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‘नौकरशाही में समुदाय विशेष की घुसपैठ’ वाली सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट के प्रसारण पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने 25 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुदर्शन न्यूज संपादक सुरेश चव्हाणके के शो का प्रोमो देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चव्हाणके ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और समुदाय विशेष के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और मानहानि की है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज की ‘नौकरशाही में समुदाय विशेष की घुसपैठ’ वाली कथित रिपोर्ट के प्रसारण पर रोक लगा दी है। शुक्रवार 28 अगस्त 2020 को रात आठ बजे इसका प्रसारण होना था। जामिया के छात्रों ने इस पर रोक लगाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट समुदाय विशेष के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देती है।

जस्टिस नवीन चावला ने सुनवाई करते हुए इसके प्रसारण को रोकने लगाने के निर्देश दिए। जामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों की ओर से वकील शादान फरसाट ने याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने 25 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुदर्शन न्यूज संपादक सुरेश चव्हाणके के शो का प्रोमो देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चव्हाणके ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और समुदाय विशेष के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और मानहानि की है।

याचिका में कहा गया कि कथित तौर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता “समुदाय विशेष द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश” का प्रतिनिधित्व करती है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सुरेश चव्हाणके ने खुले तौर पर दावा किया है कि जामिया मिल्ल‌िया इस्लामिया के जिहादी या आतंकवादी जल्द ही कलेक्टर और सेक्रेटरी जैसे शक्तिशाली पदों पर आसीन होंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोमो प्रस्तावित प्रसारण केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड 1994 का उल्लंघन करता है।

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित समुदाय विशेष के अभ्यर्थियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है।

उन्होंने घोषणा की थी कि यह ‘नौकरशाही जिहाद’ और ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ चैनल का बड़ा अभियान होगा। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?”

बता दें इस विवादास्पद वीडियो के पोस्ट को विभिन्न पक्षों द्वारा आलोचना की गई थी। विशेष रूप से वामपंथियों और इस्लामवादियों ने इसे निशाना बनाते हुए यह आरोप लगाया कि सुरेश चव्हाणके समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। पीएस एसोसिएशन और इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी इसकी निंदा की थी।

वहीं सुरेश चव्हाणके ने आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी सिविल में चुने गए कुछ श्रेणी के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि के बारे में है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कथित साजिश में आतंकी नेता जाकिर नाइक भी शामिल है। इस मामले पर आगे की सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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