के बीच कई घंटों तक बातचीत होती थी। कुछ ग्रामीणों ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

ये सब ‘Zee News’ में विशाल पांडेय की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है। ‘Zee News’ ने दावा किया है कि उसके पास वो कॉल रिकार्ड्स हैं, जिसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच घंटों बातचीत होती थी। खबर में कहा गया है कि उक्त नंबर पर अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच दोनों के बीच 5 घंटों की बातचीत हुई थी। वहीं पीड़िता के बड़े भाई ने परिवार के आरोपित संदीप से बातचीत होने की बात से इनकार किया है।

‘Zee News’ की रिपोर्ट में बूलगढ़ी के ग्रामीणों ने बताया है कि पीड़िता और आरोपित के बीच प्रेम सम्बन्ध भी थे। हालाँकि, प्रेम सम्बन्ध होने का ये मतलब नहीं है कि कोई किसी की हत्या नहीं कर सकता – यहाँ ये स्पष्ट करनी ज़रूरी है। मीडिया संस्थान का कहना है कि इस मामले की छानबीन जाँच एजेंसियाँ करेंगी, जिसमें सच सामने आएगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीड़िता का भाई कुछ न कुछ छिपा रहा है।

हाथरस मामले में ‘Zee News’ की ग्राउंड रिपोर्ट (साभार)

आरोपित लवकुश की माँ का कहना है कि उनके बेटे को उन्होंने घायल पीड़िता को पानी पिलाने के लिए भेजा था लेकिन उसे भी आरोपित बना दिया गया। वहीं आरोपित रामू की माँ ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उनका बेटा सुबह 7 बजे ही डेयरी प्लांट के लिए निकल चुका था, जहाँ वह नौकरी करता था। डेयरी प्लांट के मालिक ने बताया कि वो सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक वहीं पर ड्यूटी कर रहा था।

डेयरी मालिक आरोपित रामू को सीधा-साधा लड़का बताते हुए कहा कि रजिस्टर में उस दिन उसकी एंट्री भी दर्ज है और अन्य कर्मचारियों ने भी उसे देखा था। पुलिस रजिस्टर ले गई है। वहीं खुद को प्रत्यक्षदर्शी बताने वाले ओंकार सिंह ने कहा कि घायल लड़की जब खेत में पड़ी हुई थी तो उसका भाई उसे ‘संदीप का नाम लेने’ को कह रहा था और उस समय संदीप अपने पिता के साथ गाय को पानी पिलाने में लगा हुआ था।

उधर यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के अनुसार, पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने का दबाव था और इसके एवज में उन्हें 50 लाख रुपए देने का लालच एक राजनेता ने दिया था। साथ ही एक पत्रकार द्वारा पीड़िता के भाई को कहा गया था कि वो पिता को मीडिया में उसका मनपसंद बयान देने के लिए मनाए। पिता पर मीडिया में ये कहने का दबाव था कि वो सरकार की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। एडीजी प्रशांत कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है कि राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश हो रही थी।

अनुराग कश्यप मामले में ऋचा चड्ढा ने पायल घोष के खिलाफ किया ₹1.1 करोड़ की मानहानि का केस, सुनवाई 7 अक्टूबर को

अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली अभिनेत्री पायल घोष के ख़िलाफ़ बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने कानूनी कार्रवाई करते हुए 1.1 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया है।

ऋचा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में इस संबंध में कल याचिका दायर करवाई। हालाँकि, कोर्ट ने आज इस याचिका को 7 अक्टूबर तक के लिए खारिज कर दिया। कोर्ट की तरफ से ऐसा उत्तरदाताओं (respondents) को नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर किया गया है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों मीटू अभियान के तहत पायल घोष ने अनुराग कश्यप के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कई एक्ट्रेस का नाम इस मामले में उजागर किया था। उस समय उन्होंने अनुराग पर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब उन्होंने अनुराग की हरकतों का विरोध किया था तो उन्होंने उनसे कहा कि ये सब तो नॉर्मल बात है।

इसके अलावा पायल के मुताबिक कश्यप ने घोष से यह भी कहा था कि बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस उनके साथ बहुत सहज हैं। इस बातचीत को उजागर करते हुए पायल घोष ने ऋचा चड्ढा का नाम भी शामिल किया था और उसके बाद ही ऋचा चड्ढा ने एक्ट्रेस को कानूनी तरीकों से जवाब देने के लिए मानहानि की याचिका दायर की।

बताया जा रहा है सबसे पहले एक्ट्रेस ने 21 सितंबर को ही अपनी लीगल टीम की ओर से नोटिस जारी कर दिया था और लीगल कार्रवाई करने की बात कही थी। इसके बाद एक्ट्रेस ने महिला आयोग में भी इस मामले की शिकायत की थी। ऋचा ने पायल को लीगल नोटिस भेजा था, मगर उनके स्टाफ ने उसे स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद ऋचा ने नोटिस की सॉफ्ट कॉपी एक्ट्रेस को मेल की थी।

अपने लीगल नोटिस में ऋचा ने लिखा था, “मैं हर महिला के लिए न्याय चाहती हूँ। लेकिन किसी भी महिला द्वारा उसकी आजादी का दुरुपयोग दूसरी महिलाओं के खिलाफ निराधार, बिना किसी वजूद के, झूठे और आधारहीन आरोप लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।”

बता दें कि ऋचा ने पायल के अलावा कमाल आर खान और एक न्यूज चैनल पर भी मानहानि केस किया है। एक्ट्रेस का दावा है कि इन सभी ने कई आपत्तिजनक बयान दिए हैं, जिससे उनकी छवि को ठेस पहुँची है। ऋचा ने माँग की है कि सोशल मीडिया पर इस केस संबंधित उनके खिलाफ डाले गए वीडियो और बयानों को भी डिलीट करवाया जाए।

इस मामले पर सोमवार को बॉम्बे हाइकोर्ट के जज अनिल मेनन के समक्ष सुनवाई की गई थी। इस दौरान ऋचा चड्ढा के आरोपों पर एक्ट्रेस घोष की ओर से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। अब इस मामले पर 7 अक्टूबर को फिर से कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा और सभी दस्तावेज फिर से पेश करने होंगे।