Home Blog Page 4498

अपने पत्रकारों की रिहाई के लिए NHRC पहुॅंची रिपब्लिक, महाराष्ट्र पुलिस ने रिपोर्टिंग करते वक्त हिरासत में लिया था

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने अपने दो पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मॉंग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से शुक्रवार (11 सितंबर, 2020) को की। इससे पहले नेटवर्क ने महाराष्ट्र सरकार से अपने दोनों पत्रकारों को रिहा करने को कहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करने गए रिपोर्टर अनुज कुमार, कैमरामैन यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनावड़े को अवैध रूप से महाराष्ट्र पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनको महाराष्ट्र पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से तीन दिन से हिरासत में रखा हुआ है।

कथित तौर पर रायगढ़ के कर्जत में बने उद्धव ठाकरे की बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड से कुछ पूछताछ करने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा बिना परमिशन के भवन में घुसने के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था।

चैनल ने कहा है कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएँगे, क्योंकि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अनुज से जबरन पूछताछ की जा रही है और उन्हें सूत्र का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

गौरतलब है इससे पहले रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के प्रमुख अर्नब गोस्वामी ने अपने पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की करते हुए केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी पर भी चेताया था।

अर्नब गोस्वामी ने कहा था, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।” रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा था कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे।

‘हर मुस्लिम शुक्रवार को मुजाहिद मस्जिद में आए, 10 साल में केरल बन जाएगा इस्लामी स्टेट’: Video

हेट स्पीच देने के लिए कुख्यात इस्लामी उपदेशक मुजाहिद बालुसेरी ने एक बार फिर से केरल में खलीफा शासन लाने की बात कही है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, बालुसेरी एक वीडियो में कथित तौर पर ‘मुजाहिदों’ को उकसाते हुए सुना जा सकता है ताकि केरल में इस्लामी शासन लाया जा सके।

अपनी वीडियो में वो कहता है कि केरल के हर मुस्लिम को सिर्फ़ हर शुक्रवार मुजाहिद मस्जिद में भेजो और हम केरल को मात्र 10 सालों के अंदर एक इस्लामी राज्य बना देंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, वो आगे कहता है, “हमारे पास जिम्मेदारी है। यदि हम केरल में कुछ अन्य मुस्लिमों की धार्मिक शाखाओं को बंद कर देते हैं और उन्हें मुजाहिद के अधीन लाते हैं, तो हम 10 वर्षों के भीतर केरल को इस्लामी राज्य में बदल सकते हैं। एक व्यक्ति नैतिक रूप से हर तरह से संपूर्ण हो सकता है लेकिन अगर वह अन्य देवताओं की पूजा करेगा तो उसे जन्नत नहीं मिलेगी। क्योंकि यह कहना कि ‘गुरुवायुरप्पा मुझे बचाओ’ समलैंगिकता, ब्याज पे उधारी से भी बड़ा शिर्क है। ये कहने वाला जहन्नुम में जाता है।”

इसी प्रकार साल 2017 की एक वीडियो में, इस उपदेशक को हिंदू मंदिरों की तुलना एक वेश्यालय से करते सुना जा सकता है। वीडियो में वह कहता है कि यदि आप हिंदू मंदिर या त्योहार पर पैसे दान करते हैं, तो आप शिर्क को प्रोत्साहित करते हैं जो कि सबसे बड़ा गुनाह है। आप वेश्यालय या पब में पैसे दान नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि केरल के इस उपदेशक से पहले एक वीडियो में जाकिर नाइक ने भी भारत के मुस्लिमों से एकल राजनीतिक दल के पीछे एकजुट होने का आग्रह किया था और उन्हें सुझाव दिया था कि यदि वे अपने मजहब का अभ्यास नहीं कर सकते, तो उन्हें ‘हिजरत’ (प्रवास) करना चाहिए।

उसने कहा था, “यदि आपके पास एक मुस्लिम बहुसंख्यक देश में जाने का साधन है जो सबसे अच्छा होगा। लेकिन जिनके पास नहीं है वो उस राज्य में जाएँ जो मुस्लिमों के लिए उदार है।” वीडियो में उसने कहा था, “सबसे अच्छा राज्य मुझे मुस्लिम के लिए केरल लगता है।”

बेंगलुरु दंगों की जाँच करेगी NIA, आरोपितों के आतंकी कनेक्शन की करेगी पड़ताल

केंद्र सरकार ने बेंगलुरु में हुए हिंसक दंगों से जुड़े आपराधिक मामलों की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को ट्रांसफर करने का फैसला किया है। पुलिस ने दंगों में शामिल लगभग 280 लोगों पर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया था। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में यह जाँच करेगी कि गिरफ्तार आरोपितों के कनेक्शन किसी आतंकी संगठन से है या नहीं।

कर्नाटक उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ, जिसके मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओका (Abhay Shreeniwas Oka) और न्यायमूर्ति अशोक एस. किनगी (Ashok S. Kinagi) के समक्ष एनआईए का प्रतिनिधित्व करते हुए, वकील पी. प्रसन्ना कुमार ने बेंगलुरु के डीजे हल्ली और केजी हल्ली इलाकों में हिंसा की घटनाओं से जुड़े मामलों को स्थानांतरित करने की अपील की।

इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा जल्द ही आदेश जारी किए जाने की उम्मीद है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एनआईए को जाँच स्थानांतरित करने, हिंसा के दौरान संपत्तियों को हुए नुकसान के मुआवजे का भुगतान, आदि मामलों को भी प्रस्तुत किया गया था।

गौरतलब है सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने दंगे शामिल समीउद्दीन नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था। दावा किया जा रहा है कि उसका संबंध अल-हिंद संगठन से है।

पिछले महीने बेंगलुरु के डीजे हल्ली इलाके में उपद्रवियों ने कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाते हुए विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फूँक दी गई थी। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

दंगाइयों ने पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी की, पत्थरबाजी की और गाड़ियों को फूँक दिया। कट्टरपंथियों ने डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी थी।

कॉन्ग्रेस के पूर्व शहर महापौर अरुण प्रताप और स्थानीय नागरिक वार्ड पार्षद संपत राज के निजी सहायक सहित 300 से अधिक लोगों पर दंगे भड़काने और बर्बरता करने का आरोप लगाया गया था।

कंगना के फैन को गिरफ्तार करने कोलकाता तक चली गई मुंबई पुलिस, संजय राउत को धमकी देने का आरोप

मुंबई पुलिस ने कोलकाता से 20 साल के पलाश घोष को गिरफ्तार किया है। कंगना रनौत का प्रशंसक बताए जा रहे पलाश पर शिवसेना सांसद संजय राउत को फोन पर धमकी देने का आरोप है। उसे मुंबई पुलिस की एक टीम ने कोलकाता पुलिस की मदद से शुक्रवार तड़के टॉलीगंज स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया।

कथित तौर पर पलाश ने राउत को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। साथ ही उस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भी कॉल करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसे शहर की अदालत अलीपुर कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा जहाँ मुंबई पुलिस उसे मुंबई ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड देने का अनुरोध करेगी। पलाश जिम इंस्ट्रक्टर बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि शिवसेना नेता संजय राउत और अदाकारा कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से जुबानी जंग चल रही है। महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर बीएमसी अधिकारियों ने मंगलवार को कंगना के कार्यालय (मणिकर्णिका फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड) का निरीक्षण किया था। इसके बाद उन्होंने दफ्तर में स्टॉप वर्क नोटिस ’चिपकाया था। अभिनेत्री को 24 घंटे के भीतर इस मामले में जवाब देने के लिए कहा गया था।

हालाँकि, अगले दिन ही कंगना के दफ्तर पर बीएमसी अधिकारियों ने पहुँचकर उसकी संपत्ति के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। उस वक्त बॉलीवुड क्वीन मनाली से मुंबई के लिए निकल चुकी थी और रास्ते में थी। बीएमसी अधिकारियों ने दावा किया था कि बीएमसी की अनुमति के बिना परिसर में कई बदलाव किए गए थे। बाद में बीएमसी की इस कार्रवाई पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।

सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी, चैनल में घुसने की कोशिश: सुरेश चव्हाणके का दावा, कहा- पत्थर भी फेंके

हाल ही में अपने शो ‘बिंदास बोल’ पर ‘जिहाद ब्यूरोक्रेसी’ दिखाने का ऐलान करने के कारण चर्चा में आए सुदर्शन न्यूज चैनल के ऊपर आज (सितंबर 11, 2020) हमला हुआ है। इस हमले की जानकारी मीडिया संस्थान के प्रमुख संपादक सुरेश चव्हाणके ने स्वयं दी है।

उन्होंने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी। स्टूडियो में घुसने से रोकने पर सुरक्षा रक्षकों पर किया हमला। सेक्टर 58 थाने के प्रमुख “नावेद ख़ान” को कई बार निवेदन देने के बावजूद नोएडा पुलिस ने यहाँ एक भी पुलिसवाला नहीं लगाया है। ट्वीट लिखते समय हंगामा जारी है।”

सुरेश चव्हाणके के इस ट्वीट के बाद सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले पर यूपी के डीजी को फौरन एक्शन लेने की बात कही है।

सुदर्शन न्यूज के ट्विटर अकॉउंट पर भी एक वीडियो साझा की गई है। इस वीडियों में दूसरे समुदाय के लोगों का जमावड़ा मुख्यालय के बाहर देखा जा सकता है। साथ ही उनमें से एक व्यक्ति संस्थान के लोगों से कहता दिख रहा है, “इस शो को बंद होना चाहिए। ये मजहब के सिवा कोई बात ही नहीं करते। देश में रोजगार भी है, शिक्षा भी है, स्वास्थ्य भी है। उस पर शो चलाइए।”

वहीं न्यूज चैनल के ट्वीट में लिखा है, “सुदर्शन मुख्यालय के बाहर मुस्लिमों का जमावड़ा। जबरन चैनल में घुसने की कोशिश। अंदर फेंके पत्थर। सुरेश जी को बाहर निकालने के नारे।”

गौरतलब है कि सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके बाद से ही चैनल समुदाय विशेष के निशाने पर था। दरअसल इस वीडियो में उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद जामिया के छात्रों ने इस शो को रुकवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शो पर रोक लगा दी। हालाँकि कल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश दिए कि चैनल अपना शो चला सकता है।

दाऊद इब्राहिम का घर छोड़ दिया और कंगना का दफ्तर तोड़ दिया: उद्धव सरकार पर देवेंद्र फडणवीस ने साधा निशाना

बीएमसी द्वारा कंगना रनौत का दफ्तर तोड़े जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस कड़ी में भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर बयान दिया है। फडणवीस ने उद्धव सरकार की आलोचना करते हुए कहा सरकार दाऊद इब्राहिम का घर नहीं तोड़ती है, लेकिन कंगना का दफ्तर तोड़ दिया जाता है। 

फडणवीस ने अपने बयान में कहा कि महाराष्ट्र सरकार को देख कर ऐसा लगता है जैसे उनकी लड़ाई कोरोना से नहीं, बल्कि कंगना रनौत से है। कोरोना से आम लोगों की जान जा रही है, लेकिन सरकार को इस बात की चिंता नहीं है। मेरा ऐसा मानना है कि सरकार अगर कोरोना वायरस का सामना करने में आधी ताकत भी लगा दे तो शायद आम लोगों की जान बच जाए। लेकिन अफ़सोस कि महाराष्ट्र सरकार की आधे से ज़्यादा ताकत कंगना रनौत से लड़ने में खर्च हो रही है। 

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार को कंगना से ज़्यादा कोरोना पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी ने नहीं उठाया। कंगना का मुद्दा महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा किया है। अभिनेत्री का घर तोड़ा गया, लंबी-चौड़ी बयानबाजी की और धमकी दी कि उसे मुंबई में कदम नहीं रखना चाहिए। सरकार को यह समझना चाहिए था कि कंगना राष्ट्रीय नेता नहीं है। 

कंगना का दफ्तर तोड़े जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा सरकार दाऊद का घर क्यों नहीं तोड़ रही है? सरकार ने जितनी सक्रियता कंगना का दफ्तर तोड़ने में दिखाई गई उतनी दाऊद का घर तोड़ने में क्यों नहीं दिखाई? फडणवीस ने ड्रग्स मामले पर बोलते हुए कहा एनसीबी इस मामले की जाँच कर रही है, मामला अदालत में है इसलिए मैं इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगा। मेरा ऐसा मानना है कि ड्रग्स के मुद्दे को हमेशा के लिए ख़त्म कर देना चाहिए।     

कंगना रनौत ने आज ही महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई पर सोनिया गाँधी से सवाल किए थे। सवाल पूछते हुए कंगना ने कहा जिस तरह महाराष्ट्र सरकार एक महिला के साथ सार्वजनिक रूप से ज़्यादती कर रही है, उस पर सोनिया गाँधी को अपना मौन तोड़ना चाहिए। कंगना ने अपने सवाल में यह भी कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र सरकार ने क़ानून-व्यवस्था का मज़ाक बना कर रखा है, क्या सोनिया गाँधी उस पर कुछ नहीं कहेंगी।    

कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा, “बाला साहब ठाकरे के जाने के बाद शिवसेना अपने उद्देश्य से भटक गई है। इसके बाद कंगना ने सोनिया गाँधी से सवाल करते हुए कहा, महाराष्ट्र की सरकार में कॉन्ग्रेस भी एक सहयोगी दल है। ऐसे में जब राज्य सरकार एक महिला के साथ इतना घटिया बर्ताव कर रही है तो क्या आपको (सोनिया गाँधी) इस बात का बुरा नहीं लगता है। क्या आप (सोनिया गाँधी) महाराष्ट्र सरकार से निवेदन नहीं कर सकती हैं कि वह डॉ. अंबेडकर के संविधान के सिद्धांतों का सम्मान और पालन करें।” 

मंदिर में मिला 3 पुजारियों का खून से लथपथ शव, धारदार हथियारों से हत्या के बाद पत्थर से सिर कुचला

कर्नाटक के मांड्या जिले के प्रसिद्ध अरकेश्वर मंदिर के 3 पुजारियों की गुरुवार (सितंबर 10, 2020) को बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम उस समय दिया गया जब पुजारी मंदिर परिसर में सो रहे थे। पुजारियों को मौत के घाट उतारने के लिए धारदार हथियार के अलावा पत्थर का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि ये काम चोरी करने वाली गैंग का है।

पुलिस का कहना है कि मंड्या शहर के बाहरी इलाके गुट्टलु (Guttalu) में स्थित मंदिर के भीतर खून से लथपथ हालत में गणेश (55), प्रकाश (58) और आनंद (40) का शव मिला। तीनों पुजारियों को बेहरमी से मारा गया था। इनके सिर पत्थर से कुचले गए थे और मंदिर की दान पेटी से सारे रुपए गायब थे। जाँच में केवल दानपेटी से कुछ सिक्के ही मिले हैं। इसके अलावा उपद्रवियों ने कीमती सामान की तलाश में मंदिर के गर्भगृह में तोड़फोड़ भी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये तीनों पुजारी मंदिर की देखभाल करते थे। शुक्रवार को जब ग्रामीणों ने मंदिर का दरवाजा टूटा हुआ पाया, तब उन्होंने मामला जानने के लिए अंदर जाकर देखा और वहाँ उन्हें खून से लथपथ पुजारियों के शव मिले। इसके बाद उन लोगों ने पुलिस को सूचित किया।

मामले की जानकारी होते ही आईजी समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और पड़ताल शुरू की। फोरेंसिक टीम से लेकर स्निफर डॉग्स तक को क्राइम सीन के पास लाया गया।

इस घटना की सूचना पाते ही कर्नाटक के मुख्य मंत्री बीएस येदियुरप्पा ने पुजारियों के परिजनों को 5 लाख रुपए मुआवजा का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “ये बेहद परेशान करने वाली बात है कि अरकेश्वर मंदिर के पुजारियों गणेश, प्रकाश और आनंद की हत्या चोरों ने कर दी है। मंदिर में मारे गए पुजारियों परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा और दोषियों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई होगी।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में साधु, संतों और पुजारियों पर हमले की घटनाओं में अचानक वृद्धि देखने को मिली है। अप्रैल में सबसे पहले पालघर में दो साधुओं की लिंचिंग का मामला सामने आया था। इसके बाद महाराष्ट्र के नांदेड़ में लिंगायत समाज के साधु की हत्या हुई थी। कुछ दिनों बाद वृंदावन में साधु तमालदास के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। बिहार में भी कजरा थाना क्षेत्र के शृंगी ऋषि धाम के पुजारी नीरज झा की हत्या कर उनके शव को जंगल स्थि‍त हनुमान थान के समीप फेंक दिया गया था। इनके अलावा यूपी के सुल्तानपुर, संभल में भी इसी तरह के हमले देखने को मिले थे।

4 दिन बाद गंदे नाले से बरामद हुआ आतंकी अकीब लोन का शव, सेना की गोली से भाग निकला था

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षाबलों ने शुक्रवार (सितम्बर 11, 2020) को एक आतंकी का शव बरामद किया है। दरअसल, बीते 7 सितंबर के दिन एनकाउंटर के दौरान एक आतंकी को गोली लगी थी। इसके अलावा, शुक्रवार सुबह ही भारतीय सेना के उत्तरी कमान ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के बडगाम के कावोसा खलीसा क्षेत्र में एक संयुक्त अभियान में एक आतंकवादी मारा गया।

सेना को जिस अकीब लोन नामक आतंकवादी का शव बरामद हुआ है, वह आतंकी एनकाउंटर के दौरान गर्दन में गोली लगने से घायल हो गया था। लेकिन इसके बावजूद भी वह भाग निकलने में कामयाब रहा था। भागते वक़्त उसने सुकनाग नाले में कूदकर भागने की कोशिश की। 4 दिन की खोज के बाद शुक्रवार को उसका शव एक नाले से बरामद किया गया है।

गोली लगने के 4 दिन बाद नाले से बरामद हुआ आतंकी का शव

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बडगाम जिले में 7 सितंबर को हुई मुठभेड़ के चार दिन की खोज के बाद चेक कावूसा से कल देर रात एक आतंकवादी का शव बरामद किया गया। यह शव एक नाले से बरामद किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया कि गत 7 सितम्बर के दिन एनकाउंटर के दौरान आतंकी के गर्दन में गोली लगने से वह घायल हो गया था। पुलिस, सीआरपीएफ और सेना की संयुक्त टीम ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर उस ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

एनकाउंटर के बाद से ही इलाके में सर्च ऑपरेशन चल रहा था। खबरों के मुताबिक, मारे गए आतंकी की पहचान शोपियाँ के अगलर निवासी अकीब लोन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था।

कुपवाड़ा में जैश-ए-मोहम्मद के 2 आतंकी गिरफ्तार, 7 लाख रुपए समेत AK-47 राइफल बरामद

बृहस्पतिवार को ही सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों को भी गिरफ्तार किया। खबरों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुपवाड़ा में जैश-ए-मोहम्मद के कुछ आतंकी छिपे हुए हैं, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने इलाके में घेराबंदी करके सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकी ठिकाने से दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आतंकियों के पास से हथियार और भारतीय मुद्रा मिलीं, जिसमें एक एके 47 राइफल, एक मैगजीन, 2 ग्रेनेड और 7 लाख रुपए कैश शामिल हैं। गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ जारी है।

‘अब उद्धव ठाकरे का अयोध्या में स्वागत नहीं होगा’: कंगना के समर्थन में संत समाज

महाराष्ट्र सरकार और कंगना रनौत के बीच जारी खींचतान में उद्धव ठाकरे का विरोध संत समाज ने भी किया है। अयोध्या के साधु-संतों का कहना है कि अगर उद्धव ठाकरे अयोध्या आते हैं तो उनका स्वागत नहीं किया जाएगा और उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा। संतों ने इस मुद्दे पर कंगना रनौत का समर्थन किया है और महाराष्ट्र सरकार के बर्ताव पर सवाल खड़े किए हैं। 

हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा अब उद्धव ठाकरे और शिवसेना का अयोध्या में स्वागत नहीं किया जाएगा। अगर उद्धव ठाकरे अयोध्या आते हैं तो उन्हें प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। महाराष्ट्र सरकार ने कंगना रनौत पर कार्रवाई करने में बिलकुल भी समय व्यर्थ नहीं किया। लेकिन महाराष्ट्र की उस सरकार ने ही पालघर में साधुओं की हत्या करने वाले लोगों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।

ठीक इसी तरह अयोध्या संत समाज के मुखिया महंत कन्हैया दास ने भी महाराष्ट्र सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार ऐसे लोगों का बचाव कर रही है जो देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे को अयोध्या में दाखिल न होने की चेतावनी भी दी।

महंत कन्हैया दास ने अपने बयान में कहा “अब उद्धव ठाकरे का अयोध्या में स्वागत नहीं किया जाएगा। शिवसेना कंगना रनौत पर हमला क्यों कर कर रही है? यह सब समझ सकते हैं, यह कोई रहस्य नहीं है। शिवसेना वह राजनीतिक दल नहीं रह गया है जो बाल ठाकरे के दौर में हुआ करता था।” 

विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मुद्दे पर कंगना रनौत का समर्थन करते हुए बयान जारी किया है। बयान के मुताबिक़ कंगना पर होने वाली कार्रवाई का मतलब साफ़ है कि शिवसेना जान-बूझकर ऐसा कर रही है। कंगना ने शुरू से ही राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन किया है और मुंबई के ड्रग माफ़िया के विरुद्ध आवाज़ उठाई। इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा महाराष्ट्र सरकार गलत तरीके और गलत भावना के साथ कंगना रनौत पर कार्रवाई कर रही है।        

कंगना रनौत और शिवसेना के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने महाराष्ट्र की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से की। इसके बाद शिवसेना और एनसीपी के नेताओं ने कंगना के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद मुंबई के मंडलायुक्त ने भी कंगना के साथ किए जाने वाले बुरे बर्ताव को बढ़ावा दिया। फिर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कंगना रनौत को ‘हरामखोर लड़की’ कह कर सम्बोधित किया। 

इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने ड्रग्स इस्तेमाल को लेकर कंगना के खिलाफ़ जाँच का आदेश भी जारी कर दिया। ठीक बाद संजय राउत ने कंगना रनौत को मुंबई में कदम नहीं रखने की धमकी दे दी। इस धमकी को दरकिनार करते हुए कंगना बुधवार को मुंबई पहुँची। उससे पहले बीएमसी ने कंगना रनौत के दफ्तर का एक हिस्सा पूरी तरह तोड़ दिया। इसके कारण महाराष्ट्र सरकार की काफी फ़ज़ीहत हुई। 

48000 अवैध झुग्गियों को हटाने को लेकर कोर्ट ने राजनीतिक दखलंदाजी नहीं करने के दिए थे निर्देश, फिर भी कॉन्ग्रेस नेता ने डाली याचिका

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे स्थित 48,000 झुग्गियों को हटाने को लेकर अदालत के दिए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

कोर्ट ने पिछले हफ्ते यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि दिल्ली में अवैध झुग्गियों को हटाने में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव और दखलंदाजी नहीं होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा है कि अगर कोई भी अदालत हटाने के खिलाफ कोई अंतरिम स्टे आदेश पारित करती है, तो उसे अप्रभावी माना जाएगा। अदालत ने तीन महीने के भीतर दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया था।

माकन ने सुप्रीम कोर्ट के झुग्गी-झोपड़ी को हटाने के आदेश को ‘अमानवीय’ करार दिया। उन्होंने 2019 में पारित दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि झुग्गीवासियों का शहर पर अधिकार है और उन्हें तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि उनके पुनर्वास की पूर्व व्यवस्था नहीं की जाती।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने झुग्गीवासियों पर 2019 के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बारे में सुप्रीम कोर्ट को सूचित नहीं किया। उन्होंने दोनों सरकारों पर “अदालत से धोखाधड़ी करने” और लोगों को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाया।

माकन ने दावा किया कि आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता है क्योंकि झुग्गी में रहने वाले या उनके प्रतिनिधियों को आदेश पारित करने से पहले अदालत ने नहीं सुना। यह याचिका वकील अमन पंवार और एडवोकेट नितिन सलूजा द्वारा दायर की है। उनकी याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोरोनावायरस महामारी की वर्तमान स्थिति में, पुनर्वास की व्यवस्था के बिन बस्तियों को ध्वस्त करना बहुत जोखिम भरा होगा क्योंकि झुग्गियों में रहने वाले लोग आश्रय और आजीविका की तलाश में जगह-जगह भटकेंगे।