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‘ये न्यूकमर्स तो ऐसे निकल रहे हैं, जैसे बरसात में मेंढक- टर्र टर्र’: जब SRK ने आयुष्मान के सिर पर फोड़ दी थी बोतल

बॉलीवुड में अब जब नेपोटिज्म की चर्चा हो रही है, ऐसे में लगातार कई पुराने वीडियोज के जरिए ये ध्यान दिला रहे हैं कि कैसे न्यूकमर्स का यहाँ अपमान किया जाता है। इसी तरह के एक अवॉर्ड शो का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें शाहरुख खान न्यूकमर आयुष्मान खुराना पर टिप्पणी करते नज़र आ रहे हैं। ये वीडियो 2013 के IIFA अवॉर्ड्स का है, जब आयुष्मान खुराना को ‘विकी डोनर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेता का पुरस्कार मिला था।

आयुष्मान खुराना ने ‘विकी डोनर‘ का जरिए ही बॉलीवुड में कदम रखा था। ऐसे में जब उन्हें अवॉर्ड मिला तो शाहरुख खान के साथ शो की एंकरिंग कर रहे शहीद कपूर उनसे पूछते नज़र आते हैं, “शाहरुख भाई, आपको नहीं लगता है कि इस साल न्यूकमर्स टाइप के लोग कुछ ज्यादा ही हो गए हैं?” इस पर जवाब देते हुए शाहरुख खान कहते हैं, “हाँ, ये न्यूकमर्स तो ऐसे निकल रहे हैं जैसे बरसात में मेंढक निकलते हैं- टर्र.. टर्र.. टर्र..“।

इसके बाद शाहिद कपूर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल तो जिसे देखो वो हीरो बनने चला आता है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि शाहिद कपूर वरिष्ठ अभिनेता पंकज कपूर और बॉलीवुड अभिनेत्री रहीं नीलिमा अज़ीम के बेटे हैं। नीलिमा ने पंकज कपूर के बाद दो और शादियाँ की थीं। अभिनेता ईशान खट्टर नीलिमा और उनके दूसरे पति राजेश खट्टर के बेटे हैं। शाहिद की इस टिप्पणी के दौरान सुशांत सिंह राजपूत भी ऑडियंस में बैठे देखे जा सकते हैं।

इसके बाद शाहिद कपूर ने सुझाव दिया कि अधिकतर प्रोफेशन में परीक्षाएँ होती हैं और उसमें लोग पास-फेल होते हैं, इसीलिए फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसे ही परीक्षाएँ होनी चाहिए। शाहरुख खान ने भी उनके इस सुझाव का समर्थन किया। इसके बाद शाहिद ने प्रस्ताव दिया कि न्यूकमर्स को स्टेज पर बुला कर ही उनकी ‘क्लास’ लेनी चाहिए। इस पर शाहरुख खान कहते दिखते हैं कि इन न्यूकमर्स को बेकार में फुटेज मत दो, ये हमलोगों के लिए अच्छा नहीं है।

इसके बाद आयुष्मान खुराना स्टेज पर आते हैं और सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त झुक कर मंच को प्रणाम करते हैं, जिस पर टिप्पणी करते हुए शाहरुख खान कहते हैं कि तू गलत जगह पैर छू रहा है। इसके बाद आयुष्मान ने उनके भी पाँव छुए। उनके सिर पर शीशे की एक बोतल भी फोड़ी जाती है, जिसके बाद पूछा जाता है कि उन्हें लगी या नहीं? आयुष्मान जवाब में कहते हैं कि काफी जोर से लगी।

इस पर शाहरुख खान आयुष्मान के नितम्बों पर लात मारने की एक्टिंग करते हुए और नर्सों को बुलाते हुए कहते हैं कि आयुष्मान को हॉस्पिटल ले जाओ और इसे 2 साल तक बॉलीवुड में नहीं आने देना। IIFA ने इस वीडियो का एक हिस्सा अपने फेसबुक पेज से इसे ‘Fun’ बताते हुए पोस्ट किया। बॉलीवुड में अधिकतर शो स्क्रिप्टेड होते हैं और कई तो ‘रियलिटी’ बोल कर भी स्क्रिप्ट के हिसाब से ही चलते हैं।

शाहरुख़ खान और आयुष्मान खुराना IIFA अवार्ड शो 2013 में

लेकिन, इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के मन में भी कुछ सवाल हैं कि क्या न्यूकमर्स को अवॉर्ड शो में मंच पर बुला कर उनके साथ जानबूझ कर ऐसा बर्ताव किया जाता है? क्या न्यूकमर्स पर जानबूझ कर फब्तियाँ कसी जाती हैं, भले ही ये स्क्रिप्ट का हिस्सा हो या फिर वास्तविक रूप में हो रहा हो। नेपोटिज्म डिबेट के बीच एक-एक ऐसी घटनाओं पर कई लोगों की नज़र है और वो इससे खुश नहीं हैं।

इसी तरह सुशांत के जिम पार्टनर सुनील ने खुलासा किया कि सुशांत सिंह आईफ़ा अवार्ड्स में शाहरुख खान और शाहिद कपूर के साथ मंच साझा करने वाले थे। शाहरुख ने शो के पहले सुशांत से बात की थी। उनसे कहा था कि वे मंच पर उनकी फिल्म ‘काई पो चे’ का ज़िक्र करेंगे। शाहरुख खान ने उनसे यह भी कहा था कि उसके (सुशांत) संघर्ष और अब तक के सफ़र के बारे में भी पूछेंगे। लेकिन इन सारी बातों से ठीक उलट उन्होंने मंच पर सुशांत को बेइज्ज़त करना शुरू कर दिया। इससे वो निराश थे।

बच्चे को मोलेस्ट किया, पता ही नहीं था सेक्सुअलिटी क्या होती है: अनुराग कश्यप ने स्वीकारा, शब्दों से पाप छुपाने की कोशिश

अनुराग कश्यप के खिलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने बलात्कार का मामला दर्ज कराया है। इसके साथ ही अनुराग कश्यप के साथ काम कर चुकीं तापसी पन्नू और ऋचा चड्ढा के अलावा उनकी दोनों पूर्व-पत्नियों कल्कि कोचलिन और आरती बजाज ने उनका समर्थन किया है। इसी बीच उनके कुछ वीडियोज सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने यौन शोषण या दुर्व्यवहार की बातें स्वीकार की हैं। कंगना रनौत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।

इनमें से एक वीडियो में अनुराग कश्यप दिखा रहे हैं कि ‘जॉइंट को कैसे रोल’ किया जाता है। एक वीडियो इंटव्यू में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप कहते दिख रहे हैं कि कैसे जब वो काफी दिनों तक जूनियर थे तो सीनियर बनने पर एक जूनियर लड़के पर अपना गुस्सा उतारा। उन्होंने कहा कि वो उस लड़के को लेकर जाते थे और उसकी थप्पड़ों से पिटाई करते थे। उन्होंने बताया था कि वो उस बच्चे का यौन शोषण करते थे और उसे पता ही नहीं चलता था कि उसके साथ हो क्या रहा है।

बकौल अनुराग कश्यप, उनसे तंग आकर उस बच्चे ने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया और उन्होंने आकर उनसे पूछा कि अनुराग ने उनके बच्चे के साथ क्या किया है। हालाँकि, बाद में उन्होंने कहा कि वो इन चीजों को लेकर शर्मिंदा थे और उन्हें तब यौन शोषण जैसी चीजों की समझ नहीं थी और उन्हें ये सब प्राकृतिक लगता था क्योंकि उन्हें इन सबके बारे में किसी ने नहीं समझाया था।

उन्होंने कहा कि जब क्लास में उनके दोस्त हस्तमैथुन वगैरह के बारे में बात करते थे और बताते थे कि ये कैसे किया जाता है, तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था। इसी तरह जब विकास बहल पर यौन शोषण के आरोप लगे थे तो अनुराग कश्यप ने कहा था कि उन्होंने विकास के खिलाफ कार्रवाई की थी और असल में उन्होंने कुछ नहीं किया बल्कि ‘शानदार’ फिल्म के निर्देशन के लिए उन्हें फिर से साइन कर लिया था।

राजीव सिंह राठौड़ ने ट्विटर पर एक थ्रेड के जरिए इन वीडियों को अपलोड किया है और आरोप लगाया है कि कैसे अनुराग कश्यप पर पायल घोष के यौन शोषण के आरोपों के बावजूद खुद को फेमनिस्ट कहने वाले गैंग के एक भी व्यक्ति ने पायल का समर्थन नहीं किया। उन्होंने फेमिनिस्ट गिरोह पर मूवी माफिया को बचाने का आरोप लगाया। बता दें कि पायल घोष ने एक वीडियो के जरिए अनुराग कश्यप के बारे में खुलासा किया था।

इस मामले में अनुराग कश्यप की वकील भी वही प्रियंका खिमानी हैं, जो कभी सुशांत सिंह राजपूत की वकील हुआ करती थीं। राजीव ने कहा कि ये एक बड़ा खेल है क्योंकि अनुराग इससे पहले सुशांत को ड्रग्स एडिक्टेड और साइको कहते रहे हैं लेकिन अब उनके लिए काम कर चुकी वकील को हायर कर रहे हैं। इसी तरह अपने मित्र और फिल्म निर्देशक दिबाकर बनर्जी का भी समर्थन किया था।

पायल रोहतगी ने दिबाकर पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, तब अनुराग कश्यप ने कहा था कि जब पायल रोहतगी किसी फिल्म निर्देशक के साथ सोने की बात स्वीकार कर रही हैं तो फिर उन्हें किसी को अपना पेट दिखाने में क्या समस्या है? उन्होंने तब कहा था कि वो ‘Me Too’ के आरोपित दिबकर बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें खुद रोज ऐसे-ऐसे 50 नए एक्टर्स के मैसेज आते रहते हैं।

अनुराग कश्यप और विकास बहल ‘फैंटम फिल्म्स’ में पार्टनर थे, जो अब टूट चुकी है। आरोप है कि बहल ने एक लड़की के ऊपर बैठ कर उसके ऊपर हस्तमैथुन कर दिया। वो लड़की आर्ट डायरेक्टर थी। श्रेया नारायण ने आरोप लगाया था कि जब अनुराग कश्यप के पास पीड़िता शिकायत लेकर गई तो वो 2 साल तक चुप-चाप बैठे रहे और कुछ नहीं किया। जब सार्वजनिक बेइज्जती शुरू हुई, तब उन्होंने फैंटम को ख़त्म कर दिया।

असल में अनुराग कश्यप और इस गैंग के लोगों की आदत है कि वो अंग्रेजी के भारी-भड़कम शब्दों के जरिए अपने कुकर्म छिपाने की कोशिश करते हैं और इसे आधुनिक सोच का रूप दे देते हैं। उनके हिसाब से उनके सारे पाप सही हो जाते हैं क्योंकि उन्होंने लिबरल चोला चोला ओढ़ लिया है, जबकि जो उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाते, 100 साल पहले उनके पूर्वजों में से कोई साइकिल चलाते हुए भी गिर गया हो तो वो इसे ऐसा पाप मानते हैं, जिसके लिए कोई भी सज़ा कम ही है।

पायल घोष ने कहा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की। उन्होंने मुझसे इस तरह बात की जैसे फिल्म इंडस्ट्री में शारीरिक संबंध बनाना गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि हुमा कुरैशी, ऋचा चड्डा और मही गिल जैसी अभिनेत्रियाँ हमेशा उनसे फोन पर संपर्क में रहती हैं।”

लोकतंत्र के मंदिर से होता खिलवाड़, क्या उपवास के बहाने ही सही विपक्ष करेगा गाँधी को याद?

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश उपवास पर हैं। उपवास दूसरे की गलतियों के लिए। उपवास खुद पर हुए अलोकतांत्रिक हमले के खिलाफ। यही तो गाँधी का पथ है, हमारे बापू का पथ। उपवास करो पाप के खिलाफ। क्या विपक्ष हरिवंश के इस गाँधीवादी कदम से कोई सीख लेगा? क्या हमेशा गाँधी नाम की राजनीति करने की कोशिश में जुटा विपक्ष सही मायनों में इस गाँधीवादी तरीके से मिल रही सीख को अपने जीवन में उतारेगा? ये तो वक़्त ही बताएगा। 

ऐसा दृश्य राज्यसभा ने शायद ही देखा हो

संसद को हम बड़े गर्व से ‘लोकतंत्र का मंदिर’ कहते हैं। पर क्या वास्तव में जो हम कहते हैं उसे अमल में लाते भी हैं? भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने राष्ट्रपति काल के दौरान स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था, “सही राजनीति का सच्चा अर्थ यह है कि राजनीति, राजनीतिक-राजनीति होनी चाहिए, ना कि राजनीति के लिए राजनीति।” इसे व्यापक स्तर पर समझने की जरूरत है।

हाल ही में, कृषि बिल के विरोध में तृणमूल कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस और सीपीआई (एम) द्वारा अपनाया गया विरोध का तरीका बेहद ही असंवैधानिक तथा गैर-जिम्मेदाराना रहा। ये हम सब जानते हैं कि सोमवार को राज्यसभा में जो दृश्य था, वो पहले शायद ही कभी देखने को मिला हो। इनका विरोध इतना ज्यादा था कि कृषि विधेयक के विरोध में वेल में आकर हंगामा किया और रूल बुक फाड़ने की कोशिश की।

कृषि विधेयक पारित होने के दौरान इन सांसदों ने हंगामा तो किया ही किया, साथ ही साथ, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ दुर्व्यवहार भी किया। इन सांसदों को इनके गलत रवैये के कारण ठीक दूसरे ही दिन सभापति वैंकेया नायडू द्वारा इन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सांसदों में तृणमूल कॉन्गेरस के डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कॉन्ग्रेस के राजीव साटव, सैयद नासिर हुसैन, रिपुन बोरा और सीपीआई (एम) से एल्मलारान करीम और केके रागेश शामिल हैं। बता दें कि लोकसभा में यह विधेयक ध्वनि मत से पारित हो चुका है। 

इन नेताओं द्वारा लोकतंत्र के इस मंदिर में किए गए दुर्व्यवहार को भारतीय संसदीय इतिहास के पन्नों में एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा में विरोध की अपनी महत्ता है, परन्तु विरोध तार्किक एवं संवैधानिक होना चाहिए, केवल विरोध के लिए विरोध ठीक बात नहीं है। हमें यह समझने की जरुरत है कि विरोध के लिए विरोध राजनीति को रसातल की ओर ले जाता है।

विपक्ष इतने पर ही नहीं रुका बल्कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सभापति वैंकेया नायडू ने खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि विपक्ष का एजेंडा सदन को बिल पास करने से रोकना था।

क्या हरिवंश से गाँधीवादी रवैया सीखेगा विपक्ष?

एक महान व्यक्ति के क्या गुण होते हैं, यह हरिवंश ने अपने महान कृत्य से साबित किया। जब राज्यसभा से निलंबित ये 8 सांसद गाँधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए, तब ठीक अगले ही सुबह सांसदों के धरनास्थल पर खुद उपसभापति हरिवंश उन्हें चाय पिलाने पहुँचे तथा उनसे बातें भी की। यह उनके बड़प्पन और उदारता को दर्शाता है। साथ ही साथ उनका यह कृत्य गाँधी जी के सिद्धांतो के मूल को आत्मसात करता हुआ दर्शाता है। उन्होंने यह साबित किया, ‘मतभेद भले ही हो, मनभेद नहीं होने चाहिए।’ लोकतंत्र की गरिमा को लज्जित करने वालों के समक्ष हरिवंश ने सर्वोत्तम उदाहरण पेश किया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के इस कदम की तारीफ करते हुए ट्वीट किया और कहा, “जिन सांसदों ने उन पर हमला किया और उनका अपमान किया, उनके लिए स्वयं चाय लेकर जाना उनके खुले विचार और बड़प्पन को दर्शाता है। यह हरिवंश जी की महानता को दिखाता है। मैं देश की जनता के साथ मिलकर इसके लिए हरिवंश जी को बधाई देता हूँ।” क्या इन विपक्षी दलों के नेताओं को हरिवंश जी से सीख लेने की जरूरत नहीं है? 

सदन में विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा किए गए गलत व्यवहार से दुखी हरिवंश ने एक दिन के उपवास का फैसला लिया है। इस सन्दर्भ में उन्होंने सभापति महोदय वैंकेया नायडू और राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है, और बतलाया कि सदन में जो कुछ भी हुआ उससे वे बहुत दु:खी हैं। निश्चित तौर पर, हरिवंश का यह कदम मर्यादा की राजनीति को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ी के राजनेताओं को एक सबक के रूप में स्थापित होगा।

आज खुद से सवाल पूछने की जरूरत!

आज हमें खुद से कुछ प्रश्न करने की जरूरत है कि लोकतंत्र के मंदिर में हुई यह शर्मनाक हरकत से हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सीख दे रहें हैं? राजनीति की दशा और दिशा क्या हो, यह संसद के माध्यम से स्थापित होती है। पर क्या हम सही मायने में देश की राजनीति को सही दिशा देने हेतु प्रेरित एवं प्रतिबद्ध हैं? हमारे राजनेताओं को आज इन प्रश्नों को बारिकी से समझने की जरुरत है।

हाल ही में राज्यसभा सांसद डॉ विनय सहस्रबुद्धे ने संसद में अपने भाषण के दौरान राजनीति के मूल-तत्व को उद्घाटित करते हुए बड़ा ही सटीक कहा था कि दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए राजनेताओं को ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ रिस्पॉन्सिबिलिटी’ को आत्मसात करने के जरूरत है। आज यह जरूरी है कि इस मूल-मंत्र के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए, सच्ची एवं सार्थक राजनीति का एक अप्रतिम उदाहरण स्थापित करने के दिशा में हमारे राजनेताओं को समझने एवं मनन करने की जरूरत है।

‘खून की प्यासी’ होती हैं तलाकशुदा महिलाएँ’ – कॉन्ग्रेसी उदित राज ‘सबसे बड़े दलित नेता’ ने दिया ‘दिव्य ज्ञान’

देश में किसी भी मुद्दे पर बहस चल रही तो और उसमें घुस कर पूर्व-सांसद उदित राज दलित-सवर्ण न खेलें तो फिर वो बहस ही अधूरी रह जाती है। भाजपा में टिकट न मिलने से कॉन्ग्रेस में आए उदित राज ने अब अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर कमेंट्री करते हुए उन्हें सज्जन व्यक्ति करार दिया है और इस खबर की चर्चा की है कि कैसे उनकी दोनों पूर्व-पत्नियाँ कल्कि कोचलिन और आरती बजाज उनका समर्थन कर रही हैं नहीं तो तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ होती हैं।

कभी अपने-आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ घोषित कर चुके उदित राज ने ट्विटर पर लिखा, “अनुराग कश्यप सज्जन व्यक्ति लगते हैं। तलाक़ की गई दोनो पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, वर्ना खून की प्यासी होती हैं। कंगना रनौत और पायल घोष को जेल में बंद कर देना चाहिए जो सामाजिक भ्रष्टाचार फैला रही हैं।” उन्होंने दो महिलाओं को बिना मतलब जेल भेजने की बात की और सारी तलाकशुदा महिलाओं को ‘खून की प्यासी’ करार दिया।

यानी, उदित राज का मानना है कि जिन महिलाओं का तलाक हो जाता है, वो अपने पूर्व-पति के लिए ऐसी दुर्भावना रखती हैं कि उनका खून पीना चाहती हैं। वैसे, फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप को देख कर लगता नहीं कि उनके शरीर में खून की कमी है। महिला हितों की बात करने वाले उदित राज जैसे लोग जहाँ एक तरफ खुद को आधुनिक सोच वाला दिखाते हैं, वहीं महिलाओं के लिए इस तरह के तुच्छ विचार रखते हैं।

अगर सारी तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ हैं फिर तो जितने भी तलाकशुदा पति हैं, वो ज़िंदा ही नहीं बचने चाहिए थे? या फिर उनमें से अधिकतर आज अस्पताल में खून की बोतलें चढ़ाते रहते। अरबाज खान और ऋतिक रौशन के बारे में ‘सबसे बड़े दलित नेता’ के क्या विचार हैं, ये अभी तक साफ़ नहीं हो सका है। लेकिन हाँ, महिलाओं को लेकर उनकी सोच पहले भी कई बार सामने आ चुकी है।

साथ ही उन्होंने बलात्कार के प्रयास की पीड़िता को सामाजिक भ्रष्टाचार फैलाने का आरोपित करार दिया। उदित राज की मानें तो बलात्कार का प्रयास करने वाले की तलाकशुदा पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, तो पीड़िता को ही जेल भेज देना चाहिए और इसे सामाजिक भ्रष्टाचार का नाम दिया जाना चाहिए। वैसे 1996 में एक ‘खून की प्यासी’ नामक फिल्म आई थी लेकिन उसमें किसी तलाकशुदा महिला को नहीं दिखाया गया था।

इसी तरह उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने सूई से लेकर परमाणु बम तक बनाया लेकिन फिर भी उसे देशद्रोही कहा जाता है लेकिन भाजपा हवाई जहाज तक बेच कर भी देशभक्त है। भले ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने सारी सरकारी कंपनियों को खटारा बना दिया और मोदी सरकार प्राइवेट प्लेयर्स को मौका देकर उन्हें उबारने की कोशिश में लगी हों, लेकिन उदित राज को इन सब से क्या मतलब, क्यों ही समझें इन चीजों तो… दलित घुसा दिया, नेहरू-गाँधी का याद किया, काफी है।

वैसे कल को उदित राज ये भी ना कह दें कि जवाहरलाल नेहरू ने खुद बैठ कर कुम्हार की तरह मिट्टी गूँथ कर हवाई जहाजों का निर्माण किया। कॉन्ग्रेस के लोगों ने हवाई जहाज का अविष्कार किया, राइट ब्रदर्स को इस तकनीक के बारे में बताया और फिर भारत में उसे उड़ाने लगे – शायद उदित राज कल को ये भी लिख सकते हैं। उनकी सोच है कि शायद मोदी सरकार ने ‘हवाई जहाज’ वैसे ही बेच दिया है, जैसे कोई खिलौना हो।

वहीं उदित राज का आरोप है कि उनसे Y+ सिक्योरिटी इसलिए छीन ली गई, क्योंकि वो आरक्षण का समर्थन करते हैं और कंगना रनौत आरक्षण का विरोध करती हैं, इसीलिए उन्हें सरकारी सिक्योरिटी दी गई है। वैसे आरक्षण का समर्थन और विरोध ही इसकी एकमात्र योग्यता है तो सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह को क्यों सुरक्षा मिली हुई है, ये उन्हें बताना चाहिए। क्या ये दोनों नेता भी आरक्षण के विरोधी हैं।

वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत ने कहा था कि फिल्म में रोल पाने के लिए हीरो के साथ सोना पड़ता था तो क्या उन्होंने भी ये ‘अपराध’ किया है। उनकी सोच देखिए। एक महिला से वो सीधे पूछ रहे हैं कि क्या वो अभिनेताओं के साथ सोती थीं? ऐसी सोच वाले लोगों के लिए बलात्कार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं के लिए भी मन में ऐसे ही आपत्तिजनक और घृणित सवाल होते हैं, आश्चर्य है!

साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष क्यों बनना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ये सारी भविष्यवाणियाँ कीं- कोरोना आएगा, बेरोजगारी बढ़ेगी, अचानक लॉकडाउन से कुछ नहीं होगा। टेस्टिंग बढ़नी चाहिए और चीन परेशानी पैदा करेगा, आर्थिक स्थति बिगड़ेगी। इनमें से आधी बातें ऐसी हैं, जो सभी को पता हैं और आधी ऐसी हैं, जिनका कॉन्ग्रेस ने ही नैरेटिव बनाया है। और, अगर सारी सही हैं तो फिर राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नहीं, ‘राष्ट्रीय भविष्यवेत्ता’ घोषित किया जाना चाहिए।

असल में गाँवों में आजकल भी कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका काम होता है लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए बिना माँगे राय देना। बाद में कहीं कोई गड़बड़ होती है तो वो कहते हैं कि देखो, मैंने कहा था ऐसा मत करो। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की अगर यही योग्यता है तो फिर इन्हीं लोगों की एक टीम बना कर उनमें से किसी एक को चुन लेना चाहिए। या फिर बहुत लोग तो आकाश देख कर बता देते हैं कि आज बारिश होगी।

उदित राज दलितों को हिन्दू नहीं मानते। उनका कहना है कि समुदाय विशेष को डराने के लिए ही दलितों को हिन्दू बताया जाता है। वो कहते हैं कि अगर गाँधी-नेहरू नहीं होते तो आज का भारत ब्रिटिश युग से भी बदतर होता। वो यूएन की रिपोर्ट का हवाला देकर कहते हैं कि दलित महिलाओं की औसत उम्र कम है, जिसके लिए सवर्ण जिम्मेदार हैं। वो सवर्णों को बलात्कारी कहने से भी नहीं हिचकते।

उदित राज ने लिखा था कि दलित महिलाओं का बलात्कार अधिकतर सवर्ण ही करते हैं। आजकल की वेब सीरीज में भी ऐसा ही दिखाया जाता है। वो उत्तर प्रदेश में प्रियंका गाँधी को दलितों की आवाज़ करार देते हैं। जब सचिन पायलट ने कॉन्ग्रेस से बगावत की थी तो उन्होंने कहा था कि पायलट इतनी कम उम्र में ही प्रदेश अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री बन गए थे, जबकि कई लोग ज़िंदगी भर मेहनत कर के भी प्रधान तक नहीं बन पाते।

जब तक कोई भाजपा विरोधी वीर सावरकर को गाली नहीं दे तब तक उसका विरोध पूरा नहीं होता। उदित राज भी इस मामले में अपवाद नहीं हैं। उन्होंने तो आरोप लगाया था कि सावरकर ने 6 बार अंग्रेजों से माफ़ी माँगी थी और ब्रिटिश फ़ौज की मदद की थी। साथ ही ये भी कहा कि जिन्ना ने उनकी बात मान कर ही भारत का विभाजन करवाया। उन्होंने इसे भाजपा-संघ से जोड़ दिया। सावरकर को गाली देकर सभी कॉन्ग्रेस समर्थक खुद को ‘कूल’ मानते हैं।

इसी तरह उदित राज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद का अपमान किया था। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीते और 2019 में टिकट न मिलने पर भाग खड़े हुए उदित राज ने ट्वीट कर ख़ुद को ‘बोलने वाला’ दलित नेता बताया था और कहा कि भाजपा को दलितों से नफ़रत है और वो ‘बोलने वाले’ दलित की जगह सीट हारना पसंद करेंगे। वो संवैधानिक पदों को भी दलित-सवर्ण के दौरे में बाँधते रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में लगातार हो रहे मंदिरों पर हमले: चंद्रबाबू नायडू ने उठाया CM रेड्डी की चुप्पी पर सवाल, कहा- वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर बढ़ रहे हमलों के मद्देनजर टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को प्रदेश के सीएम पर आरोप लगाया कि इतने मामले आने के बावजूद उन्होंने अभी तक एक भी मंदिर में जाने की ज़हमत नहीं उठाई। 

अपने पार्टी नेताओं को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम चाहे कोई भी धर्म का अनुसरण करता हो, मगर उसका फर्ज है कि वह हर धर्म के श्रद्धालुओं को समानता और न्याय दें। उन्होंने कहा कि ये आज की सरकार की जिम्मेदारी है वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में कई मंदिरों पर हमले के मामले सामने आए हैं। अभी हाल की घटना में उपद्रवियों ने मकापेटा गाँव में प्राचीन काशी विश्वेश्वरा स्वामी मंदिर में नंदी की प्रतिमा को तोड़ दिया था। इसके अलावा मंदिर से आभूषण और कई कीमती चीजें चोरी हुई थी। 

इसी तरह प्रदेश के पूर्वी गोदावरी इलाके में अंतर्वेदी एक तीर्थस्थल है। वहाँ कुछ समय पहले एक 62 साल पुरानी श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा की मूर्ति को जलाकर राख करने का मामला सामने आया था। अजीब बात यह थी जिस समय घटना हुई, उस दौरान सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे। इस घटना के उजागर होने के बाद कई हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने प्रदर्शन किया था और ईसाई मिशनरी ग्रुप्स पर आरोप लगाया था।

नेल्लोर में रथ पर जब हमला हुआ, तो पुलिस ने कहा कि यह काम मानसिक तौर पर अस्थिर इंसान ने किया है। जिस पर चिलकुर मंदिर के डॉ सीएस रंगाराजन ने कहा था कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में संयोजित रूप से हिंदू मंदिरों पर हमले हो रहे हैं।

यहाँ बता दें कि नेल्लोर के प्रसन्ना वेंकटेश्वर मंदिर में पिछली फरवरी को भी एक रथ जलाया गया था। उसी महीने, गुंटूर जिले के रोम्पीचर्ला गाँव में श्री वेणु गोपाल स्वामी मंदिर में देवताओं की मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था। इसके अलावा श्री गणेश की मूर्ति भी वहाँ से कथित तौर पर चोरी हो गई थी।

फिर जनवरी में ही, अज्ञात उपद्रवियों ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पीथापुरम शहर में हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियों को तोड़ दिया था। साथ ही उन्होंने उन बैनरों को भी जला दिया, जिन पर हिंदू देवताओं की तस्वीरें छपी थीं।

नायडू ने कल ऐसे ही मामलों का उल्लेख करते हुए वाईएसआरसी पर कई अन्य आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह पार्टी झूठों की और जालसाजों की है। उनके नेता ब्लैकमेल करने, बरगलाने में माहिर हैं। अपनी पार्टी को सेकुलर कहते हुए कहा जब तक उनकी पार्टी सत्ता में थी उन्होंने हर धार्मिक स्थल की रक्षा की। वहीं वाईएसआरसी सिर्फ़ टीडीपी के ख़िलाफ झूठी जानकारी के साथ अभियान चलाती रही।

नायडू ने इस बात का भी जिक्र किया कि यह शर्म की बात है वाईएसआरसी सांसद, टीडीपी को निशाना साधने के लिए संसद परिसर में बैठें हैं न कि प्रदेश की जनता के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने कभी अपने आंदोलनों में किसानों का मुद्दा नहीं उठाया न कभी केंद्र से सवाल किए। उन्होंने पूर्व मंत्री अत्चन्नािदु को 80 दिन तक जेल में डाले जाने पर सत्ता पक्ष की निंदा की। साथ ही कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने लेबर मिनिस्टर गुम्मानुर जयाराम के ख़िलाफ़ एक्शन नहीं लिया जबकि  ईएसआई स्कैम में उनकी संलिप्ता के पर्याप्त सबूत थे।

दीपिका पादुकोण के खिलाफ NCB जुटा रही सबूत, जल्द भेजा जा सकता है समन: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के ख़िलाफ़ सबूत जुटा कर एक ओर जहाँ नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उन्हें जल्द समन भेजने की तैयारी में जुटी है, वहीं उनकी टैलेंट मैनेजर करिश्मा प्रकाश से इस मामले में पूछताछ जारी है। उनके अलावा सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह, सिमोन खंबाता को भी इस हफ्ते तक एनसीबी द्वारा समन भेजे जाने के पूरे-पूरे आसार हैं।

दीपिका का नाम ड्रग मामले में पड़ताल के दौरान इसी हफ्ते सामने आया है। इस बीच उनकी व्हॉट्सएप की एक बातचीत भी वायरल हो चुकी है। उस चैट को लेकर दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण उसमें किसी k नाम के शख्स से कथित तौर पर हैश की माँग कर रही हैं। अब यह ‘k’ कौन है? इसी को लेकर कयास लगाए गए हैं कि वह करिश्मा प्रकाश हैं, उनकी मैनजर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2017 को हुई यह बातचीत इस प्रकार है:

10:03AM (+91-992——-) D(D मतलब दीपिका माना जा रहा है):K..तुम्हारे पास माल है?
10:05 AM (+91-961——-) ‘K’: मेरे पास है लेकिन घर पर है। मैं बांद्रा में हूँ।10:05, K: मैं अमित से पूछ सकती हूँ अगर आपको चाहिए।
10:07, दीपिका:हाँ!! प्लीज
10:08, K: अमित के पास है, वो इसे ला रहा है।
10:12, दीपिका: हैश न?
10:12, दीपिका: वीड नहीं।
10:14, K: आप कोको किस समय आ रहे हो?
10:15: दीपिका: 11:30/12:00
10:15: दीपिका: शाल किस समय तक है वहाँ?
K: मुझे लगता है कि उसने 11:30 तक कहा है क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और जाना है

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पैसों की हेरफेर के दौरान कुछ चैट्स को खंगाला था, उसी के बाद उन्हें ड्रग एंगल के सबूत मिले, जिसे उन्होंने एनसीबी को भेज दिया। एनसीबी ने मामला संभालते ही सारी पड़ताल की और करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया। इमें रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती का नाम भी पूरी पड़ताल में शामिल है।

बता दें कि ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती 8 सितंबर को गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद से वे मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रिया पर आरोप है कि वे सुशांत के लिए ड्रग्स का प्रबंध करती थीं। दावा है कि रिया ने करीब 25 बॉलीवुड सेलेब्स का नाम एनसीबी के सामने लिया है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: जिसे बताया हेट स्पीच, वो अनुवाद ही गलत… मधु किश्वर ने दायर की हस्तक्षेप याचिका

सुदर्शन टीवी के शो ‘यूपीएससी जिहाद’ का मामला इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में गरमाया हुआ है। ऐसे में मधु पूर्णिमा किश्वर ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर पर भी दी है। 

उन्होंने बताया है कि कोर्ट में उनके बयान का गलत अनुवाद करके उसे हेट स्पीच के सबूत की तरह पेश किया गया। उनकी याचिका बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट पर भी आधारित है। यह याचिका कोर्ट में वकील रवि शर्मा की ओर से डाली गई है। 

अपने ट्विटर पर मधु पूर्णिमा किश्वर लिखती हैं, “सुदर्शन टीवी के शो यूपीएससी जिहाद में डिबेट के दौरान मेरी टिप्पणी के छोटे से हिस्सा का बेहूदा अनुवाद करके, कोर्ट में हेटस्पीच के सबूत के तौर पर पेश किए जाने के बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 15 सितंबर को ‘यूपीएससी जिहाद’ शो के टेलीकास्ट के बाद वकील फिरोज इकबाल खान ने मधु पूर्णिमा किश्वर और शांतनु गुप्ता की टिप्पणी का हवाला दिया था। इसके बाद कोर्ट ने बिंदास बोल शो के शेष एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी।

इकबाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि किश्वर ने शो में कहा, “कोर्ट ने खुद ही अपने ऊपर सवाल खड़ा कर लिया है। उन्हें लगता है कि गज़वा-ए-हिंद के मिशन को पूरा करना उनका अधिकार है। वे इसे अपना अधिकार मानते हैं। वे समझते हैं कि पूरे राष्ट्र को कन्वर्ट किया जाना चाहिए। वे घुसपैठ करके सार्वजनिक कार्यालयों पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने पहले दिन से शिक्षा मंत्रालय में घुसपैठ की है।”

अपनी ‘हस्तक्षेप याचिका’ में किश्वर ने कहा है कि उन्हें सुरेश चव्हाणके को दिए अपने बयान पर पूरा भरोसा है और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किश्वर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सुदर्शन टीवी के शो में सरकार को बायपास करने की कोशिश है, क्योंकि सरकार ही फ्री स्पीच पॉलिसी निर्धारित करने के लिए फाइनल अथॉरिटी है।

इस पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता ने याचिकाकर्ता पर यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके (किश्वर के) बयानों को गलत तरह से पेश किया। इस आवेदन में उन्होंने लिखा कि वह सेकुलरिज्म में विश्वास करती हैं। उनका कहना है कि हर इंसान की जन्मजात स्वतंत्रता वास्तव में अपना रास्ता और उद्देश्य खोजने की होती है।

गौरतलब है कि इससे पहले सुदर्शन न्यूज केस में ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।

‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया थ, “सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”

यहाँ बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी, महेश जेठमलानी और अधिवक्ता गौतम भाटिया और शाहरुख आलम भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए उपस्थित हो चुके हैं। अब इस मामले को आज यानी 23 सितंबर को दोपहर 2 बजे उठाया जाएगा।

गौरतलब है सुदर्शन न्यूज के ‘बिंदास बोल’ शो पर 15 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रथम दृष्टया अवलोकन करने के बाद शो के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा ​​और केएम जोसेफ की एक पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा होस्ट किया गया शो ‘बिंदास बोल’ सिविल सेवाओं में समुदाय विशेष के प्रवेश को सांप्रदायिक रूप दे रहा था।

वहीं, जामिया छात्रों की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट शादान फरासत ने कहा था, “यह सुनिश्चित करना राज्य की सकारात्मक ज़िम्मेदारी है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से निकले अधिकारों का एक नागरिक के ‌लिए उल्लंघन न हो। अगर उनका उल्लंघन किया जाता है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट चुपचाप देखता रहेगा?” उन्होंने तर्क दिया था कि ‘हेट स्पीच’ कानून मौजूदा मामले में लागू होता है, शो की भाषा और भंगिमा के कारण शेष कड़ियों की टेलीकास्टिंग पर रोक लगाने के लिए ठोस मामला बनाता है।

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा अपने बेबाक बोल के लिए जाने जाते हैं। टीवी स्टूडियो में वो राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारों को भी आइना दिखाने से नहीं चूकते। फिर से उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ पर ही एक बहस में हिस्सा लेते हुए अर्बन नक्सलियों के लॉजिक का जवाब दिया।

बॉलीवुड में ड्रग्स नेटवर्क में एक के बाद एक फ़िल्मी हस्तियों के नाम सामने आ रहे हैं और बहस में NCB की कार्रवाई पर चर्चा हो रही थी, जिसमें संबित पात्रा और मेघना पंत भी हिस्सा ले रहे थे।

इस बार ‘अर्बन नक्सलियों’ ने अजीबोगरीब लॉजिक दिया कि हिन्दुओं के भगवान लोग भी तो ड्रग्स लेते हैं। साथ ही वामपंथियों ने भगवान शिव के ड्रग्स लेने की बात करते हुए न सिर्फ हिन्दुओं को नीचा दिखाने की कोशिश की, बल्कि ड्रग्स लेने वाले बॉलीवुड सेलेब्स का भी बचाव किया। साथ ही लॉजिक था कि किसी की प्राइवेट ज़िंदगी को क्यों निशाना बनाया जाए, अगर वो आनंद के लिए ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वामपंथियों ने इसे ‘प्राइवेसी में छापेमारी’ करार दिया था। इसके जवाब में संबित पात्रा ने पूछा कि आखिर अर्बन इलीट लोग इस तरह के गँवार लॉजिक लेकर कैसे आ जाते हैं? ‘इंडिया टुडे’ में राहुल कँवल के शो में लेखिका मेघना पंत ये लॉजिक लेकर आईं। उनका कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

संबित पात्रा ने कहा कि मेघना पंत जैसे लोगों की ‘क्लासिकल हिपोक्रिसी’ ये है कि वो हिन्दू धर्म छोड़ कर किसी अन्य मजहब के देवी-देवताओं के बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि एक तो इन्होंने भगवान शिव को ड्रग्स की चर्चा में घसीट लिया, ऊपर से इनकी मुस्कराहट देखिए। उन्होंने कहा कि ऐसे तथाकथित ‘हाई एन्ड एलीट्स’ के साथ यही समस्या है, जो ड्रग्स के ‘एन्ड यूजर’ वाला बहाना देते हैं।

संबित पात्रा का जवाब 8:20 के बाद (वीडियो साभार: इंडिया टुडे)

संबित पात्रा ने कहा कि हमारे देश में जो चीज गैर-क़ानूनी है, वो गैर-कानूनी है। जैसे- हत्या। उन्होंने कहा कि किसी ने ‘प्राइवेट’ में किसी की हत्या कर दी तो क्या उसे इसीलिए छोड़ दिया जाएगा क्योंकि ये उसकी प्राइवेट लाइफ है? उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की हत्या/आत्महत्या की बात करते हुए कहा कि इसके जो भी दोषी हैं, उन्हें सिर्फ इसीलिए नहीं छोड़ दिया जा सकता है क्योंकि ये उन्होंने अपनी ‘प्राइवेट लाइफ’ में किया।

संबित पात्रा ने कहा कि जब एन्ड यूजर्स से पूछताछ होगी, वो नाम उगलेंगे – तभी तो बड़े ड्रग्स माफिया को पकड़ा जा सकेगा, उन पर शिकंजा कसा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अगर ड्रग्स के एन्ड यूजर हैं तो फिर उनका कोई न कोई स्रोत होगा और इस तरह से पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा। उनके इस जवाब के बाद मेघना पंत बगले झाँकने लगीं। वहीं शो का संचालन कर रहे पत्रकार राहुल कँवल ने भी इस जवाब की तारीफ की।

इससे पहले संबित पात्रा ने इसी चैनल पर बताया था कि आखिर राजदीप सरदेसाई ने रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू क्यों लिया। उन्होंने कहा था कि ये सब इसीलिए किया गया, क्योंकि इसके पीछे एक खास एजेंडा था। उन्होंने कहा था कि वो किसी का नाम नहीं लेंगे, लेकिन 13 दिसंबर 2001 को एक रिपोर्टर ने क्या किया था, वो ये बताना चाहेंगे। उन्होंने याद दिलाया था कि कैसे एक पत्रकार (सरदेसाई) ने संसद भवन पर हुए हमले को अपनी ज़िंदगी का ‘बेस्ट डे’ बताया था।

राजनीति में आएँगे ‘रॉबिनहुड बिहार के’? संस्कृत से UPSC क्लियर करने वाले गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में भी दिया था इस्तीफा

माफिया अपराधी माँगे दुआ भगवान से.. चोर घूसखोर काँपे इनके नाम से..
हिल जाए इलाका इनकी एक दहाड़ से.. डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय रॉबिनहुड बिहार के..
यारों के यार हैं ये जनता के हीरो.. इनका काम सबसे मस्त है..
हर गली मोहल्ले में चर्चा है यारों कि इंसान जबरदस्त है
मसीहा गरीब के हैं बक्सर गंगा पार के
डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय रॉबिनहुड बिहार के..

ये पंक्तियाँ हैं बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पर बने गाने ‘रॉबिनहुड बिहार के’ का, जिसे दीपक ठाकुर ने लिखा, गाया और कम्पोज किया है। गुप्तेश्वर पांडेय का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है क्योंकि वो अक्सर लाइमलाइट में रहे हैं और अपने कामकाज के सख्त तरीके को लेकर मीडिया की चर्चा में रहते हैं। उनके बयान भी अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं। ऐसे में अब उनके इस्तीफे को लेकर चर्चा हो रही है।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है, जिसे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने स्वीकार भी कर लिया। गुप्तेश्वर पांडेय ने जानकारी दी है कि वो बुधवार (सितम्बर 23, 2020) की शाम अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लाइव आकर जनता के समक्ष अपनी बात रखेंगे। ध्यान देने वाली बात है कि बिहार में 2 महीने में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। वो 5 महीने में ही रिटायर होने वाले थे।

गृह विभाग ने मंगलवार की रात ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी। हाल ही में बक्सर के जदयू जिलाध्यक्ष के साथ उनकी तस्वीर वायरल हुई थी, जिसके बाद उनके राजनीति में आकर चुनाव लड़ने की सम्भावना जताई जा रही है। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले मुजफ्फरपुर के जोनल आईजी भी रहे हैं। एसपी, रेंज डीआईजी, एडीजी मुख्यालय और डीजी बीएमपी सहित कई पदों पर उन्होंने अपनी सेवाएँ दी हैं।

हालाँकि, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए कम से कम 3 महीने पहले आवेदन देने का नियम है लेकिन गुप्तेश्वर पांडेय की वरिष्ठता को देखते हुए बिहार सरकार ने उनके लिए नरमी बरती। केएस द्विवेदी के रिटायर होने के बाद उन्हें फ़रवरी 2019 में बिहार के डीजीपी का कार्यभार सौंपा गया था। जानने वाली बात ये है कि 11 वर्ष पहले 2009 में भी उन्होंने आईजी रहते वीआरएस ले लिया था। तब भी उनके राजनीति में आने की चर्चा हुई थी।

लेकिन, उन्होंने बाद में फिर से अपना वीआरएस वापस ले लिया था। अब उनके बाद बिहार में एसके सिंघल को डीजीपी का प्रभार सौंपा गया है। फ़िलहाल वो डीजी होमगार्ड के पद पर कार्यरत हैं। एसके सिंघल लम्बे समय से मुख्यालय में तैनात थे, जिसके बाद उन्हें डीजी के रूप में पदोन्नति मिली। इसके साथ ही बिहार में 3 आईपीएस अधिकारियों को इधर से उधर किया गया। सिंघल को पुलिस महकमे के चुस्त-दुरुस्त अधिकारियों में से एक में रखा जाता है।

जहाँ तक गुप्तेश्वर पांडेय की बात है, पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद उनका चयन आईआरएस के लिए हुआ था लेकिन वो अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसके बाद वो आईपीएस बनने में सफल रहे। उन्होंने 31 वर्षों तक पुलिस विभाग को अपनी सेवाएँ दीं। बिहार को लेकर उनके अनुभव का अंदाज़ा इसी से लगा लीजिए कि वो राज्य के 26 जिलों में किसी न किसी पद पर कार्यरत रहे हैं।

हालाँकि, गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले भी कहते रहे हैं कि अगर लोगों को लगेगा कि उन्हें नेता बनना चाहिए तो वो राजनीति में भी आएँगे ही। उनका जन्म 1961 में बक्सर के ही गेरुआ गाँव में हुआ था, जो सड़क, अस्पताल, बिजली और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कटा हुआ था। गुप्तेश्वर पांडेय खुद कहते हैं कि उन्होंने गंजी-बनियान पहन कर स्कूलिंग की है और उन्हें इंटर तक हिंदी बोलना भी नहीं आता था, वो भोजपुरी बोलते थे।

गुप्तेश्वर पांडेय के एक भाई किसान हैं और एक भाई मीडिया में हैं। एक बात रोचक है कि उन्होंने संस्कृत में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एमए का सेशन लेट होने के कारण वो यूपीएससी की तैयारी में लग गए। गुप्तेश्वर पांडेय खुद स्वीकारते रहे हैं कि उनके खानदान में कभी कोई उनसे पहले स्कूल ही नहीं गया। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हस्ताक्षर करने आता था। उनके पिता को पता तक नहीं था कि बेटा कहाँ पढ़ रहा है – वो साधु थे।

गुप्तेश्वर पांडेय ने ‘लल्लनटॉप’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने एक औसत विद्यार्थी को आईएएस बनते देखा, जिसके बाद उन्हें भी तैयारी करने का मोटिवेशन मिला। जब गुप्तेश्वर पांडेय बेगूसराय में आए थे, तब माफिया अशोक सम्राट की वहाँ तूती बोलती थी और उसे ही वहाँ का अघोषित सरकार माना जाता था। तरह-तरह के कारखानों के माध्यम से वो अपना साम्राज्य चलाता था। गुप्तेश्वर पांडेय ने उन लोगों को जेल में डालना शुरू किया, जिन पर दर्जनों केस दर्ज थे।

दीपक ठाकुर का गाना ‘रॉबिनहुड बिहार के’ (वीडियो साभार: DT Production)

42 मुठभेड़ और 400 से अधिक अपराधियों को जेल भेज कर वो चर्चा में आए। यूपीएससी में संस्कृत को अपना विषय चुनने वाले गुप्तेश्वर पांडेय बिहार को लेकर खासे चिंतित रहे हैं और यहाँ विकास के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। सुशांत सिंह राजपूत मामले में उन्होंने जिस तरह से पीड़ित परिवार का साथ दिया और केस को सीबीआई तक भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उस दौरान उनकी सक्रियता सभी ने देखी।

वो गीत-संगीत में भी खासी रूचि रखते हैं। कुछ ही महीनों पहले उनके गाए गाने का एक एल्बम भी आया था। हाल ही में एक गाने के वीडियो में वो दिखे थे, जो उनके ही ऊपर था। अब देखना ये है कि गुप्तेश्वर पांडेय राजनीति में अगर आते हैं तो, वैसी ही धाक जमा पाएँगे या नहीं – जैसी उन्होंने पुलिस सेवा में जमाई है! कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार का करीबी होने के कारण वो जदयू में शामिल हों।

पूनम पांडे का पति है सैम अहमद, 11 दिन पहले ही दोनों ने की शादी… अब मोलेस्टेशन, मारपीट करने में गिरफ्तार

हाल ही में गुपचुप तरीके से शादी करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री पूनम पांडे के पति सैम अहमद बॉम्बे को पुलिस ने गोवा में कल (सितंबर 22, 2020) गिरफ्तार कर लिया। उनके ख़िलाफ़ पूनम ने मोलेस्टेशन, धमकी देने और मारपीट करने का आरोप लगाया था।

पुलिस में दर्ज श‍िकायत के मुताबिक, दक्ष‍िण गोवा के कानाकोना गाँव में पूनम पांडे किसी फिल्‍म की शूटिंग कर रही थीं। यह घटना तभी हुई। कानाकोना पुलिस थाने के इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम चव्‍हाण के अनुसार, पूनम ने अपनी श‍िकायत में कहा है कि सोमवार (सितंबर 21, 2020) की रात उनके पति सैम अहमद ने उन्‍हें मोलेस्‍ट किया और मारपीट की। इतना ही नहीं, पूनम ने यह भी कहा कि सैम अहमद बॉम्‍बे ने उन्‍हें अंजाम भुगतने की भी धमकी दी है।

पूनम की शिकायत के बाद उनके पति सैम अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि दक्षिण गोवा एसपी पंकज कुमार सिंह ने की है। उन्होंने बताया कि अभिनेत्री को प्रताड़ित, मारपीट और मारने की धमकी देने के लिए पुलिस ने सैम अहमद बॉम्बे को गिरफ्तार किया है। उनका अब मेडिकल टेस्‍ट होना है, जिसके बाद सैम को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

यहाँ बता दें कि अभी पिछले हफ्ते ही पूनम अपने पति के साथ हनीमून मनाने गईं थीं। इस दौरान पूनम अपने पति सैम बॉम्बे के साथ बेहद सिंपल नजर आईं थीं। उनकी माँग में सिंदूर था, हाथों में चूड़ा था और उन्होंने गले में मंगलसूत्र भी पहन रखा था।

उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री के 46 वर्षीय पति सैम अहमद पेशे से एक फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनका घर दुबई में है। उनके एक प्रोडक्शन हाउस का नाम बॉम्बे मैटिनी फिल्म्स भी है।

वहीं, पूनम पांडे कानपुर से हैं। उन्होंने साल 2013 में फिल्म नशा से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद से वह अपने बोल्ड फोटोशूट के कारण अक्सर चर्चा में रहीं। उन्होंने कई तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। सैम अहमद बॉम्बे के साथ उनका रिलेशन करीब तीन साल पुराना है। बीती 27 जुलाई को दोनों ने सगाई की थी और 10 सितंबर को सोशल मीडिया पर खबर दी थी कि उन्होंने शादी कर ली है।