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हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर एक ऐसे लेखक थे, जो गद्य और पद्य – दोनों ही विधाओं में समान रूप से पारंगत थे। विद्रोह और क्रांति हो या फिर श्रृंगार और प्रेम, उन्होंने कविता की हर विधा में साहित्य रचे और अपनी कुशलता दिखाई। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को इतिहास का अच्छा ज्ञान था और द्वापर युग से उनका लगाव इतना था कि उन्होंने खुद स्वीकारा है कि वो समसामयिक समस्याओं के समाधान के लिए दौड़े-दौड़े हमेशा वहीं चले जाते हैं।

बेगूसराय के सिमरिया में जन्मे दिनकर संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू – हिंदी के अलावा इन चार भाषाओं के भी जानकार थे। मुजफ्फरपुर कॉलेज में बतौर हिंदी विभागाध्यक्ष और भागलपुर कॉलेज में बतौर उपकुलपति काम करने के बाद उन्होंने भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में सेवाएँ दीं। स्वाधीनता के बाद वो बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष रहे। 12 वर्षों तक सांसद रहे। फिर वो भागलपुर यूनिवर्सिटी में वो बतौर कुलपति लौटे।

यहाँ हम उन रामधारी सिंह दिनकर की बात करेंगे, जो राज्यसभा सांसद थे और जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सत्ता से सवाल पूछने और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों पर ऊँगली उठाने में कभी झिझक महसूस नहीं की। भारत-चीन युद्ध इतिहास का एक ऐसा ही प्रसंग है, जब नेहरू के मन से ये भ्रम मिट गया था कि अब अहिंसा का युग आ गया है और भारत को हथियारों व सेना की ज़रूरत ही नहीं है।

फ़रवरी 21, 1963 में राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है। उन्होंने बताया था कि गाँधी की अहिंसा मात्र अहिंसा ही नहीं थी बल्कि उसमें आग थी, क़ुर्बानी का तेज था और आहुति-धर्म की ज्वाला थी।

उन्होंने कहा था कि हम अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे, लेकिन साथ ही हम हथियारों से लैस होकर भी चलेंगे, ताकि हम उन भेड़ियों से अपनी प्राण-रक्षा कर सकें, जो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं।

ऐसा नहीं है कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने ये बात सिर्फ संसद में ही कही थी, बल्कि उनकी कविताओं में भी ये भाव दिखता है। शांति और अहिंसा की उन्होंने हमेशा प्रशंसा की है लेकिन साथ ही खुद की रक्षा के लिए, आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए और राष्ट्र के लिए हथियार उठाने के भी उन्होंने प्रेरित किया है।

उन्होंने ये स्वीकार करने में हिचक महसूस नहीं की कि भारत ने आज़ादी के बाद 15 वर्षों तक इस व्यावहारिक-धर्म की उपेक्षा की। ‘कुरुक्षेत्र’ की ये पंक्तियाँ देखिए, जो उनके संसद में कही गई बातों से एकदम मिलती-जुलती है:

छीनता हो सत्व कोई, और तू
त्याग-तप के काम ले यह पाप है।
पुण्य है विच्छिन्न कर देना उसे
बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ हो।
बद्ध, विदलित और साधनहीन को
है उचित अवलम्ब अपनी आह का;
गिड़गिड़ाकर किन्तु, माँगे भीख क्यों
वह पुरुष, जिसकी भुजा में शक्ति हो?
युद्ध को तुम निन्द्य कहते हो, मगर,
जब तलक हैं उठ रहीं चिनगारियाँ
भिन्न स्वर्थों के कुलिश-संघर्ष की,
युद्ध तब तक विश्व में अनिवार्य है।

रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में भीष्म के शब्दों में आज के सत्ताधीशों को शासन करने का तरीका सिखाया है और शत्रु से निपटने का गुर बताया है। भला इसके लिए उन्हें शरशैया पर पड़े भारतवर्ष के उस बूढ़े महावीर से अच्छा कौन मिलता, जिसने महाभारत जैसे पूरे युद्ध को देखा हो, उसमें हिस्सा लिया हो और कुरुवंश की कई पीढ़ियों को अपना मार्गदर्शन दिया हो। कुरुक्षेत्र में दिनकर शांति की वकालत करते हैं लेकिन ऐसी परिस्थितियों की भी बात करते हैं, जब युद्ध को टाला ही नहीं जा सके।

संसद में जब वो हथियारों से लैस होने की बात करते हैं तो ‘कुरुक्षेत्र’ में भीष्म पितामह के मुँह से भी यही कहलवाते हैं कि अपनी तरफ बढ़ रहे हाथ को विछिन्न कर देना पुण्य है, इसमें कोई पाप नहीं है। जिसकी भुजा में शक्ति है, उसे भला गिड़गिड़ा कर भीख माँगने की क्या आवश्यकता है? अगर कोई आपके साथ हिंसा कर रहा हो और आप त्याग-तप से ही काम चलाते रहें तो ये पाप है, ये ठीक नहीं है।

आज जब भारत-चीन का तनाव चरम पर है, हमें रामधारी सिंह दिनकर के इस भाषण को ज़रूर पढ़ना चाहिए। बल्कि आज सरकार पर सवाल उठा रहे विपक्ष को भी इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बड़े ही आसान तरीके से समझा दिया कि भारत ने क्या गलतियाँ कीं। दिनकर ने कहा कि दुनिया भर के देश अपने खाने के दाँत अलग और दिखाने के दाँत अलग रखते हैं लेकिन हमने सिधाई में आकर अपने दिखाने के दाँत को ही असली मान लिया।

रामधारी सिंह दिनकर ने तब के सत्ताधीशों को समझाया कि जो बातें हम नहीं समझ सके, उन्हें चीन ने हमारी आँखों में उँगली डाल कर समझा दिया। आखिर रामधारी सिंह दिनकर ने क्यों कहा था कि महात्मा गाँधी, सम्राट अशोक और तथागत बुद्ध, ये सभी इस देश के रक्षक नहीं है, बल्कि ये सब तो खुद रक्षणीय हैं। दिनकर इन तीनों को देश की शोभा, संस्कार, गौरव और अभिमान तो मानते थे लेकिन उनका कहना था कि इस संस्कार की रक्षा तभी होगी, जब गुरु गोविन्द सिंह, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई और भगत सिंह जैसे बटालियन हर वक़्त तैयार रहें।

दिनकर मानते थे कि हमारी सीमा पर हमें खतरा है लेकिन वो ये भी कहते थे कि खतरा हमारे प्रजातंत्र और जीवन-पद्धति पर भी है। उन्होंने सरकार से कहा था कि शारीरिक बल और बाहुबल की रक्षा के लिए हमने कुछ नहीं किया। उनका जोर था कि दंड, कुश्ती, बैठक और गदका, तलवार, पट्टा, भाल इत्यादि का युवाओं और बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाए। विश्व शांति की वो पैरवी करते थे लेकिन कहते थे कि ये किसी एक देश की जिम्मेदारी थोड़े है।

दिनकर को इस बात से दिक्कत थी कि जब नेता लोग विश्व शांति पर बोलने लगते हैं तो वो ऐसी बातें बोल जाते हैं, जो कवियों और संतों को बोलनी चाहिए। रामधारी सिंह दिनकर ने अपने उस ऐतिहासिक भाषण में कहा था कि अहिंसा और शांति बड़े ही श्रेष्ठ गुण हैं, लेकिन शरीर के आभाव में ये दुर्गति को प्राप्त होती है। तभी तो उन्होंने कहा था कि जिसके हाथ में बन्दूक नहीं है, वो शांति का समर्थ रक्षक सिद्ध नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा था:

“एक और बीमारी जो हमारे देश में पनप रही है, वो है अंतरराष्ट्रीयता की अति आराधना की बीमारी। जिसके भीतर राष्ट्रीयता नहीं है, वो अंतरराष्ट्रीय भी नहीं हो सकता। धरती की दो गतियाँ हैं। पृथ्वी अपनी धुरी के चारों ओर घूमती है, जो मनुष्य के राष्ट्रीय भाव का द्योतक है। पृथ्वी सूर्य के भी चारों भी परिक्रमा करती है, ये मनुष्य के अंतरराष्ट्रीय भाव का पर्याय है। जिस दिन ये पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमना बंद कर दे, उस दिन उसका सूर्य के चारों ओर घूमना भी अपने-आप बंद हो जाएगा। जिस व्यक्ति ने अपनी राष्ट्रीयता को तिलांजलि दे दी, उसकी अंतरराष्ट्रीयता छूछी है। देश को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो ये कहते फिरते हैं कि वो राष्ट्रीयता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीयता के प्रहरी हैं। मैं उस विचारधारा का भी समर्थन नहीं करता, जो कहता है कि चीन के आक्रमण से जो व्यथित हैं, वो प्रतिक्रियागामी है और जो अपमान पीकर जीन के लिए तैयार है, वो प्रगतिशील है।”

तो ये थी रामधारी सिंह दिनकर की राष्ट्रवाद को लेकर सोच। उनके कहने का मतलब था कि जो अपने देश का नहीं हुआ, वो विश्व का कैसे हो सकता है? पृथ्वी का उदाहरण देकर उन्होंने इसे भली-भाँति समझाया। आज जब अरुंधति रॉय जैसे लोग और उनके अनुयायी खुद को ‘वैश्विक नागरिक’ साबित करने की होड़ में भारत को हर मंच से भला-बुरा कहते हैं, आज दिनकर होते तो ऐसे लोगों को ज़रूर देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताते।

रामधारी सिंह दिनकर के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ (वीडियो साभार: RSTV)

उनका सीधा मानना था कि अपमान पीकर जीने की बात करने वाले जो कथित ‘प्रगतिशील’ हैं, वो चीन की करतूतों पर पर्दा डालना चाहते हैं। आज भी कॉन्ग्रेस और वामपंथी दल हैं, जो अपने बयानों में चीन की निंदा करना तो दूर की बात, अपने सरकार और सेना के बयानों तक का साथ नहीं देते। दिनकर कहते थे कि ऐसे लोग भारत को उसी हालत में ले जाना चाहते हैं, जो चीन के साथ फिर से भाई-भाई का नाता बैठा लें। ये तंज नेहरू पर था।

उनका कहना था कि जब बात देश की रक्षा की हो तो कैसी विचारधारा? कैसा दक्षिणपंथ और कैसा वामपंथ? आपकी विचारधारा दाएँ की हो या बाएँ की, देश की सेवा करने की तो इन दोनों को ही ज़रूरत है न? आज जब भारत-चीन तनाव के बीच ऐसी शक्तियाँ फिर से प्रबल होने की कोशिश में लगी हैं, याद कीजिए – शांति और अहिंसा के लिए भी बन्दूक रखना ज़रूरी है वरना भेड़िये तो अकारण राह चलते साधुओं पर भी झपट्टा मारते हैं।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को ट्विटर पर KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक अनिर्बान ब्लाह पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया

शर्लिन चोपड़ा एक घटना का वर्णन करते हुए बताती है कि वह ए-लिस्टर्स के लिए टैलेंट एजेंसी के रूप में अपने करियर को मैनेज करने में मदद करने के लिए अनिर्बान से पूछने गई थी। उन्होंने उससे पूछा कि क्या वह उन्हें अच्छी क्वालिटी वाली फिल्में दिलाने में मदद कर सकते हैं। इसके बाद वह कहती हैं, “उसने मुझे ऊपर-नीचे देखा। मैंने उनसे पूछा, क्या हुआ सर, क्या मैं अच्छी तरह से तैयार नहीं हूँ?’ उन्होंने कहा, नहीं, नहीं। फिर उसने पूछा- क्या आपके स्तन (breast) असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?”

शर्लिन ने तब कहा कि उसने अनिर्बान से पूछा कि क्या वह शादीशुदा है। उन्होंने अनिर्बान से कहा, “क्या आप अपनी पत्नी को नहीं छूते हैं। अपनी पत्नी के स्तनों को स्पर्श करो। तुम जान जाओगे। चाहे वे असली हों या नकली।” शर्लिन चोपड़ा का कहना है कि इतना कहने के बाद भी अनिर्बान ने उनसे पूछा कि क्या ये ‘असली’ हैं।

शर्लिन आगे कहती है, “मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।”

उन्होंने कहा कि यह अस्वीकार्य व्यवहार है। वो कहती हैं, “आप इस तरह एक महिला से बात नहीं कर सकते। अगर कोई भी लड़की आपको या आपके निजी अंगों को छूती है तो आप इसे पसंद कर रहे होंगे। पर एक महिला को यह पसंद नहीं है। खासकर तब जब वह एक टैलेंट मैनेजर के पास जा रही हो। वह इसे क्यों पसंद करेगी? क्या आपके पास दिमाग नहीं है? स्तनों के आकार के साथ टैलेंट का क्या लेना-देना है? ”

शर्लिन ने आगे कहा, “चाहे यह असली हो या नकली, इससे क्या फर्क पड़ता है? जब मैंने इस तरह की चीजों का अनुभव किया, तो मैंने महसूस किया कि इस इंडस्ट्री में कई लोग शालीनता के मुखौटे पहने हुए हैं, लेकिन वो काफी अभद्र व्यवहार करते हैं।”

अनिर्बान ब्लाह #MeToo का आरोपित

2018 में, अनिर्बान दास ब्लाह को #MeToo के आरोपों के बाद KWAN से पद छोड़ने के लिए कहा गया था। चार महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अभिनेत्री मीरा उमर ने कहा था कि 2016 में जब वह अभिनेत्री बनने के लिए मुंबई आई थीं, तो उन्होंने KWAN के अनिर्बान से मुलाकात की। अपनी पहली मुलाकात के बाद, उसे अच्छा नहीं महसूस हुआ था। ब्लाह ने उसे फिर से बुलाया और उससे निजी तौर पर मिलने का अनुरोध किया।

उमर ने कहा कि उसने उसे अपने जुहू अपार्टमेंट में बुलाया। कुछ बातचीत करने के बाद वह उससे अनुचित सवाल पूछ शुरू कर दिया, जिसके बाद उसने वहाँ से जाने का फैसला किया, लेकिन अनिर्बान ने उसे जबरदस्ती चूमने की कोशिश की। हालाँकि, जल्द ही उसका कैब आ गया और वह वहाँ से निकल गई।

सुप्रीम कोर्ट में ‘हिन्दू आतंक’ का हवाला दिए जाने से बौखलाए NDTV के पत्रकार ने केंद्र पर लगाया ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप

NDTV ‘जर्नलिस्ट’ श्रीनिवासन जैन ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को सुदर्शन न्यूज़ के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘कथित’ निष्क्रियता पर अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए ट्विटर पर अपना पक्ष रखा। आतंकवादी हमले को ‘छोटा-मोटा’ हमला करार देने वाले पत्रकार ने केंद्र पर किसी भी कीमत पर ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप लगाया।

सुदर्शन न्यूज द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘हिंदू आतंक’ पर NDTV शो का हवाला दिए जाने की वजह से श्रीनिवासन जैन भड़के हुए थे। एनडीटीवी के पत्रकार ने केंद्र पर हमला करते हुए ट्वीट किया कि सुदर्शन टीवी की रक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी सीमाएँ पार कर दी।

उन्होंने लिखा, “सॉलिसिटर जनरल ने प्रेस फ्रीडम की खोज करते हुए किसने क्या किया तकनीक (जो हिंदू आतंक पर दिखाया गया है?) को फर्जी बताया कि कोर्ट पहले डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करे।”

जैन ने आगे आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के लिए मीडिया में अपने लोगों का बचाव करना आम बात है। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्षता और कानून के शासन के लिए कभी-कभार अपना बलिदान देती है, बशर्ते कि अपराध ‘बहुत शर्मनाक’ हो।

श्रीनिवासन जैन ने ट्वीट किया, “अपने लोगों’ की सुरक्षा के लिए सभी दल / सरकार अपने रास्ते से भटक गई है। लेकिन कभी-कभी निष्पक्षता और कानून के शासन के पालन के लिबास को बनाए रखने के लिए, आप कार्रवाई की अनुमति देते हैं, खासकर यदि अपराध बहुत ही बुरा हो।”

NDTV के पत्रकार आगे कहा कि केंद्र तो निष्पक्ष या कानून का पालन करने का नाटक भी नहीं करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार ‘अपने लोगों’ की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी, भले ही वह कानून के शासन को बर्बाद कर दे।

उन्होंने कपिल मिश्रा, सुदर्शन टीवी और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का नाम लिया, जिन्होंने कथित तौर पर जेएनयू पर हमला किया था, उन लोगों की सूची में जिनके अपराध ‘गंभीर’ थे। लेकिन इस शासन ने, बार-बार, ‘अपने लोगों’ की रक्षा के लिए पूरी जोर लगा दी, चाहे इससे कानून पर कितना भी बुरा प्रभाव क्यों न पड़े।

श्रीनिवासन जैन ने आतंकी हमला को बताया ‘छोटा-मोटा’

गौरतलब है कि NDTV पर अपने एक शो के दौरान, श्रीनिवासन जैन ने अपने मोदी विरोधी नैरेटिव को फैलाने के लिए एक आतंकवादी हमले को कम दिखाने कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इशरत जहाँ जैसे आतंकवादियों को एक मुठभेड़ के दौरान गुजरात पुलिस ने गोली मार दी थी। पत्रकार का कहना था कि आतंकी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मारने के लिए नहीं, बल्कि ‘छोटा-मोटा’ बम विस्फोट करने के लिए आए थे।

निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने NDTV के पत्रकार की खिंचाई की

हाल ही में एनडीटीवी पर निवेशक और व्यापारी राकेश झुनझुनवाला ने इंटरव्यू के दौरान ‘पत्रकार’ श्रीनिवासन जैन को नैतिक मीडिया रिपोर्टिंग का सबक सिखाया। राकेश झुनझुनवाला ने जोर देते हुए कहा, “मैं पीएम मोदी का प्रशंसक हूँ – यह एक जाना-माना तथ्य है। एक भारतीय के रूप में, मुझे अपने राजनीतिक विकल्पों पर अधिकार है, लेकिन, मैं आपको पूर्वाग्रह से ग्रसित पाता हूँ। मुझे लगता है कि NDTV सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित है।” हालाँकि श्रीनिवासन ने अपने चैनल पर लगे आरोपों को खारिज करने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई मतलब नहीं था।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने माँगा तलाक

बिहार के बेगूसराय में रहने वाली एक हिंदू महिला ने बजरंग दल से मदद की गुहार लगाई है। महिला का कहना है कि अब उसे अपने पति आफ़ताब आलम से डर लगने लगा है। उसका पति आफ़ताब उसको रोज शराब पीकर मारता था और उसे सड़क पर ही भद्दी-भद्दी गालियाँ देता था। इसके अलावा उसके अन्य महिलाओं से भी शारीरिक संबंध हैं। कुछ दिन पहले महिला ने अपनी जान को खतरा देखते हुए उससे अलग होने की ठानी लेकिन आफ़ताब उसे नर्क से मुक्ति देने को तैयार नहीं है। वह बार-बार डायवोर्स से मना कर देता है और घर आकर धमकी भी देता है।

अब पूजा नामक ( पीड़िता का बदला हुआ नाम) महिला ने बेगूसराय में बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज से मदद माँगी है। उन्होंने बजरंग दल को लिखे पत्र में बताया है कि शादी से पहले उन्हें नहीं पता था कि उनके पति आफ़ताब को शराब की लत है, लेकिन धीरे-धीरे जब वह साथ रहने लगीं तो उन्हें यह सब पता चला। महिला ने बताया कि इसके बाद से उनका पति नशे में धुत होकर उन्हें मारता और गाली गलौच करता। पीड़िता ने बजरंग दल को ऐसे सबूत भी पेश किए हैं जिनमें आरोपित के संबंध दूसरी औरतों से साफ देखे जा सकते हैं।

बजरंग दल से महिला ने माँगी मदद

अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों की बाबत हिंदू महिला ने 14 सितंबर 2020 को पुलिस में एफआईआर भी करवाई। अपनी एफआईआर में उन्होंने बताया कि साल 2006 में आफ़ताब ने उन्हें बहला-फुसला कर फँसाया था। इसके बाद उनका शारीरिक शोषण हुआ। हालाँकि तब उन्होंने आफ़ताब पर दबाव बनाकर 24 मार्च 2006 को कोर्ट मैरिज कर ली। इसके बाद उनकी दो बेटियाँ हुईं। आज उनमें एक की उम्र 8 साल है और दूसरी की 6 साल है।

महिला ने एफआईआर में बताया कि जब शादी के बाद वह अपने ससुराल गईं, तो वहाँ उनके साथ गाली गलौच हुई और उन्हें प्रताड़िता भी किया गया। काफी समय तक उन्होंने वहाँ गुजर बसर किया। फिर, साल 2008 में परेशान होकर दूसरे इलाके में किराए पर रहने लगी, लेकिन वहाँ भी आफ़ताब के घर वाले पहुँच जाते और बोलते कि हिंदू की औलाद हरामी होती है। 

पीड़िता ने शिकायत में कहा कि इसके बाद उनके पति में उग्रता आने लगी। धीरे-धीरे उनके साथ व उनके बच्चों के साथ जानवरों की तरह मारपीट भी आम हो गई। इस बीच आरोपित के नाजायज संबंध दूसरी महिलाओं से हो चुके थे। वे कहती हैं कि शुरुआत में तो आफ़ताब बाहर जाकर महिला से संबंध बनाता था, लेकिन कुछ समय बाद वह पड़ोस की महिला को रात में घर ही बुलाने लगा।

दूसरी महिला के साथ आफ़ताब की तस्वीर

जब उन्होंने ने इसकी शिकायत अपने ससुराल वालों से की तो सबने उन्हें जवाब दिया, “मर्द है मुँह मारेगा, तुम खाओ पड़ी रहो।” इसके बाद उनके ससुराल वालों ने महिला पर उन्हीं के इलाके में जमीन लेने का दबाव बनाया। बार-बार उन्हें सुनाया जाता रहा, “तुम्हारे बाप ने कुछ नहीं दिया कहो…. में जमीन बिक रही है, उसे खरीदने के लिए पैसा दें।”

एफआईआऱ

पीड़िता के पिता ने जब अपनी बेटी की हालत जानी, तो उन्होंने उसकी खुशी के लिए 1 5,00,000 रुपए आफ़ताब को दिया और जमीन खरीदी गई। आज पूजा उसी जमीन पर घर बनवाकर रहती हैं। मगर, उनकी शिकायत है कि उन्हें अब भी आफ़ताब और उसके घरवाले तंग करते हैं।

पूजा के अनुसार, उन्होंने काफी समय तक अपने बच्चों के लिए काफी कुछ झेला है। उनके पति आफ़ताब ने न केवल उनको प्रताड़ित करते हुए उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया बल्कि उनके घर को शराबखाने में बदल  दिया। साथ ही कई दोस्तों को घर पर लाने लगा। ये सब उनके सामने और उनके बच्चों के सामने अश्लील हरकत करते थे।

महिला का कहना है कि आफ़ताब के दोस्तों की बुरी निगाह से उन्होंने हमेशा अपनी दोनों बेटियों को बचाया। मगर, कई बार ऐसा भी वक्त आया जब आफ़ताब ने अपनी बीवी को ही अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने को बोल दिया।

जी हाँ। महिला अपनी एफआईआर में इस बात का जिक्र किया है। उन्होंने अपने बयान में लिखा, “कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।”

दूसरी महिला के साथ आफ्ताब आलम

पूजा की मानें तो 19 अगस्त को पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी के बाद उनके पति आफ़ताब को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से जब से वह छूट कर आया तो महिला के साथ रोजाना मारपीट करने लगा। इस बीच उसके ससुराल वाले उसे और उसके बच्चों को धमकी भी देने लगे। उन्होंने पीड़िता और बच्चों से कहा कि घर छोड़ कर निकल जाओ वरना सभी को हलाल करके लाश लापता कर देंगे।

ऑपइंडिया से पीड़िता की बातचीत और आफ़ताब का सच

गौरतलब है कि पूजा का मामला जब ऑपइंडिया के संज्ञान में आया तो हमने उनकी आपबीती जानने के लिए उनसे संपर्क किया। पूजा ने हमसे बात करते हुए कई ऐसी बातें बताईं जिनका उल्लेख एफआईआर में बहुत हद तक सीमित नजर आता है मगर पीड़िता से पता चलता है कि साल 2006 से साल 2020 तक में उसने क्या-क्या झेला।

पीएम मोदी से घृणा के चलते आफ़ताब करता था पूजा को प्रताड़ित

पूजा के अनुसार, उसकी शादी 14 साल पहले हुई थी। उसके बाद से ही उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। अभी जब एनआरसी और सीएए का मुद्दा उठा, तो उसे लेकर भी आफ़ताब ने पूजा को ही उलटा सीधा बोलना शुरू कर दिया।

पूजा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी भी फैसले पर आफ़ताब उसको उलटा- सीधा सुनाता था। राम मंदिर के फैसले पर भी उन्हें आहत करने का प्रयास आफ़ताब ने किया था। इतने के बावजूद उन्होंने कोशिश की कि रिश्ते को निभा लें मगर अभी हाल की घटना है कि उसने रोड पर ही शराब पीकर उन्हें ‘रं%’ कहना शुरू कर दिया। साथ ही पीड़िता के भूमिहार होने के कारण उस पर जातिसूचक टिप्पणी की।

महिला के मुताबिक वो बहुत बार डॉयवोर्स की बात कह चुकी है लेकिन आफ़ताब उसे छोड़ने को तैयार नहीं है और कहता है, “तुम कैसे ले लोगी डायवोर्स, हम नहीं देंगे।” पूजा बताती हैं कि आफ़ताब ने कई बार उन पर पिस्तौल तानी है। इसलिए अब उन्हें अपनी जान का खतरा सताता है। वह कहती हैं कि उन्हें अब किसी भी कीमत पर अपने पति के साथ नहीं रहना बस वह तलाक चाहती हैं।

पीड़िता बताती हैं कि जब पिछली बार आफ़ताब जेल से छूट कर आया तो उसने अपनी उनके ऊपर झूठा इल्जाम लगा दिया। जेल से छूटकर आफ़ताब ने पूजा से कहा, “तुमने सब करवाया है। तुम्हारी वजह से ही सब हुआ है। तुमको जान से मार देंगे।” तब जाकर पीड़िता ने कहा कि अब उसे और उसके बच्चों को आफ़ताब के साथ नहीं रहना है। उन्हें उससे डर लगने लगा है।

कोर्ट मैरिज से पहले आफ़ताब करता था शोषण

शादी से पहले की घटना साझा करते हुए हुए पूजा कहती हैं कि उनकी मर्जी के बिना भी उनसे संबंध बनाए गए। इसके लिए आफ़ताब पूजा को अपने दोस्त के घर भी लेकर गया। महिला कहती है कि इतना सब होने के बावजूद जब आफ़ताब ने शादी को लेकर टाल मटोल शुरू की, तो उन्होंने इसे लेकर उस पर दबाव बनाया। कोर्ट मैरिज के बाद आफ्ताब ने घर पर पीना शुरू कर दिया। बाद में बच्चियों को परेशान करने लगा। वह जानबूझकर पीने के बाद उनसे राजनीति और धर्म आदि पर बात करता था ताकि उन्हें परेशानी हो।

ईंट पत्थर, पिस्तौल सबसे किया गया पीड़िता पर हमला

अपनी हालिया एफआईआर के बारे में बताते हुए पूजा कहती हैं कि एक दिन जब सड़क पर पीने के बाद उसने बहुत हल्ला शुरू कर दिया, गाली देकर उन्हें मारनेलगा और घर से निकालने की धमकी देने लगा, तब पूजा ने बच्चों को घर में अंदर करके गेट किसी तरह बंद कर लिया। जिसके बाद वह ईंट पत्थर घर में फेंकने लगा, जब उनसे भी कुछ नहीं हुआ तो बालकनी में चढ़ने की कोशिश भी की।

पूजा को यही सब देखकर एहसास हुआ कि वह सच में उन्हें मार डालेगा। इसी को सोचते हुए उन्होंने इस पूरे केस पर कानूनी कार्रवाई के लिए आवाज उठाई। अब वह सोच चुकी हैं कि किसी कीमत पर आफ़ताब को दूसरा मौका नहीं देना है।

नाजायज संबंधों को बरकरार रखने के लिए पूजा को भेजा देहरादून, विरोध पर चप्पल से भी मारा गया

पूजा के अनुसार, जब उनकी छोटी बेटी हुई, तब भी उनके पति ने पड़ोस की महिला से संबंध बनाए हुए थे। जब महिला ने विरोध किया तो उसे कहा गया कि वह अपने मायके चली जाए सब ठीक हो जाएगा। महिला ने ऐसा करने से मना कर दिया। फिर उसने पूजा को व उसकी बेटियों को देहरादून भेज दिया। साथ ही खरीददारी के लिए 1 लाख रुपए तक दे दिए।

पूजा वहाँ जाकर कुछ दिन रही, जब मन नहीं माना तो उसने वापस लौटने की इच्छा जताई। इस पर उससे कहा गया, “उत्तराखंड में सुंदर-सुंदर लड़के होते हैं, तुम्हें कोई अच्छा नहीं लगा क्या?” इसके बाद आफ़ताब ने अपने कंपनी स्टाफ जिसके साथ पूजा को देहरादून भेजा था उससे कहा कि उसे दूसरे लड़कों से मिलवा दो।

पूजा बताती हैं कि घर लौटने के बाद उन्हें उसके अवैध संबंधों के बारे में कई बातें पता चलीं और उन्होंने उसका फोन चेक करना शुरू कर दिया। एक दिन ऐसे में जब नशे में धुत होकर उसने अपना फोन का लॉक खुला छोड़ा, तो गूगल ड्राइव में दूसरी महिलाओं के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें उन्हें दिख गईं। जब महिला ने इनका विरोध किया और सवाल पूछे तो आफ़ताब ने अपनी गलती मानने की बजाय लड़की के भाई के सामने उसे चप्पल से मारा और घर से भागने को बोला। 

कुछ दिन बाद महिला उसे बिन बताए अपने घर चली गईं। लेकिन इसने दोबारा उन्हें वापस बुलवा लिया और घर लाकर फिर पीटा। महिला का कहना है कि कुछ दिन पहले आफ़ताब ने एक 16 साल की लड़की को फँसाने के लिए 1500 रुपए मदद के नाम पर भी भिजवाए थे ताकि वह उसके जाल में फँस जाए। मगर, लड़की के माँ-बाप ने इसे बहुत डाँटा और बात बहुत ज्यादा बढ़ गई।

पीड़िता के करीब आने की करता था कोशिश

पीड़िता के अनुसार, आरोपित पति उसे अक्सर कहता था कि तुम्हारा समय खत्म हो गया और फिर खुद ही आकर छूने लगता था। इसका वह विरोध भी करती थी, लेकिन आफ़ताब पास आता था, साथ ही ये भी कहता था, “ऐसा मत समझना तुम में कुछ खास बात हैं, मेरे पास बहुत हैं।”

पूजा की माँग बस यही है कि वो तलाक लेना चाहती है। इसके लिए वह वकील से बात भी कर रही है, लेकिन, आफ़ताब तलाक से मना कर रहा है और जोर देकर कहता है कि तलाक नहीं देगा। वहीं पीड़िता का कहना है कि वह किसी कीमत पर साथ नहीं रह सकती। इन सबसे बड़ी वाली बेटी पर असर पड़ रहा, वह डिप्रेशन में जा रही है।

अलमारी में छिपाकर रखने पड़ते थे भगवान

पूजा की मानें तो जब उसकी कोर्ट मैरिज हुई थी तब आफ़ताब ने उसे निकाह का जिक्र किया था। हालाँकि, तब महिला ने कह दिया कि बात सिर्फ़ कोर्ट मैरिज की हुई थी, इसलिए वह धर्म परिवर्तन नहीं करेगी। लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह सारी बातें होनी शुरू हो गई। आफ़ताब ने घर में भगवान रखने से मना कर दिया मगर अपनी आस्था के चलते महिला अलमारी में भगवान को रख कर पूजा करती थी। वह कहती हैं कि अब अलग होने के बाद वह विचार कर रही हैं कि भगवान के लिए मंदिर बनवाएँ।

बजरंग दल से क्या सोचकर माँगी मदद?

बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वारज से संपर्क करने की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह पूरा मामला अपने हाथ से जाता दिख रहा था। वह लगातार गेट पर आता था, उनसे गाली गलौच करता था, उनकी जाति धर्म को उल्टा बोलता है। इसलिए किसी परिचित ने ही इस नारकीय जीवन से निकलने के लिए उन्हें शुभम से मदद लेने की सलाह दी। उसके बाद उन्होंने संपर्क किया और अब उन्हें विश्वास है कि उनकी मदद की जाएगी। बता दें, पूजा ने इस संबंध में महिला आयोग में अपनी शिकायत करवाई थी। उन्हें यह भी डर है कि उनके नाम से कई फेसबुक आईडी चलाई जा रही हैं।

निलंबित AAP सांसद संजय सिंह ने टीवी पर स्वीकारा कि उन्होंने उपाध्यक्ष का माइक तोड़ा, कहा- लोकतंत्र की रक्षा कर रहे थे

संसद में उपद्रवी व्यवहार के कारण एक सप्ताह के लिए निलंबित किए जाने के बाद AAP के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आज (सितंबर 22, 2020) को राष्ट्रीय टेलीविजन पर अनायास ही स्वीकार कर लिया कि संसद में कृषि बिल पर पर हंगामे के बीच उन्होंने सदन के उपाध्यक्ष का माइक तोड़ दिया।

हालाँकि, संजय सिंह ने अपने अनियंत्रित व्यवहार का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसा लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया।

संजय सिंह को सीएनएन न्यूज 18 के एक पत्रकार के साथ एक साक्षात्कार में उनके असभ्य व्यवहार के बारे में सुना गया। पत्रकार से बात करते हुए संजय सिंह कहते हैं, “मैं मानता हूँ कि मैं मेज पर चढ़ा था। मैं यह भी स्वीकार करता हूँ कि मैंने माइक तोड़ा, लेकिन मैंने जो कुछ भी किया, वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसा किया, लोकतंत्र की हत्या को रोकने के लिए किया।”

यह पूछे जाने पर वेंकैया नायडू ने कहा कि निलंबित सांसदों में से किसी को भी अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है, इसी वजह से उन्हें निलंबित किया गया, AAP नेता संजय सिंह ने खुद और अन्य विधायकों का बचाव करते हुए कहा कि वे ‘लोकतंत्र को बचाने’ की कोशिश कर रहे थे।

संजय सिंह ने कहा, “यह सरकार की गलती है। उन्होंने कृषि बिलों को जबरन पारित करके लोकतंत्र की हत्या की है। यह एक संवैधानिक नियम और परंपरा है कि भले ही एक ही सदस्य विभाजन वोट की माँग करे, तो उन्हें यह करने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि राज्यसभा ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को संजय सिंह समेत 8 विपक्षी सांसदों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया। इस दौरान वो सदन की कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इनको असंसदीय व्यवहार के लिए दोषी पाया गया था। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें संजय सिंह के अलावा डेरेक ओब्रायन, राजू सातव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नज़ीर हुसैन और एलमरान करीम के नाम शामिल हैं।

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ड्यूटी पर मार्शल के साथ मारपीट की वीडियो क्लिप कल वायरल हो गई थी। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “संसद में मार्शल का गला दबाकर मारते संजय सिंह। बाद में घूँसों से मार्शल पर हमला किया।” वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह दुखद, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण था।

एक यूजर प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट कर कहा था, “संजय सिंह ने राज्यसभा में मार्शल का गला दबाया और घूँसों से मार्शल पर हमला किया। माइक तोड़ना, बिल की कॉपी फाड़ना और सभापति की टेबल पर अभद्रता करके डेरेक ओ ब्रायन व संजय ने अपनी पुरानी आदतों का परिचय दिया है। इनका यह कृत्य किसी भी प्रकार से विद्वत राज्यसभा के अनुकूल नहीं है।”

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

भारत के आगे एक बार फिर नतमस्तक हुआ नेपाल: विवादित नक्‍शे वाली किताब पर PM ओली ने लगाई रोक

नेपाल की केपी ओली सरकार ने देश के विवादित नक्‍शे वाली किताब के वितरण पर रोक लगा दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने श‍िक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस किताब के विषयवस्‍तु पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इसके बाद नेपाली कैबिनेट ने श‍िक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह न केवल इस किताब का वितरण रोके बल्कि उसके प्रकाशन पर भी रोक लगाए। नेपाली कैबिनेट के इस फैसले से शिक्षा मंत्री गिरिराज मणि पोखरल को करारा झटका लगा है।

काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने कहा था कि इस किताब में कई तथ्‍यात्‍मक ग़ल्तियाँ और ‘अनुचित’ कंटेंट है, इस वजह से किताब के प्रकाशन पर रोक लगाई गई है। कानून मंत्री श‍िव माया ने कहा, “हमने यह निष्‍कर्ष निकाला है कि किताब के वितरण पर रोक लगा दी जाए।” माया ने माना कि कई गलत तथ्‍यों के साथ संवेदनशील मुद्दों पर किताब का प्रकाशन गलत कदम था।

नेपाल की एजुकेशन मिनिस्ट्री ने कुछ दिन पहले इस विवादित किताब को लॉन्च किया था और इसे सेकंडरी स्कूल के स्टूडेंट्स के लिए रेफरेंस बुक कहा गया था। नेपाल के एजुकेशन मिनिस्टर गिरिराज मनी पोखरेल ने 15 सितंबर को 110 पेज की यह किताब ‘सेल्फ स्टडी मटीरियल ऑन नेपाल्स टेरिटरी एंड बॉर्डर’ रिलीज की। इसमें मुख्य तौर पर भारत के साथ नेपाल के सीमा विवाद का जिक्र है और बताया गया है कि भारत के कई इलाके नेपाल का हिस्सा हैं।

इस किताब में नेपाल का नया एरिया 147,641.28 स्क्वायर किलोमीटर दिखाया गया है, जिसमें 460.28 स्क्वायर किलोमीटर एरिया कालापानी का है। नेपाल के नए पॉलिटिकल मैप में भी भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पयाधुरा एरिया को अपना बताया गया है। इस किताब की प्रस्तावना खुद नेपाल के एजुकेशन मिनिस्टर ने लिखी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि किस तरह उन्होंने 24 साल पहले कालापानी, लिुपलेख और लिम्पयाधुरा से भारतीय सेना को हटाने के लिए कैंपेन किया था।

नेपाल के सीनियर पॉलिटिकल जर्नलिस्ट बिनोद घीमीरे ने काठमांडू रिपोर्ट में कहा है कि जो नया मैप नेपाल सरकार ने जारी किया था, वहीं इस किताब में भी है लेकिन लगता है कि पॉलिटिकल सर्कल में इस किताब की प्रस्तावना पर ज्यादा आपत्ति है, जिसमें अनडिप्लोमेटिक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

लैंड मैनेजमेंट मिनिस्ट्री का भी कहना है कि इसमें कई जगहों पर गलत और असंवेदनशील टिप्पणी की गई है। मिनिस्ट्री के मुताबिक अभी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का पूरा एरिया का नाम अब तक पब्लिश नहीं किया है और उससे पहले ही किताब छापना ठीक नहीं है।

बिनोद घीमीरे ने कहा कि यह लगता है कि इस किताब से विदेश मंत्रालय भी खुश नहीं है क्योंकि यह डिप्लोमेसी के लिहाज से भी सही नहीं है। नेपाल में कई एक्सपर्ट्स भी इस किताब के छापने के वक्त को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनके मुताबिक ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे वक्त में जब भारत-नेपाल के बीच डिप्लोमेटिक बातचीत कई महीनों से रुक गई थी, ऐसे में इस तरह का कदम भारत-नेपाल के बीच रिश्ते खराब करने वाला होगा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने इस किताब पर रोक लगाकर इसका ख्याल रखा है कि भारत-नेपाल के बीच रिश्ते खट्टे न हों।

बता दें कि भारत और नेपाल के बीच मई में सीमा विवाद पैदा हो गया था। इस बीच नेपाल सरकार ने बच्चों की एक किताब में विवादित नक्शा प्रकाशित किया है। यही नहीं, इसमें भारत के साथ सीमा विवाद का भी जिक्र है। नेपाल के इस कदम से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत को झटका पहुँचने की आशंका पैदा हो गई थी।

नोटबंदी और कृषि बिल के लिए एक ही शख्स के इंटरव्यू के वायरल दावे को ANI एडिटर ने नकारा, कॉन्ग्रेस ने फैलाया ‘झूठ’

इन दिनों सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि समाचार एजेंसी ANI ने हाल ही में पारित किए गए किसान बिल और 2016 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नोटबंदी के लिए एक ही व्यक्ति का इंटरव्यू लिया। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक विनय कुमार डोकानिया ने एक समान दिखने वाले दो व्यक्तियों की तस्वीरें शेयर करते हुए आरोप लगाया कि ANI ने किसान बिल के लिए उसी व्यक्ति का साक्षात्कार लिया, जिसने 2016 में नोटबंदी की सराहना की थी। ये तस्वीरे काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

Fake tweet by INC social media co-ordinator

ANI की प्रधान संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा इस दावे का सख्ती से खंडन किया गया। उन्होंने दावा किया कि तस्वीरें दो अलग-अलग व्यक्तियों की थी। डोकानिया झूठ बोल रहे थे।

हालाँकि, ट्वीट और भी ज्यादा वायरल तब हो गया जब दिल्ली कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष अभिषेक दत्त ने डोकानिया के ट्वीट का हवाला देते हुए स्मिता प्रकाश से पूछा कि ट्वीट का सच क्या है। ANI के प्रधान संपादक ने जवाब दिया कि उनके सहयोगी ने फर्जी ट्वीट के साथ विवाद शुरू किया और बाकी लोगों ने इसे शेयर किया।

दत्त ने कहा कि अगर यह ट्वीट फर्जी था तो वह इसे जल्द से जल्द हटा देंगे। हालाँकि, स्मिता प्रकाश के स्पष्ट स्पष्टीकरण के बावजूद, इस लेख को लिखने के समय तक ट्वीट को नहीं हटाया गया है। इसके बजाय, एएनआई के विरोधियों द्वारा ट्विटर पर ट्वीट को व्यापक रूप से साझा किया गया है।

लोगों ने स्मिता प्रकाश के कार्य की नैतिकता पर भी सवाल उठाए। वैभव विशाल नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा कि वह व्यक्ति किसान की तरह बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। उसने नए बनियान, नए गमछे आदि पहन रखे थे। इसके साथ ही वैभव ने स्मिता से अपनी टीम से सवाल करने के लिए भी कहा।

इस पर स्मिता प्रकाश ने चुटकी लेते हुए व्यक्ति से माफी माँगी कि एक शख्स भूखे किसान की छवि में फिट नहीं बैठता है। इसके बाद एएनआई द्वारा इंटरव्यू लिए गए किसानों की छवियों को शेयर करते हुए, वैभव विशाल ने कहा कि एएनआई को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

शब्दों की जंग और भी ज्यादा तब छिड़ गई, जब सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फर्जी ट्वीट को शेयर करते हुए नकली आरोपों के लिए स्मिता प्रकाश से स्पष्टीकरण या खंडन माँगा। ट्विटर यूजर ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि एएनआई अपने आकाओं के लिए यह सब कर रही है लेकिन उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया। 

इस तिरस्कारपूर्ण टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए स्मिता प्रकाश ने वरिष्ठ अधिकारी की खिंचाई करते हुए उन्हें एक ‘कॉपी पेस्ट कलाकार’ कहा, जो कल्पना से तथ्य को अलग नहीं कर सकते और बिना सत्यापन के दूसरों पर आरोप लगा सकते थे। थापर ने स्मिता प्रकाश द्वारा जारी स्पष्टीकरण के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन उनके गुस्से के लिए उनसे सवाल किया।

स्मिता ने जवाब दिया, “हाँ, आपने मुझे अपने ट्वीट में ‘पाखंडी’ और ऐसी अन्य चीजें कही। मैं उतना ही वापस दे सकती हूँ जितना मुझे मिलता है। चूँकि आपने वर्दी पहनी थी, इसलिए आपको एक विरोधी की सराहना करनी चाहिए।”

समाचार एजेंसी एएनआई पर समय-समय पर हमले होते रहते हैं, जो ज्यादातर प्रोपेगेंडिस्ट द्वारा किया जाता है। वो न्यूज एजेंसी पर ‘propaganda’ outlet  होने का आरोप लगाते हैं, वहीं, वे आमतौर पर एक और समाचार एजेंसी, PTI को पीएम मोदी जैसे नेताओं की छवि को खराब दिखाने और फर्जी तस्वीर शेयर करने के लिए फ्री पास दे देते हैं।

इस साल अगस्त में, PTI को भारत में कोरोना वायरस मामलों की कुल संख्या पर पीएम मोदी को गलत बताते हुए पाया गया था। उससे पहले, जून में, पीटीआई ने चीनी राजदूत सुन वेइदॉन्ग का साक्षात्कार लिया, , जिसमें उन्होंने गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच टकराव के लिए भारत को दोषी ठहराया। 

ड्रग तस्कर केशवानी ने पूछताछ में लिया दीया मिर्जा का नाम: NCB बाकी सितारों के साथ उन्हें भी जल्द भेजेगी समन

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग एंगल सामने आने के बाद अब बॉलीवुड के कई सितारों का नाम धीरे-धीरे एनसीबी की लिस्ट में शामिल हो रहा है। दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान के बाद अब एनसीबी के निशाने पर बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा का नाम है।

दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया है। केशवानी ने बताया कि दीया की मैनेजर ड्रग्स खरीदती थी। उन्होंने इसके सबूत भी दिए हैं। अब इस मामले में एनसीबी जल्द ही दीया मिर्जा को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ड्रग्स ऐंगल की जाँच कर रही है। इससे पहले खबर आई थी कि दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने समन भेजा है।

इससे पहले इस मामले में रिया चक्रवर्ती, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आ चुका है। खबर है कि सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत इसी हफ्ते समन भेजा जाएगा। इनके साथ सिमोन खंबाटा और रकुलप्रीत का नाम भी आ रहा है। 

रिया चक्रवर्ती ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन्होंने सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह और सुशांत के साथ लोनावला में पार्टी की थी। NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया शाह से भी पूछताछ की है।

जया शाह के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए हैं, जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही हैं। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया है। हालाँकि फिलहाल ये साफ नहीं हो पाया है कि करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने क्यों तलब किया है।

वहीं कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का भी खुलासा किया था। इसमें बॉलीवुड के कई सितारे जाँच के घेरे में आ सकते हैं। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए हैं। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई है। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

व्यंग्य: रवीश जी दुबरा गए हैं, एतना चिंता हो रहा है देस का कि का कहें महाराज!

नमस्कार, मैं बकैत कुमार!

अभी जीडीपी के सदमे से उबरे नहीं थे कि किसानों पर हमला बोल दिया गया। भारत का युवा तो आईपिल, सॉरी IPL, फ्री में कैसे देखें उस पर सर्च कर रहा है। उसी गूगल में, उसी उँगली से लिखे कि ‘जीडीपी पर बकैत कुमार की राय’ तो मेरा लेख मिल जाएगा। मटीरियल तो मैं रोज बनाता हूँ, नोट्स की तरह उपलब्ध कराता हूँ। प्वाइंट-वाइज चाहिए तो वो भी दे दूँगा, लेकिन युवा वर्ग सो रहा है। उसको पढ़ना है मेरा फेसबुक पोस्ट, लेकिन पढ़ कर खाली गरियाता है, और भाग जाता है। ऐसे जागेगा भारत?

फिर कहते हैं ‘बकैत जी, आप ही की बकैती से उम्मीद है। उम्मीद से तो हम भी बैठे थे मई 2019 में, कि युवाओं के लिए इतने पोस्ट लिखे, स्टूडियो से कैम्पेनिंग की, रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीवी, R&DTV को हिन्दी में भी टॉप टेन से बाहर करा दिया… किस लिए? भक्तों की इतनी गालियाँ सुनी, किस लिए? इसीलिए न कि वापस भाजपा छोड़ कर कोई भी आ जाए तो हम लोगों का भी चैनल जो है ‘एक्सक्लूसिव’ जानकारी निकाल कर टीआरपी पा जाएगा। हमको भी तो मन है कि कोई कैबिनेट मिनिस्टर बरखा टाइप बदलवा कर देखें! लेकिन जा रे जमाना, ये होने नहीं दिया। मजनूँ! साला जलता है हमसे!

खैर, युवा सोता रहा और मोदी ने एक और रिफॉर्म, मेरा मतलब है कि हमला, कर दिया। नोटबंदी से राहुल गाँधी अभी भी त्रस्त है, आज भी राहुल गाँधी जो भी वीडियो बनाता है, एक बार नोटबंदी पर जरूर बोलता है। आप ऐसे क्रिएटिव आदमी को वोट नहीं देते जो चार साल बाद भी डीमोनेटाइजेशन रट रहा है, लेकिन मोदी को देना है। काहे? काहे कि शौचालय बनवा दिया, गैस दिलवा दिया, बत्ती लगवा दिया, जीवन सुधार दिया… ठीक है कि जीवन सुधार दिया लेकिन एक आम आदमी के जीवन में संघर्ष ही तो है। वही तो उसके अस्तित्व की परिभाषा का आधारबिन्दु है और आपने वह भी खींच लिया। ये किस तरह की सरकार है?

जीएसटी से क्या हुआ? वन नेशन वन टैक्स का मतलब तो यही होता है न कि जितना टैक्स आटा पर उतनी ही ‘चेभरोलीट’ की गाड़ी पर। जब वो नहीं कर सके तो काहे का जीएसटी, ‘एक देश, एक टैक्स’। लेकिन युवा वर्ग जो है वो सो रहा है, वो IPL का शेड्यूल ढूँढ रहा है कि शाम में किस का मैच है। एक तो वैसहिए हमारा R&DTV चैनल नहीं देखता था कोई, अब ये कोरोना के टाइम में क्रिकेट हो रहा है। नहीं, ठीके है। जब ऊपर से ही कुआँ में ही भाँग मिला दिया है तब और कर भी क्या सकते हैं।

अब देखिए किसान वाला बिल आया है। ऊपर से सब ठीक लगता है कि किसान को विकल्प हो गया, वो अपनी उपज किसको बेचे, कहाँ बेचे। लेकिन गहराई में जाने से पता चलता है कि एक गरीब किसान को सरकार कन्फ्यूज करना चाहती है कि वो कहाँ बेचे। पहले सिस्टम ठीक था कि एक जगह जाना है, गेहूँ-मकई सब बेच देना है। पैसा भी तय होता थ, दलाली भी तय थी। अब, ये नई खुराफात सूझी मोदी को कि कृषि को भी उदारवादी बनाना है। योगी तो इनसे उदारवादी बने नहीं आज तक, कृषि को बनाने जा रहे हैं।

आप यह सोचिए कि ये सरकार दलालों को खत्म करना चाहती है! दलालों से समस्या क्या है? कॉन्ग्रेसी सत्ता की दलाली तो लम्बे समय तक मेरा चैनल, मेरे सहकर्मी आदि करते रहे हैं। इसी से पेट चलता है। बिना पेमेंट के कर रहा हूँ, कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी तक में भविष्य ढूँढ रहा हूँ, इससे बड़ी दलाली और क्या होगी? लेकिन मोदी सरकार दलालों के पीछे ही पड़ गई है।

आप सोचिए कि दलाली जैसा इनोवेटिव कोई चीज है? दिल्ली में देखिए कि मोमो की दुकान से ज्यादा प्रॉपर्टी डीलर हैं। सोफा पर बैठे रहते हैं, मकान किसी का, चाहिए किसी को, और आधे महीने का रेंट ले लेते हैं। कल को इस पर बिल ले आना और हन्नी-लक्की सब घर बैठेंगे फिर। क्या मेहनत नहीं करते दलाल? राडिया टेप में सुनिए हमारी मेहनत। धूप में खड़े रहते हैं, छाती जलती रहती है, आत्मा धिक्कारती है कि रे बकैतबा, राहुल गाँधी को कैसे कर लेता है डिफेंड… लेकिन मजाल है कि चेहरे पर मुस्कुराहट के अलाव एक शिकन तक आ जाए जब डिम्पलधारी राहुल जी सामने हों।

किसान लोग सीधे लोग होते हैं। अब कहा जा रहा है कि वो कॉन्ट्रैक्ट साइन करें और खेती करें। बताइए आप! किसान खेती करेगा कि कॉन्ट्रैक्ट साइन करेगा? फिर मोदी कह देगा कि किसान को एमबीए कर लेना चाहिए ताकि वो समझ सके कि कॉन्ट्रैक्ट में क्या लिखा हुआ है। किसान तो गरीब होते हैं, उनको क्या मतलब कि वो चार पैसे ज्यादा कमा लें। ज्यादा पैसे कमाएगा, तो वो फ्रिज खरीद लेगा, एसी लगा लेगा, डबल बेड पर गद्दा बिछा लेगा और स्मार्टवाच से स्लीप ट्रैकिंग करेगा कि हे एप्पल वाच जी महाराज, हमको गहरी नींद आई कि नहीं, ये बता दो।

फिर आप सोचिए कि ‘चिड़ियों के जगने से पहले खाट छोड़ उठ चला किसान’ वाली कविता का क्या होगा? क्या आपको नहीं लगता कि मोदी के ये किसान वाले बिल साहित्य विरोधी हैं? सोचिए कि किसान शब्द सुनते ही कैसी छवि मन में उभरती है: एक नरकंकाल, जिस पर थोड़ी चमड़ी हो, दिखने में कोयला जैसा काला हो, मैली धोती को घुटने से ऊपर चढ़ाए हो, और भवों के ऊपर एक हाथ रख कर बादल की राह देख रहा हो।

मोदी ने क्या किया? मोदी ने इस ऐतिहासिक और सर्वकालिक लोकप्रिय छवि को बदलने की कोशिश की है। अब किसान जो है वो ऐसा गरीब टाइप नहीं दिखेगा। वो समान कहीं और बेच लिया करेगा। वो मंडी के आढ़तियों से ब्याज पर पैसे ले कर उसी आढ़त में, कम तौल पर वाले तराजू की वैज्ञानिकता पर अपनी उपज को नहीं बेच पाएगा। ये एक युग की समाप्ति जैसा है।

आप ही सोचिए कि कल्कि अवतार हुआ भी नहीं और मोदी युग की समाप्ति करवा रहा है। स्वयं को हिन्दू हृदय सम्राट कहलवाने वाला आदमी विष्णु भगवान को ही चुनौती दे रहा है। कह रहा है कि कलियुग में तुम्हें आने ही नहीं देंगे, युग ही बदल देंगे। क्या यह हिन्दू-विरोधी विधेयक नहीं है?

एक समाज के तौर पर हम कहाँ जा रहे हैं? धरती घूम रही है और हम भी घूम रहे हैं। इसी धरती पर मोदी हमें घुमा रहा है। जबकि लेहरू जी द्वारा भारत को दिए गए विज्ञान की सौगात यही कहती है किसान को किसान ही रहने दो, उसको व्यापारी मत बनाओ वरना कॉन्ग्रेस के द्वारा प्रतिपादित ऊष्मप्रवैगिकी के प्रथम नियम के अनुसार, भारत में किसान और गरीब न तो बढ़ते हैं, न कम होते हैं, वो बस कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा अपनी अवस्था त्यागने का प्रलोभन पा सकते हैं।

मोदी ने इस वैज्ञानिक बात को बदलने की कोशिश की है। किसान अब व्यापारी हो जाएगा। आप ही सोचिए फिर व्यापारी क्या करेगा? व्यापारी तो एक खेल भी हुआ करता था जिसमें लोग कलकत्ता जाने पर किराया लेते थे, और दो बार जाने पर ज्यादा किराया लेते थे। अब मैं कलकत्ता नहीं जा पाता, न ही वहाँ की खबरें दिखा पाता हूँ क्योंकि दीदी किराया तो लेती ही है, टीएमसी के लोग साथ में खर्चा-पानी भी दे देते हैं।

लेकिन बात समझ में आती है जब आप इस पर मनन-चिंतन करते हैं। बनिया आदमी बनियावृत्ति में ही यकीन रखता है। वो तो कहेगा ही कि गेहूँ ज्यादा उपजा लिए तो बेच लो। यहाँ मत बेचो, वहाँ बेचो जहाँ पैसा ज्यादा मिलता है। इस आदमी के लिए सब चीज बस पैसा ही है। पैसा, जबकि शास्त्रों के अनुसार, हाथ का मैल है। आखिर किसानों को हाथ का मैल क्यों दिलवाना चाहता है मोदी? कोरोना के समय में जब बीस सेकेंड तक हाथ धोना चाहिए, तब मोदी जी कह रहे हैं कि हाथ का मैल घर में रखो।

ओहो! अब समझ में आया! रिलायंस वाले हैंडवाश और सेनिटायजर भी तो बेचते हैं।

नमस्कार!

आयकर विभाग ने उद्धव ठाकरे और उनके बेटे के साथ ही शरद पवार और उनकी बेटी को भेजा नोटिस, गलत जानकारी साझा करने के आरोप

आयकर विभाग ने NCP के शरद पवार को नोटिस भेजा है। यह नोटिस उन्हें पिछले 3 चुनावों के लिए दायर अपने चुनावी हलफनामों पर स्पष्टीकरण माँगने के लिए भेजा गया है। शरद पवार के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, बेटे आदित्य ठाकरे और शरद पवार की बेटी, सांसद सुप्रिया सुले को भी आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजे गए हैं।

इस मुद्दे पर बोलते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, “मुझे अपने चुनावी हलफनामे के बारे में आयकर विभाग से नोटिस मिला। चुनाव आयोग के निर्देश पर, आयकर ने 2009, 2014 और 2020 के लिए चुनावी हलफनामों पर एक नोटिस भेजा है। आईटी विभाग ने सुप्रिया सुले को अपने अंतिम 3 चुनाव हलफनामों का विवरण देने के लिए भी कहा है। ऐसा लगता है कि आयकर विभाग में कुछ लोगों से ज्यादा प्यार है।”

बता दें कि पिछले दिनों चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से उद्धव और आदित्य ठाकरे के साथ ही सुप्रिया सुले के खिलाफ प्राप्त उन शिकायतों की जाँच करने को कहा था, जिनमें उन पर लोकसभा / विधानसभा चुनावों के लिए अपने हलफनामे में गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगा था। इसके एक दिन बाद पार्टी ने इसे ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया था।

शिवसेना मंत्री अनिल परब ने कहा था, “आयकर प्राधिकरण के साथ एक हलफनामे में दी गई जानकारी को क्रॉस-चेक करना एक नियमित प्रक्रिया है। चुनाव आयोग और आयकर विभाग आम तौर पर जानकारी साझा करते हैं, इसलिए मुद्दे में कोई नई बात नहीं है।” उन्होंने ही उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे दोनों के चुनावी हलफनामे तैयार किए थे।

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक भी इससे हैरान नहीं थे। इसे एक ‘नियमित प्रक्रिया’ के रूप में चित्रित करते हुए, उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी के लिए एक उम्मीदवार के आयकर रिटर्न में हलफनामे में दर्ज जानकारी को सत्यापित करना सामान्य था। मलिक ने जोर देकर कहा, “यदि कोई विशिष्ट प्रश्न है, तो हम उसका उत्तर देंगे।”

गौरतलब है कि ठाकरे पिता-पुत्र द्वारा दायर हलफनामों में कुछ गंभीर विसंगतियाँ सामने आई थी। RTI कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के डेटा में विरोधाभास का हवाला दिया था। एक जो बड़ी विसंगति सामने आई थी, वह थी आदित्य के चुनावी हलफनामे में बैंक खाते का गायब होना, जिसका उल्लेख उद्धव के हलफनामे में किया गया था।

उद्धव के हलफनामे में पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे का बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ज्वाइंट अकाउंट की जानकारी दी गई थी। इसमें 9,52,568 लाख रुपए जमा होने की बात कही गई थी। हालाँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान सौंपे गए आदित्य के शपथ पत्र में इस अकाउंट का उल्लेख नहीं था। कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों ठाकरे के पास HUF (Hindu Undivided Family) कैटेगरी के तहत शेयर रखने की तारीखें भी अलग-अलग थी।