कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे स्थित 48,000 झुग्गियों को हटाने को लेकर अदालत के दिए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
कोर्ट ने पिछले हफ्ते यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि दिल्ली में अवैध झुग्गियों को हटाने में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव और दखलंदाजी नहीं होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा है कि अगर कोई भी अदालत हटाने के खिलाफ कोई अंतरिम स्टे आदेश पारित करती है, तो उसे अप्रभावी माना जाएगा। अदालत ने तीन महीने के भीतर दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया था।
Senior Congress leader Ajay Maken today moved the Supreme Court challenging the directions passed by a bench headed by former Justice Arun Mishra wherein the Court had directed demolition of about 48,000 jhuggis along-side railway tracks in Delhi. pic.twitter.com/HWZYg3mO84
माकन ने सुप्रीम कोर्ट के झुग्गी-झोपड़ी को हटाने के आदेश को ‘अमानवीय’ करार दिया। उन्होंने 2019 में पारित दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि झुग्गीवासियों का शहर पर अधिकार है और उन्हें तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि उनके पुनर्वास की पूर्व व्यवस्था नहीं की जाती।
I have petitioned the Hon’ble Supreme Court against inhuman Order of large scale demolition of slums in Delhi.
In a 2019 detailed Judgement, Delhi HC in my PIL, laid down the law that Slum Dwellers have ‘Right to the City’ & cannot be Removed without prior Rehabilitation. 1/2
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने झुग्गीवासियों पर 2019 के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बारे में सुप्रीम कोर्ट को सूचित नहीं किया। उन्होंने दोनों सरकारों पर “अदालत से धोखाधड़ी करने” और लोगों को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाया।
2/2 Unfortunately, the BJP & AAP Governments have misled the Supreme Court by not informing them about the HC Judgement (Ajay Maken Vs. UOI) and obtained the Order for removal of slums by playing a fraud upon the Court.
Now, both of them together are fooling these poor people!
माकन ने दावा किया कि आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता है क्योंकि झुग्गी में रहने वाले या उनके प्रतिनिधियों को आदेश पारित करने से पहले अदालत ने नहीं सुना। यह याचिका वकील अमन पंवार और एडवोकेट नितिन सलूजा द्वारा दायर की है। उनकी याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोरोनावायरस महामारी की वर्तमान स्थिति में, पुनर्वास की व्यवस्था के बिन बस्तियों को ध्वस्त करना बहुत जोखिम भरा होगा क्योंकि झुग्गियों में रहने वाले लोग आश्रय और आजीविका की तलाश में जगह-जगह भटकेंगे।
127 साल पूर्व, दिन 11 सितंबर 1893शिकागो शहर का ‘पार्लियामेंट ऑफ़ रिलीजन’ सभागार। नीचे एक बड़ा हॉल और एक बहुत बड़ी गैलरी, दोनों में 6-7 हजार संसार भर के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि तथा शहर के बहुसंख्यक प्रतिष्ठित व्यक्ति। मंच पर संसार की सभी जातियों के बड़े-बड़े विद्वान। डॉ. बरोज के आह्वान पर 30 वर्ष के तेजस्वी युवा का मंच पर पहुँचना। भाषण के प्रथम चार शब्द ‘अमेरिकावासी भाइयों तथा बहनों’ इन शब्दों को सुनते ही जैसे सभा में उत्साह का तूफान आ गया और 2 मिनट तक 7 हजार लोग उनके लिए खड़े होकर तालियाँ बजाते रहे। पूरा सभागार करतल ध्वनि से गूॅंजायमान हो गया।
संवाद का ये जादू शब्दों के पीछे छिपी चिर-पुरातन भारतीय संस्कृति, सभ्यता, अध्यातम व उस युवा के त्यागमय जीवन का था, जो शिकागो से निकला व पूरे विश्व में छा गया। लगभग 3 मिनट का वो भाषण आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था। उस भाषण का एक-एक शब्द अपने आप में एक परंपरा, एक जीवन व हजारों वर्षों की संत संतति से चले आ रहे संदेश का परिचायक है।
उस भाषण को आज भी दुनिया भुला नहीं पाती। इस भाषण से दुनिया के तमाम पंथ आज भी सबक ले सकते हैं। इस अकेली घटना ने पश्चिम में भारत की एक ऐसी छवि बना दी, जो आजादी से पहले और इसके बाद सैकड़ों राजदूत मिलकर भी नहीं बना सके। स्वामी विवेकाननंद के इस भाषण के बाद भारत को एक अनोखी संस्कृति के देश के रूप में देखा जाने लगा।
अमेरिकी प्रेस ने विवेकानंद को उस धर्म संसद की महानतम विभूति बताया था। स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखा था, उन्हें सुनने के बाद हमें महसूस हो रहा है कि भारत जैसे एक प्रबुद्ध राष्ट्र में मिशनरियों को भेजकर हम कितनी बड़ी मूर्खता कर रहे थे। यह ऐसे समय हुआ, जब ब्रिटिश शासकों और ईसाई मिशनरियों का एक वर्ग भारत की अवमानना और पाश्चात्य संस्कृति की श्रेष्ठता साबित करने में लगा हुआ था।
सर्वधर्म सम्मेलन में अंत में दस का घंटा बजा। ईसाई पादरी अनुभव करने लगे कि जगत में ईसाई पंथ सर्वश्रेष्ठ है। इस तथ्य को दुनिया के सामने प्रकट करने का समय आ पहुँचा और वास्तव में इसी भावना से अमेरिका के बड़े धार्मिक नेताओं ने इस महासम्मेलन का आयोजन किया था। परंतु किसी को खबर न थी कि यह घंटा तो सनातन हिन्दू-धर्म की विजय का बज रहा है।
शिकागो व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में उसको प्रस्तुत किया व स्थापित भी किया। विश्व धर्म सभा में जब सभी पंथ स्वयं को ही श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास कर रहे थे, तब स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत का विचार सभी सत्यों को स्वीकार करता है।
स्वामीजी ने कहा, “मुझे यह कहते हुए गर्व है कि जिस धर्म का मैं अनुयायी हूँ उसने जगत को उदारता और प्राणी मात्र को अपना समझने की भावना दिखलाई है। इतना ही नहीं हम सब पंथों को सच्चा मानते हैं और हमारे पूर्वजों ने प्राचीन काल में भी प्रत्येक अन्याय पीड़ित को आश्रय दिया है।” इसके बाद उन्होंने हिंदू धर्म की जो सारगर्भित विवेचना की, वह कल्पनातीत थी।
उन्होंने यह कहकर सभी श्रोताओं के अंतर्मन को छू लिया कि हिंदू तमाम पंथों को सर्वशक्तिमान की खोज के प्रयास के रूप में देखते हैं। वे जन्म या साहचर्य की दशा से निर्धारित होते हैं, प्रत्येक प्रगति के एक चरण को चिह्नित करते हैं। स्वामीजी द्वारा दिए गए अपने संक्षिप्त भाषण में हिंदू धर्म में निहित विश्वव्यापी एकता के तत्व और उसकी विशालता के परिचय ने पश्चिम के लोगों के मनों में सदियों से भारत के प्रति एक नकारात्मक दृष्टि को बदल कर रख दिया।
उनके उस छोटे से भाषण ने ही संसद की आत्मा को हिला दिया। चारों तरफ विवेकानंद की प्रशंसा होने लगी। अमेरिकी अख़बारों ने विवेकानंद को “धर्म संसद” की सबसे बड़ी हस्ती के रूप में सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति बताया। उन्होंने संसद में कई बार हिन्दू धर्म और बौध मत पर व्याख्यान दिया। 27 सितम्बर 1893 को संसद समाप्त हो गई। इसके बाद वे दो वर्षों तक पूर्वी और मध्य अमेरिका, बोस्टन, शिकागो, न्यूयॉर्क, आदि जगहों पर उपदेश देते रहे। 1895 और 1896 में उन्होंने अमेरिका और इंग्लैंड में अनेक स्थानों पर भी उपदेश दिए ।
स्वामी विवेकानंद ने उस समय तीन भविष्यवाणियाँ की थीं। जिसमें से दो सत्य सिद्ध हो चुकी है और तीसरी सत्य होते हुए दिखाई देने लगी है। इसमें से पहली तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण थी भारत की स्वाधीनता के विषय में। 1890 के दशक में उन्होंने कहा था, “भारत अकल्पनीय परिस्थितियों के बीच अगले 50 वर्षों में ही स्वाधीन हो जाएगा” ठीक वैसा ही हुआ।
दूसरी भविष्यवाणी थी कि रूस में पहली बार श्रमिक क्रांति होगी, जिसके होने या हो सकने के बारे में किसी को कल्पना तक न थी। ये कथन भी सत्य सिद्ध हुआ।
उनकी तीसरी भविष्यवाणी थी, जिसका सत्य सिद्ध होना अभी शेष है। लेकिन ऐसा होते हुए अब दिख रहा है। वो है भारत एक बार फिर समृद्ध व शक्ति की महान उँचाइयों तक उठेगा और अपने समस्त प्राचीन गौरव को प्राप्त कर आगे बढ़ेगा। आज भारत उस पथ पर अग्रसर होता हुआ दिख भी रहा है और पूरी दुनिया स्वावलंबी, संस्कारित, संगठित तथा समृद्धशाली भारत के इस वर्चस्व को देख भी रही है व मान भी रही है।
संक्षेप में स्वामी विवेकानंद ने सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का परिचय भारत को करवाया। उन्होंने हिंदुत्व को भारत की राष्ट्रीय पहचान के रूप में प्रतिष्ठित किया। ‘हिंदू-राष्ट्र’ इस शब्दावली का प्रथम प्रयोग भी संभवतः विवेकानंद ने ही किया था। शिकागो में 11 सितंबर 1893 को दिए अपने प्रथम भाषण में ‘Response to Welcome’ में उन्होंने अपने हिंदू होने पर गर्व का विस्तार से वर्णन किया है।
दिनांक 17 सितंबर 1893 को उनके द्वारा प्रस्तुत ‘Paper on Hinduism’ हिंदुत्व की राष्ट्रीय परिभाषा ही है। इस परिप्रेक्ष्य में समझने पर हमें हमारे विशाल देश की बाह्य विविधता में अंतर्निहित एकात्मता के दर्शन होते हैं। उन्होंने हिंदू समाज को जागृत किया तथा भारत को पुन: एक सबल, सशक्त, सुसंपन्न तथा वैभवशाली बनाने की प्रेरणा दी।
दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग उनसे प्रभावित हुए और आज भी उनसे प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। सी राजगोपालाचारी के अनुसार “स्वामी विवेकानंद ने हिन्दू धर्म और भारत की रक्षा की” सुभाष चन्द्र बोस के कहा “विवेकानंद आधुनिक भारत के निर्माता हैं”। महात्मा गाँधी मानते थे कि विवेकानंद ने उनके देशप्रेम को हजार गुना कर दिया। स्वामी विवेकानंद ने खुद को एक भारत के लिए कीमती और चमकता हीरा साबित किया है। उनके योगदान के लिए उन्हें युगों और पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।
कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी आधुनिक भारत के निर्माता थे, तो उसमें भी अतिशयोक्ति नहीं हो सकती। यह इसलिए कि स्वामी जी ने भारतीय स्वतंत्रता हेतु जो माहौल निर्माण किया उस पर अमिट छाप पड़ी। आज के समय में स्वामी जी के मानवतावाद के रास्ते पर चलकर ही भारत एवं विश्व का कल्याण हो सकता है। वे बराबर युवाओं से कहा करते थे कि हमें ऐसे युवकों और युवतियों की जरूरत है जिनके अंदर ब्राह्मणों का तेज तथा क्षत्रियों का वीर्य हो। युवा मित्रों! आज विवेकानंद को जानने व 11 सितंबर 1893 शिकागो में उनके द्वारा दिए गए भाषण को पढ़ने के साथ ही उसे गुनने की भी जरूरत है।
(लेखक डॉ. पवन सिंह मलिक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में सहायक प्राध्यापक है)
बिहार के नवादा जिले के कादिरगंज गाँव में मारपीट और पत्थरबाजी का मामला सामने आया है। एक पक्ष का कहना है कि पूरा विवाद बाइक टकराने पर शुरू हुआ और उन पर जानलेवा हमला तक कर दिया गया। वहीं दूसरे पक्ष का आरोप है कि उनके ख़िलाफ़ पहले से साजिश की गई थी और घात लगाकर हमला बोला गया।
पुलिस ने इस मामले में विधिवत कार्रवाई करने की बात कही है। हालाँकि, गिरफ्तारी अभी तक किसी की नहीं हुई है। घायलों में से एक लड़का सीए का छात्र है। FIR में नाम होने के कारण उसकी चिंता अपने भविष्य को लेकर बढ़ गई है। वो कहता है कि उसने आज तक कहीं लड़ाई नहीं की, चाहे तो उसके स्वभाव को लेकर उसके कॉलेज में भी ये बातें पता कर ली जाएँ। इसके अलावा परिवार को लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता में है।
गौरव आनंद (साभार: ट्विटर)
गौरव आनंद नामक इस लड़के ने ट्विटर पर अपनी परेशानी को साझा करके 1 सितंबर को इंसाफ की गुहार लगाई थी। गौरव का आरोप था कि स्थानीय पुलिस उनसे समझौते की बात कह रही है और गिरफ्तारी भी किसी की नहीं की है। ऑपइंडिया ने गौरव से संपर्क करके पूरे मामले पर उनका पक्ष जानना चाहा। उन्होंने अपनी बात रखते हुए अपनी चोट लगी तस्वीरें और पत्थरबाजी के समय की कुछ वीडियोज साझा की। इसके बाद ऑपइंडिया ने पुलिस से भी मामले की पुष्टि की और उन पर लग रहे आरोपों के मद्देनजर संपर्क किया।
पुलिस ने आरोपों का किया खंडन, कहा-कानूनी कार्रवाई होगी
ऑपइंडिया ने जब पुलिस से इस मामले पर अपडेट जानना चाहा और पुलिस पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने ‘समझौते करवाने की बात’ का खंडन किया। पुलिस ने कहा, “अगर उन लोगों में आपस में समझौता होता है, तो वो उनके बीच की बात है। हमारे पास एफआईआर हुई है। हम क्यों समझौते के लिए कहेंगे? हमारी ओर से हमारा काम कानूनी कार्रवाई करना है। हम तो जो लीगल एक्शन लेना होगा, वही करेंगे। हमने एफआईआर की है। गिरफ्तारी की धाराओं में सुपरविजन होना है, जैसे ही वो होता है, फिर आगे कार्रवाई होगी। अभी विधिवत कार्रवाई चल रही है। एक्शन के लिए हम तैयार है। बस सुपरविजन नोट का इंतजार किया जा रहा है।”
दोनों पक्षों की क्या है शिकायत
गौरव आनंद और उनके परिजनों पर हमले के मामले में उनके पिता सत्यजीत की ओर से 29 अगस्त को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। इसमें उन्होंने बताया कि वह उस दिन (अगस्त 29, 2020) दुकान पर बैठकर पोस्ट ऑफिस का काम कर रहे थे। उसी समय सुखदेव यादव, सूर्यदेव यादव हाथ में पिस्तौल लेकर आए और उन्हें धमकी दी कि वह उनके पूरे परिवार को खत्म कर देंगे।
इसके बाद पिस्तौल के पिछले से उन लोगों ने उनके बेटे (गौरव) पर हमला किया, जिससे उसका सिर फूट गया। इसके बाद सौरभ आनंद और संतोष केशरी पर डंडे से हमला बोला जिससे उनका भी सिर फट गया। शिकायत के अनुसार, इस घटना में सौरभ आनंद का हाथ जख्मी हुआ है। गौरव ने ऑपइंडिया से बताया कि हमलावरों ने दुकान में सामान, कैश और मोबाइल की भी लूट की। फिर धमकी देते हुए कहा कि यदि केस करोगे तो अंजाम बुरा होगा।
गौरव द्वारा की गई शिकायत
दूसरे पक्ष की शिकायत पार्वती देवी की ओर से घटना के कई दिन बाद 4 सितम्बर को करवाई गई है। जिसमें उनका कहना है कि 29 अगस्त को साढ़े 10:30 बजे वह किसी जरूरी काम से अपने बेटे नितीश के साथ मोटर साइकिल से बाहर जा रही थीं कि तभी पुल के पास गाँव के ही कुछ लोग घात लगाए बैठे थे। उन लोगों ने रास्ते में बाइक को रोक दिया और पिस्तौल से लैश होकर उनको घेर लिया।
इसके बाद गाली देकर कहा- “मादर*&%$ बड़ी गाड़ी चलाता है।” इसी बात के बाद बाकी लोग उनके बेटे से मारपीट करने लगे। बीच में जब पार्वती देवी ने भागने का प्रयास किया तो दो लोगों ने कथित तौर पर उन्हें घेरकर उनके गले से सोने की चेन छीन ली जिसकी कीमत 50 हजार थी। इसके बाद पार्वती देवी का आरोप है कि उनसे गलत व्यवहार भी किया गया।
घायल गौरव आनंद से ऑपइंडिया की बातचीत
मारपीट में घायल हुए गौरव आनंद ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “29 अगस्त को मैं, मेरे पिता और मेरे भैया कादिरगंज मेन रोड पर स्थित अपनी दुकान पर बैठे थे। तभी कुछ बच्चे आए और अपनी बाइक हमारी बाइक में अड़ा दी और उसे गिरा दिया। तभी मेरे भैया ने कहा कि अंधा है क्या तुम्हें दिखता नहीं। इसके बाद भैया ने उसकी बाइक साइड में लगवा दी और चाभी निकाल कर कहा अपने गार्जियन को बुला कर लाओ। इतने में पीछे से भैया पर उनमें से एक ने हमला कर दिया। उनका कॉलर पकड़ा और उन्हें मारा। फिर भैया ने भी उसे तीन-चार थप्पड़ मारे और उनके पिता को बुला कर लाने को कहा। मगर, वो लोग वहाँ से गए और आरा मशीन से शीशम की बड़ी सी लकड़ी लेकर लेकर आए। ”
गौरव आनंद बताते हैं कि वो लोग उस लकड़ी से उनके पिता पर हमला करने जा रहे थे। तभी उनके भैया ने हाथ लगा दिया, जिसकी वजह से उनकी छोटी उंगली के पास फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद वह गाली-गलौच करने लगे, जिसे देख कर वहाँ मौजूद लोगों ने उसे पकड़ा और बार-बार गाली देने पर उसे पीटा भी। थोड़ी देर बाद उनके पक्ष (जाति) की महिलाएँ इकट्ठा हो गईं और दुकान पर पत्थर फेंकने लगीं।
गौरव का कहना है, “उन महिलाओं को पूरा मामला पता भी नहीं था फिर भी उन्होंने केवल यह देखकर कि लड़का उनकी जाति का है, हम पर हमला कर दिया। अगर वो महिलाएँ इस तरह हमला नहीं करती, तो हम इस मामले में दूसरे पक्ष को ‘दूसरी जाति’ कहकर संबोधित नहीं करते और मामला दोनों पक्ष का निजी ही होता। मगर, लड़कों की जाति देखते हुए उन्होंने हम पर बेवजह हमला किया। बाद में लड़कों के घरवालों ने भी आकर हमसे गाली गलौच किया। पुलिस को बुलाया तो वह आधे घंटे बाद पहुँची, जबकि चौकी ज्यादा दूर नहीं है।”
उनके अनुसार, इलाके में उस जाति (यादव जाति) का दबदबा होने के कारण समझौते की बात हुई थी। मगर, शाम को 7 बजे के आस-पास कुछ लोग हथियार से लैस होकर आए और उनके पिता पर बंदूक तान दी। जब गौरव अपने पिता को बचाने गए तो उनपर वार किया गया, जिससे उनकी आँख पर चोट आ गई और फिर उनके सिर पर डंडे से हमला किया गया।
इसके बाद वह बेहोश हो गए। बाद में दूसरा पक्ष उनकी दुकान से 60,000 रुपए और मोबाइल लेकर चला गया। गौरव का कहना है, “इस मामले में हमारे तुरंत शिकायत के बाद दूसरे पक्ष ने भी हम पर 4 सितम्बर को एफआईआर की है। जिसमें उन्होंने झूठा इल्जाम लगाया है कि हम लोग घात लगाकर पुल पर बैठे थे। जबकि हम सीए की तैयारी कर रहे हैं। घर से बाहर रहते हैं। हम यहाँ आकर ये सब करेंगे?”
गौरव ने ट्विटर पर क्या बताया
ऑपइंडिया से की गई अधिकांश बातों का जिक्र गौरव के ट्विटर अकाउंट पर मौजूद है। वहाँ उन्होंने आपबीती साझा करते हुए लिखा है कि उन लोगों को गोली मारने की धमकी दी गई। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरे पक्ष खुलेआम घूम रहे हैं। वह बताते हैं कि वो सीए के छात्र हैं और उनकी इस नवंबर में परीक्षा होने वाली है। उन्होंने कभी भी जिंदगी में मारपीट नहीं की। अब सरकार को तय करना होगा कि बिहार में उन्हें कैसे लोग चाहिए। स्थानीय पुलिस तो समझौते के लिए बोल रही है।
अपने ट्विटर पर उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को हमला करने के बाद वो लोग उनके घर में घुसने वाले थे। लेकिन उनकी माँ ने दरवाजा बंद कर दिया। जिसके बाद उन्होंने दुकान को लूटा। जो लोग बचाने गए उन्हें भी मारा गया। गौरव के अनुसार उन्हें सिर में 3 टाँके आए हैं, जिन अंकल ने दुकान बचाने की कोशिश की, उन्हें 12-15 टाँके आए हैं। उनके भैया के कलाई के पास फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस ने तब भी उन्हें नहीं पकड़ा है।
उन्होंने बताया कि उनकी बात आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे से भी हुई थी। पर, उन्होंने एसपी से बात करने को कहा। इसके बाद 5 सितंबर को गौरव का ट्वीट है कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि कार्रवाई होगी। सब विधिवत हो रहा है। 6 सितंबर को गौरव ने बताया दूसरे पक्ष सिर पर किसी बड़े नेता का हाथ है। उन लोगों को बेल मिल जाने की बात सामने आई थी वो भी बिना गिरफ्तारी के। लेकिन बाद में हमें पता चला कि वह सब अफवाह थी।
7 सितंबर को गौरव ने बताया, उन लोगों पर केस हुआ है। दूसरे पक्ष ने उन पर यह आरोप लगा दिया है कि उन्होंने (गौरव के परिजन की ओर से) हमला हुआ और उन्होंने ही उनके पैसे और चेन छीनी, फिर मारपीट भी की। इसी सबके बीच वो लोग घायल हुए।
गौरव का कहना है कि एफआईआर में उनका नाम शामिल है। उन्होंने आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे को टैग करके गुहार लगाई है कि नवंबर में उनकी परीक्षा है । वो इन सबमें रहेंगे तो कैसे ध्यान लगाएँगे। वो अपील करते हैं कि उनका पुराना रिकॉर्ड चेक कर लिया जाए। कॉलेज में कॉमर्स के छात्र हैं और पढ़ाई को ही कर्म समझा है।
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के मुखिया अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए अपने दो कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मॉंग महाराष्ट्र सरकार से की है। साथ ही रिपब्लिक टीवी का प्रसारण बंद करने को लेकर केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी को लेकर भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार और कैमरामैन यशपालजीत सिंह को महाराष्ट्र पुलिस ने उस वक़्त हिरासत में लिया था, जब दोनों रिपोर्टिंग के लिए रायगढ़ गए थे। अर्नब गोस्वामी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ तीखा हमला करते हुए दोनों पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की है।
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
वहीं अब इस मुद्दे पर शिवसेना द्वारा रिपब्लिक नेटवर्क के चैनलों को ब्लॉक कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसको लेकर अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अवैध रूप से रिपब्लिक टीवी और रिपब्लिक भारत को ब्लैकआउट करने के लिए पत्र भेजे थे। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को चैनल बैन करने या फिर इसका परिणाम भुगतने की धमकी दी है।
अर्नब गोस्वामी ने मुख्यमंत्री से कहा है,” मेरे पत्रकारों को तुरंत रिहा करें और अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाते हुए अपने पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करें, जो केबल ऑपरेटरों को सरेआम धमकी देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।”
गोस्वामी ने रिपब्लिक चैनल के लिए की गई कड़ी मेहनत और प्रयास को लेकर कहा,”मैं एक मुंबईकर हूँ।” साथ ही अपने चैनलों पर मनमाने प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना उनके नेटवर्क को छू भी नहीं सकती है, क्योंकि मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लोग उनके साथ हैं।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे। रिपब्लिक टीवी ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार उनके रिपोर्टर अनुज कुमार से जबरन पूछताछ का प्रयास कर रही है।
गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी की हालिया सुशांत सिंह राजपूत और पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में मामले में व्यापक कवरेज और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ किए गए हमलावर सवालों की वजह से रिपब्लिक टीवी को डराने और धमकाने का काम किया जा रहा है।
बता दें बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा था। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की थी।
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज स्कूल एजुकेशन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के ज़रिए किस तरह के बदलाव आएँगे। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आगामी युग के बीज लगाने का काम करेगी। इस शिक्षा नीति की मदद से भारत को 21वीं सदी में नई दिशा मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों की शुरूआती पढ़ाई का ज़िक्र करते हुए कहा हमें फन लर्निंग माहौल और एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग की ज़रूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बच्चों की शिक्षा पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया गया है। प्री स्कूल में एक बच्चा माता पिता की छत्र छाया और आराम भरे माहौल से बाहर निकलने की कोशिश करता है। यह पहला पड़ाव होता है जब बच्चे अपने ज्ञान और कौशल को ज़्यादा बेहतर तरीके से समझने की शुरुआत करते हैं। इसके लिए ऐसे विद्यालय और ऐसे शिक्षकों की ज़रूरत है जो बच्चों को फन लर्निंग, प्लेफुल लर्निंग, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और डिस्कवरी बेस्ड लर्निंग का वातावरण दें।”
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक़ फ़िलहाल हमारा ध्यान राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने पर होना चाहिए। अभी सरकार और लोगों का काम शुरू हुआ है, हमारा प्रयास होना चाहिए कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रभावशाली तरीके से और पूरी बराबरी से लागू की जाए। पिछले हफ्ते के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के संबंध में 15 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। सरकार ने उन सभी सुझावों का समुचित मूल्यांकन किया था।
उन्होंने कहा एक बच्चे को कक्षा 5 तक उसकी मातृ भाषा में ही पढ़ाया जाना चाहिए। बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी है कि वह एक भाषा को समझने में समय देने की बजाय विषय को समझने में ज़्यादा समय बिताएँ। इसके अलावा बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय भाषाएँ, अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाएँ भी पढ़ाई जाएँगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम भी कम किया जाएगा और छात्रों को फन लर्निंग का माहौल दिया जाएगा। साल 2022 तक नया पाठ्यक्रम प्रभावी हो जाएगा।
Pre-school is the first outside experience for the children. We need teachers right from the pre-school level who focus on fun-learning, activity based learning and discovery based learning: PM @narendramodipic.twitter.com/HE6LfYlxIL
इसके बाद शिक्षकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कई बातें कहीं। उन्होंने कहा शिक्षकों पर यह ज़िम्मेदारी होगी कि वह बच्चों में गहन सोच, रचनात्मकता और संवाद की क्षमता स्थापित करें। 21वीं सदी में बच्चों के पास यह सभी गुण अनिवार्य रूप से होने चाहिए। यह हमारी ज़िम्मेदारी होनी चाहिए कि शिक्षा दीवारों के भीतर सीमित होकर न रह जाए। शिक्षा का दायरा बड़ा होना चाहिए जिससे बच्चों को बाहरी दुनिया जानने और समझने का मौक़ा मिले।
पीएम ने इस दौरान पाँच सी और पाँच ई का मंत्र दिया। पाँच C का मंत्र देते हुए पीएम ने कहा कि हमें अपने छात्रों को 21वीं सदी की स्किल्स के साथ आगे बढ़ाना है। 21वीं सदी के स्किल्स में Critical Thinking (गुण दोष में अंतर करने वाली सोच), Creativity (रचनात्मकता), Collaboration (सहयोग), Curiosity (जिज्ञासा) और Communication (संचार) शामिल है।
वहीं पाँच ई का मंत्र देते हुए पीएम ने कहा कि हमें आसान और नए-नए तौर-तरीकों को बढ़ाना होगा। हमारे ये प्रयोग नए समय की शिक्षा का मूलमंत्र होने चाहिए। पीएम ने कहा कि 5E में Engage, (प्रण करना), Explore, (खोज करना), Experience, (अनुभव करना), Express (प्रकट करना ) और Excel (श्रेष्ठ होना) शामिल है।
फिर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा हमारा लक्ष्य है की साक्षरता की नींव मज़बूत हो। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि कक्षा 3 का बच्चा 1 मिनट के भीतर 30 से 40 शब्द पढ़ पाए। इसके लिए हमें लर्न टू रीड और रीड टू लर्न (सीखने के लिए पढ़ना और पढ़ने के लिए सीखना) की यात्रा तय करनी पड़ेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मदद से बच्चों की वैज्ञानिक मानसिकता का विकास होगा। यह शिक्षा नीति भारत के आने वाले कल की नींव रखेगी। इस कॉन्क्लेव का आयोजन शिक्षा मंत्रालय ने ‘शिक्षा पर्व’ कार्यक्रम के तहत कराया था जो 8 से 25 सितंबर तक चलने वाला है।
मॉडल पाउला ने हाउसफुल के डायरेक्टर साजिद खान पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में आरोप लगाया है कि जब वह 17 साल की थी तो हाउसफुल में रोल देने के बदले साजिद खान ने उनका यौन शोषण करने की कोशिश की थी।
पाउला ने बुधवार को इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, “साजिद खान मुझसे गंदी बातें करता था। वह मुझे छूने की कोशिश करता था। उसने मुझे अपने सामने कपड़े उतारने के लिए कहा जिससे वो मुझे आने वाली फिल्म ‘हाउसफुल’ में रोल दे सके।” मॉडल ने पोस्ट को कैप्शन देते हुए लिखा, “इससे पहले कि लोकतंत्र की हत्या हो जाए और बोलने की आजादी न रहे, मुझे लगा कि मुझे बोलना चाहिए!”
“Sajid touched my chest and said ye real hai kya, ye real hai kya.”
What I felt watching it as a female is unexplainable.
मॉडल ने लिखा कि, वह 2018 में ही इस बारे में बोलना चाहती थी, जब #Metoo मूवमेंट के दौरान बहुत से लोगों ने साजिद खान के खिलाफ बोला था। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखाते हुए कहा कि, उस वक्त वे निर्देशक के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर सकी क्योंकि वह इंडस्ट्री में नई थी और उनका कोई गॉडफादर नहीं था। परिवार के लिए उनका काम करना जरूरी था, इसलिए वो चुप रहीं। अब उनके माता-पिता उनके साथ नहीं हैं, वो अब खुद अपने लिए कमाती हैं। ऐसे में वे अब निर्देशक के खिलाफ बोल सकती हैं। उन्होंने लिखा, “मैं हिम्मत दिखा सकती हूँ और बताना चाहती हूँ कि जब मैं 17 साल की थी साजिद खान ने मेरा शोषण किया था।”
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पाउला आगे लिखती हैं कि, “वह मुझसे गंदी बातें करता था। वह मुझे छूने की कोशिश करता था। उसने मुझे अपने सामने कपड़े उतारने के लिए कहा जिससे वो मुझे आने वाली फिल्म ‘हाउसफुल’ में रोल दे सके।”
उन्होंने लिखा, “भगवान ही जानता है कि ये सब उसने कितनी लड़कियों के साथ किया है। मैं यहाँ किसी के कहने पर अब नहीं आई हूँ। मुझे बस एहसास हुआ कि यह मुझ पर कितनी बुरी तरह से असर डालता है। तब मैं एक बच्ची थी और बोल नहीं पाई लेकिन अब बहुत हो चुका। उसे जेल में होना चाहिए। ना केवल कास्टिंग काउच के लिए. बल्कि लोगों को बहलाने-फुसलाने के लिए भी। लेकिन अब मैं नहीं रुकने वाली नहीं हूँ!! गलत होता अगर मैं इस पर नहीं बोलती!”
गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब साजिद खान पर इस तरह के आरोप लग रहे हैं। इससे पहले साल 2018 में 3 महिलाओं ने सामने आकर हाउसफुल के डायरेक्टर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। वहीं बॉलीवुड जॉर्नलिस्ट ने ट्विटर के जरिए साजिद की पोल खोली थी।
यहाँ तक कि इस मामले में टेनिस प्लेयर महेश भूपति भी सामने आए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि उनकी पत्नी लारा दत्ता ने उनसे शिकायत की थी कि साजिद खान द्वारा हाउसफुल के सेट पर उनके साथ “अश्लील और दुर्व्यवहार” किया जा रहा था।
इस मामले में अभिनेता अक्षय कुमार ने भी ट्विटर पर घोषणा की थी कि निर्देशक साजिद खान पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद वह फिल्म हाउसफुल 4 की शूटिंग रद्द कर रहे हैं। इन आरोपों की वजह से निर्देशक साजिद को दिसंबर 2018 में भारतीय फिल्म और टेलीविजन निर्देशकों के संघ (IFTDA) द्वारा एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया था।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में ड्रग एंगल आने के बाद गिरफ्तार हुई अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती की जमानत याचिका आज (सितंबर 11, 2020) खारिज कर दी गई। विशेष अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान अपना फैसला सुनाया। इससे पहले मुंबई की सत्र अदालत ने रिया और अन्य के मामले में गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
अदालत ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती के अलावा अब्दुल बासित, ज़ैद विलात्रा, दिपेश सावंत और सैमुअल मिरांडा की जमानत याचिका खारिज की है। खबर है कि अब ये आरोपित सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। NCB ने इन सबको ड्रग एंगल सामने आने के बाद पर्याप्त सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया था और गुरुवार को इनकी जमानत याचिका का विरोध भी किया था।
एनसीबी ने गुरुवार को जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि भले ही इस मामले में जब्त की गई प्रतिबंधित मादक पदार्थों की मात्रा कम थी, लेकिन यह वाणिज्यिक मात्रा थी और 1,85,200 रुपए की थी। इसके अलावा अपने हलफनामे में उन्होंने लिखा था कि रिया चक्रवर्ती और शौविक चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत के लिए मादक पदार्थों की व्यवस्था करते थे और उसके पैसे देते थे। वहीं आरोपित दीपेश सावंत द्वारा दिए गए बयान के अनुसार वह राजपूत और रिया चक्रवर्ती के निर्देश पर मादक पदार्थ खरीदा करता था।
#Breaking | Mumbai Sessions court rejects the bail plea filed by Rhea Chakraborty, her brother Showik Chakraborty & all other accused in the drug case. Rhea & team to approach Bombay High Court on Monday.
इस याचिका के खारिज होने के बाद सुशांत के लिए लगातार इंसाफ माँगने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि उन्हें इस फैसले की उम्मीद थी। क्योंकि पहला तो ड्रग ट्रैफिकिंग बहुत गंभीर अपराध है और दूसरा एनसीबी ने इस मामले में जाँच के समय कोई हड़बड़ी नहीं की। उन्होंने बड़ी तसल्ली से इस मामले की जाँच की है। रिया से सवाल पूछे हैं। इसलिए कोर्ट भी इस बात से सहमत हुआ कि भले ही रिया चक्रवर्ती एक्ट्रेस हैं, अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती है, लेकिन उनका अपराध राष्ट्र हित में नहीं है। जिसके कारण कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा। इस हिरासत में उनसे अधिकारी सवाल करेंगे और ऐसे समय में उन्हें जवाब देना ही होगा। हर लोकतांत्रिक देश में यही प्रावधान होते हैं।
भाजपा नेता का कहना है कि अब हम इस मामले से जुड़े हर तार के बारे में जानेंगे क्योंकि रिया उसी चेन का हिस्सा थीं। अब हम जानना चाहते हैं कि इन केसों में पैट्रन (संरक्षक) कौन था? क्योंकि बिना किसी संरक्षक के वो ये सब अकेले नहीं कर सकती थी। उन्होंने रिया के बयान से पलटने वाले मामले पर यह भी कहा कि हर अपराधी ऐसा ही करता है। पहले अपराध स्वीकार करता है फिर बाद में कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया।
गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती ने मुंबई की विशेष अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की थी जिस पर आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। इस मामले में ड्रग्स के पहलू पर जाँच करते हुए नार्कोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती सहित अन्य को हिरासत में लिया था। जहाँ उन्होंने ड्रग लेने और भाई शौविक से ड्रग मँगवाने की बात स्वीकारी थी। मगर, गिरफ्तारी के बाद में अपनी याचिका में रिया अपने पूर्व के बयानों से पलट गईं और विशेष अदालत में दायर की गई याचिका में कहा कि उसने एनसीबी के दबाव में आकर ड्रग्स रैकेट में शामिल होने की बात स्वीकारी थी।
बीते कुछ समय से कंगना रनौत को महाराष्ट्र सरकार की तरफ से धमकियाँ, अनैतिक हमले और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में 9 सितंबर 2020 को बीएमसी ने कंगना रनौत के मुंबई स्थित करोड़ों के दफ्तर में तोड़-फोड़ की। इस कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर ही उच्च न्यायालय ने बीएमसी की इस तोड़-फोड़ पर आधिकारिक रूप से रोक भी लगा दी।
महाराष्ट्र सरकार के लिए कंगना का रवैया शुरुआत से ही आलोचनात्मक रहा है। ख़ास कर सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच में मुंबई पुलिस की भूमिका को लेकर। अब कंगना रनौत ने इस मामले पर सोनिया गाँधी से सवाल किए हैं। सवाल पूछते हुए कंगना ने कहा जिस तरह महाराष्ट्र सरकार एक महिला के साथ सार्वजनिक रूप से ज़्यादती कर रही है। उस पर सोनिया गाँधी को अपना मौन तोड़ना चाहिए। कंगना ने अपने सवाल में यह भी कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र सरकार ने क़ानून व्यवस्था का मज़ाक बना कर रखा है क्या सोनिया गाँधी उस पर कुछ नहीं कहेंगी।
कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा, “बाला साहब ठाकरे के जाने के बाद शिवसेना अपने उद्देश्य से भटक गई है। इसके बाद कंगना ने सोनिया गाँधी से सवाल करते हुए कहा, महाराष्ट्र की सरकार में कॉन्ग्रेस भी एक सहयोगी दल है। ऐसे में जब राज्य सरकार एक महिला के साथ इतना घटिया बर्ताव कर रही है तो क्या आपको (सोनिया गाँधी) इस बात का बुरा नहीं लगता है। क्या आप (सोनिया गाँधी) महाराष्ट्र सरकार से निवेदन नहीं कर सकती हैं कि वह डॉ. अंबेडकर के संविधान के सिद्धांतों का सम्मान और पालन करें।”
कंगना रनौत के ट्वीट
इसके अलावा दूसरे ट्वीट में कंगना ने सोनिया गाँधी को सम्बोधित करते हुए लिखा, “आप विदेश में पली बढ़ी हैं और भारत में आपका जीवन बीता। क्या आप नहीं समझती हैं कि एक महिला के जीवन में किस तरह के संघर्ष होते हैं। इतिहास आपको आपके इस मौन और भेद करने वाली मानसिकता के आधार पर तौलेगा। जब एक पूरी सरकार ने क़ानून व्यवस्था का मज़ाक बना कर एक महिला के साथ ज़्यादती और उत्पीड़न किया था। मैं इस बात की उम्मीद करती हैं कि आप इस मुद्दे पर अपना चुप्पी तोड़ेंगी क्योंकि कॉन्ग्रेस भी महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा है।”
बीते दिन कंगना रनौत की माँ ने गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया था। उनका कहना था कि वह गृह मंत्री की आभारी हैं जो उन्होंने होने वाले खतरों को मद्देनज़र रखते हुए कंगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से कॉन्ग्रेस का हिस्सा था लेकिन फिर भी भारतीय जनता पार्टी ने उनकी बेटी को सुरक्षा दिलाई। इसके लिए वह भाजपा की आभारी हैं।
महाराष्ट्र सरकार के अंतर्गत आने वाली बीएमसी ने 24 घंटे का नोटिस देकर कंगना रनौत के दफ्तर पर बुलडोज़र चला दिया था। इस कार्रवाई में बीएमसी ने कंगना के दफ्तर का आधे से अधिक हिस्सा तबाह कर दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार को बड़े पैमाने पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कंगना के लिए अनैतिक शब्दों का इस्तेमाल भी किया था।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने यहाँ तक कहा था कि कंगना को मुंबई में रहने का कोई अधिकार नहीं है। शिवसेना विधायक प्रताप सारणिक ने कहा अगर कंगना मुंबई में कदम रखती हैं तो उनका मुँह तोड़ दिया जाएगा। इस तरह पिछले कुछ समय में कंगना को शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार की तरफ से धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।
सुशांत सिंह राजपूत मामले में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती ड्रग्स मामले में 22 सितंबर तक मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। रिया ने मुंबई की विशेष अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की है जिस पर आज फैसला आने की उमीद है। इस मामले में ड्रग्स के पहलू पर जाँच करते हुए नार्कोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने रिया चक्रवर्ती, उसके भाई शोविक चक्रवर्ती सहित अन्य को हिरासत में लिया था। ख़बरों के मुताबिक़ रिया ने विशेष अदालत में दायर की गई याचिका में कहा कि उसने एनसीबी के दबाव में आकर ड्रग्स रैकेट में शामिल होने की बात स्वीकारी थी।
Drug case: A special court will pass its order on the bail plea filed by Rhea Chakraborty & her brother Showik Chakraborty who were arrested by NCB.
रिया चक्रवर्ती ने दावा किया है कि वह सुशांत सिंह के कहने पर अपने भाई शोविक से ड्रग्स खरीदने की बात कहती थी। इसके अलावा रिया ने कहा कि न तो उसके पास और न ही उसके घर से किसी भी तरह की ड्रग्स बरामद हुई है। रिया ने अपनी जमानत याचिका में आरोप लगाया है कि एनसीबी सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों को मानने में पूरी तरह विफल रही है। उसने दलील देते हुए यह भी कहा कि मौके पर एक भी महिला अधिकारी नहीं थी जो क़ानून को मद्देनज़र रखते हुए आवेदक से पूछताछ करती। अंत में रिया ने अपनी याचिका में दावा किया कि वह इस मामले में निर्दोष है।
विशेष अदालत ने इन सभी मामलों पर बीते दिन (10 सितंबर 2020) सुनवाई पूरी कर ली थी। आज अदालत इस मामले पर फैसला सुना सकती है। एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती को मंगलवार को गिरफ्तार किया था और ठीक उसी दिन विशेष अदालत ने रिया चक्रवर्ती को 22 सितंबर तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। रिया ने पहले भी जमानत के लिए याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
न्यायाधीश जी बी गुराव ने गुरूवार को रिया चक्रवर्ती और उसके भाई शोविक चक्रवर्ती के वकील और सरकारी अभियोजक की दलीलों को सुना। इसके अलावा ड्रग्स मामले में 4 अन्य आरोपितों की याचिका पर भी सुनवाई की। इसके बाद विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया था। आज इन सभी याचिकाओं पर आदेश सुनाए जाने की उम्मीद है।
एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती दोनों पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 ए के तहत मामला दर्ज किया था। जमानत याचिका खारिज होने पर रिया चक्रवर्ती को 22 सितंबर तक मुंबई की भायखला जेल में रहना होगा। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के मामले में 3 संघीय एजेंसी अलग-अलग पहलुओं से जाँच कर रही हैं। इसमें एनसीबी, प्रवर्तन निदेशालय और केन्द्रीय जाँच ब्यूरो मुख्य हैं।
पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी है।
बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की हैं।
शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ उठाया गया यह कदम बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिपब्लिक टीवी द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग के बीच आई है। इसके अलावा, हाल ही में अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में द्वारा BMC द्वारा किए गए विवादास्पद नुकसान को लेकर भी महाराष्ट्र कि शिवसेना घिरती हुई नजर आ रही है और रिपब्लिक टीवी ने इसे भी प्रमुखता से अपने समाचार चैनल पर जगह दी है।
शिव केबल सेना द्वारा महाराष्ट्र के केबल ऑपरेटर्स को लिखा गया पत्र
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।
इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
शिवसेना की धमकी को रिपब्लिक टीवी ने बताया अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला
शिवसेना द्वारा रिपब्लिक टीवी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के प्रयासों के बाद, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि शिवसेना केबल, जो कि शिवसेना विंग का हिस्सा है, ने ‘संजय राउत के मार्गदर्शन’ के तहत एक आदेश जारी किया। रिपब्लिक टीवी ने कहा कि यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में केबल ऑपरेटरों के लिए एक खुला खतरा है।
#CantBlockRepublic | Open threat to cable operators across Maharashtra to ban Republic Media Network or ‘face consequences’. Join the call to defend the right to report, sign the petition, Tweet us your videos and watch them on-air on Republic https://t.co/Y9zlarecVl
रिपब्लिक टीवी ने इस पर बयान देते हुए कहा, “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।”
मीडिया नेटवर्क ने अपने बयान में कहा, “वे हर घर में दर्शकों तक पहुँचने के अपने रिपोर्ट के अधिकार और बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। मीडिया नेटवर्क ने कहा कि वे रिपब्लिक के सवालों को बंद करना चाहते हैं और रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग को रोकना चाहते हैं। हालाँकि, वे रिपब्लिक टीवी को ब्लॉक नहीं कर सकते क्योंकि भारत के लोग हमारे साथ हैं।”
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के कवरेज के बाद से ही रिपब्लिक टीवी चैनल महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ कि कवरेज के दौरान भी मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक चैनल के पत्रकारों से धक्का-मुक्की की और उन्हें गिरफ्तार भी किया।